मनोज तिवारी की बेटी का हुआ नामकरण, रखा ये प्यारा-सा नाम

भोजपुरी अभिनेता और उत्तर पूर्व दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी और उनकी पत्नी श्रीमती सुरभि तिवारी ने अपने घर आई नन्ही परी के लिए प्यारा सा नाम खोज ही लिया. बुधवार को दिल्ली में हुए नामकरण समारोह में भोजपुरी अभिनेता व गायक तथा दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी की बड़ी बेटी रीति तिवारी ने अपनी छोटी बहन के लिए सान्विका तिवारी (Saanvika tiwari ) यह नाम सुझाया.

ज्ञातव्य है कि अप्रैल 2020 में कोरोना काल में मनोज तिवारी ने सुरभि तिवारी से दूसरा विवाह रचाया और 2020 की समाप्ति होते होते उनकी पत्नी ने मनोज तिवारी को बेटी का यह यादगार तोहफा दिया था. उनकी इस प्यारी बेटी के  नामकरण समारोह में कई जानी मानी हस्तियां सान्विका तिवारी को आशीर्वाद देने आयी थी.

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मनोज तिवारी से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने अपनी बेटी का यही नाम सोचा था ? इस पर उन्होंने कहा -” मेरी बड़ी बेटी रीति तिवारी ने यह हक मुझसे छीन लिया था और दिल्ली आने के बाद एक नामकरण समारोह में रीति ने अपनी छोटी बहन का प्यारा सा नाम रखा सान्विका तिवारी.”

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आज देश में बड़ा नाम बन चुके हैं. कभी बेहद साधारण सा जीवन जीने वाले मनोज तिवारी ने पहले भोजपुरी संगीत जगत में धमाल मचाया उसके बाद बतौर अभिनेता फिल्मों की दुनिया में धमाल मचाया. फिर राजनीति के मैदान में भी उनका जलवा दिखा. बतौर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पार्टी के लिए वह दिल्ली जैसे अहम राज्य की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. अब निजी जीवन में सांसद मनोज तिवारी दो बेटियों के पिता हैं. बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली सुरभि तिवारी जानी मानी गायिका हैं.

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Bigg boss 14: Rakhi Sawant की शादी को लेकर भाई राकेश ने कही चौंकाने वाली बात

बिग बौस फेम राखी सावंत अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में छायी हुई हैं. ‘बिग बौस 14’ में राखी सावंत के एंट्री के बाद हर कोई ये जानना चाहता है कि उनका पति कौन है. दरअसल शो में आने के बाद राखी अपने पति के बारे में कई बार बात कर चुकी हैं.

लेकिन उनका पति कौन हैं, ये किसी को नहीं पता. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि राखी सावंत ने शादी की भी है या नहीं… या फिर वो कोई ड्रामा कर रही हैं.

सुशांत की Birth Anniversary पर इमोशनल हुए फैंस, एक यूजर ने लिखा ‘वापस आ जाओ सुशांत’

अब खबर ये आ रही है कि राखी सावंत के मुंहबोले भाई राकेश ने कहा है कि राखी सावंत (Rakhi Sawant) रितेश नाम के लड़के के साथ शादी कर चुकी हैं. राखी सावंत की शादी में राकेश भी मौजूद थे.

 

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रिपोर्ट्स के अनुसार राखी सावंत के भाई राकेश ने बताया, उसकी शादी को लेकर तरह तरह की अफवाहें उड़ रही हैं. राखी सावंत अपनी शादी को लेकर झूठ क्यों बोलेगी. मैं राखी सावंत और रितेश की शादी का हिस्सा रह चुका हूं. उस समय मेरी मां भी इस शादी में पहुंची थीं.

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खबरों के अनुसार राकेश ने अभिनव शुक्ला के बारे में बात करते हुए कहा, राखी सावंत अपने पति रितेश को मिस कर रही है. वो अभिनव को पसंद करती है, किसी को पसंद करना गुनाह तो नहीं. हर लड़की को अपनी फीलिग्स जाहिर करने का हक है.

राकेश ने आगे कहा,  मुझे लगता है कि मेरी बहन बहुत अच्छा गेम खेल रही है. उसको ‘बिग बौस 14’ के गेम में और ज्यादा ध्यान देना चाहिए.

सुशांत की Birth Anniversary पर इमोशनल हुए फैंस, एक यूजर ने लिखा ‘वापस आ जाओ सुशांत’

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की बर्थ एनिवर्सरी पर फैंस सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर उन्हें याद कर रहे हैं. और फैंस बेहद भावुक हो रहे हैं. आज तो सुशांत की बर्थ एनिवर्सरी है पर फैंस उन्हें  हर दिन याद करते हैं.

सुशांत सिंह राजपूत को इस दुनिया से गए हुए कई महीने हुए लेकिन फैंस के दिल में आज भी वो राज करते हैं.  तो आइए जानते हैं, फैंस ने सोशल मीडिया पर फैंस ने उनके बारे में क्या पोस्ट लिखकर उन्हें याद किया हैं.

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, 21 जनवरी, बौलीवुड के इतिहास में किसी एक्टर के बर्थडे के लिए इतनी उत्सुकता कभी नहीं देखी. सुशांत का 21 जनवरी रिकौर्ड ब्रेकिंग होने वाला है.

