वेटिंग रूम- भाग 1: सिद्धार्थ और जानकी की छोटी सी मुलाकात के बाद क्या नया मोड़ आया?

Writer- जागृति भागवत 

हाथ में एक छोटा सा हैंडबैग लिए हलके पीले रंग का चूड़ीदार कुरता पहने जानकी तेज कदमों से प्रतीक्षालय की ओर बढ़ी आ रही थी. यहां आ कर देखा तो प्रतीक्षालय यात्रियों से खचाखच भरा हुआ था. बारिश की वजह से आज काफी गाडि़यां देरी से आ रही थीं. उस ने भीड़ में देखा, एक नौजवान एक कुरसी पर बैठा था तथा दूसरी पर अपना बैग रख कर उस पर टिक कर सो रहा था, पता नहीं सो रहा था या नहीं. एक बार उस ने सोचा कि उस नौजवान से कहे कि बैग को नीचे रखे ताकि एक यात्री वहां बैठ सके, परंतु कानों में लगे इयरफोंस, बिखरे बेढंगे बाल, घुटने से फटी जींस, ठोड़ी पर थोड़ी सी दाढ़ी, मानो किसी ने काले स्कैचपैन से बना दी हो, इस तरह के हुलिया वाले नौजवान से कुछ समझदारी की बात कहना उसे व्यर्थ लगा. वह चुपचाप प्रतीक्षालय के बाहर चली गई.

मनमाड़ स्टेशन के प्लेटफौर्म पर यात्रियों के लिए कुछ ढंग की व्यवस्था भी नहीं है, बाहर बड़ी मुश्किल से जानकी को बैठने के लिए एक जगह मिली. ट्रेन रात 2:30 बजे की थी और अभी शाम के 6:30 बजे थे. रोशनी मंद थी, फिर भी उस ने अपने बैग में से मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास ‘गोदान’ निकाला और पढ़ने लगी. गाडि़यां आतीजाती रहीं. प्लेटफौर्म पर कभी भीड़ बढ़ जाती तो कभी एकदम गायब हो जाती. 8 बज चुके थे, प्लेटफौर्म पर अंधेरा हो गया था. प्लेटफौर्म की मंद बत्तियों से मोमबत्ती जैसी रोशनी आ रही थी. सारे दिन की बारिश के बाद मौसम में ठंडक घुल गई थी. जानकी ने एक बार फिर प्रतीक्षालय जा कर देखा तो वहां अब काफी जगह हो गई थी.

जानकी एक अनुकूल जगह देख कर वहां बैठ गई. उस ने चारों तरफ नजर दौड़ाई तो लगभग 15-20 लोग अब भी प्रतीक्षालय में बैठे थे. वह नौजवान अब भी वहीं बैठा था. कुरसियां खाली होने का फायदा उठा कर अब वह आराम से लेट गया था. 2 लड़कियां थीं. पहनावे, बालों का ढंग और बातचीत के अंदाज से काफी आजाद खयालों वाली लग रही थीं. उन के अलावा कुछ और यात्री भी थे, जो जाने की तैयारी में लग रहे थे, शायद उन की गाड़ी के आने की घोषणा हो चुकी थी. जल्द ही उन की गाड़ी आ गई और अब प्रतीक्षालय में जानकी के अलावा सिर्फ वे 2 युवतियां और वह नौजवान था, जो अब सो कर उठ चुका था. देखने से तो वह किसी अच्छे घर का लगता था पर कुछ बिगड़ा हुआ, जैसे किसी की इकलौती संतान हो या 5-6 बेटियों के बाद पैदा हुआ बेटा हो.

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नौजवान उठ कर बाहर गया और थोड़ी देर में चाय का गिलास ले कर वापस आया. अब तक जानकी दोबारा उपन्यास पढ़ने में व्यस्त हो चुकी थी. थोड़ी देर बाद युवतियों की आवाज तेज होने से उस का ध्यान उन पर गया. वे मौडर्न लड़कियां उस नौजवान में काफी रुचि लेती दिख रही थीं. नौजवान भी बारबार उन की तरफ देख रहा था. लग रहा था जैसे इस तरह वे तीनों टाइमपास कर रहे हों. जानकी को टाइमपास का यह तरीका अजीब लग रहा था. उन तीनों की ये नौटंकी काफी देर तक चलती रही. इस बीच प्रतीक्षालय में काफी यात्री आए और चले गए. जानकी को एहसास हो रहा था कि वह नौजवान कई बार उस का ध्यान अपनी तरफ खींचने का प्रयास कर रहा था, परंतु उस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. अब तक 9:00 बज चुके थे. जानकी को अब भूख का एहसास होने लगा था. उस ने अपने साथ ब्रैड और मक्खन रखा था. आज यही उस का रात का खाना था. तभी किसी गाड़ी के आने की घोषणा हुई और वे लड़कियां सामान उठा कर चली गईं. अब 2-4 यात्रियों के अलावा प्रतीक्षालय में सिर्फ वह नौजवान और जानकी ही बचे थे. नौजवान को भी अब खाने की तलाश करनी थी. प्रतीक्षालय में जानकी ही उसे सब से पुरानी लगी, सो उस ने पास जा कर धीरे से उस से कहा, ‘‘एक्सक्यूज मी मैम, क्या मैं आप से थोड़ी सी मदद ले सकता हूं?’’

