अली खान

एक रिपोर्ट से यह बात उभर कर सामने आई है कि भीषण सर्दीगरमी, बारिश और कुहरे में रेल मुसाफिरों को महफूज घर पहुंचाने में हर साल औसतन 100 गैंगमैन ट्रेन की पटरियों पर कट कर मर जाते हैं.

आज देश और दुनिया में आधुनिक तकनीकी युग में तकरीबन सभी काम मशीनों से किए जा रहे हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक के बावजूद गैंगमैन ट्रेन सिक्योरिटी की रीढ़ माने जाते हैं.

मौजूदा समय में मशीनों के इस्तेमाल ने काम को आसान जरूर किया है, पर ट्रैक पर काम करने के लिए गरमी, बरसात और ठंड हर मौसम का सामना अभी भी गैंगमैन ही करता है.

जब भी रेलवे की उपलब्धि की बात होती है, तो इन के काम के योगदान की कोई बात नहीं करता है, जबकि रेल को आगे बढ़ाने में ट्रैकमैन व गैंगमैन का अहम रोल होता है. आज भी शीतलहर व हाड़ कंपकंपाती ठंड में खुले आसमान के नीचे जंगल व सुनसान जगहों में रह कर हमारे सफर को सुखद बनाने का कोई काम करता है, तो वे हैं रेलवे ट्रैकमैन व गैंगमैन.

रेलवे में इन का पद भले ही छोटा है, तनख्वाह भी काफी कम है, लेकिन ये लोग जिम्मेदारी काफी बड़ी निभाते हैं. हम ट्रेनों में चैन की नींद लेते हैं, लेकिन ये खुले आसमान के नीचे रेल पटरियों की निगरानी करते हैं. इन की जिंदगी जितनी मुश्किल होती है, उतनी ही जोखिम भरी भी.

पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि गैंगमैन हर दिन हादसों के शिकार हो रहे हैं. लिहाजा, गैंगमैन की सिक्योरिटी तय किए जाने की जरूरत है.

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