पांच साल बाद- भाग 4: क्या निशांत को स्निग्धा भूल पाई?

पूर्व कथा

पिछले अंक में आप ने पढ़ा कि जिस समाज से स्निग्धा विद्रोह करना चाहती थी उसी समाज के एक कुलीन ने उस का सतीत्व लूट लिया और मन भरने के बाद उसे छोड़ दिया. उधर, निशांत, जो उस से एकतरफा प्यार करता था, पांच साल बाद उस की जिंदगी में आया. आगे क्या हुआ.

पढि़ए शेष भाग.

वह सारा दिन उन दोनों ने साथसाथ व्यतीत किया. पालिका बाजार, सैंट्रल पार्क, कनाट प्लेस से ले कर पुराने किले से होते हुए वे इंडिया गेट तक गए और रात 8 बजे तक वहीं बैठ कर उन्होंने जीवन के हर पहलू के बारे में बात की. निशांत हवा के साथ उड़ रहा था तो स्निग्धा के मन में अपने विगत को ले कर एक अपराधबोध था. निशांत हर प्रकार की खुशबू अपने दामन में समेटने के लिए आतुर था तो स्निग्धा संकोच के साथ अपने पांव पीछे खींच रही थी.

निशांत के जीवन की खोई हुई खुशियां जैसे दोबारा लौट आई थीं. उस के जीवन में 5 साल बाद वसंत के फूल महके थे. स्निग्धा को उस के घर के बाहर तक छोड़ कर जब वह वापस लौट रहा था तब उस के कानों में स्निग्धा के मीठे स्वर गूंज रहे थे, ‘बाय निशू, गुड नाइट. एक अच्छे दिन के लिए बहुतबहुत धन्यवाद. आशा है, हम कल फिर मिलेंगे.’

‘हां, कल शाम को मैं तुम्हें फोन करूंगा, ओके.’

स्निग्धा के घर से उस के घर के बीच का रास्ता कितनी जल्दी खत्म हो गया, उसे पता ही न चला. अपने 2 कमरों के किराए के मकान में पहुंच कर उसे लगा, जैसे पूरा घर ताजे फूलों से सजा हुआ हो और उन की मादक सुगंध चारों तरफ फैल कर उस के दिमाग को मदहोश किए दे रही थी. वह एक लंबी सांस ले कर पलंग पर धम से गिर पड़ा.

उसे स्निग्धा के साथ मिलने के संयोग पर विश्वास नहीं हो रहा था.

विश्वास तो स्निग्धा को भी नहीं हो रहा था. वह अपने कमरे की सीढि़यां चढ़ते हुए यही सोच रही थी कि निशांत से मिलने के बाद क्या उस के जीवन में कोई बड़ा परिवर्तन होने वाला है. क्या यह परिवर्तन सुखद होगा? कमरे में पहुंची तो उस के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे, जैसे वह फूल की तरह हलकी हो गई थी और उसे लग रहा था कि हवा का एक हलका झोंका भी आया तो वह आसमान में उड़ जाएगी. कोई उसे पकड़ नहीं पाएगा.

उस की रूममेट रश्मि ने जब उस का हंसता हुआ चेहरा देखा तो पहला प्रश्न यही किया, ‘लगता है, तुम्हारा खोया हुआ प्यार तुम्हें मिल गया है?’

उस ने पर्स को मेज पर पटका और रश्मि को गले से लगा कर भींच लिया. रश्मि कसमसा उठी और उसे परे करती हुई बोली, ‘इतना ज्यादा मत इतराओ. अभी एक प्यार की चोट पूरी तरह से भरी नहीं है और फिर से तुम प्यार करने लगी हो. कहां तो समाज की हर चीज से बगावत करने पर तुली हुई थीं, कहां अब एक आम लड़की की तरह बारबार प्यार में इस तरह गिर रही हो, जैसे गीले गुड़ में मक्खी…क्या यही है तुम्हारा आदर्श?’

‘अरे, भाड़ में जाए समाज से विद्रोह. वह मेरी बेवकूफी थी कि मैं नैतिकता को बंधन समझती थी. दरअसल, यही सच्चा जीवनमूल्य है, जो हमें एक नैतिक और मर्यादित बंधन में रख कर समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने में मदद करता है. निरंकुश आजादी मनुष्य को गैरजिम्मेदार और तानाशाह बना देती है, जबकि सामाजिक मूल्य हमें एक निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करते हैं.’

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‘वाह, तुम तो एक दिन ही में सारे जीवनमूल्यों को पहचान गईं. किस ने ऐसा गुरुमंत्र दिया है जो अपनी बनाई हुई लीक को तोड़ने पर मजबूर हो गई हो? क्या पहले प्यार में धोखा खाने के बाद तुम्हें यह एहसास हुआ है या किसी ने तुम्हें भारतीय दर्शन और संस्कृति का पाठ पढ़ाया है?’

वह पलंग पर बैठती हुई बोली, ‘नहीं रश्मि, बहुतकुछ हम अपने अनुभवों से सीखते हैं और बहुतकुछ हम अपने संपर्क में आने वाले लोगों से. इस से कुछ कटु अनुभव होते हैं और कुछ मृदु. यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि अपने द्वारा किए गए गलत कामों के कटु अनुभवों से हम क्या सीखते हैं और हम किस प्रकार अपने को बदल कर सही मार्ग पर आते हैं.

समाज में हर चीज गलत नहीं होती. हमें अपने विवेक से देखना पड़ता है कि क्या सही है, क्या गलत. सामाजिक कुरीतियां, अंधविश्वास, अति पूजापाठ और धर्मांधता अगर बुरे हैं तो शादीब्याह जैसी संस्थाएं बुरी नहीं हैं. यह परिवार और समाज को एक बंधन में बांध कर राष्ट्र को मजबूत बनाने में मदद करती हैं. मेरी गलती थी कि मैं समाज की हर चीज को बुरा समझने लगी थी. मनमाने ढंग से जीवन जीने का परिणाम क्या हुआ? एक व्यक्ति जिसे मैं अपना समझती थी कि वह जीवनभर मेरा साथ देगा, मेरे सुखदुख बांटेगा, वही मेरा उपभोग कर के एक किनारे हो गया.

‘यही काम अगर मैं शादी कर के करती तो समाज में गर्व से अपना सीना तान कर चल सकती थी. आज मैं अपने मांबाप, परिजनों और संबंधियों के सामने नहीं पड़ सकती, उन को अपना मुंह नहीं दिखा सकती. इतनी नैतिक शक्ति मेरे पास नहीं है,’ और उस के चेहरे पर फिर से पहले जैसी उदासी व्याप्त हो गई.

रश्मि बहुत समझदार लड़की थी. वह उस के पास आ कर उस के सिर पर हाथ रख कर बोली, ‘तुम बहुत साहसी लड़की हो. कभी इस तरह हिम्मत नहीं हारतीं. आज तुम कितना खुश थीं. मुझे अफसोस है कि मैं ने तुम्हारी दुखती रग पर हाथ रख कर तुम्हें ज्यादा दुखी कर दिया. चलो, भूल जाओ अपना अतीत और नए सिरे से अपना जीवन शुरू करो. अब मैं तुम से पिछले जीवन के बारे में कोई बात नहीं करूंगी. बस, तुम खुश रहा करो.’

‘मैं खुश हूं, रश्मि,’ उस ने हंसने का खोखला प्रयास किया और बाथरूम की तरफ जाती हुई बोली, ‘तुम देखना, मैं हमेशा हंसतीमुसकराती रहूंगी.’

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‘ये हुई न कोई बात.’

स्निग्धा ने अपने मन को इतना कठोर बना लिया था कि राघवेंद्र के साथ व्यतीत किए गए जीवन के कड़वे पलों को पूरी तरह भुला दिया था. अगर कभी यादें उसे हरा देतीं तो उस को उबकाई आने लगती.

आज वह एक सच्चे प्यार की तलाश में थी, तन की भूख की अब उस में कोई ललक नहीं थी.

रश्मि एक कौल सैंटर में काम करती थी. लखनऊ की रहने वाली थी. स्निग्धा से उस की मुलाकात इसी गैस्ट हाउस में हुई थी. रश्मि पहले से यहां रह रही थी. बाद में स्निग्धा आ गई तो उन्होंने एकसाथ एक कमरे में रहने का निर्णय लिया. इस से उन पर किराए का बोझ कम हो गया था.

स्निग्धा जब से आई थी, बहुत उदास और गुमसुम सी रहती थी. बहुत पूछने और साथ रहने के कारण स्निग्धा ने उस से अपने जीवन की बहुत सारी बातें बांट ली थीं. रश्मि ने भी उसे अपने बारे में बहुतकुछ बताया था. धीरेधीरे स्निग्धा खुश रहने लगी थी परंतु आज बाहर से आने के बाद वह जितना खुश थी उतना दिल्ली आने के बाद कभी नहीं रही.

