Bhojpuri एक्ट्रेस पाखी हेगड़े की म्यूजिक कंपनी के इस गाने ने दिया आत्महत्या रोकने का मैसेज, देखें Video

कोरोना काल में घर के अंदर रहते हुए लोग अकेलापन महसूस करने के साथ साथ तनाव के शिकार हो रहे हैं और इस तरह के लोगों द्वारा आत्महत्या करने की खबरे भी काफी आ रही हैं. ऐसे हालात में मशहूर भोजपुरी अभिनेत्री (Bhojpuri Actress) पाखी हेगड़े (Pakhi Hegde) की संगीत कंपनी ‘बियोंड म्यूजिक’ (Beyond Music) ने एक बेहतरीन सोशल मैसेज देने वाला वीडियो सौंग ‘रो रो के गुजरे दिन’ को यूट्यूब पर रिलीज किया है, जो आत्महत्या ना करने का पैगाम देता है.

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इस खास गीत को टिकटॉक स्टार (TikTok Star) अदनान शेख (Adnaan Shaikh) के जन्मदिन पर सात अगस्त को रिलीज किया गया था और महज दो सप्ताह के अंदर इस गीत को तीन मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. इस म्यूजिक वीडियो में लोकप्रिय सोशल मीडिया सेंसेशन अदनान शेख (Adnaan Shaikh) और जुमाना खान (Jumana Khan) हैं. इस गीत को मुंबई और दुबई में फिल्माया गया है.

 

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If you want me to control my temper, so control your stupidity😈 #addylovers #team07

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‘बियोंड म्यूजिक’ कंपनी पाखी हेगड़े (Pakhi Hegde) और वीरल मोटानी (Viral Motani) की है. इस गीत को वीरल मोटानी और पाखी हेगड़े द्वारा निर्मित किया गया है और इसे बियॉन्ड म्यूजिक स्टूडियो द्वारा फिल्माया गया है. हार्दिक टेलर और दिव्या भट्ट द्वारा गाए गए गाने के वीडियो की कहानी से हर दर्शक कनेक्ट हो रहा है. इसके अलावा अदनान और जुमाना की बेहतरीन ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री वास्तव में देखने लायक है.

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पाखी हेगड़े (Pakhi Hegde) कहती हैं- “खुशी की बात यह है कि इस गीत को युवा पीढ़ी सबसे अधिक पसंद कर रही है. इस म्यूजिक वीडियो का कौंसेप्ट श्रोताओं और दर्शकों को लुभा रहा है. इस गीत के माध्यम से  हम आत्महत्या की रोकथाम का सशक्त संदेश देना व जागरूकता फैलाना चाहते हैं. मैं अपने म्यूजिक लेबल ‘बियांड म्यूजिक’ के जरिए दुनिया के लिए एक प्रभावी संदेश के साथ यह गीत रिलीज करके बेहद खुश हूं. हमारा यह गीत दरअसल कह रहा है ‘से नो टू सुसाइड.’ #SayNoToSuicide जो आज के समाज के लिए बहुत ज्वलंत मामला है.’’

 

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Vibe high and the magic around you will unfold.

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भोजपुरी फिल्मों की सशक्त अदाकारा पाखी हेगड़े (Pakhi Hegde) हिंदी धारावाहिक व फिल्मों के साथ साथ  मराठी, पंजाबी और भोजपुरी सिनेमा में अपनी अदाकारी के जलवे दिखाए हैं. दूरदर्शन पर प्रसारित सीरियल ‘‘मैं बनूंगी मिस इंडिया’’ में मुख्य भूमिका निभाकर उन्हाने अपने करियर की शुरूआत की थी. पाखी हेगड़े ने मनोज तिवारी (Manoj Tiwari), दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ (Dineshlal Yadav ‘Nirhua’) और पवन सिंह (Pawan Singh) के साथ कई भोजपुरी फिल्मों में काम किया. फिल्म ‘गंगा देवी’ (Ganga Devi) में अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के साथ काम करने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ. मराठी फिल्म ‘सत ना गत’ में उन्होंने महेश मांजरेकर के साथ भी अदाकारी की.अब अपनी कम्पनी ‘बियोंड म्यूजिक’ के द्वारा नए तथा उभरते गायको व  म्यूजिशियन को मौका दे रही हैं.

Bigg Boss 14 में एंट्री ले सकती हैं सुशांत सिंह राजपूत की एक्स-गर्लफ्रेंड, देखें Photos

रिएलिटी शो बिग बॉस (Bigg Boss) के फैंस के लिए एक बेहद ही अच्छी खुशखबरी है. खबरों की माने तो बिग बॉस का सीजन 14 (Bigg Boss 14) इस साल सितम्बर से ऑन एयर हो जाएगा. काफी समय से शो के मेकर्स आने वाले सीजन को लेकर पूरी मेहनत कर रहे हैं. हाल ही में कलर्स टीवी (Colors TV) के औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर शो के मेकर्स ने बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) का प्रोमो रिलीज किया जिससे फैंस का उत्साह सांतवे आस्मान पर पहुंच गया.

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बॉलीवुड इंडस्ट्री के टैलेंटिड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) का जबसे निधन हुआ है तभी से फैंस के दिलों में बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) के लिए मिक्सड रिएक्शंस देखने को मिल रहे हैं क्योंकि सुशांत सिंह के फैंस उनकी अचानक हुई मौत के बाद से स्टार किड्स (Star Kids) और उन लोगों के खिलाफ हो गए थे जो कि इंडस्ट्री में नेपोटिज्म (Nepotism) फैला रहे हैं और इन सब में सबसे ज्यदा नाम जो सामने आया है वो है सलमान खान (Salman Khan), करण जोहर (Karan Johar), आलिया भट्ट (Alia Bhatt), महेश भट्ट (Mahesh Bhatt), संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) का.

वहीं अब आने वाले दिनों में सलमान खान (Salman Khan) का सबसे पौपुलर रिएलिटी शो बिग बॉस ऑन एयर होने वाला है तो कई फैंस तो इस शो के लिए हर बार की तरह काफी एक्साइटिड हैं तो वहीं कुछ फैंस इस रिएलिटी शो के विरुद्ध होकर इसे बॉयकौट करने की बात कर रहे हैं. खबरों की माने तो इस बार बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के मेकर्स ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) को शो में बुलाने का फैसला लिया है.

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I’m waiting to meet my ganpatibappa this year ❤️ganpati Bappa laukar ya 😍 #throwback 2019 ganpatibappa

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आपको बता दें कि जब से सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत हुई है तभी से अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) अपने परिवार वालों की काफी मदद कर रही हैं और उनके साथ कदम से कदम मिला कर उनका खूब साथ दे रही हैं. अंकिता लोखंडे दिल से ये चाहती हैं कि सुशांत सिंह राजपूत और उनके घरवालों को न्याय मिले और सच्चाई सबसे सामने आए.

 

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#justiceforsushantsinghrajput. #CBIforSSR

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बात करें बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) की तो अंकिता ने अपनी बेस्टफ्रेंड रश्मि देसाई (Rashmi Desai) को बाहर बैठे ही खूब सपोर्ट किया था. ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि क्या अंकिता लोखंडे बिग बॉस 14 का ऑफर अपनाएंगी या नहीं.

