अजय देवगन ने खरीदी इंडिया की सबसे महंगी गाड़ी, कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान

बौलीवुड के स्टार अजय देवगन वैसे तो लाइमलाइट में रहना ज्यादा पसंद नहीं करते पर इस बार वो कुद बा कुद सुर्खियों में आ गए है. हाल ही में अजय देवगन ने सबसे महंगी गाड़ियां खरीदकर एक बार फिर सबको चौका दिया है. इसके पहले भी अजय ने अपनी पत्नी काजोल को लग्जरी एसयूवी औडी क्यू 7 गिफ्ट की थी ये गाड़ी भी काफी महंगी है. आपको बता दे की अजय को गाड़ियों का काफी शौक है और ये आप उनकी फिल्मों से भी जान सकते हैं.

Rolls Royce Cullinan खरीद ने वाले तीसरे भारतीय

बौलीवुड स्टार अजय देवगन ने Rolls Royce Cullinan  खरीदी है. इस गाड़ी को खरीदने के बाद अजय देवगन भारत के तीसरे खरीदार बन गए है. अजय देवगन (Ajay Devgan) के पास इस समय कई महंगी गाड़ियां हैं. अजय के पास इस समय मिनी कूपर, BMW Z4, रेंज रोवर वोग , मर्सडीज बेंज W115 220डी जैसी कई महंगी गाड़ियों का कलेक्शन है.

 

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Standing together for something good … #plasticbanegafantastic #startalittlegood #beingresponsible

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 खरीदी नीले रंग की Rolls Royce Cullinan

अजय ने भारत की सबसे महंगी गाड़ियों में से एक एसयूवी कार Rolls Royce Cullinan खरीद ने के बाद से काफी सुर्खियां बटोर ली है. इस गाड़ी  की खास बात ये है की इसको खरीददार के हिसाब से बनाया जाता है. अजय ने एसयूवी Rolls Royce Cullinan गाड़ी नीले रंग में खरीदी है. ये गाड़ी इस समय मुकेश अंबानी और प्रोड्यूसर भूषण कुमार के पास है इसके बाद अब अजय ने इसे खरीद लिया है. अजय ने ये गाड़ी 6.95 करोड़ रुपये में खरीदी है.

 

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Son in my eyes.

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तानाजी: द अनसंग वौरियर फिल्म में आने वाले है नजर

अजय देवगन इस समय ‘तानाजी: द अनसंग वौरियर’ की शूटिंग में बिजी है. इस फिल्म में वो लीड रोल में दिखाई देंगे. फिल्म में सैफ अली खान भी नजर आएंगे. फिल्म में सैफ नेगेटिव किरदार में होंगे. साथ ही काजोल भी इस फिल्म में छोटे लेकिन अहम किरदार में दिखाई देंगी. ये एक पीरियड फिल्म होगी जोकि 150 करोड़ के बजट के साथ बनाई जा रही है. ये फिल्म अगले साल 10 जनवरी को रिलीज की जाएगी. बौक्स औफिस पर इस फिल्म की टक्कर दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक से होगी.

‘बिग बौस’ के बाद इस हौट अंदाज में TV पर नजर आएंगी जसलीन मथारू

बिग बौस 12 फेम स्टार जसलीन मथारु जब भी कुछ नया करती है तो सभी को चौका ही देती है. हाल ही में भी कुछ ऐसा ही हुआ जब जसलीन ने बताया की वो जल्द ही छोटे पर्दे पर दस्तक देने वाली है. बिग बौस में भी जसलीन को काफी पसंद क्या गया था ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा की वो छोटे पर्दे पर  तहलका बचा सकती है. आपको बता दे की बिंग बौस 12 में एंट्री के लिए जसलीन ने अपने गुरु अनुप जलोटा को अपना बौयफ्रेंड बताया था. जिसके बात सभी के जुबान पर इस का ही नाम था. दोनों ने इस समय काफी चर्चा बटोरी थी.

छोटे पर्दे पर जसलीन को धमाका

जसलीन कलर्स के टीवी सीरियल ‘विश’ में नजर आएंगी. गिरती टीआरपी की वजह से मेकर्स अब जसलीन मथारु की शो में एंट्री करवाने जा रहे हैं. ऐसे में यह देखना मजेदार होगा कि, दर्शकों को जसलीन मथारु कितनी पसंद आती हैं. जसलीन सुपरनैचुरल शो का हिस्सा बनने जा रही हैं. ऐसे में वह किसी सादे किरदार में नजर आएंगी ऐसा तो हो ही नहीं सकता. यही वजह है कि, इस सीरियल में जसलीन एक जलपरी के किरदार में नजर आने वाली हैं. इस सीरियल में जसलीन को टीवी एक्ट्रेस देबीना बनर्जी के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिलेगा. जिसको देखने के लिए फैंस काफी एक्साइटेड है.

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Watch “VISH” tonight at 10:30 pm on COLORS @colorstv #vish #colorstv #jasleenmatharu #vish PC @chaurasiya4652

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‘बिग बौस 12′ के पसंदीदा कंटेस्टेंट में से एक

बिग बौस 12 में जसलीन मथारु का जबरदस्त अंदाज लोगों को खूब पसंद आया था. यही वजह है कि, जसलीन खेल में काफी लंबे समय तक टिक पाई थीं. उनको घर में काफी हंगामा मचाते हुए भी देखा जा चुका है. जिसे लोगों ने काफी पसंद किया इसलिए कहना गलत नहीं होगा की जसलीन के छोटे पर्दे में एंट्री के बाद वो और भी ज्यादा पौपुलर होने वाली है.

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It’s the weekend,,, Time to Relax 🤸‍♀️ Have a great Saturday 🍷🍺🍻🥂 #jasleenmatharu #love #peace

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सिंगिग के बाद अब एक्टिंग में मचाएंगी धमाल

जसलीन मथारु सिंगर तो पहले से ही थीं, पर अब वो एक्टिंग की दुनिया में हाथ आजमाना चाह रही हैं. यही वजह है कि, सीरियल्स की मदद से वह अपनी एक्टिंग सुधार रही हैं. सलमान खान के शो में जसलीन का हौट अंदाज लोगों को खूब पसंद आया था. इतना ही नहीं घर के कई लड़के जसलीन की खूबसूरती के पीछे लट्टू हो गए थे. बिग बौस 12 से निकलने के बाद भी जसलीन आए दिन अपने हौट लुक के चलते सुर्खियों में बनी रहती हैं. हाल ही में जसलीन के बिकिनी फोटोज काफी वायरल हुए. फैंस उनके सभी अवतार को खासा पसंद करते है.