जानकी ने काफी आश्चर्य और असमंजस से नौजवान की तरफ देखा, थोड़ी घबराहट में बोली, ‘‘कहिए.’’ ‘‘मुझे खाना खाने जाना है, अगर आप की गाड़ी अभी न आ रही हो तो प्लीज मेरे सामान का ध्यान रख सकेंगी?’’ ‘‘ओके,’’ जानकी ने अतिसंक्षिप्त उत्तर दिया और नौजवान चला गया. लगभग 1 घंटे बाद वह वापस आया, जानकी को थैंक्स कहने के बहाने उस के पास आया और कहा, ‘‘यहां मनमाड़ में खाने के लिए कोई ढंग का होटल तक नहीं है.’’

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‘‘अच्छा?’’ फिर जानकी ने कम से कम शब्दों का इस्तेमाल करना उचित समझा.

‘‘आप यहां पहली बार आई हैं क्या?’’ बात को बढ़ाते हुए नौजवान ने पूछा.

‘‘जी हां.’’ जानकी ने नौजवान की ओर देखे बिना ही उत्तर दिया. अब तक शायद नौजवान की समझ में आ गया था कि जानकी को उस से बात करने में ज्यादा रुचि नहीं है.

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए ये हैं 9 खास टिप्स

लेखक- हरीश भंडारी

शरीर कई तरह की बीमारियों के जीवाणुओं का हमला झेलता रहता है और कई बार इन की चपेट में आ जाता है. इन हमलों को नाकाम तभी किया जा सकता है, जब हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो यानी इम्यून सिस्टम सौलिड होना जरूरी है. इसे मजबूत करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. तो आइए, देखते हैं कि किस तरह हम अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बना सकते हैं, कुछ खास टिप्स :

  1. चोकरयुक्त अनाजः गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का जैसे अनाज का सेवन चोकर सहित करें. इस से आप को कब्ज नहीं होगी तथा आप की रोग प्रतिरोध क्षमता चुस्तदुरुस्त रहेगी.

2. पानीः पानी भी प्राकृतिक औषधि है. प्रचुर मात्रा में शुद्ध पानी पीने से शरीर में जमा कई तरह के विषैले तत्त्व बाहर निकल जाते हैं और इस से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. पानी सामान्य या फिर थोड़ा कुनकुना हो तो ज्यादा लाभदायक रहता है. फ्रिज का ठंडा पानी पीने से बचें.

3. तुलसीः तुलसी एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी फायदेमंद है. रोजाना सुबह तुलसी के 3-4 पत्तों का सेवन करें, काफी फायदा मिलेगा.

4. योगः योग व प्राणायाम भी शरीर को स्वस्थ और रोगमुक्त रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. रोजाना घर पर इन का अभ्यास किया जा सकता है.

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5. जोर से हंसनाः जोर से हंसने से रक्त संचार सुचारु होता है व शरीर अधिक मात्रा में औक्सीजन लेता है. तनावमुक्त हो कर हंसने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने में मदद मिलती है.

6. रसदार फलः संतरा, मौसमी, कीनू आदि रसदार फलों में भरपूर मात्रा में खनिज लवण तथा विटामिन सी होता है. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में ये महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. आप चाहें तो साबुत फल खाएं और चाहें तो इन का रस निकाल कर सेवन करें ध्यान रखें रस में चीनी या नमक न मिलाएं.

7. गिरीदार फलः सर्दी के मौसम में गिरीदार फलों जैसे बादाम, काजू, अखरोट का सेवन बहुत फायदेमंद है. इन्हें रात भर भिगो कर रखने व सुबह चाय या दूध के साथ आधा घंटा पहले खाने से बहुत लाभ होता है.

8. अंकुरित अनाजः अंकुरित अनाज (जैसे मूंग, मोठ, चना आदि) तथा भीगी हुई दालों का भरपूर मात्रा में सेवन करें. अनाज को अंकुरित करने से उन में मौजूद पोषक तत्त्वों की क्षमता बढ़ जाती है. ये पचाने में आसान, पौष्टिक और स्वादिष्ठ होते हैं.

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9. सलादः  भोजन के साथ सलाद का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करें. भोजन का पाचन पूर्ण रूप से हो, इस के लिए सलाद का सेवन जरूरी होता है. ककड़ी, टमाटर, मूली, गाजर, पत्तागोभी, प्याज, चुकंदर आदि को सलाद में जरूर शामिल करें. इन में प्राकृतिक रूप से मौजूद नमक हमारे लिए पर्याप्त होता है. अलग से नमक न डालें.

आखिर किसानों से सरकार को क्यों चिढ़ है?

सुप्रीम कोर्ट ने यह तो कह दिया कि किसान सड़कों को रोक कर अपना आंदोलन नहीं कर सकते पर उन्हें यह नहीं बताया कि सारे देश में आखिर जिसे भी सरकार से नाराजगी हो वह जाए कहां? सारे देश में पुलिस और प्रशासन ने इस तरह से मैदानों, चौराहों, खाली सड़कों की नाकाबंदी कर रखी है कि कहीं भी सरकारी कुरसी की जगह धरनेप्रदर्शन की जगह बची नहीं है.

सारी दुनिया में सड़कों पर ही आंदोलन होते रहे हैं. हमेशा सत्ता का बदलाव सड़कों से हुआ है. जिन सड़कों के बारे में सत्ता के पाखंडियों का प्यार आजकल उमड़ रहा है वे ही इन पर कांवड़ यात्रा, महायात्रा, रथयात्रा, रात्रि जागरण, कथा कराते रहे हैं. सड़कों पर बने मंदिर सारे देश में आफत हैं जो हर रोज फैलते हैं, खिसकते नहीं हैं. सरकार और सुप्रीम कोर्ट को ये नहीं दिख रहे, किसान दिख रहे हैं.

