Balika Vadhu 2: आनंदी और आनंद की लव स्टोरी की होगी शुरूआत, देखें Video

टीवी सीरियल बालिका वधू 2 (Balika Vadhu 2) काफी कम समय में दर्शकों के दिल में जगह बना ली है. मेकर्स शो को और भी इंट्रेस्टिंग बनाने जा रहे हैं. शो में जल्द ही नया ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के आने वाले एपिसोड के बारे में.

आनंदी और जिगर का किरदार निभा रहे वंश सयानी और श्रेया पटेल ने शो को अलविदा कह दिया है. दरअसल कहानी में 10 साल का लीप आने वाला है.

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हाल ही में मेकर्स ने बालिका वधू 2 का नया प्रोमो जारी किया है. जिसमें आनंदी,  आनंद और जिगर की पहली झलक देखने को मिल रही है.

 

बता दें कि ये रिश्ता क्या कहलाता है फेम एक्ट्रेस  शिवांगी जोशी (नायारा) बड़ी आनंदी के रूप में दिखाई दे रही हैं तो वहीं सीरियल ये उन दिनों की बात है फेम रणदीप राय को आनंद का किरदार निभा रहे हैं. और समृद्धि बावा को जिगर के भूमिका में दिखाया जा रहा है.

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शो के प्रोमो के अनुसार, कहानी में लव ट्रायंगल दिखाया जाएगा. आनंदी और जिगर की शादी बचपन में ही हो जाती है लेकिन बड़े होने के बाद आनंदी और अनंत की लव स्टोरी की शुरुआत होगी.

 

शो में आनंदी और अनंत के बीच प्यार का ट्रैक दिखाया जाएगा.  आनंदी आगे की पढ़ाई करने के लिए कॉलेज जाएगी. उसकी मुलाकात आनंद से होगी. तो वहीं जब जिगर को इन दोनों के बारे में पता चलेगा तो उसे जलन होगी.  बालिका वधू 2 की कहानी बाल विवाह और कई सामाजिक बुराइयों के खिलाफ है

टॉप 10 सामाजिक समस्याएं हिन्दी में

कहा जाता है कि हम आधुनिक जमाने में रहते हैं लेकिन आज भी हमारे समाज की सोच पुराने रीति-रिवाज और ख्यालों से बंधी हुई है, ऐसे में हमें कई समाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इन समस्याओं के कारण कई लोग अपनी जान भी गंवा देते हैं. तो इस खबर में हम आपके लिए लेकर आए हैं, टॉप 10 समाजिक समस्याएं हिन्दी. इसे पढ़कर आप इन समाजिक समस्याओं से रूबरू होंगे और समाज को सच का आईना दिखाएंगे.

  1. शर्मनाक: पकड़ौआ विवाह- बंदूक की नोक पर शादी

social issues in hindi

कहते हैं कि शादी ऐसा लड्डू है, जो खाए वह पछताए और जो न खाए वह भी पछताए. लेकिन वहां आप क्या करेंगे, जहां जबरन गुंडई से आप की मरजी के खिलाफ आप के मुंह में यह लड्डू ठूंसा जाने लगे? हम बात कर रहे हैं ‘पकड़ौवा विवाह’ की, जो बिहार के कुछ जिलों में आज भी हो रहे हैं.

22 साल के शिवम का सेना के टैक्निकल वर्ग में चयन हो गया था और वह 17 जनवरी को नौकरी जौइन करने वाला था. हमेशा की तरह एक सुबह जब वह अपने कुछ दोस्तों के साथ सैर पर निकला, तभी कार में सवार कुछ लोगों ने उसे अगवा कर लिया.

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2.गांव की औरतें: हालात बदले, सोच वही

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राज कपूर ने साल 1985 में फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ बनाई थी, जो पहाड़ के गांव पर आधारित थी. इस में हीरोइन मंदाकिनी ने गंगा का किरदार निभाया था. फिल्म का सब से चर्चित सीन वह था, जिस में मंदाकिनी  झरने के नीचे नहाती है. वह एक सफेद रंग की सूती धोती पहने होती है. पानी में भीगने के चलते उस के सुडौल अंग दिखने लगते हैं.

उस दौर में गांव की औरतों का पहनावा तकरीबन वैसा ही होता था. सूती कपड़े की धोती के नीचे ब्लाउज और पेटीकोट पहनने का रिवाज नहीं था. इस की वजह गांव की गरीबी थी, जहां एक कपड़े में ही काम चलाना पड़ता था.

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3. जिगोलो: देह धंधे में पुरुष भी शामिल

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देह व्यापार का एक बाजार ऐसा भी है, जहां के सैक्सवर्कर औरतें नहीं बल्कि मर्द होते हैं. जिन्हें जिगोलो कहा जाता है. उन्हें यौन पिपासा से भरी औरतों को हर तरह से खुश करना होता है. आजकल जिगोलो की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. इस धंधे में मोटी कमाई तो होती ही है साथ ही…

भरे बदन वाली एक अधेड़ महिला कमसिन दिखने की अदाओं के साथ ड्राइंगरूम में खड़ी थी. वहीं कुछ दूसरी महिलएं सिगरेट का धुंआ उड़ाती कुछ दूरी बना कर सोफे पर क्रास टांगों के साथ बैठी थीं. सभी के बीच अपनेअपने सैक्स अपील वाले यौवन को दर्शाने की होड़ सी दिख रही थी.

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4. रीति रिवाजों में छिपी पितृसत्तात्मक सोच

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हम पुरुषवादी समाज में रहते हैं जहां स्त्रियों को हमेशा से दोयम दर्जा दिया जाता रहा है. स्त्री कितना भी पढ़लिख ले, अपनी काबिलीयत के बल पर ऊंचे से ऊंचे पद पर काबिज हो जाए पर घरपरिवार और समाज में उसे पुरुषों के अधीन ही माना जाता है.

उस के परों को अकसर काट दिया जाता है ताकि वह ऊंची उड़ान न भर सके. स्त्रियों को दबा कर रखने और उन की औकात दिखाने के लिए तमाम रीतिरिवाज व परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं.

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5. धर्म का धंधा: कुंडली मिलान, समाज को बांटे रखने का बड़ा हथियार!

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लड़केलड़की की कुंडलियों में यदि 36 गुणों में सभी गुणों का मिलान हो जाए तो क्या इस की कोई गारंटी है कि वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा? यदि ऐसा न हुआ तो इस में किस का दोष माना जाएगा? क्या शादी से पहले कुंडली मिलान करना आवश्यक है या फिर कुंडली मिलान की प्रक्रिया के पीछे समाज को बांटे रखने वाली मानसिकता काम करती है? क्या यह सिर्फ एक धर्म में ही है या इस जैसी कोई प्रक्रिया अन्य धर्मों में भी पाई जाती है?

साल था जनवरी 2018, जब राजीव की शादी के लिए जगहजगह लड़की तलाशने के लिए लोगों के घर जाया जा रहा था. उन के घर वाले ऐसी बहू की तलाश में थे जो सुंदर हो, सुशील हो, घरबार का काम करना आता हो, पढ़ीलिखी हो इत्यादि.

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6. पत्नी की सलाह मानना दब्बूपन की निशानी नहीं

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पुरुषप्रधान समाज में आज महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं. ऐसे में पढ़ीलिखी, योग्य व समझदार पत्नी की राय को सम्मान देना पति का गुलाम होना नहीं, बल्कि उस की बुद्धिमत्ता को दर्शाता है.

