भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह का नया रोमांटिक गाना रिलीज, देखें वीडियो

भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह इन दिनों सुर्खियों में चल रही है उनकी जल्द ही राहुल शर्मा के साथ डार्लिंग फिल्म आने वाली है जिसे लेकर वे इन दिनों चर्चा में है. अक्षरा सिंह एक ऐसी एक्ट्रेस है जो अपने नाम के दम पर फिल्म हिट करा सकती है मेकर्स उनपर पूरा भरोसा करके फिल्म की कास्टिंग करते है. अब अक्षरा का डार्लिंग फिल्म का नया गाना रिलीज हुआ है जिसमें वो राहुल शर्मा के साथ रोमांस करती दिख रही है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Ratnakar Kumar (@ratnakarwwrindia)

आपको बता दें, कि अक्षरा सिंह की फिल्म डार्लिंग का ट्रेलर पहले ही आ चुका है और मंगलवार को इसका गाना ‘सुनी ये बलम जी’ गाना रिलीज हुआ है इस गाने को स्वाति शर्मा और आयुष आनंद ने गाया है. जिस पर अक्षरा सिंह और राहुल शर्मा रोमांस करते दिख रहे है बता दें, राहुल शर्मा की य़े डेब्यू फिल्म है. जिसका गाना इन दिनों हिट चल रहा है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Akshara Singh (@singhakshara)

इस गाने में अक्षरा सिंह ने गोल्डन कलर की साड़ी पहनी हुई है. जिसमें वह बेहद ही खूबसूरत लग रही है. गाने की वीडियो की शुरुआत में अक्षरा सिंह और राहुल शर्मा एक जगह पर खड़े हुए है. वहा पर गांव की महिलाएं कुछ गा रही है तो कुछ ढोलक बजा रही है. गाना सुनकर राहुल, अक्षरा के बारें में सोचने लगता है औऱ फिर एक्ट्रेस गोल्डन साड़ी में दिखाई देती है.दोनों म्यूजिक के धुन पर नाचने लगते है. बता दे, कि गाने के लिरिक्स प्रफुल्ल तिवारी ने लिखें है. जबकि इसका म्यूजिक रजनीश मिश्रा ने दिया है. वीडियो को यूट्यूब के वर्ल्डवाइड रिकॉर्डस भोजपुरी चैनल पर रिलीज किया गया है.

फिल्म सभी सिनेमाघरों में 7 जुलाई को रिलीज होगी. यह एक एक्शन रोमांटिक फिल्म है जिसमें अक्षरा सिंह सिंगर बनीं है. वह असल जिंदगी में भी बहुच अच्छा गा लेती है. फिल्म को प्रदीप शर्मा ने प्रड्यूस किया है. राहुल शर्मा उन्ही के बेटे है जिनकी ये पहली फिल्म होगी.डार्लिंग फिल्म में राहुल ऐसा किरदार निभा रहे  है जो प्यार में सारी हदें पार कर देता है. अक्षरा और राहुल के अलावा संजय महानंद, अमित शुक्ला, रोहित सिंह मटरू और सुजान सिहं ने अहम किरदार निभांए है.

मेमोरी पावर बढ़ाने के ये कुछ आसान तरीके, याद किया हुआ भूलेंगे नहीं

अक्सर ऐसा होता है कि आप कुछ चीजे कितना भी याद कर लें, लेकिन आप भूल जाते है ऐसा ज्यादातर बच्चों के साथ होता है कि वो अपना पढ़ा हुआ भूल जाते है और एग्जाम इसी वजह से उनके कम नबंर आते है तो आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही ट्रिक बताएंगे जिससे आपके बच्चे की मेमोरी शॉर्प होगी और याद किया हुआ कभी नही भूलेंगे.

