रिचा चड्ढा और अली फजल बनाएंगे पॉलिटिकल थ्रिलर वेब सीरीज

अभिनेत्री रिचा चड्ढा और उनके निजी जीवन के प्रेमी व अभिनेता अली फजल अक्सर सामाजिक मुद्दो पर मुखरता के साथ अपनी बात कहते रहते हैं. इतना ही नही रिचा चड्ढा और अली फजल ने मिलकर अपना खुद को प्रोडक्शन हाउस ‘‘पुशिंग बटनंस स्टूडियो’’ की स्थापना कर सामाजिक मुद्दों पर विचारोत्तेजक कहानियां परोसने का निर्णय लिया है. इसी के तहत रिचा चड्ढा व अली फजल पहली फिल्म कामुकता की वर्जनाओं को चुनौती देने वाली फिल्म बना रही हैं, जिसका नाम ‘‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स’’.

इस फिल्म का निर्देशन शुचि तलाती करने वाली हैं. फिल्म की कहानी उत्तर भारत के पहाड़ी इलाके में स्थित एक आवासीय विद्यालय की 16 वर्षीय छात्रा के इर्द गिर्द घूमती है. इस फिल्म की शूटिंग शुरू करने की सारी तैयारियं पूरी हो गयी हैं. तो वहीं अब रिचा और अली फजल ने अपने प्रोडक्शन हाउस के तहत ही राजनीतिक रोमांचक वेब सीरीज बनाने की तैयारी शुरू कर दी है.

सूत्रों की माने तो यह बहुत लंबी और कई सीजन तक चलने वाली राजनीतिक वेब सीरीज होगी. इस वेब सीरीज में लालच, महत्वाकांक्षा और असीमित शक्ति की कहानी है. सूत्रो की माने तो इस वेब सीरीज से अभिनेत्री मनिषा कोईराला लंबे समय बाद वापसी करेंगी, जो कि इसमें मुख्य भूमिका निभाएंगी. इसका लेखन विशाल पॉल और अंगशुमान बिस्वास कर रहे हैं.

कुछ समय पहले प्रदर्शित राजनीतिक फिल्म ‘‘मैडम चीफ मिनिस्टर’’ में दलित मुख्यमंत्री का किरदार निभा चुकी अभिनेत्री रिचा चड्ढा अभी इस संबंध में कुछ भी बताने को तैयार नही है, मगर सूत्रों का दावा है कि इस अनाम वेब सीरीज की कहानी का केंद्र एक दलित महिला है, जो कि पहली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने के बाद बड़ी तेजी से कुशल राजनीतिज्ञ के तौर पर उभरती है. यूं तो इसकी कहानी काल्पनिक है, मगर कुछ वास्तविक घटनाक्रम भी जोड़े जा रहे हैं. कहानी में उसकी राजनेता के तौर पर क्षमता के साथ भावनात्मक उत्थान की दास्तान है.

वैसे तो पिछले कुछ समय में भारतीय राजनीति को लेकर कुछ वेब सीरीज आयी हैं और कुछ अन्य निर्माणाधीन हैं, मगर रिचा चड्ढा के करीबियों का दावा है कि यह वेब सीरीज सभी राजनीतिक फिल्मों व राजनीतिक वेब सीरीज से जुदा किस्म की होगी.

कश्मीर के 100 सालों के इतिहास पर बन रही है वेब सीरीज ‘‘कश्मीर-एनिग्मा ऑफ पैराडाइज‘’

बौलीवुड के फिल्मकार कश्मीर की वादियों में अपनी फिल्म के गाने फिल्माते रहे हैं, मगर अब तक किसी भी फिल्मकार ने कश्मीर, कश्मीर के इतिहास व वहां के लोगों को लेकर कोई फिल्म नहीं बनायी. अब पहली बार पत्रकार से फिल्मकार बने अतुल अग्रवाल ने कश्मीर के 1920 से 2020 यानी कि सौ वर्ष के इतिहास को वेब सीरीज ‘‘कश्मीर: एनिग्मा ऑफ पैराडाइज’’ के माध्यम से पेश करने का बीड़ा उठाया है.

यह एक मेगा वेब सीरीज प्रोजेक्ट है,जिसके पहले सीजन में 45 मिनट के 10 एपिसोड होंगे. 18 सितंबर से कश्मीर में फिल्मायी जा रही इस वेब सीरीज में रजनीश दुग्गल, इनामुलहक, सज्जाद डेलाफ्रूज, इहाना ढिल्लों, आकांक्षा पुरी, डेलबर आर्य, महेश बलराज जैसे कलाकार अभिनय कर रहे हैं.

पहले शिड्यूल में 1947 में कश्मीर पर कबाइली हमले के युद्ध के दृश्यों का फिल्मांकन किया जा रहा है और इन युद्ध के दृश्यों का निर्देशन एक्शन डायरेक्टर सुनील रॉड्रिग्स कर रहे हैं. अतुल अग्रवाल निर्देशित वेब सीरीज ‘‘कश्मीरः एनिग्मा आफ पैराडाइज’’ का निर्माण ‘वन इंडिया मूवी एंटरटेनमेंट’ के बैनर तले राकेश पटेल, राकेश लाहोटी, कौशल पटेल, संजय दत्ता और हिमांशु भाई शाह कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश निवासी अतुल अग्रवाल ने एम.फिल. की डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकार के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत की थी. आजतक, काल चक्र समाचार पत्रिका, जनसत्ता और एनबीटी जैसे विभिन्न मीडिया कंपनी में काम करने के बाद उन्होंने प्रोडक्शन और निर्देशन में जाने का फैसला किया और जी एंटरटेनमेंट नेटवर्क पर टेलीविजन श्रृंखला ‘भारत एक दर्शन‘ का निर्देशन किया. उन्होंने टेलीविजन विज्ञापनों के साथ-साथ कई दक्षिण फिल्मों और बौलीवुड फिल्मों का निर्देशन भी किया है.

इस वेब सीरीज के संदर्भ में अतुल अग्रवाल कहते हैं- ‘‘हमने 18 सितंबर 200 क्रू मेंबर्स के साथ लगातार 120 दिन शूटिंग करने की योजना बनाकर काम शुरू किया है. मैं इस वेब सीरीज को लेकर अति उत्साहित हूं. कश्मीर भारत के स्वर्ग के रूप में जाना जाता है और अतीत में कई फिल्में कश्मीर की पृष्ठभूमि के रूप में बनाई गई हैं. हमारी वेब श्रृंखला सुंदर राज्य और उसमें रहने वाले लोगों के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानियों पर केंद्रित होगी.‘‘

अपने हिस्से की जिंदगी- भाग 3: क्यों कनु मोबाइल फोन से चिढ़ती थी?

Writer- Er. Asha Sharma

कनु अपने साधारण मोबाइल में नैट यूज नहीं करती है, इसीलिए न तो व्हाट्सऐप पर वह दिखाई देती है और न ही किसी और सोशल साइट पर उस का कोई अकाउंट है. उस की कोई पर्सनल मेल आईडी भी नहीं है. हां एक औफिसियल मेल आईडी जरूरी है जिस की जानकारी सिर्फ उस के स्टाफ मैंबर्स को ही है और उसे वह अपने लैपटौप पर ही इस्तेमाल करती है. बहुत मना करने पर भी निमेश उस पर अकसर पर्सनल मैसेज डाल देता है, मगर पढ़ने के बाद भी कनु उसे कोई जवाब नहीं देती.

अगले दिन जैसे ही कनु कौल सैंटर पहुंची, निमेश तुरंत उस के पास आया और बोला, ‘‘कनु तुम से कोई जरूरी बात करनी है.’’

‘‘फ्री हो कर करती हूं,’’ कह कनु ने उसे टाल दिया. पूरा दिन निमेश उस के फ्री होने का इंतजार करता रहा, मगर कनु उसे नजरअंदाज करती रही और शाम को चुपचाप वहां से निकल गई. अभी उसे घर पहुंचे 1 घंटा ही हुआ था कि निमेश भी पीछेपीछे आ गया. क्या करती कनु. घर आए मेहमान को अंदर तो बुलाना ही था. मगर उस एक कमरे के घर में उसे बैठाने की जगह भी नहीं थी.

‘चलो अच्छा ही हुआ… आज हकीकत अपनी आंखों से देख लेगा तो इस के इश्क का बुखार उतर जाएगा…’ सोचती हुई कनु उसे भीतर ले गई. कमरे में 3 चारपाइयां लगी थीं. एक पर सोनू और एक पर दादी सो रहे थे.

तीसरी शायद कनु की थी. निमेश खाली चारपाई पर चुपचाप बैठ गया. कनु चाय बना कर ले आई. दादी को सहारा दे कर तकिए के सहारे बैठा कर उस ने एक कप दादी को थमाया और एक निमेश की तरफ बढ़ा दिया. निमेश चुपचाप चाय पीता रहा. सोच कर तो बहुत आया था कि कनु से यह कहूंगा, वह कहूंगा, मगर यहां आ कर तो उस की जबान तालू से ही चिपक गई थी. एक भी शब्द नहीं निकला उस के मुंह से. चाय पी कर निमेश ने ‘चलता हूं’ कह कर उस से बिदा ली.

ये भी पढ़ें- खिलौना: क्यों रीना अपने ही घर में अनजान थी?

