Satyakatha: दोस्त की दगाबाजी

सौजन्य- सत्यकथा

दगाबाजी में दोस्त समेत 3 निर्दोषों की भी मौत हो गई

राजस्थान के शहर हनुमानगढ़ में राष्ट्रीय समाचार पत्र के ब्यूरो प्रमुख और स्थानीय संवाददाता एक सप्ताह पहले नहर में इनोवा कार गिरने की घटना को साधारण दुर्घटना मानने को तैयार नहीं थे. उस हादसे में 4 लोगों की नहर में डूब कर मौत हो गई थी, 3 एक ही परिवार के सदस्यों में पतिपत्नी और उन की बेटी के अलावा एक लिफ्ट ले कर कर सफर कर रही अपरिचित महिला थी.

ब्यूरो प्रमुख ने स्थानीय संवाददाता से इस बारे में अपना तर्क देते हुए कहा, ‘‘माना कि इंदिरा गांधी मेन कैनाल में अकसर गाडि़यों के गिरने की दर्दनाक घटनाएं होती रहती हैं. परंतु यह भी उतनी ही कड़वा सच है कि वैसी घटनाओं को ले कर पुलिस भी ज्यादा छानबीन नहीं करती. महज एक हादसा बता कर आगे की जांच बंद कर देती है. 8 फरवरी की रात को हुई इस घटना को एक हादसा कह कर नजरंदाज करना ठीक नहीं होगा.’’

‘‘आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं सर. एक तो इनोवा. भारीभरकम कार. ऊपर से उस में बैठे 4 लोग. तो फिर अचानक कैसे खिसक जाएगी?’’ स्थानीय संवाददाता बोला.

‘‘और हां, कार तो सड़क के किनारे उबड़खाबड़ पटरी पर खड़ी की गई थी.’’ ब्यूरो प्रमुख बोले.

‘‘ऐसा करते हैं कि हम लोग घटनास्थल पर वैसी ही एक कार ले कर चलते हैं और उसे पटरी पर लगा कर देखते हैं कि वह अपने आप कैसे खिसक सकती है? कितनी दूरी तक जा सकती है..?’’ संवाददाता ने सुझाव दिया.

‘‘एक इनोवा किराए पर लो और कल ही वहां चलने का प्रोग्राम बनाओ. हमें पुलिस प्रशासन को सचेत करना होगा, वरना आगे भी दुर्घटनाएं होती रहेंगी और वे फाइलों में बंद होती रहेंगी.’’

ब्यूरो प्रमुख के इस निर्णय का संवाददाता ने एक आदेश की तरह पालन किया और फिर दोनों अगले ही रोज इनोवा कार ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.

उन्होंने सुरक्षा के लिए कार को पीछे से एक रस्से के सहारे बांध रखा था. रस्से को ढीला कर इनोवा को अपने आप खिसकने के लिए छोड़ दिया, लेकिन यह क्या कार टस से मस नहीं हुई. यहां तक कि उसे हलका सा धक्का भी दिया गया और कई एंगल से हिलाडुला कर देखा गया. कार वहीं रुकी रही.

2 पत्रकारों द्वारा किए गए इस प्रयोग की खबर अगले दिन समाचार पत्र में प्रमुखता से मुख्य पृष्ठ पर छपी. उस में एक हफ्ते पहले हुई इनोवा कार हादसे को एक सुनियोजित घटना बताया गया.

यह भी कहा गया कि किसी साजिश के तहत कार को कैनाल में ढकेला गया होगा. आशंका जताई गई कि कार में सवार से किसी के साथ दुश्मनी हो. कारण कार ड्राइव करने वाला व्यक्ति भी हादसे के बारे में साफ जानकारी नहीं दे पाया था.

खबर पढ़ कर लोग चौंक गए. वे तरहतरह की चर्चा करने लगे. किसी ने उस जगह को पूरी तरह से सुरक्षित बनाने का तर्क दिया, तो किसी ने पुलिस पर निकम्मेपन का दोष मढ़ दिया.

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दूसरी ओर पुलिस प्रशासन पर भी इस खबर का असर हुआ. वैसे पुलिस के आला अधिकारी पहले से ही इस घटना को शंका की निगाह से देख रहे थे.

घटना के 8 दिन बाद मृतक रेणु के भाई रमेश प्रसाद विजय नगर में हनुमानगढ़ पुलिस थाना गया. वह सिडाना निवासी जगदीश प्रसाद का बेटा था, उस ने इनोवा कार ड्राइवर रमेश स्वामी के खिलाफ लापरवाही से कार चलाने की शिकायत दर्ज की.

शिकायत में रमेश प्रसाद ने लिखा कि कार चालक की लापरवाही की वजह से ही उस की बहन रेणु, बहनोई विनोद और भांजी इशिका समेत एक अन्य महिला सुनीता भाटी की मौत हुई.

उस ने चालक पर जानबूझ कर हत्या करने का मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई. चालक को मृतक व्यक्ति का दोस्त और एक ही औफिस में साथसाथ काम करने वाला बताया.

इस आरोप के आधार पर भादंसं की धारा 304 के तहत एक मामला दर्ज कर लिया गया. मामले को एसपी प्रीति जैन ने गंभीरता से लेते हुए जांच की जिम्मेदारी रणवीर सिंह मीणा को सौंप दी.

साथ ही हनुमानगढ़ के डीएसपी प्रशांत कौशिक और साइबर सेल के हैडकांस्टेबल वाहेगुरु सिंह, रिछपाल सिंह को सहयोगी के तौर पर उन के साथ लगा दिया.

उस के बाद पुलिस मुस्तैदी से जांच करने लगी. साइबर सेल टीम ने कार चालक रमेश स्वामी के मोबाइल नंबर की डिटेल्स निकलवाई.

पिछले 10 दिनों के भीतर मोबाइल पर हुई उस की तमाम बातचीत की स्टडी की. उसी सिलसिले में रमेश की कुछ संदिग्ध काल की भी जानकारी मिली. साइबर सेल टीम चौंक गई कि इनोवा कार विनोद की ही थी. तब रमेश ने उस बारे में रामलाल नायक नाम के व्यक्ति से क्यों बातें की थी? रामलाल के मोबइल नंबर की लोकेशन लखुपाली की थी.

पुलिस ने रामलाल को उस के मोबाइल लोकेशन के आधार पर थाने बुला लिया. पूछताछ में उस ने बताया कि वह पिछले कई सालों से रमेश स्वामी  के खेत बंटाई पर जोता करता था.

रमेश स्वामी पहले ही हिरासत में लिया जा चुका था. उस ने भी रामलाल की बातों की पुष्टि कर दी. उस के बाद आगे की जांच के लिए रामलाल को भी हिरासत में ले लिया गया.

पुलिस ने जब रामलाल पर उस की रमेश के साथ फोन पर हुई बातचीत को विस्तार से जानने के लिए सख्ती की, तब उस ने बताया कि उस ने एक सहयोग मांगा था. उस के लिए वह तैयार भी हो गया था. रमेश के कहने पर घटना के दिन रामलाल शाम ढलते ही इंदिरा गांधी मेन कैनाल पर पहुंच गया था.

रमेश स्वामी ने जब गाड़ी पटरी पर खड़ी की तब रामलाल वहीं पास में अंधेरे में खड़ा था. रमेश कार में बैठे लोगों को क्या कह कर उतरा था रामलाल को नहीं मालूम, लेकिन रमेश ने रामलाल के पास आ कर कार को पीछे धक्का देने के लिए कहा.

उस ने धक्का देने के बारे में कुछ भी जानने की जरूरत नहीं समझी. उस के कहे अनुसार उस ने जोर से धक्का लगा दिया. बताया कि कार के थोड़ा हिलने के बाद रमेश स्वामी ने उसे वहां से चले जाने को कहा और खुद कार की दूसरी ओर चला गया.

उस के बाद रमेश स्वामी और रामलाल कहां गए इस का खुलासा नहीं हो पाया था

इस मामले में पुलिस के सामने यह सवाल खड़ा था कि आखिर कार को रमेश और रामलाल ने जानबूझकर क्यों पीछे से धकेला? कार के हिलने के बाद रमेश वहां से थोड़े समय के लिए क्यों चला गया? उस ने रामलाल को धक्का देने के तुरंत बाद क्यों चले जाने को कहा? रामलाल ने कार के धक्का देने के बारे में उस से कुछ भी क्यों नहीं पूछा? इन सवालों के कुछ जवाब से पुलिस के सामने एक और सच्चाई सामने आई. उस सच में एक दोस्त की दगाबाजी भी उजागर हो गई.

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जांच की दूसरी कड़ी के तौर पर शिकायतकर्ता रमेश प्रसाद से कुछ अन्य जानकारियां जुटाई जाने लगी. उस के बहनोई की मौत परिवार समेत हो गई थी. प्रसाद ने बताया कि उस के बहनोई विनोद कुमार पिछले कुछ महीने से काफी मानसिक तनाव में थे.

4 बीघा खेती की जमीन खरीदने की बात करते रहते थे, जिस के लिए उन्होंने अपने एक बहुत ही खास दोस्त रमेश को 15 लाख रुपए एडवांस भी दिए थे. यह बात बीते साल 2020 के अगस्त माह में कोरोना का असर कम होने के समय की थी. बताते हैं कि उस की रजिस्ट्री नहीं हो पाने से वह बहुत परेशान चल रहे थे.

प्रसाद की इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने विनोद कुमार के दोस्त रमेश स्वामी को भी संदिग्ध मानते हुए अपनी गिरफ्त में ले लिया था.

पुलिस के सामने अब कुछ तसवीर साफ होती नजर आने लगी थी. रमेश से जमीन की खरीदबिक्री संबंधी सवाल पूछे गए, जिस में जमीन से ले कर उस के लिए पैसे के लेनदेन की भी बातें थीं.

पहले तो रमेश दोस्त की आकस्मिक मौत का मातम मनाते हुए खुद को निर्दोष बताता रहा. काफी समय तक एक दोस्त खोने का रोना रोता रहा. लेकिन जब पुलिस ने खेती की जमीन के लिए एडवांस और रजिस्ट्री नहीं होने की बात सख्ती से पूछी तो वह टूट गया.

उस ने बताया कि वह  जमीन विनोद के नाम रजिस्ट्री नहीं कर सकता था, क्योंकि जमीन उस के पिता के नाम थी.

उस ने यह भी बताया कि जमीन का सौदा 25 लाख रुपये में हुआ था. उसे एडवांस में 15 लाख मिले थे. एडवांस की एक कच्ची रसीद बनाई गई थी. बाकी पैसे रजिस्ट्री के समय मिलने थे.

रमेश से पूछताछ के सिलसिले में जमीन के भारत माला प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग में चिन्हित होने की भी बात सामने आई. बताते हैं कि इस कारण जमीन की कीमत एक झटके में कई गुना बढ़ गई थी.

इस आधार पर पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि रमेश के मन में अधिक मुनाफे का लालच आ गया होगा और रजिस्ट्री नहीं होने की बहानेबाजी पर उतर आया होगा.

रमेश और विनोद एक शिक्षण संस्थान एसकेएम में नौकरी करते थे. वहां विनोद कुमार अकाउंटेंट थे, जबकि रमेश स्वामी क्लर्क के पद पर तैनात था. विनोद एकदम शांत स्वभाव के थे तो वहीं स्वामी का स्वभाव उन के उलट था, लेकिन उन की दोस्ती की सभी मिसाल देते थे.

विनोद कुमार के साले प्रसाद ने पुलिस को उन की परेशानी में कही हुई एक और बात बताई. बहनोईं ने एक बार कहा था कि उस के दोस्त ने उस के पीठ में खंजर घोंपा है, वह पैसा वापस नहीं कर रहा है. केवल बहाने बनाता है.

एडवांस की रकम वापसी नहीं किए जाने को ले कर भी पुलिस ने रमेश से पूछताछ की. इस पर रमेश ने बताया कि उस ने दिसंबर 2020 के अंत में पैसा लौटाने का वादा किया था, लेकिन उस की नीयत में खोट आ गई थी. पैसा लौटाने के बजाय उस ने विनोद के मुंह को हमेशा के लिए बंद करने की खतरनाक योजना बना ली थी.

ऐसा निर्णय लेने के बारे में उस ने बताया कि बारबार पैसा मांगने से वह तंग आ गया था. उसे ले कर औफिस के सभी लोग तरहतरह की बातें किया करते थे. पीठ पीछे उस की बुराई करते थे, जबकि विनोद को ईमानदार बताते थे.

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रमेश के अनुसार पैसे वापसी को ले कर उस की आखिरी खुशनुमा मुलाकात औफिस में ही हुई थी. रमेश ने माफी मांगते हुए मात्र 3 दिनों में ही पैसा लौटाने का आश्वासन दिया था.

उस दिन दोनों ने कई महीने बाद औफिस में एक साथ बैठ कर नाश्ता किया और चाय पी. उन के बीच महीनों से चले आ रहे गिलेशिकवे दूर हो गए थे.

विनोद खुश हो गए थे कि उन का पैसा मिलने वाला है. मिलने वाले पैसे को ले कर उन्होंने मन ही मन कुछ योजनाएं भी बना ली थीं.

इस से अलग रमेश के मन में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी. उस ने रकम लौटाने का वादा तो कर लिया था, लेकिन सच तो यह था कि रकम उस के पास थी ही नहीं.

पलक झपकते ही 2 दिन गुजर गए. रमेश के हाथ खाली ही थे. उस ने नया बहाना बनाया. चौथे दिन विनोद के घर पहुंच गया, विनोद ने प्यार से उसे बिठाया और पत्नी को उस के लिए चायनाश्ता लाने के लिए कहा.

लेकिन रमेश मना करता हुआ मायूसी से बोला, ‘‘दोस्त, मैं अपने वायदे पर खरा नहीं उतर पाया हूं. मैं ने अपने सभी बकाएदारों के यहां तकादा कर लिया. सब ने हाथ खड़े कर दिए हैं. उन में 3 तो अनाज के व्यापारी हैं. उन्होंने मार्च के बाद ही रकम लौटाने की बात कही है. भैया, चलो मुझे पुलिस के हवाले कर दो, जो चाहे सजा दिलवा दो’’

‘‘ऐसी बात क्यों करते हो, मुझे तुम पर भरोसा है. मैं थानापुलिस के झमेले में नहीं पड़ना चाहता.’’ विनोद बोला.

‘‘नहींनहीं भाई, मैं तुम्हारा और ज्यादा नुकसान नहीं होने दूंगा. अब मैं सारी रकम का ब्याज भी दूंगा. ब्याज के साथ मूल रकम अप्रैल 2021 तक मिल जाएगी.’’ रमेश ने एक और आश्वासन दिया.

रमेश की बातें सुन कर विनोद को मन मारना पड़ा. उन के पास न तो कोई मजबूत कागजात थे. और न वह किसी कानूनी विवाद में पड़ना चाहते थे. उन्होंने कहा कि उन्हें मूल रकम ही मिल जाए वही काफी है. वह यह भी जानते थे कि अगर रमेश पर ज्यादा दबाव बनाया तो वह मूल रकम से भी मुकर सकता है.

विनोद का मन एक बड़ी रकम के फंस जाने से दुखी था, जबकि रमेश स्वामी के दिमाग में कुछ और ही खुराफात चल रही थी. वह खुश था कि विनोद उस के जाल में फंस गया है.

हालांकि इस के अलावा एक और सच्चाई थी, जिसे रमेश ने पुलिस के सामने कबूल कर ली थी. उस ने तय कर लिया था विनोद को इस दुनिया से ही चलता कर देगा. इस के लिए वह उधेड़बुन करता रहा कि कैसे विनोद की मौत को स्वाभाविक मौत में बदला जाए.

उसे अचानक एशिया की सब से लंबी नहर इंदिरा गांधी मेन कैनाल के बारे में मालूम था, जिस में कई वाहनों की जल समाधि हो चुकी थी.

उस हादसे की पुलिस विशेष जांच नहीं करती थी और वैसे हादसों की फाइल पर ‘मर्ग’ दर्ज कर मामले को हमेशा के लिए दफन कर दिया जाता था. इसी तरह की रमेश ने योजना बनाई.

नए साल 2021 की शुरुआत हो चुकी थी. विनोद अपनी बड़ी बेटी रिया को सीकर ले जाना चाहता था. वहां उसे एक कोचिंग संस्थान में दाखिला करवाना था. हालांकि उस के पास खुद की इनोवा कार थी, लेकिन उस से वह दूर की यात्रा के लिए खुद ड्राइव नहीं करता था. उसे रमेश के बारे में पता था कि वह कार अच्छी तरह ड्राइव कर लेता है. उस के साथ वह पहले भी सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर चुका था.

इस बारे में विनोद ने रमेश से बात की. वह झट तैयार हो गया. उसे मानो मुंहमांगी मुराद मिल गई थी. तय प्रोग्राम के अनुसार विनोद अपनी पत्नी रेणुका, बड़ी बेटी रिया, छोटी बेटी इशिका के साथ 8 फरवरी को इनोवा से सीकर के लिए निकल पड़े.

कार रमेश स्वामी ने ड्राइव की. वे साढ़े 3 घंटे में सीकर पहुंच गए. वहां रिया का दाखिला हो गया. अब उन के लौटने की बारी थी.

इसी बीच विनोद कुमार के एक जानकार संदीप भाटी ने फोन कर बताया कि उस की पत्नी सुनीता भाटी इन दिनों सीकर में है, सो उसे भी वह अपनी गाड़ी में साथ लेते आएं. उन्होंने सुनीता के मिलने की जगह भी बता दिया.

शाम होने से करीब एक घंटा पहले विनोद सीकर से वापस लौट पड़े. इस बार कार में बेटी रिया की जगह सुनीता थी. थोड़ी देर गाड़ी ड्राइव करने के बाद रमेश स्वामी ने चायनाश्ता करने की इच्छा जताई. सभी एक ढाबे के पास रुके. उस दौरान रमेश उन से दूर जा कर फोन पर किसी से बातें करता रहा.

रात के 10 बज चुके थे. विनोद की कार लखुवाली गांव से गुजरते हुए नहर के पुल पर पहुंच गई. नहर करीब 35 फीट गहरी है. पुल से करीब एक किलोमीटर आगे मेन रगुलेटर बना हुआ है. उस से अन्य नहरों में पानी बहा दिया जाता है.

रमेश ने कार को मेन सड़क से हटा कर कैनाल की पटरी पर खड़ा कर दिया. वह नीचे उतर गया. बाकी लोग नींद में कार में ही बैठे रहे.

विनोद ने सोचा कि वह शायद पेशाब वगैरह के लिए उतरा होगा. वह भी नींद में था. थकावट भी महसूस कर रहा था. कुछ मिनट में ही कार खिसकने लगी. देखते ही देखते कार नहर में जा गिरी. खिसकती कार से सुनीता ने अपने पति संदीप को फोन किया था. अनहोनी की आशंका के साथ जब वे कैनाल के पास पहुंचे, तब तक वहां तो अनहोनी हो चुकी थी.

लोगों की भीड़ जुट चुकी थी. उन्हीं में से किसी ने दुर्घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी. रात होने और काफी अंधेरा होने के कारण पुलिस कुछ नहीं कर सकी थी. घना कोहरा भी छा गया था.

अगले रोज 9 फरवरी, 2021 को पुलिस ने गोताखोरों और क्रेन की मदद से इनोवा कार बाहर निकाली. उस में चारों सवार भी थे. उन की मौत हो चुकी थी. पुलिस ने उसे सीधेसीधे हादसा करार देते हुए फाइल तैयार की और मीडिया को इस की जानकारी दे दी.

कुछ दिनों बाद कोरोना संक्रमण के फैलने के कारण इलाके में कोरोना कर्फ्यू लग गया. भारी संख्या में पुलिस बल व्यस्त हो गए. नतीजतन इस मामले की जांचपड़ताल थम गई.

लौकडाउन में ढील दिए जाने के बाद इस मामले की सुनवाई जून महीने से दोबारा शुरू की गई. तमाम तरह की पूछताछ के बाद रामलाल और रमेश स्वामी को 12 जुलाई, 2021 को अदालत में पेश किया गया. बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

मेरी पत्नी मां के साथ नहीं रहना चाहती है, ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल

मैं सरकारी स्कूल में शिक्षक हूं. घर में किसी चीज की दिक्कत नहीं है पर मेरी परेशानी मेरी पत्नी है, जो निहायत ही झगड़ालू और क्रोधी है. घर में मेरी मां के साथ वह हमेशा लड़ती रहती है और मुझ पर दबाव डालती है कि कहीं और फ्लैट ले लो, मुझे तुम्हारी मां के साथ नहीं रहना. मैं किसी भी हाल में अपनी मां को खुद से अलग नहीं कर सकता. बताएं मैं क्या करूं?

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जवाब

पहले तो आप यह जानने की कोशिश करें कि आप की पत्नी ऐसा क्यों चाहती है? तह तक जाए बगैर फिलहाल कोई निर्णय लेना सही नहीं होगा. पत्नी को समझाबुझा सकते हैं. संभव हो तो पत्नी के मातापिता को भी मध्यस्थ बनाएं. पत्नी के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं और साथ घूमनेफिरने जाएं. इन सब से पत्नी सही रास्ते पर आ सकती है.

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Anupamaa: वनराज-काव्या को अलग होने से रोकेगी मालविका, शो में आएगा ये ट्विस्ट

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) में अब तक आपने देखा कि मालविका, अनुज और अनुपमा के बीच अब सब कुछ ठीक हो गया है. तो दूसरी तरफ वनराज मालविका को कपाड़िया परिवार की जायदाद के उकसा रहा है. लेकिन मालविका ने उसकी बातों में नहीं आने वाली है. उसने वनराज से कह दिया है कि वह अपनी मर्जी की मालकिन है. तो आइए बताते हैं शो के आने वाले एपिसोड के बारे में.

शो में आप देखेंगे कि मालविका वनराज को अपने और अनुज के बारे में बताएगी. वह कहेगी कि अनुज उससे बहुत प्यार करता है लेकिन वो कपाड़िया एंपायर को अपने नाम नहीं करवाना चाहती. उसे प्रॉपर्टी नहीं चाहिए. मालविका कहेगी कि वो जैसी है बहुत खुश है.

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तो दूसरी तरफ वनराज पूछेगा कि दस साल पहले ऐसा क्या हुआ कि वह अनुज को छोड़कर चली गई. मालविका इसका कोई जवाब नहीं देगी और वहां से चली जाएगी.

 

शो के आने वाले एपिसोड में ये भी दिखाया जाएगा कि मालविका वनराज से कहेगी कि उसने काव्या-वनराज की बातें पार्टी के दौरान सुन ली थी. वह काव्या को तलाक देने से पहले अच्छे से सोच ले. मालविका वनराज को समझाने की कोशिश करेगी कि उसे काव्या को तलाक नहीं देना चाहिए.

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शो में आप ये भी देखेंगे कि अनुज और अनुपमा के बीच नजदीकियां बढ़ने लगेंगी. तो दूसरी तरफ काव्या फिर मालविका से लड़ेगी और कहेगी कि वो उसके पति के गले क्यों लगती है. इस पर मालविका कहेगी कि वह उसकी तरह पति चोर नहीं है. ये सुन कर काव्या को धक्का लगेगा.

त्रिपाठी परिवार के सामने आएगा आदित्‍य-इमली के तलाक का सच, अब क्या करेगी मालिनी

स्‍टार प्‍लस का सीरियल इमली की कहानी दिलचस्प मोड़ ले चुकी है. फैंस इन दिनों कहानी का ट्रैक काफी पसंद कर रहे हैं. शो में शादी का सीक्वेंस दिखाया जा रहा है. दरअसल आदित्य मालिनी से दोबारा शादी कर रहा है. हालांकि आदित्य का परिवार इस शादी के खिलाफ है. तो दूसरी तरफ ये सब देखकर इमली बिखरतीजा रही है लेकिन आर्यन उसे संभालने की कोशिश कर रहा है. शो के नए एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइ बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में अब तक आपने देखा कि आदित्‍य को लगता है कि इमली और आर्यन एक दूसरे से प्‍यार करते हैं.शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे शादी के बाद मालिनी त्रिपाठी परिवार पहली बार खाना बनाएगी. इस दौरान इमली और आर्यन भी रहेंगे. मालिनी आदित्‍य के लिए उसके पसंदीदा खाना बनाएगी और वह आदित्‍य को अपने हाथ से बिरयानी खिलाएगी.

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ऐसे में आदित्‍य मालिनी के खाने की तारीफ करेगा और इमली से भी कहेगा कि वो भी खाए. लेकिन इमली मालिनी के हाथ का बना खाना नहीं खाएगी और वह हरी मिर्च खा जाएगी. वह ढेर सारी मिर्ची खा लेगी तो आर्यन उसे रोक लेगा.

 

शो के अपकमिंग एपिसोड में आदित्य-इमली के तलाक का सच सामने आने वाला है. जी हां, आने वाले एपिसोड में सबको पता चल जाएगा कि इमली और आदित्‍य का तलाक किस गलतफहमी की वजह से हुआ था. दरअसल आदित्‍य को लगता है कि तलाक के पेपर इमली ने उसे भेजे और इमली को लगता है कि आदित्‍य ने पेपर भेजे.

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शो में दिखाया गया था कि इमली ने एक लेटर भेजा था और इसमें मालिनी ने तलाक के पेपर रखकर आदित्‍य को दे दिए थे. अब ये सच त्रिपाठी परिवार के सामने आने वाला है. अब देखना ये होगा कि तलाक का सच जानने के बादे आदित्य क्या करता है?

अदालत तो वही देखेगी न जो दिखाया जाएगा!

उम्मीद तो नहीं थी कि 2020 की फरवरी में उत्तरी दिल्ली में कराए गए मुसलिमों के खिलाफ दंगों, आगजनी और हत्याओं पर किसी हिंदू को भी सजा मिलेगी पर पहली कोर्ट ने एक दिनेश यादव को गुनाहगार मान ही लिया है. वह एक घर जलाने का अपराधी माना गया है जिस में 73 साल की मुसलिम औरत जल कर मर गई.

पुलिस और गवाहों की मिलीभगत से कई दशकों से सत्ता में बैठी पार्टी के गुरगों के किए कुकर्मों पर सजा कम ही मिल पाती है. 1984 के दंगों में 2-4 को सजा मिली, मेरठ के हिंदूमुसलिम दंगों में नहीं मिली, 2002 के गुजरात के दंगों में नहीं मिली और उत्तरी दिल्ली के दंगों में बीसियों मुसलिम आज भी गिरफ्तार हैं. पर हिंदू दंगाई आजाद हैं और 1-2 को पहली अदालत ने सजा दी है और शायद ऊंची अदालतों तक यह भी खत्म हो जाएगी.

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हमारी क्रिमिनल कानून व्यवस्था ही ऐसी है कि गुनाहगारों को अगर सजा देनी है तो अदालत में मामला जाने से पहले दे दो, जमानत न दो. इस चक्कर में गुनाहगार और बेगुनाह दोनों फंस जाते हैं. 200-300 की हिंदुओं की भीड़ में से केवल एक को अपराधी मान कर न्याय का कचूमर निकाला गया है. इस भीड़ ने मकानों पर हमला किया, लूटा और फिर वहां दुबकेछिपे लोगों के साथ मकान को बिना डरे आग लगा दी और फैसला अभी ?ोल लिए हुए है कि वह अपराधी भीड़ का हिस्सा था और भीड़ ने लूट व हत्या की. यह फैसला ऐसा है जो अपील में बदला जाए तो बड़ी बात नहीं.

आज भी उस इलाके में डर का माहौल यह है कि भीड़ में चेहरे पहचानने वाले केवल पुलिस वाले गवाह हैं, आम आदमी नहीं. जो मरे उन के रिश्तेदार भी चुप हैं क्योंकि वे जानते हैं कि इस तरह के दंगों में किसी को सजा न देने की पुरानी परंपरा है और इक्केदुक्के मामलों में सजा पहली अदालत ने दे भी दी तो बाद में छूट जाएंगे.

हिंदूमुसलिम दंगों या हिंदूसिख दंगों में खुलेआम हत्याएं हुईं और लूट व आगजनी हुई, पर गिरफ्तार मुट्ठीभर लोग हुए और वे भी 1-1 कर के छूट गए. हां, उन में से कुछ को लंबे समय तक अदालतों के चक्कर काटने पड़े जो अपनेआप में किसी सजा से कम नहीं है. पर यह तो लाखों बेगुनाहों को करना होता है, जिन्हें जैसेतैसे पुलिस के हां करने पर जमानत मिल ही जाती है.

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धर्म किसी को सुधारता है, आदमी बनाता है, सच बोलना सिखाता है, अच्छे काम करने का रास्ता दिखाता है, गलत कामों से रोकता है, ये सब खयालीपुलाव हैं और धार्मिक दंगे इस की पोल खोलते हैं. आज नहीं हमेशा से, भारत में ही नहीं दुनियाभर में, औरत, जमीन और पैसे पर नहीं धर्म पर ज्यादा मारकाट हुई है और मारने और लूटने वालों को हमेशा अपने धर्म के दुकानदारों से धर्म की रक्षा करने की वाहवाही मिली है. हर धार्मिक नेता के पीछे कोई बड़ा अपराध या बड़ा अपराधी है. फिर भी लोगों को कहा जाता है कि धर्म के सहारे ही समाज टिका है.

उत्तरी दिल्ली के कई मामलों में फैसले आने हैं पर वे कुछ अच्छा फैसला देंगे या भरोसा पैदा करेंगे, इस का भरोसा कम है. अदालत तो वही देखेगी न जो दिखाया जाएगा.

मैं एक Student हूं पर मेरी मां चाहती हैं कि पापा के साथ उन की दुकान संभालूं, क्या करूं?

सवाल

मैं 19 साल का एक कुंआरा नौजवान हूं. मैं पढ़ाई में बहुत अच्छा हूं और खूब पढ़ाई कर के अच्छी नौकरी भी पाना चाहता हूं, पर मेरी मां चाहती हैं कि मैं पापा के साथ उन की दुकान संभालूं, क्योंकि कोरोना महामारी के बाद हमें काफी माली नुकसान हुआ था और अब पापा दुकान पर नया मुलाजिम रखने की स्थिति में नहीं हैं. इस बात से मैं अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पा रहा हूं. बताइए कि मैं क्या करूं?

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जवाब

यह कोई बड़ी चिंता वाली बात नहीं है. आप की मां ठीक ही तो कह रही हैं. बेहतर होगा कि आप दुकान पर भी बैठें और पढ़ाईलिखाई करते हुए नौकरी की भी कोशिश जारी रखें.

यह तय है कि 2 काम करने में मेहनत ज्यादा लगेगी, लेकिन हालात देखते हुए आप का फर्ज बनता है कि मांबाप की मदद करें.

आजकल नौकरियां भी आसानी से नहीं मिलतीं, फिर नौजवान मजबूर हो कर दुकान खोलते हैं या फिर अपना छोटामोटा धंधा शुरू करते हैं. आप को तो बैठेबिठाए मौका मिल रहा है. पिता का हाथ बंटाते हुए अगर नौकरी मिल जाती है, तो वे भी आप को रोकेंगे नहीं.

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मुहरे- भाग 1: विपिन के लिए रश्मि ने कैसा पैंतरा अपनाया

मैं शाम की सैर से घर लौटी ही थी. पसीने से तरबतर थी. तभी डोरबैल बजी. विपिन औफिस से आ गए थे. मुझे देखते ही बोले, ‘‘रश्मि, क्या हुआ?’’

मैं ने रूमाल से पसीना पोंछते हुए कहा, ‘‘कुछ नहीं, बस अभीअभी सैर से लौटी हूं.’’ ‘‘हूं,’’ कहते हुए विपिन बैग रख फ्रैश होने चले गए.

मैं 10 मिनट फैन के नीचे खड़ी रही. फिर मैं विपिन के लिए चाय चढ़ा कर थोड़ा लेटी ही थी कि विपिन ने पूछा, ‘‘क्या हुआ?’’ ‘‘आज गरमी में हालत खराब हो गई. अजीब सी थकान हो रही है.’’

विपिन छेड़छाड़ के मूड में आ गए थे. मुसकराते हुए बोले, ‘‘हां, उम्र भी तो हो रही है.’’ एक तो गरमी से परेशान ऊपर से विपिन की बात से मैं और तप गई.

तुनक कर बोली, ‘‘कौन सी उम्र हो रही है? अभी 50 की भी नहीं हुई हूं. हर समय उम्र का राग अलापते रहते हो.’’ विपिन ने और छेड़ा, ‘‘सच बहुत कड़वा होता है रश्मि.’’

मैं ने जलतेकुढ़ते उन्हें चाय का कप पकड़ाया. मैं इस समय चाय नहीं पीती हूं. फिर शीशे में जा कर खुद पर नजर डाली, ‘‘हुंह, कहते हैं उम्र हो रही है… सभी कौंप्लिमैंट देते हैं… इतनी फिट हूं… और विपिन कुछ भी हो जाए उम्र की बात करेंगे… सब से बड़ी बात यह कि जब मैं खुद को यंग महसूस करती हूं तो यह जरूरी है क्या कि कभी कुछ हो जाए तो उम्र ही कारण होगी? हुंह, कुछ भी बोलते रहते हैं. इन की बातों पर कौन ध्यान दे. गुस्सा अपनी ही हैल्थ के लिए ठीक नहीं है… बोलने दो इन्हें.

थोड़ी देर में हमारे बच्चे वान्या और शाश्वत भी कोचिंग से आ गए. सब अपने रूटीन में व्यस्त थे. डिनर करते हुए अचानक मुझे कुछ याद आया, तो मैं अपने माथे पर हाथ रखते हुए बोली, ‘‘उफ, गरमी लग रही थी तो सैर से सीधी घर आ गई. कल सुबह के लिए सब्जी लाना ही भूल गई.’’ विपिन को फिर मौका मिला तो फिर अपना तीर छोड़ा, ‘‘होता है, उम्र के साथ याद्दाश्त कमजोर होती ही है.’’

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एक तो सुबह क्या बनेगा, इस की टैंशन, ऊपर से फिर उम्र का व्यंग्यबाण, मैं सचमुच नाराज हो गई. मुंह से तो कुछ नहीं बोला पर विपिन को जलती नजरों से घूरा तो बच्चे समझ गए कि मुझे गुस्सा आया है, पर हैं तो ऐसी शरारतों में अपने पापा के चमचे ही न, अत: शाश्वत ने कहा, ‘‘मम्मी, आप सच ऐक्सैप्ट क्यों नहीं कर पा रहीं? कभी भी आप का बैक पेन बढ़ जाता है, कभी भी कुछ भूल जाती हो, मान लो मम्मी उम्र हो रही है.’’ वान्या को लगा कि कहीं मेरा गुस्सा न

बढ़ जाए. अत: फौरन बात संभाली, ‘‘चुप रहो शाश्वत मम्मी, सब्जी नहीं है तो कोई बात नहीं, हम तीनों कैंटीन में खा लेंगे. आप बस अपना खाना बना लेना.’’ मैं ने जल्दी से अपना खाना खत्म किया और फिर पर्स उठा, कर बोली, ‘‘देखती हूं पनीर मिल जाए तो ले आती हूं.’’

विपिन ने भी कहा, ‘‘अरे छोड़ो, कैंटीन में खा लेंगे सब.’’ जानती हूं विपिन को घर का खाना ही ले जाना पसंद है. उम्र बढ़ने की बात से मुझे गुस्सा तो आता है, चिढ़ती भी बहुत हूं पर प्यार भी तो करती हूं न उन्हें. अत: मैं उन्हें देख कर मुंह फुलाए हुए अपनी नाराजगी प्रकट करते घर से निकलने लगी, तो विपिन मुसकरा उठे. वे भी जानते हैं कि मेरा गुस्सा क्षणिक ही होता है.

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हम तीसरी मंजिल पर रहते हैं. मैं सीढि़यों से ही उतरती हूं. ज्यादा सामान होता है तभी लिफ्ट में आती हूं. पनीर ले कर लौट रही थी तो देखा लिफ्ट नीचे ही थी. कोई लिफ्ट में जा रहा था. मैं भी यों ही लिफ्ट में आ गई. साथ खड़े लड़के ने लिफ्ट में 7वीं मंजिल का बटन दबाया. मैं पता नहीं किन खयालों में थी कि तीसरी मंजिल का बटन दबाना ही भूल गई. दिमाग में विपिन की उम्र की बातें ही चल रही थीं न. जब अचानक लगा कि ऊपर जा रही हूं तो हड़बड़ा कर स्टौप का बटन दबा दिया. लिफ्ट रुक गई. आजकल कुछ गड़बड़ चल रही थी.

साथ खड़ा लड़का शालीनता से बोला, ‘‘क्या हुआ मैम?’’ मैं झेंप गई. कहा, ‘‘सौरी, गलती से कर दिया. मुझे तीसरी मंजिल पर जाना था.’’

सेक्स के लिए घातक है इंफेरियारिटी कॉम्प्लेक्स

एक नहीं अनेक बातों और सदंर्भों से यह स्पष्ट है कि सेक्स की प्रक्रिया में शरीर से ज्यादा प्रभावी भावनाओं की भूमिका होती है. क्योंकि सेक्स भले शरीर के जरिये संभव होता हो, लेकिन उस शरीर को इसके लिए तैयार मन करता है, भावनाएं करती हैं. इसलिए इस प्रक्रिया में शरीर से ज्यादा मन और भावनाओं की सक्रियता की जरूरत होती है. जब हम किसी बात को लेकर इंफीरियर्टी काॅम्प्लेक्स में होते हैं यानी हीनताबोध का शिकार होते हैं, तो भले मजदूरी कर लें, भले बोझा उठा लें, भले गाड़ी चला लें, लेकिन सेक्स नहीं कर सकते. क्योंकि सेक्स में सिर्फ मांसपेशियों की ताकत से काम नहीं चलता. इसके लिए मन में एक खास किस्म की भावनात्मक लहर का होना जरूरी है और भावनात्मक लहर मैकेनिकल नहीं होती. उसका कोई मैकेनिज्म नहीं है कि हर बार उसे एक ही तरीके से दोहरा दिया जाए.

मन की लहर एक ऐसी स्वतंत्र और मौलिक प्रक्रिया है जो भावनाओं के प्रवाह में ही पैदा होती है. यह प्रवाह तकनीकी रूप से पैदा तो नहीं की जा सकती, पर तकनीकी रूप से इसे कई सामाजिक और मानसिक बाधाएं रोक जरूर देती हैं. जब हममें डर, भय, अपराधबोध और निम्न होने की भावना होती है, तो हमारे अंदर पैदा होने वाली खुशी की तरंगे नहीं पैदा होतीं. ऐसे में हम गुस्से की तमाम चीजें तो कर सकते हैं, लेकिन खुशी और प्यार नहीं जता सकते. इसीलिए हम सेक्स भी नहीं कर सकते. क्योंकि सेक्स करना अंततः मन का खुशियों और भावनाओं से भरा होना होता है. नकारात्मक भावनाएं खुशियों को छीन लेती हैं और मन में पैदा होने वाली लहर से हमें वंचित कर देती हैं. इसलिए शरीर तरंगित नहीं होता और सेक्स के लिए तैयार नहीं होता.

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क्योंकि सेक्स में जिन सक्रिय और उत्तेजित इंद्रियों अथवा अंगों की मुख्य भूमिका होती है, उन्हें सक्रिय और उत्तेजित होने के लिए मन में एक लहर और खुशी देने वाले उन्माद पैदा होना जरूरी है. हीनभावना एक नकारात्मकता है, इसलिए यह हममें भावनात्मक अंतरंगता खत्म करती है, जिससे हममें शारीरिक स्फूर्ति या इंद्रियोचित स्फूर्ति नहीं बनती. नतीजतन हम डिप्रेशन में, हीनभावनाओं के शिकार होने पर या ऐसे ही दूसरे तनाव के क्षणों में सेक्स के लिए सक्षम नहीं होते. कुदरत ने इस मामले में डीलडौल को या बहुत ताकतवर को यह विशिष्टता नहीं बख्शी है कि वह किसी भी मानसिक और शारीरिक स्थिति में सेक्स कर सके. अच्छे से अच्छे पहलवान, बड़े से बड़े एथलीट के दिमाग में भी अगर यह बात बैठ जाए कि वह सही परफोर्मेंस नहीं कर पायेगा, तो फिर चाहे कुछ भी हो जाए, वह सेक्स नहीं कर सकता. सेक्स वास्तव में भावनाओं की ड्राइव है और इसमें जरा सा भी किसी भावना को ठेस लग जाए, जरा सी हिचक आ जाए, संशय या द्वंद पैदा हो जाए तो फिर कुछ नहीं हो सकता.

दरअसल हीन भावनाएं हमारे दिल दिमाग में कई तरह से आती हैं, एक कारण तो सामाजिक होता है, जिसमें हमें बचपन से ही ठंूस ठंूसकर दिमाग में भरा जाता है कि ये छोटा है, ये बड़ा, ये ऊंची जात का है, ये नीची जात का है. यह श्रेष्ठ है, यह गैर श्रेष्ठ है. फिर एक कर्मकांडों की भूमिका होती है. छोटी बड़ी उम्र और सामाजिक रिश्तों की भी एक लक्ष्मण रेखा होती है, कई बार वह सही होती है, कई बार वह मन का बहम होती हैं. लेकिन सेक्स के मामले में जो सबसे बड़ी हीनभावना होता है, वो ऐसे दुष्प्रचारों से आयी हुई है, जिन दुष्प्रचारों के जरिये कुछ लोग अपनी रोटी सेंकते हैं. मतलब यौन दुर्बलता, शारीरिक कद, रंग, हैसियत, ये सब दिमाग में भरे गये ऐसी ऐसी हीनभावनाएं हैं, जो हमें सेक्स के मामले में कमजोर बनाती हैं.

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हीनभाव से मुक्ति के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है. अपनी सामथ्र्य को पहचानने तथा अपनी शक्ति का मूल्यांकन करने से भी हीनताबोध से उबरा जा सकता है. ऐसे उपाय न करने से हीनता के भाव आपके पूरे जीवन पर छाये रहेंगे, जो आपकी पूरी सामथ्र्य को खोखला बनाते रहेंगे. हीनताबोध यौन क्रीड़ा को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है. क्योंकि हीनताबोध का शिकार व्यक्ति अपने दिल दिमाग में एक तनाव लिये रहता है कि वह सही से सहवास नहीं कर पायेगा. यह चिंता हर समय किसी न किसी रूप मंे दिमाग में हथौड़ा बजाती रहती है, इसलिए वह वास्तव में सहवास नहीं कर पाता, फिर चाहे वह कितना ही सक्षम क्यों न हो.

इस मानसिक विकार को जितनी शीघ्रता से हो, खत्म करना चाहिए. अक्सर यह बोध भ्रामक धारणा से उत्पन्न होता है. ऐसी अवस्था में पुरुष या स्त्री के मन में यह बात बैठ जाती है कि उससे सफल सहवास नहीं हो पायेगा. इस भ्रामक धारण के चलते वह वास्तव में सेक्स में सक्षम नहीं हो पाता. व्यवहारिक दृष्टि से ऐसी धारणाएं इन बातों से आती है. शिश्न को छोटा समझकर हीनभावना से ग्रस्त होना. स्त्री की श्रेष्ठता का ख्याल करना. उसके अच्छे पद तथा उसकी स्थिति को लेकर हीनग्रस्त रहना. परिवार का धनवान अथवा निर्धन होना. अनमेल आर्थिक स्थिति आदि.

ये तमाम धारणाएं सहवास के लिए बेहद नकारात्मक है. एक बात समझ लीजिए कि शिश्न की लंबाई-मोटाई सहवास को कदापि प्रभावित नहीं करती. छोटे शिश्न वाले व्यक्ति को जान लेना चाहिए कि स्त्री की योनि की बनावट ऐसी होती है जिसमें हर प्रकार का शिश्न पूर्ण आनंद देता है. पुरुष को इस गलत धारणा से ध्यान हटाकर सहवास की सही तकनीक के अनुसार रमण करना चाहिए. यदि पुरुष इस धारणा को नहीं त्यागेगा तो उसे सहवास में विफलता ही मिलेगी. वह अपनी सहयोगी स्त्री को पूर्ण संतुष्टि नहीं दे पायेगा. स्त्री संतुष्ट होगी, तो हीनता का भाव अपने आप खत्म हो जायेगा.

स्त्री की श्रेष्ठता का ख्याल रखकर अपने को हीन मान लेना भी गलत है. स्त्री का अधिक पढ़ा-लिखा होना, आर्थिक स्थिति का अच्छा होना अथवा उसका ऊंचा पद भी यौन क्रीड़ा के लिए कोई महत्व की वस्तु नहीं है. अतः उसका पद या कद मैथुन क्रिया में विचारना एकदम नासमझी है. सहवास में दोनों बराबर के स्तर पर आकर आनंद प्राप्त कर सकते हैं. सहवास के मधुर क्षणों को और भी मधुर बनाने के लिए दोनों स्त्री-पुरुष एक धरातल पर आकर इस यौन प्रक्रिया को संपादित करके मानसिक तथा शारीरिक आनंद प्राप्त कर सकते हैं.  जहां तक जाने-अनजाने में किए गये गलत कार्यों से उपजा हीनताबोध या अपराधबोध है, उससे पीड़ित रहकर बेकार ही तनाव मोल लेना है. जो हो चुका, उसे भूलना ही बेहतर होता है.

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Pawan Singh क नया गाना ‘Yehi Khatir Ara Aaile’ हुआ वायरल, सामने आया Video

भोजपुरी इंडस्ट्री के सुपरस्टार पवन सिंह (Pawan Singh) का नया गाना ‘एहि खातिर आरा अईले’ (Yehi Khatir Ara Aaile) सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस गाने को पवन सिंह के साथ अनुपमा यादव ने भी आवाज दी हैं.

बते दें कि इस गाने को यूट्यूब पर अब तक 5, 941, 779 व्यूज मिल चुके हैं. इस गाने में पवन सिंह स्टेज पर जमकर ठुमके लगाते हुए नजर आ रहे हैं. पवन सिंह का ये गाना मां अम्मां फ़िल्मस के यूटयूब चैनल पर रिलीज किया गया है. इस गाने का म्यूजिक प्रियांशु सिंह ने दिया है.

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हाल ही में पवन सिंह का एक और गाना न्यू इयर पार्टी (New Year Party Song) सॉन्ग रीलीज किया गया था. इस गाने में उनकी को-स्टार बेहद बोल्ड अंदाज में दिख रही हैं. वीडियो में एक्ट्रेस जहां एक ओर अपने पोलो डांस से लोगों को इंप्रेस कर रही हैं तो वहीं दूसरी ओर वे अपनी शोख अदाओं से भी घायल करते देखी जा सकती हैं. पवन सिंह के नए गाने के बोल ‘चुम्मा नया साल’ का है.

इस गाने के म्यूजिक को छोटे बाबा ने दिया है और वेब म्यूजिक ने इस गाने को नए साल 1 जनवरी 2022 के दिन रिलीज किया है. चुम्मा दे दी हो दहिना गाल से पहले पवन सिंह का ‘जिंदगी’ और ‘तुमसा कोई प्यारा’ गाना धमाल मचा रहा है. दोनों गानों के जरिए पावर स्टार करोड़ों दर्शकों के दिल पर राज कर रहे हैं.

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