GHKKPM: सई को धोखा देगा विराट? सामने आया ये Video

नील भट्ट (Neil Bhatt),  ऐश्वर्या शर्मा (Aishwarya Sharma) और आयशा शर्मा (Ayesha Singh) स्टारर सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin)  की कहानी दिलचस्प मोड़ ले चुकी है. शो में दिखाया जा रहा है कि सई-विराट एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं. सई को अहसास होने लगा है कि वह विराट से प्यार करने लगी है. लेकिन पाखी उसे विराट के खिलाफ भड़काने का काम करती है.

शो का नया प्रोमो सामने आया है, इस वीडियो में दिखाया जा रहा है कि सई को अहसास हो रहा है वह विराट से प्यार करती है लेकिन विराट, सई से नाराज दिखाई दे रहा है. तो वहीं विराट का अजीब बर्ताव देखकर सई परेशान हो जाती है.

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तो दूसरी तरफ पाखी सई को भड़काने की कोशिश करती है. वीडियो में आप देख सकते हैं कि पाखी सई से कहती है कि विराट किसी एक का हो ही नहीं सकता. उसने उसका भी दिल तोड़ा है और अब सई का भी दिल तोड़ेगा.

 

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शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि अश्विनी और निनाद मौका ने सई को शॉपिंग पर ले जाने के लिए भवानी इजाजत मांगी.  वहीं भवानी ने सई के जाने पर पाबंदी लगा दी.

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ऐसे में अश्विनी और निनाद ने  भवानी को समझाने की कोशिश की. जिसके बाद अश्विनी और निनाद, सई और विराट के साथ मॉल घूमने गये. तो दूसरी तरफ विराट सई के लिए अपने कमरे में जगह बनाया.

Anupama: क्या शो में दिखाई देगा अनुपमा का डबल रोल, फैंस को दिया हिंट

टीवी सीरियल अनुपमा (Anupama) फेम  रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly)  का एक वीडियो सामने आया है, इसमें रुपाली गांगुली मोनिशा और अनुपमा के किरदार में दिखाई दे रही हैं. यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. आइए जानते हैं इस वीडियो के बारे में.

हाल ही में ‘अनुपमा’  ने इंस्टाग्राम पक एक वीडियो शेयर किया है, इस वीडियो में मोनिशा और अनुपमा का आमना-सामना हुआ है. वीडियो में आप देख सकते हैं कि मोनिशा अनुपमा से कह रही है कि वह उसकी बहुत बड़ी फैन है और ऑटोग्राफ मांग रही है. मोनिशा ये भी कहती है कि अनुपमा की एक्टिंग बिल्कुल रियल लगती है.

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वीडियो के लास्ट में अनुपमा फैंस का शुक्रिया अदा करती है और ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि जल्द आ रहे हैं दोनों साथ में.  इस वीडियो के देखकर माना जा रहा है कि एक्ट्रेस जल्द ही शो में भी डबल रोल प्ले कर सकती हैं.

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अनुपमा के आने वाले एपिसोड में दिखाया जाएगा कि वनराज जल्द ही शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन बनेगा. शो से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है. जिसमें वनराज का लुक बदला हुआ दिखाई दे रहा है.

 

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काव्या के धोखे से वनराज पूरी तरह टूट चुका है. उसने काव्या को सबक सीखाने का प्लान बना लिया है. शो में जल्द ही बड़ा चेंज देखने को मिलेगा. शो में आप ये भी देखेंगे कि अनुपमा अनुज से वादा करेगी कि वो उसके साथ ही रहेगी. तो दूसरी तरफ काव्या घरवालों को जाने से रोक लेगी. लेकिन वनराज का गुस्सा कम नहीं होगा.

खबरों के अनुसार शो में दिखाया जाएगा कि वनराज काव्या को भी  तलाक देगा. ये बात जानकर काव्या के होश उड़ जाएंगे.

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Manohar Kahaniya- राम रहीम: डेरा सच्चा सौदा के पाखंडी को फिर मिली सजा- भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

18अक्तूबर, 2021 को सुबह से ही पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. अदालत के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई थी. हत्या के जिस मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट के जज सुशील कुमार गर्ग सजा का ऐलान करने वाले थे, उस में 5 आरोपी उन के सामने कठघरे में खडे़ थे. जबकि एक आरोपी पिछले कई घंटों से रोहतक की सुनारिया जेल से वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए जुड़ा था. इसी शख्स के कारण सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए गए थे.