1 सप्ताह हो गया कनु को निमेश कहीं नजर नहीं आया. मन ही मन सोचा कि निकल गई न इश्क की हवा… फिर सोचा कि इस में बेचारे निमेश की क्या गलती है… कुदरत ने मेरी जिंदगी में प्यार वाला कौलम ही खाली रखा है. निमेश ठीक ही तो कर रहा है… अब कोई जानबूझ कर जिंदा मक्खी कैसे निगल सकता है… सपने देखने की उम्र में कोई जिम्मेदारियों के लबादे भला क्यों ओढ़ेगा?

शाम को अचानक पापा को घर आया देख कर कनु को बहुत आश्चर्य हुआ. ‘2 साल से सोनू बिस्तर पर है, मगर पापा ने कभी आ कर देखा तक नहीं कि वह किस हाल में है… यहां तक कि उन की अपनी मां के चोटिल होने तक की खबर सुन कर भी उन्होंने उन की कोई खैरखबर नहीं ली… आज जरूर कुछ सीरियस बात है जो पापा को यहां खींच लाई है… क्या बात हो सकती है…’ कनु का दिल तेजी से धड़कने लगा.

‘‘कनु, मुझे माफ कर दे बेटी. मैं सिर्फ अपनी खुशियां ही तलाश करता रहा, तेरी खुशियों के बारे में जरा भी नहीं सोचा… धिक्कार है मुझ जैसे बाप पर… मुझे तो अपनेआप को पिता कहते हुए भी शर्म आ रही है… भला हो निमेश का जिस ने मेरी आंखें खोल दी वरना पता नहीं और कितने गुनाहों का भागी बनता मैं…’’ पापा ने कनु के  हाथ अपने हाथ में लेते हुए भर्राए गले से कहा.

‘‘अच्छा तो ये सब निमेश का कियाधरा है… उसे कोई अधिकार नहीं है इस तरह उस के घरेलू मामले में दखल देने का…’’ पापा के मुंह से निमेश का नाम सुनते ही कनु का पारा चढ़ गया. उस ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा, ‘‘पापा, आप हमारी फिक्र न करें… हम सब ठीक हैं… सोनू और दादी की देखभाल मैं कर सकती हूं… बोझ नहीं हैं वे दोनों मेरे लिए…’’ बरसों से मन के भीतर दबी कड़वाहट धीरेधीरे पिघल कर बाहर आ रही थी.

‘‘मैं अपने किए पर पहले ही बहुत पछता रहा हूं, मुझे और शर्मिंदा मत करो कनु. मां और सोनू तुम्हारी नहीं बल्कि मेरी जिम्मेदारी है…’’ पापा ने ग्लानि से कहा.

तभी कनु ने निमेश को आते हुए देखा तो नाराजगी से अपना मुंह फेर लिया. कनु के पापा ने भी उसे देख लिया था. बोले, ‘‘सोनू और मां को तो मैं अपने साथ ले जाऊंगा, मगर एक और बड़ी जिम्मेदारी है मुझ पर पिता होने की… उस से अगर मुक्ति मिल जाती तो मैं गंगा नहा लेता.’’ कनु ने प्रश्नवाचक नजरों से उन की तरफ देखा.

‘‘कनु, निमेश बहुत ही अच्छा जीवनसाथी होगा… तुम्हें बहुत खुश रखेगा…. तुम्हें राजी करने के लिए इस ने क्याक्या पापड़ नहीं बेले… तुम बस हां कर दो… इसे इस के प्यार का प्रतिदान दे दो,’’ पापा ने निमेश की वकालत करते हुए कनु से मनुहार की.

‘‘अगर आप सोनू और दादी को अपने साथ ले जाएंगे तो क्या आप की पत्नी को एतराज नहीं होगा?’’ कनु ने अपनी कड़वाहट जाहिर की.

‘‘कौन पत्नी… कैसी पत्नी? वह औरत तो 2 साल पहले ही मुझे यह कह कर छोड़ गई थी कि जो अपनी मां और बच्चों का नहीं हुआ वह मेरा कैसे हो सकता है… वैसे सही ही कहा था उस ने… मुझे आईना दिखा दिया था उस ने… मगर मुझ में ही हिम्मत नहीं बची थी तुम्हारा सामना करने की… क्या मुंह ले कर आता तुम्हारे पास… मैं एहसानमंद हूं निमेश का जिस ने मुझे हिम्मत बंधाई और अपनी जिम्मेदारी निभाने का हौसला दिया…’’ कनु के पापा की आंखों से आंसू बह चले.

कनु ने प्यार से निमेश की तरफ देखा तो वह शरारत से मुसकरा रहा था. बोला, ‘‘कनु, मैं बेशक छोटी सी नौकरी करता हूं, ज्यादा पैसा नहीं हैं मेरे पास… मगर मैं तुम से वादा करता हूं कि तुम्हें कोई कमी नहीं रहने दूंगा… तुम्हारे हिस्से की जिंदगी अब खुशियों से भरपूर होगी.’’

ये भी पढ़ें- दो पाटों के बीच: दीपा के साथ ऑफिस में क्या हुआ?

‘‘मैं सोनू और मां के लिए ऐंबुलैंस मंगवाता हूं. तुम तब तक अपना जरूरी सामान पैक कर लो,’’ कनु के पापा ने उसे लाड़ से कहा. फिर निमेश की तरफ मुड़ कर बोले, ‘‘तुम इस रविवार अपने घर वालों को हमारे यहां ले कर आओ… रिश्ते की बात घर के बड़ों के बीच हो तो ही अच्छा लगता है.’’

अपने आंसू पोंछते हुए कनु बोली, ‘‘एक शर्त पर मैं आप सब की बात मान सकती हूं… आप सभी को मुझ से वादा करना होगा कि कोई भी अनावश्यक रूप से मोबाइल का उपयोग नहीं करेगा… इसे जरूरत पर ही इस्तेमाल किया जाएगा, शौक के लिए नहीं…’’

‘‘वादा’’ सब ने एकसाथ चिल्ला कर कहा और फिर घर में हंसी की लहर दौड़ गई.

Manohar Kahaniya: बच्चा चोर गैंग- भाग 3

सौजन्य- मनोहर कहानियां

विनोद कुमार ने सीसीटीवी कैमरे की ओर हाथ उठाते हुए आगे कहा, ‘‘तुम लोगों के कारनामे का मेरे पास पूरा सबूत है. तुम्हारे घर के आसपास की पूरी वीडियो रिकौर्डिंग है. तुम लोगों ने किसकिस से फोन पर क्या बातें कीं, उस की भी हमारे पास रिकौर्डिंग का आ चुकी है.’’

उस के बाद थानाप्रभारी ने तीनों युवकों के चेहरों से गमछा हटाते हुए कहा, ‘‘… और सब से बड़े सबूत के तौर पर हम ने आज ही इन शातिरों को पकड़ा है, जिसे तुम लोगों ने चोरी का बच्चा बेचा था. गलती यह हुई कि उसे लड़की दे दी, जबकि उस की मांग लड़के की थी. इसी बात को ले कर ही तीनों का तुम से झगड़ा हुआ था.’’

इस खुलासे के बाद बच्चा चोरी की वारदातों के ले कर जो बातें सामने आईं, वह काफी चौंकाने वाली निकलीं—

हफ्तों तक राजा और रेखा पतिपत्नी बन बच्चा चोरी की शिकायत के साथ थाने का चक्कर लगाते रहे. यहां तक कि उन्होंने एसएसपी से मिल कर भी अपना बच्चा चोरी होने की जानकारी दी. एसएसपी कलानिधि नैथानी ने दोनों को तसल्ली दी और बच्चा बरामदगी का पूरा यकीन दिलाया. उस के 2 दिन बाद क्राइम मीटिंग में भी एसएसपी नैथानी ने बच्चा चोरी के मामले की चर्चा की. पता चला कि 2 बच्चे इसी तर्ज पर और चोरी हुए हैं, जो बहुत ही गरीब बंजारों के हैं.

ये भी पढ़ें- Crime- हत्या: जर जोरू और जमीन का त्रिकोण

बच्चा चोरी के मामले के खुलासे के लिए एक टीम गठित कर दी गई. इस में एसआई धर्मेंद्र कुमार के साथ सर्विलांस टीम और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को भी जोड़ दिया गया. इन के कोऔर्डिनेशन व समीक्षा के लिए एसपी (सिटी) कुलदीप गुनावत व सीओ (तृतीय) श्रेताभ पांडेय को जिम्मेदारी सौंपी गई.

सभी आरोपी धर दबोचे

पुलिस ने आसपास के सारे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल निकाली. सैकड़ों मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया. मुखबिरों का जाल भी बिछा दिया. इस तरह बच्चा चोरी मामले का काफी डेटा पुलिस टीम के पास एकत्रित हो गया.

25 जुलाई, 2021 की देर रात मुखबिर की सटीक सूचना पर थानाप्रभारी विनोद कुमार महुआखेड़ा में मय फोर्स के वोरना तिराहे पर पहुंच गए. श्रेताभ पांडे भी टीम के साथ थे. सूचना के आधार पर 3 सवारों वाली बाइक को विशेष रूप से रोकरोक कर चैकिंग किया जाने लगा. कुछ देर में ही शिकार हाथ लग गया. 3 सवारों वाली एक बाइक को रोका तो उस के चालक ने भागने का प्रयास किया. लेकिन वह पुलिस टीम से घिर चुका था.

