सहचारिणी – भाग 1: क्या सुरुचि उस परदे को हटाने में कामयाब हो पाई

आज का दिन मेरी जिंदगी का सब से खास दिन है. मेरा एक लंबा इंतजार समाप्त हुआ. तुम मेरी जिंदगी में आए. या यों कहूं कि तुम्हारी जिंदगी में मैं आ गई. तुम्हारी नजर जैसे ही मुझ पर पड़ी, मेरा मन पुलकित हो उठा. लेकिन मुझे डर लगा कि कहीं तुम मेरा तिरस्कार न कर दो, क्योंकि पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है. लोग आते, मुझे देखते, नाकभौं सिकोड़ते और बिना कुछ कहे चले जाते. मैं लोगों से तिरस्कृत हो कर अपमानित महसूस करती. जीवन के सीलन भरे अंधेरों में भटकतेभटकते कभी यहां टकराती कभी वहां. कभी यहां चोट लगती तो कभी वहां. चोट खातेखाते हृदय क्षतविक्षत हो गया था. दम घुटने लगा था मेरा. जीने की चाह ही नहीं रह गई थी. मैं ऐसी जिंदगी से छुटकारा पाना चाहती थी. धीरेधीरे मेरा आत्मविश्वास खोता जा रहा था.

वैसे मुझ में आत्मविश्वास था ही कहां? वह तो मेरी मां के जाने पर उन के साथ चला गया था. वे बहुत प्यार करती थीं मुझे. उन की मीठी आवाज में लोरी सुने बिना मुझे नींद नहीं आती थी. मैं परी थी, राजकुमारी थी उन के लिए. पता नहीं वे मुझ जैसी साधारण रूपरंग वाली सामान्य सी लड़की में कहां से खूबियां ढूंढ़ लेती थीं.

मगर मेरे पास यह सुख बहुत कम समय रहा. मैं जब 5 वर्ष की थी, मेरी मां मुझे छोड़ कर इस दुनिया से चली गईं. फिर अगले बरस ही घर में मेरी छोटी मां आ गईं. उन्हें पा कर मैं बहुत खुश हो गई थी कि चलो मुझे फिर से मां मिल गईं.

वे बहुत सुंदर थीं. शायद इसी सुंदरता के वश में आ गए थे मेरे बाबूजी. मगर सुंदरता में बसा था विकराल स्वभाव. अपनी शादी के दौरान पूरे समय छोटी मां मुझे अपने साथ चिपकाए रहीं तो मैं बहुत खुश हो गई थी कि छोटी मां भी मुझे मेरी अपनी मां की तरह प्यार करेंगी. लेकिन धीरेधीरे असलियत सामने आई. बरस की छोटी सी उम्र में ही मेरे दिल ने मुझे चेता दिया कि खबरदार खतरा. मगर यह खतरा क्या था, यह मेरी समझ में नहीं आया.

सब के सामने तो छोटी मां दिखाती थीं कि वे मुझे बहुत प्यार करती हैं. मुझे अच्छे कपड़े और वे सारी चीजें मिलती थीं, जो हर छोटे बच्चे को मिलती हैं. पर केवल लोगों को दिखाने के लिए. यह कोई नहीं समझ पा रहा था कि मैं प्यार के लिए तरस रही हूं और छोटी मां के दोगले व्यवहार से सहमी हुई हूं.

सुंदर दिखने वाली छोटी मां जब दिल दहलाने वाली बातें कहतीं तो मैं कांप जाती. वे दूसरों के सामने तो शहद में घुली बातें करतीं पर अकेले में उतनी ही कड़वाहट होती थी उन की बातों में. उन की हर बात में यही बात दोहराई जाती थी कि मैं इतनी बदनसीब हूं कि बचपन में ही मां को खा गई. और मैं इतनी बदसूरत हूं कि किसी को भी अच्छी नहीं लग सकती.

उस समय उन की बात और कुटिल मुसकान का मुझे अर्थ समझ में नहीं आता था. मगर जैसेजैसे मैं बड़ी होती गई वैसेवैसे मुझे समझ में आने लगा. मगर मेरा दुख बांटने वाला कोई न था. मैं किस से कहूं और क्या कहूं? मेरे पिता भी अब मेरे नहीं रह गए थे. वे पहले भी मुझ से बहुत जुड़े हुए नहीं थे पर अब तो उन से जैसे नाता ही टूट गया था.

मैं जब युवा हुई तो मैं ने देखा कि दुनिया बड़ी रंगीन है. चारों तरफ सुंदरता है, खुशियां हैं, आजादी है और मौजमस्ती है. पर मेरे लिए कुछ भी नहीं था. मैं लड़कों से दूर रहती. अड़ोसपड़ोस के लोग घर में आते तो मुझ से नौकरानी सा व्यवहार करते. मेरी हंसी उड़ाते. अब आगे मैं कुछ न कहूंगी. कहने के लिए है ही क्या? मैं पूरी तरह अंतर्मुखी, डरपोक और कायर बन चुकी थी.

लेकिन कहते हैं न हर अंधेरी रात की एक सुनहरी सुबह होती है. सुनहरी सुबह मेरी जिंदगी में भी तब आई जब तुम बहार बन कर मेरी वीरान जिंदगी में आए.

तुम्हारी वह नजर… मैं कैसे भूल जाऊं उसे. मुझे देखते ही तुम्हारी आंखों में जो चमक आ गई थी वह जैसे मुझे एक नई जिंदगी दे गई. याद है मुझे वह दिन जब तुम किसी काम से मेरे घर आए थे. काम तुरंत पूरा न होने के कारण तुम्हें अगले दिन भी हमारे घर रुक जाना पड़ा था.

उन 2 दिनों में जब कभी हमारी नजरें टकरा जातीं या पानी या चाय देते समय जरा भी उंगलियां छू जातीं तो मेरा तनमन रोमांचित हो उठता. मेरी जिंदगी में उत्साह की नई लहर दौड़ गई थी.