कपिल इंजीनयर हैं. लोक सेवा आयोग से चयनित राकेश उच्च पद पर हैं. विभागीय परिचितों, साथियों में दोनों की इमेज पत्नियों से डरने, उन के आगे न बोलने वाले भीरु या डरपोक पतियों की है. पत्नियों का आलम यह है कि नौकरी संबंधी समस्याओं की बाबत मशवरे के लिए पतियों के उच्च अधिकारियों के पास जाते समय वे भी उन के साथ जाती हैं.

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7. वर्जिनिटी: टूट रही हैं बेडि़यां

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आदिकाल से ही औरतों के लिए शुचिता यानी वर्जिनिटी एक आवश्यक अलंकार के रूप में निर्धारित कर दी गई है. यकीन न हो, तो कोई भी पौराणिक ग्रंथ उठा कर देख लीजिए.

अहल्या की कहानी कौन नहीं जानता. शुचिता के मापदंड पर खरा नहीं उतरने के कारण जीतीजागती, सांस लेती औरत को पत्थर की शिला में परिवर्तित हो जाने का श्राप मिला था. पुराणों के अनुसार, उस का दोष सिर्फ इतना ही था कि वह अपने पति का रूप धारण कर छद्मवेश में आए छलिए इंद्र को उस के स्पर्श से पहचान न सकी.

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8. नारी हर दोष की मारी

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आज भी स्त्रियों के लिए सामाजिक एवं धार्मिक मान्यताएं जैसे उन्हें निगलने के लिए मुंह बाए खड़ी हैं. कई योजनाएं बनती हैं, लेख लिखे जाते हैं, कहानियां गढ़ी जाती हैं, प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं और सब से खास प्रतिवर्ष महिला दिवस भी मनाया जाता है. किंतु हकीकत यह है कि घर की चारदीवारी में महिलाएं बचपन से ले कर बुढ़ापे तक समाज एवं धर्म की मान्यताओं में बंधी कसमसा कर रह जाती हैं.

कुंआरी लड़की एवं विधवा दोष

कुछ महीने पहले की ही बात है  झुन झुनवाला की 25 वर्षीय बिटिया के विवाह की बात चल रही थी, लड़कालड़की दोनों ने एकदूसरे को पसंद कर लिया था. लेकिन फिर बात आगे न बढ़ सकी, जब  झुन झुनवाला से पूछा गया कि मिठाई कब खिला रही हैं तो कहने लगीं…

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9. वर्जनिटी: चरित्र का पैमाना क्यों

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हमारे शास्त्रों और सामाजिक व्यवस्था ने वर्जिनिटी यानी कौमार्य को विशेष रूप से महिलाओं के चरित्र के साथ जोड़ कर उन के लिए अच्छे चरित्र का मानदंड निर्धारित कर दिया है.

हमारे समाज में वर्जिनिटी की परिभाषा इस के बिलकुल विपरीत है. दरअसल, समाज और शास्त्रों के अनुसार इस का अर्थ है कि आप प्योर हैं. हम किसी चीज या वस्तु की प्युरिटी की बात नहीं कर रहे हैं वरन लड़की की प्युरिटी की बात कर रहे हैं. लड़की की वर्जिनिटी को ही उस की शुद्धता की पहचान बना दी गई है. लड़कों की वर्जिनिटी की कहीं कोई बात नहीं करता. बात केवल लड़कियों की वर्जिनिटी की करी जाती है.

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10. समलैंगिकता मिथक बनाम सच

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भारत में समलैंगिकता आज भी हंसीमजाक का हिस्सा मात्र है. कानून बनने के बाद भी लोग समलैंगिकता को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे कई मिथक हैं जिन के चलते समलैंगिक लोगों के लिए वातावरण दमघोंटू बना हुआ है.

पिछले वर्ष फरवरी में एक फिल्म आई थी, ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’. उस में समलैंगिक जोड़े को अपनी शादी के लिए परिवार, समाज और मातापिता से संघर्ष करते हुए दिखाया गया था. वह कहीं न कहीं हमारे समाज की सचाई और समलैंगिकों के प्रति होने वाले व्यवहार के बहुत करीब थी.

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Crime: सोशल मीडिया बनता ब्लैकमेलिंग का अड्डा

सावधान, इन दिनों सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग का अड्डा बनता जा रहा है. पहले दोस्ती, फिर सैक्ंिस्टग और अंत में ब्लैकमेलिंग के जरिए लाखों रुपए ऐंठे जा रहे हैं. ऐसा शातिर गिरोह द्वारा योजनापूर्ण तरीके से किया जा रहा है. आप भी इस की गिरफ्त में तो नहीं?

सोशल मीडिया का जाल जैसेजैसे बढ़ रहा है, लोगों के संबंध अनजान लोगों से बन रहे हैं. इन अनजान लोगों में चंद लोग तो अच्छे होते हैं. आमतौर पर सोशल मीडिया लोगों को लूटने, ब्लैकमेल करने का एक अड्डा बन चुका है.

जी हां, सोशल मीडिया की दोस्ती आप को कंगाल बना सकती है. आप को बरबाद कर सकती है. एक लंबी त्रासदी और पीड़ा से गुजरने के लिए मजबूर कर सकती है.

इस रिपोर्ट में हम आप को ऐसे ही कुछ घटनाक्रम बता रहे हैं जो एकदम सच्चे हैं और लोगों की सोशल मीडिया की दोस्ती की पीड़ा की गवाही भी.

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ह्ल पहला घटनाक्रम

राजस्थान की गुलाबी नगरी अर्थात राजधानी जयपुर में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर लोगों की फोटो एडिट कर, उसे अश्लील बना कर, वसूली करने वाले गिरोह की करतूत का आखिरकार पुलिस ने परदाफाश कर दिया है. इस गिरोह ने एक के बाद एक कई मामले अंजाम दिए. यह गिरोह नएनए लोगों को फंसा कर उन से मोटी रकम वसूल रहा था.

जयपुर के बजाज नगर थाने में एक युवक ने 2 युवतियों सहित 4 लोगों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग कर 1.75 लाख रुपए वसूल लेने के साथ और वसूली के लिए धमकी देने का मामला दर्ज करवाया.

दरअसल, हुआ यह कि एक युवती रागिनी (काल्पनिक नाम) ने सोशल मीडिया की एक साइट देख कर व्हाट्सऐप मैसेज किया. फिर उक्त नंबर को ब्लौक कर दिया. इस के बाद एक अन्य नंबर से फोन आया और फोन करने वाले ने धमकी दी कि पीडि़त का नंबर गलत साइट पर डाल देंगे.

धमकी देने वाले ने पीडि़त युवती के फेसबुक से पीडि़त और उस के परिवार की फोटो डाउनलोड कर ली और एडिट कर के उन फोटो को अश्लील बना दिया. फोन करने वालों ने रुपए मांगते हुए पीडि़त को ही व्हाट्सऐप पर उस की और परिवार की एडिट की हुई अश्लील फोटो भेज दी और धमकाने लगे कि रुपए नहीं दिए तो यह फोटो फेसबुक पर वायरल कर दी जाएगी.

दूसरा घटनाक्रम

कवर्धा के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के मुताबिक एक युवती ने अपने परिजनों के साथ सिटी कोतवाली पहुंच कर शिकायत दर्ज कराई थी. पीडि़ता ने बताया कि एक युवक सोशल मीडिया पर उस की और उस की सहेली की फोटो अपलोड कर आपत्तिजनक बातें और कमैंट कर रहा है.