हमारी यौन कुंठा का कारण- बॉडी नहीं, बॉडी इमेज होती है

आइये आपको संजना और श्वेता का किस्सा सुनाते हैं. मगर रुकिये, संजना और श्वेता न तो बहनें थीं, न घनिष्ठ सहेलियां. इन्हें तो एक-दूसरे के वजूद के बारे में भी कुछ पता नहीं था. ये तो हम इनका दो पात्रों के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. खैर आगे बढ़ते हैं. इन दोनों लड़कियों में कुछ बातें बिल्कुल एक जैसे थी, कुछ एक दूसरे से अलग. पहली जो बात एक जैसे थी, वह यह कि ये दोनों मोटी थीं. कुछ ज्यादा मोटी कि चाहे तो आप बेडौल भी कह सकते हैं. लेकिन इस मोटोप के अलावा इनमें सब कुछ एक दूसरे से बिल्कुल अलग था. संजना गहरे सांवले रंग की थी, तो श्वेता अपने नाम की ही तरह गोरी. श्वेता के जहां नाक-नक्श तीखे और आकर्षक थे, वहीं संजना की नाक मोटी थी, आंखें छोटी थी और होंठ भी मोटे. मतलब यह कि मजाक उड़ाने के लिए व्यंग्य में जो कुछ भी कहा जा सकता था, संजना उन सबकी मालकिन थी.

सिर्फ इन दोनों लड़कियों के व्यक्तित्व में ही फर्क नहीं था, उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी एक दूसरे से भिन्न थी. श्वेता के पिता एक मध्यम दर्जे के के सरकारी मुलाजिम थे. वेतन कम तो नहीं था, लेकिन एक जमाने में उसके मुकाबले सपने इतने बड़े थे कि इस वेतन से कभी वो संतुष्ट ही नहीं हुए. श्वेता की मां भी किसी चिड़चिड़ी गृहिणी का जीता जागता किरदार थी, शायद उसमें ये चिड़चिड़ापन श्वेता के मोटापे को लेकर बनी असुरक्षा से ही पैदा हुआ था. उसे श्वेता तो फूटी आंख भी नहीं सुहाती थी, कारण कि उसे लगता था उसकी कभी शादी नहीं होगी.

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दूसरी तरफ संजना की पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग थी. संजना अपने माता-पिता की दो संतानों में एक थीं. उसका छोटा भाई अपने में मस्त रहने वाला खुशमिजाज लड़का था. मां स्कूल में पढ़ाती थी और पिता एक प्राइवेट कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर थे. घर में पढ़ने लिखने के साथ-साथ जागरूकता का माहौल था. संजना के मम्मी पापा ने बचपन से लेकर जवानी तक उसे कभी यह एहसास दिलाने की कोशिश नहीं की थी कि मोटापा उसके भावी वैवाहिक जीवन के लिए अशुभ है बल्कि उसे हमेशा इस बात के लिए प्रेरित किया था कि वह अपनी मोटापे पर सोचने की जगह अपने अंदर तमाम गुण विकसित करे और संजना ने ऐसा ही किया था. श्वेता की हीनभावना और उसके परिवार का उसे लेकर असुरक्षाबोध ने जहां उसके दिल दिमाग में ऐसा दबाव बनाया कि वह 12वीं के आगे पढ़ ही न सकी. वहीं संजना ने न सिर्फ कौलेज से मास्टर डिग्री हासिल की बल्कि वह हमेशा लीडर की तरह रही.

परिवार के वातावरण के चलते संजना में गजब का आत्मविश्वास था. अगर कभी किसी ने उसके मोटापे को लेकर कोई ताना मारा तो वह पलटकर ऐसा करारा जबाव देती कि मजाक करने वाले को दोबारा ऐसे मजाक के नाम से भी घबराहट होती. घर के माहौल से मिले आत्मविश्वास के कारण संजना ने अपनी काया को हमेशा ऐसे सकारात्मक नजरिये से देखा कि उसे कभी सपने भी इस सुरक्षाबोध ने नहीं दबोचा कि उसकी शादी नहीं होगी. दूसरी तरफ न सिर्फ श्वेता इस असुरक्षा से बल्कि उसके मां-बाप भी हर समय इसी असुरक्षाबोध से ग्रस्त रहते कि उनकी लड़की से भला कौन शादी करेगा. बहरहाल जिंदगी ने फिर सबक देने वाला खेल खेला. दोनो लड़कियों की शादी हुई. दोनों के लिए ही लड़के उनके मां-बाप ने चुने थे. संयोग से श्वेता और संजना दोनो को ही उनकी उम्मीदों से ज्यादा बेहतर वर मिले. श्वेता का पति सर्वगुण संपन्न एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर था, तो संजना का पति भी हंसमुख, उसी की तरह आत्मविश्वास से लबालब एक सरकारी विभाग में हेड क्लर्क था. लड़कियों के विपरीत दोनो ही लड़के सामान्य वजन के थे और आश्चर्यजनक ढंग से अपनी पत्नियों को लेकर खुश थे. दोनो में से किसी को पत्नियों के मोटापे को लेकर कोई समस्या नहीं थी.

संजना के तो जीवन में चार चांद लग गये. शादी के रात से ही दोनों में ऐसी बनी कि लोग उन्हें दो जिस्म, एक जान कहने लगे. लेकिन श्वेता यहां भी अपने असुरक्षाबोध के चलते परेशान ही रही. संजना ने जहां अपनी सुशिक्षित मां के मार्गदर्शन में अपने भावी वैवाहिक जीवन की तैयारियां की थीं और सेक्स को उसने एक विज्ञान की तरह लिया था, वहीं श्वेता ने हर समय इसे डर और दहशत के रूप में अपने दिल दिमाग में पाला था. संजना ने जहां अपने मोटे होने की समस्या को यौन जीवन में आड़े नहीं आने दिया, वह जब भी अपने पति से अगतंरंग हुई, खुलकर हुई और जो समस्याएं आयीं उनके विकल्प ढूंढ़ लिये. वहीं श्वेता ने छप्पर फाड़कर मिली खुशी को भी मन ही मन घुलने वाले दुख में बदल दिया. श्वेता के मन में अपने मोटापे को लेकर मौजूद हीनग्रंथियों ने उसके पति की तमाम अच्छाईयों, संवेदनशीलता को भी बेमतलब कर दिया. श्वेता के पति का उसके मोटापे से कोई समस्या नहीं थी. उसने एक बार भी मोटापे के चलते उसके प्रति आकर्षित न हुआ हो, ऐसा कभी नहीं हुआ. उसने हमेशा बिस्तर में अपने से ज्यादा श्वेता का ख्याल रखा. श्वेता के प्रति उसके पति में पूर्ण समर्पण था. लेकिन श्वेता ने कभी बिस्तर में खुशी ही नहीं जतायी. हमेशा उसका मूड थका थका बिगड़ा बिगड़ा रहा. भले वह पति से कभी लड़ी न हो, लेकिन धीरे धीरे दोनो के बीच सेक्स दहशत का विषय बन गया.

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श्वेता के मन में कभी यौन उत्सुकता ही नहीं जगी.  अपनी बौडी को लेकर हीनभावना ने हमेशा उसे डरा डरा, बुझा बुझा रखा. वह जब भी बाथरूम में होती शीशे में अपने आपको देखकर कहती ‘तुझे कोई प्यार नहीं करता’, तुझे तो खुश करने के लिए समर्पण की भीख दी जा रही है’. मतलब यह कि उसने अपने पति के सारे अच्छे व्यवहार को भी शून्य कर दिया. जबकि हकीकत यह थी कि श्वेता का पति सचमुच उसकी तमाम खूबियों पर मोहित था. उसके दिमाग में कभी मोटापे की बात आती नहीं थी. वह तो उसके गोरे बदन, चमकती त्वचा, तीखे नाक-नक्श और उसकी सुरीली आवाज पर फिदा था. लेकिन वह उसे अपने व्यवहार से कभी खुश ही नहीं कर सका. अंत में उसे श्वेता को यौन मनोचिकित्सक के पास ले जाना पड़ा और करीब एक साल की थैरेपी के बाद श्वेता अपने जीवन में वह सब पा सकी जो पहले से ही मौजूद था.

दो स्थूलकाय लड़कियों की यह कहानी हमें बताती है कि हमारे यौन जीवन की सफलता में काया से ज्यादा काया के प्रति हमारी धारणाओं में निहित. दरअसल हम सेक्स और काया का कुछ ज्यादा ही रिश्ता जोड़ते हैं. जबकि ऐसा कुछ होता नहीं. वास्तव में काया के प्रति हमारी यह धारणा जिसे मनोवैज्ञानिक बौडी इमेज कहते हैं, यह हमारे अपने, हमारे इर्दगिर्द के लोगों और उस समाज की बनायी हुई होती है, जहां हमारी परवरिश होती है. हकीकत में इसका यौन जीवन की बाधाओं से कोई लेना देना नहीं है. हमारे रूप, रंग और मोटे, पतले का हमारे सेक्स लाइफ से उतना ज्यादा रिश्ता नहीं है, जितना बौडी इमेज की धारणा से है. सकारात्मक ‘बौडी इमेज’ हमें सुख और सफलता देती है और नकारात्मक ‘बौडी इमेज’ हमारी सुख और सफलताओं को भी दुख और असफलताओं में बदल देती है. अपनी काया को आप अपनी नजरों में कितनी खूबसूरत देखती हैं या कितना बदसूरत समझती हैं कि इस बात से ही हमारी खुशी और हमारे यौन जीवन के आनंद का रिश्ता होता है.

