अगर कमल हासन से मिलता तो कहता हीरोहीरोइन को मिला दो- आनंद सिंह

जो लोग अपने जुनून को ही काम बना लेते हैं, उन्हें आनंद सिंह कहते हैं. इन्हें तीसरे ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में ‘फैमिली वैल्यूज मूवी’ कैटेगिरी में बैस्ट डायरैक्टर का अवार्ड मिला, तो इस बात की जिज्ञासा बढ़ी कि आज जब भोजपुरी फिल्मों पर अश्लीलता बढ़ाने के आरोप लगते हैं, तब पारिवारिक फिल्में बनाने का जोखिम उठाने की हिम्मत इस शख्स ने कैसे दिखाई. फिर आनंद सिंह से उन के फिल्मी सफर पर बातचीत हुई. पेश हैं, उसी के खास अंश :

आप अपने बारे में कुछ बताएं?

मैं वाराणसी का रहने वाला हूं. मैं ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है और मेरी शादी हो चुकी है. मेरी पत्नी ने मेरा बहुत सपोर्ट किया है. मेरी एक 8 साल की बेटी है. मेरे 2 छोटे भाई हैं. एक का अपना कारोबार है और दूसरा सरकारी नौकरी में है. मेरे पिताजी, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, ने भी मुझे इस क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद की थी.

क्या आप ने फिल्म डायरैक्शन सीखा है?

हां, मैं ने फिल्म डायरैक्शन सीखा है. दूरदर्शन के कई सीरियल जैसे ‘नैंसी’, ‘कहीं देर न हो जाए’ के अलावा मैं बहुत सी भोजपुरी फिल्मों का भी असिस्टैंट डायरैक्टर रहा हूं. मुझे इस क्षेत्र में तकरीबन 14 साल हो गए हैं. अभी तक मैं ने 8 फिल्में डायरैक्ट की हैं.

आप भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से कैसे जुड़े?

मैं शुरू से ही क्रिएटिव चीजों से जुड़ा रहा हूं. बचपन में जब मैं कोई भी फिल्म देखता था, तो उस की समीक्षा लिखा करता था. जब मैं ने हिंदी फिल्म ‘सदमा’ देखी थी, तब पहली बार मैं ने किसी हीरो का नाम जाना था कमल हासन. तब ऐसा लगा था कि काश, मैं कमल हासन से मिल लेता और बोल देता कि क्लाइमैक्स में हीरो और हीरोइन को मिला दो. तब से मेरे मन में बैठ गया था कि फिल्म में जोकुछ भी करता है, वह डायरैक्टर करता है.

वैसे, वाराणसी के यूपी इंटर कालेज से इंटर करने के बाद मैं ने खुद एक कौमेडी नाटक लिखा और डायरैक्ट किया था. वहां गैस्ट के तौर पर जावेद अख्तर आए थे.

असोसिएट डायरैक्टर शैलेश ने एक भोजपुरी फिल्म बनाई थी, वहां से मैं इस इंडस्ट्री से जुड़ा. इस के अलावा भोजपुरी फिल्मों के दिग्गज डायरैक्टर पराग पाटिल का भी मुझे इस इंडस्ट्री में लाने का बहुत बड़ा योगदान रहा है.

किसी फिल्म डायरैक्टर के सामने कौनकौन सी चुनौतियां आती हैं?

बहुत सारी चुनौतियां होती हैं. सब से बड़ी चुनौती तो यही है कि जो स्क्रिप्ट है, उस के साथ वह पूरी तरह से इंसाफ कर सके और एक अच्छी फिल्म बना कर दर्शकों के सामने पेश कर सके.

मेरा मानना है कि कहानीकार की कल्पना से ज्यादा डायरैक्टर की कल्पना होती है. कहानी को फिल्माना और सीन में जान डालना डायरैक्टर का सब से अहम काम होता है.

नए प्रोजैक्ट के बारे में बताएं?

अभी मैं ने फिल्म ‘शादी मुबारक’ की है. इस फिल्म में अरविंद अकेला ‘कल्लू’ और आम्रपाली हैं. अभी मैं मनीष जैन के साथ एक फिल्म ‘भाग दूल्हा भाग’ कर रहा हूं. हीरो विनय पांडेय के साथ फिल्म ‘गंधर्व विवाह’ भी कर रहा हूं. मेरी एक वैब सीरीज ‘किन्नर साहब’ भी आने वाली है.

सबको साथ चाहिए- भाग 3: क्या सही था माधुरी का फैसला

माधुरी के मातापिता भी उसे अपने नए परिवार में खुशी से रचाबसा देख कर संतुष्ट थे. दिन पंख लगा कर उड़ते गए. सुधीर का साथ पा कर माधुरी के मन की मुरझाई लताफिर हरी हो गई. ऐसा नहीं कि माधुरी को प्रशांत की और सुधीर को अपनी पत्नी की याद नहीं आती थी, लेकिन उन दोनों की याद को वे लोग सुखद रूप में लेते थे. उस दुख को उन्होंने वर्तमान पर कभी हावी नहीं होने दिया. उन की याद में रोने के बजाय वे उन के साथ बिताए सुखद पलों को एकदूसरे के साथ बांटते थे.  सोचतेसोचते माधुरी गहरी नींद में खो गई. इस घटना के 10-12 दिन बाद ही सुधीर ने माधुरी को बताया कि रविजी और उन की पत्नी उन के घर आने के इच्छुक हैं. माधुरी उन के आने के पीछे की मंशा समझ गई. उस ने सुधीर से कह दिया कि वे उन्हें रात के खाने पर सपरिवार निमंत्रित कर लें. 2 दिन बाद ही रविजी अपनी पत्नी और दोनों बच्चों को ले कर डिनर के लिए आ गए. विमला माधुरी की हैल्प करवाने के बहाने किचन में आ गई और माधुरी से बातें करने लगी. माधुरी ने स्नेहा से कहा कि प्रिया को बोल दे, डायनिंग टेबल पर प्लेट्स लगा कर रख देगी.

‘‘उसे आज बहुत सारा होमवर्क मिला है मां. उसे पढ़ने दीजिए. मैं आप की हैल्प करवा देती हूं,’’ स्नेहा ने जवाब दिया.

‘‘पर बेटा, तुम्हारे तो टैस्ट चल रहे हैं. तुम जा कर पढ़ाई करो. मैं मैनेज कर लूंगी,’’ माधुरी ने स्नेहा से कहा.

‘‘कोई बात नहीं मां. कल अंगरेजी का टैस्ट है और मुझे सब आता है,’’ स्नेहा प्लेट पोंछ कर टेबल पर सजाने लगी. तभी सुकेश और मधुर बाजार से आइसक्रीम और सलाद के लिए गाजर और खीरे वगैरह ले आए. सुकेश ने तुरंत आइसक्रीम फ्रीजर में रखी और मां से बोला, ‘‘मां, और कुछ काम है क्या?’’

‘‘नहीं, बेटा. अब तुम आनंद और अमृता को अपने रूम में ले जाओ. वे लोग बाहर अकेले बोर हो रहे हैं,’’ माधुरी ने कहा तो सुकेश बाहर चला गया.

‘‘ठीक है मां, कुछ काम पड़े तो बुला लेना,’’ स्नेहा भी अपना काम खत्म कर के चली गई. अब किचन में सिर्फ मधुरी और विमला ही रह गईं. अब विमला ज्यादा देर तक अपनी उत्सुकता को रोक नहीं पाई और उस ने माधुरी से सवाल किया, ‘‘हम तो 2 ही बच्चों को बड़ी मुश्किल से संभाल पा रहे हैं. आप ने 4-4 बच्चों को कैसे संभाला होगा? चारों में अंतर भी ज्यादा नहीं लगता. स्नेहा और मधुर तो बिलकुल एक ही उम्र के लगते हैं.’’  माधुरी इस सवाल के लिए तैयार ही थी. वह अत्यंत सहज स्वर में बोली, ‘‘हां, स्नेहा और मधुर की उम्र में बस 8 महीनों का ही फर्क है.’’

‘‘क्या?’’ विमला बुरी तरह से चौंक गई, ‘‘ऐसा कैसे हो सकता है?’’

तब माधुरी ने बड़ी सहजता से मुसकराते हुए संक्षेप में अपनी और सुधीर की कहानी सुना दी.  अब तो विमला के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा.

‘‘तब भी आप के चारों बच्चों में इतना प्यार है जबकि वे आपस में सगे भी नहीं हैं. मेरे तो दोनों बच्चे सगे भाईबहन होने के बाद भी आपस में इतना झगड़ते हैं कि बस पूछो मत. एक मिनट भी नहीं पटती है उन में. मैं तो इतनी तंग आ गई हूं कि लगता है इन्हें पैदा ही क्यों किया? लेकिन आप के चारों बच्चों में तो बहुत प्यार और सौहार्द दिखता है. चारों आपस में एकदूसरे पर और आप पर तो मानो जान छिड़कते हैं,’’ विमला बोली.

तभी सुधीर की मां किचन में आईं और विमला से बोलीं, ‘‘बात सगेसौतेले की नहीं, प्यार होता है आपसी सामंजस्य से. दरअसल, हम सब अपने जीवन में कुछ अपनों को खोने का दर्द झेल चुके हैं इसलिए हम सभी अपनों की कीमत समझते हैं. इस दर्द और समझ ने ही मेरे परिवार को प्यार से एकसाथ बांध कर रखा है. चारों बच्चे अपनी मां या पिता को खोने के बाद अकेलेपन का दंश झेल चुके थे, इसलिए जब चारों मिले तो उन्होंने जाना कि घर में जितने ज्यादा भाईबहन हों उतना ही मजा आता है. यही राज है हमारे परिवार की खुशियों का. हम दिल से मानते हैं कि सब को साथ चाहिए.’’

विमला उन की बातें सुन कर मुग्ध हो गई, ‘‘सचमुच मांजी, आप के परिवार के विचार और सौहार्द तो अनुकरणीय हैं.’

समय बीतता गया. सुकेश पढ़लिख कर इंजीनियर बना तो मधुर डाक्टर बन गया. मधुर ने एमडी किया और सुकेश ने बैंगलुरु से एमटेक. प्रिया और स्नेहा ने भी अपनेअपने पसंदीदा क्षेत्र में कैरियर बना लिया और फिर उन चारों के विवाह, फिर नातीपातों का जन्म, नामकरण मुंडन आदि की भागदौड़ में बरसों बीत गए. फिर एकएक कर सब पखेरू अपनेअपने नीड़ों में बस गए. सुकेश और प्रिया दोनों इंगलैंड चले गए. जहां दोनों भाईबहन पासपास ही रहते थे. मधुर बेंगलुरु में सैटल हो गया और स्नेहा मुंबई में. मांजी और माधुरी के मातापिता का निधन हो गया.

