GHKKPM: पाखी का सच आएगा सबके सामने! सई को बाहर जाने से रोकेगा विराट

नील भट्ट और आयशा सिंह स्टारर सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ अब तक आपने देखा कि सई मानने को तैयार नहीं है कि विराट सिंर्फ उससे प्यार करता है. शिवानी उसे समझाती है लेकिन वह अपने जिद पर अड़ी है कि विराट उससे प्यार नहीं कर सकता. तो  दूसरी तरफ विराट को पता चल जाता है कि सई ने ही सीनियर से बात कर के उसका ट्रांसफर रुकवाया है. शो के अपकमिंग एपिसोड में महाट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि पाखी और सम्राट घरवालों के लिए शॉपिंग करते हैं. तो वहीं पाखी विराट को गिफ्ट देने जाती है. तो दूसरी तरफ सई गिफ्ट लेने से मना कर देती है. पाखी विराट के सामने अच्छा बनने की कोशिश करती है और सई से कहती है कि वो सई के लिए लाया हुआ गिफ्ट वापस नहीं लेगी.

ये भी पढ़ें- अनुपमा का दीवाना हुआ अनुज कपाड़िया, देखें Viral Video

 

पाखी ये भी कहेगी कि अब वह अपने शादीशुदा जिंदगी में कोई तनाव नहीं चाहती. तो इस पर सई उसे ताना मारेगी, कहेगी कि उसे सम्राट के साथ गिफ्ट देने आना चाहिए. सई उससे ये भी कहती है कि वह अपने रिश्ते को लेकर नाटक क्यों कर रही है. वह पाखी से कहेगी कि वह सम्राट के साथ खुश नहीं है. वह जानबूझकर अपनी खुशी के बारे में विराट को बता रही है.

ये भी पढ़ें- अनुपमा-अनुज होंगे एकसाथ? वनराज की बढ़ेंगी धड़कनें

 

सई पाखी का सच बताएगी. वह कहेगी कि वह ढोंग ना करे. तो वहीं विराट पाखी का सपोर्ट करेगा और सई से लड़ेगा. सई पाखी से कहेगी कि वो अपने रिश्ते को बचाने की सच में कोशिश करे और सम्राट के साथ सच में खुश रहे.

 

तो दूसरी तरफ सम्राट दोनों की बातें सुन लेगा. उस लगेगा कि क्या पाखी उसके साथ रहने का दिखावा कर रही है. शो के नए एपिसोड में आप ये भी देखेंगे कि घर की पूजा में हिस्सा लेने से सई मना कर देगी तो विराट का गुस्सा सातवें आसमान पर होगा और वह उसे कमरे में बंद कर देगा.

मजबूत इरादों से बदले हालात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश की जेलों को हमनें सुधारगृह के रूप में बदला है. यहां अपराधियों को सुधरने का अवसर दिया गया है लेकिन जेलों को अपराध का गढ़ या अपराधियों की मौज मस्ती का केंद्र नहीं बनने दिया है. एक दौर वह भी था जब सत्ता माफिया का शागिर्द बन उसके पीछे चलती थी, आज माफिया पर हमारी सरकार का बुलडोजर चलता है.

सीएम योगी ने संतकबीरनगर जिले में 126 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित जिला कारागार का लोकार्पण समेत कुल 245 करोड़ रुपये की लागत वाली 122 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार में माफिया को मिले सत्ता के संरक्षण पर जमकर निशाना साधा.

सुधरे नहीं तो हराम कर देंगे माफियाओं को जीना

सीएम योगी ने कहा कि माफिया के लिए हमारा संदेश बिलकुल स्पष्ट है. माफिया यदि गरीब, किसान, व्यापारी का जीना हराम करेगा तो हमारी सरकार उसका जीना हराम कर देगी. सरकार ने यह करके दिखाया भी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि संतकबीरनगर में जिला कारागार बन जाने से अब यहां के कैदियों को बस्ती नहीं भेजना पड़ेगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कारागार सुधारगृह के रूप में आदर्श कारागार बनेगा.

पहले नौकरियां नीलाम होती थीं,अब ऐसा करने वालों के घर

मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े चार साल पहले कैसी सरकार थी, इसे आप सभी जानते हैं. वंशवाद, भाई भतीजावाद, तुष्टिकरण से जनता के हित पर डकैती, गुंडागर्दी और दंगा ही प्रदेश की पहचान बन गई थी. नौजवानों की नौकरियों की नीलामी होती थी और गरीबों के निवाले की डकैती. नौकरियां पहले गिरवी रख दी जाती थीं. एक परिवार के लोग नौकरी के नाम पर वसूली करने निकल जाते थे. आज किसी ने नौकरी नीलाम करने की कोशिश भी की तो हम उसका घर नीलाम करवा देंगे.

योग्यता 4.5 लाख सरकारी नौकरियां, 90 हजार और आ रहीं

सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने नौजवानों को उनकी योग्यता के आधार पर 4.5 लाख सरकारी नौकरियां दी हैं. पूरी पारदर्शिता के साथ, कहीं भी सिफारिश नहीं, एक रुपये वसूली की शिकायत नहीं. उन्होंने कहा कि 90 हजार सरकारी नौकरियां और आ रही हैं.

प्रतियोगी परीक्षाओं में जुटे नौजवानों को देंगे भत्ता, टेबलेट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर नौजवानों के लिए प्रदेश सरकार की तरफ से खजाना खोलने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि जब तक कोरोना का प्रभाव है, उनकी सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे नौजवानों को वाहन किराया भत्ता व तैयारी भत्ता देने जा रही है. इसके अलावा वर्चुअली या फिजिकली तैयारी करने वाले, उच्च-तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा में अध्ययनरत नौजवानों को मुफ्त टैबलेट के साथ उन्हें डिजिटल असेस भी प्रदान किया जाएगा.

महिलाओं के सुरक्षा,सम्मान व स्वावलंबन पर सरकार का जोर

सीएम ने कहा कि उनकी सरकार का जोर महिलाओं की सुरक्षा के साथ उनके सम्मान और स्वावलंबन पर भी है. 30 हजार महिला पुलिसकर्मीयों की भर्ती इसी दिशा में बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है. महिलाओं के हित में सरकार मिशन शक्ति, कन्या सुमंगला, निराश्रित महिलाओं को पेंशन जैसी अनेकानेक योजनाओं को निरंतर आगे बढ़ा रही है.

रेडीमेड गारमेंट का हब बन सकता है संतकबीरनगर

सीएम योगी आदित्यनाथ ने समारोह में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पांच महिलाओं को टेलरिंग टूलकिट भी प्रदान किया. इसका जिक्र अपने संबोधन में करते हुए उन्होंने कहा कि यह टूलकिट महिलाओं के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप वोकल फॉर लोकल के मंत्र का अनुसरण करते हुए स्वरोजगार का मंच बन सकता है. सीएम ने कहा कि एक समय इस जिले का खलीलाबाद करघा और हथकरघा का बड़ा केंद्र हुआ करता था. ऐसे में यह रेडीमेड गारमेंट का हब क्यों नहीं बन सकता. अगर हम महिलाओं को आधुनिक सिलाई मशीन देकर उन्हें मार्केट से लिंक कर दें तो हर घर रेडीमेड गारमेंट बनने लगेगा. ऐसी स्थिति में रेडीमेड गारमेंट के उत्पादन के मामले में हम बांग्लादेश और वियतनाम को भी पीछे छोड़ सकते हैं.

बखिरा के बर्तन उद्योग को दिलाएंगे वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री ने संतकबीरनगर जिले के बखिरा के बर्तन उद्योग का भी प्रमुखता से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कभी इस जिले की पहचान बखिरा के बर्तनों से होती थी. पूर्व की सरकारों में इसे भुला दिया गया लेकिन हम बखिरा के बर्तन उद्योग को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं. यह स्थानीय स्तर पर नौजवानों व महिलाओं के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम बनेगा.

