चालबाज शुभी- भाग 2

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

अजय अरोड़ा ने पूछा, तो प्रतिउत्तर में शुभी जोरों से रोने लगी.

“मैं तो आप को एक नेक इनसान समझती थी, पर मुझे क्या पता था कि आप भी और मर्दों की तरह ही निकलेंगे,” शुभी ने सुबकते हुए कहा.

“आखिर बात क्या है? कुछ तो बताओ,” परेशान हो उठे थे अजय अरोड़ा.

इस के जवाब में शुभी ने अपने मुंह से एक शब्द भी नहीं निकाला, बल्कि अपने मोबाइल की स्क्रीन को औन कर के अजय अरोड़ा की तरफ बढ़ा दिया.

अजय ने मोबाइल की स्क्रीन पर देखा, तो मोबाइल पर कुछ तसवीरें थीं, जिस में शुभी के जिस्म का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह से नग्न था और अजय अरोड़ा उस के ऊपर लेटे हुए थे. एक नहीं, बल्कि कई तसवीरें थीं इन दोनों की, जो ये बताने के लिए काफी थीं कि कल रात उन दोनों के बीच जिस्मानी संबंध बने थे.

“पर, ये सब मैं ने नहीं किया…” अजय अरोड़ा ने कहा.

“आप सारे मर्दों का यही तरीका रहता है… कल जब मैं दूध का गिलास ले कर आई, तो आप नशे में लग रहे थे और आप ने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे साथ गलत काम किया… गलती मेरी ही है, आखिर मैं ने आप की आंखों में वासना के कीड़ों को क्यों नहीं पहचान लिया?” रोते हुए शुभी ने कहा.

“पर, भला ये तसवीरें तुम ने क्या सोच कर खींचीं?” माथा ठनक उठा था अजय अरोड़ा का.

“अगर, मैं ये तसवीरें नहीं लेती, तो भला आप क्यों मानते कि आप ने मेरे साथ गलत किया है,” शुभी का सवाल अचूक था और सारे सुबूत सामने थे, इसलिए अजय अरोड़ा का मन भी इन सब बातों को मानने के लिए मजबूर था, क्योंकि बचपन में उन्हें नींद में चलने की बीमारी थी, जो कि काफी समय बीतने के बाद ही सही हो सकी थी.

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“चलो, अब जो भी हुआ, उसे भूल जाओ… मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूं…पर, ये बात किसी से न कहना… मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं,” अजय अरोड़ा ने कहा.

अजय अरोड़ा रात में 2 बजे तक काम किया करते थे, पर आज पता नहीं क्या हुआ कि उन की पलकें भारी होने लगीं और उन्हें जल्दी नींद आ गई. वे अपना लैपटौप सिरहाने रख कर सो गए.

अगली सुबह जब अजय अरोड़ा की आंखें खुलीं, तो उन्होंने अपने पास बैठी हुई शुभी को देखा. उसे अपने बिस्तर पर बैठा देख अजय अरोड़ा चौंक पड़े और पूछ बैठे, “क्या बात है शुभी, तुम इतनी सुबहसुबह मेरे कमरे में… और वो भी मेरे बिस्तर पर क्या कर रही हो?”

“नहीं, आप मुझ से बड़े हैं. मेरे सामने हाथ मत जोड़िए… हां, अगर मेरे लिए कुछ करना ही चाहते हैं, तो मेरी बेटियों को अपने बेटे नरेश के साथ जायदाद में बराबर की हिस्सेदारी दिलवा दीजिए,” शुभी ने कहा.

शुभी की बात सुन कर अजय अरोड़ा को ये समझते देर नहीं लगी कि वो बुरी तरह से उस के बिछाए जाल में फंस गए हैं, पर अब उन के पास उस की बात मानने के अलावा और कोई चारा भी नहीं था, इसलिए वे शुभी की बात मानने पर राजी हो गए और उन्होंने जायदाद और अरोड़ा ग्रुप के वित्तीय मामलों मे नरेश के साथसाथ शुभी की बड़ी बेटी को भी शामिल कर लिया.

“देखो… मैं अभी सिर्फ तुम्हारी बड़ी बेटी को ही कंपनी में शामिल कर सकता हूं, क्योंकि कंपनी के और भी शेयरहोल्डर हैं, उन्हें भी मुझे जवाब देना है…

‘‘अगर चाहो तो मैं तुम्हारी छोटी बेटी को अपने दूसरे प्रोजैक्ट का इंचार्ज बना सकता हूं… पर, उस के लिए उसे कोलकाता जाना होगा,” अजय अरोड़ा ने कहा.

“बिलकुल जाएगी… कोलकाता तो क्या वह भारत के किसी भी हिस्से में जाएगी… बस, मुझे पैसा और पावर चाहिए… मैं आज ही उसे तैयारी करने को कहती हूं.”

अपनी इस कूटनीतिक जीत पर मन ही मन बहुत खुश हो रही थी शुभी और इसी जीत को सेलिब्रेट करने के लिए ‘बरिस्ता‘ कौफीहाउस में जा पहुंची, जहां उस के सामने वाली कुरसी पर बैठा हुआ शख्स उसे ऊपर से नीचे तक निहारे जा रहा था.

“अब तो तुम बहुत खुश होगी… आखिर अरोड़ा ग्रुप में बराबरी का हिस्सा मिल ही गया तुम्हें,” वो घनी दाढ़ी वाले शख्स ने कहा, जिस का नाम रौबिन था,

“मिला नहीं है, बल्कि छीना है मैं ने… पर, असली खुशी तो मुझे उस दिन मिलेगी, जब मैं उस नरेश के बच्चे को एमडी की कुरसी से हटवा दूंगी,” नफरत भरे लहजे में शुभी बोल रही थी.

“और उस के लिए अगर तुम्हें मेरी कोई भी जरूरत पड़े तो बंदा हाजिर है… पर, उस की कीमत देनी होगी,‘‘ रौबिन ने शरारती लहजे में कहा.

“बोलो, क्या कीमत लोगे?”

“बस, जिस तरह की तसवीरों में तुम अजय अरोड़ा के साथ नजर आ रही हो, वैसी ही जिस्मानी हालत में मेरे साथ एक रात गुजार लो.”

“बस… इतनी सी बात… अरे, तुम्हारे लिए मैं ने मना ही कब किया है,” शुभी की बातें सुन कर रौबिन अपने हाथ से शुभी के हाथ को सहलाने लगा.

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रौबिन और शुभी की जानपहचान कालेज के समय से थी और इतना ही नहीं, दोनों एकदूसरे से प्यार भी करते थे और शुभी की शादी हो जाने के बाद भी दोनों ने इस रिश्ते को बनाए रखा.