  • अगर आप चाहते हैं कि आपको याद किया हुआ भूले ना तो फिर आप उनके नोटबुक के कवरपेज पर सिगिल (sigil sign) का साइन बनाइए. इससे आप जो कुछ भी याद करेंगे फटाफटा याद होगा. और आपकी लर्निंग पावर भी बूस्ट होगी. आपको साइन कैसे बनाना है इसके लिए आप एंबेड वीडियो देख सकते हैं.
  • अगर आपको सीखने समझने में समय जरूरत से ज्यादा लगता है तो इसके पीछे आपकी खराब लाइफस्टाइल भी हो सकती है. आपको सबसे पहले तो अपनी 8 घंटे की नींद को पूरी करना है. शार्प माइंड के लिए अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी होता है.
  • इसके अलावा आप जब भी पढ़ने बैठें तो लगातार 1 से 2 घंटे पढ़ाई ना करें. हर 45 मिनट पर आप ब्रेक लेते रहें. इससे आपकी याददाश्त मजबूत होती है. दिमाग को 45 मिनट के बाद रिलैक्स की जरूरत होती है.
  •  

    View this post on Instagram

     

    A post shared by Sneha Jain (@thehopetarot)

कुछ योगासन करने से भी मेमोरी होती है तेज

1. डायमंड पोज

अपने दिमाग को शांत और आराम से रखने के अलावा, एकाग्रता और स्मृति क्षमता में सुधार के लिए इस ब्रेन योग का अभ्यास करना अच्छा होता है. ये आपकी एकाग्रता को बेहतर करेगा.

2. शोल्डर स्टैंड पोज

यह मस्तिष्क योग एकाग्रता और ध्यान को बढ़ाता है. योग शास्त्र के अनुसार सर्वांगासन को आपके शरीर के सभी अंगों को बेहतर बनाता है. इससे आपकी सेहत बहुत बेहतर होती है और स्मरण शक्ति में भी सुधार होता है.

3. हलासन

यह आसन आपकी इंद्रियों को एक्टिव रखने का काम करता है. यह आपके नर्वस सिस्टम के लिए बेहतर होता है. इससे पीठ की स्ट्रेचिंग भी बेहतर होती है. यह आपके पोश्चर को भी बेहतर करने का काम करता है.

4. स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेंड

यह दिमाग का योग ब्रेन में ब्लड फ्लो को बेहतर करता है. यह मानसिक तीक्ष्णता और समृति में भी सुधार करता है. इसलिए आज से आप यहां बताए जा रहे योग को करना शुरू कर दीजिए.

कंडोम से जुड़ी वो जानकारियां जो हर किसी को जाननी चाहिए

मां बनने की खुशी से भला कौन वंचित रहना चाहता है? मगर सही वक्त और सही स्थिति का होना बहुत जरूरी है. सेक्स के दौरान या उसके बाद तमाम सुविधा-असुविधा के बारे में जानकारी रखना बहुत आवश्यक है. तभी एक परिवार सफल व सुखी परिवार बना रह सकता है. यह जिम्मेदारी सिर्फ एक पार्टनर की नहीं बल्कि दोनों की, बराबर की है. युवाओं को अकसर इस संबंध में सही जानकारी नहीं होती. यहां प्रस्तुत है इस संबंध में वैज्ञानिक जानकारी ताकि कई तरह के रोगों और असमय गर्भधारण से बचा जा सके.

कंडोम को हमेशा तवज्जो देना क्यों जरूरी है?

सेक्स हर हाल में शारीरिक संबंध है जो अपने साथ-साथ कई किस्म की बीमारियां भी लिए होता है. जरा सी लापरवाही किसी की पूरी दुनिया बदल सकती है. किसी के जीवन का अंत भी हो सकता है. इसलिए सेक्स के बारे में सोचने के साथ ही कंडोम के बारे में सोचना जरूरी है. क्योंकि इससे ही सुरक्षित सेक्स संभव है. संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए कंडोम एक बेहतर विकल्प है.

संक्रामक रोग, असमय प्रेग्नेंसी के बारे में दोनो सोचें

इन सब विषयों के बारे में सोचना सिर्फ महिलाओं की ही जिम्मेदारी नहीं है. दरअसल लोगों की इस पर अपनी-अपनी राय है कि कंडोम, प्रेग्नेंसी आदि यह सब पुरुषों के सोचने का विषय है. वास्तव में संक्रामक रोगों से बचाव और असामयिक प्रेग्नेंसी की समस्या दोनो की ही समस्या है. विशेषतौर पर महिलाओं को इस मामले में मुखर होने की जरूरत है.

कंडोम न मिलने की स्थिति में क्या करना चाहिए?