क्योंकि प्रशासन को आशंका थी कि उस के खिलाफ सजा का ऐलान होने से कहीं उस के भक्त भड़क कर हिंसा पर उतारू न हो जाएं. यह शख्स कोई छोटामोटा व्यक्ति नहीं, बल्कि डेरा सच्चा सौदा का मुखिया संत गुरमीत राम रहीम था, जिस के देशविदेश में लाखों समर्थक थे.

सरकारी वकील और बचाव पक्ष के वकीलों की कई घंटे दलील चली. आखिरकार कई घंटों की बहस के बाद सीबीआई जज सुशील कुमार ने अपना फैसला देते हुए डेरे के सेवादार रणजीत कुमार की हत्या के आरोप में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम, अवतार सिंह, जसबीर सिंह, सर्बदिल सिंह और कृष्णलाल को धारा 120बी, 302 एवं 506 के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई.

इस मामले में आरोपित इंद्रसेन की सुनवाई के दौरान 8 अक्तूबर, 2020 को मौत हो गई थी. जज ने गुरमीत राम रहीम को 32 लाख रुपए का जुरमाना अदा करने की सजा भी सुनाई. यह रकम पीडि़त परिवार को देने का आदेश दिया.

सजा का ऐलान होते ही रोहतक की सुनारिया जेल से वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए कोर्ट के साथ जुड़े राम रहीम ने अपना सिर पकड़ लिया और वहीं जमीन पर बैठ गया.

ये वही गुरमीत राम रहीम था, जिस के आगेपीछे कुछ साल पहले तक लाखों अनुयायियों की भीड़ जुटी रहती थी. लेकिन अपने कर्मों के कारण आज वह सलाखों के पीछे एक नहीं बल्कि 3 आपराधिक मामलों में सजा भोग रहा है.

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रणजीत सिंह हत्याकांड की कहानी को समझने के लिए हमें पहले राम रहीम और उस के उस साम्राज्य की बात करनी होगी, जिस के गुमान में वह अपराध दर अपराध करते हुए आज सलाखों के पीछे है.

गुरमीत सिंह के डेरा प्रमुख राम रहीम बनने की कहानी

गुरमीत सिंह अपने मातापिता की इकलौती संतान था. उस का जन्म 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोदिया में जट सिख परिवार में हुआ था. उस के पिता का नाम मघर सिंह व मां का नाम नसीब कौर है. मातापिता हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी थे.

महज 7 साल की उम्र में मातापिता ने 31 मार्च, 1974 को अपने बेटे गुरमीत सिंह को तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह के चरणों में समर्पित कर दिया था. जिस के बाद डेरे में ही उस की शिक्षादीक्षा शुरू हुई.

23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह ने देशभर से अनुयायियों का सत्संग बुलाया. उसी समय उन्होंने गुरमीत सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. गुरमीत सिंह हरियाणा के सिरसा में स्थित आध्यात्मिक संस्था डेरा सच्चा सौदा के तीसरे प्रमुख बने. जिस की स्थापना 1969 में शाह सतनाम सिंह के गुरु शाह मस्तानाजी ने की थी.

डेरा प्रमुख बनने से पहले ही गुरमीत सिंह का गृहस्थ जीवन शुरू हो चुका था. गुरमीत सिंह की 2 बेटियां और एक बेटा है. बड़ी बेटी चरणप्रीत और छोटी का नाम अमरप्रीत है. उस ने इन 2 बेटियों के अलावा एक बेटी हनीप्रीत को गोद लिया हुआ था. इस की बड़ी बेटी चरणप्रीत कौर के पति का नाम डा. शान-ए-मीत इंसां जबकि छोटी बेटी अमरप्रीत के पति का नाम रूह-ए-मीत इंसां है.

गुरमीत सिंह के बेटे जसमीत की शादी बठिंडा के पूर्व एमएलए हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी हुस्नमीत इंसां से हुई थी. डेरा सच्चा सौदा का साम्राज्य विदेशों तक फैला हुआ है.

अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड से ले कर आस्ट्रेलिया और यूएई तक उन के आश्रम व अनुयायी हैं. डेरे की तरफ से दावा किया जाता है कि दुनिया भर में उन के करीब 5 करोड़ अनुयायी हैं, जिन में से 25 लाख अनुयायी अकेले हरियाणा में ही मौजूद हैं.

बहरहाल, गद्दी संभालने के बाद गुरमीत सिंह ने सर्वधर्म समभाव का संदेश देने के लिए अपने नाम में सभी धर्मों के नाम शामिल किए और अपना नाम गुरमीत सिंह से बदल कर गुरमीत राम रहीम सिंह रख लिया. जिस कारण चौतरफा उन की प्रशंसा हुई.

उन्होंने जाति प्रथा की समाप्ति का आह्वान किया तथा अपने भक्तों से जातिवाचक नाम हटा कर ‘इंसां’ नाम लगाने को प्रेरित किया. गुरमीत राम रहीम ने कई वेश्याओं को अपनी पुत्री का दरजा दे कर अपनाया व अनुयायियों से आह्वान कर उन के घर बसाए.

उन्होंने सफाई के कई अभियान चलाए. ऐसे कई काम थे, जिस कारण संत गुरमीत राम रहीम की शोहरत दुनिया भर में फैलने लगी और उन के भक्तों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी.

लेकिन इंसान चाहे साधारण हो या कोई संत, अगर अपनी इच्छाओं और कामनाओं पर अंकुश न रख सके तो शोहरत को कलंक लगने में देर नहीं लगती. गुरमीत राम रहीम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

गुरमीत राम रहीम सन 2002 में पहली बार सुर्खियों में तब आए, जब उन के ऊपर डेरे की साध्वियों के यौनशोषण के आरोप लगे. उसी साल उन के खिलाफ यौन शोषण की खबर छापने वाले सिरसा के एक स्थानीय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या हो गई. इस के आरोप भी डेरामुखी पर ही लगे.

अचानक शोहरत की बुलंदियां छूते राम रहीम अपने किसी न किसी कारनामे के कारण आए दिन मीडिया की सुर्खियां बनने लगे. डेरामुखी राम रहीम ने अपने ऊपर लगे आरोपों से निकलने के लिए एक के बाद ऐसी गलतियां कीं, जिस से वह अपराध की दलदल में गहरे तक फंसते चले गए.

जब हुआ बेनकाब डेरे में चल रही अय्याशगाह का खेल

28 अगस्त, 2017 को सीबीआई कोर्ट ने पहली बार गुरमीत राम रहीम को 4 साध्वियों के बलात्कार मामले में 20 साल की जेल व 30 लाख रुपए जुरमाने की सजा सुनाई थी. जिस मामले में उन्हें सजा सुनाई गई थी. डेरे में चल रहे साध्वियों के यौन उत्पीड़न के खुलासे की कहानी बेहद रोचक है.

हुआ यूं कि साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक गुमनाम पत्र मिला. इस में एक गुमनाम साध्वी ने लिखा कि वह पंजाब की रहने वाली है और सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में 5 साल से रह रही है. डेरे में साध्वियों का यौन शोषण किया जा रहा है. लेटर में बठिंडा, कुरुक्षेत्र की कुछ साध्वियों के यौन शोषण किए जाने की बात भी लिखी थी.

साध्वी के पत्र में लिखी बातों का कुछ हिस्सा बेहद आपत्तिजनक था. इस गुमनाम पत्र के बाद से ही बवाल शुरू हो गया था.

2002 में गुमनाम साध्वी की लिखी चिट्ठी की गोपनीय जांच शुरू हो गई, लेकिन इसी बीच ये चिट्ठी मीडिया के जरिए सार्वजनिक हो गई, जिस पर संज्ञान लेते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच सौंप दी.

सीबीआई ने डेरे के मैनेजर इंद्रसेन से 1999 से 2001 तक की साध्वियों की लिस्ट मांगी तो 2005 में सीबीआई को 3 लिस्ट मिलीं. पहली लिस्ट में 53, दूसरी में 80 और तीसरी लिस्ट में 24 साध्वियों के नाम थे.

राम रहीम के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए सीबीआई ने 1997 से 2002 के बीच डेरा छोड़ चुकी 24 साध्वियों पर फोकस किया. इन में से 18 को ही सीबीआई ट्रेस कर पूछताछ कर पाई. इन में भी सिर्फ 2 ही साध्वियां अदालत तक पहुंचीं और और अपने बयान दर्ज कराए. इन शादीशुदा साध्वियों के बच्चे भी हैं.

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जो साध्वी सीबीआई के सामने आईं, उस में से फतेहाबाद की एक पूर्व साध्वी ने 4 मई, 2006 को सीबीआई के सामने बयान दर्ज कराया. उस ने बताया कि 1998 में डेरा में बतौर साध्वी जौइन किया था. वह शाह सतनामजी स्कूल में पढ़ाती थी. 6 महीने बाद उस की बहन भी साध्वी बन गई. बाबा ने उस का नाम नाजम और बहन का तसलीम रखा.

बाबा गर्ल्स हौस्टल के पास बनी अपनी गुफा में रहता था और गुफा के बाहर साध्वियों को ही संतरी रखता था. जिन की ड्यूटी रात 8 बजे से 12 और 12 बजे से 4 बजे 2 शिफ्टों में होती थी.

एक दिन उसे रात को 10 बजे गुफा में बुलाया गया, जहां बाबा ने उस के साथ जबरन रेप किया. वह रोती हुई गुफा से निकली और हौस्टल चली गई. वहां पर उस ने किसी को कुछ नहीं बताया. मगर उस दिन उस की बहन ने बताया कि बाबा उस के साथ भी रेप कर चुका है.

रेप होने के एक साल बाद उसे डेरे के मैनेजर ने बुलाया और कहा कि बाबा ने उसे गुफा में बुलाया है. मगर पहले हुई घटना के कारण उस ने गुफा में जाने से मना कर दिया.

इस के बाद मैनेजर ने उसे ऐसा करने पर भूखा रखने की धमकी दी. मजबूर हो कर उसे गुफा में दोबारा जाना पड़ा और बाबा ने उस के साथ फिर रेप किया.

दोनों बहनों ने हौस्टल की दूसरी साध्वियों को भी बाबा की गुफा से कई बार रोते हुए निकलते देखा था. एक बहन ने तो अपने साथ हुई घटना के तुरंत बाद डेरा छोड़ दिया. दूसरी साध्वी बहन भी डेरा छोड़ना चाहती थी, मगर उस के भाई की बेटियां डेरे में बीए की पढ़ाई कर रही थीं. इस कारण उसे वहां रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा.

फिर अप्रैल, 2001 में उस ने अपने भाई और उस की दोनों बेटियों समेत डेरा छोड़ दिया.

दोनों बहनों के डेरा छोड़ने के बाद ही प्रधानमंत्री कार्यालय को गुमनाम चिट्ठी मिली थी. बहरहाल, साध्वी के बयान कोर्ट में दर्ज कराने के बाद सीबीआई ने बाबा के साथ एक आरोपी अवतार सिंह, डेरा मैनेजर इंद्रसेन और मैनेजर कृष्णलाल को आरोपी बना कर उन का चंडीगढ़ और दिल्ली में लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया.

जहां झूठ पकड़ने वाली मशीन से खुलासा हुआ कि डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम साध्वियों का यौन शोषण करता था.

दोनों साध्वियों ने सीबीआई और अदालत को अपनी जो आपबीती सुनाई, उस में कहा था कि बाबा हर रोज साध्वियों को गुफा में बुलाता था और रेप करता था. उस के शीश महल जिसे वह गुफा कहता था, वहां से साध्वियां हर रोज रोते हुए बाहर निकलती थीं.

गुफा के आसपास बने हौस्टलों में 200 से ज्यादा सुंदर साध्वियों को रखा गया था.  बाबा की गुफा के आसपास रात के वक्त महिला साध्वियों को गार्ड के रूप में तैनात किया जाता था.  साध्वियों से दुष्कर्म का यही वो केस था, जिस के बाद गुरमीत राम रहीम नायक से खलनायक और संत से अपराधी बन गया था.

प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजे गए गुमनाम साध्वी के इस पत्र को पहले गृह मंत्रालय को सौंपा गया था. जहां से बाद में पत्र की जांच का जिम्मा सिरसा के सेशन जज को सौंपा गया. इसी दौरान हाईकोर्ट ने भी इस पर संज्ञान ले लिया था.

दिसंबर 2002 में  राम रहीम के खिलाफ धारा 376, 506 और 509 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया था. दिसंबर 2003 में  इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी दी गई. जांच अधिकारी सतीश डागर ने केस की जांच शुरू की और आखिर साल 2005-2006 में उस साध्वी को ढूंढ निकाला, जिस का यौन शोषण हुआ था.

जुलाई 2007 में  सीबीआई ने केस की जांच पूरी कर अंबाला सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी. अंबाला से केस की सुनवाई पंचकूला शिफ्ट कर दी गई. चार्जशीट के मुताबिक, डेरे में 1999 और 2001 में कुछ और साध्वियों का भी यौन शोषण हुआ, लेकिन वे मिल नहीं सकीं.

अगस्त 2008 में साध्वियों से दुष्कर्म  केस का ट्रायल शुरू हुआ और डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए. साल 2011 से 2016 तक  केस का ट्रायल चला और डेरा प्रमुख राम रहीम की ओर से बड़ेबड़े वकील लगातार जिरह करते नजर आए.

जुलाई 2016 तक चली केस की सुनवाई के दौरान कुल 52 गवाह पेश किए गए, इन में 15 प्रौसिक्यूशन और 37 डिफेंस के थे. और फिर वह दिन आ गया, जब राम रहीम की गरदन इस केस में पूरी तरह फंसी नजर आई और जून 2017 में कोर्ट ने डेरा प्रमुख के विदेश जाने पर रोक लगा दी.

17 अगस्त, 2017 को दोनों पक्षों की ओर से चल रही जिरह खत्म हो गई और फैसले के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की गई. 25 अगस्त, 2017 को पंचकूला सीबीआई कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने राम रहीम को उम्र कैद की सजा सुनाई.

राम रहीम के खिलाफ सजा दिए जाने के आदेश के बाद डेरा सर्मथकों ने पंचकूला और सिरसा में जम कर उत्पात मचाया और हिंसा की, जिस में करीब 41 लोगों की मौत हुई. अदालत के फैसले के खिलाफ सिरसा व पंचकूला में हुई हिंसा के बाद गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा पर पुलिस के छापे पडे़ तो वहां से हथियारों का जखीरा बरामद हुआ.

अगले भाग में पढ़ें- फ्रीज हुए डेरा के 90 बैंक एकाउंट

झारखंड का बिहारीकरण: बोली के जरिए तकरार

बिहार और ?ारखंड के बीच एक नया विवाद शुरू हो गया है. इस इलाकाई कार्ड के विवाद की आग को शुरू किया ?ारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उसे हवा दे दी है.

हेमंत सोरेन ने यह कह कर बवाल मचा दिया कि ?ारखंड में रहने वाले मगही और भोजपुरी बोलने वाले दबंग हैं और वे लोग ?ारखंड का बिहारीकरण कर रहे हैं, जिसे किसी भी हाल में बरदाश्त नहीं किया जाएगा.

वहीं नीतीश कुमार ने हेमंत सोरेन पर पलटवार करते हुए कहा कि सियासी फायदा उठाने के लिए ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए. इस के बाद बिहार और ?ारखंड के कई नेताओं ने एकदूसरे के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है.

गौरतलब है कि मार्च, 2018 में उस समय की भाजपा सरकार ने मगही, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका को दूसरी भाषा का दर्जा दिया था. अब हेमंत सरकार ने भाजपा की रोजगार नीति को पलट दिया है और ?ारखंड स्टेट सर्विस कमीशन में क्वालिफाइंग के लिए इन चारों भाषाओं को हटा दिया है.

इस मसले पर हेमंत सोरेन कहते हैं कि पहले की सरकार ने ऐसी बहाली नीति बना रखी थी, जिस से लोकल लोगों से ज्यादा बाहरी लोगों को मौका मिलता था. ?ारखंड राज्य आदिवासियों और स्थानीय लोगों की तरक्की के लिए बना था, न कि मगही और भोजपुरी बोलने वालों के लिए. बिहार और भोजपुरी व मगही भाषा के खिलाफ मोरचा खोल कर हेमंत सोरेन ने स्थानीयता का कार्ड खेला है.

हेमंत सोरेन यहीं नहीं रुकते हैं, बल्कि वे भोजपुरी और मगही बोलने वालों पर यह आरोप लगा देते हैं कि जब अलग ?ारखंड राज्य बनाने की लड़ाई चल रही थी, तो भोजपुरी और मगही बोलने वाले आदिवासियों को गंदीगंदी गालियां देते थे और आदिवासी औरतों के साथ गलत बरताव करते थे. इस से उन के मन में भोजपुरी और मगही वालों के खिलाफ काफी गुस्सा है.

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3 करोड़, 30 लाख की आबादी वाले ?ारखंड राज्य में भोजपुरी और मगही बोलने वालों की आबादी तकरीबन साढ़े 6 फीसदी है, वहीं आदिवासियों की तादाद 26 फीसदी है. हिंदी के अलावा बंगला, नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया, कुट्टमाली, कुडुख, संथाली, मुंडारी, हो वगैरह बोलियां बोली जाती हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाषा के इस बवाल के बारे में कहते हैं कि बिहार और ?ारखंड तो भाईभाई हैं. ऐसे मसलों पर सोचसम?ा कर बोलना चाहिए. अगर इस से किसी को सियासी फायदा मिलता है तो ले ले, लेकिन ऐसे मसलों से दूर ही रहना चाहिए.

पिछले दिनों हेमंत सोरेन ने कह दिया कि भोजुपरी और मगही उधर की भाषा है और इसे बोलने वाले लोग ?ारखंड को बिहार बनाना चाहते हैं. ?ारखंड पर कब्जा करना चाहते हैं. स्थानीय भाषा पर ये दोनों बाहरी भाषाएं हावी हैं. अब समय आ गया है कि ?ारखंड की तरक्की के लिए लोकल भाषाओं को बढ़ावा दिया जाए.

ऐसा नहीं करने से आदिवासी राज्य और इलाकाई बोलियों का वजूद ही खत्म हो जाएगा. दिलचस्प बात यह है कि हेमंत सोरेन की पढ़ाई पटना में हुई है और वे खुद अच्छीखासी मगही बोल लेते हैं.

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हेमंत सोरेन से पहले ?ारखंड के मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास कहते हैं कि हेमंत सोरेन की नीति ‘बांटो और राज करो’ की रही है. चुनाव से पहले उन्होंने  बढ़चढ़ कर ऐलान किया था कि 5 लाख लोगों को नौकरी दी जाएगी.

मुख्यमंत्री अपने वादे को भूल गए हैं. अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए वे ऐसा बचकाना बयान दे रहे हैं. मुख्यमंत्री को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे केवल आदिवासियों के मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि ?ारखंड की साढ़े 3 करोड़ जनता के सेवक हैं.

हेमंत सरकार के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव आग में घी डालते हुए कहते हैं कि क्या बिहार में संथाल और उरांव भाषा को मान्यता दी जाएगी? बिहार में रहने वाले संथाल और उरांव जातियों के लोगों की भाषा को सरकारी नौकरियों में मान्यता क्यों नहीं दी जाती है?

गौरतलब है कि बिहार के सहरसा, पूर्णियां, कटिहार, बांका, बेतिया और बगहा जिलों में संथाल और उरांव जातियों की बड़ी आबादी है.

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल कहते हैं कि ?ारखंड के मुख्यमंत्री समाज को बांटने की कोशिश में लगे हुए हैं, जो राज्य और जनता के भले के लिए नहीं है.

?ारखंड हाईकोर्ट के वकील अभय सिन्हा कहते हैं कि बिहार के पढ़ेलिखे लोग ?ारखंड सरकार में ऊंचे पदों पर कायम हैं, इसी से हेमंत सोरेन को चिंता हो रही है.

हेमंत सोरेन आदिवासियों की बेहतरीन पढ़ाईलिखाई का इंतजाम करने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के बजाय राजनीति का कार्ड खेल रहे हैं और आदिवासियों को लौलीपौप दिखा कर सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक मजबूत करने की फिराक में हैं.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अगर आदिवासियों को पढ़ालिखा कर बाहरी लोगों के बराबर खड़ा करेंगे, तभी आदिवासियों की तरक्की होगी और बाहरी लोगों का दबदबा भी खत्म होगा.

Balika Vadhu 2 की आनंदी बनेगी नायरा, देखें शिवांगी जोशी का नया लुक

स्टार प्लस का सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की नायारा जल्द ही टीवी पर वापसी करने जा रही है. जी हां, सही सुना आपने. नायारा यानी    शिवांगी जोशी जल्द ही पॉपुलर सीरियल बालिका वधू 2 में धमाकेदार एंट्री मारेंगी.

ऐसे में शिवांगी जोशी के फैंस इस खबर से काफी खुश है कि वह टीवी सीरियल में एक बार फिर दिखाई देंगी. इसी बीच शिवांगी जोशी का लुक सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. आईए दिखाते हैं, शिवांगी जोशी की कुछ खूबसूरत तस्वीरें.

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दरअसल इन तस्वीरों में रणदीप रॉय और शिवांगी जोशी नजर आ रहे हैं. फैंस इन तस्वीरों को खूब पसंद कर रहे हैं. इस तस्वीर में शिवांगी जोशी अपने कोस्टार रणदीप रॉय के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आ रही हैं.

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शिवांगी जोशी ने काफी दिनों से ‘बालिका वधू 2’ की शूटिंग में व्यस्त हैं.  उन्होंने शूटिंग के दौरान एक से बढ़कर एक पोज दिए हैं. फैंस को शिवांगी जोशी के नया अवतार काफी पसंद आ रहा है.

 

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खबरों के अनुसार सीरियल ‘बालिका वधू 2’ में जल्द ही लीप आने वाला है. लीप आने के बाद शिवांगी जोशी, श्रेया पटेल को रिप्लेस करेंगी.

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अनुपमा देगी वनराज का साथ तो बापूजी रखेंगे ये शर्त

टीवी सीरियल अनुपमा (Anupamaa) की कहानी एक नया मोड़ ले रही है. फैंस को कहानी का ट्रैक काफी पसंद आ रहा है. शो में इन दिनों हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि काव्या ने शाह हाउस अपने नाम कर लिया है. उसने शाह परिवार को खूब खरी-खोटी सुनाया. उसने बापूजी की सरेआम बेईज्जती भी की. इतना ही नही काव्या ने अनुपमा-वनराज के बच्चों को भी खूब सुनाया. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में दिखाया जा रहा है कि काव्या के इस हरकत से शाह परिवार हैरान है तो वनराज पूरी तरह बिखर गया है. शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि वनराज परिवार में अपना सम्मान वापस पाने के लिए और काव्या को सबक सिखाने के लिए नई चाल चलेगा.

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शो के एक प्रोमो के अनुसार वनराज कह रहा है कि वह अपने परिवार के लिए वहीं वनराज शाह है, जो उनके लिए कुछ भी कर सकता है. शो के आने वाले एपिसोड में वनराज एक नए लुक में नजर आएगा.

शो में दिखाया जा रहा है कि काव्या ने शाह हाउस पर अपना अधिकार जमाया है तो वहीं वनराज यह कोशिश कर रहा है कि उसकी जिंदगी पहले की तरह हो जाए. वह शाह परिवार के सामने उसे एक और मौका देने के लिए रिक्वेस्ट करता है.

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शो में आप ये भी देखेंगे कि वह अनुपमा की मदद लेगा. इसके बाद अनुपमा वनराज का साथ देगी और बापूजी से हाथ जोड़कर रिक्वेस्ट करेगी है कि वह वनराज को एक मौका जरूर दें.

 

तो दूसरी तरफ बापूजी अनुपमा से यह कहते हैं कि वह वनराज को एक मौका जरूर देंगे लेकिन अनुपमा को उनकी एक शर्त माननी पड़ेगी. बापूजी अनुपमा से कहते हैं कि अगर वह अनुज को अपना जीवनसाथी चुनने के लिए तैयार हो जाएगी तो वे वनराज का साथ देंगे. शो में अब ये देखना होगा कि क्या अनुपमा बापूजी की ये शर्त मानेगी?

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