शुभी और रौबिन के प्यार का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता था कि आज भी अपनी खुशी को बांटने के लिए शुभी अपने पति के पास न हो कर रौबिन के पास ही आई थी.

कभी रौबिन से इश्क करने वाली शुभी को आज भी इस बात से कतई परहेज नहीं था कि आज रौबिन एक छोटामोटा ड्रग पेडलर बन चुका था, जो कि पैसा कमाने के लिए अफीम और अन्य नशीले पदार्थों की खरीदफरोख्त किया करता था और कई बार हवालात की हवा भी खा चुका था.

चालबाज शुभी- भाग 3

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

भले ही शुभी की लड़कियों को बिजनैस में शामिल कर लिया गया था और वे दोनों बिजनैस की बारीकियां सीख रही थीं, पर शुभी को हमेशा ही ये डर खाए जाता था कि हो न हो, नरेश को ही इस जायदाद का असली वारिस घोषित किया जाएगा और वो तो ऐसा बिलकुल नहीं चाहती थी, पर उस के पास अभी कोई और चारा नहीं था, इसलिए शुभी अपने अगले वार के लिए सही वक्त का इंतजार कर रही थी.

और वो सही वक्त कुछ महीनों बाद आ ही गया, जब नरेश की शादी तय करा दी गई और बड़ी धूमधाम से उस की शादी हो गई, विजय और अजय अरोड़ा के साथ में कितना नाची थी शुभी? उस की खुशी देख कर जान पड़ता था कि जैसे उस के सगे बेटे की शादी हो, पूरे शहर में नरेश की शादी की भव्यता की चर्चा कई दिन तक होती रही.

घर के मेहमान भी जा चुके थे और आज नरेश और उस की पत्नी बबिता अपना हनीमून मनाने के लिए स्विट्जरलैंड के लिए जाने वाले थे. सुबह से ही शुभी सारी तैयारियां करवा रही थी. मन में खुशियों का सागर हिलोरे ले रहा था नरेश और बबिता के, इसलिए फ्लाइट के समय से पहले ही नरेश एयरपोर्ट पहुंच जाना चाहता था. उस ने अपना सारा सामान एक जगह इकट्ठा कर लिया और अपनी पत्नी बबिता की प्रतीक्षा करने लगा. शुभी के साथ नरेश को अपनी पत्नी आती दिखाई दी तो नरेश ने राहत की सांस ली.

“ये लो… इसे समयसमय पर खाते रहना… तुम्हें अभी ताकत की बहुत जरूरत पड़ेगी,” शुभी ने नरेश के हाथ में एक थैली पकड़ाते हुए कहा, “पर, चाची इस में है क्या?”

“अरे, इसे खोल कर यहां मत देखो… ये तुम्हारे लिए ताकत वाले लड्डू हैं… हनीमून के लिए खास बनाए हैं,” शुभी रहस्मयी ढंग से मुसकराते हुए बोली, तो फिर उस की बात को मन ही मन भांप कर उस के आगे नरेश कुछ बोल नहीं सका और चुपचाप अपने बैग में वह थैली रख ली.

नवयुगल एयरपोर्ट पर पहुंच चुका था. दोनों ने एकदूसरे का हाथ पकड़े हुए एयरपोर्ट में एंट्री ली. नरेश ने नजरें उठाईं, तो सामने ही एक कस्टम विभाग का बड़ा अधिकारी अपनी सजीली सी विभागीय यूनीफौर्म पहने हुए खड़ा था, जो कि इन दोनों की तरफ देखते हुए मुसकराते हुए आगे आया, “नमस्ते भाभीजी… आप दोनों की यात्रा शुभ हो.”

“अरे, इन से मिलो ये मेरा दोस्त है रचित. और रचित, ये हैं बबिता मेरी पत्नी,” हंसते हुए नरेश ने कहा.

नरेश और बबिता के साथ में एक बड़े कस्टम अधिकारी के होने के कारण उन दोनों को फ्लाइट तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं हुई और कुछ ही देर बाद उन की फ्लाइट टेक औफ कर चुकी थी.

तकरीबन 8-9 घंटे की उड़ान के बाद वे दोनों स्विट्जरलैंड के हवाईअड्डे पर थे, जहां यात्रियों का सामान चैक किया जा रहा था. नरेश और बबिता भी शांत भाव और प्रसन्न मुद्रा में सारी कार्यवाही देख रहे थे और अपने एयरपोर्ट से निकलने का इंतजार कर रहे थे, ताकि अपने हनीमून की खुशियों का मजा ले सकें.

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“आप दोनों को हमारे साथ चलना होगा,” नरेश से एक कस्टम के अधिकारी ने आ कर अंगरेजी में कहा.

“क्या हुआ… क्या बात है?” नरेश ने भी अंगरेजी में ही पूछा.

“जी, दरअसल बात यह है कि हमें आप के ब्रीफकेस में ड्रग्स मिली है. बहुत अफसोस है कि हमें आप को पुलिस के हवाले करना पड़ेगा,” कस्टम अफसर ने वह थैली दिखाते हुए कहा, जिस में शुभी ने ताकत वाले लड्डू रखे थे.

नरेश और बबिता को अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हुआ, जो उन्होंने अभीअभी सुना था.

“पर, इस में तो मेरी चाची ने ताकत के लड्डू रखे  थे, जरूर आप को कोई गलतफहमी हुई है,” नरेश कह रहा था.

“यहां पर आ कर पकड़े जाने के बाद सभी यही कहते हैं मिस्टर नरेश, पर हमारे यहां कानून है कि आप अपनी गिरफ्तारी की खबर अपने घर पर इस फोन के द्वारा दे सकतें हैं… ये लीजिए अपना कंट्री कोड डायल कर के अपने घर फोन मिला लीजिए.”

इस के बाद नरेश ने फोन मिला कर अपने साथ हुए हादसे के बारे में अपने मांबाप को बताया कि किस तरह से उस थैली में ड्रग्स भेजा गया था और नरेश ने उन्हें यह भी बताया कि यहां पर ड्रग्स संबंधी कानून बहुत कड़े हैं, इसलिए उन्हें कम से कम 10-12 साल जेल में ही रहना होगा.

पुलिस ने नरेश और बबिता के हाथों में हथकड़ी पहना दी थी. उन लोगों को अब भी समझ नहीं आ रहा था कि ये सब कैसे और क्यों हुआ है? पर भारत में बैठी हुई शुभी को बखूबी समझ में आ रहा था, क्योंकि ये पूरी चाल उस ने ही तो रौबिन के साथ मिल कर रची थी, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.