यौन विशेषज्ञों का मानना है कि यौन संतुष्टि का रिश्ता सांचे में ढले बदन या दूध जैसी रंगत से नहीं होता बल्कि हमारी सोच से होता है. ऐसा होता तो यूरोप के बाहर की लड़कियां कभी खुश ही नहीं होतीं, विशेषकर अफ्रीकन लड़कियां क्योंकि वो तो काली भी होती हैं, मोटी भी होती हैं और कई देशों में बहुत दुबली भी होती हैं. मगर अमरीका में 35 फीसदी से ज्यादा मौडल अश्वेत हैं, चाहे वह लड़कियां हों या लड़के. अनेक मोटे नाक-नक्श वाली अफ्रो-अमरीकी लड़कियों को पूरे आत्मविश्वास के साथ सौंदर्य प्रतियोगिताओं में शामिल होते देखा जा सकता है. इनमें लबलबाता हुआ आत्मविश्वास उनके हर अंदाज से झलकता है. अमरीका की विश्व प्रसिद्ध टीवी प्रेेजेन्टर ओपरो विनफ्रे को ही देख लीजिए अगर हम सुंदरता के पारंपरिक पैमाने पर परखें तो उसकी दशा एक ऐसी मोटी, भद्दी और काली लड़की की होनी चाहिए, जो अपनी ‘असुंदरता’ के कारण हीनभावना से ग्रस्त होकर घर के से निकलते हुए घबराए. जबकि ओपरा के लिए पुरुषों की दीवानगी का एक जमाने में आलम यह रहा है कि जाने कितने करोड़पति युवकों ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा और ओपरा ने उन्हें ठुकरा दिया.

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कुछ लोग अपने मोटापे के कारण विपरीत लिंगियों के समक्ष हीनभावना के एहसास से ग्रस्त रहते हैं, तो कुछ लोगों की यही परेशानी उनके जरूरत से ज्यादा दुबलेपन के कारण रहती है. कोई लड़की अपने छोटे कद को लेकर अपने आपको पुरुष के योग्य नहीं मानती, तो कोई युवक अपने भद्दे नाक-नक्श के आधार पर यह मान बैठता है कि कोई लड़की उससे अपनी खुशी से शादी करना नहीं चाहेगी. ये सब एक नकारात्मकता के कारण जमीनी सच्चाई से वे अपना संबंध तोड़ बैठते हैं. उपरोक्त सारे तथ्यों को गहराई से देखें तो इनका आपके जीवन विशेषकर यौन जीवन से कोई विशेष फायदा या नुकसान नहीं होता. अगर आप (स्त्री या पुरुष) साधारण चेहरे-मोहरे वाले हैं, अगर आपकी कद-काठी आदर्श कही जा सकने के योग्य नहीं है या अगर आपने जीवन के मैदान में कोई बड़ा तीर नहीं मारा है, तो इस बात को लेकर नकारात्मक ‘बौडी इमेज’ बनाने की जरूरत बिल्कुल नहीं है. आपका साधारण, काला, मोटा या अत्यधिक दुबला होना यौन जीवन के लिए कोई बाधा नहीं है.

Crime- चुग्गा की लालच में फंसते, ये पढ़ें लिखे श्रीमान!

आपने एक कहानी पढ़ी होगी- शिकारी “पंछी” को फसाने के लिए दाने डालता है और फिर जाने कितने पंछी उस चुग्गे के लालच में आकर के दाना चुगने लगते हैं और शिकारी उन्हें अपने जाल में फंसा लेता है.
यह कहानी बचपन में पढ़ने के बाद हम मन ही मन हंसते हैं की पंछी बेचारे कितने अनजान होते हैं. और हम जिंदगी में कभी भी ऐसी कोई भूल नहीं करेंगे. इस कहानी का यही संदेश भी है.

मगर बचपन की कहानी जब हम बड़े हो जाते हैं तो शायद भोले भाले इंसान से  एक लालची, लोधी व्यक्ति के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं, जो कहीं थोड़ा भी लाभ दिखाई देता है तो उसे पाने के लिए लालायित हो जाता है. और यह भूल जाता है कि कहीं वह किसी शिकारी का शिकार तो नहीं है.

देश दुनिया में हमारे आसपास ऐसे जाने कितनी घटनाएं घटती जाती है.समाचार पत्रों में सुर्खियां बनती हैं लोग पढ़ते हैं और फिर भूल जाते हैं.

आइए आज हम आपको एक आंख खुलने वाली रिपोर्ट से रूबरू कराएं और देखें कि कैसे पढ़े लिखे लोग ठगी के जाल में फंस जाते हैं लाखों रुपए लुटा के होश आता है.

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प्रथम घटना-नोएडा की श्रीमती रमा शर्मा को फोन कॉल आया कि आपको कौन बनेगा करोड़पति में मौका मिलने वाला है और उनसे दो लाख रुपए ठग  लिए गए.

दूसरी घटना-मध्य प्रदेश के कटनी में एक इंजीनियर को सोशल मीडिया के माध्यम से लाखों रुपए की लाभ का लालच देकर कई लाख रुपए ठग लिए गए.

तीसरी घटना – महाराष्ट्र के नागपुर में एक पुलिस आरक्षक को एक कॉल आया किया की आपको जिओ से लाखों रुपए का लाभ  मिलने वाला है और उससे लाखों  रुपए ठग लिए गए.

हम आपको सावधान करते हैं

ऐसे ही जाने कितने छोटे-छोटे और बड़े-बड़े लालच देकर के लोगों को ठगा जा रहा है, लूटा जा रहा है. पुलिस और समाजिक संस्थाएं यथासंभव यह प्रयास करती हैं कि लोगों में जागरूकता आए. प्रयास जारी है मगर इसके साथ ही ठगी का या खेल और भी ज्यादा बढ़ता चला जा रहा है. अतः हम आपको सावधान करते हैं कि आप किसी शिकारी का चुग्गा फेंकने पर कदापि ना फंसे.

क्योंकि देखा जा रहा है कि  आम लोगों के अलावा भी पढ़े लिखे लोग, शासकीय पदों में बैठे हुए लोग भी छोटे से लाभ के चक्कर में फंस कर के ठगे जा रहे हैं. एक ज्वलंत उदाहरण यह है-

कम दाम में “कार” पाने की लालच में एक युवक दिल्ली के ठगों से 14 लाख रुपए की ठगी का शिकार हो गया. मामला भिलाई के सुपेला थाना क्षेत्र का है. पुलिस के मुताबिक आवेदक मोनिष लोही उम्र 22 साल सेक्टर 2 में रहता है. करीब 3 वर्ष पूर्व 20 दिसंबर 2018 को 24 शपिंग हब के स्वामी हितेश कुमार के कर्मचारी धनराज सिंह ने फोन पर बताया कि हमारे कंपनी से कार खरीदी करने के लिए ऑफर है उसने दाना फेंका-  “प्रमोशनल इवेंट चल रहे हैं, आप टाटा कंपनी की कार नेक्सन जीत सकते हैं.”

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पढ़ा लिखा और दुनिया जाहन  की जानने समझने वाला मनीष उनकी बातों से प्रभावित हो गया और कार जीतने के लालच ने उसे कंपनी के कर्मचारी के बताए अनुसार बैंक खाते में धीरे-धीरे करके 14 लाख रुपए वर्ष 2018 एवं 2019 में किस्तों में भुगतान किया. लेकिन टाटा नेक्सन कार की डिलीवरी मनीष को आज तक अप्राप्त है. इस रिपोर्ट के आधार पर पर पुलिस ने देश की राजधानी दिल्ली की एक महिला ठग सहित तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज करके कार्रवाई की है.

आज चल रही इस ठगी के तारतम्य में पुलिस अधिकारी विकास शर्मा के मुताबिक यह बहुत ही चिंता की बात है कि आम लोग तो ठगी का शिकार हो ही रहे हैं पढ़े लिखे शिक्षित लोग भी सोशल मीडिया के आने के बाद बहुत बड़ी तादाद में जालसाजी और ठगी का शिकार हो रहे हैं इसका मूल कारण सिर्फ लालच ही है.

नारी हर दोष की मारी

लेखक- रोचिका अरुण शर्मा

आज भी स्त्रियों के लिए सामाजिक एवं धार्मिक मान्यताएं जैसे उन्हें निगलने के लिए मुंह बाए खड़ी हैं. कई योजनाएं बनती हैं, लेख लिखे जाते हैं, कहानियां गढ़ी जाती हैं, प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं और सब से खास प्रतिवर्ष महिला दिवस भी मनाया जाता है. किंतु हकीकत यह है कि घर की चारदीवारी में महिलाएं बचपन से ले कर बुढ़ापे तक समाज एवं धर्म की मान्यताओं में बंधी कसमसा कर रह जाती हैं.

कुंआरी लड़की एवं विधवा दोष

कुछ महीने पहले की ही बात है  झुन झुनवाला की 25 वर्षीय बिटिया के विवाह की बात चल रही थी, लड़कालड़की दोनों ने एकदूसरे को पसंद कर लिया था. लेकिन फिर बात आगे न बढ़ सकी, जब  झुन झुनवाला से पूछा गया कि मिठाई कब खिला रही हैं तो कहने लगीं, ‘‘क्या करें हम तो तैयार बैठे हैं मिठाई खिलाने के लिए पर बिटिया की कुंडली में ही दोष है, कोई रिश्ता बैठता ही नहीं.’’

कैसे दोष? पूछने पर कहने लगीं कि लड़के वालों ने पंडितजी को दिखाई थी बिटिया की कुंडली, कहने लगे कुंडली में ग्रहों की स्थिति बताती है कि बिटिया का विधवा योग है. विवाह के कुछ बरसों पश्चात ही वह विधवा हो जाएगी. तो भला कौन अपने लड़के को हमारी बिटिया से ब्याहेगा? उन के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई थी.

अनब्याही में मांगलिक दोष

पुणे में रहने वाली स्मिता कहती हैं कि उन का विवाह बड़ी उम्र में हुआ, क्योंकि कुंडली में मांगलिक दोष था. कहा जाता है कि मांगलिक दोष वाली युवती के ग्रह मांगलिक दोष वाले पुरुष से मिलने चाहिए तभी विवाह का सफल होना संभव है अन्यथा या तो दोनों में से एक की मृत्यु हो जाती है या फिर तलाक. कुल मिला कर किसी भी कारण से विवाह असफल ही रहता है. ऐसे में अकसर मांगलिक युवतियां बड़ी उम्र तक कुंआरी रह जाती हैं या फिर इस मंगल दोष को हटाने के लिए पूजा एवं समाधान बताए जाते हैं, उन कार्यों को संपन्न करने पर ही ऐसी युवतियों का विवाह होता है. बढ़ती उम्र तक यदि विवाह न हो तो समाज ताने देने से नहीं चूकता.

तलाकशुदा स्त्री

हैदराबाद में रहने वाली संजना का अपने पति से विवाह के करीब 5 वर्ष बाद 30 की उम्र में ही तलाक हो गया था. उस  समय उन का बेटा था जिसे संजना ने अपने पास ही रखा. तलाक के कुछ वर्षों बाद उन के पति ने तो पुनर्विवाह कर लिया, किंतु संजना अब 50 वर्ष की हैं और एकाकी जीवन जी रही हैं. वैसे तो वे स्वयं आईटी इंडस्ट्री में कार्यरत हैं सो आर्थिक स्थिति अच्छी ही है फिर भी जब उन से पुनर्विवाह के बारे में पूछा गया तो कहने लगीं, ‘‘अब इस उम्र में कौन करेगा मु झ से विवाह और जब जवान थी तब एक बच्चे की मां से कौन करता विवाह? कोई दूसरे के बच्चे की जिम्मेदारी लेता है भला?’’

इस तरह के न जाने कितने मामले देखने को मिल जाएंगे जिन में लड़की में दोष बता कर उसे एकाकी, पाश्चिक या निम्न स्तर की जिंदगी जीने पर मजबूर कर दिया जाता है.

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विधवा स्त्री

इसी तरह एक मामला देखने को मिला जिस में एक पढ़ीलिखी, सुंदर, स्मार्ट महिला के पति की कम उम्र में मृत्यु हो गई. क्योंकि पति सरकारी नौकरी में थे, महिला को उन की मृत्यु के पश्चात अच्छी रकम मिली. महिला का एक नवजात बेटा भी था.

किसी कारणवश महिला को ससुराल वालों का सपोर्ट नहीं मिली तो वह मायके में रहने लगी. मायके में भाईभाभी की नजर में वह खटकती. यह देख कर उस के मातापिता ने पढ़ालिखा अच्छा कमाने वाला तलाकशुदा पुरुष देख कर उस का पुनर्विवाह कर दिया. कुछ समय तो ठीकठाक चला, किंतु फिर अकसर महिला के बच्चे को ले कर पतिपत्नी में अनबन रहने लगी. सास की नजर महिला के पहले पति की मृत्यु उपरांत प्राप्त धनराशि पर रहती. अब जब घर में कुछ  झगड़ा होता, बारबार महिला को ताना दिया जाता कि एक तो विधवा वह भी एक बच्चे की मां से विवाह किया. रोजरोज के  झगड़ों एवं तानों से परेशान हो इस महिला ने स्वयं ही अपने दूसरे पति से तलाक ले लिया.

अब यहां सोचने वाली बात यह है कि वह विधवा हुई उस में उस का क्या दोष? बच्चा भी नाजायज नहीं? उस के पति से संबंध के फलस्वरूप हुआ जबकि दूसरा पति तो तलाकशुदा था, हो सकता है उसी का या उस के परिवार का व्यवहार बुरा रहा हो जिस के चलते उस की पहली पत्नी से उस का तलाक हुआ हो. लेकिन बारबार महिला को विधवा होने का दोष देना कहां तक उचित है?

इस मामले में तो पढ़ीलिखी स्मार्ट महिला थी सो पुनर्विवाह हुआ और न जमने पर उस ने तलाक ले लिया. यदि यहां गांव की, मजबूर, कम पढ़ीलिखी, आर्थिक रूप से कमजोर स्त्री होती तो उस की दुर्दशा होनी तय थी.

सशक्त वीरांगना

इसी तरह का एक और महिला का उदाहरण है जिस में महिला का पति फौज में था और शहीद हो गया. नवविवाहित महिला पढ़ीलिखी है, उस का एक बच्चा भी है. उसे अपने पति के बदले में नौकरी मिल गई सो वह आर्थिक रूप से सशक्त रही. एक बच्चा था जिसे उस ने बड़ी ही लगन और मेहनत से पालपोस कर बड़ा किया.

किंतु समस्या तब आती जब सबकुछ होते हुए भी वह एकाकी जीवन जीती. मन कहीं रमणीय स्थल पर घूमने जाना चाहता है, क्योंकि कम उम्र में पति शहीद हुए, सुखद वैवाहिक जीवन के सपने तो उस ने भी देखे थे, वह भी अच्छे वस्त्र पहन कर अपने पति की बांहों में बांहें डाले किसी फिल्मी अभिनेत्री की तरह घूमनाफिरना चाहती थी, तसवीरें खिंचवाना चाहती थी.

सोशल मीडिया का जमाना है. अपनी तसवीरें वह भी दूसरों के साथ शेयर करना चाहती थी. किंतु पति के न रहने पर वह किस के साथ घूमेफिरे? कैसे खुशियां बटोरे? यदि उम्र ज्यादा होती तो शायद वह इस जीवन को जी चुकी होती, उस के शौक पूरे हुए होते, किंतु बच्चा छोटा होने से वह अकेली तो पड़ ही गई. सो मन मान कर जीने पर मजबूर हो गई. क्योंकि ऐसे में न तो कोई रिश्तेदार और न ही कोई मित्र अपने परिवार में किसी अन्य का दखल पसंद करता है और न ही कोई उस की जिम्मेदारी लेना चाहता है.

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परित्यक्त स्त्री

ऐसा ही एक उदाहरण है परित्यक्त स्त्री का जिसे उस के पति ने  झगड़ा कर घर से निकाल दिया. उस की 5 वर्षीय बेटी भी मजबूरन उस के साथ अपने ननिहाल में आ गई. वह महिला अपने मायके में आ कर नौकरी करने लगी. मातापिता ने सोचा आखिर कब तक वह उसे सहारा देंगे? उन की भी तो उम्र बढ़ती जा रही है. सो उन्होंने उस की बेटी को ददिहाल भेज दिया, सोचा कि बेटी के लिए मां की आवश्यकता पड़ेगी तो ससुराल वाले उसे बुला लेंगे. किंतु ऐसा नहीं हुआ, बल्कि उस महिला के मातापिता ने उस का तलाक करवाया और एक ऐसे पुरुष से विवाह कर दिया जिस की पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी और उस के 2 बच्चे व मरणासन्न बूढ़ी मां थी.

यह विवाह तो हो गया, किंतु क्या वह महिला इस विवाह में अपनी बेटी को अपने साथ नहीं रख सकती? जब वह अपने दूसरे पति के बच्चे पालती होगी तो क्या उसे अपनी बेटी याद नहीं आती होगी? क्या उस 5 वर्षीय बच्ची के साथ अन्याय नहीं हुआ?

जबकि महिला के दोनों पति तो अपनी जिंदगी आराम से जीते रहे. इस केस में मु झे महसूस होता है दूसरे विवाह के समय उस महिला को पत्नी का नहीं अपितु परिचारिका का दर्जा दिया गया था वरना उस की बेटी को भी सहर्ष स्वीकार करना चाहिए था. इस से मांबेटी बिछड़ती नहीं.

कुंडली में दोष एवं उपाय

कई बार तो ऐसा भी देखने को मिलता है कि लड़की की कुंडली में दोष बताया जाता है फिर किसी न किसी पूजा, यज्ञ, हवन के माध्यम से उसे दोषमुक्त किया जाता है. तब कहीं जा कर उस के विवाह की बात आगे बढ़ती है.

इसी तरह विधवा महिलाओं के लिए कई मान्यताएं एवं धारणाएं तय कर दी गई हैं जो उन के जीवन को अति निम्न स्तर का, नारकीय एवं पाश्चिक बना देती हैं. किसी भी स्त्री का विधवा होना किसी अभिशाप से कम नहीं है.

वैदिक ज्योतिष कुंडली के अनुसार विवाह, वैवाहिक जीवन एवं विवाह की स्थिति के लिए सप्तम भाव का अध्ययन किया जाता है. इस के अनुसार किसी स्त्रीपुरुष के विवाह के बाद वैवाहिक जीवन में आने वाली स्थितियों का अध्ययन किया जा सकता है. इन भावों के स्वामियों से संबंध बनाना वैवाहिक जीवन के सुखों में कमी करता है.

सप्तम भाव के अध्ययन के अनुसार इस भाव में मंगल एवं पाप ग्रहों की स्थिति कन्या की कुंडली में होने पर विधवा योग बनते हैं.

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विभिन्न भावों, कुंडली में चंद्रमा के स्थान व राहू की दशा के अनुसार कन्या का निश्चित रूप से विधवा होना तय है.

कुछ कुंडली दोष कहते हैं कि स्त्री विवाह के उपरांत 7-8 वर्ष के अंदर विधवा हो जाती है. लग्न एवं सप्तम दोनों में पाप ग्रह हो तो स्त्री के विवाह के 7वें वर्ष में पति का देहांत हो जाता है.

इस तरह के अनेक योग व दशा ज्योतिषियों द्वारा समयसमय पर लिखी व कही गई हैं और अब तो यह जानकारी इंटरनैट पर भी उपलब्ध है.

सिर्फ इतना ही नहीं इस तरह की जानकारी के साथ विभिन्न शहरों में रहने वाली महिलाओं के नाम के साथ उन के कुंडली दोष व विधवा होने की स्थिति का जिक्र भी किया गया है ताकि लोग उसे सत्य मान कर स्वीकार करें और कुंडली में भरोसा करें.

इन सब के अलावा इंटरनैट पर मेनका गांधी एवं सोनिया गांधी की कुंडली का जिक्र किया गया है और यह भी बताया गया है कि उन की कुंडलियों के अध्ययन से पता चलता है कि कितनी कम उम्र में उन्हें वैधव्य प्राप्त होगा और वह हुआ भी. साथ ही यह भी लिखा गया है कि यदि शनिमंगल का उपाय कर लिया जाए तो वैधव्य योग टल सकता है.

विधवा स्त्री के लिए विधवा व्रत

शास्त्रों में जिस तरह स्त्री के लिए पविव्रत धर्म है उसी प्रकार विधवा स्त्री के लिए विधवा व्रत का विधान है जिस में विधवा को किस तरह का जीवन जीना चाहिए इस के लिए मानक तय हैं:

विधवा स्त्री को पुरुषों के साथ अथवा अपने मायके में ही रहना चाहिए.

विधवा स्त्री को शृंगार, अलंकरण यहां तक कि सिर धोना भी छोड़ देना चाहिए.

विधवा स्त्री को सिर्फ एक ही समय भोजन करना चाहिए और एकादशी के दिन अन्न का पूर्ण त्याग करना चाहिए.

विधवा स्त्री को खट्टामीठा नहीं खाना चाहिए, सिर्फ साधारण खाना खाना चाहिए.

सार्वजनिक कार्यों, शुभकार्यों, विवाह, गृहप्रवेश आदि में नहीं जाना चाहिए.

विधवा स्त्री को भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए और अपनी संतानकी देखरेख करनी चाहिए और उस के लिए व्रत करने चाहिए.

विधवा से विवाह करने वाला नर्क में जाता है.

इस के अलावा यदि कोई स्त्री विधवा नहीं है, किंतु उस का पति परदेस में रहता है तो उसे भी विधवा व्रत का विधान मानना चाहिए.

वीडियो भी उपलब्ध

कुंडली, ज्योतिष, विधवा व्रत आदि पर न सिर्फ लेख उपलब्ध हैं, अपितु ऐसे वीडियो भी मिल जाएंगे जिन में बताया गया है कि विधवा स्त्री को पुनर्विवाह करना चाहिए या नहीं?

विधवा स्त्री के हाथ से कोई शुभ कार्य नहीं करवाया जाता? विधवा स्त्री को सफेद साड़ी क्यों पहनाई जाती है? घर के दोष से भी औरत हो सकती है विधवा.

स्त्री को आशीर्वाद दिया जाता है ‘अखंड सौभाग्यवती भव’’ यानी जब तक वह जीवित रहे उस का सुहाग अखंड रहे. सोचने की बात यह है कि यह आशीर्वाद पुरुष को नहीं दिया जाता, क्योंकि पुरुष तो स्त्री के न रहने पर पुनर्विवाह का हकदार है. यदि उस के 2-3 बच्चे भी हों तो भी कोई न कोई स्त्री उस से विवाह कर ही लेगी. किंतु यदि कोई स्त्री विधवा हो गई तो हमारे समाज और धर्म की मान्यताएं तो जैसे उस के मनुष्य जीवन पर ऐसा कुठाराघात करेंगी कि उस का जीना जैसे नर्क हो.

सोचने की बात यह है कि यदि पुरुष की मृत्यु हो तो उस का दोष स्त्री की कुंडली को. पति की मृत्यु की सजा उस की पत्नी को. क्या यह हमारे समाज के नियमों का दोष नहीं? क्या इस दोष का कोई उपाय नहीं होना चाहिए?

आज जहां हम एक तरफ विज्ञान में नई खोज, आविष्कार, तरक्की की बात करते हैं वहीं दूसरी ओर विधवा, परित्यक्त, अविवाहित स्त्री के जीवन में सुधार की बातें क्यों दबी रह जाती हैं? क्यों ऐसी स्त्रियां घुटनभरा जीवन जीने पर मजबूर होती हैं? सिर्फ मंचों पर कार्यक्रम से कुछ नहीं होने वाला है. आवश्यकता है खुले मन से उन्हें स्वीकारने की. वे जैसी भी हैं, जिस स्थिति में हैं, इंसान वे भी हैं.

धुंधली सी इक याद- भाग 1: राज अपनी पत्नी से क्यों दूर रहना चाहता था?

Writer- Rochika Sharma

‘‘बोलो न राज… एक बार मैं तुम्हारे मुंह से सुनना चाहती हूं. कहो न कि तुम्हें मुझ से प्यार है,’’ ईशा ने राज के गले में बांहें डालते हुए कहा.

‘‘हां, मुझे तुम से और सिर्फ तुम से प्यार है. मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता. तुम परी हो, अप्सरा हो और न जाने क्याक्या हो… हो गया या और भी कोई डायलौग सुनने को बाकी है?’’ राज ने मुसकराते हुए पूछा.

ईशा भी मुसकराते हुए बोली, ‘‘हुआ… हुआ… अब आया न मजा.’’

राज और ईशा एकदूसरे को 8 सालों से जानते थे. दोनों एक ही कालेज में पढ़ते थे. वहीं दोनों के प्यार का सिलसिला शुरू हुआ था. दोनों साथ घूमतेफिरते और अपनी पढ़ाई का भी ध्यान रखते. ईशा अमीर मातापिता की इकलौती संतान थी. उसे पैसे की नहीं सच्चे प्यार की तलाश थी और राज को पा कर वह धन्य हो गई थी. बस अब उसे इंतजार था कि कब राज की प्रमोशन हो और वह अपने मातापिता को राज के बारे में सब कुछ बता सके.  वैसे तो राज एक बड़ी कंपनी में ऊंचे ओहदे पर काम करता था. लेकिन ईशा चाहती थी कि राज की एक प्रमोशन और हो जाए ताकि वह अपने पिता से शान से कह सके कि उस ने राज को जीवनसाथी के रूप में चुना है. बस 1 महीने का और इंतजार था.

जैसे ही राज को प्रमोशन लैटर मिला,  ईशा ने खुशी से उसे बधाई देते हुए कहा, ‘‘बस राज मैं आज ही पापा से तुम्हारे बारे में बात  करती हूं. मुझे पूरा विश्वास है कि पापा तुम्हें बहुत पसंद करेंगे.’’  जब ईशा रात का खाना खाने अपने परिवार के साथ बैठी तो उस ने धीरे से कहा, ‘‘पापा, मैं आप को एक खुशखबरी देना चाहती हूं. मैं ने अपना जीवनसाथी चुन लिया है.’’

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उस के पिता ने भी बड़े आश्चर्य से पूछा, ‘‘अच्छा, कौन है वह?’’

ईशा चहकते हुए बोली, ‘‘पापा वह राज है. आप कहें तो मैं कल उसे डिनर के लिए बुला लूं ताकि आप और मम्मी उस से मिल सकें?’’

ईशा के पिता ने झट से हामी भर दी. अगले दिन राज ईशा के घर में था. उस से मिल कर ईशा के पिता बोले, ‘‘हमें गर्व है अपनी बेटी की पसंद पर. हमें तुम से यही उम्मीद थी ईशा. तुम इतनी पढ़ीलिखी और समझदार हो कि तुम्हारी पसंद में तो हम कोई कमी निकाल ही नहीं सकते.’’

फिर अगले संडे को ईशा के मातापिता ने राज के मातापिता से मिल दोनों के रिश्ते की बात की.  बात ही बात में राज के पिता ने ईशा के पिता से कहा, ‘‘हमें ईशा बहुत पसंद है, किंतु हम आप को एक बात साफ बता देना चाहते हैं कि राज हमारा अपना बच्चा नहीं, इसे हम ने गोद लिया था. लेकिन हम ने इसे पालापोसा अपने बच्चे की तरह ही है. हमारी अपनी कोई संतान न थी. लेकिन हम यकीन दिलाते हैं कि हम ईशा को भी बड़े ही प्यार से रखेंगे.’’  राज के पिता का व्यवहार और कारोबार बहुत अच्छा था. अत: ईशा के पिता को इस रिश्ते पर कोई ऐतराज नहीं था. फिर क्या था. एक ही महीने में राज व ईशा की सगाई व शादी हो गई. ईशा दुलहन बनी बहुत ही सुंदर लग रही थी. कालेज के दोस्त व सहेलियां भी उन की शादी में उपस्थित थे. उन में से कुछ की शादी हो चुकी थी और कुछ तैयारी में थे. सभी राज व ईशा को बधाई दे रहे थे. विदाई की रस्म पूरी हुई और ईशा राज के घर आ गई. राज के मातापिता भी चांद सी बहू पा कर बहुत खुश थे.

आज राज व ईशा की पहली रात थी. उन का कमरा फूलों से सजाया गया था.  पलंग पर हलके गुलाबी रंग की चादर पर गहरे गुलाबी रंग की पंखुडि़यों को दिल के आकार में सजाया गया था. पूरा कमरा गुलाब की खुशबू से महक रहा था. उस पर सजीधजी ईशा इतनी खूबसूरत लग रही थी कि चांद की चमक भी फीकी पड़ जाए. रोज सलवारकुरता और जींसटौप पहनने वाली ईशा दुलहन बन इतनी सुंदर लगी कि राज के मुंह से निकल ही गया, ‘‘जी चाहता है इतने सुंदर चेहरे को आंखों में भर लूं और हर पल नजारा करूं.’’ ईशा शरमा कर राज की बांहों में समा गई.  अगली सुबह ईशा नहाधो कर हलके नीले रंग की साड़ी पहने किसी परी सी लग रही थी. सुबह से ही उस की सहेलियों के फोन आने शुरू हो गए. सब चुटकियां लेले पूछ रही थीं, ‘‘कैसी रही पहली रात ईशा?’’  उस का पूरा दिन इन चुहलबाजियों में ही बीत गया. ईशा भी सब को हंस कर एक ही जवाब देती, ‘‘अच्छी रही, वंडरफुल.’’

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खैर, 1 महीना बीत गया और दोनों का हनीमून भी खत्म हुआ. अब राज को 1 महीने की छुट्टी के बाद दफ्तर जाना था. दफ्तर जाते ही सभी पुराने दोस्तों का भी वही सवाल था कि कैसा रहा हनीमून और जवाब में राज भी मुसकरा कर बोला कि अच्छा रहा.  दिन तेजी से बीत रहे थे. हर शाम ईशा सजीधजी राज के घर आने का इंतजार करती. रात को खाना खा कर दोनों छत पर लगे झूले में बैठ कर चांदनी रात में तारों को निहारा करते. प्यार की बातों में कब आधी रात हो जाती उन्हें मालूम ही न पड़ता. राज के मातापिता भी ईशा से बहुत खुश थे. उस के आने से घर की रौनक बढ़ गई थी. सारा काम नौकरचाकर करते, लेकिन ईशा राज की मां और स्वयं की थाली खुद ही लगाती. राज की मां के साथ ही खाना खाती.  1 साल बीत गया. अब राज की मां ईशा से कहने लगीं, ‘‘बेटी, तुम ने इस सूने घर में रौनक ला दी. बेटी अब इस घर में 1 बच्चा आ जाए तो यह रौनक 4 गुना बढ़ जाए.’’

ईशा भी कहती, ‘‘जी मम्मी, आप ठीक कह रही हैं.’’

जब कभी खाने के समय राज भी साथ होता तो यही बात मां राज से भी कहतीं.  राज कहता, ‘‘हो जाएगा मम्मी. इतनी भी क्या जल्दी है?’’

ऐसा चलते 1 साल और बीत गया. अब ईशा भी राज से कहने लगी, ‘‘राज, मैं तुम से एक बात पूछना चाहती हूं. तुम बुरा न मानना और मुझे गलत न समझना… तुम्हें क्या हो जाता है राज… तुम मुझ से प्यार की बातें करते हो, मुझे चूमते हो, मुझे बांहों में लेते हो, लेकिन वह क्यों करते नहीं जो एक बच्चा पैदा करने के लिए जरूरी है? हमारी शादी को 2 साल हो गए, लेकिन हम अभी कुंआरों की जिंदगी ही जी रहे हैं.’’  राज ने भी सिर हिलाते हुए कहा, ‘‘हां, तुम ठीक कहती हो.’’

मन का मीत- भाग 2: कैसे हर्ष के मोहपाश में बंधती गई तान्या

मेरी मम्मी को मेरे अकेले मुंबई रहने में समस्या दिख रही थी. अत: वे भी मेरे साथ मुंबई आ गईं. मेरे पापा के बौस के बड़े भाई अमेरिकी नागरिक हैं. उन का बेटा अमेरिका में नौकरी करता था. उन्होंने अपने बेटे समीर के रिश्ते के लिए पापा से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि समीर से शादी के बाद मुझे भी जल्द ही अमेरिका का ग्रीन कार्ड और नागरिकता मिल जाएगी. आननफानन में मेरी शादी हो गई. मैं अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में आ गई. फिर मुझे जल्द ही ग्रीन कार्ड भी मिल गया.

मेरे पति समीर गूगल कंपनी में काम करते थे. मुझे भी यहां नौकरी मिल गई. अमेरिका में काफी बड़ा बंगला, 4-4 महंगी गाडि़यां और अन्य सभी ऐशोआराम की सुविधाएं उपलब्ध थीं. मैं समीर की पत्नी भी बन गई और जब उस की मरजी होती उस के लिए पत्नी धर्म का पालन भी करती. पर मर्दों के प्रति जो मन में एक खौफ था बचपन से उस के चलते अकसर उदासीनता छाई रहती.

हम दोनों के विचार भी भिन्न थे. समीर शुरू से अमेरिकन संस्कृति में पलाबढ़ा था. यही कारण रहा होगा हम दोनों में असमानता का पर मैं ने महसूस किया कि आज तक उस ने कभी मुझे प्यार भरी नजरों से नहीं देखा, न ही मेरी तारीफ में कभी दो शब्द कहे. अपने साथ मुझे बाहर पार्टियों में भी वह बहुत कम ले जाता. मैं कभी कुछ कहना चाहती तो मेरी पूरी बात सुने बिना बीच में ही झिड़क देता या कभी सुन कर अनसुना कर देता. मेरी भावनाएं उस के लिए कोई माने नहीं रखतीं. काफी दिनों तक पति से हमबिस्तर होने पर भी मुझे वैसा कोई आनंद नहीं होता जैसा फिल्मों में देखती थी.

मेरे औफिस में एक नए भारतीय इंजीनियर ने जौइन किया था. पहले दिन उस का सब से परिचय हुआ, हर्षवर्धन नाम था उस का. उसे औफिस में सब हर्ष कहते थे. हम दोनों के कैबिन आमनेसामने थे. मैं ने महसूस किया कि अकसर वह मुझे देखता रहता. कभी मैं भी उस की तरफ देखने लगती. जब दोनों की नजरें मिलतीं, तो हम दोनों नजरें झुका लेते.

पर पता नहीं क्यों हर्ष का यों देखना मुझे बुरा नहीं लगता और मैं भी जब उसे देखती मन में खुशी की लहर सी उठती थी. मुझे लगता कि कोई तो है जिसे मुझ में कुछ तो दिखा होगा. अभी तक दोनों में वार्त्तालाप नहीं हुआ था. लंच टाइम में औफिस की कैंटीन में दोनों का आमनासामना भी होता, नजरें मिलतीं बस. कभी उस के चेहरे पर हलकी सी मुसकान होती जिसे देख कर मैं नजरें चुरा लेती.

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इस बीच मैं प्रैगनैंट हुई. हर्ष और मैं दोनों उसी तरह से नजरें मिलाते रहे. मैं ने देखा कैंटीन में कभीकभी उस की नजरें मेरे बेबीबंप पर जा टिकतीं तो मैं शर्म से आंखें फेर लेती या उस से दूर चली जाती. कभी बीचबीच में वह काम के सिलसिले में टूअर पर जाता तो मेरी नजरें उसे ढूंढ़तीं. कुछ दिनों बाद मैं मैटर्निटी लीव पर चली गई.

इसी बीच मैं ने फेसबुक पर हर्ष का फ्रैंडशिप रिक्वैस्ट देखा. पहले तो मुझे आश्चर्य हुआ कि न बोल न चाल और सीधे दोस्त बनना चाहता है. 2-3 दिनों तक मैं भी इसी उधेड़बुन में रही कि उस की रिक्वैस्ट स्वीकार करूं या नहीं. फिर मेरा मन भी अंदर से उसे मिस कर रहा था. अत: मैं ने उस की रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट कर ली. फौरन उस का पोस्ट आया कि थैंक्स तान्या. आई मिस यू.

मैं ने भी मी टू लिख दिया. फिलहाल मैं ने उस दिन इतने पर ही फेसबुक लौग आउट कर दिया. मैं आंखें बंद कर देर तक उस के बारे में सोचती रही.

पता नहीं क्यों आमनेसामने हर्ष को मुझ से या फिर मुझे भी हर्ष से बात करने में संकोच होता, पर मुझे अब रोज हर्ष का फेसबुक पर इंतजार रहता. मेरा पति समीर भी जानता था मेरे एफबी फ्रैंड के बारे में, पर यह एक आम बात है. कोई शक या आश्चर्य की बात नहीं है. उसे इस से कोई फर्क नहीं पड़ता था.

इसी बीच हर्ष ने बताया कि वह बोकारो का रहने वाला है. बीटैक करने के बाद अमेरिका एक स्टूडैंट वीजा पर आया था और मास्टर्स करने के बाद ओपीटी पर है. अमेरिका में साइंस, टैक्नोलौजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (एसटीईएम) में स्नातकोत्तर करने पर कम से कम 12 महीने तक की औप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) का अवसर दिया जाता है जिस दौरान वे नौकरी करते हैं. अगर इसी बीच किसी कंपनी द्वारा उन्हें जौब वीजा एच 1 बी मिल जाता है तब वे 3 साल के लिए और यहां नौकरी कर सकते हैं वरना वापस अपने देश जाना पड़ता है.

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हर्ष और मेरे बीच फेसबुक संपर्क बना हुआ था. इसी बीच मैं ने एक बेटे को जन्म दिया. हम लोगों ने उस का नाम आदित्य रखा, पर घर में उसे आदि कहते हैं. हर्ष ने मुझे और समीर को बधाई संदेश भेजा. मेरे घर पर पार्टी हुई पर मैं हर्ष को चाह कर भी नहीं बुला सकी. औफिस कुलीग के लिए अलग से एक होटल में पार्टी दी गई. उस में हर्ष भी आमंत्रित था. उस ने आदि के लिए ‘टौएज रस’ और ‘मेसी’ दोनों स्टोर्स के 100-100 डौलर्स के गिफ्ट कार्ड दिए थे ताकि मैं अपनी पसंद के खिलौने व कपड़े आदि ले सकूं. पहली बार इस पार्टी में उस से आमनेसामने बातें हुईं.

उस ने मुझे बधाई देते हुए धीरे से कहा, ‘‘तान्या, तुम वैसे ही सुंदर हो पर प्रैगनैंसी में तो तुम्हारी सुंदरता में चार चांद लग गए थे. मैं तुम्हें मिस कर रहा हूं. औफिस कब जौइन कर रही हो?’’

तलाक के बाद शादी- भाग 2: देव और साधना आखिर क्यों अलग हुए

देव ने गुस्से में फोन पटक दिया और उदास हो कर सोचने लगा, ‘जिस लड़की के प्यार में अपने मातापिता, भाईबहन, समाज, रिश्तेदार सब छोड़ दिए, आज वही मुझे बिना बताए चली गई. उस पर उस की मां कोर्टकचहरी की धमकी दे रही है. अगर उस का परिवार है तो मैं भी तो कोई अकेला नहीं हूं.’

देव भी अपने घर चला गया. उस के परिवार के लोगों ने भी यही कहा, ‘तुम ने गैरजात की लड़की से शादी कर के जीवन की सब से बड़ी भूल की है. तलाक लो. फुरसत पाओ. हम समाज की किसी अच्छी लड़की से शादी करवा देंगे. शादी 2 परिवारों का मिलन है. जो गलती हो गई उसे भूल जाओ. अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है? अच्छे दिखते हो. अच्छी कमाई है. अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा, सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते. अच्छा हुआ कि कोई बालबच्चा नहीं हुआ वरना फंस गए थे बुरी तरह. पूरा जीवन बरबाद हो जाता. फिर तुम्हारे बच्चों की शादी किस जात में होती.’

प्रेम तभी सार्थक है जब वह निभ जाए. यदि बीच में टूट जाए तो उसे अपने पराए सब गलती कहते हैं. यदि यही शादी जाति में होती तो मातापिता समझाबुझा कर बच्चों को सलाह देते. विवाह कोई मजाक नहीं है. थोड़ाबहुत सुनना पड़ता है. स्त्री का धर्म है कि जहां से डोली उठे, वहीं से जनाजा. फिर दामादजी से क्षमायाचना की जाती है. बहू को भी प्रेम से समझाबुझा कर लाने की सलाह दी जाती है. लेकिन मातापिता की मरजी के विरुद्ध अंतरजातीय विवाह में तो जैसे दोनों पक्षों के परिवार वाले इस प्रयास में ही रहते हैं.

यह शादी ही नहीं थी, धोखा था. लड़केलड़की को बहलाफुसला कर प्रेम जाल में फंसा लिया गया था. उन की बेटाबेटी तो सीधासादा था. अब तलाक ही एकमात्र विकल्प है. यह शादी टूट जाए तो ही सब का भला है. ऐसे में जीजा नाम के प्राणी को घर का सम्मानित व्यक्ति समझ सलाह ली जाती है और जीजा वही कहता है जो सासससुर, समाज कहता है. इस गठबंधन के बंध तोड़ने का काम जीजा को आगे बढ़ा कर किया जाता है.

जब देव साधना से और साधना देव से बात करना चाहते तो दोनों तरफ से माता या पिता फोन उठा कर खरीखोटी सुना कर तलाक की बात पर अड़ जाते और बच्चों के कान में उलटेसीधे मंत्र फूंक कर एकदूसरे के खिलाफ घृणा भरते.

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तलाक की पहली पेशी में भी पतिपत्नी आपस में बात न कर पाए इस उद्देश्य से घर से समझाबुझा कर लाया गया था कोर्ट में और साथ में मातापिता, जीजा हरदम बने रहते कि कहीं कोई बात न हो जाए. इस बीच साधना औफिस नहीं गई. उस ने भोपाल तबादला करवा लिया या कहें करवा दिया गया.

मजिस्ट्रेट के पूछने पर दोनों पक्षों ने तलाक के लिए रजामंदी दिखाई. फिर दूसरी पेशी में उन के वकीलों ने दलीलें दीं. तीसरी पेशी में पत्नी और पति को साथ में थोड़े समय के लिए छोड़ा गया. कुछ झिझक, कुछ गुस्सा, कुछ दबाव के चलते कोई निर्णय नहीं हो पाया. चौथी पेशी में तलाक मंजूर कर लिया गया.

इस बीच 3 वर्ष गुजर गए. जिस जोरशोर से परिवार के लोगों ने दोनों का तलाक करवाया था, उसी तरह विवाह की कोशिश भी की, लेकिन जो उत्तर उन्हें मिलते उन उत्तरों से खीज कर वे अपने बच्चों को ही दोषी ठहराते.

तलाकशुदा से कौन शादी करेगा? 30 साल बड़ा 2 बच्चों का पिता चलेगा जो विधुर है.घर से भाग कर पराई जात के लड़के से शादी, फिर तलाक. एक व्यक्ति है तो लेकिन अपाहिज है. एक और है लेकिन सजायाफ्ता है लड़की से जबरदस्ती के केस में.

मां ने गुस्से में कह दिया, ‘‘बेटी, तुम भाग कर शादी करने की गलती न करती तो मजाल थी ऐसे रिश्ते लाने वालों की. समाज माफ नहीं करता.’’ फिर मां ने समझाते हुए कहा, ‘‘ऐसी बहुत सी लड़कियां हैं जो बिना शादी के ही परिवार की देखरेख में जीवन गुजार देती हैं. तुम भोपाल में भाईभाभी के साथ रहो. अपने भतीजेभतीजियों की बूआ बन कर उन की देखरेख करो.’’

साधना ने भाभी को भी धीरे से भैया से कहते सुन लिया था कि दीदी की अच्छी तनख्वाह है, हमारे बच्चों को सपोर्ट हो जाएगा. मन मार कर वह भाईभाभी के साथ रहने लगी. भाभी के हाथ में किचन था. भैया ड्राइंगरूम में अपने दोस्तों के साथ गपें लड़ाते, टीवी देखते रहते और वह दिनभर थकीहारी औफिस से आती तो दोनों भतीजे उसे पढ़ाने या उस के साथ खेलने की जिद करते उस के कमरे में आ कर.

कुछ ऐसा ही देव के साथ हुआ तलाक के बाद. शादी की जहां भी बात चलती तो लड़का तलाकशुदा है. कोई गरीब ही अपनी लड़की मजबूरी में दे सकता है. कौन जाने कोई बच्चा भी हो. फिर तलाश की गई लड़की की उम्र बहुत कम होती या उसे बिलकुल पसंद न आती.

पिता गुस्से में कहते, ‘‘दामन पर दाग लगा है, फिर भी पसंदनापसंद बता रहे हो. फिर भी तुम्हारे जीवन को सुखी बनाने के लिए कर रहे हैं तो दस कमियां निकाल रहे हैं जनाब. पढ़ीलिखी नहीं है. बहुत कम उम्र की है. दिखने में ठीकठाक नहीं है.’’

परिवार के व्यंग्य से तंग आ कर देव ने कई बार तबादला कराने की सोची. लेकिन सफलता नहीं मिली. इन 3 वर्षों में वह सब सुनता रहा और एक दिन उसे प्रमोशन मिल गया और उस का तबादला भोपाल हो गया. उसे मंगलवार तक औफिस जौइन करना था. रविवार को उस ने कंपनी से मिले नौकर की मदद से कंपनी के क्वार्टर में सारी सामग्री जुटा ली. सोमवार को उस ने बाकी छोटामोटा घरेलू उपयोग का समान लिया और मन बहलाने के लिए 6 बजे के शो का टिकट ले कर पिक्चर देखने चला गया. ठीक 9 बजे फिल्म छूटी. वह एमपी नगर से हो कर निकला जहां उस का औफिस था. सोचा, औफिस देख लूं ताकि कल आने में आसानी हो. एमपी नगर से औफिस पर नजर डालते हुए वह अंदर की गलियों से मुख्य रोड पर पहुंचने का रास्ता तलाश रहा था.

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दिसंबर की ठंड भरी रात. गलियां सुनसान थीं. उसे अपने से थोड़ी दूर एक महिला आगे की ओर तेज कदमों से जाती हुई दिखाई पड़ी. देव को लगा, शायद यह किसी दफ्तर से काम कर के मुख्य रोड पर जा रही हो, जहां से आटो, टैक्सी या सिटीबस मिलती हैं. वह उस के पीछे हो लिया. तभी उस महिला के पीछे 3 मवाली जैसे लड़कों ने चल कर भद्दे इशारे, व्यंग्य करने शुरू कर दिए.

‘‘ओ मैडम, इतनी रात को कहां? घर छोड़  या कहीं और?’’

फिर तीनों ने उसे घेर कर उस का रास्ता रोक लिया. महिला चीखी. देव तब तक और नजदीक आ चुका था. एक मवाली ने उसे थप्पड़ मार कर चुप रहने को कहा. महिला फिर चीखी. उसे चीख जानीपहचानी लगी. उस के दिल में कुछ हुआ. पास आया तो वह उस महिला को देख कर आश्चर्य में पड़ गया. यह तो साधना है. वह चीखा, ‘‘क्या हो रहा है, शर्म नहीं आती?’’

भोजपुरी एक्ट्रेस Monalisa ने दिए बोल्ड पोज, वायरल हुआ Video

भोजपुरी सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस मोनालिसा (Monalisa) इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह आए दिन अपनी फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती हैं. एक्ट्रेस का फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही जमकर वायरल होने लगता है.

अब मोनालिसा ने हॉट वीडियो शेयर किया है, इसमें वह बोल्ड पोज देते हुए नजर आ रही हैं. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक्ट्रेस ऑरेंज कलर की शॉर्ट ड्रेस पहनकर पोज देती देती हुई दिखाई दे रही हैं. इस बार उन्होंने शॉर्ट ड्रेस पहनकर फैंस का दिल धड़का दिया है. मोनालिसा का ये रूप देखकर फैंस हैरान हो गए हैं.

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कुछ फैंस ने इस वीडियो को देखकर कमेंट किया है कि Monalisa इंस्टाग्राम हिलाने की तैयारी कर रही हैं. हाल ही में मोनालिसा नजर 2 में डायन के अवतार में नजर आई थीं. कुछ दिन पहले ही मोनालिसा का एक फोटोशूट सामने आया था. इस फोटो में उन्होंने ब्लू कलर का गाउन कैरी किया हुआ था. एक्ट्रेस बेहद खूबसूरत लग रही थी. मोनालिसा इस आउटफिट में अपने टोन्ड फिगर को फ्लॉन्ट करती दिखाई दे रही थीं.

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बता दें कि मोनालिसा भोजपुरी फिल्मों के अलावा टीवी सीरियल में भी नजर आती हैं. दर्शक एक्ट्रेस के निगेटिव किरदार को काफी पसंद करते हैं. मोनालिसा ‘बिग बॉस’ का भी हिस्सा रह चुकी हैं. उन्होंने इस शो में ही भोजपुरी एक्टर विक्रांत सिंह से शादी की.

 

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गरबा नाइट में इस तरह मिले अनुज-अनुपमा, Viral वीडियो में दिखी रोमांटिक केमिस्ट्री

एक्ट्रेस रूपाली गांगुली (Rupali Ganguly)  स्टारर सीरियल अनुपमा (Anupamaa) में इन दिनों सुर्खियों में छाया हुआ है. शो में अनुज के आने से कहानी में दिलचस्प मोड़ आया है. शो में दिखाया जा रहा है कि अनुज 26 साल से अनुपमा से प्यार कर रहा है. और इसी उम्मीद में वह अनुपमा का इंतजार करते आया है कि एक दिन उसे अपने दिल की बात बताएगा लेकिन वह डरता है कि कहीं उसके फीलिंग से अनुपमा और उसकी दोस्ती टूट जाएगी.  इसी बीच अनुज-अनुपमा का रोमांटिक वीडियो सामने आया है.

Rupali Ganguly ने इस  वीडियो के सोशल मीडिया पर शेयर किया है. इस वीडियो में अनुपमा के साथ अनुज यानी गौरव खन्ना नजर आ रहे हैं. वीडियो में दोनों ‘एक मैं और एक तू’ पर डांस करते हुए नजर आ रहे हैं. रूपाली गांगुली और गौरव खन्ना का ये वीडियो जमकर वायरल हो रहा है.  फैंस इस वीडियो को काफी पसंद कर रहे हैं.

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अनुपमा सीरियल की बात कर तो शो में इन दिनों हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. नंदिनी का एक्स बॉयफ्रेंड शाह परिवार को परेशान करता नजर आ रहा है. ऐसे में अनुज उसके पिता के एक काले कारनामे का राज पुलिस को बताने की बात कहेगा. जिसे सुनकर रोहन डर जाएगा.

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रोहन उसे चुप रहने की गुहार लगाएगा और अनुज की हर बात मानने को तैयार हो जाएगा. इसके बाद अनुज, रोहन के सामने तीन शर्त रखेगा. वह रोहन से कहेगा कि एक तो वह नंदनी के साथ वाली तस्वीरें डिलीट करे, दूसरी शर्त कि वह समर और नंदनी से माफी मांगे और तीसरी शर्त की वह हमेशा के लिए दोनों से दूर हो जाए. रोहन भी डर के कारण अनुज की तीनों शर्तें मानने के लिए राजी होगा.

 

तो दूसरी तरफ बा अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगी और अनुज को वहां से जाने के लिए कहेंगी. तभी समर वहां आ जाएगा और कहेगा कि मैंने अनुज को बुलाया था. बा अनुज और गोपी काका को खूब खरी-खोटी सुनाएंगी.

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तो दूसरी तरफ अनुपमा ये सब देखकर खूब रोएगी. तो देविका उससे कहगी कि जिसने तेरा हमेशा साथ दिया, उसका तुन अपमान कैसे सहन कर सकती हो. तो वहीं अनुपमा शाह परिवार के खिलाफ जाकर अनुज को रोकेगी.  और अपने साथ डांडिया खेलने के लिए कहेगी. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि अनुपमा का ये रूप देखकर वनराज कैसे रिएक्ट करता है.

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