युवती ने बताया कि आरोपी फोटो और कमैंट को सोशल मीडिया से डिलीट करने के बदले पैसे की डिमांड कर रहा है. शिकायत पर थाना कवर्धा में अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 509 और आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया था.

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तीसरा घटनाक्रम

सोशल मीडिया में अश्लील फोटो वायरल कर युवती को ब्लैकमेल करने वाले आरोपी को लखनऊ से गिरफ्तार कर छत्तीसगढ़ लाया गया है. आरोपी ने सोशल मीडिया पर युवती के साथ दोस्ती की और जानपहचान होने के बाद पीडि़ता के साथ की कुछ अंतरंग तसवीरें लीं. इस के बाद सोशल मीडिया में फोटो वायरल कर ब्लैकमेल करने लगा. युवती ने डोंगर गांव थाने में इस की शिकायत दर्ज कराई थी.

अश्लील वीडियो बनाने वाले गैंग

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के एक बैंक मैनेजर की शिकायत पर पुलिस ने एक बड़ा खुलासा किया है. ब्लैकमेलिंग के खेल में महिला का भाई और पति का दोस्त शामिल पाया गया है. सोशल मीडिया के इस जाल में पुलिस को फोन से कई अश्लील वीडियो मिले हैं. जो सच सामने आया है वह यह बताता है कि किस तरह यह एक बड़ा ब्लैकमेलिंग का धंधा बन गया है.

सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर लोगों को हनी ट्रैप में फंसाने वाली महिला को थाना बिसरख पुलिस ने एक शिकायत के बाद उस के साथी के साथ गिरफ्तार किया. पकड़ा गया आरोपी महिला के पति का दोस्त है. इस मामले में एक अन्य आरोपी, जो महिला का भाई है, को भी दोषी माना जा रहा है.

दरअसल, पुलिस की गिरफ्त में आई शिवानी और अमित कुमार को थाना बिसरख पुलिस ने मुंबई के एक बैंक मैनेजर की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया. पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं जो बताते हैं कि सोशल मीडिया का भयंकर चक्रव्यूह लोगों के लिए किस तरह ब्लैकमेलिंग का एक मंच बन गया है.

पुलिस अधिकारी, नोएडा सैंट्रल, अंकुर अग्रवाल ने बताया, ‘एक वैवाहिक वैबसाइट पर शादी के लिए विज्ञापन दिया गया था. विज्ञापन देख कर महिला ने उस से संपर्क किया और विवाह की इच्छा जताई.

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‘इस के बाद दोनों फोन पर बातें करने लगे. कुछ दिनों पहले प्रबंधक एक कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली आया था. महिला ने उसे जिद कर अपने फ्लैट पर बुला लिया. इस के बाद उसे हनी ट्रैप में फंसा कर 5 लाख रुपए वसूलने का प्रयास किया था. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया लेकिन इस मामले में महिला का भाई फरार है.

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, महिला का पति प्रौपर्टी डीलिंग का काम करता था. आरोपी अमित पति शिवम का दोस्त था और उस का घर आनाजाना था. 4 वर्षों पहले शिवम की मौत हो गई.

इस के बाद महिला और अमित के बीच निकटता बढ़ गई. दोनों ने मिल कर हनी ट्रैप की साजिश रची और इस में महिला के भाई को भी शामिल कर लिया. आरोपी अमित के मोबाइल से पुलिस ने कई अश्लील वीडियोज भी बरामद किए हैं.

बैलेंसशीट औफ लाइफ- भाग 2: अनन्या की जिंदगी में कैसे मच गई हलचल

सुमित और राहुल के आने तक अनन्या ने प्रत्यक्षतया तो स्वयं को सामान्य कर लिया था, पर अंदर ही अंदर बहुत दुखी व उदास थी. अगले दिन औफिस जाते हुए वह एक मशहूर बुकशौप पर गई. ‘न्यू कौर्नर’ में उसे ‘बैलेंसशीट औफ लाइफ’ दिख गई. उसे खरीद कर उस ने छुट्टी के लिए औफिस फोन किया और फिर घर वापस आ गई.

सुमित और राहुल तो जा चुके थे, बैड पर लेट कर उसने बुक पढ़नी शुरू की. राघव के जीवन के आरंभिक काल में उस की कोई रुचि नहीं थी. उस ने वहां से पन्ने पलटने शुरू किए जहां से उसे अंदाजा था कि उस का जिक्र होगा. उस का अंदाजा सही था. कालेज के दिनों में उस ने स्वयं को अनन्या नाम की क्लासमेट का हीरो बताया था. जैसेजैसे उस ने पढ़ना शुरू किया, क्रोध से उस का चेहरा लाल होता चला गया. लिखा था, ‘मेरा पूरा ध्यान बड़ा आदमी बनने में था. मैं आगे, बहुत आगे बढ़ना चाहता था, पर अनन्या का साथ मेरे पैरों की बेड़ी बन रहा था. मैं उस समय किसी भी लड़की को गंभीरतापूर्वक नहीं सोचना चाहता था पर मैं भी एक लड़का था, युवा था, कोई खूबसूरत लड़की मुझे पूर्ण समर्पण का निमंत्रण दे रही थी तो मैं कैसे नकार देता?

‘कुछ पलों के लिए ही सही, उस के सामीप्य में मेरे कदम डगमगाते तो जरूर पर उस के प्यार और साथ को मैं मंजिल नहीं समझ सकता था. पर हर युवा की तरह मैं भी ऐसी बातों में अपना कुछ समय तो नष्ट कर ही रहा था. एक अनन्या ही नहीं, उस समय एक ही समय पर मेरे 3-4 लड़कियों से शारीरिक संबंध बने, मेरे लिए ये लड़कियां बस सैक्स का उद्देश्य ही पूरा कर रही थीं.’ अनन्या ने इस के आगे कुछ पढ़ने की जरूरत ही नहीं समझी, उन पलों के पीछे इतना कटु सत्य था. उस ने स्वयं को अपमानित सा महसूस किया. आंखों से आंसू बह निकले. प्रेम के जिस कोमल एहसास में भीग कर एक लड़की एक लड़के को अपना सर्वस्व समर्पित कर देती है, उस लड़के के लिए वह कुछ महत्त्व नहीं रखता? किसी पुरुष के लिए लड़कियों की भावनाओं से खेलना इतना आसान क्यों हो जाता है? अनन्या अजीब सी मनोस्थिति में आंखें बंद किए बहुत देर तक यों ही पड़ी रही.

फिर उस ने मेघा को फोन मिलाया, ‘‘मेघा, मैं राघव को सबक सिखा कर रहूंगी. छोड़ूगी नहीं उसे.’’

‘‘क्या करेगी, अनन्या? इस में खुद ही तुम्हें तकलीफ न उठानी पड़े… वह अब एक मशहूर आदमी है.’’ ‘‘होगा बड़ा आदमी. मेरे बारे में लिख कर किसी लड़की की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की सजा तो उसे जरूर दूंगी मैं. उस का नंबर चाहिए मुझे, प्लीज, मेघा इस में हैल्प कर.’’

‘‘अनन्या, दिल्ली में अगले ही हफ्ते हमारे कालेज के एक प्रोग्राम में वह मुख्य अतिथि बन कर आ रहा है, मैं ने यह सुना है.’’ ‘‘ठीक है, थैंक्स, मैं आ रही हूं.’’

‘‘सुन तो.’’ ‘‘नहीं, बस अब वहीं आ कर बात करूंगी.’’

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अनन्या ने मन ही मन बहुत देर सोच लिया था कि सुमित से कहेगी कि अपने मम्मीपापा से मिलने का मन कर रहा है. वह दिल्ली जा रही है. राघव को सब के सामने ऐसे लताड़ेगी कि याद रखेगा. मौकापरस्त, लालची? शाम को सुमित और राहुल कुछ जल्दी ही आए. सुमित ने बहुत ही चिंतित स्वर में आते ही कहा, ‘‘उफ अनु, तुम कहां हो? तुम ने आज फोन ही नहीं उठाया. मुझे लगा किसी मीटिंग में होगी और यह चेहरा इतना क्यों उतरा है?’’

सुमित के प्यार भरे स्वर से अनन्या की आंखें झरझर बहने लगीं. राहुल उस से लिपट गया, ‘‘क्या हुआ, मम्मा?’’

‘‘कुछ नहीं, बेटा,’’ कहते हुए अनन्या ने उसे प्यार किया. ‘‘अनन्या, तुम घर कब आईं?’’

‘‘आज औफिस गई ही नहीं?’’ ‘‘अरे, क्या हुआ? तबीयत तो ठीक है? लंच तो किया था न?’’

‘‘नहीं, भूख नहीं थी. सौरी, सुमित, मेरा फोन साइलैंट था आज.’’ इतने में ही सुमित की नजर बैड पर जैसे फेंकी गई स्थिति में उस बुक पर पड़ी जिस ने अनन्या को बहुत परेशान कर दिया था. सुमित ने बुक उठाई. एक नजर डाली, फिर वापस रख दी कहा, ‘‘मैं अभी आया. तुम आराम करो?’’ सुमित ने खुद फ्रैश हो कर राहुल के हाथमुंह धुला कर कपड़े बदलवाए. इतने में अनन्या 2 कप चाय और राहुल के लिए दूध और नाश्ता ले आई. तीनों ने कुछ चुपचाप ही खायापीया.

राहुल को टीवी पर कार्टून देखने के लिए कह कर सुमित बैड पर अनन्या के पास ही आ कर बैठ गया. अनन्या का मन कर रहा था अपने मन की पूरी बात सुमित से शेयर कर ले पर उस ने कुछ सोच कर स्वयं को रोक लिया. सुमित ने अनन्या का हाथ अपने हाथ में ले कर चूम लिया. फिर कहा, ‘‘अनन्या, राघव की बुक से इतनी टैंशन में आने की जरूरत नहीं है.’’

अनन्या को हैरत का एक तेज झटका लगा. बोली, ‘‘यह सब पता है तुम्हें?’’ ‘‘हां, इस बुक को मार्केट में आए 1 महीना हो चुका है. पैसे से तो बड़ा आदमी बन गया वह, पर मानवीय मूल्यों को समझ ही नहीं पाया. ऐसे लोगों को मैं मानसिक रूप से गरीब ही समझता हूं.’’ अब अनन्या स्वयं को रोक नहीं पाई. सुमित के गले में बांहें डाल कर फूटफूट कर रो पड़ी.

‘‘अरे अनु, तुम्हें रोने की कोई जरूरत नहीं है. मैं अतीत की बात वर्तमान में करने में विश्वास ही नहीं रखता. वह उस उम्र की बात थी. उस का आज हमारे जीवन में कोई स्थान नहीं है.’’ सुमित के गले लगी अनन्या देर तक अपना मन हलका करती रही. सुमित उस की पीठ पर हाथ फेरता हुआ उसे शांत करता रहा. सुबकियों के बीच भी सुमित जैसा पति पा कर अनन्या स्वयं को धन्य समझती रही थी.

थोड़ी देर बाद अनन्या ने पूछा, ‘‘इस बुक के बारे में तुम्हें कैसे पता चला?’’ ‘‘दिल्ली में मेरा दोस्त, जो किताबी कीड़ा है,’’ मुसकराते हुए कहा सुमित ने, ‘‘अनुज ने इसे पढ़ा था, उस ने मुझ से फोन पर मजाक

जब आप कौलिंग से ज्यादा चैटिंग करने लगें

हाल के दशकों में सोशल मीडिया का क्रेज बढ़ा है. एकदूसरे से जोड़े रखने वाले सोशल मीडिया प्लेटफौर्म और मोबाइल एप्लिकेशंस की भी खासी संख्या बढ़ी है. आज हम अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और औफिस कलीग्स से फोन पर बोल कर बात करने के बजाय उन्हें टैक्स्ट मैसेज ज्यादा करते हैं.

एक रिसर्च में पाया गया कि हम किसी से बोल कर बात करने के बजाय लिख कर ज्यादा बात करते हैं, यानी हम अपने स्मार्टफोन और लैपटौप का इस्तेमाल भी मेल भेजने और मैसेज के लिए ही कर रहे हैं. हम वीडियो या वौयस कौल कम कर रहे हैं. लेकिन स्टडी में यह बात सामने आई है कि फोन पर बात करने के बजाय टैक्स्ट मैसेज करने से हमारी सोशल बौंडिंग कमजोर हो रही है. इस की जगह अगर हम बोल कर बातें करें तो रिश्ते मजबूत बनेंगे.

विशेषज्ञों के मुताबिक, लोग अपनों की आवाज के जरिए ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं. आवाज सुन कर वे सामने वाले के बोलने का भाव समझ पाते हैं. लेकिन लोगों को लगता है कहीं उन के कौल करने से सामने वाला डिस्टर्ब न हो जाए या शायद उन्हें अच्छा न लगे, इस कारण मैसेज कर देना ही सही रहेगा. मैसेज के साथ एक इमोजी भेज देना बहुत फीका सा लगता है. लेकिन वहीं अगर बोल कर उस बात को जतलाया जाए तो अपनापन सा महसूस होता है.

सोशल मीडिया की वजह से लोगों के बीच की दूरियां भले ही कम हो गई हैं लेकिन दिलों की दूरियां बढ़ी हैं. न्यूयौर्क के शोधकर्ताओं का कहना है कि हम समय बचाने के लिए अकसर ईमेल या टैक्स्ट मैसेज भेजना ज्यादा पसंद करते हैं. लेकिन सही मानो में फोनकौल अपनों से जुड़ाव महसूस कराता है.

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वैज्ञानिकों ने रिसर्च में कुछ लोगों को उन के पुराने साथियों से फोन पर मेल के जरिए कनैक्ट होने को कहा. कुछ लोगों को वीडियोकौल, टैक्स्ट मैसेज और वौयस चैट से कनैक्ट होने को कहा. इस में पाया गया कि एकदूसरे से बात कर के वे ज्यादा जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. यहां तक कि जो लोग सिर्फ वौयसकौल से जुड़े, उन्हें भी साथियों के साथ अच्छी बौंडिंग नजर आई.

रिचर्स में ये 4 बातें सामने आई हैं

लोगों को बोल कर बातें करने में झिझक महसूस होती है.

असुरक्षा के चलते टैक्स्ट मैसेज भेजते हैं.

टैक्स्ट चैट से तेज है वौयस चैट में बौंडिंग.

वौयस चैट में मिसअंडरस्टैंडिंग का खतरा कम है.

बोल कर बात करने के फायदे

अकेलेपन से छुटकारा.

तनाव कम.

लोगों से जुड़ा हुआ महसूस करेंगे.

दोस्तरिश्तेदारों से मजबूत बौंडिंग होगी.

हमें क्या करना चाहिए

जितना ज्यादा हो सके, बोल करबात करें.

औफिस जा कर काम करने में संकोच न करें.

