‘रंग जाऊं तेरे रंग में’: सृष्टि से ब्याह करने के लिए बारात लेकर पहुंचे ध्रुव पांडे, क्या हो पाएगी ये शादी?

3 जनवरी से ‘‘दंगल’’ टीवी पर सोमवार से  शनिवार रात साढ़े नौ बजे प्रसारित हो रहे सीरियल ‘‘रंग जाउं तेरे रंग में’’ की कहानी अति दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गयी है. लेकिन कहीं न कहीं इसमें अंधविश्वास व नियति को ही बढ़ावा दिया जा रहा है. बहरहाल, अब तक इस सीरियल में लखनऊ निवासी काशीनाथ पांडे (सुदेश बेरी) के बेटे ध्रुव पांडे (करम राजपाल ) की शादी का रिश्ता होते होते 15 बार टूट चुका है. जिसके चलते काशीनाथ पांडे बहुत परेशान हैं.

यूँ तो उनके पास किसी चीज की कमी नही है. धन दौलत व मान सम्मान सब कुछ है. मगर उन्हे अपने बेटे ध्रुव की  शादी की चिंता सताती रहती है. खैर, अब उनकी यह चिंता खत्म होने जा रही है. उनके बेटे ध्रुव पांडे के लिए वाराणसी निवासी सुरेंद्र चैबे (चैतन्य अदीब) की बेटी सृष्टि (केतकी कदम ) मिल गयी है. पंडित जी ने ध्रुव व सृष्टि की जन्म कुंडली देखकर कह दिया है कि दोनो का जीवन सुखमय रहेगा. काशीनाथ पांडे बड़े जोश के साथ अपने बेटे ध्रुव की बारात लेकर सुरेंद्र चैंबे के घर भी पहुँच गए हैं. उनका आदर सत्कार भी सही हो रहा है. शादी का जश्न अपने शबाब पर है. पर अभी भी सवाल है कि क्या ध्रुव व सृष्टि की शादी होगी?

सूत्रों की माने तो सृष्टि को ध्रुव ब्याह नहीं करना है. इस बात से सभी अनजान हैं. इसी वजह से इधर ध्रुव बारात लेकर सृष्टि के घर पहुँचते हैं, उधर सृष्टि चुपचाप बिना किसी को बताए घर छोड़कर चली जाती है. अब क्या होगा? पंडित जी ने तो ध्रुव व सृष्टि की  कुंडली देखकर कई दावे किए थे. अब उन दावों का क्या होगा? सीरियल से जुड़े सूत्र की माने तो ध्रुव के साथ सृष्टि की छोटी बहन धानी(मेघा रे ) का ब्याह होता है. सूत्रों की माने तो ऐसे मौके पर पंडित जी, काशीनाथ पांडे को यही समझाने वाले है कि विधि कि विधान यानी कि नियति को कोई नही बदल सकता. इसलिए नियति का खेल समझते हुए वही करें,जो हो रहा है.

पर अहम सवाल हे कि जब कुछ विधि का विधान होता है,तो फिर यह पंडित जी कुंडली देखकर जो दावे करते हैं, उसका आधार क्या होता है? क्या  यह महज झूठ का पिटारा होता है? खैर ? देखना है कि लेखक व निर्देशक सीरियल ‘रंग जाउं तेरे रंग में’ इस मसले को किस तरह से दिखाते हैं? क्या इसमें कुंडली मिलान को लेकर कोई कमेंट करते हैं अथवा नहीं? फिलहाल सीरियल में ध्रुव व सृष्टि की शादी का जश्न मनाया जा रहा है. सभी लोग काफी उत्साहित हैं. शादी की खास तैयारियां की गई हैं. सीरियल में इसे भव्य पैमाने पर फिल्माया जा रहा है. बैंड बाजा बारात, रौशनी, जगमगाहट, जश्न , नृत्य के साथ ही सभी के चेहरे पर उत्साह व खुशी का माहौल नजर आ रहा है. काशीनाथ पांडे अति उत्साहित हैं. वह शेरवानी और पगड़ी पहने हुए काफी स्मार्ट नजर आने वाले हैं.

इस संबंध में बात करते हुए काशीनाथ पांडे का किरदार निभा रहे अभिनेता सुदेश बेरी ने कहा- “मैं बहुत ही खुश हूं, मेरे बेटे की शादी है. हमें अपने बेटे ध्रुव के लिए सृष्टि जैसी लड़की चाहिए थी.

सृ ष्टि एक ऐसी लड़की है, जो पूरे परिवार को एक साथ रखना जानती है और घर में वह और प्यार लाएगी. काफी बड़े पैमाने पर शादी की तैयारियां की गई हैं लेकिन टीवी सीरियल की शादी है तो इसमें कुछ जबरदस्त ट्विस्ट भी आना स्वाभाविक है. पर अभी नही बता सकता.’’ ध्रुव के छोटे भाई अभिषेक पांडे की भूमिका निभा रहे उदित शुक्ला कहते हैं-‘‘भैया की शादी है, तो हम सभी काफी खुश हैं.मगर यह ख़ुशी कब तक रहेगी और आगे कौन सा ड्रामा होने वाला है, इसकी सही सही जानकारी मुझे नही है.’’ यूँ तो लगभग हर कलाकार ने इस बात को कबूल किया कि यह टीवी की शादी है, तो स्वाभाविक तौर पर इसमें कुछ ट्विस्ट आने वाला है. तो क्या सूत्रों की बात सच साबित होगी?

ध्रुव पांडे की भूमिका निभाने वाले अभिनेता करम राजपाल से जब हमने बात की,तो उन्होंने कहा-‘‘ शादी का यह दृश्य वाकई सेट पर बहुत उत्साह लेकर आया है. हम सभी शादी के खास कपड़ों में तैयार हुए हैं और इसका मजा ले रहे हैं. हम जब बारात लेकर लड़की वालों के घर पहुंचे तो हमारा स्वागत बड़े अच्छे से किया गया. मगर अंदर क्या होगा, यह राज है.फिलहाल ध्रुव सोच रहा है कि सृष्टि हमारे परिवार के रंग में अच्छी तरह से रंग जाएगी. शादी में कुछ ड्रामा भी होने वाला है मगर उसके लिए आपको दंगल टीवी पर यह सीरियल देखना होगा.काफी रोचक मोड़ आने वाला है. हमने कल एक गाली वाला दृश्य फिल्माया ,जिसमें एक रस्म के चलते लड़की वाले लड़के वालों को गालियां देते हैं, यह दरअसल शादी की एक रस्म है जिसके बारे में मुझे भी नही पता था.’’ अभिनेता करम राजपाल ने गाली की रस्म का जिक्र किया, तो हमें याद आया कि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बरीक्षा की रस्म के वक्त लड़की पक्ष द्वारा लड़के पक्ष के पुरुषों और महिलाओं के स्वागत में अति गंदी गालियां लोकगीत शैली में गायी जाती है.यह रस्म कब शुरू हुई थी? किसने शुरू की थी, कोई नही जानता.मगर लोग यह मानते हैं कि यदि समाज में बिना इस अवसर के यदि यही गालियाँ दे दी जाएं, तो लोग एक दूसरे के  खून के प्यासे हो जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी रस्म को सीरियल में दिखाने का औचित्य क्या है? इस तरह की रस्मों से दूरी बनाए रखना सही होता?

वैसे कुछ कलाकारों ने स्वीकार किया कि गालियों की इस रस्म के चलते माहौल बिगड़ जाता है,जिसे बामुश्किल संभाला जाता है. इस अवसर पर सृष्टि की छोटी बहन धानी चैबे का किरदार निभा रही अभिनेत्री मेघा रे रंग बिरंगी पोशाक में बेहद खूबसूरत और खुश नजर आ रही थीं. मेघा ने कहा- ‘‘मेरी दीदी की शादी हो रही है, तो सबसे ज्यादा उत्साहित हूँ. मैंने ही दीदी का मेकअप से लेकर उनके ड्रेस से लेकर घर को सजाने तक का काम किया है. बाकी नही पता.’’

Such A Boring Day: शहनाज़ गिल का लेटेस्ट वीडियो हुआ वायरल, आखिर क्यों बोर हो रही हैं सना

शहनाज़ गिल के फेमस डायलॉग ‘त्वाडा कुत्ता टॉमी, साडा कुत्ता कुत्ता’… को अपने म्यूजिक से रीमिक्स करके सोशल मीडिया पर धूम मचाने  वाले म्यूजिक प्रोडूसर यशराज मुखाटे (Yashraj Mukhate) एक बार फिर से सुर्ख़ियों में है. यशराज का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है, जिसमें वो शहनाज़ के एक और डायलॉग ‘बोरिंग डे ‘को अपना म्यूजिक दे रहे हैं. बता दें की बिग बॉस फेम शहनाज़ गिल के पहले डायलॉग वीडियो को उनके फैंस ने काफी पसंद किया था.

 

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मज़ेदार बात ये है की इस वीडियो को बनाने में खुद शहनाज़ ने यशराज की मदद की. वीडियो में शहनाज़ गिल यशराज के साथ जमकर डांस और मस्ती करते हुए नज़र आ रही हैं. सोशल मीडिया पर इस गाने ने धूम मचाई हुई है . फैंस वीडियो को काफी पसंद कर रहे हैं और  लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं.