अब इतने बड़े घर में सुधीर और माधुरी अकेले रह गए. जब बच्चे और नातीपोते आते तो घर भर जाता. कभी ये लोग बारीबारी से सारे बच्चों के पास रह आते, लेकिन अधिकांश समय दोनों अपने घर में ही रहते. अपनी दिनचर्या को उन्होंने इस तरह से ढाला कि सुबह की चाय बगीचे की ताजी हवा में साथ बैठ कर पीते, साथ बागबानी करते. साथसाथ घर के सारे काम करने में दिन कब गुजर जाता, पता ही नहीं चलता. दोनों पल भर कभी एकदूसरे से अलग नहीं रह पाते. अब जा कर माधुरी और सुधीर को एहसास होता कि अगर उन्होंने उस समय अपने मातापिता की बात न मान कर विवाह नहीं किया होता तो आज जीवन की इस संध्याबेला में दोनों इतने माधुर्यपूर्ण साथ से वंचित हो कर बिलकुल अकेले रह जाते. जीवन की सुबह मातापिता की छत्रछाया में गुजर जाती है, दोपहर भागदौड़ में बीत जाती है मगर संध्याबेला की इस घड़ी में जब जीवन में अचानक ठहराव आ जाता है तब किसी के साथ की सब से अधिक आवश्यकता होती है. सुधीर के कंधे पर सिर टिकाए हुए माधुरी यही सोच रही थी. सचमुच, बिना साथी के जीवन अत्यंत कठिन और दुखदायक है. साथ सब को चाहिए.

डायरैक्टर की हर बात मानें: जश्न अग्निहोत्री

ऐक्टिंग को अपना सबकुछ मानने वाली जश्न अग्निहोत्री दिल्ली की हैं. एयर होस्टैस के पद पर काम करने वाली जश्न अग्निहोत्री कहती हैं कि आज भी वे डायरैक्टर के मुताबिक चलती हैं, पर उन्होंने कभी ऐक्टिंग के बारे में सोचा नहीं था. काम के दौरान ही बौलीवुड के कुछ मौडल कौऔर्डिनेटर ने उन्हें ऐक्टिंग की सलाह दी और औडिशन के लिए बुलाया. वे मौडल बनीं और उसी दौरान उन्हें मधुर भंडारकर ने अपनी एक फिल्म में एक गाने के लिए चुना.

जश्न अग्निहोत्री का काम छोटा था, पर सब ने उन की तारीफ की. यह मौका हर किसी को नहीं मिलता. आजकल इस तरह के सारे रोल ऊंची जातियों की लड़कियों को मिलते हैं, जिन के परिवारों की आपस में दोस्तियां होती हैं.

जश्न अग्निहोत्री एयर होस्टैस थीं, फ्लाइट में कुछ लोग ऐसे मिले, जो मौडल कौऔर्डिनेटर थे और उन्होंने कहा कि मेरा फेस अच्छा है, हंसी चार्मिंग है, ऐसा सुनतेसुनते उन के अंदर ऐक्टिंग की इच्छा पैदा हुई. गांवकसबों की स्मार्ट लड़कियों को फर्राटेदार इंगलिश नहीं आती, इसलिए उन्हें ये मौके नहीं मिलेंगे.

ऐक्टिंग के बारे में कभी सोचा है तो पहले बड़े शहर आएं और संपर्क बढ़ाएं. मौडलिंग के बारे में जरूर सोचें. काम के दौरान मौडल कौऔर्डिनेटरों से संबंध रखें. हर तरह का काम करें, हर औडिशन के लिए बुलाया जाए तो जाएं. मुंबई बहुत बड़ा शहर है, पर औडिशन देने जाना हो तो जुगाड़ कर के जाएं. धीरेधीरे थोड़ाथोड़ा काम मिलना शुरू हो जाएगा.

जश्न अग्निहोत्री ने अभी तक 100 से भी ज्यादा इश्तिहारों में काम किया है. वे कहती हैं कि हर तरह का काम लें और हर लोगों से मिलें. स्क्रीन टैस्ट दें. नए कलाकार को अच्छा काम मिलना मुश्किल होता है, ऐसे में अगर भूमिका छोटी होने पर इफैक्टिव हो तो उसे करें, क्योंकि ऐसी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनने से बड़े कलाकारों के साथ काम करने और सीखने का मौका मिलता है. कई बार छोटा सा रोल फिल्म कैरियर को आगे बढ़ने में मदद करता है.

अच्छी नौकरी छोड़ कर फिल्मों में ऐक्टिंग के लिए आना रिस्की है, पर तब तक आप को जिंदगी के सीक्रेट पता चल जाते हैं. सेफ लाइफ से अनसेफ लाइफ में जाएं. इसे अपनी पसंद बनाएं.

जश्न अग्निहोत्री को जानपहचान से कुछ काम मिले थे. वे कहती है कि मेरा फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है. मौडलिंग से शुरू हो कर थोड़ीबहुत ऐक्टिंग का काम भी मिलना शुरू हो गया था.

परिवार का सहयोग न हो, वे नाराज हों, उन्हें लगे कि फिल्मों में काफी शोषण होता है, फिल्म इंडस्ट्री में लड़कियों को इज्जत नहीं मिलती, लेकिन कामयाबी मिलने के बाद सब खुश होंगे और काम की तारीफ करते हैं. कोई नहीं पूछेगा कि कितना कंप्रोमाइज किया.

ऐक्टिंग को ले कर आप कोई मापदंड न बनाएं. ‘मैं यह काम नहीं कर सकती’ जैसे शब्द मुंह से न निकालें. जैसी भूमिका हो वैसा करें. फोटोग्राफर, डायरैक्टर के मुताबिक चलें, रात हो या दिन.

कास्टिंग काउच का सामना करना पड़े, तो हिचकिचाएं नहीं. हालांकि बहुत सी हीरोइनें यह कहती हैं, पर यह गलत लगता है. अब जरूर हल्ला मच गया है. अगर आप अंगरेजी पढ़ीलिखी नहीं हैं, तो आप का फिल्मी सफर मुश्किल होगा. पर बदन अच्छा हो, टैलेंट हो, तो कुछ न कुछ काम मिलता रहेगा. हर कोई दीपिका पादुकोण नहीं बन सकता.

मधुबाला और माधुरी दीक्षित ने भी ऊंची जातियों और अच्छे घराने के होने के बावजूद बहुत लड़ाई लड़ी है. ‘मी टू’ कैंपेन की वजह से अब लड़कियां सेफ होने लगी हैं. मीडिया का हल्ला 10-20 साल बाद भी किसी को गलत ठहरा सकता है. कानून की नजर से देखने पर चाहे गलती लड़की की हो. इस से जिंदगी नरक हो गई है.

पंजाबी हो, हरियाणवी हो या बिहारी, जश्न अग्निहोत्री को सारे भोजन पसंद हैं. मैं सब खाती हूं, लेकिन बहुत वर्कआउट भी करती हूं.

आप कितनी फैशनेबल हैं?

इस सवाल पर जश्न अग्निहोत्री कहती हैं कि तरहतरह के फैशन हैं. हर तरह के कपड़े पहनें. अपनी डिजाइनर खुद बनें. अगर शूट हो तो उस के हिसाब से सबकुछ करें.

गुस्सा होने पर क्या करती हैं?

इस सवाल पर उन्होंने कहा कि वर्कआउट करें. इस से सारा गुस्सा निकल जाता है. पत्रिकाएं, किताबें पढ़ें, चाहे हिंदी की हों या पंजाबी की. पढ़ना बहुत जरूरी है. हर बात याद रखें. कानून की सम?ा रखें. राजनीति में बढ़चढ़ कर हिस्सा लें. दोस्तों से मिलें. जो काम मिले उसे खुशी से और अच्छा करने की कोशिश करें.

आउटसाइडर होने से बहुत सी मुश्किलें आती हैं खासतौर पर अगर सुंदर और टैलेंटैड होने के बावजूद आप पिछड़ी व निचली जाति की हैं, क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री पर ऊंची जाति वालों का कब्जा है.

हर तरह की फिल्में देखें. ध्यान से देखें. धर्मेंद्र और राजेश खन्ना की फिल्मों से डब की गई विदेशी फिल्में भी देखें. हर फिल्म का आलोचक बनना सीखें. सब से बड़ी बात यह है कि अपने बोलने के लहजे में गांव का स्टाइल न आने दें और बनावटी न लगें.

वारिस- भाग 2: कौन-सी मुक्ति का इंतजार कर रही थी ममता

नरेंद्र ने जब से होश संभाला था उस का भी अमली चाचा से वास्ता पड़ता रहा था. जब भी उस के पांव की चप्पल कहीं से टूटती थी तो उस की मरम्मत अमली चाचा ही करता था. चप्पल की मरम्मत और पालिश कर के एकदम उस को नया जैसा बना देता था अमली चाचा.

काम करते हुए बातें करने की अमली चाचा की आदत थी. बातों की झोंक में कई बार बड़ी काम की बातें भी कह जाता था अमली चाचा.

‘कुदेसन’ के बारे में अमली चाचा से वह पूछेगा, ऐसा मन बनाया था नरेंद्र ने.

एक दिन जब स्कूल से वापस आ कर सब लड़के अपनेअपने घर की तरफ रुख कर गए तो नरेंद्र घर जाने के बजाय चौपाल के करीब पीपल के नीचे जूतों की मरम्मत में जुटे अमली चाचा के पास पहुंच गया.

नरेंद्र को देख अमली चाचा ने कहा, ‘‘क्यों रे, फिर टूट गई तेरी चप्पल? तेरी चप्पल में अब जान नहीं रही. अपने कंजूस बाप से कह अब नई ले दें.’’

‘‘मैं चप्पल बनवाने नहीं आया, चाचा.’’

‘‘तब इस चाचा से और क्या काम पड़ गया, बोल?’’ अमली ने पूछा.

नरेंद्र अमली चाचा के पास बैठ गया. फिर थोड़ी सी ऊहापोह के बाद उस ने पूछा, ‘‘एक बात बतलाओ चाचा, यह ‘कुदेसन’ क्या होती है?’’

नरेंद्र के सवाल पर जूता गांठ रहे अमली चाचा का हाथ अचानक रुक गया. चेहरे पर हैरानी का भाव लिए वह बोले, ‘‘ तू यह सब क्यों पूछ रहा है?’’

‘‘मैं ने सुरजीत के घर में एक औरत को देखा था चाचा, सुरजीत कहता है कि वह औरत ‘कुदेसन’ है जिस को उस का बापू बाहर से लाया है. बतलाओ न चाचा कौन होती है ‘कुदेसन’?’’