बोल कर बात करने में झिझक महसूस न करें.

सामाजिक जुड़ाव कम न होने दें.

साथ काम करने वाले साथियों से मजबूत बौंडिंग रखें.

रिसर्च में यह भी पाया गया है कि लोग बोल कर बात करने से पीछे हटते हैं. उस की जगह मेल या टैक्स्ट मैसेज का यूज करना ज्यादा पसंद करते हैं. लोगों को लगता है कि बोल कर बात करना भद्दा लग सकता है या फिर सामने वाला उसे गलत समझ सकता है, इसलिए वे बात करने से कतराते हैं.

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मैक कोम्ब्स बिजनैस स्कूल में असिस्टैंट प्रोफैसर अमित कुमार कहते हैं कि लोग आवाज वाले मीडिया से ज्यादा कनैक्ट महसूस करते हैं लेकिन लोगों के अंदर भद्दा लगने और गलत महसूस किए जाने का डर भी होता है. इस के चलते लोग टैक्स्ट मैसेज ज्यादा भेजते हैं. आज सोशल डिस्टैंसिंग भले लोग बरत रहे हैं लेकिन हमें सोशल बौंडिंग की भी जरूरत है.

कोरोना के बाद लोगों की सोशल बौंडिंग कम हुई

अमेरिका लेबर सप्लाई कंपनी ऐडको ने 8 हजार वर्कर्स में वर्क फ्रौम होम को ले कर एक सर्वे किया. इस के मुताबिक, हर 5 में से 4 लोग घर से काम करना चाहते हैं. हालांकि, घर से काम करने में कम्युनिकेशन गैप बढ़ गया है और लोग अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं. इस के अलावा वर्क फ्रौम होम से लोगों का फेसटूफेस बात करने का समय भी कम हो गया.

रिमोट वर्किंग में चुनौतियों को ले कर

लोग क्या कहते हैं

कोऔर्डिनेशन और कम्युनिकेशन की कमी.

अकेलापन.

कुछ और करते समय नहीं.

घर पर डिस्टर्बैंस.

दोस्तों से अलग टाइमजोन.

मोटिवेट रहने की चुनौती.

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वैकेशन लेने में समस्या.

इंटरनैट की दिक्कत.

अन्य और भी.

लिख कर बात करने के बजाय बोल कर

बात करने के फायदे

लोगों से ज्यादा जुड़े रहेंगे.

स्ट्रैस फ्री रहेंगे.

स्वास्थ्य के लिए अच्छा है.

अपनापन महसूस करेंगे.

सोशल बौंडिंग के लिए क्या करें

चैटिंग या टैक्स्ट मैसेज करने के बजाय कौल कर के बात करें.

अपने दोस्त, रिश्तेदार या सहकर्मियों से फोन कर बात करें तो उन्हें ज्यादा अच्छा लगेगा.

सोशल मीडिया पर अपना स्क्रीनटाइम कम करें.

वर्क फ्रौम होम में अगर अकेलापन महसूस हो तो औफिस जा कर काम करें.

बिन सजनी घर- भाग 1: मौली के जाने के बाद क्या हुआ

टिंगटौंग, टिंगटौंग…लगातार बजती दरवाजे की घंटी से समीर हड़बड़ा कर उठ बैठा. रात पत्नी मौली को मुंबई के लिए रवाना कर एयरपोर्ट से लौटा तो घोड़े बेच कर सोया था. आज दूसरा शनिवार था, औफिस की छुट्टी जो थी, देर तक सोने का प्लान किस कमबख्त ने भंग कर दिया. वह अनमनाया सा स्लीपर के लिए नीचे झुका, तो रात में उतार फेंके बेतरतीब पड़े जूतेमोजे ही नजर आए. घंटी बजे जा रही थी, साथ ही मेड की आवाज-

‘‘अब जा रही हूं मैं, साहब, 2 बार पहले भी लौट चुकी हूं.’’

समीर ने घड़ी देखी, उफ, 10 बज गए, मर गया, ‘‘अरे रुको, रुको, आता हूं.’’ वह नंगेपांव ही भागा. मोजे के नीचे बोतल का ढक्कन, जो कल पानी पी कर बेफिक्री से फेंक दिया था, पांव के नीचे आया और वह घिसटता हुआ सीधा दरवाजे से जा टकराया. माथा सहलाते हुए दरवाजा खोला, तो मेड ने गमले के पास पड़ी दूध की थैली और अखबार उसे थमा दिए.

‘‘क्या साहब, चोट लगी क्या?’’ खिसियाया सा ‘कोई नहीं’ के अंदाज में उस ने सिर हिलाया था.

‘‘मैं तो अब वापस घर को जाने वाली थी,’’ कह कर रामकली ने दांत निपोरे, ‘‘घर पर बच्चे खाने के लिए बैठे होंगे.’’

‘‘अरे मुझे क्यों थमा रही है, बाकी काम बाद में करना, पहले मुझे चाय बना दे और यह दूध भी उबाल दे. बाकी मैं कर लूंगा,’’ समीर माथा सहलाते स्लीपर ढूंढ़ता बाथरूम की ओर बढ़ गया.

चाय तैयार थी. उस ने टीवी औन किया, न्यूज चैनल लगा, चाय की चुस्कियों के साथ पेपर पढ़ने लगा.

साहब, ‘‘मोटर सुबह नहीं चलाया क्या आप ने, पानी बहुत कम कम आ रहा, ऐसे तो काम करते घंटों लग जाएंगे, साहब.’’

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समीर की जबान दांतों के बीच आ गई. शाम को मौली ने मेरे कपड़े धोए थे, बोला भी था कि सुबह मोटर याद से चला लेना वरना पानी नहीं मिलेगा?

‘‘मैं भूल गया, खाली किचेनकिचेन कर लो और जाओ. वैसे भी घर कोई गंदा नहीं रहता. मौली फुजूल में करवाती रहती है सफाई, कुछ ज्यादा ही शौक है उसे.’’

काम खत्म कर मेड जाने को हुई, ‘‘बाहर बालकनी से कपड़े याद से उतार लेना, साहब, अभी सूखे नहीं. बारिश वाला मौसम हो रहा है. दरवाजा बंद कर लो, साहब.’’ वह चली गई.

‘‘ठीक है, ठीक है, जाओ.’’

चलो बला टली. अब आराम से जैसे चाहे रहूंगा. वह सोफे पर कुशन पर कुशन लगा टांगें फैला कर लेट गया. कितना आराम है. वाह, 2 बजे मैच शुरू होने वाला है, अब मजे से देखूंगा. वरना मौली सोफे पर कहां लेटने देती. उस के दिमाग में अचानक आया कि रोहित, जतिन, सैम को भी साथ मैच देखने के लिए बुला लेता हूं, कुछ दिन तो पहले सी आजादी एंजौय करूं.

उस ने कौल किया तो एक के साथ दोदो और आ गए.

‘‘अरे वाह, यार रितेश, विवेक, मोहित तुम भी. अरे वाह, कमाल हो गया, यार, कितने दिनों बाद हम मिले.’’

‘‘तेरी तो शादी क्या हुई, दोस्तों को पराया ही कर दिया, और आज बुलाया है वह भी जब भाभी घर पर नहीं.’’

‘‘तभी तो हिम्मत पड़ी बेचारे की,’’ सभी हंसने लगे.

‘‘यार, कहां भेज दिया भाभी को?’’

‘‘और कहां, मुंबई यार, हफ्तेदस दिनों के लिए. मायका भी है और उस की सहेली की शादी भी.’’

‘‘तब तो आजादी, बेटा समीर, 10 दिन मजे कर.’’

‘‘अच्छा, बोल, चाय या कौफी पीनी है तुम सब को? हां, तो किचेन उधर है और फ्रिज इधर. बना लो मेरे लिए भी.’’ समीर हंसा था.

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फिर तो जिस का मन जो आया, जब आया, बनाया, खायापिया. खाना समीर ने बाजार से मंगवा लिया. डायनिंग टेबल तक कोई न गया, वहीं सोफे के पास सैंटर टेबल घसीट कर सब ने खापी लिया. मैच खत्म हुआ तो जीत का जश्न मनाने के लिए पिज्जापेस्ट्री की पार्टी हुई. सारे घर में हर प्रकार के जूठे बरतनों की नुमाइश सी लग गई. खानेपीने के सामान भी मनमरजी से बिखरे पड़े थे जैसे. उन के जाने के बाद समीर का ध्यान घर के बिगड़े नक्शे की ओर गया, शुक्र मनाया कि मौली घर पर नहीं है, वरना इतना एंजौय न कर पाता. वह अभी ही बिखरा हुआ सब सही करवाती. कोई नहीं, कल छुट्टी है. कौन सा औफिस जाना है, मिनटों में सब अस्तव्यस्त ठीक कर लूंगा कल. तभी बिजली कड़की और घर की लाइट गुल हो गई. घुप अंधेरा. कोई सामान तो ठिकाने पर था नहीं. पौकेट में हाथ डाला तो मोबाइल भी नहीं था, जो टौर्च यूज कर लेता. शायद किचेन में रखी थी. वह तेजी से किचेन की ओर लपका तो टेबल से टकराया और नीचे गिर गया. उस ने उठने के लिए टेबल का सहारा लिया तो फैले रायते में हाथ सन गया. कटोरे का रायता टेबल से नीचे गिर कर कपड़ेजूते पर से होता कारपेट पर फैल गया था. ‘क्या मुसीबत है…चल कोई नहीं, 10 मिनट तो लगेंगे, हो जाएगा सब साफ,’ सोचते हुए सोफा कवर से हाथ साफ कर डाले. फिर ध्यान आया, अरे यार, एक और काम बढ़ा लिया. कोई नहीं, मेड को ऐक्स्ट्रा पैसे दे दूंगा, ऐसी क्या आफत है?

आखिरकार माचिसमोमबत्ती टटोलते हुए सही जगह पहुंच गया.

Manohar Kahaniya: प्यार के जाल में फंसा बिजनेसमैन- भाग 3

यह सुन कर संजीव आश्चर्य में पड़ गया, ‘‘मानसी ऐसी क्या बात हो गई, मैं हूं न.’’

‘‘अब क्या बताऊं, शादी के बाद तो मैं मानो पिंजरे का पंछी बन गई हूं. यह भी सह लेती, मगर सासससुर के ताने और घर का माहौल बहुत ही तकलीफ देता है. मुझे मौत के सिवा कोई रास्ता नजर नहीं आता.’’ वह बोली.

इस पर संजीव ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा, ‘‘देखो मरने जैसी बात कभी नहीं करना, जब तक मैं जिंदा हूं, कभी नहीं. कहो तो मैं आ जाऊंगा.’’

‘‘क्या आप मेरठ आएंगे?’’ आश्चर्य से मानसी ने कहा.

‘‘अरे मेरठ क्या, मैं तो तुम से मिलने दुनिया के किसी भी कोने में आ सकता हूं. मैं आज ही निकलता हूं, कल पहुंच जाऊंगा, तुम बिलकुल भी चिंता न करो.’’

आपत्तिजनक हालत में संजीव को देख लिया ललित ने

दूसरे दिन शाम होतेहोते संजीव जैन ने मेरठ के कोतवाली थाना क्षेत्र पहुंच कर मानसी को काल की. मानसी खुशी से बावरी हो गई. अपनी ससुराल में मायके जाने के बहाने से निकली, लेकिन सीधा संजीव के ठहरे हुए होटल में चली गई.

महीनों बाद संजीव मानसी से मिला था. उस ने उसे अपनी आगोश में ले लिया. मानसी ने उस रात अपना जिस्म सौंपने के एक लाख रुपए संजीव से वसूल लिए. दूसरे दिन संजीव जैन खुशीखुशी मेरठ से राजनंदगांव की ओर अपनी गाड़ी में निकल पड़ा और मानसी रायपुर मायके चली आई.

उस के बाद संजीव और मानसी की मुलाकातें फिर पहले की तरह होने लगीं. मानसी के मायके में सभी को दोनों की दोस्ती के बारे में पता था. वे उस की मदद के बारे में भी जानते थे. इस कारण उस की खूब आवभगत होती थी.

एक दिन संजीव जब मानसी के घर आया हुआ था, उस वक्त मानसी का पति ललित भी आया हुआ था. उसे भी संजीव के बारे में थोड़ी जानकारी थी.

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यहां तक कि संजीव जैन की मानसी से अवैध संबंध की कहानी भी कानोकान उस के घरपरिवार तक पहुंच चुकी थी. मगर उस के प्रभाव और उस की मदद के बोझ के आगे कोई कुछ खुल कर नहीं बोल पाता था.

संयोग से एक रोज ललित ने मानसी और संजीव को अलिंगनबद्ध देख लिया था. फिर उसे उन के संबंध के बारे में समझते देर नहीं लगी. ललित को सामने देख कर संजीव भी घबरा गया. ललित ने इस की प्रतिक्रिया में संजीव को 3-4 थप्पड़ जड़ दिए. वह गालीगलौज करने लगा. तब संजीव वहां से चुपचाप निकल गया.

दूसरे दिन मानसी ने संजीव को फोन कर बताया कि मेरे साथ गलत काम करने का आरोप लगा कर ललित पुलिस में शिकायत करने जा रहा है. उस ने उस से हाथपैर जोड़ कर रोक के रखा है.

आज ही उस से बात कर मामले को निपटा लो. इस के साथ ही मानसी ने संजीव यह भी कहा कि उसे किस तरह से मनाना है. वह कर्ज से लदा हुआ है उसे कुछ पैसे दे कर उसे पुलिस में जाने से रोक सकते हो.

पुलिस की बात सुन कर संजीव भी घबरा गया और बोला, ‘‘अगर वह पुलिस में चला गया, तो मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी. तुम किसी भी तरीके से बात करवाओ, मैं उसे मनाने का प्रयास करूंगा.’’

देर शाम संजीव की काल आई. मानसी ने ललित को फोन दे दिया. उस ने सिर्फ कहा, ‘‘तुम मुझ से आ कर मिलो, सारी बातें फोन पर नहीं की जा सकतीं.’’

संजीव और ललित की मुलाकात हुई. ललित ने साफ शब्दों में पैसे की मांग रखते हुए कहा कि 20 लाख रुपए चाहिए. वह उस पैसे से कर्ज उतारेगा. मानसी की खुशी के लिए उसे ऐसा करना चाहिए.

ललित की शर्तनुमा बातें सुन कर संजीव ने थोड़ी राहत महसूस की, किंतु चिंतित भी हो गया. कारण इतनी बड़ी रकम का बंदोबस्त करने में समय लग सकता था. उस ने ललित को आश्वासन दिया कि पैसों का इंजताम जल्द कर लेगा. उस के लिए उसे अपना एक मकान बेचना होगा.