संतकबीरनगर में पीपीपी मॉडल पर बनेगा मेडिकल कॉलेज

सीएम योगी ने कहा कि एक समय तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस, मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों से बहुत मौतें होती थीं. इलाज का सारा दारोमदार गोरखपुर के जर्जर बीआरडी मेडिकल कॉलेज पर होता था. लोगों को मजबूरन लखनऊ, दिल्ली या मुम्बई जाना पड़ता था. आज प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था हो रही है. गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज नए व बेहतरीन रूप में है. गोरखपुर में एम्स भी बनकर तैयार है जिसका उद्घाटन पीएम मोदी शीघ्र करेंगे. देवरिया, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, अयोध्या, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ को मेडिकल कॉलेज की सौगात दी गई है. प्रदेश में कोई भी जिला शेष नहीं रहेगा जहां मेडिकल कॉलेज न हो. मुख्यमंत्री ने एक बार फिर कहा कि संतकबीरनगर में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा.

हर बाढ़ पीड़ित को उपलब्ध कराई जा रही राहत किट

संतकबीरनगर में लोगों से मुखातिब सीएम योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के चलते आई बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार हर पीड़ित तक पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री का किट उपलब्ध करा रही है. साथ ही बाढ़ के कारण होने वाली बीमारी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम और एंटी रेबीज वैक्सिन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की वे हर बाढ़ पीड़ित तक राहत सामग्री पहुंचना सुनिश्चित करें.

सपा-बसपा शासन के दौरान कोरोनाकाल में केरल, दिल्ली जैसे होते यूपी के हालात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज यूपी में कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण है. पर सपा-बसपा का शासन होता तो कोरोनाकाल में यूपी के हालात केरल व दिल्ली जैसे खतरनाक होते. उन्होंने यूपी में कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जनता के अनुशासन, स्वास्थ्यकर्मियों, कोरोना वारियर्स, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व मीडिया की भूमिका की सराहना की.

अब विकास में किसी से पीछे नहीं रहेगा संतकबीरनगर

सीएम ने अपने संबोधन में लोगों को जिले की विकास परियोजनाओं से जोड़ते हुए कहा कि अब संतकबीरनगर विकास के पैमाने पर किसी भी जनपद से पीछे नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि बाबा तामेश्वरनाथ और महान सूफी संत संतकबीर की यह धरती 24 वर्ष से विकास की आस में थी. विकास के लिए राजनीतिक घोषणाएं तो होती थीं लेकिन उनका क्रियान्वयन नहीं होता था. योजनाएं ठेके पट्टे, भाई भतीजावाद के चक्कर में फंसकर रह जाती थीं. पर बीते साढ़े चार सालों में परिवर्तन आया है.

245 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं से जुड़ा यह कार्यक्रम प्रदर्शित करता है कि यह जिला अब विकास के नए प्रतिमानों को छुएगा. विकास जनता की आवश्यकता है और इससे ही हर व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि दो वर्ष पूर्व मगहर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संतकबीर की साधना स्थली पर कबीरपीठ की स्थापना की थी, इसके लोकार्पण की शुभ तिथि भी अब आने वाली है.

कोरोना से निराश्रित बच्चों को प्यार-दुलार

कार्यक्रम में कोरोना से निराश्रित बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का स्वीकृति पत्र प्रदान करने के दौरान सीएम योगी ने बच्चों को खूब प्यार-दुलार दिया. उनसे उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा और सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद दिया. सीएम ने कहा कि हर पीड़ित के साथ सरकार खड़ी है. निराश्रित बच्चों के अलावा कोरोना से निराश्रित हुई महिलाओं के लिए भी सरकार शीघ्र योजना ला रही है.

कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र का वितरण

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना व शादी अनुदान योजना के लाभार्थियों तथा सामुदायिक शौचालयों का स्वच्छता प्रबंधन करने वाले स्वयं सहायता समूहों के केयर टेकर्स को मानदेय स्वीकृति पत्र का वितरण भी किया. कोविड 19 से मृतक सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को नियुक्ति पत्र प्रदान करने के साथ ही उन्होंने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को टूलकिट सौंपा. इस अवसर पर सीएम के हाथों सबमिशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना के लाभार्थियों को चाबी का वितरण भी किया गया. समारोह में कारागार मंत्री जयकुमार सिंह जैकी, उद्यान एवं कृषि विपणन मंत्री श्रीराम चौहान, जिले के प्रभारी मंत्री व स्टाम्प पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल, सांसद प्रवीण निषाद, विधायक राकेश सिंह बघेल, दिग्विजय नारायण चौबे, दयाराम चौधरी आदि भी मौजूद रहे. आभार ज्ञापन अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने किया.

महिला सशक्तिकरण को विशेष महत्व

प्रदेश सरकार एक ओर अपनी योजनाओं से महिलाओं के मनोबल को बढ़ा रही है वहीं दूसरी ओर मिशन शक्ति जैसे वृहद अभियान से उनको सुरक्षा, सम्‍मान और स्‍वावलंबन का कवच प्रदान कर रही है. प्रदेश सरकार की दो योजनाओं से महिलाओं और बेटियों को लाभ मिल रहा है जिसमें पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिला पेंशन योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से महिलाओं और बेटियों को सीधे तौर पर मदद मिल रही है.

मिशन शक्ति अभियान के तहत इन दोनों योजनाओं से नए लाभार्थियों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है. महिला कल्‍याण विभाग की ओर से स्‍वावलंबन कैंप कार्यक्रम का आयोजन कर नई महिलाओं बेटियों के आवेदनों को स्‍वीकार कर इस योजना के तहत लाभान्वित किया जा रहा है. बता दें क‍ि म‍िशन शक्ति अभियान से प्रदेश की महिलाओं और बेटियों को योगी सरकार की योजनाओं की जानकारी संग उनको विभिन्‍न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है.

महज एक साल में जुड़े 1.73 लाख पात्र नवीन लाभार्थी

पति की मृत्यु उपरान्त निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत साल 2017 से 2021 तक पति की मृत्यु उपरान्त निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत कुल 12.36 लाख नए लाभार्थी जुड़े हैं. वहीं साल 2021-22 में 1.73 लाख पात्र नवीन लाभार्थी जोड़े गए हैं. अब तक 29.68 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया जा चुका है. बता दें कि पात्र लाभार्थियों को 500 रुपए प्रतिमाह की दर से 04 तिमाही में पेंशन का भुगतान पीएफएमएस के जरिए से सीधे उनके बैंक खाते में किया जाता है. इसके साथ ही योजना के लिए लाभार्थी की आयु की अधिकतम सीमा को समाप्त करते हुए वार्षिक आय सीमा को बढ़ाकर 2.00 लाख कर दिया गया है.

कन्या सुमंगला योजना से संवर रहा बेटियों का भविष्‍य

प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने, बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा को सुदृढ करने, बालिका के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने साथ ही बालिका के प्रति आम जन में सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अप्रैल 2019 में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की शुरूआत की. इस योजना तहत अब तक 9.91 लाख लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा चुका है.

पश्चाताप- भाग 1: क्या सास की मौत के बाद जेठानी के व्यवहार को सहन कर पाई कुसुम?

उर्मिला देवी बाथरूम में बेसुध पड़ी थीं. शाम में छोटी बहू कुसुम औफिस से आई और सास के कमरे में चाय ले कर गई तो देखा कि वे बेहोश हैं. कुसुम घबरा गई. तुरंत पति को फोन किया. पति और जेठ दौड़ेदौङे आए.

“जरूर दोपहर में नहाते वक्त मां का पैर फिसल गया होगा और सिर लोहे के नल से टकरा गया होगा,” छोटे बेटे ने कहा.

“पर अभी सांस चल रही है. जल्दी चलो अमन, हम मां को बचा सकते हैं. कुसुम तुम जा कर जरा ऐंबुलैंस वाले को फोन करो. तब तक हम मां को बिस्तर पर लिटाते हैं.”

“हां मैं अभी फोन करती हूं,” घबराई हुई कुसुम ने तुरंत ऐंबुलैंस वाले को काल किया.

आननफानन में मां को पास के सिटी हौस्पिटल ले जाया गया. उन्हें तुरंत इमरजैंसी में ऐडमिट कर लिया गया. ब्रैन हेमरेज का केस था. मां को वैंटीलेटर पर आईसीयू में रखा गया. तब तक बड़ी बहू मधु भी औफिस से अस्पताल आ गई. उस के दोनों लड़के ट्यूशन के बाद घर पहुंच गए थे.

ये भी पढ़ें- दोहराव : क्यों बेचैन था कुसुम का मन

कुसुम की बिटिया मां के साथ ही हौस्पिटल में थी. सबकुछ इतना अचानक हुआ कि किसी को कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिला था.

आज से करीब 20 साल पहले उर्मिलाजी पति कुंदनलाल और 2 बेटों के साथ इस शहर में आई थीं. उन्होंने कामिनी कुंज कालोनी में अपना घर खरीदा था. यह एक पौश कालोनी थी. आसपड़ोस भी अच्छा था. जिंदगी सुकून से गुजर रही थी. पर करीब 15 साल पहले कुंदनलाल नहीं रहे. तब उर्मिलाजी ने बखूबी अपना दायित्व निभाया. दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई. वे खुद सरकारी नौकरी में थीं. पैसों की कमी नहीं थी. उन्होंने घर को बड़ा करवाया. 2 फ्लोर और बनवा लिए. फिर अच्छे घरों में बेटों की शादी करा दी.

बेटों की शादी के बाद ग्राउंड फ्लोर में वे अकेली रहने लगीं. ऊपर के दोनों फ्लोर में उन के दोनों बेटे अपने परिवार के साथ रहते. बेटेबहू मां का पूरा खयाल रखते. खासकर छोटी बहू कुसुम सास का ज्यादा ही खयाल रखती. वह फर्स्ट फ्लोर पर रहती थी. सो फटाफट चायनाश्ता, खाना आदि बना कर सास को दे आती. शाम को बड़ी बहू के दोनों बेटे भी आ कर दादी के पास ही खेलने लगते और चाची के हाथ के बने स्नैक्स का मजा लेते.

ये भी पढ़ें- तलाक के बाद: जब सुमिता को हुआ अपनी गलतियों का एहसास

2 साल पहले दोनों बेटों ने अपना नया स्टार्टअप शुरू किया था. दोनों इस पर काफी मेहनत कर रहे थे. दोनों बहुएं काम पर जाती थीं. इसलिए दिनभर घर से बाहर रहतीं. रिटायरमैंट के बाद उर्मिला देवी पीछे से उन के बच्चों का पूरा खयाल रखतीं. खासकर छोटी बहू की बिटिया तो उन की गोद में ही बड़ी हुई थी.

हादसे के बाद पूरा परिवार स्तब्ध था. 3-4 दिन उर्मिलाजी अस्पताल में ही रहीं. पूरे परिवार की रूटीन बदल गई. उर्मिलाजी घर में होती थीं तो सब कुछ कायदे से चलता था. दोनों बहुओं को बच्चों की चिंता नहीं रहती थी. बच्चे स्कूल और ट्यूशन से जल्दी भी आ जाते तो तुरंत दादी के पास पहुंच जाते. घर में किसी को भी कोई परेशानी नहीं होती थी. दादी हमेशा सब के लिए हाजिर रहतीं. पर आज दादी ही परेशानी में थीं तो जाहिर है पूरा परिवार परेशान था.

चौथे दिन डाक्टर ने आ कर सौरी कह दिया. उर्मिलाजी बच नहीं सकीं. 2-3 दिन तक घर में मातम पसरा रहा. दूरदूर से रिश्तेदार आए थे. धीरेधीरे सब चले गए. फिर शुरुआत हुई एक खास मसले पर बहस की. मसला था जायदाद का बंटवारा. मां ने कोई वसीयत जो नहीं छोड़ी थी.

बड़े बेटे ने शांति से सुलह की बात की,”देखो मां ने कोई वसीयत तो लिखी नहीं. अब झगड़े के बजाए क्यों न आपसी सहमति से हम जमीनजायदाद को 2 बराबर हिस्सों में बांट लें. दोनों भाईयों को बराबर की संपत्ति मिल जाएगी.”

बड़े भाई की बात सुन कर छोटे भाई ने स्वीकृति में सिर हिला दिया.

मगर बड़ी बहू यानी मधु अपने पति का फैसला सुन कर बिफर पड़ी,” ऐसा कैसे हो सकता है? हम बड़े हैं. हमारे 2 बच्चे हैं. हमें बड़ा हिस्सा मिलना चाहिए. कुसुम की एक ही बेटी है. उसे कम मिलना चाहिए.”

“पर भाभी ऐसा क्यों होगा? बड़े होने का मतलब यह तो नहीं कि हर चीज आप को ज्यादा मिले. कुसुम ने कितना कुछ किया है मां के लिए. हमेशा उन के खानेपीने का खयाल रखती रही है.”

365 पत्नियों वाला रंगीला राजा भूपिंदर सिंह

राजाओंमहाराजाओं के पराक्रम के किस्सों से इतिहास भरा पड़ा है. लेकिन ऐसे भी तमाम राजामहाराजा हुए हैं, जिन की रंगीनमिजाजी और शौक की चर्चा कर के आज भी लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं.

दरअसल देश की सत्ता जब अंगरेजों के पास आई तो इन राजाओं के पास केवल लगान वसूली का काम रह गया. लगान वसूल कर अंगरेजों का हिस्सा पहुंचा कर बाकी बची रकम से ये केवल अपने शौक पूरे करने के अलावा अय्याशी करते थे.

इन के शौक और अय्याशी भी किसी सनक की ही तरह होती थी. वैसे तो विलासिता पसंद राजाओंमहाराजाओं की हमारे यहां कमी नहीं रही, जो काफी अय्याश भी रहे थे. उन्हीं में एक नाम पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह का भी है.

पटियाला की बात चलते ही तुरंत पटियाला पैग की याद आ जाती है. जंबो पैग यानी पटियाला पैग. जंबो पैग की ही तरह पटियाला के महाराजा का परिवार भी जंबो था. सोच कर आप को हंसी भी आ जाए और कंपा भी दे, इस तरह का परिवार था पटियाला के महाराजा का.

आज एक पत्नी और एक या 2 बच्चों के साथ रहना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में रोज के हिसाब से एक रानी यानी 365 रानियों के साथ जीवन कैसे गुजरेगा, यह सोच कर दिमाग चकरा जाता है. फिर भी रंगीनमिजाज लोगों को एक की अपेक्षा कई पत्नियों को संभाल लेने की कला अच्छी तरह आती है.

पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह को भी यह कला अच्छी तरह आती थी. वह बहुत ही रंगीले इंसान थे. पावर करप्ट वाली अंगरेजों की युक्ति यहां पूरी तरह फिट बैठती थी.

ये भी पढ़ें- अंधविश्वास: अजब अजूबे रंग !

12 अक्तूबर, 1891 को पैदा हुए भूपिंदर सिंह. सामान्य बच्चा जिस उम्र में गली में मिट्टी में खेलने जाने लगता है, उसी उम्र में भूपिंदर सिंह महाराजा रजिंदर सिंह की मौत के बाद राजा बन गए थे. 9 साल की उम्र में ही पटियाला की बागडोर संभालने वाले राजा भूपिंदर सिंह ने पटियाला पर 38 साल राज किया था.

हालांकि औपचारिक तौर पर राज्य की कमान उन्होंने 18 साल की उम्र में संभाली थी. 28 साल राज करने के बाद 23 मार्च, 1938 को मात्र 47 साल की उम्र में उन का निधन हो गया था.

भारत में उन दिनों तमाम रजवाड़े थे. राजाओं की रंगीनमिजाजी के तमाम किस्से सुनने को मिलते रहते हैं. तमाम राजाओं की रंगीनमिजाजी पर किताब भी लिखी गई है.

भूपिंदर सिंह के दीवान जरमनी दास ने भी ‘महाराजा’ नामक एक किताब लिखी है, जिस में पटियाला के महाराजा की रंगीनमिजाजी का पूरा उल्लेख किया गया है.

उन्होंने महाराजा भूपिंदर सिंह के जीवन पर जो किताब लिखी है, उस पर काफी विवाद रहा है. लेकिन इस बात पर सभी एकमत रहे हैं कि महाराजा भूपिंदर सिंह भव्य और विलासिता भरा जीवन जीते थे.

इस किताब में जिस भवन का उल्लेख है, वह लीलाभवन अपने नाम के अनुसार ही लीला यानी रंगरलियों के लिए प्रसिद्ध था.

ऐसा नियम था कि इस महल में कोई कपड़ा पहन कर नहीं जा सकता था. मतलब वहां लोग बिना कपड़ों के यानी नग्न जाते थे. पटियाला के भूपिंदरनगर से जाने वाली सड़क पर बारहदरी बाग के नजदीक यह महल बना है. कपड़ा उतार कर जिस महल में प्रवेश मिलता हो, उस महल की रंगीनमिजाजी यानी इश्कमिजाजी के बारे में क्या कहा जा सकता है. इस महल में एक खास कमरा था, जिस का नाम प्रेम मंदिर रखा गया था.

प्रेम तो एक इबादत माना जाता है, ऐसे में लीलाभवन में प्रेम मंदिर का होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है. लीलाभवन के इस प्रेम मंदिर की दीवारों पर चारों तरफ ऐसे चित्रों की भरमार थी, जिस में महिलापुरुष कामवासना में लिप्त दिखाई देते थे.

ये भी पढ़ें- बुनियादी हक: पीने का साफ पानी

इस कमरे में महाराजा भूपिंदर सिंह के अलावा किसी अन्य पुरुष को जाने की अनुमति नहीं थी. हां, अगर राजा की इच्छा हो तो दूसरे किसी पुरुष को प्रवेश मिल सकता था. पर ज्यादातर राजा ही अय्याशी में रचेबसे रहते थे तो दूसरे को जाने का मौका कहां से मिलता. प्रेम मंदिर के उस कमरे में भोगविलास की सारी सुविधाएं उपलब्ध रहती थीं.

इस महल में एक ऐसा तालाब था, जिस में एक साथ 150 लोग स्नान कर सकते थे. इसी महल में राजा पार्टियां देते थे, जिस में जानीमानी महिलाओं और कुछ खास लोगों को निमंत्रण मिलता था.

सभी लोग एक साथ तालाब में स्नान करते, तैरते और अय्याशी करते. यहां खुलेआम अय्याशी होती थी. महाराज इस तरह की पार्टियों में सभी के सामने अपनी प्रेमिकाओं से इश्क फरमाते थे.

राजा भूपिंदर सिंह साल में एक बार बिना कपड़ों के सिर्फ हीरों का हार पहन कर हाथी पर सवार हो कर निकलते थे. तब लोग उन की जयजयकार करते थे. लोगों का मानना था कि राजा की ताकत उन्हें बुरी तापती से बचा सकती है.

रंगीनमिजाज महाराजा भूपिंदर सिंह ने वैसे तो 10 शादियां की थीं. लेकिन इन 10 रानियों के अलावा 365 अन्य महिलाएं रानी की हैसियत से महाराज से मिला करती थीं. महाराज ने  इन सभी रानियों के रहने के लिए पटियाला में भव्य महल बनवाए थे, जिन में भोगविलास की सारी सुविधाएं उपलब्ध रहती थीं.

उस समय लोग स्वास्थ्य के प्रति इतना जागरूक नहीं थे, पर महाराजा भूपिंदर सिंह ने हर रानी के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए राउंड द क्लाक देशीविदेशी विशेषज्ञ चिकित्सक रख रखे थे.

ये चिकित्सक रानियों के रूटीन जांच और सेहत के अन्य मामलों पर ध्यान रखते थे. ये विशेषज्ञ रानियों के स्वास्थ्य पर ही नहीं, उन की हेयर स्टाइल से ले कर नाकनक्श तक आधुनिक और खूबसूरत रहे, इस का भी खयाल रखते थे. इस के लिए महाराजा प्लास्टिक सर्जन की भी मदद लेते थे.

‘महाराजा’ किताब में दी गई जानकारी के अनुसार महाराजा की शादी की हुई 10 रानियों से 88 संतानें हुईं. पर उन में से केवल 53 संतानें ही जीवित रहीं.

365 रानियां हों तो किस के साथ रहना है, यह भी एक बड़ा सवाल है. पर भूपिंदर सिंह ने इस का हल निकाल लिया था. राजा के महल में रात को 365 फानस जलते थे.

इन तमाम फानस पर एकएक रानी का नाम लिखा था. इन में से जो फानस सवेरे सब से पहले बुझ जाता था और उस पर जिस रानी का नाम लिखा होता था, इस का मललब था कि राजा रात उसी रानी के निवास में गुजारेंगे.

उस समय महाराजा भूपिंदर सिंह अय्याशी के लिए ही नहीं, संपत्ति के लिए भी खूब जाने जाते थे. उन के पास ऐसी अनेक चीजें थीं, जिन के कारण वह दुनिया में मशहूर थे. वह अपने खास और अलग अंदाज के लिए जाने जाते थे. वह अपना जीवन भी खास और अलग अंदाज से जीते थे.

वह जिस थाली में खाना खाते थे, उस की कीमत करीब 17 करोड़ थी. उन के सभी बरतनों पर सोने या चांदी की परत चढ़ी हुई थी. राजा का यह डिनर सेट लंदन की कंपनी गोल्डस्मिथ्स एंड सिल्वरस्मिथ्स ने तैयार किया था.

उन के पास दुनिया भर में मशहूर पटियाला हार था, यह हार आभूषण बनाने के लिए विश्वप्रसिद्ध कंपनी कार्टियर ने बनाया था. इस हार में 2900 से अधिक हीरे लगे थे. इस में उस समय का दुनिया के सब से बड़े हीरों में सातवें नंबर का हीरा जड़ा था. इस की कीमत 166 करोड़ थी.

यह हार 1948 में पटियाला के शाही खजाने से चोरी हो गया था. फिर कई सालों बाद अलगअलग हिस्सों में कई स्थानों से बरामद हुआ था. पर इसे गायब करने वाले का पता आज तक नहीं चला है.

उन के पास 44 कारों का पूरा एक काफिला था, जिन में से 20 रोल्स रायस कारें थीं, जिन में से 20 कारें रोज के काम में लगी रहती थीं.

भारत में भूपिंदर सिंह ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन के पास अपना विमान था. 1910 में उन्होंने ब्रिटेन से वह विमान खरीदा था और उस के लिए पटियाला में रनवे भी बनवाया था. उन्होंने विमान खरीदने से पहले चीफ इंजीनियर को स्पौट स्टडी करने के लिए यूरोप भेजा था. उस के बाद विमान खरीदा था.

ये भी पढ़ें- मिसाल: रूमा देवी- झोंपड़ी से यूरोप तक

यह पटियाला पैग भी भूपिंदर सिंह की ही देन है. आज भी शराब के शौकीन पटियाला पैग लगाने के लिए आतुर होते हैं. इस दुनिया को पटियाला पैग भेंट करने वाले भूपिंदर सिंह अपनी 365 रानियों के साथ किस तरह रहते रहे होंगे, यह आज भी रहस्य है.

Crime Story: पुलिस वाले की खूनी मोहब्बत- भाग 1

इसी 5 जून की बात है. गुजरात के पुलिस इंसपेक्टर अजय देसाई ने अपने साले जयदीप भाई पटेल को मोबाइल पर फोन कर पूछा, ‘‘भैयाजी, स्वीटी आप के पास आई है क्या?’’

जयदीप ने चौंकते हुए कहा, ‘‘नहीं जीजाजी, स्वीटी तो यहां नहीं आई, लेकिन बात क्या है?’’

‘‘दरअसल, स्वीटी रात एक बजे से आज सुबह साढ़े 8 बजे के बीच घर से कहीं चली गई. वह अपना मोबाइल भी घर पर ही छोड़ गई है.’’ अजय ने जयदीप को बताया.

‘‘जीजाजी, आप ने स्वीटी से कुछ कहा तो नहीं या घर में कोई झगड़ा वगैरह तो नहीं हुआ था?’’ जयदीप ने चिंतित स्वर में अजय से पूछा.

‘‘अरे नहीं यार, न तो घर में कोई झगड़ा हुआ और न ही मैं ने उस से कुछ कहा.’’ अजय ने अपने साले के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘वह बिना किसी को बताए पता नहीं कहां चली गई?’’

‘‘जीजाजी, मेरा भांजा अंश कहां है?’’ जयदीप ने अजय से पूछा. अंश स्वीटी का 2 साल का बेटा था.

‘‘यार, वह उसे भी घर पर ही छोड़ गई है. मुझे चिंता हो रही है कि वह अकेली कहां चली गई.’’ अजय ने कहा, ‘‘अंश अपनी मां के बिना रह भी नहीं रहा. वह लगार रो रहा है.’’