‘‘क्या करेगा जान कर? अभी तेरी उम्र नहीं है ऐसी बातों को जानने की. थोड़ा बड़ा होगा तो सब अपनेआप मालूम हो जाएगा. जा, घर जा.’’ नरेंद्र को टालने की कोशिश करते हुए अमली चाचा ने कहा.

लेकिन नरेंद्र जिद पर अड़ गया.

तब अमली चाचा ने कहा,

‘‘ ‘कुदेसन’ वह होती है बेटा, जिस को मर्द लोग बिना शादी के घर में ले आते हैं और उस को बीवी की तरह रखते हैं.’’

‘‘मैं कुछ समझा नहीं चाचा.’’

‘‘थोड़े और बड़े हो जाओ बेटा तो सब समझ जाओगे. कुदेसनें तो इस गांव में आती ही रही हैं. आज सुरजीत का बाप ‘कुदेसन’ लाया है. एक दिन तेरा बाप भी तो ‘कुदेसन’ लाया था. पर उस ने यह सब तेरी मां की रजामंदी से किया था. तभी तो वह वर्षों बाद भी तेरे घर में टिकी हुई है. बातें तो बहुत सी हैं पर मेरी जबानी उन को सुनना शायद तुम को अच्छा नहीं लगेगा, बेहतर होगा तुम खुद ही उन को जानो,’’ अमली चाचा ने कहा.

अमली चाचा की बातों से नरेंद्र हक्काबक्का था. उस ने सोचा नहीं था कि उस का एक सवाल कई दूसरे सवालों को जन्म दे देगा.

सवाल भी ऐसे जो उस की अपनी जिंदगी से जुडे़ थे. अमली चाचा की बातों से यह भी लगता था कि वह बहुत कुछ उस से छिपा भी गया था.

अब नरेंद्र की समझ में आने लगा था कि होश संभालने के बाद वह जिस खामोश औरत को अपने घर में देखता आ रहा है वह कौन है?

वह भी ‘कुदेसन’ है, लेकिन सवाल तो कई थे.

यदि मेरा बापू कभी मां की रजामंदी से ‘कुदेसन’ लाया था तो आज मां उस से इतना बुरा सलूक क्यों करती है? अगर वह ‘कुदेसन’ है तो मुझ को देख कर रोती क्यों है? जरा सा मौका मिलते ही मुझ को अपने सीने से चिपका कर चूमनेचाटने क्यों लगती थी वह? मां की मौजूदगी में वह ऐसा क्यों नहीं करती थी? क्यों डरीडरी और सहमी सी रहती थी वह मां के वजूद से?

फिर अमली चाचा की इस बात का क्या मतलब था कि अपने घर की कुछ बातें खुद ही जानो तो बेहतर होगा?

ऐसी कौन सी बात थी जो अमली चाचा जानता तो था किंतु अपने मुंह से उस को नहीं बतलाना चाहता?

एक सवाल को सुलझाने निकला नरेंद्र का किशोर मन कई सवालों में उलझ गया.

उस को लगने लगा कि उस के अपने जीवन से जुड़ी हुई ऐसी बहुत सी बातें हैं जिन के बारे में वह कुछ नहीं जानता.

अमली चाचा से नई जानकारियां मिलने के बाद नरेंद्र ने मन में इतना जरूर ठान लिया कि वह एक बार मां से घर में रह रही ‘कुदेसन’ के बारे में जरूर पूछेगा.

‘कुदेसन’ के कारण अब सुरजीत के घर में बवाल बढ़ गया था. सुरजीत की मां ‘कुदेसन’ को घर से निकालना चाहती थी मगर उस का बाप इस के लिए तैयार नहीं था.

इस झगड़े में सुरजीत की मां के दबंग भाइयों के कूदने से बात और भी बिगड़ गई थी. किसी वक्त भी तलवारें खिंच सकती थीं. सारा गांव इस तमाशे को देख रहा था.

वैसे भी यह गांव में इस तरह की कोई नई या पहली घटना नहीं थी.

जब सारे गांव में सुरजीत के घर आई ‘कुदेसन’ की चर्चा थी तो नरेंद्र का घर इस चर्चा से अछूता कैसे रह सकता था?

नरेंद्र ने भी मां और सिमरन बूआ को इस की चर्चा करते सुना था लेकिन काफी दबी और संतुलित जबान में.

इस चर्चा को सुन कर नरेंद्र को लगा था कि उस के मां से कु छ पूछने का वक्त आ गया है.

एक दिन जब नरेंद्र स्कूल से वापस घर लौटा तो मां अपने कमरे में अकेली थीं. सिमरन बूआ किसी रिश्तेदार के यहां गई हुई थीं और बापू खेतों में था.

नरेंद्र ने अपना स्कूल का बस्ता एक तरफ रखा और मां से बोला, ‘‘एक बात बतला मां, गायभैंस बांधने वाली जगह के पास बनी कोठरी में जो औरत रहती है वह कौन है?’’

मेरे सगे छोटे भाई का सौतेली मां के साथ नाजायज संबंध है, मैं क्या करूं?

सवाल
मेरी मां मर चुकी हैं. पिताजी ने दूसरी शादी की है, उस से भी एक लड़का है. मेरे सगे छोटे भाई का सौतेली मां के साथ नाजायज संबंध है. पिताजी मां के दबाव में आ कर छोटे भाई को तो पैसे देते हैं, मगर मुझे कुछ भी नहीं देते. मैं क्या करूं?

जवाब
आप का छोटा भाई सौतेली मां की जिस्मानी जरूरतें पूरी कर के पूरा फायदा उठा रहा है. आप पिताजी से कहें कि बड़ा बेटा होने के नाते वे आप का भी खयाल रखें. वे न मानें, तो उन से कानूनन बंटवारा करने को कहें.

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भारी भी पड़ती है बुढ़ापे में रंगीनमिजाजी

60साल के अमर सिंह की जिंदगी देख कर घरगृहस्थी की गाड़ी ढोते दूसरे लोगों को उस से कोफ्त होती थी. वजह, अमर सिंह अकेला था. उस पर ‘आगे नाथ न पीछे पगहा’ वाली कहावत लागू होती थी. उस के सिर पर कोई जिम्मेदारी नहीं, घर में कोई सवालजवाब करने वाला नहीं और न ही कोई झंझट.

पेशे से मिस्त्री अमर सिंह निहायत ही मस्तमौला भी था. दिनभर मजदूरी कर के वह 5-6 सौ रुपए कमाता था. उन में से 2 सौ रुपए मुरगेदारू पर खर्च करता था और रात को टैलीविजन देखतेदेखते बेफिक्री से चादर तान कर सो जाता था.

अब से तकरीबन ढाई साल पहले अमर सिंह की बीवी की मौत हुई थी. तब से वह तनहा रह गया था. उस के 3 औलादें थीं. शादी कर के बेटी अपनी ससुराल में सुकून से रह रही थी, लेकिन एक बेटे ने 3 साल पहले खुदकुशी कर ली थी और दूसरा बेटा लव मैरिज कर के इंदौर जा बसा था, जिसे बाप से कोई खास मतलब नहीं था.

भोपाल के करोंद इलाके के पीपल चौराहा इलाके के मकान नंबर 2 में बीते 8 महीनों से अमर सिंह किराए पर रह रहा था. वजह यह नहीं थी कि उस का अपना कोई मकान नहीं था, बल्कि वह अपना खुद का मकान इसलाम नगर इलाके में बनवा रहा था.

दरअसल, कुछ महीने पहले ही उस ने अपनी जिंदगीभर की कमाई और बचत से शिव नगर इलाके में बनाया अपना मकान साढे़ 12 लाख रुपए में बेचा था और उसी पैसे से अकेले खुद के रहने लायक छोटा मकान बड़े चाव से बनवा रहा था.

मस्ती पर लगा ग्रहण

पीपल चौराहा इलाके के लोगों और अमर सिंह के पड़ोसियों को यह देखने की आदत सी पड़ गई थी कि अनजान औरतें कभी भी अमर सिंह के घर आतीजाती रहती थीं. अंदर क्या होता होगा, इस का अंदाजा लगाने के लिए किसी को अपने दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं डालना पड़ता था.

चूंकि अमर सिंह किसी से खास वास्ता नहीं रखता था और न ही किसी के लिए परेशानी का सबब बनता था, इसलिए कोई इस बात को उस का निजी मामला मानते हुए एतराज नहीं जताता था.

अमर सिंह का नया मकान तकरीबन तैयार हो गया था और उस ने गृह प्रवेश की तारीख 20 जनवरी तय भी कर ली थी. मकान बनवाई का काम आखिरी दौर में था, इसलिए अमर सिंह ने 3 मजदूर लगा लिए, जिस से कि वक्त पर गृह प्रवेश हो जाए.

ये 3 मजदूर थे विदिशा का रहने वाला जीतू उर्फ भरतलाल अहिरवार और बाकी 2 जवान लड़कियां थीं. इन में से 35 साला मंजू नट उडि़या बस्ती में रहती थी और उस की 25 साला सहेली टीना नट उस की पड़ोसन थी.

जीतू व अमर सिंह की जानपहचान पुरानी थी. जीतू की सिफारिश पर कुछ दिन पहले ही अमर सिंह ने उन दोनों लड़कियों को अपने मकान के काम में लगा लिया था.

जल्द ही मंजू और टीना की जवानी देख रंगीनमिजाज अमर सिंह का दिल डोलने लगा. शौकीन तो वह था ही और किस्मकिस्म की औरतों को भोग चुका था, लिहाजा उसे लगा कि थोड़ी कोशिश की जाए, तो इन में से कोई एक पट ही जाएगी. टीना ने तो घास नहीं डाली, लेकिन मंजू से हंसीमजाक शुरू हो गया.

मिस्त्री होने के चलते अमर सिंह का पाला कई मजदूर औरतों से पड़ा था. वह उन की पैसे की जरूरतों को खूब समझता था. धीरेधीरे उस ने मंजू से नजदीकियां बढ़ाईं और उसे लालच देना शुरू कर दिया.

मंजू ने थोड़ी घास डाली, तो अमर सिंह को लगा कि शिकार जाल में आ फंसा है. लिहाजा देर नहीं करनी चाहिए. मंजू को फंसाने के चक्कर में कुछ दिनों से उस ने किसी कालगर्ल को भी नहीं बुलाया था. इसलिए उस की जिस्मानी भूख और भड़कती जा रही थी.

जल्द ही अमर सिंह ने मंजू से छेड़छाड़ शुरू कर दी, जिस पर मंजू ने एतराज तो जताया, पर वह इतना सख्त नहीं था कि अमर सिंह उसे उस की न समझ लेता.

