सजा- भाग 2: तरन्नुम ने असगर को क्यों सजा दी?

‘‘वह तो शादी से पहले 50 फीसदी लड़कियां खास होने का दावा करती हैं पर असलीयत में वे भी आम ही होती हैं. है न, जब तक तरन्नुम को शादी में दिलचस्पी नहीं थी, मुहब्बत में यकीन नहीं था, वह खास लगती थी. पर तुम्हें चाह कर उस ने जता दिया है कि उस के खयाल भी आम औरतों की तरह घर, खाविंद, बच्चों पर ही खत्म होते हैं. मैं तो उस के ख्वाबों को पूरा करने में उस की मदद कर रहा हूं,’’ शकील ने तफसील से बताते हुए कहा.

और यों दोस्त की शादी में शरीक होने वाला असगर अपनी शादी कर बैठा. तरन्नुम को दिल्ली ले जाने की बात से शकील कन्नी काट रहा था. अपना मकान किराए पर दिया है, किसी के घर में पेइंगगेस्ट की तरह रहता हूं. वे शादीशुदा को नहीं रखेंगे. इंतजाम कर के जल्दी ही बुला लेने का वादा कर के असगर दिल्ली वापस चला आया.

तरन्नुम ने जब घर का पता मांगा तो असगर बोला, ‘‘घर तो अब बदलना ही है. दफ्तर के पते पर चिट्ठी लिखना,’’ और वादे और तसल्लियों की डोर थमा कर असगर दिल्ली चला आया.

7-8 महीने खतों के सहारे ही बीत गए. घर मिलने की बात अब खटाई में पड़ गई. किराएदार घर खाली नहीं कर रहा था इसलिए मुकदमा दायर किया है. असगर की इस बात से तरन्नुम बुझ गई, मुकदमों का क्या है, अब्बा भी कहते हैं वे तो सालोंसाल ही खिंच जाते हैं, फिर क्या जिन के अपने घर नहीं होते वह भी तो कहीं रहते ही हैं. शादी के बाद भी तो अब्बू, अम्मी के ही घर रह रहे हैं, ससुराल नहीं गई, इसी को ले कर लोग सौ तरह की बातें ही तो बनाते हैं.

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असगर यों अचानक तरन्नुम को अपने दफ्तर में खड़ा देख कर हैरान हो गया, ‘‘आप यहां? यों अचानक,’’ असगर हकलाता हुआ बोला.

तरन्नुम शरारत से हंस दी, ‘‘जी हां, मैं यों अचानक किसी ख्वाब की तरह,’’ तरन्नुम ने चहकते से अंदाज में कहा, ‘‘है न, यकीन नहीं हो रहा,’’ फिर हाथ आगे बढ़ा कर बोली, ‘‘हैलो, कैसे हो?’’ असगर ने गरमजोशी से फैलाए हाथ को अनदेखा कर के सिगरेट सुलगाई और एक गहरा कश लिया.

तरन्नुम को लगा जैसे किसी ने उसे जोर से तमाचा मारा हो. वह लड़खड़ाती सी कुरसी पकड़ कर बैठ गई. मरियल सी आवाज में बोली, ‘‘हमें आया देख कर आप खुश नहीं हुए, क्यों, क्या बात है?’’

असगर ने अपने को संभालने की कोशिश की, ‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं. तुम्हें यों अचानक आया देख कर मैं घबरा गया था,’’ असगर ने घंटी बजा कर चपरासी से चाय लाने को कहा.

‘‘हमारा आना आप के लिए खुशी की बात न हो कर घबराने की बात होगी, ऐसा तो मैं ने सोचा भी नहीं था,’’ तरन्नुम की आंखें नम हो रही थीं.

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तब तक चपरासी चाय रख कर चला गया था. असगर ने चाय में चीनी डाल कर प्याला तरन्नुम की तरफ बढ़ाया. तरन्नुम जैसे एकएक घूंट के साथ आंसू पी रही थी.

असगर ने एकदो फाइलें खोलीं. कुछ पढ़ा, कुछ देखा और बंद कीं. अब उस ने तरन्नुम की तरफ देखा, ‘‘क्या कार्यक्रम है?’’

‘‘मेरा कार्यक्रम तो फेल हो गया,’’ तरन्नुम लजाती सी बोली, ‘‘मैं ने सोचा था पहुंच कर आप को हैरान कर दूंगी. फिर अपना घर देखूंगी. हमेशा ही मेरे दिमाग में एक धुंधला सा नक्शा था अपने घर का, जहां आप एक खास तरीके से रहते होंगे. उस कमरे की किताबें, तसवीरें सभी कुछ मुझे लगता है मेरी पहचानी सी होंगी लेकिन यहां तो अब आप ही जब अजनबी लग रहे हैं तब वे सब…’’

असगर के चेहरे पर एक रंग आया और गया. फिर वह बोला, ‘‘यही परेशानी है तुम औरतों के साथ. हमेशा शायरी में जीना चाहती हो. शायरी और जिंदगी 2 चीजें हैं. शायरी ठीक वैसी ही है जैसे मुहब्बत की इब्तदा.’’

