अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल अभिनीत फिल्म हेरा फेरी तो आपको याद होगी. जिसमें ठगी को बड़े ही सरल ढंग से दिखाया गया है. फिल्म में पैसे उधार लेकर के भी लोग दांव लगा देते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद रहती है कि पैसा कई गुना ज्यादा हो जाएगा.

सच तो यह है कि यह एक तरह से कुछ चालबाज नेताओं और सत्ताधारी पार्टियों के कार्यकर्ताओं का अघोषित धंधा बना हुआ है. नेताओं के संरक्षण में पुलिस भी कार्रवाई नहीं करती और प्रार्थी को डपट कर थाने से भगा देने के भी कई किस्से अक्सर हमने सुने हैं. यह भी सच है कि बहुत से मामले स्वंय ही दब जाते हैं और पुलिस तक तो गिनती के ही मामले पहुंचते हैं. यह भी गंभीर तथ्य है कि कई मामलों में फरियादी थाना पुलिस के आगे पीछे घूमता रहता हैं.

क्योंकि कुछ मामलों मे फरियादी के पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं होते है. जिससे आरोपी को न्यायालय मे सजा दिलाई जा सके,कई मामलों मे पुलिस जानबूझकर कर अपराध दर्ज नहीं करना चाहती. इस प्रकार पीड़ित व्यक्ति को न्याय नहीं मिल पाता. कई बार पीड़ित ब्याज पर उधार लेकर, पैसा ठग को दे देता है, ठगी का शिकार होने से, जिनसे उधार लिए होते है उनको वापस करना मुश्किल हो जाता है. फिर वे भागते फिरते हैं या आत्महत्या कर लेते हैं.

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पहला किस्सा-

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के केदारपुर निवासी जगदीश विश्वकर्मा ने घर में गड़े धन और उसके अदृश्य रक्षकों द्वारा बढ़ाई जा रही परेशानी को दूर कराने के चक्कर मे 21 तोला सोना और 40 हजार रुपए नगद गंवा दिया. करीबी महिला रिश्तेदार के झांसे में आए परिवार के बाबा ने जैसा कहा वे वैसा करते चले गए.

बाबा ने पीतल के मटके में लिपटे सांप से बात करके इन्हें औऱ भी आश्चर्य में डाल दिया था. कथित विघ्नहर्ता बाबा ने स्वार्थ पूरा होने पर इनसे दूरी बनाई तब ठगी का एहसास हुआ. कथित तांत्रिक आचार्य संजय शर्मा द्वारा पैसा एवं सोना ठगी करने की रिपोर्ट सरगुजा अंचल के अंबिकापुर कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई है.

दूसरा किस्सा- 

संस्कारधानी कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक भौमिक नामक शख्स ने पौश इलाके में एक दमकती दुकान खोली और यह विज्ञापन देना शुरू किया कि आइए लोन लीजिए. लोग अपनी जमीन के कागजात के दस्तावेज जमा करते चले गए और ठगराज भौमिक ने बैंक से सांठगांठ करके उनके दस्तावेजों के आधार पर लगभग 9 करोड़ रुपए बिलासपुर की पांच बैंकों से निकलवा लिया.जब यह जानकारी लोगों को हुई तो बिलासपुर पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत पहुंची जांच शुरू हुई तो मामला सामने आ गया. पुलिस ने कथित ठग भौमिक के खिलाफ जांच प्रारंभ कर दी है.

तीसरा किस्सा-

छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगर कोरबा में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल, रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर विद्युत मंडल के एक पूर्व कर्मचारी ने जिला चांपा जांजगीर, कोरबा के कुछ बेरोजगारों को भ्रमित कर की उन्हें नौकरी दिलाई जाएगी. लगभग बीस लाख रुपए वसूल कर लिए. लंबे समय तक जब नौकरी नहीं लगी तो युवा थाना पहुंचे और मामला रंग लेने लगा. जांच पड़ताल में मामला सही पाया गया और आरोपी को जेल दाखिल कर दिया गया.

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देश में बेरोजगार युवाओं को ठगने का धंधा हर कोने में फल-फूल रहा है. हर दिन कहीं न कहीं से अखबारों में ऐसी खबरें सुर्खियां बटोरती रहती हैं कि किसी बेरोजगार युवक का पिता, परिजन या फिर स्वयं बेरोजगार युवक-युवती नौकरी लगाने के नाम पर, मोबाइल टावर लगाने के नाम पर, रूपये दुगुना-तिगुना करने के नाम पर, इंश्योरेंस के नाम पर, मेडिकल कालेज मे एडमिशन के नाम पर, जमीन खरीदने के नाम से, शादी के नाम पर और न जाने  कितने प्रकार के फ्राड के शिकार युवा बेरोजगार और अभिभावक लोग होते रहते है. इस संदर्भ में छत्तीसगढ़ के आईपीएस रतनलाल डांगी कहते हैं कि-“कई मामलों मे तो पीड़ित व्यक्ति लोकलाज के कारण कहीं पर शिकायत भी नहीं करता, कुछ मामलों मे पीड़ित जब शिकायत करता हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती हैं. ठगने वाले लोग अपना ठिकाना व सम्पर्क नम्बर बदल चुके होते हैं.”

हमारे संवाददाता से बातचीत में रतनलाल डांगी ने बताया की कई मामलों में दोनों पक्षों के बीच कम ज्यादा करके रकम वापसी का प्रयास चलता रहता है, कई मामलों मे रुपये के लेनदेन का कोई साक्ष्य भी नहीं होता हैं, कई मामलों में रूपये की वापसी किश्तों मे देने की बात करके पीड़ित को घुमाते रहते है.

दुखी पीड़ित आत्महत्या भी कर लेते हैं…

सरस सलिल विशेष

परेशान होकर कुछ पीड़ित न्याय मिलने से पहले ही जीवन लीला समाप्त कर लेते है. जिससे परिवार पर और असहनीय दुखों का पहाड़ टूट पड़ता हैं.कुछ संवेदनशील पुलिस अधिकारी मामला दर्ज भी कर लेते हैं. न्यायालय से मामलों में निराकरण तक कोई रकम पीड़ित को वो रकम वापस नहीं मिलती है और आरोपी उसी पैसे से अपना मामला अदालत मे लड़ते  रहते हैं. आज की सच्चाई है की शिक्षित बेरोजगार कानून की जानकारी नहीं होने की कारण और देश की लुंज पुंज व्यवस्था के कारण दोनों हाथों से ठगे जा रहे हैं. इसके लिए कानून भी जहां लचर है वही प्रश्न यह भी है कि एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति जबकि आज टीवी और समाचार पत्रों में लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं फिर पैसे देकर ठगी का शिकार क्यों हो रहा है. मां-बाप के वर्षों से कमाये हुए पैसों को गंवा कर अपनी इह लीला समाप्त कर रहा है.

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युवाओं को सचेत रहना आवश्यक…

ऐसे युवाओं को पुलिस अधिकारी विवेक शर्मा का संदेश पढ़कर गांठ बांध लेना चाहिए की अगरचे रुपये से ही नौकरी लगती तो आज  केवल अमीर लोगों के ही बच्चे सरकारी नौकरी में होते. सरकारी नौकरी शिक्षा से ही मिलती है. असफल रहने वाले और  मेहनत न करके अपने आपको सांत्वना देने और अपनी कमजोरी छिपाने के लिए लोग कहानी गढ़ लेते है कि बिना पैसे दिए लिए कुछ नहीं होता है.

यह समझने की बात है कि आप किसी तरह का शोर्टकट रास्ता न खोजें और न किसी के झांसे में आए. आपको बालक ध्रुव की कहानी स्मरण होनी चाहिए जब वह प्रभु को ढूंढने निकलता है तो उसे नारद मुनि कहते हैं कि प्रभु को पाने के दो रास्ते हैं एक कठिन जिसमें कांटे हैं पत्थर हैं दूसरा सरल. बालक ध्रुव कठिन रास्ते को अपनाते हैं और प्रभु को आप जानते ही हैं कि प्राप्त कर लेते हैं. अतः आप पढ़िए डिग्री प्राप्त करिए नौकरी आपका इंतजार कर रही है किसी के झांसे में ना आइए.

झांसे देने वाले से कहिए…

अगर आपको कोई नौकरी देने की बात कहता है तो उससे एक बात कहिए कि क्या आप स्टांप पेपर पर लिखित में दे सकते हैं की मैं नौकरी दिलाऊंगा. आप देखेंगे यह सुनते ही वह गायब हो जाएगा. वहीं अगर आप झांसे में आ गए हैं तो समझदारी से काम लें और सुबूत इकट्ठा करें कि आपने फलां व्यक्ति को पैसे दिए हैं और निकट के थाना में शिकायत दर्ज कराएं. कोई भी कदम उठाने से पहले हर बात को तस्दीक कीजिए. संदेह होने से पुलिस को अनिवार्य रूप से सूचना दीजिए. लोकलाज मे किसी बात को छिपाने का काम न कीजिए, हो सकता है आपके द्वारा ऐसी घटना उजागर करने से आपके और भी साथी ठगी का शिकार होने से बच जाए. आपकी सावधानी ही आपको ठगी का शिकार होने से बचा सकती हैं. जितना रूपये आपसे कोई ठगता है उससे आप कोई काम-धंधा भी शुरू करेंगे तो अच्छा रहेगा. आप नौकरी करने के बजाय नौकरी देने वाले बन सकते हैं.

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