यश राज  ने अपने और शहनाज़ के इस वीडियो को ‘बोरिंग डे’ नाम भी दिया है. यशराज मुखाटे  पहले से ही  शहनाज़ गिल के बिग बॉस डायलॉगस को अपने  म्यूजिक के जादू से रिमिक्स बनाते आ रहे हैं. अब इस नए वीडियो से यशराज ने शहनाज़ के फैंस को खुश किया है. फैंस बोल रहे हैं  ‘मज़ा आ गया ‘

एक युवती के साथ मेरा अफेयर है. वह भी नौकरी करती है, हर बार वह खर्च मुझ पर टाल देती है. मैं क्या करूं?

सवाल
मैं 21 वर्षीय युवक हूं. ग्रैजुएशन की पढ़ाई करने के साथसाथ मैं नौकरी भी करता हूं. 3 साल से एक युवती के साथ मेरा अफेयर है. वह युवती भी जौब करती है. हफ्ते में एक बार हम एक रेस्तरां में मिलते हैं. पहले हम दोनों मिलजुल कर खर्च किया करते थे, लेकिन 5-6 महीने से मैं नोटिस कर रहा हूं कि वह खर्च मुझ पर टाल देती है. शर्म से मैं कुछ कह नहीं पाता, हालांकि उस की जौब भी अच्छीखासी है, जबकि मुझे अपना वेतन घर देना पड़ता है, क्योंकि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. मैं क्या करूं? डर लगता है कि अगर उस से पूछूं तो कहीं उसे खो न बैठूं?

जवाब
अगर आप यों ही शर्म करते रहेंगे तो फिर खर्च करने का अफसोस मत करिए. आप की कुछ आर्थिक मजबूरियां हैं, ये सब जानते हुए भी आप समझौता न ही करें तो अच्छा है. अगर युवती समझती है कि आप रईस परिवार से नाता रखते हैं तो आप उस से दोटूक बात कह कर वन बाय वन खर्च करने की बात कहें. उसे भी यह समझ आ जाएगा कि सिंगल खर्चे की बात दूसरे का हाजमा खराब कर सकती है.

याद रखिए, जिस ने की शर्म, उस के फूटे कर्म. जब उस युवती ने धीरेधीरे अपना हाथ पीछे खींच लिया है तो आप भी रोमांस करिए, बात करिए और घर को चलते बनिए. युवती अगर भूख लगने की बात कहे तो कह दीजिए पेट फुल है, अगर उसे खाना है तो मजे से खाए.

सत्यकथा: ठग भाभियों की टोली

सुरेशचंद्र रोहरा

‘‘आओआओ, भाभी बहुत दिनों बाद आई हो, आओ.’’ कह कर सरिता

कुर्रे ने सुनीता साहू उर्फ कुमकुम का स्वागत करते हुए ड्राइंग रूम में बैठाया.

‘‘बहन, मैं इधर से गुजर रही थी तुम्हारी याद आ गई. सोचा, तुम्हारा हालचाल ले लूं और हो सके तो तुम्हें भी मालामाल करवा दूं.’’ सुनीता साहू उर्फ  कुमकुम ने बड़े ही मीठे स्वर से सरिता कुर्रे से कहा.

अपने मालामाल होने की बात सुन कर के सरिता कुर्रे चौकन्नी हो गई. उस ने कहा, ‘‘भाभी, क्या बात है कैसे मालामाल करोगी भला बताओ तो!’’

इस पर कुमकुम ने बिंदास हो कर कहा, ‘‘आप को सोना चाहिए क्या, बताओ. असली गोल्ड बहुत ही कम पैसों में?’’

‘‘अच्छा भाभी, भला वो कैसे?’’ सविता कुर्रे ने आश्चर्य व्यक्त किया.

‘‘देखो, मैं तो चाहती हूं कि मेरे जितने भी जानपहचान वाले हैं, वे इस का फायदा उठा लें. मेरे कुछ ऐसे लोगों से संबंध हैं कि हमें बहुत सस्ते में सोना मिल सकता है. कुछ लोग तो मालामाल हो भी गए हैं.’’यह सुन कर सरिता की बांछें खिल गईं. मोहक अदा से उस ने कहा, ‘‘ऐसा है तो बताओ मैं भी सोना ले लूं.’’

‘‘बताऊंगी, बताती हूं थोड़ा चैन की सांस तो ले लेने दो.’’ कह कर कुमकुम सरिता कुर्रे के  यहां ड्राइंगरूम में आराम से पसर कर बैठ गई.

सरिता कुर्रे ने सुनीता साहू उर्फ कुमकुम की अब खूब आवभगत करनी शुरू कर दी. उस के लिए किचन से कुछ मीठा, नमकीन ले आई और पूछा, ‘‘क्या पियोगी चाय या ठंडा?’’

कुमकुम ने सहज भाव से कहा, ‘‘बहन तकलीफ मत करो, जो घर में है चलेगा.’’ और आराम से बैठ कर के मिठाई पर हाथ साफ करने लगी.

चायपानी करने के बाद सुनीता उर्फ कुमकुम ने रहस्यमय स्वर में सरिता कुर्रे से कहा, ‘‘अभी सोने का दाम क्या चल रहा है तुम्हें मालूम है?’’

‘‘हां, कुछकुछ तो पता है लगभग 40 हजार रुपए तोले का रेट हो गया है.’’

‘‘हां, तुम सही कह रही हो. आज के समय में 42 हजार रुपए तोला का मार्केट भाव है. तुम्हें पता है मैं कितने में दिलवा सकती हूं.’’

‘‘बताओ, कितने में मिल जाएगा.’’ उत्सुकतावश सरिता ने कहा.

‘‘अगर मैं आप को 25 से 28 हजार रुपए तोला सोना दिलवा दूं तो बताओ, कैसा रहेगा?’’

यह सुन कर के सरिता कुर्रे खुशी से उछल पड़ी और बोली, ‘‘ऐसा है तो मैं 30 लाख रुपए का सोना ले लूंगी.’’

‘‘ठीक है, तुम पैसे का इंतजाम करो. मगर हां सुनो, यह बात ज्यादा हल्ला नहीं करने की है. हमें चुपचाप फायदा उठा लेना है.’’

 

यह सुन कर के कुमकुम गंभीर हो गई और सिर हिलाते हुए सहमति से उस ने कहा, ‘‘तुम सही कह रही हो, दीवारों के भी कान होते हैं. मैं ध्यान रखूंगी किसी को भी नहीं बताऊंगी. मगर तुम मुझे जल्द से जल्द सोना दिलवा दो.’’

‘‘हां बहन, सोने में ही इनवैस्ट करना सब से समझदारी का काम है. अब देखो न 5 साल पहले 20 हजार रुपए तोला सोना हुआ करता था. आज इतना महंगा हो गया है और हर साल और भी ज्यादा महंगा होता जाएगा.’’

सरिता कुर्रे सुनीता साहू उर्फ कुमकुम की बातों से सहमत थी. वह महसूस कर रही थी कि सुनीता उस का बहुत भला करने आई है. उस ने फिर भी जिज्ञासावश पूछा, ‘‘भाभी, आखिर तुम मुझे इतना सस्ता सोना कहां से और कैसे दिलओगी.’’

‘‘अब सुनो, मैं बताती हूं तुम से क्या छिपाना. तुम तो मेरी बहन जैसी हो, क्या है कि तुम ने मणप्पुरम गोल्ड का नाम सुना है. यह एक बैंक है, जो लोगों का सोना गिरवी रख कर के उन्हें पैसे लोन देता है. कुछ जरूरत के मारे, बेचारे लोग यहां पैसा लेते हैं, अपना सोना भी गिरवी रख देते हैं और फिर बाद में छुड़ा नहीं पाते. मैं तुम को बताऊं मेरा एक भाई इसी कंपनी में काम करता है. बस जो लोग अपना सोना यहां से नहीं ले पाते, उसे सेटिंग कर के हम सस्ते में ले लेते हैं. अब तुम इस बात को किसी को बताना नहीं, नहीं तो तुम्हारा खेल बिगड़ जाएगा.’’

सविता कुर्रे ने यह बात सुनी तो उसे पूरी तरह विश्वास हो गया कि सुनीता साहू उर्फ कुमकुम की एकएक बात सौ फीसदी सही है.

चलतेचलते कुमकुम ने कहा, ‘‘ तुम  रुपए की व्यवस्था जितनी जल्दी हो सके कर लो. फिर देखना कैसे तुम्हें मैं मालामाल करवा दूंगी.’’

सुनीता उर्फ कुमकुम चली गई. मगर सरिता कुर्रे की तो मानो रातों की नींद उड़ गई. वह रात भर सोचती रही कि किस तरह वह आने वाले समय में सोना खरीद लेगी और मालामाल हो जाएगी. रात भर जागजाग के उस ने अपने सारे बैंक बैलेंस के रुपयों की गिनती लगानी शुरू कर दी.

उस ने जोड़ा तो उस के पास विभिन्न खातों में लगभग 40 लाख रुपए का अमाउंट होने का अंदाजा हो गया. उस ने मन ही मन निर्णय किया कि कल ही 1-2 बैंक से 8-10 लाख  रुपए इकट्ठा कर के कुमकुम को पहली किस्त में दे कर के सोना ले लेगी. उस ने सोचा एक साथ दांव लगाना ठीक नहीं, पहले कम पैसे दे कर के देख लो क्या होता है.

 

सरिता को अपनी होशियारी पर नाज हो आया. वह सोचने लगी कि यही सही रहेगा एक साथ 40 लाख रुपए का सोना लेना और रुपए देना ठीक नहीं रहेगा. कहीं कोई गड़बड़ हो गई तो…

उस ने यह बात अपने पति को भी नहीं बताई और सोचा कि पहले 10 लाख रुपए का सोना मैं अपने हाथ ले लूं फिर पतिदेव को बताऊंगी तो वह भी कितने खुश होंगे.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गांव खमतराई में सविता कुर्रे अपने परिवार के साथ रहती थी. यहीं पास ही भनपुरी में सुनीता साहू उर्फ कुमकुम हाल ही में उड़ीसा नवापारा से आ कर रहने लगी थी. अपने अच्छे व्यवहार से आसपास के लोगों से हिलमिल कर सब की भाभी बन गई थी.

दूसरे दिन सरिता कुर्रे अपने स्थानीय बैंक पहुंची और वहां से 7 लाख रुपए निकलवा कर के घर आ कर सुनीता साहू को फोन लगाया और उसे बताया, ‘‘भाभी, पैसों का इंतजाम हो गया है. तुम कब आओगी?’’

यह सुन कर सहज भाव से कुमकुम ने कहा, ‘‘मैं अभी तो कहीं व्यस्त हूं. शाम को आती हूं.’’

 

सरिता कुर्रे बहुत बेचैन थी. दोपहर को एक दफा और फोन कर के कुमकुम से बात की और आश्वस्त हो गई कि शाम को 4 बजे कुमकुम आएगी और ठीक शाम को 4 बजे कुमकुम घर पर आ पहुंची तो मानो सरिता कुर्रे की खुशी का ठिकाना नहीं था.

कुमकुम के साथ पूर्णिमा और प्रतिभा गीता महानंदा नामक 2 महिलाएं भी थीं. कुमकुम ने उन का भी सरिता से परिचय कराया और बताया कि ये मेरी सहेलियां हैं और मेरी मदद करती हैं.

तीनों महिलाओं ने सरिता को ऊंचेऊंचे ख्वाब दिखा करके कहा तुम्हारे कितना पैसा है बताओ.

इस पर सरिता ने 7 लाख रुपए ला कर के उन के सामने रख दिया और कहा, ‘‘अभी इतने ही रुपए की व्यवस्था हुई है. मुझे इतने का सोना दिलवा दो.’’

‘‘अच्छी बात है हम तुम्हें कल 7 लाख रुपए का सोना दिलवा देंगी.’’

यह कह कर कुमकुम ने 7 लाख रुपए अपने पास रखे और सरिता कुर्रे को आश्वस्त कर तीनों चली गईं.

यह मार्च, 2019 का महीना था. इस दरमियान सरिता कुर्रे कई दिनों तक सुनीता साहू का इंतजार करती रही. फोन पर बात होती तो वह कहती, ‘‘बहन, मैं अचानक शहर से बाहर चली गई हूं 2 दिन बाद आ रही हूं, तुम बिलकुल चिंता मत करो. यह समझो कि बैंक में पैसा तुम्हारा सुरक्षित है.’’

सरिता कुर्रे को इस तरह बारबार विश्वास दिलाया जाता रहा. इस दरमियान खुद कुमकुम ने सरिता को फोन किया और उसे भरोसा दिलाती रही.

एक दिन अचानक सुनीता साहू उर्फ कुमकुम अनुसइया, पूर्णिमा, प्रतिभा गीता महानंद इन 4 महिलाओं के साथ घर आई और बोली,  ‘‘बहन, तुम तनिक भी चिंता न करो. कहो तो अभी तुम्हें मैं पैसे लौटा दूंगी, बैंक का मामला है, लो तुम खुद बैंक कर्मचारी से बात कर लो.’’

यह सुन कर के सरिता कुर्रे को ढांढस बंधा. कुमकुम ने उसे एक नंबर दिया जोकि मणप्पुरम बैंक के एक अधिकारी शेखर का बताया गया. सरिता कुर्रे ने बात की तो बताया गया कि वह मणप्पुरम गोल्ड लोन बैंक का अधिकारी बोल रहा है. सरिता ने जब सुनीता साहू के बारे में पूछा तो उधर से जवाब मिला, ‘‘हां, हम उस को जानते हैं. उस का हमारे यहां 85 तोला सोना गिरवी रखा हुआ है जो सुरक्षित है.’’

बैंक अधिकारी शेखर से बात करने के बाद सरिता के टूटते मन को ढांढस बंधा. उसे सुकून महसूस हुआ. जब सुनीता ने देखा कि सरिता कुर्रे निश्चिंत हो गई है तो उस ने कहा, ‘‘बहन, देखो मैं तुम्हारे लिए कुछ सोना लाई हूं. इसे अभी रख लो बाकी मैं 82 तोला तुम्हें और जल्दी दे दूंगी. मैं पैसे की व्यवस्था कर रही हूं सारा पैसा दे कर के एक साथ पूरा सोना में बैंक से ले लूंगी.’’

इतना सुनते ही सरिता बोली, ‘‘अब मुझे तुम पर पूरा विश्वास हो गया है. बताओ, तुम्हें कुल कितना पैसा वहां जमा करना है?’’

इस पर सुनीता ने कहा, ‘‘मुझे 14 लाख रुपए और चाहिए इस के बाद मैं सारा गोल्ड मणप्पुरम गोल्ड लोन ब्रांच से छुड़वा लूंगी.’’

सुनीता को सरिता ने आश्वस्त किया, ‘‘ठीक है, ऐसा है तो रुपए का मैं इंतजाम कर देती हूं.’’

दूसरे दिन सरिता कुर्रे ने अपने पति व घर के अन्य लोगों को बताए बगैर बैंक से सारे रुपए निकाले और शाम को जब कुमकुम अपनी महिला मंडली के साथ आई तो 14 लाख रुपए उस के सामने रख दिए गए.

यह देख कर के सुनीता ने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘बहन, यह तुम ने बहुत अच्छा किया. अब मैं ये पैसे जमा कर के सारा सोना कल ही बैंक से छुड़वा कर के तुम्हें दे दूंगी.’’ यह कह कर  सुनीता वहां से चली गई.

दूसरे दिन जब सरिता कुर्रे ने फोन किया तो सुनीता ने कहा, ‘‘मैं ने पैसे जमा कर दिए हैं. बस, थोड़ी सी प्रक्रिया बाकी है. जैसे ही गोल्ड हाथ आएगा मैं आ कर के तुम्हें सौंप दूंगी.’’

2-3 दिन ऐसे ही गुजर गए. कोई न कोई बहाना बना कर के सुनीता साहू उसे टाल रही थी. अब सरिता कुर्रे की चिंता बढ़ती चली गई. एक दिन अचानक उस की एक सहेली रमा  ने कहा, ‘‘देखो, कैसेकैसे ठग पैदा हो गए हैं. कवर्धा में सोना दिलाने के नाम पर कुछ महिलाओं ने ठगी की है, मामला पुलिस तक पहुंच गया है.’’

यह सुन कर सरिता कुर्रे पसीनापसीना हो गई और सोचने लगी कि क्या सचमुच ऐसा हुआ है? क्या वह भी कुमकुम के हाथों ठग ली गई है? उस ने रमा से कहा, ‘‘बहन, कुमकुम कैसी महिला है?’’

इस पर हंसते हुए रमा ने कहा, ‘‘सुना है कुमकुम रोज पति बदलती है. अभी चौथे पति के साथ रह रही है. उस का रंगढंग मुझे ठीक नहीं लगता, क्यों क्या बात है?’’

‘‘अब क्या बताऊं, एक दिन कुमकुम आई थी और मुझ से पैसे मांग रही थी कुछ लाख रुपए.’’ सरिता कुर्रे ने बात छिपाते हुए कहा.

‘‘लाखों रुपए! उस की औकात है कुछ लाख रुपए गिनने की?’’  रमा ने व्यंग्यभाव से  कहा, ‘‘देखो, कुमकुम जैसी महिलाओं पर तुम एक पैसे का भी भरोसा नहीं करना.’’

महिला मित्र रमा की बातें सुन कर के सविता कुर्रे की आंखें खुल गईं. उस ने सारी बातें रमा को बताईं और उस से सलाहमशविरा किया.

 

सरिता कुर्रे उसी दोपहर रमा के साथ अचानक सुनीता साहू के घर भनपुरी पहुंच गई. सुनीता घर पर ही थी. सरिता ने कहा, ‘‘कहां है मेरा सोना, कब दोगी, कितने दिन हो गए.’’

यह सुन कर के सुनीता साहू ने उसे अपने पास बैठाया और कहा, ‘‘बहन, मुझे कुछ समय दो.’’

‘‘मैं और कितना समय दूं. मैं कुछ नहीं जानती, मुझे मेरा सोना दो नहीं तो मैं पुलिस में जा रही हूं.’’ सरिता कुर्रे ने साफसाफ चेतावनी देते हुए कहा.

यह सुन कर के सुनीता साहू मुसकराई और बोली, ‘‘यह तुम बहुत बड़ी गलती करोगी, पुलिस भला हमारा क्या कर लेगी.’’

इतने में घर के भीतर से 2-3 पुरुष बाहर आए. ये थे पति मुकेश चौबे, उस के दोस्त सिंधु वैष्णव, बंटी उर्फ शेखर. इन लोगों ने सरिता से बातचीत में साफसाफ कहा, ‘‘तुम पैसे भूल जाओ. क्या सबूत है कि तुम ने पैसे दिए हैं?’’

यह सुन कर सरिता कुर्रे मानो आसमान से जमीन पर आ गिरी. उस ने तड़प कर कहा, ‘‘तुम लोग इस तरीके से झूठ पर उतर आओगे, मैं ने सोचा नहीं था.’’

सरिता ने सुनीता साहू की ओर देखते हुए कहा, ‘‘तुम मुझे अगर आज पैसे नहीं दोगी तो ठीक नहीं होगा.’’ और यह कह कर के सरिता रमा के साथ घर से चली गई.

दिन बीतता चला गया, जब उसे लगा कि वह बुरी तरीके से ठग ली गई है तो उस की आंखों के आगे अंधेरा घिर आया.

अगले दिन सरिता कुर्रे सहेली रमा के साथ  थाना खमतराई पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई. उस ने थानाप्रभारी को बताया कि वह शिवानंद नगर सेक्टर-1 खमतराई रायपुर में रहती है. फरवरी, 2019 में सुनीता उर्फ कुमकुम साहू के साथ अन्य महिलाएं उस के घर आईं तथा उसे सस्ते दाम में सोना देने का प्रस्ताव रखा. कुछ दिन बाद वह सभी दोबारा आईं तथा 85 तोला सोना 28 हजार रुपए प्रति तोला देने की बात की.

इस तरह से उन्होंने उस से सोना दिलाने के नाम पर कुल 22 लाख 70 हजार रुपए ठग लिए.

सोना देने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी की घटना को डीआईजी एवं एसएसपी अजय यादव ने गंभीरता से लेते हुए एएसपी (सिटी) लखन पटले, एसपी (सिटी उरला) अक्षय कुमार एवं थानाप्रभारी खमतराई विनीत दुबे को आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए.

आरोपियों की गिरफ्तारी में लगी टीम ने आरोपियों की खोजबीन शुरू कर दी. आखिर पुलिस को आरोपी सुनीता साहू उर्फ कुमकुम, पी. अनुसुईया राव, पूर्णिमा साहू, प्रतिभा मिश्रा एवं गीता महानंद को गिरफ्तार करने में सफलता मिल गई. उन से सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पूछताछ में पता चला कि सुनीता साहू उर्फ कुमकुम उड़ीसा के जिला नवापारा की है. सिर्फ छठवीं कक्षा तक पढ़ी है.

उस की जब पति से नहीं बनी तो उसे छोड़ कर रायपुर आ गई और यहां महेश राव से विवाह कर लिया. कुछ समय बाद जब उस से भी नहीं पटी तो तीसरा पति बनाया और वर्तमान में चौथे पति मुकेश चौबे के साथ वह रह रही थी और उस का जीवन ऐश के साथ बीत रहा था. रोज गहने और कपड़े खरीदती, महंगी शराब पीती थी. अपने गिरोह के पुरुष सदस्य को मणप्पुरम कंपनी का कर्मी बताते हुए उस से मोबाइल फोन पर बात करा दी जाती थी, जिस से शिकार आसानी से इन पर भरोसा कर इन के झांसे में आ जाते थे.

आरोपियों द्वारा जिला कवर्धा में भी इसी तरीके से लोगों को सस्ते दाम में सोना देने का झांसा दे कर लगभग 17 लाख रुपए की ठगी की गई थी. कथा लिखे जाने तक पुलिस द्वारा घटना में शामिल सुनीता साहू उर्फ कुमकुम सहित 5 महिला आरोपियों व उस के चौथे पति मुकेश चौबे सहित एक पुरुष साथी मुश्ताक को गिरफ्तार कर लिया था तथा शेष आरोपियों की पतासाजी कर उन के छिपने के हर संभावित स्थानों में लगातार छापेमारी कर उन की गिरफ्तारी के हरसंभव प्रयास किए जा रहे थे.

महिलाओं के ठग गिरोह की सरगना सुनीता साहू ने रामेश्वर नगर की रहने वाली नरगिस बेगम को अपनी बेटी रानी के एक्सीडेंट की झूठी कहानी सुना कर इमोशनल किया था. सुनीता साहू ने सोना फाइनेंस कंपनी में गिरवी होने की बात कही. बारबार बेटी की इमोशनल कहानी सुन कर नरगिस उस की बात में आ गई और कुमकुम को 2 लाख रुपए दे दिए.

पैसा नहीं मिला तो नरगिस बेगम ने मणप्पुरम गोल्ड लोन बैंक में जा कर गिरवी रखे जेवर के बारे में पता किया तो ठगी के राज से परदा उठ गया. वहां बताया गया कि कुमकुम का कोई जेवर गिरवी था ही नहीं. नरगिस को यह समझते देर नहीं लगी कि कुमकुम ने उसे ठग लिया है.

पुलिस की जांच में सामने आया कि कुमकुम इस के पहले भी जिला कवर्धा में पैसा डबल करने की फरजी स्कीम चला चुकी है. कवर्धा में वह 17 लाख की हेराफेरी कर चुकी है. शातिर कुमकुम हर साल अपना पता बदल लिया करती थी. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि 4 शादियां करने के पीछे की असल वजह क्या है, दूसरी तरफ ठग भाभियों के गैंग का शिकार हुई महिलाएं अपने रुपयों के वापस मिलने की आस में हैं.

इसी तरह पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपियों द्वारा सोना दिलाने के नाम पर  इंदु सिंह से 2 लाख 77 हजार रुपए, नरगिस साखरे से ढाई लाख रुपए, अनिता वर्मा से साढ़े 5 लाख रुपए, मिसेज चौहान से एक लाख 70 हजार रुपए तथा अन्य लोगों को बैंक में रखे सोना को सस्ते में दिलाने के नाम से कुल 35 लाख 18 हजार रुपए की ठगी की गई थी.

खमतराई पुलिस ने 28 जून, 2021 को आरोपी ठग महिलाओं के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 34 के तहत गिरफ्तार कर उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां माननीय न्यायालय द्वारा इन ठग महिलाओं को सेंट्रल जेल रायपुर भेज दिया गया.

नागिन 6 Promo : Rubina या Nia Sharma, कौन होगी टीवी की नई नागिन?

टीवी पर्दे पर एक बार फिर से एकता कपूर अपने नये सुपरनैचुरल शो नागिन 6 से दस्तक देंगी. इस शो की नई नागिन के रोल के लिए रुबीना दिलैक और निया शर्मा का नाम काफ़ी सुनने को मिल रहा था.  ऐसे में रुबीना दिलैक के फैंस कयास लगा रहे हैं कि रुबीना ही इस बार नागिन का रोल करेंगी. रुबीना दिलैक टीवी पर्दे की लोकप्रिय एक्ट्रेस्स में से एक मानी जाती हैं. उनके फैंस भी चाहते हैं कि वो ही नागिन के रोल में दिखें.

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लेकिन इसी बीच एकता कपूर ने नागिन 6 का प्रोमो सोशल मीडिया पर शेयर करके फैंस की कंफ्यूज़न बढ़ा दी है. प्रोमो में नागिन  कोरोना का सामना करते हुए दिखाई दे रही है, हालाँकि नागिन का चेहरा प्रोमो में  साफ नहीं दिख रहा है.

फैंस सिर्फ़ नागिन के फिगर को देख कर कयास लगा रहे हैं कि शो की नई नागिन कोई और नहीं बल्कि उनकी फ़ेवरेट रुबीना ही हैं, वहीं दूसरी ओर निया शर्मा के फैंस को लग रहा है कि यह फिगर रुबीना का नहीं बल्कि उनकी फ़ेवरेट एक्ट्रेस्स निया शर्मा का है. सोशल मीडिया पर दोनों के फैंस अपनी फ़ेवरेट एक्ट्रेस्स का नाम ले रहे हैं. सभी बातों को देखकर यही लगता है कि रुबीना दिलैक और निया शर्मा के फैंस कंफ्यूज़ हैं क़ी आख़िर कौन होगी शो की नई नागिन ?

जब सब की नजर में आप दिखना चाहें  नंबर वन

नया साल नई उम्मीद के साथ आता है, इसलिए लोग साल की शुरुआत को खुशनुमा तरीके से मनाते हैं. इस बार चीजें थोड़ी नियंत्रण में हैं तो एहतियात के साथ सजनासंवरना और खुशियां मनाना बनता है तो आइए जानते हैं क्या आउटफिट पहनें.

नए साल को हमेशा गर्मजोशी के साथ आमंत्रित किया जाता रहा है. उस दिन चारों तरफ रोशनी से पूरा देश जगमगा उठता है. लेकिन पिछले 2 सालों से कोविड ने सभी उत्सवों के सैलिब्रेशन पर पाबंदी सी लगा दी है. कोविड के कम होने और सभी लोगों के 2 वैक्सीन लग चुकी होने की वजह से इस बार सभी ने न्यू ईयर के सैलिब्रेशन को एक बार फिर अच्छी तरह से मनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. होटल और रैस्तरां सभी प्रीबुक हो चुके हैं. लेकिन कोविड के औमिक्रोन वैरिएंट के बढ़ने की वजह से महाराष्ट्र में 144 धारा लगा दी गई है ताकि लोग समूह में एक जगह इकट्ठा न हों. यह सही भी है, क्योंकि कोविड की दूसरी लहर का असर समने के पहले ही काफी लोगों ने अपनी जान गंवाई है. ऐसे में पूरा विश्व अब गलतियां करने से खुद को रोक रहा है पर इतना तय है कि इस बार नए साल को, हलके थोड़े में ही सही, पर मनाएंगे सभी अवश्य.

होड़ लेटैस्ट ट्रैंड की

फैशन हर साल मौसम के अनुसार बदलता रहता है. इसलिए हर साल के ट्रैंड को जानना आवश्यक है. इस बार नए साल की पार्टी में सभी ने कुछ न कुछ तैयारी अपने स्तर पर की है. सब से अधिक उत्साहित यूथ हैं. मुंबई की साक्षी कहती हैं, ‘‘मैं ने नए साल की पार्टी के लिए ब्लैक कलर का शिमरी गाउन सिलवाया है, क्योंकि इस बार यह फैशन में है.’’

22 साल की नूपुर ने लैदर स्कर्ट और लैदर जैकेट खरीदी है. इस के अलावा कुछ यूथ फैशन डिजाइनर्स के पास जा कर लेटैस्ट ट्रैंड की पोशाक खरीद रहे हैं, ताकि वे पार्टी में सैंटर औफ अट्रैक्शन बने रहें. गर्ल्स उस दिन लाइटवेट ड्रैस अधिक प्रिफर करती हैं. न्यू ईयर पार्टी में अधिकतर वैस्टर्न वियर ही पहने जाते हैं. इस में वन पीस, शौर्ट ड्रैस पहनने से इसे संभालना आसान होता है.

एंजौय करना है प्राथमिकता

नए साल के फैशन ट्रैंड के बारे में पूछे जाने पर सैलिब्रिटी डिजाइनर श्रुति संचेती कहती हैं, ‘‘कोविड की वजह से सभी ने पिछले 2 सालों से घर के कपड़े पजामा और टीशर्ट के साथ ही नए साल का स्वागत किया था, लेकिन इस साल सभी ने एंजौय करने को सोचा था, लेकिन औमिक्रोन ने इस पर थोड़ी पाबंदी लगा दी है. मेरे हिसाब से कमोबेश सभी नजदीक के रैस्तरां और होटलों में जाएंगे, लेकिन छोटे ग्रुप्स में जाएंगे और कोविड में वही सही भी रहेगा. इस बार चीयरफुल, ग्लिटरी, सीक्वैंस, शाइनी और शिमर वाली ड्रैसेस फैशन में हैं. ट्रैंड में रैड और ब्लैक पार्टी कलर हावी रहेगा, क्योंकि इन दोनों रंगों की ड्रैस काफी स्टाइलिश हैं, जो पार्टी में काफी हौट और बोल्ड लुक देती हैं.’’

ब्राइट कलर्स, जिस में बरगंडी, वाइन, बौटल ग्रीन, पर्पल और रौयल ब्लू जैसे डार्क कलर्स आते हैं और जो विंटर के चर्चित रंग हैं, उन की प्राथमिकता रहेगी. इस के अलावा सीक्वैंस के जैकेट, एक ही रंग के पैंट, जैकेट और टौप होंगे. ये इस साल यूथ को बहुत पसंद आ रहे हैं. ये नए साल के फैशन ट्रैंड में भी हैं. इन में भी डार्क कलर्स के साथ ब्राइट प्रिंट होने पर उत्सव का रंग उन में दिखेगा. लोग घर पर रहरह कर थक चुके हैं, इसलिए वे थोड़ाबहुत फैशन के मूड में हैं.

डिजाइनर श्रुति संचेती आगे कहती हैं, ‘‘जो लोग घर से दूर किसी स्थान पर नए साल को मनाने जाते हैं, वे मैक्सी, कफ्तान, शौर्ट्स आदि पहन सकते हैं. इस साल में बदलाव बहुत आया है.

‘‘एक्सेसरीज की अगर बात करें तो एकसाथ कई चेन्स गले में पहनना या एक अच्छे कान के सैट को पहनना ट्रैंड में है. अधिक एक्सेसरीज इस बार फैशन में नहीं है. इसलिए ड्रैस के अनुसार एक्सेसरीज पहनें. इस बार सभी उत्साहित हैं, पार्टियां छोटी रहेंगी पर स्पिरिट उतनी ही हाई रहेगी.’’

ट्रैंड फ्लौवरी फैशन का

डिजाइनर राहुल मिश्रा के कपड़े हाईएंड क्लासी फैशन में आते हैं. लेकिन इस साल उन्होंने नए साल के लिए भी कुछ नए क्रिएशंस मार्केट में उतारे हैं. उन का कहना है कि नए साल में मुंबई जैसे शहर, जहां कम ठंड होती है, में गर्ल्स लाइट फ्रीफ्लोइंग, फ्लौवरी, शिफौन की ड्रैस, फ्रौक्स पहन सकती हैं. लेकिन ठंड वाले स्थानों पर फुलस्लीव शौर्ट ड्रैस, लैदर जैकेट, शौर्ट स्कर्ट, गाउंस आदि पहनें तो अच्छा रहेगा. वाइब्रैंट कलर्स, जिस में औरेंज, रैड, ब्लैक, ग्रीन आदि प्रमुख होने के साथसाथ, उस पर मोटिफ्स, एंब्रौयडरी, नैट्स, सीक्वैंस आदि किसी को भी एक नया लुक दे सकते हैं.

इस बार नए साल में खूबसूरत पोशाक के साथ मेकअप ट्रैंड हलका और न्यूड ही रहेगा, ताकि ड्रैस के साथ मेकअप मैच करते हुए एक खूबसूरत मुसकान हो. लेकिन इन सब के साथसाथ फौलो करना होगा कोविड के नियम, ताकि आप बाद में भी स्वस्थ रहें और नए साल को एंजौय करें.

 गैंगमैन की  सिक्योरिटी तय हो

 अली खान

एक रिपोर्ट से यह बात उभर कर सामने आई है कि भीषण सर्दीगरमी, बारिश और कुहरे में रेल मुसाफिरों को महफूज घर पहुंचाने में हर साल औसतन 100 गैंगमैन ट्रेन की पटरियों पर कट कर मर जाते हैं.

आज देश और दुनिया में आधुनिक तकनीकी युग में तकरीबन सभी काम मशीनों से किए जा रहे हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक के बावजूद गैंगमैन ट्रेन सिक्योरिटी की रीढ़ माने जाते हैं.

मौजूदा समय में मशीनों के इस्तेमाल ने काम को आसान जरूर किया है, पर ट्रैक पर काम करने के लिए गरमी, बरसात और ठंड हर मौसम का सामना अभी भी गैंगमैन ही करता है.

जब भी रेलवे की उपलब्धि की बात होती है, तो इन के काम के योगदान की कोई बात नहीं करता है, जबकि रेल को आगे बढ़ाने में ट्रैकमैन व गैंगमैन का अहम रोल होता है. आज भी शीतलहर व हाड़ कंपकंपाती ठंड में खुले आसमान के नीचे जंगल व सुनसान जगहों में रह कर हमारे सफर को सुखद बनाने का कोई काम करता है, तो वे हैं रेलवे ट्रैकमैन व गैंगमैन.

रेलवे में इन का पद भले ही छोटा है, तनख्वाह भी काफी कम है, लेकिन ये लोग जिम्मेदारी काफी बड़ी निभाते हैं. हम ट्रेनों में चैन की नींद लेते हैं, लेकिन ये खुले आसमान के नीचे रेल पटरियों की निगरानी करते हैं. इन की जिंदगी जितनी मुश्किल होती है, उतनी ही जोखिम भरी भी.

पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि गैंगमैन हर दिन हादसों के शिकार हो रहे हैं. लिहाजा, गैंगमैन की सिक्योरिटी तय किए जाने की जरूरत है.

यह बेहद दुख की बात है कि भले ही गैंगमैन की जान बचाने के लिए साल 2016 में संसद में उन को सिक्योरिटी के उपकरण देने का ऐलान किया था, लेकिन रेलवे के पास पैसा नहीं होने के चलते 5 साल में 20 फीसदी गैंगमैन को ही ऐसे सिक्योरिटी के उपकरण दिए जा सके हैं. लिहाजा, सिक्योरिटी की कमी में गैंगमैन हादसों के शिकार हो रहे हैं.

रेल मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2021 तक रेल पटरियों की मरम्मत और निगरानी काम के दौरान 451 गैंगमैन ट्रेन से कट कर मारे गए यानी ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन में हर साल औसतन 100 गैंगमैन पटरियों पर दम तोड़ रहे हैं. हालांकि, रेल यूनियन का दावा है कि हर साल औसतन 250 से 300 गैंगमैन हादसों के शिकार होते हैं.

अब सवाल है कि गैंगमैन आखिर हादसों के शिकार क्यों हो जाते हैं? बता दें कि रेलवे की सभी ट्रैक लाइनों (प्रमुख रेल मार्ग) पर क्षमता से ज्यादा 120 से 200 फीसदी सवारी ट्रेन चलाई जाती हैं. लिहाजा, गैंगमैन को पटरी की मरम्मत और रखरखाव के लिए ब्लौक नहीं मिलते हैं. ज्यादातर हादसे डबल लाइन या ट्रिपल लाइन सैक्शन पर होते हैं.

ट्रेन नजदीक आने पर जब वे दूसरी पटरी पर जाते हैं, तभी उस पर भी ट्रेन के आने से गैंगमैन कट कर मर जाते हैं. इस के अलावा काम के दबाव में ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं देती है.

देश में कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश के हरदोई में रेलवे की लापरवाही से 4 गैंगमैनों की मौत हो गई थी. वे गैंगमैन संडीला और उमरताली के बीच रेलवे ट्रैक पर काम कर रहे थे. उन्हें न तो ट्रेन के आने की कोई सूचना दी गई और न ही संकेत. तेज रफ्तार से आ रही ट्रेन गैंगमैनों के ऊपर से गुजर गई.

वे गैंगमैन रेलवे ट्रैक पर बेधड़क हो कर काम कर रहे थे. उन के काम करने की जगह से कुछ दूरी पर उन्होंने लाल रंग का कपड़ा भी बांध रखा था. तभी वहां अचानक कोलकाता से अमृतसर जा रही ‘अकालतख्त ऐक्सप्रैस’ ट्रेन आ गई और उन सभी गैंगमैनों को रौंदते हुए तेज रफ्तार से निकल गई थी. ऐसे हादसे देश में आएदिन होते रहते हैं.

ऐसे में सवाल मौजूं है कि आखिर गैंगमैन की सिक्योरिटी कैसे तय हो? गैंगमैन को बचाने के लिए हैलमैट, सुरक्षा जूते, सैल टौर्च, बैकपैक टूल जैसे खास उपकरण मुहैया कराए जाने की जरूरत है.

याद रहे कि रेल मंत्री रह चुके सुरेश प्रभु ने साल 2016-17 के रेल बजट भाषण में गैंगमैन को ‘रक्षक’ नामक मौडर्न डिवाइस देने का ऐलान किया था. कमर में पहनने वाली यह डिवाइस गैंगमैन को 400 मीटर से 500 मीटर की दूरी पर ट्रेन के आने पर ‘बीप’ के साथ अलर्ट कर देगी. कुहरे, बारिश व सर्दी के खराब मौसम में ट्रेन नहीं दिखाई पड़ने

पर यह डिवाइस गैंगमैन की जिंदगी बचाएगी.

हालांकि, इस डिवाइस को अभी तक गैंगमैन को मुहैया नहीं करवाया जा सका है. जानकारों का यह भी कहना है कि एक डिवाइस की कीमत तकरीबन 80,000 रुपए है.

सभी गैंगमैन को डिवाइस देने में रेलवे के तकरीबन 240 करोड़ रुपए खर्च होंगे. पैसे की कमी के चलते रेलवे को यह डिवाइस खरीदने में काफी समय लग सकता है.

गौरतलब है कि इस समय भारतीय रेलवे में तकरीबन 3 लाख गैंगमैन काम कर रहे हैं. इतनी बड़ी तादाद में काम कर रहे मुलाजिमों की सिक्योरिटी तय करना रेलवे की जिम्मेदारी है. इस दिशा में तत्काल कदम उठाए जाने की सख्त जरूरत है.

यह तो पागल है

अपनी पत्नी सरला को अस्पताल के इमरजैंसी विभाग में भरती करवा कर मैं उसी के पास कुरसी पर बैठ गया. डाक्टर ने देखते ही कह दिया था कि इसे जहर दिया गया है और यह पुलिस केस है. मैं ने उन से प्रार्थना की कि आप इन का इलाज करें, पुलिस को मैं खुद बुलवाता हूं. मैं सेना का पूर्व कर्नल हूं. मैं ने उन को अपना आईकार्ड दिखाया, ‘‘प्लीज, मेरी पत्नी को बचा लीजिए.’’

डाक्टर ने एक बार मेरी ओर देखा, फिर तुरंत इलाज शुरू कर दिया. मैं ने अपने क्लब के मित्र डीसीपी मोहित को सारी बात बता कर तुरंत पुलिस भेजने का आग्रह किया. उस ने डाक्टर से भी बात की. वे अपने कार्य में व्यस्त हो गए. मैं बाहर रखी कुरसी पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद पुलिस इंस्पैक्टर और 2 कौंस्टेबल को आते देखा. उन में एक महिला कौंस्टेबल थी.

मैं भाग कर उन के पास गया, ‘‘इंस्पैक्टर, मैं कर्नल चोपड़ा, मैं ने ही डीसीपी मोहित साहब से आप को भेजने के लिए कहा था.’’

पुलिस इंस्पैक्टर थोड़ी देर मेरे पास रुके, फिर कहा, ‘‘कर्नल साहब, आप थोड़ी देर यहीं रुकिए, मैं डाक्टरों से बात कर के हाजिर होता हूं.’’

मैं वहीं रुक गया. मैं ने दूर से देखा, डाक्टर कमरे से बाहर आ रहे थे. शायद उन्होंने अपना इलाज पूरा कर लिया था. इंस्पैक्टर ने डाक्टर से बात की और धीरेधीरे चल कर मेरे पास आ गए.

मैं ने इंस्पैक्टर से पूछा, ‘‘डाक्टर ने क्या कहा? कैसी है मेरी पत्नी? क्या वह खतरे से बाहर है, क्या मैं उस से मिल सकता हूं?’’ एकसाथ मैं ने कई प्रश्न दाग दिए.

‘‘अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. डाक्टर अपना इलाज पूरा कर चुके हैं. उन की सांसें चल रही हैं. लेकिन बेहोश हैं. 72 घंटे औब्जर्वेशन में रहेंगी. होश में आने पर उन के बयान लिए जाएंगे. तब तक आप उन से नहीं मिल सकते. हमें यह भी पता चल जाएगा कि उन को कौन सा जहर दिया गया है,’’ इंस्पैक्टर ने कहा और मुझे गहरी नजरों से देखते हुए पूछा, ‘‘बताएं कि वास्तव में हुआ क्या था?’’

‘‘दोपहर 3 बजे हम लंच करते हैं. लंच करने से पहले मैं वाशरूम गया और हाथ धोए. सरला, मेरी पत्नी, लंच शुरू कर चुकी थी. मैं ने कुरसी खींची और लंच करने के लिए बैठ गया. अभी पहला कौर मेरे हाथ में ही था कि वह कुरसी से नीचे गिर गई. मुंह से झाग निकलने लगा. मैं समझ गया, उस के खाने में जहर है. मैं तुरंत उस को कार में बैठा कर अस्पताल ले आया.’’

‘‘दोपहर का खाना कौन बनाता है?’’

‘‘मेड खाना बनाती है घर की बड़ी बहू के निर्देशन में.’’

‘‘बड़ी बहू इस समय घर में मिलेगी?’’

‘‘नहीं, खाना बनवाने के बाद वह यह कह कर अपने मायके चली गई कि उस की मां बीमार है, उस को देखने जा रही है.’’

‘‘इस का मतलब है, वह खाना अभी भी टेबल पर पड़ा होगा?’’

‘‘जी, हां.’’

‘‘और कौनकौन है, घर में?’’

‘‘इस समय तो घर में कोई नहीं होगा. मेरे दोनों बेटों का औफिस ग्रेटर नोएडा में है. वे दोनों 11 बजे तक औफिस के लिए निकल जाते हैं. छोटी बहू गुड़गांव में काम करती है. वह सुबह ही घर से निकल जाती है और शाम को घर आती है. दोनों पोते सुबह ही स्कूल के लिए चले जाते हैं. अब तक आ गए होंगे. मैं गार्ड को कह आया था कि उन से कहना, दादू, दादी को ले कर अस्पताल गए हैं, वे पार्क में खेलते रहें.’’

इंस्पैक्टर ने साथ खड़े कौंस्टेबल से कहा, ‘‘आप कर्नल साहब के साथ इन के फ्लैट में जाएं और टेबल पर पड़ा सारा खाना उठा कर ले आएं. किचन में पड़े खाने के सैंपल भी ले लें. पीने के पानी का सैंपल भी लेना न भूलना. ठहरो, मैं ने फोरैंसिक टीम को बुलाया है. वह अभी आती होगी. उन को साथ ले कर जाना. वे अपने हिसाब से सारे सैंपल ले लेंगे.’’

‘‘घर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं?’’ इंस्पैक्टर ने मुझ से पूछा.

‘‘जी, नहीं.’’

‘‘सेना के बड़े अधिकारी हो कर भी कैमरे न लगवा कर आप ने कितनी बड़ी भूल की है. यह तो आज की अहम जरूरत है. यह पता भी चल गया कि जहर दिया गया है तो इसे प्रूफ करना मुश्किल होगा. कैमरे होने से आसानी होती. खैर, जो होगा, देखा जाएगा.’’

 

इतनी देर में फोरैंसिक टीम भी आ गई. उन को निर्देश दे कर इंस्पैक्टर ने मुझ से उन के साथ जाने के लिए कहा.

‘‘आप ने अपने बेटों को बताया?’’

‘‘नहीं, मैं आप के साथ व्यस्त था.’’

‘‘आप मुझे अपना मोबाइल दे दें और नाम बता दें. मैं उन को सूचना दे दूंगा.’’ इंस्पैक्टर ने मुझ से मोबाइल ले लिया.

फोरैंसिक टीम को सारी कार्यवाही के लिए एक घंटा लगा. टीम के सदस्यों ने जहर की शीशी ढूंढ़ ली. चूहे मारने का जहर था. मैं जब पोतों को ले कर दोबारा अस्पताल पहुंचा तो मेरे दोनों बेटे आ चुके थे. एक महिला कौंस्टेबल, जो सरला के पास खड़ी थी, को छोड़ कर बाकी पुलिस टीम जा चुकी थी. मुझे देखते ही, दोनों बेटे मेरे पास आ गए.

‘‘पापा, क्या हुआ?’’

‘‘मैं ने सारी घटना के बारे में बताया.’’

‘‘राजी कहां है?’’ बड़े बेटे ने पूछा.

‘‘कह कर गई थी कि उस की मां बीमार है, उस को देखने जा रही है. तुम्हें तो बताया होगा?’’

‘‘नहीं, मुझे कहां बता कर जाती है.’’

‘‘वह तुम्हारे हाथ से निकल चुकी है. मैं तुम्हें समझाता रहा कि जमाना बदल गया है. एक ही छत के नीचे रहना मुश्किल है. संयुक्त परिवार का सपना, एक सपना ही रह गया है. पर तुम ने मेरी एक बात न सुनी. तब भी जब तुम ने रोहित के साथ पार्टनरशिप की थी. तुम्हें 50-60 लाख रुपए का चूना लगा कर चला गया.

‘‘तुम्हें अपनी पत्नी के बारे में सबकुछ पता था. मौल में चोरी करते रंगेहाथों पकड़ी गई थी. चोरी की हद यह थी कि हम कैंटीन से 2-3 महीने के लिए सामान लाते थे और यह पैक की पैक चायपत्ती, साबुन, टूथपेस्ट और जाने क्याक्या चोरी कर के अपने मायके दे आती थी और वे मांबाप कैसे भूखेनंगे होंगे जो बेटी के घर के सामान से घर चलाते थे. जब हम ने अपने कमरे में सामान रखना शुरू किया तो बात स्पष्ट होने में देर नहीं लगी.

‘‘चोरी की हद यहां तक थी कि तुम्हारी जेबों से पैसे निकलने लगे. घर में आए कैश की गड्डियों से नोट गुम होने लगे. तुम ने कैश हमारे पास रखना शुरू किया. तब कहीं जा कर चोरी रुकी. यही नहीं, बच्चों के सारे नएनए कपड़े मायके दे आती. बच्चे जब कपड़ों के बारे में पूछते तो उस के पास कोई जवाब नहीं होता. तुम्हारे पास उस पर हाथ उठाने के अलावा कोई चारा नहीं होता.

‘‘अब तो वह इतनी बेशर्म हो गई है कि मार का भी कोई असर नहीं होता. वह पागल हो गई है घर में सबकुछ होते हुए भी. मानता हूं, औरत को मारना बुरी बात है, गुनाह है पर तुम्हारी मजबूरी भी है. ऐसी स्थिति में किया भी क्या जा सकता है.

‘‘तुम्हें तब भी समझ नहीं आई. दूसरी सोसाइटी की दीवारें फांदती हुई पकड़ी गई. उन के गार्डो ने तुम्हें बताया. 5 बार घर में पुलिस आई कि तुम्हारी मम्मी तुम्हें सिखाती है और तुम उसे मारते हो. जबकि सारे उलटे काम वह करती है. हमें बच्चों के जूठे दूध की चाय पिलाती थी. बच्चों का बचा जूठा पानी पिलाती थी. झूठा पानी न हो तो गंदे टैंक का पानी पिला देती थी. हमारे पेट इतने खराब हो जाते थे कि हमें अस्पताल में दाखिल होना पड़ता था. पिछली बार तो तुम्हारी मम्मी मरतेमरते बची थी.

‘‘जब से हम अपना पानी खुद भरने लगे, तब से ठीक हैं.’’ मैं थोड़ी देर के लिए सांस लेने के लिए रुका, ‘‘तुम मारते हो और सभी दहेज मांगते हैं, इस के लिए वह मंत्रीजी के पास चली गई. पुलिस आयुक्त के पास चली गई. कहीं बात नहीं बनी तो वुमेन सैल में केस कर दिया. उस के लिए हम सब 3 महीने परेशान रहे, तुम अच्छी तरह जानते हो. तुम्हारी ससुराल के 10-10 लोग तुम्हें दबाने और मारने के लिए घर तक पहुंच गए. तुम हर जगह अपने रसूख से बच गए, वह बात अलग है. वरना उस ने तुम्हें और हमें जेल भिजवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. इतना सब होने पर भी तुम उसे घर ले आए जबकि वह घर में रहने लायक लड़की नहीं थी.

‘‘हम सब लिखित माफीनामे के बिना उसे घर लाना नहीं चाहते थे. उस के लिए मैं ने ही नहीं, बल्कि रिश्तेदारों ने भी ड्राफ्ट बना कर दिए पर तुम बिना किसी लिखतपढ़त के उसे घर ले आए. परिणाम क्या हुआ, तुम जानते हो. वुमेन सैल में तुम्हारे और उस के बीच क्या समझौता हुआ, हमें नहीं पता. तुम भी उस के साथ मिले हुए हो. तुम केवल अपने स्वार्थ के लिए हमें अपने पास रखे हो. तुम महास्वार्थी हो.

‘‘शायद बच्चों के कारण तुम्हारा उसे घर लाना तुम्हारी मजबूरी रही होगी या तुम मुकदमेबाजी नहीं चाहते होगे. पर, जिन बच्चों के लिए तुम उसे घर ले कर आए, उन का क्या हुआ? पढ़ने के लिए तुम्हें अपनी बेटी को होस्टल भेजना पड़ा और बेटे को भेजने के लिए तैयार हो. उस ने तुम्हें हर जगह धोखा दिया. तुम्हें किन परिस्थितियों में उस का 5वें महीने में गर्भपात करवाना पड़ा, तुम्हें पता है. उस ने तुम्हें बताया ही नहीं कि वह गर्भवती है. पूछा तो क्या बताया कि उसे पता ही नहीं चला. यह मानने वाली बात नहीं है कि कोई लड़की गर्भवती हो और उसे पता न हो.’’

‘‘जब हम ने तुम्हें दूसरे घर जाने के लिए डैडलाइन दे दी तो तुम ने खाना बनाने वाली रख दी. ऐसा करना भी तुम्हारी मजबूरी रही होगी. हमारा खाना बनाने के लिए मना कर दिया होगा. वह दोपहर का खाना कैसा गंदा और खराब बनाती थी, तुम जानते थे. मिनरल वाटर होते हुए भी, टैंक के पानी से खाना बनाती थी.

‘‘मैं ने तुम्हारी मम्मी से आशंका व्यक्त की थी कि यह पागल हो गई है. यह कुछ भी कर सकती है. हमें जहर भी दे सकती है. किचन में कैमरे लगवाओ, नौकरानी और राजी पर नजर रखी जा सकेगी. तुम ने हामी भी भरी, परंतु ऐसा किया नहीं. और नतीजा तुम्हारे सामने है. वह तो शुक्र करो कि खाना तुम्हारी मम्मी ने पहले खाया और मैं उसे अस्पताल ले आया. अगर मैं भी खा लेता तो हम दोनों ही मर जाते. अस्पताल तक कोई नहीं पहुंच पाता.’’

इतने में पुलिस इंस्पैक्टर आए और कहने लगे, ‘‘आप सब को थाने चल कर बयान देने हैं. डीसीपी साहब इस के लिए वहीं बैठे हैं.’’ थाने पहुंचे तो मेरे मित्र डीसीपी मोहित साहब बयान लेने के लिए बैठे थे. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे सब से पहले आप की छोटी बहू के बयान लेने हैं. पता करें, वह स्कूल से आ गई हो, तो तुरंत बुला लें.’’

छोटी बहू आई तो उसे सीधे डीसीपी साहब के सामने पेश किया गया. उसे हम में से किसी से मिलने नहीं दिया गया. डीसीपी साहब ने उसे अपने सामने कुरसी पर बैठा, बयान लेने शुरू किए.

2 इंस्पैक्टर बातचीत रिकौर्ड करने के लिए तैयार खड़े थे. एक लिपिबद्ध करने के लिए और एक वीडियोग्राफी के लिए.

डीसीपी साहब ने पूछना शुरू किया-

‘‘आप का नाम?’’

‘‘जी, निवेदिका.’’

‘‘आप की शादी कब हुई? कितने वर्षों से आप कर्नल चोपड़ा साहब की बहू हैं?’’

‘‘जी, मेरी शादी 2011 में हुई थी.

6 वर्ष हो गए.’’

‘‘आप के कोई बच्चा?’’

‘‘जी, एक बेटा है जो मौडर्न स्कूल में दूसरी क्लास में पढ़ता है.’’

‘‘आप को अपनी सास और ससुर से कोई समस्या? मेरे कहने का मतलब वे अच्छे या आम सासससुर की तरह तंग करते हैं?’’

‘‘सर, मेरे सासससुर जैसा कोई नहीं हो सकता. वे इतने जैंटल हैं कि उन का दुश्मन भी उन को बुरा नहीं कह सकता. मेरे पापा नहीं हैं. कर्नल साहब ने इतना प्यार दिया कि मैं पापा को भूल गई. वे दोनों अपने किसी भी बच्चे पर भार नहीं हैं. पैंशन उन की इतनी आती है कि अच्छेअच्छों की सैलरी नहीं है. दवा का खर्चा भी सरकार देती है. कैंटीन की सुविधा अलग से है.’’

‘‘फिर समस्या कहां है?’’

‘‘सर, समस्या राजी के दिमाग में है, उस के विचारों में है. उस के गंदे संस्कारों में है जो उस की मां ने उसे विरासत में दिए. सर, मां की प्रयोगशाला में बेटी पलती और बड़ी होती है, संस्कार पाती है. अगर मां अच्छी है तो बेटी भी अच्छी होगी. अगर मां खराब है तो मान लें, बेटी कभी अच्छी नहीं होगी. यही सत्य है.

‘‘सर, सत्य यह भी है कि राजी महाचोर है. मेरे मायके से 5 किलो दान में आई मूंग की दाल भी चोरी कर के ले गई. मेरे घर से आया शगुन का लिफाफा भी चोरी कर लिया, उस की बेटी ने ऐसा करते खुद देखा. थोड़ा सा गुस्सा आने पर जो अपनी बेटी का बस्ता और किताबें कमरे के बाहर फेंक सकती है, वह पागल नहीं तो और क्या है. उस की बेटी चाहे होस्टल चली गई परंतु यह बात वह कभी नहीं भूल पाई.’’

‘‘ठीक है, मुझे आप के ही बयान लेने थे. सास के बाद आप ही राजी की सब से बड़ी राइवल हैं.’’

उसी समय एक कौंस्टेबल अंदर आया और कहा, ‘‘सर, राजी अपने मायके में पकड़ी गई है और उस ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया है. उस की मां भी साथ है.’’

‘‘उन को अंदर बुलाओ. कर्नल साहब, उन के बेटों को भी बुलाओ.’’

थोड़ी देर बाद हम सब डीसीपी साहब के सामने थे. राजी और उस की मां भी थीं. राजी की मां ने कहा, ‘‘सर, यह तो पागल है. उसी पागलपन के दौरे में इस ने अपनी सास को जहर दिया. ये रहे उस के पागलपन के कागज. हम शादी के बाद भी इस का इलाज करवाते रहे हैं.’’

‘‘क्या? यह बीमारी शादी से पहले की है?’’

‘‘जी हां, सर.’’

‘‘क्या आप ने राजी की ससुराल वालों को इस के बारे में बताया था?’’ डीसीपी साहब ने पूछा.

‘‘सर, बता देते तो इस की शादी नहीं होती. वह कुंआरी रह जाती.’’

‘‘अच्छा था, कुंआरी रह जाती. एक अच्छाभला परिवार बरबाद तो न होता. आप ने अपनी पागल लड़की को थोप कर गुनाह किया है. इस की सख्त से सख्त सजा मिलेगी. आप भी बराबर की गुनाहगार हैं. दोनों को इस की सजा मिलेगी.’’

‘‘डीसीपी साहब किसी पागल लड़की को इस प्रकार थोपने की क्रिया ही गुनाह है. कानून इन को सजा भी देगा. पर हमारे बेटे की जो जिंदगी बरबाद हुई उस का क्या? हो सकता है, इस के पागलपन का प्रभाव हमारी अगली पीढ़ी पर भी पड़े. उस का कौन जिम्मेदार होगा? हमारा खानदान बरबाद हो गया. सबकुछ खत्म हो गया.’’

‘‘मानता हूं, कर्नल साहब, इस की पीड़ा आप को और आप के बेटे को जीवनभर सहनी पड़ेगी, लेकिन कोई कानून इस मामले में आप की मदद नहीं कर पाएगा.’’

थाने से हम घर आ गए. सरला की तबीयत ठीक हो गई थी. वह अस्पताल से घर आ गई थी. महीनों वह इस हादसे को भूल नहीं पाई थी. कानून ने राजी और उस की मां को 7-7 साल कैद की सजा सुनाई थी. जज ने अपने फैसले में लिखा था कि औरतों के प्रति गुनाह होते तो सुना था लेकिन जो इन्होंने किया उस के लिए 7 साल की सजा बहुत कम है. अगर उम्रकैद का प्रावधान होता तो वे उसे उम्रकैद की सजा देते.

मैं जिससे प्रेम करती हूं, उसको समझने में कन्फ्यूज हो जाती हूं. ऐसे व्यक्ति से शादी करना क्या सही होगा.

सवाल
मैं 22 वर्षीय युवती हूं. 5 साल से जिस युवक से प्रेम करती हूं उस के व्यवहार को समझने में कन्फ्यूज हो जाती हूं. कभी तो लगता है कि वह सरल हृदय व भावुक है तो कभी ऐसे व्यवहार करता है जैसे कोई राक्षस हो. जब मैं ने उस के व्यवहार संबंधी परिवर्तन की वजह जाननी चाही तो वह बोला कि ऐसा कुछ भी नहीं है. क्या हो जाता है, कुछ नहीं मालूम. उस के व्यवहार का कौन सा पहलू वास्तविक है, यही नहीं समझ पा रही हूं. ऐसे व्यक्ति से शादी करना क्या सही होगा?

जवाब
आमतौर पर जब युवक युवती मिलते हैं तो उन का व्यवहार डीसैंट रहता है. इस दौरान युवती को यह ध्यान से परखना होता है कि उस के व्यवहार का शानदार पहलू कब रहता है और कब आचार व्यवहार में परिवर्तन होता है. युवक युवती का यदि वास्तव में अच्छा व्यवहार है तो वह हर किसी के साथ, हर स्थिति में अच्छे व्यवहार का ही परिचय देंगे, लेकिन जो अच्छा बनने का नाटक करते हैं, उन की असलियत जल्दी दिख जाती है.

आप अपने मित्र के परिवर्तित व्यवहार की तुलना राक्षस से कर रही हैं, तो इस से साफ समझ में आता है कि उस समय बरदाश्त करना असहनीय होता होगा. आप एक फैसले पर पहुंचने से पहले उस युवक के फ्रैंड सर्कल से तफतीश करें. कोशिश करें कि अगर युवक के बहन या भाई हैं, तो उन से कुछ पूछताछ करें और यदि सब एक जैसा ही फीडबैक देते हैं तो अपनी समझ से उचित फैसला लें.

मैं एक लड़के से प्यार करती हूं लेकिन वह कभी बाप नहीं बन सकता, मैं उस से शादी करना चाहती हूं कृप्या मार्गदर्शन करें

सवाल
मैं एक युवक से बहुत प्यार करती हूं. वह भी मुझ से प्यार करता है. हम दोनों इस बारे में अपनी फैमिली को बता चुके हैं. हम आगे की पढ़ाई साथ करना चाहते थे, लेकिन मुझे पटना भेज दिया गया और उसे कोटा. उस की फैमिली मुझे स्वीकार करती है लेकिन मेरी फैमिली कहती है कि वह मांसाहारी है और मुझे उस से बात करने से भी मना करते हैं. मेरे पापा कहते हैं कि यदि मैं ने उस युवक से बात की तो वे अपना गला काट लेंगे. मैं किसी को खोना नहीं चाहती. क्या करूं?

जवाब

‘जब मियांबीवी राजी तो क्या करेगा काजी,’ लेकिन जब बात अपने अजीज की हो तो दुविधा होती ही है. आप की स्थिति भी कुछकुछ ऐसी ही है. यह अच्छी बात है कि आप पेरैंट्स की इज्जत समझती हैं, लेकिन उन का आप पर उस युवक को छोड़ने हेतु आत्महत्या की धमकी देते हुए दबाव बनाना एकदम गलत है. ऐसे में आप को अपने प्रेम की परीक्षा देनी होगी.

अपने प्रेमी से कुछ दिन अगर दूर रहना पड़े तो कोई हर्ज नहीं. इस बीच अपने पिता को कौन्फिडैंस में लीजिए. जब उन्हें लगे कि वाकई युवक अच्छा है तभी बात बढ़ाइए. किसी अन्य के जरिए उन से बात करेंगी तो अच्छा रहेगा.

साथ ही अपने प्रेमी से कहें कि अच्छा कैरियर बनाए और सब को इंप्रैस करे. फिर तो जीत आप की ही होगी, क्योंकि युवती के पिता सिर्फ यही चाहते हैं कि युवक पढ़ालिखा और अच्छी कमाई व ओहदे वाला हो. जब समाज में उस की इज्जत होगी तो पिता भी स्टेटस व मांसाहारी होने पर एतराज नहीं करेंगे और आप का प्यार भी परवान चढ़ेगा.

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