‘‘और मुहब्बत की मौत शादी,’’ असगर की तरफ गहरी आंखों से देखते हुए तरन्नुम बोली.

‘‘मुझे पता है तुम ने बहुत से इनाम जीते हैं वादविवाद में, लेकिन मैं अपनी हार कबूल करता हूं. मैं बहस नहीं करना चाहता,’’ असगर ने उठते हुए कहा, ‘‘तुम्हारा सामान कहां है?’’

‘‘बाहर टैक्सी में,’’ तरन्नुम ने बताया.

‘‘टैक्सी खड़ी कर के यहां इतनी देर से बैठी हो?’’

‘‘और क्या करती? पता नहीं था कि आप यहां मिलोगे भी या नहीं. फिर सामान भी भारी था,’’?तरन्नुम ने खुलासा किया.

जाहिर था असगर उस की किसी भी बात से खुश नहीं था.

जब टैक्सी में बैठे तो असगर ने टैक्सी चालक को किसी होटल में चलने को कहा, ‘‘पर मैं तो आप का घर देखना…’’

कोरोना लव- भाग 2: शादी के बाद अमन और रचना के रिश्ते में क्या बदलाव आया?

अमन की बातें सुन कर रचना दंग रह गई कि कैसा इंसान है यह? जरा भी हमदर्द नहीं है? क्या सोचता है? क्या वह घर में आराम करती रहती है? रचना खामोश ही रही.

अमन फिर बोल पड़ा, ‘‘हां, बोलो न, क्या मुश्किल है, बताओ मुझे? जब मन आए काम करो, जब मन आए आराम कर लो. इतना अच्छा तो है, फिर भी नाकमुंह चढ़ाए रहती हो. सच में, तुम औरतों को तो समझना ही मुश्किल है.’’

अब रचना का पारा और चढ़ गया. अभी वह कुछ बोलती ही कि उस की दोस्त मानसी का फोन आ गया.

‘‘हैलो मानसी, बता, कैसा चल रहा है तेरा? बच्चेवच्चे सब ठीक तो हैं न?’’ लेकिन मानसी बताने लगी कि बहुत मुश्किल हो रही है, घर, बच्चे और औफिस का काम संभालना. क्या करें, कुछ समझ नहीं आ रहा है.

‘‘ज्यादा चिंता मत कर. चलने दे जैसा चल रहा है. क्या कर सकती है तू. लेकिन बच्चे और अपनी सेहत का ध्यान रख, वह जरूरी है अभी.’’

थोड़ी देर और मानसी से बात कर रचना ने फोन रख दिया. फिर किचन का सारा काम समेट कर अपनी टेबल पर जा कर बैठ गई.

उस दिन जब उस ने मानसी से अपनी समस्या बताई थी कि घर में वह औफिस की तरह काम नहीं कर पा रही है और ऊपर से बौस का प्रैशर बना रहता है हरदम, तब मानसी ने ही उसे सुझाया था कि बैडरूम या डाइनिंग टेबल पर बैठ कर काम करने के बजाय वह अपने घर के किसी कोने को औफिस जैसा बना ले और वहीं बैठ कर काम करे तो सही रहेगा. जब ब्रेक लेने का मन हो तो अपनी सोसाइटी का एक चक्कर लगा आए या पार्क में कुछ देर बैठ जाए. इस से  अच्छा लगेगा क्योंकि वह भी ऐसा ही करती है.

‘‘अरे वाह, क्या आइडिया दिया तू ने मानसी. मैं ऐसा ही करूंगी,’’ कहते हुए चहक पड़ी थी रचना. लेकिन मानसी की स्थिति जान कर दुख भी हुआ.

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मानसी बताने लगी कि उस के 2 बच्चे हैं, ऊपर से बूढ़े सासससुर, घर के काम के साथसाथ उन का भी बराबर ध्यान रखना होता है और औफिस का काम भी करना पड़ता है. पति हैं कि जहां हैं वहीं फंस चुके हैं, आ नहीं सकते. तो उस पर ही घरबाहर सारे कामों की जिम्मेदारी पड़ गई है. उस पर भी कोई तय शिफ्ट नहीं है कि उसे कितने घंटे काम करना पड़ता है. बताने लगी कि कल रात वह 3 बजे सोई, क्योंकि 2 बजे रात तक तो व्हाट्सऐप पर ग्रुप डिस्कशन ही चलता रहा कि कैसे अगर वर्क फ्रौम होम लंबा चला तो, सब को इस की ऐसी प्रैक्टिस करवाई जाए कि सब इस में ढल जाएं.