वैसे, अमर सिंह को यह नहीं मालूम था कि शादीशुदा मंजू जीतू की माशूका थी. जब मंजू ने अमर सिंह की हरकतों के बारे में जीतू को बताया, तो उस का खून खौल उठा और उस ने मंजू और टीना के साथ मिल कर अमर सिंह को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली.

नए साल की शुरुआत में उस ने अमर सिंह को बताया, ‘‘मंजू और टीना चिकन बहुत जायकेदार बनाती हैं. क्यों न एक दिन की पार्टी तुम्हारे यहां रख ली जाए?’’

अमर सिंह ने तुरंत हामी भर दी और 14 जनवरी को पार्टी की रात तय हुई. इस दिन अमर सिंह के रसोईघर से चिकन की ऐसी खुशबू आ रही थी कि पूरा महल्ला उसे सूंघता रहा.

अंदर खाना तैयार होता रहा और कमरे में जीतू और अमर सिंह शराब पीते अपनी भूख बढ़ाते रहे. लेकिन अमर सिंह को एहसास भी न था कि थोड़ी देर बाद क्या होने वाला है.

ज्यादा शराब पीने से अमर सिंह लुढ़कने लगा, तो जीतू के बुलावे पर वे दोनों बाहर आईं. मंजू ने अमर सिंह के हाथ जकड़े और टीना ने पांव पकड़े. फिर जीतू ने गरदन पर कुल्हाड़ी से हमला कर के उस का काम तमाम कर दिया.

इस के बाद वे तीनों अमर सिंह का पर्स, मोबाइल फोन, घर की चाबी और स्कूटर ले कर फरार हो गए.

3 दिन बाद मकान से बदबू आने लगी, तो लोगों ने पुलिस को खबर दी. अमर सिंह की लाश सड़ चुकी थी. पूछताछ में जल्द ही उजागर हो गया कि हादसे की रात जीतू, मंजू और टीना उस के घर आए थे. निशातपुरा थाने की पुलिस ने शक की बिना पर उन्हें हिरासत में लिया, तो तीनों ने कत्ल की वारदात कबूल कर ली.

क्या करें अकेले बूढ़े

बुढ़ापे में रंगीनमिजाजी आम बात है, खासतौर से उन बूढ़ों की, जिन के आगेपीछे कोई नहीं होता है.

बूढ़े सैक्स की अपनी जरूरत पूरी करें, तो यह उन का हक है, लेकिन अमर सिंह जैसे बूढ़े अकसर गच्चा खा जाते हैं. देखा जाए, तो अमर सिंह बदले का नहीं, बल्कि साजिश का शिकार हुआ, नहीं तो इस से पहले वह कालगर्ल लाता था, तयशुदा रकम देता था और सुबह उन्हें चलता कर देता था.

अकेले रह रहे बूढ़ों का कालगर्ल के पास जाना या फिर घर ला कर सुख भोगना उतनी ही आम बात है, जितनी नौजवानों का ऐसा ही करना. फर्क इतना है कि बूढ़ों से कालगर्ल को ज्यादा पैसा मिल जाता है.

भोपाल के एमपी नगर इलाके की 26 साला एक कालगर्ल कामिनी (बदला नाम) की मानें, तो आजकल उन के ग्राहकों में बूढ़ों की तादाद तकरीबन 25 फीसदी होती है.

बकौल कामिनी, ‘‘जरूरतमंद बूढ़े दलालों के जरीए उन तक पहुंचते हैं, कभी सीधे भी सौदा हो जाता है. ये लोग जल्दबाजी में ज्यादा भावताव नहीं करते और थोड़ा डरते भी हैं.’’

कामिनी इस बाबत बूढ़ों को ज्यादा कुसूरवार नहीं मानती. वह कहती है कि ये बेचारे क्या करें और कहां जाएं. अगर मालदार हों तो हर किसी की नजर इन के माल पर रहती है, इसलिए खुद औरतें इन पर डोरे डालती हैं. लेकिन समझदार बूढ़े कालगर्ल्स को ज्यादा महफूज मानते हैं.

कुछ बूढ़े जोश के लिए इश्तिहार पढ़ कर ताकत और मर्दानगी वाली दवाएं भी खरीदते हैं.

भोपाल के शाहपुरा इलाके के मनीषा मार्केट के एक कैमिस्ट अनिल ललवानी की मानें, तो बड़ी तादाद में बूढ़े इश्तिहारों वाली पलंगतोड़ दवाएं खरीद कर ले जाते हैं और कंडोम भी खरीदते हैं.

जाहिर है, बूढ़ों को भी हक है कि वे सैक्स का सुख उठाएं, लेकिन जरूरी यह है कि इस में एहतियात रखें, नहीं तो अंजाम अमर सिंह सरीखा भी हो सकता है, जो जल्दबाजी के चलते मारा गया.

ऐसे महफूज रह सकते हैं आशिकमिजाज बूढ़े

* सैक्स के लिए कालगर्ल्स जानपहचान वालियों से बेहतर साबित होती हैं.

* अगर औरतों या कालगर्ल्स के साथ कोई मर्द दिखे, तो उस से जल्द पल्ला झाड़ लेना चाहिए. ये लोग किसी गिरोह वाले भी हो सकते हैं.

* जब कालगर्ल लाएं, तो उस पर रोब डालने के लिए अपनी दौलत का जिक्र न करें, न ही घर में ज्यादा नकदी और कीमती सामान रखें.

* कालगर्ल का मोबाइल फोन बंद करवा दें, जिस से वह बातचीत टेप न कर सके और न ही वीडियो फिल्म बना कर बाद में ब्लैकमेल कर सके.

* सैक्स की लत इस उम्र में इतनी न लगाएं कि रोजरोज इस की जरूरत पड़ने लगे.

* कालगर्ल या कोई दूसरी औरत लाएं, तो नशा खासतौर से शराब का सेवन बिलकुल न करें. अमर सिंह की यही गलती उस की आसान मौत की वजह बनी.

* सैक्स में कमजोरी आजकल नौजवानों में भी आम बात है. वैसे भी सैक्स पर उम्र का कोई खास असर नहीं पड़ता. अगर इश्तिहार वाली दवाओं से खुद पर भरोसा बढ़ता है, तो उन्हें लेने में हर्ज नहीं है.

* सैक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें. इस से सैक्स संबंधी बीमारियां होने का खतरा नहीं रहता.

Mother’s Day Special: स्वीकृति- कैसे जागी डिंपल की सोई हुई ममता

आशीष के जाते ही डिंपल दरवाजा बंद कर रसोईघर की ओर भागी. जल्दी से टिफिन अपने बैग में रख शृंगार मेज के समक्ष तैयार होते हुए वह बड़बड़ाती जा रही थी, ‘आज फिर औफिस के लिए देर होगी. एक तो घर का काम, फिर नौकरी और सब से ऊपर वही बहस का मुद्दा…’

5 वर्ष के गृहस्थ जीवन में पतिपत्नी के बीच पहली बार इतनी गंभीरता से मनमुटाव हुआ था. हर बार कोई न कोई पक्ष हथियार डाल देता था, पर इस बार बात ही कुछ ऐसी थी जिसे यों ही छोड़ना संभव न था.

‘उफ, आशीष, तुम फिर वही बात ले बैठे. मेरा निर्णय तो तुम जानते ही हो, मैं यह नहीं कर पाऊंगी,’ डिंपल आपे से बाहर हो, हाथ मेज पर पटकते हुए बोली थी.

‘अच्छाअच्छा, ठीक है, मैं तो यों ही कह रहा था,’ आखिर आशीष ने आत्मसमर्पण कर ही दिया. फिर कंधे उचकाते हुए बोला, ‘प्रिया मेरी बहन थी और बच्चे भी उसी के हैं, तो क्या उन्हें…’

बीच में ही बात काटती डिंपल बोल पड़ी, ‘मैं यह मानती हूं, पर हमें बच्चे चाहिए ही नहीं. मैं यह झंझट पालना ही नहीं चाहती. हमारी दिनचर्या में बच्चों के लिए वक्त ही कहां है? क्या तुम अपना वादा भूल गए कि मेरे कैरियर के लिए हमेशा साथ दोगे, बच्चे जरूरी नहीं?’ आखिरी शब्दों पर उस की आवाज धीमी पड़ गई थी.

डिंपल जानती थी कि आशीष को बच्चों से बहुत लगाव है. जब वह कोई संतान न दे सकी तो उन दोनों ने एक बच्चा गोद लेने का निश्चय भी किया था, पर…

‘ठीक है डिंपी?’ आशीष ने उस की विचारशृंखला भंग करते हुए अखबार को अपने ब्रीफकेस में रख कर कहा, ‘मैं और मां कुछ न कुछ कर लेंगे. तुम इस की चिंता न करना. फिलहाल तो बच्चे पड़ोसी के यहां हैं, कुछ प्रबंध तो करना ही होगा.’

‘क्या मांजी बच्चों को अपने साथ नहीं रख सकतीं?’ जूठे प्याले उठाते हुए डिंपल ने पूछा.

‘तुम जानती तो हो कि वे कितनी कमजोर हो गई हैं. उन्हें ही सेवा की आवश्यकता है. यहां वे रहना नहीं चाहतीं, उन को अपना गांव ही भाता है. फिर 2 छोटे बच्चे पालना…खैर, मैं चलता हूं. औफिस से फोन कर तुम्हें अपना प्रोग्राम बता दूंगा.’

तैयार होते हुए डिंपल की आंखें भर आईं, ‘ओह प्रिया और रवि, यह क्या हो गया…बेचारे बच्चे…पर मैं भी अब क्या करूं, उन्हें भूल भी नहीं पाती,’ बहते आंसुओं को पोंछ, मेकअप कर वह साड़ी पहनने लगी.

2 दिनों पहले ही कार दुर्घटना में प्रिया तो घटनास्थल पर ही चल बसी थी, जबकि रवि गंभीर हालत में अस्पताल में था. दोनों बच्चे अपने मातापिता की प्रतीक्षा करते डिंपल के विचारों में घूम रहे थे. हालांकि एक लंबे अरसे से उस ने उन्हें देखा नहीं था. 3 वर्ष पूर्व जब वह उन से मिली थी, तब वे बहुत छोटे थे.

वह घर, वह माहौल याद कर डिंपल को कुछ होने लगता. हर जगह अजीब सी गंध, दूध की बोतलें, तारों पर लटकती छोटीछोटी गद्दियां, जिन से अजीब सी गंध आ रही थी. पर वे दोनों तो अपनी उसी दुनिया में डूबे थे. रवि को तो चांद सा बेटा और फूल जैसी बिटिया पा कर और किसी चीज की चाह ही नहीं थी. प्रिया हर समय, बस, उन दोनों को बांहों में लिए मगन रहती.

परंतु घर के उस बिखरे वातावरण ने दोनों को हिला दिया. तभी डिंपल बच्चा गोद लेने के विचार मात्र से ही डरती थी और उन्होंने एक निर्णय ले लिया था. ‘तुम ठीक कहती हो डिंपी, मेरे लिए भी यह हड़बड़ी और उलझन असहाय होगी. फिर तुम्हारा कैरियर…’ आशीष ने उस का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा था.

दोनों अपने इस निर्णय पर प्रसन्न थे, जबकि वह जानती थी कि बच्चे पालने का अर्थ घर का बिखरापन ही हो, ऐसी बात नहीं है. यह तो व्यक्तिगत प्रक्रिया है. पर वह अपना भविष्य दांव पर लगाने के पक्ष में कतई न थी. वह अच्छी तरह समझती थी कि यह निर्णय आशीष ने उसे प्रसन्न रखने के लिए ही लिया है. लेकिन इस के विपरीत डिंपल बच्चों के नाम से ही कतराती थी.

डिंपल ने भाग कर आटो पकड़ा  और दफ्तर पहुंची. आधे घंटे बाद ही फोन की घंटी घनघना उठी, ‘‘मैं अभी मुरादाबाद जा रहा हूं. मां को भी रास्ते से गांव लेता जाऊंगा,’’ उधर से आशीष की आवाज आई.

‘‘क्या वाकई, मेरा साथ चलना जरूरी न होगा?’’

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं, मांजी तो जाएंगी ही. और कुछ दिनों पहले ही बच्चे नानी से मिले थे. उन्हें वे पहचानते भी हैं. तुम्हें तो वे पहचानेंगे ही नहीं. वैसे तो मैं ही उन से कहां मिला हूं. खैर, तुम चिंता न करना. अच्छा, फोन रखता हूं…’’

2 दिनों बाद थकाटूटा आशीष वहां से लौटा और बोला, ‘‘रवि अभी भी बेहोश है, दोनों बच्चे पड़ोसी के यहां हैं. वे उन्हें बहुत चाहते हैं. पर वे वहां कब तक रहेंगे? बच्चे बारबार मातापिता के बारे में पूछते हैं,’’ अपना मुंह हाथों से ढकते हुए आशीष ने बताया. उस का गला भर आया था.

‘‘मां बच्चों को संभालने गई थीं, पर वे तो रवि की हालत देख अस्पताल में ही गिर पड़ीं,’’ आशीष ने एक लंबी सांस छोड़ी.

‘‘मैं ने आज किशोर साहब से बात की थी, वे एक हफ्ते के अंदर ही डबलबैड भिजवा देंगे.’’

‘‘एक और डबलबैड क्यों?’’ आशीष की नजरों में अचरजभरे भाव तैर गए.

‘‘उन दोनों के लिए एक और डबलबैड तो चाहिए न. हम उन्हें ऐसे ही तो नहीं छोड़ सकते, उन्हें देखभाल की बहुत आवश्यकता होगी. वे पेड़ से गिरे पत्ते नहीं, जिन्हें वक्त की आंधी में उड़ने के लिए छोड़ दिया जाए,’’ डिंपल की आंखों में पहली बार ममता छलकी थी.

उस की इस बात पर आशीष का रोमरोम पुलकित हो उठा और वह कूद कर उस के पास जा पहुंचा, ‘‘सच, डिंपी, क्या तुम उन्हें रखने को तैयार हो? अरे, डिंपी, तुम ने मुझे कितने बड़े मानसिक तनाव से उबारा है, शायद तुम नहीं समझोगी. मैं आजीवन तुम्हारे प्रति कृतज्ञ रहूंगा.’’ पत्नी के कंधों पर हाथ रख उस ने अपनी कृतज्ञता प्रकट की.

डिंपल चुपचाप आशीष को देख रही थी. वह स्वयं भी नहीं जानती थी कि भावावेश में लिया गया यह निर्णय कहां तक निभ पाएगा.

डिंपल सारी तैयारी कर बच्चों के आने की प्रतीक्षा कर रही थी. 10 बजे घंटी बजी. दरवाजे पर आशीष खड़ा था और नीचे सामान रखा था. उस की एक उंगली एक ने तो दूसरी दूसरे बच्चे ने पकड़ रखी थी. उन्हें सामने देख डिंपल खामोश सी हो गई. बच्चों के बारे में उसे कुछ भी तो ज्ञान और अनुभव नहीं था. एक तरफ अपना कैरियर, दूसरी तरफ बच्चे, वह कुछ असमंजस में थी.

आशीष और बच्चे उस के बोलने का इंतजार कर रहे थे. ऊपरी हंसी और सूखे मुंह से डिंपल ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ‘‘हैलो, कैसा रहा सफर?’’

‘‘बहुत अच्छा, बच्चों ने तंग भी नहीं किया. यह है प्रार्थना और यह प्रांजल. बच्चो, ये हैं, तुम्हारी मामी,’’ आशीष ने हंसते हुए कहा.

परंतु चारों आंखें नए वातावरण को चुपचाप निहारती रहीं, कोई कुछ भी न बोला.

डिंपल ने बच्चों का कमरा अपनी पसंद से सजाया था. अलमारी में प्यारा सा कार्टून पिं्रट का कागज बिछा बिस्कुट और टाफियों के डब्बे सजा दिए थे. बिस्तर पर नए खिलौने रखे थे.

प्रांजल खिलौनों से खेलने में मशगूल हो, वातावरण में ढल गया, किंतु प्रार्थना बिस्तर पर तकिए को गोद में रख, मुंह में अंगूठा ले कर गुमसुम बैठी हुई थी. वह मासूम अपनी खोईखोई आंखों में इस नए माहौल को बसा नहीं पा रही थी.

पहले 4-5 दिन तो इतनी कठिनाई नहीं हुई क्योंकि आशीष ने दफ्तर से छुट्टी ले रखी थी. दोनों बच्चे आपस में खेलते और खाना खा कर चुपचाप सो जाते. फिर भी डिंपल डरती रहती कि कहीं वे उखड़ न जाएं. शाम को आशीष उन्हें पार्क में घुमाने ले जाता. वहां दोनों झूले झूलते, आइसक्रीम खाते और कभीकभी अपने मामा से कहानियां भी सुनते.

आशीष, बच्चों से स्वाभाविकरूप से घुलमिल गया था और बच्चे भी सारी हिचकिचाहट व संकोच छोड़ चुके थे, जिसे वे डिंपल के समक्ष त्याग न पाते थे. शायद यह डिंपल के अपने स्वभाव की प्रतिक्रिया थी.

एक हफ्ते बाद डिंपल ने औफिस से छुट्टी ले ली थी ताकि वह भी बच्चों से घुलमिल सके. यह एक परीक्षा थी, जिस में आशीष उत्तीर्ण हो चुका था. अब डिंपल को अपनी योग्यता दर्शानी थी. हमेशा की भांति आशीष तैयार हो कर 9 बजे दफ्तर चल दिया. दोनों बच्चों ने नाश्ता किया. डिंपल ने उन की पसंद का नाश्ता बनाया था.

‘‘अच्छा बच्चो, तुम जा कर खेलो, मैं कुछ साफसफाई करती हूं,’’ नाश्ते के बाद बच्चों से कहते समय हमेशा की भांति वह अपनी आवाज में प्यार न उड़ेल पाई, बल्कि उस की आवाज में सख्ती और आदेश के भाव उभर आए थे. थालियों को सिंक में रखते समय डिंपल उन मासूम चेहरों को नजरअंदाज कर गई, जो वहां खड़े उसे ही देख रहे थे.

‘‘जाओ, अपने खिलौनों से खेलो. अभी मुझे बहुत काम करना है,’’ और वह दोनों को वहीं छोड़ अपने कमरे की ओर बढ़ गई.

कमरा ठीक कर, किताबों और फाइलों के ढेर में से उस ने कुछ फाइलें निकालीं और उन में डूब गई. कुछ देर बाद उसे महसूस हुआ, जैसे कमरे में कोई आया है. बिना पीछे मुड़े ही वह बोल पड़ी, ‘‘हां, क्या बात है?’’

परंतु कोई उत्तर न पा, पीछे देखा कि प्रार्थना और प्रांजल खड़े हैं.

प्रांजल धीरे से बोला, ‘‘प्रार्थना को गाना सुनना है.’’

डिंपल ने एक ठंडी सांस भर कमरे के कोने में रखे स्टीरियो को देखा, फिर अपनी फाइलों को. उसे एक हफ्ते बाद ही नए प्रोजैक्ट की फाइलें तैयार कर के देनी थीं. सोचतेसोचते उस के मुंह से शब्द फिसला, ‘‘नहीं,’’ फिर स्वयं को संभाल उन्हें समझाते हुए बोली, ‘‘अभी मुझे बहुत काम है, कुछ देर बाद सुन लेना.’’

दोनों बच्चे एकदूसरे का मुंह देखने लगे. वे सोचने लगे कि मां तो कभी मना नहीं करती थीं. किंतु यह बात वे कह न पाए और चुपचाप अपने कमरे में चले गए.

डिंपल फिर फाइल में डूब गई. बारबार पढ़ने पर भी जैसे मस्तिष्क में कुछ घुस ही न रहा था. पैन पटक कर डिंपल खड़ी हो गई. बच्चों के कमरे में झांका, वहां एकदम शांति थी. प्रार्थना तकिया गोद में लिए, मुंह में अंगूठा दबाए बैठी थी. प्रांजल अपने सूटकेस में खिलौने जमाने में व्यस्त था.

‘‘यह क्या हो रहा है?’’

‘‘अब हम यहां नहीं रहेंगे,’’ प्रांजल ने फैसला सुना दिया.

उस रात डिंपल दुखी स्वर में पति से बोली, ‘‘मैं और क्या कर सकती हूं, आशीष? ये मुझे गहरी आंखों से टुकुरटुकुर देखा करते हैं. मुझ से वह दृष्टि सहन नहीं होती. मैं उन्हें प्रसन्न देखना चाहती हूं, उन्हें समझाया कि अब यही उन का घर है, पर वे नहीं मानते,’’ डिंपल का सारा गुबार आंखों से फूट कर बह गया.

प्रांजल और प्रार्थना के मौन ने उसे हिला दिया था, जिसे वह स्वयं की अस्वीकृति समझ रही थी. उस ने उन्हें अपनाना तो चाहा लेकिन उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया.

‘‘मैं जानता हूं, यह कठिन कार्य है, पर असंभव तो नहीं. मांजी ने भी उन्हें समझाया था कि उन की मां बहुत दूर चली गई है, अब वापस नहीं आएगी और पिता भी बहुत बीमार हैं. पर उन का नन्हा मस्तिष्क यह बात स्वीकार नहीं पाता. लेकिन धीरेधीरे सब ठीक हो जाएगा.’’

‘‘शायद उन्हें यहां नहीं लाना चाहिए था. कहीं अच्छाई के बदले कुछ बुरा न हो जाए.’’

‘‘नहीं, डिंपी, हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए. इस समय उन्हें भरपूर लाड़प्यार और ध्यान की आवश्यकता है. हम जितना स्नेह उन्हें देंगे, वे उतने ही समीप आएंगे. वे प्यार दें या न दें, हमें उन्हें प्यार देते रहना होगा.’’

‘‘मेरे लिए शायद ऐसा कर पाना कठिन होगा. मैं उन्हें अपनाना चाहती हूं, पर फिर भी अजीब सा एहसास, अजीब सी दूरी महसूस करती हूं. इन बच्चों के कारण मैं अपना औफिस का कार्य भी नहीं कर पाती जब वे पास होते हैं तब भी और जब दूर होते हैं तब भी. मेरा मन बड़ी दुविधा में फंसा है.’’

‘‘मैं ने तो इतना सोचा ही नहीं. अगर तुम को इतनी परेशानी है तो कहीं होस्टल की सोचूंगा. बच्चे अभी तुम से घुलेमिले भी नहीं हैं,’’ आशीष ने डिंपल को आश्वासन देते हुए कहा.

‘‘नहीं नहीं, मैं उन्हें वापस नहीं भेजना चाहती, स्वीकारना चाहती हूं, सच. मेरी इच्छा है कि वे हमारे बन जाएं, हमें उन्हें जीतना होगा, आशू, मैं फिर प्रयत्न करूंगी.’’

अगले दिन सुबह से ही डिंपल ने गाने लगा दिए थे. रसोई में काम करते हुए बच्चों को भी आवाज दी, ‘‘मेरी थोड़ी मदद करोगे, बच्चो?’’

प्रांजल उत्साह से भर मामी को सामान उठाउठा कर देने लगा, किंतु प्रार्थना, बस, जमीन पर बैठी चम्मच मारती रही. उस के भोले और उदास चेहरे पर कोई परिवर्तन नहीं था आंखों के नीचे कालापन छाया था जैसे रातभर सोई न हो. पर डिंपल ने जब भी उन के कमरे में झांका था, वे सोऐ ही नजर आए थे.

‘‘अच्छा, तो प्रार्थना, तुम यह अंडा फेंटो, तब तक प्रांजल ब्रैड के कोने काटेगा और फिर हम बनाएंगे फ्रैंच टोस्ट,’’ डिंपल ने कनखियों से उसे देखा. पहली बार प्रार्थना के चेहरे पर बिजली सी चमकी थी. दोनों तत्परता से अपनेअपने काम में लग गए थे.

उस रात जब डिंपल उन्हें कमरे में देखने गई तो भाईबहन शांत चेहरे लिए एकदूसरे से लिपटे सो रहे थे. एक मिनट चुपचाप उन्हें निहार, वह दबेपांव अपने कमरे में लौट आई थी.

अगला दिन वाकई बहुत अच्छा बीता. दोनों बच्चों को डिंपल ने एकसाथ नहलाया. बाथटब में वे पानी से खूब खेले. फिर सब ने साथ ही नाश्ता किया. खरीदारी के लिए वह उन्हें बाजार साथ ले गई और फिर उन की पसंद से नूडल्स का पैकेट ले कर आई. हालांकि डिंपल को नूडल्स कतई पसंद न थे लेकिन उस दोपहर उस ने नूडल्स ही बनाए.

आशीष टूर पर गया हुआ था. बच्चों को बिस्तर पर सुलाने से पूर्व वह उन्हें गले लगा, प्यार करना चाहती थी, पर सोचने लगी, ‘मैं ऐसा क्यों नहीं कर पाती? कौन है जो मुझे पीछे धकेलता है? मैं उन्हें प्यार करूंगी, जरूर करूंगी,’ और जल्दी से एक झटके में दोनों के गालों पर प्यार कर बिस्तर पर लिटा आई.

अपने कमरे में आ कर बिस्तर देख डिंपल का मन किया कि अब चुपचाप सो जाए, पर अभी तो फाइल पूरी करनी थी. मुश्किल से खड़ी हो, पैरों को घसीटती हुई, मेज तक पहुंच वह फाइल के पन्नों में उलझ गई.

बाहर वातावरण एकदम शांत था, सिर्फ चौकीदार की सीटी और उस के डंडे की ठकठक गूंज रही थी. डिंपल ने सोचा, कौफी पी जाए. लेकिन जैसे ही मुड़ी तो देखा कि दरवाजे पर एक छोटी सी काया खड़ी है.

‘‘अरे, प्रार्थना तुम? क्या बात है बेटे, सोई नहीं?’’ डिंपल ने पैन मेज पर रखते हुए पूछा.

पर प्रार्थना मौन उसे देखती रही. उस की आंखों में कुछ ऐसा था कि डिंपल स्वयं को रोक न सकी और घुटनों के बल जमीन पर बैठ प्रार्थना को गले से लिपटा लिया. बच्ची ने भी स्वयं को उस की गोद में गिरा दिया और फूटफूट कर रोने लगी. डिंपल वहीं बैठ गई और प्रार्थना को सीने से लगा, प्यार करने लगी.

काफी देर तक डिंपल प्रार्थना को यों ही सीने से लगाए बैठी रही और उस के बालों में हाथ फेरती रही. प्रार्थना ने उस के कंधे से सिर लगा दिया, ‘‘क्या सचमुच मां अब नहीं आएंगी?’’

अब डिंपल की बारी थी. अत्यंत कठिनाई से अपने आंसू रोक भारी आवाज में बोली, ‘‘नहीं, बेटा, अब वे कभी नहीं आएंगी. तभी तो हम लोगों को तुम दोनों की देखभाल करने के लिए कहा गया है.

‘‘चलो, अब ऐसा करते हैं कि कुछ खाते हैं. मुझे तो भई भूख लग आई है और तुम्हें भी लग रही होगी. चलो, नूडल्स बना लें. हां, एक बात और, यह मजेदार बात हम किसी को बताएंगे नहीं, मामा को भी नहीं,’’ प्रार्थना के सिर पर हाथ फेरते हुए डिंपल बोली.

‘‘मामी, प्रांजल को भी नहीं बताना,’’ प्रार्थना ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘ठीक है, प्रांजल को भी नहीं. तुम और हम जाग रहे हैं, तो हम ही खाएंगे मजेदार नूडल्स,’’ डिंपल के उत्तर ने प्रार्थना को संतुष्ट कर दिया.

डिंपल नूडल्स खाती प्रार्थना के चेहरे को निहारे जा रही थी. अब उसे स्वीकृति मिल गई थी. उस ने इन नन्हे दिलों पर विजय पा ली थी. इतने दिनों उपरांत प्रार्थना ने उस का प्यार स्वीकार कर उस के नारीत्व को शांति दे दी थी. अब न डिंपल को थकान महसूस हो रही थी और न नींद ही आ रही थी.

अचानक उस का ध्यान अपनी फाइलों की ओर गया कि अगर ये अधूरी रहीं तो उस के स्वप्न भी…परंतु डिंपल ने एक ही झटके से इस विचार को अपने दिमाग से बाहर निकाल फेंका. उसे बच्ची का लिपटना, रोना तथा प्यारभरा स्पर्श याद हो आया. वह सोचने लगी, ‘हर वस्तु का अपना स्थान होता है, अपनी आवश्यकता होती है. इस समय फाइलें इतनी आवश्यक नहीं हैं, वे अपनी बारी की प्रतीक्षा कर सकती हैं, पर बच्चे…’

डिंपल ने प्रार्थना को प्यारभरी दृष्टि से निहारते देखा तो वह पूछ बैठी, ‘‘अच्छा, यह बताओ, अब कल की रात क्या करेंगे?’’

‘‘मामी, फिर नूडल्स खाएंगे,’’ प्रार्थना ने नींद से बोझिल आंखें झपकाते हुए कहा.

‘‘मामी नहीं बेटे, मां कहो, मां,’’ कहते हुए डिंपल ने उसे गोद में उठा लिया.

देशद्रोही आफरीन- भाग 3: क्या थी उसकी कहानी

‘‘उस का नाम बलवंत राय?है और वह भी अपने बाप की तरह राजनीति में कदम रखना चाहता है. उस ने अपनी छवि एक हिंदूवादी नेता के रूप में बनानी शुरू कर दी है, क्योंकि हमारे देश में लोग जातिवाद पर ही सब से ज्यादा आंदोलित होते हैं, इसलिए धर्म की राजनीति कर के वह अपने पिता की राह पर चलना चाहता है और फिलहाल उस ने कुछ गायों को खरीद कर अपने फार्महाउस पर रखवा दिया है, जिन का इस्तेमाल वह आने वाले समय में दंगे फैलाने में कर सकता है… मेरा मतलब समझ रही हैं न आप?’’

‘‘क्या तुम इसी समय मुझे बलवंत राय के बंगले पर ले जा सकते हो? हमें सुबूत इकट्ठे करने होंगे,’’ आफरीन ने कहा.

‘‘ले जा तो सकता हूं, पर जाने से पहले मैं अपने दिल की बात आप से कहना चाहता हूं,’’ अनुभव ने कहा.

‘‘कहिए,’’ आफरीन ने कहा.

‘‘दरअसल, आप जैसी इनसानियत से प्यार करने वाली लड़की मैं ने आज तक नहीं देखी. आप एक अनजान लड़की को इंसाफ दिलाने के लिए अपनी जान खतरे में डाल रही हो और आप का यह जज्बा देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा है.

‘‘मैं ने हमेशा से अपने लिए आप जैसी लड़की ही चाही है और मैं आप से यह कहना चाहता हूं कि मुझे आप से प्यार है और मैं आप से शादी करना चाहता हूं,’’ एक ही सांस में कह गया था अनुभव.

अनुभव की बात सुन कर एक पल के लिए रुखसार के गाल लाल हो उठे, पर उस की जबान खामोश हो गई थी. उस के होंठों पर मुसकराहट दौड़ गई थी. आफरीन के होंठ खामोश थे, पर अनुभव को उस का जवाब मिल गया था.

वे दोनों बलवंत राय के फार्महाउस के बाहर थे. अंदर एक ओर घास का छोटा सा मैदान था, जहां पर कई गाय और बछड़े बंधे हुए थे.

आफरीन ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया और धीरेधीरे खिड़की के पास जा पहुंची. बलवंत राय अंदर दोस्तों के साथ बैठा हुआ शराब पी रहा था और उस के दोस्त उस की मक्खनबाजी करने में लगे थे.

‘‘देखना अगला इलैक्शन तो हमारे भैया ही जीतेंगे,’’ एक दोस्त बोला.

‘‘हां, तो राजनीति में है ही क्या… लोगों को धर्म के नाम पर, जाति के नाम पर एकदूसरे से लड़वाओ और राज करो… एक जाति की लड़की का रेप करो तो दूसरी जाति वाले को फंसाओ और दूसरे धर्म की लड़की का रेप करो तो किसी और धर्म के लोगों को फंसाओ.

‘‘अभी देखो न, जब मैं ने चलती कार में उस लड़की का रेप किया तो वह लगी चिल्लाने… मैं ने भी बस चाकू से उस की जीभ काट दी… न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी…’’ बलवंत राय हंसते हुए बोला.

खिड़की के बाहर वीडियो शूट करते हुए आफरीन की आंखें हैरत से फैल गई थीं कि तभी किसी ने पीछे से आ कर उस को पकड़ लिया और उस का मोबाइल छीन लिया.

‘‘क्या रे चिकनी. क्या जासूसी कर रही थी? और तू हमारे टुकड़ों पर पालने वाला कुत्ता… तू अब हमें ही काटने की तैयारी कर रहा था,’’ बलवंत राय के सामने दोनों को ले जाने के बाद वह आगबबूला हो रहा था.

उस के एक आदमी ने उसे बताया कि आफरीन के मोबाइल में गाय और बछड़ों के वीडियो हैं और दोस्तों के साथ हो रही बातें भी रिकौर्ड हैं.

‘‘देखो छमिया. शक्ल से तो कश्मीरी लगती हो. अगर ये सब ले कर तुम पुलिस के पास चली भी जाओगी तो भी पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी. पर, आज हम तेरे इन गालों को काट कर देखेंगे कि इन में कितना रस है और फिर कल तुम पुलिस में चली जाना अपने साथ हुए रेप की खबर देने,’’ बलवंत राय ने आफरीन के गालों को सहलाते हुए कहा.

‘‘नहीं बलवंत राय, आफरीन मेरी होने वाली बीवी है. उसे कुछ मत करना, नहीं तो ठीक नहीं होगा,’’ अनुभव चीख पड़ा था.

‘‘ओह, तो लव का लफड़ा है,’’ इतना कह कर बलवंत राय ने अपनी शर्ट उतार फेंकी और आफरीन की ओर बढ़ा. उस की आंखों में हवस के कीड़े नाच रहे थे कि तभी उस के मोबाइल पर उस के विधायक पिताजी का फोन आ गया.

‘‘अरे, कुछ दिनों के लिए अपनी नीच हरकतों को बंद करो. वह जो लड़की की जबान काटने वाला केस है, वह मीडिया में पहुंच गया है और तुम्हारा नाम भी उछल रहा है. इस तरह तो मेरी कुरसी भी खतरे में पड़ जाएगी, इसलिए कुछ दिन के लिए शुद्ध भगवाधारी ब्रह्मचारी जैसी जिंदगी बिताओ, नहीं तो मैं बचा नहीं पाऊंगा तुम्हें,’’ और इतना कह कर फोन काट दिया.

बलवंत राय काफी कुछ समझ चुका था. वह बोला, ‘‘इन दोनों को बांध कर रखो. इन का इस्तेमाल हम कल होने वाली रैली में करेंगे.’’

अगले दिन ‘बिटिया बचाएंगे… देश जगाएंगे’ नाम की रैली थी. तमाम पुलिस बल इकट्ठा था. तमाम लोगों के ‘हिंदू हृदय सम्राट’ बलवंत राय जनता को संबोधित करने जा ही रहा था कि माइक पर एक महिला की तेज आवाज गूंज पड़ी, ‘‘पाकिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुर्दाबाद…’’

सब इधरउधर देखने लगे. भला इस रैली में ऐसा नारा कौन लगा सकता है?

एक आदमी आफरीन और अनुभव के मुंह पर टेप लगा कर स्टेज पर खींचता हुआ लाया, जिसे जनता की ओर दिखाते हुए वह आदमी बोला, ‘‘देखो साथियो, हम एकता की बात करते हैं और ये कश्मीरी लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ करते हैं. इतना ही नहीं, ‘‘यह देखिए, इन के पास से गौमांस भी बरामद हुआ है,’’ यह कह कर उस आदमी ने एक बैग में गौमांस लोगों को दिखाया.

‘‘ओह तो ये लोग गाय काट कर पार्टी करते हैं. अब चलेगा इन पर प्रतिबंधित पशु काटने का केस और देशद्रोह का मुकदमा, तब अक्ल ठिकाने आ जाएगी,’’ बलवंत राय ने आफरीन को पुलिस की तरफ धकेल दिया.

अनुभव और आफरीन चिल्लाते रहे कि ये उन के खिलाफ एक साजिश है, पर भला सत्ता में बैठे विधायक के बेटे के खिलाफ उठती आवाजें कौन सुनता?

बेकुसूर को सजा दी गई. आफरीन को देशद्रोही मान कर जेल में डाल दिया गया.

और उस दिन के बाद से आफरीन और अनुभव कभी मिल नहीं सके… न जाने कितने अनुभव और आफरीन जेल में बंद होंगे…

आज आफरीन यह भी नहीं जानती कि अस्पताल में जंग लड़ती लड़की जिंदा भी है या नहीं. अलबत्ता, उसे हर पल यह जरूर जताया जाता है कि उस ने देश विरोधी नारे लगाए हैं और वह एक देशद्रोही है.

जानें दुनिया की टॉप 5 एडल्ट फिल्म एक्ट्रेसेस के बारे में

एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में सब से ज्यादा पोर्न अमेरिकी लोगों द्वारा देखे जाते हैं, वहां एशियाई देशों में खासकर इंडियन लड़कियों के अश्लील वीडियो की जबरदस्त मांग है. उन्हें ‘देसी या इंडियन पोर्न वीडियो’ कहा जाता है. इस लिस्ट में अमेरिका के बाद यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), जापान, फ्रांस और इटली का नाम आता है.

पिछले 2 से ढाई दशकों में भारत में भी पोर्न देखने के प्रति ललक तेज हुई है. नतीजा अब भारत में भी पोर्न मूवीज एडल्ट इंडस्ट्री बन चुका है. छोटी फिल्में और वेब सीरीज बनने लगे हैं. उसे कई, भाभी, आंटी, वाइफ, देसी, ग्रुप, सपना, मस्तराम, मोहिनी, माया आदि कैटेगरी में बांट दिया गया है.

बौलीवुड में अपनी पहचान बना चुकी अभिनेत्री सनी लियोनी भी पोर्नस्टार हैं. इस इंडस्ट्री में उन की भी खासी मांग है.

पिछले कुछ सालों में बौलीवुड से ले कर टौलीवुड और दक्षिण के मलयाली, तमिल, तेलुगू सिनेमा समेत टेलीविजन क्षेत्र के छोटेछोटे जूनियर कलाकार या सिनेमा या टीवी कार्यक्रमों में अपनी जगह पाने के लिए संघर्ष करने वाले युवक युवतियां भी इस में शामिल हो चुके हैं.

ओटीटी प्लेटफार्म के आने पर इन में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है. इन की उपलब्धता भी काफी आसान हो गई है. इंटरनेट और स्मार्टफोन पोर्न वीडियो को बनाने से ले कर लोगों तक पहुंचाने का एक बड़ा माध्यम बन गया है.

हालांकि इस में नयापन, चलन, वैरायटी कैटगरी और मांग सर्चइंजनों पर लोगों के ट्रेंड से पता चलता है. उस आधार पर पोर्न में बदलाव लाने के लिए नएनए प्रयोग किए जाते हैं.

जैसे साल 2021 में पोर्न इंडस्ट्री में सब से ज्यादा देखे जाने वाली पोर्न कैटेगरी लेस्बियन निमोनी और मिल्फ थीं. इन्हीं में देसी पोर्न का नाम भी शामिल हो गया था.

इस बारे में की गई औनलाइन सर्वे रिपोर्ट बताती है कि पूरी दुनिया में पोर्न मार्केट की कुल संपत्ति करीब 100 बिलियन डालर यानी लगभग 740 हजार करोड़ रुपए की है, जो पिछले साल के पकिस्तान के सालाना बजट से मात्र 104 हजार करोड़ रुपए ही कम है.

मतलब यह कि पाकिस्तान का जितना कुल बजट है, पोर्न इंडस्ट्री की लगभग उतनी ही कमाई है. पोर्न से जितनी कमाई होती है उन पैसों से कम से कम दुनिया भर के 4.8 अरब लोगों का पेट भरा जा सकता है.

एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में 250 लाख पोर्न वेबसाइट्स हैं. ये आंकड़ा दुनिया की कुल वेबसाइटों का करीब 12 प्रतिशत हैं. यानी हर 100 में से 12 वेबसाइट पोर्नोग्राफी कंटेंट वाली हैं. इन वेबसाइट्स पर दुनिया में लोग औसतन 10 मिनट 13 सेकेंड का समय गुजारते हैं. जबकि इंडिया में यह औसत 8 मिनट 23 सेकेंड का है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया में 30 प्रतिशत ट्रैफिक पोर्न वेबसाइट्स का ही है. यानी तकरीबन एक तिहाई इंटरनेट ट्रैफिक पोर्न वेबसाइट्स से गुजरता है.

विदेशी पोर्न में हौलीवुड फिल्मों की तरह पोर्न स्टार की अपनी लोकप्रियता होती है. फिर भी वह अपनी एक सामाजिक पहचान को ले कर तरसती रहती हैं. उन्हें बाद में पछतावा होता है कि वह क्यों पोर्न इंडस्ट्री का हिस्सा बनीं.

वैसे उन की इंटरनेट ट्रेंड से मिली लोकप्रियता को देखें तो पाएंगे कि ग्लैमर और एंटरटेनमेंट की दुनिया में उन की अच्छी दखल है. साथ ही पोर्न इंडस्ट्री को मजबूती देने में उन की भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है. उन की इंटरनेट पर बाकायदा रैंकिंग की जाती है.

इस बार इंटरनेट रैंकिंग में दुनिया की 5 पोर्न स्टार्स में मिया माल्कोवा, रायली रीड, लाना रोड्स, अबेला डेंजर और ईवा एल्फी टौप पर हैं.

मिया माल्कोवा की गिनती दुनिया की सब से खूबसूरत पोर्न स्टार में होती है. इंटरनेट रैंकिंग में वह पांचवें नंबर पर हैं. वह इस साल पहली जुलाई को 30 साल की हो जाएंगी. हालांकि करिअर की शुरुआत से वह पोर्न इंडस्ट्री में नहीं थीं.

16 साल की उम्र में मिया माल्कोवा ने मैकडोनल्ड में काम किया. पोर्न इंडस्ट्री में काम करने से एक हफ्ते पहले तक वह सिजलर्स नाम की फास्टफूड चेन में काम करती रही थीं.

वह अमेरिका के कैलिफोर्निया की हैं, लेकिन नाम की वजह से लोग इन्हें रशियन समझते हैं. मिया माल्कोवा के भाई और पति भी पोर्न स्टार ही हैं.

टौप-5 पोर्न स्टार रैंकिंग में चौथे नंबर पर रायली रीड भी अमेरिका की रहने वाली हैं. वह 19 साल की उम्र में पोर्न इंडस्ट्री में आई थीं. इस के बाद से लगातार टौप-10 पोर्न स्टार में शामिल रहीं. इस बार दुनिया में चौथे नंबर पर इस पोर्न स्टार को सर्च किया गया.

तीसरे नंबर पर पोर्नस्टार ईवा एल्फी हैं. वह रूस की रहने वाली हैं. एक खास बात और है कि ईवा सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय रहती हैं. यह पोर्नहब की काफी चर्चित एडल्ट एक्ट्रैस हैं. करीब 22 साल की ईवा अपनी मुसकान और अदाओं से दर्शकों के दिलों में जगह बना चुकी हैं.

बात अगर इन की नेटवर्थ की की जाए तो 10 लाख डालर से भी ज्यादा की इन की संपत्ति है. इन्हें बचपन से ही शौक था कि वह सफल मौडल बनें. लेकिन यह सन 2018 में पोर्नहब वेबसाइट की पोर्नस्टार बन गई थीं.

पोर्नस्टार अवेला डेंजर दुनिया की टौप-5 पोर्नस्टार्स में से दूसरे नंबर पर आती हैं. इन का जन्म अमेरिका के मियामी शहर में हुआ था. 19 नवंबर, 1995 को जन्मी अवेला बचपन से ही बेहद खूबसूरत थीं. तभी तो जब वह युवावस्था में पहुंचीं तो तमाम युवक उन पर फिदा होने लगे थे.

15 साल की उम्र में उन्होंने एक बौयफ्रैंड के कहने पर न्यूड सीन किया था. इस के बाद वह धीरेधीरे पोर्न इंडस्ट्री में आ गईं. इस तरह 19 साल की उम्र में वह पोर्नस्टार बन गईं. खूबसूरती और मादकता की बदौलत वह इस इंडस्ट्री में नंबर-2 पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो गईं.

दुनिया में सब से ज्यादा सर्च की जाने वाली पोर्नस्टार लाना रोड्स हैं. लगभग 25 साल की लाना अमेरिका के शिकागो शहर की हैं. इन्होंने 21 साल की उम्र में प्लेबौय के लिए मौडलिंग शुरू की थी. उस के बाद यह पोर्नस्टार बन गईं.

हालांकि बाद में लाना ने पोर्न फिल्में करनी बंद कर दीं. लंबे समय से इन का कोई पोर्न वीडियो सामने न आने के बावजूद भी इंटरनेट पर इस पोर्नस्टार ने खलबली मचा रखी है.

दुनिया में सब से ज्यादा लोग इंटरनेट पर इसी पोर्नस्टार को सर्च कर रहे हैं. लाना खुद भी इस बात से अचंभित हो रही हैं.

बताया जाता है कि दुनिया में तेजी से उभर रहे इस बाजार में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. अंधाधुंध पैसे कमाने की ललक में लोग सामाजिक और नैतिकता को तो ताख पर रख ही चुके हैं साथ ही उन्हें कानून का भी कोई डर नहीं रहता.

सत्यकथा: पोर्न वेबसाइटों के जाल में फंसती महिलाएं

दिल्ली पुलिस को बीते साल जून से सितंबर माह के बीच कुछ अज्ञात महिलाओं द्वारा उन की न्यूड तसवीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए जाने की शिकायतें मिली थीं. उस सिलसिले में दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक औपरेशन यूनिट (आईएफएसओयू) ने 25 फरवरी, 2022 को एक 33 वर्षीय युवक को हिरासत में लिया था. उस पर कथित तौर पर महिलाओं के फरजी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाने और उन की स्पष्ट न्यूड तसवीरें पोस्ट करने का आरोप लगा था.

पुलिस ने तहकीकात में पाया कि युवक ने करीब 200 महिलाओं की 4,000 न्यूड तसवीरें सोशल साइट के अकाउंटों और पोर्न साइटों पर पोस्ट किए हैं. आरोपी की पहचान नोएडा निवासी मोहित शर्मा के रूप में हुई, जिस के पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमबीए की डिग्री थी. यहां तक कि वह एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी में मार्केट रिसर्च एनालिस्ट रह चुका था.

पुलिस पूछताछ में पता चला कि उस ने खुद को एक रूसी पत्रिका के संपादक के रूप में पेश किया था और महिलाओं को अपना चेहरा छिपा कर साफ तसवीरें साझा करने के लिए धोखा दिया था.

उस ने उन में से कुछ तसवीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दी थीं और उन्हें पीडि़तों के रिश्तेदारों व दोस्तों के साथ साझा कर दी थीं. उन में नाबालिगों की तसवीरें भी थीं.

डीसीपी (आईएफएसओयू) के.पी.एस. मलहोत्रा ने बताया कि उस तक पहुंचने के लिए उन्हें तकनीकी सहारा लेना पड़ा. पहले इंस्टाग्राम अकाउंट के आईपी पते को ट्रैक किया गया, जिस से नोएडा में एक घर की ब्रौडबैंड वाईफाई सर्विस का पता लगा और अंतत: आरोपी तक पहुंचने में उन्हें सफलता मिली.

पुलिस के अनुसार यह मामला तब सामने आया, जब पिछले साल दिल्ली की रिया नाम की एक महिला ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाई. उस ने आरोप लगाया कि किसी ने ‘आर्कुडनेस’ नाम से एक फरजी इंस्टाग्राम अकाउंट बना रखा है और उस की नग्न तसवीरें पोस्ट कर दी हैं.

साथ ही उसे अकाउंट से  धमकी भी मिली है कि वह उस की तसवीरें साझा कर देगा. इंस्टाग्राम अकाउंट में रिया की इंस्टाग्राम प्रोफाइल फोटो भी लगी थी.

दरअसल, रिया ने लगभग जून 2021 के महीने में एक इंस्टाग्राम अकाउंट, ‘मारिया’ से पहली बार संपर्क किया गया था, जो एक ‘रूसी’ पत्रिका की महिला संपादक थी. मारिया ने उस की बगैर चेहरे वाली नग्न तसवीरों की मांग की थी.

मारिया ने कहा था कि उन की तसवीरें अंडरगारमेंट के विज्ञापन के साथ इस्तेमाल की जाएंगीं. इस के बदले में उस ने डालर में पैसे देने का औफर दिया था. उस के बाद रिया ने अपनी डिफरेंट पोज की कुछ न्यूड और लिंगरी में सेमी न्यूड तसवीरें उसे पोस्ट कर दी थीं.

तसवीरें देख कर मारिया ने उस के शरीर की सुंदरता, मांसलता लिए सुडौल टांगें, बाहें, स्तनों के उभार और कमर के कटाव की बहुत तारीफ की थी. साथ ही यह भी पूछा कि इतनी खूबसूरत तसवीरें किस ने खींची थीं.

तब रिया ने उसे बताया कि सारी तसवीरें उस की बहन ने क्लिक की हैं, तब मारिया ने बहन की तसवीरें भेजने के लिए भी प्रेरित किया. रिया ने बहन की भी कई तसवीरें भी पोस्ट कर दीं.

उस के थोड़े दिनों बाद ही रिया और मारिया का संपर्क टूट गया. किंतु करीब 7 महीने बाद एक अन्य यूजर ने रिया से संपर्क किया और ऐसी दूसरी तसवीरें भेजने का दबाव बनाया. ऐसा नहीं करने पर उसे पहले की तसवीरें सोशल मीडिया में सार्वजिनक करने की धमकी दी. यानी कि उसे पहले की तसवीरों के साथ ब्लैकमेल किया गया.

इस बार उस से अलगअलग पोज में कुछ वैसे सामानों का इस्तेमाल करते हुए न्यूड वीडियो मांगी गई, जो सामान्य तौर पर विदेशी पोेर्न साइटों के वीडियो में प्रोफेशनल पोर्न स्टार पर फिल्माए जाते हैं. जब उस ने ऐसा करने से मना कर दिया, तब उस की न्यूड तसवीरें दोस्तों और परिवार के सदस्यों के फेसबुक पर भेज दीं.

इस शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस को टेक्नोलौजी की आड़ में छिपे अपराधी तक पहुंचने में शुरुआती सफलता नहीं मिल पाई. किंतु इंस्टाग्राम और हौटमेल से डिजिटल चिह्नों के तौर पर रजिस्ट्रैशन का विवरण जुटाने के बाद पुलिस ने आरोपी मोहित शर्मा नाम के युवक को दबोच लिया.

पुलिस के अनुसार, मोहित ने शुरू में इस मामले में शामिल होने से इनकार कर दिया था और दावा किया कि उस का वाईफाई कनेक्शन किसी ने हैक कर लिया था. इस की वह पुलिस में शिकायत भी कर चुका है.

उस के मोबाइल और लैपटौप पर कोई ठोस सबूत नहीं मिलने पर पुलिस ने डिलीट किए गए डेटा को निकालने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध फोरैंसिक प्रयोगशाला में फोरैंसिक विश्लेषण के लिए भेज दिया.

जब उस की जांच की परतें खुलने लगीं, तब आरोपी का निशाना बनी दूसरी सैकड़ों महिलाओं की हजारों न्यूड तसवीरें मिलीं. उन में पीडि़ता रिया की तसवीरें भी शामिल थीं.

बताते हैं कि मोहित ने महिलाओं की न्यूड तसवीरें और वीडियो न केवल पोर्न वेबसाइटों को बेचे, बल्कि उन की तसवीरों के जरिए ही उसे अधिक से अधिक वीडियो बना कर भेजने के लिए ब्लैकमेल भी किया.

उस के खिलाफ सितंबर, 2020 में स्थानीय पुलिस में और बाद में जून, 2021 में दिल्ली पुलिस साइबर सेल में औनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई थी.

मोहित पर धारा 66 सी आईटी अधिनियम, 419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी के लिए सजा) भारतीय दंड संहिता और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे.

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