जयदीप कुछ समझ नहीं पाया कि उस की बहन स्वीटी अचानक कैसे अपने घर से बिना किसी को बताए कहीं चली गई. उस ने अजय से कहा, ‘‘जीजाजी, आप तो पुलिस में इंसपेक्टर हैं. स्वीटी का पता लगाइए. मैं भी पता करता हूं.’’

ये भी पढ़ें- Crime Story: नैनीताल की घाटी में रोमांस के बहाने मिली मौत

‘‘ठीक है, कुछ पता चले, तो बताना.’’ अजय ने यह कह कर फोन काट दिया.

बहन स्वीटी के अचानक इस तरह गायब होने की बात सुन कर जयदीप परेशान हो गया. उस ने अपने कुछ रिश्तेदारों को फोन कर स्वीटी के बारे में पूछा, लेकिन उस का कहीं से कुछ पता नहीं चला.

अजय देसाई गुजरात के वडोदरा शहर में करजण इलाके की प्रयोशा सोसायटी में रहता था. वह गुजरात पुलिस में इंसपेक्टर था. अजय ने स्वीटी पटेल से 2016 में लव मैरिज की थी. उन की मुलाकात अहमदाबाद के एक स्कूल में 2015 में हुई थी.

उस स्कूल में तब माइंड पौवर नामक एक कार्यक्रम हुआ था. इसी कार्यक्रम में अजय और स्वीटी की मुलाकात हुई. दोनों एकदूसरे से प्रभावित हुए. स्वीटी अजय की प्रतिभा पर रीझ गई थी और अजय उस की खूबसूरती पर फिदा हो गया था.

दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं. करीब एक साल तक प्रेम प्रसंग के बाद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और 2016 में एक मंदिर में शादी कर ली.

स्वीटी की इस से पहले एक शादी हो चुकी थी. उस का पहला पति हेतस पांड्या आस्ट्रेलिया में रहता है. बताया जाता है कि हेतस पांड्या भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हार्दिक पांड्या का रिश्ते का भाई है. हेतस पांड्या से शादी के बाद स्वीटी के एक बेटा रिदम हुआ. अब 17 साल का हो चुका रिदम भी अपने पिता के साथ आस्ट्रेलिया में रहता है.

पुलिस इंसपेक्टर अजय देसाई से दूसरी शादी के बाद स्वीटी के एक बेटा हुआ. उस का नाम अंश रखा गया. जयदीप को यही पता था कि स्वीटी दूसरी शादी के बाद अपने पति अजय और 2 साल के बेटे अंश के साथ खुश है.

भाई पहुंच गया थाने

अब अचानक स्वीटी के गायब होने की सूचना से वह बेचैन हो गया. वह तुरंत तो वडोदरा नहीं पहुंच पा रहा था. इसलिए फोन पर ही अजय से संपर्क में रह कर अपनी बहन के बारे में पूछता रहा, लेकिन हर बार उसे निराशाजनक जवाब मिला.

जयदीप समझ नहीं पा रहा था कि आखिर ऐसी क्या बात हुई, जो उस की बहन अचानक किसी को बताए बिना घर से चली गई?

स्वीटी पढ़ीलिखी 37 साल की मौडर्न महिला थी. जयदीप की नजर में ऐसी कोई भी बात नहीं आई थी कि वह अपने पति पुलिस इंसपेक्टर पति से किसी तरह से परेशान या नाखुश है. वह अपने छोटे से परिवार में खूब मौज में थी.

फिर अचानक 2 साल के बेटे को घर पर अकेला छोड़ कर क्यों और कहां चली गई? अपना मोबाइल भी साथ नहीं ले जाने से उस से संपर्क भी नहीं हो रहा था.

ये भी पढ़ें- Crime Story: मसाज पार्लर की आड़ में देह धंधा

जयदीप स्वीटी के इस तरह गायब होने का रहस्य समझ नहीं पा रहा था. उस ने मोबाइल पर ही अपने रिश्तेदारों और जानकारों से अजय और स्वीटी के रिश्तों के बारे में पूछताछ की, लेकिन ऐसी कोई बात पता नहीं चली,

जिस से स्वीटी के गायब होने का कारण समझ आता.

अजय से जब भी जयदीप ने बात की, तो वह यही कहता रहा कि हम खोजबीन कर रहे हैं, लेकिन अभी स्वीटी का कुछ पता नहीं चला है. जयदीप ने अपने जीजा को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही तो अजय ने परिवार की बदनामी की बात कहते हुए कुछ दिन रुकने को कहा.

5-6 दिन तक स्वीटी का कुछ पता नहीं चलने पर आखिर जयदीप वडोदरा आ कर अपने जीजा अजय देसाई से मिला और स्वीटी के गायब होने के बारे में सारी बातें पूछीं. अजय ने उसे बताया कि 4 जून की रात एक बजे वह स्वीटी के साथ अपने घर में सोया था.

अगले दिन 5 जून को सुबह करीब साढ़े 8 बजे उठा तो स्वीटी नहीं मिली. उस का मोबाइल भी कमरे में ही था और अंश भी बैड पर सो रहा था. पूरे घर में तलाश करने पर भी स्वीटी नहीं मिली तो आसपास उस की तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला.

जयदीप ने अपने जीजा से बातोंबातों में कुरेदकुरेद कर यह पता लगाने की कोशिश की कि उन के बीच कोई झगड़ा तो नहीं हुआ था या कोई और बात नहीं थी, लेकिन ऐसी कोई बात पता नहीं चली. अंश के बारे में अजय ने बताया कि उसे रिश्तेदार के पास भेज दिया है.

आखिर थकहार कर जयदीप ने 11 जून को वडोदरा के करजण पुलिस थाने में स्वीटी के लापता होने की सूचना दर्ज करा दी. अजय पहले करजण पुलिस थाने में ही तैनात था. बाद में उस का ट्रांसफर वडोदरा जिले के स्पेशल औपरेशन ग्रुप (एसओजी) शाखा में हो गया था.

स्वीटी के लापता होने की सूचना दर्ज होने पर पुलिस उस की तलाश में जुट गई. एक पुलिस इंसपेक्टर की पत्नी के गायब होने का मामला होने के कारण पुलिस ने कई दिनों तक आसपास के जंगलों, नदीनालों और झीलों में स्वीटी की तलाश की, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिला.

ड्रोन से जंगलों में की खोजबीन

पुलिस ने विभिन्न अस्पतालों में जा कर 17 लावारिस लाशों का मुआयना किया. आसपास के पुलिस थानों के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से भी लावारिस शव मिलने की सूचनाएं जुटाईं, लेकिन कुछ पता नहीं चला.

एकएक दिन गुजरता जा रहा था. पुलिस अजय के बयानों पर भरोसा करते हुए हरसंभव स्थानों पर स्वीटी की तलाश करती रही. डौग स्क्वायड और ड्रोन के जरिए भी आसपास के जंगलों में तलाश की गई. रेलवे लाइनों के नजदीक भी काफी खोजबीन की गई.

कोई सुराग नहीं मिलने पर करीब एक महीने बाद पुलिस ने अखबारों में स्वीटी के लापता होने के इश्तिहार छपवाए, लेकिन इस का भी कोई फायदा नहीं हुआ. पुलिस को कहीं से कोई सूचना नहीं मिली.

स्वीटी को लापता हुए एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका था. एसओजी के पुलिस इंसपेक्टर की गायब पत्नी का पता नहीं लग पाने पर पूरे गुजरात में तरहतरह की चर्चाएं होने लगीं. लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे थे.

पुलिस अधिकारियों के लिए भी स्वीटी के गायब होने का रहस्य लगातार उलझता जा रहा था. अधिकारी रोजाना मीटिंग कर स्वीटी का पता लगाने के लिए अलगअलग एंगल से जांच शुरू करते, लेकिन उस का कोई नतीजा नहीं निकल रहा था.

इस बीच, पुलिस के अधिकारी बीसियों बार इंसपेक्टर अजय देसाई से भी पूछताछ कर चुके थे. उस के फ्लैट पर जा कर भी कई बार जांचपड़ताल की जा चुकी थी. सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की जांच और स्वीटी के मोबाइल से भी पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लगा था.

आसपास के लोगों से भी कई बार पूछताछ हो चुकी थी. पुलिस के अधिकारी समझ नहीं पा रहे थे कि स्वीटी को आसमान खा गया या जमीन निगल गई, जो उस का कुछ पता नहीं चल पा रहा.