हॉट एक्ट्रेस सनी लियोन ने फैंस को दिए फिट रहने के टिप्स, शेयर किया ये Video

बॉलीवुड इंडस्ट्री की सबसे खूबसूरत और हॉट एक्ट्रेसेस में से एक सनी लियोन (Sunny Leone) अपने फैंस के दिलों पर तो जैसे राज करती हैं. सनी लियोन (Sunny Leone) के फैंस उनके इतने दीवाने हैं वे कोई भी फोटो या वीडियो अप्लोड करें तो उनके फैंस उन्हें इतना प्यार देते हैं कि उसे जल्द से जल्द वायरल कर देते हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक्ट्रेस सनी लियोन (Sunny Leone) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और लगातार अपनी हॉट फोटोज और वीडियो फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं.

 

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Sunday afternoon hanging around and doing nothing!!

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एक्ट्रेस सनी लियोन (Sunny Leone) अक्सर अपनी फैमिली के साथ बिताए हुए खूबसूरत लमहों की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं लेकिन इस बार उन्होनें एक अलग ही वीडियो शेयर की है. जैसा कि हम सब जानते हैं कि सनी लियोन (Sunny Leone) दिखने में बेहद ही फिट हैं और वे अपनी फिटनेस को लेकर जानी जाती हैं तो इस बार उन्होनें फैंस के साथ एक वीडियो शेयर की है जिसमें वे अपनी फिटनेस टिप्स शेयर कर रही है.

 

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Leg and booty workouts are never easy!! Blah

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इस वीडियो में सनी लियोन (Sunny Leone) लेट कर लेग्स (Legs) और बूटी (Booty) एक्सरसाइज कर रही हैं जिसके कैप्शन में उन्होनें लिखा है कि, “Leg and booty workouts are never easy!! Blah”. कुछ समय पहले उन्होनें एक और वीडियो शेयर की थी जिसमें वे साइकलिंग करती नजर आ रही थीं. इस वीडियो के कैप्शन में उन्होनें लिखा था कि, “All gyms have closed again! So back to the boring home gym! Just when we felt things might return to a little normalcy. NOPE!!! As you can see my level of excitement is soooo high! Lol but better this then getting COVID”.

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आपको बता दें कि सनी लियोन (Sunny Leone) अपना ज्यादा से ज्यादा समय घर में अपने पति और बच्चों के साथ बिताना पसंद करती हैं और अक्सर वे अपने पति डैनियल के साथ अलग अलग प्रैंक्स (Pranks) करती रहती हैं जिसे उनके फैंस भी काफी पसंद करते हैं.

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औरत सिर्फ एक देह नहीं : भाग 2

एक रोज सचिन ने अपनी चाहतों से ममता के जिस्म को पिघलाना चाहा, लेकिन ममता ने काबू बनाए रखा और सचिन को समझाते हुए बोली, ‘‘सचिन, यह सब अभी नहीं, यह सब शादी के बाद ही हो तभी अच्छा लगता है. अगर तुम चाहते हो कि हम जल्दी से एक हो जाएं तो अपने घरवालों से कह कर मेरे घरवालों से शादी की बात कर लो.’’

‘‘ममता, मैं शादी से कहां मना कर रहा हूं. जब हम प्यार करते हैं और हमारे दिल एक हो चुके हैं तो हमारे शरीर भी एक हो जाने चाहिए. जिस से हमारे बीच किसी प्रकार की दूरी न रहे.’’ सचिन ने समझाया.

‘‘लेकिन शादी से पहले यह पाप है, जोकि मेरे लिए कलंक का टीका बन सकता है. इसलिए मैं ऐसा कोई कदम नहीं उठाऊंगी जिस से मेरे व मेरे घर वालों की इज्जत पर आंच आए.’’ ममता ने साफ कह दिया.

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‘‘इस का मतलब यह हुआ कि तुम्हें मेरे ऊपर बिलकुल भी विश्वास नहीं है.’’

‘‘अगर विश्वास न होता तो तुम्हारे प्यार में इतना आगे तक नहीं बढ़ती. लेकिन तुम जिस चाहत को पूरा करने की बात कह रहे हो, वह शादी से पहले मुमकिन नहीं है.’’

सचिन को क्रोध तो बहुत आया लेकिन उस ने ममता पर जाहिर नहीं होने दिया. फिर दोनों के बीच इधरउधर की बातें होती रहीं. उस के बाद दोनों विदा हो कर अपने घर चले गए.

असल में सचिन ममता से प्यार नहीं करता था, बल्कि वह उस की देह का पुजारी था और ममता की देह को अपनी बांहों में भर कर मसोसना चाहता था. जबकि ममता उस से सच्चा प्यार करती थी.

सचिन ने बारबार कोई न कोई बहाने से ममता को फुसलाना चाहा लेकिन वह सफल नहीं हो पाया. लेकिन सचिन भी जिद्दी था. उस ने ममता को एक दिन अपनी बातों के जाल में फांस ही लिया और वह सब कर गुजरा जो वह करना चाहता था.

उसे ममता के जिस्म का चस्का लगा तो वह बारबार उसे पाने के लिए बेचैन रहने लगा. ममता एक बार उस के लिए अपने जिस्म के द्वार खोल चुकी थी, इसलिए उस ने बारबार खोलने से इनकार नहीं किया. उसे भी इस में आनंद आने लगा था.

9 जनवरी, 2020 की शाम को सचिन अपने घर पर था. लगभग सवा 7 बजे किसी का फोन आया तो वह बाइक उठा कर जाने लगा. पिता रजनीकांत ने पूछा तो सचिन ने कहा कि वह काम से सुरसा जा रहा है. इतना कह कर सचिन अपनी बाइक स्टार्ट कर के चला गया. जब वह देर रात तक नहीं लौटा तो रजनीकांत को चिंता हुई. उन्होंने सचिन का मोबाइल नंबर मिलाया तो वह बंद था.

10 जनवरी की सुबह 6 बजे इच्छनापुर गांव की सीमा से सटे गांव ओदरा के बाहर सड़क किनारे खाई में एक युवक का शव औंधे मुंह पड़ा मिला. किसी ने 112 नंबर पर काल कर के लाश पड़ी होने की सूचना दे दी.

घटनास्थल सुरसा थाना क्षेत्र में आता था, इसलिए कंट्रोल रूम से इस की सूचना सुरसा थाने को दे दी गई. सूचना पा कर सुरसा थाने के इंसपेक्टर राजकरन शर्मा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मृत युवक की उम्र 21 से 25 साल के बीच रही होगी. युवक के गले व शरीर पर अनगिनत घाव के निशान थे, जो कि किसी तेज धारदार हथियार से किए गए थे.

कुछ ही दूरी पर एक टीवीएस स्पोर्ट्स बाइक नंबर यूपी30ए पी5804 भी लावारिस हालत में खड़ी मिली. संभवत: वह मृतक की ही होगी. बाइक से बैटरी, बाइक के कागज आरसी और अन्य पेपर गायब थे.

इसी बीच सूचना पा कर एसपी अमित कुमार गुप्ता और सीओ (सिटी) विजय राणा भी आ गए. दोनों अधिकारियों ने लाश व घटनास्थल का मुआयना किया, फिर आवश्यक दिशानिर्देश दे कर वहां से चले गए. मृतक की शिनाख्त न होने पर इंसपेक्टर राजकरन शर्मा ने फोटो खिंचवा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी.

बाइक के नंबर के जरिए मृतक की शिनाख्त की कोशिश की गई तो सफलता मिल गई. लाश सचिन पांडेय की थी. उस की लाश मिलने की सूचना सचिन के घर भेज दी गई. सचिन के घर आने की बाट जोह रहे पिता रजनीकांत को उस की लाश मिलने की सूचना मिली तो उन्हें गहरा धक्का लगा. किसी तरह उन्होंने अपने आप को संभाला और फिर थाने पहुंच गए.

इंसपेक्टर राजकरन शर्मा ने उन को लाश का फोटो दिखाया तो उन्होंने उस की शिनाख्त सचिन के रूप में कर दी. शिनाख्त के बाद इंसपेक्टर शर्मा ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि सचिन का किसी युवती से प्रेम प्रसंग था. वह मोबाइल पर उसी युवती से बात करता रहता था. 9 जनवरी की शाम को सवा 7 बजे किसी के फोन करने के बाद ही वह घर से निकल गया था.

इस के बाद रजनीकांत की लिखित तहरीर के आधार पर इंसपेक्टर राजकरन शर्मा ने अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

सर्वप्रथम इंसपेक्टर शर्मा ने सचिन के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो जिस नंबर से आखिरी काल की गई थी, उस के बारे में पता किया गया. वह नंबर सुरसा कस्बे में शराब ठेके के पीछे रहने वाले हीरालाल का निकला. लेकिन उस नंबर की लोकेशन जो हमेशा रहती थी, वह सथरी गांव की थी.

इंसपेक्टर शर्मा ने 13 जनवरी को हीरालाल को सथरी गांव के पास से हिरासत में ले कर कड़ाई से पूछताछ की तो उस ने अपनी प्रेमिका सोनिका और दोस्त पंकज निवासी गांव चमरौधा थाना सुरसा के साथ मिल कर सचिन की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस ने सचिन की हत्या के पीछे की पूरी कहानी सुना दी.

सचिन ममता के घर आताजाता था. इसी आनेजाने के दौरान देह के लोभी सचिन की नजरें ममता की छोटी बहन सोनिका की देह पर भी टिकने लगीं. सोनिका का कच्ची उम्र का यौवन सचिन को अपनी ओर खींचने लगा था.

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अब सचिन की आंखों में ममता के बजाए सोनिका की देह रचीबसी रहती थी, इसलिए ममता को वह कन्नौज उस की मां के पास छोड़ आया. ममता के न होने से घर पर सोनिका ही अकेली रह जाती थी. उस घर में अकेला पा कर एक दिन सचिन ने उसे दबोच लिया.

सचिन की इस हरकत से सोनिका भौचक्की रह गई. वह जानती थी कि सचिन उस की बड़ी बहन का प्रेमी है, इसलिए ऐसी हरकत के बारे में वह सपने में भी नहीं सोच सकती थी, जैसी सचिन ने की थी.

उस ने सचिन को धमकाया कि वह वहां से चला जाए नहीं तो वह शोर मचा देगी. सोनिका के चिल्लाने की आवाज से आसपास के लोग आ सकते थे, इसलिए सचिन ने उस समय वहां से जाने में ही भलाई समझी. लेकिन वह उस दिन के बाद से सोनिका पर बारबार नाजायज संबंध बनाने के लिए दबाव बनाने लगा.

जुलाई, 2019 में सचिन लखनऊ गया तो वाहन चैकिंग के दौरान उस ने अपने 2 साथियों के साथ भागते समय पुलिस पर गोली चला दी, जिस पर इंटौजा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और इंटौजा पुलिस ने सचिन को उस के एक साथी के साथ गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. दिसंबर में वह जेल से छूटा और हरदोई में अपने गांव आ गया.

जेल से छूट कर आने के बाद वह फिर से सोनिका पर दबाव बनाने लगा. जब सोनिका ने देखा कि सचिन उस का पीछा नहीं छोड़ रहा है तो उस ने यह बात अपने प्रेमी हीरालाल को बताई. 20 वर्षीय हीरालाल सुरसा कस्बे में शराब के ठेके के पीछे रहता था. वह 3 भाइयों में सब से छोटा था और अविवाहित था. उस के दोनों बड़े भाइयों अनिल और छोटू का विवाह हो चुका था.

हीरालाल ने सोनिका को एक मोबाइल और अपनी आईडी पर एक सिमकार्ड खरीद कर दिया था. सोनिका उसी फोन से हीरालाल से बातें करती थी.

उस ने जब बताया कि सचिन उस पर नाजायज संबंध बनाने का दबाव बना रहा है और समझाने से भी नहीं मान रहा तो हीरालाल ने उस को सबक सिखाने के लिए उस की हत्या करने का निर्णय कर लिया.

सोनिका से उस ने बताया तो वह उस का साथ देने को तैयार हो गई. सचिन की हत्या में साथ देने के लिए हीरालाल ने अपने हमउम्र दोस्त पंकज से बात की तो दोस्ती की खातिर वह हीरालाल का साथ देने के लिए तैयार हो गया. तीनों ने मिल कर सचिन की हत्या की योजना बनाई.

योजनानुसार, 9 जनवरी को शाम सवा 7 बजे सोनिका ने अपने मोबाइल से सचिन को फोन कर के मिलने के लिए बुलाया. उस के बुलावे पर सचिन तुरंत बाइक उठा कर घर से चल दिया. गांव के बाहर निकलते ही उसे हीरालाल और पंकज मिल गए. हीरालाल ने सचिन से उन दोनों को सुरसा छोड़ देने को कहा तो सचिन तैयार हो गया. सचिन बाइक पर दोनों को बैठा कर चल दिया.

सुनसान जगह पा कर हीरालाल ने ओदरा गांव के पास बाइक रुकवा ली. हीरालाल ने उतरते ही साथ लाए चाकू से सचिन पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए. सचिन ने हाथपैर चलाने की कोशिश की तो पंकज ने उसे दबोच लिया. हीरालाल ने सचिन का गला चाकू से रेत दिया, जिस से सचिन की मौत हो गई.

दोनों ने उस की लाश सड़क किनारे खाई में डाल दी और उस की बाइक को एक पेड़ के पीछे खड़ा कर दिया. बाइक की बैटरी, हेलमेट, बाइक की आरसी और सचिन का पर्स पैंट से निकाल कर अपने साथ ले गए. एक जगह उन्होंने आरसी टुकड़ेटुकड़े कर के फेंक दी.

इंसपेक्टर राजकरन शर्मा ने अभियुक्तों से पूछताछ के बाद उन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, बाइक की बैटरी, हेलमेट, आरसी के टुकडे़ व सचिन का पर्स बरामद कर लिया. इस के साथ ही मुकदमे में धारा 120बी और बढ़ा दी गई.

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आवश्यक कानूनी लिखापढ़ी कर के पुलिस ने सोनिका, हीरालाल और पंकज को सीजेएम की अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में ममता और सोनिका नाम परिवर्तित हैं.

औरत सिर्फ एक देह नहीं : भाग 1

बहादुर सीधे सरल स्वभाव का था. वह सिर्फ अपने काम से काम रखता था. ऐसे व्यक्ति का सीधापन कभीकभी उस के लिए ही घातक साबित हो जाता है. बहादुर जैसा था, उस की पत्नी शीला ठीक उस के विपरीत थी. वह काफी तेज और महत्त्वाकांक्षी थी. लेकिन उस की शादी चूंकि बहादुर के साथ हुई थी, इसलिए वह मजबूरी में उस का साथ निभा रही थी.

लेकिन एक दिन शीला को मनमाफिक साथी मिला तो वह दोनों बेटियों को पति बहादुर के पास छोड़ कर उस के साथ चली गई और उस के साथ विवाह कर के कन्नौज में रहने लगी. यह करीब 10 साल पहले की बात है.