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एक फैंस ने ट्वीट कर सुशांत सिंह राजपूत को याद किया और लिखा, वापस आ जाओ सुशांत, इस दुनिया को तुम्हारी जरूरत है. तो वहीं दूसरे यूजर ने फैंस द्वारा बनाई गई ट्रिब्यूट वीडियो शेयर की है.

सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने सुशांत के नाम ट्वीट किया. उन्होंने सुशांत और अपनी फैमिली फोटो शेयर की और कैप्शन में लिखा, लव यू भाई, तुम मेरा हिस्सा हो और हमेशा रहोगा….#sushantday


बता दें कि सुशांत ने 14 जून 2020 को अपने घर में सुसाइड कर लिया था. इस खबर को सुनकर देश में शोक की लहर छा गई थी.

देशभर में सुशांत की मौत की जांच की मांग उठी. बाद में इस मामले की जांच सीबीआई के हाथ में सौंपी गई. और अब तक सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है.

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Crime Story: काली नजर का प्यार भाग 3

सौजन्य-  सत्यकथा

इधर वीरेंद्र ने अपने व वर्षा के प्रेम संबंधों की जानकारी मां को दी तो सरस्वती भड़क उठी. उस ने वीरेंद्र से साफ कह दिया कि वह बिनब्याही लड़की को घर में नहीं रख सकती. उस ने कोई बवाल कर दिया तो हम सब फंस जाएंगे. बदनामी भी होगी.

इस पर वीरेंद्र ने मां को समझाया कि वे दोनों एकदूसरे से प्रेम करते हैं. 6 महीने बीतते ही शादी कर लेंगे. वर्षा के घर वालों को भी साथ रहने में कोई ऐतराज नहीं है. इस बीच हम लोग वर्षा को परख भी लेंगे कि वह घर की बहू बनने लायक है भी या नहीं.

सरस्वती देवी का मन तो नहीं था, लेकिन बेटे के समझाने पर वह राजी हो गई.

इस के बाद वीरेंद्र ने 5 जून, 2020 को वर्षा को राठ स्थित शीतला माता मंदिर बुला लिया. यहां उस ने उस की मांग में सिंदूर लगाया. फिर उसे अपने घर ले आया. सरस्वती ने आधेअधूरे मन से बिनब्याही दुलहन का स्वागत किया और घर में पनाह दे दी.

वर्षा महीने भर तो मर्यादा में रही, उस के बाद रंग दिखाने लगी. वह न तो घर का काम करती और न ही खाना बनाती. सरस्वती देवी उस से कुछ कहती तो वह उसे खरीखोटी सुना देती. देवर अनिल के साथ भी वह दुर्व्यवहार करती. पति वीरेंद्र को भी उस ने अंगुलियों पर नचाना शुरू कर दिया. वर्षा मनमानी करने लगी तो घर में कलह होने लगी.

कलह का पहला कारण यह था कि वर्षा को संयुक्त परिवार पसंद नहीं था. वह सास देवर के साथ नहीं रहना चाहती थी. कलह का दूसरा कारण उस की स्वच्छंदता थी. जबकि सरस्वती देवी चाहती थी कि वर्षा मर्यादा में रहे.

उधर वर्षा को घर की चारदीवारी कतई पसंद न थी. वह स्वच्छंद विचरण चाहती थी. तीसरा अहम कारण पति का वेतन था. वर्षा चाहती थी कि वीरेंद्र जो कमाए, वह उस के हाथ पर रखे. जबकि वीरेंद्र अपना आधा वेतन मां को दे देता था. इस बात पर वह झगड़ा करती थी.

10 नवंबर, 2020 की शाम 4 बजे सरस्वती देवी खाना तैयार करने नवोदय विद्यालय छात्रावास चली गई. अनिल व वीरेंद्र भी काम पर गए थे. घर में वर्षा ही थी. शाम 5 बजे वीरेंद्र घर आ गया. आते ही वर्षा ने वीरेंद्र से वेतन के संबंध में पूछा. वीरेंद्र ने बताया कि उसे वेतन मिल तो गया है. लेकिन उसे पैसा मां को देना है. क्योंकि दीपावली का त्यौहार नजदीक है और मां को घर का सारा सामान लाना है.

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यह सुनते ही वर्षा गुस्से से बोली, ‘‘शारीरिक सुख मेरे से उठाते हो और पैसा मां के हाथ में दोगे. यह नहीं चलेगा. आज रात मां के कमरे में ही जा कर सोना, समझे.’’

वर्षा की बात सुन कर वीरेंद्र तिलमिला उठा और उस ने गुस्से में वर्षा के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया. वर्षा गम खाने वाली कहां थी, वह वीरेंद्र से भिड़ गई. दोनो में मारपीट होने लगी. इसी बीच वर्षा की निगाह सिलबट्टे पर पड़ी. उस ने सिल का बट्टा उठाया और वीरेंद्र के सिर पर प्रहार कर दिया.

बट्टे के प्रहार से वीरेंद्र का सिर फट गया और वह जमीन पर गिर पड़ा. इस के बावजूद वर्षा का हाथ नहीं रुका और उस ने उस के सिर व चेहरे पर कई और वार किए. जिस से वीरेंद्र की मौत हो गई. कथित पति की हत्या करने के बाद वर्षा ने घर पर ताला लगाया और फरार हो गई.

इधर रात 8 बजे सरस्वती देवी नवोदय विद्यालय छात्रावास से खाना बना कर घर आई तो घर के दरवाजे पर ताला लटक रहा था. सरस्वती ने वर्षा के मोबाइल फोन पर काल की तो उस का मोबाइल फोन बंद था.
फिर उस ने अपने छोटे बेटे अनिल को फोन कर घर पर बुला लिया. अनिल ने भी वर्षा को कई बार काल की लेकिन उस से बात नहीं हो पाई.

सरस्वती और उस के बेटे अनिल ने पड़ोसियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वर्षा बदहवास हालत में घर के बाहर निकली थी. ताला लगाने के बाद वह बड़बड़ा रही थी कि सास और पति उसे प्रताडि़त करते हैं. वह रिपार्ट लिखाने पुलिस चौकी जा रही है. पड़ोसियों की बात सुन कर सरस्वती का माथा ठनका. किसी अनिष्ट की आशंका से उस ने राठ कोतवाली को सूचना दी.

सूचना पाते ही कोतवाल के.के. पांडेय पुलिस टीम के साथ आ गए. पांडेय ने दरवाजे का ताला तुड़वा कर घर के अंदर प्रवेश किया.

उन के साथ सरस्वती व अनिल भी थे. कमरे में पहुंचते ही सरस्वती व अनिल दहाड़ मार कर रो पड़े. कमरे के फर्श पर 22 वर्षीय वीरेंद्र की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. सरस्वती ने पांडेय को बताया कि यह उन के बड़े बेटे की लाश है.

चूंकि हत्या का मामला था. अत: के.के. पांडेय ने सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी. कुछ ही देर में एसपी नरेंद्र कुमार सिंह, एएसपी संतोष कुमार सिंह, तथा डीएसपी अखिलेश राजन घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

वीरेंद्र की हत्या सिल के बट्टे से सिर पर प्रहार कर के की गई थी. उस की उम्र 22-23 वर्ष के बीच थी. खून से सना आलाकत्ल बट्टा शव के पास ही पड़ा था, जिसे अधिकारियों ने सुरक्षित करा लिया.

निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल हमीरपुर भिजवा दिया. उस के बाद मृतक की मां व भाई से घटना के बारे में पूछताछ की.

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सरस्वती देवी ने बताया कि वर्षा उस के बेटे वीरेंद्र के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रही थी. उसी ने वीरेंद्र की हत्या की है. उस का मायका राठ कोतवाली के गांव सैदपुर में है. सरस्वती देवी की तहरीर पर थानाप्रभारी के.के. पांडेय ने भादंवि की धारा 302 के तहत वर्षा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उस की तलाश शुरू कर दी.

रात 11 बजे थानाप्रभारी ने पुलिस टीम के साथ सैदपुर गांव में चंदा देवी के घर छापा मारा. घर पर उस की बेटी वर्षा मौजूद थी. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. उसे थाना राठ कोतवाली लाया गया.
थाने पर जब उस से वीरेंद्र की हत्या के संबंध में पूछा गया तो उस ने सहज ही हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

उस ने बताया कि वीरेंद्र से रुपए मांगने पर उस का झगड़ा हुआ था. गुस्से में उस ने वीरेंद्र पर सिल के बट्टे से प्रहार किया. जिस से उस का सिर फट गया और उस की मौत हो गई. पुलिस से बचने के लिए वह घर में ताला लगा कर मायके चली गई थी, जहां से वह पकड़ी गई.

11 नवंबर, 2020 को पुलिस ने अभियुक्ता वर्षा को हमीरपुर की कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

New Born Baby के लिए ऐसे बनाएं डाइट चार्ट

नवजात के ग्रोथ चार्ट की इस सरल परिभाषा के अपने अलग माने हैं, जिस से यह भी पता चलता है कि नवजात की दूसरी बालसुलभ या उम्रजनित क्रियाएं भी स्वाभाविक और ठीकठाक हैं या नहीं. मसलन, पाचन, रंगों और वस्तुओं को पहचानना, उलटनापुलटना और प्रतिक्रियाएं देना इत्यादि.

इस में कोई शक नहीं कि अपने बच्चे को रोज बढ़ते देखने का अपना एक अलग सुख और आनंद है, जिसे सभी मांबाप ऐंजौय करते हैं. जिंदगी के इस अद्भुत सुख का सटीक वर्णन शायद ही कोई मांबाप कर पाए, क्योंकि जैसेजैसे बच्चा बड़ा होता जाता है वैसेवैसे वे गुजरे दिनों को भूलते जाते हैं.

इस में भी कोई शक नहीं कि नए दौर के मांबाप जागरूक हो रहे हैं और उन की अधिकतम कोशिश यह होती है कि वे नवजात की ग्रोथ के बारे में सबकुछ जानें. लेकिन दिक्कत अभी भी यह है कि ज्यादातर पेरैंट्स यह मानते हैं कि अगर बच्चा मोटा, गोलमटोल और वजनदार है तो इस का मतलब उस की ग्रोथ ठीक हो रही है और अगर बच्चा दुबलापतला हो तो वे चिंतित हो उठते हैं कि उस की ग्रोथ दूसरे बच्चों के मुकाबले कम हो रही है, जबकि ऐसा नहीं है.

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वर्ल्ड हैल्थ और्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ नवजातों की ग्रोथ को पर्सेंटाइल में दर्शाता है, जिस के माने अकसर भारतीय मांबाप को समझ नहीं आते. भोपाल के एक वरिष्ठ बालरोग चिकित्सक ए. एस. चावला की मानें तो डब्ल्यूएचओ के ग्रोथ चार्ट के अपने अलग मायने हैं और उस का ग्रोथ चार्ट दुनियाभर के लगभग 100 देशों में प्रयोग किया जाता है जबकि भारत में अधिकांश बालरोग विशेषज्ञ अपने बनाए चार्ट का इस्तेमाल करते हैं.