फिर सब कुछ बहुत जल्दीजल्दी घट गया और तुम हमेशा के लिए मेरी जिंदगी में आ गए. एक लंबी तपस्या जैसे सफल हो गई. छोटी मां ने अनजाने में ही मुझ पर बहुत बड़ा उपकार कर दिया. उन्हें लगा होगा बिना दहेज के इतना अच्छा रिश्ता मिल रहा है और यह अनचाही बला जितनी जल्दी घर से निकल जाए उतना अच्छा.

 

 

अगर आप भी है स्टाइलिश कपड़ों के शौकीन, तो ट्राय करें ये स्लोगन टी-शर्ट्स

प्लेन टी-शर्ट तो आमतौर पर हर किसी के वौर्डरोब में होती ही है, लेकिन इस बार खरीदें स्लोगन लिखी टी-शर्ट. आपको हौट, कूल या स्टाइलिश दिखाने में यह आपके खूब काम आएगी.

कोट्स के अलावा गानों की कैची लाइन…

कोट्स के अलावा गानों की कैची लाइन वाली टी शर्ट भी आपको खूब मिलेंगी. गाने ज्यादातर लेटेस्ट फिल्मों की या तो पहली लाइन हैं या कोई बीच की कैची लाइन को उठाया गया है.

ये भी पढ़ें- Winter Parties में ट्राय करें आयुष्मान खुराना के भाई के ये लुक्स

पुराना फैशन नए ट्रेंड में…

हालांकि स्लोगन टी शर्ट का क्रेज लंबे समय से ट्रेंड में है, लेकिन इस सीजन इसने एक नए अंदाज में वापसी की है. पहले जहां टी शर्ट में कोट्स लंबे- लंबे होते थे, वहीं अब एक से दो शब्द ही ज्यादातर देखने में आ रहे हैं.

ये भी पढ़ें- दिखना चाहते हैं सबसे अलग, तो जरूर ट्राय करें ‘Rugged’ जींस

हिट हैं ये स्लोगन…

बौलीवुड में भी स्लोगन वाली टी-शर्ट का फैशन इस समय बेहद ट्रेंड में है. सेलिब्रिटीज कई मौकों पर इन्हें पहने नजर आती हैं.

ये भी पढ़ें- अगर आपको भी है नए हेयरस्टाइल्स रखने का क्रेज तो जरूर फौलो करें ये ट्रेंडी लुक्स

खुद भी करवा सकती हैं तैयार…

अगर आपको अपने मनपसंद को कोई कोट्स टी शर्ट पर लिखवाना है, तो प्लेन वाइट टी शर्ट खरीद लें और फिर उसे पेंटर से लिखवा लें. इससे आप जो चाहेंगी, वह कोट्स उस पर लिखवा सकती हैं. क्या आप भी तुरंत मार्केट जाकर एक व्हाइट टी-शर्ट खरीदने की सोच रही हैं.

ये भी पढ़ें- फेस्टिव सीजन के लिए परफेक्ट हैं इन एक्टर्स के ये इंडो वेस्टर्न लुक, देखें फोटोज

मुझे नहीं लगता कि मैं किसी से उस तरह प्यार कर भी पाऊंगा जैसा मुझे मेरी पहली गर्लफ्रैंड से हुआ था, क्या करूं?

सवाल

मैं 25 वर्षीय वयस्क हूं. मैं बहुत सी रिलेशनशिप में रह चुका हूं. पर अब मेरी रिलेशनशिप और प्यारव्यार के चक्करों में पड़ने की इच्छा नहीं रही. अब मुझे नहीं लगता कि मैं किसी से उस तरह प्यार कर भी पाऊंगा जैसा मुझे मेरी पहली गर्लफ्रैंड से हुआ था. मेरे औफिस में एक लड़की है. मेरी बहुत अच्छी दोस्त है. मैं उस के प्रति आकर्षण महसूस करता हूं परंतु उस का दिल दुखाने से डरता हूं. मैं क्या करूं?

जवाब

आप को अपने अतीत से बाहर निकलने की जरूरत है. आप को 1-2 बार प्यार में मंजिल नहीं मिली, इस का मतलब यह नहीं कि आप खुद को प्रेम में पड़ने से ही रोक दें. आप उस लड़की की तरफ आकर्षित हैं तो आप के प्यार में पड़ने की संभावनाएं भी हैं. आप इस तरह अपनेआप को प्रेम करने से रोकेंगे और उस की तरफ आकर्षित भी होते रहेंगे तो इस से आप का मन कभी शांत नहीं हो पाएगा और कहीं ऐसा न हो कि आप की अकुलाहट को वह कभी दोस्ती से ज्यादा समझे ही न और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ प्रेम में पड़ जाए. समय रहते उस से अपने मन की बात कह दीजिए, खुद को प्रेम में पड़ने से मत रोकिए. हो सकता है आप दोनों का प्रेम परवान चढ़े और यह आप की जिंदगी का सब से अच्छा फैसला साबित हो.

मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता हूं. मेरी गर्लफ्रैंड 11वीं कक्षा में है…

सवाल

मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता हूं. मेरी गर्लफ्रैंड 11वीं कक्षा में है. हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं. मैं उसे छोड़ कर इस स्कूल से नहीं निकलना चाहता. मैं यदि 12वीं में फेल हो जाऊं तो यह संभव है, पर मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा करना सही होगा या नहीं?

जवाब…

इस उम्र में लड़का-लड़की सिर्फ अपनी दुनिया में खोए होते हैं. जैसे ही हकीकत की जमीन पर आते हैं तो गुब्बारे की हवा की तरह उन का प्यार भी फुस हो जाता है. फेल होने जैसी बेवकूफी न करें. यह समय अपने भविष्य को संवारने का है, प्रेम संबंधों में पड़ कर अपने जीवन के कीमती समय को व्यर्थ करने का नहीं. आप के मातापिता को आप से बहुत उम्मीदें हैं. आप के पास पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा.

