संबंधों की बैसाखी बनी बंदूक : भाग 1

घड़ी की टिकटिक करती सुइयां 11 मार्च, 2020 को अलविदा कह कर अगली तारीख पर दस्तक दे चुकी थीं. प्रणव जैन और उस की नानी मनोरमा जैन रात का पहला पहर बीत जाने पर भी बेचैनी से घर में टहल रहे थे.

प्रणव रात 10 बजे से ही अपनी मां रिनी जैन को फोन पर फोन कर रहा था, लेकिन उन का फोन लगातार बंद जा रहा था. इस उम्मीद में कि शायद अब फोन औन हो गया होगा, वह दोबारा फोन करता. लेकिन दूसरी तरफ से वही स्विच्ड औफ की आवाज सुन कर दिल निराशा से भर उठता.

प्रणव और उस की नानी के मन में बुरेबुरे ख्याल आ रहे थे. मां के साथ किसी अनिष्ट की आशंका से ही प्रणव का पूरा शरीर सिहर जाता था.

रिनी जैन (42) अपनी मां मनोरमा जैन और बेटे प्रणव जैन के साथ दिल्ली से सटे गाजियाबाद में मोहननगर के पास स्थित गुलमोहर ग्रीन सोसायटी में जी-5 एए फ्लैट में रहती हैं.

उन का बेटा प्रणव डीएलएफ स्कूल में 12वीं का छात्र है. तलाकशुदा रिनी जैन के साथ उन की मां मनोरमा भी रहती हैं. रिनी जैन गाजियाबाद में इग्नू से संबद्ध एक इंस्टीट्यूट में इग्नू की तरफ से बतौर काउंसलर नियुक्त थीं. साधनसंपन्न परिवार था.

रिनी जैन जिदंगी को खुल कर जीने वाली महिला थीं, इसीलिए अपने परिचितों में वह एक बिंदास और शौकीन मिजाज महिला के रूप में जानी जाती थीं.

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11 मार्च, 2020 की शाम साढ़े 7 बजे रिनी अपनी मां और बेटे से यह कह कर घर से निकली थीं कि उन की किसी के साथ मीटिंग है और वह साढे़ 9 या 10 बजे तक लौट आएंगी. रिनी जैन अपनी स्विफ्ट कार यूपी14सी बी3394 ले कर अपनी सोसाइटी से निकलीं और देर रात तक घर नहीं लौटीं तो उन के बेटे व मां को चिंता सताने लगी.

परेशानहाल उन के बेटे व मां ने ऐसे तमाम लोगों को फोन करना शुरू कर दिया, जो रिनी जैन के परिचित थे और वह अकसर उन से मिलतीजुलती रहती थीं.

लेकिन किसी के पास रिनी के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं थी. उन्होंने अपनी ही सोसाइटी गुलमोहर ग्रीन के 812 एए में रहने वाले अपने परिचित संदीप कौशिक को भी फोन कर के रिनी के बारे में जानना चाहा. उन्होंने बताया कि दिन में एक बार उन की रिनी से बात तो हुई थी, लेकिन बीते दिन मुलाकात नहीं हुई थी.

प्रणव जैन और उन की नानी मनोरमा जैन की रात आंखोंआंखों में ही कटी. जैसेतैसे सुबह हुई तो प्रणव सोचने लगा कि अब क्या किया जाए. लेकिन 12 मार्च को सुबह 8 बजे कालोनी में रहने वाले उस के अंकल संदीप उन के घर पहुंच गए.

परिवार का हमदर्द बना संदीप

संदीप ने आते ही प्रणव से रिनी जैन के बारे में सारी बात पूछी. प्रणव ने उन्हें बताया कि वह घर में 9 या 10 बजे तक लौटने की बात कह कर गई थीं. यह जान संदीप भी चिंतित हो उठे. आखिरकार तय हुआ कि रिनी के लापता होने की गुमशुदगी दर्ज करा दी जाए.

इस दौरान 1-2 रिश्तेदार भी रिनी के लापता होने की खबर पा कर उन के घर पहुंच गए थे.

गुलमोहर ग्रीन सोसाइटी थाना साहिबाबाद के अंतर्गत आती है. प्रणव जैन रिश्तेदारों और संदीप कौशिक को ले कर सुबह करीब 10 बजे साहिबाबाद थाने पहुंच गए.

साहिबाबाद थाने के एसएचओ अनिल कुमार शाही, एडीशनल एसएचओ मुकेश कुमार तथा एसएसआई प्रमोद कुमार उस वक्त किसी मसले पर मंत्रणा कर रहे थे.

संदीप कौशिक के साथ साहिबाबाद थाने पहुंचे प्रणव जैन ने इंसपेक्टहर शाही को बताया कि उन की मां रिनी जैन बीती शाम से अपनी कार समेत लापता हैं और उन का मोबाइल फोन भी बंद है.

प्रणव जैन ने अपनी मां के साथ किसी अनहोनी की आशंका जताई, तो इंसपेक्टर शाही ने रिनी जैन का एक फोटो ले कर उन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. साथ ही उन्होंने रिनी के हुलिए की जानकारी देते हुए जिले के सभी थानों और पूरे एनसीआर में वायरलैस पर उन की गुमशुदगी की सूचना प्रसारित करवा दी.

उसी दिन सिहानी गेट कोतवाली क्षेत्र में भट्ठा नंबर 5 के पास झाडि़यों में एक महिला का खून से लथपथ शव मिला था. उस के सिर में शायद गोली लगी थी. सिहानी गेट थाने की पुलिस ने उस अज्ञात महिला के शव के मिलने की जानकारी वायरलैस पर प्रसारित कराई थी.

वायरलैस पर मिली इस जानकारी से साहिबाबाद थाने की पुलिस को वह शव रिनी जैन का होने की आशंका हुई. इसलिए उसी दिन दोपहर में साहिबाबाद थाने के एसएसआई प्रमोद कुमार प्रणव जैन को साथ ले कर पहले सिहानी गेट थाने गए और फिर गाजियाबाद मोर्चरी पहुंचे.

सोसाइटी में रहने वाले फैमिली फ्रैंड संदीप कौशिक प्रणव के साथ थे. मोर्चरी में रखा महिला का शव बुरी तरह खून से लथपथ था. इस के बावजूद प्रणव शव को देखते ही फफकफफक कर रोने लगा. वह शव उस की मां का ही था.

प्रणव जैन ने पुलिस को बता दिया कि शव उस की मां का ही है. शव की शिनाख्त  हो गई थी. लिहाजा एसपी (सिटी) मनीष कुमार मिश्रा के आदेश पर सिहानी गेट पुलिस ने अज्ञात महिला की हत्या के दर्ज मामले को उसी दिन साहिबाबाद पुलिस के सुपुर्द कर दिया.

साहिबाबाद पुलिस ने निरीक्षण में पाया कि सिर पर वार कर हत्या करने के बाद शव को झाड़ी में फेंका गया था. महिला का मोबाइल व स्विफ्ट डिजायर कार गायब थी. रिनी अपने बेटे से पार्टी में जाने की बात कह कर घर से निकली थी. साहिबाबाद पुलिस ने 12 मार्च को ही रिनी जैन की गुमशुदगी के मामले को भादंसं की धारा 302 यानी हत्या के रूप में दर्ज कर लिया.

चूंकि मामला हत्या जैसे गंभीर अपराध का था, इसलिए इस मामले की जांच का दायित्व इंसपेक्टर इन्वैस्टीगेशन मुकेश कुमार के सुपुर्द कर दिया गया.

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मामला एक सभ्रांत परिवार की हाईप्रोफाइल महिला की हत्या का था, इसलिए गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने भी इस पर तत्काल संज्ञान लिया और एसपी (सिटी) को निर्देश दिया कि घटना का जल्द से जल्द खुलासा करें.

एसपी (सिटी) ने उसी दिन बौर्डर इलाके के सीओ डा. राकेश कुमार मिश्रा  की निगरानी में थानाप्रभारी अनिल कुमार शाही, जांच अधिकारी इंसपेक्टर मुकेश कुमार, एसएसआई प्रमोद कुमार, सबइंसपेक्टर राजीव बालियान, नरेंद्र सिंह, हैडकांस्टेबल नाहर सिंह, कांस्टेबल सुजय कुमार, संजीव कुमार, ललित कुमार, सुनील कुमार और अनुज कुमार की टीम का गठन कर दिया और खुद जांच की मौनिटरिंग करने लगे.

जीवित गई रिनी लाश बन कर लौटी

थानाप्रभारी अनिल कुमार शाही ने उसी शाम को मृतका रिनी जैन के शव का पोस्टमार्टम करवा कर शव को उस के घर वालों के सुपुर्द करवा दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि रिनी जैन की मौत उन के सिर में 2 गोली लगने से हुई थी.

साथ ही उन के शव पर कई जगह चोट के निशान भी मिले थे. चूंकि रिनी जैन का मोबाइल व स्विफ्ट डिजायर कार गायब थी, इसलिए पुलिस को पहली नजर में लगा कि ये मामला लूटपाट के विरोध में हुई हत्या का हो सकता है.

हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने तक पुलिस को शक था कि कहीं रिनी जैन की हत्या दुष्कर्म करने के बाद न की गई हो. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह शक गलत निकला.

पुलिस को एक शक यह भी था कि इस वारदात के पीछे उन के किसी परिचित का हाथ न रहा हो. क्योंकि मोहननगर में रहने वाली रिनी जैन का शव राजनगर एक्सटेंशन से लगे भट्ठा नंबर 5 के इलाके में मिलना यह दर्शाता था कि वहां तक वह किसी परिचित के साथ ही आई होंगी. क्योंकि उस इलाके में आमतौर पर कोई अपनी मरजी से घूमने नहीं आता.

पुलिस को यकीन था कि रिनी जैन के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाने से कातिल तक पहुंचने में मदद मिल सकती है. इसलिए थानाप्रभारी अनिल कुमार शाही ने रिनी जैन के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर उस की पड़ताल शुरू करा दी, जिस से यह साफ हो गया कि रात के 10 बजे जब रिनी जैन का मोबाइल बंद हुआ था, तो उस की आखिरी लोकेशन राजनगर एक्सटेंशन की थी.

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पुलिस ने जब उस के मोबाइल की काल डिटेल्स तथा शाम 6 बजे से उस के मोबाइल की लोकेशन को चैक करने का काम शुरू किया तो रिनी जैन के कातिल का चेहरा बेनकाब होता चला गया.

पुलिस ने मोबाइल की टैक्निकल सर्विलांस और कुछ सीसीटीवी फुटेज का सहारा लेने के बाद आखिरकार 14 मार्च की सुबह कातिल को पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया.

थाना साहिबाबाद के प्रभारी अनिल कुमार शाही ने गठित की गई पुलिस टीम के साथ 14 मार्च को राजनगर एक्सटेंशन में घेराबंदी कर दी और किसी का इंतजार करने लगे. आखिरकार थोडे़ इंतजार के बाद 2 लोग रिनी जैन की कार में बैठे हुए राजनगर एक्सटेंशन से गाजियाबाद की तरफ जाते दिखे.

जब उस गाड़ी को रोका गया, तो उस में सवार व्यक्ति को देख कर पुलिस टीम की बांछें खिल गईं. क्योंकि उस व्यक्ति को पकड़ने के लिए ही टीम ने जाल बिछाया था. वह शख्स कोई और नहीं, रिनी जैन की सोसाइटी में रहने वाला उन का फैमिली फ्रैंड संदीप कौशिक और उस की पत्नी प्रीति त्यागी थे.

संदीप की पत्नी प्रीति त्यागी न्यू देहली इंस्टीट्यूट औफ मैनेजमेंट, ओखला में विजिटिंग प्रोफेसर थी. वे दोनों जिस स्विफ्ट कार में सवार हो कर राजनगर एक्सटेंशन से गाजियाबाद की तरफ जा रहे थे, वह रिनी जैन की थी, जो लापता थी. पुलिस ने जब उस कार की तलाशी ली तो उस में रिनी जैन की हत्या में प्रयुक्त 6.35 बोर का रशियन पिस्टल बरामद हुआ.

इस मामले में अब तक पीडि़त परिवार के साथ उन का हमदर्द बन कर पुलिस को चकरघिन्नी की तरह घुमा रहे संदीप और उस की पत्नी के चोरी पकड़े जाते ही होश उड़ गए.

दोनों को रिनी जैन की कार समेत थाने लाया गया. एसपी (सिटी) मनीष कुमार और सीओ डा. राकेश कुमार मिश्रा भी साहिबाबाद पहुंच गए.

जब पुलिस ने सख्ती के साथ रिनी जैन की हत्या के बारे में संदीप और प्रीति से पूछताछ की, तो हत्याकांड के सारे राज बेपरदा होते चले गए.

अपने खुले विचारों के कारण रिनी जैन का अपने पति से 2004 में तलाक हो चुका था. पति से तलाक के बदले उसे अच्छीखासी रकम मिली थी.जिस के सहारे रिनी जैन कुछ साल तक गाजियाबाद के कविनगर में रहते हुए अपने बेटे को पालने लगी. साथ में उन की मां रहने लगी थी.

2014 में रिनी जैन की जिंदगी में तब अचानक बदलाव आया जब संदीप कौशिक से उस की जानपहचान हुई.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

ग्रहण हट गया: भाग 1

लेखक- अभिजीत माथुर

मैं घर के कामों से फारिग हो कर सोने की सोच ही रही थी कि फोन की घंटी घनघना उठी. मैं ने बड़े बेमन से रिसीवर उठाया व थके स्वर से कहा, ‘‘हैलो.’’

उधर से अपनी सहेली अंजु की आवाज सुन कर मेरी खुशी की सीमा नहीं रही.

‘‘यह हैलोहैलो क्या कर रही है,’’ अंजु बोली, ‘‘मैं ने तो तुझे एक खुशखबरी देने के लिए फोन किया है. तेरे भैया शैलेंद्र की 24 जून की शादी पक्की हो गई है. कल ही शैलेंद्र भैया कार्ड दे कर गए हैं. तुझे भी शादी में आना है, तू आएगी न?’’

यह सुन कर मैं हड़बड़ा गई और झूठ ही कह दिया, ‘‘हां, क्यों नहीं आऊंगी, मैं जरूर आऊंगी. भाई की शादी में बहन नहीं आएगी तो कौन आएगा. मैं तेरे जीजाजी के साथ जरूर आऊंगी.’’

अंजु बोली, ‘‘ठीक है, तू जरूर आना, मैं तेरा इंतजार करूंगी,’’ यह कह कर अंजु ने फोन रख दिया.

फोन रखने के बाद मैं सोच में पड़ गई कि क्या मैं वाकई शादी में जा पाऊंगी? शायद नहीं. अगर मैं जाना भी चाहूं तो अखिल मुझे जाने नहीं देंगे. हमारी शादी के बाद अखिल ने जो कुछ झेला है वह उसे कैसे भूल सकते हैं.

मैं ने व अखिल ने 2 साल पहले घर वालों की इच्छा के खिलाफ कोर्ट में प्रेमविवाह किया था. मेरे घर वाले मेरे प्रेमविवाह करने पर काफी नाराज थे. उन्होंने मुझ से हमेशा के लिए रिश्ता ही तोड़ दिया था. वे अखिल को बिलकुल भी पसंद नहीं करते थे. हम विवाह के बाद घर वालों का आशीर्वाद लेने गए थे, पर हमें वहां से बेइज्जत कर के निकाल दिया गया था. तब से ले कर आज तक मैं ने व अखिल ने उस घर की दहलीज पर पैर नहीं रखा है.

मैं धीरेधीरे अपने इस संसार में रमती गई और अखिल के प्यार में पुरानी कड़वी यादें भूलती गई पर आज अंजु के फोन ने मुझे फिर उन्हीं यादों के भंवर में ला कर खड़ा कर दिया, जहां से मैं हमेशा दूर भागना चाहती थी. मैं सोच रही थी कि आखिर मैं ने ऐसा क्या किया है जो मेरे घर वाले मुझ से इतने खफा हैं कि उन्होंने मुझे शैलेंद्र भैया की शादी की सूचना तक नहीं दी. क्या मैं ने अखिल से प्रेमविवाह कर इतनी भारी भूल की है कि मेरा उस घर से रिश्ता ही तोड़ दिया, जिस घर में मैं पली और बड़ी हुई. उस भाई से नाता ही टूट गया जिसे मैं सब से ज्यादा चाहती थी, जिस से मैं लड़ कर हक से चीज छीन लिया करती थी.

क्याक्या सपने संजोए थे मैं ने शैलेंद्र भैया की शादी के कि यह करूंगी, वह करूंगी, पर सारे सपने धराशायी हो गए. मैं भैया की शादी में जाना तो दूर, जाने की सोच भी नहीं सकती थी.

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मैं दिन भर इसी ऊहापोह में रही कि इस बारे में अखिल को कहूं या नहीं.

शाम को अखिल के आने के बाद मैं ने बड़ी हिम्मत जुटा कर उन से शैलेंद्र भैया की शादी के बारे में कहा तो अखिल ने आराम से मेरी बातें सुनीं फिर मुसकराते हुए बोले, ‘‘अरे, वाह, मेरे साले की शादी है, तब तो हमें जरूर चलना चाहिए.’’

मैं ने कहा, ‘‘अखिल, कोई कार्ड या कोई संदेश नहीं आया है. यह तो मुझे अंजु ने फोन पर बताया है.’’

यह सुन अखिल कुछ सोच कर बोले, ‘‘तब तो हमारा न जाना ही ठीक है.’’

मैं अखिल के मुंह से यह सुन कर उदास हो गई और पूरी रात गुमसुम सी रही. अखिल कुछ कहते तो मैं केवल हूंहां में जवाब दे देती.

अगले दिन अखिल के आफिस जाने के बाद मेरा किसी काम में मन नहीं लगा और मैं घुटघुट कर रोए जा रही थी. बाहर से घंटी की आवाज सुन कर मैं दौड़ती हुई फाटक तक जाती कि शायद पोस्टमैन आया हो और शैलेंद्र भैया की शादी का कार्ड आया हो. फोन की घंटी बजने पर मैं सोचती, शायद ताऊजी या पापा का हो पर ऐसा कुछ नहीं था. मैं 3-4 दिन तक ऐसे ही रही थी. अखिल मेरा यह हाल रोज देखते और शायद परेशान होते.

एक रात अखिल मेरी उदासी से परेशान हो कर बोले, ‘‘बीना, क्या तुम शैलेंद्र भैया की शादी में शरीक होना चाहती हो?’’

मैं तो जैसे यह सुनने को तरस रही थी. बोली, ‘‘हां, अखिल, मैं अपने शैलेंद्र भैया को दूल्हा बने देखना चाहती हूं. मेरी यह दिली इच्छा थी कि मैं अपने भाई की शादी में खूब मौजमस्ती करूं. प्लीज, अखिल, शादी में चलो न. मैं एक बार भैया को दूल्हे के रूप में देखना चाहती हूं.’’

‘‘ठीक है, फिर हम तुम्हारे शैलेंद्र भैया की शादी में जरूर शरीक होंगे,’’ अखिल बोले, ‘‘मैं तुम्हारी यह ख्वाहिश जरूर पूरी करूंगा. लेकिन बीना, मेरी एक शर्त है.’’

‘‘शैलेंद्र भैया की शादी में जाने के लिए मुझे हर शर्त मंजूर है,’’ मैं खुशी से पागल होते हुए बोली.

‘‘बीना, हम तुम्हारे घर पर नहीं बल्कि वहां किसी होटल में रुकेंगे.’’

मैं ने कहा, ‘‘ठीक है.’’

24 जून को मैं व अखिल जयपुर के लिए रवाना हो गए. मैं पूरे रास्ते सपने संजोती रही कि मैं वहां यह करूंगी, वह करूंगी. हमें देख सब खुश होंगे. खुशी के मारे मुझे पता ही नहीं चला कि रास्ता कैसे कटा.

जयपुर पहुंचते ही होटल के कमरे में सामान रखने के बाद मैं फटाफट तैयार होने लगी. अखिल मुझे यों उतावले हो कर तैयार होते पहली बार देख रहे थे. उन की आंखों में उस दिन पहली बार मैं ने दर्द देखा था. मैं इतनी जल्दी तैयार हो गई तो अखिल बोले, ‘‘हमेशा डेढ़ घंटे में तैयार होने वाली तुम आज पहली बार 10 मिनट में तैयार हुई हो, वाकई घर वालों से मिलने के लिए कितनी बेकरार हो.’’

मैं ने कहा, ‘‘अब ज्यादा बातें मत करो, प्लीज, जल्दी टैक्सी ले आओ.’’

अखिल टैक्सी ले आए. मैं पूरे रास्ते घबराती रही कि पता नहीं वहां क्या होगा. मेरा दिल आने वाले हर पल के लिए घबरा रहा था.

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हम घर पहुंचे तो हमें आया देख कर सब आश्चर्यचकित हो गए. शायद किसी को हमारे आने का गुमान नहीं था. सब हमें किसी अजनबी की तरह देख रहे थे. मैं 2 साल बाद अपने घर आई थी, पर वहां मुझे कुछ भी बदलाव नजर नहीं आया. सबकुछ वैसा ही था जैसा मैं छोड़ कर गई थी. बस, बदले नजर आ रहे थे तो अपने लोग जो मुझे एक अजनबी की तरह देख रहे थे. हां, मेरे छोटे भाईबहन मुझे व अखिल को घेर कर खड़े थे. कोई कह रहा था, ‘‘दीदी, आप कहां चली गई थीं? आप व जीजाजी अब कहीं मत जाना.’’

मैं बच्चों से बातें करने में व्यस्त हो गई. अखिल मेरी तरफ देख चुपचाप एक कुरसी पर जा कर बैठ गए. मैं ने देखा वह डबडबाई आंखों से मुझे देखे जा रहे थे.

मैं ने बूआजी के लड़के राकेश को चुपचाप शैलेंद्र भैया को बुलाने भेजा. शैलेंद्र भैया 15-20 मिनट तक नहीं आए तो मैं ने सोचा शायद वह हम से मिलना नहीं चाहते हैं. मैं अपने को कोस रही थी कि क्यों मैं ने यहां आने की जिद की. मैं फालतू ही यहां अपनी व अखिल की बेइज्जती कराने आ गई. मैं तो कितना चाव ले कर यहां आई थी पर इन लोगों को हमारे आने की जरा भी खुशी नहीं है. मैं समझ गई कि यहां कोई हमारी इज्जत नहीं करेगा. मैं ने वहां से वापस जाने की सोची.

मैं हारी हुई लुटेपिटे कदमों से अखिल के पास जा ही रही थी कि पीछे से आवाज आई, ‘‘बीनू.’’

मैं ने पलट कर देखा तो राकेश के साथ शैलेंद्र भैया खड़े थे. मैं भैया के पांव छूने झुकी तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया. मैं रोने लगी. भैया भी रोने लगे और बोले, ‘‘कैसी है री, तू? मुझे अभीअभी पता चला कि तू आ चुकी है. मैं सब की नजर बचा कर दौड़ादौड़ा तेरे पास चला आया. अच्छा हुआ, अंजु ने तुझे सही समय पर सूचित कर दिया, नहीं तो मैं सोच रहा था कि पता नहीं अंजु तुझे कहेगी भी या नहीं.’’

मैं बोली, ‘‘तो क्या आप ने अंजु को कहा था मुझे कहने के लिए?’’

भैया बोले, ‘‘हां…तू क्या सोचती है, तेरा भाई इतना निष्ठुर है कि अपनी प्यारी बहन को भूल जाए और अकेला जा कर शादी कर आए. अंजु को मैं ने ही कहा था कि वह तुझे जरूरजरूर किसी भी हालत में आने को कहे.’’

मैं बोली, ‘‘पर मुझे अंजु ने यह तो नहीं कहा था कि उसे आप ने बोला है मुझे आने के लिए.’’

भैया बोले, ‘‘उसे मैं ने ही मना किया था कि मेरा नाम नहीं ले क्योंकि मैं तुझे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. तेरे आने से मुझे तसल्ली है. तू मुझ से एक वादा कर, अब तुझे कोई कुछ भी कहे तू अपने भाई को छोड़ कर नहीं जाएगी.’’

मैं ने कहा, ‘‘ठीक है भैया, अब तो आप की खातिर सब सह लूंगी.’’

भैया बोले, ‘‘अखिल कहां हैं…मुझे उन से मिला तो सही.’’

भैया को मैं ने अखिल से मिलवाया तो भैया हाथ जोड़ कर अखिल से बोले, ‘‘अखिल, आप ने अच्छा किया जो मेरी बहन को आज के दिन ले आए. मैं आप का आभारी हूं. आप को शायद मैं अच्छी तरह अटेंड न कर पाऊं पर प्लीज, आप कहीं मत जाना, चाहे परिवार का कोई कुछ भी कहे.’’

अखिल बोले, ‘‘भाई साहब, आज तो हम आए ही आप की खातिर हैं, जैसा आप कहेंगे वैसा ही करेंगे.’’

भैया बोले, ‘‘अखिल, मैं अभी आता हूं. आप लोग यहीं रुकें.’’

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फिर मैं व अखिल एकांत में कुरसी पर बैठ गए. मैं अखिल को अपने घर के बारे में, अपनी बचपन में की गई शरारतों के बारे में बताने लगी.

हमारे यहां रस्म है कि दोपहर में दूल्हे की एक आरती उस की बड़ी बहन करती है. वह रस्म जब होने जा रही थी तो मैं व अखिल चुपचाप कुरसी पर बैठे उसे देख रहे थे. मेरे पापा ने उस रस्म के लिए मेरी छोटी बहन शालिनी को आवाज लगाई तो शैलेंद्र भैया बोले, ‘‘पापा, बीना के यहां होते शालिनी कैसे आरती करेगी? क्या कभी शादीशुदा बहन के होते छोटी बहन आरती करती है? आरती तो बीना ही करेगी,’’ ऐसा कह कर भैया ने मुझे आवाज दी, ‘‘बीनू, यहां आओ, तुम्हें कसम है.’’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

जानें इस Lockdown में क्या कर रहें हैं भोजपुरी फिल्मों के स्टार विलेन देव सिंह

भोजपुरी फिल्मों में अपनें दमदार अभिनय की बदौलत निगेटिव किरदार निभा कर चर्चित स्टार अभिनेता देव सिंह (Dev Singh) ने अलग ही छवि बनाई है. इस साल उनकी कई फ़िल्में प्रदर्शित होनें वाली हैं और कई फिल्मों का शेड्यूल भी लगा हुआ था. लेकिन कोरोना के चलते लगाये गये Lockdown के चलते चल रही शूटिंग बीच में ही कैंसिल करनी पड़ी तो फिल्मों के शूटिंग के लिए पहले से तय तारीखें भी आगे बढ़ानी पड़ी. इस दशा में अभिनेता देव सिंह भी दूसरे एक्टर्स की तरह घर में अपने पत्नी और बच्चे के बीच इज्वाय कर रहें हैं.

इस Lockdown के बीच उपजी बोरियत को भगाने के लिए देव सिंह बहुत ही फनी तरीकें अपना रहें हैं जिससे जुडी तस्वीरें और वीडियोज वह अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर करते रहतें हैं.

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Lockdown के बीच हाल ही में उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह अपने एक साल के बच्चे की तेल मालिश कर रहें हैं. इन्स्टाग्राम पर शेयर इस वीडियो के कैप्सन में उन्होंने लिखा है “अपना लॉक डाउन चालू है,,आंनद है इसमें. सोनम जी ने चोरी से वीडीयो बना दिया”. सोनम उनके पत्नीं का नाम हैं.

 

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तंदूरी चाय ☕ गुड़ वाली, ख़ुद के द्वारा निर्मित

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वहीं इन्स्टाग्राम पर ही शेयर किये गए एक दूसरे वीडियो में वह किचन में कुछ बनाते हुए नजर आ रहें अब क्या बना रहें हैं इसके बारे में उन्होंने खुद ही वीडियो के कैप्सन लिखा है “तंदूरी चाय गुड़ वाली, ख़ुद के द्वारा निर्मित” वैसे इस वीडियो को देख कर भी आप जान जायेंगे की देव क्या कर रहें है क्यों की इस वीडियो मेंवह छलनी से कप में चाय छानते हुए नजर आ रहें हैं.

 

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देवांश बाबू अपना सहयोग करते हुए।।

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शेयर किये गए एक वीडियो में अपने बेटे देवांश को पीठ पर बैठा कर वर्कआउट करते नजर आ रहें है तो एक दूसरे वीडियो में वह बेटे को पैरों पर बैठा कर वर्कआउट कर रहें हैं. इस वर्कआउट वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा है “लॉकडाउन का मज़ा लेते हुए,परिवार के साथ टाइम स्पेंड कर रहा हूं. फोन खराब होने की वजह से दूर था, अब फोन आ गया, लेकिन बिना फोन के ज्यादा सुकून था. वक़्त है एन्जॉय करिए परिवार के साथ, सतर्क रहिये सुरक्षित रहिये.”एक वीडियो में उन्होंने नें किसी का चैलेन्ज भी एक्सेप्ट किया है जिसे भी उन्होंने शेयर किया है.

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वह अपने पोस्ट में लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर जागरूक करनें वाले पोस्ट भी कर रहें हैं. जिसके जरिये वह लोगों से वह सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनें की अपील करते नजर आ रहें हैं.

 

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Stay home ,stay safe🙏

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देव सिंह नें भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री मे कई यादगार रोल किये हैं जिसमें मैं सेहरा बांध के आऊंगा, भाई जी, बजरंग, इंडियन मदर, मोकामा जीरो किलोमीटर, जिगर, लागी नहीं छूटे रामा, रब्बा इश्क न होवे, डमरू, पवन राजा , राजा जानी, संघर्ष,  निरहुआ चलल ससुराल 2, पत्थर के सनम, राज तिलक, लल्लू की लैला, स्पेशल इनकाउंटर, कुली नंबर, जिद्दी, के रोल को दर्शकों ने खूब पसंद किया था. इन दिनों वह भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे व्यस्त अभिनेता हैं वह हर साल दर्जन भर से अधिक फ़िल्में करते हैं. यही कारण विलेन के रूप में भोजपुरी बेल्ट में दर्शकों के बीच वह काफी पॉपुलर हैं.

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संबंधों की बैसाखी बनी बंदूक : भाग 2

संदीप कौशिक रेस्तरां चलाता था. उस के परिवार में पत्नी प्रीति कौशिक के अलावा एक बेटी थी, जो लगभग प्रणव जैन की उम्र की ही थी.

2014 में जब संदीप की बेटी और रिनी जैन का बेटा गाजियाबाद के राजेंद्रनगर स्थित डीएलएफ स्कूल में एक साथ पढते थे, तभी रिनी जैन और संदीप की एकदूसरे से जानपहचान हुई थी. दोनों ही अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते थे. बाद में वे टीचर पेरैंट्स मीटिंग में भी मिलने लगे.

रिनी ने संदीप में ढूंढा पति का प्यार

कुछ समय बाद दोनों एकदूसरे के आकर्षण में बंध गए. पति से तलाक के बाद अकेले रह गई रिनी जैन को किसी ऐसे मर्द की जरूरत थी, जो उस के तन की प्यास बुझाने के साथ उस की भावनाओं को भी समझता हो. संदीप में उसे वे सारे गुण दिखे. फलस्वरूप दोनों के बीच नाजायज रिश्ते बन गए. जल्द ही दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना भी शुरू हो गया. हालांकि संदीप ने अपनी पत्नी से रिनी जैन से अपने असली रिश्ते की बात छिपा ली थी.

रिनी जैन संदीप को बेपनाह प्यार करती थी. संदीप भी उस के हर दुखदर्द में बढ़चढ़ कर उस का साथ देता था. देखतेदेखते कई साल गुजर गए. दोनों के बच्चे भी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुके थे.

संदीप की बेटी और रिनी का बेटा प्रणव डीएलएफ स्कूल में ही कक्षा 12 में साथ पढ़ रहे थे. 2 साल पहले रिनी जैन ने भी संदीप जैन की ही गुलमोहर ग्रीन सोसायटी में फ्लैट ले लिया और वहां आ कर रहने लगी. इस दौरान दोनों के संबंध और भी ज्यादा प्रगाढ़ हो गए.

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इधर रिनी जैन ने एक साल पहले संदीप के राजेंद्रनगर स्थित रेस्तरां अमिगो में कुछ पैसा भी इनवैस्ट किया था. एक तरह से वह रेस्तरां में उस क ी साइलेंट पार्टनर बन गई थी.

लेकिन एकदूसरे के साथ घूमनेफिरने और गाढ़ी दोस्ती के कारण अब लोग दोनों के संबंधों पर अंगुलियां उठाने लगे थे. रिनी जैन की कई महिला दोस्त तो उसे सलाह देने लगीं कि वह संदीप की इतनी मदद करती है, तो उस से शादी क्यों नहीं कर लेती. जब कई लोगों ने रिनी को ऐसी सलाह दी तो करीब 10 महीना पहले रिनी जैन ने संदीप पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह उस के साथ शादी कर लें.

शुरू में तो संदीप रिनी की बातों को हंसी में कही गई बात मान कर टालता रहा. लेकिन कुछ दिनों बाद जब उस ने ज्यादा दबाव बनाना शुरू किया तो संदीप को उस से कहना पड़ा, ‘‘यार, जब हम दोनों रिलेशनशिप में आए थे तो दोनों के बीच ऐसा कुछ तय नहीं हुआ था कि शादी करेंगे.’’

‘‘हां, तय नहीं हुआ था. लेकिन अब मैं कह रही हूं कि तुम्हें  मुझ से शादी करनी पडे़गी.’’ रिनी ने धमकी भरे लहजे में कहा.

‘‘चलो तुम्हारी बात मान भी लूं तो अपने परिवार का क्या करूंगा. मेरी पत्नी तो मुझे जेल भिजवा देगी.’’ संदीप ने रिनी को अपनी मजबूरी समझाते हुए कहा.

‘‘अगर तुम उसे नहीं मना सकते तो उस की हत्या कर दो, लेकिन तुम्हें हर हाल में मुझ से शादी करनी पड़ेगी.’’

उस दिन रिनी ने संदीप को अंतिम चेतावनी देने के साथ जब संदीप को उस की पत्नी की हत्या करने का सुझाव दिया तो वह कांप उठा.

संदीप को लगा कि रिनी बहुत जहरीली औरत है. आखिर 2 महीने पहले संदीप  कौशिक ने अपनी पत्नी प्रीति त्यागी को रिनी जैन के साथ अपने रिलेशन की बात बता दी और यह भी बता दिया कि रिनी जैन उस पर शादी का दबाव बना रही है. वह कह रही है कि अगर तुम इस के लिए तैयार नहीं हो तो मैं तुम्हारी हत्या कर दूं.

पति के मुंह से उस के अवैध संबधों की बात सुन कर प्रीति को गुस्सा भी आया और संदीप से जम कर झगड़ा भी हुआ. लेकिन जब प्रीति को इस बात का अहसास हुआ कि संदीप उस से इतना प्यार करता है कि उस की हत्या की बात आने पर उस ने रिनी से अपने संबधों तक की बात उसे बता दी.

इस के बाद संदीप और प्रीति योजना बनाने लगे कि उन्हें रिनी जैन से किस तरह निबटना है. दोनों ने रिनी पर यह जाहिर नहीं होने दिया कि उन्होंने एकदूसरे को सब कुछ बता दिया है.

लेकिन कुछ समय पहले से रिनी ने संदीप पर कुछ ज्यादा ही दबाव बनाना शुरू कर दिया. लिहाजा संदीप को कहना पड़ा कि वह अपने ही हाथों से अपनी पत्नी की हत्या नहीं कर सकता. अगर वह ऐसा करेगा तो वह पुलिस की पकड़ में आ जाएगा.

लेकिन रिनी पर तो किसी भी तरह संदीप को पाने का जुनून सवार था. लिहाजा उस ने संदीप को धमकी दी कि वह 17 मार्च से पहले अपनी पत्नी को मार दे, नहीं तो वह 17 मार्च को संदीप के घर पहुंच कर खुद उस की हत्या कर देगी.

उस ने संदीप से कहा कि वह उस दिन अपने घर के सारे सीसीटीवी कैमरे जरूर बंद कर दे ताकि उस के घर में जाने का कोई सबूत रिकौर्ड में ना आए. रिनी का इरादा था कि प्रीति की हत्या के कुछ दिन बाद दोनों शादी कर लेंगे.

रिनी की धमकी भारी पड़ी

रिनी जैन की ये धमकी सुन कर संदीप बुरी तरह डर गया और उस ने प्रीति को यह बात भी बता दी. दोनों ने योजना बनाई कि अगर रिनी की इस धमकी से बचना है तो उसे रास्ते से हटाना होगा. बस संदीप ने रिनी की हत्या की साजिश का तानाबाना बुन लिया.

संदीप ने कुछ दिन पहले से ही रिनी के दिलोदिमाग में यह बात बैठा दी थी कि वह 17 तारीख तक अपनी पत्नी प्रीति की हत्या कर देगा. लेकिन इस से पहले संदीप ने रिनी को रेस्टोटरेंट का काम बढ़ाने के लिए 3 लाख रुपए देने के लिए मना लिया. रिनी ने उस से कहा कि वह 11 मार्च को रकम का इंतजाम कर देगी.

रिनी जैन के पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी, उस ने अपने एक दोस्त से 3 लाख रुपए उधार ले लिए. रकम का इंतजाम होने के बाद उस ने 11 मार्च की शाम को 5 बजे संदीप को फोन किया कि पैसे का इंतजाम हो गया है, वह रकम देने के लिए कहां मिले.

संदीप ने प्रीति को मिलने के लिए रेस्टोरेंट की जगह राजेंद्रनगर में एक क्लब के पास बुलाया. रिनी जब अपनी कार से वहां पहुंची तो संदीप पहले से उस का इंतजार कर रहा था. संदीप ने रिनी से घूमने चलने के लिए कहा. इस के बाद दोनों रिनी की कार से ही घूमते रहे.

लेकिन इस से पहले संदीप ने साजिश के तहत अपनी पत्नी प्रीति को अपना मोबाइल दे कर दिल्ली भेज दिया, ताकि उस की लोकेशन वहां की मिले. कुछ देर तक दोनों कार में ही ड्रिंक करते रहे.

रात करीब साढे़ 9 बजे संदीप ने रिनी से गाड़ी में ही सैक्स करने की फरमाइश की तो रिनी ने कार को किसी सुनसान इलाके में ले चलने को कहा. जिस के बाद संदीप रिनी की कार को ड्राइव करते हुए भट्ठा नंबर 5 पर सुनसान जगह ले आया.

वहां पूरा सन्नाटा देख कर संदीप ने बहाने से उसे कार से नीचे उतारा. इसी दौरान पीछे से छोटी रशियन पिस्टल से उस के सिर में 2 गोलियां मार दीं. इस के बाद संदीप ने रिनी  का मोबाइल बंद कर दिया और वहां से निकल गया.

संदीप ने कार के पेपर हिंडन पुल के पास नदी में फेंक दिए और रिनी की कार, हत्या में प्रयुक्त पिस्टल व रकम के साथ गुलमोहर गार्डन में अपने एक परिचित के पास छोड़ दिया. बाद में वह कैब से घर आ गया. अगले दिन रिनी के बेटे के साथ हमदर्दी जताते हुए वह साहिबाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने पहुंच गया.

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खुल गया पूरा राज

दरअसल, पुलिस को संदीप कौशिक पर शक इसलिए हुआ क्योंकि जब रिनी जैन के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गई तो दोनों के बीच हर रोज कई बार लंबीलंबी बातचीत के रिकौर्ड मिले. इन काल रिकौर्ड से साफ हो गया कि दोनों के बीच सिर्फ फैमिली फ्रैंड वाले रिश्ते नहीं हैं.

संदीप पर शक का एक कारण यह भी था कि उस ने पुलिस को यह बात नहीं बताई थी कि वारदात वाले दिन सुबह से ले कर शाम 5 बजे तक उस की रिनी जैन से छह बार बात हुई थी. इस के अलावा पुलिस को उन के बीच वाट्सऐप चैट के भी सबूत मिले.

हालांकि पुलिस की सामान्य पूछताछ में संदीप ने यही बताया था कि वारदात वाली रात को साढे़ 10 बजे तक वह अपने रेस्तरां पर था. लेकिन जब उस के मोबाइल की लोकेशन निकाली गई तो 6 बजे के बाद उस के मोबाइल की लोकेशन दिल्ली के कनाट प्लेस में मिली. बस इसी से पुलिस को उस पर शक हो गया.

इस के अलावा पुलिस ने शाम को 7 बजे से उस पूरी रात में गुलमोहर ग्रीन सोसाइटी के साथ आसपास की सोसाइटी के करीब 100 से 200 सीसीटीवी की जांच की थी.

इन्हीं कैमरों की फुटेज में संदीप गुलमोहर गार्डन अपार्टमेंट में रिनी जैन की कार को पार्किंग में ले जाते हुए और उसे पार्क करते दिखा था.

इस के बाद पुलिस ने संदीप कौशिक के मोबाइल को निगरानी में ले लिया और उस की हर गतिविधि को वाच किया जाने लगा. बस संदीप पर शक के पुख्ता होते ही पुलिस ने उसे पकड़ने का जाल बिछाया और उसे तब गिरफ्तार कर लिया जब वह अपनी पत्नी के साथ कार को ठिकाने लगाने के लिए ले जा रहा था.

विस्तृत पूछताछ के बाद संदीप ने अपने घर में रखे 3 लाख रुपए भी बरामद करवा दिए जो उस ने हत्या के बाद रिनी जैन से लूटे थे. पुलिस ने हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में संदीप की पत्नी  प्रीति त्यागी को भी संदीप के साथ सक्षम न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया गया.

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एसएसपी गाजियाबाद ने केवल 72 घंटे में ही ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाने वाली साहिबाबाद पुलिस को 15 हजार रुपए का पुरस्कार दिया है.

– कथा पुलिस की जांच व आरोपियों के बयान पर आधारित है

संबंधों की बैसाखी बनी बंदूक

ग्रहण हट गया: भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- ग्रहण हट गया: भाग 1

लेखक- अभिजीत माथुर

यह सुन कर मेरी एकदम रुलाई फूट गई. मुझे यों अपमानित होते देख अखिल मेरे पास आए और बोले, ‘‘चलो, बीना, चलो यहां से. मैं तुम्हारी और बेइज्जती होते नहीं देख सकता.’’

यह सुन कर पापा बोले, ‘‘हां, हां…चले जाओ यहां से. वैसे भी यहां तुम्हें बुलाया किस ने है?’’

अखिल बोले, ‘‘आप ने हमें नहीं बुलाया लेकिन हम यहां इसलिए आए हैं क्योंकि बीना अपने भाई को दूल्हा बने देखना चाहती थी और मैं यहां इस की वह इच्छा पूरी करने आया था, पर मुझे क्या पता था कि यहां इस की इतनी बेइज्जती होगी.

‘‘अरे, आप को बेइज्जती करनी थी तो मेरी की होती. गुस्सा निकालना था तो मुझ पर निकाला होता, दोषी तो मैं हूं. इस मासूम का क्या कुसूर है? आप लोगों के लिए पराया तो मैं हूं, यह तो आप लोगों की अपनी है. आप के घर की बेटी है, आप का खून है. क्या खून का रिश्ता इतनी जल्दी मिट जाता है कि अपनी जाई बेटी पराई हो जाती है?

‘‘मैं इस के लिए पराया हो कर भी इसे अपना सकता हूं और आप लोग इस के अपने हो कर भी इसे दुत्कार रहे हैं. मैं पराया हो कर भी इस की खुशी, इस की इच्छा की खातिर अपनी बेइज्जती कराने यहां आ सकता हूं और आप लोग इस के अपने हो कर भी इस की बेइज्जती कर रहे हैं. इस की खुशी, इस की इच्छा की खातिर थोड़ा सा समझौता नहीं कर सकते. यह बेचारी तो कितने सपने संजो कर यहां आई है. कितने अरमान होंगे इस के दिल में अपने भाई की शादी के, पर आप लोगों को इस से क्या? आप लोग तो अपनी झूठी इज्जत, मानमर्यादा के लिए उन सब का गला घोटना चाहते हैं.

‘‘मैं पराया हो कर भी इसे 2 साल में इतना प्यार दे सकता हूं और आप जिन्होंने इसे बचपन से अपने पास रखा उसे जरा सा प्यार नहीं दे सकते. इस का गुनाह क्या है? यही न कि इस ने आप लोगों की इच्छा से, आप की जाति के लड़के से शादी न कर मुझ जैसे दूसरी जाति के लड़के से शादी की. इस का यह गुनाह इतना बड़ा तो नहीं है कि इसे हर पल, हर घड़ी बेइज्जत किया जाए. इस ने जो कुछ अपनी खुशी, अपनी जिंदगी के लिए किया वह इतना बुरा तो नहीं है कि जिस के लिए बेइज्जत किया जाए और रिश्ता तोड़ दिया जाए.’’

मैं आज अखिल को ऐसे बेबाक बोलते पहली बार देख रही थी. मैं अखिल को अपलक देखे जा रही थी.

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अखिल फिर बोले, ‘‘आप शायद नहीं जानते कि यह आप लोगों को कितना प्यार करती है? आप लोग सोचते हैं कि इस ने आप की इच्छा के खिलाफ शादी की है तो यह आप लोगों की भूल है. यह आप लोगों को उतना नहीं, उस से भी कहीं ज्यादा प्यार करती है, जितना हमारी शादी से पहले करती थी.

‘‘यह पिछले 2 साल से मेरे साथ रह रही है. मैं इसे भरपूर प्यार देता हूं, कभी किसी बात की तकलीफ नहीं होने देता, फिर भी कभीकभी यह आप लोगों की याद में इतनी बेचैन हो जाती है कि रोने लग जाती है और खानापीना छोड़ कर खुद अपने को आप का गुनाहगार मानती है. कहने को यह आप लोगों से दूर है, पर इस का दिल, इस का मन तो आप लोगों के पास ही है.

‘‘मैं आप सभी से माफी चाहता हूं कि गुस्से व भावना में आ कर मैं आप लोगों को न जाने क्याक्या कह गया. पर मैं क्या करूं…मैं मजबूर था. मैं बीना की बेइज्जती होते नहीं देख सकता क्योंकि मैं बहुत प्यार करता हूं इसे, बहुत ज्यादा. अच्छा, हम चलते हैं…बिन बुलाए आए और आप की खुशियों में खलल डाला इस के लिए माफी चाहते हैं,’’ अखिल बोले और मेरी ओर देख कर कहा, ‘‘चलो, बीना.’’

हम दोनों चलने के लिए मुड़े ही थे कि शैलेंद्र भैया, जो इतनी देर से चुपचाप अखिल को बोलते देखे जा रहे थे, बोले, ‘‘ठहरो,’’ फिर घर वालों की ओर मुखातिब हो कर बोले, ‘‘पापा, ताऊजी, मैं जानता हूं कि यह बीना का दोष है कि इस ने हमारी इच्छा के खिलाफ जा कर हमारी जाति से अलग जाति के लड़के से शादी की है, पर इस का दोष इतना बड़ा तो नहीं कि हम इसे मरा समझ लें. आखिर इस ने जो भी किया, अपनी खुशी, अपनी जिंदगी के लिए किया. इस ने अपने लिए जो लड़का पसंद किया है वैसा तो शायद आपहम भी नहीं ढूंढ़ सकते थे.

‘‘यह अपने घर वालों का…हम लोगों का प्यार पाने के लिए कितना तड़प रही है. यह हमारा प्यार पाने के लिए पति के साथ अपने मानसम्मान की परवा न करते हुए यहां आई है ताकि यह अपने भाई को दूल्हा बना देख सके. यह हमारा प्यार पाने के लिए भटक रही है और हम इसे गले लगा कर प्यार देने के बजाय दुत्कार रहे हैं, बेइज्जत कर रहे हैं. क्या हमारा फर्ज नहीं बनता कि हम इसे गले लगा कर अपने प्यार के आंचल में भींच लें. जब अखिल पराया हो कर इसे प्यार से रख सकता है, तो हम लोग इतने गएगुजरे तो नहीं हैं कि इस के अपने हो कर भी इसे प्यार नहीं दे सकते.

‘‘पापा, अगर इस ने नादानी में कोई भूल की है तो हम तो समझदार हैं, हमें इसे माफ कर के गले लगा लेना चाहिए. मैं ने तो इसे कभी का माफ कर दिया था. मैं शायद आप लोगों को यह सब कभी नहीं कह पाता, पर आज जब अखिल को बोलते देखा तो मैं ने सोचा कि जब यह आदमी अपनी पत्नी, जो मात्र 2 बरस से इस के साथ रह रही है, उस की बेइज्जती सहन नहीं कर पाया तो मैं अपनी बहन की बेइज्जती कैसे सहन कर रहा हूं, जो मेरे साथ 20 साल रही है. मैं चाहता हूं कि आप लोग भी बीना को माफ कर दें व इसे गले लगा लें.’’

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मैं ने देखा भैया की आंखें भर आई हैं. फिर मैं ने अपनी ताईताऊजी, मम्मीपापा की तरफ देखा, सभी के चेहरे बुझे हुए थे व सभी की आंखों में आंसू थे. शायद उन पर अखिल की बातों का असर हो गया था. ताईजी व मम्मी, ताऊजी व पापा की तरफ याचिकापूर्ण दृष्टि से देख रही थीं.

अचानक ताऊजी मेरे पास आए और हाथ जोड़ कर बोले, ‘‘बेटी, मुझे माफ कर दो. मैं ने तुम्हें समझने में भूल की है. मैं तुम्हारी भावनाओं को नहीं समझ सका और अपनी ही शान में ऐंठा रहा, पर आज अखिल व शैलेंद्र की बातों ने मेरी आंखें खोल दी हैं. इन की बातों ने मेरी झूठी शान की अकड़ को मिटा दिया है. हमारा जीवन तुम्हारा गुनाहगार है, हमें माफ कर दो.’’

मैं ताऊजी को यों रोते देख हतप्रभ सी हो गई और मेरे मुंह से शब्द नहीं फूट रहे थे. अखिल ताऊजी और पापा के सामने आए और बोले, ‘‘ताऊजी व पापाजी, आप कैसी बातें करते हैं? बड़े क्या कभी बच्चों से माफी मांगते हैं. माफी तो हमें मांगनी चाहिए आप लोगों से कि हम ने आप को कष्ट दिया. गलती तो हम से हुई है कि हम ने आप लोगों की इच्छा के विरुद्ध कार्य किया. आप तो हम से बड़े हैं, आप का हाथ तो हमें आशीर्वाद देने के लिए है, हमारे सामने हाथ जोड़ने के लिए  नहीं.’’

ताऊजी बोले, ‘‘नहीं बेटे, मैं ने तुम्हें समझने में बड़ी भूल की है. शैलेंद्र ने सही कहा कि बीनू ने तुम्हारे रूप में जो पति पसंद किया है वैसा तो शायद हम सब मिल कर भी नहीं ढूंढ़ पाते. तुम हमारी बेटी की खुशी, उस की ख्वाहिश के लिए अपने मानसम्मान की परवा किए बगैर यहां आ गए और हम ने तुम दोनों का आदरसत्कार करने के बजाय बेइज्जत किया. तुम्हारी भावनाओं को, तुम्हारे प्रेम को नहीं समझा बल्कि अपनी रौ में बह कर तुम्हें तवज्जुह नहीं दी. हमारा परिवार वाकई तुम दोनों का गुनाहगार है. हमें माफ कर दो. मैं व हरि दोनों अपने घर वालों की तरफ से तुम दोनों से क्षमा चाहते हैं.’’

तभी पापा बोले, ‘‘हां, अखिल बेटे, मेरी गलती को माफ कर दो और यहीं रुक जाओ. यह हमारे घरपरिवार की तरफ से प्रार्थना है. मैं तुम से हाथ जोड़ कर विनती करता हूं.’’

फिर ताऊजी, पापा, ताईजी व मम्मी सभी मेरे व अखिल के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हो कर क्षमा मांगते हुए हमें रोकने लगे. यह देख अखिल बोले, ‘‘अरे, यह आप सब लोग क्या कर रहे हैं? प्लीज, आप लोग अपने बच्चों के सामने हाथ जोड़ कर खड़े न हों. आप लोग हमारे बुजुर्ग हैं. आप लोगों के हाथ तो आशीर्वाद देने के लिए हैं. मैं और बीना कहीं नहीं जाएंगे बल्कि पूरी शादी में खूब मजे करने के लिए यहीं रुकेंगे. यह तो आप लोगों का बड़प्पन है कि आप हम से बिना किसी गलती के माफी मांग रहे हैं.’’

ताऊजी यह सुन कर मुझ से बोले, ‘‘बीनू, वाकई तू ने एक हीरा पसंद किया है. हम ने इसे पहचानने में भूल कर दी थी,’’ फिर वह मेरे पास आ कर बोले, ‘‘क्यों बीना, तू ने मुझे माफ कर दिया या कोई कसर रह गई है. अगर रह गई है तो बेटी, पूरी कर ले. मैं तेरे सामने ही खड़ा हूं.’’

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मैं ने हंस कर कहा, ‘‘क्या ताऊजी आप भी,’’ फिर मैं खुशी से ताऊजी के गले लग गई.

तभी पापा की आवाज आई, ‘‘अरे, बीना, जल्दी इधर आ और शैलेंद्र की आरती कर. देख, देर हो रही है. बाकी रस्में भी करनी हैं. फिर बरात ले कर तेरी भाभी को भी लेने जाना है.’’

मैं पापा की आवाज सुन कर खुशी से कूदती हुई शैलेंद्र भैया की आरती करने गई. मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे ग्रहण का हिस्सा जो मेरी जिंदगी पर लग गया.

पवन सिंह का दूसरा इंटरनेशनल गाना ‘ये लड़की सही है’ हुआ वायरल, देखें Video

6 जून को ‘‘यशी फिल्मस’’ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भोजपुरी अभिनेता व गायक पवन सिंह (Pawan Singh) द्वारा स्वबद्ध और उन्ही पर फिल्माया गया दूसरा इंटरनेशनल एल्बम ‘ये लड़की सही है’ (Ye Ladki Sahi Hai) वायरल होते ही हंगामा हो गया है. सूत्रों का दावा है कि महज चैबिस घंटे में ही इसे एक लाख से अधिक व्यूज मिल चुके हैं.

‘‘ये लड़की सही है’’ एल्बम के निर्माता अभय सिन्हा (Abhay Sinha) कहते हैं- ‘‘हमें पहले से यकीन था एल्बम ‘ये लड़की ही है’ ऐसा संगीत एल्बम है,जो कि भोजपुरी संगीत जगत में चार्ट बस्टर बनेगा. जो कि सच साबित हो गया है. पवन सिंह (Pawan Singh) एक बार फिर से अपनी आवाज और अभिनय से धमाल मचा रहे हैं. इसमें वह विभिन्न देशों की मॉडल के साथ नजर आ रहे हैं. हमने इस एल्बम की शूटिंग दुबई में की है, जिसमें हमने भव्यता का पूरा ख्याल रखा है.’’

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अभय सिन्हा ने आगे कहा- ‘‘भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में एल्बम ‘ये लड़की सही है’ दूसरा ऐसा एल्बम है, जिसकी शूटिंग विदेश में हुई है. इससे पहले हमने ही पवन सिंह को लेकर एल्बम ‘नंबर ब्लॉक चल रहा है’ की शूटिंग दुबई के मनोरम लोकेशन पर की थी. अब दूसरे एल्बम की शूटिंग भी दुबई में हुई है. हालांकि हमने गाने की शूटिंग लॉकडाउन (Lockdown) से पहले की थी, पर हमने अब इसे रिलीज किया है. ‘ये लड़की सही है’ का कॉन्सेप्ट भी नया और अनोखा है.’’

एल्बम ‘ये लड़की सही है’ के वीडियो निर्देशक कुमार सौरव सिन्हा, गीतकार आजाद सिंह, संगीतकार आजाद सिंह व सजन मिश्रा, कैमरामैन वासु, नृत्य निर्देशक संजय कोर्वे हैं.

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अमिताभ बच्चन नें पढ़ी पिता की कविताएं, तो आंखों में छलके आंसू

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को लेकर ट्रोलर्स ने कोरोना त्रासदी में फंसे लोगों की सहायता के लिए पीएम केयर फंड में सहयोग न करने के चलते तमाम तरीके से उनका मजाक बनाया था और उनकी बुराइयां भी की. लेकिन अमिताभ बच्चन ने हजारों दिहाड़ी मजदूरों को सीधे सहयोग किये जाने की बात कर उन सभी लोगों की बोलती बंद कर दी जो उन्हें ट्रोल कर रहे थे. उन्होंने औल इंडिया फिल्म एंप्लॉइज कन्फेडरेशन से जुड़े एक लाख दिहाड़ी मजदूरों के परिवार की मदद के लिए मासिक राशन मुहैया कराने का ऐलान किया है. अमिताभ बच्चन के कदम से अब चारो ओर उनकी सराहना हो रही है.

इन सबके बीच हर रोज अमिताभ बच्चन के तरह से किसी न किसी वीडियो और पोस्ट के जरिये लोगों में कोरोना से बचाव और निराशा से उबरने के लिए पोस्ट और वीडियो जारी किये जा रहें हैं. इन सभी के बीच अमिताभ बच्चन नें अपने ट्विटर, इन्स्टाग्राम, और फेसबुक एकाउंट पर अपने पिता और मशहूर कवि हरिवंश राय बच्चन के कविताओं की कुछ पंक्तियों को अपने आवाज में रिकार्ड कर शेयर किया है.

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अमिताभ बच्चन नें अपने पिता के कविता की जिन पंक्तियों को अपनी आवाज में रिकार्ड किया है. वह “है अंधेरी रात पर दीपक जलाना कब मना है.” उन्होंने छः पंक्तियों वाली इस कविता के तीसरे और अंतिम छठी  पंक्ति को रिकार्ड किया है. वीडियो के बैकग्राउंड में उनकी आवाज में रिकार्ड की गई इस इस कविता की पंक्तियां गूंज रहीं हैं. और उनके हाथ में उनके पिता के कविताओं की पुस्तक है जिसे वह पलट कर उसी कविता पर आ जातें हैं. यह पल बहुत ही भावुक करने वाला हैं कभी उनके चहेरे पर मुस्कराहट आ रही है तो कभी आंखों में आँसू. इस वीडियो को देख कर लगता है की अमिताभ बच्चन अपने पिता की यादों में खो से गयें हैं.

अमिताभ बच्चन नें इसी से जुडा वीडियो अपने ट्विटर पर अपलोड कर लिखा है “बाबूजी और उनकी आशा भारी कविता को याद करता हूँ. बाबूजी कवि सम्मेलनों में  ऐसे ही गा के सुनाया करते थे”. (T 3495 – I reminisce my Father and his poem, which expresses hope and strength. The singing is exactly how Babu ji recited it at Kavi Sammelans, which I attended with him).

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उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम पोस्ट में लिखा है “इन अकेली घड़ियों में, मैं बाबूजी और उनकी कविता को याद करता हूँ, जो आशा भरी हैं, शक्ति सम्पूर्ण गाने की धुन बिलकुल वैसी है जैसे बाबूजी कवि सम्मेलनों में गा के सुनाया करते थे. मैं उनके साथ होता था” (In these times of isolation I reminisce my Father and his poem , which expresses hope and strength. The singing is exactly how Babu ji recited and sang it at Kavi Sammelans, which I attended with him).

 

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In these times of isolation I reminisce my Father and his poem , which expresses hope and strength. The singing is exactly how Babu ji recited and sang it at Kavi Sammelans, which I attended with him .. इन अकेली घड़ियों में, मैं बाबूजी और उनकी कविता को याद करता हूँ, जो आशा भरी हैं, शक्ति सम्पूर्ण । गाने की धुन बिलकुल वैसी है जैसे बाबूजी कवि सम्मेलनों में गा के सुनाया करते थे । मैं उनके साथ होता था ।

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अमिताभ बच्चन ने इस कविता को उस समय अपलोड किया है जब कोरोना के चलते ओर निराशा है. ऐसे में इस कविता की यह पंक्तियाँ आशा की किरण पैदा करती है. इस कविता को रिकार्ड करने में उनकी बेटी श्वेता और नातिन का बड़ा हाथ है. जब की जिस वीडियो को अपलोड किया गया है उसे अमिताभ बच्चन ने अपने घर में ही रिकार्ड कराया है जिसे उनके ही फोन से अभिषेक बच्चन ने रिकार्ड किया है. उन्होंने अपने इस वीडियो को फेसबुक एकाउंट पर भी शेयर किया है.

हरिवंश राय बच्चन की वह पंक्तियां जिसे उन्होंने नें गाकर सुनाया है

क्या घड़ी थी, एक भी चिंता नहीं थी पास आई
कालिमा तो दूर, छाया भी पलक पर थी न छाई
आँख से मस्ती झपकती, बात से मस्ती टपकती
थी हँसी ऐसी जिसे सुन बादलों ने शर्म खाई
वह गई तो ले गई उल्लास के आधार, माना
पर अथिरता पर समय की मुस्कुराना कब मना है
है अंधेरी रात पर दीपक जलाना कब मना है.

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क्या हवाएं थी कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना
कुछ न आया काम तेरे शोर करना, गुल मचाना
नाश की उन शक्तियों के साथ चलता ज़ोर किसका
किंतु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना
जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से
पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है
है अंधेरी रात पर दीपक जलाना कब मना है.

बंगाली लड़कियां मेहनती होती हैं – पूजा गांगुली

बंगाली बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने वाली तमाम हीरोइनों ने भोजपुरी सिनेमा (Bhojpuri Cinema) में अपनी खूबसूरती और अदाकारी की बदौलत एक अलग ही मुकाम हासिल किया है.

ऐसा ही एक नाम है पूजा गांगुली (Pooja Ganguly) का. भोजपुरी फिल्मों में खेसारी लाल यादव (Khesarilal Yadav) जैसे ऐक्टर के साथ डैब्यू करने वाली पूजा गांगुली आज के दौर में भोजपुरी फिल्मों की हिट हीरोइनों में गिनी जाती हैं.

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उन्होंने ‘कुली नंबर वन’ (Coolie  No.1), ‘मुकद्दर का सिकंदर’ (Mukaddar Ka Sikander), ‘साजिश : एक जाल (Saajish : Ek Jaal)’ में खेसारी लाल यादव और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ (Dinesh Lal Yadav ‘Nirhua’) के साथ काम कर के बहुत ही कम समय में नाम कमा लिया है.

भोजपुरी फिल्म ‘गोरखपुरिया रंगबाज’ (Gorakhpuriya Rangbaaz) के सैट पर हुई एक मुलाकात में पूजा गांगुली के फिल्मी सफर पर लंबी बातचीत हुई.

पेश हैं, उसी के खास अंश :

क्या वजह है कि भोजपुरी की ज्यादातर कामयाब हीरोइनें बंगाली बैकग्राउंड से हैं?

सच कहूं तो बंगालियों के खून में अदाकारी रचीबसी है. यहां के कलाकारों के लिए भाषा मायने नहीं रखती है. बंगाल के ऐक्टर जिस भी भाषा की फिल्म में ऐक्टिंग करते हैं, वहां उन्हें कामयाबी मिल ही जाती है.

जहां तक बंगाल की लड़कियों के भोजपुरी सिनेमा में कामयाबी की बात है, तो यहां की लड़कियां मौडलिंग (Modelling) के क्षेत्र में आगे हैं. साथ ही, वे मेहनती भी होती हैं. अगर मैं भोजपुरी सिनेमा की बात करूं, तो यहां आ कर मोनालिसा (Monalisa), मनी भट्टाचार्य (Mani Bhattacharya), संचिता बनर्जी (Sanchita Banerjee), अमृता पांडेय (Amrita Pandey) जैसी तमाम बंगाली लड़कियों ने कामयाबी पाई है.

अगर खुद की बात करूं तो मैं भोजपुरी के पहले बंगला सिनेमा में काम कर रही थी, लेकिन भोजपुरी ने मुझे एक नई पहचान देने का काम किया है.

आप की मां आप को एक कामयाब गायिका के रूप में देखना चाहती थीं, फिर आप ने ऐक्टिंग का रास्ता क्यों चुना?

जी, आप ने सही कहा. मेरी मां बंगला की एक कामयाब गायिका हैं और उन की ख्वाहिश थी कि आगे चल कर मैं भी एक कामयाब गायिका बनूं, लेकिन मेरी दिलचस्पी गायन की तरफ न हो कर ऐक्टिंग की तरफ रही, इसलिए मैंने ऐक्टिंग को चुना और इस में मुझे कामयाबी भी मिली.

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आप को ऐक्टिंग में बिना किसी जद्दोजेहद के कामयाबी मिली. इसे आप कैसे देखती हैं?

जी, आप ने सही कहा. मुझे अचानक ही बंगाली टीवी चैनल स्टार जलसा के एक सीरियल के लिए औफर मिला था, जिस के लिए मैं ने तुरंत ही हां कह दिया था.

इस के बाद मुझे इस चैनल के 5 धारावाहिकों में बतौर लीड काम करने का मौका मिला. इस हिसाब से मुझे ज्यादा जद्दोजेहद नहीं करनी पड़ी.

आप को भोजपुरी की पहली ही फिल्म में भोजपुरी के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव (Khesali Lal Yadav) के साथ काम करने का मौका मिला. इस कामयाबी को आप कैसे देखती हैं?

मुझे भोजपुरी फिल्मों में पहला ब्रेक कोलकाता से ही मिला. यह ऐसे हुआ कि मेरी मुलाकात कोलकाता के एक बड़े प्रोडक्शन हाउस में भोजपुरी के जानेमाने डायरैक्टर लाल बाबू पंडित से हुई.

उन्होंने मुझ से अपनी फिल्म ‘कुली नंबर वन’ में काम करने का औफर दिया, जिस में लीड रोल में खेसारी लाल यादव थे.

मैं अचानक मिले इतने बड़े मौके को गंवाना नहीं चाहती थी और तुरंत ही हां कर दिया. भोजपुरी में मेरे लिए यह फिल्म मील का पत्थर साबित हुई.

आप ने भोजपुरी की पहली बायोपिक फिल्म में भी काम किया. क्या इसे भोजपुरी सिनेमा में बदलाव का संकेत माना जाए?

जी, बिलकुल. भोजपुरी सिनेमा में अब पूरी तरह से बदलाव आना शुरू हो चुका है. जहां भोजपुरी में एक भी बायोपिक फिल्म नहीं बनती थी, वहीं दिनेश लाल यादव ने ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी कामयाब भोजपुरी फिल्म दी. मुझे खुशी है कि मैं भी इस फिल्म का हिस्सा रही.

आप की फिल्म ‘कुली नंबर 1’ में वृद्धाश्रमों की बढ़ती तादाद पर सवाल खड़ा किया गया है. भोजपुरी में इस तरह के सामाजिक मुद्दों पर बनने वाली फिल्मों को ले कर आप आगे क्या भविष्य देखती हैं?

सच कहूं तो भोजपुरी में इतने संजीदा विषयों पर पहले कम फिल्में बनती थीं, लेकिन अच्छे स्क्रिप्ट राइटरों के आने से अब भोजपुरी में भी सोशल इश्यू पर फिल्में बनने का रास्ता खुला है.

कलाकारों के लिए सोशल मीडिया और इंटरनैट के क्या माने हैं?

आज के दौर में कलाकारों के लिए सुर्खियों में बने रहने के लिए सोशल मीडिया एक अहम जरीया बन चुका है, खासकर इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर किसी भी कलाकार को आगे बढ़ाने में अहम रोल निभा रहे हैं, क्योंकि ऐसे प्लेटफार्म से अपने फैंस से सीधे जुड़ने का मौका मिलता है.

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आप बाकी कलाकारों से खुद को कैसे अलग मानती हैं?

देखिए, अगर मैं खुद अपनी बड़ाई करती हूं, तो अपने मुंह मियां मिट्ठू वाली बात हो जाएगी. लेकिन अगर मैं अपने फैंस और दर्शकों की जबान में कहूं तो उन का कहना है कि मैं किसी भी रोल में आसानी से ढल जाती हूं. मैं दूसरों की तरह खुद के ऊपर कभी भी स्टारडम हावी नहीं होने दूंगी.

फिल्मों में ग्लैमरस लुक होना आप कितना अहम मानती हैं?

आज के दौर में एक हीरोइन के लिए बिना ग्लैमरस लुक के इंडस्ट्री में बने रहना मुश्किल है, इसलिए उन्हें अपना ग्लैमरस लुक बनाए रखना चाहिए.

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