Manohar Kahaniya: सेक्स चेंज की जिद में परिवार हुआ स्वाहा

इतना संपन्न परिवार होने के बावजूद मलिक परिवार में बीते कुछ समय से अशांति बनी हुई थी. बीते कुछ समय से अभिषेक घर वालों से 5 लाख रुपयों की मांग कर रहा था.

Manohar Kahaniya: सेक्स चेंज की जिद में परिवार हुआ स्वाहा- भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

लेखक- शाहनवाज

रोहतक का रहने वाला 20 साल का अभिषेक जब दिल्ली में स्किल कोर्स करने गया तो उस की दोस्ती समलैंगिक कार्तिक से हुई. यह दोस्ती प्यार में बदल गई. कार्तिक से शादी करने के लिए अभिषेक ने अपना लिंग चेंज कराने की ठान ली. लेकिन उस के मातापिता ने अपने इकलौते बेटे को इस की इजाजत नहीं दी. तब समलैंगिक प्यार में अंधे हो चुके अभिषेक ने अपने घर वालों को कुछ इस तरह से सजा दी कि सब की रूह कांप गई.

हरियाणा में रोहतक के विजय नगर में रहने वाला मलिक परिवार, इलाके के संपन्न परिवारों में से

एक था. घर के मुखिया प्रदीप मलिक को रोहतक का हर इंसान जानता था. पेशे से वह प्रौपर्टी डीलिंग का काम किया करते थे और हर कोई उन्हें बबलू पहलवान के नाम से जानता था. उन के छोटे से हंसतेमुसकराते  परिवार में उन की पत्नी संतोष देवी उर्फ बबली, उन का एकलौता बेटा अभिषेक मलिक उर्फ मोनू और एकलौती बेटी तमन्ना उर्फ नेहा ही थी.

मलिक परिवार में कभी भी किसी भी सदस्य को किसी भी चीज की कमी नहीं थी. घर के दरवाजे पर एक गाड़ी खड़ी रहती, बच्चों के हाथों में उन के मनमुताबिक एप्पल के मोबाइल फोन और तो और दोनों बच्चों के पास एप्पल के ही लैपटौप थे.

इतना संपन्न परिवार होने के बावजूद मलिक परिवार में बीते कुछ समय से अशांति बनी हुई थी. बीते कुछ समय से अभिषेक घर में अपने घर वालों से 5 लाख रुपयों की मांग कर रहा था.

हालांकि उस के पिता बबलू पहलवान ने उसे पैसे देने से इंकार नहीं किया था, लेकिन घर में अशांति तब पैदा हुई जब घर वालों को अभिषेक के 5 लाख रुपयों की मांग करने की असली वजह पता चली.

घर वालों के लिए ये बात इतनी गंभीर थी कि उन्होंने अभिषेक पर घर में कई तरह की पाबंदियां तक लगा दीं. आखिर वह वजह क्या थी?

27 अगस्त, 2021 के दिन जब अभिषेक को लगा कि उस पर घर वालों के द्वारा लगाई गई पाबंदियां कुछ ढीली पड़ी हैं, तो उस ने तय किया कि वह बाहर घूम कर आएगा. आखिर वह पिछले 20 दिनों से घर में किसी कैदी की तरह रहने को मजबूर था जिस के साथ कोई भी ढंग से बात करने को राजी नहीं था. यहां तक कि उस की मां और बहन भी उस से नजरें नहीं मिलाते थे. घर में अभिषेक को समझानेबुझाने के लिए उस की नानी रोशनी देवी भी आई थीं. सिर्फ उस की नानी ही उस से इन दिनों बात किया करतीं और उस का खयाल रखा करती थीं.

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27 अगस्त को घर में हर कोई मौजूद था. उस के पापा भी उस दिन काम से नहीं निकले थे. करीब सुबह 11 बजे के आसपास अभिषेक ने घर में किसी को कुछ नहीं बताया और घर से थोड़ा टहलने के लिए निकल गया. विजय नगर के पास ही एक जगह पर उस का दोस्त कार्तिक दिल्ली से उस से मिलने आया था तो अभिषेक वहीं चला गया. जब वह अपने पक्के यार कार्तिक से मिल कर दोपहर को ढाई बजे के करीब घर पर लौटा तो उस ने देखा कि घर में सभी कमरे बाहर से बंद थे.

उस ने कमरा खटखटाया लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. उस ने अपनी बहन नेहा को फोन मिलाया लेकिन घंटी बजती रही. अभिषेक ने उस के बाद अपनी मां के नंबर पर फोन किया. इस बार रिंगटोन जोर से बजी और ये समझ आया कि फोन घर पर ही है लेकिन किसी ने भी नहीं उठाया.

हार मान कर उस ने अपने पिता के नंबर पर फोन किया लेकिन वही हुआ जो अभी तक होता आ रहा था, किसी ने फोन नहीं उठाया और कोई जवाब नहीं मिला. घर के सदस्यों को लगातार फोन करने का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा लेकिन जब अभिषेक को कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा हुआ तो उस के दिल में घबराहट पैदा हो गई.

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अभिषेक ने बिना किसी देरी के अपने पापा के साथ प्रौपर्टी डीलिंग में पार्टनर और उस के मामा प्रवीण, जोकि सांपला के रहने वाले थे, को फोन मिलाया. उस ने हड़बड़ाते हुए कहा, ‘‘मामा, घर पर कोई फोन नहीं उठा रहा, दरवाजा भी लौक हो रखा है. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि क्या हुआ है. अंदर से किसी की आवाज नहीं आ रही है..’’

उस के मामा प्रवीण ने उसे हौसला रखने को कहा, ‘‘अरे चिंता मत कर, मैं देखता हूं एक बार.’’

अगले भाग में पढ़ें- घर के बाहर जुट गई भीड़

Satyakatha- इश्क का जुनून: प्यार को खत्म कर गई नफरत की आग- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

लेखक-  दिनेश बैजल ‘राज’/संजीव दुबे

पुलिस ने प्रेमी युगल की खोजबीन करते हुए 24 अगस्त को नेहा के पिता देवीराम को शक के आधार पर हिरासत में ले लिया. पुलिस को किसी अनहोनी का शक था क्योंकि देवीराम ने अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने के संबंध में थाने में कोई रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं कराई थी?

पुलिस ने जब उस से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया. उस ने अपना जुर्म कुबूल करते हुए कहा, ‘‘बेटी नेहा के अपने प्रेमी उत्तम के साथ भाग जाने से उस के परिजन काफी नाराज थे. इस कृत्य से बेटी ने परिवार की नाक कटवा दी.’’

इस सनसनीखेज अपहरण व हत्याकांड का रहस्योद्घाटन करते हुए पुलिस को देवीराम ने जो खौफनाक जानकारी दी, वह रोंगटे खड़ी कर देने वाली थी.

देवीराम ने बताया कि 31 जुलाई, 2021 को नेहा जब उत्तम के साथ घर से भाग गई तो सभी लोग उस के लिए परेशान हो गए. इस बीच उन की खोजबीन की गई. इसी दौरान दोपहर को उत्तम के दोस्त वीनेश निवासी कुतुकपुर ने फोन पर उसे सूचना दी कि दोनों पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हैं. तब उस ने वीनेश से कहा कि वह किसी तरह वीनेश को वहीं रोके रहे. वह दिल्ली पहुंच रहा है. वीनेश ने ऐसा ही किया.

उधर देवीराम कुछ लोगों को साथ ले कर कार से दिल्ली के लिए निकल गया और पुरानी दिल्ली पहुंच गया. पिता और अन्य को देख कर नेहा डर गई. प्रेमी युगल समझ नहीं पा रहा था कि उन के साथ अब क्या होगा.

देवीराम नेहा और उत्तम को रात करीब 2 बजे थाना नसीरपुर स्थित बांकलपुर भट्ठे पर ले आया. यहां दोनों को समझाने का प्रयास किया. लेकिन वे नहीं माने.

उन के न मानने पर उस ने अपने साथ आए लोगों को घर भेज दिया. इस के बाद फोन कर अपने भाई शिवराज को इस घटनाक्रम की जानकारी दी.

शिवराज आगरा जिले के पिनाहट स्थित बाबा बर्फानी कोल्ड स्टोर पर मुनीम की नौकरी करता था. शिवराज कार ले कर भट्ठे पर आ गया. यहां से नेहा और उत्तम को कार में बैठा कर वे नौरंगी घाट पहुंचे.

उन्होंने पहले बेटी नेहा की गला दबा कर हत्या कर लाश यमुना में फेंक दी. इस बीच उत्तम ने शोर मचाया. तब उत्तम की भी गला दबा कर हत्या कर उस की लाश भी उसी स्थान पर यमुना में फेंक दी. शिवराज गाड़ी ले कर पिनाहट चला गया. जबकि देवीराम पैदल ही गांव पहुंचा.

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इस के बाद एसएसपी अशोक कुमार शुक्ला ने आगरा पुलिस से संपर्क किया. प्रेमी युगल के शवों की तलाश के लिए गोताखोरों की टीम बुलाई गई.

26 अगस्त को पीएसी के गोताखोर स्टीमर ले कर बटेश्वर के नौरंगी घाट पहुंचे और देवीराम द्वारा यमुना में शव फेंके जाने वाले स्थान व आसपास कई किलोमीटर के क्षेत्र में शवों की तलाश शुरू की गई.

19 घंटे तक पुलिस के गोताखोरों ने तलाशे शव

19 घंटे की तलाश के बाद भी युवक व किशोरी नेहा के शव बरामद नहीं हुए. एसपी अशोक कुमार शुक्ला के अनुसार शवों को फेंके हुए काफी समय हो चुका है. ऐसे में शवों के बह कर जाने और जलीय जंतुओं द्वारा खाने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है. हालांकि पुलिस ने हार नहीं मानी और शवों की अपने स्तर से यमुना व आसपास के क्षेत्रों में तलाश जारी रखी.

जबकि वास्तविक कहानी कुछ और ही निकली. जहांगीरपुर गांव का यह प्रेमी जोड़ा औनर किलिंग का शिकार तो हुआ था. लेकिन पूरे मामले के तार उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, राजस्थान व मध्य प्रदेश से जुड़े निकले.

राजस्थान व मध्य प्रदेश में एक युवक और एक किशोरी के शव मिलने के बाद इस मामले में 42 दिन बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ.

प्रेमी युगल का देवीराम व घरवालों ने दिल्ली से अपहरण कर दोनों की हत्या कर शव राजस्थान व मध्य प्रदेश में फेंक दिए थे. देवीलाल पुलिस को गुमराह कर दोनों के शवों को बटेश्वर स्थित नौरंगी घाट स्थित यमुना में फेंकने की बात कहता रहा.

इस घटना का खुलासा दूसरे आरोपी शिवराज, जोकि नेहा का चाचा है, ने पुलिस रिमांड के दौरान किया. नामजद आरोपी शिवराज ने 3 सितंबर को कोर्ट में सरेंडर कर दिया था. जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

पुलिस ने उस की रिमांड के लिए 13 सितंबर को प्रार्थनापत्र दिया. इस पर कोर्ट ने 14 सितंबर को 48 घंटे का रिमांड स्वीकृत किया.

थाना सिरसागंज के थानाप्रभारी प्रवेंद्र कुमार व आईओ एसएसआई मोहम्मद खालिद आरोपी शिवराज को ले कर थाने आए और उस से पूछताछ की. इस संबंध में जो असली कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

31 जुलाई, 2021 को नेहा व उत्तम गांव से भाग कर दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे थे. वहां पहुंच कर उत्तम ने रहने के लिए कमरा किराए पर लेने का निर्णय लिया. इस काम में मदद के लिए उस ने कुतुकपुर निवासी अपने करीबी दोस्त वीनेश को फोन किया.

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वीनेश के पिता विनोद दिल्ली में काम करते हैं. वीनेश दिल्ली आताजाता रहता था. वीनेश उस समय अपने गांव में था. उसे उत्तम ने पूरी बात बताई और दिल्ली में रहने के लिए कमरा किराए पर दिलाने की बात कही.

वीनेश ने यह जानकारी नेहा के पिता देवीराम को दे दी. जानकारी मिलते ही देवीराम ने कहा, ‘‘वीनेश, तुम उसे वहीं रोक कर रखो.’’

इस पर वीनेश ने उत्तम से कहा, ‘‘तुम मैट्रो पर ही मिलना. मैं दिल्ली आ रहा हूं. वहां तुम्हें कमरा दिलवा दूंगा.’’

यह सुन कर उत्तम और नेहा को तसल्ली हुई. वे वीनेश के आने का इंतजार करने लगे.

देवीराम अपने भाई शिवराज व गांव के श्याम बिहारी, रोहित, राहुल, अमन उर्फ मोनू व कुतुकपुर के वीनेश व गुंजन ड्राइवर के साथ ईको कार से 31 जुलाई को ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए. रास्ते में बीचबीच में वीनेश उत्तम से मोबाइल पर बात करता रहा.

दिल्ली पहुंच कर वीनेश ने उत्तम से संपर्क किया. अचानक वीनेश के साथ अपने घरवालों को देख कर नेहा व उत्तम डर गए. लेकिन देवीराम ने दोनों को प्यार से समझाते हुए कहा, ‘‘तुम लोगों को इस तरह नहीं भागना चाहिए था. इस से दोनों ही परिवारों की गांव में बदनामी होगी. तुम लोग घर चलो.’’

बहलाफुसला कर वे दोनों को दिल्ली से अपने साथ ले आए. रात करीब एक बजे वे लोग थाना नसीरपुर स्थित बांकलपुर भट्ठे पर पहुंचे. यहां दोनों को समझाते रहे कि वे एकदूसरे को भूल जाएं. लेकिन दोनों एक साथ रहने की जिद पर अड़े रहे. उन्होंने कहा कि वे शादी करना चाहते हैं और शादी के बाद वे गांव नहीं आएंगे.

दगाबाज निकला जिगरी दोस्त वीनेश

उत्तम ने जिस जिगरी दोस्त वीनेश से सिर छिपाने के लिए मकान दिलाने को कहा था. वही दोस्त प्रेमी युगल की जान का दुश्मन बन गया. उस ने फोन कर नेहा के पिता देवीराम को दोनों के ठिकाने की जानकारी दे कर दिल्ली ले जा कर उन्हें धोखे से पकड़वा दिया. दोस्त यदि दगा न करता तो आज प्रेमी युगल जिंदा होता.

तभी देवीराम के भाई शिवराज ने अपने परिचित जितेंद्र शर्मा को फोन कर आलू व्यापारी सुनील की बोलेरो ले कर आने को कहा. कुछ देर बाद जितेंद्र शर्मा सुनील के साथ उस की बोलेरो ले कर रात 3 बजे भट्ठे पर पहुंच गया.

उत्तम और नेहा को भट्ठे से पिनाहट स्थित कोल्ड स्टोरेज पर ला कर शिवराज ने एक कमरे में दोनों के हाथपैर बांध कर बंधक बना कर 2 दिन यानी 2 व 3 अगस्त को रखा. यहां देवीराम ने अपने भाई व अन्य के साथ एक खौफनाक साजिश रची.

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इस के बाद देवीराम ने अपने परिचित बालकराम को फोन कर मध्य प्रदेश के भिंड शहर में मिलने के लिए कहा. 3 अगस्त की रात साढ़े 10 बजे देवीराम उस का भाई शिवराज, देवीराम का भतीजा जैकी, सुनील प्रेमी युगल नेहा व उत्तम को ले कर भिंड पहुंच गए. वहां उन्हें बालकराम मिल गया. वह भी गाड़ी में बैठ गया. गाड़ी झांसी ग्वालियर मार्ग होते हुए ग्वालियर जिले के डबरा पहुंची.

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पांच साल बाद- भाग 3: क्या निशांत को स्निग्धा भूल पाई?

कहतेकहते उस ने निसंकोच निशांत का दाहिना हाथ पकड़ लिया और प्यार से उसे सहलाते हुए बोली, ‘मुझे खेद है कि मैं ने तुम्हारे जैसा हीरा खो दिया, परंतु अफसोस तो मुझे इस बात का अधिक है कि आजादी और समाज से विद्रोह के नाम पर परंपराओं को तोड़ने का जो नासमझी भरा कदम मैं ने इलाहाबाद जैसे पारंपरिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक शहर में किया था, वह मेरे जीवन की सब से बड़ी भूल थी. उस भूल का परिणाम तुम देख ही रहे हो कि आज मैं कैसी हूं और कितनी तन्हा. इतनी तन्हा, जितना किसी गुफा का सन्नाटा हो सकता है.’

स्निग्धा की आंखों में आंसू छलक आए. निशांत ने उस की आंखों को देखा, परंतु उस ने उस के आंसू पोंछने का कोई प्रयास नहीं किया. बस, अपने हाथों को धीरे से उस के हाथों से अलग कर के कहा, ‘हर आदमी जीवन में कोई न कोई भूल करता है, परंतु उस के लिए अफसोस करने से दुख कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता ही है,’ उस के स्वर में दृढ़ता थी.

‘सच कहते हो तुम,’ उस ने झटके से अपने आंसू पोंछ डाले और मुसकराने का प्रयास करती हुई बोली, ‘मैं अपना अतीत याद नहीं करना चाहती, परंतु उसे बताए बिना तुम मेरी बात नहीं समझ पाओगे. विगत की हर एक बात मैं तुम्हें नहीं बताऊंगी. बस, उतना ही जितने से तुम मेरे मन को समझ सको और यह समझ सको कि मैं ने अपने विद्रोही स्वभाव के कारण क्या पाया और क्या खोया.’

‘इतना भी आवश्यक नहीं है,’ वह गंभीरता से बोला, ‘तुम सामान्य बातें करोगी तो मुझे अच्छा लगेगा.’

‘मैं तुम्हारे मन की दशा समझ सकती हूं. तुम मेरे दुख से दुखी नहीं होना चाहते हो.’

‘मैं तुम्हारे सुख से सुखी होना चाहता हूं,’ उस ने स्पष्ट किया.

स्निग्धा को उस की बात से घोर आश्चर्य हुआ. वह हकबका कर बोली, ‘मैं कुछ समझी नहीं?’

‘जिस जगह तुम मुझे छोड़ कर गई थीं, उसी जगह पर मैं अभी तक खड़ा हो कर तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा हूं,’ उस ने निसंकोच कहा.

स्निग्धा के हृदय में मधुर वीणा के तारों सी झंकार हुई, ‘लेकिन तुम अच्छी तरह जानते हो कि मैं बिना शादी के राघवेंद्र के साथ रह रही थी. तुम्हें पता नहीं है कि पिछले 5 सालों में मेरे साथ क्याक्या गुजरा है?’

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निशांत ने प्रश्नवाचक भाव से उस की तरफ देखा और अपने दोनों हाथों को मेज पर रख कर उस की तरफ झुकता हुआ बोला, ‘तुम चाहो तो बता सकती हो.’

स्निग्धा ने एक राहत भरी सांस ली और बोली, ‘मैं बहुत लंबा व्याख्यान नहीं दूंगी. मेरी बातों से ऊबने लगो तो बता देना.’

उस ने सहमति में सिर हिलाया और तब स्निग्धा ने धीरेधीरे उसे बताया, ‘मैं ने परंपराओं, सामाजिक मर्यादा और वर्जनाओं का विरोध किया. बिना शादी के एक युवक के साथ रहने लगी. परंतु जिसे मैं ने आजादी समझा था वह तो सब से बड़ा बंधन था. सामाजिक बंधन में तो फिर भी प्रतिबद्धता होती है, एकदूसरे के प्रति लगाव और कुछ करने की चाहत होती है परंतु बिना बंधन के संबंधों का आधार बहुत सतही होता है. वह केवल एक विशेष जरूरत के लिए पैदा होता है और जरूरत पूरी होते ही मर जाता है.

‘मैं राघवेंद्र के साथ रहते हुए बहुत खुश थी. हम दोनों साथसाथ घूमते, राजनीतिक पार्टियों में शामिल होते. मेरी अपनी महत्त्वाकांक्षा भी थी कि राघवेंद्र के सहारे मैं राजनीति की सीढि़यां चढ़ कर किसी मुकाम तक पहुंच जाऊंगी, परंतु यह मेरी भूल थी. 3 साल बाद ही मुझे महसूस होने लगा कि राघवेंद्र मुझे बोझ समझने लगा था. अब वह मुझे अपने साथ बाहर ले जाने से भी कतराने लगा था. बातबात पर खीझ कर मुझे डांट देता था.

मैं समझ गई, वह केवल अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए मुझे अपने साथ रखे हुए था. मेरा रस चूस लेने के बाद अब वह मुझे बासी समझने लगा था. वह मुरझाए फूल की तरह मुझे फेंक देना चाहता था. उस की बेरुखी से मैं ने महसूस किया कि हम जिस शादी के बंधन को बोझ समझते हैं, वह वाकई वैसा नहीं है. बिना शादी के भी तो 2 व्यक्ति वही सबकुछ करते हैं, परंतु बिना किसी जिम्मेदारी के और जब एकदूसरे से ऊब जाते हैं तो बड़ी आसानी से जूठी पत्तल की तरह फेंक देते हैं. लेकिन मान्यताप्राप्त बंधन में ऐसा नहीं होता.

‘मैं ने भी अगले 2 साल तक और बरदाश्त किया, परंतु एक दिन राघवेंद्र ने मुझ से साफसाफ कह दिया कि मुझे अपना राजनीतिक कैरियर बनाना है. तुम अपने लिए कोई दूसरा रास्ता चुन लो. तुम्हारे साथ रहने से मेरी बदनामी हो रही है. अगला आम चुनाव आने वाला है. अगर तुम मेरे साथ रहीं तो मेरी छवि धूमिल हो जाएगी और मुझे टिकट नहीं मिलेगा.’

‘मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गई. मेरी सारी शक्ति, समाज से बगावत करने का जोश जैसे खत्म हो गया. मैं समझ गई, नारी चाहे जितना समाज से विद्रोह करे, पुरुष के हाथों की कठपुतली न बनने का मुगालता पाल ले, परंतु आखिरकार वह वही करती है जो पुरुष चाहते हैं. वह पुरुष की भोग्या है. जानेअनजाने वह उस के हाथों से खेलती रहती है और सदा भ्रम में जीती है कि उस ने पुरुष को ठोकर मार कर आजादी हासिल कर ली है.

‘जिस समाज से मैं विद्रोह करना चाहती थी, जिस की मान्यताएं, परंपराओं और वर्जनाओं को तोड़ कर मैं आगे बढ़ना चाहती थी, उसी समाज के एक कुलीन और सभ्य व्यक्ति ने मेरा सतीत्व लूट लिया था या यों कहिए कि मैं ने ही उस के ऊपर लुटा दिया था. बताओ, एक शादीशुदा औरत और मुझ में क्या फर्क रहा? शादीशुदा औरत को भी पुरुष भोगता है और बिना शादी किए मुझे भी एक पुरुष ने भोगा. उस ने अपनी भूख मिटा ली. परंतु नहीं, हमारी जैसी औरतों और शादीशुदा औरतों में एक बुनियादी फर्क है. जहां शादीशुदा औरत यह सब कुछ एक मर्यादा के अंतर्गत करती है, हम निरंकुश हो कर वही काम करती हैं. एक पत्नी को शादी कर के परिवार और समाज की सुरक्षा मिलती है, परंतु हमारी जैसी औरतों को कोई सुरक्षा नहीं मिलती. पत्नी के प्रति पति जिम्मेदार होता है, उस के सुखदुख में भागीदार होता है, जीवनभर उस का भरणपोषण करता है, परंतु हमें भोगने वाला व्यक्ति हर प्रकार की जिम्मेदारी से मुक्त होता है. वह हमें रखैल बना कर जब तक मन होता है, भोगता है और जब मन भर जाता है, ठोकर मार कर गलियों में भटकने के लिए छोड़ देता है.’

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वह बड़ी धीरता और गंभीरता से अपनी बात कह रही थी. निशांत पूर्ण खामोशी से उस की बातें सुन रहा था. बीच में उस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की, न कुछ बोला. अपनी बात खत्म करतेकरते स्निग्धा भावों के अतिरेक से विह्वल हो कर रोने लगी. परंतु निशांत ने उसे चुप नहीं कराया.

कुछ देर बाद वह स्वयं शांत हो गई.

पता नहीं, निशांत क्या सोच रहा था. उस का सिर झुका हुआ था और लग रहा था जैसे वह स्निग्धा की सारी बातों को मन ही मन गुन रहा था, उन पर मनन कर रहा था. फिर और कई पल गुजर गए. इस बीच वेटर आ कर कई बार पूछ गया कि कुछ और चाहिए या बिल लाऊं. उस ने इशारे से उसे 2 और कोल्ड कौफी लाने को आदेश दे दिया था.

– क्रमश: 

Bigg Boss 15: डबल गेम खेल रहे हैं करण कुद्रा, Tejasswi Prakash ने लगाईं लताड़

बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) में लगातार करण कुंद्रा (Karan kundrra) और तेजस्वी प्रकाश (Tejasswi Prakash) सुर्खियों में छाये हुए हैं. शो में दोनों की दोस्ती गहरी होती हुई दिखाई दे रही है. ये दोनों एक-दूसरे से अपने दिल की बात भी शेयर करते हुए नजर आ रहे हैं. इसी बीच एक प्रोमो सामने आया है. जिसमें तेजस्वी प्रकाश करण कुंद्रा से नाराजगी जाहिर करती हुई दिखाई दे रही है.

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि तेजस्वी प्रकाश करण से  कह रही हैं कि वह शो में डबल गेम खेलने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि करण सबके सामने अच्छा बनने की कोशिश करते हैं. इसलिए वह शमिता शेट्टी से खूब बात करते हैं लेकिन पीठ पीछे बुराई करते हैं. ये बात सुनकर करण कुंद्रा कहते हैं कि उनको तेजस्वी प्रकाश की बातें हर्ट कर रही हैं.

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शो में आपने देखा कि कैप्टेंसी टास्क की वजह से घमासान मचा हुआ है. तो वहीं करण कुंद्रा और शमिता शेट्टी इस टास्क के संचालन कर रहे थे. ये टास्क पहले उमर रियाज की टीम ने पूरा किया. घरवालों ने उमर रियाज और उनकी टीम की हालत खराब कर दी थी.  इस दौरान करण कुंद्रा, उमर रियाज की मजाक बनाते नजर आए. करण कुंद्रा ने शमिता शेट्टी से कहा कि उमर रियाज इसी लायक है, उमर रियाज तो एक गधा है.

 

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सोशल मीडिया पर उमर रियाज के फैंस ने करण कुंद्रा की जमकर क्लास लगा दी. एक यूजर ने लिखा, करण कुंद्रा शमिता शेट्टी को भड़काने की कोशिश कर रहा है. मेकर्स को ये सब हरकतें बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए. तो वहीं दूसरे फैन ने लिखा कि मेकर्स उमर रियाज को शो में स्पेस नहीं दे रहे हैं.

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फैंस ने ये भी कहा कि मेकर्स करण कुंद्रा को सपोर्ट कर रहे हैं जो कि अपने गेम के लिए उमर रियाज की इमेज खराब कर रहा है. कुछ फैंस तो करण कुंद्रा की तुलना गधे से कर दी.

अनुज के लाइफ में होगी नई औरत की एंट्री, क्या अनुपमा हो जाएगी दूर?

स्टार प्लस का सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) की कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. शो में अनुपमा का नया अवतार देखने को मिल रहा है. जिससे बा, वनराज और काव्या भड़कते हुए नजर आ रहे हैं. शो में आपने देखा कि वनराज ने अनुपमा के चरित्र पर लांछन लगाया जिससे अनुपमा ने अपना आपा खो दिया है और शाह हाउस छोड़ने का फैसला किया. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो आने वाले एपिसोड में अनुपमा की कहानी पूरी तरह से बदल जाएगी. शो में नया ट्रैक शुरू होगा. अनुपमा की जिंदगी अब अलग ही ट्रैक पर बढ़ने वाली है. शो में नई एंट्री होगी. रिपोर्ट के अनुसार अनुपमा में जानी-मानी एक्ट्रेस सविता प्रभुने की एंट्री होने वाली है. जी हां, उन्होंने ‘पवित्र रिश्ता’ में अंकिता लोखंडे (अर्चना) की मां का किरदार निभाया था.

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खबरों के अनुसार सविता प्रभुने का कनेक्शन अनुज से होगा. बताया जा रहा है कि वह अनुपमा-अनुज को दूर करने की कोशिश करेंगी. खबर ये भी है कि अनुज की यह आंटी चाहेंगी कि वह एक यंग लड़की से शादी करे और उसके अपने बच्चे हों.

 

रिपोर्ट के अनुसार अनुज की आंटी को पता चलेगा कि अनुपमा तीन बच्चों की मां है और अनुज उससे प्यार करता है तो वह अनुपमा से नफरत करने लगेंगी.

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शो में दिखाया गया था कि अनुपमा बा और वनराज से तंग आ चुकी हैं और उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. ऐसे में वह शाह हाउस छोड़ने का फैसला करती है. नंदिनी, समर, पाखी साथ में अनुपमा के फैसले का समर्थन करते हैं.वह अपना बैग पैक करती है और निकल जाती है. अब अनुपमा अपने मां के घर में रहेगी.

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बस एक सनम चाहिए- भाग 2: शादी के बाद भी तनु ने गैर मर्द से क्यों रखा रिश्ता

साल भर तक तो उन का यह आंखों वाला प्यार चला और फिर धीरेधीरे दोनों में प्रेम पत्रों का आदानप्रदान होने लगा. 1-2 बार छोटेमोटे गिफ्ट भी दिए थे दोनों ने एकदूसरे को. कई बार स्कूल के बाद कुछ देर रुक कर दोनों बातें भी कर लेते थे. तनु पहले की तरह ही मुझे अपने सारे राज बताती थी. अब तक हम दोनों 12वीं क्लास में आ गए थे. मैं ने एक दिन तनु से चुटकी ली, ‘‘कब तक चलेगा तुम्हारा यह प्यार?’’

तनु मुसकरा कर बोली, ‘‘जब तक प्यार सिर्फ प्यार रहेगा. जिस दिन इस की निगाहें मेरे शरीर को टटोलने लगेंगी, वही हमारे रिश्ते का आखिरी दिन होगा.’’ ‘‘अरे यार, आशिकों का क्या है? रिकशों की तरह होते हैं. एक बुलाओ तो कई आ जाते हैं,’’ तनु ने बेहद लापरवाही से कहा.

मैं उस की बोल्डनैस देख कर हैरान थी. मैं ने पूछा, ‘‘तनु, तुम्हें ये सब करते हुए डर नहीं लगता?’’ ‘‘इस में डरने की क्या बात है? अगर ऐसा कर के मेरा मन खुश रहता है तो मुझे खुश होने का पूरा हक है. और हां, ये लड़के लोग भी कहां डरते हैं? फिर मैं क्यों डरूं? क्या लड़की हूं सिर्फ इसलिए?’’ तनु थोड़ा सा गरमा गई. मेरे पास उस के तर्कों के जवाब नहीं थे.

उस दिन हमारी स्कूल की फेयरवैल पार्टी थी. हम सब को स्कूल के नियमानुसार साड़ी पहन कर आना था. तनु लाल बौर्डर की औफ व्हाइट साड़ी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी. हम लोग हमेशा की तरह साइकिलों पर नहीं, बल्कि टैक्सी से स्कूल गए थे. शाम को घर लौटते समय तनु ने मेरे कान में कहा, ‘‘मैं ने आज अपना रिश्ता खत्म कर लिया.’’ ‘‘मगर तुम तो हर वक्त मेरे साथ ही थी. फिर कब, कहां और कैसे उस से मिली? कब तुम ने ये सब किया?’’ मैं ने आश्चर्य के साथ प्रश्नों की झड़ी लगा दी.

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‘‘शांतशांतशांत…जरा धीरे बोलो.’’ तनु ने मुझे चुप रहने का इशारा किया और फिर बताने लगी, ‘‘टैक्सी से उतर के जब तुम सब स्कूल के अंदर जाने लगी थीं उसी वक्त मेरी साड़ी चप्पल में अटक गई थी, याद करो…’’ ‘‘हांहां… तुम पीछे रह गई थी,’’ मैं ने याद करते हुए कहा.

‘‘जनाब वहीं खड़े थे. टैक्सी की आड़ में, पहले तो मुझे जी भर के निहारा, फिर हाथ थामा और बिना मेरी इजाजत की परवाह किए मुझे बांहों में भर लिया. किस करने ही वाला था कि मैं ने कस कर एक लगा दिया. पांचों उंगलियां छप गई होंगी गाल पर…’’ तनु ने फुफकारते हुए कहा. ‘‘अब तुम ओवर रिएक्ट कर रही हो.. अरे, इतना तो हक बनता है उस का…’’ मैं ने उसे समझाने की कोशिश की.

‘‘नहीं, बिलकुल नहीं. मेरे शरीर पर सिर्फ मेरा अधिकार है,’’ तनु अब भी गुस्से में थी. उस के बाद परीक्षा. फिर छुट्टियां और रिजल्ट के बाद नया कालेज. वह स्कूल वाला लड़का कुछ दिन तो कालेज के रास्ते में दिखाई दिया मगर तनु ने कोई रिस्पौंस नहीं दिया तो उस ने भी अपना रास्ता बदल लिया.

पता नहीं कैसी जनूनी थी तनु. उसे प्यार तो चाहिए मगर उस में वासना का तनिक भी समावेश नहीं होना चाहिए. कालेज के 3 साल के सफर में उस ने 3 दोस्त बनाए. हर साल एक नया दोस्त. मैं कई बार उसे समझाया करती थी कि किसी एक को ले कर सीरियस क्यों नहीं हो जाती? क्यों फूलों पर तितली की तरह मंडराती हो? ‘‘फूलों पर मंडराना क्या सिर्फ भौंरो का ही अधिकार है? तितलियों को भी उतना ही हक है अपनी पसंद के फूल का रस पीने का…’’ तनु ताव में आ जाती.

तनु में एक खास बात थी कि वह किसी रिश्ते में तब तक ही रहती थी जब तक सामने वाला अपनी मर्यादा में रहता. जहां उस ने अपनी सीमा लांघी, वहीं वह तनु की नजरों से उतर जाता. तनु उस से किनारा करने में जरा भी वक्त नहीं लगाती. वह अकसर मुझ से कहती थी, ‘‘अपनी मरजी से चाहे मैं अपना सब कुछ किसी को सौंप दूं, मगर मैं अपनी मरजी के खिलाफ किसी को अपना हाथ भी नहीं पकड़ने दूंगी.’’ ‘‘कालेज के बाद जौब भी लग गई. तनु अब तो अपनेआप को ले कर सीरियस हो जाओ. कोई अच्छा सा लड़का देखो और सैटल हो जाओ,’’ मैं ने एक दिन उस से कहा जब उस ने मुझे बताया कि आजकल उस का अपने बौस के साथ सीन चल रहा है.

‘‘मेरी भोली दोस्त तुम नहीं जानती इन लड़कों को. उंगली पकड़ाओ तो कलाई पकड़ने लगते हैं. जरा सा गले लगाओ तो सीधे बिस्तर तक घुसने की कोशिश करते हैं. जिस दिन मुझे ऐसा लड़का मिलेगा जो मेरी हां के बावजूद खुद पर कंट्रोल रखेगा, उसी दिन मैं शादी के बारे में सोचूंगी,’’ तनु ने कहा. ‘‘तो फिर रहना जिंदगी भर कुंआरी ही. ऐसा लड़का इस दुनिया में तो मिलने से रहा.’’

इस के बाद कुछ ही महीनों में मेरी शादी हो गई. तनु ने भी जयपुर की अपनी पुरानी जौब छोड़ कर मुंबई की कंपनी जौइन कर ली. कुछ समय तो हम एकदूसरे के संपर्क में रहे फिर धीरेधीरे मैं अपनी गृहस्थी और बच्चे में बिजी होती चली गई और तनु दिल के किसी कोने में एक याद सी बन कर रह गई. आज इस गाने ने बरबस ही तनु की याद दिला दी. उस से बात करने को मन तड़पने लगा. ‘पता नहीं उसे सनम मिला या नहीं…’ सोचते.

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हुए मैं ने पुरानी फोन डायरी से उस का नंबर देख कर डायल किया, लेकिन फोन स्विच औफ आ रहा था. ‘क्या करूं? कहां ढूंढ़ूं तनु को इतनी बड़ी दुनिया में,’ सोचतेसोचते अचानक मेरे दिमाग की बत्ती जल गई और मैं ने तुरंत लैपटौप पर फेस बुक लौग इन किया. सर्च में ‘तनु’ लिखते ही अनगिनत तनु नाम की आईडी नजर आने लगीं. उन्हीं में एक जानीपहचानी शक्ल नजर आई. आईडी खंगाली तो मेरी ही तनु निकली. मैं ने उसे फ्रैंड रिक्वैस्ट भेज दी.

Diwali 2021: खुशियां मनाएं मिल-बांट कर

शादी के बाद प्रिया पति के साथ पहली बार दूसरे शहर आई थी. उस के पति का ‘दृष्टि रेजीडैंसी’ में खूबसूरत फ्लैट था. अपने शहर में प्रिया का बड़ा सा परिवार था. त्योहार के दिन सभी एकजुट हो, मिलबांट कर खुशियां मनाते थे. यहां उसे अकेलापन महसूस हो रहा था. जैसेजैसे दीवाली करीब आ रही थी. प्रिया की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे? पति प्रकाश से बात करने पर पता चला कि उस के ज्यादातर दोस्त बाहर के रहने वाले हैं. वे लोग पहले से ही घर जाने का टिकट करा चुके हैं.

कुछ लोग हैं जो उस के फ्लैट से दूर रहते थे. प्रिया ने अपने कौंप्लैक्स में रहने वाले कुछ परिवारों से कम दिनों में अच्छी जानपहचान कर ली थी. उस ने उन सब के साथ मिल कर बात की तो पता चला कि कौंप्लैक्स में कुछ परिवार दीवाली मनाते हैं. वे भी अपने फ्लैट के अंदर ही दीवाली मना लेते हैं. बहुत हुआ तो किसी दोस्त को कुछ उपहार दे कर त्योहार मना लेते हैं. अब प्रिया ने तय कर लिया कि इस बार दीवाली को नए तरह से मनाना है. दृष्टि रेजीडैंसी बहुत ही खूबसूरत जगह पर थी. उस के पास में हराभरा पार्क था. प्रिया ने पार्क की देखभाल करने वाले से कह कर पार्क को साफ करा दिया.

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इस के बाद उस ने एक खूबसूरत सा दीवाली कार्ड डिजाइन किया. इस के कुछ प्रिंट लिए और अपने कौंप्लैक्स में रहने वालों के लिए चाय, नमकीन और मिठाई का प्रबंध भी कर लिया था. उस ने दृष्टि रेजीडैंसी के सभी 50 फ्लैट के लोगों को बुलाया था. प्रिया को यकीन था कि ज्यादातर लोग आएंगे. शाम को पति प्रकाश के आने पर उस ने अपना पूरा प्लान उन को बताया. पहले तो प्रकाश को यकीन ही नहीं हुआ, लेकिन सारी तैयारियां देख कर उस का मन खुशी से भर गया. प्रकाश ने प्रिया का हाथ बंटाते हुए खुशियों को बढ़ाने के लिए दीवाली के प्रदूषणमुक्त पटाखे और गीतसंगीत के लिए डीजे का भी इंतजाम कर लिया.

शाम 8 बजे प्रिया और प्रकाश पार्क में सजधज कर पहुंच गए. थोड़ी देर के बाद एकएक कर लोग वहां पहुंचने लगे. ऐसे में दीवाली का एक नया रूप सामने आ गया. देर रात तक पार्टी चलती रही, नाचगाना, मस्ती सब कुछ खास था. बाद में लोगों ने अपने हिसाब से पटाखे और फुलझडि़यां भी चलाईं. सभी लोगों ने इस शानदार आयोजन के लिए प्रिया को दिल से धन्यवाद दिया. प्रिया ने जो शुरुआत की वह हर साल होने लगी. अब इस आयोजन में सभी परिवार मिलजुल कर काम करने लगे. पार्टी में होने वाले खर्च को भी आपस में बांट लिया गया. बहुत लोग जुटे तो पार्टी का अलग ही मजा आने लगा. दीवाली रात का त्योहार है. ऐसे में रोशनी और पटाखों का अपना अलग मजा होता है. मिठाई और नमकीन के साथ ऐसे त्योहार का मजा और भी ज्यादा बढ़ जाता है.

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खर्च घटाएं और मजा बढ़ाएं

मिलजुल कर त्योहार मनाने से त्योहार में होने वाला खर्च घटता और मजा बढ़ता है. अपने घरपरिवार से दूर रह कर भी घर जैसे मजे लिए जा सकते हैं. आज के समय में ज्यादातर लोग अपने शहर और घर से दूर कमाई के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं. अपने घर जाने के लिए उन को छुट्टी लेनी होती है. कई बार छुट्टियों में घर जाने के लिए रेल, बस और हवाई जहाज के महंगे टिकट लेने पड़ते हैं. मुसीबत उठा कर अपने घर जाना कई बार परेशानी का सबब बन जाता है. ऐसे में त्योहारों के संयुक्तरूप से होने वाले आयोजन अच्छे होते हैं. मिलजुल कर इन का आयोजन करने से सभी लोगों की हर तरह से भागीदारी रहती है. इस से कोई किसी को अपने पर बोझ नहीं समझता है. कम खर्च में अच्छा आयोजन हो जाता है. परिवार के साथ रहने से पति दोस्तों के साथ शराब पीने और जुआ जैसे कृत्य से परहेज करता है.

मिलेगा हर रिश्ता

संयुक्त आयोजन में हर रिश्ता मिलता है. जिस के मातापिता साथ नहीं रहते वे दूसरों के परिवार में रहने वाले मातापिता का साथ पाते हैं. किसी को भाभीभाई, अंकलआंटी, देवरानीजेठानी, बेटाबेटी और बहन जैसे हर रिश्ते अलगअलग परिवारों से मिल जाते हैं. आपस में जो दोस्ती पहले से होती है वह और प्रगाढ़ हो जाती है. त्योहारों के समय रिश्तों के आपस में जुड़ने से केवल खुशियां ही नहीं बांटी जा सकतीं, जरूरत पड़ने पर दुखदर्द भी बांटे जा सकते हैं. धर्म, रूढि़वादिता और कुरीतियां हमें बांटने का काम करते हैं. त्योहारों का लाभ उठा कर इस दूरी को कम किया जा सकता है.

आज एकल परिवारों का दौर है. ऐसे में बच्चों को बहुत सारे रिश्तों और उन की गंभीरता का अंदाजा नहीं होता है. अगर ऐसे आयोजन होते रहेंगे तो एकल परिवार में रहते हुए भी किसी हद तक संयुक्त परिवारों का मजा लिया जा सकता है.

मजेदार होंगे पार्टी गेम्स

संयुक्त आयोजन को मजेदार बनाने के लिए पार्टी गेम्स को भी उस में शामिल कर सकते हैं. ये हर उम्र को ध्यान में रख कर तैयार किए जाने चाहिए. इस से आयोजन में रोचकता बनी रहेगी. लोगों का समय पास होगा. गीतसंगीत का हलकाफुलका आयोजन भी करना चाहिए. इस में पार्टी में शामिल हुए लोगों की हिस्सेदारी होनी चाहिए. हर किसी में कुछ अलग काम करने की प्रतिभा होती है. सब को प्रतिभा के अनुरूप काम देना चाहिए. बच्चों को ऐसे आयोजनों में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उन को भी उन की प्रतिभा के अनुसार कुछ काम देना चाहिए. संयुक्त आयोजन होने से दीवाली में पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकता है.

संयुक्त आयोजन होने से त्योहार का मजा दोगुना हो जाता है. सभी धर्मों के बीच रहने वाले लोग भी इस का हिस्सा बन जाते हैं. इस से अलगअलग जगहों की संस्कृति और खानपान का मजा भी लिया जा सकता है. आज जिस तरह से आपस में दूरियां बढ़ रही हैं उसे कम करने का एक बड़ा माध्यम है कि त्योहारों की खुशियां मिलजुल कर मनाएं. केवल रेजीडैंशियल कौंप्लैक्स में ही नहीं, कसबों, महल्लों, शहरों और गांवों में भी दीवाली उत्सव के संयुक्त आयोजन होने चाहिए. इस से समाज में एक नए प्यार और सौहार्द का माहौल बनेगा.

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Crime: एक सायको पीड़ित की अजब दास्तां

माता-पिता बच्चों को पढ़ने के लिए  भेजते हैं मगर एक युवक की साइबर पुलिस द्वारा कथित खुलासे के बाद यह तथ्य चिंता का सबब बन गया है कि जब कोई युवा मानसिक रूप से पीड़ित होकर अश्लील हरकतें करने लगे और माध्यम सोशल मीडिया को बनाए तो आसपास की महिलाएं और लड़कियां को कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

पुलिस ने एक एक अलग ही आरोपी एक आईआईटी छात्र को पटना, बिहार से गिरफ्त में लिया  है. जिस पर आरोप है  राजधानी दिल्ली के एक नामी स्कूल की पचास से अधिक छात्राओं और महिला शिक्षकों को -“सोशल नेटवर्किंग साइट” के द्वारा भयादोहन अर्थात ब्लैक मेलिंग करने लगा था.पुलिस के मुताबिक महावीर पटना के खाजेकला थाना इलाके के गुजरी बाजार का रहवासी है. लंबी तफ्तीश के पश्चात गिरफ्तार कर लिया.

दरअसल संपूर्ण घटनाक्रम के पश्चात जो कहानी सामने आई है उसके अनुसार सिविल लाइंस स्थित स्कूल की तरफ से पुलिस को अगस्त माह में शिकायत मिली थी कोई अंजान शख्स ऑनलाइन कक्षाओं में अवैध तौर पर घुस जाता है. वह छात्राओं को ब्लैकमेल करता है और स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप के प्रोफाइल लोगो एवं अन्य सेटिंग्स में परिवर्तन कर अश्लील हरकतें कर रहा  है. अपने आप में विचित्र सच्ची घटना थी पुलिस ने जब यह मामला हाथ में लिया तो उसके सामने एक बड़ी चुनौती थी कि इस अजब गजब मामले का पटाक्षेप कैसा होगा.आखिरकार  इंस्पेक्टर संजीव कुमार की देखरेख में साइबर सेल प्रभारी एसआई रोहित सारस्वत को जांच सौंपी गई. इस दरमियान एक छात्रा ने भी थाने में शिकायत दी कि उसके साथ कोई अश्लील हरकतें कर रहा है. फिर एसआई रोहित सारस्वत और एसआई रोहित भारद्वाज ने स्कूल की छात्राओं से बात की तो कुछ आईपी एड्रेस मिले.

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पुलिस ने व्हाट्सएप से भी आईपी एड्रेस प्राप्त किए. इस सब के आधार पर पुलिस महावीर कुमार तक अंततः पहुंच गई. एसआई प्रवीन यादव और एसआई रोहित ने  पटना से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. महावीर धातु विज्ञान से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है.

अश्लील फोटो और ब्लैकमेल

आरोपी महावीर के इकबालिया बयान के मुताबिक वह कोटा, राजस्थान में 2018 में इंजीनियरिंग की तैयारी करने के लिए जब गया था वहां  सिविल लाइंस दिल्ली स्थित स्कूल की पूर्व छात्रा से मुलाकात हुई जिसके कहने पर उसने इंस्टाग्राम पर प्रोफाइल बनाकर  बातचीत  शुरू की. आगे उसने इंस्टाग्राम पर संबंधित स्कूल की छात्राओं को ढूंढना शुरू किया. फिर उसने मोबाइल नंबर लेकर बात करनी शुरू की. एक छात्रा से उसकी दूसरी सहेली का नंबर लेकर बात करना शुरू किया. इस बीच उसके आचरण से नाराज़ छात्राओं ने बात करना बंद कर दिया तो उसने परेशान करने का निर्णय लिया.

सबसे पहले महावीर ने छेड़छाड़ कर छात्राओं की अश्लील फोटो बनाई. इसके जरिए छात्राओं को भयभीत और ब्लैकमेल करने लगा. वह डरा धमकाकर स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप और ऑनलाइन कक्षाओं के लिंक मंगा लिया करता था. फिर इन ग्रुप में कभी फोटो बदल देता तो कभी अश्लील फोटो डाल देता. यही नहीं बदला लेने के लिए महावीर ने आवाज बदलने वाले एप का इस्तेमाल किया. वह इस एप के जरिए एक छात्रा को दूसरे छात्रा के प्रति भड़काता था.

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यही नहीं स्कूल में शिक्षकों को फोन कर छात्राओं की शिकायत करता था. वह स्कूल की महिला टीचर से भी अभद्रता करता था. इसकी वजह से आठ छात्राओं को स्कूल की ऑनलाइन कक्षाओं से निकाल भी दिया गया था. मगर आखिरकार महावीर को पुलिस ने पकड़ ही लिया और आज वो जेल की हवा खा रहा है.
संगीत के द्वारा मनोविकारों की गुत्थी सुलझाने वाले शिक्षक घनश्याम तिवारी के मुताबिक आमतौर पर ऐसे ही युवक मनो विकारों से ग्रस्त होते हैं और इसके लिए जहां उन्हें चिकित्सा की आवश्यकता होती है वही संगीत के माध्यम से भी स्वास्थ्य गत लाभ संभव है. दरअसल ऐसे युवक एक ऐसे समय से गुजर रहे होते हैं जब उन्हें सही सलाह की आवश्यकता होती है उन्हें यह बताना आवश्यक होता है कि आप की सीमाएं क्या है.

पुलिस अधिकारी विवेक शर्मा के मुताबिक ऐसे ही कुछ मामलों में विवेचना की है जिसमें मैंने यह पाया है कि कम उम्र के युवक अश्लील मनोभावों से ऐसी हरकतें करने लगते हैं उन्हें कानून की जानकारी नहीं होती और अति आत्मविश्वास के कारण वे गलत दिशा में आगे बढ़ जाते हैं फिर बाद में पछताना पड़ता है.

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