अगले भाग में पढ़ें- लव अफेयर्स एंगल पर भी की जांच

रिश्ता दिल से

क्या प्यार की कोई सही उम्र होती है? क्या प्यार के लिए कोई छोटा और कोई बूढ़ा होता है? जी नहीं, प्यार की कोई उम्र, कोई सीमा नहीं होती. प्रसिद्ध लेखिका मारिया एजवर्थ ने कहा था कि इंसानी दिल किसी भी उम्र में उस दिल के आगे खुलता है जो बदले में अपने दिल का रास्ता खोल दे. तकरीबन 2 शतक पूर्व कही गई उन की बात आज भी सटीक साबित होती है. शायद इसी बात की मार्मिकता को समझते हुए गजल सम्राट जगजीत सिंह ने फिल्म ‘प्रेम गीत’ (1981) के एक गीत ‘होठों से छू लो तुम…’ की कुछ पंक्तियों में कहा है, ‘न उम्र की सीमा हो… न जन्मों का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन…’ चार दशक पहले लिखा यह गीत आज भी प्रासांगिक है. तब प्यार की जो नई परिभाषा कल्पना में पिरो कर शब्दों से सजाई गई थी, आज वह समाज की हकीकत बन गई है.

मनोवैज्ञानिक अदिति सक्सेना कहती हैं, ‘‘हम उम्र के हर पड़ाव में भावनात्मक रूप से जुड़ने की क्षमता को महसूस करते हैं और चाहते हैं कि कोई हो जो हमारा ध्यान करे, हमारी इज्जत करे, हम से प्यार करे.’’

बौलीवुड की फिल्मों का तो यह औलटाइम फेवरेट विषय रहा है. असंख्य फिल्में व गीत प्रेम की मधुरता, प्रेमी से विरह और प्यार में जीनेमरने की स्थितियों को गुनगुनाते सुने व देखे जाते रहे हैं. एक आम आदमी के जीवन में प्यार कभी उस के जीवन की मजबूत कड़ी बनता है, तो कभी मृगतृष्णा की भांति जीवनभर छलावा देता है. ढाई अक्षर के इस शब्द में जीवन की संपूर्णता है.

ये भी पढ़ें- क्या आपको भी सेक्स के दौरान होता है दर्द

जवानी दीवानी

हमारे समाज में जवानी को बहुत महत्त्व दिया जाता है. कुछ इस तरह का माहौल बना रहता है कि यदि जवानी बीत गई तो जीवन ही समाप्त समझो. जीवन की ऊर्जा, उस की क्षमता और उस का उत्साह, सबकुछ जवानी अपने साथ ले जाती है. शायद इसीलिए जवानी जाने के बाद भी अकसर लोग जवान बने रहना चाहते हैं. लेकिन बढ़ती उम्र इतनी बुरी भी नहीं और इस का सब से बड़ा कारण है कि उम्र के साथ हमारे पास अनुभवों का खजाना बढ़ता जाता है जिस से हमारी जिंदगी पहले के मुकाबले और रंगीन व रोचक हो जाती है.

यह जरूरी नहीं कि प्यार पाने के लिए आप जवान ही हों. प्यार किसी भी उम्र में हो सकता है. यह तो वह अनुभूति है जो जिसे छू जाए वही इस का सुख, इस का नशा जानता है. कितनी बार हम यह सोचते हैं कि अब हम प्यार के लिए बूढ़े हो चुके हैं खासकर कि महिलाएं. महिलाएं अकसर रोमांस या नए रिश्ते खोजने में डरती हैं और सोचती हैं कि अब हमारी उम्र निकल चुकी है, अब हमें कौन मिलेगा. लेकिन जरूरी नहीं कि प्यार जवानी में ही मिले.

एक उम्र गुजार देने के बाद जो प्यार मिलता है वह छोटी उम्र के प्यार से बेहतर होता है. आप सोचेंगे कैसे? वह ऐसे कि जब हम जवान होते हैं या कम उम्र होते हैं तो हमारे पास केवल उतनी ही उम्र का तजरबा होता है. जबकि उम्र बढ़ने के साथसाथ हमारे अनुभव बढ़ते हैं, हमारी गलतियां बढ़ती हैं और उन गलतियों से हमारी सीखें भी बढ़ती हैं. इसलिए बड़ी उम्र का प्यार वह गलतियां नहीं करने देता जो छोटी उम्र वाले आशिक अकसर कर बैठते हैं. उम्र गुजार देने के बाद हम अपनी गलतियों से शिक्षा ले आगे की राह सुगम बनाने लगते हैं. हमें पता चल जाता है कि हमें क्या चाहिए और क्या नहीं.

मर्दों को अकसर आत्मविश्वासी औरतें बहुत भाती हैं जिन्हें यह पता हो कि उन्हें खुद से और सामने वाले से क्या चाहिए. इसलिए आजकल ऐसे कई उदाहरण हैं जिन में आशिकों की उम्र में अंतर तो होता है लेकिन साथियों में बड़ी उम्र की औरत होती है और कम उम्र का मर्द. आजकल आप कई ऐसे जोड़े देखेंगे जिन में अधिक उम्र की महिलाओं के साथ कम उम्र के मर्द दिखाई देते हैं.

साइकोलौजिस्ट डा. पल्लवी जोशी कहती हैं, ‘‘प्यार के लिए आपसी सामंजस्य, समझदारी, समर्पण व सम्मान की जरूरत है न कि उम्र की.’’  डा. जोशी के अनुसार ऐसे रिलेशनशिप (जो बड़ी उम्र में बनते हैं) कोई नई बात नहीं है. लेकिन अब जो बदलाव आ रहे हैं उन में यह देखने को मिल रहा है कि महिलाएं ऐसे रिश्तों में ज्यादा खुल कर सामने आ रही हैं.

दिल तो बच्चा है जी

दिल की मासूमियत कभी खत्म नहीं होती. फिर चाहे आप 15 के हों, 30 के, या फिर 55 के ही क्यों न हों. दिल तो हमेशा बच्चा होता है और वह उसी तरह बचपना कर के जिंदगी का आनंद लेता रहता है. दिल कभी भी यह नहीं सोचता कि आप की उम्र क्या है या जिस से आप की आंखें चार होने वाली हैं उस की उम्र और उस का मजहब क्या है. यह सब से अच्छा होता है. सब से खूबसूरत और जिंदादिल होता है. दिल हमेशा जवां होता है, जिसे अपने सब से करीब पाता है, बस, वह उसी का होने को बेताब हो जाता है.

मशहूर सिंगर मैडोना ने 61 वर्ष की उम्र में अपने से 36 वर्ष छोटे लड़के विलियम से प्यार किया. हालांकि, विलियम के मातापिता तक उम्र में मैडोना से छोटे हैं पर वे इस रिश्ते को स्वीकार कर चुके हैं और कहते हैं कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती.

मिसेज इंडिया फेम रह चुकीं मीनाक्षी माथुर का कहना है, ‘‘हमारा समाज काफी बदल रहा है. समाज की तरफ से कई ऐसे आयामों को स्वीकृति मिल रही है जो पहले नहीं थी, जैसे बड़ी उम्र का प्यार या लिव इन रिलेशनशिप. लेकिन अब भी हमारे समाज में उतनी मैच्योरिटी नहीं आई है जितनी कि पाश्चात्य समाज में है. पश्चिम के लोग यह जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं. पहले किसी को पसंद करना, फिर उस के साथ रह कर यह देखना कि निबाह हो सकता है या नहीं और फिर शादी का निर्णय लेना. ये सभी परिपक्व सोच की निशानियां हैं.’’

मैच्योर लव

एक सफल रिश्ते के लिए किसी एक का मैच्योर होना महत्त्व रखता है, रूप से नहीं, दिमाग से ताकि रिश्ता संपूर्ण समझदारी व धैर्य से निभाया जा सके. एक मैच्योर साथी धैर्य से रिश्ते की कमजोरियों पर गौर करता है. ठंडे दिमाग से अपनी व अपने प्रियतम की खामियों को दूर करने की पहल करता है. हमें नहीं भूलना चाहिए कि रूप, यौवन एक वक्त के बाद ढल ही जाता है, फिर चाहे वह स्त्री का हो या पुरुष का. तब ताउम्र जो आप के साथ रहता है वह है आप का प्यार, आपसी सामंजस्य, विश्वास, एकदूसरे की परवा व समझदारी. इन की नींव पर खड़ा रिश्ता जिंदगी के आखिरी पड़ाव में आप का हाथ थामे रखता है चूंकि उस की बुनियाद उम्र नहीं, आप का सच्चा प्यार होता है.