नतीजा तीनों भाग नहीं पाए. पुलिस ने उन्हें दबोच लिया. पुलिस ने पूछताछ की तो बच्चा चोर गिरोह का खुलासा हुआ.

पकड़े गए 3 लोगों में एक का नाम दुर्योधन दूसरे का नाम अनिल तीसरे का नाम शुभम बताया गया. दुर्योधन ठाकुरदास का बेटा है. गंगानगर कालोनी गांधी पार्क अलीगढ़ में रहता है. वह अनारपुर थाना मिरहची एटा का है. अनिल मूलत: मध्य प्रदेश में जिला सागर स्थित बजरिया गडरिया का है. शुभम हसायन हाथरस का निवासी है.

तीनों की दोस्ती जब दिल्ली में हुई थी, तब वे एक फैक्ट्री में काम किया करते थे. दुर्योधन की मुलाकात बबली से हुई. बातोंबातों में बबली ने एक दिन कहा कि उन के एक दूर के रिश्तेदार बहुत अमीर हैं. उन के कोई बच्चा नहीं है, अगर उन्हें कोई बच्चा मिल जाए तो वह मोटी रकम मुझे देंगे. दुर्योधन ने अनिल और शुभम से संपर्क किया और बच्चा चोरी की योजना बनाई. उन्हें यह धंधा काफी लाभकारी लगा. बच्चे के खरीदार एक बच्चे के ही लाखों रुपए देने को तैयार थे. बच्चों की चोरी कर ये अमीर घरानों के लोगों को बेचने लगे. बच्चे गरीब परिवारों के चुराए जाते थे. उन्होंने रेखा और राजा को भी इस काम के लिए तैयार कर लिया था. दोनों बंजारा समुदाय के थे.

अलगअलग क्षेत्र और जिले से 5 बच्चे पुलिस ने बरामद किए. इन बच्चों को बेचने में सहयोग करने और खरीदने वालों की पुलिस ने धरपकड़ शुरू कर दी. इस तरह पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया. इन में महिलाएं भी थीं. महिलाओं में बबली, नेहा, चांदनी और रेखा इस गिरोह में शामिल थीं.

ये भी पढ़ें- Crime: प्राइवेट पार्ट, एक गंभीर सवाल

सभी से पूछताछ करने के बाद गंगानगर कालोनी निवासी बबली के घर से 2 बच्चे , बाबा कालोनी निवासी आकाश के पास से एक बच्चा, खैर के संजय गोयल से एक बच्चा, दिल्ली गेट जाहिद के घर से एक बच्चा बरामद किया गया. एक बच्चे को मुंबई में बेचने की जानकारी मिली. पुलिस ने मुंबई जा कर छानबीन की, लेकिन बताए गए स्थान पर बच्चा बरामद नहीं हो सका.

पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मां जल्दी आना- भाग 2: विनीता अपनी मां को क्यों साथ रखना चाहती थी?

अनंत मांबाबूजी की कमजोर नस थी सो उन के पास और कोई चारा भी तो नहीं था. खैर गाजेबाजे के साथ हम सब यामिनी को हमारे घर की बहू बना कर ले आए थे. सांवली रंगत और बेहद साधारण नैननक्श वाली यामिनी गोरेचिट्टे, लंबे कदकाठी और बेहद सुंदर व्यक्तित्व के स्वामी अनंत के आसपास जरा भी नहीं ठहरती थी पर कहते हैं न कि ‘‘दिल आया गधी पे तो परी क्या चीज है?’’

एक तो बड़ा जैनरेशन गैप दूसरे प्रेम विवाह तीसरे मांबाबूजी की बहू से आवश्यकता

से अधिक अपेक्षा, इन सब के कारण परिवार के समीकरण धीरेधीरे गड़बड़ाने लगे थे. बहू के आते ही जब मांबाबूजी ने ही अपनी जिंदगी से अपनी ही पेटजायी बेटियों को दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंका था तो बेटेबहू के लिए तो वे स्वत: ही महत्वहीन हो गई थी. कुछ ही समय में बहू ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे.

अनंत और उस की पत्नी यामिनी को परिवार के किसी भी सदस्य से कोई मतलब नहीं था. कुछ समय पूर्व ही यामिनी की डिलीवरी होने वाली थी तब मांबाबूजी गए थे अनंत के पास. नवजात पोते के मोह में बड़ी मुश्किल से एक माह तक रहे थे दोनों तभी अनंत ने मुझ से उन्हें वापस भोपाल आने का उपाय पूछा था. मैं ने भी येनकेन प्रकारेण उन्हें दिल्ली से भोपाल वापस आने के लिए राजी कर लिया था.

अभी उन्हें आए कुछ माह ही हुए थे कि अचानक एक दिन बाबूजी को दिल का दौरा पड़ा और वे इस दुनिया से ही कूच कर गए पीछे रह गई मां अकेली. लोकलाज निभाते हुए अनंत मां को अपने साथ ले तो गया परंतु वहां के दमघोंटू वातावरण और यामिनी के कटु व्यवहार के कारण वे वापस भोपाल आ गईं और अब तो पुन: दिल्ली जाने से साफ इंकार कर दिया. सोने पे सुहागा यह कि अनंत और यामिनी ने भी मां को अपने साथ ले जाने में कोई रुचि नहीं दिखाई. मनुष्य का जीवन ही ऐसा होता है कि एक समस्या का अंत होता है तो दूसरी उठ खड़ी होती है.

ये भी पढ़ें- ये चार दीवारें: अभिलाषा और वर्षा क्यों दुखी थी?

अचानक एक दिन मां बाथरूम में गिर गईं और अपना हाथ तोड़ बैठीं. अनंत ने इतनी छोटी सी बात के लिए भोपाल आना उचित नहीं समझा बस फोन पर ही हालचाल पूछ कर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर ली. दोनों बड़ी बहनें तो विदेश में होने के कारण यूं भी सारी जिम्मेदारियों से मुक्त थीं. बची मैं सो अनंत का रुख देख कर मेरे अंदर बेटी का कर्त्तव्य भाव जाग उठा. फ्रैक्चर के बाद जब मां को देखने गई तो उन्हें अकेला एक नौकरानी के भरोसे छोड़ कर आने की मेरी अंतआर्त्मा ने गवाही नहीं दी और मैं मां को अपने साथ मुंबई ले कर आ गई. मैं कुछ और आगे की यादों में विचरण कर पाती तभी मेरे कानों में अमन का स्वर गूंजा.

‘‘कहां हो भाई खानावाना मिलेगा… 9 बजने जा रहे हैं.’’ मैं ने अपने खुले बालों का जूड़ा बनाया और फटाफट किचन में जा पहुंची. देखा तो मां ने रात के डिनर की पूरी तैयारी कर ही दी थी बस केवल परांठे बनाने शेष थे. मैं ने फुर्ती से गैस जलाई और सब को गरमागरम परांठे खिलाए. सारे काम समाप्त कर के मैं अपने बैडरूम में आ गई. अमन तो लेटते ही खर्राटे लेने लगे थे पर मैं तो अभी अपने विगत से ही बाहर नहीं आ पाई थी. आज भी वह दिन मुझे याद है जब मां को देखने गई मैं वापस मां को अपने साथ ले कर लौटी थी. मुझे एअरपोर्ट पर लेने आए अमन ने मां के आने पर उत्साह नहीं दिखाया था बल्कि घर आ कर तल्ख स्वर में बोले,’’ ये सब क्या है विनू मुझ से बिना पूछे इतना बड़ा निर्णय तुम ने कैसे ले लिया.

‘‘कैसे मतलब… अपनी मां को अपने साथ लाने के लिए मुझे तुम से परमीशन लेनी पड़ेगी.’’ मैं ने भी कुछ व्यंग्यात्मक स्वर में उतर दिया था.

‘‘क्यों अब क्यों नहीं ले गया इन का सगा बेटा इन्हें अपने साथ जिस के लिए इन्होंने बेटी तो क्या दामादों तक को सदैव नजरंदाज किया.’’

‘‘अमन आखिर वे मेरी मां हैं… वह नहीं ले गया तभी तो मैं ले कर आई हूं. मां हैं वो मेरी ऐसे ही तो नहीं छोड़ दूंगी.’’ मेरी बात सुन कर अमन चुप तो हो गए पर कहीं न कहीं अपनी बातों से मुझे जता गए कि मां का यहां लाना उन्हें जंचा नहीं. इस के बाद मेरी असली परीक्षा प्रारंभ हो गई थी. अपने 20 साल के वैवाहिक जीवन में मैं ने अमन का जो रूप आज तक नहीं देखा था वह अब मेरे सामने आ रहा था.

घर आ कर सब से बड़ा यक्षप्रश्न था हमारे 2 बैडरूम के घर में मां को ठहराने का. 10 वर्षीय बेटी अवनि के रूम में मां का सामान रखा तो अवनि एकदम बिदक गई. अपने कमरे में साम्राज्ञी की भांति अब तक एकछत्र राज करती आई अवनि नानी के साथ कमरा शेयर करने को तैयार नहीं थी. बड़ी मुश्किल से मैं ने उसे समझाया तब कहीं मानी पर रात को तो अपना तकिया और चादर ले कर उस ने हमारे बैड पर ही अपने पैर पसार लिए कि ‘‘आज तो मैं आप लोगों के साथ सोउंगी भले ही कल से नानी के साथ सो जाउंगी.’’