पराकाष्ठा- भाग 2: एक विज्ञापन ने कैसे बदली साक्षी की जिंदगी

पति को बस में करने के नएनए तरीके आजमाने की जब उस ने कोशिश की तो सुदीप का माथा ठनका. इस तरह शर्तों पर तो जिंदगी नहीं जी जा सकती. आपस में विश्वास, समझ, प्रेम व सामंजस्य की भावना ही न हो तो संबंधों में प्रगाढ़ता कहां से आएगी? रिश्तों की मधुरता के लिए दोनों को प्रयास करने पड़ते हैं और साक्षी केवल उस पर हावी होने, अपनी जिद मनवाने तथा स्वयं को सही ठहराने के ही प्रयास कर रही है. यह सब कब तक चल पाएगा. इन्हीं विचारों के झंझावात में वह कुछ दिन उलझा रहा.

एक दिन अचानक खुशी की लहर उस के शरीर को रोमांचित कर गई जब साक्षी ने उसे बताया कि वह मां बनने वाली है. पल भर के लिए उस के प्रति सभी गिलेशिकवे वह भूल गया. साक्षी के प्रति अथाह प्रेम उस के मन में उमड़ पड़ा. उस के माथे पर प्रेम की मोहर अंकित करते हुए वह बोला, ‘थैंक्यू, साक्षी, मैं तुम्हारा आभारी हूं, तुम ने मुझे पिता बनने का गौरव दिलाया है. मैं आज बहुत खुश हूं. चलो, बाहर चलते हैं. लेट अस सेलीब्रेट.’

मां को जब यह खुशखबरी सुदीप ने सुनाई तो वह दौड़ी चली आईं. अपने अनुभवों की पोटली भी वह खोलती जा रही थीं, ‘साक्षी, वजन मत उठाना, भागदौड़ मत करना, ज्यादा मिर्चमसाले, गरम चीजें मत लेना…’ कह कर मां चली गईं.

एकांत के क्षणों में सुदीप सोचता, बच्चा होने के बाद साक्षी में सुधार आ जाएगा. बच्चे की सारसंभाल में वह व्यस्त हो जाएगी, सहेलियों के जमघट से भी छुटकारा मिल जाएगा.

प्रसवकाल नजदीक आने पर मां ने आग्रह किया कि साक्षी उन के पास रहे मगर साक्षी ने दोटूक जवाब दिया, ‘मुझे यहां नहीं रहना, मां के पास जाना है. मेरी मम्मी, मेरी व बच्चे की ज्यादा अच्छी देखभाल कर सकती हैं.’

हार कर उसे मां के घर भेजना ही पड़ा था सुदीप को.

3 माह के बेटे को ले कर साक्षी जब घर लौटी तो सब से पहले उस ने आया का इंतजाम किया. चूंकि उस का वजन भी काफी बढ़ गया था इसलिए हेल्थ सेंटर जाना भी शुरू कर दिया. उसे बच्चे को संभालने में खासी मशक्कत करनी पड़ती. दिन भर तो आया ही उस की जिम्मेदारी उठाती थी. कई दफा मुन्ना रोता रहता और वह बेफिक्र सोई रहती. एक दिन बातों ही बातों में सुदीप ने जब इस बारे में शिकायत कर दी तो साक्षी भड़क उठी, ‘हां, मुझ से नहीं संभलता बच्चा. शादी से पहले मैं कितनी आजाद थी, अपनी मर्जी से जीती थी. अब तो अपना होश ही नहीं है. कभी घर, कभी बच्चा, बंध गई  हूं मैं…’

सुदीप के पैरों तले जमीन खिसक गई, ‘साक्षी, यह क्या कह रही हो तुम? अरे, बच्चे के बिना तो नारी जीवन ही अधूरा है. यह तो तुम्हारे लिए बड़ी खुशी की बात है कि तुम्हें मां का गौरवशाली, ममता से भरा रूप प्राप्त हुआ है. हम खुशकिस्मत हैं वरना कई लोग तो औलाद के लिए सारी उम्र तरसते रह जाते हैं,’ सुदीप ने समझाने की गरज से कहा.

‘तुम आज भी उन्हीं दकियानूसी विचारों से भरे हो. दुनिया कहां से कहां पहुंच गई है. अभी भी तुम कुएं के मेढक बने हुए हो. घर, परिवार, बच्चे, बस इस के आगे कुछ नहीं.’

साक्षी के कटाक्ष से सुदीप भीतर तक आहत हो उठा, ‘साक्षी, जबान को लगाम दो. तुम हद से बढ़ती जा रही हो.’

‘मुझे भी तुम्हारी रोजरोज की झिकझिक में कोई दिलचस्पी नहीं. मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना, तलाक चाहिए मुझे…’

साक्षी के इतना कहते ही सुदीप की आंखों के आगे अंधेरा छा गया, ‘क्या कहा तुम ने, तलाक चाहिए? तुम्हारा दिमाग तो ठीक है?’

‘बिलकुल ठीक है. मैं अपने मम्मीपापा के पास रहूंगी. वे मुझे किसी काम के लिए नहीं टोकते. मुझे अपने ढंग से जीने देते हैं. मेरी खुशी में ही वे खुश रहते हैं…’

उन के संबंधों में दरार आ चुकी थी. मुन्ने के माध्यम से यह दरार कभी कम अवश्य हो जाती लेकिन पहले की तरह प्रेम, ऊष्मा, आकर्षण नहीं रहा.

तनावों के बीच साल भर का समय बीत गया. इस बीच साक्षी 2-3 बार तलाक की धमकी दे चुकी थी. सुदीप तनमन से थकने लगा था. आफिस में काम करते वक्त भी वह तनावग्रस्त रहने लगा.

मुन्ना रोए जा रहा था और साक्षी फोन पर गपशप में लगी थी. सुदीप से रहा नहीं गया. उस का आक्रोश फट पड़ा, ‘तुम से एक बच्चा भी नहीं संभलता? सारा दिन घर रहती हो, काम के लिए नौकर लगे हैं. आखिर तुम चाहती क्या हो?’

‘तुम से छुटकारा…’ साक्षी चीखी तो सुदीप भी आवेश में हो कर बोला, ‘ठीक है, जाओ, शौक से रह लो अपने मांबाप के घर.’

साक्षी ने फौरन अटैची में अपने और मुन्ने के कपड़े डाले.

khatron Ke Khiladi 12 : स्टंट के दौरान कनिका मान हुईं घायल

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म मेकर रोहित शेट्टी का शो खतरों के खिलाड़ी 12 इन दिनों टीवी पर लगातार धमाल मचाया हुआ है. आपको बता दें कि यह शो 2 जुलाई से टीवी पर दस्तक देने वाला है.

लेकिन इस शो कि शूटिंग बहुत पहले से शुरू हो चुका  था. जिसमें टीवी के कई सारे मशहूर हस्तियों ने हिस्सा लिया है. शिवांगी जोशी , प्रतीक सहजपाल, फैजल शेख, जन्नत जुबैर, कनिका मान , रुबीना दिलाइक के अलावा और भी कई सेलिब्रिटी इस शो में हिस्सा लिए हुए है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

हाल ही में एक्ट्रेस कनिका मान की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रही है. जिसमें कनिका मान को चोट लगी हुई है. तस्वीर में  छिलने कटने के निशान दिखाई दे रहे हैं. दरअसल, एक स्टंट के दौरान कनिका मान घायल हो गई थी. जिसमें उन्हें गंभीर चोट लगी है.

कनिका मान ने एक इंटरव्यू में बताया  है कि वह स्टंट के दौरान काफी ज्यादा डरी हुई थीं. वह रोहित सर से कह रही थी कि मेरे हाथ पैर नहीं चल रहे हैं. लेकिन रोहित ने उनके हौसले को बढ़ाते हुए कहा कि वह एक मजबूत प्लेयर की तरह पर्फॉरम करें. जिस दौरान उन्हें चोट लग गई.

इसके अलावा और भी कई सारे खिलाड़ी इस शो में हिस्सा लिए हुए हैं. जो लगातार अपना बेहतर देने की सोच रहे हैं. इससे पहले भी इस शो के कई सीजन आ चुके हैं और इसमें कई सारे अलग- अलग कलाकारों ने हिस्सा लिया है.

Hrithik Roshan की नानी का 91 साल में निधन, लंबे समय से थी बीमार

बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रौशन के घर में एक बार फिर से दुख का माहौल छाया हुआ है. सभी परिवार वाले शोक में डूबे हुुए हैं. दरअसल लंबे समय से बीमार चल रही ऋतिक रौशन की नानी का निधन हो गया है.

बताया जा रहा है कि वह पिछले 2 साल से रौशन परिवार में ही रह रही थी, और उनका लगातार इलाज चल रहा था. रिपोर्ट्स के अनुसार पता चला है कि आज सुबह 3 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली है. ऋतिक रोशन की मां पिंकी रौशन ने कुछ वक्त पहले ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी मां पद्मा रानी के साथ मदर्स डे मनाते हुए फोटो शेयर किया था.

जिसमें वह अपनी मां से केक कटवा रही हैं. इस तस्वीर को देखने के बाद पता चलता है कि पिंकी रौशन अपनी मां से बहुत ज्यादा क्लोज थीं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Pinkie Roshan (@pinkieroshan)

इस खबर के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स वालों ने राकेश रौशन से बातचीत किया है. जिसमें उन्होंने अपनी सास की मौत पर दुख जताया है.ओम शांति कहा है.

बता दें कि कहा जाता है कि ऋतिक रौशन भी अपनी नानी से बहुत ज्यादा क्लोज थें. आपकेे जानकारी के लिए बता दें कि पद्मा रानी की तरह उनके पति जे ओम प्रकाश का निधन भी 93 वें साल में हुआ था.

अगर ऋतिक रौशन के निजी जीवन के बारे में बात करें तो आए दिन वह सोशल मीडिया पर अपने बच्चों के साथ तस्वीर शेयर करते रहते हैं. हाल ही में ऋतिक रौशन को उनकी गर्लफ्रेंड के साथ देखा गया था. जिसमें वह दोनों साथ में अच्छे लग रहे थें.

 

अतिक्रमण की समस्या सरकार की खुद की देन है

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली के बाद अब बिहार में शासक जो अपने को किसी पौराणिक चक्रवर्ती राजा से कम नहीं समझते, बुलडोजर ऐसे चला रहे हैं जैसे चतुरंगी सेनाएं चल रही हों. ऐसा एक दृश्य हौलीवुड की फिल्म ‘अवतार’ में है जब पृथ्वीवासी एक अन्य ग्रह में रह रहे लोगों की जमीन से खनिज निकालने के लिए विशाल बुलडोजर टाइप मशीनें ले कर चलते हैं. उन का उद्देश्य उस जमीन से नीले रंग के उन लंबे कान व पूंछ वाले आदिवासियों को हटाना ही नहीं था, उन्हें या तो गुलाम बनाना था या मार डालना था.

ये राज्य सरकारें और उन के अधीन काम करने वाले नगरनिगम भी बुलडोजरों के इस्तेमाल से पूरीपूरी कौमों को नष्ट करने की कोशिश में हैं. आज ये बुलडोजर मुसलमानों पर चल रहे हैं, आज सरकारी या पब्लिक जमीन पर अतिक्रमण पर चलाए जा रहे हैं, कल दूसरे विरोधियों पर नहीं चलेंगे, इस की क्या गारंटी है? महाभारत में बहुत से ऐसे अस्त्रों का बखान है जो झूठा ही सही, है, था शत्रुओं के लिए. उस समय के पौराणिक शत्रु दस्यु और दानव थे जो महाभारत के ही अनुसार लाखों में थे, उन के अपने राज्य भी थे.