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किसानों से सरकार को चिढ़ यह?है कि आज का किसान हमारे पुराणों के हिसाब से शूद्र है और वह किसी भी हक को नहीं रख सकता. उस का काम तो पैरों के पास बैठ कर सेवा करना है या उस गुरु के कहने पर अंगूठा काट देना है जिस ने शिक्षा भी नहीं दी. वह शूद्र आज पांडित्य के भरोसे बनी सरकार को आंखें दिखाए यह किसी को मंजूर नहीं. न सरकार को, न मीडिया को, न सुप्रीम कोर्ट को, क्योंकि इन सब में तो ऊंची जातियों के लोग बैठे हैं जिन की आत्मा ने पिछले जन्मों में ऋषिमुनियों की सेवा कर के आज ऊंची जातियों में जन्म लिया है.

सरकार और सुप्रीम कोर्ट तो कहती हैं कि हर जने (जिस का अर्थ हर काम करने वाले को) को काम करते रहना चाहिए, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए. अब कर्म होगा तो फल किसी के हाथ तो लगेगा. पूरी गीता छान मारो कहीं नहीं मिलेगा कि कर्म का फल जाएगा किसे और क्यों. कर्म का फल तो कर्म करने वाले को मिलना चाहिए. अनाज का दाम किसान को मिलना चाहिए, साहूकार को नहीं. गीता के पाठ को नए कृषि कानूनों में पिरोने की चाल को समझ कर किसान अगर आंदोलन कर रहे हैं तो गलत नहीं है.

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प्रोटैस्ट का हक ही लोकतंत्र की जान है पर प्रोटैस्ट की सोचने वालों को गिरफ्तार कर लेना, प्लानिंग करने वाले पर मुकदमा चला देना, उसे मैदान, सड़क न देना आज सरकार का हथियार बन गया है जिसे किसान तोड़ने में लगे हैं. सुप्रीम कोर्ट बिलकुल सही है जब कहती है कि प्रोटैस्ट का हक है पर बिलकुल गलत है जब कहती है कि सड़कों पर प्रोटैस्ट नहीं हो सकता. प्रोटैस्ट तो वहीं होगा जहां से सरकार को दिखे, जहां सरकार की कुरसी हो. किसान वीरान रण के कच्छ में जा कर तो अपना धरनाप्रदर्शन नहीं कर सकते जहां मीलों तक न पेड़ हैं, न मकान, न सरकारी नेता, न सरकार की कुरसी.

GHKKPM: सई देगी विराट को तलाक? पाखी करेगी ये काम!

नील भट्ट (Neil Bhatt),  ऐश्वर्या शर्मा (Aishwarya Sharma) और आयशा शर्मा (Ayesha Singh) स्टारर सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) में  लगातार नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि भवानी ने फिर से पहले की तरह अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. भवानी का ये रूप देखकर चौहान परिवार हैरान हो गया है.

दरअसल शो में आपने देखा कि पाखी ने सई के खिलाफ भवानी के मन में जहर भर दिया है. तो दूसरी तरफ सम्राट पाखी को खूब-खरी खोटी सुनाता है.

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भवानी सई की जिंदगी में एक नई मुसीबत लेकर आएगी. शो में आप देखेंगे कि निनाद अश्विनी और सई को बाजार जाने के लिए कहेगा, लेकिन भवानी सई को जाने से रोक देगी.

 

भवानी कहेगी कि सई को एक बहू की तरह उसकी हर एक बात माननी पड़ेगी. भवानी की इन बातों को सुनकर विराट और सई शॉक्ड हो जाएंगे. भवानी ऐलान करेगी कि सई और विराट को एक कमरे में साथ रहना होगा.

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तो दूसरी तरफ सई भवानी की बात मानने से इंकार करना चाहेगी. सई कहेगी कि वह विराट के साथ एक कमरे में नहीं रहना चाहती है. अब शो में ये देखना होगा कि क्या सई विराट को तलाक देगी?

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बा के गुस्से से टूट गया शाह परिवार, अनुपमा देगी बापू जी को सहारा

स्टार प्लस (Star Plus) का सीरियल अनुपमा (Anupama) में अब तक आपने देखा कि बा ने बापू जी को खूब खरी-खोटी सुनाया है. जिससे बापूजी को गहरा सदमा लगा है और वह पूरी तरह टूट गए हैं. तो वहीं अनुपमा बापू जी की सहारा बनी है. शो के अपकमिंग एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि बा सबके सामने मामाजी पर भी हाथ उठा देगी और कहेगी कि घर में अब केवल उसी की चलेगी. बा अनुपमा से कहेगी कि डांस अकादमी उसकी जमीन में बनी है. इसके बाद वह तोड़-फोड़ करने लगेगी.

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इतवी ही नहीं बा गु्स्से में कहेगी कि आज के बाद वो घर में उसके और वनराज के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे. बा कहेगी आज से घर में सिर्फ मेरा राज होगा और बापूजी सिर्फ हां में हां मिलाएंगे.

 

तो दूसरी तरफ अनुपमा भी चुप नहीं रहेगी और बा को धमकी देगी कि अनुपमा बापूजी को अपने घर लेकर जाएगी. शो में ये भी दिखाया जाएगा कि बा की खरी खोटी सुनने के बाद बापूजी को गहरा सदमा लगेगा.