पर जैसे ही अमन सोने के लिए कमरे में आए तो अवनि को बैडरूम में देख कर चौंक गए.

‘‘लो अब प्राइवेसी भी नहीं रही.’’

‘‘आज के लिए थोड़ा एडजस्ट कर लो कल से तो अवनि नानी के साथ ही सोएगी.’’ मैं ने दबी आवाज में कहा कि कहीं मां न सुन लें.

‘‘एडजस्ट ही तो करना है, और कर भी क्या सकते हैं.’’ अमन ने कुछ इस अंदाज में कहा मानो जो हो रहा है वह उन्हें लेशमात्र भी पसंद नहीं आ रहा पर उन्हें इग्नोर करने के अलावा मेरे पास कोई चारा भी नहीं था. मां को सुबह जल्दी उठने की आदत रही है सो सुबह 5 बजे उठ कर उन्होंने किचन में बर्तन खड़खड़ाने प्रारंभ कर दिए थे. मैं मुंह के ऊपर से चादर तान कर सब कुछ अनसुना करने का प्रयास करने लगी. अभी मेरी फिर से आंख लगी ही थी कि अमन की आवाज मेरे कानों में पड़ी.

ये भी पढ़ें- मशाल: निलेश क्यों संध्या को ब्लैकमेल कर रहा था?

‘‘विनू ये मम्मी की घंटी की आवाज बंद कराओ मैं सो नहीं पा रहा हूं.’’ मैं ने लपक कर मुंह से चादर हटाई तो मां की मंदिर की घंटी की आवाज मेरे कानों में भी शोर मचाने लगी. सुबह के सर्दी भरे दिनों में भी मैं रजाई में से बाहर आई और किसी तरह मां की घंटी की आवाज को शांत किया. जब से मां आईं मेरे लिए हर दिन एक नई चुनौती ले कर आता. 2 दिन बाद रात को जैसे ही मैं सोने की तैयारी कर रही थी कि अवनि ने पिनपिनाते हुए बैडरूम में प्रवेश किया.

‘‘मम्मी मैं नानी के पास तो नहीं सो सकती, वे इतने खर्राटे लेती हैं कि

मैं सो ही नहीं पाती.’’ और वह रजाई तान कर सो गई. अमन का रात का कुछ प्लान था जो पूरी तरह चौपट हो गया था और वे मुझे घूरते हुए करवट ले कर सो गए थे बस मेरी आंखों में नींद नहीं थी. अगले दिन अमन को जल्दी औफिस जाना था पर जैसे ही वे सुबह उठे तो बाथरूम पर मां का कब्जा था उन्हें सुबह जल्दी नहाने का आदत जो थी. बाथरूम बंद देख कर अमन अपना आपा खो बैठे.

‘‘विनू मैं लेट हो जाऊंगा मम्मी से कहो हमारे औफिस जाने के बाद नहाया करें उन्हें कौन सा औफिस जाना है.’’

‘‘अरे औफिस नहीं जाना है तो क्या हुआ बेटा चाय तो पीनी है न और तुम जानते हो कि मैं बिना नहाए चाय भी नहीं पीती.’’ मां ने बाथरूम से बाहर निकल कर सफाई देते हुए कहा. जिंदगीभर अपनी शर्तों पर जीतीं आईं मां के लिए स्वयं को बदलना बहुत मुश्किल था और अमन मेरे साथ कोऔपरेट करने को तैयार नहीं थे. इस सब के बीच मैं खुद को तो भूल ही गई थी. किसी तरह तैयार हो कर लेटलतीफ बैंक पहुंचती और शाम को बैंक से निकलते समय दिमाग में बस घर की समस्याएं ही घूमतीं. इस से मेरा काम भी प्रभावित होने लगा था. मेरी हालत ज्यादा दिनों तक बैंक मैनेजर से छुपी नहीं रह सकी और एक दिन मैनेजर ने मुझे अपने केबिन में बुला ही भेजा.

‘‘बैठो विनीता क्या बात है पिछले कुछ दिनों से देख रही हूं तुम कुछ परेशान सी लग रही हो. यदि कोई ऐसी समस्या है जिस में मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं तो बताओ. अपने काम में सदैव परफैक्शन को इंपोर्टैंस देने वाली विनीता के काम में अब खामियां आ रही हैं इसीलिए मैं ने तुम्हें बुलाया.’’

‘‘नहीं मैम ऐसी कोई बात नहीं है बस कुछ दिनों से तबियत ठीक नहीं चल रही है. सौरी अब मैं आगे से ध्यान रखूंगी.’’ कह कर मैं मैडम के केबिन से बाहर आ गई. क्या कहूं मैडम से कि बेटियां कितनी भी पढ़ लिख लें, आत्मनिर्भर हो जाएं पर अपने मातापिता को अपने साथ रखने या उन की जिम्मेदारी उठाने के लिए पति का मुंह ही देखना पड़ता है.

राज्य में सुरक्षा और सुशासन के वातावरण का सृजन हुआ: मुख्यमंत्री

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां लोक भवन में वर्तमान राज्य सरकार के साढ़े चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में राज्य सरकार को अब तक के कार्यकाल में पूरी सफलता मिली है.

मुख्यमंत्री जी ने प्रधानमंत्री सहित केन्द्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री तथा केन्द्रीय कैबिनेट का धन्यवाद करते हुए कहा कि सुरक्षा और सुशासन की दृष्टि से राज्य सरकार का कार्यकाल अविस्मरणीय है. राज्य में सुरक्षा और सुशासन के वातावरण का सृजन हुआ है. आज प्रदेश में महिलाओं सहित समाज के सभी लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. विगत साढ़े चार वर्षों में राज्य सरकार द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों ने पूरे देश व दुनिया में प्रदेश के प्रति नजरिए को बदला है. विगत साढ़े चार वर्षों में राज्य सरकार प्रदेश की छवि में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल हुई है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए. अपराध और भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी. जिस भी व्यक्ति ने प्रदेश में अपराध किया, वह किसी भी जाति, मत, मजहब, क्षेत्र, राजनीतिक दल अथवा कद का रहा हो, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की गई. माफियाओं द्वारा अवैध ढंग से अर्जित 1800 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पत्तियां जब्त/ध्वस्त की गईं. साढ़े चार वर्षों में प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ. उन्होंने ने कहा कि सभी प्रमुख त्योहार, धार्मिक जुलूस, मेले आदि सकुशल सम्पन्न हुए.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलम्बन के लिए ‘मिशन शक्ति अभियान’ संचालित किया गया है. वर्तमान में ‘मिशन शक्ति’ का तृतीय चरण गतिमान है. महिलाआंे के सशक्तीकरण के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना इत्यादि योजनाएं लागू की गई हैं. ग्राम सचिवालयों में महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए एक कक्ष आरक्षित करते हुए वहां महिला पुलिस बीट अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है, जो उनकी समस्याओं का समाधान कर रही हैं. पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में महिलाएं चुनी गई हैं. इससे उनके सशक्तीकरण को गति मिल रही है. उत्तर प्रदेश पुलिस की भर्ती में 30,000 महिला आरक्षियों की भर्ती की गई है. स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 01 करोड़ महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है. यह दर्शाता है कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार सुशासन के माध्यम से जनता की सेवा कर रही है. राज्य सरकार ने सुशासन के माध्यम से सभी सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ हर जरूरतमन्द तक पहुंचाया है. आज उत्तर प्रदेश में सभी प्रकार की पेंशन, छात्रवृत्तियां, किसानों को अनुदान, उनकी उपज की खरीद का भुगतान सहित सभी सरकारी सहायता राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे पहुंच रही है. अब तक विभिन्न योजनाओं के तहत नौजवानों, गरीबों, महिलाओं व किसानों सहित अन्य लाभार्थियों को डी0बी0टी0 की गई धनराशि लगभग 05 लाख करोड़ रुपए है. वर्तमान सरकार में बिचौलियों और दलालों की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गई है. किसानों से बड़े पैमाने पर उनकी उपज की खरीद एम0एस0पी0 के तहत की जा रही है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना काल के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को नवम्बर, 2021 तक के लिए प्रति माह प्रति यूनिट 05 किलोग्राम अतिरिक्त निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रदेश सरकार द्वारा भी 15 करोड़ पात्र लोगों को 03 माह तक निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया गया.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सरकारी नियुक्तियों और सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती पूरी पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित की है. पूरी ईमानदारी एवं पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए मेरिट के आधार पर सरकारी नौकरियों में 4.5 लाख से अधिक युवाओं का नियोजन कराया गया.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने ट्रांसफर-पोस्टिंग का उद्योग पूरी तरह से समाप्त कर दिया. मेरिट के आधार पर ट्रांसफर किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में स्थिरता का माहौल बना, जिससे कर्मियों का मनोबल बढ़ा. परिणामस्वरूप विकास कार्य प्रभावी ढंग से संचालित हुए, जिसका लाभ जनता को मिल रहा है. प्रधानमंत्री जी के संकल्प ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ को अक्षरशः लागू करते हुए वर्तमान सरकार ने सभी मत, मजहब, जाति, वर्ग और क्षेत्र का समावेशी विकास किया है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बिना भेदभाव सभी को पात्रता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है. प्रत्येक वृद्धजन, दिव्यांगजन तथा निराश्रित महिला को पंेशन का लाभ दिलाया गया. ऐसे जरूरतमन्द जो भारत सरकार की योजनाओं की पात्रता के दायरे में नहीं आ रहे, उन्हें राज्य सरकार द्वारा अपने संसाधनों से योजना संचालित कर लाभान्वित कराया जा रहा है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सुरक्षा, स्वच्छता और सुव्यवस्था के मानक स्थापित करते हुए प्रयागराज कुम्भ-2019 का सफल आयोजन, बेहतर कोरोना प्रबन्धन, बाढ़ के दौरान तत्परतापूर्वक राहत कार्यों का संचालन इत्यािद सरकार एवं नेतृत्व की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं. इसी प्रकार वाराणसी में पीबीडी तथा प्रदेश में पहली इनवेस्टर समिट का आयोजन उत्तर प्रदेश की नई पहचान बनाने में सफल रहा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के चलते आज उत्तर प्रदेश देश की दूसरी अर्थव्यवस्था है.