लेकिन उन अस्त्रों का इस्तेमाल हुआ कहां. अर्जुन का गांडीव भाइयों पर चला. कर्ण का शक्ति शस्त्र घटोत्कच पर चला. कृष्ण का सुदर्शन चक्र शिशुपाल पर चला. ये सब एक ही घर के लोग थे. ये पराए नहीं थे, ये विदेशी नहीं थे, ये विधर्मी नहीं थे, ये नीची जाति वाले भी नहीं थे. ये एक परिवार के ही थे जिन से राज और संपत्ति को ले कर विवाद हुआ और दादा पर चले, चचेरे भाइयों पर चले, मामा पर चले, भतीजों पर चले, गुरुओं पर चले, पत्नियों, बहुओं, सगों पर चले.

ये बुलडोजर भी अपनों पर चल सकते हैं. पी. चिदंबरम जब गृह मंत्री और वित्त मंत्री थे तो उन्होंने बहुत से कठोर कानून बनवाए, ताकि देश में आर्थिक व शासकीय अनुशासन बने. इन कानूनों का इस्तेमाल उन्हीं के खिलाफ  106 दिन की जेल में किया गया जिस में कुछ दिन तो वे एक ऐसे कमरे में बंद रहे जिस में नहाने का गुसलखाना तक न था, ऐसी जेल में रहे जिस में पखाने में भी सीसीटीवी लगा था.

यह बुलडोजर संस्कृति कौनकहां चलाएगा, पता नहीं. बुलडोजर निर्माण के लिए है, विनाश के लिए नहीं. कुछ बनाने के लिए जमीन समतल करने के लिए है, तोड़ने के लिए नहीं. यह आधुनिक तकनीक का सिंबल है जिस पर चढ़ कर इंगलैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जौनसन भारत आने पर तसवीर खिंचवाते हैं, क्योंकि ज्यादातर बुलडोजर इंगलैंड की कंपनी जेसीबी की फैक्टरी से ही निकल कर आ रहे हैं.

निर्माण की चीज को तोड़ने का प्रयोग 1975-76 में संजय गांधी ने भी किया था और दिल्ली के तुर्कमान गेट के आसपास काफी इलाके में मुसलिम मकान तोड़े गए थे.

अतिक्रमण की समस्या सरकार की खुद की देन है. सरकारी अफसर पहले हफ्ता ले कर पटरियों, सड़कों, खाली पड़ी निजी या सरकारी जमीन पर कब्जा होने देते हैं और जब लोग वहां अपनी गृहस्थी जमा लेते हैं तो उन्हें डरानेधमकाने लगते हैं. सरकारों ने शहरी जमीनों पर तो नियंत्रण कर ही रखा है, शहर के बाहर खेती की जमीन पर मकान बनाने पर बीसियों कानून और भारी फीस लगा रखी है. जहां उन की कौड़ी नहीं लगती वहां काम शुरू होने से पहले वसूलना अन्याय और लूट है पर जो इस के खिलाफ बोलेगा उस के लिए न कानून है, न अदालत, न दलील, न वकील, बस फैसला वह भी बुलडोजर का.

निश्चित है कि ऐसी सरकारों का अंत पांडवों और कृष्ण जैसा होता है. इंदिरा गांधी को गोल्डन टैंपल में बुलडोजर चलाने की सजा मिली और राजीव गांधी को श्रीलंका में 3,000 तमिल टाइगर्स के खिलाफ  एक लाख इंडियन पीस कीपिंग फोर्स बुलडोजरों समेत भेजने की मिली.

मुंहबोली बहनें- भाग 3 : रोहन ने अपनी पत्नी को क्यों दे डाली धमकी

‘‘मेरे और अनाइका के बीच कुछ चल रहा है, यह बात अनाइका ने मुझे क्यों नहीं बताई? इतनी बड़ी बात मुझ से छिपा कर रखी? मुझे भी बता देती तो मैं थोड़ा अपने पर इतरा लेता,’’ रोहन भैया ने चिंतित मुद्रा में मुंह बना कर कहा, ‘‘सोनाली, कमी मुझ में नहीं उन लड़कियों की सोच में है. किसी से दो बातें कर लो तो सीधा ‘चक्कर चलना’ ही मान बैठती हैं.’’ रोहन भैया मेरी किसी बात को गंभीरता से लेने को तैयार ही नहीं थे. मैं झक मार कर वहां से उठ ही गई, ‘‘ठीक है रोहन भैया, आप के लिए तो हर बात बस, मजाक ही होती है, पर कालेज में होने वाली बातों का मुझ पर असर पड़ता है. कोई मेरे भाई के बारे में अनापशनाप कहे तो मैं बरदाश्त नहीं कर पाती हूं. अगले साल मैं अपना कालेज ही बदल लूंगी. न आप के कालेज में रहूंगी, न आप के बारे में कुछ सुनूंगी और न ही मेरा दिमाग खराब होगा,’’ कह कर मैं अपना बैग उठा कर वहां से निकल पड़ी.

‘‘ओए मधुमक्खी, कालेज बदलना तो अकेली ही जाना, अपनी सहेलियों को मत ले जाना वरना मेरे कालेज में तो पतझड़ आ जाएगा,’’ कह कर रोहन भैया फिर होहो कर के हंसने लगे. मुझे पता था कि रोहन भैया चिकने घड़े हैं. मेरी किसी बात का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. फिर भी हर 10-15 दिन में मैं उन से इस बात को ले कर बहस कर ही बैठती थी.

12वीं के बाद बीकौम में जब मुझे दीनदयाल डिग्री कालेज में ऐडमिशन मिला था तो मैं फूली नहीं समाई थी. नामीगिरामी कालेज में ऐडमिशन पाने की खुशी के साथसाथ एक सुकून का एहसास यह सोचसोच कर भी हो रहा था कि रोहन भैया के होते हुए मुझे किसी काम के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी. मेरा सारा काम बैठेबिठाए हो जाएगा. रोहन भैया उसी कालेज से एमकौम कर रहे थे और कालेज में उन के रोब के किस्से उन के मुंह से सालों से सुनती चली आ रही थी.

कालेज पहुंची तो सचमुच रोहन भैया की कालेज में पहचान देख कर मैं दंग रह गई. छात्रसंघ के सक्रिय सदस्य होने के कारण सारे प्रोफैसर और विद्यार्थी न केवल उन्हें अच्छी तरह जानते थे बल्कि वाक्पटुता और आकर्षक व्यक्तित्व के कारण उन्हें पसंद भी बहुत करते थे. युवतियों के तो वे खासकर सर्वप्रिय नेता माने जाते थे. उन में वे किशन कन्हैया के नाम से मशहूर थे. लड़कियां उन के इर्दगिर्द मंडराने के अवसर तलाशती रहती थीं.

कालेज में उन के जलवे देख कर मैं भी अपना सिक्का जमाने के लिए सभी के सामने रोब जमाते हुए यह कहने लगी कि रोहन मेरे भैया हैं और मुझे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन उस के बाद से ही मेरी मुसीबतों का सिलसिला शुरू हो गया. रोज कोई न कोई युवती अपना कोई न कोई काम ले कर मेरे पास

मनोहर कहानियां: प्यार के साथ जोर जबरदस्ती कभी नहीं

राजस्थान की राजधानी जयपुर के थाना करधनी के बैनाड़ रोड स्थित फकीरा नगर में नरेंद्र सिंह राठौर अपनी पत्नी विनोद कंवर व 3 बच्चों के साथ रहता था. इसी परिसर में उस के पड़ोस में सुभाष कुमावत भी किराए पर कमरा ले कर रहता था.

सुभाष टैक्सी चालक था. जयपुर में भाड़े पर गाड़ी चलाता था. जबकि नरेंद्र सिंह बस ड्राइवर था. दोनों के कमरे पासपास होने और हमपेशा होने के कारण एकदूसरे से अच्छी पटती थी. दोनों का एकदूसरे के यहां आनाजाना भी था.

सुभाष ड्राइवरी पार्टटाइम करता था. वह गांव में रहता था. जब कोई उसे बुलाता तब गाड़ी चलाने के लिए जयपुर आ जाता था. इस बीच वह फकीरा नगर में अपने कमरे पर हफ्ते में 2-3 दिन के लिए रुक जाता था और काम खत्म हो जाने के बाद वापस अपने गांव चला जाता था.

नरेंद्र की पत्नी विनोद कंवर एक फैक्ट्री में काम करती थी. 6 मार्च, 2022 की शाम दोनों पतिपत्नी अपनेअपने काम से वापस घर आए थे. विनोद कंवर ने चाय बनाई. उस ने पति नरेंद्र से कहा, ‘‘सुभाष के लिए भी चाय बना ली है. आप उसे बुला लाओ.’’

इस पर उस का पति सुभाष को बुलाने उस के कमरे पर गया तो वहां सुभाष की लाश को देखते ही वह चीखते हुए अपने घर की ओर दौड़ा. उस ने पत्नी को बताया कि कमरे में सुभाष मरा पड़ा है.

यह सुन कर विनोद कंवर भी पति के साथ दौड़ीदौड़ी उस के कमरे पर पहुंची. देखा कमरे की खिड़की के पास सुभाष मरा हुआ पड़ा था. इस पर नरेंद्र ने मकान मालिक को खबर दी. मकान मालिक ने इस की जानकारी करधनी थाना पुलिस को दी.

शाम का समय था. थाने पर थानाप्रभारी बनवारीलाल मीणा बैठे थे. लाश मिलने की सूचना पर वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने लाश का निरीक्षण किया. थानाप्रभारी को मृतक के हाथ और गरदन पर चोट के निशान जरूर दिखाई दे रहे थे.

ऐसी आशंका व्यक्त की गई कि कहीं सुभाष को हार्ट अटैक आया हो और गिरने से उसे चोट लगी हो. वहां एकत्र भीड़ व मकान मालिक ने बताया कि सुभाष मिलनसार युवक था. वह टैक्सी ड्राइवर था. अपने काम से काम रखता था. कमरे पर कुछ दिन ही रुकता था.

पूछताछ में विनोद कंवर ने पुलिस को बताया कि सुभाष से उस के परिवार के अच्छे संबंध थे. सुभाष को चाय पीने के लिए उस का पति बुलाने गया था, लेकिन वहां सुभाष मृत अवस्था में मिला.

पुलिस को पता चला कि सुभाष मूलत: जयपुर के गोविंदगढ़ थाना इलाके के ढोडसर गांव का रहने वाला था. मृतक के घर वालों को सूचना देने के साथ ही पुलिस ने मामला संदिग्ध लगने पर एफएसएल टीम को बुला लिया. मौके की काररवाई निपटाने के बाद लाश मोर्चरी भिजवा दी.

मामला संदिग्ध होने के कारण लाश का मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवक की मौत का कारण गला घोटना बताया गया. मृतक के चेहरे व हाथ पर नाखूनों के निशान मिले थे. इस पर मृतक के भाई सुनील ने थाने में

हत्या की रिपोर्ट अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई.

हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस हत्यारे की तलाश में जुट गई. पुलिस ने वहां लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किए. इस के

साथ ही आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ की गई.

सुभाष की मौत को 4 दिन बीत गए थे. लेकिन पुलिस हत्यारे का सुराग नहीं लगा सकी थी. इस से मृतक के घर वालों में रोष बढ़ता जा रहा था. पुलिस का अनुमान था कि हत्या के दौरान सुभाष का हत्यारे से संघर्ष हुआ होगा, इसी से शरीर पर नाखूनों के निशान आए थे. लेकिन सवाल यह था कि सुभाष की हत्या किस ने और क्यों की?

अश्लील वीडियो ने खोला हत्या का राज

पुलिस को मृतक सुभाष का मोबाइल हाथ लगा. उस में अश्लील वीडियो क्लिपिंग ने सुभाष की हत्या का राज खोल दिया. पता चला कि सुभाष क ी हत्या उस की प्रेमिका ने ही गला घोट कर की थी. प्रेमिका भी कोई और नहीं बल्कि पड़ोस में रहने वाले नरेंद्र की पत्नी विनोद कंवर थी.

पुलिस ने बिना देर किए उस की प्रेमिका विनोद कंवर को हिरासत में ले लिया. विनोद ने पुलिस को इस संबंध में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि सुभाष ने गले में दुपट्टे से फंदा लगा कर खिड़की से लटक कर आत्महत्या कर ली.

सुबह जब वह वहां गई तो वह फंदा लगा रहा था. उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह असफल रही. फिर वह फैक्ट्री काम पर चली गई. डर के चलते यह बात उस ने अपने पति को भी नहीं बताई थी.

पुलिस ने प्रेमिका के बयानों की सच्चाई जानने के लिए उस के मोबाइल को भी खंगाला. मोबाइल को चैक करने पर उस में भी वाट्सऐप पर वीडियो काल करने की जानकारी मिली. उस के मोबाइल में भी दोनों की अश्लील क्लिप मिली थीं. विनोद कंवर को संदेह के दायरे में लाने के लिए इतना ही काफी था.

पुलिस ने 10 मार्च, 2022 को उसे हिरासत में ले कर पूछताछ की. विनोद ने पुलिस को गुमराह करने की काफी कोशिश की, लेकिन एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवक की गला घोट कर हत्या करने व नाखूनों के निशान की बात सामने आने तथा फांसी दुपट्टे से लगाने की बात बताई थी. लेकिन मौके पर दुपट्टा न मिलने से उस की चालाकी धरी की धरी रह गई.

इस के बाद पुलिस के कड़ाई से पूछताछ करने पर विनोद कंवर टूट गई और सुभाष की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया.

डीसीपी जयपुर (पश्चिम) रिचा तोमर ने प्रैस कौन्फ्रैंस में इस ब्लाइंड मर्डर का परदाफाश करते हुए बताया कि इस हत्या की वजह प्रेमिका से जबरन अवैध संबंध बनाना था. सुभाष की हत्या उस की प्रेमिका विनोद कंवर ने अकेले ही उस का गला घोट कर की थी. उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. इस हत्याकांड में कामुकता की कहानी सामने आई.

26 वर्षीय मृतक सुभाष कुमावत राजस्थान के गोविंदगढ़ का रहने वाला था और करधनी थाना क्षेत्र के बैनाड रोड पर फकीरा नगर में किराए का कमरा ले कर रहता था. वह अविवाहित था.

इसी परिसर में नरेंद्र भी रहता था, दोनों में दोस्ती थी. जब भी सुभाष कमरे पर आता, नरेंद्र उसे अपने यहां खाने पर बुला लेता था. साथसाथ शराब पीने से दोनों एकदूसरे के गहरे दोस्त बन गए थे.

भरेपूरे बदन की विनोद कंवर को देख कर सुभाष का मन डोल गया था. वह विनोद को भाभी कहता था. सुभाष अपने दोस्त नरेंद्र से हंसीमजाक में कह देता था, ‘तुम तो कम अक्ल हो, ताज्जुब है तुम्हें इतनी सुंदर बीवी कैसे मिल गई?’

सीधासादा नरेंद्र उस की बात को हंसी में टाल देता था. लेकिन पति के दोस्त के मुंह से अपनी सुंदरता की बात सुन कर विनोद कंवर शरमा जाती.

छिप न सके अवैध संबंध

33 वर्षीय विनोद कंवर अपने पति व बच्चों के साथ रहती थी. आकर्षक मीठी बोली, तीखे नैननक्श, लंबा कद, आकर्षक देहयष्टि होने के कारण वह अपनी उम्र से कम की दिखाई देती थी.

दोनों के बीच हंसीठिठोली भी होती रहती थी. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए. अपने प्यार का इजहार करने के लिए उन के पास पर्याप्त अवसर थे. इसलिए उन्हें न मोहब्बत के इजहार में वक्त लगा, न इश्क के इकरार में. जल्दी ही दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए.

गांव चले जाने पर सुभाष फोन पर विनोद कंवर से लंबीलंबी बातें करने लगा. विनोद कंवर भी उस के खयालों में खोईखोई सी रहती थी. दोनों के बीच पिछले 2 सालों से अवैध संबंध थे. इस बीच प्रेम के हिंडोले में झूलती विनोद कंवर से एक दिन सुभाष ने कहा, ‘‘तुम अपने पति को तलाक दे दो. मैं तुम से शादी कर लूंगा.’’

‘‘सुभाष, मैं दिल देने के साथ अपना सब कुछ सौंप कर अब पूरी तरह तुम्हारी हो चुकी हूं, तुम भी मेरा साथ निभाना. कभी भूल से भी मेरा दिल मत तोड़ना.’’ विनोद कंवर बोली.

‘‘कैसी बात कर रही हो, तुम्हारा दिल अब मेरी जान है और कोई भी अपनी जान को यूं ही नहीं छोड़ता.’’ सुभाष ने भी अपने सच्चे प्यार का उसे पूरा भरोसा दिलाया.

जब भी सुभाष का मन प्रेमिका से मिलने का होता, वह कमरे पर आता और उस के पति नरेंद्र की गैरमौजूदगी में प्रेमिका से संबंध बनाता और 2-3 दिन रहने के बाद गांव वापस चला जाता था. वह प्रेमिका को महंगेमहंगे गिफ्ट देने के साथ ही उस की हर जरूरत पूरी करता था.

लेकिन इस बीच पति नरेंद्र को उन के बीच प्रेम संबंधों की भनक लग गई थी. उस ने पत्नी विनोद को कई बार समझाया कि सुभाष जब घर आए तो वह उस से बात न किया करे, लेकिन पति की बातों का पत्नी पर कोई असर नहीं होता था.

सुभाष प्रेमिका से उसे अपने साथ रखने की बात भी कह रहा था. इस का पता नरेंद्र को चल गया था. इसी बात को ले कर पतिपत्नी के बीच कहासुनी भी हुई थी. लेकिन विनोद दबंग थी, इसलिए पति नरेंद्र उस का विरोध नहीं कर पाता था.

सुभाष पर शक होने पर नरेंद्र अपनी पत्नी को गांव भी ले गया था, लेकिन विनोद जिद कर के वापस आ गई थी. इस अनबन के चलते उस ने अपने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा भी दर्ज कराया था.

शारीरिक संबंध बनाने की जिद ने ली जान

इस के बाद अब विनोद कंवर सुभाष से मिलने में काफी सावधानी बरतती थी. जब भी विनोद कंवर का पति घर पर नहीं होता था, तब सुभाष उस के घर आता और दोनों शारीरिक संबंध बनाते थे. कभीकभी वह प्रेमिका को अपने कमरे पर बुला लेता.

6 मार्च, 2022 की सुबह 7 बजे विनोद का पति नरेंद्र काम पर निकल गया था. विनोद घर पर अकेली थी. उस के बाद सुभाष आया. उस ने जबरन शरीरिक संबंध बनाने की कोशिश की. मना करने पर दोनों के बीच झगड़ा हो गया.

दरअसल, उस दिन विनोद कंवर की तबियत ठीक नहीं थी, लेकिन सुभाष पर सैक्स का भूत सवार था, वह हर हाल में अपनी प्यास बुझाना चाहता था.

इसी के चलते विनोद कंवर के इंकार करने पर सुभाष ने उस के अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी. इस पर विनोद भड़क गई. उस ने कहा, ‘‘मैं ने तुम्हें दिल से प्यार किया, लेकिन तुम केवल मेरे शरीर के भूखे हो.’’

सुभाष की धमकी के बाद विनोद कंवर ने मन ही मन विचार करने के बाद एक भयानक निर्णय लिया. उस ने सुभाष से कहा, ‘‘तुम तो नाराज हो गए. मैं ने तुम्हें किसी बात के लिए कभी मना किया है? यदि तुम ज्यादा ही बेचैन हो रहे हो तो कमरे पर चलते हैं.’’

उस ने सुभाष से कहा कि वह अपने कमरे पर पहुंचे, पीछे से वह आती है. सुभाष को तो बस इसी पल का इंतजार था. अब तक वह काफी उत्तेजित हो चुका था. अपने कमरे पर जैसी ही वह पहुंचा, पीछेपीछे प्रेमिका विनोद कंवर भी आ गई. बैड पर पहुंचते ही उस ने विनोद कंवर को आगोश में ले लिया और बेतहाशा चूमने लगा.

विनोद कंवर भी दिखावे के लिए उसे सैक्स के लिए उकसाती रही. इसी बीच वह कामुक सुभाष के ऊपर बैठ गई और दोनों हाथों से उस का मुंह और गला दबा कर हत्या कर दी.

हत्या के बाद शव को खींच कर कमरे की खिड़की के पास लिटा दिया. करीब साढ़े 8 बजे प्रेमी सुभाष की हत्या करने के बाद वह फैक्ट्री चली गई.

धोखेबाज प्रेमी को दी सजा

विनोद कंवर ने बताया कि सुभाष पिछले एक महीने से उसे काफी परेशान कर रहा था. उस ने उस के अश्लील वीडियो बना रखे थे.

जिस प्रेमी पर उस ने अपना सब कुछ लुटा दिया, वही जबरन संबंध बनाने का विरोध करने पर अंतरंग क्षणों का वीडियो वायरल कर उसे बदनामी के गर्त में धकेलने की धमकी दे रहा था. ऐसे धोखेबाज प्रेमी से छुटकारा पाने के लिए उस ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया.

चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रेमी की हत्या के बाद दोपहर को प्रेमिका वापस घर आई और लंच करने के बाद फिर से काम पर चली गई. ऐसा उस ने इसलिए किया कि आसपड़ोस के लोग उस पर शक न कर सकें.

सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो विनोद कंवर अनजान बनते हुए संदिग्ध मौत होने की बात कहने लगी. आरोपी प्रेमिका विनोद ने पुलिस को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

उस ने हत्या की बात शाम तक किसी को नहीं बताई. बल्कि अपने को निर्दोष दिखाने के लिए शाम को पति को सुभाष के पास चाय के बहाने बुलाने भेज दिया.

सुभाष की हत्या के 4 दिन बाद पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए हत्या की आरोपी प्रेमिका विनोद कंवर को गिरफ्तार कर इस हत्याकांड का परदाफाश कर दिया.

पुलिस ने 10 मार्च, 2022 को आरोपी विनोद कंवर को गिरफ्तार कर लिया. दूसरे दिन न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

प्रेमी के प्यार में पड़ कर विनोद कंवर ने अपने बसेबसाए परिवार को उजाड़ लिया और हंसतीखेलती दुनिया बरबाद कर ली. अब वह अपने पति और बच्चों से भी दूर हो गई. द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारि

 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें