सूना आसमान- भाग 3: अमिता ने क्यों कुंआरी रहने का फैसला लिया

‘प्यार के परिणाम के बारे में सोच कर प्यार नहीं किया जाता. तुम मुझे अच्छे लगते हो, तुम्हारे बारे में सोचते हुए मेरा दिल धड़कने लगता है, तुम्हारी आवाज मेरे कानों में मधुर संगीत घोलती है, तुम से मिलने के लिए मेरा मन बेचैन रहता है. बस, मैं समझती हूं, यही प्यार है,’’ उस ने अपना दायां हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और बाएं हाथ से मेरा सीना सहलाने लगी.

मैं सिकुड़ता हुआ बोला, ‘‘हां, प्यार तो यही है, लेकिन मैं अभी इस मामले में गंभीर नहीं हूं.’’

‘‘कोईर् बात नहीं, जब रोजरोज मुझ से मिलोगे तो एक दिन तुम को भी मुझ से प्यार हो जाएगा. मैं जानती हूं, तुम मुझे नापसंद नहीं करते,’’ वह मेरे साथ जबरदस्ती कर रही थी.

क्या पता, शायद एक दिन मुझे भी निधि से प्यार हो जाए. निधि को अपने ऊपर विश्वास था, लेकिन मुझे अपने ऊपर नहीं… फिर भी समय बलवान होता है. एकदो साल में क्या होगा, कौन क्या कह सकता है?

इसी तरह एक साल बीत गया. निधि से हर सप्ताह मुलाकात होती. उस के प्यार की शिद्दत से मैं भी पिघलने लगा था और दोनों चुंबक की तरह एकदूसरे को अपनी तरफ खींच रहे थे. इस में कोई शक नहीं कि निधि के प्यार में तड़प और कसमसाहट थी. मेरे मन में चोर था और मैं दुविधा में था कि मैं इस संबंध को लंबे अरसे तक खींच पाऊंगा या नहीं, क्योंकि भविष्य के प्रति मैं आश्वस्त नहीं था.

एक साल बाद हमारे डिग्री कोर्स समाप्त हो गए. परीक्षा के बाद फिर से गरमी की छुट्टियां. मैं अपने शहर आ गया. छुट्टियों में निधि से रोज मिलना होता, लेकिन इस बार अपने घर आ कर मैं कुछ बेचैन सा रहने लगा था. पता नहीं, वह क्या चीज थी, मैं समझ ही नहीं पा रहा था. ऐसा लगता था, जैसे मेरे जीवन में किसी चीज का अभाव था. वह क्या चीज थी, लाख सोचने के बावजूद मैं समझ नहीं पा रहा था. निधि से मिलता तो कुछ पल के लिए मेरी बेचैनी दूर हो जाती, लेकिन घर आते ही लगता मैं किसी भयानक वीराने में आ फंसा हूं और वहां से निकलने का कोई रास्ता मुझे दिखाई नहीं पड़ रहा.

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अचानक एक दिन मुझे अपनी बेचैनी का कारण समझ में आ गया. उस दिन मैं जल्दी घर लौटा था. मां आंगन में अमिता की मां के साथ बैठी बातें कर रही थीं. अमिता की मां को देखते ही मेरा दिल अनायास ही धड़क उठा, जैसे मैं ने बरसों पूर्व बिछड़े अपने किसी आत्मीय को देख लिया हो. मुझे तुरंत अमिता की याद आई, उस का भोला मुखड़ा याद आया. उस के चेहरे की स्निग्धता, मधुर सौंदर्य, बड़ीबड़ी मुसकराती आंखें और होंठों को दबा कर मुसकराना सभी कुछ याद आया. मेरा दिल और तेजी से धड़क उठा. मेरे पैर जैसे वहीं जकड़ कर रह गए. मैं ने कातर भाव से अमिता की मां को देखा और उन्हें नमस्कार करते हुए कहा, ‘‘चाची, आजकल आप दिखाई नहीं पड़ती हैं?’’ वास्तव में मैं पूछना चाहता था कि आजकल अमिता दिखाई नहीं पड़ती.

मुझे अपनी बेचैनी का कारण पता चल गया था, लेकिन मैं उस का निवारण नहीं कर सकता था. अमिता की मां ने कहा, ‘‘अरे, बेटा, मैं तो लगभग रोज ही आती हूं. तुम ही घर पर नहीं रहते.’’

मैं शर्मिंदा हो गया और झेंप कर दूसरी तरफ देखने लगा. मेरी मां मुसकराते हुए बोलीं, ‘‘लगता है, यह तुम्हारे बहाने अमिता के बारे में पूछ रहा है. उस से इस बार मिला कहां है?’’ मां मेरे दिल की बात समझ गई थीं.

अमिता की मां भी हंस पड़ीं, ‘‘तो सीधा बोलो न बेटा, मैं तो उस से रोज कहती हूं, लेकिन पता नहीं उसे क्या हो गया है कि कहीं जाने का नाम ही नहीं लेती. पिछले एक साल से बस पढ़ाई, सोना और कालेज… कहती है, अंतिम वर्ष है, ठीक से पढ़ाई करेगी तभी तो अच्छे नंबरों से पास होगी.’’

‘‘लेकिन अब तो परीक्षा समाप्त हो गई है,’’ मेरी मां कह रही थीं. मैं धीरेधीरे अपने कमरे की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन उन की बातें मुझे पीछे की तरफ खींच रही थीं. दिल चाहता था कि रुक कर उन की बातें सुनूं और अमिता के बारे में जानूं, पर संकोच और लाजवश मैं आगे बढ़ता जा रहा था. कोई क्या कहेगा कि मैं अमिता के प्रति दीवाना था…

‘‘हां, परंतु अब भी वह किताबों में ही खोई रहती है,’’ अमिता की मां बता रही थीं.

आगे की बातें मैं नहीं सुन सका. मेरे मन में तड़ाक से कुछ टूट गया. मैं जानता था कि अमिता मेरे घर क्यों नहीं आ रही थी. उस दिन की मेरी बात, जब वह मेरे कमरे में मिठाई देने के बहाने आई थी, उस के दिल में उतर गई थी और आज तक उसे गांठ बांध कर रखा था. मुझे नहीं पता था कि वह इतनी जिद्दी और स्वाभिमानी लड़की है. बचपन में तो वह ऐसी नहीं थी.

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अब मैं फोन पर निधि से बात करता तो खयालों में अमिता रहती, उस का मासूम और सुंदर चेहरा मेरे आगे नाचता रहता और मुझे लगता मैं निधि से नहीं अमिता से बातें कर रहा हूं. मुझे उस का इंतजार रहने लगा, लेकिन मैं जानता था कि अब अमिता मेरे घर कभी नहीं आएगी. एक साल हो गया था, आज तक वह नहीं आई तो अब क्या आएगी? उसे क्या पता कि मैं अब उस का इंतजार करने लगा था. मेरी बेबसी और बेचैनी का उसे कभी पता नहीं चल सकता था. मुझे ही कुछ  करना पड़ेगा वरना एक अनवरत जलने वाली आग में मैं जल कर मिट जाऊंगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा.  

गुलाम बनते जा रहे युवा

नई टैक्नोलौजी युवाओं पर भारी पड़ेगी. जो युवा गुणगान करते रहते हैं कि आज उन की मुट्ठी में दुनियाभर की नौलज है, वे यह भूल रहे है कि यह नौलज एकतरफा व प्लांटेड है. यह उन के विवेक व उन की सोच को बरबाद करने वाली है. मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीम पर बंद जानकारी, गपें मारने के प्लेटफौर्म, नाचगाना दिखाने वाली ऐप, बहुत ही उलझे हुए कंप्यूटर असल में एक तरह से साजिश हैं जो आज के युवा का मन चाहे बहलाएं लेकिन इस चक्कर में उन्हें मानसिक व शारीरिक गुलाम भी बना रहे हैं.

पहली नजर में यह गलत लगता है पर जरा सी परतें उधेड़ें, तो साफ पता चल जाएगा. आज मोबाइल की जंजीर में बंधे युवा का ध्यान म्यूजिक ऐप, डांस ऐप या कंप्यूटर गेम पर होता है, सो उसे, दूसरों की जरूरतें तो छोडि़ए, किसी को देखने तक की फुरसत तक नहीं होती. मांबाप, भाईबहन, दोस्त क्या कर रहे हैं, क्या कह रहे हैं, कैसे भाव उन के चेहरों पर हैं, उन्हें मालूम ही नहीं रहता. वे तो सिर्फ स्क्रीन पर आंख और दिमाग गड़ाए रहते हैं.

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इन ऐप्स और गेम्स को जम कर पैसा मिल रहा है. कुछ एड्स से तो कुछ ऐप को खरीदने से. बिटकौइनों ने खरीदारी आसान कर दी है पर खरीद करने पर हाथ में क्या रहता है? जीरो. इन युवाओं को बिना कुछ बदले में पाए पैसे खर्चने की आदत इतनी बढ़ गई है कि उन को काम करने की आदत नहीं रह गई है. उन्हें अपने में मगन रहने और मोबाइल में डूबे रहने की इतनी लत हो गई है कि वे बाहर जो हो रहा है, उस के अच्छेबुरे पर सोच भी नहीं सकते.

आज का युवा अगर जरा सी हवा में उड़ रहा है, जरा सी लहर में बह रहा है तो इसलिए कि उस के पैर जमीन पर हैं ही नहीं. उस के पास किसी लक्ष्य तक पहुंचने की इच्छा ही नहीं है. वह तो अपने डांस के लाइक्स, अपने नेता के विरोधियों को दी गई गालियों वाले मैसेजों को फौरवर्ड करने में लगा है. वह न तो कुछ नया सोच रहा है, न कुछ नया कर रहा है.

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हां, टैक्नोलौजी बहुत उन्नति कर रही है. नईनई चीजें बन रही है. नए ऊंचे भवन बन रहे हैं. आसमान और सितारों को छुआ जा रहा है पर यह सब काम जनता का छोटा सा वर्ग कर रहा है जिस के हाथ में सारी डोरे हैं. वे पूरी मेहनत कर रहे हैं. मोटी किताबें पढ़ रहे है, मोटी किताबें लिख रहे हैं, लैब्स में खोज कर रहे हैं, कंस्ट्रक्शन साइटों पर घंटों और कईकई दिनों जमे रहते हैं पर उन की गिनती कम होती जा रही है. वे कम हैं, इसलिए उन को मिलने वाले पैसे बढ़ रहे हैं. पहले सब से कम और सब से ज्यादा वेतन पाने वालों का अंतर 20-30 गुना होना था, अब हजारों गुना हो रहा है. अडानी, अंबानी हर घंटे में सैंकड़ों करोड़ कमा रहे हैं. लैब्स में काम कर रहे साइंटिस्ट महंगे और महंगे होते जा रहे है. एमबीए, एमबीबीएस, लौ, इंजीनियरिंग कोर्सों में जगह नहीं मिल रही. थोड़े से भी कमजोरों की किसी को जरूरत नहीं. वे तो अब एमेजौन के डिलीवरी बौय बन रहे हैं, मैक्डोनल्ड में कैरियर या स्टोर में सैल्समैन. उन के पास है, तो मोबाइल, जो असल में जंजीर है, मोटी, दिमाग को बांधने वाली.

अपराध: लव, सैक्स और गोली

एक शादीशुदा और 2 बच्चों की मां खुशबू अपने पति राजीव सिंह के जिम ट्रेनर के गठीले बदन पर कुछ इस कदर फिदा हुई कि उस की मुहब्बत एक दिन नफरत में बदल गई और अपने आशिक की जान लेने के लिए कौंट्रैक्ट किलर की मदद से उस पर गोलियों की बौछार करवा दी.

लव, सैक्स और गोली के इस केस में खुशबू, राजीव समेत सभी आरोपी पुलिस के फंदे में फंस चुके हैं. राजीव फिजियो थैरेपिस्ट है और जनता दल (यू) के मैडिकल सैल का उपाध्यक्ष है. इस केस में नाम आने के बाद पार्टी ने उसे पद से हटा दिया है.

पिछले 18 सितंबर की सुबह 6 बजे विक्रम लोहानीपुर महल्ले के अपने घर से जिम जाने के लिए स्कूटी से निकला, तो रास्ते में कदमकुआं इलाके के बुद्ध मूर्ति के पास शूटरों ने उस पर गोलियां चला दीं.

विक्रम लहूलुहान हो कर स्कूटी से गिर पड़ा और आसपास खड़े लोगों से अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगाने लगा. किसी ने दर्द से छटपटाते विक्रम की बात नहीं सुनी. आखिरकार खून से लथपथ विक्रम खुद ही उठा और स्कूटी चला कर पास के प्राइवेट अस्पताल पहुंचा.

प्राइवेट अस्पताल ने उसे भरती करने से इनकार कर दिया, तो वह पटना मैडिकल कालेज पहुंचा. वहां तुरंत आपरेशन किया गया और उस के जिस्म से 5 गोलियां निकाली गईं.

आशिकी के चक्कर में खुशबू ने विक्रम पर सुपारी किलर से गोलियां चलवाई थीं. इस के लिए पुराने दोस्त मिहिर सिंह के जरीए सुपारी किलर को ढाई लाख रुपए दिए गए थे.

पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए कहा कि राजीव, खुशबू, मिहिर

और 3 सुपारी किलरों को गिरफ्तार किया गया है. सुपारी किलर अमन कुमार, शमशाद और आर्यन उर्फ रोहित से पुलिस पूछताछ कर चुकी है और सभी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है.

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18 सितंबर को सुपारी किलरों ने विक्रम के जिस्म में 5 गोलियां दागी थीं. अपराधियों ने कबूल किया कि उन्हीं लोगों ने विक्रम पर गोलियां चलाई थीं और इस काम के लिए मिहिर ने उन्हें रुपए दिए थे.

अमन एमबीए का स्टूडैंट है और डिलीवरी बौय का काम करता है. शमशाद गोवा में राजमिस्त्री का काम करता था और लौकडाउन की वजह से वह पटना आया हुआ था. अमन और शमशाद भागवतनगर में किराए के मकान में साथ रहते हैं. मकान का किराया 14,000 रुपए है. मिहिर के चचेरे भाई सूरज ने मिहिर की मुलाकात अमन से कराई थी.

जिम ट्रेनर को जान से मारने की धमकी देने का आडियो भी पुलिस को मिला. ट्रेनर की बीवी और परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि आडियो में धमकी देने वाली महिला खुशबू की आवाज है, जो फिजियो थैरेपिस्ट राजीव कुमार सिंह की बीवी है.

ट्रेनर की बीवी वर्षा का आरोप है कि फिजियो थैरेपिस्ट की बीवी ने उस के पति को फोन पर गंदीगंदी गालियां भी दी थीं. उस ने बताया कि खुशबू अकसर पटना मार्केट के ‘द जिम सिटी’ पहुंच जाती थी.

पहले तो फिजियो थैरेपिस्ट राजीव ने पुलिस को बताया कि जिम ट्रेनर विक्रम पर हुए हमले में उस का और उस की बीवी का कोई हाथ नहीं है.

अलबम बनाने के नाम पर विक्रम ने 60,000 रुपए लिए थे. अलबम नहीं बनाने पर राजीव और विक्रम से तीखी नोकझोंक हुई थी और रुपया लौटाने की बात हुई थी. बाद में विक्रम ने राजीव के अकाउंट में 40,000 रुपए और खुशबू के अकाउंट में 20,000 रुपए डाल दिए थे. मई महीने के बाद से राजीव और विक्रम से कोई बातचीत नहीं हुई थी.

एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने बताया कि खुशबू का कहना है कि विक्रम उस का पीछा नहीं छोड़ रहा था और वह उस से पीछा छुड़ाना चाह रही थी. खुशबू का कहना है कि 60,000 रुपए के लेनदेन को ले कर विवाद पैदा हुआ था.

पुलिस को दिए गए बयान में विक्रम ने कहा है कि खुशबू उसे पिछले एक साल से परेशान कर रही थी. एक साल तक वह राजीव को उन के पाटलीपुत्र कालोनी वाले घर में ऐक्सरसाइज कराने जाता था. पैसे को ले कर हिसाबकिताब ठीक नहीं रहने पर उस ने वहां जाना बंद कर दिया. उस के बाद खुशबू ने उसे सोशल मीडिया के जरीए तंग करना चालू कर दिया. एक बार खुशबू ने गुस्से में उस के सीने पर ब्लेड से हमला किया था.

पुलिस ने खुशबू और राजीव के मोबाइल फोन को खंगाला तो खुलासा हुआ कि जनवरी में खुशबू और विक्रम के बीच 1100 बार बातचीत हुई. राजीव से आखिरी बार 18 अप्रैल को बात

हुई थी. उन के बीच ह्वाट्सएप और वीडियो काल के जरीए बातचीत होती थी.

सितंबर, 2020 से मई, 2021 के बीच खुशबू ने विक्रम को 1875 काल की थी. दोनों के बीच साढ़े 5 लाख सैकंड बातचीत हुई थी. इतने ही समय के दौरान खुशबू ने अपने पति राजीव को महज 13 बार फोन किया. खुशबू और विक्रम के बीच अकसर घंटों बातें होती थीं.

मिहिर ने पुलिस को बताया कि वह 5-6 सालों से खुशबू को जानता था. खुशबू ने ही उस से कहा था कि विक्रम उसे परेशान करता है, इस वजह से वह उस की हत्या करवाना चाहती है. सुपारी किलर को जुलाई में ही एक लाख, 85 हजार रुपए दिए थे. एसएसपी ने बताया कि कुछ साल पहले मिहिर और खुशबू की पहचान भी फेसबुक के जरीए ही हुई थी.

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पुलिस की छानबीन से यह बात भी सामने आई कि 5-6 साल पहले खुशबू और मिहिर के बीच भी गहरा रिश्ता रहा था. मिहिर भी खुशबू का प्रेमी रह चुका है. जब विक्रम ने खुशबू से कन्नी काटना शुरू किया, तो खुशबू को पुराने आशिक मिहिर की याद आई. उस ने मिहिर से कहा कि विक्रम उसे बहुत परेशान कर रहा है और फिर दोनों ने मिल कर विक्रम को रास्ते से हटाने की साजिश रची.

खुशबू ने मिहिर से यह भी कहा कि विक्रम को ठिकाने लगाने के लिए वह रुपयों की चिंता न करे. विक्रम को मारने के लिए मिहिर ने खुशबू से 3 लाख रुपए मांगे. खुशबू ने 3 किस्तों में एक लाख, 85 हजार रुपए मिहिर को दिए.

मिहिर ने अपने चचेरे भाई सूरज के साथ मिल कर पूरी साजिश रची. उस के बाद शार्प शूटर अमन, आर्यन और शमशाद को विक्रम को मारने की सुपारी दी गई.

शूटरों के साथ यह डील अगस्त महीने की शुरुआत में ही हुई थी. अगस्त महीना खत्म हो गया और उस के बाद सितंबर भी आधा खत्म हो गया और विक्रम को ठिकाने नहीं लगाया जा सका तो खुशबू परेशान हो गई. उस ने मिहिर पर दबाव बनाना शुरू किया.

विक्रम राजीव को जिम ट्रेनिंग देने के लिए उस के घर पर जाता था. वहीं खुशबू से जानपहचान हुई और बातचीत शुरू हुई. विक्रम के गठीले बदन को देख खुशबू उस पर फिदा हो गई. वह धीरेधीरे विक्रम के करीब आती गई. वह पटना मार्केट के पास विक्रम के जिम में पहुंचने लगी और वहीं कईकई घंटों तक बैठी रहती थी.

विक्रम ने पुलिस को बताया कि वह उस के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाना चाहती थी. ऐसा नहीं करने पर वह उसे फंसाने और ब्लैकमेल करने की धमकी देने लगी. जब विक्रम उस से दूर रहने की कोशिश करने लगा तो एक रात को विक्रम के घर पहुंच गई और हंगामा मचाने लगी.

खुशबू की हरकतों से आजिज आ कर विक्रम ने डाक्टर राजीव को फोन कर सारे मामले की जानकारी भी

दी. विक्रम ने उस से कहा कि खुशबू उसे पिछले कई दिनों से परेशान कर रही है.

डाक्टर राजीव ने विक्रम की बातों पर यकीन नहीं किया और उस से कहा कि सुबूत ले कर आओ, उस के बाद देखा जाएगा.

विक्रम के बयान पर कदमकुआं थाने में केस दर्ज किया गया. केस नंबर है-477/2021. आरोपियों पर आईपीसी की धारा-307, 120बी, 34 और 27 के तहत केस दर्ज किया गया है.

नशाखोरी: बढ़ती गांजे की लत

हिंदी फिल्म कलाकार और पूरी दुनिया में ‘किंग खान’ के नाम से मशहूर सुपर स्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और उस के साथ कई लोगों को बैन किया गया. नशा अपने पास रखने और उस का सेवन करने का आरोप उन पर लगा, तो पूरी दुनिया में इस तरह के नशे पर बहस शुरू हो गई.

चिलम, तंबाकू और सिगरेट के साथ गांजे का इस्तेमाल भारत में लंबे समय से होता रहा है. कई मंदिरों में तो यह प्रसाद के तौर पर चढ़ता है. आयुर्वेद में गांजे को दवा के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है. नशे और दवा दोनों के रूप में गांजे का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

एक तरफ इस को नशा मान कर इस का कारोबार गैरकानूनी माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ दवा और प्रसाद जैसा मान कर इस के बैन को हटाने की मांग भी की जा रही है.

इन सब बातों के बीच गांजे का सब से बड़ा और बुरा असर आम घरपरिवार पर पड़ रहा है. इस की वजह से परिवार के परिवार उजड़ रहे हैं. 50 रुपए की पुडि़या में मिलने के चलते यह सस्ता और मिलना आसान हो गया है. यही वजह है कि गांव के गरीब इस का सेवन कर के बरबाद हो रहे हैं.

गांजे का इस्तेमाल भारत के कई मंदिरों में प्रसाद के तौर पर किया जाता है. कई मंदिरों में इसे ‘महादेव का प्रसाद’ भी कहा जाता है. उत्तर कर्नाटक में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां गांजे का इस्तेमाल प्रसाद के तौर पर किया जाता है.

यादगीर जिले के तिन्थिनी के मोरेश्वर मंदिर में छोटे पैकेट में गांजा बतौर प्रसाद मिलता है. बताया जाता है कि यह ध्यान करने में मददगार होता है.

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बिहार के खगडि़या में कात्यायनी मां के मंदिर में भी दूध और गांजा प्रसाद के रूप में चढ़ता है. शिव मंदिरों में भी ऐसा ही चलन देखने को मिलता है. यही वजह है कि जब गांजा न पीने की बात की जाती है, तो पीने वाले कहते हैं कि यह नशा नहीं, बल्कि प्रसाद है.

तमाम साधुसंत इस का सेवन चिलम से धुआं उड़ाते करते हैं. हिंदी फिल्मों में भी ‘दम मारो दम’ जैसे गानों में चिलम के सहारे धुआं उड़ाते गाने सुने जा सकते हैं.

घरपरिवार पर बुरा असर

रात के तकरीबन 11 बज रहे थे. रामपुरगांव के रहने वाले शिवकुमार के घर पर निगोहां पुलिस का छापा पड़ा. शिवकुमार घर में नहीं मिला तो पुलिस ने उस की पत्नी स्वाति को हिरासत में ले लिया.

शिवकुमार के बारे में पुलिस को यह सूचना मिली थी कि वह गांजा बेचने का काम करता है. शिवकुमार के घर से पुलिस को गांजा मिला भी था. अपने पति की बुरी आदतों के चलते स्वाति को जेल जाना पड़ा. इस वजह से उसे गांव में बेहद बदनामी का सामना करना पड़ा.

गांजे का नशा करने वाला थकाथका सा रहता है. उसे देख कर लगता है, जैसे वह बहुत परेशान है. वह बातबात पर गुस्सा और मारपीट करता है. वह चीखनेचिल्लाने का काम ज्यादा करता है.

पिछले कुछ सालों से जब से शराब की कीमत बढ़ने लगी है और कच्ची शराब बनाना मुश्किल होने लगा है, तब से गांवदेहात में गांजे का इस्तेमाल नशे के रूप में बढ़ने लगा है.

इस की सब से बड़ी वजह यह है कि गांजा खरीदना सस्ता पड़ता है. इस के अलावा इस को पुडि़या के रूप में रखा जाता है. शराब की तरह इस की बदबू नहीं फैलती है. गांव में 2-4 लोग ?ांड बना कर बैठ जाते हैं. वहां चिलम में रख कर इसे पीते हैं, जबकि देखने वाले को लगता है कि वे लोग तंबाकू पी रहे हैं. असल में तो वे गांजा पी रहे होते हैं.

गांजा बेचने वाले गांव के लोगों को पहले मुफ्त में पिलाने का काम करते हैं, पर जब इस की आदत पड़ जाती है तो लोग खरीद कर पीने लगते हैं.

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बड़े पैमाने पर तस्करी

गांजे का इस्तेमाल बढ़ने से बड़ी मात्रा में इस की तस्करी भी बढ़ने लगी है. ओडिशा से सस्ते दाम पर गांजा खरीद कर दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश के शहरों में बेचने वाले तस्कर गिरोह के 2 सदस्यों को भदोही पुलिस ने गिरफ्तार किया था. वाराणसीप्रयागराज रोड पर ऊंज थाना क्षेत्र में नवधव के पास से ट्रक में लदा 350 किलोग्राम गांजा बरामद किया था.

बरामद गांजे की कीमत 35 लाख रुपए आंकी गई थी. जिस ट्रक से गांजा बरामद किया गया, उस में टूटे हुए शीशे लदे थे. ट्रक के केबिन में गांजे को छिपा कर रखा गया था.

जागरूकता की जरूरत

लखनऊ के निगोहां थाने के क्षेत्राधिकारी नईम उल हसन कहते हैं, ‘‘यह देखा गया है कि नशे के रूप में गांजे का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने लगा है, जिस की रोकथाम के लिए पुलिस के साथसाथ गांव के लोगों और समाज के खास लोगों को भी सामने आना पड़ेगा, तभी गांवों को गांजे के नशे से दूर रखा जा सकता है. गांव के लोगों को यह सम?ाना होगा कि यह नशा सेहत के साथसाथ उन की सामाजिक इज्जत को भी नुकसान पहुंचा रहा है.’’

मोहनलालगंज संसदीय सीट के सांसद कौशल किशोर ने नशे के खिलाफ एक बड़ी मुहिम छेड़ी है. वे लोगों को नशा छोड़ने की शपथ दिलाते हैं. इस मुहिम में वे अपने क्षेत्र के साथसाथ पूरे देश में जागरूकता का संदेश दे रहे हैं.

कौशल किशोर कहते हैं, ‘‘किसी भी तरह की नशीली चीजों का सेवन सेहत के लिए खराब होता है. यह घरपरिवार को पूरी तरह से तबाह कर देता है. ऐसे में जरूरी है कि गांवगांव इस बात को ले कर जागरूकता

मुहिम शुरू की जाए और लोगों को सम?ाया जाए.’’

अपराध है गांजे का सेवन

हमारे देश में हजारों सालों से गांजे का सेवन किया जा रहा है. इसे इंगलिश भाषा में कैनेबिस कहा जाता है. कैनेबिस के फूलों से ही गांजा बनाया जाता है. नशे के तौर पर अगर गांजे का सेवन करना छोड़ दिया जाए तो इस पौधे का इस्तेमाल कृषि, बागबानी, कपड़ा उद्योग, दवा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में किया जाता है.

एक जानकारी के मुताबिक, 2 करोड़ लोग गांजे के पौधे से बने उत्पादों का इस्तेमाल नशे के तौर पर करते हैं.

गांजे को तंबाकू में मिला कर चिलम या हुक्के के जरीए लिया जाता है. नए दौर में अब इस को कागज में लपेट कर तंबाकू के साथ सिगरेट जैसा बना कर भी लिया जाता है. शहरों में चलने वाले हुक्का बार में इस का इस्तेमाल हुक्का पीने में किया जाता है.

हाल के कुछ दिनों में गांव से ले कर शहर तक इस का चलन तेजी से बढ़ गया है. साल 1985 में राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे. उस समय से ‘नार्कोटिक ड्रग्स ऐंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस ऐक्ट 1985’ (एनडीपीएस ऐक्ट 1985) लागू हुआ था, जिस में गांजे को बैन कर दिया गया था. अब भारत में गांजे का इस्तेमाल करना और इसे बेचना पूरी तरह से बैन है. इस के बावजूद लोग चोरीछिपे इस का कारोबार और सेवन करते हैं

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गांजे की खेती

गांजे के नर और मादा 2 पौधे होते हैं. नर पौधे की पत्तियों से भांग बनती है. मादा पौधे के फूल को सुखा कर गांजा बनाया जाता है. गांजे का सेवन करने पर लोगों में एक तरह का जोश सा बढ़ जाता है, क्योंकि यह तंबाकू के साथ मिला कर पीया जाता है. यह तेजी से असर करता है.

तंबाकू के साथ मिला कर गांजा पीने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. जो लोग गांजे का ज्यादा और लगातार सेवन करते हैं, उन के चेहरे पर काले दाग पड़ जाते हैं.

अलगअलग रूपों में गांजे का सेवन पूरी दुनिया में होता है. हिमाचल प्रदेश के मलाना इलाके में उगने वाला गांजा दुनिया का सब से बेहतरीन गांजा माना जाता है.

गांजे की खेती  जुलाई महीने के आसपास होती है, तब इस के पौधे को लगाया जाता है. 4 से 8 फुट तक इस का पौधा बढ़ता है.

गांजे के फूल को उलटपलट कर सुखाया जाता है. इसी से गांजा पाउडर तैयार किया जाता है.

अच्छी किस्म के गांजे में 15 से 25 फीसदी रेजिन और 15 फीसदी राख निकलती है. रेजिन को ही तंबाकू के साथ मिला कर पीने का काम किया जाता है.

सेहत के लिए खतरनाक

तंबाकू के साथ मिला कर गांजा पीने से दिमाग में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं. कैनेबिस के पौधे में तकरीबन 150 तरह के कैनेबिनौइड पाए जाते हैं. कैनेबिनौइड एक तरह का कैमिकल होता है. 150 कैमिकलों में से 2 कैमिकल टैट्राहाइड्रोकैनाबिनौल (टीएचसी) और कैनेबिडौल (सीबीडी) ऐसे भी होते हैं, जो दिमाग पर सब से ज्यादा असर डालते हैं.

गांजे में पाए जाने वाले ये दोनों कैमिकल यानी टीएचसी और सीबीडी अलगअलग काम करते हैं. टीएचसी जहां एक तरफ नशा बढ़ाता है, तो वहीं दूसरी तरफ सीबीडी नशे के असर को कम करता है. जब गांजे में टीएचसी की मात्रा ज्यादा होती है, तो टीएचसी खून के साथ दिमाग तक पहुंच जाता है और गड़बड़ करने लगता है.

यह दिमाग में काम करने वाले न्यूरौन पर असर डालता है. गांजा पीने के बाद न्यूरौन ही कंट्रोल से बाहर हो जाता है. कैनेबिडौल का इस्तेमाल दवाएं बनाने में किया जाता है.

गांजा पीने के बाद जब हमारा दिमाग बेकाबू हो जाता है, तो लोगों को बेशक मजा सा आता है, लेकिन इस का खराब असर ही पड़ता है. धीरेधीरे नशेड़ी कोई बात ज्यादा देर तक याद नहीं रख पाते हैं. उन का दिमागी बैलेंस खराब होने लगता है. डिप्रैशन बढ़ने लगता है. कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

जो लड़कियां गांजे का सेवन करने लगती हैं, वे अपनी बच्चा जनने की ताकत खोने लगती हैं. माहवारी में दिक्कतें होने लगती हैं. हमेशा नशा करने का मन होता है. नशा पाने की बेचैनी में वे कुछ भी करने को तैयार हो जाती हैं.

यही नहीं, खुद पर काबू न रख पाना ही नशा करने का सब से बड़ा नुकसान है. करता कोई एक है और भुगतता पूरा परिवार है.

परमानेंट दोस्त हैं जरूरी

‘आई लव यू माय लब्बू’ लिखा टैटू जब बौलीवुड अभिनेत्री जाहनवी कपूर ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस को दिखाया तो यह टैटू चर्चा का विषय बन गया. जिस समय जाहनवी ने यह टैटू अपने फ्रैंड्स को शेयर किया, उस समय वह छुटिट्यां मनाने गई थी. छुटिट्यों में भी जाहनवी अपनी मां को ही याद करती रही. ‘आई लव यू माय लब्बू’ लिखे टैटू का संबंध जाहनवी की मां श्रीदेवी से है.

जब श्रीदेवी जिंदा थीं, उस समय उन्होंने जाहनवी को लिखा था, ‘आई लव यू माय लब्बू’. श्रीदेवी के न रहने के बाद जाहनवी ने इस लाइन को ही अपना टैटू बनवा लिया. श्रीदेवी अपनी बेटी जाहनवी को प्यार से उस के निकनेम ‘लब्बू’ से ही बुलाती थीं. इस टैटू के जरिए जाहनवी कपूर अपनी मां को याद करती हैं. श्रीदेवी ने अपने जीवित रहते जाहनवी कपूर के लिए यह लिखा था, ‘‘मैं तुम से बहुत प्यार करती हूं प्यारी लब्बू, तुम दुनिया की सब से अच्छी बच्ची हो.’’

जाहनवी कपूर का जन्म 7 मार्च, 1997 को हुआ था. उस की मां का नाम श्रीदेवी और पिता का नाम बोनी कपूर है. जाहनवी कपूर आज हिंदी फिल्मों की प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं. जाहनवी ने 2018 में पहली फिल्म ‘धड़क’ से अपने अभिनय की शुरुआत की थी. इस फिल्म के लिए जाहनवी को ‘बेस्ट डैब्यू अवार्ड’ दिया गया था.

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जाहनवी के परिवार में भाई अर्जुन कपूर फिल्मों में अभिनय करते हैं. इस के अलावा उस के चाचा अनिल कपूर और संजय कपूर भी फिल्मों में हैं. जाहनवी की पढ़ाई मुंबई के धीरूभाई अंबानी इंटरनैशनल स्कूल से हुई. जाहनवी ने कैलिफोर्निया के ‘ली स्ट्रैसबर्ग थिएटर एंड फिल्म इंस्टिट्यूट’ में ऐक्ंिटग की पढ़ाई पूरी की थी.

जाहनवी कपूर हिंदी फिल्म ‘धड़क’, कौमेडी हौरर फिल्म में रूही अफजा, बायोपिक ‘गुंजन सक्सेना : द कारगिल गर्ल’ में गुंजन सक्सेना की भूमिका में काम कर चुकी हैं. नैटफ्लिक्स एंथोलौजी फिल्म ‘घोस्ट स्टोरीज’ में जोया अख्तर के सेगमैंट में भी अभिनय किया है. इस के अलावा अब वे करण जौहर की फिल्म ‘तख्त’ में एक गुलाम लड़की का किरदार निभा रही हैं.

रोमांटिक कौमेडी फिल्म ‘दोस्ताना’ के सीक्वैंस में कार्तिक आर्यन और लक्ष्य लालवानी के साथ काम कर रही हैं. 24 साल की उम्र में जाहनवी कपूर ने अपनी एक अलग पहचान बना ली है. फिल्मी दुनिया में उन के बहुत सारे मित्र हैं. घरपरिवार भी है. इस के बाद भी उन्हें अपनी मां से अच्छा कोई और दोस्त मिला नहीं.

श्रीदेवी मां नहीं दोस्त

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त, 1963 को हुआ था. श्रीदेवी ने 1975 में फिल्म ‘जूली’ से बाल अभिनेत्री के रूप में प्रवेश किया था. उन्होंने बाद में तमिल, मलयालम, तेलुगू, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम किया. अपने फिल्मी कैरियर में उन्होंने 63 हिंदी, 62 तेलुगू, 58 तमिल, 21 मलयालम तथा कुछ कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया.

श्रीदेवी को फिल्मों की ‘लेडी सुपरस्टार’ कहा जाता है. उन्होंने 5 फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त किए. उन्हें लोकप्रिय अभिनेत्री माना जाता है. 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान दिया. उन की प्रमुख फिल्मों में ‘हिम्मतवाला’, ‘सदमा’, ‘नागिन’, ‘निगाहें’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘चालबाज’, ‘लम्हे’, ‘खुदागवाह’ और ‘जुदाई’ हैं. 24 फरवरी, 2018 को दुबई में श्रीदेवी का निधन हो गया.

श्रीदेवी अपने कैरियर की ही तरह से अपने परिवार का भी ध्यान रखती थीं. वे काफी समय परिवार और अपनी बेटियों को देती थीं. दुबई भी वे पति बोनी कपूर, बेटी खुशी और भतीजे मोहित के साथ शादी के एक समारोह में हिस्सा लेने गई थीं. उन की बड़ी बेटी जाहनवी उस समय उन के साथ नहीं थी. मां के न रहने के बाद जाहनवी अकेली पड़ गई. मां के साथ अंतिम समय न रहने का दर्द उसे था.

अब उस ने अपनी मां की याद में अपने हाथों से लिखा टैटू बनवा कर याद किया. युवाओं में अपने पेरैंट्स के साथ लगाव बढ़ता जा रहा है. इस की वजह यह है कि अब उन के पास परमानैंट दोस्तों की कमी होने लगी है. जाहनवी जैसे कई युवा अपने पेरैंट्स को खोने के बाद उन की याद में डूबे रहते हैं.

परमानैंट दोस्त की कमी

युवाओं के अकेले परमानैंट दोस्त अब पेरैंट्स ही रह गए हैं. पति, पत्नी और पेरैंट्स के अलावा जो दोस्त होते हैं, वे कुछ घंटों के लिए होते हैं. यही नहीं, ये सभी दोस्त अपने मतलब के लिए दोस्ती करते हैं. बच्चे भी उदार और सपोर्टिव पेरैंट्स के साथ चिपके रहना पंसद करते हैं.

श्रीदेवी ने कम उम्र में ही काम शुरू किया था. परिवार का कोई बहुत सहयोग नहीं था. इस के बाद भी श्रीदेवी ने न केवल फिल्मों में नाम कमाया, बल्कि अच्छी मां के रूप में भी पहचान बनाई. आज के युवा इस तरह की जिम्मेदारी उठाने से बचते हैं. उन के पास जो दोस्त होते हैं, वे उन के वर्किंगप्लेस के होते हैं. ये कोई परमानैंट दोस्त नहीं होते. परमानैंट दोस्तों की संख्या अब कम होती जा रही है. काम खत्म होते ही दोस्त बदल जाते हैं. इस वजह से जब किसी तरह का दुख हो, इमोशनल सहयोग की जरूरत हो तो दोस्त की कमी खलने लगती है.

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युवाओं के सब से पहले परमानैंट दोस्त उन के पेरैंट्स होते हैं. इस के बाद शादी होने के बाद पतिपत्नी के रूप में परमानैंट दोस्त मिलते हैं. यही वजह है कि पेरैंट्स एक तय समय पर बच्चों की शादी कर देना चाहते हैं. आज के दौर में बच्चे पहले कैरियर बनाना पसंद करते हैं. इस के बाद वे शादी की सोचते हैं. कैरियर में भी कंपीटिशन बढ़ गया है. ऐसे में उन को कैरियर बनाने में भी समय लगने लगा है.

इस बीच अगर पेरैंट्स के साथ कोई हादसा हो जाए, बच्चे अकेले पड़ जाते हैं. जिन को पतिपत्नी के रूप में परमानैंट दोस्त मिल जाते हैं उन को कम दिक्कत का सामना करना पड़ता है. अगर पतिपत्नी और पेरैंट्स में से कोई भी साथ न हो तो जीवन से परमानैंट दोस्त एकदम से खत्म हो जाते हैं, जिस की वजह से युवा दिक्कत में आ जाते हैं.

इसलिए, यह जरूरी हो गया है कि जीवन में परमानैंट दोस्त हों. ये कभी गलत सलाह नहीं देंगे. मुसीबत में साथ, हिम्मत और सहयोग देंगे. पेरैंट्स हमेशा नहीं रह सकते. युवाओं को शादी से दूर नहीं भागना चाहिए. पेरैंट्स के बाद पतिपत्नी आपस में एकदूसरे के परमानैंट दोस्त होते हैं, जो हर सुखदुख में साथ देते हैं.

वर्किंगप्लेस के दोस्त भी महज दोस्त ही होते हैं. इन पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता. युवाओं को परमानैंट दोस्तों के साथ रहने की कोशिश करनी चाहिए. वही मुसीबतों से बाहर निकाल सकते हैं. अकेलापन दूर कर सकते हैं. परमानैंट दोस्तों की कमी कई तरह की मानसिक बीमारियां ले कर आती है. इन से बचने के लिए भी परमानैंट दोस्तों का जीवन में होना जरूरी होता है.       – शैलेंद्र सिंह द्य

Monalisa ने इस शख्स के साथ मनाया बर्थडे, नहीं दिखे पति विक्रांत

भोजपुरी इंडस्ट्री की हॉट एक्ट्रेस मोनालिसा (Monalisa) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह आए दिन फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अब उन्होंने अपने बर्थडे की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की हैं.

मोनालिसा ने बर्थडे सेलिब्रेशन की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. उन्हें पति विक्रांत सिंह राजपूत (Vikrant Singh Rajput) के बिना ही अपना बर्थडे मनाना पड़ा.

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इस फोटो में आप देख  सकते हैं कि वह अकेले ही बर्थडे केक काटते हुए नजर आ रही हैं. तस्वीरों में एक्ट्रेस की मुस्कुराहट के साथ उदासी चेहरे पर साफ नजर आ रही है.

 

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उन्होंने इस फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि ‘मुझे जन्मदिन मुबारक हो और धन्यवाद दीपक मेरे बर्थडे को स्पेशल बनाने के लिए. मेरे केक को शानदार तरीके से सजाया. विक्रांत आपको बहुत याद किया.

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बता दें कि मोनालिसा के बर्थडे के मौके पर उनके पति विक्रांत सिंह राजपूत मौजूद नहीं थे. उन्होंने इस दौरान उन्हें काफी मिस किया. मोनालिसा की पोस्ट पर विक्रांत ने कमेंट किया और लिखा,’मैं भी बहुत याद कर रहा हूं. उनकी इस पोस्ट पर टीवी और अन्य सेलेब्स ने भी बर्थडे विश की है.

आपको बता दें कि विक्रांत सिंह इन दिनों अपकमिंग फिल्मों की शूटिंग कर रहे हैं जिनके सेट से वो खूब तस्वीरें और रील वीडियोज शेयर करते रहते हैं. हाल ही में उन्होंने फिल्म ‘तरकीब’ की शूटिंग शुरू की है. इसमें वे एक्ट्रेस श्रुति राव के साथ लीड रोल में नजर आएंगे.

TMKOC: दुल्हन बनी रीटा रिपोर्टर, नहीं दिखी टप्पू और बबीता जी की जोड़ी

टीवी कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’  फेम एक्ट्रेस प्रिया आहूजा इन दिनों लगातार सुर्खियों में छाई हुई हैं. हाल ही में प्रिया आहूजा (Priya Ahuja)  ने दोबारा शादी की हैं. एक्ट्रेस की शादी की तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. आइए दिखाते हैं एक्ट्रेस की शादी की तस्वीरें.

इन तस्वीरों में सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा की पूरी टीम दिखाई दे रही हैं. लेकिन तारक मेहता फेम फमुनमुन दत्ता और राज अनादकट नहीं दिखाई दे रहे हैं. कयास लगाया जा रहा है कि मुनमुन दत्ता और राज अनादकट ने विवादों से बचने के लिए इस शादी में शामिल  नहीं  हुए हैं.

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बता दें कि रीटा रिपोर्टर की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. फैंस प्रिया आहूजा के ब्राइडल लुक को काफी पसंद कर रहे हैं. प्रिया आहूजा ने अपनी शादी की दसवीं सालगिरह पर दोबारा सात फेरे लिए हैं.

 

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प्रिया आहूजा के पति मालव राजदा (Malav Rajda) ‘तारक मेहता उल्टा चश्मा’ के साथ भी चीफ डायरेक्टर भी हैं. प्रिया और राजदा की मुलाकात शो के सेट पर ही हुई थी. शो के सेट पर ही दोनों का प्यार परवान चढ़ा. शादी के मंडप में प्रिया आहूजा बेबी पिंक कलर के डिजाइवनर लहंगे में पोज देती नजर आईं.

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अनुपमा की ऑनस्क्रीन मां Madhavi Gogate का हुआ निधन, पढ़ें खबर

टीवी सीरियल अनुपमा (Anupamaa)  के फैंस के लिए एक बुरी खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि शो में अनुपमा की ऑनस्क्रीन मां का किरदार निभा चुकी अदाकारा माधवी गोगटे (Madhavi Gogate) का निधन हो गया है.

रिपोर्ट के अनुसार माधवी गोगटे को कोरोना हो  गया था. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालांकि उनके सेहत में सुधार भी हो रहा था. लेकिन अचानक 21 नवम्बर यानी रविवार को माधवी गोगटे की तबियत खराब हो गई. और इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया.

 

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सीरियल अनुपमा के कालाकार इस खबर से काफी दुखी हैं. वे माधवी गोगटे के निधन पर शोक जाहिर कर रहे हैं तो वहीं फैंस को भी इस खबर पर विश्वास नहीं हो रहा. शो के कालाकार सोशल मीडिया पर और फैंस माधवी गोगटे को श्रद्धांजलि दे रहे हैं. बा यानी अल्पना बुच ने सोशल मीडिया पर शोक जाहिर की है. उन्होंने लिखा है कि  माधवी गोगटे ये अच्छी बात नहीं है. सीन खत्म होने से पहले कोई भी एक्टर बाहर नहीं जा सकता. हमसभी आपको सेट पर बहुत मिस करेंगे. आपकी प्यारी सी मुस्कान, आपकी आवाज हमको बहुत याद आने वाली है.

बता दें कि आखिरी बार माधवी गोगटे ने आखिरी बार सीरियल अनुपमा में ही काम किया था. उन्होंने इस शो में अनुपमा की ऑन स्क्रीन मां का किरदार निभाया था.

 

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आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने शो को अलविदा कहा था. तो वहीं अब अनुपमा की मां के किरदार में सविता प्रभुने नजर आ रही हैं. माधवी गोगटे सीरियल अनुपमा के अलावा कई बड़े टीवी शोज में काम कर चुकी हैं.

 

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सीरियल ‘अनुपमा’ की बात करे तो शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है.  शो में आप देखेंगे कि  वनराज अपने साथ काव्या को घर से जाने के लिए कहेगा.  काव्या ऐसा करने से साफ मना कर देगी.  काव्या वनराज से कहेगी कि वो घर से बाहर नहीं जाएगी. काव्या सबको बताएगी कि उसने शाह हाउस अपने नाम कर लिया है.

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