मुख्यमंत्री जी ने कोरोना महामारी के प्रबन्धन का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना की पहली लहर में तमाम संकटों के बावजूद सभी सुरक्षित थे. उन्होंने कहा कि इस वर्ष वे स्वयं भी कोरोना की चपेट में आ गये थे, लेकिन संक्रमण की रिपोर्ट निगेटिव आते ही फील्ड में काम करने निकल गये. जिलों, कस्बों और गांवों का निरीक्षण किया तथा लोगों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि कोरोना नियंत्रण की व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के साथ समीक्षा की तथा संसाधनों की समुचित व्यवस्था करायी.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आबादी की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश ने दुनिया में कोरोना प्रबन्धन का बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत किया. इसके लिए परिश्रम और टीम वर्क से कार्य किया गया. प्रदेश में कोरोना महामारी से सभी को सुरक्षा प्रदान करने के दृष्टिगत अब तक साढ़े नौ करोड़ लोगों का टीकाकरण किया गया है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसी भी प्रदेश के विकास मंे अवस्थापना सुविधाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में एक्सप्रेस-वेज़ का निर्माण कया जा रहा है, जिनमें पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, बलिया लिंक एक्सप्रेस-वे, बलिया एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे इत्यादि शामिल हैं. इसी प्रकार तहसील मुख्यालयों एवं विकासखण्ड मुख्यालयों को 02 लेन सड़क मार्गों से जोड़ा जा रहा है. जबकि राज्य मुख्यालय से जिला मुख्यालय की सड़कों को फोर-लेन किया जा रहा है. प्रदेश में जगह-जगह पर आवश्यकतानुसार आरओबी, दीर्घ तथा लघु सेतुओं का निर्माण कराया जा रहा है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से नए एयरपोर्टों का विकास किया जा रहा है. वर्तमान में प्रदेश में 10 नए एयरपोर्ट बन रहे हैं. प्रदेश में 05 अन्तर्राष्ट्रीय एयर पोर्ट मौजूद हैं. इसी प्रकार प्रदेश के कई शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाएं संचालित हो रही हैं. कानपुर और मेरठ शहरों में इस वर्ष के अन्त तक मेट्रो रेल सेवा संचालित होने लगेगी. शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में 07 नए विश्वविद्यालय स्थापित किये जा रहे हैं. साथ ही, प्रदेश में 50 नए महाविद्यालय स्थापित किए जाएंगे. इसके अलावा प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज का शिलान्यास किया जा चुका है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में तकनीक का व्यापक प्रयोग किया जा रहा है. सरकार ने सत्ता में आने पर राशन कार्डाें का सत्यापन कराया. फर्जी राशन कार्डाें को निरस्त कराकर वास्तविक पात्र लोगों को राशन कार्ड उपलब्ध कराये गये. 80 हजार राशन दुकानों को पीओएस से जोड़ा गया. आज हर गरीब अपने गांव में अथवा देश के किसी कोने में राशन प्राप्त कर सकता है. तकनीक के प्रयोग से गरीब को राशन मिलने के साथ ही 1200 करोड़ रुपये की सालाना बचत हो रही है. प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र में तकनीक का उपयोग करते हुए किसानों के लिए विभिन्न प्रकार की सहूलियतें विकसित की हैं. एमएसपी के तहत किसानों से उनकी उपज की खरीद में ई-पॉप सिस्टम के उपयोग से भ्रष्टाचार पर रोक लगी है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में चीनी मिलों को बन्द कराया गया, जबकि वर्तमान राज्य सरकार ने बन्द चीनी मिलों को चालू कराया. यहां तक कि कोरोना काल मंे सभी 119 चीने मिलें कार्यरत रहीं. सरकार द्वारा गन्ना किसानों को अब तक 1.43 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि केन्द्रीय सहायतार्थ योजनाओं में वर्ष 2012-17 के मुकाबले वर्ष 2017-21 तक लगभग दोगुनी सहायता प्राप्त हुई. विगत साढ़े चार वर्षों में 02 लाख करोड़ रुपए से अधिक की केन्द्रीय सहायता प्राप्त हो चुकी है. इसका परिणाम यह रहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिला है. वर्तमान में उत्तर प्रदेश केन्द्र सरकार की 44 योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में प्रथम स्थान पर है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पूर्व की सरकारों के मुख्यमंत्रियों में स्वयं के आवास बनाने हेतु होड़ लगती थी, उनमें एक प्रतिस्पर्धा चलती थी. लेकिन सुशासन को समर्पित विगत साढ़े चार वर्षों में हमने अपने आवास नहीं बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों को मिलाकर 42 लाख से अधिक आवास गरीबों के लिए निर्मित करवाए. इसी प्रकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2.61 करोड़ व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया गया है. उज्ज्वला योजना में 1.56 करोड़ निःशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए, वहीं सौभाग्य योजना में 01 करोड़ 38 लाख से अधिक निःशुल्क विद्युत कनेक्शन प्रदान किए गए हैं. आयुष्मान भारत के तहत 06 करोड़ लाभार्थियों को स्वास्थ्य बीमा कवर तथा 03 करोड़ प्रवासी/निवासी श्रमिकों को 02 लाख रुपये सामाजिक सुरक्षा गारण्टी दी गई है. इसके अलावा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के प्रारम्भ से अब तक 02 करोड़ 53 लाख 98 हजार किसानों को 37,521 करोड़ रुपए हस्तान्तरित किया गया है. प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से 08 लाख 80 हजार स्ट्रीट वेण्डर्स लाभान्वित हुए हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि दशकों से लम्बित बाणसागर सिंचाई परियोजना को पूर्ण कराते हुए प्रधानमंत्री जी के कर-कमलों से इसका लोकार्पण सम्पन्न हुआ. पहाड़ी बांध, बण्डई बांध, जमरार बांध, पहुंज बांध, मौदहा बांध, लहचुरा बांध, गुण्टा बांध, रसिन बांध परियोजनाएं एवं जाखलौन पम्प प्रणाली पूर्ण की जा चुकी हैं. तरकुलानी रेगुलेटर परियोजना का लोकार्पण किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि 12 अन्य सिंचाई परियोजनाएं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है. सिंचाई परियोजनाओं पर किए गए कार्यों को प्रदेश में 3.77 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के त्वरित औद्योगिक विकास तथा अपने युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार अनेक कदम उठा रही है. कानून और व्यवस्था की उत्कृष्ट स्थिति तथा सरकार की इन्वेस्टर फ्रैण्डली सेक्टरवार नीतियों के कारण हमारा राज्य निवेश का सबसे आकर्षक गन्तव्य बनकर सामने आया है. चीन से अपना कारोबार समेटने वाली कम्पनी ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए चुना. उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर मृतप्राय हो गया था, परन्तु आज बदले माहौल में वही एम0एस0एम0ई0 सेक्टर एक लाख इक्कीस हजार करोड़ रुपए का प्रति वर्ष निर्यात कर रहा है. आज उत्तर प्रदेश एक्सपोर्ट के एक नये हब के रूप में देश में विकसित हुआ है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों के फलस्वरूप ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में प्रदेश ने देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. यूपी इन्वेस्टर्स समिट में प्राप्त 4.68 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से 03 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मूर्तरूप दिया गया है. इसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर सृजित हुए. प्रदेश सरकार पारम्परिक उद्योगों एवं पारम्परिक कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘एक जनपद, एक उत्पाद योजना’ तथा ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ संचालित कर रही है. यह योजनाएं बड़ी संख्या मंे रोजगार सृजन का माध्यम बन रही हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नौकरी एवं रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के कारण वर्ष 2017 में प्रदेश की बेरोजगारी दर 17.5 से घटकर मार्च, 2021 में

4.1 प्रतिशत रह गई. राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, प्रतिष्ठा और गरिमा को पुनर्स्थापित करने में सफल हुई है. प्रधानमंत्री जी द्वारा 05 अगस्त, 2020 को अयोध्या में भगवान श्रीराम मन्दिर के भव्य निर्माण का भूमि पूजन किया गया.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश की आजादी दीवानों, सभी अमर शहीदों की स्मृति में चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव का आयोजन पूरी भव्यता के साथ प्रत्येक शहीद स्थल पर मनाया जा रहा है. यह आयोजन जनता के मन में समस्त स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान का भाव पैदा कर रहे हैं. इसके साथ ही राज्य सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले सैनिकों के नाम पर सड़कों का नामकरण, विभिन्न प्रकार के स्मारकों का निर्माण व उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी की व्यवस्था पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रही है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अयोध्या में दीपोत्सव, मथुरा में कृष्णोत्सव, वाराणसी में देव दीपावली तथा बरसाना में रंगोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. ब्रज क्षेत्र के विकास के लिए ब्रज तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद की स्थापना की गई है. विन्ध्यधाम तीर्थ विकास परिषद तथा श्री चित्रकूटधाम तीर्थ विकास परिषद के गठन का निर्णय भी सरकार ने लिया है.

