सत्य असत्य- भाग 4: क्या था कर्ण का असत्य

निशा सामान्य भाव से अपने बाल संवारती रही. फिर उस ने जल्दी से पर्स उठाया. मैं असमंजस में थी कि क्या उस ने पिताजी की बात नहीं सुनी? उस ने मेज पर लगा अपना नाश्ता खाया और बाहर निकल गई.

निशा के जाने के बाद पिताजी बोले, ‘‘देखो कर्ण, जिस से प्यार करते हो, जिस से दोस्ती होने का दम भरते हो, कम से कम उस के प्रति तो ईमानदार रहो. प्यार करते हो तो आगे बढ़ कर उस से कहो. दोस्त से दोस्ती निभाना चाहते हो तो अपने अहं को थोड़ा सा अलग रखना सीखो. मन में कुछ मैल आ गया है, कुछ गलत देखसुन लिया है तो झट से कह कर सचाई की तह तक जाओ. मन ही मन किसी कहानी को जन्म मत दो. अब विजय की बात ही सुन लो. मैं उस से एक बार भी नहीं मिला. तुम से झूठ ही कहता रहा और तुम उस पर क्रोध करते हुए उस से नाराज भी हो गए. अगर खुद ही बात कर ली होती तो मेरा झूठ कब का खुल गया होता. मगर नहीं, तुम तो अपनी ही अकड़ में रहे न.’’

‘‘जी,’’ भैया के साथसाथ मैं भी हैरान रह गई.

‘‘निशा से प्यार करते हो तो उसे साफसाफ सब बता दो.’’

करीब 4 बजे निशा आई. मुंहहाथ धो कर रसोई में जाने लगी, तभी पिताजी ने पूरी कहानी निशा को सुना दी, जिसे वह चुपचाप सुनती रही. हम सांस रोके उस की प्रतिक्रिया का इंतजार करते रहे. शायद सुबह उस ने सुना न हो, मैं यह खुशफहमी पाले बैठी थी.

‘‘बेटी, क्या तुम यह सब जानती थीं?’’ पिताजी उस की तटस्थता पर हैरान रह गए.

निशा ने ‘हां’ में गरदन हिला दी.

‘‘तुम्हें कैसे पता चला?’’ पिताजी उठ कर उस के पास गए तो निशा एकाएक रो पड़ी, फिर संभलते हुए बोली, ‘‘उस दिन जब मैं घर की सफाई कर के लौटी थी…’’ इतना कह कर वह रोने लगी तो पिताजी उठ कर बाहर चले गए. उस के बाद किसी ने उस से कोई बात न की.

थोड़ी देर बाद मुझे निशा की आवाज सुनाई दी, ‘‘गीता, मैं सुबह अपने घर चली जाऊं?’’

मैं ने चौंक कर उस की ओर देखा तो वह बोली, ‘‘अब नौकरी मिल गई है न. और फिर जब जीना है तो अकेले रहने की आदत तो डालनी ही होगी. यहां कब तक रहूंगी?’’

शीघ्र ही उस ने अटैची और बैग तैयार कर लिया और बोली, ‘‘मैं जाती हूं. चाचाजी से मिल कर जाने की हिम्मत नहीं है. वे आएं तो बता देना.’’

मैं ने भैया को पुकारना चाहा कि उसे वे जा कर छोड़ आएं, परंतु निशा ने मना कर दिया. शायद वह भैया की सूरत भी नहीं देखना चाहती थी. रोते हुए उस ने अटैची उठाई और भारी बैग कंधे पर लादे चुपचाप चली गई. अवरुद्ध कंठ से मैं कुछ भी न कह पाई.

निशा के जाने के बाद पिताजी उदास से रहने लगे थे. मगर जो हालात बन गए थे, उन में वे कुछ नहीं कर सकते थे. उस रात मुझे नींद नहीं आई. अलमारी सहेजने लगी तो निशा के घर की दूसरी चाबी हाथ लग गई.

मैं ने वह चाबी भैया के सामने रख दी और कहा, ‘‘अभी तक सोए नहीं?’’

वे सूनीसूनी आंखों से मुझे निहारते रहे.

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‘‘जाओ, निशा को ले आओ. अधिकार से हाथ पकड़ कर, क्षमा मांग कर. जैसे भी आप को अच्छा लगे. यह उस के घर की चाबी है.’’

‘‘क्या पागल हो गई हो?’’

‘‘मैं भी साथ चलती हूं. उस से क्षमा मांग लेना. उसे अपने प्यार का विश्वास दिलाना.’’

‘‘बस गीता, बस. अब और नहीं,’’ भैया ने डबडबाई आंखों से मेरी ओर देखा.

इसी तरह 3 हफ्ते बीत गए. एक शाम मां ने भैया से कहा, ‘‘कर्ण, कहीं तुम्हारी शादी की बात चलाएं?’’

‘‘नहीं, मैं शादी नहीं करूंगा.’’

तभी पिताजी बोल उठे, ‘‘अच्छी बात है, मत करना शादी, मगर मेरा एक काम जरूर करना. अगर मुझे कुछ हो गया तो कम से कम अपनी बहन का ब्याह जरूर कर देना.’’

रात को मां की आवाज सुनाई दी. ‘‘निशा कैसी रूखी है, जब से गई है, एक बार फोन तक भी नहीं किया.’’

‘‘तो क्या तुम उस से मिलने गईं? इन दोनों में से कोई एक भी गया उसे देखने?’’ पिताजी ऊंची आवाज में बोले, ‘‘किसी दूसरे से अपेक्षा करना बहुत आसान है, कभी अपना दायित्व भी सोचा है तुम लोगों ने?’’

सुबहसुबह पिताजी के स्वर ने मुझे चौंका दिया, ‘‘गीता, कर्ण कहां है? उस की मोटरसाइकिल भी नहीं है. कहीं गया है क्या?’’

‘‘मैं हड़बड़ा कर उठी. लपक कर देखा, अलमारी में वह चाबी भी नहीं थी. मन एक आशंका से कांप उठा कि भैया कहीं निशा का कुछ अनिष्ट न कर बैठें.’’

पिताजी ने चिंतित स्वर में पूछा, ‘‘वह कहां गया है. तुम से कुछ कहा?’’

‘‘कहा तो नहीं, पर हो सकता है, निशा के पास…,’’ मैं ने उन से पूरी बात कह दी.

औटो से हम निशा के घर पहुंचे. वहां भैया की मोटरसाइकिल भी दिखाई न दी. धड़कते दिल से द्वार की घंटी बजा दी. हम कितनी ही देर खड़े रहे, पर द्वार नहीं खुला. पड़ोसी सुरेंद्र साहब का द्वार खटखटाया तो उन्होंने जो सुनाया, वह अप्रत्याशित था, ‘‘निशा तो महीनाभर हुआ सबकुछ छोड़छाड़़ कर चली भी गई. उस के चाचा उसे लेने आए थे.’’

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हम पितापुत्री चिंतित खड़े रह गए. फौरन घर वापस चले आए. भैया लुटेपिटे से सामने ही बैठे थे.

सोच का विस्तार- भाग 3: जब रिया ने सुनाई अपनी आपबीती

Writer- वीना त्रेहन

रात भर रिया खुद को कोस सिसकती रही और मौसी उस का सिर थपथपा तसल्ली देती रहीं. सुबह नाश्ते के बाद जारेद निधि को ले उस की डाक्टर अपौइंटमैंट पर चला गया. मौसी ने रिया को समझाया कि अच्छा होगा तुम अमन को तलाक दे नई जिंदगी की शुरुआत करो. मैं तुम्हारे मम्मीपापा से पूरी बात करूंगी. जारेद तुम्हारी पूरी मदद करेंगे.

निधि ने बेटी को जन्म दिया. नाम रखा जूली. छोटी बच्ची के आने से सब व्यस्त हो गए. इसी बीच रिया ने मम्मीपापा से बात कर उन्हें पूरी बात बता दी. सब की सलाह से तलाक के पेपर फाइल करवा दिए गए. जूली के 2 हफ्ते का होते ही आज जो व्यक्ति उन्हें घर बधाई देने आया उसे जारेद का कजन विलियम बताया गया. निधि उस से बातें करती रही. जूली नानी की गोद में सो रही थी. नाश्ते का प्रबंध रिया ने ही किया. जब जारेद बाहर से लौटे तो सब बातें करने लगे पर रिया चुप. क्या बात करे अनजाने आदमी से.

उस के जाते ही निधि ने विलियम के बारे में बताया कि पिछले साल कार ऐक्सीडैंट में पत्नी का देहांत हो गया था. अब उस की ढाई साल की बेटी की दादी, जो एक नर्स हैं, देखभाल कर रही हैं. विली यानी विलियम अकेला रहता है और आंटी उस का जल्दी ब्याह करना चाहती हैं. जारेद बीच में ही बोल पड़े कि विली बहुत अच्छा इंसान है. यदि रिया तुम उस की बेटी को अपनाने को तैयार हो तो तुम्हें उस से अच्छा साथी नहीं मिलेगा.

रिया बात पूरी सुन अपने कमरे में चली गई. क्या… 1 साल में ही शादी, तलाक, दूसरी शादी और एक बच्ची की मां. सोचतेसोचते उस का सिर घूमने लगा. चूंकि निधि भी रिया के पीछे आ गई, इसलिए उसे बेहोश होते देखा तो पकड़ कर कुरसी पर बैठा दिया. उस रात मौसी रिया के साथ सोईं.

दिखावे को रिया सो रही थी पर उस की आंखें जैसे कोई चलचित्र देख रही हों… मम्मीपापा की परेशानी, दादी की फटकार, अमन सलाखों के पीछे, विली की उस की ओर देखती आंखें, मौसी की सलाह और अचानक वह घबराहट से उठ बैठी.

मौसी ने पूछा कि क्या कोई सपना देख रही थी. सपना कहां यह तो उस की जीतीजागती कहानी है. अब रिया को स्वयं इस कहानी का अंत तलाशना है.

निधि से रिया ने 2 दिन का समय मांगा.

2 दिन बाद कठोर दिल कर उत्तर दिया कि ठीक है जैसे जारेद जीजू सोचें मुझे मंजूर है. इसी इतवार विली उस की बेटी काइरा और मां रिया से मिलने आईं. रिया किचन में नाश्ते का इंतजाम करने गई तो विली मदद करने पहुंचा. बोला कि रिया प्लीज नो प्रैशर, इफ यू ऐग्री आई प्रौमिस टू कीप यू आलवेज हैप्पी. रिया ने उस की ओर देख सिर हिलाया जैसे वह उस की कही बात से सहमत हो. उसी रात फिर फोन कर निधि के कहने पर रिया ने अपने मम्मीपापा को सहमति बताई, पर साथ ही सारी बात दादी को बताने पर जोर दिया.

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2 दिन बाद शाम को विली बेटी काइरा को ले निधि के घर पहुंचा. अकेले में रिया से मिलते हुए उस ने कहा कि वह उस के साथ इंडिया जा उस की फैमिली से मिल उन्हें पूरा विश्वास दिलाना चाहता है कि सब ठीक होगा और हां वह काइरा को भी साथ ले जाएगा.

जाने का दिन तय हुआ. जाने वाले दिन रिया को बड़ा अजीब सा लग रहा था. अभी बिना बने रिश्ते के आदमी व बच्चे के साथ यात्रा करना. प्लेन में रिया काइरा से ऐसे जुड़ गई जैसे वह उसी की बच्ची हो. उस के साथ बातें करते, खिलाते, सुलाते एक संबंध सा जुड़ गया.

एअरपोर्ट पर अकेले पापा आए. बेटी और विली को गले लगाया

और फिर बच्ची को गोद ले कर कार में बैठाया. घर पहुंच अंदर जाते ही रिया सीधी दादी के कमरे में पहुंची और उन की गोद में सिर रख सुबकसुबक कर देर तक रोती रही. दादी प्यार से सिर सहला उसे शांत रहने को कहती रहीं.

विली ने आगे बढ़ मां के चरण स्पर्श किए. वह ये सब यहां आने से पहले निधि से जान गया था. थोड़ा समय बीता तो दादी ने रिया को उसे बुलाने को कहा यानी विली से मिलना चाहा. विली ने दादी के सामने माथा टेका. यह देख रिया हैरान हुई.

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दादी ने उस के सिर पर हाथ रखते कहा कि मेरी रिया को सदा खुश रखना, सुखी रहो. दरवाजे की आड़ में काइरा को गोदी में उठाए रेखा यह देख रो पड़ीं जिस सास ने सारी उम्र छूतछात, वहमों, नियमों में अपने को बांधे रखा आज एकाएक सब भूल एक विदेशी मांसाहारी को आशीर्वाद दे रही हैं.

शायद उन की सोच का विस्तार तब हुआ था जब रिया ने फोन कर दादी को सारी बात सच बताने पर जोर दिया था. बेटे सुरेश से रिया के दुख, अमन की हरकतें, जेल जाने और अब तलाक का जान मां दुखी हो बोली थीं कि मेरी फूल सी पोती को इतनी यातना देने वाला तो राक्षस निकला. अब जेल में पड़ा सड़ता रहेगा. सुरेशजी ने मां को समझाया एक इंसान का अच्छा होना धर्मजाति पर नहीं उस के व्यवहार पर निर्भर होता है.

Satyakatha: पैसे का गुमान- भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

4 साल पहले मुरादाबाद के रहने वाले नंदकिशोर से कुलदीप की मुलाकात एक वैवाहिक आयोजन के दौरान हुई थी. उस के बाद से दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे.

वैसे नंदकिशोर उर्फ नंदू चाऊ की बस्ती लाइनपार का रहने वाला था. उस के पिता मुरादाबाद रेलवे में टैक्नीशियन के पद पर थे, जो रिटायर हो चुके थे. नंदकिशोर खुद एमटेक की पढ़ाई पूरी कर एक दवा कंपनी में मैडिकल रिप्रजेंटेटिव का काम करता था. उस ने एक दवा कंपनी की फ्रैंचाइजी भी ले रखी थी और दवाओं का कारोबार शुरू किया था.

इस काम को शुरू करने के लिए उस ने 20 लाख का गोल्ड लोन ले रखा था. संयोग से लौकडाउन में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिस कारण वह लोन की किस्त नहीं जमा कर पाया था.

इस वजह से वह काफी परेशान चल रहा था. वह अपनी सारी तकलीफें कुलदीप को बताया करता था.

उस ने अपने कर्ज और किस्त नहीं जमा करने की मुसीबत भी बताई थी. उसे पता था कि कुलदीप का कारोबार अच्छी तरह से चल रहा है. इसे देखते हुए उस ने मदद के लिए उस के सामने हाथ फैला दिया.

उस से 65 हजार रुपए उधार मांगे और उसे विश्वास दिलाया कि पैसे जल्द वापस कर देगा. ज्यादा से ज्यादा 2 महीने का समय लगेगा. कुलदीप ने पैसे देने से इनकार तो नहीं किया, मगर वह कई दिनों तक उसे टालता रहा.

नंदकिशोर के बारबार कहने पर कुलदीप बोला, ‘‘यार तू तो पहले से ही कर्जदार है तो मेरा 65 हजार कैसे वापस कर पाएगा? और फिर तेरी इतनी औकात अभी नहीं है.’’

यह सुन कर पहले से ही टूट चुका नंदकिशोर बहुत मायूस हो गया. उस ने केवल इतना कहा कि यदि तुम्हें नहीं देना था तो पहले दिन ही मना कर देता.

यहां तक तो ठीक था. उन की दोस्ती पर जरा भी फर्क नहीं पड़ा. लेकिन कुलदीप बारबार उस के जले पर नमक छिड़कता रहा. एक दिन तो कुलदीप ने हद ही कर दी. एक पार्टी में नंदकिशोर की कई लोगों के सामने बेइज्जती कर दी.

पार्टी छोटेबड़े कारोबारियों की थी. इस में शामिल लोगों की अपनीअपनी साख थी. कौन कितनी हैसियत वाला है और कौन किस कदर भीतर से खोखला, इसे कोई नहीं जानता था. कहने का मतलब यह था कि सभी एकदूसरे की नजर में अच्छी हैसियत वाले थे.

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पार्टी के दरम्यान कोरोना काल में कई तरह के बिजनैस में नुकसान होने की बात छिड़ी, तब कुलदीप ने नंदकिशोर पर ही निशाना साध दिया.

पहले तो उस ने सब के सामने कह दिया कि वह लाखों का कर्जदार बना हुआ है. यह बात कुछ लोगों को ही मालूम थी. इस भारी बेइज्जती से नंदकिशोर तिलमिला गया. उस वक्त तो खून का घूंट पी कर रह गया.

ऐसा कुलदीप ने उस के साथ कई बार किया. नंदकिशोर ने अपना गुनाह कुबूल करते हुए पुलिस को बताया कि कुलदीप पैसे के घमंड में चूर था. बड़ेबड़े दावे करना, बेइज्ज्ती करना उस के लिए मनोरंजन का साधन बन गया था.

उस ने बताया कि इस से वह काफी तंग आ चुका था. तभी उस ने निर्णय लिया वह कुलदीप को सबक जरूर सिखाएगा. उस ने कसम खाई और योजना बना कर उस में अपने बुआ के लड़के कर्मवीर उर्फ भोलू और रणबीर उर्फ नन्हे को शामिल  कर लिया. कर्मवीर और रणबीर दोनों सगे भाई थे.

योजना के अनुसार, कुलदीप की हत्या से कुछ दिन पहले नन्हे को बताया कि कुलदीप ने हाल में ही अपनी पोलो कार बेची है. उस से मिले 4 लाख रुपए उस के पास हैं. पैसा हड़पने में मदद करने पर उसे भी हिस्सेदार बनाया जाएगा. नन्हे इस के लिए तैयार हो गया.

नंदकिशोर ने कुलदीप को अच्छी हालत में मारुति स्विफ्ट कार दिलवाने का सपना दिखाया. उसी कार को दिखाने के बहाने से वह 4 जून, 2021 को अपनी बाइक से कुलदीप को ले कर कांठ में डेंटल हौस्पिटल के सामने पहुंच गया.

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वहां पहले से ही नन्हे और भोलू एंबुलेंस ले कर उस का इंतजार कर रहे थे. एंबुलेंस भोलू चलाता था. वहां उस ने कहा कि आज ही बिजनौर जा कर पेमेंट करनी होगी. कुलदीप उस की बातों में आ गया. उस के साथ एंबुलेंस में बैठ गया. रास्ते में नंदकिशोर ने शराब की एक बोतल खरीदी. आगे चल कर स्यौहारा कस्बे में गाड़ी रोक कर तीनों ने शराब पी.

कुलदीप जब शराब के नशे में धुत हो गया, तब नंदकिशोर ने उस के साथ मारपीट शुरू कर दी. उस से बोला, ‘‘अगर वह अपनी जिंदगी बचाना चाहता है तो 4 लाख रुपए मंगवा ले.’’

मरता क्या न करता, कुलदीप ने अपनी पत्नी सुनीता को फोन कर पैसे दुकान पर मंगवा लिए. इधर नंदकिशोर ने कर्मवीर उर्फ भोलू को भेज कर दुकान से वह पैसे मंगवा लिए.

पैसा मिल जाने पर भी नंदकिशोर ने उसे नहीं छोड़ा. एंबुलेंस में औक्सीजन सिलेंडर का मीटर खोलने वाले औजार (स्पैनर) से उस ने कुलदीप के सिर पर कई वार कर दिए.

नशे की हालत में होने के कारण कुलदीप खुद को संभाल नहीं पाया. कुछ समय में ही उस की वहीं मौत हो गई.

बाद में कुलदीप की लाश को एंबुलेंस में डाल कर धामपुर, नगीना, नजीबाबाद और भी कई जगह ले कर घूमते रहे. अगले दिन 5 जून को रात के 8 बजे उन्होंने लाश को गंगाधरपुर के पर सड़क पर डाल कर दोनों मुरादाबाद वापस लौट आए.

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मुरादाबाद पुलिस ने नंदकिशोर और उस के साथी से साढ़े 3 लाख रुपए बरामद कर लिए. पूछताछ में नंदकिशोर ने इस योजना में शामिल 2 और लोगों के नाम बताए. उस के बताए सुराग से एक पकड़ा गया, लेकिन रणबीर उर्फ नन्हे 50 हजार रुपए ले कर फरार हो चुका था.

बताते हैं कि कुलदीप के गले से हनुमान का 3 तोले का लौकेट भी गायब था. मुरादाबाद पुलिस ने 7 जून, 2021 को प्रैसवार्ता कर पूरी घटना की जानकारी दी.

Manohar Kahaniya: 2 महिलाओं की बलि देकर बच्चा पाने का ऑनलाइन अनुष्ठान- भाग 3

सौजन्य- मनोहर कहानियां

पुलिस उन की कहानी सुन कर दंग रह गई. उन्होंने सिर पर हाथ रख लिया कि टेस्ट ट्यूब से बच्चा पैदा होने के जमाने में भी ऐसा अंधविश्वास लोगों के जेहन में भरा हुआ है.

इस अंधविश्वास के कारण हुए अपराध की कहानी की जड़ में संतान की चाहत निकली. जिस का फायदा उठाने वाले ढोंगी बाबा की भी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण थी, जिस की वजह से एक नहीं बल्कि 2-2 महिलाओं की बलि दी गई थी.

भाभी ममता की गोद भरना चाहती थी मीरा

भावनात्मक दावपेंच और तांत्रिक अनुष्ठान के लिए अपनाए गए भयभीत करने वाले तरीके के प्रवाह में 5 लोग बह गए. उन में मीरा राजावत, उस का भाई बेटू भदौरिया, भाभी ममता, प्रेमी नीरज परिहार और तांत्रिक गिरवर था. इस में शिकार बनने वाली अनजान महिला आरती और नीरू थीं.

इस का पूरा तानाबाना मीरा द्वारा ही बुना गया था. उसी ने अपने निस्संतान भाईभौजाई को इस के लिए उकसाया था. हत्या का जुर्म स्वीकारने के बाद पछतावे में रोती हुई मीरा बोली, ‘‘साहब, भाई का घर आबाद करने की चाहत में तांत्रिक के कहने पर ही आरती और नीरू की बलि देनी पड़ी थी.’’

यह सब कैसे हुआ, उस की दिलचस्प मगर सवाल खड़ा करने के साथसाथ सावधान करने वाली कहानी इस प्रकार है—

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ग्वालियर के मोतीझील इलाके में रहने वाले मीरा के बड़े भाई बेटू भदौरिया की शादी 18 साल पहले ममता भदौरिया के साथ हुई थी. बेटू ट्रक ड्राइवर था. अभी तक वे निस्संतान थे. काफी डाक्टरी इलाज और मन्नतों के बावजूद ममता की गोद सूनी थी. एक दिन ममता ने अपनी संतानहीनता की पीड़ा मीरा को सुनाई. किसी भी तरह कहीं से कोई बच्चा गोद लेने या दूसरा उपाय करने के लिए कहा.

मीरा खुद तो अविवाहित थी, लेकिन वह संतानहीनता की पीड़ा को समझती थी. उस की जानपहचान कई तरह के लोगों से थी. ममता को उस के प्रेमी नीरज की अच्छी जानपहचान होने के बारे में भी मालूम था. इस कारण ममता ने मीरा को नीरज या किसी और के जरिए उपाय करने की गुजारिश की.

ममता के काफी अनुरोध के बाद मीरा ने इस बारे में नीरज से बात की. नीरज ने छूटते ही बताया कि वह एक ऐसे तांत्रिक को जानता है, जो कइयों की मनमानी संतान की चाहत को पूरा करवा चुका है, लेकिन इस पर वह मोटी फीस वसूलता है.

नीरज की विश्वास भरी बातें सुन कर मीरा को लगा जैसे उस के भाईभाभी की मुराद बस पूरी होने ही वाली है. उस ने तुरंत तांत्रिक से बात करने के लिए कहा.

अगले रोज ही नीरज ने मीरा को जानकारी दी कि हमें इस के लिए भैयाभाभी को तांत्रिक गिरवर यादव नाम के तांत्रिक के यहां ले कर जाना होगा. वहीं उन की जन्म कुंडलियों को देखने के बाद उपाय के बारे में सब कुछ तय किया जाएगा.

मीरा ने तुरंत यह जानकारी अपनी भाभी ममता को दी, ममता ने अपने पति बेटू को इस के लिए राजी कर लिया. इस पर आने वाले खर्च के बारे में बेटू ने जानना चाहा. मीरा कोई निश्चित राशि तो नहीं बता पाई, लेकिन इतना जरूर कहा कि नीरज के मुताबिक लाख, सवा लाख में उपाय हो जाना चाहिए.

इसी के साथ मीरा ने बेटू को 10-15 हजार रुपए साथ ले कर चलने को भी कहा, ताकि तांत्रिक की पैरपुजाई के तौर पर कुछ पेशगी दी जा सके.

तांत्रिक ने बताया संतान प्राप्ति का तरीका

चारों लोग तांत्रिक के पास गए. तांत्रिक ने बेटू और ममता की जन्मकुंडलियां देखने के बाद ध्यान लगा कर बताया कि ममता की किस्मत में औलाद सुख बहुत ही कमजोर है. थोड़ीबहुत उम्मीद की किरण बेटू में दिखती है. उसे ममता के करीब लाने के लिए एक तांत्रिक अनुष्ठान करना होगा.

तांत्रिक ने अनुष्ठान का समय भी निर्धारित कर दिया. बताया कि दोनों को औलाद सिर्फ उसी सूरत में हो सकती है, जब वे शरद पूर्णिमा की आधी रात में किसी निस्संतान महिला की बलि बगैर रक्त बहे दे दें.

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अनुष्ठान तक की बात सभी के लिए किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं थी, लेकिन बलि की बात सुन कर सभी हैरानी में पड़ गए. जबकि तांत्रिक ने स्पष्ट कहा कि इस के बगैर वे संतान की उम्मीद छोड़ दें.

मीरा और नीरज ने इस के लिए तुरंत हामी भर दी. उस के बाद ममता और बेटू ने भी अपनी स्वीकृति दे दी. उन्होंने इस पर आने वाले खर्च और आगे की तैयारी के बारे में पूछा.

तांत्रिक गिरवर यादव ने बताया कि पूरे आयोजन पर कुल डेढ़ लाख रुपए का खर्च आएगा. बलि के लिए किसी को तैयार करने का खर्च और इंतजाम उन का होगा. इस काम के लिए वह श्मशान में लगातार 3 घंटे तक मंत्रजाप  अकेले करेंगे.

तांत्रिक की शर्त पर ममता, बेटू, मीरा और नीरज ने एक साथ हामी कर दी. अनुष्ठान के लिए समय मात्र एक हफ्ते का बचा था. महत्त्वपूर्ण तैयारी किसी वैसी निस्संतान औरत के तलाश की थी, जो उन की बिरादरी की न हो. इस के लिए नीरज को लगा दिया गया.

उस ने अपने जानने वालों से गुप्त तरीके से इस पर काम करना शुरू कर दिया. उसी क्रम में उसे पहचान वाली रोशनी से मदद मिल गई. उस ने आरती के बारे में बताया.

संयोग से आरती को नीरज पहले से जानता था. जल्द ही उन के बीच बात बन गई और नीरज ने आरती को 10 हजार रुपए में धार्मिक आयोजन में सहयोग करने के लिए तैयार कर लिया. नीरज आरती को एडवांस पैसा देने के बाद 20 अक्तूबर, 2021 की शाम 8 बजे के करीब आटो में बिठा कर बेटू की पुरानी छावनी स्थित आवास पर ले गया. वहां गिनेचुने लोग ही थे. उसे मिला कर कुल 5 लोग.

एक कमरे में अनुष्ठान की तैयारी की गई थी. आरती की खातिरदारी के साथसाथ उस के लिए खरीदे गए उपहार के कपड़े और सामान दिखाए गए, जो उसे आयोजन के बाद दिए जाने थे. आरती यह सब देख कर खुश हो गई.

औनलाइन अनुष्ठान में दी गई महिला की बलि

मीरा ने आरती को आयोजन के उद्देश्य और तरीके के बारे में समझाया. उस ने कहा कि उस के सहयोग से उस के भाईभाभी के घर में किलकारी गूंज उठेगी. इस का लाभ भविष्य में हम सभी को मिलेगा, ऐसा पुजारी ने कहा है. उसे एक धार्मिक अनुष्ठान में बेटू और ममता के साथ एक अनुष्ठान करने वाले महत्त्वपूर्ण सदस्य के तौर पर बैठना है.

अनुष्ठान का सारा काम औनलाइन होगा. पुजारी दूर रह कर हवन आदि के साथ मंत्रजाप करेंगे. यहां से हमें मोबाइल पर उन की आवाज के साथ सहयोग का जयकारा लगाना होगा.

इन तैयारियों के साथ अनुष्ठान का आयोजन रात के 11 बजे शुरू हो गया. तांत्रिक ने बलि देने का समय रात के एक बजे का तय किया था. आरती को इस का जरा भी आभास नहीं हुआ कि उस की बलि दी जानी है.

अगले भाग में पढ़ें- बाइक से सड़क पर गिर गई लाश

गहरी पैठ

जम्मूकश्मीर और बंगलादेश के निहत्थे निर्दोष हिंदू अपने ही देश के नागरिकों द्वारा मारे जा रहे हैं और महान हिंदू राष्ट्र बनाने का वादा करने वाले असहाय ताक रहे हैं. जम्मूकश्मीर में अचानक हिंदू बिहारी मजदूरों पर आक्रमण शुरू हो गए और लगभग उसी समय बंगलादेश में बंगलादेशी नागरिक हिंदुओं पर भी आक्रमण होने लगे. कुछ गोलियां से मारे गए, कुछ हिंसा में, कुछ के घर जले. धर्म के नाम पर एक गुट दूसरे के खून का प्यासा होने लगा, जबकि दोनों ही जगह न हिंदू, न मुसलमान इतनी फुरसत में हैं कि वे किसी तरह का दंगा सह सकें.

आर्थिक संकटों से जूझ रहे बंगलादेश और जम्मूकश्मीर दोनों में समय व शक्ति काम में लगनी चाहिए, पर लग रही है फालतू के दंगों में. जिन से तथाकथित कल्याण करने वाला धर्म बचाया जा सके. बंगलादेश ने हाल में उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति की है और इस में वहां के हिंदुओं और मुसलमानों दोनों का बराबर का हाथ है और कोई खास वजह नहीं कि वे एकदूसरे के खून के प्यासे हों.

जम्मूकश्मीर में जो भी नाराजगी कश्मीरी मुसलमानों को है वह दिल्ली सरकार से है और बिहार से गए हिंदू मजदूर उस के लिए कहीं से जिम्मेदार नहीं हैं. ये लोग कश्मीर इसलिए आते हैं, क्योंकि यहां इस तरह का काम करने वाले नहीं मिलते. ये कमा रहे हैं पर साथ ही उन कश्मीरियों की सेवा भी कर रहे हैं जो काम नहीं करना चाहते, वरना क्यों गरम इलाकों में रहने वाले कश्मीर की ठंड में सर्दियों में अपने को ठिठुराएंगे?

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धर्म को असल में लोगों के सुख से कुछ लेनादेना नहीं होता. जन्म से ही धर्म में कैद लोगों को चाहे जैसे मरजी हांका जा सकता है. धर्म ने सदियों से यह फार्मूला अपनाया है. झोंपड़ी में रह कर, भूखेनंगे लोगों के पिरामिड बनाए, रोम के चर्च बनाए, मसजिदें बनाईं, मकबरे बनाए, अंकोरवाट जैसे मंदिर बनाए, एलोरा और अजंता में पत्थर काट कर महल बनाए, अपने सुख के लिए नहीं उस धर्म के लिए जिस का न ओर पता है, न छोर और जो देता सपने और वादे है और लेता पैसा, औरतें और जान है.

जो हिंदू कश्मीर और बंगलादेश में मारे जा रहे हैं और जो मुसलमान मर रहे हैं उन की आपस में कोई दुश्मनी नहीं है, किसी ने एकदूसरे से कुछ लियादिया नहीं. धर्म ने कहा मार दो तो मार डाला. हमारे देश में भी यही काम हिंदू बजरंगी, सेवादल कर रहे हैं. सड़कों पर चल रहे निहत्थे मुसलमानों को मारापीटा जा रहा है, बिना किसी कारण के. न कश्मीर में, न बंगलादेश में और न भारत में दूसरे धर्म को लूटने की नीयत से भी नहीं मारा जा रहा. सिर्फ इसलिए पीट दो, मार दो कि  उस का हुक्म उन के धर्म ने दिया है.

अफगानिस्तान में अमेरिका के भाग जाने से मुसलिम जगत की हिम्मत भी बढ़ गई तो बड़ी बात नहीं. तालिबानी अपने मनसूबे पहले ही जता चुके हैं. अफीम के व्यापार के कारण उन के पैर हर जगह फैले हैं. वे अब यूरोप में भी कहर मचाने लगे हैं, अमेरिका में न जाने फिर कभी न्यूयौर्क के ट्विन टौवर जैसा 9/11 हादसा हो जाए.

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इस सब से क्या हिंदू या ईसाई अपना धर्म छोड़ कर मुसलमान बन जाएं तो बात होती. हर धर्म की अपने मूर्ख भक्तों पर इतनी पकड़ है कि वह जानता है कि लोग जान दे देंगे पर धर्म नहीं बदलेंगे. वैसे भी जब भी 10-20 लोग एक धर्म छोड़ कर हावी हो रहे धर्म को अपनाते हैं तो उन के पुराने धर्म वाले ही उन के दुश्मन हो जाते हैं और उन्हें मारने के स्पष्ट आदेश हर धर्म में हैं. एक तरह से हर धर्म का भक्त अपने धर्म का गुलाम है और ये हत्याएं भक्ति का प्रसाद हैं.

इन से न तो इसलाम को लाभ होगा और न हिंदू धर्म को कोई नुकसान होगा. पिसेंगे तो दोनों धर्मों के लोग. दुकानों की हलवापूरी चालू रहेगी. औरतें भी मिलती रहेंगी.

Bigg Boss 15: Afsana Khan ने की ऐसी हरकत! मेकर्स ने किया शो से बाहर

‘बिग बॉस 15’ (Bigg Boss 15) में  कंटेस्टेंट शो में बने रहने के लिए हर तरह से कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में कंटेस्टेंट शो में  गेेम प्लान करते नजर आ रहे हैं. अब शो से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि अफसाना खान को शो से बाहर निकाल दिया गया है. आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला.

रिपोर्ट के मुताबिक अफसाना खान ने चाकू से खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. दरअसल शो के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि अफसाना अपना आपा खो बैठती है और वीआईपी एक्सेस टास्क में हारने के बाद खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती है.

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एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अफसाना को मेडिकल रीजन्स की वजह से घर से बाहर किया गया था क्योंकि उन्हें पैनिक अटैक आया था. तो वहीं वीआईपी एक्सेस टास्क के दौरान अफसाना खान और शमिता शेट्टी के बीच जमकर लड़ाई हुई थी.

 

ऐसे में शो में दिखाया जाएगा कि बिग बॉस ने सभी घरवालों को लिविंग एरिया में बुलाएंगे और घोषणा करेंगे कि अफसाना खान को शमिता के साथ फिजिकल लड़ाई के लिए शो छोड़ना होगा.

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शो में आप ये भी देखेंगे कि बिग बॉस ने शमिता शेट्टी को बार-बार अंग्रेजी में बोलने के लिए भी फटकार लगाएंगे. शो में कंटेस्टेंट को आपस में हिंदी में बात करनी होती है. तो वहीं राकेश बापट की तबीयत खराब हो गई जिसकी वजह से उन्हें भी शो से बाहर होना पड़ा

अनुज पर गुंडे करेंगे हमला तो शाह परिवार के सामने आएगा 26 साल पुराना राज

रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly), गौरव खन्ना (Gaurav Khanna), सुधांशु पांडे (Sudhanshu Pandey) स्टारर सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) में लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. जिससे दर्शकों का एंटरटेनमेंट का जबरदस्त तड़का मिल रहा है.

शो में अब तक आपने देखा कि पारितोष अनुपमा पर लांछन लगाता है तो वह अनुज को भी खूब सुनाता है. वह कहता है कि अनुज के कारण ही अनुपमा ने शाह हाउस छोड़ा. उसके कारण अनुपमा का पूरा परिवार बिखर गया है. ऐसे में अनुज को धक्का लगता है, वह सोचता है कि अनुपमा ने उसके कारण कितना कुछ बर्दाश्त किया है. ऐसे में वह शाह हाउस जाने के लिए तैयार होता है ताकि अनुपमा और उसके रिश्ते को लेकर गलतफहमियां है, वह दूर कर सके.

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शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज कपाड़िया शाह हाउस जाएगा. वह वनराज को बताना चाहेगा कि वो दोनों सिर्फ अच्छे दोस्त हैं, अनुपमा अपने परिवार से बहुत प्यार करती है. तो दूसरी तरफ वनराज अपमना आपा खो देगा और गुस्से में उसकी कॉलर पकड़ेगा.

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वनराज कहेगा कि अनुज अनुपमा से प्यार करता है और अनुपमा अनुज से प्यार करती है. केवल यही सच है. ऐसे में अनुज भी गुस्से में 26 साल पहले का राज सबके सामने चिल्ला-चिल्ला कर बताता है.

 

शो में आप देखेंगे कि अनुज कहेगा कि वह  बीते 26 साल से अनुपमा से प्यार करता आ रहा है और आज भी वह अनुपमा से बेहद प्यार करता है, लेकिन अनुपमा उससे प्यार नहीं करती है.तो दूसरी तरफ अनुपमा ये सारी बातें सुन लेती है और बुरी तरह टूट जाती है.

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शो में ये भी दिखाया जाएगा कि अनुज अपनी सारी बातें कहकर शाह हाउस के बाहर आएगा और खुद पर काफी गुस्सा निकालेगा. वह अपने आप से नाराज है क्योंकि उसे लगता है कि उसने अनुपमा का विश्वास तोड़ा है. तो वहीं सड़क पर खड़े कुछ गुंडो से झगड़ा करेगा, उनके बीच मारपीट होगी.

Manohar Kahaniya: बहन के प्यार का साइड इफेक्ट- भाग 2

सौजन्य- मनोहर कहानियां

Writer- आर. के. राजू

गगन अभी कुछ बोलता इस से पहले ही ममता बोली, ‘‘मैं हर्बल पार्क घूमने आई थी. पार्क की सुंदरता देख कर तुम्हारे साथ यहां गुजारे पुराने दिन याद आ गए. आ जाओ यहीं पार्क के रेस्तरां में एक बार फिर मिलते हैं. साथ बैठते हैं…’’

बीते दिनों की कई पुरानी बातें बता कर ममता ने गगन को काफी भावुक कर दिया था. वह ममता की बातें सुन कर पुराने दिनों के हसीन लम्हों में खो गया. ममता गगन का पहला प्यार थी.

गगन को ममता के साथ बिताए पल अचानक झिलमिलाने लगे थे. वह ममता से बोला,‘‘तुम बुलाओ और हम न आएं, ऐसा नहीं हो सकता.’’

थोड़ी देर में ही गगन हर्बल पार्क पहुंच गया. ममता जींस टौप पहने बेसब्री से उस का इंतजार कर रही थी.

गगन ने आते ही ममता को बाहों में भर लिया. ममता उस से छूटते ही बोली, ‘‘तुम अभी भी वही पुराने वाले गगन, जरा भी नहीं बदले…लेकिन अब तुम शादीशुदा हो आगे से ध्यान रखना हां. …अच्छा चलो पार्क के बाहर झाडि़यों की ओर चलते हैं. वहीं बैठ कर कुछ बातें करेंगे, आराम से.’’

गगन को झाडि़यों में ले गई ममता

गगन ने महसूस किया कि ममता में कोई बदलाव नहीं आया है, वही पहले की तरह चंचल अदाएं, कसक और अपनापन….

‘‘ थोड़ा रुको यार, बहुत दिनों बाद मिले हो तुम्हारे लिए कोल्ड ड्रिंक्स और नमकीन लाती हूं. वहीं पार्क में बैठ कर साथसाथ पीएंगे.’’

ममता के बोलने पर गगन बोला, ‘‘हांहां क्यों नहीं.’’

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‘‘ बस मैं कैंटीन गई और अभी आई.’’ बोलती हुई ममता कैंटीन की ओर जाने लगी.

तभी गगन हाथ खींचते हुआ बोला, ‘‘यह काम तुम्हारा नहीं मेरा है.’’

‘‘देखो मैं ने तुम्हें बुलाया है. समझो कि आज तुम हमारे मेहमान हो.’’ ममता कहती हुई गगन से हाथ छुड़ा कर तेजी से कैंटीन की ओर दौड़ी चली गई. गगन उसे देखता रह गया.

ममता यह सब योजना के मुताबिक कर रही थी. ममता की जिद के आगे गगन कुछ नहीं कर पाया. वह केवल ममता के साथ गुजारे पुराने लम्हों को ही याद करता रह गया.

‘‘ आओ चलें…’’ ममता बोली.

गगन एक बार फिर सपनों की दुनिया से बाहर आया. ममता के हाथ से कोल्ड ड्रिंक अपने हाथ में ले ली. ममता डिसपोजल गिलास और नमकीन का पैकेट संभालती हुई झाडि़यों की ओर बढ़ गई. कुछ पल में ही दोनों पार्क के मुख्य मार्ग से नजर नहीं आने वाली झाडि़यों के पीछे थे. गगन टायलेट का इशारा करते हुए उस ओर चला गया.

ममता के लिए इस से अच्छा मौका और क्या हो सकता था. उस ने तुरंत दोनों डिसपोजल गिलास निकाले. उन में दोतिहाई कोल्ड ड्रिंक भरा और अपने साथ लाई नशीले पदार्थ की पुडि़या एक गिलास में डाल दी. गगन के आते ही उस ने अपने बाएं हाथ का गिलास उस की ओर बढ़ा दिया.

‘‘नहींनहीं, इस हाथ से नहीं दाएं हाथ वाला दो. तुम्हारी बाएं हाथ से किसी को सामन देने की आदत अभी तक गई नहीं है.’’ गगन बोला.

‘‘क्या करूं गगन, मेरा दायां हाथ चलता ही नहीं है. तुम्हारे साथ शादी हो जाती तब  शायद यह आदत छूट जाती. अच्छा लो इसे पकड़ो.’’ कहती हुई ममता ने अपने दाएं हाथ का कोल्ड ड्रिंक भरा गिलास आगे कर दिया. गगन ने गिलास हाथ में ले लिया.

उस से एक घूंट पीने के बाद ममता मंदमंद मुसकराई. उस की मुसकान में कुटिलता छिपी थी, कारण वह अपनी योजना में कामयाब हो रही थी. नशीला पदार्थ मिला कोल्ड ड्रिंक का गिलास गगन के हाथ में था और वह नमकीन के साथसाथ घूंटघूंट कर चुस्की लेने लगा था.

कुछ समय में ही गगन बोला. ‘‘ममता… म… ममता,  मुझे तुम्हारा चेहरा साफ क्यों नहीं दिख रहा.’’ गगन की आवाज में लड़खड़ाहट थी. ममता समझ गई कि उस पर नशा हावी हो रहा है.

ममता ने प्रेम भरी हमदर्दी दर्शाते हुए उस का सिर अपनी गोद में ले लिया. उस के बालों में अंगुलियां घुमाने लगी. कुछ पल में ही गगन पूरी तरह से बेहोश हो चुका था. ममता ने तुरंत थोड़ी दूर दूसरी झाड़ी के पीछे छिपे वीरू को इशारा किया.

इशारा पाते ही ताक में बैठा वीरू ममता के पास आ गया. ममता वहां से उठती हुई बोली, ‘‘शिकार को संभालो, मैं ने अपना काम कर दिया, आगे का काम तुम्हारा.’’

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उस के बाद नंदिनी और प्रदीप को भी इस की जानकारी दे दी कि उस का काम पूरा हो चुका है. हालांकि तब तक गगन के मुंह से केवल एक ही बड़बड़ाने की आवाज निकल रही थी, ‘‘ममता क्या हुआ है मुझे…’’

‘‘कुछ नहीं तुम्हें थोड़ा चक्कर आ गया है, अभी तुम्हें डाक्टर के यहां ले जाने का इंतजाम करवाती हूं.’’ ममता बोली. ममता उसे सहारा देते हुए वीरू के साथ उस की मोटरसाइकिल तक ले गई. वहां प्रदीप पहले से मौजूद था.

गगन को प्रदीप और वीरू ने पकड़ कर मोटरसाइकिल पर बिठा दिया. वीरू मोटरसाइकिल चलाने के लिए बैठ गया, जबकि प्रदीप गगन को गिरने से थामे हुए था.

वीरू और प्रदीप गगन को जयंतीपुर ले गए. वहां एक खाली प्लौट में उन दोनों ने गगन को जबरदस्ती शराब पिलाई. फिर गगन के गले में पड़े गमछे से गला घोंट कर उस की हत्या कर दी.

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Satyakatha: पुलिसवाली ने लिया जिस्म से इंतकाम- भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

शीतल के इंस्टाग्राम पर पुलिस को एक मर्द का चेहरा और एक पोस्ट नजर आई, जिस का नाम धनराज यादव था. पुलिस ने शीतल के परिचितों को खंगालना शुरू किया तो जानकारी मिली कि धनराज यादव पेशे से एक बस ड्राइवर है.

शीतल की इंस्टाग्राम पर धनराज से दोस्ती हुई थी. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि शीतल ने धनराज से दोस्ती करने के 5 दिनों बाद ही उस से शादी कर ली. यह बात 2019 के आखिर की है.

यह अपने आप में हैरानी की बात जरूर थी. इंसपेक्टर लांडगे को लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं धनराज यादव ने ही अपनी पत्नी के साथ हुए यौन शोषण का बदला लेने के लिए शिवाजी की सड़क हादसा कर हत्या कर दी हो. वह पेशे से ड्राइवर भी था.

पुलिस को लगने लगा कि कातिल अब उस से एक हाथ की दूरी पर है. गुपचुप तरीके से शीतल के जानकारों से पुलिस ने पता कर लिया कि धनराज तमिलनाडु का रहने वाला है. शादी के सिर्फ एक महीने बाद ही धनराज रहस्यमय तरीके से अचानक शीतल को छोड़ कर तमिलनाडु चला गया. उस के बाद धनराज को किसी ने नहीं देखा.

डीसीपी शिवराज पाटिल को केस की इस नई जानकारी का पता चलने पर एक टीम को तमिलनाडु भेज दिया गया. एक सप्ताह तक सुरागरसी करतेकरते पुलिस टीम आखिर तमिलनाडु में धनराज के घर तक पहुंच गई और उसे पकड़ कर मुंबई ले आई.

हालांकि पुलिस ने नैनो कार में बैठे जिन 2 लोगों की सीसीटीवी फुटेज हासिल की थी, उन से धनराज का चेहरा कहीं भी मेल नहीं खाता था. लेकिन फिर भी उस से पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ तो नई जानकारी मिली.

उस ने कुबूल कर लिया कि उस ने इंस्टाग्राम पर कांस्टेबल शीतल से दोस्ती करने के बाद 5 दिनों में ही शादी कर ली थी, लेकिन एक महीने के बाद ही वह शीतल को छोड़ कर अपने गांव चला गया था.

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‘‘क्यों, ऐसा क्यों किया तुम ने?’’ इंसपेक्टर लांडगे ने सवाल किया.

‘‘सर, मैं बहुत डर गया था. पहले तो दोस्ती करने के बाद इतनी जल्द मेरे जैसे ड्राइवर से एक पुलिस वाली के शादी करने का राज ही मेरी समझ में नहीं आया था. लेकिन शादी के 5 दिन बाद ही जब शीतल ने मुझ से एक खतरनाक काम करने के लिए कहा तो मेरी समझ में आ गया कि उस ने अपना काम कराने के लिए मुझ से शादी की है और मुझे हथियार बनाना चाहती है.’’ धनराज ने सहमते हुए एकएक राज उगलना शुरू कर दिया.

उस ने बताया कि शीतल ने उसे शिवाजी सानप द्वारा अपने यौनशोषण की कहानी सुना कर भावुक कर दिया था. इस के बाद शीतल ने उस से कहा कि अगर वह उस से प्यार करता है तो वह अपनी पत्नी के साथ हुई नाइंसाफी का बदला ले और शिवाजी को ट्रक से कुचल कर मार दे.

यह सुन कर धनराज बहुत डर गया. क्योंकि वह मुंबई शहर में रोजीरोटी कमाने के लिए आया था. ऐसे में एक कत्ल वह भी पुलिस वाले का… ऐसा सुनते ही धनराज के रोंगटे खड़े हो गए.

उस ने शीतल को समझाया, ‘‘शीतल, जो हुआ उसे भूल जाओ. यह सब जान कर भी तुम्हारे लिए मेरा प्यार कम नहीं हुआ है. वैसे भी यह काम बहुत रिस्क वाला है मैं ने जीवन में कभी ऐसा काम नहीं किया है. सोचो मैं ने यह काम कर भी दिया तो एक न एक दिन भेद खुल जाएगा. फिर मैं और तुम दोनों ही पकड़े जाएंगे.’’

लेकिन शायद शीतल के ऊपर शिवाजी से इंतकाम लेने का जुनून इस कदर सवार था कि वह आए दिन धनराज पर दबाव डालने लगी कि चाहे जैसे भी हो, उसे शिवाजी की हत्या करनी ही होगी.

वह तो पेशे से ड्राइवर है इसलिए किसी को भी शक नहीं होगा. अगर पकड़े भी गए तो केवल लापरवाही से हुई दुर्घटना का केस चलेगा.

इसी तरह 3 सप्ताह गुजर गए. धनराज अजीब पशोपेश में था. क्योंकि वह दिल से नहीं चाहता था कि ऐसा गलत काम करे. उसे अब इस बात का भी डर सताने लगा था कि अगर वह लगातार शीतल का काम करने से मना करता रहा तो वह कहीं उसे पुलिस विभाग में अपनी तैनाती का फायदा उठा कर किसी झूठे आरोप में फंसवा कर जेल न भिजवा दें.

उस के सामने अब यह भी साफ हो गया था कि शीतल ने उस से शादी अपना यह काम करवाने के लिए ही की थी. लिहाजा एक दिन डर की वजह से धनराज अपनी नौकरी छोड़ कर सारा सामान समेट कर अपने गांव तमिलनाडु भाग गया.

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धनराज से पूछताछ के बाद पुलिस एक बार फिर अंधेरे मोड़ पर खड़ी हो गई. क्योंकि पुलिस पहले ही तसदीक कर चुकी थी कि 2019 में तमिलनाडु जाने के बाद धनराज कभी अपने राज्य से बाहर या मुंबई नहीं गया था.

‘‘अच्छा, तुम ये दोनों फोटो देख कर बताओ कि इन में से किसी को पहचानते हो? ये उस कार में बैठे लोगों की फोटो हैं जिस से शिवाजी का ऐक्सीडेंट हुआ था.’’

धनराज से पूछताछ के बाद निराश इंसपेक्टर लांडगे ने धनराज को सीसीटीवी से हासिल हुई दोनों संदिग्धों की फोटो दिखाईं तो धनराज बोला, ‘‘अरे सर, ये तो विशाल है. 2019 में शीतल से शादी के बाद मैं जिस सोसाइटी में रहता था, उसी सोसाइटी के चौकीदार बबनराव का बेटा है ये.’’

पूरी तरह से निराश हो चुके इंसपेक्टर लांडगे के चेहरे पर धनराज का जवाब सुनते ही अचानक चमक आ गई. अब उन्हें लगने लगा कि शिवाजी सानप हत्याकांड की गुत्थी सुलझ जाएगी.

धनराज की इस गवाही से जब डीसीपी पाटिल को अवगत कराया गया तो उन्होंने तत्काल पुलिस कमिश्नर को इस पूरे केस की जानकारी दे कर शीतल की गिरफ्तारी का आदेश हासिल कर लिया.

12 सितंबर की रात पुलिस ने ताबड़तोड छापेमारी कर पहले शीतल को हिरासत में लिया, उस के बाद उसी रात विशाल बबनराव जाधव को. उन दोनों से पूछताछ के बाद गणेश लक्ष्मण चव्हाण उर्फ मुदावथ को भी हिरासत में ले लिया.

इन लोगों के पास से पुलिस ने 3 मोबाइल फोन, एक कार और कुछ कपड़े बरामद किए. तीनों ने कड़ी पूछताछ में शिवाजी सानप की हत्या का गुनाह कुबूल कर लिया. शिवाजी माधवराव सानप की सड़क दुर्घटना में मौत का मामला पनवेल पुलिस ने भादंसं की धारा 302 व 201 में दर्ज कर लिया.

अगले दिन तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद 7 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया. इस दौरान पुलिस ने घटना की एकएक कडि़यों को जोड़ कर तीनों आरोपियों के खिलाफ कड़े सबूत एकत्र करने का काम किया.

इन से की गई पूछताछ के बाद इस अपराध की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

शीतल पंचारी महाराष्ट्र के जलगांव की रहने वाली थी. स्नातक की पढ़ाई करने के बाद उसे महाराष्ट्र पुलिस में नौकरी मिल गई. 28 साल की शीतल 4 साल नौकरी के बाद जब 2018 में नेहरू नगर थाने में तैनात हुई तो उस की दोस्ती जल्द ही अपने ही थाने में तैनात हैडकांस्टेबल शिवाजी माधवराव सानप से हो गई.

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दोनों की दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई और दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ता भी कायम हो गया. दोनों के बीच लंबे समय तक प्यार की कहानी चली.

उन दोनों के रिश्ते के बारे में अब विभाग में भी चर्चा होने लगी थी. शीतल के साथ काम करने वाले साथी पुलिसकर्मी भी अब उसे शिवाजी का माल कह कर चिढ़ाने लगे थे.

ऐसे में बदनामी बढ़ती देख एक दिन शीतल ने शिवाजी से कहा कि हम दोनों के संबंधों को ले कर अब लोग अंगुलियां उठाने लगे हैं, इसलिए हमें अब शादी कर लेनी चाहिए.

यह सुनते ही शिवाजी को झटका लगा. क्योंकि वह तो पहले से ही शादीशुदा था, उस के 2 बच्चे भी थे. लिहाजा शादी की बात सुनते ही शिवाजी ने शीतल को डपट दिया और बोला, ‘‘संबध रखने हैं तो रखो नहीं तो छोड़ दो. लेकिन मैं किसी भी हालत में शादी नहीं कर सकता. क्योंकि मैं अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता हूं.’’

शादी से इंकार की बात सुनते ही शीतल शिवाजी पर बिफर पड़ी. क्योंकि शिवाजी ने ऐसी कड़वी बात कह दी थी, जिस ने शीतल के तन, मन और आत्मा को बुरी तरह झुलसा दिया था.

शिवाजी ने तंज कसा था, ‘‘शादी से पहले जो औरत एक हैडकांस्टेबल के नीचे लेट सकती है वह अपना काम निकलवाने के लिए तो न जाने कितने बड़े अफसरों के नीचे लेटेगी. अपनी प्यार करने वाली बीवी को छोड़ कर ऐसी औरत से कौन शादी करेगा?’’

उस दिन शिवाजी और शीतल में खूब लड़ाई हुई और उसी दिन से दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं.

चूंकि शीतल के शिवाजी से संबंधों की बात पूरे थाने को और विभाग के दूसरे लोगों को भी पता थी. इसलिए खुद को पाकसाफ दिखाने के लिए शीतल ने पहले उस के खिलाफ उसी नेहरू नगर थाने में छेड़छाड़ की धारा 354 तथा उस के बाद कल्याण थाने में बलात्कार की धारा 376 में शिकायत दर्ज करवा दी थी.

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