एक ही झटके में शुभी ने नरेश और उस की पत्नी बबिता को जेल भिजवा दिया था. एकलौते बेटे की गिरफ्तारी और शुभी की नीचता की बात जान कर अजय अरोड़ा चीख पड़े थे, “मुझे तुझ से ऐसी उम्मीद नहीं थी… मैं ने तेरी हर बात मानी, फिर भी तेरी पैसे की हवस पूरी नहीं हुई… आखिरकार तू ने मेरे बेटेबहू को मुझ से छीन ही लिया.”

“जो हुआ उस में मेरी कोई गलती नहीं है… नरेश के पास से ड्रग्स निकली है, इस का साफ सा मतलब है कि वह ड्रग्स लेता था और अब बचने के लिए वह मुझ पर इलजाम लगा रहा है,” शुभी बड़े आराम से जवाब दे रही थी.

शुभी से अभी जब अजय अरोड़ा की बहस हो ही रही थी कि उन के सीने में तेज दर्द उठा. वे अपना सीना पकड़ कर वहीं बैठ गए और फिर कभी उठ न सके. उन का देहांत हो चुका था.

अब कंपनी की एमडी शुभी की बेटी थी और पूरे बिजनैस पर उन का एकाधिकार था, पर अपनी मां के द्वारा किए गए इस काम से वह जरा भी खुश नहीं थी, इसलिए वह अपने दादी और बाबा के साथ सबकुछ छोड़ कर कहीं चली गई और शुभी के नाम एक पत्र छोड़ गई, जिस में लिखा था:

“मां… आप पैसे और सत्ता के लालच में इतना गिर जाओगी, ऐसा मैं ने कभी नहीं सोचा था… आप को पैसा चाहिए था, जो आज आप को मिल गया है… कंपनी के कागज और चेकबुक्स दराज में रखी हैं. आप अपने पैसों के साथ खुश रहो… मुझे और मेरे दादीबाबा को ढूंढ़ने की कोशिश मत करना.”

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पैसे और सत्ता के लालच में अंधी हो कर शुभी ने नरेश के खिलाफ इतनी कठोर साजिश को अंजाम दिया, जिस से उस के जीवन की सारी खुशियां तहसनहस हो गई थीं.

नरेश और बबिता इस घटना से स्तब्ध थे. उन्हें ये बात ही नहीं समझ में आ रही थी कि अगर ये काम चाची ने जानबूझ कर किया है, तो क्यों किया है. वजह चाहे जो भी रही हो, पर वे दोनों जेल में थे.

नरेश और बबिता को हनीमून तो छोड़ो, पर अब साथ रहना भी नसीब नहीं हो रहा था. सलाखों के पीछे बारबार नरेश यही बुदबुदा रहा था… ये कैसा हनीमून???

प्यार की चाहत में

प्यार की चाहत में – भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

11सितंबर, 2020 की सुबह उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद थाने में एक राहगीर से सूचना मिली कि अमीना मसजिद के पास एक लाश पड़ी है. इस सूचना पर थाने से एसआई अशोक कुमार मसजिद के पास पहुंचे तो वास्तव में सड़क के किनारे एक युवक की लाश पड़ी थी. उस युवक की उम्र 25 साल के करीब लग रही थी. उस के गले पर हलके खरोंच के निशान थे.

उस समय सुबह का वक्त था. कुछ लोग सड़क पर आजा रहे थे. उन्होंने कुछ लोगों को बुला कर लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की. चूंकि यह मामला हत्या का प्रतीत हो रहा था, इसलिए एसआई अशोक कुमार ने थानाप्रभारी पी.सी. यादव को घटना के बारे में सूचना दे दी.

थानाप्रभारी पी.सी. यादव थाने में मौजूद एएसआई प्रदीप, हैड कांस्टेबल कैलाश और कांस्टेबल अजय को साथ ले कर थोड़ी ही देर में घटनास्थल पर पहुंच गए.

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उन्होंने लाश का बारीकी से मुआयना किया. मृतक ने नारंगी रंग की टीशर्ट और स्लेटी रंग की पैंट पहन रखी थी. थानाप्रभारी ने क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी घटनास्थल पर बुला लिया, जिस ने लाश की कई कोण से फोटो खींचीं. मृतक के गले पर खरोंच के निशान के अलावा शरीर पर जख्म के निशान दिखाई नहीं दे रहे थे.

2 घंटे तक वहां के लोगों से लाश की शिनाख्त कराने के प्रयास किए. इस के बावजूद भी जब मृतक की पहचान नहीं हो सकी तो उसे पोस्टमार्टम के लिए सब्जीमंडी मोर्चरी भेज दिया गया. मोर्चरी में लाश पर चोटों के निशान देखने के लिए उस के कपड़े उतारे गए तो पता चला कि मृतक युवक मुसलिम है. उसी दिन थानाप्रभारी पी.सी. यादव के निर्देश पर मृतक की फोटो वजीराबाद के कई वाट्सऐप ग्रुप में भेज कर उन से लाश की शिनाख्त करने की अपील की गई.

दोपहर में फोटो की पहचान वजीराबाद की गली नंबर 9 में रहने वाले साहिल उर्फ राजा के रूप में हो गई. उस के घर पहुंचने पर मृतक की मां मिली. उस ने मोबाइल पर लाश की फोटो देख कर उस की पुष्टि अपने बेटे साहिल के रूप के कर ली.

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पूछताछ के दौरान उन्होंने थानाप्रभारी पी.सी. यादव को बताया कि कल रात साहिल ने उसे फोन कर बताया था कि वह अभी वर्षा के घर जा रहा है, इसलिए उस का इंतजार न करें. मां ने साहिल की हत्या का शक वर्षा पर जताया.

13 सितंबर को पुलिस ने साहिल की मां की शिकायत पर वर्षा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया और इस केस की जांच अतिरिक्त थानाप्रभारी गुलशन गुप्ता को सौंप दी गई. अतिरिक्त थानाप्रभारी गुलशन गुप्ता ने साहिल की मां से वर्षा के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि वर्षा अपने भाई आकाश के साथ दिल्ली के ही शास्त्रीनगर में रहती है.

वर्षा के ठिकाने का पता लगते ही वह पुलिस टीम के साथ शास्त्रीनगर स्थित वर्षा के मकान पर पहुंचे. लेकिन उस के मकान पर ताला लटका हुआ था. उस के मकान मालिक का पता लगा कर उस से वर्षा के बारे में पूछताछ की, लेकिन मकान मालिक को भी वर्षा के मूल निवास स्थान की जानकारी मालूम नहीं थी.

लेकिन उस ने पुलिस टीम को वर्षा के छोटे भाई आकाश का मोबाइल नंबर बता दिया, जिसे अतिरिक्त थानाप्रभारी गुलशन गुप्ता ने अपनी डायरी में नोट कर लिया. वर्षा के घर से गायब रहने के कारण जांच अधिकारी के मन में साहिल की हत्या में उस का हाथ होने का शक और पुख्ता हो गया.