उस की बातें सुन कर रचना का तो दिमाग ही घूम गया. जानती है वह कि उस के बच्चे कितने शैतान हैं और सासससुर ओल्ड. कैसे बेचारी सब का ध्यान रख पाती होगी? सोच कर ही उसे मानसी पर दया आ गई. लेकिन, इस लौकडाउन में वह उस की कोई मदद भी तो नहीं कर सकती थी. सो, फोन पर ही उसे ढाढ़स बंधाती रहती थी.

‘सच में, कैसी स्थिति हो गई है देश की? न तो हम किसी से मिल सकते हैं,  न किसी को अपने घर बुला सकते हैं और न ही किसी के घर जा सकते हैं. आज इंसान, इंसान से भागने लगा है. लोग एकदूसरे को शंका की दृष्टि से देखने लगे हैं. क्या हो रहा है यह और कब तक चलेगा ऐसा? सरकार कहती रही कि अच्छे दिन आएंगे. क्या ये हैं अच्छे दिन? किसी ने सोचा था कभी कि ऐसे दिन भी आएंगे?’ अपने मन में यह सब सोच कर रचना दुखी हो गई.

रचना ने अपने घर के ही एक कोने में जहां से हवा अच्छी आती थी, टेबल लगा कर औफिस जैसा बना लिया और काम करने लगी. चारा भी क्या था? वैसे, अच्छा आइडिया दिया था मानसी ने उसे. थैंक यू बोला उस ने उसे फोन कर के.

काम करतेकरते जब रचना का मन उकता जाता, तो ब्रेक लेने के लिए थोड़ाबहुत इधरउधर चक्कर लगा आती. नहीं तो अपने घर की छत पर ही कुछ देर टहल लेती. और फिर अपने लिए चाय  बना कर काम करने बैठ जाती. अब रचना का माइंड सैट होने लगा था. लेकिन बौस का दबाव तो था ही, जिस से मन चिड़चिड़ा जाता कभीकभी कि एक तो इस लौकडाउन में भी काम करो और ऊपर से इन्हें कुछ समझ नहीं आता. सबकुछ परफैक्ट और सही समय पर ही चाहिए. यह क्या बात हुई? बारबार फोन कर के चैक करते हैं कि कर्मचारी अपने काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं. कहीं वे अपने घर पर आराम तो नहीं फरमा रहे हैं.

उस दिन बौस से बातें करते हुए रचना को एहसास हुआ कि कोई उसे देख रहा है. ऐसा होता है न? कई बार तो भरी बस या ट्रेन के कोच में भी ऐसी फीलिंग आती है कि कोई हम पर नजरें गड़ाए हुए है.  अकसर हमारा यह एहसास सच साबित होता है. अब ऐसा क्यों होता है, यह तो नहीं पता लेकिन सामने वाली खिड़की पर बैठा वह शख्स लगातार रचना को देखे ही जा रहा था.

जैसे ही रचना की नजर उस पर पड़ी, वह इधरउधर देखने लगा. लेकिन, फिर वही. रचना उसे नहीं जानती. आज पहली बार देख रही है. शायद, अभी वह नया यहां रहने आया होगा, नहीं तो वह उसे जरूर जानती होती. लेकिन वह उसे क्यों देखे जा रहा है? क्या वह इतनी सुंदर है और यंग है? वह बंदा भी कुछ कम स्मार्ट नहीं था. तभी तो रचना की नजर उस पर से हट ही नहीं रही थी. लेकिन, फिर यह सोच कर नजरें फेर लीं उस ने कि वह क्या सोचेगा.

एक दिन फिर दोनों की नजरें आपस में टकरा गईं, तो आगे बढ़ कर रचना ने ही उसे ‘हाय’ कहा. इस से उस बंदे को बात आगे बढ़ाने का ग्रीन सिग्नल मिल गया. अब रोज दोनों की खिड़की से ही ‘हायहैलो’ के साथसाथ थोड़ीबहुत बातें होने लगीं. दोनों कभी देश में बढ़ रहे कोरोना वायरस के बारे में बातें करते, कभी लौकडाउन को ले कर उन की बातें होतीं, तो कभी अपने वर्क फ्रौम होम को ले कर बातें करते. और इस तरह से उन के बीच बातों का सिलसिला चल पड़ता, तो रुकता ही नहीं.

‘‘वैसे, सच कहूं तो औफिस जैसी फीलिंग नहीं आती घर से काम करने में, है न?’’ रचना के पूछने पर वह बंदा कहने लगा, ‘‘हां, सही बात है, लेकिन किया भी क्या जा सकता है?’’

‘‘सही बोल रहे हैं आप, किया भी क्या जा सकता है. लेकिन पता नहीं, यह लौकडाउन कब खत्म होगा. कहीं लंबा चला तो क्या होगा?’’ रचना की बातों पर हंसते हुए वह कहने लगा कि भविष्य में क्या होगा, कौन जानता है? ‘‘वैसे जो हो रहा है सही ही है, जैसे हमारा मिलना’’ जब उस ने मुसकराते हुए यह कहा, तो रचना शरमा कर अपने बाल कान के पीछे करने लगी.

रचना के पूछने पर उस ने अपना नाम शिखर बताया और यह भी कि वह यहां एक कंपनी में काम करता है. अपना नाम बताते हुए रचना कहने लगी कि उस का औफिस उसी तरफ है.

काम के साथसाथ अब दोनों में पर्सनल बातें भी होने लगीं.

शिखर ने बताया कि पहले वह मुंबई में रहता था, मगर अभी कुछ महीने पहले ही तबादला हो कर दिल्ली शिफ्ट हुआ है.

ये घर बहुत हसीन है- भाग 5: उस फोन कॉल ने आन्या के मन को क्यों अशांत कर दिया

लेखक- मधु शर्मा कटिहा

‘‘साहब कितने खुश हैं आप के साथ. यहां आ गए तो… दुखी हो जाएंगे. मेम साब आप चलिए न नीचे… मैं नहीं करूंगी आज यहां की सफाई,’’ वान्या का हाथ पकड़ खींचते हुए प्रेमा कातर स्वर में बोली.

‘‘नहीं जाऊंगी मैं यहां से… बताओ मुझे कि यहां आ कर क्यों दुखी हो जाएंगे साहब.’’

‘‘सुरभि मेम साब ने मुझे आप को बताने से मना किया था, लेकिन अब आप ही मेरी मालकिन हो. जैसा आप कहोगी मैं करूंगी. ऐसा करते हैं इस छोटे कमरे से निकल कर बाहर वाले बड़े कमरे में चलते हैं.’’

बड़े कमरे में आ कर वान्या पलंग पर बैठ गई. प्रेमा ने दरवाजे को चिटकनी लगा

कर बंद कर दिया और वान्या के पास आ कर धीमी आवाज में कहना शुरू किया, ‘‘मेम साब, यह कमरा आर्यन साहब के बड़े भाई का है. उन दोनों की उम्र में 3 साल का फर्क था, लेकिन प्यार वे पिता की तरह करते थे आर्यन साहब को. आप को पता होगा कि साहब के मांपिताजी को गुजरे कई साल हो चुके हैं. बड़े भाई ने अपने पिता का धंधा अच्छी तरह संभाल लिया था.

‘‘एक बार जब बड़े साहब काम के सिलसिले में देश से बाहर गए तो वहां अंग्रेज लड़की से प्यार कर बैठे. शादी भी कर ली थी दोनों ने. अंग्रेज मैडम डाक्टरी की पढ़ाई कर रहीं थी, इसलिए साहब के साथ यहां नहीं आई थीं. साहब वहां आतेजाते रहते थे. एक साल बाद उन का बेटा भी हो गया. बड़े साहब बच्चे को यहां ले आए थे. यह बात आज से कोई ढाईतीन साल पहले की है. उस टाइम आर्यन साहब पढ़ाई कर रहे थे और मुंबई में रह रहे थे. जब पिछले साल अंग्रेज मैडम की पढ़ाई पूरी हुई तो बड़े साहब उन को हमेशा के लिए लाने विदेश गए थे. वहां… बहुत बुरा हुआ मेम साब.’’ प्रेमा अपने सूट के दुपट्टे से आंसू पोंछ रही थी. वान्या  की प्रश्नभरी आंखें प्रेमा की ओर देख रही थी.

‘‘मेम साब, बर्फ पर मौजमस्ती करते हुए अचानक साहब तेजी से फिसल गए और वे लड़खड़ा कर गिरे तो अंग्रेज मैडम भी गिरी, क्योंकि दोनों एकदूसरे का हाथ पकडे़ थे. लुढ़कतेलुढ़कते दोनों नीचे तक आ गए और जब तक लोग अस्पताल ले जाते, बहुत देर हो चुकी थी. साथसाथ हाथ पकड़े हुए चले गए दोनों इस दुनिया से. उन का बेटा कृष अब सुरभि दीदी के पास रहता है.’’

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वान्या दिल थाम कर सब सुन रही थी. रुंधे गले से प्रेमा का बोलना जारी था. ‘‘मेम साब, इस दुर्घटना के बाद जब सुरभि दीदी यहां आईं थीं तो कृष आर्यन साहब को देख कर लिपट गया और पापा, पापा कह कर बुलाने लगा, क्योंकि बड़े साहब और छोटे साहब की शक्ल बहुत मिलती थी. ये देखो…’’ प्रेमा ने प्यानों पर ढका कपड़ा उठा दिया. प्यानों की सतह पर एक पोस्टर के आकार वाली फोटो चिपकी थी, जिस में आर्यन और बड़ा भाई एकदूसरे के गले में हाथ डाले हंसते हुए दिख रहे थे. दोनों का चेहरा एकदूसरे से इतना मिल रहा था कि किसी को भी जुड़वां होने का भ्रम हो जाए.

‘‘मेम साब, अभी आप कह रही थीं न कि मोबाइल के टाइम में भी ऐसे फोटो? ये बड़े साहब ने पोस्टर बनवाने के लिए रखे हुए थे. बहुत शौक था बड़ेबड़े फोटो से उन्हें घर सजाने का.’’ प्रेमा आज जैसे एकएक बात बता देना चाहती थी वान्या को.

‘‘ओह, अच्छा एक बात बताओ, कृष ने आर्यन से अपनी मम्मी के बारे में कुछ नहीं पूछा?’’ वान्या व्यथित हो कर बोली.

‘‘नहीं, अपनी मां के साथ तो वह तब तक ही रहा जब 2 महीने का था. बताया था न मैं ने कि बड़े साहब ले आए थे उस को यहां. कभीकभी साहब के साथ जाता था तभी मिलता था उन से. वैसे भी वे 6 महीने की ट्रेनिंग पर थीं और कहती थीं कि अभी बच्चा मुझे मम्मी न कहे सब के सामने. कृष कोई दीदीवीदी समझता होगा शायद उन को.’’

वान्या सब सुन कर गहरी सोच में डूब

गई. कुछ देर तक शांत रहने के बाद प्रेमा फिर बोली, ‘‘मेम साब, जब आप का रिश्ता पक्का नहीं हुआ था और साहब आप से मिल कर

आए थे तो आप की फोटो साहब ने मुझे और मेरे पति को दिखाई थी. हमें उन्होंने आप के बारे में बताते हुए कहा था कि इन का चेहरा जितना भोलाभाला लग रहा है, बातों से भी उतनी मासूम हैं. वैसे स्कूल में टीचर हैं, समझदार हैं, मेरे पास रुपएपैसे की तो कोई कमी नहीं है. मुझे जरूरत है तो उस की जो मेरा साथ दे, मेरे अकेलेपन को दूर कर दे, जिस के सामने अपना दर्द बयां कर सकूं. मैं ने इन को तुम्हारी मेम साब बनाने का फैसला कर लिया है…’’

वान्या प्रेमा के शब्दों में अभी भी खोई हुई थी. प्रेमा ने कहा, ‘‘मेम साब अब नीचे चलते हैं’’ कहते ही वह गुमसुम सी सीढि़यां उतरने लगी.

प्रेमा के वापस चले जाने के बाद वह आर्यन के साथ लंच कर आराम करने बैडरूम

में आ गई. वान्या को प्यार से अपनी ओर खींचते हुए आर्यन बोला, ‘‘रात में बहुत नींद आ रही थी, अब नहीं सोने दूंगा.’’

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‘‘लेकिन एक शर्त है मेरी,’’ वान्या आर्यन के सीने पर सिर रख कर बोली.

‘‘कहो न, कोई भी शर्त मानूंगा तुम्हारी,’’ वान्या के चेहरे से अपना चेहरा सटा आर्यन बोल सका.

‘‘कोरोना के हालात ठीक होने के बाद हम दीदी के पास चलेंगे और अपने बेटे कृष को हमेशा के लिए अपने साथ ले आएंगे.’’

आर्यन की सांस जैसे वहीं थम गई. ‘‘प्रेमा ने बताया न,’’ भर्राए गले से वह इतना ही बोल सका.

वान्या मुसकरा कर ‘हां’ में सिर हिला दिया.

आर्यन ने वान्या को अपने सीने से लगाए खामोश हो कर भी बहुत कुछ कह रहा था. वान्या को प्रेम में डूबे युगल की मूर्ति आज बेहद खूबसूरत लग रही थी. मन ?ही मन वह कह उठी, ‘बेकार नहीं, मनहूस नहीं… ये घर  बहुत हसीन है.

भोजपुरी स्‍टार पवन सिंह का फिल्‍म ‘एक दूजे के लिए 2’ का धमाकेदार ट्रेलर हुआ वायरल

इन दिनों यूट्यूब पर अपने गानों को लेकर वर्ल्‍ड वाइड धमाल मचाने वाले पावर स्‍टार पवन सिंह के लंदन वाले फिल्‍म का ट्रेलर आउट हो गया है, जो अब वायरल होने लगा है. इस फिल्‍म का नाम ‘एक दूजे के लिए 2’ है, जिसकी शूटिंग लंदन में की गई है.

इस फिल्‍म में पवन सिंह के साथ दो खूबसूरत अदाकारा सहर अफसा और मधु शर्मा नजर आ रही हैं. यशी फिल्‍म्स की यह एक और शानदार प्रस्‍तुति है. इसके निर्माता अभय सिन्‍हा, प्रशांत जम्‍मूवाला और समीर अफताब हैं. फिल्‍म का ट्रेलर इंटर 10 रंगीला के यूट्यूब चैनल से रिलीज हुआ है.

फिल्‍म के ट्रेलर के अनुसार, ‘एक दूजे के लिए 2’ की कहानी सामाजिक संस्‍कारों और आधुनिकता के बीच सामंजस्‍य बिठाने वाली है. इसमें पवन सिंह को प्‍यार तो सहर अफसा से होता है, लेकिन परिवार के तथाकथित शान की वजह से शादी मधु शर्मा से होती है.

ऐसे में एक साथ कई जिंदगियां बर्बाद होती है. सपने टूटते हैं. निर्देशक पराग पाटिल ने इस कहानी को इंटरनेशनली फिल्‍माया है. आखिर ऐसी घटनाओं से सामाजिक जड़ता को तोड़ने के लिए सीख लेनी चाहिए, फिल्‍म के जरिये पराग पाटिल कुछ यही कहना चाहते हैं. वैसे फिल्‍म की कहानी जहां भोजपुरी टच में ही, वहीं लोकेशन इसे इंटरनेशनल स्‍तर का बनाती है. फिल्‍म के गाने भी बेहतरीन हैं.

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आपको बता दें कि फिल्‍म ‘एक दूजे के लिए 2’ का को-प्रोड्यूसर जबावा इंटरटेंमेंट – मडाज मूवीज है. यूके टीम प्रोड्यूसर विपुल शर्मा हैं. फिल्‍म में पवन सिंह, सहर अफशा व मधु शर्मा के साथ मशहूर अभिनेत्री माया यादव और दीपक सिन्‍हा भी मुख्‍य भूमिका में हैं. डीओपी मुकेश शर्मा, म्‍यूजिक छोटे बाबा, सिंगर पवन सिंह, तृप्ति शाक्‍या व प्रियंका सिंह और लिरिक्‍स प्रकाश बारूद व रितेश सिंह का है. पीआरओ रंजन सिन्हा (RANJAN SINHA) हैं. कोरियोग्राफर संजय कोर्वे और संजीव कुमार शर्मा हैं. स्‍टोरी – डायलॉग्‍स राकेश त्रिपाठी हैं. स्‍क्रीनप्‍ले पराग पाटिल और राकेश त्रिपाठी का है.

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Bigg Boss Ott : Shamita Shetty ने अक्षरा सिंंह को बताया गंवार, एक्ट्रेस ने लगाई लताड़

भोजपुरी स्टार अक्षरा सिंह बिग बॉस ओटीटी’  से लास्ट संडे को एलिमिनेट हो गई. मिलिंद गाबा और अक्षरा एक साथ घर से बेघर हुए. घर से बाहर आने के बाद भोजपुरी एक्ट्रेस बिग बॉस कंटेस्टेंट के बारे में खुलकर बात कर रही हैं. अब उन्होंने शमिता शेट्टी को लेकर कुछ बातें बताई हैं. आइए बताते हैं क्या कहा एक्ट्रेस ने.

एक इंटरव्यू के अनुसार अक्षरा ने कहा है कि घर में पहले हफ्ते में शमिता जी ने मुझसे बात ही नहीं की. जब भी बात हुई एक ही बात बोलती थी ये तो गंवार  है. एक्ट्रेस ने ये भी कहा, अगर मैंने हिंदी में बात कर ली तो  मैं गंवार हो गई. शमिता ने मुझे हमेशा दबा रखा.

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अक्षरा सिंह ने आगे कहा कि शमिता मेरे ऊपर बहुत भड़कती थी. मैंने शमिता जी को कुछ दिन तक सहन किया लेकिन जब हद से ज्यादा हो गया तब मैं उन्हें वापस जवाब देने लगी.

 

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बिग बॉस ओटीटी के घर में अक्षरा सिंह और शमिता शेट्टी के बीच कई झगड़े हो चुके हैं. अक्षरा ने शमिता की ऐज-शमिंग की थी. उन्होंने कहा था कि वह उनकी मां बनने के लिए काफी बूढ़ी है.

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अनुपमा का दीवाना हुआ अनुज कपाड़िया, देखें Viral Video

स्टार प्लस का सुपरहिट सीरियल अनुपमा (Anupamaa) की कहानी एक दिलचस्प मोड़ ले रही है. शो में अनुज कपाड़िया (Gaurav Khanna) की एंट्री से कहानी में लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. फैंस अनुज-अनुपमा की केमेस्ट्री को काफी पसंद कर रहे हैं. अनुज अनुपमा को ढेर सारी खुशियां देना चाहता है. ऐसे में शो से जुड़ा एक सीन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिससे यूजर्स अनुज कपाड़िया को टीवी दुनिया का गालिब कह रहे हैं.

