विषबेल- भाग 3: आखिर शर्मिला हर छोटी समस्या को क्यों विकराल बना देती थी

शाम को समीर ने अपने विवाह के उपलक्ष्य में एक छोटी सी पार्टी का आयोजन किया था. सारा इंतजाम होटल में रखा गया. कुछ वरिष्ठ, कुछ कनिष्ठ, कुछ सहकर्ता अफसर आमंत्रित थे. सभी आमंत्रित मेहमानों ने शर्मिला के रूप, लावण्य और शिक्षा की खूब प्रशंसा की, तो समीर ने भी पत्नी के गुणों की प्रशंसा की. साथ ही, यह भी कहा, ‘उच्च शिक्षित होने के बावजूद वह एक अच्छी गृहस्थन भी है.’ यह सुन शर्मिला अवाक रह गई.

आखिरकार, अपशब्दों पर उतर आई और समीर पर  झूठ बोलने का आरोप लगाया. ‘ झूठा’ संबोधन से ही समीर अवाक रह गया. ठंडी सांस ले कर बोला, ‘शर्मिला, मु झे आज तक किसी ने ‘ झूठा’ नहीं कहा और तुम्हें जरा भी  िझ झक नहीं हुई?’

‘नहीं, क्योंकि मैं जानती हूं तुम ने मेरी  झूठी प्रशंसा की है.’

‘लगता है, मां ने इस आंगन में तुलसी के स्थान पर नागफनी रोप ली है.’

‘इस नागफनी को तुम्हें पानी भी देना पड़ेगा और ध्यान भी रखना पड़ेगा.’ शर्मिला एकदम निर्लज्ज बनी थी.

उस रात समीर की हलक से एक निवाला नहीं उतरा. सारी रात यही सोचता रहा, ‘किस मिट्टी की बनी है शर्मिला. न वाणी में मिठास है, न व्यवहार में नम्रता, हर समय घात लगाए बैठी रहती है कि कैसे किसी का अपमान करे.’

एक दिन समीर के सिर में तेज दर्द था. उस ने शर्मिला को पुकारा. दफ्तर में वह अनुशासन अधिकारी था, उस की आवाज में दम था. सो, उस की सहज बातचीत में भी शर्मिला को आदेश की गंध आती थी. ऐसे वाक्यांशों को वह अनसुना कर देती थी. उस ने सुन कर भी अनसुना कर दिया. समीर का धैर्य टूट गया.

‘क्या कम सुनाई पड़ने लगा है?’ शर्मिला मौन रही.

‘क्या ऊंचा सुनने लगी हो?’

शर्मिला को अपनी मां से पता चल चुका था, इस घर में 7 पीढि़यों से किसी औरत पर हाथ नहीं उठाया गया है. सो, उस ने शेरनी की तरह व्यवहार किया, ‘‘इतवार को मेरा मूड खराब मत करो. मेरे कान बिलकुल ठीक हैं. अगर गुस्सा आ गया तो मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा लूंगी.’

‘क्या कहा?’’ समीर चीख कर उछल पड़ा, जैसे सांप ने सामने से फुफकार मारी हो.

‘जो तुम ने सुना,’ शर्मिला ने स्वर धीमा नहीं किया, ‘यही कि अधिक परेशान करोगे तो मैं आत्महत्या कर लूंगी. तुम्हारे साथ दूसरे भी बंधेबंधे फिरेंगे, सारी इंजीनियरिंग धरी की धरी रह जाएगी.’

‘कितने घटिया संस्कार हैं तुम्हारे?’

‘तो छोड़ दो मु झे, तलाक दे दो.’

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समीर बुरी तरह डर गया. डरी तो शर्मिला भी थी मगर नारीहठ पुरुष के अहं को पराजित करने के लिए मन प्राण से जुटा था. असल में कुतर्कपूर्ण असभ्य संवाद शैली के कारण शर्मिला का अकसर समीर से  झगड़ा हो जाता था. घर की बात घर से बाहर न निकले, इसलिए समीर हमेशा घुटने टेक देता था. शर्मिला इसे अपनी जीत सम झ कर अपनी मां और बहनों की वाहवाही बटोरती. संक्षेप में कहा जाए तो उस ने नंदन कानन को श्मशानभूमि में बदल सा दिया था.

समस्या ने विकराल रूप तब धारण किया, जब नन्हा गौरव इस परिवार का सदस्य बना. समीर को पूरी उम्मीद थी कि शर्मिला के स्वभाव में अब बदलाव आएगा. अब वह इस परिवार से जुड़ेगी. लेकिन जुड़ना तो दूर, उस ने देवयानी और सुधाकर को उसे छूने तक नहीं दिया और जता दिया कि वह अपने बच्चे की देखभाल भलीभांति कर सकती है. बढ़ावा देने के लिए बहनें तो थीं ही, अब उस के अभियान में मां भी शामिल हो गई.

‘मेरा बेटा है, चाहे जिस प्रकार रखूं, मारूं या पालपोस कर बड़ा करूं.’

समीर ने बड़े दुखी स्वर में कहा, ‘इस मासूम ने किसी का क्या बिगाड़ा है शर्मिला? अपने हठ में तुम ने गर्भ के समय भी किसी का कहना नहीं माना. न मां की सलाह सुनी, न डाक्टर की हिदायतें, न पौष्टिक आहार ही अपनी डाइट में शामिल किया, इसलिए गौरव इतना कमजोर है.’

‘तुम यही कहना चाहते हो न कि, ‘गौरव मेरी लापरवाही के कारण कमजोर है? नहीं, वह तुम्हारी बेवकूफी और गैरजिम्मेदाराना हरकतों की वजह से कमजोर है. तुम न अच्छे पति बन सके, न अच्छे पिता.’

समीर के भीतर की कड़वाहट उस के सामने फूट पड़ना चाहती थी, फिर भी वह खुद को बांधे रहा. जानता था कि शर्मिला कभी भी अपनी गलती नहीं मानेगी. उस की मां ने बचपन से ही अपनी बेटियों को समर्पण का जवाब ठोकर से देना सिखाया है.

अगर समीर उसे गोद में उठाना चाहता, तो शर्मिला उसे भी दो कड़वे बोल सुना कर दूर छिटक देती. अगर देवयानी और सुधाकर उसे खिलाना चाहते, तो ऐसा कुहराम मचाती कि पूरा घर ज्वालामुखी के मुहाने पर जा बैठता.

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समीर तर्क देता, ‘एक व्यक्ति को कई लोग एकसाथ प्यार कर सकते हैं क्योंकि वह किसी का बेटा, किसी का भाई, किसी का पति और किसी का मित्र होता है. सभी तो उसे चाहेंगे. गौरव पर निश्चय ही सब से अधिक तुम्हारा अधिकार है, किंतु मेरे परिवार के लोग भी तो उस से स्नेह करते हैं और उस के सच्चे हितैषी हैं.’

किंतु शर्मिला ने किसी की न सुनी और गौरव को ले कर मायके चली गई ताकि उस की मां गौरव का लालनपालन कर सके. बहनों के सामने उस ने बढ़चढ़ कर अपनी विजय पताका लहराने के किस्से सुनाए तो तलाकशुदा बहन नीरा और छोटी बहन शिल्पा ने उस के समर्थन में सिर हिला दिया.

शर्मिला को मायके आए हुए एक महीने से ऊपर हो चुका था. शुरू में मां ने दुलारा, पुचकारा, सहानुभूति जतलाई, सांत्वना भी प्रकट की. बहनों ने भी उस के साहस की खूब प्रशंसा की. फिर, सभी अपनीअपनी राह हो लिए. मां अपनी सभासोसाइटियों और भजन मंडलियों में व्यस्त हो गई. बहनों का पूरा दिन सैरसपाटे, किटी पार्टियों और शौपिंग में बीत जाता. उस के बाद जो समय बचता, उस दौरान मन बहलाने के लिए फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसी विधाएं तो थीं ही.

कोरोना लव- भाग 3: शादी के बाद अमन और रचना के रिश्ते में क्या बदलाव आया?

‘‘ओह, और आप की पत्नी भी जौब में हैं?’’ रचना ने पूछा तो शिखर ने कहा, ‘‘नहीं, वह हाउसवाइफ है.’’

‘‘हाउसवाइफ नहीं, होममेकर कहिए शिखरजी, अच्छा लगता है,’’ बोल कर रचना खिलखिला पड़ी.

शिखर उसे देखता ही रह गया. रचना से बातें करते हुए शिखर के चेहरे पर अजीब सी संतुष्टि नजर आती थी. लेकिन वहीं, अपनी पत्नी से बातें करते हुए वह झल्ला पड़ता था.

अमन को औफिस भेज कर, घर के काम जल्दी से निबटा कर, रचना अपनी जगह पर जा कर बैठ जाती, उधर शिखर पहले से ही उस का इंतजार करता रहता और उसे देखते ही खिड़की के पास आ कर खड़ा हो जाता. फिर दोनों बातें करने लगते. लेकिन जैसे ही शिखर को अपनी पत्नी की आवाज सुनाई पड़ती, वह भाग कर अपनी जगह पर बैठ जाता और फिर दोनों इशारोंइशारों में बातें करने लगते. कहीं न कहीं दोनों एकदूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे थे. कोरोना के चलते घर में क्वारंटाइन होने की वजह से उन के प्यार की गाड़ी अटक गई थी. लेकिन, उन्होंने इस का भी हल निकाल लिया.

दोनों कागज पर लिख कर अपने दिल का हाल बयां करते और उस खत को रोल कर एकदूसरे की तरफ फेंकते. कभी मोबाइल से दोनों बातें करते, कभी चैटिंग करते. जोक्स बोल कर हंसतेहंसाते. लेकिन इस पर भी जब उन का मन नहीं भरता, तो दोनों अपनीअपनी छत पर खड़े हो कर लोगों के घरों में ताकझांक करते कि इस लौकडाउन में वे अपने घरों में क्या रहे हैं. कहीं पतिपत्नी साथ मिल कर खाना पका रहे होते. कहीं काम को ले कर सासबहू में झगड़े हो रहे होते. और एक घर में तो हसबैंड पोंछा लगा रहा था और उस की पत्नी उसे बता रही थी कि और कहांकहां पोंछा लगाना है. देख कर दोनों की हंसी रुक ही नहीं रही थी. रचना का तो पेट ही दुखने लगा हंसहंस कर. बड़ा मजा आ रहा था उन्हें लोगों के घरों में ताकझांक करने में. अकसर दोनों छत पर जा कर लोगों के घरों में ताकतेझांकते और खूब मजे लेते.

इस कोरोना ने पूरी दुनिया में कहर मचा रखा है. दुनियाभर में कोरोना की चपेट में लाखों लोग आ गए हैं. लाखों लोगों की मौत हो चुकी है. कोरोना के डर से करोड़ों लोग अपने घरों में कैद हैं. सोशल डिस्टैंसिंग के चलते लोग एकदूसरे से मिल नहीं रहे हैं. वहीं, इस दहशत के बीच रचना और शिखर के बीच प्यार का अंकुर फूट पड़ा है. यह अनोखी प्रेम कहानी भले ही लोगों की आंखों से ओझल है, पर दोनों एकदूसरे की आंखों में डूब चुके हैं.

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लेकिन, उन का प्यार रचना के पति अमन और शिखर की पत्नी की आंखों से छिपा नहीं है. जान रहे हैं वे दोनों कि इन दोनों के बीच कुछ चल रहा है. तभी तो अमन जब भी घर में होता है, रचना के आसपास ही मंडराता रहता है, और उधर शिखर की पत्नी भी खिड़की खुली देख नाकभौं चढ़ा लेती है.

इसी बात पर कई बार अमन से रचना की लड़ाई भी हो चुकी है. अमन का कहना है कि क्यों वह वहीं बैठ कर काम करती है? घर में और भी तो जगह है? लेकिन रचना कहती कि उस की मरजी, जहां बैठ कर वह काम करे.

‘वह क्यों उस का मालिक बना फिरता है? घर का एक काम तो होता नहीं उस से, और बड़ा आया है नसीहतें देने,’ अपने मन में ही बोल रचना मुंह बिचका देती.

उधर, शिखर भी अपनी पत्नी के व्यवहार से परेशान है. जब देखो, वह उस के आगेपीछे मंडराती रहती. कभी चाय, कभी पानी देने के बहाने वहां पहुंच जाती और फालतू की बातें कर उसे बोर करती. कहता शिखर कि जाओ मुझे काम करने दो. पर नहीं, बकवास करनी ही है उसे. रचना को वह घूर कर देखती है और खिड़की बंद कर देती है. लेकिन जब वह चली जाती है, खिड़की फिर खुल जाती और फिर दोनों की गुपचुप बातें शुरू हो जातीं.

अमन के सो जाने पर, देररात तक रचना शिखर के साथ फोन पर चैटिंग करती रहती है. सुबह रचना को डेरी तक दूध लाने जाना पड़ता था, तो अब शिखर भी उस के साथ दूध और सब्जीफल लाने  स्टोर तक जाने लगा है, ताकि दोनों को आपस में बातें करने का और मौका मिल सके. लोगों की नजरें बचा कर शिखर कूद कर रचना की छत पर आ जाता और दोनों एकदूसरे की आंखों में झांकते हुए घंटों बिता देते हैं.

‘‘लगता है बारिश होगी. हवा भी कितनी ठंडीठंडी चल रही है’’ कह कर रचना उस रोज, जब दोनों एक ही छत पर साथ बैठे हुए थे, रचना अपनेआप में ही सिकुड़ने लगी, तभी अमन ने उसे अपनी बांहों में भर लिया और दोनों वहीं जमीन पर बैठ गए. कुछ देर तक दोनों एकदूसरे की आंखों में ऐसे डूबे रहे जैसे उन के आसपास कोई हो ही न. शिखर हौलेहौले रचना के बालों में उंगलियां फेरने लगा और वह मदहोश उस की बांहों में सिकुड़ती चली गई. ‘‘अभी तो लोगों को डिस्टैंस बना कर कर चलने के लिए कहा जा रहा है और हम यहां एकसाथ बैठे प्यारमोहब्बत कर रहे हैं. अगर किसी ने देख लिया हमारा कोरोना प्यार तो?’’ हंसते हुए रचना बोली.

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‘‘हां, सही है यार. किसी ने देख लिया तो? पता है, पुलिस लोगों को दौड़ादौड़ा कर डंडे बरसा रही है,’’ कह कर शिखर हंसा, तो रचना भी हंस पड़ी और बोली, ‘‘वैसे, क्यों न हम अपने प्यार का नाम ‘कोरोना लव’ रख दें. कैसा रहेगा?’’

तभी अचानक से शरीर पर पानी की बूंदें पड़ते देख दोनों चौंक पड़े. ‘‘ब…बारिश, बारिश हो रही है, शिखर. ओ मां, इस मार्च के महीने में बारिश?’’ बोल कर रचना एक बच्ची की तरह चिहुंक उठी और अपनी हथेलियां फैला कर गोलगोल घूमने लगी. मजा आ रहा था उसे बारिश में भीगने में. लेकिन तबीयत बिगड़ने के डर से दोनों वापस घर आ गए. यह बेमौसम की बारिश थी और वैसे भी, अभी कोरोना वायरस फैला हुआ है, तो बारिश में भीगना ठीक नहीं. लेकिन दोनों की बातें अभी खत्म नहीं हुई थीं. सो, वे अपनीअपनी खिड़की से ही इशारों मे बातें करने लगे.

‘‘आंखों की गुस्ताखियां माफ हों, एकटक तुम्हें देखती हैं, जो बात कहना चाहे जबां, तुम से वो यह कहती है. एक कागज पर ढेरों तारीफें लिख कर शिखर ने रचना की तरफ अभी फेंका ही था कि अमन आ गया और उन का कलेजा धक्क कर गया.  खैर,  वह उस कागज के गोले को देख नहीं पाया, क्योंकि रचना ने झट से उसे अपने पैर के नीचे दबा लिया और जब अमन वहां से चला गया, तब वह उसे खोल कर पढ़ने लगी. अपनी तारीफें पढ़ कर रचना के गाल शर्म से लाल हो गए. जब उस ने अपनी नजरें उठा कर शिखर की तरफ देखा, तो उस ने एक प्यारा सा  ‘फ्लाइंग किस’ रचना को भेजा. बदले में रचना ने भी उसे फ्लाइंग किस भेजा और दोनों मोबाइल पर चैटिंग करने लगे.

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कोरोना के डर से लोग सहमे हुए हैं, सड़केंगलियां वीरान पड़ी हैं जबकि रचना और शिखर को अपनी जिंदगी पहले से भी हसीन लगने लगी है. उन्हें वीरान पड़ी दुनिया रंगीन नजर आ रही है. सायंसायं करती हवा प्यार की धुन लग रही है. अपनी जिंदगी में यह नया बदलाव दोनों को भाने लगा है. लेकिन यही बातें अमन और शिखर की पत्नी को जरा भी नहीं भा रही हैं. उन्हें खुश देख वे जलभुन रहे हैं.

अमन और रचना ने लवमैरिज की थी.  परिवार के खिलाफ जा कर दोनों ने शादी की थी. वैसे, फिर बाद में सब ने उन के रिश्ते को स्वीकार कर लिया. लेकिन अब उसी अमन में वह बात नहीं रही जो पहले हुआ करती थी. रचना तो आज भी अमन को प्यार करती है, पर ताली तो दोनों हाथों से बजती है न?

हताश जिंदगी का अंत- भाग 1: क्यों श्यामा जिंदगी से हार गई थी?

श्यामा निरंकारी बालिका इंटर कालेज में रसोइया के पद पर कार्यरत थी. वह छात्राओं के लिए मिडडे मील तैयार करती थी. श्यामा 2 दिन से काम पर नहीं आ रही थी. जिस से छात्राओं को मिडडे मील नहीं मिल पा रहा था. श्यामा शांति नगर में रहती थी. वह काम पर क्यों नहीं आ रही है, इस की जानकारी करने के लिए कालेज की प्रधानाचार्य ने एक छात्रा प्रीति को उस के घर भेजा. प्रीति, श्यामा के पड़ोस में रहती थी. और उसे अच्छी तरह से जानतीपहचानती थी.

प्रीति सुबह 9 बजे श्यामा के घर पहुंची. घर का दरवाजा अंदर से बंद था. छात्रा प्रीति ने दरवाजे की कुंडी खटखटाई लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला और न ही कोई हलचल हुई. श्यामा की बेटी प्रियंका, प्रीति की सहेली थी और उस की कक्षा में पढ़ती थी. सो, प्रीति ने आवाज दी, ‘‘प्रियंका, ओ प्रियंका, दरवाजा खोलो. मु झे मैडम ने भेजा है.’’ पर फिर भी दरवाजा नहीं खुला और न ही किसी प्रकार की हलचल हुई.

पड़ोस में श्यामा का ससुर रामसागर रहता था. प्रीति ने दरवाजा न खोलने की जानकारी उसे दी तो रामसागर मौके पर आ गया. उस ने दरवाजा पीटा और बहूबहू कह कर आवाज दी, परंतु दरवाजा नहीं खुला. रामसागर ने दरवाजे की  िझर्री से  झांकने का प्रयास किया तो उस के नथुनों में तेज बदबू समा गई. उस ने किसी गंभीर वारदात की आंशका से पड़ोसियों को बुला लिया. पड़ोसियों ने उसे पुलिस में सूचना देने की सलाह दी. यह बात 1 फरवरी 2020 की है.

सुबह 10 बजे रामसागर बदहवास फतेहपुर सदर कोतवाली पहुंचा. उस समय कोतवाल रवींद्र कुमार कोतवाली में मौजूद थे. उन्होंने एक वृद्ध व्यक्ति को बदहवास हालत में देखा तो पूछा, ‘‘क्या परेशानी है. तुम इतने घबराए हुए क्यों हो? जो भी परेशानी हो, बताओ. हम तुम्हारी मदद करेंगे.’’

‘‘हुजुर, मेरा नाम रामसागर है. मै कोतवाली थाने के शांतिनगर महल्ले में रहता हूं. पड़ोस में हमारा पुत्र रामभरोसे अपनी पत्नी श्यामा व 4 पुत्रियों के साथ रहता है. उस के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद है और भीतर से दुर्गंध आ रही है. हमें किसी अनिष्ट की आशंका है. आप मेरे साथ जल्दी चलने की कृपा करें.

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रामसागर ने जो बात बताई थी, वह वास्तव में गंभीर थी. सो, थाना प्रभारी रवींद्र कुमार ने आवश्यक पुलिस बल साथ लिया और रामसागर के साथ उस के पुत्र रामभरोसे के घर पहुंच गए. उस समय वहां पड़ोसियों का जमघट था और लोग दबी जबान से अनेक प्रकार के कयास लगा रहे थे. थाना प्रभारी रवींद्र कुमार लोगों को परे हटाते दरवाजे पर पहुंचे. दरवाजा अंदर से बंद था. उन्होंने आवाज दे कर दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया लेकिन असफल रहे. कमरे के अंदर मां और उस की 4 बेटियां थीं. कमरे के अंदर से दुर्गंध भी आ रही थी. स्पष्ट था कि कोई गंभीर बात है. थाना प्रभारी रवींद्र कुमार ने पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी.

जानकारी प्राप्त होते ही पुलिस अधीक्षक प्रशांत, अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार तथा सीओ (सिटी) कपिल देव मौके पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने पहले जानकारी जुटाई. फिर थाना प्रभारी रवींद्र कुमार को कमरे का दरवाजा तोड़ने का आदेश दिया. आदेश पाते ही उन्होंने अन्य पुलिस कर्मियों की मदद से कमरे का दरवाजा तोड़ दिया. दरवाजा टूटते ही तेज दुर्गंध का भभूका सभी के नथुनों में समा गया.

पुलिस अधिकारियों ने कमरे के अंदर प्रवेश किया तो उन के दिल कांप उठे. कमरे का दृश्य बड़ा ही वीभत्स था. कमरे के अंदर 5 लाशें आड़ीतिरछी एकदूसरे के ऊपर पड़ी थीं. मृतकों की पहचान राम सागर ने की. उस ने बताया कि मृतकों में एक उस की बहू श्यामा है तथा अन्य 4 उस की नातिन पिंकी (20 वर्ष), प्रियंका (14 वर्ष), वर्षा (13 वर्ष) तथा रूबी उर्फ ननकी (10 वर्ष) है.

सभी लाशें फर्श पर पड़ी थीं. देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सभी ने जहरीला पदार्थ पी कर आत्महत्या की थी. क्योंकि लाशों के पास ही एक भगैने में जहरीला पदार्थ आटे में घोला गया था. शायद इसी पदार्थ को पी कर मां तथा बेटियों ने आत्महत्या की थी. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर जांच हेतु फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. फोरैंसिक टीम ने जांच की और कमरे से 7 पैकेट जहरीला पदार्थ (क्विक फौस) बरामद किया. इन में 4 पैकेट खाली थे और 3 पैकेट भरे थे.

फोरैंसिक टीम ने जहरीले पदार्थ के पैकेट जांच हेतु सुरक्षित कर लिए. भगोना तथा उस में घोला गया जहरीला पदार्थ भी जांच हेतु सुरक्षित कर लिया. इस के अलावा टीम ने अन्य साक्ष्य भी जुटाए.

अब तक मां व उस की 4 बेटियों द्वारा आत्महत्या कर लेने की खबर जंगल की आग की तरह शांतिनगर एवं आसपास के महल्लों मे फैल गई थी. सैकड़ों की भीड़ घटनास्थल पर इकट्ठी हो गई थी. जिस ने भी मांबेटियों के शवों को देखा उसी की आंखों में आंसू आ गए. पड़ोसी महिलाएं तो फूटफूट कर रो रही थीं.

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श्यामा तथा उस की बेटियों की मौत की खबर निरंकारी बालिका इंटर कालेज पहुंची तो शोक की लहर दैड़ गई. प्रधानाचार्य ने कालेज में शोक संवेदना व्यक्त की, उस के बाद कालेज में छुट्टी कर दी गई. छुट्टी के बाद अनेक छात्राएं शांतिनगर स्थित मृतकों के घर पहुंचीं और सहेलियों के शव देख कर फूटफूट कर रोईं. दरअसल, मृतका प्रियंका, रूबी और वर्षा निरंकारी बालिका इंटर कालेज में ही पढ़ती थीं. उन के साथ पढ़ने वाली छात्राएं ही अंतिम विदाई के वक्त घर पहुंची थीं.

जांचपड़ताल के बाद पुलिस अधिकारी इस नतीजे पर पहुंचे कि श्यामा ने आर्थिक तंगी व शराबी पति की क्रूरता से तंग आ कर अपनी पुत्रियों सहित आत्महत्या की है. हत्या जैसी कोई बात नही थी. सो, पुलिस अधिकारियों ने पांचों शवों का पंचनामा भरवा कर और अलगअलग सील मोहर करा कर पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल भिजवा दिया.

घर से 5 लाशें जरूर बरामद हुई थीं लेकिन घर के मुखिया रामभरोसे का कुछ अतापता न था. पुलिस अधिकारियों ने उस के संबंध में पिता रामसागर से पूछताछ की तो उस ने बताया कि रामभरोसे शराबी है. वह दिनभर मजदूरी करता है और शाम को शराब के ठेके पर पहुंच कर शराब पीता है. उस की तलाश ढाबों व शराब ठेकों पर की जाए तो वह मिल सकता है.

पुलिस अधीक्षक प्रशांत ने सीओ (सिटी) कपिल देव की निगरानी में पुलिस की एक टीम बनाई और रामभरोसे की खोज में लगा दी. पुलिस टीम ने कई शराब ठेकों पर उस की खोज की, लेकिन उस का पता नहीं चला. पुलिस टीम रामभरोसे की खोज करते जब जीटी रोड स्थित एक ढाबे पर पहुंची तो वह वहां बरतन साफ करते मिल गया. रामभरोसे को हिरासत में ले कर पुलिस टीम वापस सदर कोतवाली लौट आई.

थाना प्रभारी रवींद्र कुमार ने मृतका श्यामा के नशेड़ी पति राम भरोसे के पकड़े जाने की खबर पुलिस अधिकारियों को दी तो पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा तथा अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार कोतवाली आ गए. पुलिस अधिकारियों ने जब रामभरोसे को पत्नी और 4 पुत्रियों द्वारा आत्महत्या करने की जानकारी दी तो उस के चेहरे पर पत्नी व बेटियों के खोने का कोई गम नहीं दिखा. पूछताछ में उस ने बताया कि उस की नशेबाजी को ले कर घर में अकसर  झगड़ा होता था. 3 दिन पूर्व उस का पत्नी से  झगड़ा व मारपीट हुई थी. परेशान हो कर श्यामा ने जहर खा कर जान देने की धमकी दी थी. लेकिन उस ने यह नहीं सोचा था कि श्यामा सचमुच बेटियों संग जान दे देगी. हुजूर, पूरा परिवार चौपट हो गया है. अब ऐसा लगता है कि कोई उसे भी ला कर जहर देदे तो खा कर मर जाए.

अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने एक नफरतभरी दृष्टि रामभरोसे पर डाली फिर बोले, ‘‘रामभरोसे, तुम्हारी क्रूरता और नशेबाजी के कारण तुम्हारी पत्नी व बेटियों ने अपनी जान दे दी. वह तो मर गईं, लेकिन तु झे तिलतिल मरने को छोड़ गईं. अब पश्चात्ताप के आंसू बहाने से कोई फायदा नहीं. तुम्हें तुम्हारे किए कर्म की सजा कानून देगा. वक्त की मार से न कोई बच पाया है और न तुम बचोगे. तुम्हारी पत्नीबेटियों को इंसाफ जरूर मिलेगा.

पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने थाना प्रभारी रवींद्र कुमार को आदेश दिया कि वे रामभरोसे के विरुद्ध आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज करें और उसे जेल भ्ेजें. आदेश पाते ही रवींद्र कुमार ने मृतका श्यामा के ससुर रामसागर को वादी बना कर भा.द.वि. की धारा 309 के तहत राम भरोसे के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया और उसे विधि सम्मत बंदी बना लिया. पूछताछ में श्यामा की हताश जिंदगी की अंत की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई.

फतेहपुर जनपद की खागा तहसील के बहुआ ब्लौक के अंतर्गत एक गांव पड़ता है-नौगांव. दलितबाहुल्य इस गांव में जयराम रैदास अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा 3 संतानें थीं. बेटे का नाम रामप्रकाश था, जबकि बेटियों में श्यामा व रामदेवी थीं. जयराम के पास कृषि योग्य भूमि नाममात्र की थी. सो, वह दूसरों की जमीन बंटाई पर ले कर फसल तैयार करता था. कृषि उपज से ही वह अपने परिवार का भरणपोषण करता था. अतिरिक्त आमदनी के लिए जयराम साप्ताहिक बाजार में जूताचप्पल की मरम्मत का काम भी करता था.

श्यामा जयराम की संतानों में सब से बड़ी थी. श्यामा बचपन से ही खूबसूरत थी. उस ने जब जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो उस का जिस्म खिल उठा. श्यामा अपने मातापिता के साथ खेत पर काम करने जाती थी. आतेजाते गांव के मनचले युवक उसे घूरघूर कर देखते थे. भद्दे मजाक व फब्तियां कसते  थे लेकिन श्यामा उन को भाव नहीं देती थी.

श्यामा को चाहने वालों में एक गनपत भी था. वह उसी की जातिबिरादरी का था और दिखने में स्मार्ट था. वह गांव के जूनियर हायर सैकंडरी स्कूल में सफाई कर्मचारी था. श्यामा भी उसे मन ही मन चाहती थी. लेकिन दिल की बात कभी जबान पर नहीं ला पाती थी. श्यामा और गनपत की उम्र में यद्यपि 5-6 वर्ष का अंतर था फिर भी वह उस की ओर आकृष्ट थी.

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एक रोज श्यामा और गनपत को बगीचे में हंसतेबतियाते श्यामा के भाई प्रकाश ने देख लिया. उस ने यह बात अपने मांबाप को बता दी. इस के बाद तो घर में कलह मच गई. जयराम ने श्यामा को ख्ूब खरीखोटी सुनाई और गनपत से न मिलने की हिदायत दी. मां ने भी श्यामा को प्यार से सम झाया और गनपत से नयनमटक्का न करने की सलाह दी. दरअसल, जयराम और उस की पत्नी गांव के युवक के साथ बेटी की शादी करने को राजी न थे. दूसरे, जयराम की गनपत के परिवार से पुरानी दुश्मनी भी थी.

श्यामा अपने मांबाप की चहेती थी. वह उन की कद्र भी करती थी. इसलिए उस ने बड़ी आसानी से मांबाप की बात मान ली और गनपत से मिलनाजुलना बंद कर दिया. एक दिन गनपत ने उस का रास्ता  रोका और जबरदस्ती हाथ पकड़ा तो उस ने उस की शिकायत अपने तथा गनपत के घर वालों से कर दी. छेड़छाड़ को ले कर तब दोनों परिवारों में जम कर तूतू मैंमैं हुई. लेकिन इस छेड़छाड़ से जयराम को आभास हो गया कि उस की बेटी श्यामा अब जवान हो गई है. अब उसे उस की शादी जल्द ही कर देनी चाहिए.

जयराम ने इस बाबत अपनी पत्नी से विचारविमर्श किया. उस के बाद वह श्यामा के योग्य घरवर की खोज में जुट गया. उस ने नातेरिश्तेदारों को भी कोई बेटी के योग्य लड़का बताने को कहा. जयराम ने खागा, धाता तथा किशनपुर में बेटी के योग्य लड़के पसंद किए. लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह रिश्ता पक्का न कर सका. आखिर में एक रिश्तेदार के माध्यम से उसे एक लड़का रामभरोसे पसंद आ गया.

रामभरोसे का पिता रामसागर रैदास, फतेहपुर शहर के शांतिनगर महल्ले में रहता था. उस के परिवार में पत्नी गौरादेवी के अलावा 2 पुत्र दिनेश तथा रामभरोसे थे. रामसागर का शांति नगर में पुश्तैनी मकान था.

वह ट्रक व ट्रैक्टर की कमानी की मरम्मत करने वाली दुकान पर काम करता था. उस ने रामभरोसे को भी इसी दुकान पर काम करने के लिए लगा लिया था. रामभरोसे शरीर से तो स्वस्थ था किंतु उस का रंग काला था. राम भरोसे के पिता रामसागर से जयराम ने अपनी बेटी श्यामा की शादी की बात चलाई तो वह बिना दहेज बेटे की शादी करने को राजी हो गया. इस के बाद वर्ष 1996 में श्यामा का विवाह रामभरोसे के साथ हो गया.

शादी के लाल जोडे़ में लिपटी श्यामा पहली बार ससुराल पहुंची तो सभी ने उस के रूपसौंदर्य की प्रशंसा की. सुहागरात को रामभरोसे ने जब उस का घूंघट पलटा तो चांद सा सुंदर मुखड़ा देख कर वह ठगा सा रहा गया. वहीं दूसरी ओर, जब श्यामा ने कालेकलूटे पति को देखा तो उस के सपने बिखर गए. श्यामा ने जिस सुदर्शन युवक के सपने संजोए थे रामभरोसे उस के जैसा नहीं था. लेकिन श्यामा ने यह मान कर कि जैसा पति लिखा था वैसा मिला. रामभरोसे को स्वीकार कर लिया.

श्यामा ने ससुराल आते ही घरगृहस्थी का काम संभाल लिया था. उस ने अपने सरल स्वभाव तथा सेवासुश्रुषा से सासससुर का दिल जीत लिया था. वे उस की तारीफ करते नहीं अघाते थे. हंसीखुशी से जीवन व्यतीत करते 3 वर्ष बीत गए. इन 3 वर्षों में श्यामा ने एक सुंदर सी बच्ची को जन्म दिया. उस का नाम उस ने पिंकी रखा. पिंकी के जन्म से पूरे घर में खुशी छा गई. उस की किलकारियों से उस का घरआंगन गूंजने लगा.

पिंकी के जन्म के 5 वर्ष बाद श्यामा ने एक और बेटी को जन्म दिया. उस का नाम उस ने प्रियंका रखा. रामभरोसे का परिवार बढ़ा तो उसे खर्च की चिंता सताने लगी. रामभरोसे की आय सीमित थी. दुकान पर उसे जो पैसा मिलता उसे वह घरगृहस्थी चलाने को पिता को देता था. पत्नी के हाथ पर कुछ भी नहीं रख पाता था. जिस से श्यामा को छोटेछोटे खर्च के लिए भी ससुर रामसागर का मुंह देखना पड़ता था. रामसागर कभी तो पैसे दे देता तो कभी इंकार भी कर देता था.

श्यामा को एक पुत्र की चाहत थी, ताकि वंशबेल आगे बढ़े. कुदरत ने उस की यह चाहत तो पूरी नहीं की बल्कि उस की गोद में एक के बाद एक 2 बेटियां और डाल दीं. इन बेटियों का नाम उस ने वर्षा तथा रूबी रखा. इस तरह अब श्यामा की 4 बेटियां पिंकी, प्रियंका, वर्षा और रूबी घरआंगन में कूदनेफुदकने लगीं. श्यामा की सास बारबार बेटी के जन्म से श्यामा से नाराज रहने लगी थी. अब वह उसे हीनभावना से देखने लगी थी और उस के काम में टोकाटाकी करने लगी थी.

4-4 बच्चों का पालनपोषण कोई साधारण बात नहीं होती. श्यामा भी जब बच्चों के पालनपोषण में व्यस्त रहने लगी तो उस की घरेलू काम में व्यस्तता कम हो गई. काम न करने को ले कर श्यामा और उस की जेठानी सुषमा में  झगड़ा होने लगा. सुषमा चालाक और चापलूस औरत थी. वह श्यामा के रूपसौंदर्य से जलती थी. उस की बेटियों से भी नफरत करती थी. साथ ही, सास के कान उस के विरुद्ध भरती रहती थी. सास, तब सुषमा का पक्ष ले कर श्यामा को भलाबुरा कहती थी.

देवरानीजेठानी का  झगड़ा बढ़ा तो कलह ने घर में पांव पसार लिए. इस कलह का परिणाम यह हुआ कि रामभरोसे शराब पीने लगा. जिस दिन घर में कलह होती उस दिन वह कुछ ज्यादा ही पी कर आता. श्यामा उसे टोकती तो वह उसे मारनेपीटने लगता. नशे में वह मांबाप तथा भाईभैजाई को भी खूब खरीखोटी सुनाता. यही नहीं, वह घर में तोड़फोड़ भी करता. उस के उत्पात से पूरा घर सहम जाता. रामभरोसे अब अपनी पूरी कमाई नशाखोरी में ही उड़ाने लगा.

Satyakatha: स्पा सेंटर की ‘एक्स्ट्रा सर्विस’- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला 25 वर्षीय राजेश गुड़गांव में एक मल्टीनैशनल कंपनी में जौब करता था. उस की अभी शादी नहीं हुई थी. गुड़गांव में जिस जगह वह काम करता था वहां उसे काम करते हुए करीब 3 साल हो गए थे.

मल्टीनैशनल कंपनी में इतने समय से काम करने के दौरान उस के कई दोस्त बने. कुछ खानेपीने वाले दोस्त बने तो कुछ बचाने वाले. कमाल की बात यह थी कि राजेश इन दोनों में किसी भी कैटेगरी में नहीं आता था.

उसे जितनी तनख्वाह मिलती, उस का कुछ हिस्सा वह बचा लिया करता था और बाकी अपने औफिस के दोस्तों और अपने बचपन के दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने के लिए खर्च कर दिया करता. 25 साल की अपनी इस उम्र तक आतेआते उस ने अपने जीवन में कई चीजों का अनुभव हासिल कर लिया था. लेकिन अभी भी कई चीजें ऐसी थीं, जिन का अनुभव उसे नहीं था.

एक दिन ऐसे ही औफिस में कंप्यूटर स्क्रीन के आगे बैठ कर काम करतेकरते राजेश के टेबल पर पड़ा पेन लुढ़क कर नीचे फर्श पर गिर गया. वह अपने काम में इतना मशगूल था कि उसे अपना पेन उठाना याद ही नहीं रहा.

देखते ही देखते लंच टाइम हो गया और राजेश का अपने कंप्यूटर स्क्रीन से ध्यान टूटा. उस ने अपनी कुरसी पर बैठेबैठे ही अंगड़ाई ली और उस की नजर नीचे गिरे अपने पेन पर गई.

वह पहले तो अपनी कुरसी छोड़ सीधा खड़ा हो गया, उस के बाद एक झटके से अपने शरीर को आधा झुका कर वह नीचे गिरे पेन को उठाने लगा.

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अचानक से झटके के साथ अपना पेन उठाने की वजह से राजेश ने अपनी कमर की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव महसूस किया.

उसे एक पल के लिए भरोसा ही नहीं हुआ कि उस के जवान शरीर में खिंचाव कैसे आ सकता है भला. उस के बाद उस ने अपने बैग से लंच के लिए खाने का डब्बा निकाला और अपने दोस्तों के साथ औफिस की कैंटीन में खाना खाने के लिए निकल गया.

खाना खाते हुए उस ने अपने दोस्तों को दोपहर को हुई अपनी उस घटना के बारे में बताया तो हर कोई उसे अपने शरीर में खिंचाव ठीक करने के तरहतरह की तरकीबें बताने लगा.

कोई उसे डाक्टर के पास जाने के लिए कहता तो कोई उसे योगा करने की हिदायत देता. यह देख का औफिस के मैनेजर विनय, जोकि राजेश का ही दोस्त था, ने राजेश को अपने शरीर पर मसाज करवाने की सलाह दी.

विनय ने राजेश से कहा, ‘‘मेरी मान तो तुझे अपने शरीर पर मसाज करवा लेनी चाहिए. हमारा शरीर समय समय पर अपने पुर्जों के रखरखाव के लिए इन चीजों की मांग करता है.’’

राजेश ने विनय की बात को गौर से सुनते हुए सवाल किया, ‘‘यार मसाज से कहां कुछ ठीक होता है?’’

विनय ने राजेश के सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘‘मसाज करवाने के कोई साइड इफेक्ट्स भी तो नहीं हैं. अगर तू इस के लिए डाक्टर के पास जाता है तो वो तुझे दवाइयां देंगे, दवाइयों से साइड इफेक्ट्स के खतरे भी तो होंगे. इस से बेहतर है कि तू प्राकृतिक तरीके से अपने शरीर की मालिश करवा ले. इस में कोई नुकसान भी नहीं है.’’

राजेश को विनय की बातों में कुछ तो दम दिखा और उस ने तय कर लिया कि वह जल्द से जल्द अपने शरीर की मालिश करवाएगा ताकि ये समस्या और न बढ़ सके.

उस ने विनय से अगले दिन की छुट्टी मांगी और उस से किसी मसाज सेंटर के बारे में पूछा. अगले दिन वह सुबह 10 बजे के आसपास अपने घर से मसाज करवाने के लिए निकला.

उसे अपने इलाके में तो कहीं भी कोई स्पा सेंटर नहीं दिखाई दिया तो उस ने अपने फोन में इंटरनेट की मदद से दिल्ली में स्पा सेंटर तलाशना शुरू किया. इंटरनेट पर उसे दिल्ली के अच्छे स्पा सेंटर की एक लंबीचौड़ी लिस्ट दिखाई दी.

उस ने उत्तम नगर से नजदीक द्वारका में एक स्पा सेंटर में जाने का तय कर लिया. रास्ते से उस ने आटो लिया और द्वारका की ओर निकल पड़ा.

करीब 20 मिनट बाद वह द्वारका में उस मसाज व स्पा सेंटर पर पहुंच गया, जो उस ने गूगल से खोजा था. स्पा सेंटर के बाहर एक बड़ा सा बोर्ड लगा था, जिस पर गुलाब के फूल, तेल, चंदन और कई तरह की चीजों के फोटो छपे थे.

काले रंग के शीशों के दरवाजे को राजेश ने खोल कर सेंटर में प्रवेश किया तो देखा कि अंदर रिसैप्शन में बेहद हल्की लाइट जल रही थी.

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सेंटर के अंदर रौशनी इतनी कम थी कि सिर्फ रिसेप्शन काउंटर पर बैठी महिला का चेहरा और आसपास की एकाध चीज ही नजर आ रही थी. लेकिन सेंटर के अंदर चीजों की सजावट देख कर राजेश काफी प्रभावित हुआ. उसे ये सब देख कर काफी अच्छा सा महसूस हो रहा था.

रिसैप्शन पर बैठी सुंदर सी युवती ने इधरउधर देखते राजेश का ध्यान तोड़ते हुए पूछा, ‘‘जी सर, आप कैसी मसाज करवाना चाहते हैं?’’

राजेश का ध्यान एकाएक रिसैप्शन पर बैठी युवती पर गया और वह हकपकाते हुए बोला, ‘‘मुझे नहीं पता. मैं पहली बार मसाज करवाने आया हूं.’’

दरअसल, राजेश रिसैप्शन पर बैठी युवती की सुंदरता को देख कर और ज्यादा हकपका रहा था.

रिसैप्शन पर बैठी युवती ने राजेश के हकपकाने और घबराने का कारण जान लिया था. वह समझ गई थी कि यह पहली बार मसाज करवाने के लिए आया है और अपने सामने सुंदर सी महिला को देख कर घबरा रहा है.

महिला ने राजेश की घबराहट को कम करने के लिए उस से दोस्ताना व्यवहार करते हुए सब से पहले अपना नाम बताया. फिर बोली, ‘‘सर, घबराने की जरूरत नहीं है. मेरा नाम पूनम है और मैं ये स्पा सेंटर संभालती हूं. सर, आप यह बताइए कि कैसी मसाज करवाना पसंद करेंगे? क्योंकि हमारे पास कई वैरायटी के मसाज आप्शन हैं.’’

पूनम की बात सुन कर राजेश की घबराहट थोड़ी कम हुई और वह बोला, ‘‘पूनमजी, दरअसल मुझे पता ही नहीं है कि मुझे कौन सी मसाज करवानी है. कल औफिस में काम करते समय मेरा पेन नीचे गिर गया था. जब मैं उसे उठाने लगा तो मुझे कमर में खिंचाव महसूस हुआ. मेरे मैनेजर ने मुझे सलाह दी कि मुझे मसाज करवाना चाहिए, इसीलिए मैं यहां आप के पास आया हूं.’’

‘‘आप बिलकुल सही जगह पर आए हैं सर. आप को चिंता करने की जरूरत नहीं है. इस समस्या के लिए हम अपने ग्राहकों को स्पैशल मसाज की सलाह देते हैं सर. इस में हर तरह के मसाज का आनंद लिया जा सकता है.’’ पूनम ने राजेश को अपने स्पा सेंटर का मेनू कार्ड थमाते हुए कहा.

मेनू कार्ड अपने हाथ में लेते हुए राजेश ने स्पैशल मसाज पर नजर घुमाई और उस ने देखा कि उस की कीमत 2,500 रुपए थी. राजेश ने पूनम को उन के स्पैशल मसाज पर मंजूरी देते हुए कहा, ‘‘ठीक है मैडम. आप स्पैशल मसाज ही करा दीजिए.’’

राजेश के यह कहते ही दुकान की धीमी रौशनी को चीरते हुए हलके गुलाबी रंग की ड्रेस में कुछ युवतियां, जिन की उम्र करीब 24 से 30 साल की होगी, राजेश के सामने आ कर खड़ी हो गईं.

सब ने एकएक कर के राजेश से हाथ मिलाते हुए अपना नाम बताया. उस समय वहां एकलौता राजेश ही पुरुष था और बाकी सब युवतियां थीं.

इस से पहले कि राजेश उन सभी के उस से हाथ मिलाने की वजह जान पाता, इतनी देर में रिसैप्शन में बैठी पूनम बोल पड़ी, ‘‘सर, ये सभी हमारे स्पा सेंटर में मसाज करती हैं. आप इन में से किसी की भी सेवा ले सकते हैं.’’

अगले भाग में पढ़ें- रीटा ने राजेश के सवाल का क्या जवाब दिया

सजा- भाग 3: तरन्नुम ने असगर को क्यों सजा दी?

असगर ने तरन्नुम का हाथ दबाया, ‘‘मेरे दोस्त अपने घर में मुझे मेहमान रखने की इजाजत नहीं देंगे.’’

‘‘पर मैं तो मेहमान नहीं, आप की बीवी हूं,’’ तरन्नुम ने मरियल आवाज में दोहराया.

‘‘उन की पहली शर्त ही कुंआरे को रखने की थी और ऐसी जल्दी भी क्या थी. मैं ने लिखा था कि घर मिलते ही बुला लूंगा,’’ असगर का दबा गुस्सा बाहर आया.

‘‘हमारी शादी को 8 महीने हो गए. तब से अभी तक अगर अपना घर नहीं मिला तो क्या किराए का भी नहीं मिल सकता था,’’ तरन्नुम ने खीज कर पूछा. उसे दिल ही दिल में बहुत बुरा लग रहा था कि शादी के चंद महीने बाद ही वह खास औरताना अंदाज में मियांबीवी वाला झगड़ा कर रही थी.

‘‘ठीक है,’’ असगर ने कहा, ‘‘अब तुम दिल्ली आ ही गई हो तो घरों की खोज भी कर लो. तुम्हें खुद ही पता लग जाएगा कि घर ढूंढ़ना कितना आसान है,’’ होटल में आ कर भी तरन्नुम महसूस कर रही थी कहीं कुछ है जो असगर को सामान्य नहीं होने दे रहा.

अगले दिन असगर जब दफ्तर चला गया तब तरन्नुम ने अपनी सहेली रीता अरोड़ा को फोन किया और अपनी घर न मिलने की मुश्किल बताई. रीता ने कहा कि वह शाम को अपने परिचितों, मित्रों से बातचीत कर के कुछ इंतजाम करेगी.

दूसरे दिन रीता अपनी कार ले कर तरन्नुम को लेने आई. रास्ते से उन्होंने एक दलाल को साथ लिया जो विभिन्न स्थानों में उन्हें मकान दिखाता रहा. शाम होने को आई लेकिन अभी तक जैसा घर तरन्नुम चाहती थी वैसा एक भी नहीं मिला. कहीं घर ठीक नहीं लगा तो कहीं पड़ोस तरीके का नहीं. अगर दोनों ठीक मिल गए तो आसपास का माहौल बेतुका. दलाल को छोड़ते हुए रीता ने घर के बारे में पूरी तरह अपनी इच्छा समझाई.

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दलाल ने कहा 2-3 दिन के अंदर ही ऐसे कुछ घर खाली होने वाले हैं तब वह खुद ही उन्हें फोन कर के सही घर दिखाएगा.

असगर तरन्नुम से पहले ही होटल आ गया था. थकी, बदहवास तरन्नुम को देख कर उसे बहुत अफसोस हुआ. फोन पर चाय का आदेश दे कर बोला, ‘‘कहां मारीमारी फिर रही हो? यह काम तुम्हारे बस का नहीं है.’’

‘‘वाह, जब शादी की है तो घर भी बसा कर दिखा देंगे. आप हमारे लिए घर नहीं खोज सके तो क्या. हम ही आप को घर ढूंढ़ कर रहने को बुला लेंगे,’’ तरन्नुम खुशी से छलकती हुई बोली.

‘‘चलो, यही सही,’’ असगर ने कहा, ‘‘चायवाय पी कर नहा कर ताजा हो लो फिर घर पर फोन कर देना. अभी अब्बू परेशान हो रहे होंगे. उस के बाद नाटक देखने चलेंगे. और हां, साड़ी की जगह सूट पहनना. तुम पर बहुत फबता है.’’

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असगर की इस बात पर तरन्नुम इठलाई, ‘‘अच्छा मियांजी.’’

रात देर से लौटे, दिन भर की थकान थी, इतना तो तरन्नुम कभी नहीं घूमी थी. पर अब रात को भी उसे नींद नहीं आ रही थी. कल देखे जाने वाले घरों के बारे में वह तरहतरह के सपने संजो रही थी. उस का अपना घर, उस का अपना खोजा घर.

नाश्ते के बाद असगर दफ्तर चला गया. तरन्नुम रीता के इंतजार में तैयार हो कर बैठी उपन्यास पढ़ रही थी. उस का मन सुबह से ही किसी भी चीज में नहीं लग रहा था. होटल भला घर हो सकता है कभी? उसे लग रहा था जैसे वह मुसाफिरखाने में अपने सामान के साथ बैठी अपनी मंजिल का इंतजार कर रही है और गाड़ी घंटों नहीं, हफ्तों की देर से आने का सिर्फ ऐलान ही कर रही है और हर पल उस की बेचैनी बढ़ती ही जा रही है.

अचानक फोन की घंटी से जैसे वह गहरी सोच से जाग उठी. रीता ने होटल की लौबी से फोन किया था. रीता की आवाज खुशी से खनक रही थी. तरन्नुम ने झटपट पर्स उठाया और लौबी में आ गई. रीता ने बाहर आतेआते कहा, ‘‘आज ही सुबह बिन्नी दी का फोन आया था. उन के पड़ोस में कोई मुसलिम परिवार है, उन्हीं की कोठी का ऊपरी हिस्सा खाली हुआ था. उस घर की मालकिन बिन्नी दी की खास सहेली हैं. उन्हीं की गारंटी पर तुम्हें घर देने के लिए तैयार हैं. जितना किराया तुम दे सकोगी उन्हें मंजूर होगा.’’

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रीता और तरन्नुम पंचशील पार्क की उस कोठी में गए. तरन्नुम को गेट खोलते ही बहुत अच्छा लगा. घर के बाहर छोटा सा लेकिन बहुत खूबसूरत लौन, इस भरी गरमी में भी हराभरा नजर आ रहा था.

शिल्पा- राज कुंद्रा : अपराध और भगवान

फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का वैष्णो देवी जाना एक साथ कई प्रश्न खड़े कर देता है. हाल ही में पति राज कुंद्रा पर पोर्नोग्राफी के गंभीर आरोप लगे, वह जेल में हैं.

अब शिल्पा भक्ति में लवलीन हो गई है, सवाल है ऐसा क्यों होता है कि जब भी कोई मनुष्य अपराध के आरोपों से घिर जाता है पुलिस कानून के शिकंजे में फंस जाता है तो उसे और परिजनों को भगवान याद आता है?

या फिर गलत तरीके से कमाए गए पैसों से कहीं कोई मंदिर बनवा देता है. और समझता है कि प्रायश्चित हो गया, मुझे मुक्ति मिल गई?

समाज में यह मानसिकता बेहद घातक है और एक तरफ से अपराध करने की अप्रत्यक्ष रूप से छुट देता है. अर्थात पहले तो आप खुब अपराध करिए जितना हो सके दोनों हाथों से लूटिए और जब पुलिस पकड़ ले या फिर आत्मग्लानि हो तो भगवान की शरण में चले जाओ!

यह मानसिकता जाने कब से चली आ रही है और जाने कब खत्म होगी. आज हमारे इस लेख का विषय यही है कि ऐसी मानसिकता को आपके समक्ष उद्घाटित करते हुए यह प्रयास किया जाए की समाज में चल रही यह मनोवृत्ति खत्म होनी चाहिए. क्योंकि किसी भी दृष्टि से यह उचित नहीं है समाज में इसे प्रश्रय नहीं मिलना चाहिए.यह एक ऐसा घातक मनोविकार है जिसका कोई ओर छोर भी नहीं है. मगर हम यह कह सकते हैं कि इस मनो वृत्ति को जाने कब से समाज और परिवार का एक तरह से समर्थन मिला हुआ है. जिसके कारण यह बढ़ती चली जा रही है. और एक नासूर बन चुकी है जिसका खत्म होना बहुत आवश्यक है.

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शिल्पा शेट्टी का व्यवहार

पुलिस ने शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा पर आरोप लगाया और गिरफ्तार किया तो शिल्पा शेट्टी का व्यवहार देखने लायक था वह एक पत्नी होने के नाते निसंदेह सब कुछ जानती होंगी की सच क्या है और झूठ क्या है. मगर उन्होंने सार्वजनिक रूप से यही कहा कि उनके पति श्रीमान राज कुंद्रा ऐसा कभी नहीं कर सकते उन्हें फंसाया गया है.

लाख टके का सवाल यही है कि राज कुंद्रा जैसे एक शख्स को जो एक सेलिब्रिटी का पति है जिसकी अपनी एक अहमियत है, वजूद है उसे भला कोई कैसे और क्यों फंसा सकता है?

इस मामले में जिस तरीके से बयान आए कई लड़कियों ने खुल कर के राज कुंद्रा की असलियत को बताना शुरू किया तो फिर बाकी बचा क्या रह गया.

और जैसा कि हमेशा होता रहा है अगर कोई हमारा परिजन अपराधिक कृत्य में पाया जाता है तो हम आमतौर पर उसके पक्ष में खड़े रहते हैं, यही काम शिल्पा शेट्टी ने भी किया . मगर इससे समाज में है जिस विकृति को बढ़ावा मिल रहा है वह कैसे खत्म होगी.

धन संपत्ति की लालच में लोग कानून को अपने हाथ में लेकर के किस तरह से फिल्मी दुनिया की आड़ में रुपए बनाने का खेल करते हैं यह कुछ-कुछ राज कुंद्रा मामले में देश देख रहा है.

शिल्पा शेट्टी ने अपना कथित धर्म निभाया है यह कहा जा सकता है. लेकिन समाज का और देश का धर्म क्या है क्या कोई परिजन अपराध करने लगे तो उसका बचाव करना और उसे कानून से बचा कर ले आना ही मानव धर्म है?

निसंदेह यह गलत होगा और गलत है. मगर समाज में जब हमारे आसपास यही हो रहा है जब देश दुनिया के बड़े लोग यही कर रहे हैं तो फिर कानून का राज कहां है. क्या इस तरीके से कानून को मानवता को धत्ता नहीं बताया जा रहा है.

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कोई सांई बाबा, कोई वैष्णो देवी

राज कुंद्रा के खिलाफ मुंबई क्राइम ब्रांच ने 1500 पन्नों की चार्जशीट दायर कर दी है. आरोप पत्र में अभीनेत्री शिल्पा शेट्टी के बयान को भी दर्ज किया गया है. ऐसा लग रहा है जब राज कुंद्रा बुरी तरह फंस गए हैं तो मुश्किल हालात में शिल्पा को वैष्णो देवी के दर्शन के‌ लिए पहुंच गई. राज कुंद्रा 19 जुलाई से कथित रूप से पोर्नोग्राफी मामले जेल में बंद हैं.

अक्सर देखा गया है कि जब कोई कानून के फंदे में फंसता है तो बचने के लिए न किसी देवी देवता के शरण में पहुंच जाता है. आम तौर पर हम देखते हैं कि यही कारण होता है कि देश के बहुचर्चित मंदिरों में करोड़ों रूपए का चढ़ावा पहुंचता है मंदिर करोड़ों रुपए के ट्रस्ट बनते जा रहे हैं. और आम गरीब आदमी को दो वक्त का भोजन भी नहीं मिलता. यह एक बहुत बड़ा सच है यह मानसिकता देश, मानवता के लिए अपराध भी है और घातक भी.

GHKKPM: 300 एपिसोड पूरा होने पर पाखी, सई और विराट ने ऐसे मनाया जश्न, देखें Photos

नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा स्टारर सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ की कहानी एक दिलचस्प मोड़ ले रही है. सीरियल में इन दिनों लव ट्रैगल दिखाया जा रहा है.  हर हफ्ते  शो को टीआरपी चार्ट में जगह मिल रही है. दर्शक शो की कहानी को खूब पसंद कर रहे हैं. बता दें कि इस शो ने 300 एपिसोड पूरा कर लिया है और इस खुशी में‘गुम है किसी के प्यार में’ की टीम जश्न मना रही है.

टीम मेंबर्स ने सेलिब्रेशन की फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर की है. इन फोटोज में पाखी, सई और विराट नजर आ रहे हैं. फोटोज में तीनों की बॉन्डिंग आप देख सकते हैं. फोटो में ऑफस्क्रीन तीनों काफी क्लोज दिखाई दे रहे हैं.

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फोटो में आप देख सकते हैं कि  इस सेलिब्रेशन के लिए  केक मंगाए गए हैं. फोटोज से ही पता चलता है कि टीम सेलिब्रेशन के लिए काफी एक्साइटेड है.

 

‘गुम है किसी के प्यार में’ के लेटेस्ट एपिसोड की बात करे तो पाखी विराट का प्यार पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है. पाखी पूजा के दौरान विराट का अटेंशन पाने के लिए अपनी जान दांव पर लगाने वाली है. जी हां, पाखी अपना और सम्राट का गठबंधन आग में डाल देगी. ताकि विराट उसे आकर बचाये. लेकिन विराट के आने से पहले ही सम्राट जोर से चिल्लाता है जिससे पाखी डर जाती है. पाखी का बनाया हुआ खेल उसी पर भारी पड़ जाता है.

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शो में गिखाया जा रहा है कि विराट पाखी को पसंद नहीं करता है. उसे सिर्फ और सिर्फ सई से प्यार है. लेकिन खबरों के अनुसार पाखी-विराट  असल जिंदगी में इस साल के अंत तक शादी के बंधन में बंध सकते हैं. आपको बता दें कि ‘गुम है किसी के प्यार में’  इस शो के शूटिंग के दौरान ही नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा एक-दूसरे को अपना दिल दे बैठे.

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एक इंटरव्यू के अनुसार, नील भट्ट ने बताया था कि हमें एक-दूसरे का साथ अच्छा लगता है. हम शुरुआत से ही अपने रिलेशनशिप को लेकर सीरियस थे.एक लंबे समय तक का रिलेशन चाहते थे. यह कभी कम समय के लिए नहीं था.

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