कंडोम एक ऐसा सुरक्षा कवच है जिसकी तुलना मंे कोई और गर्भनिरोधक नहीं है. हालांकि गर्भनिरोधक कई मौजूद हैं मगर बिना किसी रिस्क फैक्टर के कंडोम का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका कोई दुष्परिणाम नहीं होता. लेकिन कोई ऐसी स्थिति आ जाए जब सेक्स करने के दौरान कंडोम न हो तो क्या किया जाए? बाजार में कई दूसरे गर्भनिरोधक भी आपके काम आ सकते हैं. ध्यान रखें यह गर्भनिरोधक सिर्फ गर्भ ठहरने की आशंका को ही सुनिश्चित करते हैं. इनमें किसी किस्म की दूसरी सुरक्षा नहीं होती.

क्या पहली बार सेक्स में ही कोई महिला गर्भवती हो सकती है?

यह एक ऐसा सवाल है जिसका कोई जवाब नहीं है. इसलिए युवाओं का यह जानना बहुत जरूरी है कि चाहे आप पहली बार सेक्स कर रहे हों या दसवीं बार, कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें. हालांकि यह थोड़ी परेशान करने वाली बात लग सकती है कि पहली बार सेक्स में भी कंडोम का इस्तेमाल किया जाए? लेकिन हकीकत यही है कि अगर अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहते हैं तो कंडोम का उपयोग बिना झिझक करें.

कंडोम कहां से खरीदे जा सकते हैं? क्या कंडोम अलग-अलग प्रकार के भी होते हैं?

कंडोम कोई ऐसी अंजान चीज नहीं है जिसे खरीदने के लिए मुश्किल सामने आती है. यह आपको कहीं भी आसानी से उपलब्ध हो सकता है. कैमिस्ट की दुकान से इसे आसानी से खरीदा जा सकता है. जब आप सेक्स से नहीं शरमाते तो किसी के सामने एक शब्द ‘कंडोम’ कहने मंे शरम कैसी?

अब जहां तक बात है इसके प्रकार की तो विभिन्न प्रकार के कंडोम मार्केट में उपलब्ध हैं. अपनी सहूलियत के अनुसार जो पसंद हो, उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. उनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

1 मैटीरियलः

ज्यादातर कंडोम लैटेक्स और पाॅलीयूरीथेन से बने होते हैं. लैटेक्स के द्वारा बनाए गए कंडोम ज्यादा मजबूत होते हैं. प्रेग्नेंसी और संक्रामक रोगों से दूसरों के मुकाबले यह ज्यादा सुरक्षा प्रदान करते हंै.

2 साइजः

बाजार में अलग-अलग लम्बाई का कंडोम उपलब्ध होता है. कोई छोटे होते हैं, कई ज्यादा लम्बे होते हैं तो कई की चैड़ाई ज्यादा होती है तो कुछ पतले होते हैं. अगर पैकेट में लिखा है ‘लार्ज’ अथवा ‘स्माॅल’ इसका मतलब उसकी लम्बाई से नहीं बल्कि चैड़ाई से है. कंडोम खरीदते वक्त बिना शरमाएं अपने शिश्न के साइज अनुसार ही कंडोम खरीदें.

3 लुब्रीकेटः

लुब्रीकेट यानी चिकनाई. कुछ कंडोम ऐसे भी होते हैं जिसमे जरा भी चिकनाहट नहीं होती. जबकि कुछ में सिलिकन बेस्ड लुब्रीकेंट्स होते हैं तो कुछ में वाॅटर बेस्ड लुब्रीकेंट्स होते हैं.

4 कलर्डः

लैटेक्स या कंडोम का वास्तविक रंग क्रीमी व्हाईट होता है. लेकिन बाजार में कंडोम अलग-अलग रंगों में भी उपलब्ध है.

5 फ्लेवर्डः

कुछ सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन, ओरल सेक्स की वजह से भी फैलते हैं. सो, अगर ओरल सेक्स के दौरान भी कंडोम का उपयोग किया जाए तो अच्छा है. कई दफा लोगों को लैटेक्स की गंध और उसका स्वाद पसंद नहीं आता. इसलिए फ्लेवर्ड कंडोम बेहतर विकल्प हैं.

कंडोम कितना कारगर है?

वास्तव में यह निर्भर करता है उपयोग करने वाले पर. अगर कंडोम का उपयोग सही मायने में किया जाए तो 94प्रतिशत से लेकर 97प्रतिशत तक तमाम समस्याओं से निजात दिलाता है. प्रेग्नेंसी या संक्रामक रोग, सभी से निजात दिलाने में यह कारगर साबित हुआ है. एचआईवी से तो यह लगभग 100प्रतिशत तक राहत देता है. कुछ लोग मानते हैं कि कुछ वायरस हैं जिनके सामने कंडोम असफल है, जबकि ऐसा नहीं है.