इससे पूर्व मुख्यमंत्री जी ने सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित ‘विकास की लहर हर गांव-हर शहर पारदर्शी और जवाबदेह सरकार’ पुस्तिका का विमोचन किया. उन्होंने इस अवसर पर सरकार के साढ़े चार वर्ष के कार्यों पर केन्द्रित सूचना विभाग द्वारा निर्मित एक फिल्म का अवलोकन भी किया.

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रिगण श्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ0 दिनेश शर्मा, विधान परिषद सदस्य श्री स्वतंत्रदेव सिंह, मुख्य सचिव श्री आरके तिवारी, अपर मुख्य सचिव गृह श्री अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव एमएसएमई एवं सूचना श्री नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री एसपी गोयल, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एव सूचना श्री संजय प्रसाद, सचिव मुख्यमंत्री श्री आलोक कुमार, सूचना निदेशक श्री शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

पांच और शहरों में मेट्रो का काम अंतिम चरण में : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के चार शहरों लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मेट्रो रेल का सफल संचालन किया जा रहा है. कानपुर और आगरा में मेट्रो का काम  चल रहा है. इसके साथ ही पांच अन्य प्रमुख शहरों गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और झांसी में मेट्रो के लिए डीपीआर तैयार है या अंतिम चरण में है. इन शहरों में भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध होगी.

सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर से कानपुर और आगरा मेट्रो की प्रथम प्रोटोटाइप ट्रेन का वर्चुअल अनावरण कर रहे थे. इस अवसर पर उन्होंने उन्होंने कहा कि आज हमारे लिए उल्लास का क्षण है. वास्तव में मेट्रो जैसा सुरक्षित और आरामदायक पब्लिक ट्रांसपोर्ट आज की आवश्यकता है. हम अपेक्षा करते हैं कि 30 नवम्बर के आसपास हम कानपुर मेट्रो को देश को समर्पित करने की स्थिति में होंगे.

प्रयास होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से इसका शुभारंभ कराया जाए. उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि वड़ोदरा के उपक्रम में कोविडकाल की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद प्रथम प्रोटोटाइप ट्रेन को समय से पहले उपलब्ध कराया गया है. सीएम ने कहा कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना भी साकार हो रही है. मुख्यमंत्री ने आगरा व कानपुर मेट्रो के प्रथम प्रोटोटाइप ट्रेन के वर्चुअल अनावरण के दौरान वड़ोदरा से जुड़े यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक, मेसर्स एचटॉम इंडिया ट्रांसपोर्ट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक समेत सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को इसके लिए बधाई भी दी.

Manohar Kahaniya: पत्नी की मौत की सुपारी- भाग 3

सौजन्य- मनोहर कहानियां

लेकिन इतनी मार खाने के बाद भी आरती कहती रही कि यह सब झूठ है. उसे गलतफहमी हुई है. जबकि श्यामशरण ने उस की बात पर विश्वास नहीं किया. अब आए दिन उन दोनों का झगड़ा मोहल्ले वालों के लिए मुफ्त का तमाशा बन गया था.

रोजरोज की पिटाई से आहत हो कर आरती एक दिन अपने दोनों बच्चों को ले कर मायके ग्वालियर आ गई. कुछ माह बाद श्यामशरण आरती को लेने ग्वालियर आया. लेकिन आरती ने उस के साथ जाने को साफ मना कर दिया.

पति ने फोड़ दिया सिर

धीरेधीरे कई साल बीत गए. लेकिन आरती पति के घर नहीं लौटी. श्यामशरण को बच्चों से मोह था. कभीकभी वह बच्चों से मिलने जाता, लेकिन आरती बच्चों से नहीं मिलने देती.

अनिल शर्मा चाहते थे कि दोनों में सुलह हो जाए और आरती अपने बच्चों के साथ ससुराल चली जाए. वह सोचते थे कि आखिर जवान बेटी कब तक पिता की छाती पर मूंग दलेगी.

अनिल कुमार शर्मा ने इस दिशा में प्रयास शुरू किया तो दिसंबर 2020 में आरती और श्यामशरण आपसी सुलह को राजी हो गए. आरती अपने पिता के साथ ससुराल पहुंची.

वहां दोनों के बीच बात शुरू हुई. आरोपप्रत्यारोप के बीच दोनों की भौंहें टेढ़ी हो गईं. गुस्से में श्यामशरण ने सिलबट्टे से आरती के सिर पर प्रहार कर दिया, जिस से उस का सिर फट गया और खून बहने लगा.

आरती अपने हाथ में खून ले कर गुस्से से बोली, ‘‘मिस्टर शर्मा, तुम्हें इस खून की कीमत चुकानी पड़ेगी. खून का बदला खून से न लिया तो आरती मेरा नाम नहीं.’’

ये भी पढ़ें- Manohar Kahaniya- किडनैपिंग: चंबल से ऐसे छूटा अपहृत डॉक्टर- भाग 1

इस के बाद वह पिता के साथ घर चली गई. उस के फटे सिर में 10 टांके लगाने पड़े थे. लेकिन उस के पिता ने दामाद के खिलाफ रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई थी.

आरती अब सोचने लगी थी कि उसे बच्चों के भविष्य के लिए अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा. इसी उद्देश्य से वह कानपुर शहर आ गई. फिर एक रिश्तेदार के माध्यम से नौबस्ता थाने के सागरपुरी (गल्लामंडी) में एक मकान किराए पर ले कर रहने लगी.

इस के बाद उस ने इसी मकान में एक आइसक्रीम फैक्ट्री शुरू कर दी. उस की मेहनत और लगन रंग लाई और उस का धंधा अच्छा चलने लगा.

उस की आइसक्रीम की बुकिंग शादीविवाह व छोटेमोटे अन्य समारोह के लिए होने लगी. जल्दी ही आरती की पहचान उद्यमी महिला के रूप में हो गई.

पति ने बनाई हत्या की योजना

आरती हंसमुख थी. सामने वाले को प्रभावित करने में वह माहिर थी. सजधज कर भी वह रहती थी. होंठों पर लिपस्टिक और आंखों का कजरा, उस की खूबसूरती में चारचांद लगाते थे.

वह रंगीनमिजाज भी थी, जिस से कई युवक उस के दोस्त बन गए थे. उन के साथ वह होटल, क्लब जाती, शराब पीती और मौजमस्ती करती. अब उसे रोकनेटोकने वाला कोई न था.

इधर श्यामशरण को जब से आरती ने बदला लेने की धमकी दी थी, तब से उस की रातों की नींद हराम हो गई थी. उसे लगने लगा था कि यदि आरती जीवित रही तो वह उस की हत्या करा देगी. लिहाजा श्यामशरण ने पत्नी आरती की हत्या कराने का फैसला ले लिया.

इस के लिए उस ने भरुआ सुमेरपुर कस्बा के ईदगाह कालोनी निवासी कुख्यात अपराधी नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू से संपर्क साधा और 3 लाख 20 हजार रुपए में आरती की हत्या की सुपारी दी.

नईम ने अपने साथी शाहरुख तथा प्रतापगढ़ के राजा शुक्ला गैंग के शूटर विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत को शामिल किया. विकास कबरई (बांदा) का रहने वाला था, जबकि राहुल राजपूत प्रतापगढ़ का.

14 मई, 2021 को ईद वाले दिन नईम उर्फ रिंकू के घर सभी बदमाश इकट्ठे हुए और श्यामशरण शर्मा की मौजूदगी में आरती की हत्या की योजना बनी. श्यामशरण ने शूटरों को आरती का फोटो तथा मोबाइल नंबर दिया.

इस के बाद शाहरुख ने फरजी आईडी पर एक सिम ऐक्टीवेट कराया और उस ने आरती से बात की. उस ने आइसक्रीम की क्वालिटी तथा रेट पूछे.

ये भी पढ़ें- Manohar Kahaniya: बच्चा चोर गैंग- भाग 1

उस ने कहा कि 20 मई को उस के यहां शादी है, उस के लिए 2-3 तरह की आइसक्रीम चाहिए. इस पर आरती ने जवाब दिया कि सभी क्वालिटी की आइसक्रीम आप को उचित रेट पर मिल जाएगी.