बहादुर शीला के जाने से काफी दुखी हुआ, लेकिन वह कुछ नहीं कर पाया. शीला अपनी दोनों बेटियों से भी बेहद प्यार करती थी, इसलिए दूसरा विवाह करने के बाद भी वह फोन पर दोनों बेटियों के संपर्क में रहती थी.

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बहादुर की दोनों बेटियों ममता और सोनिका ने गांव के ही स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी. इस के बाद गांव के पास ही एक कालेज में ममता इंटरमीडिएट में तो सोनिका हाईस्कूल में पढ़ रही थी. बिन मां के सीधे पिता के संरक्षण में पल रही दोनों बहनें अपनी मरजी से जिंदगी जी रही थीं. उन पर पिता का कोई अंकुश नहीं था. दोनों बहनें जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थीं.

सुरसा थाना क्षेत्र के ही इच्छनापुर गांव में रजनीकांत पांडेय रहते थे. उन के परिवार में भी उन की पत्नी विभा के अलावा 2 बेटियां और एकलौता बेटा सचिन था.

करीब 10 साल पहले विभा भी अपनी दोनों बेटियों के साथ पति का घर छोड़ कर लखनऊ रहने चली गई थी. बाद में रजनीकांत और विभा के बीच का विवाद कोर्ट तक पहुंच गया, जोकि अभी तक कोर्ट में लंबित है. सचिन जो अपने पिता के साथ ही रहता था, अपनी मां से मिलने लखनऊ जाता रहता था.

सचिन पांडेय ने हाईस्कूल पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. वह अपनी बाइक पर घूमते हुए आवारागर्दी करता था. एक दिन वह पड़ोस के गांव सथरी गया, जहां उस का दोस्त रहता था. उस समय हलकीहलकी बरसात हो रही थी, सड़क सुनसान पड़ी थी. तभी सचिन की नजर एक युवती पर पड़ी, जो पिट्ठू बैग लटकाए बारिश में भीगती हुई जा रही थी. उस ने कालेज की ड्रैस पहन रखी थी. सचिन समझ गया कि वह कालेज से छुट्टी के बाद घर लौट रही है.

सचिन ने उस लड़की को देख कर पलभर के लिए कुछ सोचा, फिर लंबेलंबे कदमों से उसी ओर बढ़ने लगा. वह उस लड़की के एकदम करीब पहुंच कर बोला, ‘‘तुम भीगते हुए क्यों जा रही हो? अगर चाहो तो छतरी के अंदर आ जाओ. मैं तुम्हें घर तक छोड़ देता हूं.’’

लड़की ने पलभर के लिए उस की ओर देखा. फिर मुसकराते हुए बोली, ‘‘मैं तो पूरी तरह भीग चुकी हूं, देखो. अब छतरी में घुसने का क्या फायदा?’’

वास्तव में लड़की पूरी तरह भीग चुकी थी. कपड़े भीग कर उस के बदन से चिपक गए थे. सचिन ने जब उस का भीगा शारीरिक सौंदर्य देखा तो उसे पाने के लिए मचल उठा. वह उसे समझाते हुए बोला, ‘‘यह बरसात का पानी है, ज्यादा भीगोगी तो बीमार पड़ सकती हो.’’

युवती ने एक पल उसे देख कर सोचा, फिर झट से छतरी के नीचे आ गई.

वह युवती कोई और नहीं ममता थी. सचिन उसे जानता तो था लेकिन उसे उस का नाम नहीं पता था. कुछ दूरी तय करने के बाद ममता का घर आ गया. वह बोली, ‘‘धन्यवाद, मुझे यहीं छोड़ दीजिए.’’

सचिन उसे घर के चबूतरे पर छोड़ आया. वह चबूतरे पर खड़ी हो कर अपने बालों को झाड़ने लगी.

उस रात खाना खाने के बाद सचिन जब बिस्तर पर लेटा तो हजार कोशिशों के बाद भी उसे नींद नहीं आई. उस की आंखों के सामने ममता का भीगा हुआ शरीर घूमता रहा.

2-3 दिनों तक वह ममता की यादों में खोया रहा. ममता की एक झलक पाने का निश्चय कर के वह शाम को बाइक ले कर घर से निकल गया.

ममता उस की हालत से अनजान अपनी सहेली से हंसीमजाक करते हुए कालेज से घर की तरफ आ रही थी. सचिन की नजर उस पर पड़ी तो वह उन दोनों से थोड़ा आगे हो कर बाइक चलाते हुए बारबार पलट कर ममता की ओर देखने लगा.

ममता इस से अनजान अपनी बातों में मशगूल हो कर आगे बढ़ती रही थी. लेकिन उस की सहेली को उस की इस हरकत का अंदाजा हो चुका था. वह ममता से बोली, ‘‘ममता देखो, वह लड़का बारबार पलट कर हमारी ओर देख रहा है. क्या तुम उसे जानती हो?’’

सचिन बाइक पर बैठे पलटा तो ममता ने उसे पहचान लिया. ममता उसे देख कर मुसकराई तो वह हड़बड़ा गया. उस की बाइक का संतुलन बिगड़ गया और वह बाइक समेत नीचे गिर गया.

यह देख कर ममता की सहेली ठहाका मार कर हंसने लगी तो ममता ने उसे डांटा दिया.

‘‘तू बड़ी तरफदारी कर रही है उस की. उसे जानती है क्या?’’ सहेली ने कहा.

‘‘हां, उस का नाम सचिन है और पड़ोस के गांव इच्छनापुर में रहता है. 2 दिन पहले ही उस ने मुझे अपनी छतरी में ढक कर घर तक छोड़ा था.’’

‘‘फिर तो वह पक्का तुझे ही देख रहा था और इसी वजह से बेचारा चारों खाने चित गिर गया.’’ सहेली बोली.

‘‘तुम इतने विश्वास के साथ कैसे कह रही हो कि वह मुझे ही देख रहा था?’’

‘‘सीधी सी बात है, मैं तो उसे जानती तक नहीं.’’

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अपनी सहेली के इस तर्क से ममता पलभर के लिए कुछ सोचे बिना न रह सकी. तब तक उस की सहेली का घर आ चुका था. वह अपने घर चली गई. ममता अकेली घर पहुंचने तक यही सोचती रही कि सचिन उसे क्यों देख रहा था.

इसी तरह कुछ दिन बीत गए. दोनों के मन में खलबली मची हुई थी. एक प्रेमरोगी बन चुका था तो दूसरा मनोरोगी. एक अपने प्यार का इजहार करना चाह रहा था तो दूसरा अपने मन की उलझन को सुलझाना चाहता था. दोनों के मन में एकदूसरे से मिलने की चाह बढ़ती जा रही थी.

उस दिन शाम का वक्त था. ममता घर का कुछ सामान खरीद कर थैला हाथ में लिए घर की तरफ जा रही थी, तभी उस की नजर सामने से आ रहे सचिन पर पड़ गई. उसे देख कर ममता के शरीर में अजब सी हलचल होने लगी.

वह सचिन के एकदम करीब आ कर बोली, ‘‘मेरी सहेली बोल रही थी कि तुम उस दिन बारबार पलट कर मुझे देख रहे थे?’’

उस का यह अप्रत्याशित प्रश्न सुन कर सचिन एक पल के लिए हड़बड़ा गया. फिर हिम्मत जुटा कर उस ने कहा, ‘‘तुम्हारी सहेली ठीक कह रही थी. मैं बारबार तुम्हें ही देख रहा था.’’

‘‘तुम ऐसा क्यों कर रहे थे?’’

‘‘अगर मैं कहूं कि मैं तुम से प्यार करता हूं तो..?’’ ममता को सचिन से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. किंतु इन शब्दों ने उसे विस्मय में जरूर डाल दिया. वह एकाएक कुछ बोल नहीं पाई, बल्कि पलभर के लिए अपलक उस की तरफ देखती रही.

‘‘इस तरह की फालतू बातों के लिए मेरे पास वक्त नहीं है.’’ वह बोली.

‘‘अगर मेरा प्यार सच्चा होगा तो तुम्हारे दिल में प्यार का फूल जरूर खिलेगा. मैं मेले में तुम्हारा इंतजार करूंगा. अगर तुम मुझ से मिलने आओगी तो मैं समझ जाऊंगा कि मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल गया है.’’ कह कर सचिन तेज कदमों से वहां से चल पड़ा.

ममता अपनी छोटी बहन सोनिका के साथ सोती थी. उस रात ममता को नींद नहीं आ रही थी. सचिन की मुसकान और बातें उस के सामने घूम रही थीं. सच्चाई यह थी कि ममता भी उसे चाहने लगी थी. उसे बेचैन देख कर सोनिका ने उस से पूछा भी था, ‘‘क्या बात है दीदी, नींद नहीं आ रही है?’’

‘‘मेरा मन नहीं लग रहा है.’’ कह कर उस ने करवट बदल ली. कुछ पल के लिए आंखें मूंदी तो सचिन के शब्द उस के कानों में गूंजने लगे. उस का मासूम चेहरा आंखों के सामने घूमने के अलावा जेहन में कई तरह के सवाल पनपने लगे. उसी समय उस ने फैसला कर लिया कि वह सचिन से मिलने जरूर जाएगी.

अगले दिन सजधज कर ममता मेले में गई तो उस ने सचिन को नदी के किनारे इंतजार करते पाया. उसे देखते ही सचिन का चेहरा खिल उठा.

वह तुरंत उस के नजदीक आ कर बोला, ‘‘मुझे मालूम था कि तुम जरूर आओगी.’’

‘‘तुम पर तरस खा कर आ गई. नहीं आती तो कहीं नदी में कूद कर जान दे देते तो बेकार में मेरे सिर पर पाप चढ़ जाता.’’ मंदमंद मुसकराते हुए ममता ने कहा तो सचिन ने उस का हाथ पकड़ कर चूम लिया.

‘‘क्या कर रहे हो, मेरी छोटी बहन भी साथ आई है. उस से बहाना कर के आई हूं. मुझे जल्दी जाना होगा.’’

‘‘थोड़ी देर तो बैठो.’’ सचिन ने उसे बिठाया.

कुछ पल की खामोशी के बाद ममता बोली, ‘‘हम दोनों का प्यार हमारे घर वाले कबूल नहीं करेंगे.’’

‘‘जब हम दोनों को कबूल है तो दुनिया की क्या परवाह करना.’’ सचिन बोला.

‘‘दुनिया की नहीं पर घर वालों की परवाह तो करनी ही पड़ेगी. अच्छा, अब मैं चलती हूं.’’ कह कर वह चली गई.

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इस के बाद अकसर दोनों का मिलनाजुलना शुरू हो गया.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

बदलती दिशा : रमन का व्यवहार क्यों हो गया था रूखा

औरत सिर्फ एक देह नहीं

बदलती दिशा : भाग 3- रमन का व्यवहार क्यों हो गया था रूखा

दया को साथ ले कर जया घर आई. अलमारी का लौकर खोला तो वह एकदम खाली पड़ा था. जया को चक्कर आ गए. दया उस का चेहरा देख चौंकी और समझ गई कि कुछ गड़बड़ है. बोली, ‘‘क्या हुआ, जया?’’

‘‘40 हजार के विकासपत्र थे. पिछले महीने मेच्योर हो कर 80 हजार हो गए थे. सोच रही थी कि उठा कर उन्हें डबल कर दूंगी पर…’’

तभी अम्मां पानी ले कर आईं और बोलीं, ‘‘बीबीजी, एक दिन दोपहर में आ कर साहब अलमारी से कुछ कागज निकाल कर ले गए थे.’’

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‘‘कब?’’

‘‘पिछली बार दौरे पर जाने से पहले.’’

जया सिर थाम कर बिस्तर पर बैठ गई. दया ने ढाढ़स बंधाया.

‘‘जाने दे, जया, तू परेशान न हो. कहीं न कहीं से पैसे का जुगाड़ हो ही जाएगा.’’

‘‘एक बार डाकघर चल तो मेरे साथ.’’

दोनों डाकघर आईं और बड़े बाबू से बात की तो उन्होंने कहा, ‘‘आप के पति 10-12 दिन पहले कैश करा कर रकम ले गए थे. आप को पता नहीं क्या?’’

दोनों चुपचाप डाकघर से निकल आईं. घर आ कर रो पड़ी जया.

‘‘धैर्य रख, जया,’’ दया बोली, ‘‘अब तू भी सावधान हो जा. जो गया सो गया पर अब और नुकसान न होने पाए. इस का ध्यान रख.’’

थोड़ी देर बाद वह फिर बोली, ‘‘जया, एक बात बता…तेरा प्यार अंधा है या तू रमन से डरती है.’’

‘‘अब तक मैं प्यार में अंधी ही थी पर अब मेरी आंख खुल गई है.’’

‘‘ऐसा है तो थोड़ा साहस बटोर. तू तो जो है सो है, प्रिंस के भविष्य को अंधेरे में मत डुबा दे. उसे एक स्वस्थ जीवन दे. अकेले उसे पालने की सामर्थ्य है तुझ में.

‘‘जया, मैं तुझे एक बात बताना चाहती थी, पर तुझे मानसिक कष्ट होगा यह सोच कर आज तक नहीं बोली थी. मेरी भानजी नैना को तो तू जानती है. पिछले माह उस की शादी हुई तो वह पति के साथ हनीमून पर शिमला गई थी. वहां रमन एक युवती को ले कर जिस होटल में ठहरा था उसी में नैना भी रुकी हुई थी.  नैना जब तक शिमला में रही रमन की नजरों से बचती रही पर लौट कर उस ने मुझे यह बात बताई थी.’’

अब सबकुछ साफ हो गया था. जया ने गहरी सांस ली.

‘‘हां, तू ठीक कह रही है…बदलाव से डर कर चुप बैठी रही तो मेरे साथ मेरे बच्चे का भी सर्वनाश होगा, मम्मी भी पिछले रविवार को आ कर यही कह रही थीं. कुछ करूंगी.’’

2 दिन बाद रमन लौटा. प्रिंस को बुखार था इसलिए जया उसे गोद में ले कर बैठी थी. रमन ने उस का हाल भी नहीं पूछा, आदत के मुताबिक आते ही बोला, ‘‘अम्मां से कहो, बढि़या पत्ती की एक कप चाय बना दें.’’

‘‘पहले बाजार जा कर तुम दूध का पैकेट ले आओ तब चाय बनेगी.’’

रमन हैरान हो जया का मुंह देखने लगा.

‘‘मैं… मैं दूध लेने जाऊं?’’

‘‘क्यों नहीं? सभी लाते हैं.’’

जया ने इतनी रुखाई से कभी बात नहीं की थी. रमन कुछ समझ नहीं पा रहा था.

‘‘अम्मां को भेज दो.’’

‘‘अम्मां के पास और भी काम हैं.’’

‘‘ठीक है, मैं ही लाता हूं, पैसे दे दो.’’

‘‘अपने पैसों से लाओ और घर का भी कुछ सामान लाना है…लिस्ट दे रही हूं, लेते आना.’’

‘‘रहने दो, चाय नहीं पीनी.’’

रमन बैठ गया. प्रिंस सो गया तो जया अखबार ले कर पढ़ने लगी. रमन तैयार होते हुए बोला, ‘‘100 रुपए दे देना, पर्स एकदम खाली है.’’

‘‘मैं एक पैसा भी तुम्हें नहीं दे सकती, 100 रुपए तो बड़ी बात है… और तुम बैठो, मुझे तुम से कुछ कहना है.’’

रमन बैठ गया.

‘‘विकासपत्र के 80 हजार रुपए निकालते समय मुझ से पूछने की जरूरत नहीं समझी?’’

‘‘पूछना क्या? जरूरत थी, ले लिए.’’

‘‘अपनी जरूरत के लिए तुम खुद पैसों का इंतजाम करते, मेरे रुपए क्यों लिए और वह भी बिना पूछे?’’

‘‘तुम्हारे कहां से हो गए…शादी में दहेज था. दहेज में जो आता है उस पर लड़की का कोई अधिकार नहीं होता.’’

‘‘कौन सा कानून पढ़ कर आए हो? उस में दहेज लेना अपराध नहीं होता है क्या? आज 5 महीने से पूरा घर मैं चला रही हूं, तुम्हारा पैसा कहां जाता है?’’

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‘‘मैं कितने दिन खाता हूं तुम्हारा, दौरे पर ही तो रहता हूं.’’

‘‘कहां का दौरा? शिमला का या गांधीनगर का?’’

तिलमिला उठा रमन, ‘‘मैं कहीं भी जाता हूं…तुम जासूसी करोगी मेरी?’’

‘‘मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं. इतने दिन मूर्ख बनाते रहे…अब मेरी एक सीधी बात सुन लो. यह मेरा घर है…मेरे नाम से है…मैं किस्त भर रही हूं…तुम्हारे जैसे लंपट की मेरे घर में कोई जगह नहीं. मुझे पिं्रस को इनसान बनाना है, तुम्हारे जैसा लंपट नहीं. इसलिए चाहती हूं कि तुम्हारी छाया भी मेरे बच्चे पर न पडे़. तुम आज ही अपना ठिकाना खोज कर यहां से दफा हो जाओ.’’

‘‘मुझे घर से निकाल रही हो?’’

‘‘तुम्हें 420 के अपराध में पुलिस के हाथों भी दे सकती थी पर नहीं. वैसे हिसाब थोड़ा उलटा पड़ गया है न.  आज तक तो औरतों को ही धक्के मारमार कर घर से निकाला जाता था…यहां पत्नी पति को निकाल रही है.’’

रमन बुझ सा गया, फिर कुछ सोच कर बोला, ‘‘मैं तुम्हारी शर्तों पर समझौता करने को तैयार हूं.’’

‘‘मुझे कोई समझौता नहीं चाहिए. तुम जैसे धूर्त व मक्कार पति की छाया से भी मैं अपने को दूर रखना चाहती हूं.’’

‘‘तुम घर तोड़ रही हो.’’

‘‘यह घर नहीं शोषण की सूली थी जिस पर मैं तिलतिल कर के मरने के लिए टंगी थी पर अब मुझे जीवन चाहिए, अपने बच्चे के लिए जीना है मुझे.’’

बात बढ़ाए बिना रमन ने अपने कपड़े समेटे और चला गया.

जया ने मां को फोन किया : ‘‘मम्मी, आप की सीता ने निरपराधी हो कर भी बिना विरोध किए अग्निपरीक्षा दी थी और मैं एक छलांग में आग का दरिया पार कर आई. रमन को घर से भगा दिया.’’

‘‘सच, कह रही है तू?’’

‘‘एकदम सच, मम्मी. मां के सामने जब बच्चे के भविष्य का सवाल आ कर खड़ा होता है तो वह संसार की हर कठिनाई से टक्कर लेने के लिए खड़ी हो जाती है.’’

‘‘तू मेरे पास चली आ. यहां ऊपर का हिस्सा खाली पड़ा है.’’

‘‘नहीं, मम्मी, अपने घर में रह कर ही मेरा प्रिंस बड़ा होगा. अम्मां अब मेरे साथ ही रहेंगी, घर नहीं जाएंगी.’’

‘‘जैसी तेरी इच्छा, बेटी,’’ कह कर जया की मां ने फोन रख दिया.

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बदलती दिशा : भाग 2- रमन का व्यवहार क्यों हो गया था रूखा

जया की सांस रुक गई. एक पल को लगा कि चारों ओर अंधेरा छा गया है फिर भी अपने को संभाल कर बोली, ‘‘कोई गलती तो…मतलब डीलडौल में रमन जैसा कोई दूसरा आदमी…’’

‘‘रमन मेरे बचपन का साथी है. उस को पहचानने में मैं कोई भूल कर ही नहीं सकता.’’

‘‘पर भैया, उन्होंने आज सुबह ही बंगलौर से फोन किया था. रोज ही करते हैं.’’

‘‘उस का मोबाइल और तुम्हारा लैंडलाइन, तुम को क्या पता कहां से बोल रहा है?’’

जया स्तब्ध रह गईर्. रमन निर्मोही है यह तो वह समझ गई थी पर धोखा भी दे सकता है ऐसा तो सपने में भी नहीं सोचा था.

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रंजीत गंभीर और चिंतित था. बोला, ‘‘तुम्हारे पारिवारिक मामलों में मेरा दखल ठीक नहीं है फिर भी पूछ रहा हूं. रमन तुम को अपनी तनख्वाह ला कर देता है या नहीं?’’

‘‘तनख्वाह तो कभी नहीं दी…हां, घरखर्च देते थे पर 4 महीने से एक पैसा नहीं दिया है. कह रहे थे कि गलती से ओवर पेमेंट हो गई, सो वह रिफंड हो रही है. उस में आधी तनख्वाह कट जाती है.’’

‘‘जया, तुम पढ़ीलिखी हो, समझदार हो, अच्छे पद पर नौकरी कर रही हो, घर के बाहर का संसार देख रही हो फिर भी रमन ने तुम्हें मूर्ख बनाया और तुम बन गईं. यह कैसा अंधा विश्वास है तुम्हारा पति पर. सुनो, अपना भला और बच्चे का भविष्य ठीक रखना चाहती हो तो रमन पर लगाम कसो. अपने पैसे संभालो.’’

जया की नींद उड़ गई. चिंता से सिर बोझिल हो गया. वह खिड़की के सहारे बिछी आरामकुरसी पर चुपचाप बैठी रमन के बारे में मां की नसीहतों को याद करने लगी.

संपन्न मातापिता की बड़ी लाड़ली बेटी जया, रमन के लिए उन को भी त्याग आई थी.

रमन का हावभाव और उस के बात करने का ढंग कुछ इस तरह का रूखा था जो किसी संस्कारी व्यक्ति को पसंद नहीं आता था. इस के लिए जया, रमन को दोषी नहीं मानती थी क्योंकि उसे संस्कारवान बनाने वाला कोई था ही नहीं. जिस  समय रमन का उस के परिवार में आनाजाना था तब वह मामूली नौकरी करता था और जया ने लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर के अधिकारी के पद पर काम शुरू किया था. लेकिन तब जया, रमन के प्रेम में एकदम पागल हो गई थी.

मां ने समझाया भी था कि इतने अच्छेअच्छे घरों से रिश्ते आ रहे हैं और तू ने किसे पसंद किया. यह अच्छा लड़का नहीं है, इस के चेहरे से चालाकी और दिखावा टपकता है. तू क्यों नहीं समझ पा रही है कि यह तुझ से प्यार नहीं करता बल्कि तेरे पैसे से प्यार करता है.

जया तो रमन के कामदेव जैसे रूप पर मर मिटी थी, सो एक दिन घर में बिना बताए उस ने चुपचाप रमन के साथ कोर्ट मैरिज कर ली और दोनों पतिपत्नी बन गए. तब से मांबाप से उस का कोई संबंध ही नहीं रहा. अब इस शहर में उस का ऐसा कोई नहीं है जिस के सामने वह रो कर जी हलका कर सके. कोई विपदा आई तो कौन सहारा देगा उसे?

मां के कहे शब्द और रमन  के आचरण की तुलना करने लगी तो पाया कि जब से विवाह हुआ है तब से ले कर अब तक कभी रमन ने उस की इच्छाओं को मान्यता नहीं दी. कभी उसे खुश करने का प्रयास नहीं किया और वह इन सब बातों को नजरअंदाज करती रही, सोचती रही कि रमन का पारिवारिक जीवन कुछ नहीं था इसलिए यह सब सीख नहीं पाया.

शादी के बाद 2 बार घूमने गई थी पर दोनों बार रमन ने अपनी ही इच्छा पूरी की. पहली बार जया ‘गोआ’ जाना चाहती थी और रमन उसे ले कर ‘जयपुर’ चला गया. दूसरी बार वह ‘शिमला’ जाना चाहती थी तो जिद कर रमन उसे ‘केरल’ के कोच्चि शहर ले गया था.

प्रिंस के होने के बाद तो उस ने घूमने जाने का नाम ही नहीं लिया. मजे की बात यह कि दोनों यात्रा का पूरा पैसा रमन ने उस से कैश ले लिया. आश्चर्य यह कि रमन के ऐसे व्यवहार से भी जया के मन में उस के प्रति कोई विरूप भाव नहीं जागा.

अभी तक रमन पर जया को इतना विश्वास था कि पति पास रहे या दूर उस का सुरक्षा कवच था, ढाल था पर अब विश्वास टुकड़ेटुकड़े हो कर बिखर गया…कहीं भी कुछ नहीं बचा. अब अपनी और बच्चे की रक्षा उस को ही करनी होगी.

रमन लौटा, एकदम टे्रन के निश्चित समय पर. जया ने उसे गौर से देखा तो उस के चेहरे पर कहीं भी सफर की थकान के चिह्न नहीं थे.

‘‘जया, जल्दी से नाश्ता लगवा दो. आफिस के लिए निकलना है.’’

अम्मां ने परांठासब्जी प्लेट में रख खाना लगा दिया. खाना खातेखाते रमन बोला, ‘‘200 रुपए मेरे पर्स में रख दो, स्कूटर में तेल डलवाना है. मेरा पर्स खाली है.’’

पहले कहते ही निहाल हो कर जया पैसे रख देती थी पर इस बार अभी से समेटना शुरू हो गया.

‘‘मेरे पास पैसे नहीं हैं. मेरी तनख्वाह एक हफ्ते बाद मिलेगी.’’

‘‘तो क्या मैं बस में जाऊं या पैदल?’’

‘‘वह समस्या तुम्हारी है मेरी नहीं.’’

रमन अवाक् सा उस का मुंह देखने लगा. जया  नहाने चली गई. नहा कर बाहर आई तो रमन तैयार हो रहा था.

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‘‘सुनो, मुझे कुछ कहना है.’’

‘‘हां, कहो…सुन रहा हूं.’’

‘‘घर का पूरा खर्च मैं चला रही हूं… तुम देना तो दूर उलटे लेते हो. अगले महीने से ऐसा नहीं होगा. तुम को घरखर्च देना पड़ेगा.’’

‘‘पर मेरा रिफंड…’’

‘‘वह तो जीवन भर चलता रहेगा. ओवर पेमेंट का इतना सारा पैसा गया कहां? देखो, जैसे भी हो, घर का खर्च तुम को देना पड़ेगा.’’

‘‘कहां से दूंगा? मेरे भी 10 खर्चे हैं.’’

‘‘घर चलाने की जिम्मेदारी तुम्हारी है मेरी नहीं.’’

रमन खीसें निकाल कर बोला, ‘‘डार्लिंग, नौकरी वाली लड़की से शादी घर चलाने के लिए ही की थी, समझीं.’’

जया को लगा उस के सामने एक धूर्त इनसान बैठा है.

‘‘और सुनो, रात को खाने में कीमा और परांठा बनवाना.’’

‘‘डेढ़ सौ रुपए गिन कर रख जाओ कीमा और घी के लिए, तब बनेगा.’’

‘‘रहने दो, मैं सब्जीरोटी खा लूंगा.’’

उस दिन जया दफ्तर में बैठी काम कर रही थी कि उस के ताऊ की बेटी दया का फोन आया. घबराई सी थी. दया से उसे बहुत लगाव है. उस के साथ जया जबतब फोन पर बात करती रहती है.

‘‘जया, मैं तेरे पास आ रही हूं.’’

‘‘बात क्या है? कुशल तो है न?’’

‘‘मैं आ कर बताऊंगी.’’

आधा घंटा भी नहीं लगा कि दया चली आई. वास्तव मेें ही वह परेशान और घबराई हुई थी.

‘‘पहले बैठ, पानी पी…फिर बता हुआ क्या?’’

‘‘मेरी छोटी ननद का रिश्ता पक्का हो गया है, पर महज 50 हजार के लिए बात अटक गई. लड़का बहुत अच्छा है पर 50 हजार का जुगाड़ 2 दिन में नहीं हो पाया तो रिश्ता हाथ से निकल जाएगा. सब जगह देख लिया…अब बस, तेरा ही भरोसा है.’’

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‘‘परेशान मत हो. मेरे पास 80 हजार रुपए पड़े हैं. तू चल मेरे साथ, मैं पैसे दे देती हूं.’’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

बदलती दिशा : भाग 1- रमन का व्यवहार क्यों हो गया था रूखा

जया ने घड़ी देखी और ब्रश पकड़े हाथों की गति बढ़ा दी. आज उठने में देर हो गई है. असल में पिं्रस की छुट्टी है तो उस ने अलार्म नहीं लगाया था. यही कारण है कि 7 बजे तक वह सोती रह गई. प्रिंस तो अभी भी सो रहा है.

कल रात जया सो नहीं पाई थी, भोर में सोई तो उठने का समय गड़बड़ा गया. वैसे आज प्रिंस को तैयार करने का झमेला नहीं है. बस, उसे ही दफ्तर के लिए तैयार होना है.

अम्मां ने चलते समय उसे टिफिन पकड़ाया और बोलीं, ‘‘परांठा आमलेट है, बीबी. याद से खा लेना. लौटा कर मत लाना. सुबह नाश्ता नहीं किया…चाय भी आधी छोड़ दी.’’

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अम्मां कितना ध्यान रखती हैं, यह सोच कर जया की आंखों में आंसू झिलमिला उठे. यह कहावत कितनी सही है कि अपनों से पराए भले. अपने तो पलट कर भी नहीं देखते लेकिन 700 रुपए और रोटीकपड़े पर काम करने वाली इस अम्मां का कितना ध्यान है उस के प्रति. आज जया उसे हटा दे तो वह चली जाएगी, यह वह भी जानती है फिर भी कितना स्नेह…कैसी ममता है.

ढलती उमर में यह औरत पराए घर काम कर के जी रही है. भोर में आ कर शाम को जाती है फिर भी जया के प्रति उस के मन में कितना लगावजुड़ाव है. और पति रमन…उस के साथ तो जन्मजन्मांतर के लिए वह बंधी है. तब भी कभी नहीं पूछता कि कैसी हो. इतना स्वार्थी है रमन कि किसी से कोई मतलब नहीं. बस, घर में सबकुछ उस के मन जैसा होना चाहिए. उस के सुखआराम की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए. वह अपने को घर का मालिक समझता है जबकि तनख्वाह जया उस से डबल पाती है और घर चलाती है.

अच्छे संस्कारों में पलीबढ़ी जया मांदादी के आदर्शों पर चलती है…उच्च पद पर नौकरी करते हुए भी उग्र- आधुनिकता नहीं है उस के अंदर. पति, घर, बच्चा उस के प्राण हैं और उन के प्रति वह समर्पित है. उसे बेटे प्रिंस से, पति रमन से और अपने हाथों सजाई अपनी गृहस्थी से बहुत प्यार है.

बचपन से ही जया भावुक, कोमल और संवेदनशील स्वभाव की है. पति उस को ऐसा मिला है, जो बस, अपना ही स्वार्थ देखता है, पत्नी बच्चे के प्रति कोई प्यारममता उस में नहीं है.  जया तो उस के लिए विलास की एक वस्तु मात्र है.

जया घर से निकली तो देर हो गई थी. यह इत्तेफाक ही था कि घर से निकलते ही उसे आटो मिल गया और वह ठीक समय पर दफ्तर पहुंच गई.

कुरसी खींच कर जया सीट पर बैठी ही थी कि चपरासी ने आकर कहा, ‘‘मैडम, बौस ने आप को बुलाया है.’’

जया घबराई…डरतेडरते उन के कमरे में गई. वह बड़े अच्छे मूड में थे. उसे देखते ही बोले, ‘‘जया, मिठाई खिलाओ.’’

‘‘किस बात की, सर?’’ अवाक् जया पूछ बैठी.

‘‘तुम्हारी सी.आर. बहुत अच्छी गई थी…तुम को प्रमोशन मिल गया है.’’

धन्यवाद दे कर जया बाहर आई, फिर ऐसे काम में जुट गई कि सिर उठाने का भी समय नहीं मिला.

दफ्तर से छुट्टी के बाद वह घर आ कर सीधी लेट गई. प्रिंस भी आ कर उस से लिपट गया. अम्मां चाय लाईं.

‘‘टिफन खाया?’’

‘‘अरे, अम्मां…आज भी लंच करना ध्यान नहीं रहा. अम्मां, ऐसा करो, ओवन में गरम कर उसे ही दे दो.’’

‘‘रहने दो, मैं गरमगरम नमक- अजवाइन की पूरी बना देती हूं…पर बीबी, देह तुम्हारी अपनी है, बच्चे को पालना है. ऐसा करोगी तो…’’

बड़बड़ाती अम्मां रसोई में पूरी बनाने चली गईं. जया कृतज्ञ नजरों से उन को जाते हुए देखती रही. थोड़ी ही देर में अचार के साथ पूरी ले कर अम्मां आईं.

‘‘रात को क्या खाओगी?’’

‘‘अभी भर पेट खा कर रात को क्या खाऊंगी?’’

‘‘प्रिंस की खिचड़ी रखी है,’’ यह बोल कर अम्मां दो पल खड़ी रहीं फिर बोलीं, ‘‘साहब कब आएंगे?’’

‘‘काम से गए हैं, जब काम खत्म होगा तब आएंगे.’’

रात देर तक जया को नींद नहीं आई. अपने पति रमन के बारे में सोचती रही कि वह अब कुछ ज्यादा ही बाहर जाने लगे हैं. घर में जब रहते हैं तो बातबात पर झुंझला पड़ते हैं. उन के हावभाव से तो यही लगता है कि आफिस में शायद काम का दबाव है या किसी प्रकार का मनमुटाव चल रहा है. सब से बड़ी चिंता की बात यह है कि वह पिछले 4 महीने से घर में खर्च भी नहीं दे रहे हैं. पूछो तो कहते हैं कि गलती से एक वाउचर पर उन से ओवर पेमेंट हो गई थी और अब वह रिफंड हो रही है. अब इस के आगे जया क्या कहती…ऐसी गलती होती तो नहीं पर इनसान से भूल हो भी सकती है…रमन पर वह अपने से ज्यादा भरोसा करती है. थोड़ा सख्त मिजाज तो हैं पर कपटी नहीं हैं. सोचतेसोचते पता नहीं कब उसे नींद आ गई.

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अगले दिन दफ्तर में उस के प्रमोशन की बात पता चलते ही सब ने उसे बधाई दी और पार्टी की मांग की.

लंच के बाद जम कर पार्टी हुई. सब ने मिल कर उसे फूलों का गुलदस्ता उपहार में दिया. जया मन में खुशी की बाढ़ ले कर घर लौटी पर घर आ कर उसे रोना आया कि ऐसे खुशी के अवसर पर रमन घर में नहीं हैं.

अम्मां के घर मेहमान आने वाले हैं इसलिए वह जल्दी घर चली गईं. ड्राइंगरूम में कार्पेट पर बैठी वह प्रिंस के साथ ब्लाक से रेलगाड़ी बना रही थी कि रमन का पुराना दोस्त रंजीत आया.

रंजीत को देखते ही जया हंस कर बोली, ‘‘आप…मैं गलत तो नहीं देख रही?’’

‘‘नहीं, तुम सही देख रही हो. मैं रंजीत ही हूं.’’

‘‘बैठिए, वीना भाभी को क्यों नहीं लाए?’’

‘‘वीना क ा अब शाम को निकलना कठिन हो गया है. दोनों बच्चों को होमवर्क कराती है…रमन आफिस से लौटा नहीं है क्या?’’

‘‘वह यहां कहां हैं. आफिस के काम से बंगलौर गए हैं.’’

रंजीत और भी गंभीर हो गया.

‘‘जया, पता नहीं कि तुम मेरी बातों पर विश्वास करोगी या नहीं पर मैं तुम को अपनी छोटी बहन मानता हूं इसलिए तुम को बता देना उचित समझता हूं…और वीना की भी यही राय है कि पत्नी को ही सब से पीछे इन सब बातों का पता चलता है.’’

जया घबराई सी बोली, ‘‘रंजीत भैया, बात क्या है?’’

‘‘रमन कहीं नहीं गया है. वह यहीं दिल्ली में है.’’

चौंकी जया. यह रंजीत कह रहा है, जो उन का सब से बड़ा शुभचिंतक और मित्र है. ऐसा मित्र, जो आज तक हर दुखसुख को साथ मिल कर बांटता आया है.

‘‘जया, तुम्हारे मन की दशा मैं समझ रहा हूं. पहले मैं ने सोचा था कि तुम को नहीं बताऊंगा पर वीना ने कहा कि तुम को पता होना चाहिए, जिस से कि तुम सावधान हो जाओ.’’

‘‘पर रंजीत भैया, यह कैसे हो सकता है?’’

‘‘सुनो, कल मैं और वीना एक बीमार दोस्त को देखने गांधीनगर गए थे. वीना ने ही पहले देखा कि रमन आटो से उतरा तो उस के हाथ में मून रेस्तरां के 2 बड़ेबड़े पोलीबैग थे. उन को ले वह सामने वाली गली के अंदर चला गया. मैं बुलाने जा रहा था पर वीना ने  रोक दिया.’’

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जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

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