श्यामली की करतूत : भाग 3

समीर के समझाने के बाद भी वह प्रेमी से मोबाइल पर घंटों बात करती थी. बात करने के तुरंत बाद ही विश्वजीत की काल हिस्ट्री को डिलीट भी कर देती थी. उसी दौरान एक दिन श्यामली से वही गलती हुई जो मियांबीवी में विवाद का कारण बनी. जिस के कारण दोनों की बसीबसाई गृहस्थी में पूरी तरह से आग लग गई. श्यामली के प्रति समीर का विश्वास टूटा तो दोनों की जिंदगी में प्रलय आ गई. लिहाजा अगली सुबह समीर उसे उस के मायके छोड़ आया.

श्यामली को मायके छोड़ने के कुछ समय बाद तक उस ने उसे कोई बात भी नहीं की. उस के कई महीनों बाद उस के ससुराल वालों ने उसे बुला कर ले जाने को कहा तो समीर ने उसे लाने से साफ मना कर दिया. उस के बाद उस की ससुराल वालों ने समीर के परिवार वालों को बुला कर गांव में ही पंचायत की. श्यामली ने भरी पंचायत में अपनी गलती की माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती न करने की बात कही.

उस के बाद श्यामली फिर से समीर के साथ रहने लगी थी. मायके से आने के कुछ दिनों तक तो श्यामली ठीकठाक रही. लेकिन एक बार 2 दिलों में आ चुकी दरार पूरी तरह से भर नहीं पाई. और समीर भी उसे पहला प्यार नहीं दे पा रहा था. जिस के कारण उस के मन में समीर के प्रति बसी छवि धूमिल होती चली गई.

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वहीं दूसरी ओर विश्वजीत उस की जिंदगी में बहार बन कर उस के सपनों का राजकुमार बन गया. यही कारण रहा है कि कुछ समय बाद ही फिर से वह चोरीछिपे विश्वजीत राय से  मिलनेजुलने लगी थी.

उसी मिलनेजुलने के दौरान श्यामली ने विश्वजीत के सामने प्यार के आंसू बहाते हुए किसी भी तरह से समीर को अपनी जिंदगी से निकालने वाली बात कही. विश्वजीत भी श्यामली को हद से ज्यादा प्रेम करने लगा था. वह किसी भी कीमत पर उसे अपनी बीवी के रूप में देखना चाहता था. लिहाजा वह समीर रूपी कांटे को हटाने के लिए तैयार हो गया.

इस हत्याकांड को अंजाम देने से एक सप्ताह पूर्व ही श्यामली ने अपने प्रेमी विश्वजीत के साथ मिल कर समीर की हत्या का तानाबाना बुना. इस अंजाम को अमलीजामा पहनाने के लिए श्यामली ने घर में रखे 50 हजार रुपए खर्च वास्ते विश्वजीत को दिए.

विश्वजीत ने उन्हीं 50 हजार रुपए में से दिनेशपुर से 315 बोर का एक तमंचा और कारतूस खरीदे. हालांकि श्यामली ने विश्वजीत के साथ मिल कर समीर की हत्या का तानाबाना बुन तो लिया था.

लेकिन अंजाम को सोच कर वह बारबार परेशान हो रही थी. वह समझ नहीं पा रही थी कि इतनी बड़ी बारदात को अंजाम देने के बाद अपने में कैसे हिम्मत जुटाएगी.

उसी समय 18 जून, 2020 को उस की मुलाकात उस की एक पुरानी सहेली प्रियंका से हुई. प्रियंका कई दिन से उसी के नजदीक रहने वाली राधिका नाम की सहेली के साथ रह रही थी. वह प्रियंका से मिली तो उस ने श्यामली के सामने अपनी दिल की पीड़ा सुनाते हुए उसे अपने साथ रखने वाली बात कही. श्यामली उस की परेशानी सुन कर उसे अपने घर ले आई.

प्रियंका के आ जाने से श्यामली का मनोबल भी बढ़ गया था. एक सप्ताह पहले समीर की हत्या की साजिश रचने के बाद श्यामली पूरी तरह से सतर्क हो गई थी. 19 जून 2020 की शाम को श्यामली ने समीर के मोबाइल पर फोन कर कहा कि उस की सहेली प्रियंका भी बीयर पीती है. आज रात वह हमारे ही साथ रहेगी. इसीलिए वह बीयर की 3 केन ले कर आए. श्यामली के कहने पर समीर उस शाम वियर की 3 केन ले कर आया.

उस दिन समीर के साथ काम करने वाले युवक सूरज और छोटू भी घर पर ही रुक थे. उस दिन श्यामली ने शाम को जल्दी ही खाना बनाया और समीर के आते ही उस ने सूरज और छोटू को खाना खिला कर ऊपर छत पर सोने के लिए भेज दिया था. उस के बाद समीर, श्यामली और प्रियंका तीनों ने एक साथ बैठ कर खाना खाया. खाना खाने के बाद तीनों ने एक जगह बैठ कर बीयर पी.

बीयर पीने के कुछ समय बाद ही समीर नींद में झूमने लगा. श्यामली ने समीर की बीयर में नींद की गोलियां मिला दी थीं. समीर के गहरी नींद में सोने के बाद ही उस ने विश्वजीत को फोन कर के उस की लोकेशन का पता किया. उस के बाद भी वह बारबार छत पर जा कर सूरज और छोटू के सोने का जायजा लेती रही.

उस समय सूरज और छोटू भी शराब पी कर सोए थे. नशे में होने के कारण वह दोनों भी शीघ्र ही सो गए थे. उन दोनों के सोते ही जब श्यामली को पूरा विश्वास हो गया कि वह दोनों भी गहरी नींद में सो चुके हैं तो उस ने जीने का दरबाजा अंदर से बंद कर दिया.

उस के बाद उस ने अपने प्रेमी विश्वजीत राय को फोन कर शीघ्र आने को कहा. श्यामली का फोन आने के तुरंत बाद ही विश्वजीत अपने 2 साथियों शिबू अधिकारी और महेश सरकार के साथ रात के कोई 2 बजे के आसपास उस के घर के पास पहुंचा. उस के घर के पास पहुंचते ही मछली बाजार के नजदीक विश्वजीत ने अपनी बाइक रोकी और फिर से श्यामली से फोन पर बात कर स्थिति का सही आंकलन किया.

उस के बाद विश्वजीत अपने साथियों शिबू अधिकारी और महेश सरकार के साथ समीर के घर पहुंचा. श्यामली ने पहले से ही घर की दूसरी ओर खुलने वाला दरवाजा खुला छोड़ दिया था.

उसी रास्ते से तीनों अंदर आ गए. अंदर जाते ही विश्वजीत ने गहरी नींद में सोए समीर के माथे पर तमंचा सटा कर गोली चला दी. माथे पर गोली लगते ही समीर की तुरंत ही मौत हो गई.

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समीर की हत्या करने के बाद विश्वजीत अपने साथियों के साथ पीछे वाले दरवाजे से ही निकल गया. समीर की हत्या हो जाने के बाद श्यामली की हिम्मत जवाब दे गई. जब उस ने समीर को रक्तरंजित हालत में देखा तो वह बुरी तरह से घबरा गई थी. उस के बाद प्रियंका ने उसे हिम्मत बंधाई और धैर्य रखने वाली बात कही.

उस समय तक घर में गोली चलने की आवाज सुन कर छत पर सो रहे सूरज और छोटू भी पड़ोसी की छत से कूद कर नीचे आ गए थे. सूरज और छोटू के पूछने पर श्यामली ने बताया कि अभी थोड़ी देर पहले ही कुछ बदमाश घर में घुस आए थे, जिन्होंने आते ही समीर को गोली मार उस की हत्या कर दी और फिर फरार हो गए.

कुछ समय बाद ही पड़ोसी और समीर के मातापिता भी घर पहुंच गए थे. जब श्यामली कोई निर्णय नहीं ले पाई तो उस ने दूसरे कमरे में जा कर पंखे से चुन्नी बांधी और आए लोगों को उलझाने के लिए उस ने अपने को भारी सदमे में दिखा कर खुदकुशी करने का ड्रामा किया. लेकिन पुलिस की जांचपड़ताल के दौरान पंखे से लटकने वाली बात केवल उस का दिखावा ही था.

