हैवान- भाग 5: प्यार जब जुनून में बदल जाए

इंस्पैक्टर रमेश सोचने लगा कि हो न हो, राधा का अपहरण और अरुण का कत्ल विक्रम ने ही किया है. सोचतेसोचते इंस्पैक्टर के चेहरे पर एक जीत भरी मुसकान फैल गई.

इधर बेहोश राधा को विक्रम अपनी गोद में लिटाए उस के बालों पर हाथ फेर रहा था.

‘‘राधा, अब हम एक हो गए हैं. अब हमें कोई और जुदा नहीं कर सकता. हमारी शादी होगी. हम दोनों साथ रहेंगे. मैं नौकरी करूंगा. महीने के आखिर में तनख्वाह तुम्हारे हाथों में सौंपूंगा. तुम दरवाजे पर खड़ी हो कर मेरा रास्ता देखोगी. मुझे लेट आने पर डांटोगी. मैं तुम्हें सारे सुख दूंगा. अब हम लोग खुशीखुशी साथ रहेंगे.’’

राधा की बेहोशी टूटने लगी. जैसे ही उसे होशा आया, वह विक्रम को धक्का दे कर दूर जा खड़ी हुई.

‘‘तुम ने मुझे बरबाद कर के ही दम लिया. अब तो तुम्हें चैन मिल गया न. और अब क्या चाहते हो तुम?’’

‘‘ऐसा मत कहो राधा,’’ विक्रम रोने वाले अंदाज में बोला, ‘‘आज हमारी शादी है राधा.’’

‘‘शादी…’’ राधा नफरत से बोली, ‘‘मैं तुम से शादी करूंगी, तुम ने यह सोचा भी कैसे.’’

‘‘क्यों, अब तो हमारे बीच कोई दीवार भी नहीं है.’’

‘‘तुम ने मुझ से मेरा पति छीन लिया. मेरे सामने मेरे मासूम बेटे का कत्ल कर दिया. मुझे हवस के भूखे कुत्तों के सामने डाल कर मेरी इज्जत लुटवा दी. मैं… मैं… तुम से शादी तो क्या तुम पर थूकना भी पसंद नहीं करूंगी.’’

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विक्रम चीख पड़ा, ‘‘हां, मैं ने ये सब किया, सिर्फ तुम्हें पाने के लिए. तुम्हें पाने के लिए जेल से भागा. जेलर का खून किया. अरुण और तुम्हारे बच्चे की हत्या की. तुम्हारा बलात्कार करवाया. ये सब मैं ने इसलिए किया, ताकि तुम्हें पा सकूं. तुम्हीं ने तो कहा था कि तुम्हें मेरे सहारे की जरूरत नहीं है, क्योंकि तुम अपने पति, बेटे और इज्जत के सहारे जी लोगी. मुझे ये सब दीवारें तुम्हारे लिए गिरानी पड़ीं. अब तुम्हारे पास कुछ नहीं है. अब तुम्हें मुझ से शादी करनी ही पड़ेगी. अब इस हाल में तुम्हें कौन अपनाएगा सिवाय मेरे?’’

अब राधा चीखचीख कर कहने लगी, ‘‘मैं तुम से नफरत करती हूं और हमेशा करती रहूंगी. तवायफ बन कर कोठों में नाच लूंगी, भीख मांग लूंगी, मगर तुम से शादी नहीं करूंगी. अपने दिल से यह खयाल निकाल दो. तुम्हारा यह सपना एक सपना ही बन कर रह जाएगा.’’

विक्रम रोने लगा, ‘‘आखिर तुम कैसे मानोगी? क्या चाहती हो तुम?’’

‘‘मैं ने तुम्हें पाने के लिए क्याक्या नहीं किया और तुम हो कि…’’

‘‘मैं तुम्हें जान से मार डालना चाहती हूं.’’

‘‘क्या, तुम मुझे मारना चाहती हो. मैं तुम से प्यार करता हूं और तुम…’’

‘‘हां… हां… मैं तुम से नफरत करती हूं,’’ राधा झल्ला गई.

विक्रम राधा से प्यार की भीख मांगता रहा, पर राधा हर बार यही जवाब देती कि मैं तुम से नफरत करती हूं.

‘‘राधा, तुम्हारी यह नफरत कैसे दूर होगी?’’ विक्रम बोला.

‘‘तुम्हारा खून कर के,’’ राधा भयानक आवाज में बोली.

‘‘तुम्हारी नफरत ले कर जीना मेरे बस का नहीं है. ये लो रिवाल्वर और खत्म कर दो मुझे. अगर मुझे मार कर तुम्हारी नफरत मिटती है, तो उतार दो मेरे सीने में इस रिवाल्वर की सारी गोलियां,’’ कहते हुए विक्रम ने गोलियों से भरा रिवाल्वर राधा के हाथों में थमा दिया. राधा ने भी विक्रम की ओर रिवाल्वर तान लिया.

‘धांय’ गोली चली, मगर राधा के हाथ की रिवाल्वर से नहीं, बल्कि चंदू की पिस्तौल से.

चंदू मुसकरा रहा था.

‘‘यह क्या हरकत है चंदू?’’ विक्रम चीखा.

‘‘उस्ताद, अगर तुम इस लड़की के हाथों मर गए, तो तुम्हारे ऊपर रखे गए उस इनाम का क्या होगा, जो पुलिस को बताने से मुझे मिलने वाला है. अगर मरना है, तो मेरी गोली से मरो, पुलिस की गोली से मरो.’’

‘‘चंदू… दगाबाज कहीं का…’’ विक्रम चीखा.

‘‘इतनी ऊंची आवाज में चिल्लाने का कोई फायदा नहीं उस्ताद. थोड़ी देर में तो पुलिस आने वाली है. उस के बाद तुम होगे पुलिस की गिरफ्त में और मैं इनाम के एक लाख रुपए ले कर इस लड़की को अपनी रखैल बना कर ऐश करूंगा.’’

‘‘चंदू…’’ विक्रम चंदू की ओर झपटा.

‘‘धांय,’’ एक गोली विक्रम के घुटने को पार करती हुई निकल गई. विक्रम वहीं गिर गया.

‘‘हा…हा…हा…’’ चंदू जोर से हंसा, ‘‘आज से मैं उस्ताद और यह लड़की भी मेरी हो गई. चल आजा रानी,’’ चंदू राधा को घसीटने लगा.

फिर एक बार विक्रम की ओर देख कर बोला, ‘‘चलते हैं उस्ताद.’’

चंदू राधा को ले कर दूसरे कमरे की तरफ चला गया. राधा की चीख सुन कर जख्मी विक्रम का चेहरा वीभत्स हो गया. वह पूरा जोर लगा कर उठा. चंदू ने राधा के जिस्म से साड़ी अलग कर दी. साड़ी विक्रम के चेहरे पर जा गिरी. विक्रम को देख चंदू ने रिवाल्वर तान दी.

इस से पहले कि चंदू ट्रिगर दबाता, विक्रम ने चंदू के ऊपर छलांग लगा दी. दोनों में जबरदस्त लड़ाई होने लगी. जख्मी होने की वजह से शुरू में चंदू भारी पड़ा, लेकिन उस्ताद तो उस्ताद ही होता है. विक्रम ने जख्मी होते हुए भी चंदू को अपने शिकंजे में ले लिया.

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इस बीच राधा ने जल्दी से साड़ी पहनी और पास में ही पड़े रिवाल्वर को उठा लिया. विक्रम ने चंदू को मारमार कर बुरी तरह से जख्मी कर दिया.

विक्रम बोला, ‘‘चंदू, उस्ताद उस्ताद ही होता है और चेला चेला.’’

हैवान- भाग 6: प्यार जब जुनून में बदल जाए

पल भर के लिए राधा सोच में पड़ गई, ‘‘यह आदमी जो मेरा गुनाहगार है… इस ने यह सब आखिर किया किसलिए? मुझे पाने के लिए न. क्या यही इस का जुर्म है कि इस ने मुझ से बेइंतहा प्यार किया. भले ही इस का तरीका गलत था, लेकिन चाहा तो मुझे बेपनाह ही था. लेकिन यह भी सच है कि इस चाहत में इस ने मेरा सबकुछ छीन लिया. मुझे बरबाद कर दिया. उस की सजा तो मैं इसे जरूर दूंगी. इतनी भयानक सजा दूंगी, जो यह सोच भी नहीं सकता.’’

विक्रम फिर बोला, ‘‘सोच क्या रही हो राधा, चलाओ गोली. आज तुम्हारे सामने तुम्हारा गुनाहगार खड़ा है. मार दो मुझे.’’