कभीकभी ऐसा भी…

मैं ने कहा, ‘‘इंस्पेक्टर साहब, मैं इन्हें जानती हूं. ये बड़े अच्छे लड़के हैं. मेरे भाई हैं. आप गलत लोगों को पकड़ लाए हैं. इन्हें छोड़ दीजिए.’’

‘‘अरे मैडम, इन के मासूम और भोले चेहरों पर मत जाइए. जब चोर पकड़ में आता है तो वह ऐसे ही भोला बनता है. बड़ी मुश्किल से तो ये दोनों पकड़ में आए हैं और आप कहती हैं कि इन्हें छोड़ दें… और फिर ये आप के भाई कैसे हुए? दोनों तो मुसलिम हैं और अभी आप ने चालान की रसीद पर पूरबी अग्रवाल के नाम से साइन किया है तो आप हिंदू हुईं न,’’ बीच में वह पुलिस वाला बोल पड़ा जिस से मैं ने अपनी गाड़ी छुड़वाई थी.

उस के बेढंगे बोलने के अंदाज पर मुझे बहुत ताव आया और बोली, ‘‘इंस्पेक्टर, कुछ इनसानियत के रिश्ते हर धर्म, हर जाति से बड़े होते हैं. वक्त पड़ने पर जो आप के काम आ जाए, आप का सहारा बन जाए, बस उस मानवतारूपी धर्म और जाति का ही रिश्ता सब से बड़ा होता है. कुछ दिन पहले मैं एक मुसीबत में फंस गई थी, उस समय मेरी मदद करने को तत्पर इन लड़कों ने मुझ से मेरी जाति और धर्म नहीं पूछा था. इन्होंने मुझ से तब यह नहीं कहा था कि अगर आप मुसलिम होंगी तभी हम आप की मदद करेंगे. इन्होंने महज इनसानियत का धर्म निभाया था और मुश्किल में फंसी मेरी मदद की थी.’’

‘‘इंस्पेक्टर साहब, शायद मेरी समझ से जो इस धर्म को अपना ले, वह इनसान सच्चा होता है, निर्दोष होता, बेगुनाह होता है, गुनहगार नहीं. उस वक्त अपनी खुशी से मैं ने इन्हें कुछ देना चाहा तो इन्होंने लिया नहीं और आप कह रहे हैं कि…’’

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मेरी उन बातों का शायद उन पुलिस वालों पर कुछ असर पड़ा. लड़के भी मेरी तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखने लगे थे. एक बोला, ‘‘मैडम, आप बचा लीजिए हमें. यह जबरदस्ती की पकड़ हमारी जिंदगी बरबाद कर देगी.’’

मैं ने भरोसा दिलाते हुए उन से कहा, ‘‘डोंट वरी, कुछ नहीं होगा तुम लोगों को. अगर उस दिन मैं ने तुम्हें न जाना होता और तुम ने मेरी मदद नहीं की होती तो शायद मैं भी कुछ नहीं कर पाती लेकिन किसी की निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का फल तो मिलता ही है. इसीलिए कहते हैं न कि जिंदगी में कभीकभी मिलने वाले ऐसे मौकों को छोड़ना नहीं चाहिए. अपनी तरफ से पूरी कोशिश करनी चाहिए कि आप के हाथों किसी का भला हो जाए.’’

मेरी बातों के प्रभाव में आया एक पुलिस वाला नरम लहजे में बोला, ‘‘देखिए मैडम, इन लड़कों को उस पर्स वाली मैडम ने पकड़वाया है. अब अगर वह अपनी शिकायत वापस ले लें तो हम इन्हें छोड़ देंगे. नहीं तो इन्हें अंदर करने के अलावा हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है.’’

‘‘तो वह मैडम कहां हैं? फिर उन से ही बात करते हैं,’’ मैं ने तेजी से कहा. ऐसा लग रहा था जैसे कि कुछ अच्छा करने के लिए ऊर्जा अंदर से ही मिल रही थी और रास्ता खुदबखुद बन रहा था.

‘‘वह तो इन लोगों को पकड़वा कर कहीं चली गई हैं. अपना फोन नंबर दे गई हैं, कह रही थीं कि जब ये उन के पर्स के बारे में बता दें तो आ जाएंगी.’’

‘‘अच्छा तो उन्हें फोन कर के यहां बुलाइए. देखते हैं कि वह क्या कहती हैं? उन से ही अनुरोध करेंगे कि वह अपनी शिकायत वापस ले लें.’’

पुलिस वाले अब कुछ मूड में दिख रहे थे. एक पुलिस वाले ने फोन नंबर डायल कर उन्हें थाने आने को कहा.

फोन पहुंचते ही वह मैडम आ गईं. उन्हें देखते ही मेरे मुंह से निकला, ‘‘अरे, मिसेज सान्याल…’’ वह हमारे आफिसर्स लेडीज क्लब की प्रेसीडेंट थीं और मैं सेके्रटरी. इसी चक्कर में हम लोग अकसर मिलते ही रहते थे. आज तो इत्तफाक पर इत्तफाक हो रहे थे.

मुझे थाने में देख कर वह भी चौंक गईं. बोलीं, ‘‘अरे पूरबी, तुम यहां कैसे?’’

‘‘मिसेज सान्याल, मेरी गाड़ी को पुलिस वाले बाजार से उठा कर थाने लाए थे, उसी चक्कर में मुझे यहां आना पड़ा. पर ये लड़के, जिन्हें आप ने पकड़वाया है, असली मुजरिम नहीं हैं. आप देखिए, क्या इन्होंने ही आप का पर्स झपटा था.’’

‘‘पूरबी, पर्स तो वे मेरा पीछे से मेरे कंधे पर से खींच कर तेजी से चले गए थे. एक बाइक चला रहा था और दूसरे ने चलतेचलते ही…’’ इत्तफाक से मेरे पीछे से एक पुलिस जीप आई, जिस में ये दोनों पुलिस वाले बैठे थे. मेरी चीख सुन के इन्होंने मुझे अपनी जीप में बिठा लिया. तेजी से पीछा करने पर बाइक पर सवार ये दोनों मिले और बस पुलिस वालों ने इन दोनों को पकड़ लिया. मुझे लगा भी कि ये दोनों वे नहीं हैं, क्योंकि इतनी तेजी में भी मैं ने यह देखा था कि पीछे बैठने वाले के, जिस ने मेरा पर्स झपटा था, घुंघराले बाल नहीं थे, जैसे कि इस लड़के के हैं. वह गंजा सा था और उस ने शाल लपेट रखी थी, जबकि ये लड़के तो जैकेट पहने हुए हैं.

‘‘इन पुलिस वाले भाईसाहब से मैं ने कहा भी कि ये लोग वे नहीं हैं मगर इन्होंने मेरी सुनी ही नहीं और कहा कि अरे, आप को ध्यान नहीं है, ये ही हैं. जब मारमार के इन से आप का कीमती पर्स निकलवा लेंगे न तब आप को यकीन आएगा कि पुलिस वालों की आंखें आम आदमी से कितनी तेज होती हैं.’’

फिर मिसेज सान्याल ने तेज स्वर में उन से कहा, ‘‘क्यों, कहा था कि नहीं?’’

पुलिस वालों से तो कुछ कहते नहीं बना, लेकिन बेचारे बेकसूर लड़के जरूर अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए बोले, ‘‘मैडम, अगर हम आप का पर्स छीन कर भागे होते तो क्या इतनी आसानी से पकड़ में आ जाते. अगर आप को जरा भी याद हो तो आप ने देखा होगा कि मैं बहुत धीरेधीरे बाइक चला रहा था क्योंकि अभी कुछ दिनों पहले ही मेरे हाथ में फ्रैक्चर हो गया था. आप चाहें तो शहर के जानेमाने हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. संजीव लूथरा से पता कर सकते हैं, जिन्होंने मेरा इलाज किया था.

‘‘हम दोनों यहां के एक मैनेजमेंट कालिज से एम.बी.ए. कर रहे हैं. आप चाहें तो कालिज से हमारे बारे में सबकुछ पता कर सकती हैं. इंस्पेक्टर साहब, आप की जरा सी लापरवाही और गलतफहमी हमारा कैरियर चौपट कर देगी. देश का कानून और देश की पुलिस जनता की रक्षा के लिए है, उन्हें बरबाद करने के लिए नहीं. हमें छोड़ दीजिए, प्लीज.’’

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अब बात बिलकुल साफ हो चुकी थी. पुलिस वालों की आंखों में भी अपनी गलती मानने की झलक दिखी. मिसेज सान्याल ने भी पुलिस से अपनी शिकायत वापस लेते हुए उन लोगों को छोड़ देने और असली मुजरिम को पकड़ने की प्रार्थना की. मुझे भी अपने दिल में कहीं बहुत अच्छा लग रहा था कि मैं ने किसी की मदद कर एक नेक काम किया है.

सचमुच, जिंदगी में कभीकभी ऐसे मोड़ भी आ जाते हैं जो आप के जीने की दिशा ही बदल दें. पुलिस के छोड़ देने पर वे दोनों लड़के वाकई मेरे भाई जैसे ही बन गए. बाहर निकलते ही बोले, ‘‘आप ने पुलिस से हमें बचाने के लिए अपना भाई कहा था न, आज से हम आप के बस भाई ही हैं. अब आप को हम मैडम नहीं ‘दीदी’ कहेंगे और हमारे अलगअलग धर्म कभी हमारे और आप के पाक रिश्ते में आड़े नहीं आएंगे. हमारा मोबाइल नंबर आप रख लीजिए, कभी भी, कहीं भी, किसी भी समय अच्छीबुरी कोई बात हो, अपने इन भाइयों को जरूर याद कर लेना दीदी, हम तुरंत आप की सेवा में हाजिर हो जाएंगे.’’

उन का मोबाइल नंबर अपने मोबाइल में फीड कर के मैं मुसकरा दी थी और अपनी पकड़ी गई गाड़ी को ले कर घर आ गई. विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये सब हकीकत में मेरे साथ हुआ, लग रहा था कि जैसे किसी फिल्म की शूटिंग देख कर आ रही हूं. घर पहुंच कर, इत्मीनान से चाय के सिप लेती हुई श्रेयस को फोन किया और सब घटना उन्हें सुनाई तो खोएखोए से वह भी कह उठे, ‘‘पूरबी, होता है, कभीकभी ऐसा भी जिंदगी में…’’     द्य

 

साईको पीड़ित ने की मां की हत्या… और….!!

उस मांस के टुकड़ों को बरतन में रखकर वह उसे खाने की तैयारीमें था. तभी पुलिस आ पहुंची. छत्तीसगढ़ की इस लोमहर्षक घटना से बोतल्दा गांव से लेकर प्रदेश भर में आम जनमानस यह देख स्तब्ध रह गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अर्धविक्षिप्त युवक को मृतक माँ ने बड़ी मुश्किलों से पाला- पोसा था.
यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरा मामला साइको बीमारी से संबंधित है. साइको पीड़ित युवक का इलाज परिवार जन नहीं कर सके अंततः उसका यह भयंकर परिणाम सामने आया है ऐसे में आप सकता है कि हम अपने आसपास ऐसे साइको विक्षिप्त लोगों पर निगाह पड़ते ही उनकी समुचित इलाज की पहल करें.

साइको पीड़ित सीताराम

जिला पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार  खरसिया थाना के दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोतल्दा गांव में एक अर्धविक्षिप्त युवक ने अपनी मां फुलोबाई उरांव (50 वर्ष) की दिनदहाड़े टांगी से मारकर हत्या कर दी. हत्या करने के बाद सिर का भेजा (मांस) निकालकर उसके टुकड़े-टुकड़े किये.  पड़ोसी से पुलिस को घटना की सूचना मिली और पुलिस दलबल के साथ तत्परता से पहुँच गई. आरोपी सीताराम उरांव (32 वर्ष) पिता बलेश्वर उराव  लंबे समय से अर्धविक्षिप्त है. और उसका इलाज नहीं कराया जा रहा था. इस दिल दह्लाने वाली घटना के पश्चात घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुट गई और घटना की जानकारी आग की तरह चारो ओर फैलती चली गई.

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पुलिस ने आरोपी को अपनी गिरफ्त में लेकर खानापूर्ति प्रारंभ कर दी अब सीतारामपुरा मां की हत्या के आरोप में जेल की सीखचो के पीछे होगा. इस घटना के बाद कई प्रश्न उठ खड़े होते हैं जैसे इस हत्या का दोषी कौन है क्या सीताराम मानसिक रूप से स्वस्थ होता तो क्या वह अपनी मां की हत्या कर सकता था?आज ऐसे प्रश्नों पर गंभीरता से चिंतन करने का समय है. आखिर इस घटना के पीछे दोषी कौन है क्या सीताराम दोषी है या उसका परिवार और अगर परिवार सक्षम था तो समाज और सरकार कहां है? यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि जो व्यक्ति अपने मां की हत्या कर सकता है क्या वह किसी और की हत्या नहीं कर सकता था आज ऐसे अनेक मामले देश विदेश में हो रहे हैं मगर इस और न को समाजिक संस्था चिंतन कर रही है और ना ही सरकार.