ये भी पढ़ें- क्या आपको पता है, सेक्स के ये हेल्थ बेनिफिट

समाजशास्त्री टेसू खेवानी कहती हैं कि स्त्री और पुरुष दोनों एकदूसरे के पूरक होते हैं. दोनों एकदूसरे की तरफ अट्रैक्ट होते ही हैं. जीवन में यदि कोई ऐसा आप को मिलता है जिस से मिलने के बाद आप खुद को पूरा समझने लगते हैं, आप का माइंडसैट, नेचर, बिहेवियर, खूबियां व खामियां सब वह अच्छे से समझता है या कहें कि आप को लगता है कि उस के साथ सब मैच करता है तो आप को बेझिझक आगे बढ़ना चाहिए.

जब प्यार मिलता है तो वह उम्र की सीमाएं नहीं नापता. वह तो बस एक तूफान की तरह आता है और अपने उफान में हमें डुबो लेता है. ऐसे में हमें सच्चे प्यार का आनंद लेना चाहिए. उस का सुख उठाना चाहिए और यह शुक्र मनाना चाहिए कि हमारे साथ यह इस समय हो रहा है. प्यार में पड़ कर भले ही हम 50 के हों किंतु हमें अनुभूति 19 की भी हो सकती है, 25 की भी हो सकती है और 38 की भी.

देशी भी पीछे नहीं

प्यार वह एहसास है जो उम्र को बखूबी हरा सकता है. इस का एक बेहद खूबसूरत उदाहरण है झाबुआ जिले के परगट गांव में रहने वाले बादू सिंह और भूरी की प्रेम कहानी. भूरी का पति शराब पी कर उस से अकसर मारपीट किया करता था जबकि बादू सिंह की पत्नी का देहांत हो चुका था और वह एकाकी जीवन जी रहा था. दोनों मजदूरी करने गुजरात गए और वहीं इन की मुलाकात हुई. मिलने पर इन्हें लगा कि हम दोनों एकदूसरे के लिए सही हैं. बस, यहीं से प्यार की कोंपलें फूटने लगीं.

लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट यह रहा कि ये दोनों ही 70 पार की उम्र के हैं. जिस उम्र में हमारा समाज अपने बुजुर्गों को हाथ में माला फेरने और भगवान में मन लगा कर अपनी उम्र पूरी होने की नसीहत देता है, उस उम्र में इन दोनों ने बेखौफ हो कर प्यार किया और समाज की परवा न करते हुए आगे बढ़ चले. दिल के हाथों मजबूर हो कर अपने प्यार को पाने के लिए इन दोनों ने लिवइन में रहना शुरू कर दिया. भूरी कोई आधुनिका नहीं, किसी पौइंट को प्रूव करने के लिए नहीं, किसी संस्था की सदस्य नहीं बल्कि केवल अपने दिल की सुनते हुए ऐसा कर गुजरी.

समाजशास्त्री टेसू खेवानी कहती हैं कि जब हम अपने किसी निर्णय पर अडिग होते हैं तो समाज भी उसे स्वीकार कर ही लेता है. हमारे अपने आत्मविश्वास को देखते हुए जब हमारी अंतरात्मा हमारा साथ देती है तो बाहरी समाज भी खूबसूरती से उसे अपना लेता है. इसलिए जरूरी है कि हम जो निर्णय लें उस पर पूरा विश्वास रखें और डटे रहें.

मनोवैज्ञानिक आधार पर रोमांटिक रिलेशनशिप

मनोवैज्ञानिक आधार पर देखा जाए तो एक सुदृढ़ रिश्ते, जिस में एक अच्छा रोमांटिक रिलेशनशिप भी आता है, का असर हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा पड़ता है. और इस कारणवश यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि एक सफल रोमांटिक रिश्ता किन कारणों से बन सकता है. बढ़ती उम्र की आबादी के लिए यह जान लेना स्वास्थ्यवर्धक रहेगा.

जब हम जवान होते हैं तो अपने रिश्ते की नकारात्मकता पर कम ध्यान देते हैं. इस कारण कई बार हम गलत रिश्ते भी बना बैठते हैं. लेकिन बढ़ती उम्र के साथ हम यह समझने लगते हैं कि हमें एक रिश्ते से क्या चाहिए और क्या नहीं. रिश्ते बनाने में भले ही हम अपनी गति धीमी कर लें लेकिन गलती करने से बचना चाहते हैं. संभवतया इसीलिए औरतें रिश्तों में आगे बढ़ने से कतराती हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि अब समय बीत चुका है, अब उन्हें उन का साथी नहीं मिलेगा, और वे रोमांटिक रिश्ता ढूंढ़ने में घबराने लगती हैं. लेकिन, साथ ही एक सचाई यह भी है कि बढ़ती उम्र की औरत अपने साथी में कमी न ढूंढ़ कर, उसे ‘जैसा है वैसा ही’ स्वीकार सकती है जबकि एक जवान स्त्री अपने साथी को अपनी तरह बनाने की कोशिश करती रहती है.

58 साल की बेथनी को जब उन का मनपसंद साथी मिला तो दोनों ने एकसाथ रहने का निर्णय किया. न्यूयौर्क में स्थित हडसन रिवर के पास जब उन्होंने अपने घर में एकसाथ रहना शुरू किया तो बेथनी ने अपने अंदर जवानी के दिनों के मुकाबले एक भारी बदलाव महसूस किया. वे कहती हैं, ‘अब तक की सारी जिंदगी में जब भी किसी पुरुष ने मुझ से भिन्न कोई कार्य किया तो मैं ने उसे अपने सांचे में ढालना चाहा. लेकिन, अब एक उम्र निकल जाने के बाद मुझ में यह बदलाव आया है कि अपने से भिन्न तरीके पर मेरी प्रतिक्रिया होती है. अच्छा, यह ऐसे भी हो सकता है, यह तो मैं ने सोचा ही नहीं था. यह तरीका बेहतर है क्योंकि इस में तनाव नहीं.’ बेथनी कहती हैं कि जिंदगी छोटी है और मौत एक दिन जरूर आएगी, और प्यार सच है. इसलिए हम वर्तमान के एकएक पल का लुत्फ उठाना चाहते हैं.

ये भी पढ़ें- लड़के खुल कर बात करें सेक्स समस्याओं पर

बहुत हैं उदाहरण

सैलिब्रिटीज की बात करें तो बढ़ती उम्र में प्यार तलाशने वालों की कमी नहीं है. जहां उर्मिला मातोंडकर, प्रीति जिंटा ने 40 पार करने पर शादियां कीं, संजय दत्त ने 48 साल की उम्र में तीसरी शादी की जो उन का सच्चा प्यार साबित हुई. वहीं, सुहासिनी मुले जैसी खूबसूरत अभिनेत्री ने 60 पार करने के बाद और कबीर बेदी ने 70 पार करने के बाद शादियां कीं. नीना गुप्ता जैसी प्रखर स्वभाव की महिला को अपना सच्चा प्यार 43 वर्ष की आयु में मिला. जब वे एक प्लेन में यात्रा कर रही थीं तब उन की मुलाकात पेशे से चार्टर्ड अकाउंटैंट विवेक मेहरा से हुई. 6 साल लिवइन रिलेशनशिप में रहने के बाद उन्हें विश्वास हो गया कि यही उन का सच्चा साथी है और 49 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने दिल की आवाज को सुना और विवाह कर लिया.

राजनीति के क्षेत्र में भी ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाते हैं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जौनसन ने 54 साल की उम्र में एक बार फिर अपने दिल की राह पकड़ी. भारत में भी ऐसा एक किस्सा कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह का मिलता है जिन्होंने 67 वर्ष की आयु में प्यार की डगर चुनी और अमृता राय से विवाह किया.

हालांकि, ऐसे किस्से कई बार इंटरनैट पर काफी ट्रोल होते हैं. बढ़ती उम्र में प्यार का हाथ थामने वालों को समाज में बहिष्कार और मखौल का पात्र बनना पड़ता है. किंतु जब प्यार किया तो डरना क्या? प्यार का साथ जिस उम्र में भी मिले, बिना संकोच करें बढ़ा हुआ हाथ थाम लेना चाहिए.

