बस एक सनम चाहिए- भाग 3: शादी के बाद भी तनु ने गैर मर्द से क्यों रखा रिश्ता

2 दिन तक कोई रिस्पौंस नहीं आया, मगर तीसरे दिन इनबौक्स में उस का मैसेज देखते ही मैं झूम उठी. उस ने अपना मोबाइल नंबर लिख कर रात 8 बजे से पहले बात करने को कहा था. लगभग 7 बजे मैं ने फोन किया. वह भी शायद मेरे ही फोन का इंतजार कर रही थी. फोन उठाते ही अपनी चिरपरिचित शैली में चहक कर बोली, ‘‘हाय फ्रैंडी, कैसी हो? आज अचानक मेरी याद कैसे आ गई? बच्चे और जीजाजी से फुरसत मिल गई क्या?’’

‘‘अरे बाप रे, एकसाथ इतने सवाल? जरा सांस तो ले ले,’’ मैं ने हंसते हुए कहा. फिर उसे उस गाने की याद दिलाई जिसे वह अकसर गुनगुनाया करती थी. सुन कर तनु जोर से खिलखिला उठी. कहने लगी, ‘‘क्या करूं यार, मैं शायद ऐसी ही हूं… बिना आशिकी के रह ही नहीं सकती.’’

‘‘क्या अब तक आशिक ही बदल रही है? तेरे मनमुताबिक कोई परमानैंट साथी नहीं मिला क्या?’’ मैं ने आश्चर्य से पूछा. ‘‘अरे, तुझे बताया नहीं क्या कभी? मैं ने राजीव से शादी कर ली थी,’’ तनु ने नए राज का खुलासा किया.

‘‘हम मिले ही कब थे जो तुम मुझे बताती? पर मैं बहुत खुश हूं. आखिर मेरी मेनका को विश्वामित्र मिल ही गया,’’ मैं ने अपनी खुशी जाहिर की. ‘‘हां यार. 2 साल तक हम दोनों का रिश्ता रहा. मैं ने उसे अपनी कसौटी पर खूब परखा. इस के लिए मैं ने अपनी सीमाएं लांघ कर उसे फुसलाने की बहुत कोशिश की, मगर वह नहीं फिसला. एक बार तो मुझे शक भी हुआ था कि यह पुरुष है भी या नहीं. कोई लड़की इतनी लिफ्ट दे रही है और ये महाशय ब्रह्मचारी बने बैठे हैं.’’ तनु के शब्दों की गाड़ी चल पड़ी थी. मेरी भी दिलचस्पी अब उस की बातों में बढ़ने लगी थी.

‘‘अच्छा, फिर आगे क्या हुआ?’’ मैं ने पूछा. ‘‘लगता है राजीव आ गया. बाकी बातें कल करेंगे,’’ कह कर तनु ने मुझ अचंभित छोड़ कर फोन काट दिया.

दूसरे दिन शाम 7 बजे तनु का फोन आया. उस ने कल के लिए सौरी बोला और कहा, ‘‘फोन काटने के लिए सौरी. मगर हम दोनों ने डिसाइड कर रखा है कि घर आने के बाद अपना सारा समय सिर्फ एकदूसरे को ही देंगे.’’ ‘‘यह तो बहुत प्यारी बौंडिंग है तुम दोनों के बीच. खैर सौरीवौरी छोड़, तू तो आगे की स्टोरी बता,’’ मैं ने उसे याद दिलाया.

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अपनी बात आगे बढ़ाते हुए तनु कहने लगी, ‘‘राजीव यों तो मुझ से बहुत प्यार जताता था, मगर जब भी मैं उसे लिफ्ट देती थी वह मुझ से कहता था कि दोस्ती तो ठीक है, मगर वह बिना शादी के जिस्मानी संबंध के पक्ष में नहीं है. वह ऐसे संबंध को अपनी होने वाली पत्नी के साथ विश्वासघात समझता है,’’ तनु ने कहा. ‘‘वैरी गुड. तुम्हें ऐसे ही साथी की तलाश थी,’’ मैं ने खुश होते हुए कहा.

‘‘हां, और फिर हम ने शादी कर ली.’’ ‘‘यानी हैप्पी ऐंडिंग,’’ मैं उस के लिए खुश हो गई.

‘‘नहीं, असली कहानी तो उस के बाद शुरू हुई,’’ तनु थोड़ी झिझकी. ‘‘अब क्या हुआ. क्या राजीव सचमुच पुरुष नहीं था?’’ मेरा मन घबरा उठा.

‘‘वह पक्का पुरुष ही था,’’ तनु ने कहा. ‘‘वह कैसे?’’ मैं ने आशंकित हो कर पूछा.

‘‘हुआ यों कि शादी के साल भर बाद ही मुझे बेचैनी होने लगी. आदतन मेरा मन किसी के प्यार के लिए तड़पने लगा. विवेक जो मेरे विभाग में नया आया था, मेरा मन उस की तरफ खिंचने लगा. उस का केयरिंग नेचर मुझे लुभाने लगा. यह बात भला एक पति और वह भी राजीव जैसे पुरुष को कैसे सहन हो सकती थी,’’ तनु बोली. ‘‘मगर क्यों? क्या राजीव के प्यार में कोई कमी थी?’’ मैं ने आशंकित हो कर पूछा.

‘‘अरे यार समझा कर, जब हम दोस्त को पति बना लेते हैं तो एक अच्छा दोस्त खो देते हैं. बहुत सी बातें ऐसी भी होती हैं जो हम पति से नहीं बल्कि एक दोस्त से ही कह सकते हैं. मेरे साथ भी यही हुआ. पता नहीं ये लड़के लोग शादी करने के बाद इतने पजैसिव क्यों हो जाते हैं,’’ तनु धीरेधीरे खुल रही थी. ‘‘अच्छा, फिर क्या हुआ’’ मैं ने आदतन जिज्ञासा से पूछा.

‘‘होना क्या था, हमारे बीच दूरियां बढ़ने लगीं. विवेक का जिक्र आते ही जैसे राजीव के चेहरे की रौनक गायब हो जाती थी. उसे मेरा विवेक से मिलना, हंसना, बोलना जरा भी पसंद नहीं था. शादी के बाद गैरमर्द से दोस्ती रखना उस के हिसाब से चरित्रहीनता थी, मगर मैं भी अपने दिल के हाथों मजबूर थी. मैं बिना प्यार के रह ही नहीं सकती.’’ तनु ने कहा. ‘‘फिर?’’

‘‘फिर क्या? एक दिन मैं ने राजीव का हाथ अपने हाथ में ले कर उस से पूछा कि दिल पर हाथ रख कर बताओ कि जब हम दोस्त थे तब वह मेरे चरित्र के बारे में क्या सोचता था? उस ने कहा कि उस ने मुझ जैसे मजबूत इरादों वाली लड़की नहीं देखी और वह मेरी इसी खूबी पर मरमिटा था. बस फिर क्या था. मैं ने उसे समझाया कि शादी से पहले जब मैं इतने लड़कों के साथ दोस्ती कर के भी वर्जिन रही तो अब वह कैसे सोच सकता है कि मेरी दोस्ती में पवित्र भावना नहीं होगी.’’ ‘‘फिर क्या कहा राजीव ने?’’ मेरी उत्सुकता बढ़ती ही जा रही थी.

‘‘मैं ने उसे यकीन दिलाया कि जिस वक्त मेरे किसी दोस्त का हाथ मेरे कंधे से नीचे सरकने लगेगा मैं उसी क्षण हाथ झटक दूंगी. मेरे तन और मन पर सिर्फ और सिर्फ उसी का हक है. बस मेरे खुश होने की शर्त शायद यही है कि एक जिगरी दोस्त मेरी जिंदगी में होना ही चाहिए,’’ तनु ने अपनी बात पूरी की. ‘‘फिर?’’