कुछ दिनों में ही संजीव ने कुआं चौक नंदई में स्थित अपना पुराना मकान बेच दिया. उस से मिले रुपए ललित को दे दिए और राहत की सांस ली. सोचा ललित रुपए पा कर शांत हो जएगा, मगर ऐसा नहीं हुआ. कुछ दिनों बाद उस की फिर कौल आई.

उस ने धमकाते हुए और रुपए की मांग की. इस पर संजीव ने मानसी से बात की, तब उस ने भी अपना दूसरा रूप दिखा दिया. उस ने ललित को समझाने और समझौता करवाने के बजाय संजीव से रुपए की मांग करने लगी.

संजीव मानसी पर पहले ही करोड़ों लुटा चुका था, कारोबार भी प्रभावित हो चुका था. रहीसही कसर लौकडाउन ने निकाल दी थी. लिहाजा वह कंगाली की ओर बढ़ने लगा था. इस कारण उस ने पैसे की मांग को पूरा करने से इनकार कर दिया.

मजबूरी बताते हुए उस ने कहा, ‘‘मुझ में अब रुपए देने की ताकत नहीं है, मेरा मकान भी बिक चुका है. मेरा बहुत सारा कामधंधा ठप हो गया है. रुपए आने के सारे स्रोत भी बंद हो चुके हैं, अब मैं तुम्हें कहां से पैसे दूं?’’

यह सुन कर मानसी और भी भड़क उठी, कहा, ‘‘देखो, तुम झूठ कह रहे हो, मैं जानती हूं कि मरा हुआ हाथी भी लाखों रुपए का होता है, मुझे पैसों की बहुत सख्त जरूरत है.’’

संजीव से रूखा व्यवहार करने लगी मानसी

मानसी ने संजीव से इस तरह रूखेपन और नाराजगी से बात पहली बार की थी. संजीव को काफी बुरा लगा. लेकिन वह इतना तो समझ ही गया कि मानसी का प्यार महज एक दिखावा था. वह उसे रुपए देता था और मानता रहा कि मानसी उस से प्यार करती है, लेकिन वह गलत था. यह सोच कर वह गहरी पीड़ा से भर गया.

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संजीव अब मानसी से पीछा छुड़ाने की सोचने लगा, जबकि मानसी बारबार उसे अपना दुखड़ा सुनाने के साथसाथ उस पर दूसरे तरह के दबाव बना कर पैसे की मांग करती रही. संजीव उस से बचने के लिए तरीके निकालने लगा. कभी आश्वासन दे कर तो कभी समय नहीं रहने का बहाना बना कर बचता रहा.

एक दिन संजीव ने कहा, ‘‘देखो, तुम चाहो तो मैं तुम्हें बैंक से लोन दिलवा देता हूं, इंस्टालमेंट तुम भरना. मैं गारंटी दे दूंगा, तुम पैसे ले कर अपना काम चलाओ.’’

मानसी कुछ सोच कर तैयार हो गई, उस ने कहा, ‘‘ठीक है मैं एक परिचित बैंक अधिकारी से बात कर के देखती हूं.’’

एक हफ्ते में ही मानसी को एक सरकारी बैंक से पर्सनल लोन मिल गया. उस का गारंटर संजीव बन गया. लोन अप्रूवल के लिए प्रोसेसिंग फीस संजीव ने ही जमा करवा दी.

इसी बीच संजीव की बेटी का रिश्ता तय होने जा रहा था. उसे बेटी की शादी मे होने वाले खर्च को लेकर चिंता होने लगी थी. अपने स्टेटस के मुताबिक. मगर कामधंधा सब चौपट हो चुका था.

संजीव राजनीति से भी हाशिए में आ चुका था. बेटी के विवाह में समाज के सम्मान के अनुरूप लंबे रुपए  की आवश्यकता थी. नगर निगम में ठेके बंद हो चुके थे. अब हाथों में रुपए भी नहीं थे. वह बड़ा चिंतित हो गया, आखिर कैसे बेटी का विवाह संपन्न होगा.

संजीव इसी उधेड़बुन में लगा हुआ था कि उस पर एक और मुसीबत आ गई. दरअसल, मानसी लोने लेने के बाद 2 किस्त ही जमा करवा पाई. बैंक के काल सेंटर से रिमाइंडर फोन आने पर उस ने मोबाइल ही बंद कर दिया. नतीजतन गारंटर संजीव के पास भी लोन की किस्त जमा करने के फोन आने लगे.

वह करता भी तो क्या, उस ने खुद ही दीवार पर अपना सिर दे मारा था. उस के सामने पछताने और मानसी को कोसने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था.

उस ने मानसी को समझाने का फैसला किया. उस ने बात की. लोन की किस्त जमा करवाने का आग्रह किया. बख्श देने की भीख मांगी. किंतु उस की बातों का मानसी पर कोई असर नहीं हुआ. उलटे मानसी ने साफसाफ कहा कि उस के सामने खुद पैसों का संकट है.

अगले भाग में पढ़ें- परेशान हो कर किया सुसाइड

Satyakatha: पैसे का गुमान- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

मुस्तफा ने बताया कि दोपहर होने पर दुकान की चहलपहल थोड़ी कम हो गई. 12 बजे के बाद बगैर किसी सूचना के कुलदीप की पत्नी सुनीता जब दुकान पर पहुंची तो वह चौंक गया. उन्होंने अपने हैंडबैग से निकाल कर एक मोटा पैकेट पकड़ा दिया.

पैकेट के बारे में पूछने से पहले ही सुनीता ने बताया कि उस के पति ने 4 लाख रुपए बैंक से निकलवाए हैं. इस में वही पैसे हैं. इतना कह कर सुनीता जाने की जल्दबाजी के साथ बोलीं कि उसे पास में कुछ खरीदारी करनी है और घर पर बहुत काम पसरा पड़ा है, इसलिए वह तुरंत दुकान से चली गईं.

उन के जाने के तुरंत बाद मुस्तफा के पास कुलदीप का फोन आया. उन्होंने फोन पर कहा कि एक आदमी बाइक पर पैसे लेने आएगा. सुनीता जो पैसे दे गई है वह उसे दे देना.

मुस्तफा ने कुलदीप को बता दिया कि सुनीता मैडम पैसा अभीअभी दे गई हैं. इतनी मोटी रकम और उसे लेने के बारे में कुलदीप ने अधिक बातें नहीं बताईं.

दोपहर एक बजे के करीब कुलदीप के बताए अनुसार एक आदमी काले रंग की बाइक पर आया. उस में नंबर प्लेट नहीं लगी थी.

मुस्तफा ने समझा कि बाइक मरम्मत के दौरान ट्रायल पर होगी. हेलमेट पहने मास्क लगाए व्यक्ति ने मुस्तफा से कहा कि उसे कुलदीप ने पैसा लेने के लिए भेजा है.

मुस्तफा ने इशारे से सामने बैठने को कहा और कुलदीप को फोन लगाया. तुरंत फोन रिसीव कर कुलदीप बोले, ‘‘इस आदमी को पैसे दे दो.’’

मुस्तफा ने कुछ पूछना चाहा, किंतु कुलदीप ने फोन कट कर दिया. लग रहा था, जैसे वह काफी हड़बड़ी में थे.

तब तक वह व्यक्ति अपना हेलमेट उतार चुका था और मास्क हटा रहा था. मुस्तफा ने उस से बगैर कोई सवालजवाब किए पैसे का पैकेट उसे दे दिया.