चार्ट से समझें ग्रोथ

दरअसल हमारे देश में इस्तेमाल किया जाने वाला चार्ट देश के प्रमुख बड़े शहरों में संपन्न परिवारों के नवजातों के विकास स्वरूप पर अध्ययन के आधार पर तैयार किया जाता है. चूंकि इस ग्रोथ चार्ट के आंकड़ों में केवल भारतीय नवजातों पर किए गए अध्ययनों को ही शामिल किया जाता है, इसलिए अधिकतर विशेषज्ञ इसे ही इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.

मगर इन को ले कर शक या भ्रम की जरूरत नहीं. डाक्टर ए. एस. चावला बताते हैं कि दोनों ही अपनी जगह ठीक हैं और उन में कोई खास फर्क नहीं है. उन के मुताबिक अगर नवजात की ग्रोथ चार्ट के मुताबिक हो रही हो तो अभिभावकों को चिंता नहीं करनी चाहिए. चिंता की बात इस स्थिति में भी नहीं जब चार्ट के मुताबिक बच्चे की ग्रोथ में थोड़ाबहुत या मामूली अंतर आ रहा हो. चिंता तब करनी चाहिए जब यह अंतर ज्यादा हो.

उदाहरण के लिए चार्ट के मुताबिक 10 महीने की उम्र की लड़की का वजन 8.8 किलोग्राम और लंबाई 71.6 सैंमी. होनी चाहिए. ऐसे में अगर बच्ची का वजन 7 किलोग्राम से कम और लंबाई भी 65 सैंमी. से कम है तो विशेषज्ञ डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

डब्ल्यूएचओ इस स्थिति को पर्सेंटाइल में दर्शाता है. मसलन उस के चार्ट के मानकों के मुताबिक आप के बच्चे का वजन 30वीं पर्सेंटाइल पर है तो उस का मतलब होता है कि आप के बच्चे की उम्र और लिंग के 29% बच्चों का वजन आप के बच्चे से कम है और 70% बच्चों का वजन उस से ज्यादा है.

पर्सेंटाइल के मामले में जरूरी नहीं कि वह वजन और लंबाई के मामले में हर बार बराबर ही हो. मिसाल के तौर पर वही बच्चा जो वजन के मामले में 30वीं पर्सेंटाइल पर है. लंबाई के मामले में 40वीं पर्सेंटाइल पर भी हो सकता है, जिस का मतलब यह निकलता है कि लंबाई के मामले में आप के बच्चे की उम्र और लिंग के 39% बच्चे उस से छोटे और 60% उस से लंबे हैं.

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चूंकि यह स्थिति डब्ल्यूएचओ ग्राफ के जरीए प्रदर्शित करता है, इसलिए मांबाप का गड़बड़ा जाना स्वाभाविक है. ऐसे में भारतीय डाक्टरों का चार्ट इस भ्रम को दूर करता है. इसे अपनाने में हरज नहीं.

चार्ट के हिसाब से उम्र के आधार पर बच्चे के वजन और लंबाई में मामूली अंतर है तो यह चिंता व्यर्थ है, इसलिए घबराना नहीं चाहिए. लेकिन अंतर ज्यादा है तो खुद डाक्टर पहल कर इन कमियों को चिकित्सकीय पैमाने पर परखते हुए इलाज करते हैं.

इसे यों समझा जा सकता है

अगर 12 महीने यानी 1 साल के लड़के का वजन 8 किलोग्राम से कम है जो चार्ट के मुताबिक 9.6 किलोग्राम होना चाहिए तो डाक्टर बच्चे की डाइट में बदलाव करने की सलाह दे सकते हैं. वे कहेंगे कि बच्चे को ज्यादा पौष्टिक भोजन दिया जाए. नवजात की फीडिंग पर भी वे गौर करेंगे जो अगर गलत तरीके से हो रही है तो उसे सुधारने को कहेंगे. यही बात लंबाई की कमी के मामले में लागू होती है.

यहां यह बात और भी अहम है कि ग्रोथ चार्ट से किसी समस्या या बीमारी का पता नहीं चलता. डा. चावला यह सलाह भी देते हैं कि अगर चार्ट या पर्सेंटाइल के मुताबिक अभिभावक कमी पाते हैं तो नवजात को दी जाने वाली डाइट में अपने मन से बदलाव न करें, बल्कि डाक्टर से सलाह लें.

अगर बच्चा प्रीमैच्योर है तो जाहिर है उस की ग्रोथ इन ग्रोथ चार्टों और पर्सेंटाइल से मेल नहीं खाएगी, क्योंकि जन्म के पहले से ही उस की ग्रोथ कम है. ऐसे बच्चों के लिए डाक्टर अलग से कई एहतियात बताते हैं और डाइट के बारे में भी सलाह देते हैं. निष्कर्ष यह है कि प्रीमैच्योर बच्चों की तुलना औसत वजन और लंबाई वाले बच्चों से ग्रोथ के मामले में नहीं की जानी चाहिए. नवजात पर आनुवंशिक कारक भी प्रभाव डालते हैं.

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नवजात की ग्रोथ में वक्तवक्त पर फर्क आता है और वह पूरी तरह 3 साल की उम्र के वक्त समझ आता है. ग्रोथ चार्ट की अहमियत इतनी भर है कि उस के अनुसार बच्चे की लंबाई और वजन को नाप कर फर्क देखा जाता है. अगर कोई बड़ी असामान्यता नजर आए तभी डाक्टर के पास जाएं.

Crime Story: काली नजर का प्यार भाग 2

सौजन्य-  सत्यकथा

वीरेंद्र समझ गया कि वर्षा कहना चाहती है कि वह उस का प्यार कबूल तो कर सकती है, मगर शर्त यह है कि उसे शादी करनी होगी. उस वक्त वीरेंद्र के सिर पर वर्षा को पाने का जुनून था, सो उस ने कह दिया, ‘‘मैं टाइमपास करने के लिए तुम्हारी तरफ प्यार का हाथ नहीं बढ़ा रहा हूं, बल्कि संजीदा हूं. मैं तुम से शादी कर के वफा और ईमानदारी से साथ निभाऊंगा.’’

दरअसल वर्षा अपनी मां की मजबूरियां जानती थी. चंदा देवी ने बहुत तकलीफें उठा कर पति का इलाज कराया था. इलाज में उस पर जो कर्ज चढ़ा था, उस की भरपाई होने में बरसों लग जाने थे. परिवार में कोई ऐसा न था जो युवा हो चुकी वर्षा के भविष्य के बारे में सोचता. मां बेटी को दुलहन बना कर विदा कर पाने की हैसियत में नहीं थी. छोटा भाई अशोक खुद अपनी जिम्मेदारियों से जूझ रहा था. अत: वर्षा को अपने भविष्य का निर्णय स्वयं करना था.

वर्षा 20 साल की भरीपूरी युवती थी. उस के मन में किसी का प्यार पाने और स्वयं भी उसे टूट कर चाहने की हसरत थी. मन में इच्छा थी कि कोई उसे चाहने वाला मिल जाए, तो वह जीवन भर के लिए उस का हाथ थाम ले. इस तरह उस का भी जीवन संवर जाएगा और वह भी अपनी गृहस्थी, पति व बच्चों में रमी रहेगी.

लोग गलत नहीं कहते, इश्क पहली नजर में होता है. वर्षा के दिल में भी तब से हलचल मचनी शुरू हो गई थी, जब वीरेंद्र से पहली बार उस की नजरें मिली थीं.

वर्षा की आंखें खूबसूरत थीं, तो वीरेंद्र की आंखों में भी प्यार ही प्यार था. उस पल से ही वीरेंद्र वर्षा की सोच का केंद्र बन गया था. वर्षा ने जितना सोचा, उतना ही उस की ओर आकर्षित होती गई. वर्षा का मानना था कि वीरेंद्र अच्छा और सच्चा आशिक साबित हो सकता है. उस के साथ जिंदगी मजे से गुजर जाएगी.

वर्षा ने यह भी निर्णय लिया कि जब कभी भी वीरेंद्र प्यार का इजहार करेगा, तो वह मुहब्बत का इकरार कर लेगी. उम्मीद के मुताबिक उस दिन वीरेंद्र ने अपनी चाहत जाहिर की, तो वर्षा ने उस का प्यार कबूल कर लिया. उस दिन से वर्षा और वीरेंद्र का रोमांस शुरू हो गया.

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वर्षा के प्रेम की जानकारी उस की मां चंदा देवी और भाई अशोक को भी हो गई थी. चूंकि वर्षा और वीरेंद्र शादी करना चाहते थे, सो उन दोनों ने उन के प्यार पर ऐतराज नहीं किया. एक प्रकार से वर्षा को मां और भाई का मूक समर्थन मिल गया था.

दूसरी ओर वर्षा वीरेंद्र के जितना करीब आ रही थी, उतना ही उसे लग रहा था कि अभी वह वीरेंद्र को ठीक से समझ नहीं पाई, अभी उसे और समझना बाकी है.

अत: वीरेंद्र को समझने के लिए वर्षा ने उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने का मन बना लिया. सोचा वीरेंद्र उस की अपेक्षाओं के अनुरूप साबित हुआ, तो उस से शादी कर लेगी. कसौटी पर खरा न उतरा, तो दोनों अपने रास्ते अलग कर लेंगे.

वर्षा को लिवइन रिलेशनशिप में भी दोहरा लाभ नजर आ रहा था. पहला लाभ यह है कि वीरेंद्र को ठीक से समझ लेगी. दूसरा लाभ यह कि अपनी जवानी को घुन नहीं लगाना पड़ेगा. वीरेंद्र उस की देह का सुख भोगेगा, तो वह भी वीरेंद्र के जिस्म से आनंद पाएगी.

एक रोज जब वर्षा और वीरेंद्र का आमनासामना हुआ और बातचीत का सिलसिला जुड़ा तो वीरेंद्र ने जल्द शादी करने का प्रस्ताव रखा. इस पर वर्षा बोली, ‘‘मुझे शादी की जल्दी नहीं है बल्कि हमें अभी एकदूसरे को समझने की जरूरत है.’’

‘‘6 महीने से हमारा रोमांस चल रहा है,’’ वीरेंद्र के शब्दों में हैरानी थी, ‘‘और अब तक तुम मुझे समझ नहीं पाई.’’

‘‘समझी तो हूं, लेकिन उतना नहीं जितना जीवन भर साथ रहने के लिए समझना चाहिए.’’

‘‘पूरी तरह समझने में कितना वक्त लगेगा?’’ वीरेंद्र ने उदास मन से पूछा.

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कुछ देर गहरी सोच में डूबे रहने के बाद वर्षा ने जवाब दिया, ‘‘शायद 6 महीने और.’’

‘‘और इस दौरान मेरा क्या होगा?’’ वीरेंद्र ने पूछा.

वर्षा के होंठों पर मुसकान आई, ‘‘तुम्हारे साथ मैं भी रहूंगी.’’

वीरेंद्र के सिर पर हैरत का पहाड़ टूट पड़ा, ‘‘बिन ब्याहे मेरे साथ रहोगी.’’

‘‘इस में बुरा क्या है?’’ वर्षा मुसकराई, ‘‘नए जमाने के साथ लोगों की सोच और जिंदगी के तरीके भी बदलते रहते हैं. शहरों कस्बों में बहुत सारे लोग लिवइन रिलेशनशिप में रह रहे हैं, हम भी रह लेंगे.’’
‘‘यानी कि शादी किए बिना ही तुम घर रहोगी.’’

वर्षा ने वीरेंद्र की ही टोन में जवाब दिया, ‘‘बेशक.’’

चूंकि वीरेंद्र वर्षा का दीवाना था. अत: जब वर्षा ने वीरेंद्र के सामने लिवइन रिलेशनशिप का प्रस्ताव रखा तो वह फौरन राजी हो गया.

अगले भाग में पढ़ें- वर्षा मनमानी करने लगी तो घर में कलह होने लगी

Crime Story: काली नजर का प्यार भाग 1

सौजन्य-  सत्यकथा

जिला हमीरपुर का एक बड़ा कस्बा है राठ. मूलत: मध्य प्रदेश के गांव सरमेड़ के रहने वाले
मूलचंद्र अनुरागी का परिवार राठ के मोहल्ला भटियानी में रहता था. परिवार में पत्नी सरस्वती के अलावा 2 बेटे वीरेंद्र व अनिल थे. गांव में मूलचंद्र का पुश्तैनी मकान व जमीन थी. वह खुद गांव में रह कर घरजमीन की देखरेख करता था.

पत्नीबच्चों से मिलने वह राठ आताजाता रहता था. मूलचंद्र की पत्नी सरस्वती, राठ स्थित नवोदय विद्यालय में रसोइया थी. वह छात्रावास में रहने वाले छात्रों के लिए खाना बनाती थी. सरस्वती का बड़ा बेटा वीरेंद्र मिठाई की एक दुकान में काम करता था.

वीरेंद्र बताशा बनाने का उम्दा कारीगर था, जबकि छोटा बेटा अनिल राठ की ही एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में नौकरी कर रहा था. चूंकि सरस्वती और उस के दोनों बेटे कमाते थे, सो घर की आर्थिक स्थिति ठीक थी.

सरस्वती बेटों के साथ खुशहाल तो थी, लेकिन घर में बहू की कमी थी. वह वीरेंद्र की शादी को लालायित रहती थी.

वीरेंद्र अनुरागी जिस दुकान में काम करता था, उसी में अशोक नाम का एक युवक काम करता था. अशोक राठ कस्बे से आधा किलोमीटर दूर स्थित सैदपुर गांव का रहने वाला था. अशोक की छोटी बहन वर्षा अकसर उसे लंच देने आया करती थी.

जयराम की 2 ही संतानें थीं अशोक और वर्षा. कुछ साल पहले जयराम की मृत्यु हो चुकी थी. मां चंदा देवी ने उन दोनों को तकलीफें सह कर बड़ा किया था. आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण अशोक और वर्षा ज्यादा पढ़लिख नहीं सके थे.

अशोक 10वीं कक्षा छोड़ कर नौकरी करने लगा था, जबकि वर्षा 10वीं कक्षा पास करने के बाद मां के घरेलू कामों में हाथ बंटाने लगी थी.

20 वर्षीय वर्षा गोरीचिट्टी, छरहरी काया की युवती थी. नैननक्श भी तीखे थे. सब से खूबसूरत थी उस की आंखें. खुमार भरी गहरी आंखें. उस की आंखों में ऐसी कशिश थी कि जो उन में देखे, खो सा जाए.

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एक दिन वर्षा अपने भाई अशोक को लंच देने दुकान पर आई. वीरेंद्र की नजरें वर्षा की नजरों से मिलीं, तो वह उन में मानो डूब सा गया. जी में आया, उन्हीं खुमार भरी आंखों की अथाह गहराइयों में पूरी उम्र डूबा रहे. खुद भी उबरना चाहे तो उबर न सके. कुछ पल के लिए आंखों से आंखें मिली थीं, लेकिन उन्हीं लम्हों में वीरेंद्र वर्षा की आंखों पर फिदा हो गया. इस के बाद वर्षा की आंखें उस की सोच की धुरी बन गईं.

उस दिन के बाद वीरेंद्र को वर्षा के आने का इंतजार रहने लगा. हालांकि अशोक से बोलचाल पहले से थी, लेकिन वर्षा तक पहुंच बनाने के लिए उस ने उस से संबंध प्रगाढ़ बना लिए. इन्हीं संबंधों की आड़ में उस ने वर्षा से परिचय भी कर लिया.

वर्षा से परिचय हुआ तो बेइमान कर देने वाली उस की नजरें वीरेंद्र का दिल और तड़पाने लगीं. अब वीरेंद्र को इंतजार था उस पल का, जब वर्षा अकेले में मिले और वह उस से अपने दिल की बात कह सके.
किस्मत ने एक रोज उसे यह मौका भी मुहैया करा दिया.

उस रोज वर्षा भाई को खाना खिला कर जाने लगी, तो ताक में बैठा वीरेंद्र उस के पीछेपीछे चल पड़ा. तेज कदमों से वह वर्षा के बराबर में पहुंचा. वर्षा ने सिर घुमा कर वीरेंद्र को देखा और मुसकराने लगी.

वीरेंद्र बोला, ‘‘मुझे तुम से एक जरूरी बात कहनी है.’’

वर्षा के कदम पहले की तरह बढ़ते रहे, ‘‘बोलो.’’

‘‘मुझे जो कहना है, सड़क चलते नहीं कह सकता.’’

सहसा वीरेंद्र की नजर कुछ दूर स्थित पार्क पर पड़ी, ‘‘चलो, वहां पार्क में बैठते हैं. सुकून से बात हो जाएगी.’’
‘‘चलो,’’ वर्षा मुसकराई, ‘‘तुम्हारी बात सुन लेती हूं.’’

वे दोनों पार्क में जा कर बैठ गए. उस के बाद वर्षा वीरेंद्र से मुखातिब हुई, ‘‘अब बोलो, क्या कहना है?’’
वीरेंद्र के पास भूमिका बनाने का समय नहीं था. अत: उस ने सीधे तौर पर अपनी बात कह दी, ‘‘तुम्हारी आंखें बहुत हसीन हैं.’’

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वर्षा की मुसकराहट गाढ़ी हो गई, ‘‘और मैं?’’
‘‘जिस की आंखें इतनी हसीन हैं, कहने की जरूरत नहीं कि वह कितनी हसीन होगी.’’
वर्षा ने उसे गहरी नजरों से देखा, ‘‘तुम मेरे हुस्न की तारीफ करने के लिए यहां ले कर आए हो या कुछ और कहना है?’’

वीरेंद्र ने महसूस किया कि वर्षा प्यार का सिलसिला शुरू करने के लिए उकसा रही है. अत: उस के दिल की बात जुबान से बयां हो गई, ‘‘तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मुझे तुम से प्यार हो गया है.’’

कुछ देर तक वर्षा उस की आंखों में देखती रही, फिर आहिस्ता से बोली, ‘‘प्यार ही तो ऐसी चीज है, जिस पर न दुनिया का कोई कानून लागू नहीं होता, न इसे दबाया या छिपाया जा सकता है. लेकिन प्यार के कुछ तकाजे भी होते हैं.’’

वीरेंद्र ने धड़कते दिल से पूछा, ‘‘कैसे तकाजे?’’

‘‘वफा, ईमानदारी और जिंदगी भर साथ निभाने का जज्बा.’’

अगले भाग में पढ़ें- वर्षा को लिवइन रिलेशनशिप में भी दोहरा लाभ नजर आ रहा था.

रहस्य रोमांच: कल्पना नहीं हकीकत, इतना बड़ा खजाना कि कीमत बताते न बने

यूं तो खजानों का मतलब ही होता है ऐसा अकूत धन जो कल्पना से भी बहुत ज्यादा हो. लेकिन इतिहास में जितने खजाने अब तक खजाना खोजने वालों को मिले हैं,उनकी बड़ी से बड़ी सम्पदा भी अकूत नहीं रही यानी इतनी नहीं रही कि उसे आंका न जा सके. मगर दो साल पहले अमरीका की अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी नासा ने एक ऐसे खजाने को खोजा है कि अगर उसके धन को हासिल कर लिया जाए तो वह इतना होगा कि जिसे बताने में सचमुच अंकगणित लड़खड़ा जायेगी. अगर इस खजाने की सम्पदा को एक अंक में उचारित करना हो तो 8,000 के पीछे 000000000000000 और लगाने पड़ेंगे. यह संपत्ति दरअसल 8,000 क्वाड्रिलियन पाउंड है.

लेकिन यह खजाना धरती में नहीं है. इस खजाने को दो साल पहले अमेरिका की अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी नासा ने मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच मौजूद एक एस्टेरायड में खोजा है. यह एस्टेरायड या छोटा तारा है, पूरी तरह से लोहे का है और इसके अंदर सोना और हीरे की परतें होने का भी अनुमान है. नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक यह छुद्र तारा यानी एस्टेरायड पूरी तरह से लोहे से भरा हुआ है. अगर इस लोहे का कोई खरीदार मिल जाए और वह इसकी आज की तारीख के हिसाब से भी कुछ कम कीमत दे दे, तो भी इस लोहे और उसके अंदर मौजूद सोने और हीरे की इतनी कीमत है कि दुनिया के हर इंसान के खाते में 90 अरब से ज्यादा रुपये आ जाएंगे. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह खजाना कितना बड़ा होगा?

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लेकिन सवाल है क्या इस खजाने को व्यवहारिक रूप में हासिल किया जा सकता है यानी क्या इसका दोहन संभव हैै? इस बारे में अभी वैज्ञानिक तक भी कुछ नहीं कह सकते. हां, दुनियाभर के वैज्ञानिकों की एक कमेटी इसका अध्ययन करेगी और जानेगी कि क्या जिस खजाने को दुनिया की तमाम गरीबी दूर कर देने वाला अकूत खजाना समझा जा रहा है, उसे धरती के इस्तेमाल में लाया जा सकता है?

इन तमाम सवालों का जवाब वैज्ञानिक अगले कुछ सालों में देंगे. लेकिन पिछले पांच हजार सालों में दुनिया के लिखित अलिखित इतिहास में खजानों को लेकर इंसानी ललक रही है, उससे आज तक कई लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. जबकि संपत्ति के रूप में बहुत थोड़े से ही कुछ भाग्यशाली लोग रहे हैं, जिन्हें कुछ मिला है. फिर भी मानव इतिहास इस बात का गवाह है कि हमेशा से भूले बिसरे या छुपे हुए खजाने लोगों को आकर्षित करते हैं; क्योंकि सबको लगता है बिना कुछ किये रातोंरात मालामाल हो जाने का यह सबसे आसान तरीका है. यूं तो दुनिया में हजारों खजाने माने जाते हैं और सबका कुछ न कुछ ब्योरा भी मौजूद है.

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लेकिन दुनिया में जिन खजानों को लेकर तमाम लोग एकमत हैं वैसे करीब 100 खजाने हैं और इनमें भी सबसे बड़े 6-7 खजानों की खोज में अब तक एक अनुमान के मुताबिक 10 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. अगर दुनिया के 10 बड़े रहस्यमयी खजानों की खोज में निकलें, तो इसमें पहला नंबर है एल डोराडो का शापित रहस्यम खजाना. इस खजाने की खोज में अब तक एक अनुमान में मुताबिक 2 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. हालांकि इसका कोई विश्वसनीय आंकड़ा किसी के पास नहीं है. क्योंकि जो लोग इस खजाने की खेाज में गये उन्होंने अपना कोई रजिस्टेªशन नहीं कराया था. लेकिन माना जाता है कि कोलंबिया की गुवाटाबिटा झील में यह खजाना दबा है. वास्तव में हजारों टन सोने के इस खजाने के पीछे विश्वास की कहानी यह है कि हजारों साल पहले यहां के आदिवासी सूर्य की आराधना करते समय अपना सोना इस झील में फेंका करते थे. वह सोना हजारों साल में झील की तलहटी में इकट्ठा हो गया है.

वैसे खजानों की अनगिनत कहानियों में कोई देश पीछे नहीं है. चाहे वो चीन हो या हिंदुस्तान. माना जाता है कि दक्षिण भारत में कई ऐसे खजाने छिपे हैं, जिनकी रखवाली हजारों, हजार काले नागों की सेना करती है. पता नहीं इस बात में कितनी सच्चाई होगी, लेकिन पिछले एक दशक के अंदर दक्षिण भारत में कई ऐसे मंदिर सामने आये हैं, जिनके तहखानों में कई कई टन सोने की मौजूदगी सार्वजनिक हुई है.

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इससे यह भी कहा जा सकता है कि खजानों को लेकर सारी कहानिया बिल्कुल झूठी भी नहीं हैं. साथ ही हम उन कहानियों को कैसे भूल सकते हैं, जो ऐसे इतिहास के पात्रों को हमारे सामने लाती हैं, जिनकी किस्मत रहस्यमयी खजानों ने बदली. बहरहाल दुनिया के ये सारे खजाने कहानियां हो सकते हैं, किस्से हो सकते हैं, लेकिन नासा के वैज्ञानिकों ने जिस छुद्र ग्रह को अब तक के सुने गये खजानों के बाप के रूप में पेश किया है, वो खजाना कहानी नहीं है, कल्पना नहीं है, बस अभी तक यह बात कल्पना है कि आखिर इस खजाने का दोहन कैसे संभव होगा?

सुशांत की Birth Anniversary के लिए फूल खरीदने पहुंचीं रिया चक्रवर्ती, देखें Photos

बौलीवुड के दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती आज मुंबई के बांद्रा में दिखाई दी. सुशांत के मौत के बाद रिया चक्रवर्ती काफी सुर्खियों में छाई थीं.

सुशांत के मौत से जुड़े रिया चक्रवर्ती पर कई तरह के सवाल किए गए. और ड्रग्स के मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा. तो ऐसे में रिया जहां भी जाती हैं, वहां उन्हें स्पौट किया जाता है. और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ.

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सुशांत सिंह राजपूत की बर्थ एनिवर्सरी कल यानि 21 जनवरी को है और इसके लिए रिया बांद्रा में फूल खरीदने गई थी. खबरों  के अनुसार वहां कुछ फोटोग्राफर्स ने तस्वीरें क्लिक करके लिए उनका पीछा किया तो एक्ट्रेस ने हाथ जोड़ते हुए पिक्टर क्लिक करने से मना किया.

बताया जा रहा है कि वहां पर किसी ने रिया से सवाल किया कि आपके लिए ये बहुत भयावह होगा कि हर समय लोग आपका पीछा करते रहते हैं. इस पर रिया ने हां में जवाब भी दिया.

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बता दें कि 14 जून 2020 में बौलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने सुसाइड कर लिया था. उस वक्त रिया के साथ उनके डेटिंग की खबरें थी. सुसाइड के बाद रिया पर सुशांत के परिवार ने एफआईआर दर्ज कराया था. इसके बाद सुशांत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.

वर्कफ्रंट की बात करे तो रिया जल्द ही अपकमिंग फिल्म ‘चेहरे’ में दिखाई देंगी. इस फिल्म में रिया चक्रवर्ती के साथ बिग बी यानि अमिताभ बच्चन भी लीड रोल में नजर आएंगे.

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