‘‘बस, बात राजीव की समझ में आ गई कि मैं दोस्त के बिना खुश नहीं रह सकती और अगर मैं खुश नहीं रहूंगी तो उसे खुश कैसे रखूंगी,’’ तनु आगे बोली. ‘‘अच्छा.’’ सुन कर मैं उछल पड़ी.

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‘‘इस के बाद उस ने मुझे विवेक से दोस्ती रखने से नहीं रोका और मैं ने भी उस से वादा किया कि जब वह मेरे साथ होगा तब मेरे वक्त पर सिर्फ उसी का अधिकार होगा,’’ तनु ने अपनी बात खत्म की. हम ने आगे भी टच में रहने का वादा करते हुए फोन पर विदा ली. तनु का फोन तो कट गया, मगर मैं अभी भी मोबाइल को कान पर लगाए सोच रही थी कि कितनी साहसी है तनु. सच ही तो कहती है कि कम से कम एक आशिक तो हमारी जिंदगी में ऐसा होना ही चाहिए जो हमें सिर्फ प्यार करे. हमारी हर बुराई के साथ हमें स्वीकार करे. जिस से हम अपनी सारी अच्छीबुरी बातें शेयर कर सकें. पति से

जुड़े राज भी. जिसे हम खुल कर अपनी कमियां बता सकें. हम औरतें जिंदगी भर अपने पति में एक दोस्त ढूंढ़ती रहती हैं, मगर पति पति ही रहता है. वह दोस्त नहीं बन सकता.’’

कथित धर्म ध्वजा वाहक राम रहीम की “उम्र कैद का संदेश”

एक समय में धर्म की नाव में बैठकर लाखों लोगों को भ्रमित करने वाले बाबा राम रहीम ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा और न ही उनके  किसी कथित भक्त ने सोचा  होगा कि देश दुनिया में “सच्चा डेरा” की एक समय में धूम मचाने वाले गुरमीतसिंह उर्फ बाबा राम रहीम को एक दिन उसके अपराध की सजा भी मिलेगी.

अब  ऐसा हो गया है, सीबीआई की विशेष अदालत ने बाबा राम रहीम को उम्र कैद की सजा सुना दी है अब बाबा राम रहीम के ऊपर ऐसे  प्रकरण और सजाएं हैं कि वह  जिंदगी में शायद ही कभी खुली हवा में सांस ले सकें, बाहर आ सकें और डेरा सच्चा सौदा का संचालन कर पाएंगे.

इस  विशेष रिपोर्ट में हम आपको स्वयं को सर्व शक्तिमान घोषित करने वाले बाबा राम रहीम के कुछ महत्वपूर्ण जानने योग्य तथ्य बताने जा रहे हैं.

दरअसल, एक संत और बाबा का चोला पहनने वाले कथित बाबा राम रहीम समेत 5 को उम्र कैद की सजा‌ उनके अपने सहयोगी रंजीत सिंह के हत्या केस में  पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने  सुनाई है. राम रहीम के साथ अन्य 4 दोषियों को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

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यहां आपको हम बताते चलें कि राम रहीम का एक बाबा के रूप में बड़ा ही जलवा था वह फिल्म बनाते थे, वह ऐसे ऐसे करतब  किया करते थे की सदैव मीडिया में चर्चा बनी रहती थी, धर्म की कथित आड़ में जाने कितने दुष्कर्म और अपराध करते रहे जिसकी गिनती कोई नहीं कर पाया और यह सदा चर्चा में रही. मगर कहते हैं ना अपराध कभी न कभी सर चढ़कर बोलता है और अपराधी कानून के शिकंजे में अंततः आ ही जाता है अंतिम समय जेल की चक्की पीसने में ही गुजर जाता है, बाबा राम जी के साथ हो रहा है.

यह भी सच है कि मामला मुकदमा दर्ज होने पर भी यह सब अपने आप को सर्व शक्तिमान समझता था और यह संदेश देता था कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. साथ ही सहयोगी महिला  हनीप्रीत के साथ भी कितनी ही किस्से कहानियां चर्चा में रही हैं.

मामला संवेदनशील होने के कारण राम रहीम की पेशी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की‌ जाती थी पूरे जिले में धारा 144 लगा दी जाती थी कहीं भी 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने की इजाजत नहीं थी. बाबा राम रहीम ने धर्म के उन्माद को इतना ज्यादा जगा दिया था की स्थिति कभी भी असामान्य हो सकती थी. यहां उल्लेखनीय है कि सन् 2002 में रंजीत सिंह की हत्या के लिए राम रहीम सहितइन लोगों को नामजद किया गया था

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख को मिला सच्चा सौदा!

जैसा कि सारी दुनिया जानती है डेरा सच्चा सौदा के बाबा गुरमीत सिंह यानी राम रहीम के मुख्य प्रबंधन का कार्य डेरा सच्चा सौदा से संचालित होता था. जहां सैकड़ों एकड़ भूमि पर कथित बाबा का वर्चस्व था यहां उनकी अनुमति के बगैर परिंदा भी पर नहीं मार पाता था. एक प्रकार से उनका अपना शासन स्थापित था. धर्म के नाम पर जो इंतेहा यहां बाबा राम रहीम ने की वह सालों बाद धीरे-धीरे छन कर  बाहर आई और उसकी क्रूरता के किस्से भी सार्वजनिक हो गए.

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जैसा कि कभी ना कभी पाप का घड़ा तो फूटता ही है 2002 में  रंजीत सिंह जो डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के समर्थक थे की 10 जुलाई 2002 को  हत्या कर दी गई थी. इसी मामले में गुरमीतसिंह सहित पांच लोगों को अब जेल के सीखचों पड़ेगा.

लगभग 20 साल बाद!

राम रहीम के द्वारा किए गए अपराधों की लंबी जांच के बाद मामला अंततः न्यायालय में पहुंचा और सभी के साक्ष्य लिए  जाने लगे. वह बाबा जो कभी अपने सच्चा सौदा के प्रतिष्ठान से लोगों को धर्म का ज्ञान देता था मगर स्वयं धर्म के रास्ते को छोड़ कर के अपराध की राह पर चल पड़ा था आखिरकार कानून की जद में आ ही गया.

यहां यह बताना जरूरी होगा कि राम रहीम की पेशी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए होती रही और राम रहीम फिला वक्त रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है वहीं से उसकी वर्चुअली पेशी कोर्ट में की जाती रही वहीं चार अन्य दोषियों को अंबाला जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच पंचकूला कोर्ट लाया गया था.

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3 दिसंबर 2003 को पुलिस में एफआईआर दर्ज हुई थी और आगे सीबीआई ने रणजीत सिंह हत्या मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी. न्यायालय में  याचिका रंजीत सिंह के बेटे जगसीर सिंह ने दायर कर इंसाफ की फरियाद की थी. इसके बाद बाबा राम रहीम पर कानून का शिकंजा कसता ही चला गया और यह भ्रम टूट गया कि अगर कोई धर्म का चोला पहन कर अपराध करता है तो बहुत दिनों तक बच सकता है.

फूल सी दोस्ती- भाग 1: क्यों विराट की गर्लफ्रैंड उसका मजाक बनाती थी

आजकल मंजरी का मन घर में बिलकुल भी नहीं लग रहा था. उस के पति शिशिर बिजनैस के सिलसिले में ज्यादातर बाहर रहा करते थे और बेटा अतुल एमएस करने अमेरिका गया, तो वहीं का हो कर रह गया. साक्षी से ही वह अपने मन की बातें कर लिया करती थी. साक्षी भी मंजरी को मां नहीं सहेली समझती थी. तभी तो पिछले सप्ताह उसे एअरपोर्ट तक छोड़ते समय मन बहुत उदास हो गया था मंजरी का. हालांकि इस बात से वह बहुत खुश थी कि मिलान से फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई करने के लिए स्कौलरशिप मिली साक्षी को. शिशिर ने उसे सोसाइटी की महिलाओं का क्लब जौइन करने का सुझाव दिया.

पर मंजरी ने सोचा कि पहले की तरह फिर उसे क्लब छोड़ना पड़ गया तो वह सब की आंखों की किरकिरी बन जाएगी. उस की दिलचस्पी औरों की तरह लोगों की कमियां निकालने, गहनों की चर्चा करने और साडि़यों की सेल के बारे में जानने की नहीं थी. किट्टी पार्टी में महंगी क्रौकरी के प्रदर्शन और ड्राइंगरूम में नित नए शो पीसेज से अपना रुतबा बढ़ाचढ़ा कर दिखाने का स्वांग रचना भी नहीं जानती थी वह. उसे कुछ अच्छा लगता था तो बस देर तक प्रकृति की गोद में बैठे रहना या फिर बच्चों के साथ हंसतेखिलखिलाते हुए बचपन को फिर से महसूस करना. उसे कभी एहसास ही नहीं हुआ कि वह 50 वर्ष पार चुकी है.

साक्षी के चले जाने के बाद मंजरी अकसर किसी पार्क में जा कर बैठ जाया करती थी. एक दिन पार्क में बैंच पर बैठी हुई वह व्हाट्सऐप पर मैसेज पढ़ने में तल्लीन थी कि ‘एक्सक्यूज मी’ सुन कर उस का ध्यान भंग हुआ. सामने एक 28-29 वर्षीय लंबा, हैंडसम युवक उसे बैंच पर रखा उस का पर्स हटाने को कह रहा था. मुसकराते हुए उस ने पर्स उठा लिया और वह युवक बैंच पर बैठ गया.

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लगभग 5 मिनट यों ही बीत गए. युवक बेचैन सा कभी पार्क के गेट की ओर देखता तो कभी अपने मोबाइल को. ऐसा लग रहा था कि वह किसी की प्रतीक्षा कर रहा है. मंजरी ने पूछ लिया, ‘‘किसी का इंतजार कर रहे हो क्या?’’ लेकिन प्रश्न पूछते ही उसे लगा कि उस से गलती हो गई. एक अजनबी, वह भी नवयुवक….अब जरूर यह खीज उठेगा. परंतु उस की आशा के विपरीत युवक ने मुसकरा कर उस की ओर देखा और कहा, ‘‘मैं… हां… इतंजार कर रहा हूं… आप… अकेली बैठीं हैं?’’

‘‘हां…जब बोर होती हूं तो यहां आ कर बैठ जाती हूं. मेरे अलावा घर के सब लोग बिजी हैं…लगता है यह बैंच उन लोगों के लिए ही बनी है जो अपनों का साथ पाने को बेचैन हैं,’’ वह निराश, पर थोड़े से मजाकिया लहजे में बोली. ‘‘हां… शायद… मेरी गर्लफ्रैंड… नहीं, हाफ गर्लफ्रैंड भी बिजी रहती है. वह ऐसे बच्चों के हौस्टल में औफिसर इन चार्ज है जो देख नहीं सकते. काफी काम रहता है उसे वहां. शायद इसीलिए टाइम पर नहीं पहुंच पाती मेरे पास.’’ निराशा छिपाते हुए एक सांस में ही नवयुवक ने सब कह डाला.

फिर अपना परिचय देते हुए उस ने मंजरी को अपना नाम बताया, ‘‘जी, मेरा नाम विराट है. और आप?’’ ‘‘मैं मंजरी,’’ थोड़ा हिचकिचाते हुए मंजरी ने भी अपना परिचय दिया.

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‘‘काम तो अच्छा कर रही हैं आप की साहिबा. नाम क्या है और हाफ गर्लफ्रैंड क्यों?’’ ‘‘रिया नाम है मैडम का… हम दोनों मुंबई में 5वीं क्लास तक एकसाथ पढ़ते थे, फिर उस के पापा का ट्रांसफर हो गया और वे लोग दिल्ली आ गए. 3 महीने पहले एक दिन अचानक ही उस से मुलाकात हो गई. उस के बाद से ही हमारा मिलनाजुलना शुरू हो गया. हम दोनों एकदूसरे को पसंद भी बहुत करते हैं. बस…वो ‘3 वर्ड्स’ अभी तक नहीं कह पाए एकदूसरे को,’’ विराट ने शरमाते हुए कहा.

‘‘फिर तो तुम भी हाफ बौयफ्रैंड हुए न उस के,’’ मंजरी ने विराट की बातों में दिलचस्पी लेते हुए कहा. ‘‘नहींनहीं, रिया तो कब की मेरे मन की बात जान चुकी होगी, क्योंकि मेरे वाट्सऐप और फेसबुक के स्टेटस मेरे मन के राज खोल देते हैं. पर रिया…वह तो इस मामले में पूरी साइलैंट मूवी की हीरोइन है,’’ और विराट होंठों पर उंगली रख, चुप्पी का इशारा करते हुए मुसकराने लगा.

Satyakatha- सुहागन की साजिश: सिंदूर की आड़ में इश्क की उड़ान- भाग 3

सौजन्य: सत्यकथा

दोनों के दिल एकदूसरे के लिए धड़के तो नजदीकियां खुदबखुद बन गईं. इस के बाद दीपक शिवगोविंद की गैरमौजूदगी में रीता से मिलने आने लगा. रीता को उस का आना और उस के साथ लच्छेदार बातें करना अच्छा लगता था. जल्द ही वे एकदूसरे से खुल गए और हंसीमजाक होने लगा.

एक रोज दोपहर में दीपक आया. रीता ने उकसाया तो उस दिन दोनों के बीच की हर दीवार टूट गई और अवैध संबंधों का रिश्ता बन गया.

पति का दोस्त बन गया मीत

उस दिन के बाद रीता और दीपक अकसर देहसुख प्राप्त करने लगे. दीपक ऐसे समय आता, जब शिवगोविंद घर पर नहीं होता. सूने घर में दोनों खूब रंगरलियां मनाते. कभीकभी तो रीता स्वयं ही फोन कर लल्ला को बुला लेती. फिर दो शरीर एक हो जाते.

लेकिन ऐसे संबंध छिपाए नहीं छिपते. धीरेधीरे गांव में रीता और दीपक के संबंधों की चर्चा होने लगी.

रीता के पति शिवगोविंद यादव को जब रीता और दीपक के संबंधों के बारे में पता चला तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उस ने इस बारे में पत्नी व दोस्त से बात की तो दोनों ने साफ कह दिया कि ऐसी कोई बात नहीं है.

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लेकिन एक रोज जब उस ने अचानक दोनों को हंसीठिठोली करते देख लिया, तो उस ने रीता की पिटाई की तथा दीपक उर्फ लल्ला को भी फटकारा. पर उन दोनों पर इस का कोई असर नहीं हुआ. दोनों पहले की तरह मौजमस्ती करते रहे.

इस के बाद तो यह रवैया ही बन गया. जिस दिन शिवगोविंद को पता चलता कि दीपक उर्फ लल्ला उस के घर आया था, उस दिन वह रीता से मारपीट करता.

शिवगोविंद का परिवार और गांव वाले इस बात को जान गए थे कि दोनों के बीच तनाव रीता और दीपक के नाजायज रिश्तों को ले कर है.