‘‘विक्रम…’’ तभी बाहर लाउडस्पीकर से तेज आवाज आई.

विक्रम ने खिड़की से बाहर झांक कर देखा. बाहर चारों तरफ पुलिस फैली हुई थी. इंस्पैक्टर रमेश के हाथ में माइक था. पुलिस की बंदूकें विक्रम की कोठी की ओर तनी हुई थीं.

‘‘विक्रम, अपनेआप को पुलिस के हवाले कर दो,’’ इंस्पैक्टर रमेश ने फिर से लाउडस्पीकर से बोला.

‘‘हा…हा…हा…’’ चंदू ठहाके मार कर हंसा, ‘‘अब तुम मरोगे उस्ताद, पुलिस आ चुकी है. अब मेरे हाथों में होगा इनाम और तुम्हारी किस्मत में कालकोठरी या पुलिस की गोली. हा… हा… हा…’’ चंदू की हंसी गूंजने लगी.

विक्रम राधा से बोला, ‘‘राधा, जल्दी से खत्म कर दो मुझे. मैं पुलिस के हाथों गिरफ्तार होने के बजाय तुम्हारे हाथों से मरना पसंद करूंगा. तुम्हारी नफरत को अपने खून के कतरों से मिटा कर मुझ मर कर भी सुकून मिलेगा. राधा, जल्दी करो.’’

‘‘मैं तुम्हें इतनी आसानी से मरने नहीं दूंगी विक्रम. तुम ने मुझे बहुत तड़पाया है. तुम्हें तो मौत से भी बदतर जिंदगी दूंगी मैं. मुझे पाने के लिए जो जुल्म तुम ने किए हैं, उन जुल्मों की यही सजा है कि मैं तुम्हें कभी न मिलूं. तुम जिंदा रहोगे, लेकिन मुझे कभी हासिल नहीं कर सकोगे. मैं तुम्हें कभी नहीं मिलूंगी… कभी नहीं…’’ और राधा ने रिवाल्वर अपनी कनपटी पर लगा कर ट्रिगर दबा दिया.

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राधा ने दम तोड़ दिया. विक्रम चीख पड़ा.

‘‘नहीं राधा… नहीं… ये तुम ने क्या किया?’’ विक्रम राधा की लाश से लिपट कर रोने लगा.

आज विक्रम की सारी उम्मीदों और सपनों को कभी न खत्म होने वाला ग्रहण लग चुका था. दूर खड़ा चंदू मुसकरा रहा था. गोली की आवाज सुन कर इंस्पैक्टर रमेश चौंक गया.

‘‘विक्रम, अब मैं सिर्फ 3 तक गिनूंगा… अगर तब तक तुम ने खुद को पुलिस के हवाले नहीं किया तो मजबूरन मुझे गोली चलानी पड़ेगी.’’

उधर विक्रम राधा को अपनी बांहों में लिए रोए जा रहा था.

चंदू बोला, ‘‘अब ये मर चुकी है उस्ताद, अब तुम्हारी बारी है.’’

‘‘राधा, अगर तुम नहीं तो मैं जी कर क्या करूंगा? मैं खुद को गोली मार कर तुम्हारीनफरत दूर करूंगा.’’

‘‘एक…’’ इंस्पैक्टर की आवाज गूंजी.

चंदू, ‘‘उस्ताद, एक हो गया. तुम तो गए.’’

‘‘दो…’’ इंस्पैक्टर की आवाज फिर गूंजी.

विक्रम का चेहरा अचानक से भयानक हो गया. उस के चेहरे पर हैवानियत के भाव आ गए. उस ने सभी खिड़की और दरवाजे खोल दिए.

‘‘उस्ताद तुम गए और मैं मालामाल,’’ चंदू ठहाका लगा कर हंसा.

‘‘हम तो डूबेंगे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे. चंदू मैं चाहूं तो अब भी भाग सकता हूं लेकिन भागूंगा नहीं. अब मैं अपनी राधा के बिना जिंदा नहीं रहना चाहता.’’

विक्रम ने जेब से रिवाल्वर निकाली. चंदू कांप उठा.

‘‘उस्ताद, पुलिस से टक्कर लोगे?’’

‘‘नहीं चंदू नहीं… राधा ने खुदकुशी कर ली. मैं जिंदा नहीं रहना चाहता. फिर ये पुलिस खाली हाथ तो वापस जाएगी नहीं. तुम्हारी गद्दारी पर ही पुलिस इतनी दूर से आई है… ऐसे ही लौट जाए अच्छा नहीं लगा.’’

‘‘तीन…’’ इंस्पैक्टर रमेश अक्रामक स्वर में बोला.

विक्रम पर तो दयाल का कोई असर नहीं था. अलबत्ता चंदू जरूर घबरा गया था. उसे विक्रम के इरादे बेहद भयावह नजर आने लगे थे.

विक्रम ने राधा का माथा चूमा और कहा, ‘‘मैं भी तुम्हो पास आ रहा हूं राधा. मैं आ रहा हूं…’’

‘‘फायर,’’ इंस्पैक्टर रमेश ने आर्डर दिया. सैकड़ों गोलियां खिड़की दरवाजों से अंदर आने लगीं. चंदू ने दीवार की आड़ ली. चंदू जोर से रमेश को आवाज लगा रहा था. यह बताने के लिए कि वे गोली न चलाए. अंदर वह भी है जिस ने विक्रम की फोन पर सूचना उस तक पहुंचाई थी. मगर गोलियों के शोर में चंदू की आवाज कहीं गुम हो गई.

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चंदू को बेबस देख कर विक्रम हंसा, ‘‘लगता है चंदू तुम ने पुलिस नहीं मौत बुलाई है.’’

विक्रम लेट कर घसीटता हुआ चंदू के पास पहुंच गया. उस ने चंदू का हाथ पकड़ लिया. चंदू घबरा गया.

विक्रम बोला, ‘‘ऐ चंदू, तुम ने बचपन में गिल्लीडंडा और कंचों का खेल तो बहुत खेला होगा. चल, आज हम दोनों मिल कर मौत का खेल खेलते हैं.’’

पुलिस की गोलियों से पूरा माहौल गूंज उठा.

विक्रम के इरादे भांपते ही चंदू दहशत से भर गया, ‘‘नहीं उस्ताद… नहीं.’’

विक्रम ने भरा रिवाल्वर उछाला और राधा की तरफ देख कर बोला, ‘‘राधा, मैं आ रहा हूं.’’

विक्रम ने चंदू और खुद को दीवार की आड़ से हटा कर खिड़की के सामने कर दिया. पलक झपकते ही गोलियां दोनों के जिस्म में समाती चली गईं.

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दोनों ने वहीं दम तोड़ दिया. पुलिस कोठी में घुसी. चंदू अपने लालच का शिकार हुआ.

विक्रम राधा को पाने की चाहत और जुनून में इस कदर हैवान हो गया था कि उस ने पहले राधा को बरबाद किया, फिर खुद को मौत के गले लगाया.

कमरे में 3 लाशें पड़ी थीं. फर्श पर खून बिखरा पड़ा था. इंस्पैक्टर रमेश ने अपनी टोपी निकाल कर हाथों में ले ली. विक्रम की राधा के लिए दीवानगी की बढ़ती हद ने उसे हैवान बना कर रख दिया था.

कोरोना: देश में “संयुक्त सरकार” का गठन हो!

इस महामारी से एकजुट हो कर जूझने के लिए जरूरत आ पड़ी है, देश में ‘संयुक्त सरकार’ का गठन हो.

क्या वाकई देश में ‘संयुक्त सरकार’ बनाने की जरूरत आ पड़ी है?

देश में कोरोना को ले कर जो हालात बन चुके हैं, वह दिल दहला रहे हैं. कहीं रेमडेसीविर इंजेक्शन नहीं है, कहीं औक्सीजन गैस नहीं है, कहीं बेड नहीं है, तो कहीं एंबुलेंस नहीं है.

लाशों को भी श्मशान घाट में जगह नहीं मिल पा रही है. उसे देख कर लगता है कि देश में मैडिकल इमर्जेंसी नहीं, बल्कि संयुक्त सरकार का गठन किया जाना चाहिए .

देश के गंभीर हालात पर देश भले ही मौन है, मगर देश के बाहर तमाम आलोचना हो रही है. आस्ट्रेलिया के प्रमुख अखबार ‘फाइनेंशियल रिव्यू’ ने प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट डेविड रो का एक कार्टून छापा है- “पस्त हाथी पर मौत की सवारी.”

इस कार्टून में भारत को एक हाथी का प्रतीक दिखाया गया है, जो मरणासन्न है और प्रधानमंत्री मोदी अपने सिंहासन पर निश्चिंत शान से बैठे हुए हैं.

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देश और दुनिया में इस तरह की आलोचना से अच्छा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं देश के मुखिया होने के नाते सामने आ कर देश में सभी महत्वपूर्ण दलों के प्रमुख नेताओं को ले कर संयुक्त सरकार का गठन की घोषणा कर के देश को बचा सकते हैं. जैसे ही हालात में सुधार हो, देश पुनः अपने राजनीतिक रंगरूप में आगे बढ़ने लगे.

वस्तुत: कोरोना का कहर देश के लगभग सभी राज्यों में बिजली बन कर टूटा है. देश का सब से बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश हो या महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश हो या राजस्थान, दिल्ली हो या दक्षिण भारत के प्रदेश सभी जगह कोविड-19 के कारण स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है और शासनप्रशासन की धज्जियां उड़ रही हैं. लगता ही नहीं कि कहीं कोई व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है. अस्पतालों के बद से बदतर हालात वायरल वीडियो के रूप में देश देख रहा है. जीवनरक्षक दवाएं नहीं मिल पा रही हैं और अगर ये कहीं मिल भी रही हैं, तो कालाबाजारी में लाखों रुपए लोगों को देने पड़ रहे हैं.

जिस तरह कोरोना महासंकट के कारण हालात बेकाबू हो गए हैं और संभले नहीं संभल रहा है. उन्हें देख कर लगता है कि तत्काल प्रभाव से देशहित मे संयुक्त राष्टीय सरकार को देश को सौंप देना चाहिए.

औक्सीजन का ही एक मसला अगर हम देखें तो पाते हैं कि देश के हर कोने में त्राहिमामत्राहिमाम मची हुई है. कहीं औक्सीजन नहीं है, तो कहीं औक्सीजन होने पर उसे अनट्रेंड लोग संचालित कर रहे हैं और न जाने कितने मरीज सिर्फ लापरवाही से मर गए. कई जगहों पर तो औक्सीजन लीकेज के कारण आग लग गई और बेवजह लोग मर गए.

औक्सीजन का वितरण भी देशभर में सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है. सवाल है कि आखिर इस का दोषी कौन है? शासनप्रशासन आखिर कहां है? ऐसी गंभीर हालत को देख कर कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी को देश को जो दिशा देनी चाहिए, उसे नहीं दे पा रहे हैं. चहुं ओर अव्यवस्था का आलम बन गया है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके, देश अगर संयुक्त राष्ट्रीय सरकार काम संभाल ले तो कोरोना संकट से नजात शीघ्र मिलने की संभावना है .

देश में महामारी का आलम है. भयंकर हो चुके कोरोना के कारण सरकारें ‘मौतों का हत्याकांड’ कर रही हैं यानी आंकड़े छिपाए जा रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ से औक्सीजन लखनऊ, उत्तर प्रदेश भेजा जा रहा है. और कहीं का औक्सीजन कहीं सत्ता की धौंस दिखा कर रोक लिया जा रहा है. लोग इस आपाधापी में बेवजह ही मर रहे हैं. ऐसे गंभीर हालात बन गए हैं. जमाखोरी और महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ चुकी है. शासन महंगाई को रोक नहीं पा रहा है और जमाखोरी कर के लोग आम लोगों को दोनों हाथों से लूट रहे हैं. लगता है, देश में शासन नहीं है. देश अराजकता की ओर बढ़ चुका है. जिसे जितनी जल्दी हो सके, व्यवस्थित करने के लिए संयुक्त सरकार बनाना इस दृष्टिकोण से उचित प्रतीत होता है क्योंकि इसी संवैधानिक माध्यम से देश में एक रूप से शासन संभव होगा और देश कोरोना से लड़ पाएगा.

और दुनिया चिंतित हो उठी है…

जिस तरीके से कोरोना की रफ्तार बढ़ रही है, आने वाले समय में प्रतिदिन 5 लाख कोरोना मरीज मिलने लगेंगे तो हालात और भी गंभीर हो जाएंगे. स्थिति में सुधार का क्या प्रयास हो रहा है? यह देशदुनिया की जनता को दिखाई नहीं दे रहा है. स्थिति विषम होते हुए ही दिखाई दे रही है.

यहां सब से महत्वपूर्ण तथ्य है कि कोविड-19 की तबाही भयावह मंजर को, भारत के गंभीर हालात को दुनिया देख रही है और उसे देख कर के चिंतित है. और आगे आ कर के हाथ बंटाना चाहती है पाकिस्तान, चीन जैसे शत्रु राष्ट्रों के अलावा यूरोपीय संघ, जरमनी, ईरान ने भारत के गंभीर हालात को देख कर के सहायता देने की पेशकश की है. वहीं रूस और अमेरिका भी सामने आ गया है, क्योंकि आज भारत के कारण दुनिया को ‘मानवता संकट’ में दिखाई देने लगी है.
अनेक देश भारत को इस महामारी से बचाने के लिए पहल कर रहे हैं. ऐसे हालात को देख कर के कहा जा सकता है कि जब दुनिया चिंतित है, तो सीधा सा अर्थ है कि भारत की वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार असफल सिद्ध हो रही है. हालात यही बने रहे तो कहा जा रहा है कि आने वाला समय और भी भयावह होगा.

हमारे यहां विगत दिनों सब से मजाक भरा फैसला यह रहा कि कोरोना वैक्सीन 3 दरों पर खरीदने का ऐलान किया गया. केंद्र सरकार स्वयं 150 रुपए में और राज्यों को 600 रुपए में वैक्सीन बेचने का फरमान जारी हुआ, जो सरकार के दिवालियापन का ही सुबूत है.

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गंभीर हालत का इस बात से भी पता चलता है कि दुनिया के कई देशों ने भारत से अपनी आवाजाही को रोक दिया है. भारत के कई बड़े पैसे वाले अपनी जान बचाने की खातिर देश छोड़ कर भाग चुके हैं.

यह भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि भारत में हुई मौतों पर अमेरिका जैसे देश मान रहे हैं कि भारत में जो आंकड़े सरकार बता रही है, उस से दोगुना से 5 गुना तक मौतें हो रही हैं, जिन्हें छुपाया जा रहा है.

ऐसे में अगर देश को मैडिकल इमर्जेंसी से बचाने के लिए यथाशीघ्र ही एक राष्ट्रीय सरकार बननी चाहिए, तभी देश में एक रूप में शासन व्यवस्था होने पर लोगों की जान बचेगी, अन्यथा आने वाले समय में जो भयंकर मंजर होगा, उस के कारण लोग देश की शासन व्यवस्था और शासन में बैठे हुए लोगों को कभी भी माफ नहीं कर पाएंगे. इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह है कि अपना अहम छोड़ कर सभी राष्ट्रीय दलों को साथ ले कर देश के प्रमुख अर्थशास्त्री, न्यायविद, चिकित्सक, सामाजिक विभूति को आगे ला कर एक ‘राष्ट्रीय संयुक्त सरकार’ बनाएं और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए देश को नेतृत्व देने का काम किया जाना चाहिए.

बिहार: गांव को चमकाने की कवायद या लूटखसोट

बिहार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी के हवाले से छपी इस खबर में बिहार के तकरीबन 8,300 गांव (पंचायतों) के विकास व उन के बढि़या रखरखाव के लिए एक रूपरेखा पेश की गई, जिस में पूरे राज्य की हर पंचायत में पार्क बनाने, खेल के लिए मैदान बनाने, सिक्योरिटी के नजरिए से गांवगांव में सीसीटीवी कैमरे लगाने, छठ घाट बनाने व उन्हें निखारने और सामुदायिक शौचालय बनाने जैसी और भी कई योजनाओं को लागू करने की बात की गई.

पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने यह भी बताया कि 15वें वित्त आयोग की सिफारिश के तहत केंद्र सरकार ने बकाया 1,254 करोड़ रुपए पंचायती राज विभाग को भेज दिए हैं, जबकि 3,763 करोड़ रुपए की रकम पहले ही भेजी जा चुकी है.

यकीनन यह खबर उन लोगों पर जरूर असर डालेगी, जिन्होंने अब तक बिहार के गांवों के दर्शन नहीं किए हैं, पर वे लोग जो बिहार से जुड़े हैं और अकसर बिहार के गांवदेहात के इलाकों में आतेजाते रहते हैं, उन के लिए यह खबर खास जोश की बात नहीं हो सकती, बजाय इस के कि यह खबर गांवदेहात के इलाकों की तरक्की और उन्हें निखारने की कम और लूटखसोट व बंदरबांट के लिए गढ़ी जाने वाली योजना संबंधी खबर ज्यादा लगती है.

जिन गांवों को ‘वीआईपी गांव’ बनाने की बात कही जा रही है, उन की आज के समय में क्या हालत है, इस का जायजा लेना जरूरी है. गांव की तो छोडि़ए, आप बिहार के शहरों की यहां तक कि राजधानी पटना की बात करें तो यहां अनेक इलाके ऐसे हैं, जिधर से आप का मुंह पर रूमाल रखे या नाक बंद किए बिना गुजर पाना भी मुमकिन नहीं है.

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अभी पिछले साल की ही तो बात है, जब पटना की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी. लोगों के घरों में पानी घुस गया था. यहां तक कि राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी घुटनेघुटने पानी में सपरिवार मदद के लिए सड़क पर खड़े नजर आए थे.

आज बिहार के ज्यादातर गांव बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं. शायद राज्य के किसी भी गांव में जल निकासी का कोई ठोस इंतजाम नहीं है. हां, अनेक गांवों में नालियां व नाले बने जरूर देखे जा सकते हैं, पर आज या तो वे टूटेफूटे पड़े हैं या उन में कूड़ा पटा पड़ा है या जिस मकसद से ये नालेनालियां बनाए गए थे, वह कतई पूरा नहीं हो रहा.

कूड़ा निबटान की कोई योजना पूरे राज्य के किसी गांव में नहीं है. नतीजतन, तकरीबन हर घर के सामने कूड़े का ढेर लगा है, जो बदबू फैलाता है. इसी गंदगी के चलते मक्खीमच्छरों की भरमार है.

आज भी गांव के तमाम लोग सड़कों के किनारे खुले में शौच करते हैं, जिस के चलते राहगीरों का गुजरना तो मुश्किल हो ही जाता है, बदबू के साथ बीमारी फैलने का भी डर बना रहता है.

पिछले साल बारिश के दिनों में दरभंगा जिले व आसपास के कई इलाकों में बाढ़ व बारिश का जो पानी गांवों में घुस गया था, वह आज तक कई ठिकानों पर रुका हुआ है. इस से वहां बदबू व मच्छरमक्खियों का तो साम्राज्य है ही, साथ ही ऐसी जगहों पर आम के पेड़ों समेत और भी पेड़ लगातार पानी लगे रहने के चलते खराब हो चुके हैं.

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पिछले शासनकाल में ‘हर घर नलजल योजना’ की शुरुआत की थी. पर यह योजना जनहितकारी योजना तो कम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ एक तमाशा जरूर साबित हुई.

इस के तहत गांवगांव में पानी की प्लास्टिक की वे टंकियां रखी गई हैं, जो अमूमन लोग अपने मकानों पर जल भंडारण के लिए रखवाते हैं. इस के अलावा प्लास्टिक (फाइबर) के पाइप बिछाए गए, जो लगने के साथसाथ खराब होते जा रहे थे.

इन टंकियों में मोटर द्वारा जमीनी जल भरा जाता था और उसी की सप्लाई की जाती थी. आज यह योजना तकरीबन नाकाम हो चुकी है, क्योंकि या तो प्लास्टिक के पाइप टूटफूट गए हैं या जमीन के नीचे से पानी खींचने वाली मोटरें जल गई हैं.

ऐसा जान पड़ता है कि इस तरह की योजनाएं जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसों की लूटखसोट के लिए ही बनाई जाती हैं, इसीलिए शक पैदा हो रहा है कि राज्य के गांवों को चमकाने व उन्हें ‘वीआईपी’ बनाने की जो नई कवायद एक बार फिर शुरू होने जा रही है, वह हकीकत में धरातल पर दिखाई भी देगी या नेताओं, पंचायत प्रतिनिधियों व सरकारी अफसरों के बीच लूटखसोट का साधन बन कर रह जाएगी?

सीसीटीवी कैमरे व पार्क बनाने से ज्यादा जरूरी है कि सही तरीके से चलने वाली नालेनालियां बनाई जाएं और जो टूटेफूटे हैं, उन्हें ठीक किया जाए. हर गांव में कूड़ा निबटान का बढि़या इंतजाम किया जाए.

‘हर घर नलजल योजना’ की दोबारा समीक्षा की जाए और इन के पाइप बदल कर लोहे के पाइप बिछाए जाएं व जलशोधन के बाद जल की सप्लाई की जाए. इस के लिए प्लास्टिक की टंकियां पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि बड़ी सीमेंट की टंकियां बनवाई जाएं.

इन सब से भी ज्यादा जरूरी है कि इन सभी योजनाओं को भ्रष्टाचार से मुक्त रखा जाए और जो भी सरकारी अफसर, जनप्रतिनिधि या ठेकेदार इन जनहितकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार करते दिखें, उन्हें फौरन जेल भेजा जाए. इस के साथसाथ गांव के लोगों को भी जागरूक किया जाए और उन्हें भी गंदगी व साफसफाई के बीच के फर्क को समझाने के लिए जनसंपर्क मुहिम चलाई जाए.

देश का किसान नए कानूनों से है परेशान ?

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल व पुडुचेरी के चुनावों का फैसला चाहे जो भी हो, मोदीशाह सरकार ने यह जता दिया है कि 1947 के बाद जो आजादी हमें मिली थी, वह धीरेधीरे खत्म हो रही है और चुनावों के जरीए नई अपनी सरकारें बनाने की बात केवल हवाहवाई है जैसे कि भगवान ही हमें चलाता है, वही फसल पैदा करता है, वही कारखानों से सामान बनवाता है, वही सर्वशक्तिशाली.

मोदीशाह और भगवान दोनों कहते हैं कि हमें पूजो, हमारी हां में हां मिलाओ वरना सरकार बनाना तो दूर तुम जीने लायक भी नहीं रहोगे.

देश का किसान नए कानूनों से परेशान है और देश में धरनों पर बैठा है पर ये भगवान कहते हैं कि पुराणों में लिखा है कि तपस्या तो वर्षों करनी पड़ती है तब भगवान सुनते हैं. देश का मजदूर बेकारी से परेशान है. उसे कोरोना वायरस से डरा कर जब सैकड़ों मील दूर चला कर घर भेजा गया तो रास्ते में डंडे पड़े, खाना नहीं मिला. पर चुनावों में मोदीशाह पैसा बरसा रहे हैं. उन का कहर तो दूसरी पार्टियों पर टूट रहा है जैसा छोटे व्यापारियों, मजदूरों, घरवालियों (नोटबंदी और गैस के दाम बढ़ा कर) पर गिरता है.
भारत जैसे विशाल देश में तरहतरह की पार्टियां होनी चाहिए ताकि हर तरह के लोग अपनी बात कह सकें और सरकारी फैसलों को अपने हिसाब से करवाने की कोशिश कर सकें पर भारतीय जनता पार्टी का सपना है कि देश में ऐसा राज हो जिस में केवल एक पार्टी हो, एक शासक हो, एक नेता हो, एक की सुनी जाए. एक ईश्वर है, उसी में आत्मा है का पाठ सुनने और सुनाने वाले अब एक का ही मंदिर चाहते हैं या एक ही ताकत को सारे मंदिरों का मालिक बना देना चाहते हैं.

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कभी तमिलनाडु में विपक्षी पार्टियों पर छापे पड़ते हैं तो कभी पश्चिम बंगाल में. कभी केरल में पुराने मामले खोले जा रहे हैं तो कभी चुनाव आयोग की बांहें मरोड़ कर उसे अपने मन की करने को कहा जा रहा है. अदालतों से कुछकुछ कहींकहीं न्याय मिल रहा है पर ऐसी सरकार सपना होती जा रही है जो सब की हो, चाहे उसे वोट दिया हो या न दिया हो.

लोकतंत्र की जान है अलग बोल. सब एक ही सुर में बोलेंगे तो वे तो कैदी माने जाएंगे. गांव तक में कई सोच चलती हैं. तभी पंच, यानी 5 की बात की जाती है. 5 जने अपनीअपनी बात अलग तरह से कह सकें, यही इस देश की मूल भावना है, यही 1947 के बाद हमें मिला.

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असल में अंगरेजों के राज में भी हमें छूट ज्यादा थी, क्योंकि जितनी जेलें आज सरकार के खिलाफ बोलने वालों से भरी हैं, 1947 से पहले कभी नहीं भरी. गांधी, नेहरू, भगत सिंह अपनी बात कह सकते थे. आज वह कहते हुए डर लगने लगा है. आज सरकार की खुफिया पुलिस मंदिरों के पंडों की शक्ल में हर गली में मौजूद है और मजेदार बात है कि उसी जनता से चंदा और चढ़ावा पाती है जिस पर वार करती है. उसी के सहारे चुनाव लड़े जा रहे हैं.

जैसे फैसले हो रहे हैं वह दिख रहा है. सारे धंधे, खेती के धंधे भी कुछ हाथों में दिए जा रहे हैं. सारे देश को मुट्ठी में करने के लिए व्यापार कुछ के हाथों में होगा. अदालतों में चुनिंदा लोग ही बैठे होंगे. पुलिस और प्रशासन में जो सरकार की न सुन कर जनता की सुनेगा उसे दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल दिया जा रहा है. इन 5 राज्यों की सरकारों, विपक्षी दलों या विपक्षी को जहरीला बताबता कर जहर जनता के लिए बहाया जा रहा है. नतीजे जो भी हों चौंकाएंगे नहीं.

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एक्टिंग के बाद अब असल जिंदगी में भी सिंगर बने ‘कुमकुम भाग्य’ के ‘किंग’ मिशाल रहेजा

कई लोकप्रिय टीवी सीरियलों में अभिनय कर बतौर अभिनेता शोहरत बटोर चुके मिशाल रहेजा एक कदम आगे बढ़ाते हुए अब गायन के क्षेत्र में कदम रख रहे हैं. जी हां! मिशाल रहेजा बतौर निर्माता,गायक व अभिनेता एक सिंगल गाना ‘‘सारा गूगल‘‘ लेकर आने की तैयारी में हैं.

सिंगल गाने ‘‘सारा गूगल’’ की चर्चा करते हुए मिशाल रहेजा कहते हैं- ‘गायक के रूप में यह मेरा पहला अवसर है और मैं थोड़ा नर्वस हूं. मेरे गुरु त्रिदीब रॉय चैधरी ने इस गीत की रचना की है, जिसे सुनने के बाद मैने स्वयं इसे अपनी अपनी आवाज में स्वरबद्ध करने का निर्णय लिया.सच कहॅूं तो जब मैंने पहली बार लंदन में इस गीत को अपने गुरू त्रिदीब राॅय चैधरी के मुख से सुना,तो मुझे अहसास हुआ कि यह गीत मेरे हालात से मेल खाता है.मेरे जीवन में अभी जिस तरह की स्थिति है,वह सब इस गीत का हिस्सा है.’’

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संगीत वीडियो का निर्माण करने का अनुभव कैसा रहा?

इस सवाल पर मिशाल रहेजा ने कहा- ‘‘यह सबसे मुश्किल काम था. हम बतौर कलाकार सेट पर जाकर निर्देशक के निर्देश कअनुसार काम करके अपने घर लौट आते हैं. मगर यहां हमें कई रचनात्मक लोगों को एक साथ लाना था, जो कि मेरे लिए सीखने का एक खूबसूरत अनुभव रहा.यह एक रोमांटिक गीत है. लेकिन इस गीत को तैयार करते हुए मैंने बहुत कुछ सीख लिया है.इसके बाद एक दूसरा गाना बनाने की भी मेरी योजना है.’’

मिशाल रहेजा ने गीत ‘‘सारा गूगल’’के साथ बौलीवुड की नामचीन हस्तियों को जोड़ा है.कई बौलीवुड फिल्मों और म्यूजिक वीडियो के मशहूर कैमरामैन संजय एफ गुप्ता ने इस सिंगल गाने के वीडियो का निर्देशन किया है. संजय ने इससे पहले लोकप्रिय गीत ‘‘जलवा’’ के वीडियो का भी निर्देशन किया था.

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बता दें कि सिंगल गाना ‘‘सारा गूगल’’ का निर्माण ‘‘मैंगो लेक पिक्चर्स’’ के बैनर तले किया गया है. बहुत जल्द यह गाना और इसका म्यूजिक वीडियो बाजार में उपलब्ध होगा.

लाला रामदेव: कोरोनिल को ना उगल पा रहे, ना निगल

आज बाबा रामदेव का आश्रम कोरोना पॉजिटिव मरीजों को लेकर  देश दुनिया में चर्चा में आ गया है. सौ के आसपास मरीज पॉजिटिव मिलने के बाद हड़कंप है. वहीं बाबा रामदेव से  जैसी अपेक्षा थी उनका स्वभाव देश जानता है, उन्होंने साफ कह दिया है कि यह झूठी खबरें हैं, अफवाहबाजी है.

आज यह सवाल है कि क्या बाबा रामदेव अपने ही  बुने हुए कोरोनिल के जाल में तो नहीं फंस गए हैं ? उन्होंने बड़ी ही चालाकी दिखाते हुए जब दुनिया में कोरोना संक्रमण फैला हुआ था 1 वर्ष पूर्व ही कोरोनिल का ईजाद करके अपनी पीठ थपथपाई थी.

अगर देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर नहीं आती भयावह मंजर देश नहीं देखता तो शायद रामदेव बाबा यह भी कहते कि देखो! मेरी बनाई “कोरोनिल”  से कोरोना भाग गया.

वर्तमान भारत सरकार में बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी से उनकी गलबहियां सार्वजनिक है. कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में उनका एक बड़ा योगदान देश ने देखा है. ऐसे में बाबा रामदेव “लाला” बन कर कोरोना कोविड 19 जैसी संक्रमण कारी बीमारी का इलाज और दवाई बनाने का दावा करने लगे, यही नहीं दवाई आज पूरे देश में हर शहर मेडिकल दुकानों में उपलब्ध है. जिसे बड़ी शान के साथ यह कह करके बेचा गया कि इसका इस्तेमाल करने से आप सुरक्षित रहेंगे. देश की भोली-भाली जनता आंख बंद करके उन्हें अपना आराध्य पूज्य मानने वाले लोग उन्हें गेरूए कपड़ा पहने हुए और लंबी दाढ़ी के कारण साधु संत त्यागी  समझ कर के लोग उनकी बात का अक्षरश: पालन करने लगे, परिणाम स्वरूप करोड़ों रुपए रामदेव बाबा ने कोरोनील के नाम पर अपनी गांठ में दबा लिए.

अब कोरोना पलट करके उनके ही आश्रम, योगपीठ में दस्तक दे रहा है और बाबा बगले झांकने को मजबूर हैं. ऐसे हालात बन गए हैं कि उन्हें न तो उगलते बन रहा है और न निगलते.

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पतंजलि योगपीठ और कोरोना

आज यह चर्चा का विषय बन गया है कि हरिद्वार में बाबा रामदेव का पतंजलि योगपीठ  कोरोना विस्फोट का केंद्र है. यहां 83 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए है. सभी संक्रमतों का आइसोलेट कर दिया गया है. कहा जा रहा है अब बाबा रामदेव की भी कोरोना जांच की जा सकती है. मगर समय बीता जा रहा है उनकी जांच की रिपोर्ट इन पंक्तियों के लिखे जाने तक नहीं आई है, जो यह सवाल खड़ा करती है कि क्या रामदेव कोई विशिष्ट प्राणी है जिनकी कोरोना जांच नहीं होगी ? बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मिलने के बाद जिला प्रशासन को चाहिए कि संशय को मिटाते हुए आश्रम के सभी लोगों का कोरोना टेस्ट करके जो कोरोना पॉजिटिव हैं उनका इलाज प्रारंभ करें. क्योंकि कोरोना को किसी भी तरह से छुपाना गंभीर परिणाम ला सकता है.

दरअसल, पंतजलि योगपीठ के कई संस्थानों में  कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं. हरिद्वार सीएमओ डॉ. शंभू झा के मुताबिक 10 अप्रैल से अब तक पंतजलि योगपीठ आचार्यकुलम और योग ग्राम में  कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं. इन संक्रमितों को पतंजलि परिसर में ही आइसोलेट किया गया है.

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बाबा रामदेव अपने कथनी और करनी में हमेशा से अलग अलग दिखाई देते हैं. वे जो कहते हैं वह करते नहीं हैं और करते हैं वैसा कहते नहीं है. आज इस वैश्विक महामारी के समय में जो गंभीरता समझदारी बाबा रामदेव के आचरण में दिखाई देनी चाहिए वह नहीं दिखाई देती. अपने इन्हीं व्यवहार के कारण , जो ऊंचाई रामदेव बाबा ने प्राप्त की थी विगत 10 वर्षों में धराशायी होती दिख रही है.

बाबा रामदेव का सम्मान और प्रभाव धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. आज कोरोना कोविड-19 के इस समय में क़रोनिल ला करके अपनी साख दांव पर लगा दी है , उन्होंने अपने आपको चक्रव्यूह में डाल दिया है जहां से बचकर निकलना अभिमन्यु के लिए भी संभव नहीं हुआ था.

Crime Story: 60 हजार के लिए मासूम का खून

राइटर- कस्तूर सिंह भाटी

सौजन्य- सत्यकथा

राजस्थान में सूर्यनगरी के नाम से मशहूर जोधपुर शहर राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृहनगर है. जोधपुर के भीतरी शहर के खांडा फलसा थानांतर्गत कुम्हारियां कुआं इलाके में जटियों की गली में ओमप्रकाश प्रजापति का परिवार रहता है.

ओमप्रकाश के 3 बेटे बंसीलाल, मुरली व गोपाल हैं. सभी भाई पिता के साथ एक ही मकान में रहते हैं. परिवार हलवाई का काम करता है.

पिछले एक साल से कोरोना के कारण शादीब्याह कम होने से परिवार की आय भी प्रभावित हुई. बंसीलाल, मुरली व गोपाल तीनों शादीशुदा व बालबच्चेदार हैं. बंसीलाल के 2 बड़ी बेटियों के बाद 7 वर्ष पहले हिमांशु  हुआ था.

बंसीलाल से छोटे भाई मुरली के एक बेटा व एक बेटी है.  वहीं तीसरे भाई गोपाल के 3 बेटियां हैं. आपस में अनबन के चलते मुरली की पत्नी दोनों बच्चों को ले कर अपने पीहर चली  गई थी.

हिमांशु ही पूरे घर में एकमात्र बेटा था. 15 मार्च, 2021 को दोपहर करीब 3 बजे अचानक हिमांशु कहीं लापता हो गया. परिजनों ने आसपास उस की तलाश की. मगर उस का कोई अतापता नहीं चला. हिमांशु के अचानक लापता होने से घर में कोहराम मच गया. किसी अनहोनी की आशंका से घर में मातम छा गया.

हिमांशु का पता नहीं चलने पर उस के पिता बंसीलाल प्रजापति थाना खांडा फलसा पहुंचे और थाने में बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी. गुमशुदगी में बताया कि उन का 7 साल का बेटा हिमांशु 15 मार्च, 2021 की शाम 3 साढ़े 3 बजे के बीच खेलता हुआ घर के आगे गली से लापता हो गया. उस की हर जगह तलाश की लेकिन कोई पता नहीं चला.

बच्चे का कद 3 फीट 6 इंच है और रंग गोरा है. उस ने प्रिंटेड औरेंज टीशर्ट व नीली जींस पहन रखी थी. खांडा फलसा थानाप्रभारी दिनेश लखावत ने गुमशुदगी दर्ज कर बच्चे के लापता होने की खबर उच्चाधिकारियों को दे दी.

जोधपुर पूर्व पुलिस उपायुक्त धर्मेंद्र सिंह यादव ने तुरंत एडिशनल सीपी भागचंद्र, एसीपी राजेंद्र दिवाकर, दरजाराम बोस, देरावर सिंह सहित 5 थानाप्रभारियों व डीएसटी को अलगअलग जिम्मा सौंप कर तत्काल काररवाई करने के निर्देश दिए.

पुलिस टीमों ने अपना काम शुरू कर दिया. सब से पहले कुम्हारिया कुआं क्षेत्र के जटियों की गली में लगे 2 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकाली गई. हिमांशु फुटेज में वहां नजर आया. तब 2 बज कर 27 मिनट का समय था. इस के बाद आगे के पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज देखे गए, मगर उन में हिमांशु कहीं नजर नहीं आया.

पुलिस ने परिजनों से भी पूछा कि फिरौती के लिए कोई फोन तो नहीं आया. उस समय तक कोई फोन नहीं आया था. पुलिस टीमें हिमांशु की खोजबीन में लगी थीं. मगर उस का पता नहीं चला.

17 मार्च, 2021 बुधवार को सुबह 11 बजे रातानाडा क्षेत्र जोधपुर स्थित रेंज आईजी नवज्योति गोगोई के बंगले की चारदीवारी के पास स्थित पोलो ग्राउंड के सूखे नाले में से भयंकर बदबू आ रही थी.

एक व्यक्ति ने असहनीय दुर्गंध की बात आईजी बंगले के संतरी को बताई. संतरी ने पुलिस को सूचना दी. रातावाड़ा पुलिस मौके पर पहुंची. सूखे नाले में आटे के कट्टे से दुर्गंध आ रही थी. आटे के कट्टे को खोल कर देखा तो उस में एक बच्चे का शव मिला.

शव मिलने की सूचना पर पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे. एफएसएल की टीम और डौग स्क्वायड को भी बुलाया गया. एफएसएल टीम ने वहां से साक्ष्य उठाए. शुरुआती जांच में सामने आया कि बच्चे की हत्या गला घोंट कर कर शव कट्टे में डाला  गया था. कट्टे में टिफिन बैग भी मिला.

पुलिस ने काररवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए मथुरादास माथुर मोर्चरी में रखवा दिया. थोड़ी देर बाद पता चला कि यह शव 3 दिन पहले लापता हुए हिमांशु प्रजापति का है.

मृतक हिमांशु के परिजन जब बच्चे का शव मिलने की खबर पा कर एमडीएम मोर्चरी पहुंचे और बच्चे का शव देखा. उन्होंने शिनाख्त कर दी कि शव हिमांशु का है.

3 दिन से लापता बच्चे का शव मिलने की खबर पा कर कुम्हारिया कुआं क्षेत्र में लोगों ने बाजार बंद कर दिया. महिलाओं ने सड़क जाम कर धरनाप्रदर्शन शुरू कर दिया. पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की जाने लगी.

पुलिस पिछले 3 दिनों से रातदिन हिमांशु की खोज में लगी थी, मगर उस का शव आज मिला. पुलिस कमिश्नर जोस मोहन ने सभी पुलिस अधिकारियों एवं थानेदारों की आपात बैठक बुला कर हर थाना क्षेत्र से एकएक टीम गठित कर करीब 10 पुलिस टीमों को अपनेअपने क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज जांचने को कहा.

कमिश्नर ने निर्देश दिया कि जल्द से जल्द हत्यारों को खोज निकाला जाए. हिमांशु का शव घर से 5 किलोमीटर दूर मिला था. उस का शव मिलने के बाद डीसीपी (पूर्व) धर्मेंद्र सिंह यादव ने जिले के अधिकारियों की बैठक ली और एडिशनल डीसीपी (पूर्व) भागचंद्र के नेतृत्व में अधिकारियों को जल्द से जल्द हत्यारों को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी.

डीसीपी ने जांच अधिकारी को अपहरण वाले स्थान के आसपास के सीसीटीवी की फुटेज देखने व संदिग्ध वाहन और व्यक्ति का पता लगाने के निर्देश दिए. नारानाडा व बनाड़ थानाप्रभारी को शव मिलने वाली जगह के आसपास के फुटेज देखने व विश्लेषण करने पर लगाया गया.

डांगियावास थानाप्रभारी को अपहरण व शव मिलने वाले स्थान और समय के बीटीएस के अवलोकन की जिम्मेदारी सौंपी गई. महामंदिर थानाप्रभारी व टीम को सादे कपड़ों में मोर्चरी भेजा गया, ताकि परिजन व स्थानीय लोगों में शामिल संदिग्ध व्यक्ति का पता लगाया जा सके.

सहायक पुलिस आयुक्त (पूर्व) ने आटे के कट्टे की निर्माता कंपनी का पता लगाया, जो बोरानाडा में थी. कट्टे पर मिले बैच नंबर व तारीख से उस दुकान का पता चल गया, जहां वह कट्टा सप्लाई हुआ था. सब से महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी साइबर टीम को दी गई. उन्हें मृतक हिमांशु के दादा ओमप्रकाश के वाट्सऐप पर आए वर्चुअल नंबर का आईपी एड्रैस ट्रेस करने का जिम्मा दिया गया.

वर्चुअल नंबर होने के बावजूद साइबर टीम ने उसे ट्रेस कर लिया. यह नंबर मृतक हिमांशु के पड़ोस में रहने वाले किशन गोपाल सोनी का था. बता दें कि 15 मार्च, 2021 को हिमांशु के लापता होने के बाद अगले दिन 16 मार्च की रात 10 बज कर 20 मिनट पर हिमांशु के दादा ओमप्रकाश के वाट्सऐप पर वर्चुअल नंबर से 10 लाख फिरौती के मैसेज किए गए थे.

दादा ने संदेश नहीं पढ़े तो अपहर्ता ने 17 मार्च की सुबह 10 बज कर 23 मिनट पर पड़ोसी मुकेश फोफलिया को वर्चुअल नंबर से काल किया. उस ने कहा कि ओमप्रकाश को जो मैसेज भेजे गए हैं, वह पढ़ें.

साथ ही कहा कि 10 लाख रुपए ले कर चाचा मुरली नागौर रेलवे स्टेशन पर आ जाए. रुपए मिलने पर हिमांशु को सुरक्षित लौटाने का आश्वासन दिया गया था.

फिरौती न देने पर बच्चे की किडनी, हार्ट निकाल कर बेचने की धमकी दी गई थी. कहा गया था कि बच्चे के शरीर से अंग निकाल कर रुपए वसूल कर लेंगे. संदेश में धमकी दी गई थी कि पुलिस को सूचना नहीं देनी है.

अपहर्त्ताओं ने फिरौती के संदेशों में हिमांशु के पिता बंसीलाल व दादा के साथ चाचा मुरली का भी उल्लेख किया था. मुकेश फोफलिया ने यह जानकारी हिमांशु के परिजनों से साझा की.

ओमप्रकाश के मोबाइल पर भेजे मैसेज देखे गए. इसी दौरान हिमांशु का शव पुलिस को मिल गया था. तब मृतक हिमांशु के दादा ओमप्रकाश और पड़ोसी मुकेश ने पुलिस को इस की जानकारी दे दी थी.

साइबर टीम ने वर्चुअल नंबर ट्रेस कर के मैसेज और फोन करने वाले किशन गोपाल सोनी की पहचान कर ली. उधर आटे के कट्टे के संबंध में दुकानदार ने बताया कि ऐसा 25 किलो आटे का कट्टा हरेक तीसरे दिन किशन गोपाल सोनी ले जाता है.

मृतक हिमांशु का पड़ोसी किशन गोपाल का परिवार ठेले पर सब्जीपूड़ी बेचता है. किशन 25 किलो आटे का कट्टा लेता है. यह जानकारी मिलने पर पुलिस ने किशन सोनी के किराए के मकान में जा कर जांच की.

जांच के दौरान आटे के कट्टे और टिफिन सप्लाई करने वाला बैग मिले. ऐसे ही बैग व कट्टे में हिमांशु का शव बरामद हुआ था.

पुलिस टीम और साइबर टीम ने जांच की तो अपहरण व हत्या के शक की सुई किशन सोनी पर जा टिकी. हत्या के बाद किशन ने वर्चुअल नंबर हासिल कर फिरौती मांगी थी.

किशन सोनी ने 16 मार्च, 2021 को दिन भर वर्चुअल नंबर लेने के लिए मशक्कत की थी. नंबर हासिल होने पर उस ने उस नंबर को इंटरनेट से कनेक्ट किया और हत्या के बावजूद फिरौती मांगने के लिए दादा को मैसेज व मुकेश फोफलिया को काल की.

पुलिस का मानना है कि फिरौती मांगने के संदेश भ्रमित करने के लिए भेजे गए थे. खैर, जब पुलिस को यकीन हो गया कि किशन सोनी ही हिमांशु प्रजापति का अपहर्त्ता और हत्यारा है, तब पुलिस ने एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी में सब से आगे रह कर प्रदर्शन कर रहे सोनी को धर दबोचा.

किशन मोर्चरी के बाहर धरनेप्रदर्शन में पुलिस प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी और आरोपी को पकड़ने का नाटक कर रहा था. जब पुलिस ने उसे दबोचा तो किशन ने अपना मोबाइल वहीं पटक कर पैर से तोड़ना चाहा. मगर पुलिस पहले ही उस की कुंडली खंगाल चुकी थी. पुलिस ने किशन सोनी को हिरासत में लिया और खांडा फलसा थाने ला कर पूछताछ की.

पुलिस के आला अधिकारी भी पूछताछ करने पहुंचे. आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. किशन सोनी ने ही हिमांशु प्रजापति की अपने घर में 15 मार्च, 2021 की दोपहर बाद साढ़े 3 बजे पहले गला घोंट कर और फिर गमछे से रस्सी बना कर उसे गले में लपेटा और कस कर उसे मार डाला था. हत्या के बाद करीब एक घंटे तक वह शव के पास बैठा रहा और शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाता रहा.

इस के बाद करीब पौने 5 बजे उस ने हिमांशु का शव आटे के कट्टे में डाला और नीचे तहखाने में ले जा कर रख दिया ताकि उस के परिवार को पता न चले.

शाम को 5 बजे किशन की मां और बहन जब पूरीसब्जी बेच कर घर लौटीं तब किशन शव वाले कट्टे के ऊपर टिफिन सप्लाई करने वाले थैले डाल कर मोटरसाइकिल पर वहां से 5 किलोमीटर दूर रातानाडा थानाक्षेत्र के आईजी के बंगले के पास पोलो मैदान के  खाली नाले में सुनसान स्थान पर डाल आया.

उस ने हिमांशु की हत्या फिरौती वसूलने के लिए की थी. आरोपी किशन ने बताया कि उसका परिवार गरीब है और रोटियां बेच कर गुजारा करता है. आरोपी औनलाइन जुआ खेलता है. वह जुए में करीब 60 हजार रुपए हार गया था. हिमांशु 3 बजे खेलता हुआ जब अचानक उस के घर आया तो उस ने उसे आधा घंटा बहलाफुसला कर रोका.

बाद में जब हिमांशु घर जाने की जिद करने लगा तब उस ने हाथ आए शिकार को मौत की नींद सुला दिया. हिमांशु के हत्यारे के पकड़े जाने की खबर के बाद कुम्हारियां कुआं क्षेत्र में प्रदर्शन बंद हुआ. पुलिस ने मैडिकल बोर्ड से मृतक के शव का पोस्टमार्टम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया.

खांडा फलसा क्षेत्र में हिमांशु की हत्या से लोग सन्न थे. मृतक के घर पर मातम छाया था. परिजनों ने मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया. वहीं पुलिस ने आरोपी किशन गोपाल सोनी की गिरफ्तारी के बाद उस के खिलाफ खांडा फलसा थाने में अपहरण कर के फिरौती मांगने और हत्या करने का मामला दर्ज कर लिया.

पुलिस ने हिमांशु के हत्यारोपी किशन गोपाल सोनी निवासी कुम्हारिया कुआं, थाना खांडा फलसा, जोधपुर को कोर्ट में पेश कर 2 दिन के रिमांड पर ले कर पूछताछ की. पूछताछ में जो कहानी प्रकाश में वह आई, वह इस प्रकार है.

राजस्थान के बीकानेर शहर के सुनारों की गवार, बागड़ी मोहल्ला से सालों पहले सूरजरत्न सोनी जोधपुर आ बसे थे. सूरजरत्न ठेले पर सब्जीपूड़ी बेचते थे. इसी से अपने बीवीबच्चों का पालनपोषण करते थे. सूरजरत्न के बेटे किशन गोपाल ने एसी फ्रिज रिपेयरिंग का काम सीख लिया था. इस काम से उसे अच्छी आय होती थी.

सूरजरत्न की बीवी और बेटी उस के साथ सब्जीपूड़ी के ठेले पर उस की मदद करती थी. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था कि कोरोना काल आ गया. किशन का कामधंधा ठप हो गया. कई महीने तक कामधंधा बंद रहा. भूखों मरने की नौबत आ गई. किशन दिन भर मोबाइल में आंखें गड़ाए रहता. वह मोबाइल में दिन भर गेम खेलता रहता था. वह मोबाइल हैकर बन गया था.

उस के मोबाइल में पुलिस को ऐसेऐसे ऐप मिले जो मोबाइल हैक करने में प्रयुक्त होते हैं. किशन मोबाइल में औनलाइन जुआ खेलता था. इस से वह 50-60 हजार का कर्जदार हो गया था. रुपए मांगने वाले किशन को परेशान करने लगे. वह किसी भी तरह रुपए पाने की फिराक में था.

तभी 15 मार्च, 2021 को करीब 3 बजे खेलतेखेलते हिमांशु उर्फ लाडू उस के घर आ गया. मातापिता व बहन ठेले पर थे. किशन घर पर अकेला था. उस के शैतानी दिमाग ने साजिश रची और उस ने हिमांशु को कमरे में बंधक बना लिया.

मासूम हिमांशु रोनेचिल्लाने लगा तो किशन ने हाथों से उस का गला दबाया. वह बेहोश हो गया तो कपड़े से उस का गला घोंट कर मार डाला. उस ने शव आटे के कट्टे में बांधा और टिफिन सप्लई वाले बैग में डाला.

फिर अकेला ही मोटरसाइकिल पर रख दिनदहाड़े आईजी बंगले के पास जा कर सूखे नाले में फेंक आया. कुम्हारिया कुआं से ले कर जालोरी गेट, रातानाडा व पोलो मैदान तक के सीसीटीवी फुटेज में किशन के बयान की पुष्टि हुई.

उस ने यूट्यूब से वर्चुअल नंबर खोजे. शव ठिकाने लगाने के बाद वर्चुअल नंबर लेने के लिए अमेरिका का नंबर चयन किया. मोबाइल से ही पेटीएम से भुगतान किया. वर्चुअल नंबर मिलने पर उसे इंटरनेट से जोड़ कर वाट्सऐप डाउनलोड किया और उसी से उस ने मृतक के दादा ओमप्रकाश को मैसेज भेजे और पड़ोसी मुकेश फोफलिया को फोन किया.

किशन सोनी ने वर्चुअल नंबर लेने के बाद टैबलेट में वाट्सऐप इंस्टाल किया था. उस ने अपने मोबाइल के इंटरनेट से टैबलेट कनेक्ट कर मृतक के दादा को फिरौती के लिए वाट्सऐप मैसेज भेजे थे.

आरोपी किशन ने सुनियोजित तरीके से साजिश रची थी. उस के टैबलेट में कई ऐसे ऐप इंस्टाल मिले. उसे भ्रम था कि पुलिस वर्चुअल नंबर से आईडी तो ट्रेस कर लेती है, लेकिन इन ऐप से लोकेशन व आईपी एड्रेस लगातार बदलते रहेंगे और वह पकड़ में नहीं आएगा. मगर उस की यह होशियारी धरी रह गई. वह शिकंजे में आ ही गया.

आरोपी किशन के खिलाफ आरोपों को और मजबूत करने के लिए पुलिस के आग्रह पर एक बार फिर एफएसएल टीम घटनास्थल पर आई. उस ने किशन गोपाल सोनी के घर की जांच की और साक्ष्य जुटाए.

पुलिस रिमांड पर चल रहे किशन की निशानदेही पर पुलिस ने टैबलेट, शव छिपाने में प्रयुक्त कट्टे का हूबहू कट्टा, टिफिन बैग, हेलमेट व बाइक बरामद की.

हिमांशु का मुंह बंद कर के किशन उसे अलमारी में छिपाना चाहता था मगर हिमांशु के घर जाने की जिद करने पर उस ने उसे मार डाला और 5 बजे तक शव फेंक कर घर लौट आया. नहा कर किशन बाहर निकल गया. उस के बाद हिमांशु के परिजन उसे तलाशते मिले. किशन भी उन के साथ हिमांशु की तलाश में जुट गया.

हिमांशु के परिवार वाले इस आस में थे कि वह कहीं खेल रहा होगा जबकि किशन सोनी उस की हत्या कर शव तक ठिकाने लगा चुका था. कुछ दिनों से किशन 60 हजार रुपए का कर्ज उतारने के लिए अपहरण और फिरौती की योजना बना रहा था कि हिमांशु उस के घर आ गया था.

बस किशन ने आगापीछा सोचे बगैर उसे दबोच लिया और मार डाला. किशन को विश्वास था कि हिमांशु की फिरौती के 10 लाख रुपए उस के परिवार वाले उसे दे देंगे. मगर वह अपने ही बुने जाल में फंस गया.

रिमांड अवधि खत्म होने पर 20 मार्च, 2021 को पुलिस ने किशन को कोर्ट में पेश कर 3 दिन के रिमांड पर फिर लिया. पूछताछ पूरी होने पर किशन को 23 मार्च को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin: पाखी की नई चाल का क्या होगा अंजाम, सई-विराट में बढ़ेंगी दूरियां?

स्टार प्लस का  सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) में इन दिनों हाई वोल्टेज ड्रामा चल रहा है. सीरियल में नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहा है जिससे दर्शकों को एंटरटेनमेंट का डबल डोज मिल रहा है. तो आइए बताते हैं शो के नए अपडेट्स के बारे में.

सीरियल में जल्द ही पाखी का नया रूप देखने को मिलने वाला है. जी हां, चौहान हाउस से सई के जाने के बाद अब पाखी विराट को पाना चाहती है. तो वहीं उधर सई ने चौहान हाउस में दोबारा आने से मना कर दिया है.

 

तो इधर पाखी विराट के करीब आने की कोशिश कर रही है. पाखी ने विराट के मन में सई के खिलाफ कान भी भरती नजर आ रही है. खबर यह आ रही है कि इस शो के अपकमिंग एपिसोड में ये दिखाया जाएगा कि विराट, पाखी की इस हरकत से से तंग आ जाएगा और वह उसको मना करेगा. तो पाखी अपनी बेईज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाएगी और सई से बदला लेने का प्लान बनाएगी.

 

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एक तरफ पाखी चाहती है कि विराट और सई को अलग हो जाए तो दूसरी तरफ बरखा चाहती है कि सई और विराट एक हो जाए. बरखा के आने से पाखी का हर एक प्लान चौपट होने वाला है.

 

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सीरियल के अपकमिंग एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा कि पाखी अपने चाल में कामयाब होती है?  या सई और विराट हमेशा के लिए अलग हो जाएंगे?

सज-धज कर किसकी दुल्हन बन गईं भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी? फोटोज हो रही हैं वायरल

भोजपुरी फिल्मों की फेमस एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दुल्हन लुक में कुछ फोटोज शेयर की हैं, इन फोटोज को देखकर फैंस के बीच में खलबली मच गई हैं और हर कोई बस यही जानना चाहता है कि क्या सचमुच रानी चटर्जी ने शादी कर ली हैं और आखिर उनका दूल्हा है कौन? अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो हम आपको बताते हैं इन वायरल फोटोज की सच्चाई…

फिल्म के लिए बनीं दुल्हन…

रानी चटर्जी के फैंस को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्होंने सचमुच शादी नहीं की है बल्कि वो तो एक फिल्म के लिए दुल्हन बनीं हैं. जी हां, रानी चटर्जी ने अपकमिंग फिल्म ‘बाबुल की गलियां’ (Babul Ki Galiyan) के लिए ये वेडिंग सीन शूट किया है. जिसकी फोटोज उन्होंने अपने पर्सनल अकाउंट पर शेयर की हैं. इन फोटोज को शेयर करते हुए रानी ने लिखा- ‘बुजर्ग कहते है सही समय पर शादी करने से अच्छा दूल्हा मिलता है. मेरे अगले पोस्ट का इंतजार कीजिए.’ जिसके बाद कुछ फैंस रानी चटर्जी को गुपचुप शादी रचाने पर बधाई भी देने लगे थे.

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ये भोजपुरी एक्टर बना दूल्हा…

इस फिल्म में रानी चटर्जी के साथ जय यादव लीड रोल में दिखाई देंगे जो इस सीन में उनके दूल्हे भी बने हैं. रानी के अलावा जय यादव ने भी अपनी सोशल मीडिया अकाउंट पर फोटो शेयर करते हुए कैप्शन दिया है, ‘रानी जी आप भोजपुरी फिल्म जगत की रानी हो. इतना सरल स्वभाव, हंसमुख, अपने को-आर्टिस्ट और टेक्नीशियनस को किस तरह कम्फर्ट करना चाहिए आप से सीखने को मिला. मुझे आपके साथ काम करके खुशी हो रही है. इतने सपोर्ट के लिए आपका धन्यवाद.’

 

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जय यादव के इस पोस्ट पर रानी ने रिप्लाई दिया, ‘आप बहुत स्वीट हो जय मैं तुम्हें बहुत मिस करूंगी. मेरी पक पक को अपनी प्यारी स्माइल के साथ सुनने के लिए आपका धन्यवाद. जल्द मिलेंगे.’

बता दें कि हाल ही में रानी चटर्जी ने व्हाइट वेडिंग गाउन में एक खूबसूरत फोटोशूट करवाया था, जिसकी फोटोज देख फैंस को लगा कि वो सचमुच शादी करने वाली हैं.

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