Satyakatha: मियां-बीवी और वो- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

विवाह के बाद मानो देवेंद्र सोनी का असली रूप धीरेधीरे सामने आता चला गया. देवेंद्र चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहा था, मगर परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पा रहा था. इधर उस की आकांक्षाएं बहुत ऊंची थीं. अपनी ऊंची उड़ान के कारण ऐसीऐसी बातें कहता और नित्य नईनई लड़कियों से दोस्ती की बातें दीप्ति को बताता.

शुरू में तो वह नजरअंदाज करती रही, परंतु पैसों की कमी होने के बावजूद वह हमेशा अच्छेअच्छे कपड़े पहनता और नईनई लड़कियों से संबंध बनाता रहता था.

यह बात जब दीप्ति को पता चलने लगी तो दोनों में अकसर विवाद गहराने लगा. इस बीच दोनों की एक बेटी सोनिया का जन्म हुआ, जो लगभग 7 साल की हो गई थी. और बिलासपुर के एक अच्छे कौन्वेंट स्कूल में पढ़ रही थी.

रात के लगभग साढ़े 11 बज रहे थे. जिला चांपा जांजगीर के पंतोरा थाने के अपने कक्ष में थानाप्रभारी अविनाश कुमार श्रीवास बैठे अपने स्टाफ से कुछ चर्चा कर रहे थे कि उसी समय घबराए हुए 2 लोग भीतर आए.

ये भी पढ़ें- Manohar Kahaniya: पत्नी की मौत की सुपारी

एक के चेहरे पर मानो हवाइयां उड़ रही थीं. उन्हें इस हालत में देख अविनाश कुमार को यह समझते देर नहीं लगी कि कोई बड़ी घटना घटित हो गई है. उन्होंने कहा, ‘‘हांहां बताओ, क्या बात है, क्यों इतना घबराए हुए हो?’’

दोनों व्यक्तियों, जिन की उम्र लगभग 30-35 वर्ष के लपेटे में थी, में से एक ने खड़ेखड़े ही लगभग कांपती हुई आवाज में बोला, ‘‘सर, मैं देवेंद्र सोनी 2-3 जिलों में कई प्रतिष्ठित लोगों के लिए अकाउंटेंट का काम करता हूं. मैं अपनी पत्नी दीप्ति के साथ कोरबा से बिलासपुर जा रहा था कि कुछ लोगों ने हम से लूटपाट की और मेरी पत्नी को…’’ ऐसा कह कर वह इधरउधर देखने लगा.

‘‘क्यों, क्या हो गया आप की पत्नी को… विस्तार से बताओ. आओ, पहले आराम से कुरसी पर बैठ जाओ.’’ अविनाश कुमार श्रीवास ने  उठ कर दोनों को अपने सामने कुरसी पर बैठाया और पानी मंगा कर के पिलाते हुए कहा.

देवेंद्र सोनी की आंखों में आंसू आ गए थे, वह बहुत घबरा रहा था. उस ने पानी पिया और धीरेधीरे बोला, ‘‘सर, मैं अपनी पत्नी दीप्ति सोनी के साथ कोरबा से बिलासपुर अपने घर जा रहा था कि खिसोरा के पास वन बैरियर के निकट जब वह लघुशंका के लिए गाड़ी से नीचे उतरा तो थोड़ी देर बाद 2 लोगों ने मेरी पत्नी और मुझे घेर लिया.

‘‘वे लोग पिस्टल लिए हुए थे. पत्नी दीप्ति के गले में रस्सी डाल कर के उसे मार कर  रुपए और लैपटौप, मोबाइल छीन कर भाग गए हैं. घटना के बाद मैं ने अपने दोस्त सौरभ गोयल, जोकि पास ही बलौदा नगर में रहता है, को फोन कर के बुला लिया. फिर दोस्त के साथ मैं थाने आया हूं.’’

अविनाश कुमार श्रीवास ने लूट और हत्या की इस घटना को सुन कर थानाप्रभारी ने तुरंत हैडकांस्टेबल नरेंद्र रात्रे व एक अन्य सिपाही को घटनास्थल पर रवाना किया और एसपी पारुल माथुर को सारी घटना की जानकारी देने के बाद वह खुद देवेंद्र सोनी और सौरभ को ले कर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

थाना पंतोरा से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर वन विभाग का एक बैरियर है. यहां से एक रास्ता सीधा बलौदा होते हुए बिलासपुर की ओर जाता है. एक रास्ता एक दूसरे गांव की ओर. यहीं चौराहे पर देवेंद्र सोनी की काली  मारुति ब्रेजा कार पुलिस को खड़ी मिली, जिस की पिछली सीट पर दीप्ति का मृत शरीर पड़ा हुआ था.

इसी समय थानाप्रभारी अविनाश कुमार श्रीवास भी घटनास्थल पर

पहुंच गए थे. हैडकांस्टेबल नरेंद्र

रात्रे ने उन्हें बताया, ‘‘सर, जब हम यहां पहुंचे तो मृतक महिला का शरीर गर्म था, यहां पास में एक सिम मिला है.’’

अविनाश कुमार श्रीवास ने सिम अपने पास सुरक्षित रख लिया. पुलिस को एक अहम सुराग मिल चुका था.

पुलिस दल ने प्राथमिक जांच करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बलोदा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिजवा दिया. इस समय तक देवेंद्र की हालत बहुत खराब हो चली थी, वह मानो टूट सा गया था.

ये भी पढ़ें- Manohar Kahaniya: खोखले निकले मोहब्बत के वादे- भाग 1

दीप्ति सोनी हत्याकांड की खबर जब दूसरे दिन 15 जून, 2021 को क्षेत्र में फैली तो चांपा जांजगीर की एसपी पारुल माथुर ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस केस की जांच के लिए एक पुलिस टीम का गठन कर दिया.

टीम में पंतोरा थाने के प्रभारी अविनाश कुमार श्रीवास, बलौदा थाने के नगर निरीक्षक व्यास नारायण भारद्वाज के अलावा आसपास के अन्य थानों के प्रभारी भी सहयोग के लिए जांच दल में शामिल कर लिए गए थे.

सभी पहलुओं पर जांच करने के बाद कई  पेचीदा तथ्य सामने आते चले गए. सब से महत्त्वपूर्ण था दीप्ति सोनी के पिता कृष्ण कुमार सोनी का बयान. उन्होंने पुलिस को बताया कि वह वर्तमान में बिलासपुर के निवासी हैं और कोरबा जिले के भारत अल्युमिनियम कंपनी में कार्यरत थे. दीप्ति उन की दूसरे नंबर की बेटी थी, जिस का प्रेम विवाह देवेंद्र सोनी से हुआ था.

उन्होंने कहा कि विवाह के बाद देवेंद्र दीप्ति को अकसर प्रताडि़त किया करता था और मायके के लोगों से भी मिलने नहीं देता था. उस ने साफसाफ यह लकीर खींच दी थी कि अपने मायके वालों से उसे कोई संबंध नहीं रखना है.

दीप्ति ने उस के इस अत्याचार को भी एक तरह से स्वीकार कर लिया था और लंबे समय से मायके वालों से कोई संबंध नहीं रख रही थी. यहां तक कि अपनी बड़ी बहन सीमा और जीजा राजेश से भी कभी भी बात नहीं करती थी. क्योंकि देवेंद्र इस से नाराज हो जाता और उस ने बंदिशें लगा रखी थीं.

उन्होंने अपने बयान में यह शक जाहिर किया कि हो सकता है देवेंद्र का दीप्ति की हत्या में हाथ हो. कृष्ण कुमार सोनी ने जांच अधिकारियों से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और आरोपियों को किसी भी हालत में न छोड़ा जाए.

इस महत्त्वपूर्ण बयान के बाद पुलिस की निगाह में देवेंद्र सोनी संदिग्ध के रूप में सामने आ गया. पुलिस ने इस दृष्टिकोण से जांचपड़ताल शुरू की. साथ ही देवेंद्र के दिए गए बयान की सूक्ष्म पड़ताल की गई.

अगले भाग में पढ़ें- देवेंद्र ने पूरी हत्याकांड की पटकथा बनाई

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें