वनराज को छोड़ अनुज कपाड़िया की स्टूडेंट बनी काव्या, देखें मजेदार Video

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa)  स्टार्स सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वे आए दिन अपनी फोटोज और वीडियो फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं. फैंस को भी  ‘अनुपमा’  स्टार्स के वीडियो का बेसब्री से इंतजार रहता है. अब काव्या यानी मदालसा शर्मा ने अनुज कपाड़िया (गौरव खन्ना) के साथ वीडियो शेयर किया है. आइए बताते हैं इस वीडियो के बारे में.

काव्या ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि अनुज, काव्या का टीचर बना है. वीडियो में अनुज काव्या से सवाल करते नजर आ रहे है और काव्या फनी अंदाज में अनुज का जवाब दे रही है. काव्या- अनुज का ये फनी वीडियो फैंस को खूब पसंद आ रहा है. बता दें कि काव्या-अनुज ने पहली बार साथ में ये रील बनाई है.

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‘अनुपमा’  सीरियल की बात करे तो शो में इन दिनो महाट्विस्ट देखने को मिल रहा है. अनुज कपाड़िया ने सबके सामने अनुपमा से अपने प्यार का इजहार कर दिया है.

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अनुपमा ये साच जानकर हैरना रह गई है. उसे लगता है कि अनुज ने उसे धोखा दिया तो वहीं  समर अनुपमा को समझाता है कि अनुज सच्चा है, उसने शिद्दत से अनुपमा से प्यार किया है. समर कहता है कि जैसे अनुपमा ने वनराज से भी इतने साल तक एकतरफा प्यार किया था उसी तरह अनुज भी अनुपमा से प्यार करता रहा.

 

शो में आप ये भी देखेंगे कि अनुपमा को अनुज की भावनाओं का एहसास होगा. तो दूसरी तरफ काव्या बा को भड़काएगी कि उन्हें अनुपमा से घर के बाद अब कारखाना भी वापस ले लेना चाहिए.

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शो से जुड़ा एक नाया प्रोमो सामने आया है. इस प्रोमो में आप देख सकते हैं कि अनुपमा अनुज से कहती हैं कि उसे इतना प्यार करने के लिए शुक्रिया. शो में अब ये देखना होगा कि क्या अनुपमा अनुज के साथ एक नए रिश्ते की शुरुआत करेगी?

इमली की जिंदगी में होगी नए शख्स की एंट्री, आएगा ये ट्विस्ट

स्टार प्लस का सीरियल इमली (Imlie) की कहानी में दिलचस्प मोड़ आ चुका है. शो में दिखाया जा रहा है कि इमली ने आदित्य और उसके परिवार को छोड़ने का मन बना लिया है. त्रिपाठी परिवार ने इमली को काफी रोकने की कोशिश की लेकिन इमली ने किसी की नहीं सुनी. शो के अपकमिंग एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि इमली की जिंदगी में नए शख्‍स की एंट्री होगी. जिससे कहानी में नया बदलाव देखने को मिलेगा. मेकर्स ने इस शो का नया प्रोमो शेयर किया है.

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प्रोमों में दिखाया जा रहा है कि इमली एक बड़े स्टार का इंटरव्यू लेती नजर आ रही है और ये स्‍टार हैं फहमान खान. इस इंटरव्‍यू के बाद फहमान और इमली करीब होंगे. शो में दोनों के बीच दिलचस्प केमिस्ट्री दिखाई जाएगी.

 

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तो दूसरी तरफ आदित्य को इस बारे में पता चलेगा तो उसके होश उड़ जाएंगे.  इमली आदित्य के नक्शेकदम पर चलेगी और बड़ा पत्रकार बनेगी.

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आपको बता दें कि इमली में तीन नए कलाकारों की एंट्री होगी. टीवी एक्‍टर फहमान खान शो में अहम किरदार निभाने वाले हैं. बताया जा रहा है कि वह इमली की जिंदगी में आदित्‍य की जगह लेने वाले हैं.

 

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शो में आपने देखा कि इमली ने आदित्‍य का घर छोड़ दिया है और उससे सारे रिश्‍ते तोड़ दिए हैं. इमली के जाने से आदित्‍य और उसका परिवार टूट चुका है.

विश्वासघात- भाग 2: आखिर क्यों वह विशाल से डरती थी?

शेफाली की आवाज ने नमिता को एक बार फिर विचारों के बवंडर से बाहर निकाला.

‘‘हां, बेटी, बस अभी आई,’’ कहते हुए पर्स में कुछ रुपए यह सोच कर रखे कि मैं बड़ी हूं, आखिर मेरे होते हुए पिक्चर के पैसे वे दें, उचित नहीं लगेगा.

जबरदस्ती पिक्चर के पैसे उन्हें पकड़ाए. पिक्चर अच्छी लग रही थी…कहानी के पात्रों में वह इतना डूब गईं कि समय का पता ही नहीं चला. इंटरवल होने पर उन की ध्यानावस्था भंग हुई. शशांक उठ कर बाहर गया तथा थोड़ी ही देर में पापकार्न तथा कोक ले कर आ गया, शेफाली और उसे पकड़ाते हुए यह कह कर चला गया कि कुछ पैसे बाकी हैं, ले कर आता हूं.

पिक्चर शुरू भी नहीं हो पाई थी कि बच्चा रोने लगा.

‘‘आंटी, मैं अभी आती हूं,’’ कह कर शेफाली भी चली गई…आधा घंटा हुआ, 1 घंटा हुआ पर दोनों में से किसी को भी न लौटते देख कर मन आशंकित होने लगा. थोड़ीथोड़ी देर बाद मुड़ कर देखतीं पर फिर यह सोच कर रह जातीं कि शायद बच्चा चुप न हो रहा हो, इसलिए वे दोनों बाहर ही होंगे.

यही सोच कर नमिता ने पिक्चर में मन लगाने का प्रयत्न किया…अनचाहे विचारों को झटक कर वह फिर पात्रों में खो गईं….अंत सुखद था पर फिर भी आंखें भर आईं….आंखें पोंछ कर इधरउधर देखने लगीं….इस समय भी शशांक और शेफाली को न पा कर वह सहम उठीं.

बहुत दिनों से नमिता अकेले घर से निकली नहीं थीं अत: और भी डर लग रहा था. समझ में नहीं आ रहा था कि वे उन्हें अकेली छोड़ कर कहां गायब हो गए, बच्चा चुप नहीं हो रहा था तो कम से कम एक को तो अब तक उस के पास आ जाना चाहिए…धीरेधीरे हाल खाली होने लगा पर उन दोनों का कोई पता नहीं था.

घबराए मन से वह अकेली ही चल पड़ीं. हाल से बाहर आ कर अपरिचित चेहरों में उन्हें ढूंढ़ने लगीं. धीरेधीरे सब जाने लगे. वह एक ओर खड़ी हो कर सोचने लगीं, अब क्या करूं, उन का इंतजार करूं या आटो कर के चली जाऊं.

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‘‘अम्मां, यहां किस का इंतजार कर रही हो?’’ उन को अकेली खड़ी देख कर वाचमैन ने उन से पूछा.

‘‘बेटा, जिन के साथ आई थी, वह नहीं मिल रहे हैं.’’

‘‘आप के बेटाबहू थे?’’

‘‘हां,’’ कुछ और कह कर वह बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहती थीं.

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‘‘आजकल सब ऐसे ही होते हैं, बूढे़ मातापिता की तो किसी को चिंता ही नहीं रहती,’’ वह बुदबुदा उठा था.

वह शर्म से पानीपानी हो रही थीं पर और कोई चारा न देख कर तथा उस की सहानुभूति पा कर हिम्मत बटोर कर बोलीं, ‘‘बेटा, एक एहसान करोगे?’’

‘‘कहिए, मांजी.’’

‘‘मुझे एक आटोरिकशा में बिठा दो.’’

उस ने नमिता का हाथ पकड़ कर सड़क पार करवाई और आटो में बिठा दिया. घर पहुंच कर आटो से उतर कर जैसे ही उन्होंने दरवाजे पर लगे ताले को खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो खुला ताला देख कर हैरानी हुई…हड़बड़ा कर अंदर घुसीं तो देखा अलमारी खुली पड़ी है तथा सारा सामान जहांतहां बिखरा पड़ा है. लाखों के गहने और कैश गायब था…मन कर रहा था कि खूब जोरजोर से रोएं पर रो कर भी क्या करतीं.

नमिता को शुरू से ही गहनों का शौक था. जब भी पैसा बचता उस से वह गहने खरीद लातीं…विशाल कभी उन के इस शौक पर हंसते तो कहतीं, ‘मैं पैसा व्यर्थ नहीं गंवा रही हूं…कुछ ठोस चीज ही खरीद रही हूं, वक्त पर काम आएगा,’ पर वक्त पर काम आने के बजाय वह तो कोई और ही ले भागा.’

किटी के मिले 20 हजार रुपए उस ने अलग से रख रखे थे. घर में कुछ काम करवाया था, कुछ होना बाकी था, उस के लिए विशाल ने 40 हजार रुपए बैंक से निकलवाए थे पर निश्चित तिथि पर लेने ठेकेदार नहीं आया सो वह पैसे भी अंदर की अलमारी में रख छोडे़ थे…सब एक झटके में चला गया.

जहां कुछ देर पहले तक वह शशांक और शेफाली को ले कर परेशान थीं वहीं अब इस नई मुसीबत के कारण समझ नहीं पा रही थीं कि क्या करें, पर फिर यह सोच कर कि शायद बच्चे के कारण शशांक और शेफाली अधूरी पिक्चर छोड़ कर घर न आ गए हों, उन्हें आवाज लगाई. कोई आवाज न पा कर  वह उस ओर गईं, वहां उन का कोई सामान न पा कर अचकचा गईं…खाली घर पड़ा था…उन का दिया पलंग, एक टेबल और 2 कुरसियां पड़ी थीं.

अब पूरी तसवीर एकदम साफ नजर आ रही थी. कितना शातिर ठग था वह…किसी को शक न हो इसलिए इतनी सफाई से पूरी योजना बनाई…उसे पिक्चर दिखाने ले जाना भी उसी योजना का हिस्सा था, उसे पता था कि विशाल घर पर नहीं हैं, इतनी गरमी में कूलर की आवाज में आसपड़ोस में किसी को कुछ सुनाई नहीं देगा और वह आराम से अपना काम कर लेंगे तथा भागने के लिए भी समय मिल जाएगा.

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पिक्चर देखने का आग्रह करना, बीच में उठ कर चले आना…सबकुछ नमिता के सामने चलचित्र की भांति घूम रहा था…कहीं कोई चूक नहीं, शर्मिंदगी या डर नहीं…आश्चर्य तो इस बात का था कि इतने दिन साथ रहने के बावजूद उसे कभी उन पर शक नहीं हुआ.

उन्होंने खुद को संयत कर विशाल को फोन किया और फोन पर बतातेबताते वह रोने लगी थीं. उन्हें रोता देख कर विशाल ने सांत्वना देते हुए पड़ोसी वर्मा के घर जा कर सहायता मांगने को कहा.

वह बदहवास सी बगल में रहने वाली राधा वर्मा के पास गईं. राधा को सारी स्थिति से अवगत कराया तो वह बोलीं, ‘‘कुछ आवाजें तो आ रही थीं पर मुझे लगा शायद आप के घर में कुछ काम हो रहा है, इसलिए ध्यान नहीं दिया.’’

‘‘अब जो हो गया सो हो गया,’’ वर्मा साहब बोले, ‘‘परेशान होने या चिंता करने से कोई फायदा नहीं है. वैसे तो चोरी गया सामान मिलता नहीं है पर कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है. चलिए, एफ.आई.आर. दर्ज करा देते हैं.’’

राजस्थान: रुदालियों की अनकही दास्तां

भारतीय समाज में पहले दूसरों की मौत पर रोने के लिए रुदालियां हुआ करती थीं, जो पैसे ले कर जमींदार या ठाकुर की मौत पर मातम मनाने के लिए बुलाई जाती थीं.

उन रुदालियों का काम होता था कि वे पूरे जोर के साथ छाती कूट कर, दहाड़ें मारमार कर ऐसा माहौल बना देती थीं कि आने वाला रोने के लिए मजबूर हो जाए.

समाज में उन्हें हमेशा ही नीची नजरों से देखा जाता था और उन के साथ कठोरता भरा बरताव किया जाता था. उन के घर भी गांव की सरहदों के बाहर बने होते थे.

साल 1993 में कल्पना लाजमी ने बंगला की महान लेखिका महाश्वेता देवी के उपन्यास ‘रुदाली’ पर एक फिल्म भी बनाई थी. इस फिल्म का लता मंगेशकर और भूपेन हजारिका की आवाज में गाया गया एक गीत ‘दिल हूमहूम करे, घबराए…’ इन रुदालियों के निजी दुख को दिखाता है.

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आज भी राजस्थान में दलित औरतों को जबरन अपने दुख में रुलाया जाता है. ऐसे हालात में कई दिनों तक तथाकथित सामंतों के घरों पर जा कर दलित औरतों को मातम मनाना पड़ता है.

राजस्थान के सिरोही जिले में दर्जनों ऐसे गांव मिले हैं, जहां दलित औरतों को ऊंची जाति के लोगों के घर जा कर किसी की मौत होने पर मातम मनाना पड़ता है.

सिरोही जिले के रेवदर इलाके में धाण, भामरा, रोहुआ, दादरला, मलावा, जोलपुर, दवली, दांतराई, रामपुरा, हाथल, उडवारिया, मारोल, पामेरा वगैरह इलाकों में रुदालियों के सैकड़ों परिवार रहते हैं.

अगर किसी तथाकथित सामंतों के यहां कोई मर जाता है, तो पूरे गांव के दलितों को सिर मुंडवाना पड़ता है. साथ ही, दलित परिवार के बच्चों से ले कर बूढ़े तक का जबरन मुंडन करवाया जाता है. अगर कोई दलित रोने न जाए या दलित सिर न मुंडाए, तो उस परिवार को सताने का दौर शुरू हो जाता है.

माना जाता है कि रुदाली की यह परंपरा राजस्थान में तकरीबन 200 साल से है. चूंकि इस बारे में कोई कानून नहीं है, इसलिए यह परंपरा अभी भी जारी है.

लोक मान्यता है कि रोने से कमजोरी होने का डर रहता है और चेहरा बदसूरत हो जाता है, इसलिए ऊंची जातियों ने अपने चेहरे की खूबसूरती बचाए रखने के लिए यह काम निचली जातियों को दे दिया गया.

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बहरहाल, यह बड़े दुख की बात है कि आजादी के 74 साल बाद भी देश के एक हिस्से में कुप्रथा के नाम पर रुदालियों को बेमन से किसी पराए के लिए आंसू बहाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. पर क्या इस तरह से दूसरों की मौत पर रोने से अपनों का अपने के प्रति शोक जाहिर हो जाता है?

एक लोकतांत्रिक देश में दलितों को संविधान से मिलने वाले हकों पर यह सीधी सी चोट ही है. आरक्षण की खिलाफत करने वाले कई लोग इस तरह की जातिवादी चोट को दरकिनार कर देते हैं, जो ठीक नहीं है.

आज जरूरत इस बात की है कि एक प्रजातांत्रिक देश में गलत रिवाजों और कुप्रथाओं से छुटकारे की दिशा में ठोस पहल हो और इस तबके को समाज की मुख्यधारा में लाने की भरसक कोशिश की जाए.

मैं घर से बाहर जाती हूं तो लोग इज्जत की नजर से नहीं देखते हैं, क्या करूं?

सवाल

मैं 23 साल की कुंआरी लड़की हूं. मेरे परिवार में दूसरों की बेवजह बुराई का मानो चलन सा बन गया है. इस से हमारे रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी सब हम से नाराज रहते हैं. वे हमारे घर आने से कतराते हैं. मैं घर से बाहर जाती हूं तो लोग इज्जत की नजर से नहीं देखते हैं. मैं बड़ी अजीब सी समस्या से जूझ रही हूं. मैं क्या करूं?

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जवाब

ऐसा अमूमन हर घर में होता है कि रिश्तेदारों और समाज वालों की बुराई करने में बड़ा मजा आता है, लेकिन आप के घर यह कुछ ज्यादा ही है, जिस से आप को कोफ्त और शर्मिंदगी महसूस होती है.

आप अपने घर वालों को समझाने की कोशिश करें कि दूसरों की बुराई से हमें कुछ हासिल नहीं होने वाला, उलटे नुकसान खुद का ही होता है. मुमकिन है कि यह बात उन की समझ में आए या न आए, तो भी आप अपना बरताव सही रखें और इस ‘निंदा पार्टी’ में शामिल ही न हों.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

तांक झांक- भाग 1: क्यों शालू को रणवीर की सूरत से नफरत होने लगी?

Writer- Neerja Srivastava

वह नई स्मार्ट सी पड़ोसिन तरुण को भा रही थी. उसे अपनी खिड़की से छिपछिप कर देखता. नई पड़ोसिन प्रिया भी फैशनेबल तरुण से प्रभावित हो रही थी. वह अपने सिंपल पति रणवीर को तरुण जैसा फैशनेबल बनाने की चाह रखने लगी थी.

शाम को जब प्रिया बनसंवर कर बालकनी में पड़े झले पर आ बैठती तो तरुण चोरीछिपे उस की हर बात नोटिस करता. कितनी सलीके से साड़ी पहने चाय की चुसकियां लेते हुए किसी किताब में गुम रहती है मैडम. क्या करे मियांजी का इंतजार जो करना है और मियांजी हैं जो जरा भी खयाल नहीं रखते इस बात का. बेचारी को खूबसूरत शाम अकेले काटनी पड़ती है. काश वह उस का पति होता तो सब काम छोड़ फटाफट चला आता.

तरुण का मन गाना गाने को मचलने लगता, ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए…’ कितने ही गाने हैं हसीन शाम के ‘ये शाम मस्तानी…’ ‘‘तरु कहां हो… समोसे ठंडे हो रहे हैं,’’ तभी उसे सपनों की दुनिया से वास्तविकता के धरातल पर पटकती उस की पत्नी शालू की आवाज सुनाई दी.

आ गई मेरी पत्नी की बेसुरी आवाज… इस के सामने तो बस एक ही गाना गा सकता हूं कि जब तक रहेगा समोसे में आलू तेरा रहूंगा ओ मेरी शालू…

‘‘बालकनी में हो तो वहीं ले आती हूं,’’ शालू कपों में चाय डालते हुए किचन से ही चीखी.

‘‘उफ… नहीं, मैं आया,’’ कह तरुण जल्दी यह सोचते हुए अंदर चल दिया, ‘कहां वह स्लिमट्रिम सी कैटरीना कैफ और कहां ये हमारी मोटी भैं…’

तरुण ने कदमों और विचारों को अचानक ब्रेक न लगाए होते तो चाय की ट्रे लाती शालू से टकरा गया होता.

तरुण रोज सुबह जौगिंग पर जाता तो प्रिया वहां दिख जाती. तरुण से रहा नहीं गया. जल्द ही उस ने अपना परिचय दे डाला, ‘‘माईसैल्फ तरुण… मैं आप के सामने वाले फ्लैट…’’

‘‘हांहां, मैं ने देखा है… मैं प्रिया और वे सामने जो पेपर पढ़ रहे हैं वे मेरे पति रणवीर हैं,’’ प्रिया उस की बात काटते हुए बोली.

‘‘कभी रणवीर को ले कर हमारे घर आएं.मैं और मेरी पत्नी शालू ही हैं… 2 साल ही हुएहैं हमारी शादी को,’’ तरुण बोला.

‘‘रियली? आप तो अभी बैचलर से ही दिखते हैं,’’ प्रिया ने तरुण के मजबूत बाजुओं पर उड़ती नजर डालते हुए कहा, ‘‘हमारी शादी को भी 2 ही साल हुए हैं.’’ अपनी तारीफ सुन कर तरुण उड़ने सा लगा.

‘‘रणवीर साहब अपना राउंड पूरा कर चुके?’’

‘‘अरे कहां… जबरदस्ती खींच कर लाती हूं इन्हें घर से… 1-2 राउंड भी बड़ी मुश्किल से पूरा करते हैं.’’

‘‘यहां पास ही जिम है. मैं यहां से सीधा वहीं जाता हूं 1 घंटे के लिए.’’

‘‘वंडरफुल… मैं भी जाती हूं उधर लेडीज विंग में…  ड्रौप कर के ये सीधे घर चले जाते हैं… सो बोरिंग… चलिए आप से मिलवाती हूं शायद आप को देख उन का भी दिल बौडीशौडी बनाने का करने लगे.’’

‘‘हांहां क्यों नहीं? मेरी पत्नी भी कुछ इसी टाइप की है… जौगिंग क्या वाक तक के लिए भी नहीं आती… आप मिलो न उस से. शायद आप को देख कर वह भी स्लिम ऐंड फिट बनना चाहे,’’ तरुण तारीफ करने का इतना अच्छा मौका नहीं खोना चाहता था.

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‘‘कल अपनी वाइफ को भी यहीं पार्क की सैर पर लाइएगा.’’ फिर कल आप के पति से वाइफ के साथ ही मिलूंगा.

‘‘ओके बाय,’’ उस ने अपने हेयरबैंड को ठीक करते हुए बड़ी अदा से थ हिलाया.

‘‘बाय,’’ कह कर तरुण ने लंबी सांस भरी.

तरुण जानबूझ कर उलटे राउंड लगाने लगा ताकि वह प्रिया को बारबार सामने से आता देख पाएगा. पर यह क्या पास आतेआते खड़ूस से पति की बगल में बैठ गई. ‘चल देखता हूं क्या गुफ्तगू, गुटरगूं हो रही है,’ सोच वह झडि़यों के पीछे हो लिया. ऐसे जैसे कुछ ढूंढ़ रहा हो… किसी को शक न हो. वह कान खड़े कर सुनने लगा…

‘‘रणवीर आप तो बिलकुल ही ढीले हो कर बैठ जाते हो. अभी 1 ही राउंड तो हुआ आप का… वह देखो सामने से आ रहा है… अरे कहां गया… कितनी फिट की हुई है उस ने बौडी… लगातार मेरे साथ 5 चक्कर तो हो ही गए उस के अभी भी… हमारे सामने वाले घर में ही तो रहता है… आप ने देखा है क्या सौलिड बौडी है उस की…’’

‘अरे, यह तो मेरे बारे में ही बात कर रही है और वह भी तारीफ… क्या बात है…. तरु तुम तो छा गए,’ बड़बड़ा कर वह सीधा हो कर पीछे हो लिया. ‘खड़ूस माना नहीं… आलसी कहीं का… बेचारी रह गई मन मार कर… चल तरु तू भी चल जिम का टाइम हो गया है’ सोच वह जौगिंग करते हुए ही जिम पहुंच गया.

प्रिया को जिम के पास उतार कर रणवीर चला गया यह कहते हुए, ‘घंटे भर बाद लेने आ जाऊंगा… यहां वक्त बरबाद नहीं कर सकता.’

‘हां मत कर खड़ूस बरबाद… तू जा घर में बैठ और मरनेकटने की खबरें पढ़.’ मन ही मन बोलते हुए तरु ने बुरा सा मुंह बनाया, ‘और अपनी शालू रानी तो घी में तर आलू के परांठे खाखा कर सुबहसुबह टीवी सीरियल से फैशन सीखने की क्लास में मस्त खुद को निखारने में जुटी होंगी.’

दूसरे दिन तरुण शालू को जबरदस्ती प्रिया जैसा ट्रैक सूट पहना कर पार्क में ले आया.1 राउंड भी शालू बड़ी मुश्किल से पूरा कर पाई. थक कर वह साइड की डस्टबिन से टकरा कर गिर गई.

‘‘कहां हो शालू? कहां गई?’’ पुकार लोगों के हंसने की आवाजें सुन तरुण पलटा. शालू की ऐसी हालत देख उस की भी हंसी छूट गई पर प्रिया को उस ओर देखता देख खिसियाई सी हंसी हंसते हुए हाथ का सहारा दे उठा दिया.

प्रिया के आगे गोल होती जा रही शालू को देख तरुण को और भी शर्मिंदगी महसूस होती. घर पर उस ने साइक्लिंग मशीन भी ला कर रख दी पर उस पर शालू 10-15 बार चलती और फिर पलंग पर फैल जाती.

‘‘बस न तरु हो गया न आज के लिए… सुबह से कुछ नहीं खाने दिया, बहुत भूख लगी है. खाने दो  पहले आलू के परांठे प्लीज.’’ खाने के नाम से उस में इतनी फुरती आ जाती कि तरुण के छिपाए परांठे फटाफट उठा लाती और फटाफट खाने लगती.

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‘‘तुम भी खा कर तो देखो मिर्च के अचार के साथ… बड़े टेस्टी लग रहे हैं… बाद में अपना घासफूस खा लेना,’’ परांठे का टुकड़ा उस की ओर बढ़ाते हुए शालू मुसकराई.

‘‘नो थैंक्स… तुम्हीं खाओ,’’ कह तरुण डाइनिंग टेबल पर रखे कौर्नफ्लैक्स दूध की ओर बढ़ गया.शालू टीवी खोल कर बैठ गई तो तरुण बाउल ले कर अपनी विंडो पर आ गया.

जानिए, सेक्सुअल एलर्जी के क्या कारण है

लेखक- डा. ऋषिकेश डी पाई

यौनजनित एलर्जी एवं रोगों का पता नहीं चल पाता, क्योंकि यह थोड़ा निजी सा मामला है. इस बारे में बात करने में लोग झिझकते हैं और अकसर चिकित्सक या परिजनों को भी नहीं बताते. जहां यौन संसर्ग से होने वाले रोग (एसटीडी) कुछ खास विषाणु एवं जीवाणु के कारण होते हैं, वहीं यौनक्रिया से होने वाली एलर्जी लेटेक्स कंडोम के कारण हो सकती है. अन्य कारण भी हो सकते हैं, परंतु लेटैक्स एक प्रमुख वजह है.

यौन संसर्ग से होने वाले रोग

एसटीडीज वे संक्रमण हैं जो किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संसर्ग करने पर फैलते हैं. ये रोग योनि अथवा अन्य प्रकार के सैक्स के जरिए फैलते हैं, जिन में मुख एवं गुदा मैथुन भी शामिल हैं. एसटीडी रोग एचआईवी वायरस, हेपेटाइटिस बी, हर्पीज कौंपलैक्स एवं ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) जैसे विषाणुओं या गोनोरिया, क्लेमिडिया एवं सिफलिस जैसे जीवाणु के कारण हो सकते हैं.

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इस तरह के रोगों का खतरा उन लोगों को अधिक रहता है जो अनेक व्यक्तियों के साथ सैक्स करते हैं, या फिर जो सैक्स के समय बचाव के साधनों का प्रयोग नहीं करते हैं.

कैंकरौयड : यह रोग त्वचा के संपर्क से होता है और अकसर पुरुषों को प्रभावित करता है. इस के होने पर लिंग एवं अन्य यौनांगों पर दाने व दर्दकारी घाव हो जाते हैं. इन्हें एंटीबायोटिक्स से ठीक किया जा सकता है और अनदेखा करने पर इन के घातक परिणाम हो सकते हैं. कंडोम का प्रयोग करने पर इस रोग के होने की आशंका बहुत कम हो जाती है.

क्लैमाइडिया : यह अकसर और तेजी से फैलने वाला संक्रमण है. यह ज्यादातर महिलाओं को होता है और इलाज न होने पर इस के दुष्परिणाम भी हो सकते हैं. इस के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, परंतु कुछ मामलों में योनि से असामान्य स्राव होने लगता है या मूत्र त्यागने में कष्ट होता है. यदि समय पर पता न चले तो यह रोग आगे चल कर गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब या पूरी प्रजनन प्रणाली को ही क्षतिग्रस्त कर सकता है, जिस से बांझपन की समस्या हो सकती है.

क्रेब्स (प्यूबिक लाइस) : प्यूबिक लाइस सूक्ष्म परजीवी होते हैं जो जननांगों के बालों और त्वचा में पाए जाते हैं. ये खुजली, जलन, हलका ज्वर पैदा कर सकते हैं और कभीकभी इन के कोई लक्षण सामने नहीं भी आते. कई बार ये जूं जैसे या इन के सफेद अंडे जैसे नजर आ जाते हैं. कंडोम का प्रयोग करने पर भी इन जुंओं को रोका नहीं जा सकता, इसलिए बेहतर यही है कि एक सुरक्षित एवं स्थायी साथी के साथ ही यौन संसर्ग किया जाए. दवाइयों से यह समस्या दूर हो जाती है.

गोनोरिया : यह एक तेजी से फैलने वाला एसटीडी रोग है और 24 वर्ष से कम आयु के युवाओं को अकसर अपनी चपेट में लेता है. पुरुषों में मूत्र त्यागते समय गोनोरिया के कारण जलन महसूस हो सकती है, लिंग से असामान्य द्रव्य का स्राव हो सकता है, या अंडकोशों में दर्द हो सकता है. जबकि महिलाओं में इस के लक्षण स्पष्ट नहीं होते. यदि इस की चिकित्सा समय से न की जाए, तो जननांगों या गले में संक्रमण हो सकता है. इस से फैलोपियन ट्यूब्स को क्षति भी पहुंच सकती है जो बांझपन का कारण बन सकती है.

हर्पीज : यह रोग यौन संसर्ग अथवा सामान्य संपर्क से भी हो सकता है. मुख हर्पीज में मुंह के अंदर या होंठों पर छाले या घाव हो सकता है. जननांगों के हेर्पेस में जलन, फुंसी हो सकती है या मूत्र त्याग के समय असुविधा हो सकती है. य-पि दवाओं से इस के लक्षण दबाए जा सकते हैं, लेकिन इस का कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं है.

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एचआईवी या एड्स : ह्यूमन इम्यूनोडैफिशिएंसी वाइरस अथवा एचआईवी सब से खतरनाक किस्म का यौनजनित रोग है. एचआईवी से पूरा तंत्रिका तंत्र ही नष्ट हो जाता है और व्यक्ति की जान भी जा सकती है. एचआईवी रक्त, योनि व गुदा के द्रव्यों, वीर्य या स्तन से निकले दूध के माध्यम से फैल सकता है. सुरक्षित एवं स्थायी साथी के साथ यौन संबंध रख कर और सुरक्षा उपायों का प्रयोग कर के एचआईवी को फैलने से रोका जा सकता है.

पैल्विक इन्फ्लेमेटरी डिसीज : पीआईडी एक गंभीर संक्रमण है और यह गोनोरिया एवं क्लेमिडिया का ठीक से इलाज न होने पर हो जाता है. यह स्त्रियों के प्रजनन अंगों को प्रभावित करता है, जैसे फैलोपियन ट्यूब. गर्भाशय या डिंबग्रंथि में प्रारंभिक अवस्था में कोई लक्षण स्पष्ट नहीं होते. परंतु इलाज न होने पर यह बांझपन या अन्य कई समस्याओं का कारण हो सकता है.

यौनजनित एलर्जी : इस तरह की एलर्जी की अकसर लोग चर्चा नहीं करते. सैक्स करते वक्त कई बार हलकीफुलकी एलर्जी का पता भी नहीं चलता. परंतु, एलर्जी से होने वाली तीव्र प्रतिक्रियाओं की अनदेखी नहीं हो सकती, जैसे अर्टिकेरिया, एंजियोडेमा, अस्थमा के लक्षण, और एनाफाइलैक्सिस. इन में से कई एलर्जिक प्रतिक्रियाएं तो लेटैक्स से बने कंडोम के कारण होती हैं. कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे कि वीर्य से एलर्जी, गस्टेटरी राइनाइटिस आदि.

लेटैक्स एलर्जी : यह एलर्जी कंडोम के संपर्क में आने से होती है और स्त्रियों व पुरुषों दोनों को ही प्रभावित कर सकती हैं. लेटैक्स एलर्जी के लक्षणों में प्रमुख हैं- जलन, रैशेस, खुजली या अर्टिकेरिया, एंजियोडेमा, अस्थमा के लक्षण और एनाफाइलैक्सिस आदि. ये लक्षण कंडोम के संपर्क में आते ही पैदा हो सकते हैं.

यह एलर्जी त्वचा परीक्षण या रक्त परीक्षण के बाद पता चल पाती है. यदि परीक्षण में एलजीई एंटीबौडी मिलते हैं तो इस की पुष्टि हो जाती है, क्योंकि वे लेटैक्स से प्रतिक्रिया करते हैं. लेटैक्स कंडोम का प्रयोग बंद करने से इस एलर्जी को रोका जा सकता है.

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वीर्य से एलर्जी : बेहद कम मामलों में ऐसा होता है, लेकिन कुछ बार वीर्य में मौजूद प्रोटीन से स्त्री में इस तरह की प्रतिक्रिया हो सकती है. कई बार भोजन या एनसैड्स व एंटीबायोटिक्स में मौजूद प्रोटीन पुरुष के वीर्य से होते हुए स्त्री में एलर्जी करने लगते हैं. इस का लक्षण है- योनि संभोग के 30 मिनट के भीतर योनि में जलन. अधिक प्रतिक्रियाओं में एरियूटिकेरिया, एंजियोडेमा, अस्थमा और एनाफाइलैक्सिस आदि शामिल हैं. प्रभावित महिला के साथी के वीर्य की जांच कर के इस एलर्र्जी की पुष्टि की जा सकती है.

दरअसल, नियमित यौन जीवन जीने वाले महिलाओं व पुरुषों को किसी विशेषज्ञ से प्राइवेट पार्ट्स की समयसमय पर जांच कराते रहना चाहिए. इस से यौनजनित विभिन्न रोगों का पता चलेगा और उन से आप कैसे बचें, इस का भी पता चल सकेगा. यदि ऐसी कोई समस्या मौजूद हुईर्, तो आप उचित इलाज करा सकते हैं. यह अच्छी बात नहीं है कि झिझक या शर्र्म के चलते ऐसी बीमारियों का इलाज रोक कर रखा जाए. यदि आप को या आप के साथी को ऐसी कोईर् बीमारी या एलर्जी हो, तो तत्काल विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए.

(लेखक ब्लूम आईवीएफ ग्रुप के मैडिकल डायरैक्टर हैं.)

Crime- बुराई: ऐसे जीजा से बचियो

दिल को दहला देने वाली यह वारदात राजस्थान के बाड़मेर जिले के गांव पोशाल नवपुरा की है. अधेड़ हो चले यहां के एक बाशिंदे पुरखाराम की बीवी, जिस का नाम पप्पू था, की मौत कोरोना से जून महीने में हो गई थी. तब से वह परेशान और चिंतित रहता था कि अब 4-4 बेटियों की परवरिश अकेले वह कैसे करेगा? उस की सब से बड़ी बेटी की उम्र 7 साल और सब से छोटी बेटी की उम्र महज डेढ़ साल है.

बिलाशक कोरोना के कहर ने दूसरे कई लोगों की तरह पुरखाराम की जिंदगी में भी तूफान मचा दिया था, लेकिन एक मिसाल इस गांव के लोगों ने कायम की थी, जिस का जिक्र कहीं नहीं हुआ था कि उन्होंने 2 लाख रुपए का चंदा कर के उसे दिए थे, जिस से वह अपनी बेटियों की परवरिश करते हुए उन्हें पढ़ा सके और इस सदमे से उबरते ही दोबारा काम पर जा सके.

बीवी की मौत के बाद बेटियों को ननिहाल जाना पड़ गया था और तब से वे वहीं रह रही थीं. वहां मौसी नेहा (बदला हुआ नाम) के साथ रहते हुए वे अपनी मां की मौत का दुख भूलने लगी थीं, जिन्हें लोगों ने इतना बताया था कि तुम्हारी मम्मी हमेशा के लिए दूर कहीं चली गई हैं, वरना तो ये नादान बच्चियां मौत का मतलब भी नहीं सम?ाती थीं. इन्हें फौरीतौर पर जिस प्यार, ममता और हमदर्दी की जरूरत थी, वह मौसी नेहा और मामा देवा राम से भी मिल रही थी.

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हैवान बना बाप

बीती 19 सितंबर को पुरखाराम अपनी ससुराल पहुंचा और ससुराल वालों से कहा कि वे नेहा की शादी उस से कर दें, जिस से उसे और बेटियों को सहारा मिल जाएगा. सौतेली मां से अच्छी तो सगी मौसी होती है.

ससुराल वालों के मना करने के बावजूद भी वह नेहा से ही शादी करने की जिद पर अड़ गया. कोई और बात होती तो शायद वे सोचते भी, लेकिन कुछ दिन पहले ही नेहा की शादी एक अच्छा घरवर देख कर तय कर दी गई थी, इसलिए उन्होंने साफ इनकार कर दिया था.

खुद नेहा की मरजी भी अपने जीजा से शादी करने की नहीं थी, इसलिए पुरखाराम की जवान और खूबसूरत साली को बेटियों की आड़ में पाने की ख्वाहिश अधूरी रह गई.

ससुराल से बैरंग लौटे हवस के मारे इस शख्स से यह इनकार बरदाश्त नहीं हुआ, क्योंकि वह उन लोगों में से था, जो साली को आधी घरवाली सम?ाते हैं और मौका मिले तो पूरी बनाने से भी नहीं चूकते. आतेआते वह लड़?ागड़ कर अपनी चारों बेटियों को भी साथ ले आया था. उस का घर जो ससुराल से चंद मिनटों की दूरी पर ही था, वहां आ कर उस ने एक वहशियाना फैसला ले लिया.

तिलमिलाए पुरखाराम ने फूल सी अपनी चारों बेटियों को दवा पिलाने के नाम पर उन्हें कीटनाशक जहर पानी में घोल कर पिला दिया और 1-1 कर के उन्हें घर में बनी पानी की टंकी में डाल दिया. कुछ ही देर में उन मासूमों ने दम तोड़ दिया.

पुरखाराम को यह लग रहा था कि अगर ये बेटियां नहीं होतीं, तो नेहा या कोई दूसरी लड़की उस से शादी करने के लिए तैयार हो जाती, क्योंकि कुछ गांव वालों के मुताबिक, उस ने 2 लाख रुपए शादी कराने वाले दलालों को दिए थे, लेकिन उस से कोई लड़की शादी करने को राजी नहीं हो रही थी और दलाल भी पैसे डकार कर छूमंतर हो गए थे.

साफ दिख रहा था कि पुरखाराम की नीयत और मंशा सिर्फ जैसे भी हो जल्द से जल्द शादी कर लेने की थी. मासूम बेटियों की तो उसे चिंता ही नहीं थी, अगर होती तो वह इतनी बेरहमी से उन की हत्या नहीं करता.

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इस वारदात को अंजाम देने के बाद पुरखाराम को लगा कि वह पकड़ा जाएगा, तो डर के मारे उस ने भी जहर पी लिया और उसी टंकी में कूद गया, लेकिन कुछ लोगों ने उसे देख लिया और बचा लिया, पर टंकी में 4 मासूमों की लाशें देख कर गांव में कोहराम मच गया.

पुलिस आई तो बच्चियों की लाशें पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दी गईं और पुरखाराम को इलाज के लिए अस्पताल में भरती करा दिया गया.

सालियां क्या करें

नेहा ने कोई गलत फैसला नहीं लिया था, यह तो उस के जीजा की करतूत से उजागर हो ही गया, जो वहशी, जिद्दी और कमजोर भी था. हर लड़की को शादी और दूसरे निजी मामलों में फैसले लेने का हक है, लेकिन कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि मन मार कर जीजा से शादी करनी पड़ती है. कुछ मामलों में यह फैसला ठीकठाक साबित होता है, तो कइयों में गलत भी निकलता है.

विदिशा की निशा (बदला हुआ नाम) की मौत एक बीमारी के चलते हुई थी, जिस का 3 साल का बेटा था. उस के क्रियाकर्म के बाद घर और समाज वालों ने फैसला लिया कि निशा की छोटी बहन आशा (बदला हुआ नाम) को जीजा से शादी कर लेनी चाहिए. इस से बच्चा सौतेली मां की परछाईं से बचा रहेगा और खर्च भी कम होगा.

घर और समाज वालों के दबाव में आ कर आशा ने हां कर दी, क्योंकि वह अपनी बहन और उस के बेटे को बहुत चाहती थी. उस के जीजाजी भी ठीकठाक आदमी थे.

लेकिन शादी के 2 साल बाद ही बात बिगड़ने लगी, क्योंकि आशा अपनी कोख से भी बच्चे को जन्म देना चाहती थी. इस पर उस के पति यानी पहले के जीजा ने साफ इनकार कर दिया कि तुम्हारा खुद का बच्चा हो जाएगा, तो तुम मेरे बच्चे पर ध्यान नहीं दोगी और उस से सौतेला बरताव करोगी.

आशा ने पति को सम?ाने की कोशिश की कि मेरा बच्चा भी तो आप का ही होगा. इस पर वह बेरुखी से बोला कि मु?ो तो बच्चे के लिए मुफ्त की आया और खुद की सैक्स संतुष्टि के लिए एक औरत चाहिए थी, इसलिए तुम से शादी करने के लिए राजी हो गया, कोई दूसरी लाता तो दिक्कत और फसाद खड़े होते.

अब आशा को अपनी हैसियत और पति की असलियत का एहसास हुआ कि उस का तो कोई वजूद ही नहीं है, उस की भावनाओं और ख्वाहिशों के कोई माने ही नहीं हैं, वह तो एक मुफ्त की नौकरानी और किराए की मां है, जिस का काम चूल्हाचौका, घर की साफसफाई और बच्चे की परवरिश करने के अलावा रात को बिस्तर में पति को खुश करना भर है.

आशा कहती है कि अब उस के नाम के मुताबिक जिंदगी में कोई आशा ही नहीं बची है, वह तो अब चलतीफिरती लाश बन कर रह गई है.

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जीजासाली का रिश्ता बड़ा अहम और हंसीमजाक का माना जाता है, लेकिन इस में एहतियात खासतौर से सालियों को रखना जरूरी है. मसलन, ज्यादा हंसीमजाक ठीक नहीं रहता. इस के अलावा जीजा की नाजायज हरकतों को हवा देना भी महंगा पड़ता है.

कई सालियां तो जीजा से प्यार कर बैठती हैं और उन्हें अपना शरीर भी सौंप देती हैं, जो अपनी ही बहन का घर उजाड़ने और उस की खुशियों पर डाका डालने जैसी बात है. इस से साली को  भी कुछ हासिल नहीं होता और कई  बार शादी हो जाने के बाद ये नाजायज ताल्लुकात खुद का भी घर उजाड़ देते हैं.

लेकिन सिचुएशन जब नेहा और आशा जैसी हो जाए तो सालियों को अपने दिमाग से सहीगलत देखते हुए जीजा से शादी करने का फैसला लेना चाहिए, क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं कि जीजा एक अच्छा पति साबित होगा ही.

सियासत: ‘लालू के लाल’ टेढ़ी चाल

पिछले तकरीबन 40 साल तक बिहार से ले कर दिल्ली तक अपनी धमक रखने वाले लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद और परिवार में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. लालू यादव के बड़े बेटे और विधायक तेजप्रताप यादव ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव और राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के खिलाफ मोरचा खोल रखा है.

इतना ही नहीं, तेजप्रताप यादव ने राजद के बराबर अपना नया संगठन भी बना लिया है, जिस का नाम छात्र जनशक्ति परिषद रखा है. इस संगठन का लोगो यानी चिह्न ‘बांसुरी’ रखा है. एक तरह से देखा जाए, तो उन्होंने राजद के चिह्न ‘लालटेन’ को भी छोड़ दिया है.

2 अक्तूबर, 2021 को अपने संगठन छात्र जनशक्ति परिषद के प्रशिक्षण शिविर में तो तेजप्रताप यादव ने अपने भाई तेजस्वी यादव और जगदानंद सिंह की धज्जियां उड़ा कर रख दीं.

तेजप्रताप ने तेजस्वी का नाम लिए बगैर कहा कि दिल्ली में उन के पिता लालू यादव को बंधक बना कर रखा गया है. उन्हें कोर्ट से जमानत मिले कई महीने गुजर गए और उन्हें पटना नहीं लाया जा रहा है. लालूजी की गैरमौजूदगी में जिस तरह से पार्टी को चलाया जा रहा है, उस से पार्टी चलने वाली नहीं है, टूट जाएगी, बिखर जाएगी.

समस्या: बिजली गुल टैंशन फुल

उन्होंने आगे कहा कि उन के पिता अपने सरकारी निवास के आउटहाउस में नियमित रूप से बैठते थे और जनता से मिलते थे. उन के घर का दरवाजा हमेशा खुला रहता था. आज यह हालत है कि मेन गेट को बंद रखा जाता है. घर से कुछ पहले ही मोटा रस्सा लगा कर लोगों के आनेजाने पर रोक लगा दी गई है. ऐसे कहीं पार्टी चलती है क्या? जब जनता ही नहीं होगी तो पार्टी किस के लिए? राजनीति किस के लिए?

तेजप्रताप यादव इतने पर ही नहीं रुके. तेजस्वी के बाद उन्होंने जगदानंद सिंह पर हमला बोल दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि कुछ लोग राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं. ऐसे लोगों का सपना वे कभी भी पूरा नहीं होने देंगे.

पार्टी और परिवार की बखिया उधेड़ने के बाद वे कहते हैं कि पिताजी की खराब सेहत को ध्यान में रख कर वे काफी दिनों तक चुप रहे, लेकिन उन की चुप्पी का लोग नाजायज फायदा उठाने लगे.

गौरतलब है कि साल 2022 में राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है. इतना तो तय है कि लालू यादव ही फिर से अध्यक्ष बनेंगे, लेकिन अगर उन की सेहत ठीक नहीं रही तो तेजस्वी यादव को यह पद देने की अटकलें चल रही हैं.

लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की चाल शुरू से ही अलग तरीके की रही है. वे राजद से हसनपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं.

16 अप्रैल, 1988 को जनमे तेजप्रताप यादव गरम मिजाज वाले हैं और अपनी बातों को बिना किसी लागलपेट के कहते हैं. वे माथे पर चंदन का टीका लगाते हैं और बांसुरी बजाते हैं.

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उन के पिता लालू प्रसाद यादव जहां ब्राह्मणवाद और पाखंड के खिलाफ राजनीति करते रहे हैं, वहीं तेजप्रताप मंदिरों में घूमते हैं और मूर्तियों के आगे माथा टेकते हैं. मथुरा, वृंदावन के चक्कर लगाते हैं. लंबे बाल, गले में रुद्राक्ष की मालाएं, ललाट पर हवनकुंड की राख, हाथ मे त्रिशूल लिए जबतब घूमते रहते हैं.

वे कभी कृष्ण का रूप बना कर बांसुरी बजाने लगते हैं, तो कभी शंकर के भेष में तांडव करने लगते हैं. कभी गेरुआ कपड़े पहन कर विधानसभा पहुंच जाते हैं. तेजप्रताप यादव ने अपना नया फेसबुक पेज बनाया है और उस का नाम रखा है ‘सैकंड लालू तेजप्रताप यादव’.

जगदानंद सिंह से वे इसलिए भी नाराज हैं कि जगदानंद सिंह ने छात्र राजद के प्रमुख आकाश कुमार को हटा कर गगन कुमार को प्रमुख बना दिया था. आकाश कुमार तेजप्रताप के करीबी हैं.

जगदानंद सिंह के इस कदम से तेजप्रताप इस कदर बौखला गए कि उन्हें ‘हिटलर’ कह दिया. तेजप्रताप ने जगदानंद से सफाई मांगी कि उन से राय लिए बगैर आकाश कुमार को क्यों हटा दिया गया? जगदानंद ने इस का जवाब देने की जरूरत नहीं समझी. इस से तेजप्रताप का पारा सातवें आसमान तक जा पहुंचा.

इस बारे में जब जगदानंद सिंह से बात की गई, तो उन्होंने साफतौर पर कहा कि वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के प्रति जवाबदेह हैं. प्रदेश छात्र राजद के अध्यक्ष का पद खाली था और भरा गया.

वहीं तेजस्वी यादव ने इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि पार्टी की बेहतरी के लिए प्रदेश अध्यक्ष को किसी भी तरह का फैसला लेने का हक है. उन के काम में किसी तरह का दखल देना ठीक नहीं है. साथ ही, तेजस्वी ने तेजप्रताप को नसीहत देने के लहजे में कहा कि बड़ों की इज्जत करना और अनुशासन में रहना बहुत ही जरूरी है.

लालू प्रसाद यादव को बंधक बनाने के तेजप्रताप के आरोप को टालते हुए तेजस्वी कहते हैं कि उन्हें कौन बंधक बना सकता है, जिस ने आडवाणी जैसे नेता को गिरफ्तार किया, देश को 2 प्रधानमंत्री दिए, 15 सालों तक बिहार पर राज किया.

हाल ही में राजद के वर्चुअल प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव के काम की खूब तारीफ की थी. उन्होंने कहा कि पिछले बिहार विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में तेजस्वी ने काफी बेहतर तरीके से सरकार के खिलाफ हल्ला बोला. इस के साथ ही जगदानंद सिंह की भी तारीफ की. तेजप्रताप का उन्होंने जिक्र तक नहीं किया.

इस से साफ है कि तेजप्रताप को बड़बोलेपन का खमियाजा भुगतना पड़ रहा है. उन्हें पार्टी में हाशिए पर धकेल दिया गया है और जाहिर है कि यह सब लालू यादव की रजामंदी से हो रहा है. इन्हीं सब बात को ले कर तेजप्रताप यादव तिलमिलाए हुए हैं.

राजद के एक बड़े नेता दबी जबान में कहते हैं कि तेजप्रताप की एक ही खासीयत है कि वे लालू यादव के बेटे हैं. वे पार्टी में हंसीठिठोली की वजह बने हुए हैं. वे पार्टी को क्या मजबूत करेंगे? वे तो विरोधियों को हल्ला करने और राजद पर निशाना साधने का मौका देते रहते हैं.

लालू यादव और राबड़ी देवी के लाड़ले तेजप्रताप यादव राजनीतिक वजहों से कम, बल्कि अपनी खुराफात से ज्यादा चर्चा में रहते हैं.

मार्च, 2019 में अपनी पार्टी से बगावत कर उन्होंने ‘लालूराबड़ी मोरचा’ नाम की एक पार्टी भी बना डाली थी. थोड़ा पीछे चलें, तो साल 2015 के विधानसभा चुनाव में जब राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन की सरकार बनी थी, तो उस समय तेजस्वी यादव को तेजप्रताप से ज्यादा तरजीह दी गई थी. तेजप्रताप को जहां स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था, वहीं तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री की कुरसी पर बिठाया गया था.

तेजप्रताप यादव की शादी भी डांवांडोल ही रही. राजद विधायक चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से उन की शादी 12 मई, 2018 को हुई थी. शादी के 2-3 महीने बाद ही दोनों के बीच अनबन हो गई. उस के बाद से तेजप्रताप का अंदाज ही बदल गया. वे नवंबर, 2018 में अपनी पत्नी से तलाक लेने की अर्जी दाखिल कर चुके हैं.

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तेजप्रताप खुलेआम कहते थे कि उन की पत्नी उन्हें और उन के परिवार को गंवार कहती है. तेजप्रताप ने यह कह कर घर में खलबली मचा दी थी कि उन की पत्नी कहती है कि उन का भाई तेजस्वी उन से जलता है. उन्होंने अपनी पत्नी पर आरोप लगाया कि वह दोनों भाइयों के बीच दरार पैदा करना चाहती है.

पिछले लोकसभा चुनाव में उन के ससुर चंद्रिका राय जब सारण लोकसभा सीट से राजद के उम्मीदवार बनाए गए, तो तेजप्रताप ने इस का विरोध जताया था. जब उन की बात नहीं सुनी गई, तो वे अपने ससुर के खिलाफ चुनाव प्रचार में कूद गए थे.

इतना ही नहीं, जब उन के खास लोगों को राजद ने टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने अपने समर्थकों को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारा और बाकायदा उन के सपोर्ट में प्रचार भी किया.

आज आलम यह है कि जिस राजद को लालू प्रसाद यादव ने तिनकातिनका जोड़ कर बड़ी ही मेहनत के बाद तैयार किया था, वह उन के जेल जाने के बाद बिखरने के कगार पर पहुंच गई है. उन की पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव उन की विरासत को संभालने में कुछ खास कामयाब होते नहीं दिख रहे हैं.

तेजस्वी यादव कुछ मजबूत जरूर हुए हैं, लेकिन भाई तेजप्रताप और बहन मीसा भारती के सियासी सपनों ने उन की आगे बढ़ने की रफ्तार पर ब्रेक लगा रखा है.

पिताजी को टैंशन नहीं देना चाहता – तेजप्रताप यादव

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की सेहत ठीक नहीं रहने की वजह से तेजस्वी यादव और राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने पार्टी की कमान संभाल रखी है. लालू यादव का बड़ा बेटा होने के बाद भी पार्टी में तेजप्रताप यादव को तरजीह नहीं दी गई है, जिस से वे खुद को अलगथलग महसूस कर रहे हैं. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :

आप क्यों नाराज हैं? किस से नाराजगी है?

मैं किसी से नाराज नहीं हूं. राजद को बिखरते देख कर गुस्सा आता है. जिस पार्टी को पिताजी ने अपने खूनपसीने से सींचा है, उस की खराब हालत को मैं चुपचाप देख नहीं सकता.

आप लालूजी को यह सब बताते क्यों नहीं हैं?

लालूजी से कुछ छिपा हुआ रह सकता है क्या. उन से तो बात होती ही रहती है. उन की सेहत ठीक नहीं चल रही है और उन्हें ज्यादा टैंशन देना ठीक नहीं है.

आप के छोटे भाई तेजस्वी पार्टी के लिए मेहनत तो कर रहे हैं. आप क्या कहते हैं?

पार्टी की जड़ें मजबूत हैं, लेकिन कुछ लोग पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं. 4-5 लोग हैं. उन के नाम हर कोई जानता है, इसलिए मैं कुछ नहीं बोलूंगा.

आप ने अपना अलग संगठन क्यों बना लिया? इस से तो राजद कमजोर होगा?

राजद को मजबूत करने के लिए ही मैं छात्रों और नौजवानों को संगठित करने का काम कर रहा हूं.

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