रिएलिटी शो बिग बॉस (Bigg Boss) के फैंस के लिए एक बेहद ही अच्छी खुशखबरी है. खबरों की माने तो बिग बॉस का सीजन 14 (Bigg Boss 14) इस साल 20 सितम्बर से ऑन एयर हो जाएगा. काफी समय से शो के मेकर्स आने वाले सीजन को लेकर पूरी मेहनत कर रहे हैं. हाल ही में कलर्स टीवी (Colors TV) के औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर शो के मेकर्स ने बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) का प्रोमो रिलीज किया जिससे फैंस का उत्साह सांतवे आस्मान पर पहुंच गया.
हर बार की तरह इस बार भी बॉलीवुड के सुपरस्टार और सबके भाईजान सलमान खान (Salman Khan) ही इस सीजन को होस्ट करने वाले हैं. बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के प्रोमो में सलमान खान (Salman Khan) ये कहते दिखाई दे रहे हैं कि, “मनोरंजन पर 2020 ने उठाया प्रशन, देंगे उत्तर मनाते हुए जश्न. अब सीन पलटेगा क्योंकि बिग बॉस देंगे 2020 को जवाब.” ऐसे में दर्शकों का शो को लेकर उत्साह और भी ज्यादा बढ़ गया है.
जैसा कि हम सब जानते हैं कि बिग बॉस (Bigg Boss) के इतिहास में सबसे सफल और सबसे ज्यादा टीआरपा बटोरने वाला सीजन 13 रहा है तो ऐसे में बिग बॉस के फैंस ये जानने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि कौन कौनसे कंटेस्टेंट्स इस बार एंट्री लेने वाले हैं और इसी के चलते कई नाम सामने आ रहे हैं. ऐसे में एक नाम जो सामने आ रहा है वो है सीरियल “कुमकुम भाग्य” (Kumkum Bhagya) की पौपुलर एक्ट्रेस नैना सिंह (Naina Singh) का.
जी हां खबरों की माने तो एक्ट्रेस नैना सिंह (Naina Singh) को बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के लिए अप्रोच किया गया है जिसके लिए एक्ट्रेस ने बिना देरी किए हामी भर दी है. आपको बता दें कि एक्ट्रेस नैना सिंह (Naina Singh) टेलिवीजन की हॉट एक्ट्रेसेस में से एक है और उन्होनें बिग बॉस के लिए अपने सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ (Kumkum Bhagya) को भी अलविदा कह दिया है.
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इसी के साथ ही एक और नाम जो सामने आ रहा है वो है इंडस्ट्री के पौपुलर सिंगर कुमार सानू (Kumar Sanu) के बेटे कुमार जानू (Kumar Janu) का. ऐसा कहा जा रहा है कि सिंगर कुमार सानू के बेटे कुमार जानू को भी बिग बॉस 14 में आने का ऑफर मिला है. अब देखने वाली बात ये होगी कि मेकर्स बिग बॉस के सीजन 14 को 13वें सीजन जितना सफल बना पाते हैं या नहीं.
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&TV के पौपुलर सीरियल भाभीजी घर पर हैं (BhabhiJi Ghar Par Hain) की अनीता विभूती नारायण मिश्रा (Anita Vibhuti Narayan Mishra) यानी की सौम्या टंडन (Saumya Tandon) अपने फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. सौम्या टंडन के लुक्स की बात करें तो वे दिखने में इतनी खूबसूरत हैं कि कोई भी उन्हें देख उन्हें अपना दिल दे बैठे. सौम्या ने कई हिट सीरीयल्स में काम किया है और यहां तक की एंटरटेंमेंट की रात (Entertainment Ki Raat), डांस इंडिया डांस (Dance India Dance) जैसे रिएलिटी शो को होस्ट भी किया है.
हाल ही में आ रही खबरों के अनुसार एक्ट्रेस सौम्या टंडन (Saumya Tandon) ने अपने सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ को अलवीदा कह दिया है और यह खबर उनके चाहने वालों के लिए बेहद ही दुखद है. जहां एक तरफ फैंस को सौन्या टंडन (Saumya Tandon) द्वारा निभाया जा रहा ‘अनीता भाभी’ का किरदार इतना पसंद था तो वहीं दूसरी तरफ अब उनकी जगह शो में किसी और को देखना फैंस के लिए काफी मुश्किल होगा.
बीते दिनों ही ऐसी खबरे आ रही थीं कि सौम्या टंडन (Saumya Tandon) की जगह सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ में बिग बॉस 13 (Bigg Boss 13) फेम शेफाली जरीवाला (Shefali Jariwala) दिखाई देने वाली हैं. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस सौम्या टंडन (Saumya Tandon) ने इस खबर का खुलासा करते हुए कहा है कि “शेफाली पहले ही इस चीज को क्लियर कर चुकी है कि उसे इस शो के लिए अप्रोच नहीं किया गया है. ऐसे में अब मैं इस पर क्या बोलूं.” सौम्या की इस बात से साफ पता चलता है कि शेफाली जरीवाला (Shefali Jariwala) इस शो का हिस्सा नहीं बनने जा रहीं.
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जब इस बारे में शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर बेनिफर कोहली (Bennifer Kohli) से बात की गई तो उन्होनें पहले तो सौम्या टंडन (Saumya Tandon) को उनके फ्यूचर के लिए शुभकामनाएं दी और बताया कि उनका सौम्या के साथ काफी अच्छा रिश्ता रहा है और तो और वे दोनों आपस में ही डिस्कशन कर चुके हैं कि ‘अनीता भाभी’ के रोल में कौन सी हीरोइन फिट बैठेगी.
खबरों की माने तो इस सीरियल के बाद एक्ट्रेस सौम्या टंडन (Saumya Tandon) को टेलिवीजन इंडस्ट्री के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) के लिए अप्रोच किया जा सकता है तो अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या एक्ट्रेस सौम्या टंडन (Saumya Tandon) बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के ऑफर को अपनाती हैं या नहीं.
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उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर के नजीराबाद थाना अंतर्गत एक मोहल्ला है जवाहर नगर. इसी मोहल्ले में स्थित गुरुद्वारे में गुरुवचन सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी गुरप्रीत कौर के अलावा 2 बेटे सुरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह तथा 2 बेटियां जगप्रीत व हरप्रीत कौर थीं.