श्यामली द्वारा अपना जुर्म कबूलते ही पुलिस ने इस केस में तीव्रता दिखाते हुए मात्र 9 घंटे में ही उस के प्रेमी विश्वजीत राय, उस के साथी शिबू अधिकारी और महेश सरकार को गिरफ्तार कर लिया था. साथ ही पुलिस ने हत्यारोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल तमंचा, एक खोखा, बीयर में डाली गई नशे की बाकी बची 3 गोलियां और घटना में इस्तेमाल बाइक भी बरामद कर ली थी.

केस का खुलासा होते ही पुलिस ने इस मामले में हत्याकांड के मुख्य आरोपी श्यामली के प्रेमी विश्वजीत राय पुत्र शिबू अधिकारी, महेश सरकार, मृतक की बीवी श्यामली बिस्वास के खिलाफ आईपीएस की धारा 302/3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें 20 जून को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

इस मामले के खुलासे के बाद एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने इस केस की जांचपड़ताल में लगी पुलिस टीम में शामिल सीओ अमित कुमार, थानाप्रभारी विद्यादत्त जोशी, एसआई विजय सिंह, प्रदीप शर्मा, कौशल भाकुनी, अर्जुन गिरि, मनोज कुमार, धीरज वर्मा, नीरज शुक्ला, नरेश जोशी, नीरज भोज, दिनेश चंद्र, राकेश उप्रेती, जितेंद्र चौहान, मुकेश मेहरा, गोकुल टम्टा आदि को ढाई हजार रुपए का ईनाम दे कर सम्मानित किया. इस केस की तफ्तीश स्वयं थानाप्रभारी विद्यादत्त जोशी कर रहे थे.

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श्यामली की करतूत : भाग 2

समीर के पिता निताई बिस्वास का परिवार भी बंगाल से आ कर रुद्रपुर में बस गया था. निताई बिस्वास के 5 बच्चो में से समीर तीसरे नंबर पर था. अब से तकरीबन 7 साल पहले ही श्यामली और समीर के बीच दोस्ती हुई थी. बाद में यह दोस्ती प्यार में बदल कर शादी तक आ पहुंची. लेकिन समीर की मम्मी अनीता बिस्वास को श्यामली पसंद नहीं थी.

समीर का श्यामली के बिना एक पल भी रहना नामुमकिन था. अनीता बिस्वास ने अपने बेटे के भविष्य को देखते हुए उसे श्यामली से दूरी बनाने को कहा तो मां भी उसे दुश्मन लगने लगी थी.

यही बात श्यामली के साथ भी आड़े आ रही थी. श्यामली अपने मांबाप की एकलौती बेटी थी. वह भी समीर के बजाय श्यामली की शादी ऐसे घर में करना चाहते थे ताकि उस की गृहस्थी में किसी प्रकार की अड़चन न आए. हालांकि समीर बिस्वास और श्यामली दोनों ही एक ही बिरादरी के थे, लेकिन श्यामली के घर वालों को भी समीर पसंद नहीं था.

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समीर जिद्दी किस्म का युवक था. यही कारण था कि उस ने अपने मांबाप की एक न मानी और श्यामली से शादी करने पर अड़ गया. हालांकि दोनों के परिवार वाले इस के लिए राजी नहीं थे, लेकिन उन की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा. और सन 2013 में दोनों की शादी करा दी गई.

श्यामली निताई बिस्वास परिवार की बहू बन कर आई तो घर में खुशियां छा गईं. शादी हो जाने के बाद श्यामली ने समीर के साथसाथ अपने सासससुर और अन्य परिवार वालों का पूरी तरह से ध्यान रखा. शादी के 3 साल बाद वर्ष 2016 में श्यामली ने एक बेटे को जन्म दिया. उस का नाम उन्होंने देव रखा. दोनों के बीच सब कुछ ठीक ही चल रहा था.

समीर के  परिवार वालों ने दिन रात कड़ी मेहनत कर के काफी पैसा कमाया था. जिस के बाद उन्होंने थाना ट्रांजिट कैंप अंतर्गत अरविंद नगर में शानदार मकान भी बना लिया था. उसी दौरान समीर कच्ची शराब बेचने के धंधे से जुड़ गया.

समीर को शराब बेचने से मोटी आमदनी होने लगी, आमदनी में इजाफा होने पर श्यामली के भी पर लग गए. उस के रहनसहन में भी काफी बदलाव आ गया था. समीर को दिनभर में जो भी कमाई होती थी, वह उसे श्यामली के हाथ पर ला कर रख देता था. जिस के कारण श्यामली के व्यवहार में काफी अंतर आने लगा था. वह खुले हाथ से पैसा खर्च करने लगी थी.

हालांकि इस बात से समीर को कोई फर्क नहीं पड़ता था. लेकिन यह सब उस के मातापिता की बरदाश्त से बाहर की बात हो गई थी. उन्होंने कई बार इस बात की शिकायत समीर से की. लेकिन समीर हमेशा ही अपने परिवार वालों की बातों को हल्के में लेता रहा. तब उन्होंने श्यामली को समझाने की कोशिश की. श्यामली तो पति की सारी कमाई पर अपना ही अधिकार समझती थी. इसलिए सासससुर के समझाने की बात उसे बुरी लगती थी. लिहाजा उस का सासससुर से मनमुटाव रहने लगा था.

वह बातबात पर अपनी सास को खरीखोटी भी सुनाने लगी थी. उस समय समीर को केवल कमाई ही दिखाई दे रही थी. उस के काम का दायरा बढ़ा तो उस ने अपनी सहायता के लिए 2 लड़कों सूरज और छोटू को भी अपने पास रख लिया. उसी दौरान विश्वजीत राय भी समीर के संपर्क में आया. विश्वजीत इलेक्ट्रीशियन था. विश्वजीत गुलरभोज (गदरपुर) का रहने वाला था. लेकिन कुछ समय बाद उस ने भी रुद्रपुर की नारायण नगर कालोनी में अपना मकान बना लिया था.

समीर के घर की लाइट की फिटिंग भी उसी ने की थी. विश्वजीत समीर के संपर्क में आया तो उस की आमदनी भी बढ़ गई थी. शराब बेचने से हुई मोटी आमदनी से विश्वजीत ने बिजली फिटिंग का काम छोड़ दिया. उस के बाद वह हर समय समीर के साथ ही उस के शराब के धंधे में लगा रहने लगा था.

काम खत्म हो जाने के बाद विश्वजीत राय, सूरज और छोटू अकसर खानापीना समीर के घर पर ही किया करते थे. श्यामली तीनों को खाना बना कर खिलाती थी. लेकिन श्यामली को पति के परिवार वाले दुश्मन नजर आने लगे थे.

समीर और विश्वजीत में गहरी दोस्ती भी हो गई थी. उसी दौरान श्यामली उस को अपना दिल दे बैठी. उन दोनों के बीच फोन पर खूब बातें होती थीं.

समीर की गैरमौजूदगी में श्यामली विश्वजीत को अपने घर में ही बुलाने लगी थी. यह बात उस के ससुराल वालों को नागवार गुजरी. जिस के कारण समीर के घर की शांति भंग हो गई. श्यामली ने अपनी सास की शिकायत पति से करते हुए कहा कि वह उसे चरित्रहीन कहती है. समीर अपनी बीवी के प्रति एक भी बुराई सुनने को तैयार न था. नतीजन समीर अपने मातापिता को बुराभला कहने पर उतर आया था.

विश्वजीत के कारण समीर के घर में इतना विवाद बढ़ा कि अपनी बीवी के कहने पर उस ने अपनी मम्मीपापा और 2 छोटे भाइयों विष्णु और सुकीर्ति को भी घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया. जिस के बाद 6 कमरों का मकान छोड़ कर उस के परिवार को ट्रांजिट कैंप दुर्गा मंदिर के पास किराए के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा. जिस औलाद की जिद के आगे हार मान कर उन्होंने उस की शादी उस की मरजी से कराई, आज उसी कपूत ने उन्हें धक्का मार कर घर से निकाल दिया था.

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श्यामली की जिंदगी में विश्वजीत के आगमन के दौरान ही समीर की गृहस्थी में भी ग्रहण लगना शुरू को गया था. अपनी ससुराल वालों को घर से निकालने के बाद श्यामली समीर की गैरमौजूदगी का लाभ उठाते हुए विश्वजीत के साथ मौजमस्ती करने लगी थी. जब कभी भी वह घर में अकेली होती तो वह फोन कर के विश्वजीत को बुला लेती और उस के साथ अय्याशी करती.

विश्वजीत के संपर्क में आने के बाद श्यामली ने बीयर पीनी भी सीख ली थी. जब कभी भी समीर किसी काम से घर से बाहर जाता तो वह विश्वजीत को अपने घर बुला लेती और फिर सारी रात शराब और शबाव का दौर चलता.

समीर की आंखों पर अभी भी श्यामली के प्यार की काली पट्टी बंधी हुई थी. श्यामली समीर की शराफत का लाभ उठाते हुए उस की कमाई का ज्यादातर हिस्सा विश्वजीत पर उड़ाने लगी थी. लेकिन समीर ने कभी भी पत्नी से घर के खर्च का हिसाबकिताब नहीं मांगा था.

समीर अपनी बीवी के प्यार में इतना पागल था कि श्यामली ने उस से बीयर लाने की मांग की तो वह डिमांड भी उस ने पूरी की. उस के बाद दोनों ही मियांबीवी रात में बीयर साथसाथ पीने लगे थे. बीयर पीने से समीर को तो कुछ नहीं हो पाता था, लेकिन श्यामली बीयर के नशे में टल्ली हो कर अपने दिल का पन्ना खुला ही छोड़ कर सो जाती थी.

उसी खुले पन्ने के कारण एक दिन श्यामली की हकीकत भी समीर के सामने आ गई. एक रात श्यामली ने समीर के साथ ही बीयर पी और फिर उस ने समीर को सोया जान कर विश्वजीत को फोन मिला दिया. उस रात समीर को उस की हकीकत जान कर बहुत ही गहरा झटका लगा.

समीर को उस रात अपनी बीवी की हकीकत पता चली तो वह खून के आंसू रोया. उस के बाद भी उसे विश्वजीत पर ही गुस्सा आया. लेकिन रात अधिक हो जाने के कारण वह कुछ भी नहीं कर सकता था.

अगले दिन सुबह होते ही वह सब कुछ काम छोड़छाड़ कर विश्वजीत से मिला. उस ने उसे समझाते हुए उस की बीवी से फोन पर बात न करने को कहा. उसी दौरान उस की विश्वजीत से कहासुनी भी हुई. उस के बाद समीर अपने घर आया और अपनी बीवी श्यामली को रात की हकीकत बता कर विश्वजीत से बात न करने की चेतावनी दी.

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पति के समझाने पर श्यामली तो ऐसी अंजान सी बन गई थी कि जैसे वह कुछ जानती ही नहीं. उस के बाद से समीर के आंखकान चौकन्ना हो गए थे. लेकिन समीर 24 घंटों में अपनी बीवी की कितने घंटे चौकसी कर सकता था.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

श्यामली की करतूत : भाग 1

रात के कोई 2 बजे का वक्त रहा होगा. उस समय तक अधिकांश लोग गहरी नींद में खर्राटे भरते नजर आते हैं. लेकिन उस समय भी अगर किसी के घर से अचानक ही गोली चलने की आवाज आए तो नींद में खलल तो पड़ ही जाती है और उन लोगों की नींद उड़ ही जाती है, गोली की आवाज सुन कर अच्छेअच्छों के हौसले पस्त हो जाते हैं. उस समय जिस घर में गोली चली थी, वह समीर बिस्वास का घर था.

जिला ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर ट्रांजिट कैंप मुखर्जी नगर में 25 वर्षीय समीर बिस्वास अपनी पत्नी श्यामली और अपने 3 वर्षीय बेटे देव के साथ रहता था. जबकि उस के पिता निताई बिस्वास ट्रांजिट कैंप के नजदीक ही अरविंद नगर में अपनी बीवी अनीता बिस्वास और 2 बेटों सुकीर्ति और विष्णु के साथ रहते थे.

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उस समय समीर बिस्वास अपने मकान के एक कमरे में अकेला ही सोया था. उस की बीवी अपने बेटे देव को साथ ले कर अपनी सहेली के साथ ही अपने बैडरूम में सोई थी. घर में अचानक गोली चली तो सब से पहले श्यामली ही चीखी थी. उस की चीख सुन कर लोगों को लगा कि समीर के घर में बदमाश घुस आए हैं और बदमाशों ने किसी को गोली मार दी.

घर में कोहराम मचा तो समीर बिस्वास की छत पर सो रहे उस के 2 दोस्त सूरज और छोटू भी छत से नीचे जाने वाली सीढि़यों की ओर दौड़े. लेकिन उन सीढि़यों पर नीचे से कुंडी लगी होने के कारण उन के सामने मजबूरी आ खड़ी हुई. फिर दोनों पड़ोसी के घर में प्रवेश कर उस की दीवार फांद कर समीर के कमरे  में जा पहुंचे.

सूरज और छोटू ने देखा कि समीर अपने बैड पर खून से लथपथ पड़ा हुआ था. जबकि उस की पत्नी श्यामली उसी के पास खड़ी बुरी तरह से दहाड़ मार कर रो रही थी. समीर के घर में रात में चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर मोहल्ले वाले भी इकट्ठे हो गए थे. लेकिन कोई भी यह नहीं समझ पा रहा था कि बदमाशों ने समीर की हत्या क्यों कर दी.

अभी लोग इस मामले को पूरी तरह से समझ भी नहीं पाए थे कि उसी समय श्यामली रोतीबिलखती दूसरे कमरे में बंद हो गई. उस को कमरे में इस तरह से बंद होते देख सभी लोग हैरत में पड़ गए. लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि  उसे अचानक क्या हो गया.

तभी किसी ने खिड़की से झांक कर देखा तो श्यामली अपनी चुनरी को पंखे से बांध रही थी. जिस से लोगों को समझने में देर नहीं लगी कि वह पंखे से लटक कर आत्महत्या करने की कोशिश कर रही है. श्यामली की हरकतों को देख कर मौके पर मौजूद लोगों ने जैसेतैसे कर दरवाजा तोड़ कर उसे बाहर निकाला. उस के बाद उसे समझाने की कोशिश की.

मृतक समीर बिस्वास के चाचा अर्जुन बिस्वास कांग्रेस पार्टी के नेता थे. अपने भतीजे की हत्या होने की बात सुनते ही अर्जुन बिस्वास भी तुरंत समीर के घर पर पहुंचे और थाना ट्रांजिट कैंप में इस सब की जानकारी दी. हत्या की सूचना पाते ही थानाप्रभारी विद्यादत्त जोशी कुछ ही देर में घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस को यह सूचना सुबह लगभग 4 बजे मिली थी.

थानाप्रभारी ने यह जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को भी दे दी थी सूचना पाते ही एसएसपी बरिंदरजीत सिंह, एसपी (सिटी) देवेंद्र पिंचा, एसपी (क्राइम) प्रमोद कुमार और सीओ अमित कुमार भी घटना स्थल पर पहुंच गए.

पुलिस ने काररवाई करते हुए समीर के कमरे की बारीकी से जांचपड़ताल की. समीर के माथे पर गोली लगी थी. समीर के शव को देख कर साफ जाहिर हो रहा था कि हत्यारों ने समीर के गहरी नींद में सोने के दौरान ही गोली मारी थी. खून उस के चेहरे से होते हुए सारे बिस्तर पर फैल चुका था.

पुलिस ने उस कमरे की पड़ताल की जिस में श्यामली ने पंखे में चुनरी बांध कर खुदकुशी करने का ढोंग ही किया था. पुलिस ने उस के परिवार वालों से समीर और उस की बीवी के बारे में जानकारी जुटाई तो इस केस ने अलग ही मौड़ ले लिया.

समीर के परिवार वालों ने पुलिस को जानकारी देते हुऐ बताया कि समीर और श्यामली ने अब से लगभग 7 वर्ष पूर्व प्रेमविवाह किया था.

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शादी के बाद इन दोनों के बीच कुछ समय तक तो सब कुछ सही रहा, लेकिन बाद में उन दोनों के बीच खटपट रहने लगी थी. उसी के चलते समीर की बीवी ने उसे परिवार से भी अलगथलग कर दिया था. उस के बाद वह न तो उसे किसी परिवार वाले से मिलनेजुलने देती थी और न ही किसी को अपने घर आने देती थी.

परिवार वालों ने बताया कि श्यामली का चरित्र ठीक नहीं था. समीर की गैरमौजूदगी में उस के घर पर कुछ संदिग्ध लोगों का आनाजाना था. उस के किसी अन्य युवक के साथ अवैध संबंध थे. जिस का समीर विरोध करता था. जिस के कारण ही समीर की हत्या हुई.

यह सब जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. समीर की लाश को पोस्टमार्टम भेजने के बाद ही पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छानबीन शुरू की.

उसी दौरान पुलिस ने श्यामली के साथ रात गुजारने वाली उस की सहेली प्रियंका से भी पूछताछ की. लेकिन प्रियंका ने बताया कि वह स्वयं ही अपनी सहेली के घर मिलने के लिए आई थी. जिस के बाद वह रात का खाना खा कर सो गई थी. उस के सोने के बाद समीर के साथ क्या घटना घटी उसे कुछ नहीं मालूम.

इस मामले की बाबत पुलिस ने श्यामली से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस रात समीर और उस के दोस्तों सूरज और छोटू ने खाना खाया और उस के बाद सूरज और छोटू मकान की छत पर जा कर सो गए. वह अपने बेटे देव को अपने साथ ले कर सहेली प्रियंका के साथ अलग कमरे में सो गई थी. जबकि समीर अपने कमरे में अकेला ही सोया था.

रात के समय उस ने अपने घर में  गोली चलने की आवाज सुनी तो वह बुरी तरह से घबरा गई. उस के बाद वह अपनी सहेली प्रियंका के साथ कमरे से बाहर निकली तो उस ने घर से बाहर कुछ लोगों को भागते हुए देखा था.

समीर को मरा देख कर वह खुद पर भी कंट्रोल नहीं कर पाई थी, जिस के बाद उस ने भी आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन वहां पर मौजूद लोगों ने उसे बचा लिया.

उसी दौरान पुलिस ने श्यामली का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया. उस की काल डिटेल्स देखी तो आखिरी बार रात के 2 बजे के समय एक नंबर पर उस की बातचीत हुई थी, वह नंबर किसी विश्वजीत राय के नाम से फीड था.

पुलिस ने श्यामली से विश्वजीत राय से रात में बात करने का कारण पूछा तो वह कोई संतोषजनक जबाव नहीं दे पाई. विश्वजीत का नाम सुनते ही उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. उस के बाद पुलिस श्यामली को पूछताछ के लिए थाने ले आई. थाने में पहुंचते ही श्यामली डर गई और सब कुछ बताने को राजी हो गई.

श्यामली ने बताया कि उस के विश्वजीत से नाजायज संबंध थे. उन्हीं संबंधों के चलते उस ने प्रेमी के सहयोग से पति की हत्या करा दी. हत्या के इस केस की जो सच्चाई उभर कर सामने आई वह दोस्ती, प्यार, शादी और उस के बाद बेवफाई से जुड़ी एक हैरतअंगेज कहानी थी –

अब से कई साल पहले श्यामली के पिता प्रवास बिस्वास का परिवार बंगाल से आ कर रुद्रपुर और गदरपुर के बीच बसे दिनेशपुर में आ कर रहने लगा था. दिनेशपुर आने के बाद उस की बीवी अपर्णा बिस्वास 2 बच्चों, बेटी श्यामली और बेटे संजीत की मां बन गई.

दिनेशपुर में बाहुल्य आबादी बंगालियों की ही है. बंगाल से आने के बाद इन लोगों ने यहां पर स्थानीय लोगों के यहां पर मेहनतमजदूरी करनी शुरू की. इन लोगों में ही कुछ लोग इतने समर्थ थे कि उन्होंने यहां पर कुछ जमीनें खरीदीं और कुछ ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर खेतीबाड़ी का काम शुरू किया. जिस के साथ ही इन लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुधरती गई.

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इन के आने से पहले यहां के किसान अपनी जमीन से 2 ही फसलें लेते थे. रवि और खरीफ की. इन लोगों ने यहां पर तीसरी फसल को जन्म दिया. वह थी बेमौसमी धान की फसल. गेहूं की फसल कटते ही धान को लगाया जाता था. जिस के कारण किसानों को एक और फसल से आमदनी बढ़ गई थी. उसी धान की पौध लगाई के दौरान समीर बिस्वास की मुलाकत श्यामली से हुई थी.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

सरकार भी कोरोना की गिरफ्त में

मध्यप्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने धार्मिक आडंबरों के बहाने कभी नर्मदा यात्रा, तो कभी आदि शंकराचार्य की पादुका पूजन करके भगवा ब्रिगेड की कमान संभालते रहे हैं. यही बजह है कि अब उनके कोविड 19 से प्रभावित होने पर उनके भक्तों द्वारा भी हवन ,पूजन,पाठ का सिलसिला शुरू कर दिया गया है.

देश की भोली भाली जनता को भावनाओं में बहलाकर कभी हिन्दू मुस्लिम रंग देकर, तो कभी कश्मीर में धारा 370 और अयोध्या में राम मंदिर बनाने की दुहाई देने वाले भगवा ब्रिगेड के लोग असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाना बखूबी जानते हैं.

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जब कोरोना ने भारत में कदम रखा ,तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार को गिराने के चक्कर में इसकी परवाह किसी ने नहीं की.22 मार्च को कोरोना वायरस की चैन तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ने जनता कर्फू का ऐलान कर जनता को यह दकियानूसी संदेश दिया  कि अपने घरों की बालकनी में खड़े होकर ताली और थाली पीटने से कोरोना भाग जायेगा. इतने ढोंग करने के बाद भी जब कोरोना का संक्रमण नहीं थमा ,तो  घरो की लाईट बुझा कर दिया जलाने का टोटका भी कर डाला.  भगवा ब्रिगेड ने तर्क दिया कि दिये की लौ से कोविड19 समाप्त हो जाएगा. मुख्यमंत्री के कोरोना से प्रभावित होने के बाद भोपाल की सांसद साध्वी  प्रज्ञा ठाकुर  हनुमान चालीसा के पाठ से वायरस भगाने की सलाह भक्तो को देती नजर आईं. कोरोना वायरस   यदि किसी धर्म,जाति, संप्रदाय में आस्था रखने वाला होता,तो इन टोने टोटकों से कभी का भाग गया होता.

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बचने के लिए दी गई डब्लूएचओ की गाइडलाइंस और डाक्टरी सलाह मानने की बजाय सरकार में बैठे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि रोज नये नये जुमले उछालते रहे हैं , जबकि यह एक यैसी संक्रामक बीमारी है जो नेताओं के जुमलों से दूर होने वाली नहीं है.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी रोज टीवी चैनलों पर किसी पंडे पुजारी की तरह कोरोना से सावधान रहने के प्रवचन तो देते रहे , लेकिन खुद उन पर अमल करना भूल गए.इसी बजह से वे 25 जुलाई को आई रिपोर्ट में  कोविड 19 पाज़ीटिव पाये गए हैं. हालांकि यह अप्रत्याशित खबर  नहीं है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जिस तरह कोरोना के बचाव की गाइडलाइंस को दरकिनार कर रोज ‌क‌ई विधायकों और मंत्रियों से मिलते रहे हैं.

मंत्री अरविंद भदौरिया , भाजपा अध्यक्ष बीडी शर्मा के साथ मुख्यमंत्री 21 जुलाई को प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन को श्रृद्धांजलि देने लखनऊ गये थे. 21 से 24 जुलाई तक मुख्यमंत्री प्रदेश के 33 मंत्रियों से वन टू वन चर्चा में शामिल रहे .जिस तरह से मुख्यमंत्री और उनके करीबियों द्वारा गाइड लाइन का खुला उल्लंघन किया जा रहा था,उससे यह पहले ही तय हो गया था कि कोरोना के संक्रमण को सीएम हाउस तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी.  अब हालात ये हैं कि दर्जनों विधायक और मंत्री भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं.

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25 जुलाई को  शिवराज सिंह चौहान भोपाल के प्राइवेट हास्पिटल चिरायु में एडमिट हुए तो सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल भी हुए. वजह साफ थी कि प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का गुणगान तो करते रहे,मगर खुद के कोरोना पाज़ीटिव होने पर कोई सरकारी अस्पताल उन्हें इलाज के लिए उपयुक्त नहीं लगा.

जमीनी हकीकत यही है कि चार महिने से भी अधिक समय बीतने के बाद पूरे प्रदेश में कोरोना की जंग सुबिधाओं की बजाय भाषणों से लड़ी जा रही है. आज भी कोविड टेस्ट के लिए पर्याप्त संख्या में किट या मशीन और‌ वेंटिलेटर की कमी से अस्पताल जूझ रहे हैं.

डब्लूएचओ की नई एडवायजरी में कोरोना के लक्षण पाये गए व्यक्ति को कम से कम 10 दिन की गहन चिकित्सकीय देखभाल में रखा जाता है. इस पीरियड में कोविड पाज़ीटिव को किसी से मिलने और छूने की इजाजत नहीं होती है. यैसे में सियासी हलकों में यह चर्चा भी  जोरों पर थी कि आगामी दिनों तक मध्यप्रदेश के शासन प्रशासन की जिम्मेदारी  कौन संभालेगा?वह भी जब प्रदेश में पूर्णकालिक राज्यपाल भी नहीं है.मुख्यमंत्री को कई अहम् दस्तावेजी फैसलों पर दस्तखत करने होते हैं.कई गोपनीय प्रतिवेदनों पर  टीप लिखनी होती है,साथ ही कानून व्यवस्था के मामले पर हस्तक्षेप करना होता है.

कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनने के सपने टूटे

कोरोना बीमारी से संक्रमित हुए शिवराज सिंह चौहान देश के पहले मुख्यमंत्री हैं,लिहाजा प्रदेश में भाजपा के कुछ नेता कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनने के सपने भी देखने लगे थे.  सत्ता के खेल के चतुर खिलाड़ी और अपने आपको जनता का मामा कहने वाले शिवराज सिंह चौहान ने पिछले 13 वर्षों के दौरान भी देश से बाहर रहने पर भी किसी भी अपने सहयोगियों को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाने की मुसीबत मोल नही ली थी. कांग्रेस के हाथों से सत्ता छीनने वाले शिवराज को इस वार मुख्यमंत्री बनने से लेकर , मंत्री मंडल के गठन और विभागों के बंटवारे में  भारी अंतर्विरोध और सिंधिया खेमे का दबाव झेलना पड़ा  है.

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प्रदेश के एक कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा, नरेंद्र सिंह तोमर ने भी मुख्यमंत्री बनने लाबिंग की थी. यही कारण है कि शिवराज अपने इसी डर की वजह से ही किसी को कार्यवाहक मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहते.वैसे भी उमा  भारती की गद्दी को बाबूलाल गौर  को सौंपने के बाद हुए राजनैतिक बदलाव के घटनाक्रम से शिवराज भी वाकिफ हैं,शायद इसी नियति को टालने वे चूकने के मूड में दिखाई नहीं दिखाई दे रहे. तभी तो चिरायु हास्पिटल से भी अपना कामकाज संभाल रहे हैं. उन्होंने  अस्पताल से ही आला अधिकारियों के साथ न‌ई शिक्षा नीति की समीक्षा भी  कर ली .मौजूदा दौर में मध्यप्रदेश में जिस तरह की राजनीतिक उठा-पटक और विधायकों की अदला-बदली हो रही है,यैसे में  सत्ता के लोभी नेताओं से घिरे शिवराज को कोविड 19 से बड़ा खतरा अपनों से ही लग रहा है.इसलिए कोरोना को भूलकर वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर गड़ाए अपने को फिटफाट साबित करने में लगे हुए हैं.

हैवानियत की हद पार : एक डाक्टर ने इनसानियत पर किया वार

याद है न बदन में सिरहन पैदा कर देने वाला निठारी कांड? साल था 2006 और जगह थी नोएडा का निठारी गांव. वहां की कोठी नंबर डी-5 दूसरी आम कोठियों की तरह ही थी. लेकिन जब इस कोठी के आसपास से नरकंकाल मिलने शुरू हुए, तो पूरा देश सकते में आ गया था. सीबीआई को जांच के दौरान इनसानी हड्डियों के हिस्से और 40 ऐसे पैकेट मिले थे, जिन में इनसानी अंगों को भर कर जमीन में गाड़ दिया था या पास के नाले में फेंक दिया था.

इस के बाद कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उस के नौकर सुरेंद्र कोली को पुलिस ने धर दबोचा. इस तरह से निठारी के कांड का काला सच सब के सामने आ गया.

सुरेंद्र कोली के मुताबिक उस का मालिक (मोनिंदर सिंह पंढेर) कई वेश्याएं घर पर लाया करता था. उन्हें आतेजाते देखते हुए उस के मन में सैक्स और इनसानी शरीर को काटने की प्रबल इच्छा पैदा होने लगी.

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बाद में खुलासा हुआ कि सुरेंद्र कोली अपने शिकारों को पहले फंसाता था, फिर पीड़ित को बेहोश कर देता था. उस के बाद रेप की कोशिश करता था. आखिर में पीड़ित को मार कर उस के शरीर के टुकड़ेटुकड़े कर देता था, फिर उन्हें जमीन में गाड़ देता था या नाले में बहा देता था.

पहले तो सीबीआई ने मई, 2007 में मोनिंदर सिंह पंढेर को अपनी चार्जशीट में एक पीड़िता रिम्पा हलदर के अपहरण, बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपमुक्त कर दिया था, पर इस के 2 महीने बाद अदालत की फटकार के बाद सीबीआई ने मोनिंदर सिंह पंढेर को इस मामले में सहआरोपी बनाया था.

तब इस मामले में इनसानी अंगों की तस्करी का मुद्दा भी उछला था. अब फिर एक दिल दहला देने वाला कांड सामने आया है और इसे अंजाम देने वाला कोई कसाई नहीं, बल्कि एक डाक्टर है जिस पर दूसरों की जान बचाने की जिम्मेदारी होती है.

इस डाक्टर का नाम देवेंद्र शर्मा है, पर है पूरा सीरियल किलर. उस ने कबूल किया है कि साल 2002 से 2004 के बीच दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में अब तक वह 100 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है, जिन में से ज्यादातर को उस ने उत्तर प्रदेश की एक नहर में मौजूद मगरमच्छों का खाना बना दिया.

गुरुग्राम किडनी कांड में शामिल अलीगढ़ के डाक्टर देवेंद्र शर्मा को हाल ही में दिल्ली से पकड़ा गया गया था. इस से पहले वह किडनी केस में पिछले 16 साल से सजा काट रहा था और अब परोल पर बाहर था. मीआद पूरी होने के बाद उसे वापस जेल जाना था, लेकिन वह अंडरग्राउंड हो गया था. पर अब पकड़े जाने के बाद उस की काली करतूतों की परतें खुल रही हैं.

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ऐसे बना अपराधी

कोई डाक्टर अपराधी कैसे बन गया? यह सवाल अब हर किसी के मन में उठ रहा है. जानकारी हासिल हुई है कि एक निवेश में धोखे के बाद देवेंद्र शर्मा ने जुर्म का रास्ता चुना था, फिर वह डाक्टरी के साथसाथ किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट, फर्जी गैस एजेंसी भी चलाने लगा था. इतना ही नहीं वह चोरी की गाड़ियां भी बेचता था. अपनी फर्जी गैस एजेंसी के लिए जब उसे सिलेंडर चाहिए होते थे, तब वह गैस डिलीवरी वाले ट्रक लूट लेता था और उस के ड्राइवर को मार देता था.

यह भी खुलासा हुआ है कि दिल्ली से उत्तर प्रदेश जाने के लिए डाक्टर देवेंद्र शर्मा के गैंग के लोग जिस टैक्सी को बुक करते थे बाद में उसे ही लूट लेते थे.

हाल ही में पकड़े जाने के बाद डाक्टर देवेंद्र शर्मा ने बताया कि उस ने ज्यादातर लाशों को उत्तर प्रदेश के कासगंज इलाके की हजारा नहर में फेंक दिया था. इस नहर में बड़ी तादाद में मगरमच्छ रहते हैं.

डाक्टर देवेंद्र शर्मा को बुधवार, 29 जुलाई को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था. वह कोई एमबीबीएस डाक्टर नहीं था, बल्कि साल 1984 में उस ने बिहार के सिवान से बैचलर औफ आयुर्वेद मैडिसिन ऐंड सर्जरी की डिगरी पूरी कर के राजस्थान में क्लिनिक खोला था, फिर साल 1994 में उस ने गैस एजेंसी के लिए एक कंपनी में 11 लाख रुपए लगाए थे, लेकिन वह कंपनी अचानक गायब हो गई. इस नुकसान के बाद उस ने साल 1995 में एक फर्जी गैस एजेंसी खोल ली थी.

बनाया अपना गैंग

इस के बाद डाक्टर देवेंद्र शर्मा ने एक गैंग बनाया जो एलपीजी सिलेंडर ले कर जाते ट्रकों को लूट लेता था. इस के लिए वे लोग ड्राइवर को मार देते थे और ट्रक को भी कहीं ठिकाने लगा देते थे. इस दौरान उस ने अपने गैंग के साथ मिल कर तकरीबन 24 लोगों का खून किया था. फिर देवेंद्र शर्मा किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह में शामिल हो गया था और उस ने 5 लाख से 7 लाख रुपए प्रति ट्रांसप्लांट के हिसाब से 125 ट्रांसप्लांट करवाए थे. इतना ही नहीं ये लोग कैब ड्राइवरों को मार कर उन की कैब लूट लेते थे और ड्राइवर की लाश को नहर में फेंक देते थे. बाद में कैब को सैकंडहैंड कार बता कर बेच दिया जाता था.

इस के बाद साल 2004 में डाक्टर देवेंद्र शर्मा पकड़ा गया था और 16 साल जयपुर जेल में रहा था, फिर अच्छे बरताव के लिए उसे जनवरी, 2020 को 20 दिन की परोल मिली थी, लेकिन वह भाग कर अंडरग्राउंड हो गया था.

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कोरोना: उलझती भूपेश बघेल सरकार!

छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस धीरे धीरे बढ़ता चला जा रहा है. और जब स्थिति काबू में थी उसे छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने किस तरह अपनी अविवेक पूर्ण सोच के कारण बद से बदतर बना दिया है उसका देश भर में शायद इससे हटकर दूसरा कोई उदाहरण आपको नहीं मिलेगा. कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार कोरोना संक्रमण के मामले में फिसड्डी और बेहद गैर जिम्मेदार सरकार सिद्ध हुई है. जिसने अपने ही हाथों अपना ही मानो सब कुछ लुटाने, बर्बाद करने का निश्चय कर लिया हो.

प्रारंभ में 2 माह जब सारा देश कोरोना संक्रमण से त्राहि-त्राहि कर रहा था. छत्तीसगढ़ इससे आश्चर्यजनक ढंग से अछूता था. कोरबा और राजनांदगांव जिला को छोड़कर संपूर्ण छत्तीसगढ़ इससे पूरी तरह बचा हुआ था. मगर भूपेश बघेल की अकर्मण्यता और अविवेकपूर्ण फैसलों के कारण छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे अगस्त महीना आते आते बेहद खतरनाक स्थिति की मोड़ पर पहुंच चुका है.

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अब इस स्थिति में बघेल सरकार के हाथ पांव फूले हुए दिखाई देते हैं. उसे कुछ समझ नहीं आता कि वह क्या करें, अब बस एक ही काम बचा है, वह है लॉकडाउन.

छत्तीसगढ़ की स्थिति धीरे-धीरे हाथ से निकलती चली जा रही है. आज राजधानी रायपुर में सबसे बुरा हाल है. यहां के लोगों का जीना मुहाल हो चुका है. लोग घरों में कैद हैं. लोगों को न तो चिकित्सा की सुविधा मिल रही है ना दैनिक जीवन में काम आने वाले सामानों की आपूर्ति हो पा रही है.हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि सरकारी दफ्तर में ताले लगे हुए हैं और शासन-प्रशासन घर से चल रहा है. सरकार सिर्फ डंडा चला रही है मानो लॉकडाउन से सब कुछ ठीक हो जाएगा.

कोरोना विस्फोटक हालात

छत्तीसगढ़ प्रदेश में कोरोना का कहर लगातार जारी है. सोमवार को 178 नए मरीजों की पहचान की गई  वहीं इलाज के दरम्यान 3 लोगों ने दम तोड़ दिया. और हां सरकार यह भी बता रही है कि 265 मरीजों के स्वस्थ होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया है.

साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा बढ़कर 9800 हो गया है.जिनमें अब तक कुल 7256 मरीज स्वस्थ्य होने के उपरांत डिस्चार्ज किए गए तथा 2483 मरीज सक्रिय हैं.  प्रदेश में मौत का आंकड़ा बढ़कर अब 61 हो चुका है.

यह रपट लिखे जाने के दिन नए 178 कोरोना पॉजीटिव मरीजों की पहचान की गई . उनमें जिला रायपुर से 66, दुर्ग से 32, जांजगीर-चांपा से 27, जशपुर से 25, रायगढ़ से 15, कोरबा से 04, महासमुंद से 03, सूरजपुर व धमतरी से 02-02, राजनांदगांव व कांकेर से 01-01 शामिल हैं. यानी कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ के लगभग आधे जिलों की स्थिति दयनीय हो चुकी है जहां लॉकडाउन का डंडा चल रहा है वही संपूर्ण छत्तीसगढ़ में कोरोना का भूत लोगों को भयभीत कर रहा है. क्योंकि साफ दिखाई देता है भूपेश बघेल सरकार इस भयावह संक्रमणकारी आपदा से बचाओ करने में नाकाम है वहीं अपनी प्रशासनिक दक्षता के मामले में भी शुन्य सिद्ध हो रही है.

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राजभवन तक पहुंचा कोरोना

छत्तीसगढ़ में राज्यपाल हैं सुश्री अनुसुइया उईके. कोरोना वायरस का संक्रमण छत्तीसगढ़ के राजधानी स्थित राजभवन तक पहुंच चुका है. हालात यह है कि राजभवन को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है .अगर बात नेताओं की करें तो कांग्रेस के सदर मोहन मरकाम के परिजन इसके शिकार हो चुके हैं. डोंगरगढ़ के विधायक कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए. छत्तीसगढ़ के कई थाने कोरोना वायरस के कारण बंद हो गए. यहां तक की न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर के सेंट्रल जेल में कोरोनावायरस पहुंच गया और त्राहि-त्राहि मच गई. धीरे-धीरे हालात सरकार के हाथ से निकलते चले जा रहे हैं. बाबा साहब अंबेडकर हॉस्पिटल के वीडियो वायरल हो रहे हैं जहां के हालात पूरी जनता देख रही है. जिसमें कोरोना मरीज आरोप लगा रहे हैं कि ना कोई डॉक्टर आ रहा है और ना ही सफाई कर्मचारी. इन हालातों को देखकर कि कहा जा सकता है कि सचमुच भूपेश बघेल सरकार कोरोना संक्रमणकालीन बीमारी के सामने लाचार सिद्ध हो रही है. फिसड्डी सिद्ध हो चुकी है.

‘नागिन’ एक्ट्रेस रश्मि देसाई ने अपने इस मुंहबोले भाई के साथ मनाया रक्षा बंधन, देखें Photos

जैसा कि हम सब जानते हैं कि हाल ही में बीते दिन देश भर में रक्षा बंधन का त्योहार मनाया गया. हमारे देश में रक्षा बंधन के त्योहार का बहुत महत्व है और इसी के चलते हर बहन ने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधी और भाई ने पूरे दिल से अपनी बहन की रक्षा करने का वादा किया. जहां देश भर में हर कोई रक्षा बंधन का त्योहार मना रहा था तो वहीं हमारे सेलेब्रिटीज भी इस दिन को एंजौय करते दिखाई दिए.

 

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Celebrating togetherness ❣️ . . #Family #Love #HappyRakshabandhan #ItsAllMagical #RashamiDesai

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हम यहां बात कर रहे हैं टेलिवीजन इंडस्ट्री की पौपुलर एक्ट्रेस रश्मि देसाई (Rashmi Desai) की. जैसा कि हम सब जानते हैं कि रश्मि देसाई अपने फैंस की काफी फेवरेट हैं और उनके फैंस उन्हें काफी चाहते भी हैं. रक्षा बंधन के चलते रश्मि देसाई ने भी अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) पर कुछ फोटोज शेयर की जिसमें वे मृणाल जैन (Mrunal Jain) को राखी बांधती हुईं नजर आईं.

आपको यह बता दें कि मृणाल जैन (Mrunal Jain) रश्मि देसाई (Rashmi Desai) के मुंहबोले भाई हैं और इन दोनो नें साथ में सारियल ‘उत्तरन’ (Uttran) में काम किया था और तभी से ही इन दोनों के इस खूबसूरत से रिश्ते की शुरूआत हुई थी. रश्मि देसाई और मृणाल जैन ने एक साथ खूब मस्ती की और बेहतरीन पोज़ देते हुए जमकर फोटोज क्लिक करवाईं.

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घर बैठे बैठे ही feeling #Festive 😉💚 . . Outfit – @style__inn Styled & Designed : @richa_r29 🤗🥰

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हाल ही में रश्मि देसाई (Rashmi Desai) को बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) में देखा गया था जहां रश्मि देसाई की पर्सनल लाइफ पर काफी सवाल खड़ हुए थे लेकिन जिस अंदाज में रश्मि देसाई ने सभी बातों का सामना किया था वे वाकई तारीफ के काबिल था और तभी से रश्मि देसाई के फैंस और भी ज्यादा उन्हें पसंद करने लगे थे.

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प्रमोद प्रेमी यादव के इस नए भोजपुरी गाने ने 3 दिन में किए 5 मिलियन व्यूज पार, देखें Video

सिनेमाघरों के बंद होने के चलते फिल्मों की रिलीजिंग पर भले ही रोक लगी हो लेकिन भोजपुरी इंडस्ट्री अपनें दर्शकों को यूट्यूब के जरिये न केवल उनका मनोरंजन करनें में कामयाब है बल्कि आये दिन नए –नए भोजपुरी भोजपुरी विडियो सौंग्स (Bhojpuri Video Song) के जरिये भोजपुरी दर्शकों के दम पर जबरदस्त कमाई भी कर रही है.

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इसी कड़ी में भोजपुरी सिनेमा के स्टार एक्टर और गायक प्रमोद प्रेमी यादव का हाल ही में वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी म्यूजिक कंपनी (Worldwide Records Bhojpuri) के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल से रिलीज हुआ नया भोजपुरी विडियो सौंग “लोइया काटत गाल हिले” 3 दिन में 5 मिलियन के व्यूज के आंकड़े को पार कर गया है.

भोजपुरी एल्बम (Bhojpuri Song) लोइया काटत गाल हिले (Loiya Katat Gaal Hile) को गाया है भोजपुरी फिल्मों के स्टार एक्टर और गायक प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav) नें. जबकि इसके गीत कृष्णा बेदर्दी (Krishna Bedardi) नें लिखे हैं और संगीत शशिरंजन (Shashi Ranjan) का है. परिकल्पना सोनू जी (Sonu Ji) और अशोक प्रेमी (Ashok Premi) का है. इस एल्बम के वीडियो डायरेक्टर बिकी माया (Biki Maya) है. इस वीडियो सौंग में प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav) के साथ अभिनेत्री प्रियंका राय (Priyanka Rai) नें परफॉर्मेंस किया है.

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इस भोजपुरी गाने को भोजपुरी बेल्ट में खूब पसंद किया जा रहा है और यह गाना तेजी से वायरल भी हो रहा है. यही कारण है की यह गाना 3 दिन में 5 मिलियन के व्यूज को पार कर गया. गाने में प्रियंका राय और प्रमोद प्रेमी की रोमांस करती हुई जोड़ी बहुत खुबसूरत लग रही है.

इस वीडियो सौंग के अलावा भी प्रमोद प्रेमी का हाल ही में एक भोजपुरी विडियो सौंग केकरा खातिर ये धनी (Kekra Khatir Ae Dhani) को वेव म्यूजिक भोजपुरी (Wave Music Bhojpuri) के ऑफिशियल यूट्यूब  चैनल से रिलीज किया गया था, जिसे दर्शकों नें खूब सराहा था. इस भोजपुरी विडियो सौंग को प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav) और संध्या संग्राम (Sandhya Sargam) ने मिल कर गाया है. जिसका लिरिक्स आर आर पंकज (R.R Pankaj) का लिखा है और इसके म्यूजिक डायरेक्टर धनंजय मिश्र (Dhananjay Mishra) हैं.

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रिलीजिंग के 2 हफ्ते बाद भी यह एल्बम भी खूब वायरल हो रहा है. वैसे प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav) के गाये गीतों को फैंस द्वारा खूब पंसद किया जाता है और उनके गानों के रिलीज होने के कुछ घंटों में ही उनको जबरदस्त व्यूज मिलते हैं. वहीं एक्टिंग को भी खूब पसंद किया जाता रहा है. इसलिए अब तक रिलीज हुई उनकी सभी फिल्में सफल साबित हुई हैं.

सितम्बर की इस तारीख से शुरू होगा Bigg Boss का अगला सीजन, जाने क्या होने वाला है खास

टेलिवीजन इंडस्ट्री का सबसे ज्यादा कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस (Bigg Boss) का हर सीजन इतना सुपरहिट रहता है कि फैंस को हर सीजन के अंत से ही अगले सीजन का इंतजार होने लगता है. जैसा कि हम सबको पता है कि पूरे विश्व भर में कोरोना वायरस (Corona Virus) जैसी महामारी फैली हुई है और इस महामारी की वजह से फैंस इस बात के काफी परेशान थे की क्या उन्हें इस बार बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) देखने को मिलने वाला है या नहीं.

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रिएलिटी शो बिग बॉस (Bigg Boss) के फैंस के लिए एक बेहद ही अच्छी खुशखबरी है. खबरों की माने तो बिग बॉस का सीजन 14 (Bigg Boss 14) इस साल 20 सितम्बर से ऑन एयर हो जाएगा. काफी समय से शो के मेकर्स आने वाले सीजन को लेकर पूरी मेहनत कर रहे हैं. हालांकि अभी तक मेकर्स द्वारा कोई बयान या जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन सूत्रों की माने तो अगले सीजन का प्रीमियर इस सितम्बर तक ऑन एयर कर दिया जाएगा.

हर बार की तरह इस बार भी इस सीजन को होस्ट करने के लिए आ रहे हैं बॉलीवुड इंडस्ट्री के सुपरस्टार सलमान खान (Salman Khan) जिनके बिना वाकई में ये शो बिल्कुल अधूरा है. खबरों की माने तो बिग बॉस सीजन 14 में कोरोना वायरस गाइडलाइंस (Corona Virus Guidelines) का पूरा ध्यान रखा जाएगा और हर कंटेस्टेंट का घर में एंट्री लेने से पहले कोरोना टेस्ट किया जाएगा.

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जैसा कि हम सब जानते हैं कि इस शो का पिछला सीजन खूब चर्चाओं में रहा था और तो और बिग बॉस के इतिहास का सबसे सफल और सबसे ज्यादा टीआरपी गेन करने वाला सीजन बना था. इसीलिए बिग बॉस के फैंस को आने वाले सीजन से और भी ज्यादा उम्मीदें हैं और बेसब्री से सब बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) का इंतजार कर रहे हैं.

 

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Best memorie in BB ♥️

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दीदी : भाग 3- किस के लिए दीदी हार गईं

दीदी अपना वैधव्य बोझ लिए फिर घर लौट आईं. वैधव्य दुख हृदय में होने पर भी अब की बार दीदी के चेहरे पर एक गहन आत्मविश्वास का भाव था, क्योंकि अब वे घर का बोझ बन कर नहीं, घर के बोझ को हलका करने की शक्ति हाथों में लिए आई थीं.

जीजाजी के पैसों से दीदी ने अपना क्लिनिक बनवाना आरंभ कर दिया. साथ ही, एक दुकान किराए पर ले कर महिलाओं व बच्चों का इलाज भी करने लगीं. गृहस्थी की जो गाड़ी हिचकोले खाती चल रही थी, वह फिर से सुचारु रूप से चलने लगी. पापा की जगह दीदी ने संभाल ली. हर कार्य दीदी की सलाह से होने लगा.

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दीदी के प्रति मां के बरताव में धीरेधीरे अंतर आने लगा. वे उन्हें अपने बड़े लड़के की उपाधि देने लगीं. सभी खुश थे, परंतु मझली दीदी अपना स्थान छिन जाने के कारण रुष्ट सी रहतीं, यद्यपि रागिनी दीदी ने अपने अधिकार का दुरुपयोग कभी नहीं किया. हम सब की खुशी को ही उन्होंने अपनी खुशी समझा था. दीपा दीदी के ढेर सारे पुरस्कारों को देख कर उन्होंने खुशी से कहा था, ‘‘अरे, दीपा, तूने तो कमाल कर दिया. इतने पुरस्कार जीत लिए. तू तो वास्तव में ही छिपी रुस्तम निकली.’’

‘‘सच पूछो तो दीदी, इस का श्रेय अमित को है. जानती हो वह आजकल अच्छेअच्छे ड्रामों का निर्देशक है. पुणे से कोर्स कर के आया है. उसी के सही निर्देशन में मैं ने ये ढेर सारे पुरस्कार …’’

बीच में ही दीदी ने दीपा दीदी को अपने अंक में भर लिया था, ‘‘मैं तो पहले ही जानती थी कि अमित के लिए उस की कला केवल शौक ही नहीं, नशा है. कितनी प्रसन्नता की बात है कि वही अमित तुझे साथ ले कर चला है.’’

अमित तब अकसर घर आने लगा था. जब भी किसी ड्रामे या प्रोग्राम की तैयारी करनी होती वह दीपा दीदी को लेने आ पहुंचता और फिर छोड़ जाता. सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी में रात को कभी एक बजा होता तो कभी इस से भी अधिक देर हो जाती.

महल्लेभर में दीपा दीदी और अमित के बारे में बातें होने लगी थीं. एक दिन मां ने ही रागिनी दीदी से कहा, ‘‘बहुत दिनों से सुनती आ रही हूं, रागिनी ये सब बातें. लोग ठीक ही तो कहते हैं, जवान लड़की है, इतनी रात गए तक वह इसे छोड़ने आता है. सोचती हूं, अब दीपा के हाथ भी पीले कर देने चाहिए.’’

दीदी ने लापरवाही से एक हंसी के साथ कहा था, ‘‘मां, लोग जिस ढंग से सोचते हैं न, एक कलाकार उस ढंग से नहीं सोच सकता, क्योंकि उसे तो केवल अपनी कला की ही धुन होती है. अमित को मैं अच्छी तरह जानती हूं, रात को दीपा यदि उस के संरक्षण में घर लौटती है तो ठीक ही करती है.’’

‘‘तू तो अपने बाप से भी दो अंगुल बढ़ कर है. उन्होंने क्या कभी सुनी थी मेरी, जो तू सुनेगी?’’ मां ने खीझ कर कहा था.

‘‘पापा ने भी तो कभी गलत नहीं सोचा था. जो कुछ भी वे सोचते थे, कितना सही होता था.’’ दीदी के उत्तर से मां निरुत्तर हो गई थीं.

एक दिन पापा की ही तरह उन्होंने मुझ से और दीपा से डांस प्रोग्राम करने का अनुरोध किया. वे मेरी छूटी हुई कला को मुझ से फिर जोड़ना चाहती थीं. दूसरे अमित व दीपा के डांस के समय पारस्परिक हावभाव कैसे रहते हैं, इस का अंदाजा भी करना चाहती थीं.

दीपा दीदी ने अमित से दीदी की इच्छा बताई तो वह पूर्ण उत्साह से तैयारी में जुट गया. एक छोटे से ड्रामे की तैयारी भी साथ ही होने लगी. महल्लेभर में खुशी की लहर दौड़ गई.

हीरोइन थी दीपा दीदी. उन के मेकअप के लिए अमित के वही सुझाव. दीपा दीदी के मुख पर विजयभरी मुसकान दौड़ जाती. उधर मेरी आंखों के आगे रागिनी दीदी का लाज से सकुचाया वही चेहरा घूम जाता, जब वे स्वयं दीपा दीदी के स्थान पर होती थीं. मैं कई बार सोच कर रह जाती, ‘रागिनी दीदी चाहें तो अब भी अमित को पा सकती हैं.’

परंतु दीदी को अपने से ज्यादा चिंता हम सब की थी, इसलिए उन्होंने उस ओर कभी सोचा ही नहीं. कभी सोचा भी होगा तो दीपा की खुशी उन्हें अपनी खुशी से भी अधिक प्यारी लगी होगी. अपने को भुला कर वे सादी सी सफेद साड़ी में, हाथ में स्टेथोस्कोप लिए घर से क्लिनिक और क्लिनिक से घर भागती रहतीं. केवल कुछ क्षणों का विश्राम. रात को भी पूरी नींद नहीं सोतीं, कभी कोई डिलिवरी केस अटैंड कर रही हैं तो कभी कोई सीरियस केस.

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हमारा सब का जीवन पटरी पर लौट आया था. वही सब पुराने ठाटबाट. घर में नौकरचाकरों की व्यवस्था, मां के लिए अच्छी से अच्छी खुराक व दवाई का प्रबंध, मेरी व अमर की पढ़ाई फिर से सुचारु रूप से चालू हो गई थी. घर में ट्यूशन का प्रबंध हो गया. दीपा दीदी की प्रतिदिन की नईनई पोशाकों व शृंगार प्रसाधनों की मांग की पूर्ति हो जाती, परंतु रागिनी दीदी?

उन्हें एक दिन अमित के साथ कहीं बाहर जाते देखा था. मरीजों से जबरदस्ती छुट्टी पा कर वे अमित के साथ उस की गाड़ी में गई थीं और कुछ ही घंटों बाद लौट भी आई थीं. तब दीपा दीदी को बहुत बुरा लगा था, ‘‘मैं तो कार्यवश उस के साथ जाती हूं. इन्हें भला दुनिया क्या कहेगी कि विधवा हो कर एक कुंआरे लड़के के साथ…’’ उस दिन मां का गुस्से से कांपता हाथ दीपा दीदी के गाल पर चटाख से पड़ा था, ‘‘ऐसी बातें कहती है बेशर्म उस के लिए? तू अभी भी समझ नहीं पाई है उसे. मैं जानती हूं वह क्यों गई है.’’

सप्ताहभर बाद ही जब रागिनी दीदी ने घर में यह घोषणा की कि वे दीपा का विवाह अमित से करेंगी तो मझली दीदी का चेहरा आत्मग्लानि से स्याह पड़ गया था.

दीदी ने बड़े चाव और उत्साह से दीपा दीदी के साथ जा कर एकएक चीज उस की पसंद की खरीदी. अम्मा व हम सब देखते रहते. दीदी कभी बाजार जा रही हैं तो कभी क्लिनिक, कभी इधर भाग रही हैं तो कभी उधर. उन के थके चेहरे को देख कर अम्मा बोली थीं, ‘‘ऐसे तो तू चारपाई पकड़ लेगी. इतना क्यों थकती है? दीपा तो अपना सामान स्वयं खरीद कर ला सकती है.’’

‘‘उस के लिए यह दिन फिर कभी नहीं आने वाला है, मां. वह लाएगी तो ऐसे ही लोभ कर के सस्ता सामान उठा लाएगी, मैं जानती हूं इस कंजूस को.’’ दीपा दीदी के सब से अधिक फुजूलखर्च होते हुए भी दीदी ने ठीक पिताजी वाले अंदाज से कंजूस बना दिया था.

मेहमानों से घर भर गया. चारों ओर चहलपहल थी. दीदी ने सब इंतजाम कर दिए थे. सभी रिश्तेदार दीदी की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे, ‘ऐसी बेटी के सामने तो अच्छेअच्छे लड़के भी नहीं ठहर पाएंगे.’

‘कौन लड़का करता है आजकल मां व बहनभाइयों की इतनी परवाह?’ चारों ओर यही चर्चा.

विवाह संपूर्ण रीतिरिवाजों के साथ संपन्न हो गया. विदाई का समय हो गया है. दीपा दीदी कार में अमित के पास बैठीं तो उन्होंने एक विजयभरी मुसकान लिए दीदी की आंखों में झांका. उस मुसकान से दीदी का चेहरा एक अद्भुत प्रसन्नता से खिल उठा, जिसे दीपा दीदी आजीवन समझ न पाएंगी. वह प्रसन्नता एक ऐसे खिलाड़ी की प्रसन्नता थी जो अपने साथी की जीत को खुशी प्रदान करने के लिए स्वयं अपनी हार स्वीकार कर लेता है, परंतु अपने साथी को यह विदित भी नहीं होने देता कि वह जानबूझ कर हारा है.

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