18 मई, 2021 की शाम 7 बजे नौबस्ता समाधि पुलिया के पास चारों शूटर इकट्ठे हुए. शूटर विकास हजारिया और राहुल राजपूत कार से आए थे. जबकि शाहरुख और नईम मोटरसाइकिल से. चारों ने मिल कर एक बार फिर से विचारविमर्श किया. फिर शाहरुख और नईम करसुई पुल की ओर रवाना हो लिए.

विकास हजारिया ने लगभग साढ़े 7 बजे उसी फरजी सिम से आरती से बात की और करसुई पुल के पास आइसक्रीम का और्डर और एडवांस देने को बुलाया.

आरती ने सोचा कि कोई बड़ी पार्टी है. अत: वह अपनी स्कूटी पर सवार हो कर करसुई पुल के पास पहुंच गई.

अब तक वहां चारों शूटर पहुंच चुके थे. नईम उर्फ भोलू आरती से बातचीत करने लगा. तभी पीछे से शूटर विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत ने आरती पर फायर झोंक दिए. दोनों गोलियां पीठ में लगीं. तीसरा फायर शाहरुख ने सामने से किया. गोली आरती के सीने में लगी. आरती वहीं गिर पड़ी और दम तोड़ दिया. हत्या करने के बाद चारों शूटर फरार हो गए.

कुछ देर बाद एक युवक ने थाना बिधनू पुलिस को सूचना दी तो थानाप्रभारी विनोद कुमार सिंह मौके पर आ गए.

26 मई, 2021 को थाना बिधनू पुलिस ने आरोपी श्यामशरण शर्मा, शाहरुख तथा नईम उर्फ रिंकू उर्फ भोलू को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

कथा लिखने तक 2 अन्य आरोपी विकास हजारिया तथा राहुल राजपूत फरार थे. पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही थी.द्य

—कथा पुलिस सूत्रोंं पर आधारित

Manohar Kahaniya: सेक्स चेंज की जिद में परिवार हुआ स्वाहा- भाग 4

सौजन्य- मनोहर कहानियां

लेखक- शाहनवाज

उसे लगता था जैसे वह किसी जेल में फंसा है. वह जानता था कि लोग लड़के से लड़के का प्यार करना बरदाश्त नहीं करते, इसलिए उस ने यह सोच रखा था कि वह सैक्स चेंज करवाने के बाद कार्तिक के साथ भारत में नहीं तो किसी दूसरे देश में रह लेगा. क्योंकि भारतीय समाज में समलैंगिकों को अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता.

7 अगस्त के दिन अभिषेक ने यह तय कर लिया था कि अगर उस के घर वाले उसे पैसे नहीं देंगे तो वह उन्हें जान से मार देगा. उस ने इस के लिए प्लानिंग कर ली थी. जब उसे उस का फोन दोबारा से दिया गया तो वह अपने घर वालों को जान से मारने के लिए तरह तरह के तरीके इंटरनेट पर सर्च करने लगा.

उस ने देखा कि ऐसी चीजें इंटरनेट पर नहीं मिलतीं तो उस ने टीवी पर आने वाले क्राइम शो के एपिसोड गौर से देखने शुरू किए. उस ने कुछ दिनों तक उन शोज को देखा और अंत में उसे आइडिया मिल ही गया कि इस काम को कैसे अंजाम देना है.

पिता की पिस्तौल ही बनी कालदूत

चूंकि प्रदीप मलिक प्रौपर्टी डीलर थे तो इस धंधे में दुश्मनी होना आम बात थी. उन्होंने अपने पास बिना लाइसैंस वाली पिस्तौल रखी थी. 15-16 साल की उम्र में उन्होंने अपने दोनों बच्चों को पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग भी दे दी थी. अभिषेक किसी तरह उस पिस्तौल को ढूंढना चाहता था.

ऐसे ही एक दिन जब प्रदीप मलिक घर पर नहीं थे, मम्मी अपने काम में बिजी थीं और नेहा सो रही थी तब अभिषेक ने स्टोर रूम में उस पिस्तौल को ढूंढ निकाला. उसे उस की गोलियां भी उसी डब्बे में रखी मिल गई जिस में वह पिस्तौल छिपाई गई थी.

इस के बाद अभिषेक ने वह पिस्तौल अपने पास रख ली और सही मौके का इंतजार करने लगा. 25 अगस्त, 2021 को उस ने कार्तिक को मिलने के लिए रोहतक बुला लिया और अपने घर वालों से काम का बहाना कर उस से मिलने चला गया.

ये भी पढ़ें- Manohar Kahaniya: बच्चा चोर गैंग

उस दिन कार्तिक से मिल कर अभिषेक ने अपने दिल के सारे अरमान पूरे कर लिए. उस ने उसे बीते कुछ दिनों में उस के साथ क्याक्या हुआ, उस की भनक तक नहीं लगने दी. कार्तिक को तो अंदाजा भी नहीं था कि वह उस के साथ इस रिश्ते में बंधने के लिए कितना बड़ा कदम उठाने जा रहा है.

26 अगस्त, 2021 को जब वह उस से मिल कर अपने घर वापस आया तो रात को उस ने अंतिम फैसला ले लिया कि उसे क्या करना है. वह अगले दिन का इंतजार करने लगा. 27 अगस्त की सुबह करीब साढ़े 11 बजे उस ने सब से पहले अपने कमरे में म्यूजिक सिस्टम को फुल वौल्यूम में किया.

उस के बाद निर्दयी बन चुका अभिषेक सब से पहले नेहा के कमरे में गया. वह गहरी नींद सोई हुई थी. उस ने पिस्तौल अपनी कमर में खोंस रखी थी. उस ने अंदर से नेहा के कमरे का गेट बंद किया, मोटा तकिया लिया और पिस्तौल को पूरी तरह से ढंक लिया ताकि आवाज बाहर न निकल सके. उस के सर के सामने जा कर उस ने उस के भेजे में एक गोली दाग दी.

अभिषेक को लगा था कि शायद गोली चलने की आवाज घर में गूंज गई होगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. उस के बाद वह नानी के पास गया और उन्हें बोला कि नेहा उन्हें बुला रही है. नानी थोड़ी देर रुकीं और उस के कमरे की ओर चल पड़ीं.

पीछेपीछे वह भी उन के साथ गया. पहली मंजिल पर कमरे में घुसते के साथ ही उस ने नानी को धक्का दे दिया और दोबारा से तकिया ले कर उन के सर पर उसी तरह से गोली चला दी जैसे नेहा पर चलाई थी.

गोली मारने के बाद उसे लगा कि मम्मी उस का नाम ले कर उसे आवाज लगा रही हैं. वह नीचे गया तो मम्मी ने उस से पूछा कि नानी कहां हैं तो अभिषेक ने ऊपर नेहा के कमरे का इशारा कर दिया.

उस की मम्मी भी बिना देरी के नेहा के कमरे की ओर चल पड़ीं. मम्मी को भी उस ने नानी की तरह पीछे से धक्का दिया और तकिए का इस्तेमाल कर उन के सर में एक गोली दाग दी.

उस के बाद सिर्फ पापा ही बचे थे. पापा ग्राउंड फ्लोर पर अपने कमरे में दरवाजा लगा कर अपने फोन में यूट्यूब देख रहे थे. वह उन के कमरे में दाखिल हुआ. उन्होंने उसे अंदर आते हुए देखा लेकिन कुछ नहीं कहा. वह चुपचाप उन के पीछे गया.

टीवी का रिमोट लेने के बहाने उन के पीछे से सर पर 2 गोलियां दाग दीं. उस ने देखा कि 2 गोलियां लगने के बाद भी पापा का शरीर हरकत कर रहा है तो उस ने एक और गोली उन के सर पर दाग दी.

अभिषेक ने क्राइम शो में देखा था कि हत्या करने वाला अकसर घटनास्थल को बिगाड़ देता है ताकि मामला लूट का लगे. उस ने भी वही किया. उस ने पापा के कमरे में सारे सामान को इधरउधर बिखेर दिया.

उस के बाद वह ऊपर गया और नेहा के कमरे में भी ऐसा ही किया. उसी बीच उस ने मां के कानों और गले में पहनी हुई सोने की ज्वैलरी निकाल ली.

फिर दरवाजा बंद किया. वह दरवाजा दोनों तरफ से बंद हो जाता था. इस के बाद जिस होटल में कार्तिक रुका हुआ था वहां चला गया. कमरे में कार्तिक के साथ वह हमबिस्तर हुआ और उस के बाद उस ने खाना मंगवाया. लेकिन अभिषेक को भूख नहीं थी, इसलिए उस ने कुछ भी नहीं खाया.

दोपहर को करीब दोढाई बजे के आसपास वह घर गया. और दरवाजा न खुलने का नाटक कर के उस ने सोनीपत में रहने वाले मामा प्रवीण को फोन मिलाया. उस ने उन्हें बताया कि घर पर कोई भी फोन नहीं उठा रहा और दरवाजा भी बंद है. बाद में दरवाजा तोड़ा गया तो घटना सामने आई.

ये भी पढ़ें- Crime Story: प्यार बना जहर

कुछ ही देर में पुलिस आई और जब पुलिस ने अभिषेक से पूछताछ की तो विरोधाभासी बयानों से उस की पोल खुल गई. तब अभिषेक ने अपना गुनाह पुलिस के सामने कुबूल कर लिया.