दरअसल शो से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें जिसमें अनुज कपाड़िया अनुपमा की तारीफ करता नजर आ रहा है. अनुज इस वीडियो में कह रहा है कि पुरुषों को क्यों लगता है कि महिलाओं को जिंदगी में कुछ करने के लिए, आगे बढ़ने के लिए पुरुषों की जरूरत पड़ेगी. वह आगे कहता है कि किसी औरत को आगे बढ़न के लिए मर्द का सहारा नहीं चाहिए होता है.

 

अनुज आगे कहता है कि औरत को आगे बढ़ने के लिए सिर्फ एक मौका चाहिए होता है और अनुपमा ने यहां पहुंचने के लिए आज तक किसी मर्द का सहारा नहीं लिया है. आगे भी उसे किसी की मदद की कोई जरूरत नहीं है.

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अनुज कपाड़िया का अंदाज फैंस को खूब पसंद आ रहा है. तो वहीं सीरियल में अनुज कपाड़िया और अनुपमा दोस्‍ती एक दूसरे के साथ करीब आ रहे हैं तो उधर वनराज को अनुज-अनुपमा की दोस्ती रास नहीं आ रहा है. शो के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि अनुज को पता चल जाएगा कि वनराज अनुपमा के साथ कैसा व्‍यवहार करता है. इस वजह से वह वनराज को सबक सिखाने का फैसला करेगा.

 

तो दूसरी तरफ काव्या अनुज कपाड़िया को इंप्रेस करने की पूरी कोशिश करेगी. खबरों के अनुसार वह काफी बोल्‍ड अवतार में नजर आने वाली है. वनराज काव्या और अनुज कपाड़िया को साथ देख लेगा. इसके बाद वह बौखला जाएगा और काव्‍या से दूरी बनाने की कोशिश करेगा.

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नशे की हालत में आदित्य ने की ये हरकत, क्या टूटा जाएगा इमली से रिश्ता?

स्टार प्लस का सीरियल इमली में इन दिनों नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. अब तक आपने देखा कि मालिनी आदित्य-इमली को दूर करने के लिए मास्टर गेम खेल रही है. उसने त्रिपाठी परिवार के सभी सदस्यों को नशीला जूस दिया ताकि वह अपने प्लान में कामयाब हो सके. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला हैं. आइए बताते हैं शो के नए ट्विस्ट एंड टर्न के बारे में.

शो में दिखाया जा रहा है कि मालिनी ने आदित्‍य को भी नशीला जूस पिला दिया है. और वह उसके कमरे में चली गई है. तो वही आदित्य नशे की हालत में अपने कमरे में जाता है. इमली आदित्य को कमरे में जाते देख सोचती है कि अब वह सुकून से सो जाएगा. इमली कमरे के बाहर ही सो जाती है.

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तो दूसरी तरफ कमरे में इमली और आदित्‍य साथ होते हैं. अगले दिन मालिनी पूरे परिवार को बता देती है कि रात में उसके साथ क्‍या हुआ. अब त्रिपाठी परिवार मालिनी को उसका हक दिलाने की बात करेगा. मालिनी की मां अनु भी ये बात सुनकर त्रिपाठी हाउस आ जाती है और आदित्‍य को उसकी बेटी की जिंदगी बर्बाद करने के लिए खूब सुनाती है.

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अनु इमली के सामने गिड़गिड़ाती है कि मेरी बेटी की जिंदगी बचा लो. आदित्‍य सफाई देता है कि उसे नहीं पता कि ये सब कैसे हुआ.  लेकिन कोई उसकी बात सुनने को तैयार नहीं होता है.

 

आदित्‍य की इस हरकत से इमली पूरी तरह टूट जाती है. इमली भी कहती है कि आदित्‍य ने उसे धोखा दिया है जो भूला नहीं जा सकता. शो में ये देखना दिलचस्प होगा कि इमली और आदित्य के रिश्‍ते का क्‍या होगा?

अंधविश्वास: अजब अजूबे रंग !

अंधविश्वास चाहे जैसा भी हो हमारे विवेक शील मनुष्य होने पर एक प्रश्न चिन्ह लगाता है.यह समय और समाज पर प्रश्न चिन्ह है. इसके बावजूद अंधविश्वास की अजब गजब हरकतें देखने को मिलती है जो यह बताती है कि आज 21 वी शताब्दी में भी लोगों के जेहन में किस तरह अशिक्षा और पिछड़ापन समाया हुआ है. जिसे दूर करने की आवश्यकता है.

अंधविश्वास कुछ ऐसे होते हैं कि जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते अब आप ही सोचिए
अगर किसी शख्स की करंट (बिजली) से मौत हो जाये और अगर उसे कीचड़ से लपेट दिया तो उसका जीवन लौट आएगा? डूबने से किसी की मौत के बाद उसे उल्टा लटका दिया जाए और यह माना जाए कि यह जीवित हो जाएगा तो क्या यह मानसिक दिवालियापन और अंधविश्वास की पराकाष्ठा नहीं है.

