पुष्पा का प्रेम ‘रतन’

गलती की सजा

अक्षरा सिंह का नया रोमांटिक गाना ‘मेरा बाबू क्यूं मुझसे नाराज है’ हुआ वायरल, देखें Video

यूं तो वेलेंटाइन अभी चंद माह पहले ही बीता है. इन दिनों प्यार का मौसम भी नही है. बल्कि कोरोना (Corona) और लाॅक डाउन (Lockdown) के चलते लोग अवसाद के शिकार हो रहे हैं, ऐसे में अपने अपने घरों में कैद प्रेमियों एवं युवा प्रेम जोड़े की बोरियत को दूर करने तथा उनके अंदर उत्साह पैदा करने के मकसद से भोजपुरी अभिनेत्री व गायिका अक्षरा सिंह (Akshara Singh) एक शानदार गाना ‘‘मेरा बाबू क्यो मुझसे नाराज है’’ लेकर आयी हैं.

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गीतकार झूलन झील, संगीतकार मधुकर आनंद, डिजिटल हेड विकी यादव के इस गीत को अक्षरा सिंह (Akshara Singh) ने अपने औफिशियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है और रिलीज होते ही गीत ‘‘मेरा बाबू क्यों मुझसे नाराज है’’ वायरल हो गया.

गीत ‘‘मेरा बाबू क्यों मुझसे नाराज है’’ में अक्षरा अपने रूठे प्रेमी को मनाने का प्रयास करती नजर आ रही हैं. तभी उन्हों ने अपने मनाने वाले अंदाज में यह गाना गाया है, जिसे उनके फैंस खूब पसंद कर रहे हैं.

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इस गीत के संदर्भ में खुद अक्षरा सिंह (Akshara Singh) कहती हैं- ‘‘मोहब्बत में रूठने व मनाने का सिलसिला जारी रहता है. कभी प्रेमी तो कभी प्रेमिका को यह काम करते देखा जा सकता है. इनके बीच के इसी दिल छू लेने वाले अहसास को हमने अपने इस गाने में शामिल किया है. जितने भी ‘लव बर्ड्स’ हैं, उन्हे मेरी तरफ से यह गीत प्यार भरा उपहार है. वह इस गाने की भावनाओं को बाखूबी समझ सकेंगे. कभी कभी ऐसी नाराजगी रिश्ते को मजबूत भी करती है, क्योंकि नाराजगी उसी से होती है, जिससे प्यार होता है.’’

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डैरेन सैमी बोले मुझ से माफी मांगो

क्रिकेट बंद है, पर क्रिकेटर पूरी हलचल में हैं खासकर सोशल मीडिया पर. कोई विदेशी खिलाड़ी अपनी फैमिली के साथ ‘टिक-टौक’ पर हिंदी गानों पर ठुमके लगा कर वाहवाही लूट रहा है, तो कोई देशी खिलाड़ी अपनी प्रेमिका के बेबी बंप से सुर्खियां बटोर रहा है. घर में खाली बैठे हैं, तो एकदूसरे को कोई भी चैलेंज दे कर बहुत से क्रिकेट खिलाड़ी टाइमपास कर रहे हैं.

इस में कोई बुराई नहीं है, पर चूंकि दुनिया में कोरोना के साथसाथ और भी बहुतकुछ ऐसा हो रहा है, जिस ने दुनिया का तापमान बढ़ा दिया है, तो उस का असर अब क्रिकेटरों पर भी देखने को मिल रहा है.

अमेरिका में एक अश्वेत नागरिक जौर्ज फ्लायड की जिस निर्मम तरीके से पुलिस के हाथों मौत हुई थी, उस के बाद तो मानो दुनियाभर के अश्वेत लोगों के दिलों में वह दबी चिनगारी भड़क गई थी, जो काले रंग के चलते उन्हें गोरे लोगों से कमतर होने का एहसास कराती है.

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इस के बाद तो एक धमाका सा हुआ हुआ और पूरी दुनिया इस नस्लभेद की लड़ाई में अश्वेत लोगों के साथ खड़ी नजर आई. नतीजतन, कहीं पुलिस ने उन से सार्वजिक तौर पर  माफी मांगी, तो कहीं लोगों का गुस्सा इस कदर फूटा कि बड़ेबड़े नेता अपने बख्तरबंद बंकरों में जा छिपे.

इसी बीच क्रिकेट जगत से ऐसी खबर आई, जो हैरान कर देने वाली थी. वैस्टइंडीज क्रिकेट टीम के एक खिलाड़ी और कप्तान रह चुके डेरेन सैमी ने एक सनसनीखेज खुलासा किया कि साल 2014 के इंडियन प्रीमियर लीग में जब वे सनराइजर्स हैदराबाद टीम की तरफ से खेलते थे, तब ड्रैसिंग रूम में कुछ लोग उन्हें उस शब्द से पुकारते थे, जो अपमानजनक था.

डेरेन सैमी के इन आरोपों के बीच भारतीय क्रिकेटर ईशांत शर्मा का 14 मई, 2104 का एक पोस्ट वायरल है , जिस में उन्होंने डेरेन सैमी के लिए उन की त्वचा के रंग से जुड़ा एक शब्द लिखा था.

इस सिलसिले में डेरेन सैमी कहा कि उन्हें जिस शब्द से संबोधित किया गया था, तब उन्हें इस का मतलब नहीं पता था, लेकिन जब से पता चला है तो वे बड़े निराश हैं. दरअसल, डेरेन सैमी ने कहा कि तब उन्हें ‘कालू’ कह कर बुलाया जाता था, लेकिन अब उन्हें इस शब्द का मतलब पता चल गया है. यह शब्द नस्लीय भेदभाव का प्रतीक है और अपमानजनक है.

इस मसले पर डेरेन सैमी इस हद तक दुखी और गुस्साए लग रहे हैं कि उन्होंने लिखा, ‘जो भी मुझे उस नाम से बुलाता था, उसे खुद ही यह पता है. मुझ से संपर्क करो, बात करो. मैं उन सभी लोगों को मैसेज भेजूंगा. आप सब को खुद के बारे में पता है. मैं यह स्वीकार करता हूं कि उस समय मुझे इस शब्द का मतलब नहीं पता था.’

डेरेन सैमी यहीं पर नहीं रुके, बल्कि उन्होंने कहा कि वे सब खिलाड़ी उन से माफी मांगे, नहीं तो वे उन सब के नाम उजागर कर देंगे.

यह पहली बार नहीं हुआ है, जब क्रिकेट में खिलाड़ियों के बीच नस्लीय टिप्पणी की गई है. भारत के लिए क्रिकेट खेल चुके तेज गेंदबाज इरफान पठान ने भी हालिया कहा कि अलग धर्म या आस्था के चलते आप को किसी सोसाइटी में घर नहीं मिलता है तो यह भी एक तरह का नस्लवाद है.

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इसी तरह वैस्टइंडीज के ही धाकड़ बल्लेबाज क्रिस गेल ने इस नस्लीय भेदभाव पर अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, ‘किसी और की तरह अश्वेत की जिंदगी के भी माने हैं… सभी नस्लवादी लोग, अश्वेत लोगों को बेवकूफ समझना बंद करो. यहां तक हमारे ही कुछ अश्वेत लोग भी दूसरों को ऐसा करने का मौका देते हैं. खुद को नीचा समझने का यह सिलसिला रोको. मैं ने दुनियाभर में यात्राएं की हैं और नस्लीय टिप्पणियों का अनुभव किया है, क्योंकि मैं अश्वेत हूं. मेरा भरोसा कीजिए, यह लिस्ट लंबी है.’

क्रिस गेल साफ कहते हैं कि नस्लवाद सिर्फ फुटबाल में ही नहीं है, बल्कि क्रिकेट में भी है.

वैस्टइंडीज के ही एक और खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो ने आज के हालात और नस्लवाद पर कहा, ‘हम चाहते हैं कि हमारे भाई और बहन यह जानें कि हम ताकतवर और खूबसूरत हैं. आप दुनिया के कुछ महान लोगों पर गौर कीजिए, चाहे वे नेल्सन मंडेला हों, मोहम्मद अली या माइकल जोर्डन. हमारे पास ऐसा नेतृत्व रहा है जिन्होंने हमारे लिए मार्ग प्रशस्त किया.’

ड्वेन ब्रावो की बात में दम है कि उन जैसे लोग ताकतवर ही नहीं बहुत खूबसूरत भी हैं, तभी तो जब क्रिकेट के मैदान पर क्रिस गेल अपने बल्ले से छक्के पर छक्के जमाते हैं, तो हर रंग का उन का फैन दीवाना हो कर खूब तालियां बजाता है, उन का एक आटोग्राफ पाने को तरस जाता है.

अमिताभ बच्चन को सता रहा है अंधेपन का डर, ब्लौग लिख कर जताई चिंता

सदी के महानायक के रूप में पहचान बनाने वाले अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) अपने उम्र के 78 वें पड़ाव पर हैं. उसके बाद भी उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है. वह हर साल फिल्मों में दमदार अभिनय के जरिये दर्शकों का मनोरंजन करते रहतें हैं. इन दिनों लॉक डाउन के चलते उनकी फिल्मों की शूटिंग रुकी हुई है इस लिए वह अपना पूरा समय अपने घर में बिता रहें हैं. इसी बीच उन्होंने अपना ब्लौग लिख कर अपनी आंखों को लेकर चिंता जाहिर की है.

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उन्होंने 9 अप्रैल की रात 10 बजकर 48 मिनट पर एक इस ब्लौग को शेयर किया है जिसमें लिखा है “ये आंखें धुंधली तस्वीरें देख रही है. आंखों से दो चीजें नजर आ रही हैं और कुछ दिनों से मुझे महसूस हो रहा है कि अंधापन आने वाला है. पहले से शरीर में इतनी मेडिकल दिक्कतों के साथ एक समस्या शुरू होने वाली है. “The eyes they see blurred images .. the vision reads double and for some days now I reconciled myself to the fact that blindness is on its way , to add to the million other medical problems that invest in me .. उनकी इस चिंता नें परिवार और फैंस की भी चिंताएं बढ़ा दी है.

इस मौके पर उन्होने अपनी मां को भी याद किया है और लिखा है “आज मैं पहले के वर्षों के बारे में सोचता हूं जब मां साड़ी के पल्लू का नरम और गोल गेंद बना कर उसे गर्म कर आंखों पर रखती थी और फिर समस्या खत्म हो जाती थी. But then .. today .. thought of those early years when Ma used to take the edge of the sari, the ‘pallu’ , make a soft round ball with it , blow into it to make it warm and place it on the eye .. and BAM ! problem solved ..

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When you see that the cause is greater than the idea you dreamt of .. there is just immense joy and gratitude for all my colleagues and friends in the making of this historic effort ! WE ARE ONE and WE SHALL OVERCOME ! Jai Hind ! जब विषय देश हित का हो, और आपका संकल्प आपके सपने से भी ज़्यादा विशाल हो ; तब फिर इस ऐतिहासिक प्रयत्न का उल्लहास और कृतज्ञ भाव, अपने फ़िल्म उद्योग के सह कलाकारों और मित्रों के लिए ! हम एक हैं … टल जाएगा, ये संकट का समाँ ! नमस्कार ! जय हिंद !

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लेकिन उन्होंने आगे “डौक्टर से बात की है, उनकी परामर्श का पालन कर रहा हूं, उनका बताया आईड्रॉप हर घंटे आंखों में डाल रहा हूं. उन्होंने मुझे सांत्वना दी है कि मैं अंधा नहीं होउंगा, यानी अभी कंप्यूटर के पास बिताने के लिए मेरे पास और अधिक वक्त हैं. आंखे थक गई हैं, बस और कुछ नहीं. ” So followed that .. hot watered a hand towel and placed it on the eyes .. spoke to the doc and followed his instruction of putting in prescribed eye drops every hour .. reassured me that I was not going blind – that there was far too much time being spent in front of the computer .. the eyes were tired .. thats all ..

लेकिन ब्लौग के अंत में इस बात पर खुशी जताई कि मां का घरेलू नुस्खा काम कर गया और वो देख सकते हैं. And YES .. that old Mother’s technology worked .. YEEAAHHH ..  I can see now  !!

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अमिताभ बच्चन उम्र के इस पड़ाव पर भी सक्रिय रहतें हैं उन्होंने कोरोना पीड़ितों के लिए हाल ही में राशन उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है. वह कोरोना से बचाव के लिए लोगों को जागरुक भी कर रहे हैं. उन्होंने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के साथ फैमली नाम से एक शार्ट मूवी बना कर जागरूक करने का काम भी किया है.

अमिताभ बच्चन का ब्लौग लिंक-

https://srbachchan.tumblr.com/

पत्नी के हाथों पति का “अंत” 

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक महिला ने अपने ही पति की निर्मम हत्या करवा उसे दुर्घटना का स्वरूप देकर पुलिस को भरमाना चाहा. अक्सर हम पति अथवा पुरुष के द्वारा महिलाओं की हत्या की खबर सुर्खियां बनते देखते हैं. मगर ऐसा बहुत ही कम होता है जब कोई महिला अपने पति, जिसके साथ उसने सात फेरे लिए हैं को रास्ते से हटाने के लिए षडयंत्र करती है और पति को मौत के घाट उतार दिया जाता है.

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छत्तीसगढ़ के जिला सूरजपुर में पुलिस ने सप्ताह भर पहले हुए कत्ल की गुत्थी को सुलझाने में  सफलता हासिल की है. जिस एसईसीएल कोल इंडिया  कर्मचारी की हत्या कर हादसा का स्वरुप देने की  चेष्टा की  गई, वो दरअसल  हत्या  मे सहभागी मिली . पुलिस की जांच के बाद  यह तथ्य सामने आ गया कि  हत्या का मास्टर माइंड कोई औऱ नहीं, बल्कि उसी की पत्नी थी. जिसने अपने भाई के साथ मिलकर पति को मौत के घाट उतार दिया था.

कारण  बना  अवैध संबंध 

और जैसा कि अक्सर हर अपराध के पीछे कोई एक कारण बड़ा गंभीर होता है इस सनसनीखेज हत्याकांड में भी

हत्या की वजह पत्नी का अवैध संबंध उजागर हुआ है. विगत  26 मई2020 को भटगांव थाना क्षेत्र के चुनगढी खोपा मार्ग में एसईसीएल में काम करने वाले भैयालाल साहू की लाश सड़क किनारे मिली थी. मृतक के सर पर  चोट के निशान थे जिससे पुलिस को साफ जाहिर हो रहा था कि मामला  हत्या का  है. इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने के लिए भटगांव पुलिस डाग स्क्वायड की मदद से जांच कर रही थी. पुलिस को पूछताछ करते करते भैयालाल की पत्नी तारा साहू पर शक हुआ, तो उससे भी  पूछताछ  पुलिस ने की.पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में सप्ताह भर पश्चात  आरोपी पत्नी तारा  ने हत्या  की अंततः स्वीकारोक्ति की.

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भाई का सहारा  मिला 

इस सनसनीखेज हत्याकांड में यह बात सामने आई कि तारा साहू ने अपने भाई विकास साहू को किसी तरह अपने साथ मिला लिया था.आरोपी  तारा साहू ने इकबालिया बयान में  बताया कि पति को उसके अवैध संबंध के बारे में खबर लग चुकी थी. जिसके कारण वह तारा से मारपीट  किया  करता था. इस कारण  तारा अपने पति को रास्ते से हटाने के लिए विगत एक साल से  मौका ढूंढ रही थी. 25 मई2020 की रात जब पति शराब के नशे में था, तब तारा ने अपने भाई विकास साहू को घर बुलाया, फिर पति को नशे की हालत में रात को कार में बैठा गांव से बाहर ले गए. गांव से दूर खोपा मार्ग में भैयालाल  साहू को  कार से उतारा गया, उसके बाद सर पर तवे से तबाड़तोड़ वार कर मौत के घाट उतार दिया गया . हत्या को हादसा बताने के लिए उसके शरीर पर वाहन चढ़ा दिया. जिससे मामला दुर्घटना  का प्रतीत हो . मगर  पुलिस की पारखी नजर मे उनकी यह चालाकी ज्यादा समय  तक टिक  नहीं पाई.

पुलिस अधीक्षक  राजेश कुकरेजा ने अंधे कत्ल का खुलासा करते हुए बताया कि अवैध संबंध के चलते भैयालाल  साहू की हत्या की गई . हत्या के आरोपी पत्नी तारा साहू और भाई विकास साहू को गिरफ्तार कर लिया गया है.

Lockdown में घटाया भोजपुरी क्वीन ने अपना वजन, शेयर की ट्रांस्फोर्मेशन Photos

भोजपुरी इंडस्ट्री (Bhojpuri Industry) की जानी मानी और सबकी फेवरेट एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) लॉकडाउन (Lockdown) से लेकर अब तक लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं. कभी वे अपनी हॉट फोटोज को लेकर सुर्खियों में आ जाती हैं तो कभी अपने पर्फोर्म किए गए बोल्ड सीन्स की वजह से. इस बार वे कुछ अलग ही वजह से सुर्खियों का कारण बनती दिखाई दी हैं.

 

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दस साल बाद #now #picoftheday📷 #me #fitandhealthy #happy #cool #positivevibes

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जी हां, पिछले कुछ दिनों ने ये देखने में आ रहा था कि भोजपुरी क्वीन रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) का वजन बढ़ता जा रहा है लेकिन इस पर वे कुछ नहीं कर पा रही. ऐसे में कई लोगों ने रानी पर खूब सारे कमेंट्स भी किए. यहां तक की कई लोगो ने तो ये तक कह दिया कि अब रानी चटर्जी का एक्टिंग करियर खत्म ही होने  वाला है. लेकिन हाल ही में रानी चटर्जी द्वारा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फोटोज शेयर करने के बाद उनके फैंस तो जैसे चौंक ही गए हैं.

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रानी चटर्जी ने अपनी फोटोज में कमाल का ट्रांस्फोर्मेशन दिखाया है और अपने फिट फोटोज शेयर की हैं. इन फोटोज में रानी की फिटनेस का कोई मुकाबला नहीं. वो कहते हैं ना कि इंसान अगर कुछ ठान ले तो क्या कुछ नहीं कर सकता तो ऐसे में लॉकडाउन के चलते रानी ने अपनी फिटनेस पर पूरा ध्यान दिया है और उन लोगों का मुंह बंद किया है जो कह रहे थे कि रानी का फिल्मी करियर खत्म होने वाला है.

 

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💙🤍💙🤍💙🤍💙 #photooftheday #positivethinking #strongwomen

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बात करें रानी चटर्जी के प्रोफेशनल करियर की तो वे हाल ही में एमएक्स प्लेयर की एडल्ट वेब सीरीज मस्तराम में दिखाई दी थीं. इस वेब सीरीज में उन्होनें कई बोल्ड सीन्स किए जिसे लोगों ने खूब प्यार दिया.

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🖤🖤🖤🖤 #girls #liketo #swing #hello #everyone

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भोजपुरी अभिनेता आनंद ओझा रियल हीरो के रूप में लोगों के लिए बनें मसीहा

Lockdown के चलते देश भर में डौक्टर्स और पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ गई है. यह लोग कोरोना प्रकोप के चलते न ही पूरी नींद ले पा रहें हैं और न ही इन्हें भरपेट पेट भोजन मिल रहा है. फिर भी देश के असली हीरो के रूप में यह लोग डटे हुए है.

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इसी में एक नाम आनंद ओझा (Anand Ojha) का भी है. वह भोजपुरी के सफलतम अभिनेताओं में गिने जाते हैं. उन्होंने कई हिट फ़िल्में भी दी हैं. आनंद ओझा सिर्फ फिल्मों के हीरो ही नहीं हैं बल्कि वह रियल हीरो है. इन दिनों वह आगरा जोन में उत्तर प्रदेश सरकार में ट्रैफिक इन्सपेक्टर के रूप में सेवा दे रहें हैं. आनंद ओझा एक पुलिस अधिकारी के रूप में दिन रात लॉक डाउन में सेवा देकर यह साबित कर दिया है की वह रियल लाइफ के भी हीरो हैं.

एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर के रूप में वह लोगों की मदद मे दिन-रात लगे हैं. वह आगरा में फंसे लोगों के लिए दिन रात एक कर ना केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने में अपनी भूमिका  निभा रहें है. बल्कि वह चप्पे- चप्पे पर अपनी नजर बनाये हुए हैं, ताकी कोई बेसहारा खाली पेट न सो पाये. इसके पहले भी आनंद ओझा नें कोरोना के चलते पलायन करने वालों के लिए आगरा के अलग-अलग हिस्सों में में खुद जाकर राहत सामग्री उपलब्ध कराया. इसके साथ ही उन्होंने उन पलायन करने वालों को सही सलामत उनके घरो तक भेजने मे में मदद भी की.

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अभिनेता और इन्सपेक्टर आनंद ओझा नें बताया की जो भी व्यक्ति आगरा के अंदर फंसा है उसके तत्काल रहने और खाने पीने की व्यवस्था की गई. और जो भी लोग दूसरे राज्यो से पलायन कर आगरा या आगरा के सीमा क्षेत्र मे फंसे है उन्हे घबराने की जरूरत नहीं है. आगरा पुलिस उनकी सेवा के लिए हर वक्त मदद के लिए तत्पर हैं, बस वह अपना धैर्य बनाये रखें.

आनंद ओझा जल्द ही काजल रघवानी के साथ फिल्म  “रण” में नजर आयेंगे. यह फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है की यह फिल्म भोजपुरी सिनेमा की बड़ी बजट वाली फिल्मों में शुमार है. इसके अलावा इस साल उनकी दर्जन भरके करीब फ़िल्में रिलीज होने वाली है. आनंद ओझा नें अपनी फिल्म “पुलिसगीरी” में अपने रोल की बदौलत दर्शकों पर अलग ही छाप छोड़ी थी. इस फिल्म में आनंद ओझा के साथ ही काजल राघवानी, मनोज सिंह टाइगर, संजय पाण्डेय, सीपी भट्ट ,रितु पाण्डेय, ने भी अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था.

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एक्ट्रेस रश्मि देसाई ने इस गाने पर डांस कर जीता फैंस का दिल, देखें Video

टीवी इंडस्ट्री (TV Industry) की जानी मानी और पौपुलर एक्ट्रेस रश्मि देसाई (Rashmi Desai) लाखों दिलों पर राज करती हैं. हाल ही में उन्होनें टीवी के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस के सीजन 13 (Bigg Boss 13) में हिस्सा लिया था और उसके बाद से तो उनके फैंस उन्हें और ज्यादा पसंद करने लगे हैं. रश्मि देसाई सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और एक्टिव रहने के साथ ही वे अपने फैंस के साथ कनेक्टिड भी रहती हैं.

 

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All work & no play 🏀📸💭 #ItsAllMagical💫 #IAmMagic🧚🏻‍♀️ #RhythmicRashami💃🏻 #RashamiDesai 💝

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रश्मि देसाई (Rashmi Desai) अक्सर अपनी खूबसूरत फोटोज और वीडियोज अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं और उनके फैंस भी उनकी हर फोटो और हर वीडियो पर जमकर प्यार बरसाते हैं और उनकी तारीफें करते नहीं थकते. इसी कड़ी में रश्मि देसाई ने हाल ही में अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) पर अपनी एक और वीडियो शेयर की है जिसे देख उनके फैंस के दिलों में तो जैसे खलबली ही मच गई हो.

 

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Dance is always a good idea 💃🏻🥰 #ForeverMood #Bollywood ❤️

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दरअसल रश्मि देसाई ने अपने इंस्टाग्राम पर अपना एक डांस वीडियो शेयर की है जिसमें वे बॉलीवुड स्टाइल डांस कर रही हैं. इस डांस वीडियो के कैप्शन में उन्होनें लिखा है कि, “Dance is always a good idea #ForeverMood #Bollywood”. रश्मि देसाई के इस कैप्शन को पढ़ने के बाद ये कहना गलत नहीं होगा कि उन्हें डांस करना काफी अच्छा लगता है और वे अपने खाली समय में खूब डांस करती होंगी.

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May every moment of this Eid brings you closer to your loved ones and gets you rewarded for your deeds! #EidMubarak 🧡🙏🏻🧿

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रश्मि देसाई (Rashmi Desai) अपने इस डांस वीडियो में ‘कमरिया’ (Kamariya) गाने पर ठुमके लगाती दिखाई दे रही हैं. इस वीडियो पर रश्मि देसाई के फैंस उनकी खूब तारीफ कर रहे हैं और तो और उनके फैंस इस वीडियो को वायरल करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे. इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर ही अब तक करीब 8 लाख बार देखा जा चुका है.

 

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Dare to begin 🌟🖤 . . #ItsAllMagical💫 #IAmMagic🧚🏻‍♀️ #RhythmicRashami💃🏻 #RashamiDesai 💝 #BoldAndBeautiful 💋

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गहरी पैठ

अपने घर को अपनों ने गिराया है. इस देश की आज जो हालत कोरोना की वजह से हो रही है उस के लिए हमारी सरकार ही नहीं, वे लोग भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने धर्म और जाति को देश की पहली जरूरत समझा और फैसले उसी पर लेने के लिए उकसाया. आज अगर कोरोना के कारण पूरे देश में बेकारी फैल रही है तो इस की जड़ों में ?वे फैसले हैं जो सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी के लिए ही नहीं, बहुत तरीके से छोटेछोटे फैसले भी लिए जिन में धर्म के हुक्म सब से ऊपर थे.

लोगों ने 2014 में अगर सत्ता पलटी तो यह सोच कर कि जो हिंदू की बात करेगा वही राज करेगा तो ही देश सोने की चिडि़या बनेगा. यह देश सोने की चिडि़या केवल तब था जब देश पर कट्टरपंथी हिंदू राज ही नहीं कर रहे थे. 1947 से पहले देश में अंगरेजों का राज था. उस से पहले मुगलों का था. उस से पहले शकों, हूणों, बौद्धों का राज था. हां, घरों पर राज हिंदू सोचसमझ का था और वही देश को आगे बढ़ने से रोकता रहा. 2014 में सोचा गया था कि हिंदू राज मनमाफिक होगा, पर इस ने न केवल सारे मुसलमानों को कठघरे में खड़ा कर दिया, दलित, पिछड़े, औरतें चाहे सवर्णों की क्यों न हों, कमजोर कर दिए गए.

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कोरोना ने तो न सिर्फ जख्मों पर लात मारी है, उन को इस तरह खोल दिया है कि आज सारा देश लहूलुहान है. करीब 6 करोड़ मजदूर शहरों से गांवों की ओर जाने लगे हैं. जो लोग 24 मार्च, 2020 को चल दिए थे उन की छठी इंद्री पहले जग गई थी. उन्होंने देख लिया था कि जिस हिंदू कहर से बचने के लिए वे गांवों से भागे थे वह शहरों में पहुंच गया है. महाराष्ट्र में जो मराठी मानुष का नाम ले कर शिव सेना बिहारियों को बाहर खदेड़ना चाहती थी, वह मराठी लोगों के ऊंचे होने के जिद की वजह से था.

आजादी से पहले भी, पर आजादी के बाद, ज्यादा ऊंची जातियों ने शहरों में डेरे जमाने शुरू किए और अपनी बस्तियां अलग बनानी शुरू कीं. गांवों से तब तक दलितों को निकलने ही नहीं दिया था. काफी राजाओं ने तो दलितों पर इस तरह के टैक्स लगा रखे थे कि एक भी जना भाग जाए तो बाकी सब पर जुर्माना लग जाता था. अब ये लोग गांवों से आजादी पाने के लिए शहरों में आए तो शहरों में मौजूद ऊंची जातियों के लोगों ने इन्हें न रहने की जगह दी, न पानी, न पखाने का इंतजाम किया. ये लोग नालों के पास रहे, पहाडि़यों में रहे, बंजर जमीन पर रहे.

1947 से 2014 तक राजनीति में इन की धमक थी क्योंकि ये पार्टियों के वोट बैंक थे. फिर धार्मिक सोच वालों ने मीडिया, सोशल मीडिया, अखबारों, पुलिस पर कब्जा कर लिया. इन्हीं दलितों, पिछड़ों और इन की औरतों को धार्मिक रंग में रंग दिया और इन्हें लगने लगा कि भगवान के सहारे इन का भाग्य बदलेगा. मुसलमानों को डरा दिया गया और हिंदू दलितों को बहका दिया गया कि उन की नौकरियां उन्हें मिल जाएंगी.

पर हमेशा की तरह सरकारी फैसले गलत हुए. 1947 के बाद भारी टैक्स लगा कर सरकारी कारखाने लगाए गए जिन में पनाह मिली निकम्मे ऊंची जातियों के अफसरों, क्लर्कों, मजदूरों को. वे अमीर होने लगे. सरकारी कारखाने चलाने के लिए टैक्स लगे जो गांवों में भूखे किसानों और उन के मजदूरों के पेट काट कर भरे गए. मरते क्या न करते वे शहरों को भागे.

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शहरों में उन्हें बस जीनेभर लायक पैसे मिले. वे कभी उस तरह अमीर नहीं हो पाए जैसे चीन से गए मजदूर अमेरिका में हुए. जाति का चंगुल ऐसा था कि वह शहरों तक गलीगली में पहुंच गया. गरीबों की झुग्गी बस्तियों में शराब, जुए, बीमारी की वजह से गरीबों की जो थोड़ी बचत थी, लूट ली गई. महाजन शहरों में भी पहुंच गए.

कोरोना ने तो बस अहसास दिलाया है कि शहर उन के काम का नहीं. अगर गांवों में ठाकुरों, उन के कारिंदों की लाठियां थीं तो शहरों में माफियाओं और पुलिस का कहर पनपने लगा. जब नौकरी भी न हो, घर भी न हो, इज्जत भी न हो, आंधीतूफान से बचाव भी न हो तो शहर में रह कर क्या करेंगे?

कोरोना ने तो यही अहसास दिलाया है कि धर्म का ओढ़ना उन्हें इस बीमारी से नहीं बचाएगा क्योंकि वे अमीर जो रातदिन पूजापाठ में लगे रहते हैं, कोरोना से नहीं बच पाए हैं. कोरोना की वजह से धर्म की दुकानें बंद हो गई हैं. चाहे छोटामोटा धर्म का व्यापार घरों में चलता रहे. कोरोना की वजह से ऊंची जातियों की धौंस खत्म हो गई है. शायद इतिहास में पहली बार ऊंची जातियों के लोग निचलों की गुलामी को नकारने को मजबूर हुए हैं कि कहीं वे एक अमीर से दूसरे अमीर तक कोरोना वायरस न ले जाएं. कोरोना इन गरीबों को छू रहा है पर ये उसे ऐसे ही ले जा रहे हैं जैसे कांवडि़ए गंगा जल ले जाते हैं जिसे छूने की मनाही है. कोरोना अमीरों में ही ज्यादा फैल रहा है.

कोरोना ने देश की निचलीपिछड़ी जातियों और ऊंची जातियों की औरतों के काम अब ऊंची जाति वालों को खुद करने को मजबूर किया है. अगर देश में हिंदूहिंदू या हिंदूमुसलिम या आरक्षण खत्म करो, एससीएसटी ऐक्ट खत्म करो की आवाजें जोरजोर से नहीं उठ रही होतीं तो लाखोंकरोड़ों मजदूर अपने गांवों की ओर न भागते. इस शोर ने उन्हें समझा दिया था कि वे शहरों में भी अब बचे हुए नहीं हैं. पुलिस डंडों की मार ये ही लोग खाते रहते हैं. 1,500 किलोमीटर चल रहे इन लोगों को ऊंची जातियों के आदेशों पर किस तरह पुलिस ने रास्ते में पीटा है यह साफ दिखाता है कि देश में अभी ऊंची जातियों का दबदबा कम नहीं हुआ है. गिनती में चाहें ऊंची जातियां कम हों पर उन के पास पैसा है, अक्ल है, लाठियां हैं, बंदूकें हैं, जेलें हैं. जब अंगरेज भारत में थे वे कभी भी 20,000 से ज्यादा गोरी फौज नहीं रख पाए थे, उन्हें जरूरत ही नहीं थी. उन के 1,500 आदमी हिंदुस्तान के 50,000 आदमियों पर भारी पड़ते थे.

देश के दलितों, पिछड़ों, गरीब मजदूरों ने कैसे एकसाथ फैसला कर लिया कि उन की जान तो अब गांवों में बच सकती है, यह अजूबा है. यह असल में एक अच्छी बात है. यह पूरे देश को नया पाठ पढ़ा सकता है. अब शहरों में महंगे मजदूर मिलेंगे तो उन्हें ढंग से ट्रेनिंग दी जाएगी. गांवों में जो शहरी काम करते मजदूर पहुंचे हैं, वे जम कर मेहनत से काम भी करेंगे और अपने को लूटे जाने से भी बचा सकेंगे. गांवों में ऊंची दबंग जातियां तो अब न के बराबर बची हैं. वे काम करेंगी तो इन के साथ.

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कोरोना वायरस दोस्त साबित हो सकता है. शर्त है कि हम धर्म की दुकानों को बंद ही रहने दें. कारखाने खुलें, लूट की पेटियां नहीं.

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