पुलिस की टीम ने आरोपी अभिषेक मलिक से विस्तार से पूछताछ कर अस्पताल में उस की जांच कराई तो मनोचिकित्सक ने अपनी प्राथमिक जांच में पाया कि अभिषेक उर्फ मोनू ने अपने पिता प्रदीप मलिक उर्फ बबलू पहलवान, मां बबली, बहन तमन्ना और नानी रोशनी देवी की हत्या पूरे होशोहवास में रहते हुए की थी.

इस के बाद पुलिस ने हत्यारोपी अभिषेक को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

हम तीन- भाग 3: आखिर क्या हुआ था उन 3 सहेलियों के साथ?

अनीता का शरीर कुछ ज्यादा ही भर गया था. मैं जोर से हंसी तो अनीता ने कहा, ‘‘हांहां, ठीक है, मुझे अपनी सेहत से कोई शिकायत नहीं है. यह तो अपने प्यारे पति के प्यार में थोड़ी फूलफल गई हूं.’’ और फिर हम तीनों इस बात पर खूब हंसीं.

मैं ने कहा, ‘‘वैसे हम तीनों के ही पति बहुत अच्छे हैं जो हमें एकदूसरी से मिलने भेज दिया.’’

अनीता ने कहा, ‘‘हां, यह री बातें सुन लें तो हैरान रह जाएं. खासतौर पर सुकन्या के बच्चे तो अपनी मां के इस सो कोल्ड प्यार का किस्सा सुन कर धन्य हो जाएंगे.’’

सुकन्या चिढ़ कर बोली, ‘‘चुप कर, खुद ही आइडिया दिया है और खुद ही मेरा मजाक उड़ा रही है.’’

अगले दिन हम तीनों पहले मार्केट गईं. वहां सुकन्या ने अनिल को देने के लिए गिफ्ट खरीदी. सुकन्या बहुत इमोशनल हो रही थी. अनीता और मैं अपनी हंसी बड़ी मुश्किल से रोक पा रही थीं.

अनिता ने मेरी कान में कहा, ‘‘यार, यह तो बिलकुल नहीं बदली. पहले भी एक बात पर हफ्तों खुश.’’

मैं ने कहा, ‘‘हां, लेकिन तूने इसे अनिल से मिलने का आइडिया क्यों दिया?’’

अनीता बड़े गर्व से बोली, ‘‘टीचर हूं, बिगड़े बच्चों को सुधारना मुझे आता है और इसे तो मैं अच्छी तरह जानती हूं. अपनी इस खूबसूरत सहेली का सौंदर्य प्रेम भी मुझे पता है और तुझे बता रही हूं मैं ने अनिल को 6 महीने पहले ही एक शादी में देखा था.’’

‘‘अच्छा, कोई बात हुई थी क्या?’’

‘‘नहीं, मौका नहीं लगा था. अच्छा, अब चुप कर. अपनी सहेली की शौपिंग पूरी हो गई शायद. पता नहीं कितने रुपए फूंक कर आ रही है मैडम.’’

सुकन्या पास आई तो हम ने पूछा, ‘‘क्याक्या खरीद लिया?’’

ये भी पढ़ें- हवाई जहाज दुर्घटना- भाग 1: आकृति का मन नकारात्मकता से क्यों घिर गया

‘‘कुछ खास नहीं, अनिल के लिए एक ब्रैंडेड शर्ट, एक परफ्यूम, एक बहुत ही सुंदर पैन और उस की पसंद की मिठाई.’’

अनीता ने कहा, ‘‘चलो चलें प्रोफैसर साहब घर आ गए होंगे.’’

शाम के 4 बजे थे. हम तीनों पैदल ही साकेत चल पड़ीं. अनीता ने एक गली में दूर से ही एक घर की तरफ इशारा किया, ‘‘यही है अनिल का घर और वह जो बाहर स्कूटर खड़ा कर रहा है शायद अनिल ही है.’’

हम तीनों के कदम थोड़े तेज हुए.

अनिता ने कहा, ‘‘हां, सुकन्या, अनिल ही तो है.’’

सुकन्या ने ध्यान से देखा. अनिल किसी से फोन पर बात कर रहा था. वह ऐसे खड़ा था कि हमें उस का साइड पोज दिख रहा था. सुकन्या के कदम ढीले पड़ गए, उस ने खुद को संभालते हुए कहा, ‘‘यह मोटा सा गंजा आदमी अनिल कैसे हो सकता है, लेकिन शक्ल तो मिल रही है.’’

अनीता ने कहा, ‘‘यही है हैंडसम सा तेरा प्रेमी जिस का साथ पाने की इच्छा आज भी तेरा पीछा नहीं छोड़ रही, जिस के सामने अपने पति का अथाह प्यार भी तुझे तुच्छ लगता है.’’

सुकन्या अचानक वापस मुड़ गई. मैं ने कहा, ‘‘क्या हुआ, अनिल से मिलना नहीं है क्या?’’

सुकन्या जल्दी से बोली, ‘‘नहीं, थोड़ा तेज नहीं चल सकती तुम दोनों? जल्दी चलो यहां से.’’

अनीता हंसते हुए बोली, ‘‘चलो, किसी रेस्तरा में चलती हैं.’’

हम ने वहां बैठ कर कौफी और सैंडविच का और्डर दिया. हमारी हंसी नहीं रुक रही थी.  सुकन्या का चेहरा देखने लायक था.

अनीता हंसी. बोली, ‘‘बेचारी सुकन्या,

इतने साल पुराने प्यार की परिणति हुई भी तो किस रूप में.’’

सुकन्या ने हमें डपटा, ‘‘चुप हो जाओ तुम दोनों, मुझे सताना बंद करो, अपनी सारी कल्पनाओं को वहीं उसी गली में दफन कर आई हूं मैं. पहली बार मुझे मेरे पति सुधीर याद आ रहे हैं. बस, अब जल्दी से उन के पास पहुंचना है.’’

मैं ने कहा, ‘‘वाह क्या बेसब्री है… तुम्हारा प्यार का भूत तो बहुत तेजी से भाग गया.’’

अब हम तीनों की हंसी नहीं रुक रही थी. हम बहुत हंसीं. इतना हंसे पता नहीं कितने साल हो गए थे. मैं ने कहा, ‘‘सुकन्या, और ये जो तुम ने गिफ्ट्स खरीदे इन का क्या होगा?’’

‘‘होगा क्या? शर्ट सुधीर पहनेंगे, मिठाई घर जा कर हम सब के साथ खाएंगे, परफ्यूम और पैन अपने बेटे को दे दूंगी.’’

ये भी पढ़ें- जीत: क्या मंजरी को अपना पाया पीयूष का परिवार?

मैं ने कहा, ‘‘हां, अनिल को तो यह शर्ट आती भी नहीं,’’ मुझे और अनीता को तो जैसे हंसी का दौरा पड़ गया था. सुकन्या की शक्ल देख कर हम इतना हंसी कि हमारी आंखों में आंसू आ गए. सच, अगर हमारे बच्चे हमारा यह रूप देखते तो उन्हें अपनी आंखों पर यकीन न आता. यह तो अच्छा था कि इस समय रेस्तरां में 1-2 लोग ही थे और हम बैठी भी एक कोने में थीं. वेटर बेचारा हमारी शक्लें देख रहा था. खैर, खापी कर हम अपनेअपने घर चली गईं.

गिनेचुने दिन थे. जाने का दिल भी पास आ रहा था. अगले दिन हम तीनों ने फिर खरीदारी की. मां के लिए, भैयाभाभी और यश के लिए कुछ कपड़े खरीदे. उन दोनों ने भी इसी तरह का सामान लिया. फिर जब हम तीनों साथ बैठीं तो सुकन्या के दिल में आया कि थोड़े मुझे छेड़ा जाए, अत: मुझ से कहने लगी, ‘‘विनोद कहां है आजकल? कुछ पता है?’’

मैं ने हाथ जोड़ते हुए कहा, ‘‘मेरी इस बात में जरा भी रुचि नहीं है. मुझे माफ करो.’’

अनीता हंसी, ‘‘मीनू, कहो तो उस का कायाकल्प भी देख लिया जाए.’’

मैं ने कहा, ‘‘नहीं, रहने दो, अभी एक को देख कर छेड़ा. फिर हम तीनों ने यह तय किया कि अब जब भी संभव होगा, मिलती रहेंगी. एक बार फिर पुराने समय में लौट कर बहुत मजा आया.’’

जाने का दिन आ गया. भीगी आंखों से एकदूसरी से बिदा ली. मां और भाभी ने तो पता नहीं कितनी चीचें बांध दी थीं. सब से पहले मैं ही निकल रही थी. अनीता को एक विवाह में शामिल होने के लिए 2 दिन और रुकना था, सुकन्या को लेने सुधीर आने वाले थे.

ये भी पढ़ें- तेरी मेरी कहानी: कैसे बदल गई रिश्तों की परिभाषा

मां और भाभी प्यार भरी शिकायत कर रही थीं कि मैं सहेलियों के साथ ही घूमती रही. मैं बहुत अच्छा समय बिता कर लौट रही थी. मुंबई जा कर स्नेहा को इस रियूनियन का आइडिया देने के लिए गले से लगा कर थैंक्स कहने के लिए मैं बहुत उत्साहित थी. सच, बहुत मजा आया था.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें