सिया के आंसू : भाग 1

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा  

22 साल की एक पढ़ीलिखी लड़की थी, जो बीटैक कर रही थी. वह एक कामयाब यूट्यूबर थी, जो अपनी कार खुद चलाना पसंद करती थी और देश के ज्वलंत मुद्दों पर भी अपनी राय बड़ी बेबाकी से सब के सामने रखती थी, पर किसी इनसान में इतनी अच्छाइयों का होना यह नहीं साबित करता है कि वह अंधविश्वासी नहीं होगा.

 

सिया के मन पर भी उस के बचपन से ही बताए गए रीतिरिवाजों और धर्मांधता का पूरा असर था. हां, पर जो उस का इन अंधविश्वासों में साथ नहीं देता था, वह था सिया के बचपन का दोस्त वीरेन. वीरेन से सिया की सगाई भी हो चुकी थी और शादी की तारीख भी दिसंबर महीने की थी, पर उस से पहले वीरेन और सिया अपने दोस्तों नताशा और तान्या के साथ एक धार्मिक जगह सिद्धनाथ के दर्शन करने जाना चाहते थे.

बाकी के दिन तो सफर की तैयारियों में कब निकल गए, सिया को पता ही नहीं चला और फिर वह दिन भी आ गया, जब वे चारों सफर पर निकल पड़े और रास्ते की सारी दिक्कतों को झेलते हुए वे सिद्धनाथ पहुंच गए. अभी उन लोगों की गाड़ी पूरी तरह से रुक भी नहीं पाई थी कि उन की गाड़ी के चारों तरफ अनजान लड़कों और आदमियों की भीड़ जमा हो गई.

‘‘हां जी मैडम… रुकने के लिए कमरा चाहिए… बहुत सस्ते में दिला देंगे… एसी वाला रूम… कम कीमत में…’’ उन में से कुछ लड़के साधुसंतों जैसे लग रहे थे. ‘‘बहनजी… हमारी धर्मशाला में कमरा ले लो… एकदम मुफ्त मिलेगा… और वह भी सारी सुविधाओं के साथ…’’ उन में से एक बोला.

‘‘मुफ्त… तुम लोग मुफ्त में कमरा क्यों दे रहे हो भाई?’’ वीरेन ने पूछा. ‘‘अरे भाई… यह सब तो धर्म को बढ़ावा देने के लिए है… हम आप को कमरा देते हैं और बदले में आप हमारे दानपात्र में कुछ पैसे डाल देना… मंदिर जाने के लिए प्रसाद हमारे यहां से ही लेना…’’ दूसरा लड़का बोला.

पता नहीं क्यों जहां पर भी धर्म और दानपात्र दोनों एकसाथ आते हैं, वहां पर वीरेन को एक अलग ही गंध आने लगती है, पर साधुसंतों द्वारा चलाई जा रही धर्मशाला में कमरा ले कर रहने में धर्म की सेवा होगी, ऐसा सोच कर सिया मचलने लगी, ‘‘वीरेन, सही तो कह रहे हैं ये लोग… आखिर धर्मशाला में कमरा ले कर रहने में बुराई ही क्या है?’’

‘‘हां, ठीक है, पर अगर कमरे हमारे रहने लायक नहीं होंगे, तो हम फिर किसी और होटल में चलेंगे,’’ वीरेन ने फैसला सुनाया और सिर हिला कर नताशा और तान्या ने उस पर अपनी मुहर लगा दी. आगेआगे वे लड़के चल रहे थे और पीछेपीछे ये चारों. कुछ देर पैदल चलने के बाद ही वे उस धर्मशाला के सामने खड़े थे, जिस में उन्हें रहना था. बाहर से तो एक एकदम साधारण सी बिल्डिंग लग रही थी, पर अंदर कदम रखते ही उन चारों की समझ में आ गया कि यह धर्मशाला किसी होटल से कम नहीं है.

उस धर्मशाला के एक तरफ जगमग करता हुआ मंदिर बना था और दूसरी तरफ कमरे बने हुए थे. मतलब साफ था कि वे लोग धर्मशाला का टैग लगा कर एक होटल चला रहे थे. चारों तरफ एक अलग सी सुगंध फैली हुई थी. सिया ने अपने लिए गए फैसले पर इठलाते हुए उन तीनों की तरफ देखा मानो यह कहना चाह रही हो कि देखा मेरा फैसला कितना सही था.

वीरेन अकेला एक कमरे में ठहर गया, जबकि बाकी तीनों लड़कियां दूसरे कमरे में. आज रातभर उन को आराम कर के कल सुबह ही उन लोगों को सिद्धनाथ बाबा के मंदिर के लिए निकलना था. अगली सुबह वे सभी जल्दी ही जाग गए और मंदिर दर्शन की तैयारी करने लगे. नताशा बाथरूम में नहाने गई थी, पर कुछ देर बाद ही वह बाथरूम से हड़बड़ाती हुई निकली और बाहर की ओर भागी. उसे इस तरह भागता देख कर कोई कुछ भी समझ नहीं पाया.

 

‘‘क्या हुआ नताशा…? तू इतनी परेशान क्यों है?’’ पीछे से आते हुए तान्या ने पूछा.‘‘पता है, जब मैं बाथरूम में नहा रही थी, तभी खिड़की से कोई मोबाइल के कैमरे से मेरी वीडियो शूट कर रहा था. मैं ने उसे देख कर जल्दी से कपड़े पहने  और पकड़ने के लिए बाहर लपकी, पर वहां पर कोई नहीं था. मैं इस बात की शिकायत यहां के मैनेजर से करने जा रही हूं,’’ कहने के साथ ही नताशा सीधे मैनेजर के पास पहुंची, जहां पर एक गंजा साधु बैठा हुआ था.

‘‘देखिए, यह एक तीर्थस्थल है… यहां आ कर तो सभी के मन का मैल अपनेआप धुल जाता है और फिर हमारे यहां ऐसा काम कौन करेगा भला… देखो बेटी, तुम से कोई भूल हुई है, फिर भी आप लोगों को कोई असुविधा हुई है, तो मैं आप लोगों का कमरा बदलवा देता हूं,’’ उस साधु ने कहा.

 

वह साधु मैनेजर ये बातें कहते हुए बारबार मंदिर की ओर देख कर हाथ जोड़ता और एक छोटी सी माला को हाथ में घुमा रहा था.

 

मेरी पत्नी मेरे पास आने से मना करती है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 30 साल का हूं. मेरी शादी को 10 साल हो चुके हैं और मेरे 3 बच्चे भी हैं. मेरी पत्नी मायके में ही रहती है और मेरे पास आने से मना करती है. अगर मैं उस से तलाक मांगता हूं तो वह मना कर देती है. इस समस्या का क्या हल हो सकता है?

जवाब

यह सच है कि आप की पत्नी आप के साथ ज्यादती कर  रही है. अच्छा होगा कि आप तलाक के लिए अदालत का सहारा लें. शादी के 10 साल बाद पत्नी के मायके में रहने की जिद गले नहीं उतरती है. आप उस के घर वालों से भी बात करें कि वह क्यों आप के साथ नहीं रहना चाहती है और वे क्यों बेटी की गृहस्थी बरबाद कर रहे?हैं. आप उस की घर वापसी के  लिए भी मुकदमा दायर कर सकते हैं. सवाल बच्चों के भविष्य का भी है.

स्वयंवर- मीका दी वोटीः क्या मीका सिंह टीवी पर विवाह रचाएंगें??

सेटेलाइट चैनलों की शुरूआत के साथ ही दर्शकों के मनोरंजन के लिए अलग अलग तरह के कार्यक्रमों का
प्रसारण होने लगा था..दर्शकों की पसंद के नाम पर संगीत व नृत्य के टीवी रियालिटी शो भी शुरू किए गए.फिर यह एक ऐसा ढर्रा बना कि लगभग हर सेटेलाइट चैनलों पर अलग अलग नाम से रियालिटी शो प्रसारित होने लगे.

यहां तक कि विवाह जैसे पवित्र बंधन को भी नही बख्शा गया. 2009 में ‘सोल प्रोडक्शन’ हाउस ने विवाह को लेकर ‘स्वयंवर’ नाम से एक रियालिटी शो की शुरूआत की थी.स्वयंवर एक ऐसा रियालिटी टेलीविजन शो है, जहां प्रतियोगी टास्क करते हैं और शादी में हाथ बंटाने के बदले में आशावान दूल्हा/ दुल्हन एक दूसरे को मात देते हैं.

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स्वयंवर के पहले सीजन में राखी सावंत आयी थी और इस शो का नाम था-‘‘राखी का स्वयंवर’’..मगर राखी सावंत ने इसके विजेता के साथ विवाह नही रचाया था.‘स्वयंवर’ का पहला सीजन 29 जून 2009 से 2 अगस्त 2009 तक ‘इमैजिन टीवी’पर प्रसारित हुआ था.

इसे फतेहगढ़ पैलेस,उदयपुर में फिल्माया गया था. हमेशा विवादों में रहने वाली राखी सावंत के चलते ‘राखी का स्वयंवर’ को बहुत ही ज्यादा टीआरपी मिली थी. तब दूसरा सीजन 2010 में राहुल महाजन के साथ आया था.जिसका नाम था-

‘राहुल दुल्हनियंा ले जाएगा’.राहुल महाजन ने इस शो की विजेता व माॅडल डिंपी गांगुली संग शादी भी रचा ली थी.डिंपी के साथ राहुल महाजन की यह दूसरी शादी थी.मगर यह विवाह ज्यादा दिन नही टिका.सूत्रों ने दावा किया था कि डिंपी से राष्ट्री टीवी पर विवाह रचाने के एक माह बाद ही डिंपी ने घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे.

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फिर 2011 में प्रसारित तीसरे सीजन में रतन राजपूत थीं.इसका नाम था-‘रतन का रिश्ता’ था.उस वक्त रतन की उम्र महज 24 वर्ष थी.तीसरे सीजन को जयपुर के शिव विलास पैलेस में फिल्माया गया था.रतन राजपूत ने इस शो के विजेता अभिनव शर्मा के संग टीवी पर विवाह नही,केवल सगाई की थी और वह एक दूसरे को अच्छी तरह से समझना चाहती थी,कुछ समय बाद रतन व अभिनव का रिश्ता टूट गया था.रियालिटी शो ‘रतन का राजपूत’’ को लेकर वह काफी विवादांे में भी रही थी.अभिनव से रिश्ता खत्म होने के कुछ समय बाद रतन राजपूत ने ‘स्वयंवर’ के रियालिटी शो का हिस्सा बनने को अपनी सबसे बड़ी गलती मानते हुए कहा था कि इसकी वजह से उनका अभिनय कैरियर चैपट
हो गया.

वैसे अब तक रतन राजपूत की शादी नही हुई है. चैथे सीजन में वीना मलिक आने वाली थी.मगर अचानक इमॅजिन चैनल के बंद हो जाने से यह चैथा सीजन रद्द हो गया था. अब ‘सोल प्रोडक्शन’ ही ‘स्वयंवर; का चैथा सीजन मशहूर व विवादास्पद 45 वर्षीय गायक मीका सिंह के साथ बना रहे हैं,जिसका नाम है-‘‘स्वयंवर-मीका दी वोटी’.यह रियालिटी शो 19 जून से ‘‘स्टार भारत ’’ टीवी चैनल पर
प्रसारित होगा.

पहला एपीसोड रवीवार 19 जून को आएगा.उसके बाद हर सोमवार से शुक्रवार रात आठ बजे इसका
प्रसारण होगा.से जोधपुर के ‘‘द उम्मेद जोधपुर पैलेस रिजॉर्ट ऐंड स्पा’’ मंें फिल्माया जा रहा है.
‘स्वयंवर- मीका दी वोटी’ में प्रतिस्पर्धी के तौर पर पूरे देश से 12 लड़कियों का चयन किया गया है.

अब इन सभी को विभिन्न टास्क को पूरा करते हुए मीका सिंह का दिल जीतकार उनका हमसफर बनने के लिए प्रयास करना होगा.इसे फिल्माने के लिए जोधपुर,राजस्थान के ‘द उम्मेद पैलेस’ में भव्य सेट बनाया गया है.इस सेट के अनावरण व पूरे सेट से मीडिया को रूबरू कराने के लिए सात जून की शाम पूरे देश की मीडिया/पत्रकारों को इकट्ठा किया गया थ..कार्यक्रम साढ़े सात बजे शुरू होना था.मीडिया को सात बजे ही ‘द उम्मेद’पहुॅचा दिया गया था,

मगर रात साढ़े नौ बजे इसकी शुरूआत हुई.लगभग दो घंटे तक पत्रकारों को रियालिटी शो के एवी को दिखाने,निक,चंद्रिका,क्रंातिका व भूमि सहित चार प्रतिस्पर्धियांे से परिचय कराने के अलावा गायिका भूमि त्रिवेदी और जसपिंदर नरूला ने गीत गाकर पत्रकारों का मनोरंजन करने में ही बिता दिए.
पूरे 14 वर्ष के अंतराल के बाद शान एक बार फिर होस्ट/कार्यक्रम संचालक के रूप मंे इस शो में नजर आने वाले हैं.

इस पर शान ने कहा-‘‘मैं बहुत खुश था और इस मौके को कभी ‘ना’ नहीं कह सकता था.जब मुझे ‘स्वयंवर-मीका दी वोटी‘ का हिस्सा बनाने के लिए ‘स्टार भारत’ ने संपर्क किया,तो मैं इंकार न कर सका. दूसरी बात यह वह शो है, जहाँ आखिर कार मेरा यार मीका सिंह अपने लिए सबसे अच्छे जीवन साथी की तलाश करने वाला है। एक तरफ तो मैं बहुत ही उत्साहित महसूस कर रहा हूँ, लेकिन साथ ही मैं थोड़ी घबराहट भी महसूस कर रहा हूँ,

क्योंकि पिछले 14 वर्ष के ंअंतराल में होस्ट करने का तरीका बदल गया है.फिर भी यह मेरे लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और मेरा फर्ज बनता है, कि मैं उसकी मदद करूँ सही चुनाव करने में. लेकिन मैं अपने भाई के लिए कुछ भी कर सकता हूँ और मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूँ.’’

इस अवसर पर मौजूद गायिका जसपिंदर नरुला ने कहा- ‘‘मीका मुझे अपनी बडी बहन मानता है.वह हमेशा मुझे इज्जत देता है. काफी समय पहले उसने मुझसे कहा था कि दीदी आपको ही मेरे लिए अच्छी लड़की तलाशनी है. औरआज वह वक्त आ गया है. मीका मेरे लिए छोटे भाई की तरह हैं और मैं उनके लिए बहुत ही खुश हूँ. मैं व्यक्तिगत रूप से मीका के लिए बहुत ज्यादा उत्साहित हूँ और चाहती हूँ कि उनका घर बस जाए. उन्होंने पहले ही अपने लिए सही जीवन साथी चुनने का काम मुझे सौंपा है,

इसलिए मैं बहुत खुश हूँ और इस शानदार खोज के लिए मैं स्टार भारत को धन्यवाद देना चाहती हूँ.इस जश्न का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत खुशी की बात थी. मैं इस शानदार शाम के लिए भी स्टार भारत
को धन्यवाद देना चाहती हूँ और अपने छोटे भाई को भी बहुत बहुत शुभकामनाएँ देती हूँ, कि उन्हें अपने जीवनसाथी के रूप में एक बहुत ही अच्छी लड़की मिले.’’

जबकि स्टेज पर आकर मीका सिंह ने कहा –‘‘मैं बहुत ही ज्यादा उत्साहित हूँ.दूसरों की शादियों में बहुत भंगड़ा पा लिया,अब अपनी बारी है.मैं अपनी ड्रीमगर्ल ढूँढ़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ. स्टार भारत के शो ‘स्वयंवर – मीका दी वोटी‘ ने मुझे अपना जीवन साथी चुनने का मौका दिया है.और जब उन्होंने इस शो के लिए मुझसे संपर्क किया, तो ऐसा लगा मानो किस्मत का पिटारा खुल गया. आखिरकार मैं किसे पसंद करने वाला हूँ,

यह जानने के लिए, 19 जून से रात 8 बजे जुड़े रहिए स्टार भारत पर.‘‘इसके बाद एंकर ने पत्रकारों की तरफ से कुछ सवाल मीका सिंह से पूछे,जिनके जवाब में  मीका सिंह ने कहा-‘‘वैसे 2015 में भी मेेरे पास फजिला मैडम मेरे पास इसका आफर लेकर आयी थीं.उस वक्त मेरा सारा ध्यान बतौर गायक
कुछ करने की तरफ ही था. इसलिए बात नहीं बनी थी.अब जब दोबारा मेरे पास यह आफर आया तो मैने दलेर पा जी से पूछा कि क्या किया जाए? मैने अब तक कई रिश्ते मना किए हैं,जिसके लिए मुझे उनसे काफी डांट भी मिलती रही है. मैने जो रिश्ते ठुकराए उसकी वजह लड़कियों में कमी नहीं थी,बल्कि मैं खुद कुछ बनना चाहता था.

दलेर पा जी ने कहा कि-

तू शादी कर ले. अभी शादी नहीं करना चाहता,तो सगाई कर ले.उन्होने मुझसे कहा कि जा और कुछ तो करके वापस आना. मंुह मीठा कराना. तो मैं इसका हिस्सा बन गया. जब दलेर पा जी ने मुझसे कहा कि जाओ,तो मुझे लगा कि यह अच्छा अवसर मुझे मिला है. स्वयंवर से अच्छी चीज और क्या हो सकती है.आज हर इंसान चाहता है कि उसकी शादी हो जाए. यहां तो ‘स्टार भारत’ मेरे सामने भगवान और परिवार की तरह आया.मैने अच्छा कह दिया.’’

वह लड़कियों में किस तरह के गुणों की तलाश कर रहे हैं? एंकर के इस सवाल पर मीका सिंह ने कहा-

‘‘हमारे पंजाबी कल्चर में हम हमेशा हर किसी का स्वागत करते हैं.तो पत्नी में हर किसी का सम्मन करने का गुण होना चाहिए.मेरे काम के समय का ध्यान रखें कि मैं समय पर सोता हॅू.क्या खाता हॅूं या कहां मुझे जाना है.

जिससे मुझे मैनेजर की जरुरत न पड़े. मेरी पत्नी ही मेरी मैनेजर होनी चाहिए.वह सब कुछ अच्छे तरीके से मैनेज करे.तीसरी क्वालिटी बेहतरीन खाना बनाने वाली हो,भले ही वर्ष में एक बार ही खाना बनाकर खिलाए.’’ बेचारे सभी पत्रकार इस अवसर का इंतजार करते रह गए कि उन्हे मीका सिंह से सीधे सवाल करने का अवसर मिलेगा.यह अवसर नही मिल सका.

एंकर के सवालों के जवाब खत्म करते ही मीका सिंह ने कह दिया कि आप लोग इसी से काम चला लें,अब मैं कोई बात नहीं करने वाला.’’यानी कि मीका सिंह ने पत्रकारों से बात नही की. मीका सिंह और विवाद
रियालिटी षो ‘स्वयंवर’ के पहले सीजन में आ चुकी राखी सावंत और मीका सिंह के साथ एक कड़ी जुड़ी हुई
है.2006 में मीका सिंह पर राखी सावंत ने जबरन किस/चंुबन करने की षिकायत दर्ज करायी थी.

यॅूं भी मीका सिंह विवादो में मे ज्यादा रहे हैं.2018 में यूएई में ब्राजीलियन टीनएजर माॅउल के साथ यौन शोषण के आरोप में मीका सिंह जेल भेजे गए थे.भारतीय विदेश मंत्रालय की मदद से वह जेल से रिहा हुए थे.14 अगस्त 2019 को ‘आल ंइडिया सिने वर्करस एसोसिएशन’ ने मीका सिंह का बैन कर दिया था,तब फिर सूचना प्रसारण मंत्रालय की दखलंदाजी के चलते मीका सिंह पर से यह बैन हटा था.मीका सिंह के बचाव में देश की सरकार बार बार क्यों खड़ी होती है,यह बात समझ से परे है.

बहरहाल,जोधपुर में रियालिटी शो‘‘स्वयंवर-मीका दी वोटी’’के सेट के अनावरण के अवसर पर प्रेस काॅंफ्रेंस
आयोजित की गयी थी.पूरे देश से करीबन 110 पिं्रट और टीवी पत्रकारों को बुलाया गया था.लेकिन मीका सिंह ने पत्रकारों से बात नहीं की.45 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी अविवाहित होते हुए भी मीका सिंह का अहम कम होने का नाम नहीं ले रहा है.

क्या मीका सिंह टीवी पर विवाह रचाएंगे?
टीवी के रियालिटी षो ‘‘स्वयंवर’’ अथवा दूसरे चैनलों पर ‘स्वयंवर’ की ही तर्ज पर प्रसारित मल्लिका
शेहरावत व शहनाज गिल वाले रियालिटी शो पर गौर करे,तो एक बात साफ तौर पर सामने आती है कि इस तरह के‘स्वयंवर’ के रियालिटी शो से जुड़ने वाले कलाकार टीवी पर विवाह करने को लेकर गंभीर नही रहे हे। सभी का मकसद इस तरह के टीवी शो के माध्यम से शोहरत बटोरना व पैसा कमाना ही रहा है.ऐसे में अब देखना है कि क्या टीवी पर मीका सिंह विवाह करते हैं या…???

निर्माता, निर्देशक और एक्टर प्रकाश झा से जाने उनके जीवन की कहानी, पढ़े इंटरव्यू

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सामाजिक मुद्दों पर फिल्म बनाने वाले निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक और एक्टर प्रकाश झा किसी परिचय के मोहताज नहीं. फिल्म ‘अपहरण’, ‘आरक्षण’, ‘सत्याग्रह’, ‘गंगाजल’ और ‘परीक्षाआदि फिल्मों को बनाने वाले प्रकाश झा को हमेशा कुछ अलग काम करना चाहते थे. उनका विवाह अभिनेत्री दीप्ती नवल के साथ हुई थी. शादी के बाद उन दोनों ने एक बेटी को गोद लिया, जिनका नाम दिशा शाह है. शादी के कुछ सालों बाद उन दोनों में अनबन होने की वजह से साल 2005 में उन्होंने तलाक ले लिया.

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प्रकाश झा ने अपने करियर की शुरुआत डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘अंडर द ब्लू’ से की थी, लेकिन उनके काम को सराहना तब मिली, जब उन्होंने बिहार के दंगों पर एक शोर्ट फिल्म बनाई.हालाँकि रिलीज होने के कुछ दिन बाद ही फिल्म बैन हो गई, पर प्रकाश झा को इस शोर्ट फिल्म के लिए नेशनल अवार्ड मिला, लेकिन इस दौरान एक दौर ऐसा भी आया था, जब उन्हें अपनी जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ा. उनके स्ट्रगल भरे दिनों में उसके पास रूम रेंट और खाने तक के पैसे नहीं थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब प्रकाश झा मुंबई आये, तो उनके पास रहने और खाने के लिए पैसे नहीं थे, ऐसे में उन्होंने कई रातें जुहू बीच के फुटपाथ पर गुजारी थी.

फिल्म निर्देशक बनना उनके लिए एक इत्तफाक था, क्योंकि कुछ फिल्म वालों से मुलाकात हो जाने पर उन्हें कुछ अलग करने की इच्छा हुई और पुणे इंस्टिट्यूट से डायरेक्शन सीखकर इस क्षेत्र में आ गए.

प्रकाश झा ने आसपास के सामाजिक मुद्दों को फिल्मों में उतारा, जिसके लिए उन्हें कई बार आरोपों के दौर से गुजरना पड़ा, लेकिन इसे वे अपनी उपलब्धि मानते है, क्योंकि उनका मकसद दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कुछ सन्देश भी देना है. अभी उनकी क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज आश्रम 3 रिलीज हो चुकी है, जिसे उन्होंनेनकली और धार्मिक गुरुओं पर आधारित ड्रामा सीरीजहै. इसे एमएक्स प्लेयर पर स्ट्रीम किया गया है. इस वेब सीरीज में बॉबी देओल मुख्य भूमिका निभा रहे है.

सच्चाई को करीब से देखने की इच्छा

निर्देशक प्रकाश झा कहते है कि आश्रम की कहानी के बारें में कहते है कि पहले डेवलप कर मुझे दी गयी और पूछा गया कि क्या मैं इस फिल्म को करना चाहता हूँ या नहीं. मैंने कहानी पढ़ी और पाया कि ये हमारे समाज की सच्चाई है, जो घट चुकी है, इसमें जो भी गलत या सही बातें बतायी गयी है, उसमे कुछ जोड़ने पर कहानी अच्छी बनेगी, इसलिए मैंने इसे करना चाहा.

अभिनय की बारीकियों को समझाना

प्रकाश झा आगे कहते है कि अभिनेता बॉबी देओल में अभिनय की प्रतिभा बहुत है, जिसे उन्होंने इस फिल्म में बखूबी निभाई है, मुझे बहुत दिनों से उनके साथ काम करने की इच्छा थी, जो मुझे मिला और निर्देशक के रूप में मेरा काम उस चरित्र को करने में पूरी तथ्य को इकट्ठा कर उन्हें दे दूँ, ताकि उन्हें अभिनय की बारीकियों कोसमझने में कोई समस्या न हो. मेरी कोशिश हमेशा किसी भी कलाकार के साथ ऐसा ही होता है.

अपडेट करना है जरुरी

फिल्मों से ओटीटी तक के सफर पर बात करते हुए प्रकाश झा कहते है कि मैं अपने क्राफ्ट को बेहतर बनाने के लिए लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में आयोजित होने वाली अभिनय कार्यशालाओं में भाग लेता था. मैं चुपचाप तरीके से जाकर अपना नामांकन कराता था और अभिनेता की भाषा को समझता था. मैंने कक्षाओं में शेक्सपियर और अन्य नाटकों का प्रदर्शन किया है, जिससे मुझे बहुत आत्मविश्वास मिला है.

मिला बढ़ावा नामचीन कलाकारों को

निर्देशक प्रकाश झा के साथ कई बड़े नामचीन कलाकारों ने काम किया है, जिसमें अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, मनोज बाजपेयी, कैटरिना कैफ आदि है. इनके द्वारा किये गए काम को दर्शको ने पसंद किया और उन्हें आगे बढ़ने में सहयता मिली. उनके साथ काम करने वाले कलाकारों का लाइम लाइट में आने की वजह क्या समझते है, पूछने पर उनका कहना है कि रियल में ये सभी अच्छे कलाकार है, जिससे इन सभी के काम को दर्शकों ने पसंद किया.

जान होती है कहानी

फिल्म सफल होने पर प्रसंशा कलाकारों को मिलती है, जबकि फ्लॉप होने पर उसका ठीकरा डायरेक्टर पर मढ़ दिया जाता है, इस बारें में प्रकाश झा का कहनाहै कि फिल्म की जान कहानी होती है और कलाकार उसे पर्दे पर लाता है. कलाकार मेहनत करते है, उन्हें तारीफे भी मिलनी चाहिए, लेकिन निर्देशक को कमोवेश तारीफ मिलती ही है. फिल्म असफल होने पर उसकी जिम्मेदारी निर्देशक को लेना पड़ेगा, क्योंकि कहानी कैसे कही है और कैसे कलाकारों का चयन किया है, कैसे उन्होंने कलाकारों से काम करवाया है आदि कई चीजे होती है. मेरे साथ चाहे अभिनेता अजयदेवगन हो या मनोज बाजपेयी ये सभी प्रतिभावान कलाकार है और सभी के साथ मुझे काम करने का मौका मिला, इससे मैं खुद को भाग्यवान समझता हूँ. नए कलाकारों में सभी बहुत अच्छे आर्टिस्ट है और मैंने जिनके साथ भी काम किया है, सभी ने अच्छा प्रदर्शन किया है.

कुछ अलग करने की चाहत

प्रकाश झा फिल्म गंगाजलमें पहली बार एक डीसीपी बीएन सिंह की भूमिका में आये और उनके इस भूमिका को सभी ने सराहा, क्योंकि उन्होंने इसमें संवाद कम रखे और अपनी आँखों और चेहरे के भाव से अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी. आगे भी प्रकाश झा एक बार फिर हीरों की भूमिका में आ रहे है.

विकास है जरुरी

ओटीटी के इस दौर को प्रकाश झा एक अच्छा समय मानते है, लेकिन उन्हें पहले की फिल्में और कहानियां कहने का ढंग बहुत पसंद है. उनका कहना है कि हर दौर में कुछ न कुछ विकास अवश्य होता है, जिसमे समय,तकनीक, सोच, परंपरा, शिक्षा, पद्यतियों आदि सभी की ग्रोथ होती है, वैसे ही फिल्मों की कहानियों में भी ग्रोथ होता है. हर वक्त में किसी भी चीज का महत्व होता है. फिल्मे पहले भी बनती थी, आज भी बनती है और कल भी वैसी ही बनती रहेगी.

सन्देश नए कलाकारों को

नए कलाकार जो एक्टिंग के लिए दूसरे शहरों से आते है, उन्हें लगन और खुद पर विश्वास रखकर काम करते रहे. काम करने की चाहत को पूरा करें, सफलता आती-जाती है, इसलिए उसके बारें में न सोचे और अच्छा काम करें.

अपराध: हाईवे पर फैला लूट व ठगी का जाल

लोगों के घरों व दुकानों में जा कर और रास्ता चलते राहगीरों को बहलाफुसला कर या फिर उन्हें झांसा या लालच दे कर ठगने और लूटने की दास्तानें हम अकसर सुनते ही रहते हैं.

कभी कोई शातिर ठग या लुटेरा किसी के गहनों को साफ करने के बहाने सोने व चांदी के जेवरात उड़ा ले जाता है, तो कभी कोई ठग किसी के कपड़ों पर गंदगी लगी होने की बात कह कर उस का बैग ले कर चंपत हो जाता है.

कोई किसी को नोट दोगुना किए जाने का लालच दे कर ठग लेता है, तो कोई किसी को सस्ते दामों पर सोना, लोहा, सीमेंट जैसी चीजें देने के बहाने ठग कर ले जाता है.

देश में शातिर चोरों का एक ऐसा गिरोह हरकत में है, जो एक बड़े सूटकेस में 10-12 साल के बच्चे को बंद कर देता है. उस बच्चे के हाथ में एक मोबाइल फोन व एक टौर्च को थमा दिया जाता है. उस के बाद वह सूटकेस वोल्वो या दूसरी ऐसी बसों में, जिन में पिछले हिस्से में सामान रखने की जगह होती है, रख दिया जाता है.

इस तरह बच्चा सूटकेस में बैठ कर सामान रखने वाली जगह पर पहुंच जाता है. उधर उस सूटकेस को रखने वाला आदमी सवारी के तौर पर बस में बैठ कर अपना सफर शुरू कर देता है.

बस के चलते ही वह लड़का भीतर से सूटकेस की चेन खोल कर बाहर निकल आता है और टौर्च के द्वारा पीछे रखे सारे सूटकेस देख कर उन में अपने पास रखी चाबियां लगा कर उन्हें बारीबारी से खोलता है और उन में रखे सभी कीमती सामान अपने सूटकेस में डाल कर खुद अपने सूटकेस में वापस बैठ जाता है और भीतर से चेन बंद कर अपने आका को फोन पर मिशन पूरा होने की सूचना दे देता है.

लड़के द्वारा सूचना पाते ही अगले ही स्टौप पर वह आदमी बस से उतर जाता है और कंडक्टर से कह कर अपना सूटकेस ले जाता है.

इसी तरह पुणेमुंबई हाईवे पर शातिर अपराधियों, लुटेरों व ठगों का एक बड़ा गिरोह हरकत में है, जो कार सवारों को अपना शिकार बनाता है.

एक खबर के मुताबिक, एक लड़की ने मुंबई से पुणे जाते समय एक पैट्रोल पंप पर पैट्रोल डलवा कर जैसे ही अपनी कार आगे बढ़ानी चाही, एक अनजान आदमी उस के मुंह के करीब विजिटिंग कार्ड दिखा कर उस में लिखा पता पूछने लगा.

लड़की ने उस कार्ड को देख कर अपनी जानकारी के मुताबिक उसे पता समझाया. उस के बाद वह लड़की कार चलाते हुए पैट्रोल पंप से आगे बढ़ गई. कुछ ही दूर पहुंचने पर उस लड़की को चक्कर आने लगा और उस ने अपनी कार हाईवे के किनारे सुनसान जगह पर खड़ी कर दी.

चंद सैकंड में वह लड़की बेहोश हो गई. इतने में पीछे से वही अपराधी, जिन्होंने पैट्रोल पंप पर विजिटिंग कार्ड दिखा कर उस से पता पूछा था, जा पहुंचे और लड़की के पास मौजूद नकदी, गहने व कीमती सामान लूट कर ले गए.

होश में आने पर लड़की ने अपनी आपबीती पुलिस को बताई. फिर पता चला कि अपराधियों ने उस विजिटिंग कार्ड में कोई ऐसा नशीला कैमिकल लगा रखा था, जो उस लड़की के नाक के करीब आते ही उस की सांस की नली में चढ़ गया और उसे बेहोश कर दिया.

एक आदमी अपने परिवार के साथ पुणे हाईवे पर सफर कर रहा था. पीछे से आ रहे 2 मोटरसाइकिल सवारों ने उस की कार को ओवरटेक किया और यह इशारा किया कि उस की कार का पिछला पहिया पंक्चर हो गया है.

पहले तो उस कार चालक ने ध्यान नहीं दिया और अपनी कार चलाता रहा. इतने में उन मोटरसाइकिल सवारों ने इशारा किया.

मोटरसाइकिल सवारों के बारबार इशारा करने पर उस कार चालक ने चलती कार में पीछे झांक कर देखने की कोशिश की, पर वह पक्का नहीं कर सका कि उस की कार का पिछला पहिया पंक्चर है भी या नहीं.

जैसे ही पंक्चर लगाने की दुकान दिखाई दी, उस ने कार उस दुकान पर रोक दी. उस ने पंक्चर लगाने वाले दुकानदार से अपनी कार के चारों पहिए चैक करने को कहा. 3 पहिए तो उस दुकानदार ने कार चालक की नजरों के सामने चैक किए, जिन में हवा का दबाव बिलकुल ठीक था.

जैसे ही वह पीछे का आखिरी पहिया चैक करने लगा, उतने में उसी दुकान पर मौजूद एक आदमी ने फुजूल की बातों में उस कार चालक का ध्यान खींच लिया.

बस, इतने में ही उस पंक्चर लगाने वाला दुकानदार पहिए में पंक्चर होने की बात बोल बैठा. उस ने दुकानदार से कार का पहिया खोल कर पंक्चर लगाने को कह दिया.

इधर वह पंक्चर लगाने की तैयारी कर रहा था, तो उधर उस दुकान पर खड़े दो आदमी कार चालक को फुजूल की बातों में उलझाए हुए थे. नतीजतन, दुकानदार ने उस ट्यूबलैस टायर में 7-8 पंक्चर दिखा दिए. कार चालक के पास टायर में पंक्चर लगवाने के सिवा और कोई चारा नहीं था.

दुकानदार ने सभी पंक्चर लगाने की कीमत 2,750 रुपए बताई. कार चालक के बहुत कहने पर उस ने 1,500 रुपए ले कर सारे पंक्चर लगा दिए. बाद में कार चालक को पता चला कि हाईवे पर इस तरह की ठगी के नैटवर्क का वह शिकार हो चुका है.

हाईवे पर अपराध की घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों द्वारा लड़कियों का भी इस्तेमाल किया जाता है. ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिन से यह पता चलता है कि हाईवे पर आकर्षक लिबास पहने कोई औरत या लड़की किसी सुनसान इलाके में खड़ी हो कर कार या ट्रक चालकों को हाथ से इशारा कर के रोक रही है. अगर कोई उस के आकर्षण का शिकार हो कर रुक गया, तो बस आप उसे तो लुटा हुआ ही समझिए.

उस लड़की या औरत की आड़ में पेड़ों के पीछे कुछ अपराधी छिपे होते हैं. जैसे ही कोई गाड़ी सवार गाड़ी से उतर कर पास रुकता है और उस से बातें करने पहुंचता है, उसी समय उस लुटेरे गिरोह के सदस्य वहां आ धमकते हैं और लूटपाट की घटनाको अंजाम देते हैं.

इस के अलावा हाईवे पर टैक्सी के रूप में देर रात चलने वाले गिरोह द्वारा कई वारदातें अंजाम दी जा चुकी हैं. इन में खुद को टैक्सी चालक बताने वाला कार में बैठे लोगों को सवारी बताता है और रास्ते में मिलने वाली किसी एक सवारी को उसी कार में बैठा लेता है.  फिर वे सब उस आदमी को लूट लेते हैं.

हाईवे पर चलने वाले लोगों को इस तरह की लूट व ठगी की घटनाओं से खुद को महफूज रखने के लिए पूरी तरह चौकस रहने की जरूरत है, क्योंकि ठगों व लुटेरों द्वारा इस तरह के जाल कहीं भी बिछे मिल सकते हैं.

निर्मल रानी

मैं 40 वर्षीय शादीशुदा पुरुष हूं, मेरी पत्नी मेरे छोटे भाई में ज्यादा ही रुचि लेने लगी है क्या करूं?

सवाल
मैं 40 वर्षीय शादीशुदा पुरुष हूं. शादी के कुछ समय बाद ही मेरा ट्रांसफर दूसरे शहर में हो गया. घर में बुजुर्ग मातापिता की देखभाल करने के चलते मैं पत्नी को अपने साथ ले कर नहीं आया. अपने छोटे भाई, पत्नी और बुजुर्ग मातापिता को छोड़ कर मैं अकेला किराए का मकान ले कर रहता था.

इस बीच पत्नी ने कई दफा मेरे साथ आने की जिद की, पर मैं टालता रहा. इधर कुछ दिनों से मैं ने महसूस किया है कि मेरी पत्नी मेरे छोटे भाई में ज्यादा ही रुचि लेने लगी है. मैं ने इस बारे में कई बार पत्नी से बात करनी चाही पर कर नहीं पाया. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
यहां गलती कहीं न कहीं आप की ही है. आप ने अपनी पत्नी को अकेला छोड़ा, तो जाहिर है अपनी शारीरिक व मानसिक जरूरतों के लिए वह स्वाभाविक रूप से आप के छोटे भाई की तरफ आकृष्ट हो गई. लेकिन आप को अपनी पत्नी से इस बारे में खुल कर बात करनी चाहिए. हो सकता है बात करने से और प्यार से समझाने से वह समझ जाए.

आप की कोशिश यही होनी चाहिए कि जल्द से जल्द पत्नी को अपने साथ ले आएं. पत्नी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं. पुरानी बातों को भूल कर गृहस्थी को प्यार और विश्वास के साथ चलाएं.

मुंहबोली बहनें- भाग 4 : रोहन ने अपनी पत्नी को क्यों दे डाली धमकी

भाभी सुंदर और समझदार थीं. शादी के बाद रोहन भैया के स्वभाव में भी बहुत परिवर्तन आ गया. अब वे काफी शांत और गंभीर रहने लगे थे. कालेज के समय वाली उच्छृंखलता अब कहीं उन के स्वभाव में नहीं दिखती थी. साल भर तक तो उन का दांपत्य जीवन बहुत अच्छी तरह चला पर अचानक न जाने क्या हुआ कि भैयाभाभी के बीच दूरियां बढ़ने लगीं. उन के बीच अकसर बहस होने लगी. ताईजी के लाख पूछने पर भी दोनों में से कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं होता. उसी दौरान मैं मायके गई थी तो ताईजी के यहां भी सब से मिलने चली गई. ताईजी ने उन लोगों के बिगड़ते रिश्ते के बारे में बताते हुए मुझे भाभी से बात कर के कारण जानने को कहा. पहले तो भाभी ने बात को टालना चाहा किंतु मेरे हठ पकड़ लेने पर उन्होंने जो कहा उस पर यकीन करना मुश्किल था.

भाभी ने कहा, ‘‘रोहन का शक्की स्वभाव उन के वैवाहिक जीवन पर ग्रहण लगा रहा है. मेरे एक मुंहबोले भाई को ले कर इन के मन में शक का कीड़ा कुलबुला रहा है. मैं उन्हें हर तरह से समझा चुकी हूं कि उस के साथ मेरा भाईबहन के अलावा और किसी तरह का कोई संबंध नहीं है पर इन्हें मेरी किसी बात पर यकीन ही नहीं है. मेरी हर बात के जवाब में बस यही कहते हैं, ‘ये मुंहबोले भाईबहन का रिश्ता क्या होता है मुझे न समझाओ. किसी अमर्यादित रिश्ते पर परदा डालने के लिए मुंहबोला भाई और मुंहबोली बहन का जन्म होता है.’ इन का कहना है कि या तो अपने मुंहबोले भाई से ही रिश्ता रख लो या मुझ से. अब तुम ही बताओ इतने सालों का रिश्ता क्या कह कर खत्म करूं? कितने अपमान की बात है मेरे लिए इतना बड़ा आरोप सहना.’’

मैं ने भाभी को आश्वस्त करते हुए कहा कि आप चिंता न करें मैं भैया से बात करती हूं. मैं जब रोहन भैया से इस बारे में बात करने गई तो बात शुरू करने से पहले ही उन्होंने मेरा मुंह यह कह कर बंद कर दिया, ‘‘सोनाली, अगर तुम मुझे कुछ समझाने आई हो तो बेहतर होगा कि वापस चली जाओ.’’ रोहन भैया के रूखे व्यवहार के आगे तो मेरी बात शुरू करने की हिम्मत ही नहीं हुई. बातबात पर उन से झगड़ने और बहस कर बैठने वाली मुझ सोनाली की बोलती ही बंद हो गई. पर बात चूंकि उन के वैवाहिक रिश्ते को बचाने की थी इसलिए हिम्मत कर के मैं उन के पास बैठ गई.

‘‘रोहन भैया, बात इतनी बड़ी नहीं है कि आप ने अपना और भाभी का रिश्ता दावं पर लगा दिया है. भाभी कह रही हैं कि उन का मुंहबोला भाई है तो उन की बात का आप यकीन क्यों नहीं करते? आखिर कालेज में आप की भी तो कई मुंहबोली बहनें थीं फिर…’’ मैं आगे कुछ और बोलूं उस से पहले ही रोहन भैया वहां से उठ खड़े हुए, ‘‘हां, सोनाली, मेरी कई मुंहबोली बहनें थीं और मैं कइयों का मुंहबोला भाई था इसीलिए इस रिश्ते की हकीकत मुझ से ज्यादा कोई नहीं जानता. कह दो अपनी भाभी से या तो मैं या वह मुंहबोला भाई, जिसे चुनना है चुन ले.’’ मैं अवाक सी भैया का मुंह देखती रह गई. कालेज वाले भैया तो वे थे ही नहीं जिन से मैं कुछ बहस कर सकती. ‘रोहन भैया, रोहन भैया’ कहने वाली कालेज की बहनों का उन्हें देख कर आहें भरना मैं भी कहां भूल पाई थी कि किसी तरह का तर्क दे कर उन की सोच को झुठलाने की कोशिश करने की हिम्मत जुटा पाती.

मेरे पास भाभी को समझाने के अलावा और कोई रास्ता शेष नहीं बचा था. रोहन भैया का शक उन के अपने अनुभव पर आधारित था. न जाने मुंहबोले भाईबहन के रिश्तों को उन्होंने किस तरह जिया था. दुनिया को तो वे अपने ही अनुभव के आधार पर देखेंगे. ‘‘रिश्ता बचाना है तो आप के सामने रोहन भैया की शर्त मानने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है भाभी, क्योंकि उन का शक उन के अनुभव पर आधारित है और अपने ही अनुभव को भला वे कैसे नकार सकते हैं. रिश्ता बचाने के लिए त्याग आप को ही करना पड़ेगा,’’ भारी मन से भाभी से यह सब कह कर मैं चुपचाप अपने घर की ओर चल दी.

 

रोजगार: अपनी पहचान, आपका काम

अगर आप ने जिंदगी में कुछ करने की ठानी है, तो मुश्किलें कितनी भी आएं, आप उन से गुजर जाते हैं. आजकल घर से चलने वाले कारोबारों में से एक है तरहतरह के रंगबिरंगे ममी बैग्स, पाउचेज और ड्रैसेज बनाना. इस काम के लिए ज्यादा बाहर जाने की जरूरत नहीं होती. स्मार्टफोन के जरीए सामानों की खरीदारी हो जाती है. फिर इसे ग्राहकों तक आसानी से पहुंचाया जाता है.

औरतें पैसे कमाने के साथसाथ अपने बच्चों का भी ध्यान रख सकती हैं. बहुत कम पूंजी वाली औरतें भी यह काम छोटे से घर से शुरू कर सकती हैं.

कुछ ब्रांडेड कंपनी के सामान अपने घर पर रख कर भी काम शुरू किया जा सकता है, जिसे थोक में खरीद कर रिटेल में आसपास बेचा जा सकता है. घरों में रहने को मजबूर औरतें तरहतरह के काम कर सकती हैं.

आर्टिफिशियल ज्वैलरी घरघर बेचना भी मुमकिन है. इस में आसपास की घरेलू औरतों को सामान बेचा जा सकता है. आजकल कोविड की वजह से नियमित बाजार कभी खुलते हैं, तो कभी बंद होते हैं. घर से चलाए जाने वाले कारोबार ज्यादा चल सकते हैं. और्डर से ले कर सामान बेचने तक पूरा काम सोशल मीडिया के जरीए हो सकता है. आप जो काम कर सकती हैं या जो सामान हैं, उसे घरेलू औरतों के गु्रपों में भेजती रहें.

विदेशी बैग खूबसूरत होने के साथसाथ टिकाऊ भी होते हैं. वे बड़ी तादाद में आयात होते हैं. उन्हें बेचना इंपोर्टर के बस की बात नहीं, इसलिए उन्हें आयात कर बेचना शुरू किया जा सकता है. जब भी बड़ी खेप बाहर से आए, तो अपने सामान का और्डर दे दें, तो कम कीमत पर सामान मिल जाता है.

ड्रैस मैटीरियल भी मंगवा सकते हैं, जिसे ग्राहकों की अपनी पसंद या इलाके के फैशन के मुताबिक बनवा कर बेचा जा सकता है. डिजाइन ग्राहक की पसंद के मुताबिक बनाएं.

अपने पास ज्वैलरी के कारीगर व दर्जी रखें, जो घरों से ही काम करें. अच्छे रंगों के तालमेल और डिजाइन के साथ जब पोशाक और बैग्स तैयार हो जाएं, तो उस का फोटो खींच कर ह्वाट्सएप के जरीए ग्राहकों तक पहुंचा दें. इस तरह मार्केटिंग का काम पूरा हो सकता है.

पिछले सालों में यह कारोबार काफी फैला है. इस में रोजाना तकरीबन 4 से 5 घंटे देने पड़ते हैं. ग्राहक दूसरे शहरों में भी बन जाते हैं.

अपनी अकेली और घुटन वाली जिंदगी से बाहर निकलें. स्मार्ट बन कर रहें. बहुत कम पूंजी से यह कारोबार शुरू किया जा सकता है. यह जिंदगी बदल सकती है. अपनी खुद की पहचान बनाएं. आप को खुद पर गर्व महसूस होने लगेगा.

योगी सरकार के राज में महिलाएं चलाएगी हाई टेक नर्सरी

बागवानी को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका में सुधार के दोहरे उद्देश्य को पूरा करने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार ने मनरेगा योजना के तहत इज़राइली तकनीक पर आधारित 150 हाई-टेक नर्सरी स्थापित करने का निर्णय लिया है.

इन हाईटेक नर्सरी का संचालन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं करेंगी.

योजनान्तर्गत प्रत्येक जिले में बेर, अनार, कटहल, नींबू, आम, अमरूद, ड्रेगन-फ्रूट आदि फल तथा स्थानीय भौगोलिक आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक सब्जियां उगाने के लिए दो-दो हाईटेक नर्सरी विकसित की जा रही हैं.

सरकार गुणवत्तापूर्ण फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ-साथ हाई-टेक नर्सरी में गुणवत्ता वाले पौधे और बीज विकसित करना चाहती है. सरकार के इस कदम का एक और उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की बढ़ती संख्या के लिए पर्याप्त फसल उपलब्ध कराना भी है.

उल्लेखनीय है कि बस्ती और कन्नौज में क्रमशः फलों और सब्जियों के लिए इंडो-इजरायल सेंटर फॉर एक्सीलेंस की स्थापना की गई है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध मिल सके.

ये 150 हाईटेक नर्सरी राज्य के कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों के परिसर, बागवानी विभाग के अनुसंधान केंद्र में स्थापित की जाएंगी ताकि किसानों को आसानी से प्रशिक्षित किया जा सके. उद्यान विभाग के अनुमान के अनुसार प्रत्येक हाई-टेक नर्सरी की औसत लागत लगभग एक करोड़ रुपये होगी.

इन नर्सरियों को उचित बाड़, सिंचाई सुविधा, हाई-टेक ग्रीन हाउस जैसी बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जाएगा और सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) / राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्य समूहों के माध्यम से इनका रखरखाव किया जाएगा.

इन नर्सरी से उत्पादित पौधों को इच्छुक स्थानीय किसानों, क्षेत्रीय स्तर पर किसान उत्पादन संगठनों (एफपीओ), राज्य स्तर पर अन्य निजी नर्सरी, राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्य सरकारों और अन्य के पौधरोपण के लिए बेचा जाएगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले 5 वर्षों में बागवानी फसलों की खेती के क्षेत्र को 11.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 16 प्रतिशत करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है ताकि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को पर्याप्त फल और सब्जियां मिल सकें.

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