पत्नी की बेवफाई से तंग आ कर एक दिन शिवगोविंद अपनी भाभी ममता के सामने फूटफूट कर रोने लगा, ‘‘भाभी, कल जिस औरत की मांग में सिंदूर सजा कर मैं ने विधवा होने का कलंक मिटाया तथा समाज में सम्मान दिलाया, आज उस औरत ने समाज में मेरा सिर नीचा कर दिया. जी करता है कि या तो उस नागिन का फन कुचल दूं या फिर खुद जान दे दूं.’’

ममता ने शिवगोविंद को समझाया कि वह सब्र से काम ले. वह रीता को समझाएगी, उसे सही रास्ते पर लाने का प्रयास करेगी. लेकिन ऐसा हो न सका. ममता व उस के पति बालगोविंद ने रीता को समझाया, मानमर्यादा में रहने का पाठ पढ़ाया. लेकिन रीता पर कोई असर नहीं पड़ा.

5 जून, 2021 की शाम शिवगोविंद का दोस्त सतीश उस के घर आया. चायपानी के दौरान दोनों में गपशप होने लगी. सतीश ने रीता की तारीफ की तो शिवगोविंद ने मन की भड़ास निकालनी शुरू कर दी.

सतीश के सामने उस ने रीता की पोल खोल कर रख दी. उस ने कुछ ऐसी भी बातें कह दीं, जो रीता के दिल को चुभ गईं.

पति बना इश्क में रोड़ा

पति की बात दिल में चुभी तो रीता ने पति को मिटाने का निश्चय कर लिया. उस ने प्रेमी दीपक उर्फ लल्ला को घर बुला लिया और घडि़याली आंसू बहाते हुए बोली, ‘‘तुम्हारी वजह से मेरा पति मुझे मारतापीटता है, दूसरों के सामने जलील करता है और तुम दुम दबा कर भाग जाते हो. आखिर तुम कुछ करते क्यों नहीं?’’

‘‘घर का मामला है भाभी, मैं कर ही क्या सकता हूं?’’ दीपक ने मजबूरी जाहिर की.

‘‘विरोध तो कर सकते हो, मुझ पर उठने वाला उस का हाथ मरोड़ तो सकते हो. फिर भी न माने तो…’’ रीता बोली.

‘‘तो क्या भाभी..?’’ दीपक ने आश्चर्य से पूछा.

रीता गुस्से में बोली, ‘‘उस का गला घोट दो, मार डालो उसे, ताकि मैं चैन से रह सकूं.’’

‘‘ठीक है जैसा तुम चाहती हो वैसा ही होगा.’’ इस के बाद रीता और दीपक ने मिल कर शिवगोविंद की हत्या की योजना बनाई. इस योजना में दीपक ने अपने दोस्त अमन व निखिल को भी पैसों का लालच दे कर शामिल कर लिया.

योजना के तहत दीपक उर्फ लल्ला ने 6 जून, 2021 की शाम 5 बजे अमन व निखिल को साबड़ व फावड़े के साथ नोन नदी किनारे खेत पर भेज दिया. फिर वह शिवगोविंद के घर पहुंचा. शिवगोविंद घर पर ही था.

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दीपक ने शिवगोविंद से कहा, ‘‘शौचालय पाटने के लिए लकड़ी चाहिए हो तो मेरे साथ खेत पर चलो. वहां यूकेलिप्टस की लकड़ी दिलवा दूंगा. कीमत भी नहीं चुकानी पड़ेगी.’’

शिवगोविंद ने अंधेरा घिर आने का बहाना बनाया. लेकिन रीता ने उस की बात खारिज कर दी और जबरदस्ती दीपक के साथ भेज दिया. शिवगोविंद नोन नदी के किनारे खेत पर पहुंचा तो वहां अमन और निखिल भी मौजूद थे. उन सब में आपस में बातें होने लगीं.

बातचीत के बीच में ही अमन और निखिल ने शिवगोविंद को दबोच लिया और दीपक ने साबड़ का प्रहार शिवगोविंद के सिर पर कर दिया. साबड़ के प्रहार से शिवगोविंद का सिर फट गया. इस के बाद अमन व निखिल ने फावड़े से प्रहार कर शिवगोविंद को मौत के घाट उतार दिया.

हत्या करने के बाद अमन, निखिल व दीपक शव को उठा कर नदी के किनारे लाए. नोन नदी सूखी थी. वहां तीनों ने मिल कर फावड़े से गहरा गड्ढा खोदा और शिवगोविंद की लाश गड्ढे में दफन कर दी. उन्होंने आलाकत्ल फावड़ा व साबड़ झाडि़यों में छिपा दिए. फिर वापस अपने अपने घर आ गए.

दीपक ने रीता को फोन कर के बता दिया कि उस के सुहाग को मिटा दिया गया है और शव को नोन नदी में दफना दिया है.

इधर जब कई दिनों से शिवगोविंद दिखाई नहीं दिया, तो ममता ने रीता से सवालजवाब किया. शक होने पर उस ने सारी बात पति बालगोविंद को बताई. बालगोविंद ने तब थाना अकबरपुर में भाई की गुमशुदगी दर्ज कराई और शक उस की पत्नी रीता पर किया.

शक होने पर थानाप्रभारी तुलसीराम पांडेय ने रीता को गिरफ्तार किया. उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो शिवगोविंद की हत्या का परदाफाश हो गया और कातिल पकड़े गए.

13 जून, 2021 को थाना अकबरपुर पुलिस ने आरोपी दीपक उर्फ लल्ला, अमन तथा रीता को कानपुर देहात की माती अदालत में पेश किया, जहां से उन को जिला जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक निखिल फरार था. पुलिस उसे गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सहयोगी : जय कुमार मिश्र

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सौजन्य- मनोहर कहानियां

आगरा के ट्रांसयमुना कालोनी के रहने वाले सीनियर डाक्टर उमाकांत गुप्ता अपने रोजाना की रुटीन के मुताबिक 13 जुलाई, 2021 की शाम साढ़े 7 बजे अपने विद्या नर्सिंग होम जाने के लिए घर से अपनी नीले रंग की बलेनो कार से निकले थे. उन का नर्सिंग होम घर से महज 700 मीटर की दूरी पर रौयल कट चौराहे के पास है और रामबाग क्षेत्र में उन का दूसरा बांकेबिहारी हौस्पिटल भी है.

वह हौस्पिटल और नर्सिंग होम में विजिट कर हमेशा रात 10 बजे तक वापस घर लौट आते थे. लेकिन उस दिन वे रात 11 बजे तक घर नहीं लौटे थे. इस कारण घर वालों को  चिंता हुई. उन की पत्नी डा. विद्या गुप्ता ने उन्हें कई बार फोन मिलाया. हर बार फोन स्विच्ड औफ मिला.

डा. विद्या ने नर्सिंग होम फोन कर स्टाफ से डाक्टर साहब के बारे में पूछा. वहां से पता चला कि आज तो डाक्टर साहब विजिट करने नर्सिंग होम आए ही नहीं. यह सुन कर डा. विद्या गुप्ता का माथा ठनका, वह सोच में पड़ गईं, ‘‘आए नहीं तब कहां गए?’’

उन्होंने तुरंत बांकेबिहारी हौस्पिटल में फोन मिलाया. वहां से भी वही सुनने को मिला कि डाक्टर साहब आज आए ही नहीं. डा. विद्या की अपने पति के सकुशल होने की चिंता अनहोनी की आशंका में बदलती जा रही थी. देरी किए बगैर उन्होंने इस की सूचना पुलिस को दे दी.

सूचना पर थाना एत्माद्दौला के थानाप्रभारी देवेंद्र शंकर पांडेय पुलिस टीम के साथ  डाक्टर के आवास पर पहुंच गए. पूरे घटनाक्रम की जानकारी ले कर परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया. इसी के साथ डा. गुप्ता के मोबाइल की अंतिम लोकेशन का पता लगाया, जो सैयां के गांव रोहता की मिली.

इसे देख कर पुलिस भी किसी अप्रिय घटना से आशंकित हो गई. उस ने घरवालों से पूछा कि डाक्टर साहब वहां क्यों गए होंगे. तब उन्होंने बताया कि इस की उन्हें जानकारी नहीं, क्योंकि वहां उन का कोई परिचित या कोई रिश्तेदार भी नहीं रहता.

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डा. विद्या ने बताया कि उन के पति ने कभी भी उस गांव को ले कर चर्चा तक नहीं की थी. फिर भी सवाल था कि डाक्टर साहब वहां क्यों गए, किसी भी तरह से जवाब नहीं मिलने की स्थिति में पुलिस को उन के अपहरण का शक हुआ.

यानी डा. गुप्ता का अपहरण! यह संदेह उन के परिवार वालों के होश उड़ाने वाला था. दबी आवाज में इस की कानोकान खबर भी पूरे शहर में फैल गई.

डा. उमाकांत गुप्ता के मोबाइल पर 13 जुलाई की शाम साढ़े 7 बजे एक अनजान नंबर से काल आई थी. उस के बाद ही वह घर से कार ले कर निकल पड़े थे. पुलिस ने उन के दूसरे काल की भी डिटेल्स जांची. सभी काल के साथ राहुल नाम दर्शा रहा था. पुलिस ने राहुल के बारे में पूछा तो डाक्टर के घर वालों ने अनभिज्ञता प्रकट की.

डाक्टर को ढूंढने में जुटीं 5 टीमें

पुलिस सोच में पड़ गई कि आखिर राहुल कौन है, उस ने डाक्टर को क्यों बुलाया होगा? क्या वह डाक्टर की कार में ही उन के साथ खंदारी से रोहता तक गया होगा? इन सवालों के जवाब के लिए पुलिस सक्रिय हो गई.

घटना की जानकारी आला अधिकारियों को भी दे दी गई. डाक्टर की तलाश तेजी से की जाने लगी. वारदात को ले कर उन के परिजन, नर्सिंग होम या फिर अस्पताल के लोगों से कोई सहयोग नहीं मिल पाया. उन्होंने डाक्टर साहब के किसी से विवाद या धमकी को लेकर अनभिज्ञता जाहिर कर दी.

पुलिस को अपने स्तर से छानबीन करते हुए डाक्टर गुप्ता को सकुशल वापस लाना बड़ी चुनौती थी. सैयां टोल प्लाजा के सारे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक किए, लेकिन उस से किसी भी तरह का सुराग नहीं मिला.

पुलिस को आशंका थी कि डा. गुप्ता का अपहरण करने से पहले गैंग ने पूरी तैयारी की होगी. वे डाक्टर को सैयां रोड पर रोहता की तरफ अकेले गाड़ी चला कर नहीं जा सकते हैं. इसलिए अनुमान लगाया गया कि उन्हें बहाने से फोन कर बुलाया होगा. उस के बाद बदमाशों ने अपहरण कर लिया हो.

डाक्टर गुप्ता के अपहरण की सूचना पर एडीजी (जोन) राजीव कृष्ण, आईजी नवीन अरोड़ा, एसएसपी मुनिराज और एसपी (सिटी) बोत्रे रोहन प्रमोद भी सक्रिय हो गए. उन्होंने परिजनों को आश्वासन देने के साथसाथ हिदायत भी दी कि फिरौती के संबंध में किसी भी तरह के फोन आने पर वे पुलिस को अवश्य सूचित करें.

डा. विद्या को इस बात का विशेष ध्यान रखने को कहा गया. उन्होंने बताया कि डा. गुप्ता दिल के मरीज भी हैं, उन का 3 महीने पहले औपरेशन हुआ था.

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आगरा में अपहरण की यह पहली घटना नहीं हुई थी. इस से पहले भी अपहरण की कई वारदातों में डाक्टर से ले कर व्यापारी तक को निशाना बनाया जा चुका है. अपहर्त्ताओं के गैंग फिरौती में मोटी मोटी रकम वसूलते रहे हैं.

बताते हैं कि इन की सक्रियता धौलपुर (राजस्थान) में है, वह आगरा से अपहृत को ले जाते हैं और उन्हें चंबल के बीहड़ में छिपा कर रखते हैं. फिरौती वसूलने के काम गैंग के अलगअलग सदस्य करते हैं.

इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस ने पहले के अपहरण की वारदातों में लिप्त गैंग के ऐसे सरगना और सदस्यों की सूची तैयार की, जो जमानत पर रिहा थे. एसएसपी मुनिराज के निर्देश पर जांच की 5 टीमें गठित की गईं.  टीमों का नेतृत्व एसपी (सिटी) प्रमोद बोत्रे को सौंपी गई.

जांच की शुरुआत मोबाइल नंबरों से हुई. जांच और सर्विलांस के तहत वारदात के दिन की तमाम संदिग्ध सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी खंगाला गया. इन से मिली जानकारियों के आधार पर पूछताछ की तैयारी की गई. यह सब काम घटना की रात को ही कर लिया गया.

धौलपुर पुलिस के चंगुल में आया पवन

पुलिस ने रात में ही ट्रांसयमुना कालोनी से ले कर रामबाग, भगवान टाकीज और खंदारी तक के सीसीटीवी कैमरे चेक किए. उन में डाक्टर की कार कहीं नजर नहीं आई. जबकि उस के बाद कार एमजी रोड पर हरी पर्वत, धाकरान और प्रतापपुरा चौराहे से आगे जाती हुई दिखाई दी.

अगले रोज 14 जुलाई, 2021 की सुबह 10 बजे धौलपुर के एसपी केसर सिंह शेखावत ने एसएसपी मुनिराज को घटना के बारे में बताया. उन के आदेश पर आगरा पुलिस की एक टीम एसपी (सिटी) के नेतृत्व में राजस्थान बौर्डर पर पहुंची. उस ने धौलपुर पुलिस से संपर्क किया. वहीं डाक्टर गुप्ता के कार की बरामदगी का पता चला, जो रात साढ़े 12 बजे धौलपुर में जब्त की गई थी.

उस के ड्राइवर द्वारा ओवरटेक किए जाने के कारण स्थानीय सिपाहियों ने पकड़ा था. पकड़े गए ड्राइवर पवन ने बताया कि वह आगरा में निबोहरा का निवासी है और डा. गुप्ता की कार का ड्राइवर है. डाक्टर साहब धौलपुर आए हुए हैं. वह उन की कार ले कर अपने काम से जा रहा था.

सिपाहियों को पवन ने पूछे गए सवालों का सटीक जवाब नहीं दिया. क्योंकि कार छोड़ने के लिए उस ने पुलिस को 500 से ले कर 5 हजार तक रिश्वत देने की पेशकश की थी.

इस कारण उस के किसी गंभीर मामले में शामिल होने का संदेह हो गया और उसे थाने लाया गया. कड़ाई से की गई पूछताछ के बाद उस ने आगरा के डाक्टर के अपहरण की बात कुबूल कर ली.

2 अपहर्त्ता और चढ़े पुलिस के हत्थे

एक अन्य घटना के तहत रात के लगभग एक बजे चैकिंग कर रही पुलिस ने बाइक पर जा रहे एक युवक और युवती को रोकने का प्रयास किया. युवक युवती को उतार कर तेजी से बाइक को भगा ले गया. भागते समय युवक की जेब से उस का मोबाइल गिर गया.

पुलिस ने तुरंत युवती और गिरे मोबाइल को अपने कब्जे में ले लिया. पूछताछ में युवती ने अपना नाम मंगला पाटीदार बताया. उसी से पता चला कि वह भी डाक्टर के अपहरण में शामिल है.

इन 2 घटनाओं में 2 अपहर्त्ताओं के पकड़े जाने की सूचना मिलने से आगरा पुलिस ने थोड़ी राहत की सांस ली. मात्र 15 घंटे में ही डाक्टर की कार बरामद होने के साथसाथ 2 अपहर्त्ता पकड़े गए थे. अब पुलिस को उन के चंगुल से डाक्टर को सकुशल वापस लाने की चुनौती थी.

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डा. गुप्ता के आगरा से अपहरण का समाचार जब समाचार पत्रों के अलावा न्यूज चैनलों पर भी आया तो पूरे शहर में सनसनी फैल गई.

इस प्रकरण पर इंडियन मैडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डीएम और एसएसपी से बात कर जल्द से जल्द उन की बरामदगी और दोषियों पर काररवाई की मांग की.

पदाधिकारियों ने वर्चुअल मीटिंग कर  पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया. डाक्टर की बरामदगी नहीं होने पर आगरा के तमाम डाक्टरों ने हड़ताल पर जाने की धमकी दे डाली.

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Satyakatha: खूंखार प्यार- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

‘‘अच्छा, ऐसी अंतिम धमकियां तो तुम जाने कितनी बार दे चुके हो. तुम मेरा मुंह बंद कर के गुलछर्रे उड़ाना चाहते हो. मेरी जिंदगी, मेरी बच्ची की जिंदगी बरबाद करना चाहते हो. मैं तुम से डरने वाली नहीं. देखो, एक मैं ही हूं जो तुम्हें बारबार माफ करती हूं. कोई दूसरी औरत होती तो अभी तक तुम जेल में होते.’’ वह गुस्से में बोली.

‘‘दीपू, तुम बारबार मुझे जेल की धमकी मत दिया करो, मैं भी कोई आम आदमी नहीं, मेरी भी ऊंची पहुंच है. चाहूं तो तुम्हें गायब करवा दूं, कोई ढूंढ भी नहीं पाएगा. बहुत ऊंची पहुंच है मेरी.’’

वे दोनों इसी तरह आपस में नोकझोंक करते हुए गृहनगर बिलासपुर की ओर बढ़ रहे थे. अचानक देवेंद्र ने कार रोकी और दीप्ति की तरफ देखते हुए बोला, ‘‘मैं एक मिनट में आता हूं.’’

दीप्ति ने उस की तरफ प्रश्नसूचक भाव से  देखा तो देवेंद्र ने छोटी अंगुली दिखाते हुए कहा, ‘‘लघुशंका.’’

देवेंद्र ने गाड़ी को सड़क से नीचे उतार दिया था. रात के लगभग 10 बज रहे थे, दीप्ति पीछे सीट पर बैठी हुई थी. दीप्ति ने गौर किया देवेंद्र देखतेदेखते कहीं दूर चला गया, दिखाई नहीं दे रहा था.

वह चिंतित हो उठी और इधरउधर देखने लगी. तभी उस ने देखा सामने से 2 लोग उस की ओर तेजी से आ रहे हैं. दोनों के चेहरे पर नकाब था, यह देख दीप्ति घबराई मगर देखते ही देखते दोनों उस पर टूट पड़े.

उन में एक पुरुष था और एक महिला, पुरुष ने जल्दी से एक नायलोन की रस्सी उस के गले में डाल दी और उस का गला रस्सी से दबाने लगा. इस में उस की साथी महिला भी उस की मदद करने लगी और दीप्ति का दम घुटने लगा. थोड़ी देर वह छटपटाती रही फिर आखिर में उस का दम टूट गया.

पुरुष और महिला ने मिल कर के उस का पर्स और मोबाइल अपने कब्जे में लिया. रुपए ले लिए, मोबाइल का सिम निकाला और जल्दीजल्दी उसे अपने कब्जे में ले कर के जेब में रखा. और एक झोले में लाए पत्थर से कार का शीशा तोड़ कर चले गए.

मगर उन लोगों ने यह ध्यान नहीं दिया कि इस आपाधापी में मोबाइल में लगा एक दूसरा सिम वहीं नीचे जमीन पर गिर गया है.

देवेंद्र सोनी और दीप्ति का विवाह 2003 में हुआ था. देवेंद्र के पिता रामस्नेही सोनी नगर के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे और उन का संयुक्त परिवार बिलासपुर के सरकंडा बंगाली पारा में रहता था.

देवेंद्र बीकौम की पढ़ाई कर ही रहा था कि पिता ने जिला कोरबा के उपनगर बालको कंपनी में कार्यरत कृष्ण कुमार सोनी की दूसरी बेटी दीप्ति से उस के विवाह की बात चलाई और दोनों परिवारों की सहमति से विवाह संपन्न हो गया.

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विवाह के बाद मानो देवेंद्र सोनी का असली रूप धीरेधीरे सामने आता चला गया. देवेंद्र चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहा था, मगर परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पा रहा था. इधर उस की आकांक्षाएं बहुत ऊंची थीं. अपनी ऊंची उड़ान के कारण ऐसीऐसी बातें कहता और नित्य नईनई लड़कियों से दोस्ती की बातें दीप्ति को बताता.

शुरू में तो वह नजरअंदाज करती रही, परंतु पैसों की कमी होने के बावजूद वह हमेशा अच्छेअच्छे कपड़े पहनता और नईनई लड़कियों से संबंध बनाता रहता था.

यह बात जब दीप्ति को पता चलने लगी तो दोनों में अकसर विवाद गहराने लगा. इस बीच दोनों की एक बेटी सोनिया का जन्म हुआ, जो लगभग 7 साल की हो गई थी. और बिलासपुर के एक अच्छे कौन्वेंट स्कूल में पढ़ रही थी.

रात के लगभग साढ़े 11 बज रहे थे. जिला चांपा जांजगीर के पंतोरा थाने के अपने कक्ष में थानाप्रभारी अविनाश कुमार श्रीवास बैठे अपने स्टाफ से कुछ चर्चा कर रहे थे कि उसी समय घबराए हुए 2 लोग भीतर आए.

एक के चेहरे पर मानो हवाइयां उड़ रही थीं. उन्हें इस हालत में देख अविनाश कुमार को यह समझते देर नहीं लगी कि कोई बड़ी घटना घटित हो गई है. उन्होंने कहा, ‘‘हांहां बताओ, क्या बात है, क्यों इतना घबराए हुए हो?’’

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दोनों व्यक्तियों, जिन की उम्र लगभग 30-35 वर्ष के लपेटे में थी, में से एक ने खड़ेखड़े ही लगभग कांपती हुई आवाज में बोला, ‘‘सर, मैं देवेंद्र सोनी 2-3 जिलों में कई प्रतिष्ठित लोगों के लिए अकाउंटेंट का काम करता हूं. मैं अपनी पत्नी दीप्ति के साथ कोरबा से बिलासपुर जा रहा था कि कुछ लोगों ने हम से लूटपाट की और मेरी पत्नी को…’’ ऐसा कह कर वह इधरउधर देखने लगा.

‘‘क्यों, क्या हो गया आप की पत्नी को… विस्तार से बताओ. आओ, पहले आराम से कुरसी पर बैठ जाओ.’’ अविनाश कुमार श्रीवास ने  उठ कर दोनों को अपने सामने कुरसी पर बैठाया और पानी मंगा कर के पिलाते हुए कहा.

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अब और नहीं- भाग 4: आखिर क्या करना चाहती थी दीपमाला

Writer- ममता रैना

उस की फजूलखर्ची से भूपेश अब परेशान रहने लगा था. कभी उस पर झुंझला उठता तो उपासना उस का जीना हराम कर देती, तलाक और पुलिस की धमकी देती.

जो शारीरिक सुख उपासना से प्रेमिका के रूप में मिल रहा था वह उस के पत्नी बनते ही नीरस लगने लगा. इश्क का भूत जल्दी ही सिर से उतर गया.

दीपमाला के साथ शादी के शुरुआती दिनों की कल्पना कर के भूपेश के मन में बहुत से विचार आने लगे. वह एक बार फिर दीपमाला के संग के लिए उत्सुक होने लगा. खाने की थाली की तरह जिस्म की भूख भी स्वाद बदलना चाहती थी.

किसी तरह दीपमाला के घर और सैलून का पता लगा कर एक दिन वह दीपमाला के फ्लैट पर आ धमका. एक अरसे बाद अचानक उसे सामने देख दीपमाला चौंक उठी कि भूपेश को आखिर उस का पता कैसे मिला और अब यहां क्या करने आया है?

‘‘कैसी हो दीपमाला? बिलकुल बदल गई हो… पहचान में ही नहीं आ रही,’’ भूपेश ने उसे भरपूर नजरों से घूरा.

दीपमाला संजसंवर कर रहती थी ताकि उस के सैलून में ग्राहकों का आना बना रहे. अब वह आधुनिक फैशन के कपड़े भी पहनने लगी थी. सलीके से कटे बाल और आत्मनिर्भरता के भाव उस के चेहरे की रौनक बढ़ा रहे थे. उस का रंगरूप भी पहले की तुलना में निखर आया था.

कांच के मानिंद टूटे दिल के टुकड़े बटोरते उस के हाथ लहूलुहान भी हुए थे, मगर उस ने अपनी हिम्मत कभी नहीं टूटने दी. वह अब जीवन की हर मुश्किल का सामना कर सकती थी तो फिर भूपेश क्या चीज थी.

‘‘किस काम से आए हो?’’ उस ने बेहद उपेक्षा भरे लहजे में पूछा. उस की बेखौफी देख भूपेश जलभुन गया, लेकिन फौरन उस ने पलटवार किया, ‘‘मैं अपने बेटे से मिलने आया हूं. तुम ने मुझे मेरे ही बेटे से अलग कर दिया है.’’

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‘‘आज अचानक तुम्हें बेटे पर प्यार कैसे आ गया? इतने दिनों में तो एक बार भी खबर नहीं ली उस की,’’ एक व्यंग्य भरी मुसकराहट दीपमाला के अधरों पर आ गई.

‘‘तुम्हें क्या लगता है मैं अंशुल से प्यार नहीं करता? बाप हूं उस का, जितना हक तुम्हारा है उतना मेरा भी है.’’

‘‘तो तुम अब हक जताने आए हो? कानून ने तुम्हें बेशक हक दिया है, मगर वह मेरा बेटा है,’’ दीपमाला ने कहा.

बेटे से मिलना बस एक बहाना था भूपेश के लिए. उसे तो दीपमाला के साथ की प्यास थी. बोला, ‘‘सुनो दीपमाला, मैं तुम्हारा गुनाहगार हूं. मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई… हो सके तो मुझे माफ कर दो.’’

भूपेश के तेवर अचानक नर्म पड़ गए. उस ने दीपमाला का हाथ पकड़ लिया.

तभी एक झन्नाटेदार तमाचा भूपेश के गाल पर पड़ा. दीपमाला ने बिजली की फुरती से फौरन अपना हाथ छुड़ा लिया.

भूपेश का चेहरा तमतमा गया. इस खातिरदारी की तो उसे उम्मीद ही नहीं थी. वह कुछ बोलता उस से पहले ही दीपमाला गुर्राई, ‘‘आज के बाद दोबारा मुझे छूने की हिम्मत की तो अंजाम इस से भी बुरा होगा. यह मत भूलो कि तुम अब मेरे पति नहीं हो और एक गैरमर्द मेरा हाथ इस तरह नहीं पकड़ सकता, समझे तुम? अब दफा हो जाओ यहां से.’’

उसे एक भद्दी सी गाली दे कर भूपेश बोला, ‘‘सतीसावित्री बनने का नाटक कर रही हो. किसकिस के साथ ऐयाशी करती हो सब जानता हूं, अगर उन के साथ तुम खुश रह सकती हो तो मुझ में क्या कमी है? मैं अगर चाहूं तो तुम्हारी इज्जत सारे शहर में उछाल सकता हूं… इस थप्पड़ का बदला तो मैं ले कर रहूंगा और फिर दीपमाला को बदनाम करने की धमकी दे कर भूपेश वहां से चला गया.

कितना नीच और कू्रर हो चुका है भूपेश… दीपमाला की सहनशक्ति जवाब दे गई. वह तकिए पर सिर रख कर खुद पर रोती रही, जुल्म उस पर हुआ था, लेकिन कुसूरवार उसे ठहराया जा रहा था.

इस मुश्किल की घड़ी में उसे अमित की जरूरत होने लगी. उस के प्यार का मरहम उस के दिल को सुकून दे सकता था. उस ने अपने फोन पर अमित का नंबर मिलाया. कई बार कोशिश करने पर भी जब उस ने फोन नहीं उठाया तो वह अपना पर्स उठा कर उस से मिलने चल पड़ी.

भूपेश किसी भी हद तक जा सकता है, यह दीपमाला को यकीन था. वह चुप नहीं बैठेगा. अगर उस की बदनामी हई तो उस के सैलून के बिजनैस पर असर पड़ सकता है. वह अमित से मिल कर इस मुश्किल का कोई हल ढूंढ़ना चाहती थी. क्या पता उसे पुलिस की भी मदद लेनी पड़े.

अमित के औफिस में ताला लगा देख कर वह निराश हो गई. अमित उस के एक बार बुलाने पर दौड़ा चला आता था, फिर आज उस का फोन क्यों नहीं उठा रहा? उसे याद आया जब वह पहली बार अमित से मिली थी तो उसे अपना विजिटिंग कार्ड दिया था. उस ने पर्स टटोला, कार्ड मिल गया. औफिस और घर का पता उस में मौजूद था. उस ने पास से गुजरते औटो को हाथ दे कर रोका और पता बताया. धड़कते दिल से दीपमाला ने फ्लैट की घंटी बजाई. एक आदमी ने दरवाजा खोला. दीपमाला ने उस से अमित के बारे में पूछा तो वह अंदर चला गया. थोड़ी देर बाद एक औरत बाहर आई. बोली, ‘‘जी कहिए, किस से मिलना है? लगभग उस की ही उम्र की दिखने वाली उस औरत ने दीपमाला से पूछा.’’

‘‘मैं अमित से मिलने आई हूं. क्या यह उन का घर है?’’ पूछते हुए उसे थोड़ा अटपटा लगा कि पता नहीं यह सही पता है भी या नहीं.

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‘‘मैं अमित की पत्नी हूं. क्या काम है आप को? आप अंदर आ जाइए,’’ अमित की पत्नी विनम्रता से बोली.

दीपमाला ने उस औरत को करीब से देखा. वह सुंदर और मासूम थी, मांग में सिंदूर दमक रहा था और चेहरे पर एक पत्नी का विश्वास.

कुछ रुक कर अपनी लड़खड़ाती जबान पर काबू पा कर दीपमाला बोली, ‘‘कोई खास बात नहीं थी. मुझे एक मकान किराए पर चाहिए था. उसी सिलसिले में बात करनी थी.’’

‘‘मगर आप ने अपना नाम तो बताया नहीं… मैं अपने पति को कैसे आप का संदेश दूंगी.’’

‘‘वे खुद समझ जाएंगे,’’ और दीपमाला पलट कर तेज कदमों से मकान की सीढि़यां उतर सड़क पर आ गई.

अजीब मजाक किया था कुदरत ने उस के साथ. उस ने शुक्र मनाया कि उस की आंखें समय रहते खुल गईं.

अमित ने भी वही दोहराया था जो भूपेश ने उस के साथ किया था. एक बार फिर से वह ठगी गई थी. मगर इस बार वह मजबूती से अपने पैरों पर खड़ी थी. जिस जगह पर कभी उपासना खड़ी थी, उसी जगह उस ने आज खुद को पाया. क्या फर्क था भला उस में और उपासना में? दीपमाला ने सोचा.

नहीं, बहुत फर्क है, उस का जमीर अभी मरा नहीं, वह इतनी खुदगर्ज नहीं हो सकती कि किसी का बसेरा उजाड़े. जो गलती उस से हो गई है उसे अब वह दोहराएगी नहीं. उस ने तय कर लिया अब वह किसी को अपने दिल से खेलने नहीं देगी. बस अब और नहीं.

Satyakatha: डॉक्टर की बीवी- रसूखदार के प्यार का वार- भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

खुशबू विक्रम के प्यार में ऐसी पड़ी कि हमेशा के लिए उस के साथ रहने के बारे में सोचने लगी. उस ने विक्रम से बात की, ‘‘विक्रम, मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकती. हमें अब हमेशा के लिए एक हो जाना चाहिए. साथ रहेंगे तो और भी प्यार बढ़ेगा.’’

विक्रम यह सुन कर सन्न रह गया, ‘‘बोलने से पहले आप एक बार सोच लेती कि क्या कहने जा रही हो. तुम शादीशुदा हो और 2 बच्चों की मां हो और एक प्रतिष्ठित परिवार से हो. ऐसा करने पर तुम्हारा परिवार तो बरबाद होगा ही, मैं भी कहीं का नहीं रहूंगा. राजीव सर भी मुझे नहीं छोड़ेगे, जान से मार देंगे.’’

‘‘मैं ने सब सोच लिया है, अब मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगी. चाहे कुछ हो जाए. तुम को मेरी बात माननी ही पड़ेगी. एक बात ध्यान रखो कि मैं जो चाहती हूं, वह पा कर रहती हूं, नहीं तो मैं सामने वाले को बरबाद कर देती हूं. अब तुम सोच लो, क्या करना है.’’ कह कर खुशबू वहां से चली गई.

खुशबू हमेशा के लिए अपना बनाना चाहती थी जिम ट्रेनर को

विक्रम तो सिर्फ खुशबू से संबंध बनाने के लिए जुड़ा था, लेकिन अब वह उस के लिए गले की हड्डी बन रही थी. ऐसे में विक्रम ने उस से दूरी बनानी शुरू कर दी. खुशबू को यह बात समझते देर नहीं लगी.

वह विक्रम के जिम जाने लगी, वहां रोज वह घंटों बैठी रहती. वह विक्रम का पीछा छोड़ने को बिलकुल तैयार ही नहीं थी. दोनों में अब प्यार के बजाय झगड़े होने लगे.

खुशबू अपनी जिद पूरी न होती देख कर बौखला सी गई. उस ने विक्रम के साथ रहने के लिए विक्रम को हर तरह से मना कर देख लिया था, लेकिन विक्रम मानने को तैयार ही नहीं था. खुशबू का दीवानापन या कहें पागलपन अपनी सीमाएं लांघने लगा था.

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विक्रम के न मानने पर वह उसे सबक सिखाने पर आमादा हो गई. वह विक्रम के घर जा कर विक्रम और उस के परिवार को धमकाने लगी कि विक्रम अगर उस की बात नहीं मानता तो वह उसे जान से मार देगी. एक बार तो उस ने विक्रम पर सर्जिकल ब्लेड से हमला भी कर दिया, जिस में विक्रम को 14 टांके लगे थे.

खुशबू गुस्से में बिफरी नागिन की तरह विक्रम को डंसने को आतुर थी. विक्रम को जान से मारने के लिए उस ने अपने पूर्व प्रेमी मिहिर सिंह से संपर्क किया. मिहिर दानापुर के नासरीगंज के यदुवंशी नगर में रहता

था. पिछले 5 सालों से उस के खुशबू से प्रेम संबंध थे.

घटना से डेढ़दो साल पहले ही उन का बे्रकअप हुआ था. अब खुशबू ने उस से प्रेम संबंध बनाए रखने के लिए अपने दूसरे प्रेमी विक्रम की जान का सौदा करवाने के लिए कहा. मिहिर उस का काम करवाने के लिए तैयार हो गया.

मिहिर 2 लोगों की मदद से शूटर अमन तक पहुंचा. अमन समस्तीपुर के किशनपुर बैकुंठ में रहता था. वह पत्राचार से एमबीए कर रहा था, साथ ही डिलीवरी बौय का भी काम करता था. अमन विक्रम की सुपारी लेने को तैयार हो गया. अमन ने अपने साथ आर्यन और शमशाद को मिला लिया.

आर्यन उर्फ रोहित सिंह सारण के सोनपुर के जहांगीरपुर का रहने वाला था. जबकि शमशाद बेगूसराय के चेरिया बरियापुर का रहने वाला था. वह गोवा में रह कर राजमिस्त्री का काम करता था. 5 महीने पहले ही वह वापस आया था.

मिहिर ने तीनों से बात कर के पूरा प्लान बनाया. सुपारी की रकम ढाई लाख रुपए तय हुई, जिस में एक लाख 85 हजार रुपए खुशबू ने 2-3 बार में दिए.

2 महीने पहले ही योजना बन गई थी. तीनों शूटर भागवतनगर इलाके में 14 हजार रुपए महीने के किराए के मकान में आ कर रहने लगे थे. 2 महीने पहले ही रुपए दिए जाने के बावजूद भी शूटर्स ने अपना काम नहीं किया तो मिहिर रुपए वापस ले कर खुशबू को दे कर इस झंझट से बाहर निकलना चाहता था.

मगर ऐसा हुआ नहीं, दबाव बढ़ा तो शूटर जल्द ही काम को अंजाम तक पहुंचाने को तैयार हो गए. शूटर्स ने कुछ दिन विक्रम की रेकी की, फिर 18 सितंबर, 2021 की सुबह एक चोरी की बाइक से कदमकुआं थाना क्षेत्र के लोहा मंडी इलाके में पहुंच गए. अमन

और आर्यन रास्ते में निश्चित स्थान पर खड़े हो गए. शमशाद कुछ दूरी पर बाइक ले कर खड़ा हो गया.

जैसे ही विक्रम स्कूटी से उस रास्ते से उन के पास से गुजरने लगा तो अमन और आर्यन ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग करनी शुरू कर दी. गोलियां मारने के बाद तीनों शूटर भागवतनगर के किराए के मकान पर वापस आ गए. अंतत: पकड़े गए.

पुलिस ने उन के पास से 2 पिस्टल, मैगजीन और गोलियां बरामद कीं. पुलिस ने डाक्टर दंपति, मिहिर सिंह और तीनों शूटर्स को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. कथा लिखने तक 2 आरोपी गिरफ्तार नहीं हो सके थे.

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खुशबू अपनी जिद और प्यार के पागलपन में इतनी अंधी हो गई कि उस ने अपना बसाबसाया घर तक बरबाद कर लिया. अच्छीखासी घरगृहस्थी और जिंदगी को छोड़ कर अब खुशबू बेउर जेल की बैरक में तन्हा जिंदगी गुजार रही है.

साजिश का पता होते हुए भी पति राजीव ने साथ दिया, वह भी अलग बैरक में बड़ी मुश्किलों में रह रहा है.

यह कहानी उन लोगों के लिए सबक है जो अपनी जिद, चाहत और पागलपन में सब कुछ बरबाद कर देते हैं. समय रहते अपने को संभाल लें तो उन की और उन के अपनों की जिंदगी बरबाद होने से बच सकती है.

—कथा पुलिस सूत्रों व मीडिया रिपोर्टों पर आधारित

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