इस के बाद उन्होंने साहिल के दोस्त साजिद से पूछताछ की तो साजिद ने बताया कि कल रात वह और साहिल औफिस से साथ निकले थे. बातचीत के दौरान साहिल ने उस से कहा भी था कि वह वर्षा के घर जा रहा है. उस ने भी वर्षा पर ही साहिल की हत्या का शक जाहिर किया.

वहां से लौट कर गुलशन गुप्ता घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां से 50 मीटर की दूरी पर एक सीसीटीवी कैमरा लगा देखा, जिस का फोकस उसी तरफ था, जहां पर साहिल का शव मिला था. उन्होंने फौरन उस सीसीटीवी कैमरे की फुटेज निकलवा कर बीरीकी से इस की जांचपड़ताल करनी शुरू की तो देखा सुबह सवा 6 बजे के समय वहां पर एक आटो आ कर रुका, जिस से 3 औरतें बाहर निकलीं. उन्होंने एक बेहोश से आदमी को आटो से बाहर निकाला और इस के बाद आटो वहां से चला गया.

प्यार की चाहत में – भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

आटो के जाने के बाद तीनों उस आदमी को वहां से थोड़ी दूर घसीट कर ले गईं. फिर एक सुनसान सी जगह पर उसे लिटा कर फरार हो गईं. सीसीटीवी फुटेज को कई वार रिवर्स कर के देखने से आटो के पीछे लिखा ‘अंशुल दी गड्डी’ और आटो की नंबर प्लेट पढ़ कर उसे अपनी डायरी पर नोट कर लिया. करीब 200 आटो की खोजबीन करने के बाद वह आटो मिल गया, जिस के पीछे कवर पर अंशुल दी गड्डी लिखा था. आटो की नंबर प्लेट से उस के मालिक रविंद्र तथा ड्राइवर मुकेश का पता लगा लिया.

मुकेश से पूछताछ करने पर पता चला कि घटना वाली रात को तड़के 4 बजे वह अपने आटो के साथ कश्मीरी गेट बसअड्डे पर किसी सवारी का इंतजार कर रहा था. एक युवती उस के पास आई थी और अपने दोस्त के गहरे नशे में होने की बात कह कर उसे शास्त्री पार्क स्थित अपने कमरे पर ले गई. वहां से अपने बेहोश साथी को ले कर जगप्रवेश अस्पताल गई. उस के साथ 2 युवतियां और थीं. वहां किसी कारण इलाज नहीं होने पर उसे वजीराबाद ला कर वहां छोड़ दिया, जहां पर पुलिस ने सुबह लाश बरामद की थी.

मुकेश का बयान दर्ज करने के बाद पुलिस टीम जगप्रवेश अस्पताल पहुंची और वहां के सीसीटीवी फुटेज की जांचपड़ताल की. उस में आटो और तीनों औरतें साफ दिख गईं.

अब तक की जांचपड़ताल से इतना पता चल गया था साहिल की हत्या में उन्हीं 3 औरतों का हाथ है. आकाश के मोबाइल नंबर की लोकेशन से पता चला कि वह इस समय उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में है.

13 सितंबर, 2020 को दिल्ली से एक पुलिस टीम वर्षा और उस के साथियों की तलाश में शाहजहांपुर पहुंची और वहां पर अपने एक रिश्तेदार के यहां छिपे वर्षा और उस के भाई आकाश को गिरफ्तार कर लिया.

उन से पूछताछ करने पर तीसरे साथी अलका उर्फ अली हसन को भी उस के रिश्तेदार के यहां से गिरफ्तार कर लिया. तीनोें को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस टीम वजीराबाद थाने लौट आई.

वर्षा से पूछताछ की. पहले तो उस ने साहिल की हत्या करने से इनकार किया, लेकिन जब उसे सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया तो वर्षा का चेहरा सफेद पड़ गया. उस ने साहिल की हत्या की बात स्वीकार करते हुए अपने इकबालिया बयान में जो बात बताई, वह हैरतअंगेज कर देने वाली थी. वर्षा से पूछताछ के बाद साहिल की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी.

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23 वर्षीय साहिल उर्फ राजा अपनी अम्मी के साथ उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद में रहता था. कई साल पहले उस के अब्बा का इंतकाल एक लंबी बीमारी के दौरान हो गया था.

कोई 4 साल पहले की बात है. तब साहिल ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर चुका था. अब्बा की मौत के बाद से ही घर में मुश्किलों का दौर शुरू हो गया था, जो अब तक कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था. अम्मी जैसेतैसे घर का गुजारा चला रही थी.

उस ने अपने लिए नौकरी की तलाश शुरू की. काफी भागदौड़ करने के बाद किसी तरह उसे शास्त्री पार्क स्थित एक स्थानीय अखबार के औफिस में नौकरी मिल गई. जहां वह रिपोर्टिंग के साथ अखबार के लिए विज्ञापन लाने का काम करता था. इस काम में उसे तनख्वाह और कमीशन मिलता था. उस से घर का गुजारा चलने लगा.

साहिल को अभी यह काम करते हुए कुछ महीने गुजरे थे कि एक दिन उस की मुलाकात वर्षा से हुई. 19 वर्षीय वर्षा देखने में काफी सुंदर होने के अलावा हंसमुख स्वभाव की थी. साहिल को वर्षा की बातें अच्छी लगीं.

वर्षा ने साहिल को बताया कि वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के गांव हसनपुर, हरदोई की रहने वाली है. गांव में उसे बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए वह नौकरी की तलाश में अपने भाई के साथ दिल्ली आ गई. इस समय वह अपने छोटे भाई आकाश के साथ शास्त्री पार्क में रहती है.

साहिल ने वर्षा से उस का मोबाइल नंबर ले लिया. वर्षा ने भी साहिल का मोबाइल नंबर सेव कर लिया. इस घटना के बाद साहिल और वर्षा हमेशा एकदूसरे के संपर्क में रहने लगे. जब भी साहिल को काम से फुरसत मिलती वह वर्षा को बुला क र उस के साथ कहीं घूमने निकल जाता था. वर्षा भी साहिल को प्यार करती थी, इसलिए वह हमेशा उसे खुश रखने की कोशिश करती थी.

चूंकि इश्क की आग दोनों तरफ बराबर लगी थी, सो जल्द ही उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. काफी दिनों तक ऐसा ही चलता रहा. बाद में वर्षा साहिल से शादी करने की जिद करने लगी तो पहले साहिल ने उस से शादी करने में कुछ आनाकानी की, लेकिन जब वर्षा ने साहिल से कहा कि बिना शादी के वह इस रिलेशन को नहीं रखना चाहती है तो साहिल ने वर्षा की जिद देखते हुए उस के साथ कोर्टमैरिज तो कर लिया, मगर उसे अपने घर नहीं ले गया.

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उस ने वर्षा को समझाते हुए कहा कि उस की अम्मी अभी इस कोर्टमैरिज को स्वीकार नहीं करेंगी. जब उस की अम्मी उसे अपनी बहू बनाने के लिए तैयार हो जाएंगी तो वह उसे अपनी बेगम बना कर घर ले जाएगा.

वर्षा ने साहिल की बात पर यकीन कर लिया. इस के बाद साहिल ने वर्षा के रहने के लिए शास्त्री पार्क में एक मकान किराए पर ले लिया, जिस में एक कमरा ग्राउंड फ्लोर पर और दूसरा कमरा ऊपरी मंजिल पर बना था.

प्यार की चाहत में – भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

साहिल दिन में औफिस में काम करता था और रात में वर्षा के पास रुक जाता था. रात के समय में दोनों ऊपरी कमरे में सोते थे, जबकि वर्षा का भाई आकाश नीचे ग्राउंड फ्लोर पर सोता था.

आकाश को वर्षा और साहिल के रिश्ते की शुरू से जानकारी थी. उसे इस पर कोई ऐतराज नहीं था. वर्षा और आकाश के साथ उस के ही गांव हसनपुर का एक लड़का अली हसन उर्फ अलका भी रहता था.

आकाश और अली हसन दिन के समय लड़कियों के कपड़े पहन कर हिजड़ों का रूप धारण कर लेते थे और शादीब्याह वाले घरों या जिस किसी के घर में बच्चे का जन्म होता, उस के घर जा कर बधाइयां गाने का काम करते थे. इस काम में उसे थोड़ी देर नाचनेगाने में ही अच्छीखासी रकम हाथ लग जाती थी. उन्हें मजदूरी करना काफी मेहनत का काम लगता था, इसलिए दोनों इसे नहीं करना चाहते थे. जबकि नकली हिजड़ा बन कर नाचगा कर मांगने का काम आकाश और अली हसन को आसान लगता था.

कुछ दिनों के बाद साहिल और वर्षा के रिश्ते की जानकारी साहिल की अम्मी को हो गई. दरअसल, साहिल अब रात में घर न पहुंच कर वर्षा के घर शास्त्री पार्क में अपनी रातें गुजारने लगा था. जब उस की अम्मी ने साहिल से इस का कारण पूछा तो उस ने अम्मी को वर्षा और अपने रिलेशनशिप के बारे में सब कुछ बता दिया.

इस के बाद अम्मी ने साहिल का विरोध नहीं किया. सालों पहले शौहर की मौत हो जाने के बाद से वह एक बेवा की जिंदगी गुजार रही थी. अब बेटे को नाराज कर वह उसे खोना नहीं चाहती थी.

इसी प्रकार साहिल और वर्षा के रिश्ते को 4 साल हो गए. वर्षा के रहनेखाने का सारा खर्च साहिल ही उठाता था, लेकिन वह उसे अपने घर ले जाने के लिए तैयार नहीं था. वर्षा जब भी साहिल को अपने घर ले चलने की बात कहती, साहिल कोई न कोई बहाना बना कर उस की बात को टाल जाता था.

पिछले 2 सालों से साहिल द्वारा लगातार टाले जाने से परेशान वर्षा के सब्र का बांध अब टूटने के कगार पर था. उस ने गंभीर हो कर यह बात अपने छोटे भाई आकाश को बताई तो वह भी बहन की परेशानी को समझ कर सोच में डूब गया.

काफी सोचविचार के बाद यह तय हुआ कि आज वह साहिल से दोटूक बात करेगी. साहिल को हर हाल में उसे अपनाना ही पड़ेगा. आकाश और अली हसन दोनों ने वर्षा की बात का समर्थन करते हुए कहा, ‘‘ठीक है, आज इस बात का फैसला हो कर ही रहेगा.’’

10 सितंबर, 2020 की रात लगभग 10 बजे साहिल जब वर्षा के घर पहुंचा तो वहां सब उस के आने का इंतजार कर रहे थे. किसी ने खाना नहीं खाया था. साहिल मार्केट जा कर सब के लिए खाना और शराब की बोतल ले आया.

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सब ने एक साथ मिल कर शराब पी और खाना भी खाया. इस के बाद साहिल रोमांटिक मूड में वर्षा को अपनी तरफ खींचते हुए ऊपर वाले कमरे में चलने के लिए कहने लगा तो वह उस की बांहों से छिटक कर अलग हो गई और बोली, ‘‘तुम रोज मेरे जिस्म से खेलते हो और जब मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे घर जा कर बीवी बन कर रहने की बात करती हूं तो बहाना बना कर टाल जाते हो. आज तुम साफसाफ बताओ कि तुम्हारे मन में क्या है?’’

वर्षा के इस बदले हुए तेवर को देख कर भी साहिल पर इस का जरा भी असर नहीं हुआ. उस ने समझा कि वर्षा थोड़ी नानुकुर करने के बाद उस की बात मान कर ऊपर के कमरे में चली जाएगी. लेकिन वह नहीं गई. वर्षा साहिल के बारबार टालने से काफी तंग आ चुकी थी, इसलिए वह साहिल के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार नहीं हुई.

वर्षा ने साहिल की इच्छा का विरोध करना शुरू कर दिया. इसी बात पर उन के बीच हाथापाई शुरू हो गई, जिस पर साहिल ने गुस्से में वर्षा के ऊपर हाथ उठा दिया. इस पर वर्षा ने अपने भाई आकाश और अली हसन के साथ मिल कर साहिल को फर्श पर पटक कर उस का गला घोंट दिया.

जब साहिल का बेजान जिस्म एक ओर लुढ़क गया तो उस की लाश देख कर उन तीनों के हाथपांव फूल गए. काफी देर तक आपस में विचार करने के बाद उन्हें लगा कि अगर साहिल को अस्पताल ले जाया जाए तो शायद उस की जान बच सकती है.

ऐसा सोच कर उन्होंने कश्मीरी गेट बसअड्डे से आटो बुलाया और उसे आटो में ले कर जगप्रवेश अस्पताल पहुंचे, जहां डाक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया. डाक्टर की बात सुन कर तीनों एकदम बदहवास हो गए. साहिल के बेजान जिस्म को उसी आटो में लाद कर वे वजीराबाद पहुंचे और उस की लाश वहां उतार कर आटो वाले को वापस भेज दिया. आटो के नजर से ओझल होते ही उन तीनों ने लाश थोड़ी दूर खींच कर एक साइड में डाल दी और वहां से फरार हो गए. सुबह पुलिस द्वारा पकड़े जाने से बचने के लिए तीनों शास्त्री पार्क स्थित मकान पर ताला लगा कर वहां से फरार हो गए.

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इसी दौरान उन्होंने यमुना नदी में साहिल का पर्स और मोबाइल फोन फेंक दिया. इस के बाद वे आनंद विहार पहुंचे और वहां से बस पकड़ कर हरदोई पहुंच गए. वहां भी जब उन्हें लगा कि पुलिस उन की तलाश में यहां भी पहुंच सकती है तो वे शाहजहांपुर स्थित अपने रिश्तेदार के यहां जा कर छिप गए.

लेकिन उन की चालाकी काम नहीं आई और दिल्ली पुलिस ने 13 सितंबर, 2020 को उन्हें दबोच लिया. 14 सितंबर को साहिल उर्फ राजा की हत्या के आरोप में उस की प्रेमिका वर्षा उस के भाई आकाश और अली हसन को तीसहजारी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.

बेहतरीन फिल्मों की एंथोलाजी है UN PAUSED

रेटिंगः चार स्टार

निर्देशकः निखिल आडवाणी, तनिष्ठा चटर्जी, राज एंड डीके,  नित्या मेहरा और अविनाश अरुण

कलाकारः गुलशन देवैया, सैयामी खेर, रिचा चड्डा, सुमीत व्यास और ईश्वक सिंह, लिलेट दुबे, रिंकू राजगुरू, अभिषेक बनर्जी और गीतिका विद्या ओहलियान, रत्ना पाठक शाह और शार्दूल भारद्वाज.

अवधिः एक घंटा 53 मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः अमेजान प्राइम वीडियो

कोरोना महामारी व लाकडाउन के चलते लोगों के जीवन मे काफी अवसाद आ गया है. रिश्तों में खटास आ गयी है, लोग बेरोजगार व आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, ऐसे वक्त में लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने व जीवन की नई शुरूआत का संदेश देने वाली बेहतरीन कहानियों को लाने का यह अमेजान प्राइम वीडियो का सार्थक व सकारात्मक प्रयास है. पांच नई लघु फिल्मों की एंथेलाजी ‘अनपाॅज्ड’ अप्रत्याशित समीकरणों को बोध कराती है. इसके सभी लेखक व निर्देशक बधाई के पात्र हैं.

‘अनपाज्ड’’ की पांच कहानियों में से पहली कहानी राज – डीके निर्देशित ‘ग्लिच’ है, जिसकी कहानी कोरोना महामारी के मौजूदा समय की है, जब लोगों के मन में एक दूसरे के संपर्क में आने का डर व्याप्त है. ऐसे ही दौर में अहान (गुलशन देवैया) हाइपो है, उसे हरदम यह भ्रम रहता है कि उसे कोई गंभीर बीमारी है. पर 193 वें ब्लाइंड डेट पर उसकी मुलाकात हरदम खुश रहने वाली एक अजीब सी लड़की आएशा हुसेन (सैयामी खेर) से होती है. पर जब उसे पता चलता है कि आएशा कोरोना वारियर है, तो वह डेट बीच में ही छेाड़कर भग खडा होता है, मगर फिर कई घटनाक्रम बदलते हैं.

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‘‘अनपाज्ड’’की दूसरी कहानी निखिल आडवाणी निर्देशित ‘‘अपार्टमेंट’’ है. इसकी कहानी एक सफल आनलाइन मैगजीन की मालकिन देविका (रिचा चड्डा) के इर्द गिद घूमती है. एक दिन उसे अपने पति साहिल खन्ना(सुमित व्यास) की पांच लड़कियों संग गलत यौन संबंधों के बारे में पता चलता है, तो उसे गहरा सदमा लगता है. वह खुद को इस हालात से तालमेल बैठा पाने में असमर्थ पाती है. और आत्महत्या करना चाहती है, पर एक युवक (ईष्वक सिंह) उसे बहाने से बचा लेता. उधर उसका पति उसे दोषी ठहराता है कि उसने उसे रोका क्यो नहीं. देविका उलझनों के अंधेरे भंवर में डूबकर अपने को दोष देने लगती है और अपने जीवन को खत्म करने की कोशिश करती है. तभी उसके जीवन में एक परेशान करने वाले अजनबी की भेष में आशा की किरण जागती है. और फिर वह अपने पति के खिलाफ उन सभी औरतों को खुलकर आरोप लगाने की इजाजत दे देती है.

अनपाज्ड की तीसरी कहानी तनिष्ठा चटर्जी निर्देशित ‘रैट ए रैट’ है. इस कहानी के केंद्र में अर्चना (लिलेट दुबे) और कदम (रिंकू राजगुरू) दो ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी उम्र में 40 चालिस साल का अंतराल है. अर्चना उत्तरप्रदेश से है, मगर एक महाराष्ट्रीयन से शादी की थी. अर्चना को संगीत का शौक है, पर पति विनय की मौत के बाद से वह एकाकी जीवन पसंद करती हैं. जबकि कदम एक महाराष्ट्रीयन लड़की है, बौलीवुड में संघर्ष कर रही है. अर्चना की पड़ोसी है कदम. लाकडाउन के दौरान एक दिन कदम के घर में चूहा आ जाता है, जिससे वह डरती है. और अर्चना का दरवाजा खुलवाती है, पहले तो अर्चना उसे अपने घर के अंदर आने की इजाजत नही देती. मगर धीरे धीरे उनमें असाधारण और अप्रत्याशित तरीके से मित्रता पनपती है, जो उनके जीवन में नई आशा का संचार करती है और इससे इन दोनों महिलाओं की जिंदगी की नई शुरुआत होती है.

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अनपाज्ड की चौथी कहानी अविनाश अरुण निर्देशित ‘‘विषाणु’’ है, जिसकी कहानी लाकडाउन के दौरान मुंबई मे फंसे राजस्थानी प्रवासी मजदूर परिवार की है. परिवार का मुखिया विष्णु (अभिषेक बनर्जी) अपनी पत्नी (गीतिका विद्या ओहलियान) और छोटे बच्चे के साथ एक निर्माणाधीन इमारत में काम करता है. मकान का किराया न देने सकने की वजह से उसे मकान मालिक मकान से निकाल देता है. यह परिवार निर्माणाधीन इमारत के सेंपल फ्लैट में अवैध ढंग से रहने लगता है. और एक सपना देखता है, जो कि उनके लिए एक अभिशाप बनकर सामने आता है, जिसमें उन्हें जिंदगी की कड़वी हकीकत का सामना करना पड़ता है.

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‘अनपाज्ड’ की पांचवी कहानी नित्या मेहरा निर्देशित ‘‘चांद मुबारक’’ है, जिसकी कहानी मुंबई में लाकडाउन के दौरान एक समृद्ध मध्यम उम्र की अकेली औरत उमा (रत्ना पाठक शाह) की है, जो रिक्शा चलाने वाले एक नौजवान रफीक (शार्दुल भारद्वाज) की मदद लेने के लिए मजबूर होती है. उमा काफी जिद्दी है और अपनी क्लास को लेकर काफी सतर्क रहती हैं. वह रिक्शा वाले के महिलाओं के प्रति दकियानूसी विचारों पर काफी क्रोधित होती है. जब यह अलग-अलग वर्ग से संबंध रखने वाले विपरीत विचारधारा के लोग तीन दिन एक साथ गुजारते हैं तो वह धीरे-धीरे अपने विचारों को छोड़ना शुरू करते हैं. उनमें एक-दूसरे के प्रति सम्मान का नया भाव जागता है और आपसी समझदारी की भावना पनपती है. दोनों महसूस करते हैं कि वह एक-दूसरे से इतने अलग नहीं है. बल्कि दोनों ही सपनों के इस शहर में बहुत अकेले हैं.

लेखन व निर्देशनः

‘कोरोना महामारी’से जुड़ी पांच लघु फिल्मों को जिस तरह से एक साथ जोड़कर ‘अमेजान’ लेकर आया है, वह वास्तव में एक सुखद अहसास दिलाता है. पांचों फिल्में कोरोना का रूदन नही है. बल्कि इन कहानियों में बीमारी की गंभीरता, मौत, मजबूर मजदूर,  आमदनी का बंद होना, तालांदी, मास्क लगाने से लेकर हर तरह की वास्तविकता के चित्रण के साथ जिंदगी को नए जोश के साथ जीने की बातें हैं. फिल्में रिश्तों की मधुरता और जिंदगी की नई शुरूआत की बात करती हैं. हर फिल्म का अंत सुखद है. इनमें सिर्फ ‘कोविड 19’ की भयावता की बात नही की गयी है, बल्कि रिश्तों को नए आयाम देने, कोरोना के चलते बदलती सकारात्मक सोच व मानवीय प्रवृत्तियों का चित्रण है.

पहली कहानी ग्लिच’में राज एंड डी के बीमारी की चिंता का मजाक उड़ाते हुए सुझाव दिया गया है कि बेवजह की भविष्यवाणियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए.

दूसरी कहानी अपार्टमेंट औरतों को उनके अंदर की ताकत का अहसास कराती है.एक बेहारीन कहानी व घटनाक्रमों से नायिका देविका को अप्रिय स्थिति का सामना करने के लिए अपनी अंदरूनी ताकत का पता चलता है और इस तरह वह हालात के भंवर से बाहर निकलती है.

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मराठी फिल्म ‘‘किला’’ से लोकप्रियताप्राप्त फिल्म्कार अविनाश अरुण निर्देशित ‘‘विषाणु’’जरुर निराश करती हैं. लाक डाउन मे आमदनी बंद होने के हालातों को फिल्मकार ने डार्क कामेडी के साथ व्यंग कसने का असफल प्रयास किया है.

मगर अंतिम फिल्म, नित्या मेहरा निर्देशित ‘चांद मुबारक’ हर दर्शक के चेहरे पर मुस्कान लेकर आ जाती है. यह फिल्म जहां एक बुजुर्ग महिला के सिर से कोरोना के डर को भगाती है, वहीं अलग धर्म, अलग वर्ग व अलग विचारधारा वाले पुरूष के साथ भाई बहन का रिश्ता स्थापित कर एक बहुत बड़ा भाईचारे का संदेश दे जाती है. यह फिल्म लेखक व निर्देशक दोनों की बहुत बड़ी कमायी है.

अभिनयः

हर कहानी में लगभग हर कलाकार ने शानदार अभिनय किया है. ‘अपार्टमेंट’ की कहानी में सुमित व्यास को देखकर निराशा होती है. सुमित व्यास को अपने कैरियर को गंभीरता से लेना चाहिए. रिचा चड्डा का अभिनय शानदार है. ‘सैराट’फेम अभिनेत्री रिंकू राजगुरू ने एक बार फिर ‘रैट ए रैट’ कहानी में अपने अभिनय का लोहा मनवा लिया. जबकि उनके सामने लिलेट दुबे जैसी दिग्गज अभिनेत्री हैं. रिंकू राजगुरू ने अपने अभिनय में कामिक टाइमिंग और संवेदनशीलता का जबरदस्त समन्वय बैठाया है. रिंकू राजगुरू की आंखें नृत्य करते हुए नजर आती हैं. कहानी अपार्टमेंट में अभिषेक बनर्जी और गीतिका विद्या ओहलियान की केमिस्ट्री सही नही बैठी है. कहानी ‘चांद मुबारक’ में भावनात्मक रूप से लाकडाउन में फंसी अकेली बीमारी महिला के किरदार केा रत्ना पाठक शाह ने अपने अभिनय से जीवंतता प्रदान की है. तो वहीं इसी कहानी में आटोरिक्शा चालक के किरदार में शार्दुल भार्गव का शानदार अभिनय चार चांद लगा देता है.

अक्षरा सिंह ने इंस्टाग्राम पर ‘मोरे होठवा से नथुनिया’ गाने  का पोस्टर किया रिलीज

भोजपुरी इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) इन दिनों अपने गाने के कारण सुर्खियों में छायी हुई है. वह अपने गाने से दर्शकों का दिल जीत रही हैं.

बता दें कि एक्ट्रेस ने अपने अपकमिंग सौन्ग ‘मोरे होठवा से नथुनिया’ (More Hotwa Se Nathuniya) का पोस्टर सोशल मीडिया पर जारी किया है. अक्षरा सिंह ने इंस्टाग्राम पर इस गाने के पोस्टर को रिलीज किया है.

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अक्षरा सिंह ने इंस्टाग्राम पर पोस्टर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि पेश है आपके लिए मेरा सबसे बहुप्रतीक्षित भड़कता तड़कता गाना ‘मोरे होठवा से नथुनिया…

इस पोस्टर में अक्षरा सिंह का ग्लैमरस अंदाज दिखाई दे रहा है. इस पोस्टर में वह सिल्वर ज्वेलरी कैरी किए हुए नजर आ रही हैं.

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आपको बता दें कि जल्द ही अक्षरा सिंह, रितेश पांडे (Ritesh Pandey) और कृष्ण कुमार (Krishna Kumar) के साथ फैमिली ड्रामा फिल्म ‘डोली’ (Doli) में दिखाई देंगी. 2021 में यह फिल्म रिलीज की जाएगी. इसके अलावा अक्षरा सिंह जल्द ही ‘लव मैरिज’ में दिखाई देंगी.

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai : शिवांगी जोशी आनस्क्रीन सौतन संग क्वालिटी टाइम बिताती आई नजर  

स्टार प्लस का फेमस सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) की नायरा इन दिनों क्वालिटी टाइम बिताती नजर आ रही हैं.  दरअसल इस सेट से कुछ तस्वीरें सामने आई है. फैंस इन तस्वीरों को खूब पसंद कर रहे हैं.

इन तस्वीरों को देखने के बाद इस सीरियल में अपकमिंग ट्विस्ट का भी अंदाजा लगाया जा सकता है. सीरियल के अपकमिंग एपिसोड में कैरव और नायरा के फैंस को सरप्राइज मिलने वाला है. जी हां, हाल ही में इस खास सीक्वेंस की शूटिंग हुई है.

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सेट से सामने आई तस्वीरों में मोहसिन खान (Mohsin Khan) अपने औनस्क्रीन बेटे के साथ क्वालिटी टाइम बिताते हुए नजर आ रहे हैं. तो वहीं इन तस्वीरों में शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) भी अपनी औनस्क्रीन सौतन रिद्धिमा के साथ क्वालिटी टाइम बिताती हुई नजर आ रही हैं.

 

सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें जमकर वायरल हो रही है. बता दें कि कई यूजर्स इन तस्वीरों को क्राप भी कर रहे हैं. शिवांगी और मोहसिन की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब धमाल मचा रही है.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में बीते एपिसोड में आपने देखा था कि  मुंबई वापस आने के बाद नायरा और कैरव एक-दूसरे से अलग हो गए थे. पर अपकमिंग एपिसोड में ये दिखाया जाएगा कि अब नायरा और कैरव एक-दूसरे से मिल जाएंगे.

 

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इतने दिनों बाद, जब नायरा अपने बेटे को देखेगी तो वह फूट-फूटकर रोने वाली हैं. कैरव भी अपनी मां से मिलकर काफी खुश हो जाएगा. शो में  अब जल्द ही नायरा और कैरव की क्यूट बौन्डिंग फैंस को देखने को मिलेगा.

बैलगाड़ी में बैठ शादी करने चला एनआरआई फर्जी दूल्हा!

अगर शादी ब्याह के मामले में आंख में मूंद कर रिश्ता करेंगे तो आप धोखा खा जाएंगे. विदेश में ऊंचे पद पर ऊंची कमाई का माया जाल फैलाकर किस तरह लोगों को उनकी भावनाओं को आहत करने से लोग बाज नहीं आते. इसका सच आपको दिखाने के लिए आज हम ले चलते हैं. छत्तीसगढ़ के जिला राजनांदगांव. जहां एक युवक ने बड़े ही तामझाम के साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति के अनुरूप ग्यारह बैल गाड़ियों से बारात निकाली. मगर विवाह करने के बाद फर्जी पाया गया और अब जेल की हवा खा रहा है.

बैलगाड़ी पर बारात लेकर छत्तीसगढ़ में चर्चा का सबब बने दूल्हे शैलेंद्र साहू शादी के 72 घंटे बाद दुल्हन के परिवारवालों की शिकायत पर फर्जी दूल्हे के साथ उसके माता-पिता, भाई और भाभी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. वैवाहिक मामले में लोगों की भावनाओं को आहत करने का अजीबो गरीब ठगी का यह मामला छत्तीसगढ़ के जिला राजनांदगांव के डोंगरगढ़ जंगलपुर का है.

यहां एक एन आर आई की शादी काफी चर्चा में थी‌. छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक शहीद की छोटी बहन से शादी करने वाला एन आर आई बैलगाड़ी से बारात निकालकर चर्चा का सबब बन गया था. अपनी विशेष बैल गाड़ियों की निकली बारात के कारण इस एन आर आई की विवाह की चर्चा सुर्ख़ियों में थी.

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अमेरिकी मूल की लड़की से की शादी

शैलेंद्र साहू लंबे समय से अमेरिका में बसा हुआ था. इसी दरमियान अमेरिकी मूल की लड़की से ब्याह रचा लिया. जानकार बताते हैं कि इस विवाह से उसके परिजन नाखुश थे. यही कारण है कि शैलेंद्र साहू को अपने गृह ग्राम आना पड़ा और यहां उसके दोबारा विवाह की तैयारी शुरू हो गई. महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि शैलेंद्र साहू का ब्याह बड़े ही शानदार तरीके से संपन्न हो गया. मगर कहते हैं की सच्चाई कभी न कभी सामने आ ही जाती है, शैलेंद्र साहू का सच भी अंततः सामने आ गया. तब तीन दिन पश्चात दुल्हन के परिजनों ने धोखेबाजी का आरोप लगाकर अमेरिका में रह रहे एन आर आई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई और उसे माता-पिता परिजनों सहित जेल भेज दिया गया.

और ऐसे खुला फर्जी दूल्हे का फर्जीवाड़ा

एन आर आई शैलेंद्र साहू पहले से ही शादी शुदा है. उसने अमेरिकी मूल की लड़की के साथ विवाह किया है, दो बच्चे भी है. मगर उसने उसके परिजनों ने लड़की और उसके परिजनों से यह सच छुपाया. 9 दिसंबर 2020 को शैलेंद्र अपने घर से 11 बैलगाड़ियों से अपनी बारात लेकर दुल्हन (रानी बदला हुआ) नाम के घर पहुंचा. और शैलेंद्र साहू ने बड़े ही शांति पूर्ण ढंग से रीति-रिवाजों के साथ विवाह कर लिया. 2 दिन पश्चात मामले का खुलासा कुछ इस तरह हुआ जो अपने आप में चौंकाने वाला है- जंगलपुर के रहने वाले सीआरपीएफ जवान पूर्णानंद साहू कुछ महीने पहले बीजापुर में नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए थे. 21 नवंबर को शहीद की बहन से शादी के लिए अर्जुनी निवासी शैलेंद्र साहू ने प्रस्ताव भेजा था. शैलेंद्र अमेरिका में रहता है.

शादी सामाजिक रस्मो रिवाज के साथ धूमधाम से हो गई लेकिन अंततः लड़की के घरवालों को पता चला कि शैलेंद्र पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी है.

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युवती शहीद जवान की बहन थी. ऐसे में सीआरपीएफ के नियमों के मुताबिक शहीद के परिजनों को फोर्स की तरफ से अनुदान राशि मिलती है. इसके तहत परिवार ने लड़की की शादी के बारे में अफसरों को बताया था, अफसरों ने लड़के की सारी जानकारी मांगी थी.

सीआरपीएफ ने जब युवक के पासपोर्ट की जांच अपने स्तर पर करवाई तो वो शादीशुदा निकला, और सारा सच सामने आ गया. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. मगर लड़की के परिजनों ने शैलेंद्र साहू के साथ रानी के विवाह को तोड़ दिया और दूल्हे सहित उसके परिजनों को जेल की हवा खिलाई है.

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