गरमी में पशुओं को खिलाएं हरा चारा

लेखक-  डा. प्रमोद प्रभाकर, डा. मनोज कुमार भारती

भारत कृषि प्रधान देश है. इस में पशुपालन कृषि उत्पादन प्रक्रिया में सहभागी है. हमारा देश दुनियाभर में दूध उत्पादन के मामले में अव्वल है. यह वैज्ञानिकों और किसानों की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है.

पशुओं के रखरखाव में अकसर 60-65 फीसदी खर्च पालनेपोसने पर ही आता?है. देश में साल में 2 बार हरे चारे की तंगी या कमी के मौके आते हैं, अप्रैलजून और नवंबरदिसंबर. पशुपालक गरमी में मक्का, लोबिया ज्वार, बाजरा वगैरह वैज्ञानिक विधि से उगा कर कम लागत में ज्यादा पैदावार ले सकते हैं. दलहनी चारे अधिक पौष्टिक होते?हैं, पर उन्हें ज्यादा नहीं खिलाना चाहिए क्योंकि इस से पशुओं में पेट फूलना या अफरा रोग हो जाता है.

पशुपालक एक दलहनी व गैरदलहनी वाली फसलों को मिला कर के अपने खेतों पर लगाएं. इस प्रकार के हरे चारे को पशुओं को खिलाने से पशुओं को कार्बोहाइड्रेट के साथसाथ प्रोटीन की आपूर्ति भी होती है. साथ ही, पशुओं की अच्छी बढ़ोतरी होने के साथसाथ दूध भी बढ़ जाता है.

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जलवायु : ज्यादा हरा चारा हासिल करने के लिए पानी, हवा, सूरज की रोशनी और माकूल जलवायु की जरूरत होती है. सफल उत्पादन मौसम की अनुकूल व प्रतिकूल दोनों ही दशाओं पर निर्भर करता है. आमतौर पर 25-30 डिगरी सैल्सियस तापमान मक्का, ज्वार, बाजरा, लोबिया वगैरह के लिए उपयुक्त रहता है.

जमीन की तैयारी : सही जल निकास वाली दोमट या रेतीली मिट्टी इस की पैदावार के लिए सही रहती है. साथ ही, जमीन समतल होनी चाहिए. एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें व 2-3 गहरी जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करने के बाद जमीन को समतल कर लें.

बीज बोने का समय : चारे की फसल लाइन में करें. छोटे आकार के बीज जैसे बाजरा वगैरह की बोआई छिटकवां विधि से भी कर सकते हैं. चारा फसलों की बोआई मार्च से जुलाई माह तक कर सकते?हैं.

फसल मिश्रण : चारे की फसल बोने पर साधारण बीज दर प्रति हेक्टेयर आधी कर देनी चाहिए. दलहनी व गैरदलहनी फसलों का ही मिश्रण बना कर पशुपालक उगाएं. इस से ज्यादा पैदावार होने के साथसाथ जमीन की उर्वराशक्ति भी बढ़ जाती है जैसे मक्का लोबिया, ज्वार, ग्वार वगैरह.

सिंचाई : गरमी में 10-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहने से चारे की बढ़वार अच्छी होती है. बारिश में जरूरत पड़ने पर ही सिंचाई करें.

खाद व उर्वरक डालने की विधि : आमतौर पर मिट्टी जांच के आधार पर ही खाद और उर्वरक डालें. 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद जुताई के समय खेत में?ठीक से मिलाएं. फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा खड़ी फसल में डालें.

कटाई : एक काट वाली फसलों की कटाई 55-60 दिनों के बाद करें यानी फूल बनते समय कटाई करें जिस से अधिकतम पोषक तत्त्वों का फायदा मिल सके.

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कई काट वाली फसलें जैसे ज्वार की पहली कटाई 35-40 दिन के बाद करें और बाद की कटाइयां 20-22 दिन बाद करें. काट वाली फसलों की कटाई जमीन से 5-7 सैंटीमीटर ऊपर से करनी चाहिए, जिस से जल्दी बढ़वार हो सके.

मुख्य चारा फसलों की जानकारी : गैरदलहनी फसलों में मक्का, ज्वार, बाजरा हैं व दलहनी फसलों में लोबिया, ग्वार का हरा चारा मिला कर खिलाने से पशु का दूध उत्पादन गरमी में कम नहीं होगा. साथ ही, पशु की प्रजनन क्षमता में भी सुधार होगा. इस तरह पशुपालक कम खर्च कर के ज्यादा आमदनी हासिल कर सकेंगे.

बंजर भूमि में गेंदा उगाएं

लेखक- ललित वर्मा

वैसे, बंजर जमीन में हैवी मैटल्स जैसे कैल्शियम, जस्ता, क्रोमियम आर्सेनिक, सीसा वगैरह पाए जाते हैं जो मानव शरीर में विभिन्न रोगों को पैदा करने की विशेष कूवत रखते हैं. डाक्टर शिखा सक्सेना ने ऐसी बंजर जमीन में जिस में आर्सेनिक व सीसा जैसे हैवी मैटल्स मौजूद थे, उस में गेंदा उगा कर पीएचडी की डिगरी हासिल की है. इस का दूसरा प्रमुख फायदा यह होता है कि जमीन में सुधार होता है,क्योंकि गेंदे की फसल बंजर जमीन के आर्सेनिक व सीसा को सोख लेती?है. गेंदा उगाने की वैज्ञानिक विधि सीख कर किसान अपनी बंजर जमीन में गेंदा की फसल उगा कर फायदा ले सकते हैं.

खेत की तैयारी : पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें. उस के बाद 2 जूताई हैरो या कल्टीवेटर से आरपार करें. यदि खेत में भूमिगत कीटों की समस्या हो तो 50 किलोग्राम नीम की खली खेत में जरूर डालें. आखिरी जुताई के बाद पाटा जरूर लगाएं. खेत के चारों ओर मेंड़ जरूर बनाएं ताकि बारिश का पानी जमीन द्वारा सोख लिया जाए.

खाद और उर्वरक : पौधों से अधिक पुष्प उत्पादन के लिए मिट्टी जांच के मुताबिक ही खाद व उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. यदि किसी कारणवश मिट्टी जांच न हो सके तो उस स्थिति में गोबर की खाद व उर्वरकों का इस्तेमाल इस तरह करना चाहिए:

गोबर की खाद 10-15 टन, नाइट्रोजन 120 किलोग्राम, फास्फोरस 80 किलोग्राम, पोटाश 80 किलोग्राम.

गोबर की खाद को पहली जुताई से पहले ही खेत में बिखेर देना चाहिए. साथ ही, फास्फोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा का मिश्रण बना कर आखिरी जुताई के समय जमीन में डालनी चाहिए. नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को 2 भागों में विभाजित कर के डालना चाहिए. पहली खुराक रोपाई के 20 दिन बाद और दूसरी खुराक रोपाई के 40 दिन बाद देनी चाहिए.

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पौधों की अधिक बढ़ोतरी

व फूलों की अच्छी उपज के लिए वानस्पतिक बढ़ोतरी के समय 15 दिनों के अंतराल पर 0.2 फीसदी यूरिया के 2 पर्णीय छिड़काव करने चाहिए.

प्रवर्धन : आमतौर पर किसान गेंदे को बीज द्वारा प्रवर्धित करते हैं क्योंकि बीज द्वारा प्रवर्धित पौधे प्रबल, सेहतमंद होते हैं और खेत में अच्छी तरह जम जाते हैं. बढ़ोतरी व पुष्पण में एकरूपता लाने के लिए कुछ किसान इसे कलमों द्वारा भी प्रवर्धित करते हैं.

बीज प्रवर्धन : गेंदे के बीज आमतौर पर 18-30 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान पर अंकुरित होते हैं. नर्सरी की क्यारियों में गोबर की खाद डाल कर भलीभांति मिला देनी चाहिए. नर्सरी की क्यारी सुविधाजनक आकार की बनानी चाहिए. एक हेक्टेयर के लिए रोपाई तैयार करने के लिए 800 ग्राम बीज पर्याप्त हैं.

नर्सरी में बोने से पहले बीज को कैप्टाफ या बाविस्टिन से 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए ताकि फसल की फफूंदीजनित रोगों से सुरक्षा हो सके. बीज बोने के बाद उन्हें गोबर की खाद की पतली परत से ढक देना चाहिए. इस के बाद हर रोज केन के द्वारा हलका पानी दिया जाना चाहिए.

साल में 3 बाद गेंदे की फसल उगाई जा सकती है. ग्रीष्मकालीन फसल के लिए जनवरी के मध्य से फरवरी के मध्य तक नर्सरी में बोआई की जा सकती है. शरदकालीन फसल के लिए सितंबर के मध्य से अक्तूबर के मध्य तक बोआई की जा सकती है, जबकि बारिश की फसल के लिए मध्य जून से मध्य जुलाई तक बोआई की जा सकती है.

नर्सरी में बीज बोने के 25-30 दिन बाद पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है.

कलमों द्वारा प्रवर्धन : पैतृक समरूप पौधों के उत्पादन के लिए गेंदे की कलमों द्वारा भी प्रवर्धित किया जा सकता है. कलमें 6-10 सैंटीमीटर लंबाई की होनी चाहिए.

पौध रोपण : रोपाई के समय पौध सेहतमंद हो, 6-10 सैंटीमीटर लंबी और 3-4 लाइनों वाली होनी चाहिए. गेंदे की प्रजाति के मुताबिक लाइन व पौध की दूरी 30 से 45 सैंटीमीटर रखनी चाहिए. यह दूरी व्यावसायिक खेती के लिए बेहतर पाई गई है.

उन्नत किस्में ही उगाएं : गेंदे की अनेक किस्में उपलब्ध हैं, जो पौधों की ऊंचाई, विकास की आदत, पुष्प की आकृति और आकार में भिन्न होती हैं. ज्यादातर किसान गेंदे की लोकल किस्मों की खेती करते?हैं, जिस की वजह से उन्हें निम्न गुणवत्ता वाली कम उपज हासिल होती है, इसलिए उन्हें उन्नत किस्में ही उगानी चाहिए.

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली और दूसरे संस्थानों द्वारा गेंदे की व्यावसायिक खेती के लिए निम्नलिखित अच्छी उपज देने वाली किस्में विकसित की गई हैं:

शीर्ष कर्तन: गेंदे के पौधों में शीर्ष कर्तन कक्षवर्ती शाखाओं को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाता है, ताकि फूलों की तादाद व उत्पादन को बढ़ाया जा सके. पर ज्यादातर किसान इस काम को नहीं करते हैं. ज्यादा उत्पादन हासिल करने के लिए गेंदे की दोनों प्रजातियों का शीर्ष कर्तन अवश्य करना चाहिए.

अफ्रीकन गेंदे की शिखाग्र वर्चस्व के कारण पौधे बहुत कम शाखाओं के साथ लंबे व दुबले हो जाते हैं. ऐसे पौधे ढह जाने के लिए संवेदनशील होते हैं और पुष्प उत्पादन कम हो जाता है, इसलिए शीर्ष कर्तन जरूर करना चाहिए ताकि उच्च उपज मिल सके.

शीर्ष कर्तन पुष्पण को थोड़ा बिलवित करता है, पर पुष्प उत्पादन में सुधार होता है. रोपाई के 40 दिन बाद शीर्ष कर्तन करना एक समान पुष्पण व उपज के लिए सर्वोत्तम पाया गया है. फ्रैंच गेंदे में शीर्ष कर्तन की जरूरत नहीं होती है.

सिंचाई व जल निकास

अच्छी बढ़वार और पुष्पण के सभी चरणों के दौरान जमीन में सही नमी रखना बहुत जरूरी?है क्योंकि नमी की कमी में पौधे सूख जाते हैं और फलियां भी ठीक से पनप नहीं पाती हैं.

गेंदे की प्रजातियां मिट्टी व मौसम पर निर्भर करती हैं. गरमी में गरम हवाएं पौधे के सूखने की अहम वजह मानी जाती हैं इसलिए पौधों को वायुमंडलीय परिस्थितियों के मुताबिक सिंचित किया जाना चाहिए.

सर्दियों में फसल को 6-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जरूरत होती है, जबकि बारिश में फसल में सिंचाई बारिश के ऊपर निर्भर करती है. यदि काफी लंबे समय तक बरसात न हो तो जरूरत के मुताबिक खेत में सिंचाई करनी चाहिए.

यदि किसी कारणवश गेंदे की फसल में फालतू पानी जमा हो जाए तो उसे तुरंत निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए अन्यथा फसल के मरने की आशंका रहती है.

पौध संरक्षण उपाय

खरपतवार नियंत्रण : गेंदे की फसल में विभिन्न प्रकार के खरपतवार उग आते हैं, जो फसल के साथ नमी व पोषक तत्त्वों के लिए होड़ करते हैं. इस के चलते फसल की बढ़वार, विकास व उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है इसलिए उन की रोकथाम के लिए जरूरत के मुताबिक निराईगुड़ाई करनी चाहिए. पूरी फसल के दौरान 5-6 बार निराईगुड़ाई की जरूरत होती है.

कीट नियंत्रण

लाल मकड़ी घुन : यह कीट पुराने पौधों पर हमला करता है. इस के चलते रोगग्रस्त पौधे धूलमय यानी झिल्लीदार दिखाई देते हैं. इस कीट की रोकथाम के लिए डायकोफोल के 0.1 फीसदी घोल का छिड़काव करना चाहिए.

पत्ता कुदकड : यह कीट पत्तियों और तनों का रस चूसता है, जिस के चलते संक्रमित भाग कुपोषित या लटकते हुए दिखाई देते हैं. इस कीट की रोकथाम के लिए मेटासिस्टाक्स के 0.2 फीसदी घोल का छिड़काव करना चाहिए.

बालों वाली सूंड़ी : गेंदे की शुरुआती अवस्था में यह सूंड़ी पत्तों को खाती?है और बाद में पुष्प वृंतों के अर-पुष्पकों को खा कर नुकसान पहुंचाती है. इस कीट की रोकथाम के लिए नुवान के 0.2 फीसदी घोल का पर्णीय छिड़काव करना चाहिए.

रोग नियंत्रण

पौध विगलन : यह एक फफूंदीजनित रोग है. इस के चलते पत्तियों के रोग छिद्रों पर भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं, जिस से अंकुर मुरझा जाते हैं, उदय के बाद अंकुरों के कौलर पर भूरे रंग के विगलित धब्बे एक विकराल रूप ले लेते हैं जो नर्सरी के पतन का कारण बनते हैं. इस रोग की रोकथाम के लिए बाविस्टिन के 0.2 फीसदी घोल का छिड़काव करना चाहिए.

पुष्पकलिका विगलन : यह भी एक फफूंदीजनित रोग है. इस रोग की शुरुआती अवस्था में पुष्प क्रम या युवा कलिकाओं पर प्रकट होता है. गंभीर संक्रमण की अवस्था में कलियां सूखी व सड़ी हुई दिखाई देती हैं. इस रोग की रोकथाम के लिए डाइथेन एम 45 के 0.3 फीसदी घोल का छिड़काव करना चाहिए.

जड़ तालन : यह रोग कई प्रकार की फफूंदियों (राइजोक्टोनिया सोलानी, स्क्लेरोसियम रोल्फ साई, पिथियम ओल्टिमम, फाइटोप्थोरा क्रिप्टोजिया) द्वारा फैलता?है. जड़ में रोग का पहला लक्षण दिखाई देते ही जड़ सड़ जाती है, पत्तियां झड़ जाती हैं और बाद में पौधा मर जाता है. इस रोग की रोकथाम के लिए कार्बंडाजिम और मेटालाक्सिल से मिट्टी को उपचारित करना चाहिए.

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फूलों की तुड़ाई : गेंदे के फूलों की तुड़ाई सही समय पर करना बेहद जरूरी?है. फूलों की तोड़ाई उस समय करनी चाहिए जब वे पूरी तरह से खिल जाएं.

तुड़ाई के बाद प्रौद्योगिकी

* पूरी तरह विकसित फूलों की सुबहशाम को ही तुड़ाई करें.

* तुड़ाई के बाद फूलों को कुछ समय के लिए पानी में डालें.

* तुड़ाई के बाद फूलों को जरूरत के मुताबिक छोटीबड़ी टोकरियों में रखें या पानी सूखने के बाद फूलों को 200 ग्राम कूवत वाली पौलीथिन की थैलियों में पैक करें.

* 1-2 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान व 80-90 फीसदी नमी होने पर ही भंडारित करें.

उपज

गेंदे की उपज कई बातों पर निर्भर करती?है जिन में जमीन की उर्वराशक्ति, उगाई जाने वाली किस्म और फसल की सही देखभाल प्रमुख?हैं. यदि बताई गई विधि से गेंदे की खेती की जाए तो प्रति हेक्टेयर 8-10 क्विंटल ताजा फूल मिल जाते हैं.

रोजर फेडरर को पहले ही सेट में मात देने वाले सुमित नांगल के बारे में जानिए,

क्रिकेट भारत की आत्मा में बसता है. ये बात सच है लेकिन क्रिकेट के अलावा बाकी खेलों में भी अब भारतीय तिरंगा लहराने लगा है. क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम की हार ने करोड़ों खेल प्रेमियों का दिल तोड़ दिया था. उस हार के सदमें में कई क्रिकेट प्रेमियों ने खाना भी नहीं खाया था. लेकिन बीते एक पखवाड़ा में भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में अपना दमखम दिखाया है. पहले भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल लाकर हिंदुस्तान को गौरन्वांवित किया, उसके बाद युवा टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल ने जो किया वो अपने आपने में एक चौंकाने वाला है.