खानापूरी जारी है

पुलिस बड़े ही गर्व के साथ यह बता रही है कि हमने हत्या का मामला दर्ज कर लिया
है.खरसिया थाना के निरीक्षक एस आर साहू ने हमारे संवाददाता को बताया कि जिस समय यह घटना हुई उस समय घर के पिछवाड़े में आरोपित के छोटे भाई की पत्नी किसी काम में लगी थी. आरोपी सिरफिरा बेटा शराब का आदी था और नशा करने के लिए माँ से पैसे की मांग कर रहा था. पैसा नहीं होने के कारण माँ उसे पैसे नहीं दे पाई जिससे गुस्से में आकर बेटे ने टांगी से माँ की हत्या कर दी और सिर के अन्दर से भेजा निकालकर टुकड़े कर दिए. घर मे जब भाई की पत्नी आई व खून से लथपथ सास को देखा.

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जानकारी मिलने पर ग्रामीण जमा हो गए और 112 को सूचना दी. 112 ने पुलिस को जानकारी दी जिसके बाद पुलिस ने पहुंचकर शव बरामद कर लिया. साहू ने बताया कि पुलिस ने कडाही में रखे मांस के टुकडे को बरामद कर लिया है. उसने पुलिस को बताया कि वह उस मांस को पकाने की तैयारी में था मगर इतने में छोटे भाई की पत्नी आ गई जिससे वह भाग निकला.पुलिस के अनुसार घर में आरोपित और उसकी माँ एक साथ रहते थे जबकि उसका छोटा भाई अपनी पत्नी और बच्चे के साथ दूसरे कमरे में रहता था. एक ही घर में दो चूल्हे जलते थे. आरोपित युवक पहले स्वस्थ और कामकाजी था तथा गाड़ी चलाकर अपना और माँ का पेट पालता था. ड्राइवरी के दौरान ही गांजा-शराब की उसे लत लग गई और बाद में अर्धविक्षिप्त भी हो गया. साईको पीड़ित होने के बाद उसने काम छूट गया जिसके बाद माँ ही अर्धविक्षिप्त को स्वयं कमाकर पाल रही थी और नशे के लिए बेटे को पैसे भी देती थी. लेकिन कब क्या हो जाये इसका कोई अन्दाजा भी नहीं लगा सकता । क्या कोई बेटा ऐसा भी कर सकता है कि अपनी ही माँ की हत्या कर उसके माँस के छोटे छोटे टुकड़े को पकाकर खा जाये।

दो जून की रोटी

ए क पुराना प्रचलित चुटकुला है  जिसे अकसर लोग आपस में कहते सुनते रहते हैं :

2 गधे चरागाह में चर रहे थे. चरतेचरते 1 गधे ने दूसरे को एक चुटकुला सुनाया, पर दूसरा गधा चुटकुला सुन कर भी शांत रहा, उस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं जाहिर की. तब चुटकुला सुनाने वाले गधे को झेंपने के अलावा कोई चारा नहीं रहा और सांझ होने पर दोनों गधे अपनेअपने निवास को चले गए.

अगले दिन दोनों गधे चरने के लिए फिर उसी चरागाह में आए तो चुटकुला सुनने वाला गधा बहुत जोर से हंसने लगा. उसे इस तरह हंसता देख कर दूसरे गधे ने हंसने का कारण जानना चाहा, तो उत्तर मिला कि कल जो चुटकुला उस ने सुना था, उसी पर हंस रहा है.

पहले गधे ने आश्चर्य से कहा कि चुटकुला तो कल सुनाया था, आज क्यों हंस रहे हो. इस पर दूसरे गधे से उत्तर मिला कि उस का अर्थ आज समझ में आया है.

अब हंसने की बारी चुटकुला सुनाने वाले की थी. उस ने जोर का ठहाका लगाते हुए कहा, ‘‘वाह, चुटकुला कल सुना था, हंस अब रहे हो. वास्तव में तुम रहोगे गधे के गधे ही. कल की बात आज समझ में आई है.’’

मेरे विचार से यह कथा मात्र एक चुटकुला नहीं है. इस में तो गहन रहस्य और ज्ञान छिपा है. वास्तविकता यह है कि बहुत सारी बातें ऐसी होती हैं जिन का अर्थ तब समझ में नहीं आता जब कही जाती हैं. बहुत सी घटनाओं का अर्थ घटना के घटित होते समय जाहिर नहीं होता. बहुत सी बातों का अर्थ बाद में समझ में आता है. कभीकभी तो ऐसी बातों एवं घटनाओं का अर्थ समझने में वर्षों का वक्त लग जाता है. पर किसी भी बात के अर्थ को समझने में व्यक्ति विशेष की बुद्धि का भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान होता है. यदि व्यक्ति बुद्धिमान है तो बात का अर्थ समझने में विलंब नहीं होता, परंतु यदि व्यक्ति की बुद्धि कुछ मंद है तो अर्थ समझने में देर होती ही है. अल्पबुद्धि होने के कारण ही शायद यह चुटकुला गधों के बारे में प्रचलित है.

बचपन में घटित एक घटना को समझने में मुझे भी वर्षों का समय लग गया था. शायद बालमन में तब इतनी समझ नहीं थी कि इस बात का अर्थ पल्ले पड़ सके या गधों की तरह बुद्धि अल्प होने के कारण अर्थ समझ में नहीं आया था. जो भी कहें पर यह घटना लगभग 40 साल पुरानी है.

मेरे श्रद्धेय पिताजी का मुख्य व्यवसाय खेती था, लेकिन जमीन पर्याप्त न होने के कारण वह खेती मजदूरों से कराते थे और खुद सिंचाई विभाग में छोटीमोटी ठेकेदारी का कार्य करते थे. यह कहना अधिक उपयुक्त और तर्कसंगत होगा कि खेती तो मजदूरों के भरोसे थी और पिताजी का अधिक ध्यान ठेकेदारी पर रहता था.

गांव में खेल व मनोरंजन का कोई साधन नहीं था, अत: कक्षा 8 पास करने के बाद मेरा ध्यान खेती की ओर आकर्षित हुआ और मैं कभीकभी अपने खेतों पर मजदूरों का काम देखने के लिए जाने लगा. तब हमारे खेतों पर 3 मजदूर भाई, जिन के नाम ज्योति, मोल्हू व राजपाल थे, कार्य करते थे. वे मुंह अंधेरे, बिना कुछ खाएपीए हलबैल ले कर खेत पर चले जाते थे. वह खेत पर काम करते और दोपहर को उन की मां भोजन ले कर खेत पर जाती. तब काम से कुछ समय निकाल कर वे दोपहर का भोजन पेड़ की छांव में बैठ कर करते थे.

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संयोगवश कभीकभी उन के खाने के समय पर मैं भी खेत पर होता था व उन का खाना देखने का अवसर मिलता था. मैं ने उन के खाने में कभी दाल या सब्जी नहीं देखी. उन के खाने में अकसर नमक मिली हुई मोटे अनाज की रोटी होती थी व उस के साथ अचार और प्याज. उन की मां कुल मिला कर 6 रोटी लाती थी व तीनों भाइयों को 2-2 रोटी दे देती थी, जिन्हें खा कर वे पानी पीते और फिर अपने काम में लग जाते.

खाने के बीच अकसर उन की मां बातें करती रहती कि आज तो घर में सेर भर ही अनाज था, उसी को पीस कर रोटी बनाई है. जिन में से घर पर औरतें व बच्चे भी खाते थे. उन्हीं में से वह तीनों भाइयों के लिए भी लाती थीं. तब मैं उन की बातें सुनता अवश्य था पर अर्थ कुछ नहीं निकाल पाता था. मुझे यह बात सामान्य लगती थी. मुझे लगता था कि उन्होंने भरपेट भोजन कर लिया है. बालपन में इस का कुछ और अर्थ निकालना संभव भी नहीं था.

उन दिनों एक परंपरा और थी कि त्योहार यानी होलीदीवाली पर मजदूरों को किसान अपने घर पर भोजन कराते थे. उसी परंपरा के तहत ज्योति, मोल्हू व राजपाल भी त्योहार के अवसर पर हमारे घर भोजन करते थे.

चूंकि मेरा उन तीनों से ही बहुत अच्छा संवाद था इसलिए उन को अकसर मैं ही भोजन कराता था. मुझे उन को भोजन कराने में बहुत आनंद आता था. उस भोजन में रोटी, चावल, दाल, सब्जी, कुछ मीठा होता था तो वह तीनों भाई भरपेट भोजन करते थे व कुछ बचा कर अपने घर भी ले जाते थे ताकि परिवार की महिलाएं व बच्चे भी उसे चख सकें.

उन को कईकई रोटी व चावल खाता देख कर कभीकभी मेरी मां कह उठतीं कि अपने घर में तो ये केवल 2 रोटी खाते हैं और हमारे घर आते ही ये इतना खाना खाते हैं. तब मुझे अपनी मां की बात सच लगती थी क्योंकि मैं उन को खेत पर केवल 2 रोटी ही खाते देखता था. मैं यह समझने में सफल नहीं रहता कि ऐसा क्यों है, यह अपने घर केवल 2 रोटी खा कर पेट भर लेते हैं व हमारे घर पर इतना खाना क्यों खाते हैं.

इन्हीं सब को देखतेभुगतते मैं खुद यौवन की दहलीज पर आ गया. पढ़ाई पूरी करने के बाद शहर में वकालत करने लगा. कुछ समय उपरांत न्यायिक सेवा में प्रवेश कर के शहरशहर तबादले की मार झेलता घूमता रहा व जीवन का चक्र गांव से शहर की तरफ परिवर्तित हो गया. खेती व खेतिहर मजदूर ज्योति, मोल्हू, राजपाल व अन्य कई मजदूर, जो कभी न कभी हमारी खेती में सहायक रहे थे, काफी पीछे छूट गए. मैं एक नई दुनिया में मस्त हो गया, जो बहुत सम्मानजनक व चमकीली थी. पर यदाकदा मुझे बचपन की बातें याद आती रहती थीं. गांव में जाने पर कभीकभार उन से भेंट भी हो जाती थी, पुरानी यादें ताजा हो जाती थीं.

कुछ ही दिन पहले न जाने क्या सोचतेसोचते मुझे उपरोक्त घटनाक्रम याद आ गया और जब मैं ने अपने वयस्क एवं परिपक्व मन से उन सब कडि़यों को जोड़ा तो वास्तविकता यह प्रकट हुई कि ज्योति, मोल्हू और राजपाल, ये 3 ही मजदूर गांव में नहीं थे बल्कि गांव में और भी बहुत मजदूर थे जिन का यही हाल था. शायद यही कारण था कि हमारे घर पर भोजन के समय उन्हें पेट भरने का अवसर मिलता था. अत: वह अपने घर की अपेक्षा हमारे घर पर अधिक भोजन करते थे. उस समय मुझे उन के अधिक खाने का कारण समझ में नहीं आया था. मुझे इस बात को समझने में लगभग 4 दशक का समय लग गया कि अनाज की कमी के कारण वे मजदूर रोज ही आधे पेट रहते थे और मुझे खेतिहर मजदूरों की उस समय की स्थिति का आभास हुआ कि तब ज्योति, मोल्हू व राजपाल जैसे श्रमिक दो जून की रोटी के लिए कितना काम करते थे व तब भी आधा पेट भोजन ही कर पाते थे.

इतने के लिए भी रूखासूखा खा कर उलटासीधा फटेपुराने कपड़ों से तन ढक कर हर मौसम में उन्हें खेती का कार्य करना पड़ता था. उन के लिए काम का कोई समय नहीं था, वह मुंहअंधेरे काम पर आते थे व देर रात को काम से लौटते थे.

मुझे जब भी अवकाश मिलता, मैं गांव जाता और उन तीनों श्रमिकों से अकसर भेंट होती, पर उन की हालत जस की तस रही. वे आधा पेट भोजन कर के ही जीवन व्यतीत करते रहे और इस दुनिया से विदा हो गए.

जीवन में उन्हें कभी दो जून की भरपेट रोटी मयस्सर नहीं हो पाई. ऐसे वे अकेले श्रमिक नहीं थे, न जाने कितने श्रमिक आधा पेट भोजन करतेकरते इस दुनिया से चले गए. अब भी, जब मैं सोचता हूं कि कितना कठिन होता है जीवन भर आधापेट भोजन कर के जीवन व्यतीत करना, तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. मैं ऊपर से नीचे तक सिहर जाता हूं.

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गांव से मेरा नाता समाप्त नहीं हुआ है. वही खेत हैं, वही खेती, पर वक्त ने सबकुछ बदल दिया है. अब तो खेतीहर श्रमिकों की स्थिति में आश्चर्य रूप से परिवर्तन हुआ है. ज्योति, मोल्हू व राजपाल के बच्चों के घर पक्के हो गए हैं. बच्चों को नए कामधंधे मिल गए हैं. अब गांव में आधा बदन ढके अर्थात शरीर पर मात्र लंगोटी डाले श्रमिक बिरले ही मिलते हैं.

समाज में समानता की ध्वनि सुनाई पड़ती है, जो प्रगति का परिचायक है पर साथ ही साथ किसानों के समक्ष समस्या भी हो गई है. अब खेती कार्य के लिए मजदूरों का मिलना लगभग असंभव हो गया है. पर वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता, वह तो हर पल करवट बदलता रहता है. मैं तो पूर्ण आशान्वित हूं कि भविष्य वास्तविक रूप से उज्ज्वल होगा.

क्या इस खुलासे के बाद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं?

विरोधियों के निशाने पर रहने वाले केजरीवाल ने यों तो दिल्ली में कई साहसिक घोषणाएं की हैं और उसे लागू भी कराया है. स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और पानी की मुफ्त योजनाओं को लागू कर वाहवाही बटोरने वाली केजरीवाल सरकार अब अपने ही स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी एक रिपोर्ट में घिरती नजर आ रही है.
दरअसल, मुख्य विपक्षी पार्टी के एक विधायक ने केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री से एक रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार जो हकीकत सामने आया है वह काफी चौंकाने वाला है.

सिर्फ घोषणा ही बन कर रह गई

दरअसल, 2015 में दिल्ली की सत्ता में आने के वाद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि दिल्ली के अस्पतालों में बेड की क्षमता 10 हजार से बढा कर 20 हजार करेंगे. मगर रिपोर्ट के अनुसार केजरीवाल सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने में बुरी तरह नाकाम रही है.
दिल्ली विधानसभा में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सत्ता में आने से पहले दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 10,969 स्वीकृत बेड थे जबकि 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में 11,353 बेड ही सरकारी अस्पतालों में हैं. यानी इस दौरान महज 394 बेड ही सरकार बढा पाई.

वैंटिलेटर्स भी पर्याप्त नहीं

एक सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने दिल्ली में वैंटिलेटर की वर्तमान स्थिति पर भी स्थिति साफ की और कहा कि दिल्ली के अस्पतालों में 440 वैंटिलेटर्स हैं जिन में से मात्र 396 वैंटिलेटर्स ही ऐक्टिव हैं. आश्चर्य की बात तो यह कि पूरी दिल्ली में सिर्फ लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में ही एमआरआई की सुविधा है.

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घिरती नजर आ रही है सरकार

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री के इस खुलासे से दिल्ली सरकार खुद ही घिरती नजर आ रही है.
प्रमुख विपक्षी पार्टियां भाजपा और कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की स्वास्थ्य योजनाओं को जनता के साथ छलावा बताया और कहा कि जिस सरकार की महात्वाकांक्षी योजना स्वास्थ्य सेवाओं को ले कर थी और जिन्होंने स्वास्थ्य सेवा को ले कर बङीबङी घोषणाएं की थीं, उस का पोल खुद सरकार के मंत्री ने खोल दी हैं.

नए प्रोजैक्ट की रफ्तार भी बेहद धीमी

उधर, दिल्ली सरकार द्वारा 3 नए सरकारी अस्पतालों के निर्माण की वर्तमान स्थिति पर भी सरकार ने जो रिपोर्ट दी है वह भी काफी निराशाजनक है. दिल्ली सरकार ने जानकारी दी कि दिल्ली में 3 नए सरकारी अस्पतालों के प्रोजैक्ट पर काम चल रहा है.
जबकि हकीकत तो यह है कि अंबेडकर नगर अस्पताल का निर्माण कार्य फरवरी, 2019 में होना था, जिस का लक्ष्य अब नवंबर, 2019 रखा गया है.
बुराङी अस्पताल प्रोजैक्ट पूरा होने का समय मार्च, 2019 था जो नवंबर, 2019 कर दिया गया है.
इंदिरा गांधी अस्पताल का प्रोजैक्ट तो इतना सुस्त है कि इसे मार्च 2019 में ही पूरा होना था, जिसे बढा कर मार्च, 2020 कर दिया गया है.
जाहिर है, इस मुद्दे को ले कर अब विपक्षी पार्टियां केजरीवाल सरकार को घेरने का काम करेगी जिस का जवाब खुद दिल्ली सरकार को देना भी भारी पङेगा.

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वाहवाही बटोर चुकी है सरकार

मगर सचाई यह भी है कि कुछ योजनाओं को लागू कर दिल्ली सरकार ने न सिर्फ दिल्ली में बल्कि विदेशों में भी वाहवाही बटोर चुकी है. सरकार की महात्वाकांक्षी योजनाएं मोहल्ला क्लीनिक और महिलाओं को मुफ्त मैट्रो में यात्रा कराने को ले कर सरकार की प्रशंसा पहले ही की जा चुकी है.

 

एक कोतवाल, रंगीन मिजाज ….

यहां भी अपने रंग दिखा रहे हैं. इधर जब जब विवाह के फोटो वायरल हुए तो युवती के माता-पिता को जानकारी मिली. उन्होंने पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचकर अपनी लड़की को बरगला कर कोतवाल द्वारा विवाह किए जाने की शिकायत की है और मांग की है कि अगर कोतवाल ने विवाह किया है तो न्याय दिया जाए और कोतवाल पर कठोर कार्रवाई की जाए. यह कहानी है कांकेर जिला मुख्यालय स्थित कोतवाली थाना में पदस्थ थाना प्रभारी अमर सिंह कोमरे की. कानून की वर्दी पहनकर अमर सिंह द्वारा तीसरी शादी का मामला सामने आया है. पीड़ित मां के अनुसार, थाना प्रभारी अमर सिंह कोमरे ने चारामा क्षेत्र की रहने वाली 21 वर्षीय युवती को पहले अपने होटल में काम करने के लिए रखा था.

परिजनों ने युवती के कुछ दिनों तक वापस नहीं लौटने पर पतासाजी की, जिसमें पता चला की युवती वहीं रहकर काम कर रही है. उसे घर वापस लाने पर युवती फिर से भाग गई, जिसके बाद दोबारा युवती नहीं लौटी.

कानून के रखवाले की यह तीसरी शादी

छत्तीसगढ़ में इन दिनों अमर सिंह कोमरे अपनी आशिक मिजाजी और तीसरी शादी के कारण चर्चा में आ गए हैं मजे की बात यह है कि कोतवाल जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उन्होंने एक युवती को पहले अपने कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर रखा फिर उसे होटल में रखा और अंततः उसकी मांग में सिंदूर भर दिया. सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह रही कि उन्होंने युवती से विवाह करने की बात छुपाई नहीं और साफ मन से स्वीकार कर लिया। युवती अपनी मां को कोतवाली प्रभारी के साथ अपनी मांग में सिंदूर भरी हुई फोटो भेज रही है, जिसके बाद से परिजन काफी परेशान हो उठे हैं .युवती के परिजनों ने बताया कि कोतवाल की उम्र लगभग 49 के पेटे में है, उसने पहले से ही दो शादी कर रखी है. इस मामले पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का कहना है कि परिजनों के आवेदन के आधार पर थाना प्रभारी को बुलाकर पूछताछ की गई है.

वर्दी पहन कोतवाल उड़ा रहे कानून की धज्जियां

छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य पिछड़ा हुआ राज्य है अगर से यह घटना किसी महानगर में घटित हुई होती तो आज राष्ट्रीय चैनलों पर प्रमुखता के साथ परोस दी जाती.इस पर चर्चा बहस के दौर शुरू हो जाते. मगर छत्तीसगढ़ के बस्तर में घटित यह महिला विरोधी एवं पुलिस की वर्दी की एक तरह से धज्जियां उड़ाने की घटना सुर्खियां नहीं बटोर पाई. कोतवाल के रूप में एक जिम्मेदार अफसर अगर पूर्व पत्नी और बच्चों को छोड़कर एक कमसिन युवती से विवाह कर ले तो यह कोई छोटी विसंगति नहीं है.मगर छत्तीसगढ़ के सरकार और पुलिस प्रशासन मानो आंखों में पट्टी बांधकर सो रहा है. यह मामला निजी नहीं हो सकता नियमत: हिंदू विवाह अधिनियम के तहत कोई भी आम शख्स पहली पत्नी से तलाक के बगैर दूसरा विवाह नहीं कर सकता. यह जानकारी क्या छत्तीसगढ़ पुलिस को नहीं है जो उसका एक कारिंदा वर्दी पहनकर कानून को ठेंगा दिखा रहा है. इस संदर्भ में कांकेर पुलिस का दो टूक कहना है युवती ने कोतवाली प्रभारी के साथ शादी करना कबूल किया है. नियमों के आधार पर जो होगा कार्रवाई की जाएगी.

कैसे पीवी सिंधु बनी बैडमिंटन की विश्व विजेता, जानें यहां

सिंधु ने बैडमिंडन वर्ल्ड चैंपियनशिप में जापान की नोजोमी ओकुहारा को 21-7, 21-7 से हरा दिया. बैडमिंटन कोर्ट में सिंधु को ये इतिहास रचने में तीन बार प्रयास करना पड़ा लेकिन तीसरी बार इतिहास भी रचा.

हम आपको बताते हैं कि विश्व विजेता पीवी सिंधु का यहां तक का सफर कैसा रहा. सिंधु कोर्ट के बाहर कैसी हैं.  2017, 2018 और फिर 2019 सिंधु लगातार तीन बार विश्व चैंपियनशिप के सेमीफाइनल पर पहुंची थी लेकिन बदकिस्मती उनका पीछा नहीं छोड़ रही थी और वो लगातार फाइनल हार रहीं थी लेकिन 2019 में उनके सामने वही खिलाड़ी थी जिसने 2017 में उनका सपना तोड़ा था. पीवी सिंधु ने जापान की नोजोमी ओकुहारा को 21-7 से हरा हिसाब चुकता किया.

पिछले तीन वर्षों में दो विश्व चैंपियनशिप के फाइनल, ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में हार के बाद सिंधु को विश्व खिताब यूं ही नसीब नहीं हुआ. इस विश्व चैंपियनशिप के लिए वह अपनी तैयारियों के हर पक्ष पर विजय पाना चाहती थीं. इसके लिए उन्होंने गोपीचंद अकादमी में विदेशी पुरुष स्पारिंग पार्टनरों (ट्रेनिंग कराने वाले बैडमिंटन खिलाड़ी) से न सिर्फ लगातार अभ्यास किया बल्कि अपने को फिट रखने के लिए उन्होंने गोपी अकादमी से बाहर का भी सहारा लिया. विश्व खिताब के अभियान में कहीं कमी न रह जाए इस लिए सिंधु ने इसी माह बैंकाक में हुई थाईलैंड ओपन सुपर सीरीज से भी अंतिम क्षणों में नाम वापस ले लिया था.

सिंधु का यहां तक का सफर आसान नहीं था. खिताब जीतने के बाद सिंधु ने किम जी ह्यून और गोपीचंद को धन्यवाद दिया. सिंधु के गुरू पुलेला गोपीचंद ने सिंधु के साथ बहुत मेहनत की. हैदराबाद के साई स्पोर्टस् कॉम्पलेक्स में सिंधु के साथ गोपीचंद घंटों ट्रेनिंग देते थे और पसीना बहाते थे. दूसरा नाम था हिरोशिमा एशियाड में टीम का गोल्ड जीतने वाले कोरियाई किम थीं जिन्होंने इस साल सिंधु के खेल में कमियों को दूर करने का बीड़ा उठाया.

सिंधु की हाईट उनको काफी परेशानी में डालती रही है. लंबी कद काठी की होने के कारण सिंधु के नेट पर खेल का उनके विरोधी हमेशा फायदा उठाते रहे हैं. सिंधु की हाईट 5 फिट 11 इंच है. किम ने उनके नेट पर खेल को न सिर्फ सुधारने में कोशिश की बल्कि उनके मुख्य हथियार आक्रमण को और पैना किया. यही कारण था कि सिंधु ने फाइनल में 358 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से स्मैश जड़ा.

बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने शटलरों की ट्रेनिंग के लिए दो इंडोनेशियाई स्पारिंग पार्टनर हेरी सेतियावन और एडी कुर्नियावन को अनुबंधित किया. दोनों ज्यादातर पुरुष शटलरों को ट्रेनिंग कराते हैं, लेकिन सिंधु को ट्रेनिंग कराने के लिए सेतियावान को लगाया गया. सिंधू एक पुरुष शटलर के साथ अभ्यास कर खुद को तैयार कर रही थीं.

सिंधु ने किया त्याग

सिंधु को ये तमगा ऐसे ही नहीं मिला. इसके लिए उनको काफी त्याग करना पड़ा था. सिंधु ने इसके लिए अतिरक्त अभ्यास किया. इसके साथ ही फिटनेस के लिए सिंधु ने दिन-रात मेहनत की. कोर्ट में फिटनेस का महत्व बहुत होता है. सिंधु ने खान-पान में भी ध्यान दिया जिससे कि खेल में किसी भी तरह की दिक्कत न हों. इसके साथ ही बताया तो यहां तक जाता था कि सिंधु ने मोबाइल फोन भी रखना छोड़ दिया था. क्योंकि इससे वह अपने गेम पर कम ध्यान दे पातीं थीं.

अगला निशाना टोक्यो ओलंपिक

सिंधु ने विश्व चैंपियन शिप जीतकर ये तो दिखा दिया कि वो स्टार शटलर क्यों कहलाती हैं. इस जीत ने आलोचकों की भी जुबान बंद कर दी थी जो कहते थे कि सिंधु फाइनल जीत नहीं सकती. अब सिंधु का अगला निशाना टोक्यो ओलंपिक होगा. वो इस गोल्ड मेडल को ओलंपिक गोल्ड मेडल में तब्दील करना चाहेगी. इस जीत से उनको मनोबल भी मिला है और गेम प्लान भी क्लीयर हो गया है. अगला ओलंपिक 2020 में टोक्यो में खेला जाना है.

रेड बिकिनी में नजर आईं ‘कसौटी जिंदगी की-2’ की ‘प्रेरणा’

टीवी के सबसे पौपुलर सीरियल ‘कसौटी जिंदगी की-2’ की स्टार एक्ट्रेस स्टार एरिका फर्नांडीज इन दिनों मस्ती के मूड में है. हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी फोटोज शेटर की जिसे देखने के बाद फैंस काफी हैरान हो गए. एरिका ने अपनी कुछ बिकिनी अंडर वौटर फोटोज शेयर की है. दरअसल एरिका इन दिनों मालदीव्स में छुट्टियां बिताने गई हुई है. खास बात ये है कि यहां वो अपने बौयफ्रेंड पार्थ समथान के साथ है और दोनों के इंस्टाग्राम से टीवी की दुनिया का सबसे फेवरेट कपल अपनी विकेशन फोटोज से धमाल मचाए हुए है. दोनों की इस वेकेशन ट्रिप की फोटोज इस्टाग्राम से लेकर फेसबुक सभी सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर काफी वायरल हो रही है.

समुंदर के अंदर रेड बिकिनी में मचाया धमाल

एरिका फर्नांडीज ने हाल ही में अपनी लेटेस्ट विकेशन फोटोज शेयर की है. इन फोटोज में वो लाल रंग की बिकिनी में बेहद कमाल लग लग रही है. इन फोटोज में एरिका ने लाल रंग की बिकिनी में समंदर के अंदर ऐसे-ऐसे पोज दिए कि फैंस की सांसें थम गई है.

प्रेरणा के अनुराग है पार्थ समथान

टीवी सीरियल कसौटी जिंदगी की 2 की प्रेरणा यानी एरिका फर्नांडीज इस दौरान बौयफ्रेंड पार्थ समथान के साथ सुकून भरे पल बिता रही है. पार्थ इन दिनों इस टीवी शो में अनुराग के रोल में वाहवाही लूट रहे हैं. इस रोल पार्थ को काफी तारीफे मिल रही है वही प्रेरणा के रोल में एरिका काफी पौपुलर हो चुकी है.

 

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फैंस के साथ क्लिक करवाई फोटोज

मालदीव में भी इन दोनों स्टार को फैंस ने घेर लिया. यहां पर भी दोनों स्टार्स ने जमकर फोटोज क्लिक करवाई है. जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. आपको बता दे की एरिका और पार्थ नच बलिए 9 में काफी कमाल मचा रहे है दोनों के डांस को फैंस खासा पसंद करते है. एक सफल एक्टर्स के साथ ये कपल डांस में भी किसी से कम नही है.

डार्क ग्रे कलर की ड्रेस में दिखा दिशा पटानी का हौट अवतार, फोटोज Viral

बौलीवुड स्टार और अपनी रिलेशनशिप के लिए हमेशा सुर्खियों में  रहने वाली एक्ट्रेस दिशा पटानी एक बार फीर चर्चाओं में है. सोशल मीडिया काफी एक्टिव रहने वाली दिशा ने हाल ही में लैक्मे फैशन वीक में नजर आईं जहां उनकी अदाओं ने सभी का दिल जीत लिआ. इस इवेंट से लौटने के बाद दिशा ने अपनी कुछ फोटोज इस्टाग्राम अकाउंट से शेयर की, जिसके बाद से ही फैंस इन फोटोज पर जमकर कमेंट करने में लगे है. दिशा की ये फोटोज सामने आई है काफी वायरल हो रही है.

डार्क ग्रे कलर की ड्रेस में आईं नजर

Lakme Fashion Week में दिशा बड़े ही कौन्फिडेंस के साथ रैंप पर उतरी थीं. रैंप पर दिशा इतनी हौट लग रही थीं कि, जिसने भी दिशा को देखा बस देखता ही रह गया. ब्लैक गाउन में दिशा के अंदाज से सभी कायल हो गए. इस डार्क ग्रे कलर गाउन की सबसे खास बात थी उसका साइड जो इस ड्रेस को एलीगेंट लुक के साथ सेक्सी भी बना रहा था.

 

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पौज देती दिशा पटानी

रैंप वौक करने के बाद दिशा शीशे के आगे खड़े होकर पोज देती नजर आई. अपने इस ब्लैक एंड व्हाइट पिक्चर में दिशा बेमिसाल लग रही हैं. तस्वीर में दिशा का लुक उनपर बहुत जंच रहा है. यही वजह है कि, उनकी यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी पसंद की जा रही हैं. दिशा की इन तस्वीरों पर लगातार कमेंट्स और लाइक्स की बौछार हो रही है.

मेकअप भी रहा चर्चा का विषय

अपने डार्क ग्रे कलर के आउटफिट के साथ दिशा ने आखों पर मैंचिंग मेकअप किया था. दिशा का स्मोकी लुक उनके इस लुक को और भी बोल्ड बना रहा है साथ में दिशा का हेयर स्टाइल देख और इनकी सेंडल इस पूरे लुक को कम्पलीट कर रही थी. फैंस ने कमेंट्स पर ही इस ड्रेस और उनके मेकअप की तारीफ करना शुरु कर दी. आपको बता दे की दिशा बौलीवुड एक्टर टाइगर श्रौफ को डेट कर रही है जिसके चलते दोनों काफी चर्चाओं रहते है.

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