पैकेट से पैसे निकाल कर वह वहीं काउंटर पर गिनने लगा. पैकेट में 2 हजार और 5 सौ के नोटों के बंडल थे. बंडल के नोट गिनते समय उस के मोबाइल पर फोन आया. उस ने फोन का स्पीकर औन कर बोला, ‘‘हां, पैसे मिल गए हैं, मैं अभी गिन रहा हूं.’’

दूसरी तरफ से डांटने की आवाज आई, ‘‘मैं ने तुम्हें पैसे लेने भेजा है या गिनने? पैसा ले और  वहां से निकल.’’ यह आवाज कुलदीप की नहीं थी. उस के बाद मुस्तफा दुकान के कामकाज में लग गया.

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उसे सुनीता का फोन शाम को 5 बजे के करीब आया. उन्होंने घबराई आवाज में कुलदीप का फोन बंद होने की बात बताई. यह सुन कर मुस्तफा कुछ समय में ही दुकान बंद कर कुलदीप के घर आ गया. उस दिन बिक्री का हिसाब और पैसे उन्हें दिए और कुछ देर रुक कर चला गया.

इतनी जानकारी मिलने के बाद एसपी प्रभाकर चौधरी ने मामले को अपने हाथों में ले लिया और एसओजी टीम के प्रभारी अजय पाल सिंह एवं सर्विलांस टीम के प्रभारी आशीष सहरावत के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी.

कुलदीप की गुमशुदगी की रिपोर्ट के आधार पर तलाशी की काररवाई की. शुरुआत फोन ट्रेसिंग से  की गई. इस जांच से संबंधित पलपल के जांच की जानकारी डीआईजी शलभ माथुर उन से ले रहे थे..

कुलदीप के फोन की आखिरी लोकेशन बिजनौर के नजीबाबाद कस्बे की मिली. मुरादाबाद पुलिस तुरंत वहां रवाना हो गई. इस की जानकारी बिजनौर पुलिस को भी दे दी गई. प्रभाकर चौधरी ने 3 अन्य टीमों का भी गठन किया.

बिजनौर जनपद की सीमाओं पर कुलदीप की आखिरी लोकेशन के आधार पर छानबीन जारी थी. फोन की लोकेशन कभी चांदपुर तो कभी नूरपुर और कभी नगीना की मिल रही थी. इस तरह से 5 जून का पूरा दिन ऐसे ही निकल चुका था.

रात के 8 बजे बिजनौर में कस्बा थाना स्यौहारा के गंगाधरपुर गांव में एक शव पड़े होने की सूचना मिली. इस की जानकारी स्यौहारा के थानाप्रभारी नरेंद्र कुमार को गांव वालों ने दी थी.

सूचना के आधार पर खून सनी लाश बरामद हुई. लाश सड़क के किनारे पड़ी हुई थी. उस के सिर और शरीर पर चोटों के निशान साफ दिख रहे थे.

लाश बरामदगी की सूचना और हुलिया समेत तसवीरें तुरंत मुरादाबाद पुलिस को भेज दी गईं. लाश कुलदीप गुप्ता के होने की आशंका के साथ उन के भाई संजीव गुप्ता को तुरंत शिनाख्त के लिए बुला लिया गया.

संजीव ने तसवीर और हुलिए के आधार पर लाश की पहचान अपने भाई कुलदीप के रूप में कर दी. इसी के साथ उन्होंने दुखी मन से इस की सूचना अपने परिवार वालों को भी दी.

कुलदीप की हत्या की सूचना से घर में कोहराम मच गया. सुनीता, इशिता, दिव्यांशु का रोरो कर बुरा हाल था. पूरे परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था.

मुरादाबाद की पुलिस के सामने अब सब से बड़ी चुनौती हत्या के बारे में पता लगाने और हत्यारे को धर दबोचने की थी. उसी रात लाश को पंचनामे के साथ बिजनौर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई.

पोस्टमार्टम के बाद लाश कुलदीप के घर वालों को सौंप दी गई. उन का मुरादाबाद के लोकोशेड मोक्षधाम में अंतिम संस्कार कर दिया गया.

उधर बिजनौर और मुरादाबाद जिले की पुलिस ने दोनों जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. कुलदीप की दुकान के कर्मचारियों से एक बार फिर डिटेल में पूछताछ हुई. पैसा लेने आए व्यक्ति के हुलिए के आधार पर छानबीन शुरू की गई.

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मुस्तफा ने घटना के दिन उस व्यक्ति और नंबर प्लेट के बगैर काली मोटरसाइकिल की मोबाइल से ली गई तसवीर पुलिस को उपलब्ध करवा दी. पुलिस को मृतक कुलदीप की काल डिटेल्स भी मिल चुकी थी.

जल्द ही 2 व्यक्तियों नंदकिशोर और कर्मवीर उर्फ भोलू को गिरफ्तार कर लिया. उन से कुलदीप की हत्या के कारण की जो कहानी सामने आई, वह पैसा, दोस्ती, गुमान और अपमान से पैदा हुई परिस्थितियों की दास्तान निकली—

मुरादाबाद के कस्बा पाकबाड़ा के रहने वाले कुलदीप के 2 बड़े भाई संजीव गुप्ता और राजीव गुप्ता के अलावा उन का अपना छोटा सा परिवार था. पत्नी सुनीता और 2 बच्चों में बेटा दिव्यांशु और बेटी इशिता के साथ मिलन विहार कालोनी में रह रहे थे.

GHKKPM: विराट-सई की जिंदगी में होगी इस शख्स की एंट्री, बढ़ेगी दूरियां

टीवी सीरियल ”गुम है किसी के प्‍यार में’’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) में इन दिनों हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है. जिससे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हो रहा है. शो में जल्द ही नए किरदारों की एंट्री होने वाली है. जिससे कहानी में नया ट्विस्ट एंड टर्न देखने को मिलेगा.

सीरियल में इन दिनों फेस्टिवल सेलिब्रेट किया जा रहा है. तो वहीं सई विराट के कमरे में रहने के लिए जाएगी. दोनों एक-दूसरे के करीब होंगे लेकिन पाखी अपनी आदतों से बाज नहीं आएगी. वह दोनों के बीच गलतफहमी पैदा करेगी.

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शो में आप देखेंगे कि विराट और सई के बीच गलतफहमी करने के लिए पाखी श्रुति का इस्तेमाल करने वाली है. खबरों के अनुसार श्रुति की वजह से विराट सई को नजरअंदाज करेगा और उनके रिश्‍ते में गलतफहमी पैदा होंगी.

 

शो के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि पत्रलेखा सई के कमरे में जाएगी और विराट को लेकर सई के कान भरेगी. वह सई से कहेगी कि वह विराट को जानती है, उसकी खोखली बातों में आकर अपने सपनों को खराब मत करो. एक दिन सब बिखर जाएगा.

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शो के लेटेस्ट प्रोमो के अनुसार, सई विराट के कमरे में जाती नजर आ रही है. फेस्टिवल के मौके पर विराट के डीआईजी सई को बताएंगे कि जब उसका एक्‍सीडेंट हुआ था तो विराट कितना परेशान था. वहीं अश्‍विनी भी सई को समझाएगी कि विराट उसकी कितनी परवाह करता है.

 

तो वहीं सई कमरे में पहुंचेगी तो विराट वर्दी में होगा और मिशन पर जाने के लिए तैयार हो रहा होगा. विराट के मुंह से मिशन की बात सुनकर सई परेशान हो जाएगी. शो में अब ये देखना होगा कि क्या सई और विराट के बीच दूरियां बढ़ेगी.

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