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वह शाह हाउस जाने से मना कर देंगे. बापूजी कहेंगे कि वह भीख मांग लेंगे लेकिन घर वापस लौटकर नहीं जाएंगे. बापूजी खूब फूटफूट कर रोएंगे. अनुपमा मनाने की कोशिश करेगी लेकिन  वह रोना नहीं छोड़ेंगे.

 

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तो दूसरी तरफ बा का भाई भी उन्हें छोड़कर चला जाएगा. तो वहीं काव्या बा से कहेगी कि उन्हें वनराज के आने से पहले सब ठीक करना होगा.

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Satyakatha: पत्नी की बेवफाई- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

Writer- मुकेश तिवारी

रामऔतार ने उस का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया. बगैर विरोध किए मालती उस की ओर खिसक आई.

दूसरे हाथ से उस ने पास जल रही लालटेन की लौ धीमी कर दी. अगले पल मालती का सिर रामऔतार की गोद में था और रामऔतार के हाथ उस के नाजुक शरीर पर रेंगने लगे थे. जल्द ही दोनों बेकाबू हो गए. वासना की आग में जल उठे.

कुछ समय में वे एकदूसरे की कामाग्नि शांत कर निढाल हो चुके थे. मालती को होश तब आया जब फेरन ने उसे लात मारी. हड़बड़ा कर उठी. कपड़े समेटने लगी. कुछ कपड़ों पर रामऔतार बेसुध लेटा हुआ था, ब्लाउज और ब्रा उस ने खींच कर निकाला.

फेरन यह सब देख कर गुस्से में तमतमा रहा था, उस के उठते ही फेरन ने पत्नी मालती के बाल पकड़ लिए. गुस्से में बदजात, बेहया, बदलचन बोलता हुआ भद्दीभद्दी गालियां देने लगा.

आधी रात का समय था. फेरन को गुस्से में देख कर रामऔतार मामला समझ गया. कुछ कहेसुने बगैर वह चुपके से निकल गया. उस के जाते ही फेरन ने लातघूंसों से मालती की जम कर पिटाई कर दी. उसे तब तक पीटता रहा जब तक वह थक नहीं गया.

अगले दिन सुबह मालती चुपचाप आंगन में पड़ी रात की गंदगी को साफ करने लगी. थोड़ी देर में रामऔतार भी आ गया. वह आते ही चुपचाप दातून करते फेरन के पैरों पर गिर पड़ा.

फेरन ने उसे झटक दिया. गुस्से में बोला, ‘‘तूने मेरी पीठ में खंजर घोंपा. बहुत बुरा किया. अब देखना मैं तुम्हारे साथ क्या करता हूं.’’

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रामऔतार ने मालती की ओर देखा. इस से पहले कि वह कुछ बोलता, मालती ने उसे चुप रहने और चले जाने का इशारा किया. थोड़ी देर में फेरन बिना कुछ खाएपिए घर से निकल पड़ा.

भारत की आजादी के जश्न का दिन था. कोरोना काल की वजह से भितरवार थाने में सादगी के साथ 15 अगस्त 2020 का झंडा फहराने का कार्यक्रम संपन्न हो चुका था. दोपहर का समय था. थानाप्रभारी पंकज त्यागी रोजाना की तरह ड्यूटी पर मौजूद थे. मालती बदहवास घबराई हुई थाने आई. आते ही वह फफकफफक कर रोने लगी.

पूछने पर उस ने बताया कि पिछले 9 दिन से उस के पति का कुछ पता नहीं चल पा रहा है, वह 6 अगस्त से ही लापता है. उस की कई जगहों पर  तलाश की जा चुकी है, लेकिन कोई पता नहीं चल पा रहा है. उस ने बताया कि वह 6 अगस्त को काम पर निकले थे. उस के बाद वह घर नहीं लौटे.

उन के पास पुराना मोबाइल फोन था, लेकिन वह बंद आ रहा है. हो सकता है खराब हो गया हो. इसी के साथ मालती किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए थाने में रोने लगी.

थाना प्रभारी ने उसे ढांढस बंधाते हुए जल्द ही पता लगाने का आश्वासन दिया. उन्होंने उस के लापता होने की सूचना दर्ज कर ली. इसी के साथ उसे भी कहा कि पति के बारे में जो भी बात मालूम हो, वह थाने में तुरंत बताए.

उस के बाद हर दूसरे दिन मालती थाने आती और अपने पति के बारे में पूछती थी.

एक दिन थाने में मालती पति को ले कर जोरजोर से हायहाय कर रोने लगी. देर तक थाने में हंगामा होता रहा. महिला पुलिसकर्मी ने उसे चुप कराया, खाना खिलाया.

थानाप्रभारी ने उसे बताया कि उन्होंने उस के पति की तलाश के लिए कई लोगों से पूछताछ की है. काम देने वाले ठेकेदार से भी फेरन के बारे में पूछा गया है, उस के एक खास दोस्त रामऔतार से पूछताछ बाकी थी.

पुलिस ने तय कर लिया था कि कोई संदिग्ध सुराग हाथ लगते ही रामऔतार को भी थाने बुला कर उस से पूछताछ की जाएगी. इस काम के लिए थानाप्रभारी ने कई भरोसेमंद मुखबिर भी लगा दिए.

कई महीने बीतने पर भी फेरन का कुछ पता नहीं चला. धीरेधीरे उस की गुमशुदगी की फाइल पर धूल जम गई. उस के ऊपर कई दूसरी फाइलें रख दी गईं. किंतु मालती चुप नहीं बैठी.

उस ने 14 सितंबर, 2020 को पुलिस पर पति को नहीं ढूंढने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगा दी. इस पर कोर्ट ने ग्वालियर एसपी अमित सांघी को जांच के आदेश दिए.

सांघी ने फेरन की गुमशुदगी के मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी (देहात) जयराज कुबेर के नेतृत्व में टीम गठित कर दी. इस के अलावा उन्होंने भितरवार एसडीओपी अभिनव बारंगे को भी इस केस को खोलने में लगा दिया.

यह मामला पुलिस के लिए किसी अबूझ पहेली से कम नहीं था, क्योंकि पिछली तफ्तीश में पुलिस के हाथ कोई ऐसा तथ्य नहीं लग पाया था, जिस से पुलिस को कोई मदद मिल सके.

एसडीओपी  बारंगे ने इस सनसनीखेज मामले की 7 जुलाई, 2021 को नए सिरे से बारीकी से अध्ययन करते हुए जांच शुरू की. जांच की शुरुआत उस के अजीज दोस्त रामऔतार से हुई.

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थानाप्रभारी पंकज त्यागी को अपने साथ ले कर फेरन के गांव मोहनगढ़ गए. वहीं उस से फेरन के बारे में हर छोटीछोटी बातें पूछी गईं. उस से मिली कई जानकारियां काफी चौंकाने वाली थीं. उसी सिलसिले में मालूम हुआ कि फेरन की पत्नी मालती का चालचलन ठीक नहीं है.

फेरन के लापता होने वाले दिन से ही वह रामऔतार के घर पर रह रही है. जबकि इस बात का मालती ने पुलिस से जरा भी जिक्र तक नहीं किया था. यहां तक कि उस ने फेरन और रामऔतार के जिगरी दोस्त होने की बात तक नहीं बताई थी.

पुलिस के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. पंकज त्यागी ने 26 जुलाई, 2021 को रामऔतार को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. उस ने न तो फेरन के बारे में कोई खास नई जानकरी दी और न ही मालती से संबंध के बारे में कुछ बताया. उस ने अपने दोस्त के लापता होने पर काफी दुख भी जताया.

मालती भी रामऔतार के फेरन का परम मित्र होने का वास्ता देती रही. दोनों की बातों पर भरोसा कर एसडीओपी ने उस दिन उन्हें छोड़ दिया, लेकिन टीआई भितरवार को दोनों पर चौकस नजर रखने को कहा.

दूसरे दिन एसडीओपी ने बिना वक्त गंवाए दूसरे राउंड की पूछताछ के लिए मालती और रामऔतार को फिर से बुलवा लिया. उन्होंने पूछताछ के लिए सब से पहले मालती को अपने कक्ष में बुलाया. उस से फेरन और रामऔतार के बारे में कई कोणों से पूछताछ की.

हर सवाल का जवाब उस ने अपने सुहाग का हवाला दे कर कसम के साथ दिया.

बातोंबातों में उस ने बोल दिया कि मैं अपने सुहाग को क्यों मिटाऊंगी? यही बात पुलिस के गले नहीं उतरी कि आखिर मालती के दिमाग में अपने सुहाग को मिटाने की बात क्यों आई? कहीं उस ने सच में ऐसा तो नहीं किया है? जरूर कुछ तो बात है, जो वह छिपा रही है.

अगले भाग में पढ़ें- तीर निशाने पर लगता देख एसडीओपी  ने बिना विलंब किए तपाक से कहा कि…

प्रेम गली अति सांकरी: भाग 1

Writer- जसविंदर शर्मा 

एक सौतन के साथ अपने पति को शेयर करने में कितनी हिम्मत चाहिए, यह मैं अब जान पाई हूं. बचपन से ही मैं ने मां को तिलतिल मरते देखा है, पापा से हर दिन लड़ते देखा है और अपने हक के लिए दिनरात कुढ़ते देखा है. जब एक म्यान में दो तलवारें ठूंस दी जाएंगी तो वे एकदूसरे को काटेंगी ही. उसी तरह एक पत्नी के होते हुए दूसरी पत्नी लाई जाएगी तो उन के दिलों में हड़कंप मचना स्वाभाविक है.

पापा को सच में मां से प्यार या सहानुभूति होती तो वे मां की सौतन को घर लाने के बारे में सोचते ही न. जब सबकुछ बरसों तक अनैतिक चलता रहा, फिर माफी मांगने से मेरी मां भला उन्हें कैसे माफ करती. प्रेम में क्षमा न तो दी जा सकती है और न ही मांगने से मिलती है. प्रेम या तो होता है या नहीं होता. कभी खुशी कभी गम वाली बीच की स्थिति में हजारों लोग जीते हैं, उन में प्रेम नहीं बल्कि सैक्स एकदूसरे का काम चलाता है. सैक्स को प्रेम मान लेना शादी की असफलता की बहुत भारी भूल है.

औरतें स्वभाव से भावुक होती हैं. हरेक बात अपने आसपास के लोगों से शेयर कर लेती हैं. हम लोग अभी बच्चे ही थे कि मां और पापा में किसी तीसरी औरत को ले कर ठन गई थी. मां ने उसे कभी नाम से नहीं पुकारा. मां हमेशा उसे ‘वह’ कहती थीं. उसे हमेशा नफरत और हिकारत की नजरों से देखतीं. ‘वह’ पापा के औफिस में काम करती थी. पापा औफिस में सीनियर औफिसर थे. हर तरफ उन का दबदबा था.

जब मैं 7 साल की थी तब पापा मुझे कभीकभार अपने साथ औफिस ले जाते थे. पापा मुझे अपने औफिस की अन्य महिला सहयोगियों से मिलवाते. वे मेरा खूब स्वागत करतीं. मुझ से प्यारभरी बातें करतीं.

‘वह’ उन सब में सब से अलग थी. मुझे उस के पास छोड़ कर पापा बहुत खुश होते. वह मुझे देखते ही खिल जाती थी. ‘वह’ मुझे गोद में उठा लेती. मेरा मुंह बारबार चूमती और मुझे चौकलेट ले कर देती या कैंटीन से कोल्ड डिं्रक मंगवाती. पूरे दफ्तर में मुझे ‘वह’ सब से ज्यादा प्यारी लगती थी.

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एक दिन मैं उस की गोद में बैठी थी. ‘वह’ पापा के कैबिन में कुरसी पर बैठी थी. पापा भी पास ही खड़े थे. उस ने मुझ से पूछा, ‘क्या तुम भी मेरे साथ रहना पसंद करोगी, अगर तुम्हारे पापा मेरे साथ मेरे घर में रहने लगें तो?’ बहुत ही बेढंगा प्रस्ताव था उस का. मैं चक्कर में पड़ गई, हां कहूं या ना. मैं सकपका गई और घबरा कर उस की गोदी से नीचे उतर गई थी.

मां अकसर मेरी बड़ी बहन से ‘उस के’ बारे में बातें करती थीं. मैं तब समझती थी कि मां उस से जलती हैं. ‘वह’ सुंदर थी, उस के पास कीमती गहने थे, वह आकर्षक थी और हमेशा नए फैशन के कपड़े पहनती थी. मैं सोचती थी कि ‘वह’ मुझ से खास स्नेह रखती थी, इसलिए मां को चिंता थी कि कहीं ‘वह’ मुझे उस से छीन न ले.

असली बात मुझे तब पता चली जब मैं थोड़ी बड़ी हुई. मां और पापा के झगड़े भयानक तेवर लेने लगे थे. उन के बहस के केंद्र में हमेशा ‘वह’ होती. मां पापा को कोसतीं, गुस्से में कहतीं कि उन के दफ्तर की स्त्रियों से संबंध हैं. कई दिनों तक मां और पापा रूठे रहते जिस का असर हम दोनों बहनों पर पड़ता.

पापा की उस प्रेमिका ने हमारे घर में तूफान ला दिया था. हर वक्त घर में कोहराम मचा रहता था. पापा हमेशा कसमें खाते कि उन का ‘उस से’ कोई संबंध नहीं है. मां इधरउधर दफ्तर के लोगों से पूछताछ करतीं. वे लोग उन्हें सच क्यों बताने लगे.

कुछ दिन पापा मां के प्रति वफादार रहते मगर उस के बाद उन का असली रंग सामने आ जाता. मां जासूसी करतीं. वे पापा को पकड़ ही लेतीं. कभी पापा ‘उस के’ साथ कैफे में मिल जाते तो कभी किसी सिनेमाहाल के बाहर.

मामला घूमनेफिरने या फिल्म देखने तक ही सीमित नहीं रहा. पापा उस के साथ शुरूशुरू में रातभर कहीं रहने लगे तो मां ने आसमान सिर पर उठा लिया. घर में खाना न बनता. मां चीखतींचिल्लातीं, घर की कई चीजें तोड़ देतीं. हम बच्चों को बेवजह पीटने लगतीं.

पापा सिर झुकाए सब कुछ सहते, चुपचाप सिगरेट फूंकते रहते. बहुत देर तक टैनिस की बौल की तरह इधर से उधर टप्पे खाखा कर मां गला फाड़फाड़ कर अंत में थक जातीं मगर पापा को कोई फर्क न पड़ता.

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अगले कुछ दिनों में मां को कीमती उपहार दे कर, आगे से सुधरने का वचन दे कर पापा मां को मना लेते. कुछ दिन मां खुश रहतीं मगर फिर कोई न कोई बात मां के कानों में पड़ ही जाती. फिर वही सबकुछ दोहराया जाता. मां की गालियां सुन कर भी पापा ने अपनी मिस्ट्रैस को छोड़ा नहीं.

उस दिन तो ‘उस ने’ बड़ी हिम्मत दिखाई. ‘वह’ एक दिन हमारे घर के दरवाजे पर आ खड़ी हुई. मैं ने दरवाजे के बाहर उसे अपनी तरफ मुसकराते देखा. घर में एक मैं ही थी जिस के मन में ‘उस के’ प्रति कोई प्रतिकार या नफरत की भावना नहीं थी.

उस के पेट के निचले हिस्से में आए उभार को देख कर मैं खुश हो उठी. मुझे मालूम था कि बच्चे मां के पेट में ही पलते व बढ़ते हैं. मां ने कुछ सप्ताह पहले ही मेरे छोटे भाई को जन्म दिया था.

मैं आश्वस्त थी कि पापा की मित्र भी जल्दी ही एक प्यारे से बच्चे को जन्म देगी. अब तक मैं ‘उसे’ पापा के औफिस की परिचित व मित्र मानती थी, जैसे हम बच्चों के स्कूल में लड़केलड़कियां मित्र होते हैं. यह तो काफी दिनों बाद मुझे बताया गया कि ‘उसे’ पापा ने ही गर्भवती बनाया था और एक विवाहित आदमी के लिए ऐसा काम अनैतिक व घृणित था. उस के बाद मैं ने ‘उसे’ नफरत की निगाहों से देखना शुरू कर दिया था.

उस दिन ‘वह’ पक्के इरादे के साथ हमारे घर आई थी. वह दरवाजे पर आश्वस्त हो कर खड़ी थी. उस ने मुझ से पापा के बारे में पूछा. उस के कसे हुए चुस्त कपड़े देख कर मैं उस की तरफ आकर्षित हुई. मैं हैरान थी कि ‘वह’ हमारे घर के अंदर क्यों नहीं आ रही थी.

ट्वैंटी-20 वर्ल्ड कप: बतौर टीम फुस्स रहा भारत

दुबई के दुबई इंटरनैशनल क्रिकेट स्टेडियम में हुए इस मैच को खेलने की चाहत 12 टीमों की थी, जिस में भारत, पाकिस्तान, इंगलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी दिग्गज टीमें तो शामिल थीं ही, साथ ही नामीबिया, स्काटलैंड जैसी नौसिखिया टीमें भी अपना हाथ आजमा रही थीं.

कई देशों ने अपनी ताकत के मुताबिक खेल दिखाया, पर जिस तरह के खेल की उम्मीद भारत से की जा रही थी, उस में वह पूरी तरह नाकाम रहा. दरअसल, यह वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले यह मान लिया गया था कि फाइनल मुकाबला खेलने वाली एक टीम तो भारत ही होगी, लड़ाई तो दूसरी टीम के फाइनल में उतरने के लिए हो रही थी.

इस की वजह यह थी कि भारत जिस ग्रुप में था, उस में न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के अलावा बाकी 3 टीमें अफगानिस्तान, नामीबिया और स्काटलैंड शामिल थीं. मतलब भारत अगर पाकिस्तान और न्यूजीलैंड में से किसी एक को हरा देता, तो बाकी कच्ची टीमों से आसानी से जीत कर सैमीफाइनल मुकाबले में अपनी जगह बना लेता.

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पर सोचना जितना आसान काम है, उसे पूरा करना उतना ही मुश्किल होता है, वह भी ट्वेंटी-20 मुकाबलों में, जहां कोई एक खिलाड़ी ही पूरे मैच का रुख बदल सकता है. यही भारत के साथ हुआ. भारत का पहला मुकाबला ही पाकिस्तान के साथ था और कागजों पर कमजोर इस टीम को शिकस्त देना भारत के लिए बड़ा ही आसान काम लग रहा था, पर हुआ ठीक इस का उलटा.

भारत ने शर्मनाक तरीके से 10 विकेट से यह मैच गंवा दिया. जले पर नमक अगले ही मैच में न्यूजीलैंड ने छिड़क दिया. पहले 2 मैच हार कर भारत को होश आया, पर तब तक चिड़िया खेत चुग चुकी थी.

आईपीएल मैचों में करोड़ों रुपए में बिकने वाले हमारे खिलाड़ी बाद के 3 मैच जीत तो गए, पर सैमीफाइनल में जाने से चूक गए. इस जगहंसाई में घरेलू दर्शकों ने भी खिलाड़ियों को नहीं बक्शा. किसी ने रोहित शर्मा पर निशाना साधा तो कोई विराट कोहली के पीछे पड़ गया.

हार्दिक पांड्या ने तो बिलकुल निराश किया. आईपीएल मैचों में छक्केचौके जड़ने वाले हार्दिक पांड्या ने खराब फिटनैस के बावजूद टीम में जगह बनाई, पर वे कोई कारनामा नहीं कर पाए. विराट कोहली पर ढंग की टीम न चुनने और अपनी चलाने का भी इलजाम लगा.

अब चूंकि वर्ल्ड कप खत्म हो चुका है और क्रिकेट की दुनिया को आस्ट्रेलिया के रूप में नया विश्व विजेता मिल चुका है, पर भारत की हार के दूसरे उन पहलुओं पर भी हमें गौर करना होगा, जो उन्हें टीम गेम जैसे खेलों में ज्यादा कामयाब नहीं होने देते हैं.

क्रिकेट ही क्यों, अगर हम फुटबाल, हाकी जैसे ज्यादा खिलाड़ियों वाले खेलों पर गौर करें तो वहां भी वर्ल्ड लैवल पर कभी बहुत ज्यादा कामयाब नहीं हो पाते हैं. 11 खिलाड़ियों वाले खेलों को तो छोड़िए 2 खिलाड़ियों वाले खेलों जैसे बैडमिंटन, टेबल टैनिस, लौन टैनिस वगैरह में भी हम खिलाड़ियों के अहम और कोच के साथ उन के बरताव के चलते बहुत ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं.

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नतीजतन, बैडमिंटन में सायना नेहवाल और पीवी सिंधू की जोड़ी टूट जाती है और उन के रिश्तों में खटास आ जाती है. लिएंडर पेस और महेश भूपति कभी एकसाथ लौन टैनिस नहीं खेलने का ऐलान कर देते हैं.

चूंकि क्रिकेट में हमारे देश के लोग ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं, तो वहां की बातें ज्यादा होती हैं. इस वर्ल्ड कप से पहले ही विराट कोहली ने ट्वैंटी-20 टीम का भविष्य में कप्तान न बनने का ऐलान कर दिया था और रवि शास्त्री का भी बतौर हैड कोच यह आखिरी टूर्नामैंट था, पर जिस तरह का खेल खिलाड़ियों ने दिखाया, उस से यही लगा कि टीम में कुछ भी ठीक नहीं है.

वैसे भी देखा जाए तो टीमवर्क वाले खेलों में टीम के चुनाव का मुद्दा बड़ा खास होता है. भारत जैसे देश में हर राज्य, जाति और तबके के खिलाड़ी को टीम में रखे जाने का दबाव होता है और अलग माहौल व रहनसहन वाले खिलाड़ी आपस में जल्दी से घुलमिल नहीं पाते हैं.

वैब सीरीज ‘इनसाइड ऐज’ में जातिवाद का दंश किस तरह नए खिलाड़ी को तोड़ देता है, बड़ी बारीकी से दिखाया गया था. फिल्म ‘चक दे इंडिया’ में भी झारखंड की खिलाड़ियों को जंगली होने तमगा दिया जाता है और अमीर खिलाड़ी किस तरह गरीब होनहार खिलाड़ी का भविष्य खराब कर सकते हैं या ऐसी चाहत रखते हैं, यह भी दिखाने की कोशिश की गई थी.

अब रहीसही कसर क्रिकेट खिलाड़ियों को मिलने वाले इश्तिहारों ने पूरी कर दी है. वे पैसा बनाने की हवस में जुआ खेलने को बढ़ावा देने वाले इश्तिहारों में भी दिखाई देने लगे हैं कि मोबाइल फोन में फलां एप डालो, अपनी टीम बनाओ और पैसा कमाओ, जबकि ऐसे खेलों की लत लगने से नौजवान पीढ़ी अपने मांबाप की पसीने की गाढ़ी कमाई को भी गंवाने में परहेज नहीं करते है. ये गेमिंग एप बहुत ही खतरनाक चलन है जो कई बार बड़े अपराध की शक्ल भी ले लेता है.

राजस्थान के चुरू में जुलाई, 2021 में पुलिस ने औनलाइन जुआ खिलाने वाले गिरोह को पकड़ा था. पुलिस ने इस मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया था.

पुलिस के बयान के मुताबिक, ये लोग एप के जरीए अलगअलग औनलाइन खेले जाने वाले खेलों में समूह बना कर उस में शामिल होते हैं, बाहर के एक खिलाड़ी को शामिल कर उस से रुपए लगवाते हैं और फिर उसे हरवा कर अलगअलग पेमेंट गेटवे के जरीए रकम हासिल कर लेते हैं.

हालांकि क्रिकेट खेल से जुड़े एप खुद को जुआ खेलाने वाला नहीं बताते हैं, पर उन का मकसद पैसा कमाना ही होता है और खेलने वाला अपना पैसा कहां से ला रहा है, इस से उन्हें कोई सरोकार नहीं होता है.

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ऐसे इश्तिहारों के अलावा भी क्रिकेट खिलाड़ी दूसरे तमाम इश्तिहारों से पैसा बटोर रहे हैं. अब वे देश के लिए कम, बल्कि पैसे के लिए खेलते ज्यादा नजर आते हैं. उन्हें आईपीएल खेलने से कोई थकावट नहीं होती है, पर वर्ल्ड कप में हारने पर उन्हें ऐसी तमाम कमियां गिनाने का मौका मिल जाता है कि उन शैड्यूल इतना टाइट होता है, लिहाजा उन्हें थोड़ा आराम मिलना चाहिए.

लेकिन जब खिलाड़ियों को आराम दिया जाता है तब वे इश्तिहारों के जरीए पैसा बनाने में मशगूल हो जाते हैं. यही वजह है कि साल 2018 में ही विराट कोहली ने उन विचारों को खारिज कर दिया था कि इश्तिहारों पर ज्यादा समय बिताना एक क्रिकेटर के लिए ध्यान भंग करने वाला हो सकता है.

क्रिकेट के चहेतों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि कौन सा खिलाड़ी कैसे देखते ही देखते करोड़ों रुपयों में खेलने लगता है, पर उन्हें इस बात पर कोफ्त जरूर होती है कि जो खिलाड़ी आईपीएल में चौकेछक्कों की झड़ी लगा देते हैं या अपनी गेंदबाजी से सामने वाले को धूल चटा देते हैं, वे आपस में एक टीम के तौर पर क्यों बेहतरीन खेल नहीं दिखा पाते हैं?

हमें तो आस्ट्रेलिया के दिग्गज खिलाड़ी डेविड वार्नर से सीख लेनी चाहिए, जिन्हें खराब खेल के चलते बीच आईपीएल में ही हैदराबाद की प्लेइंग 11 टीम से बाहर कर दिया गया था, पर हालिया वर्ल्ड कप में उन्होंने अपने कातिलाना खेल से टूर्नामैंट ही कब्जा लिया.

फाइनल मुकाबले में अपनी टीम को जीत के मुहाने तक ले जाने वाले डेविड वार्नर ने ताबड़तोड़ पारी खेलते हुए 38 गेंदों में 53 रन बनाए थे. उन्हें अपने बेहतरीन प्रदर्शन के लिए टी20 वर्ल्ड कप का ‘प्लेयर औफ द टूर्नामैंट’ भी बनाया गया था.

डेविड वार्नर ने इस ट्वैंटी-20 वर्ल्ड कप में कुल 289 रन बनाए थे. उन्हीं के कभी न हार मानने के जज्बे ने आस्ट्रेलिया टीम का मनोबल इतना ज्यादा बढ़ाया कि पहले सैमीफाइनल में और बाद में फाइनल मुकाबले में टीम ने पाकिस्तान और न्यूजीलैंड को करारी शिकस्त दी.

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