गुरुवचन सिंह गुरुद्वारा में ग्रंथी व सेवादार थे. उन की अर्थिक स्थिति भले ही कमजोर थी पर मानसम्मान बहुत था.
भाईबहनों में हरप्रीत कौर सब से छोटी थी. हरप्रीत जितनी सुंदर थी, पढ़ने में वह उतनी ही तेज थी. उस ने ग्रैजुएशन तक पढ़ाई की थी. शारीरिक सौंदर्य बनाए रखने हेतु वह गतिका सीखती थी. गुरुद्वारे में वह सेवादार भी थी. जत्थे की महिलाओं का उस पर स्नेह था.
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हरप्रीत कौर का एक भाई सुरेंद्र सिंह दिल्ली के चांदनी चौक में अपने परिवार के साथ रहता था. हरप्रीत का अपने भैयाभाभी के घर आनाजाना बना रहता था. भाई के घर रहने के दौरान कभीकभी वह मत्था टेकने बंगला साहिब गुरुद्वारा भी चली जाती थी.
हरप्रीत कौर धार्मिक प्रवृत्ति की थी. धर्मकर्म में उस की विशेष रुचि थी. गुरुनानक जयंती व गुरु गोविंद सिंह के जन्म पर्व पर वह बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी.
एक बार हरप्रीत अपने मातापिता के साथ बंगला साहिब गुरुद्वारा अपने भाई महिंद्र सिंह के लिए लड़की देखने गई. यहीं उस की मुलाकात एक खूबसूरत सिख युवक युवराज सिंह से हुई. पहली ही नजर में दोनों एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए थे. इस के बाद दोनों की अकसर मुलाकातें होने लगीं. बाद में मुलाकातें प्यार में तब्दील हो गईं. दोनों एकदूसरे को टूट कर चाहने लगे. प्यार परवान चढ़ा तो दोनों एकदूजे का होने के लिए उतावले हो उठे.
युवराज सिंह मूलरूप से पंजाब प्रांत के अमृतसर जिले के गांव जुगावा का रहने वाला था. वह शादीशुदा तथा एक बच्चे का पिता था. उस का परिवार तो गांव में रहता था, जबकि वह स्वयं दिल्ली स्थित बंगला साहिब गुरुद्वारे में रहता था. उस के मांबाप भी गुरुद्वारे में सेवादार थे. वह महीनोंमहीनों गुरुद्वारे में रहते थे.
युवराज सिंह छलिया आशिक था. उस का असली नाम जुगराज सिंह था. उस ने जानबूझ कर हरप्रीत कौर से अपनी पहचान, नाम व शादी वाली बात छिपा रखी थी. युवराज सिंह के प्यार में हरप्रीत ऐसी अंधी हो गई थी कि वह उस से ब्याह रचाने के सपने संजोने लगी.
युवराज सिंह भी हरप्रीत से प्यार का ऐसा दिखावा करता था कि उस से बढ़ कर कोई आशिक हो ही नहीं सकता. उस ने हरप्रीत को कभी आभास ही नहीं होने दिया कि वह शादीशुदा और एक बच्चे का बाप है.
हरप्रीत जब तक भाई के घर रहती, युवराज के साथ प्यार की पींगें बढ़ाती, जब वापस कानपुर आती तब मोबाइल फोन द्वारा दोनों घंटों तक बतियाते. हरप्रीत ने अपने मातापिता को भी अपने और युवराज के प्यार के संबंध में जानकारी दे दी थी. भाई सुरेंद्र सिंह को भी दोनों का प्यार पनपने की जानकारी थी.
एक रोज जब सुरेंद्र सिंह का दिल्ली में एक्सीडेंट हो गया, तब हरप्रीत अपने मांबाप के साथ भाई को देखने दिल्ली आ गई. हरप्रीत के दिल्ली आने की जानकारी पा कर युवराज भी सुरेंद्र सिंह को देखने आया. यहां भाई के घर पर हरप्रीत ने युवराज सिंह की मुलाकात अपने मांबाप से कराई.
चूंकि युवराज सिंह देखने में स्मार्ट था, सो गुरुवचन सिंह ने उसे बेटी के लिए पसंद कर लिया. उन्होंने उसी समय युवराज सिंह को शगुन भी दे दिया.
किंतु इन्हीं दिनों युवराज सिंह के छलावे की बात खुल गई. हरप्रीत को पता चला कि युवराज सिंह शादीशुदा और एक बच्चे का बाप है. इस छलावे को ले कर हरप्रीत और युवराज सिंह के बीच जम कर झगड़ा हुआ. उस ने शिकवाशिकायत की, लेकिन युवराज सिंह ने उस से माफी मांग ली.
हरप्रीत कौर, युवराज सिंह के प्यार में अंधी हो चुकी थी. वह प्यार की सब से ऊंची सीढ़ी पर पहुंच चुकी थी, जहां से नीचे उतरना उस के लिए संभव नहीं था. अत: शादीशुदा वाली बात जानने के बावजूद भी वह उस से शादी करने को अडिग रही. यद्यपि उस ने युवराज के शादीशुदा होने वाली बात अपने मातापिता से छिपा ली.
हरप्रीत को शक था कि भेद खुल जाने से कहीं युवराज सिंह सगाई से मुकर न जाए. अत: वह युवराज सिंह पर जल्द सगाई करने का दबाव डालने लगी. उस ने अपने मांबाप पर भी सगाई की तारीख तय करने का दबाव बनाया.
दबाव के चलते युवराज सिंह सगाई करने को राजी हो गया. हरप्रीत के मांबाप ने सगाई की तारीख 13 दिसंबर, 2019 नियत कर दी. इस के बाद वह बेटी की सगाई की तैयारी में जुट गए. तय हुआ कि जवाहर नगर, कानपुर गुरुद्वारे में दोनों की सगाई होगी.
युवराज सिंह हरप्रीत कौर से प्यार तो करता था, लेकिन सगाई नहीं करना चाहता था. क्योंकि सगाई से उस की खुशहाल जिंदगी तबाह हो सकती थी.
उस ने हरप्रीत से 1-2 बार सगाई का विरोध भी किया था, लेकिन हरप्रीत ने उसे यह धमकी दे कर उस का मुंह बंद कर दिया कि वह सारी बात बंगला साहिब गुरुद्वारा तथा उस के परिवार में सार्वजनिक कर देगी. तब उस की नौकरी भी चली जाएगी और परिवार में कलह भी होगी. हरप्रीत की इसी धमकी के चलते वह उस से सगाई को राजी हो गया था.
युवराज ने हामी तो भर दी लेकिन वह किसी भी कीमत पर हरप्रीत से सगाई नहीं करना चाहता था, अत: जैसेजैसे सगाई की तारीख नजदीक आती जा रही थी, वैसेवैसे युवराज की चिंता बढ़ती जा रही थी. आखिर उस ने इस समस्या से निजात पाने के लिए अपनी प्रेमिका हरप्रीत कौर को शातिराना दिमाग से ठिकाने लगाने की योजना बनाई.
इस योजना में उस ने अपने गांव के दोस्त सुखचैन सिंह तथा दिल्ली के दोस्त सुखविंदर सिंह को एकएक लाख रुपए का लालच दे कर शामिल कर लिया. सुखविंदर सिंह मूलरूप से तरसिक्का (अमृतसर) का रहने वाला था. दिल्ली में वह पांडव नगर के पास गणेश नगर में रहता था. उस के पास वैगनआर कार थी, जिसे वह दिल्ली में टैक्सी के रूप में चलाता था.
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हत्या की योजना बनाने के बाद युवराज सिंह हरप्रीत कौर व उस के मातापिता से मनलुभावन बातें करने लगा, ताकि उन्हें किसी प्रकार का शक न हो. बातचीत के दौरान युवराज सिंह को पता चला कि हरप्रीत 9 दिसंबर को भाई से मिलने तथा खरीदारी करने घर से दिल्ली को रवाना होगी.
अत: युवराज सिंह ने 9 दिसंबर की रात ही उसे ठिकाने लगाने का निश्चय किया. उस ने इस की जानकारी अपने दोस्तों को भी दे दी.
9 दिसंबर, 2019 की सुबह 11 बजे युवराज सिंह व सुखचैन सिंह, सुखविंदर सिंह की कार से दिल्ली से कानपुर को रवाना हुआ. युवराज सिंह ने अपना एक मोबाइल घर पर ही छोड़ दिया ताकि उस की लोकेशन ट्रेस न हो सके. रास्ते में सुखचैन सिंह के मोबाइल से हरप्रीत व उस की मां से बतियाता रहा. हालांकि उस ने यह जानकारी नहीं दी कि वह कानपुर आ रहा है. रात 8 बज कर 31 मिनट पर उस की कार ने बारा टोल प्लाजा पार किया, फिर साढ़े 9 बजे वह रेलवे स्टेशन से कैंट साइड में पहुंच गया.
इधर हरप्रीत कौर भी दिल्ली जाने को कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंच गई थी. यह बात युवराज सिंह को पता थी. उस ने फोन कर के हरप्रीत को स्टेशन के बाहर कैंट साइड में बुलवा लिया. हरप्रीत उसे देख कर चौंकी तो उस ने कहा कि वह उसे ही लेने आया है. इस के बाद हरप्रीत ने मां को झूठी जानकारी दी कि उस का टिकट कंफर्म हो गया है.
रात 10 बजे युवराज सिंह ने हरप्रीत को कार में बिठा लिया. फिर चारों गोविंदनगर आए. यहां सभी ने अनिल मीट वाले के यहां खाना खाया और कोल्डड्रिंक पी. युवराज सिंह ने चुपके से हरप्रीत की कोल्डडिं्रक में नशीली दवा मिला दी थी. हरप्रीत ने कोल्डड्रिंक पी तो वह कार में बेहोश हो गई.
कार इटावा हाइवे की तरफ बढ़ी और उस ने रात 12:36 बजे बारा टोल प्लाजा पार किया. चलती कार में युवराज सिंह व सुखचैन सिंह ने शराब पी. युवराज सिंह ने दोस्तों को हरप्रीत के साथ दुष्कर्म करने को कहा लेकिन सुखचैन सिंह व सुखविंदर सिंह ने इस औफर को ठुकरा दिया.
लगभग 45 मिनट बाद कार फिर कानपुर की तरफ वापस हुई और उस ने रात 1 बज कर 19 मिनट पर टोल प्लाजा को पार किया. फिर कार कानपुर हाइवे पार कर महराजपुर थाना क्षेत्र के तिवारीपुर गांव के समीप पहुंची. यहां युवराज सिंह ने सुनसान जगह पर हाइवे किनारे कार रुकवा ली.
इस के बाद बेहोशी की हालत में कार में बैठी हरप्रीत को युवराज सिंह ने दबोच लिया. सुखचैन सिंह तथा सुखविंदर सिंह ने हरप्रीत के पैर पकड़े तथा युवराज सिंह ने उस का गला घोंट दिया. हत्या करने के बाद तीनों ने मिल शव को हाइवे किनारे झाडि़यों में फेंक दिया.
इस के बाद ये लोग कार से दिल्ली की ओर चल पड़े. उन की कार ने रात 3:36 बजे बारा टोल प्लाजा को पार किया. दिल्ली पहुंच कर युवराज सिंह हरप्रीत के भाई सुरेंद्र सिंह के साथ हरप्रीत की तलाश का नाटक करता रहा. 12 दिसंबर को वह पकड़े जाने के डर से फरार हो गया. उस ने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया था.
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सुखविंदर सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस ने उसे 17 दिसंबर, 2019 को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट बी.के. पांडेय की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया. द्य
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
3 डाक्टरों के एक पैनल ने हरप्रीत कौर के शव का पोस्टमार्टम किया. पैनल में डिप्टी सीएमओ डा. ए.बी. मिश्रा, डा. कृष्ण कुमार तथा डा. एस.पी. गुप्ता को शामिल किया गया. पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी भी की गई. डाक्टरों ने विसरा के साथ ही स्लाइड बना कर डीएनए सैंपल जांच के लिए सुरक्षित रख लिए.
पोस्टमार्टम के बाद हरप्रीत के शव को जवाहर नगर गुरुद्वारा लाया गया. यहां जत्थे की महिलाओं की पुलिस से झड़प हो गई. सीओ गीतांजलि सिंह ने किसी तरह महिलाओं को समझाया. उस के बाद मृतका के शव को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बर्रा स्थित स्वर्गआश्रम लाया गया. जहां परिजनों ने उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी.
दरअसल हरप्रीत कौर की 13 दिसंबर को कानपुर में रिंग सेरेमनी थी. सगाई वाले दिन ही उस की अर्थी उठी. इसलिए जिस ने भी मौत की खबर सुनी, उस की आंखें आंसू से भर आईं. यही कारण था कि उस की शवयात्रा में भारी भीड़ उमड़ी. भीड़ में गम और गुस्सा दोनों था. गम का आलम यह रहा कि सिख समुदाय के अनेक घरों तथा गुरुद्वारे में खाना तक नहीं बना.
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एसएसपी अनंतदेव तिवारी ने हरप्रीत हत्याकांड को बेहद गंभीरता से लिया. उन्होंने हत्या के खुलासे की जिम्मेदारी एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता को सौंपी. अपर्णा गुप्ता ने खुलासे के लिए एक स्पैशल टीम गठित की.
इस टीम में नजीराबाद थानाप्रभारी मनोज रघुवंशी, सीओ गीतांजलि सिंह, कई थानों के तेजतर्रार दरोगाओं तथा कांस्टेबलों को सम्मिलित किया गया. अब तक थानाप्रभारी ने गुमशुदगी के इस मामले को भा.द.वि. की धारा 302, 201 के तहत अज्ञात हत्यारों के विरूद्ध तरमीम कर दिया था.
एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता द्वारा गठित टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया, फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया. रिपोर्ट के मुताबिक हरप्रीत की हत्या गला दबा कर की गई थी. दुष्कर्म की आशंका के चलते स्लाइड बनाई गई थी तथा जहर की आशंका को देखते हुए विसरा भी सुरक्षित कर लिया गया था. स्लाइड व विसरा को परीक्षण हेतु लखनऊ लैब भेजा गया.
टीम ने मृतका के पिता गुरुवचन सिंह का बयान दर्ज किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी हरप्रीत कौर का रिश्ता दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारा में क्लर्क के पद पर सेवारत युवराज सिंह के साथ तय हुआ था. 13 दिसंबर को उस की सगाई थी.
वह सामान की खरीदारी करने 9 दिसंबर को दिल्ली जाने के लिए कानपुर रेलवे स्टेशन पहुंची थी. बेटी तो दिल्ली नहीं पहुंची, अपितु उस की मौत की खबर जरूर मिल गई.
‘‘हरप्रीत का मंगेतर युवराज कहां है? क्या वह तुम से मिलने तुम्हारे घर आया है?’’ थानाप्रभारी ने गुरुवचन सिंह से पूछा.
‘‘नहीं, वह मौत की खबर पा कर भी कानपुर नहीं आया. 12 दिसंबर को उस से बात जरूर हुई थी. उस के बाद उस से संपर्क नहीं हो पाया. युवराज का मोबाइल फोन भी बंद है.’’ गुरुवचन सिंह ने पुलिस को जानकारी दी.
गुरुवचन सिंह की बात सुन कर मनोज रघुवंशी का माथा ठनका, इस की वजह यह थी कि जिस की होने वाली पत्नी की हत्या हो गई हो, वह खबर पा कर भी न आए, यह थोड़ा अजीब था. ऊपर से उस ने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया था. इन सब वजहों से उन्हें लगा कि कुछ तो गड़बड़ है.
हरप्रीत कौर घर से कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची थी. स्टेशन से ही वह गायब हुई थी. पुलिस टीम जांच करने स्टेशन पहुंची. कानपुर रेलवे स्टेशन की जीआरपी पुलिस की मदद से सीसीटीवी फुटेज देखे गए तो हरप्रीत कौर स्टेशन से कैंट साइड में बाहर जाते दिखी.
इस के बाद पुलिस ने रेल बाजार के हैरिशगंज क्षेत्र के एक सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो इस फुटेज में 9 दिसंबर की रात 10 बजे हरप्रीत के अलावा 3 अन्य लोग कार में बैठे दिखे.
पुलिस ने उन की पहचान कराने के लिए यह फुटेज गुरुवचन सिंह को दिखाई तो उन्होंने उन में से एक युवक की तत्काल पहचान कर ली. यह कोई और नहीं बल्कि हरप्रीत का मंगेतर युवराज सिंह था. 2 अन्य युवकों को वह नहीं पहचान पाए.
युवराज सिंह पुलिस की रडार पर आया तो पुलिस ने युवराज तथा हरप्रीत के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पता चला कि 9 दिसंबर को युवराज और हरप्रीत के बीच कई बार बात हुई थी.
हरप्रीत ने अपने मोबाइल फोन से उसे आखिरी मैसेज भी भेजा था. लेकिन उस ने हरप्रीत से अपने एक दूसरे फोन नंबर से बात की थी. उस के पहले उस के फोन की लोकेशन 9 दिसंबर की रात दिल्ली की ही मिल रही थी.
पुलिस टीम को समझते देर नहीं लगी कि युवराज सिंह शातिर दिमाग है. उस ने ही अपने साथियों के साथ मिल कर अपनी मंगेतर हरप्रीत की हत्या की है. पुलिस को उस पर शक न हो इसलिए वह अपना एक मोबाइल फोन दिल्ली में ही छोड़ आया था. हत्या में कार का प्रयोग भी हुआ था. इस का पता लगाने पुलिस टीम बारा टोल प्लाजा पहुंची. क्योंकि इसी टोल प्लाजा से कानपुर शहर का आवागमन दिल्ली आगरा की ओर होता है.
पुलिस टीम ने बारा टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज देखे तो हैरान रह गई. दिल्ली नंबर की टैक्सी वैगन आर कार 7 घंटे में 4 बार टोल से इधर से उधर क्रास हुई थी. 9 दिसंबर की रात साढ़े 8 बजे वह टैक्सी कानपुर शहर आई.
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रात 12.36 बजे वह वापस दिल्ली की तरफ गई. फिर 45 मिनट बाद रात 1.19 बजे कार वापस कानपुर की तरफ आई. इस के बाद रात 3.36 बजे वापस बारा टोल प्लाजा क्रास कर दिल्ली की ओर चली गई.
इस बीच पुलिस ने डाटा डंप करा कर कई संदिग्ध नंबर निकाले तथा इन नंबरों की जानकारी जुटाई. कार पर अंकित नंबर डीएल1आरटीए 5238 की आरटीओ कार्यालय से जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि कार का रजिस्ट्रैशन तरसिक्का (अमृतसर) निवासी सुखविंदर सिंह के नाम है.
एक अन्य संदिग्ध मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि वह नंबर अमृतसर (पंजाब) जिले के जुगावा गांव निवासी सुखचैन सिंह का है. हरप्रीत का मंगेतर युवराज सिंह भी इसी जुगावा गांव का रहने वाला था.
पुलिस टीम जांच के आधार पर अब तक हरप्रीत कौर हत्याकांड के खुलासे के करीब पहुंच चुकी थी. अत: टीम ने जांच रिपोर्ट से एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता को अवगत कराया तथा युवराज सिंह तथा उस के साथियों की गिरफ्तारी की अनुमति मांगी.
अपर्णा गुप्ता ने जांच रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तारी का आदेश दे दिया. इस के बाद पुलिस पार्टी हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली व पंजाब रवाना हो गई.
15 दिसंबर, 2019 को पुलिस टीम युवराज सिंह की तलाश में दिल्ली स्थित बंगला साहिब गुरुद्वारा पहुंची. पता चला कि युवराज सिंह का असली नाम जुगराज सिंह है. 5 दिसंबर से वह ड्यूटी पर नहीं आ रहा है. गुरुद्वारे में वह क्लर्क के पद पर तैनात था.
युवराज सिंह जब गुरुद्वारे में नहीं मिला तब पुलिस टीम ने युवराज सिंह व उस के दोस्त सुखचैन सिंह की तलाश में उस के गांव जुगावा (अमृतसर) में छापा मारा. लेकिन वह दोनों अपनेअपने घरों से फरार थे. उन का मोबाइल फोन भी बंद था, जिस से उन की लोकेशन नहीं मिल पा रही थी.
युवराज सिंह तथा सुखचैन सिंह जब पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े तो पुलिस टीम को निराशा हुई लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं हारी. इस के बाद टीम ने रात में तरसिक्का (अमृतसर) निवासी सुखविंदर सिंह के घर दबिश दी. सुखविंदर सिंह घर में ही था और चैन की नींद सो रहा था. पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया और उस की कार भी अपने कब्जे में ले ली. पुलिस टीम कार सहित सुखविंदर सिंह को कानपुर ले आई.
एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता तथा सीओ (नजीराबाद) गीतांजलि सिंह ने थाना नजीराबाद में सुखविंदर सिंह से हरप्रीत कौर की हत्या के संबंध में सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया. उस ने हत्या में शामिल होना कबूल कर लिया. कार की डिक्की से उस ने मृतका हरप्रीत का ट्रौली बैग तथा मोबाइल फोन भी बरामद करा दिया.
सुखविंदर सिंह ने बताया कि हरप्रीत कौर की हत्या उस के मंगेतर जुगराज सिंह उर्फ युवराज सिंह ने अपने गांव के दोस्त सुखचैन सिंह के साथ मिल कर रची थी. हत्या में वह भी सहयोगी था. हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के बाद वह तीनों रात में ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे. कार उस की खुद की थी.
दिल्ली में वह उस कार को टैक्सी के रूप में चलाता था. सुखविंदर सिंह ने बताया कि वह हत्या करना नहीं चाहता था, लेकिन दोस्त जुगराज सिंह की शादीशुदा जिंदगी तबाह होने से बचाने के लिए वह हत्या जैसे जघन्य अपराध में शामिल हो गया.
चूंकि सुखविंदर सिंह ने हत्या का परदाफाश कर दिया था और हत्या में प्रयुक्त कार भी बरामद करा दी थी. साथ ही मृतका का ट्रौली बैग तथा मोबाइल फोन भी बरामद करा दिया था. अत: एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता ने सीओ गीतांजलि सिंह के कार्यालय परिसर में आननफानन में प्रैस वार्ता की.
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पुलिस ने कातिल सुखविंदर सिंह को मीडिया के समक्ष पेश कर घटना का खुलासा कर दिया. पुलिस पूछताछ में प्यार में धोखा खाई एक युवती की मौत की सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई.
दरअसल, 13 दिसंबर को कानपुर में हरप्रीत कौर की रिंग सेरेमनी थी. उस का मंगेतर युवराज सिंह दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में रहता था. हरप्रीत कौर की भाभी व भाई सुरेंद्र सिंह भी दिल्ली में ही रहते थे. हरप्रीत भाई से मिलने तथा अपनी सगाई का सामान खरीदने के लिए 9 दिसंबर, 2019 की रात घर से निकली थी.
बेटी सफर में अकेली हो तो मांबाप की चिंता स्वाभाविक है. गुरुवचन सिंह को भी बेटी की चिंता थी. अत: हालचाल जानने के लिए उन्होंने रात 12 बजे बेटी को काल लगाई, पर उस का फोन स्विच्ड औफ था. उन्होंने सोचा कि वह सो गई होगी. लेकिन मन में शक का बीज पड़ गया था, जिस ने सवेरा होतेहोते वृक्ष का रूप ले लिया. सुबह 7 बजे उन्होंने फिर से हरप्रीत को काल लगाई, पर फोन अब भी बंद था.
इस से गुरुवचन सिंह की चिंता और बढ़ गई. उन्होंने दिल्ली में रहने वाले बेटे सुरेंद्र सिंह को फोन पर सारी बात बताई. सुरेंद्र सिंह ने उन्हें बताया कि हरप्रीत कौर अभी तक यहां नहीं पहुंची है. इस के बाद सुरेंद्र सिंह बहन की खोज में निकल पड़ा.
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सुरेंद्र सिंह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा क्योंकि श्रमशक्ति एक्सप्रैस नई दिल्ली तक ही आती है. वहां उस ने स्टेशन का हर प्लेटफार्म छान मारा लेकिन उसे हरप्रीत कौर नहीं दिखी. उस ने वेटिंग रूम में भी चेक किया, पर हरप्रीत कौर वहां भी नहीं थी.
सुरेंद्र सिंह ने सोचा कि हो न हो, हरप्रीत अपने मंगेतर युवराज सिंह के पास चली गई हो? मन में यह विचार आते ही सुरेंद्र सिंह ने हरप्रीत के मंगेतर युवराज से फोन पर बात की, ‘‘युवराज, हरप्रीत तेरे पास तो नहीं आई?’’
‘‘नहीं तो,’’ युवराज ने जवाब दिया. फिर उस ने पूछा, ‘‘सुरेंद्र बात क्या है, हरप्रीत को ले कर तू इतना परेशान क्यों है?’’
‘‘क्या बताऊं… हरप्रीत कल रात कानपुर से दिल्ली आने को निकली थी, पर वह अभी तक यहां नहीं पहुंची. स्टेशन पर आ कर मैं ने चप्पाचप्पा छान मारा पर वह कहीं नहीं दिख रही. मैं बहुत परेशान हूं. समझ में नहीं आ रहा कि हरप्रीत गई तो कहां गई?’’
‘‘तुम परेशान न हो. मैं तुम्हारे पास आ रहा हूं.’’ युवराज बोला और कुछ देर बाद वह नई दिल्ली स्टेशन पहुंच गया. वह भी सुरेंद्र सिंह के साथ हरप्रीत की खोज करने लगा. दोनों ने नई दिल्ली स्टेशन का कोनाकोना छान मारा, लेकिन हरप्रीत का कुछ पता न चला. दिल्ली में सुरेंद्र व युवराज के कुछ परिचित थे. हरप्रीत भी उन्हें जानती थी. उन परिचितों के यहां भी सुरेंद्र सिंह ने बहन की खोज की, पर उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.
सुरेंद्र सिंह के पिता गुरुवचन सिंह मोबाइल पर उस के संपर्क में थे. सुरेंद्र पिता को पलपल की जानकारी दे रहा था. जब सुबह से शाम हो गई और हरप्रीत का कुछ भी पता नहीं चला तो गुरुवचन सिंह चिंतित हो उठे. तब वह कानपुर रेलवे स्टेशन पर स्थित जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) थाना पहुंच गए. उन्होंने थानाप्रभारी को बेटी के लापता होने की बात बताते हुए बेटी की गुमशुदगी दर्ज करने की मांग की.
लेकिन थानाप्रभारी ने गुरुवचन सिंह की बात को तवज्जो नहीं दी. उन्होंने यह कह कर उन्हें वापस भेज दिया कि बेटी जवान है हो सकता है किसी के साथ सैरसपाटा के लिए निकल गई हो, 1-2 रोज इंतजार कर लो. उस के बाद न लौटे तो हम गुमशुदगी दर्ज कर लेंगे.
गुरुवचन सिंह बुझे मन से वापस घर आ गए. गुरुवचन सिंह और उन की पत्नी गुरप्रीत कौर ने वह रात आंखों ही आंखों में काटी. दोनों के मन में तरहतरह की आशंकाएं उमड़नेघुमड़ने लगी थीं.
अब तक गुरुवचन सिंह की युवा बेटी के गायब होने की खबर कई गुरुदारों तथा सिख समुदाय में फैल गई थी. लोगों की भीड़ उन के घर पर जुटने लगी थी. गुरुद्वारे के जत्थे की महिलाएं भी आ गई थीं. सभी तरहतरह के कयास लगा रही थीं. गुरुवचन सिंह ने अपने खास लोगों से बंद कमरे में विचारविमर्श किया और जीआरपी थाने जा कर हरप्रीत की गुमशुदगी दर्ज कराने का निश्चय किया.
11 दिसंबर, 2019 की दोपहर गुरुवचन सिंह अपने परिचितों के साथ एक बार फिर कानपुर जीआरपी थाने पहुंचे. इस बार दबाव में बिना नानुकुर के थाना पुलिस ने हरप्रीत कौर की गुमशुदगी दर्ज कर ली. गुरुवचन सिंह एवं उन के परिचितों ने पुलिस से सीसीटीवी की फुटेज दिखाने का अनुरोध किया.
इस पर पुलिस ने व्यस्तता का हवाला दे कर फुटेज दिखाने को इनकार कर दिया लेकिन जब दवाब बनाया गया तो फुटेज दिखाई. फुटेज में हरप्रीत कौर स्टेशन की कैंट साइड से बाहर निकलते दिखाई दी. उस के बाद पता नहीं चला कि वह कहां गई.
गुरुवचन सिंह जवाहर नगर में रहते थे. यह मोहल्ला थाना नजीराबाद के अंतर्गत आता है. शाम 5 बजे वह परिचितों के साथ थाना नजीराबाद जा पहुंचे. उस समय थानाप्रभारी मनोज रघुवंशी थाने पर ही मौजूद थे.
गुरुवचन सिंह ने उन्हें अपनी व्यथा बताई और बेटी की गुमशुदगी दर्ज करने की गुहार लगाई. थानाप्रभारी ने तत्काल गुरुवचन सिंह की बेटी हरप्रीत कौर की गुमशुदगी दर्ज कर ली. उन्होंने बेटी को तलाशने में हर संभव कोशिश करने का आश्वासन दिया.
इधर 12 दिसंबर की अपराह्न 3 बजे कानपुर के ही थाना महाराजपुर की पुलिस को हाइवे के किनारे झाडि़यों में एक युवती की लाश पड़ी होने की सूचना मिली. सूचना पाते ही थानाप्रभारी ए.के. सिंह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.
लाश तिवारीपुर स्थित राधाकृष्ण मुन्नीदेवी महाविद्यालय के समीप हाइवे किनारे झाडि़यों में पड़ी थी. उन्होंने घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया.
मृतका की उम्र 22 साल के आसपास थी. उसे देखने से लग रहा था कि उस की हत्या 2-3 दिन पहले कहीं और कर के लाश वहां डाली गई थी. मृतका के शरीर पर कोई जख्म वगैरह नहीं था जिस से प्रतीत हो रहा था कि उस की हत्या गला दबा कर की गई होगी. उस के पास ऐसी कोई चीज नहीं मिली जिस से उस की शिनाख्त हो सके.
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थानाप्रभारी ने हुलिए सहित एक युवती की लाश पाए जाने की सूचना वायरलेस द्वारा कानपुर नगर तथा देहात के थानों को प्रसारित कराई ताकि मृतका की पहचान हो सके. इस सूचना को जब नजीराबाद थानाप्रभारी मनोज रघुवंशी ने सुना तो उन का माथा ठनका. क्योंकि उन के यहां भी एक दिन पहले 22 वर्षीय युवती हरप्रीत कौर की गुमशुदगी दर्ज हुई थी.
उन्होंने आननफानन में हरप्रीत कौर के पिता गुरुवचन सिंह को थाने बुलवा लिया. फिर उन्हें साथ ले कर वह महाराजपुर में मौके पर पहुंच गए. गुरवचन सिंह उस लाश को देखते ही फफक पड़े, ‘‘सर, यह शव हमारी बेटी हरप्रीत का ही है. इसे किस ने और क्यों मार डाला?’’
हरप्रीत की लाश पाए जाने की सूचना जब अन्य घरवालों को मिली तो घर में कोहराम मच गया. मां, बहन, भाई व परिजन घटनास्थल पर पहुच गए. हरप्रीत का शव देख कर सभी बिलख पड़े. थानाप्रभारी ने हरप्रीत कौर की हत्या की सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी.
कुछ ही देर बाद एसएसपी अनंतदेव तिवारी, एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता तथा सीओ (नजीराबाद) गीतांजलि सिंह भी मौके पर पहुंच गईं. मौके से साक्ष्य जुटाए गए. खोजी कुत्ता शव को सूंघ कर राधाकृष्ण मुन्नीदेवी महाविद्यालय की ओर भौंकता हुआ आगे बढ़ा फिर कुछ दूर जा कर वापस आ गया.
खोजी कुत्ता हत्या से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं जुटा पाया. घटना स्थल से न तो मृतका का मोबाइल फोन बरामद हुआ और न उस का बैग. निरीक्षण के बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम हेतु लाला लाजपत राय अस्पताल भेज दिया.
13 दिसंबर, 2019 को हरप्रीत हत्याकांड की खबर समाचारपत्रों में सुर्खियों में छपी तो सिख समुदाय के लोगों में रोष छा गया. सुबह से ही लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने लगे. दोपहर 12 बजे तक पोस्टमार्टम हाउस पर भारी भीड़ जुट गई. सपा विधायक इरफान सोलंकी तथा अमिताभ बाजपेई भी वहां पहुंच गए. विधायकों के आने से भीड़ ज्यादा उत्तेजित हो उठी. लोगों में पुलिस की लापरवाही के प्रति गुस्सा था.
अत: पुलिस विरोधी नारेबाजी शुरू हो गई. यह देख कर थानाप्रभारी मनोज रघुवंशी के हाथपांव फूल गए. उन्होंने घटना की जानकारी आला अधिकारियों को दी तो एडीजी प्रेम प्रकाश, आईजी मोहित अग्रवाल, एसएसपी अनंतदेव तिवारी, एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता, तथा सीओ गीतांजलि सिंह लाला लाजपतराय अस्पताल आ गईं.
वहां जुटी भीड़ को देखते हुए एसएसपी ने मौके पर नजीराबाद, स्वरूप नगर, फजलगंज, काकादेव थाने की फोर्स भी बुला ली. बवाल की जानकारी पा कर जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत भी मौके पर आ गए.
सपा विधायक माहौल को बिगाड़ न दें, इसलिए पुलिस अधिकारियों ने भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी तथा गुरु सिंह सभा, कानपुर के नगर अध्यक्ष सिमरन जीत सिंह को वहां बुलवा लिया. भाजपा विधायक व पुलिस अधिकारियों ने मृतका के परिजनों से बातचीत शुरू की.
मृतका के पिता गुरुवचन सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बेहद लापरवाही की. पुलिस यदि सक्रिय होती, तो शायद आज उन की बेटी जिंदा होती. वह थानों के चक्कर लगाते रहे, कहते रहे कि जल्द से जल्द उन की बेटी के हत्यारों को गिरफ्तार किया जाए. उन्होंने जिलाधिकारी के समक्ष तीसरी मांग यह रखी कि उन्हें कम से कम 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाए.
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गुरुवचन सिंह की इन मांगों के संबंध में विधायक सुरेंद्र मैथानी तथा गुरु सिंह सभा नगर अध्यक्ष सिमरन जीत सिंह ने जिलाधिकारी तथा पुलिस अधिकारियों से विचारविमर्श किया. अंतत: उन की सभी मांगें मान ली गईं. अधिकारियों के आश्वासन के बाद माहौल शांत हो गया.
छत्तीसगढ़ में आगामी 25 अगस्त से विशेष “विधानसभा सत्र” आहुत करने की उद्घोषणा विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत के निर्देश पर हो गई है. तत्संबंधी निर्देश और कथित नियम जारी हो रहे हैं. ऐसे में यह सवाल राजनीतिक फिजा में सरगर्म है की क्या छत्तीसगढ़ कोई आकाश से उतारा गया विशिष्ट राज्य है जहां कोरोना वायरस कोविड-19 के समय काल में विधानसभा सत्र कराया जाना अपरिहार्य है.और विधानसभा सत्र के कारण कोरोना का प्रसार और तेजी से नहीं होगा ? उल्लेखनीय है कि
छत्तीसगढ़ में अनेक पुलिस स्टेशन, जिलाधीश कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, विश्राम गृह, विधायक, बैंक कर्मचारी, गुपचुप बेचने वाला तलक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है. यह संक्रमण निरंतर बढता चला जा रहा है ऐसे में “विधानसभा सत्र” की बैठक बुलाना क्या उचित कहा जा सकता है .अगरचे 90 विधायक जिनमे मंत्री, मुख्यमंत्री व सैकड़ों लोगों का अमला एक जगह पर एकत्रित होगा तो क्या यह सुरक्षित कार्य माना जाएगा. अगर कहीं एक भी कोरोना पॉजिटिव इस भीड़ में शामिल रहा तो क्या स्थितियां बनेंगी यह सहज कल्पना की जा सकती है. ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत का यह निर्णय चर्चा और समीक्षा का विषय है.
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डॉ. चरणदास – भूपेश बघेल एक हैं!
छत्तीसगढ़ में कोरोना की रफ्तार इन दिनों अपने चरम पर है. प्रतिदिन पांच सौ लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं. 3 से 10 तलक लोग प्रतिदिन हलाक हो रहे हैं कोरोना का ग्रास बन रहे हैं . ऐसे विषम समय में डॉ. चरणदास महंत ने भूपेश बघेल मुख्यमंत्री से मुलाकात की. दोनों नेताओं में “विधानसभा सत्र” बुलाने के लिए सहमति बन गई और यह घोषणा सुर्खियां बन गई.
आजकल संपूर्ण देश में कोरोना अपने दंश से लोगों को भयभीत कर रहा है, मार रहा है.अभी तलक कोई इलाज, कोई वैक्सीन की खोज भी नहीं हो पाई है अभी सरकार स्वयं यह प्रचार प्रसार कर रही है की आपस में दूरी 2 गज की बनाकर रखें, सोशल, फिजिकल डिसटेस्टिंग बनाए रखें . स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है कॉलेज बंद है थिएटर बंद है यहां तक की लाइब्रेरी वाचनालय भी बंद है. ऐसे में अब अगर सरकार स्वयं विधानसभा का सत्र बुलाने की उतावली कर रही है तो “आ बैल मुझे मार” की तैयारी कर रही है तो इसे समझदारी भरा कदम कदापि नहीं कहा जा सकता. इस कारण प्रबुद्ध जन सहित कुछ विधायकों ने भी डॉक्टर चरणदास को अपने फैसले को स्थगित करने का अनुरोध किया है.मगर सरकार और विधानसभा सचिवालय अपने फैसले पर पुर्नविचार करने को तैयार नहीं है.
ननकीराम ने उठाई आवाज
छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र आहूत की खबर जैसे ही सुर्खी बनी. लोगों में यह चर्चा का बयास बन गई. क्योंकि अभी कोरोना काल में विधानसभा का सत्र बुलाना सीधे-सीधे मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालने जैसा ही है. इसका प्रखर व तार्किक विरोध डॉक्टर रमन सरकार में गृह मंत्री रहे पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने किया. आदिवासी ब्रिगेड के सिपाहसलार रहे ननकीराम कंवर प्रदेश के वरिष्ठम विधायकों में हैं और इन दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से उनकी गलबहियां चर्चा में है.
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डॉक्टर रमन सिंह के घुर विरोधी ननकीराम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से अक्सर मिलते हैं और उनके सुझावो पर भूपेश बघेल तत्काल अमल भी करते देखे गए हैं. ननकीराम और भूपेश बघेल को लेकर भाजपा वक्रदृष्टि रखे हुए हैं ऐसे में ननकीराम का यह बयान की विधानसभा सत्र बुलाना कोरोना को आमंत्रित करने जैसा है और इसे स्थगित करके ऑनलाइन सत्र बुलाने का सुझाव देते हुए ननकीराम ने तल्ख स्वर में इस पहल की निंदा कर दी है.
स्थितियां बेकाबू सरकार मदहोश
छत्तीसगढ़ में कोरोना को लेकर स्थितियां बेकाबू होती जा रही हैं. बिलासपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय, आरटीओ दफ्तर, नगर निगम, नेता प्रतिपक्ष, डॉक्टर रमन सिंह और प्रदेश के कई नेता, महापौर जैसे लोग कोरोना की जद में आ चुके हैं. मगर छत्तीसगढ़ सरकार कोरोना को लेकर गंभीर नजर नहीं आती. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पोरा, हरेली का त्यौहार सार्वजनिक रूप से मनाते हैं लोगों की भीड़ जुटती है. यह गतिविधियां जनता में चर्चा का विषय बनी हुई है.
प्रतिदिन सिर्फ 6 हजार लोगों की कोरोना संक्रमित जांच हो रही है जो कि रेत में सुई की भांति है. कोरोना अपनी रफ्तार से बढ़ता चला जा रहा है स्थिति नियंत्रण में नहीं है.
ऐसी खतरनाक होती परिस्थितियों में प्रदेश के 90 विधायक, अधिकारी, कर्मचारी विधानसभा में एक साथ एकजुट होकर मिलेंगे तो क्या होगा यह सहज कयास लगाया जा सकता है. कहीं ऐसा न हो की यह पहल छत्तीसगढ़ के लिए एक भयंकर त्रासदी बन जाए .
टेलिवीजन इंडस्ट्री के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस सीजन 11 (Bigg Boss 11) की विनर और जानी मानी एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं. पौपुलर सीरियल भाभीजी घर पर हैं (Bhabhi Ji Ghar Par Hai) में शिल्पा शिंदे ने अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था जो कि लोगों ने काफी पसंद किया था. सीरियल भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी ने अपने भोलेपन से लाखों लोगों के दिल जीते थे तो वहीं उनके किरदार ने फैंस की काफी वाहवाई लूटी थी.
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आपको बता दें कि शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) उन एक्ट्रेसेस में से एक हैं जिसकी हर फोटो हर वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल जाती है. एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) के फैंस उन्हें इस कदर चाहते हैं कि सोशल मीडिया पर उन्हें उनके फैंस का जमकर प्यार मिलता है. इन दिनों एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे की कुछ फोटोज सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रही हैं.
इन फोटोज में शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) बॉलीवुड इंडस्ट्री की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ (Hum Apke Hain Kaun) की निशा यानी कि एक्ट्रेस माधुरी दिक्षित (Madhuri Dixit) के अवतार में नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस शिल्पा की इस फोटोज ने उनके फैंस की तो मानो जैसे नींदे ही उड़ा दी हों. इन फोटोज में शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) की अदाओं की बात करें तो कोई भी उनकी ऐसी अदाएं देख उनका दीवाना बन सकता है और यही वजह है कि उनको इन फोटोज के लिए फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है.
आपको बता दें कि शिल्पा शिंदे बहुत ही जल्द सुनील ग्रोवर (Sunil Grover) के साथ सीरियल ‘गैंग्स ऑफ फिल्मिस्तान’ (Gangs of Filmistan) में दिखाई देने वाली हैं. खबरों की माने तो शिल्पा शिंदे की ये फोटोज ‘गैंग्स ऑफ फिल्मिस्तान’ (Gangs of Filmistan) के सेट पर की है जिसमें वे फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ के सुपरहिट गाने ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ पर डांस परफोर्मेंस दे रही हैं.
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