लोगों में आज भी अंधविश्वास कुछ ऐसा कूट कूट कर भरा हुआ है कि यह देखकर आश्चर्य होता है कि दुनिया जब चांद सितारों तक पहुंच गई है जब रोबोट सब कुछ नियंत्रित करने के लिए बन कर तैयार हैं, आज भी हमारे देश में अंधविश्वास की घटनाएं घटित हो रही है जो यह बता रही हैं कि पिछड़ापन और कमजोर सोच किस तरह हमारे देश के लोगों को घुन की तरह खा रही है.

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 करंट से मौत के बाद, कीचड़

मध्यप्रदेश के धार जिले  में महू से लगे सागौर के मोतीनगर में दो व्यक्ति करंट की चपेट में आ गए. एक की मौत हो गई गई, जबकि दूसरा झुलस गया. घायल शख्स को लोग अस्पताल ले गए जबकि मृतक को कीचड़ में लपेट दिया गया. परिवार के सदस्यों का मनना था कि शायद ऐसा करने से फिर से सांसें चलने लगेंगी. इसी दौरान बात पुलिस तक पहुंची और वह आ पहुंची. पुलिस ने मृतक के साथ परिजनों का कु कृत्य देखा तो परिजनों को समझाया, कहा- यह अंधविश्वास है। इससे सांसें नहीं लौटेगी.

इस पर परिजनों ने पुलिस की बात मानने से इनकार कर दिया और गिड़गिड़ा कर के कहने लगे कि साहब आप देख लेना यह जिंदा हो जाएगा.

पुलिस के लाख समझाने के बाद भी परिजन अपनी बात पर अड़े रहे मामला मानवीय संवेदना का था इसलिए पुलिस को भी इंतजार करना पड़ा और समय सीमा समाप्त होने के बाद भी मृतक जिंदा नहीं हुआ तो परिजनों के चेहरे लटक गए.

इसके  बाद पुलिस ने मृतक को पोस्टमार्टम के लिए हॉस्पिटल भेज दिया.

पुलिस ने हमारे संवाददाता को बताया मोतीनगर में भागीरथ शंकरलाल का मकान बन रहा था उसके मकान के ऊपर से 11 केवी लाइन गुजर रही है.यहां जाकुखेड़ी निवासी मजदूर सलमान (30) पुत्र जब्बार पटेल व इरफान (30) उर्फ गट्टा पुत्र साबिर पटेल टेप से बिजली की लाइन की दूरी की नाप रहे थे. इसी दरमियान  करंट की चपेट में आकर हादसे का शिकार हो गए. करंट से सलमान की मौत हो गई, वहीं इरफान गंभीर घायल हो गया .

और शुरू हो गया अंधविश्वास

करंट से मौत के बाद मृतक के परिजन भी आ पहुंचे, किसी ने उन्हें सलाह दी कि सावन भादो का महीना है ऐसे में अगर किसी करंट या बिजली से मृत व्यक्ति को कीचड़ में कुछ समय के लिए दबा दिया जाए तो वह जिंदा हो जाता है. इस बात को मृतक के परिजनों ने मान लिया और तुरंत मृतक को कीचड़ में ले गए. आनन-फानन में मृतक सलमान को कीचड़ में रखकर  उसके ऊपर ढेर सारी कीचड़ डाल दी गई और इंतजार किया जाने लगा कि अब चमत्कार होगा सलमान फिर से जिंदा हो जाएगा.

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बीच सड़क पर अंधविश्वास का नाटक देख कर कुछ लोगों ने प्रशासन के पास इसकी शिकायत की थोड़ी ही देर बाद पुलिस पहुंची और सारा नजारा देखने के बाद भी परिजनों को समझाने का प्रयास किया गया मगर वे नहीं माने और अपनी बात पर टिके हुए थे. मामला चूंकि अनोखा और अजूबे से भरा हुआ था ऐसे में स्थानीय मीडिया भी घटनास्थल पर पहुंची और सब कुछ रिकॉर्ड में आता चला गया.

यहां उल्लेखनीय है कि आसपास के लोगों ने घायल इरफान को  इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन सलमान को परिजन ने उसे जीवित करने के  नाम पर  कीचड़ लपेट अंधविश्वास का परिचय देते रहे. संवाददाता के अनुसार थाना प्रभारी राजेंद्रसिंह भदौरिया जब घटना स्थल पहुंचे‌ और भारी मशक्कत के बीच शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा. उन्होंने बताया मृतक सलमान के दो बच्चे हैं.

दूसरी तरफ बिजली कंपनी के  जूनियर इंजीनियर इम्तियाज खान  के मुताबिक कुछ लोग 11 केवी लाइन के नीचे मकान बना रहे हैं, जो अपने आप में अपराधिक कृत्य है लोगों को यह समझना चाहिए कि हम अपनी जान से न खेलें और अवैध निर्माण ना करें.

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