अक्सर खिलाड़ी की वाह-वाही तब होती है जब वो मैच जीत जाता है लेकिन सुमित नांगल के साथ ऐसा नहीं हुआ. सुमित नांगल मैच हार भी गए फिर भी उनको पूरे देश की तमाम बड़ी हस्तियों से शाबासी मिली. हरियाणा के झज्जर जिले में जन्म लेने वाले 22 वर्षीय नांगल का डेब्यू मैच ही रोजर फेडरर के साथ पड़ गया. अब आप समझ ही गए होंगे कि किसी का डेब्यू मैच हो उसके सामने वो खिलाड़ी हो जिसको इस खेल का महान खिलाड़ी कहा जाता हो तो फिर उस खिलाड़ी की सांसे तेज होना तो लाजिमी है लेकिन नांगल की सांसे तेज नहीं हुईं बल्कि टेनिस बैट से निकलने वाले शॉट्स तेज हो गए.

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साल के चौथे ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन के पहले ही राउंड में सुमित का सामना टेनिस जगत के दिग्गज रोजर फेडरर से हुआ. मंगलवार को न्यूयॉर्क के आर्थर ऐश स्टेडियम में 22 साल के जोशिले क्वालिफायर सुमित नागल ने 38 साल के तजुर्बेकार फेडरर को जोरदार टक्कर दी. 20 बार ग्रैंड स्लैम विजेता रोजर फेडरर ने नागल को हल्के में ले लिया. फेडरर को यही गलती भारी पड़ गई. नांगल ने फेडरर को पहले सेट में 6-4 से हराकर अपनी ग्रांड ओपनिंग दी. फेडरर को समझ आ गया था कि ये कोई साधारण खिलाड़ी नहीं है. अंत में स्विस स्टार फेडरर ने नागल को 4-6, 6-1, 6-2, 6-4 से मात दी.

हरियाणा को खिलाड़ियों की धरती भी कहा जाता है. ओलंपिक में पदक जीतने वाले ज्यादातर खिलाड़ी इसी प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं. सुमित नागल भी हरियाणा के झज्जर जिले के जैतपुर गांव से हैं. परिवार में किसी की खेलों में जरा भी दिलचस्पी नहीं रही. उनके फौजी पिता सुरेश नागल को टेनिस में रुचि थी. सुमित को उनके पिता ने ही टेनिस खिलाड़ी बनाने के बारे में सोचा. सुरेश को एक रोज ख्याल आया कि उनका बेटा भी तो दूसरे खिलाड़ियों की तरह खेलता नजर आ सकता है. हरियाणा के सुमित नागल ने आठ साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था.

सुमित के परिवार को उनकी ट्रेनिंग के लिए दिल्ली शिफ्ट होना पड़ा. 2010 में अपोलो टायर वालों की टैलेंट सर्च प्रतियोगिता में सुमित चुन लिए गए. दो साल तक उन्होंने स्पॉन्सर किया. सुमित ने महेश भूपति की एकेडमी में भी ट्रेनिंग ली थी. पिछले नौ साल से वो कनाडा, स्पेन, जर्मनी में ट्रेनिंग कर चुके हैं.

आंकड़ों के हिसाब से अगर भारत में टेनिस खिलाड़ियों की बात करें तो सानिया मिर्जा, लिएंडर पेस, महेश भूपति, रोहन बोपन्ना, सोमदेव देववर्मन, युकी भांबरी, अंकिता रैना इनका नाम ही सबसे ज्यादा लिया जाता है लेकिन अब इस लिस्ट में सुमित नांगल का नाम जुड़ गया. लिएंडर पेस भारत के शानदार टेनिस खिलाड़ी हैं. युगल और मिश्रित युगल में इनके नाम कुल चौदह ग्रैंड स्लैम खिताब है. डेविस कप में भारत के लिए उनका योगदान अकल्पनीय है. 1996 में अटलांटिक ओलंपिक खेलों में इन्होने कांस्य पदक जीता था. इसके बाद नंबर आता है महेश भूपति का. महेश भूपति के नाम चार ग्रैंड स्लैम युगल खिताब है. टेनिस खिलाडी लिएंडर के साथ उनकी जोड़ी शानदार रही है. महेश ने दोहा में 2006 में लिएंडर पेस के साथ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था. भूपति डेविस कप में भी भारत के लिए भाग ले चुके हैं. भूपति ने कुल 46 डेविस कप खेले हैं जिनमे से 28 में जीत और 18 हार हाथ लगी.

वह भारतीय टेनिस के इतिहास में सर्वोच्च महिला टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं सानिया मिर्जा. इन्होने तीन प्रमुख मिश्रित युगल जीते 2009 ऑस्ट्रेलियन ओपन, 2012 फ्रेंच ओपन और 2014 में अमेरिकी ओपन. 2014 के एशियाई खेलों में सानिया ने साकेत मिरेनी के साथ मिश्रित युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और महिलाओं की डबल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था. अक्टूबर 2014 में डब्ल्यूटीए फाइनल में जीत हासिल की थी.

सोमदेव देवबर्मन ने 2002 में टेनिस खेलना शुरू कर दिया था और 2004 में एफ 2 कोलकाता चैम्पियनशिप में जीत के साथ सुर्खियों में आये. सोमदेव ने राष्ट्रमंडल खेल 2010 में एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था साथ ही एशियाई खेल 2010 में एकल और डबल्स इवेंट में भी स्वर्ण पदक हासिल किया.

इन सबके अलावा हमको दो नाम कभी नहीं भूलना चाहिए. जिन्होंने भारत को टेनिस से अवगत कराया. या यूं कहें कि भारत में टेनिस के जन्मदाता ही यही खिलाड़ी रहे हैं. पहला नाम आता है रमेश कृष्णन भारत के प्रसिद्ध टेनिस प्रशिक्षक और पूर्व टेनिस खिलाड़ी हैं. 1970 के दशक के अंत में जूनियर विंबल्डन और फ्रेंच ओपन में पुरुष एकल का खिताब जीता था. वर्ष 1980 के दशक में तीन ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचे और डेविस कप टीम में भी फ़ाइनल तक पहुंचे थे. रमेश कृष्णन 2007 में भारत के डैविस कप कप्तान रहे थे. इनके पिता रामनाथन कृष्णन थे जोकि भारत के प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी रहे हैं. इन्हें 1998 में भारत सरकार ने ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किया था.

दूसरा नाम आता है विजय अमृतराज. अमृतराज के छोटे भाई आनंद और अशोक देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले खिलाड़ी थे. विजय ने अपना पहला ग्रांड प्रिक्स 1970 में खेला था। 1973 में वह विंबलडन और यू.एस. ओपन के क्वॉर्टर फाइनल तक पहुंचे, जहाँ उन्हें यान कोडेस और केन रोजवैल जैसे दिग्गज ही हरा सके.

एक्टिंग से दूर पति के साथ यहां छुट्टियां मना रही हैं ये एक्स बिग बौस कंटेस्टेंट

टीवी एक्ट्रेस किश्वर मर्चेंट सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है. आअ दिन सोशल मीडिया कर वो अपनी फोटोज शेयर करती रहती है जिसे फैंस खासा पसंद करते है. किश्वर टीवी की उस ऐरा की एक्ट्रेस है जब वेम्प को सीरियल्स में काफी तवज्जो मिलता था. किश्वर जब बिग बौस के 9th सीजन में शामिल हुई थी तो उनको काफी पसंद किया गया. किश्वर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी काफी चर्चाओँ में रहती है. अपने 6 साल के रिलेशनशिप के बाद किश्वर ने टीवी एक्टर सुयाश के साथ साल 2016 में शादी कर ली. दोनों अपनी शादी को काफी एंजौय करते है.

वायरल है काफी किश्वर

किश्वर मर्चेंट इन दोनों छुट्टियों का आनंद लेती दिखाई दे रही है. उन्होंने ने इस वेकेशन की कुछ फोटोज सोशल मीडिया पर पोस्ट की है. इन ताजा फोटोज में टीवी एक्ट्रेस किश्वर बेहद खूबसूरत अंदाज के साथ सबके सामने आई है. किश्वर की इस वेकेशन एल्बम की चंद फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल होती दिखाई दे रही हैं. कुछ फोटोज में किश्वर का बोल्ड अंदाज भी सामने आया है.

 

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Desi Vibes at the sakhiyon ki baadi at @fairmontjaipurindia ❤️ Loving every bit of it 😁 💫

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सुयश के साथ खुश है किश्वर

सुयश राय और किश्वर मर्चेंट की शादी के बाद से ही दोनों काफी फोटोज आपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करते रहते है जिसे फैंस काफी पसंद करते है. आपको बता दे की किश्वर ने अपनी एक्टिंग कैरियर की शुरुआत साल 1997 में आए शो ‘शक्तिमान’ से की थी इसके बात किश्वर ने पीछे पलटकर नहीं देखा. फिलहाल किश्वर एम टीवी के शो बौक्स क्रिकेट लीक में नजर आ रही है. इसी शो के पहले सीजन को किश्वर ने जीता था.

 

वर्कआउट करती दिखीं हिना खान, फोटोज हुई वायरल

टीवी की सबसे पौपुलर एक्ट्रेंस में से एक हिना खान एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. जब भी हिना अपनी फोटोज के साथ सोशल मीडिया पर आती है फैंस उनको काफी पसंद करते है. कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब हाल ही में हिना ने अपनी वर्कआउट फोटो शेयर की. जैसे ही हिना इन पोटोज को शेयर किया फैंस ने जमकर कमेंट करना शुरु कर दिया. इन फोटोज में हिना खान का अंदाज बता रहा है कि वो एकदम फिटनेस फ्रीक बन चुकी हैं. उनके इस लुक को फैंस खासा पसंद कर रहे है.

रनिंग लुक में दिखाया कमाल

हिना खान की ये फोटोज इस बात की गवाही दे रही हैं कि वो रनिंग की तैयारी कर रही हैं. फिट रहने के लिए रनिंग करना बहुत जरूरी होता है. आपको बता दे की हिना अपनी सेहत काफी ध्यान रखती है. बिग बौस में भी जब कंटेस्टेंट थी वो सुबह उठकर काफी बार योगा करती आई थी. हिना को रनिंग में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसलिए उन्होंने अपने बालों में स्टाइलिश हेयर बैंड लगाया है. हिना खान टीवी में इतने समय से काम कर रही हैं कि उन्हें अच्छी तरह से पता है कि कैमरे के साथ कैसे खेलना है. अब इस तस्वीर में ही देख लीजिए वो कैसे नो-कैमरा पोज दे रही हैं. उनकी इन फोटोज क्यूटनेस काफी औवर लोडेड है.

न्यू योर्क से लौटने के बाद ज्यादा फिटनेस फ्रीक हिना

हिना खान जिम फ्रीक हैं, यह बात तो हर कोई जानता है लेकिन वो अपने फैंस को भी एक्सरसाइज करने के लिए प्रेरित करती हैं. यही कारण है कि वो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लगातार जिम फोटोज  शेयर करती हैं. आपको बता दे की हिना हाल ही में न्यू योर्क से लौटी है पर वो न्यू योर्क को काफी मिस कर रही है. सोशल मीडिया पर वीडियों शेयर कर उन्होंने ये बात बताई थी.

 

 

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स्ट्रेचिंग पर रखे खास ध्यान

एक्सरसाइज करने से पहले शरीर को स्ट्रेच करना बहुत जरूरी होता है. हिना खान इस बात को अच्छी तरह से जानती हैं। यही कारण है कि वो रनिंग करने से पहले स्ट्रेचिंग कर रही हैं. एक्सरसाइज के साथ-साथ हिना खूबसूरत मौसम का लुत्फ भी उठाने से नहीं चूकीं. उन्होंने मजेदार मौसम में कई सारे दिलकश पोज दिए.

अपने ब्रेस्ट की वजह से मुझे काफी शर्मिंदगी का अहसास होता है, मैं क्या करूं?

सवाल
मेरी उम्र 16 साल है. मेरी समस्या यह है कि मेरे ब्रेस्ट बहुत भारी है जिस कारण मुझे बहुत अनकंफर्टेबल लगता है. इस की वजह से मैं अपने दोस्तों से ज्यादा मिल भी नहीं पाती और अपनी पसंद के कपड़े भी नहीं पहन पाती. कृपया उपाय बताएं?

जवाब
आकर्षक वक्षस्थल हर युवती की चाह होती है. इन का बहुत बड़ा होना जहां अनकंफर्टेबल लगता है वहीं सौंदर्य पर भी असर पड़ता है. आकर्षक वक्षस्थल सैक्सुअली अट्रैक्शन बढ़ाता है. आप को अपने शरीर की अतिरिक्त वसा कम करने की जरूरत है साथ ही ऐरोबिक्स, जौगिंग जैसी ऐक्सरसाइज कीजिए, तेज चलना, साइकिल चलाना आदि इस से भी आप ब्रैस्ट के आकार को कम कर सकती हैं. इस से आप का सौंदर्य भी निखरेगा.

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लाइफ एंज्वायमेंट

लेखक- डा. विजय श्रीवास्तव

टेलीफोन की घंटी घनघनाई. मैं ने जैसे ही फोन उठाया, उधर से आई मधुर आवाज ने कानों में मिठास घोल दी. ‘‘क्या मिस्टर गंभीर लाइन पर हैं? क्या मैं उन से बात कर सकती हूं?’’

प्रत्युत्तर में मैं ने कहा, ‘‘बोल रहा हूं.’’ इस से पहले कि मैं कुछ कहूं, उधर से पुन: बातों का सिलसिला जारी हो गया, ‘‘सर, मैं पांचसितारा होटल से रिसेप्स्निष्ट बोल रही हूं. हम ने हाल ही में एक स्कीम लांच की है. हम चाहते हैं कि आप को उस का मेंबर बनाएं. सर, इस के कई बेनीफिट हैं. शहर के प्रतिष्ठित लोगों से कांटेक्ट कर के आप हाइसोसायटी में उठबैठ सकेंगे. क्रीम सोसायटी में उठनेबैठने से आप का स्टेटस बढ़ेगा और आप ऐश से लाइफ एंज्वाय करेंगे. इतने सारे लाभों के बावजूद सर, आप के कुल बिल पर हम 10 परसेंट डिस्काउंट भी देंगे. आप समझ सकते हैं सर कि यह स्कीम कितनी यूजफुल है, आप के लिए. सर, बताइए, मैं कब आ कर मेंबरशिप ले लूं?’’

मैं एकाग्रता से उस की बातें सुन रहा था क्योंकि उस के लगातार बोलने के कारण मुझे कुछ कहने का अवसर ही नहीं मिल सका. वह जब कुछ क्षण के लिए रुकी तो मैं ने तुरंत पूछ  लिया, ‘‘मैडम, आप पहले अपना नाम और परिचय दीजिए ताकि मैं आप की स्कीम के संबंध में कुछ सोच सकूं. बिना सोचेसमझे कैसे मेंबर बन पाऊंगा?’’

उस ने कहा, ‘‘सर, मैं पहले ही बता चुकी हूं कि मैं रिसेप्शनिस्ट हूं. क्या परिचय के लिए इतना काफी नहीं है? आप तो सर मेंबरशिप में इंटरेस्ट लीजिए. जो आप के लिए बहुत यूजफुल है.’’

‘‘मैडम, आप का कहना सही है पर उस से पहले आप के बारे में जानना भी तो जरूरी है. बिना कुछ जानेपहचाने मेंबर बनना कैसे संभव है.’’ वह अपनी बात पर कायम रहते हुए फिर बोली, ‘‘सर, आप मेंबर बनने के लिए यस कीजिए. जब मैं पर्सनली आ कर आप से कांटेक्ट करूंगी तब आप मुझ से रूबरू भी हो लीजिएगा. बस, आप के यस कहने की ही देर है. आप जो चाहते हैं, वह सब डिटेल में जान जाएंगे. हमारे आनरेबल कस्टमर के रूप में, आप जब यहां आएंगे तो मुलाकातें होती रहेंगी. लोगों को आपस में मिला कर, लाइफ एंज्वाय कराने का चांस देना ही हमारी स्कीम का मेन मोटो है. सर, प्लीज हमें सेवा करने का एक चांस तो अवश्य दीजिए. मेरा नाम और परिचय जानने में आप क्यों टाइम वेस्ट कर रहे हैं?’’

यह तर्क सुनने के बाद भी मैं अपनी बात पर अटल रहा. मैं ने कहा, ‘‘मैडम, जब तक आप नाम और परिचय नहीं बताएंगी, तब तक आप के प्रस्ताव पर कैसे विचार करूं?’’

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जब उस ने देखा कि मैं अपनी बात पर कायम हूं, तो हार कर उस ने कहा, ‘‘सर, जब आप को इसी में सैटिस्फैक्शन है कि पहले मैं अपना इंट्रोडक्शन दूं, तो मैं दिए देती हूं. पर सर, मेरी भी एक शर्त है. इस के बाद आप मेंबर अवश्य बनेंगे. आप इस का भी वादा कीजिए.’’

मैं ने हंसते हुए कहा, ‘‘पहले कुछ बताइए तो सही.’’

उस ने कहा, ‘‘सर, मेरा नाम मोनिका है,’’ और यह बताने के साथ ही उस ने फिर अपनी बात दोहराई और बोली, ‘‘अब तो प्लीज मान जाइए, मैं कब आ जाऊं?’’

उस के बारबार के मनुहार पर कोई ध्यान न देते हुए मैं ने उस की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘मैडम, कितना सुंदर नाम है, मोनिका? जिसे बताने में आप ने इतनी देर लगा दी. जब नाम इतना शार्ट और स्वीट है, आप की आवाज इतनी मधुर है, आप बात इतने सलीके से कर रही हैं तो स्वाभाविक है, आप सुंदर भी बहुत होंगी? सच कहूं तो आप के दर्शन करने की अब इच्छा होने लगी है.’’

अपनी तारीफ सुन कर उस ने हंस कर कहा, ‘‘सर, अब आप मेन इश्यू को अवाइड कर रहे हैं. यह फेयर नहीं है. जो आप ने नाम पूछा वह मैं ने बता दिया. फिर आप मेरी तारीफ करने लगे और अब दर्शन की बात. आखिर इरादा क्या है आप का, सर? हम ने बहुत बातें कर लीं. अब आप काम की बात पर आइए. सर, बताइए कब आ कर दर्शन दे दूं.’’

वह बराबर सदस्यता लेने के लिए अनुनयविनय करती जा रही थी लेकिन मेरे मन में एक जिज्ञासा थी जिस का समाधान करना उपयुक्त समझा. मैं ने पूछा, ‘‘मोनिकाजी, इतने बड़े शहर में आप ने मुझे ही क्यों इस के लिए चुना? शहर में और लोग भी तो हैं?’’

उस ने गंभीर हो कर कहा, ‘‘सर, वास्तव में स्कीम लांच होने पर हम शहर के स्टेटस वाले लोगों से फोन पर कांटेक्ट कर रहे हैं, जो हमारी मेंबरशिप अफोर्ड करने योग्य हैं. वैसे आप के नाम का प्रपोजल आप के मित्र सुदर्शनजी ने किया था. उन्होंने कहा था कि यदि मिस्टर गंभीर तैयार हो जाते हैं तो मैं भी मेंबर बन जाऊंगा. इसीलिए आप से इतनी रिक्वेस्ट कर रही हूं क्योंकि आप के यस कह देने पर हमें आप दोनों की मेंबरशिप मिल जाएगी. सर, अब तो सारी बातें क्लीयर हो गई हैं. इसलिए अब कोई और बहाना मत बनाइए. बताइए, मैं कब आऊं?’’

यह सुन कर मैं पसोपेश में पड़ गया क्योंकि कुछ कहने की कोई गुंजाइश नहीं थी. मुझे चुप देख कर उस ने घबराई आवाज में पूछा, ‘‘सर, अब क्या हो गया? किस गंभीर सोच में पड़ गए हैं? आप का नाम तो गंभीर है ही, क्या नेचर से भी गंभीर हैं? लाइफ में एंज्वाय करने का चांस, आप का वेट कर रहा है और आप इतनी देर से सोचने में टाइम वेस्ट कर रहे हैं. मैं ने कहा न, कम से कम मेरी बात मान कर आप एक चांस तो लीजिए, नो रिस्क नो गेन.’’

मैं ने कहा, ‘‘मोनिकाजी, मैं बहुत कनफ्यूज्ड हो गया हूं. आप को जान कर दुख होगा कि मैं अब 68 का हो गया हूं. जीवन के इस पड़ाव में आप के द्वारा दर्शित जिंदगी का उपभोग कैसे कर सकूंगा? एंज्वाय करने के दिन तो लद गए.’’

उस ने तुरंत मेरी बात को काटते हुए कहा, ‘‘गंभीरजी, यही उम्र तो होती है मौजमस्ती करने की. जब आदमी सभी रिस्पोंसिबिलिटीज से फ्री हो जाता है. फ्री माइंड हो एंज्वाय करने का मजा ही कुछ और होता है. आप मिसेज को साथ ले कर आइए और दोनों मिल कर लुफ्त उठाइए. आप अभी तक जो मजा नहीं उठा पाए  हैं, उसे कम से कम लेटर एज गु्रप में तो उठा लीजिए.’’

मैं ने कहा, ‘‘यही तो परेशानी है. श्रीमतीजी एक घरेलू और धार्मिक प्रवृत्ति की महिला हैं. होटलों में आनाजाना उन्हें पसंद नहीं है. आज तक तो कभी गईं ही नहीं फिर अब कैसे जा पाएंगी? हमारे दौर में आज जैसा होटलों में जाने का चलन और संस्कृति नहीं थी. फिर इस उम्र में लोग क्या कहेंगे? आप ही बताइए, इन हालात में आप का प्रस्ताव कैसे स्वीकार करूं?’’

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उस ने तपाक से कहा, ‘‘गंभीरजी, आप जैसे एज गु्रप वालों के साथ यही तो समस्या है कि सेल्फ डिसीजन लेने में हिचकिचाते हैं. लोग क्या कहेंगे, यह सोच कर अपना इंटरेस्ट और फ्यूचर क्यों किल कर रहे हैं आप? यदि आप की मिसेज को होटल आने में दिक्कत है तो क्या हुआ? उस का समाधान भी मेरे पास है. मैं आप के लिए पार्टनर का प्रबंध कर दूंगी. हाइसोसायटी में तो यह कामन बात है.

‘‘हमारे यहां कई सिंगल फीमेल मेंबर्स हैं. वे भी यही सोच कर मेंबर बनी हैं कि यदि अदर सेक्स का कोई सिंगल मेंबर होगा तो वे उस के साथ पार्टनरशिप शेयर कर लेंगी. गंभीरजी, जरा सोचिए, अब उन्हें आप के साथ एडजेस्ट होने में कोई आब्जेक्शन नहीं है तो आप को क्या डिफीकल्टी है? बस, आप को करेज दिखाने की जरूरत है. बाकी बातें आप मुझ पर छोड़ दीजिए. आप कोई टेंशन न लें अपने ऊपर. मैं हूं न, सब मैनेज कर दूंगी. आप तो अपनी च्वाइस भर बता दीजिए. बस, अब कोई और बहाना मत बनाइए और हमारा आफर फाइनल करने भर का सोचिए.’’

मोनिका की खुली और बेबाक दलीलें सुन कर मैं सकते में आ गया. मन में अकुलाहट होने लगी. सोचने लगा कि कहीं मैं उस के शब्दजालों में घिरता तो नहीं जा रहा हूं? यद्यपि उस से चर्चा करते हुए मन को आनंद की अनुभूति हो रही थी. टेलीफोन के मीटर घूमते रहने की भी चिंता नहीं थी. इसलिए बात को आगे बढ़ाते हुए, मैं ने पूछ लिया, ‘‘मोनिकाजी, इस प्रकार की पार्टनरशिप में पैसे काफी खर्च हो सकते हैं. मैं एक रिटायर आदमी हूं. इस का खर्च सब कैसे और कहां से बरदाश्त कर सकूंगा?’’

उस ने कहा, ‘‘आप का यह सोचना सही है. हमारी एनुअल मेंबरशिप ही 5 हजार रुपए है. होटल विजिट की सिंगल सिटिंग में 700-800 का बिल आना साधारण बात है पर आप चिंता क्यों कर रहे हैं? इस बिल पर 10 परसेंट का डिस्काउंट भी तो मिल रहा है आप को. वैसे कभीकभी पार्टनर के बिल का पेमेंट भी आप को करना पड़ सकता है. कभी वह भी पेमेंट कर दिया करेंगी. मैं उन्हें समझा दूंगी. वह मुझ पर छोडि़ए.’’

वह एक पल रुक कर फिर बोली, गंभीरजी, एक बात कहूं, जब लाइफ एंज्वाय करना ही है तो फिर पैसों का क्या मुंह देखना? आखिर आदमी पैसा इसीलिए तो कमाता है. फिर बिना पार्टनरशिप के जिंदगी में एंज्वायमेंट कैसे होगा? सिर्फ रूखीसूखी दालरोटी खाना ही तो जिंदगी का नाम नहीं है. ‘‘गंभीरजी, एक बार इस लाइफ स्टाइल का टेस्ट कर के देखिए, सबकुछ भूल जाएंगे. शुरू में आप को कुछ अजीबअजीब जरूर लगेगा लेकिन एक बार के बाद आप का मन आप को बारबार यहां विजिट करने को मजबूर करेगा. इस का नशा सिर चढ़ कर बोलता है. यही तो रियल लाइफ का एंज्वायमेंट है.’’

‘‘मोनिकाजी, मैं 68 का हूं. क्या ऐसा करना मुझे अच्छा लगेगा?’’ मैं ने यह कहा तो वह तुनक कर बोली, ‘‘गंभीरजी, आप एज का आलाप क्यों कर रहे हैं? अरे, हमारे यहां तो 80 तक के  मेंबर हैं. उन्होंने तो कभी लाइफ एंज्वायमेंट में एज फेक्टर को काउंट नहीं किया. जिंदादिली इसी को कहते हैं कि आदमी हर एज गु्रप में स्वयं को फुल आफ यूथ समझे. बस, जोश और होश से जीने की मन में तमन्ना होनी चाहिए. ‘साठा सो पाठा’ वाली कहावत तो आप ने सुनी ही होगी. आदमी कभी बूढ़ा नहीं होता, जरूरत है सिर्फ आत्मशक्ति की.’’

मोनिकाजी द्वारा आधुनिक जीवन दर्शन का तर्क सुन कर मैं अचंभित हुए बिना नहीं रहा. मुझे ऐसा लगा कि मेरी प्रत्येक बात का, एक अकाट्य तथ्यात्मक उत्तर उस के पास है. वह मुझे प्रत्येक प्रश्न पर निरुत्तर करती जा रही है. अंदर ही अंदर भय भी व्याप्त होने लगा था. एकाएक मन में एक नवीन विचार प्रस्फुटित हुआ. उन से तुरंत पूछ बैठा कि आप की एज क्या है? यह सुन कर वह चौंक गई और कहने लगी, ‘‘अब मेरी एज बीच में कहां से आ गई?’’ पर जब इस के लिए मैं ने मजबूर किया तो उस ने हंसते हुए कहा, ‘‘आप स्वयं समझ सकते हैं कि फाइव स्टार रिसेप्सनिस्ट की एज क्या हो सकती है? इतना तो श्योर है कि मैं आप के एज ग्रुप की नहीं हूं.’’

‘‘फिर भी बताइए तो सही, मैं विशेष कारण से पूछ रहा हूं.’’

‘‘25.’’

इस के बाद मैं ने फिर प्रश्न किया कि आप के मातापिता भी होंगे? उस ने सहजता से हां में उत्तर दिया. मैं ने फिर पूछा, ‘‘मोनिकाजी, क्या आप ने उन्हें भी सदस्य बना कर जीवन का आनंद उठाने का अवसर दिलाया है? वे तो शायद मुझ से भी कम उम्र के होंगे. जब आप अन्य लोगों को लाइफ एंज्वाय करने के लिए प्रोत्साहित और अवसर प्रदान कर रही हैं, तो उन्हें क्यों और कैसे भूल गईं? वे भी तो अन्य लोगों की तरह इनसान हैं. उन्हें भी जीवन में आनंद उठाने का अधिकार है. उन्हें भी मौका मिलना चाहिए. पूर्व में आप ही ने कहा कि यही उम्र तो एंज्वाय करने की होती है, इसलिए आप को स्मरण दिलाना मैं ने उचित समझा. ‘चैरिटी बिगिंस फ्राम होम’ वाली बात आप शायद भूल रही हैं.’’

मेरी बात सुन कर शायद उसे अच्छा नहीं लगा. खिन्न हो कर बोली, ‘‘आप मेरे मातापिता में कैसे इंटरेस्ट लेने लगे? मैं तो आप के बारे में चर्चा कर रही हूं.’’

‘‘आप ठीक कहती हैं,’’ मैं ने कहा, ‘‘आप के मातापिता से मेरा इनसानियत का रिश्ता है. मुझे यही लगा कि जब आप सभी लोगों को जीवन में इतना सुनहरा अवसर प्रदान करने के लिए आमादा हो कर जोर दे रही हैं तो फिर इस में मेरा भी स्वार्थ है.’’

उस ने तुरंत पूछा, ‘‘मेरे मातापिता से आप का क्या स्वार्थ सिद्ध हो रहा है?’’

तब मैं ने कहा, ‘‘कुछ खास नहीं, मुझे उन की कंपनी मिल जाएगी. आप मुझे पार्टनर दिलाने का जो टेंशन ले रही हैं, उस से मैं आप को मुक्त करना चाहता हूं. इसलिए मैं उन्हें भी मेंबर बनाने की नेक सलाह दे रहा हूं,’’ बिना अवरोध के अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मैं ने कहा, ‘‘मोनिकाजी, आप उन दोनों के मेंबर बन जाने का शुभ समाचार मुझे कब दे रही हैं, ताकि मैं खुद आप के पास आ कर सदस्यता ग्रहण कर सकूं?’’

मेरी इस बात का उत्तर शायद उस के पास नहीं था. अब उस की बारी थी निरुत्तर होने की. एकाएक खट की आवाज आई और फोन कट गया. मैं ने एक लंबी सास ली और फोन रख दिया.

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विगत 15 मिनट से चल रही बातचीत के क्रम का इस प्रकार एकाएक पटाक्षेप हो गया. मेरी एकाग्रता भंग हो गई. मैं गंभीरता से बीते क्षणों मेें हुई बातचीत के बारे में सोचने लगा कि आज के इस आधुनिक युग में विज्ञापनों के माध्यम से उपभोक्ताओं को जीवन में आनंद और सुखशांति की परिभाषा जिस प्रकार युवाओं द्वारा परोसी तथा पेश की जा रही है, वह कितनी घिनौनी है. जिस का एकमात्र उद्देश्य उपभोक्ता को किसी भी प्रकार आकर्षित कर, उन्हें सिर्फ ‘ईट, ड्रिंक एंड बी मेरी’ के आधुनिक मायाजाल में लिप्त और डुबो दिया जाए. क्या यह सब बातें हमारी भारतीय संस्कृति, संस्कारों, आदर्शों और परंपराओं के अनुरूप और उपयुक्त हैं? क्या यह उन के साथ छल और कपट नहीं है? सोच कर मन कंपित हो उठता है.

आज के आधुनिक युग की दुहाई दे कर जिस प्रकार का घृणित प्रचारप्रसार, वह भी देश की युवा पीढ़ी के माध्यम से करवाया जा रहा है, क्या वह हमारी संस्कृति पर अतिक्रमण और कुठाराघात नहीं है? हम कब तक मूकदर्शक बने, इन सब क्रियाकलापों तथा आपदाओं के साक्षी हो कर, इन्हें सहन करते जाएंगे?

दूसरे दिन फिर उसी होटल से फोन आया. इस बार आवाज किसी पुरुष की थी. उस ने कहा, ‘‘सर, मैं पांचसितारा होटल से बोल रहा हूं. हम ने एक स्कीम लांच की है. हम उस का आप को मेंबर…’’ इतना सुनते ही मैं ने बात काटते हुए उस से प्रश्न किया, ‘‘आप के यहां मोनिकाजी रिसेप्शनिस्ट हैं क्या?’’

उस ने सकारात्मक उत्तर देते हुए प्रत्युत्तर में हां कहा. इतना कह कर मैं ने फोन काट दिया कि कल इस बारे में उन से विस्तृत चर्चा हो चुकी है. मेंबरशिप के बारे में आप उन से बात कर लीजिए.

तब से मैं उन के फोन की प्रतीक्षा कर रहा हूं. पर खेद है कि उन का फोन नहीं आया. इस प्रकार तब से मैं रियल माडर्न लाइफ एंज्वायमेंट करने के लिए प्रतीक्षारत हूं

ऐसे करें तिल की खेती

लेखक-बृहस्पति कुमार पांडेय

खरीफ का मौसम तिलहन की खेती के लिए विशेष महत्त्व रखता है. इस में मूंगफली, सोयाबीन व तिल की खेती का खास स्थान है. इस सीजन में बोई जाने वाली तिलहन फसलों का खाने के तेल के अलावा और भी कई तरीकों से प्रयोग किया जाता है. मूंगफली को भून कर खाने के अलावा या उस के दानों का विभिन्न मिठाइयों में प्रयोग किया जाता है. इसी तरह सोयाबीन को सब्जी या आटे के रूप में प्रयोग किया जाता है.

लेकिन इन सभी तिलहन वाली फसलों में तिल की खेती का खास महत्त्व है. तिल से न केवल तेल निकाला जाता है, बल्कि इस से भी कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं. तिल की 2 प्रजातियां होती हैं, काला तिल व सफेद तिल. तिल का प्रयोग विभिन्न त्योहारों में भी किया जाता है. यह खासा महंगा भी होता है.

खरीफ सीजन की सब से खास तिलहनी फसल के रूप में तिल की बोआई बलुई, बलुई दोमट व मैदानी इलाकों की मिट्टी में आसानी से की जा सकती है. उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में तिल की बोआई अकसर सहफसली खेती के रूप में अरहर, ज्वार या बाजरा के साथ भी की जाती है.

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तिल की बोआई से पहले खेत की 2 बार जुताई कल्टीवेटर या रोटावेटर से कर देनी चाहिए, जिस से खेत के खरपतवार नष्ट हो जाएं. इस के बाद जून के दूसरे सप्ताह में जुताई किए गए खेत में गोबर की खाद मिट्टी में मिला देनी चाहिए. फिर जून के आखिरी हफ्ते से जुलाई के आखिरी हफ्ते के बीच में तिल के 3 से 4 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से 200 ग्राम कार्बंडाजिम या 50 ग्राम थीरम से उपचारित कर के बोआई करनी चाहिए. बोआई के समय यह ध्यान देना चाहिए कि बीज ज्यादा गहराई में न जाने पाए.

उर्वरकों का इस्तेमाल : तिल की खेती में उर्वरकों का इस्तेमाल करने से पहले किसानों को मिट्टी जांच जरूर करा लेनी चाहिए. इस से फसल में खादों की संतुलित मात्रा का इस्तेमाल करने में आसानी होती है.

वैसे, तिल की बोआई के समय 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 15 किलोग्राम फास्फोरस व 12.50 किलोग्राम गंधक का प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करना चाहिए. निराईगुड़ाई के समय 12.50 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से डालनी चाहिए. अगर तिल की खेती राकड (बंजर) जमीन में की गई हो तो 15 किलोग्राम पोटाश की मात्रा का प्रयोग भी प्रति हेक्टेयर की दर से करना चाहिए.

निराईगुड़ाई व सिंचाई : तिल की फसल में खरपतवार नियंत्रण बेहद जरूरी है, क्योंकि खरपतवार होने से तिल का उत्पादन घट जाता?है. बोआई के 20 दिनों के भीतर पहली निराईगुड़ाई करनी चाहिए. इस के बाद 35 दिनों के भीतर दूसरी बार फसल की निराईगुड़ाई करनी चाहिए. फसल में ज्यादा खरपतवार होने पर एलाक्लोर 50 ईसी का 1.25 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से बोआई के 3 दिनों के भीतर छिड़काव कर देना चाहिए. चूंकि तिल बारिश की फसल है इसलिए इसे सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है. अगर तिल की फसल में 50 फीसदी तक फली आ गई हों और बारिश न हुई हो तो फसल की 1 सिंचाई कर देनी चाहिए.

फसल सुरक्षा: बरसात में तिल की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट के रूप में पत्ती लपेटक व फलीबेधक का प्रकोप ज्यादा होता?है. तिल में सूंडि़यों के रूप में लगने वाले कीट पत्तियों में जाली बना कर पत्तियों व फलियों को खा जाते हैं. ऐसे में क्पिनालफास 25 ईजी का 1.5 लिटर प्रति हेक्टेयर या मिथाइल पैराथियान के 2 फीसदी चूर्ण का 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए.

तिल में लगने वाले रोगों में फाइलोडी रोग खास है. इस रोग से फूल गुच्छेदार हो कर खराब हो जाते हैं. इस रोग का कारण फुदका कीट होता है. तिल की फसल को फाइलोडी रोग से बचाने के लिए बोआई 10 जुलाई से 20 जुलाई के बीच करना ज्यादा सही होता है. फाइलोडी रोग से बचने के लिए फोरेट 10 जी को 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से मिट्टी में बोआई के समय ही मिला देना चाहिए. फसल में इस रोग का प्रकोप हो जाने पर मिथाइल ओ डिमेटान 25 ईसी का 1 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए.

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तिल की फसल में फाइटोफ्थेरा रोग लगने से पत्तियां तेजी से झुलस जाती हैं, जिस का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है. इस रोग की रोकथाम के लिए 3 किलोग्राम कौपर औक्सीक्लोराइड या 2.5 किलोग्राम मैंकोजेब का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए.

फसल की कटाई व भंडारण : तिल की फसल की कटाई का समय आमतौर पर अक्तूबर से नवंबर माह के बीच होता है. जब पौधों की पत्तियां सूख कर गिर जाएं और फसल की कलियां सूखने लगें, तब फसल की कटाई कर लेनी चाहिए और फलियों को डंडे से पीट कर दानों को साफ कर अलग कर लेना चाहिए. फिर अलग किए गए दानों को 4 घंटे धूप में सुखा कर बोरे में भर कर सूखी जगह पर भंडारण करना चाहिए.

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लाभ : तिल का औसत उत्पादन 8-12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पाया गया है, जिस में 1 हेक्टेयर खेत में तकरीबन 6,000 से 8,000 रुपए की लागत आती है. इस आधार पर वर्तमान बाजार भाव को देखते हुए 80 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से औसतन 10 क्विंटल से 80,000 रुपए की आमदनी होती है. अगर लागत को निकाल दिया जाए तो 4 माह की फसल से किसान को 72,000 रुपए का शुद्ध लाभ होता है इसलिए कोई भी किसान तिल की खेती को नकदी फसल के रूप में कर के अच्छा मुनाफा कमा सकता है.

लौकी की खेती और उचित देखभाल

लेखक-डा. ऋषिपाल

आबोहवा

लौकी की अच्छी पैदावार के लिए गरम व आर्द्रता वाले रकबे मुनासिब होते हैं. इस की फसल जायद व खरीफ दोनों मौसमों में आसानी से उगाई जाती है. इस के बीज जमने के लिए 30-35 डिगरी सैंटीग्रेड और पौधों की बढ़वार के लिए 32 से 38 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान मुनासिब होता है.

मिट्टी और खेत की तैयारी

बलुई, दोमट व जीवांश से?भरपूर चिकनी मिट्टी, जिस में पानी के सोखने की कूवत अधिक हो और जिस का पीएच मान 6.0-7.90 हो, लौकी की खेती के लिए मुनासिब होती है. पथरीली या ऐसी भूमि जहां पानी भरता हो और निकासी का अच्छा इतंजाम न हो, इस की खेती के लिए अच्छी नहीं होती है.

खेत की तैयारी के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से और बाद में 2-3 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करें. हर जुताई के बाद खेत में पाटा चला कर मिट्टी को भुरभुरी व इकसार कर लेना चाहिए ताकि खेत में सिंचाई करते समय पानी बहुत कम या ज्यादा न लगे.

खाद व उर्वरक अच्छी उपज हासिल करने के लिए 50 किलोग्राम नाइट्रोजन, 35 किलोग्राम फास्फोरस व 30 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए. नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय देनी चाहिए. बची हुई नाइट्रोजन की आधी मात्रा 4-5 पत्ती की अवस्था में और बची आधी मात्रा पौधों में फूल बनने से पहले देनी चाहिए.

बीज की मात्रा

सीधी बीज बोआई के लिए 2.5-3 किलोग्राम बीज 1 हेक्टेयर के लिए काफी होता है. पौलीथिन के थैलों या नियंत्रित वातावरण युक्त गृहों में नर्सरी उत्पादन करने के लिए प्रति हेक्टेयर 1 किलोग्राम बीज ही काफी होता है.

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बोआई का समय

आमतौर पर लौकी की बोआई गरमी यानी जायद मौसम में 15 फरवरी से 25 फरवरी तक और बरसात यानी खरीफ मौसम में 15 जून से 15 जुलाई तक कर सकते हैं. पहाड़ी इलाकों में बोआई मार्चअप्रैल माह में की जाती है.

बोआई की विधि

लौकी की बोआई के लिए गरमी के मौसम में 2.5-3.5 मीटर व बारिश के मौसम में 4-4.5 मीटर की दूरी पर 50 सैंटीमीटर चौड़ी  व 20 से 25 सैंटीमीटर गहरी नालियां बना लेते हैं. इन नालियों के दोनों किनारे पर गरमी में 60 से 75 सैंटीमीटर व बारिश में 80 से 85 सैंटीमीटर फासले पर बीजों की बोआई करते हैं. एक जगह पर 2 से 3 बीज 4-5 सैंटीमीटर की गहराई पर बोने चाहिए.

सिंचाई

खरीफ मौसम में खेत की सिंचाई करने की जरूरत नहीं होती, पर बारिश न होने पर 10 से 15 दिनों के बाद सिंचाई की जरूरत पड़ती है.

अधिक बारिश की हालत में पानी निकालने के लिए नालियों का गहरा व चौड़ा होना जरूरी है. गरमी में ज्यादा तापमान होने के कारण 4-5 दिनों के फासले पर सिंचाई करनी चाहिए.

निराईगुड़ाई

आमतौर पर खरीफ मौसम में या सिंचाई के बाद खेत में काफी खरपतवार उग आते हैं, लिहाजा उन को खुरपी की मदद से 25 से 30 दिनों में निराई कर के निकाल देना चाहिए. पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए 2 से 3 बार निराईगुड़ाई कर के जड़ों के पास मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए. रासायनिक खरपतवारनाशी के रूप में ब्यूटाक्लोरा रसायन की 2 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बोआई के तुरंत बाद छिड़कनी चाहिए.

कीड़ों की रोकथाम

कद्दू का लाल कीट रैड पंपकिन बीटल : इस कीट का प्रौढ़ चमकीले नारंगी रंग का होता है. इस की सूंड़ी व प्रौढ़ दोनों ही जमीन के अंदर पाए जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं. ये प्रौढ़ पौधों की छोटी पत्तियों को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. सूंड़ी पौधों की जड़ काट कर नुकसान पहुंचाती है, वहीं प्रौढ़ कीट खासतौर पर मुलायम पत्तियां अधिक पसंद करते हैं. इस कीट के अधिक आक्रमण से पौधे पत्तीरहित हो जाते हैं.

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रोकथाम

* सुबह ओस पड़ने के समय राख का बुरकाव करने से प्रौढ़ कीट पौधों पर नहीं बैठते हैं, जिस से नुकसान कम होता है.

* जैविक विधि से रोकथाम के लिए अजादीरैक्टिन 300 पीपीएम 5 से 10 मिलीलिटर या अजादीरैक्टिन 5 फीसदी 0.5 मिलीलिटर की दर से 2 या 3 बार छिड़कने से फायदा होता है.

* इस कीट का अधिक प्रकोप होने पर डाईक्लोरोवास 76 ईसी 1.25 मिलीलिटर या ट्राइक्लोफेरान 50 ईसी 1 मिलीलिटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एमएल 0.5 मिलीलिटर की दर से 10 दिनों के अंतराल पर छिड़कें.

फल मक्खी : इस कीट की सूंड़ी फसल को नुकसान पहुंचाती है. प्रौढ़ मक्खी गहरे भूरे रंग की होती है. इस के सिर पर काले व सफेद धब्बे पाए जाते हैं. प्रौढ़ मादा छोटे मुलायम फलों के अंदर अंडे देना पसंद करती है. अंडों से ग्रब्स सूंड़ी निकल कर फलों के अंदर का भाग खा कर खत्म कर देते हैं. ये कीट फल के जिस भाग पर अंडे देते हैं, वह भाग वहां से टेढ़ा हो कर सड़ जाता है और नीचे गिर जाता है.

रोकथाम

* गरमी की गहरी जुताई या पौधे के आसपास खुदाई करें ताकि मिट्टी की निचली परत खुल जाए जिस से फल मक्खी का प्यूपा धूप द्वारा नष्ट हो जाए.

* फल मक्खी द्वारा खराब किए गए फलों को इकट्ठा कर के खत्म कर देना चाहिए.

* नर फल मक्खी को नष्ट करने के लिए प्लास्टिक की बोतलों को इथेनाल कीटनाशक डाईक्लोरोवास या कार्बारिल या मैलाथियान क्यूल्यूर को 6:1:2 के अनुपात के घोल में लकड़ी के टुकड़े को डुबा कर 25 से 30 फंदे खेत में स्थापित कर देने चाहिए. कार्बारिल 50 डब्ल्यूपी, 2 ग्राम प्रति लिटर पानी या मैलाथियान 50 ईसी 2 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी को ले कर 10 फीसदी शीरा या गुड़ में मिला कर जहरीले चारे को 1 हेक्टेयर खेत में 250 जगहों पर इस्तेमाल करना चाहिए.

* प्रतिकर्षी 4 फीसदी नीम की खली का इस्तेमाल करें, जिस से जहरीले चारे की ट्रैपिंग की कूवत बढ़ जाए. जरूरत पड़ने पर कीटनाशी जैसे क्लोरेंट्रानीलीप्रोल 18.5 एससी 025 मिलीलिटर या डाईक्लारोवास 76 ईसी 1.25 मिलीलिटर का प्रति लिटर पानी की दर से छिड़काव कर सकते हैं.

खास रोग व रोकथाम

चूर्णिल आसिता : रोग की शुरुआत में पत्तियों और तनों पर सफेद या धूसर रंग पाउडर जैसा दिखाई देता है. कुछ दिनों के बाद ये धब्बे चूर्ण भरे हो जाते हैं. सफेद चूर्णी पदार्थ आखिर में समूचे पौधे की सतह को ढक लेता है. अधिक प्रकोप के कारण पौधे जल्दी बेकार हो जाते हैं. फलों का आकार छोटा रह जाता है.

रोकथाम

* इस की रोकथाम के लिए खेत में फफूंदनाशक दवा जैसे ट्राइडीमोर्फ 0.05 फीसदी 1 लिटर पानी में घोल कर 7 दिनों के फासले पर छिड़काव करें. इस दवा के न होने पर फ्लूसिलाजोल 1 ग्राम प्रति लिटर पानी या हेक्साकोनाजोल 1.5 मिलीलिटर पानी की दर से छिड़काव करें.

मृदुरोमिल आसिता : यह रोग बारिश या गरमी वाली फसलों में बराबर लगता है. उत्तरी भारत में इस रोग का हमला ज्यादा होता?है. इस रोग की खास पहचान पत्तियों पर कोणीय धब्बे पड़ना है. ये कवक पत्ती के ऊपरी भाग पर पीले रंग के होते हैं और नीचे की तरफ रोएंदार बढ़वार करते हैं.

रोकथाम

* इस रोग के लिए बीजों को मैटालिक्सला नामक कवकनाशी की 3 ग्राम दवा से प्रति किलोग्राम की दर से उपचारित कर के बोना चाहिए और मैंकोजेब 0.25 फीसदी का छिड़काव रोग की पहचान होने के तुरंत बाद फसल पर करना चाहिए.

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* यदि संक्रमण भयानक हालत में हो तो मैटालैक्सिल व मैंकोजेब का 2.5 ग्राम प्रति लिटर पानी की दर से या डाईमेयामर्फ का 1 ग्राम प्रति लिटर पानी व मैटीरैम का 2.5 ग्राम प्रति लिटर पानी की दर से 7 से 10 दिनों के फासले पर 3 से 4 बार छिड़काव करें.

फलों की तोड़ाई व उपज

लौकी के फलों की तोड़ाई मुलायम हालत में करनी चाहिए. फलों का वजन किस्मों पर निर्भर करता है. फलों की तोड़ाई डंठल लगी अवस्था में किसी तेज चाकू से करनी चाहिए. तोड़ाई 4 से 5 दिनों के अंतराल पर करनी चाहिए ताकि पौधों पर ज्यादा फल लगें. औसतन लौकी की उजप 350 से 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है.    ठ्ठ

रानू मंडल को सलमान खान देंगे आलीशान घर

रानूमंडल जब गाती है तो लोग अपनी आंखें बंद कर लेते हैं. अपने आवाज के जादू से फिल्म संगीतकार, गायक व ऐक्टर हिमेश रेशमिया के स्टूडियो पहुंच कर रानूरातोंरात स्टार बन गई.

यह किस ने सोचा था कि कभी रेलवे के प्लेटफार्म पर गीत गा कर अपना पेट पालने वाली रानूको आज करोड़ों लोग सुन रहे हैं. अब खबर है कि दबंग खान यानी सलमान खान ने रानूकी मदद के लिए हाथ बढाए हैं.

वायरल हो रही हैं खबरें

सोशल मीडिया पर आजकल सलमान खान की दरियादिली की एक खबरें खूब वायरल हो रही हैं. ऐसी खबरें वायरल है कि सलमान खान ने रानूको एक बङा सा घर दिया है, जिस की कीमत 50 लाख से अधिक की बताई जा रही है.

इतना ही नहीं, यह भी दावा किया जा रहा है कि सलमान खान अपनी आने वाली फिल्म ‘दबंग 3’ में रानूको गाने का मौका देंगे.

सलमान की तारीफ

सोशल मीडिया पर सलमान खान की इस दरियादिली की जम कर तारीफ करी जा रही है पर असलियत क्या है यह किसी को पता नहीं क्योंकि सलमान खान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

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वैसे सलमान की इस दरियादिली की बात में सचाई है भी तो वजह यह भी रहा हो कि जब रानू ‘सुपर स्टार सिंगर्स’ के सेट पर आई थी तो बतौर जजमेंट पैनल में शामिल रहे हिमेश रेशमिया ने कहा था,”सलमान भाई के पिता सलीम खान कहा करते थे कि जब भी कहीं भी कोई टेलैंट दिखे तो उसे आगे बढने का मौका जरूर दो.”

हिमेश ने शायद इसी वजह से अपनी फिल्म ‘हैप्पी हार्डी ऐंड हीर’ में गाना ‘तेरी मेरी कहानी…’ रानू से गवाया और खबरचियों की मानें तो हिमेश ने इस गीत के लिए रानूको 6 लाख रूपए भी दिए हैं.

फन्नी वीडियोज से मनोरंजन

सोशल मीडिया पर रानूको मिली इस शोहरत पर जहां कुछ लोग तारीफ के पुल बांध रहे हैं, तो वहीं कुछ फन्नी वीडियोज भी खूब वायरल हैं. इन वीडियोज में लोग रानूकी तरह ही पोज दे कर गाते हुए दिख रहे हैं.

पर जैसा कि अकसर होता आया है, नकल उतारने में माहिर कुछ लोग अब राह चलते, बसों, ट्रेनों में रानूकी नकल कर खुद भी रातोंरात शोहरत पाने का ख्वाब पाले हैं.

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हर कोई रानूनहीं बन जाता

पर हर किसी को रानूजैसा ही ब्रेक नहीं मिलता. बौलीवुड में गीत गाने के लिए कङी मेहनत और लंबा संघर्ष करना होता है. हां, यह अलग बात है कि रानूरातोंरात स्टार बन गई पर सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि वह अपने परिवार से बिछुङ गई थी और पेट पालने के लिए वह गीत गा कर लोगों का दिल जीत रही थी.

खैर जो भी हो, अपने दिलकश आवाज से रानू ने करोड़ों लोगों का दिल तो जीत ही लिया है.

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