क्या दो कंडोम का इस्तेमाल एक कंडोम के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद है?

नहीं. ऐसा बिल्कुल नहीं है. दो कंडोम पहनकर सेक्स करने से कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं. मसलन दोनों कंडोम घिसने के कारण फट सकते हैं. साथ ही यह किसी भी व्यक्ति के लिए सहज नहीं है. दो कंडोम पहनकर सेक्स करने में असुविधा होती है.

फीमेल कंडोम क्या है?

मेल कंडोम की ही तरह बाजार में फीमेल कंडोम भी मौजूद है. फीमेल कंडोम एक पाउच की तरह होता है. इसे वैजाइना में फिट किया जाता है.

कंडोम कैसे पहना जाता है?

ध्यान रखें कंडोम का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. उससे भी जरूरी है उसका सही से इस्तेमाल करना. शिश्न और योनि के बीच संपर्क होने से पहले ही कंडोम को लगाया जाना चाहिए. अन्यथा प्रेग्नेंसी या संक्रामक रोगों से बचना मुश्किल हो सकता है.

पुरुष को कंडोम तब लगाना चाहिए जब उसका शिश्न लम्बा और खड़ा हो जाए. कंडोम को खोलते समय दंात का उपयोग न करें; क्योंकि हो सकता है कि आपके दांतों की वजह से कंडोम में दरार पड़ जाए और वह आपको न दिखे.

अगर कंडोम फट जाए?

अगर सेक्स के दौरान कंडोम फट जाए तो तुरंत वहीं सेक्स प्रक्रिया रोक दें और नए कंडोम का इस्तेमाल करें. कई दफा ऐसा होता है कि आपके महसूस हो रहा है कि कंडोम फट गया है, जबकि ऐसा नहीं होता. कई बार यह मात्र एक वहम होता है. मगर बेहतर है कि रह-रहकर कंडोम को चेक करते रहें. अगर सेक्स के दौरान लगे कि आपका वीर्य कहीं न कहीं से निकलकर योनि के अंदर प्रवेश कर चुका है तो बेहतर है तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें या किसी प्रिकाॅशनरी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें. इसी से बचाव हो सकता है.

क्या ओरल सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल जरूरी है?

हां, कई डिजीज ऐसे होते हैं जो ओरल सेक्स से शरीर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं. इसलिए कंडोम का उपयोग अवश्य करें.

सेक्स करना कब रोकना चाहिए?

पुरुषों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब वह अपना शिश्न गुदा से या योनि से बाहर निकालने वाला हो तो उसे कंडोम को पकड़ लेना चाहिए. इसे आहिस्ता से निकालने के बाद सावधानीपूर्वक किसी सही जगह पर फेकना चाहिए. कंडोम को यूज करने के बाद टायलेट में न फेंके और न ही यादगार के रूप मेें अपने कमरे में सजाने का सामान बनाएं. उसे डस्टबिन में ही फेंके.

मसला: जामताड़ा हो या नूह – साइबर क्रिमिनलों का गढ़

झारखंड अपने आदिवासी समाज के साथसाथ कीमती खनिजों और हरेभरे जंगलों के लिए मशहूर है. इस राज्य का एक जिला है जामताड़ा, जिस का मतलब है सांपों का इलाका. दरअसल, जामताड़ा, ‘जामा’ और ‘ताड़’ शब्द से बना है. संथाली भाषा में ‘जामा’ का मतलब होता है सांप और ‘ताड़’ का मलतब होता है घर. वैसे, जामताड़ा को बौक्साइट की खदानों के लिए भी जाना जाता है.

लेकिन कुछ साल पहले यही जामताड़ा एक ऐसे कांड के लिए बदनाम हुआ था, जिस का जहर सांपों के जहर से भी जानलेवा साबित हुआ था. इस में कुछ शातिर लोगों ने भोलेभाले लोगों की मासूमियत का फायदा उठा कर उन्हें चूना लगाया था.

कोई फोन पर ‘हैलो’ बोलता था और सामने वाले के बैंक खाते से रकम सफाचट हो जाती थी. वह फोन इसी जामताड़ा के किसी गांव में बैठे साइबर क्रिमिनल के यहां से आता था, तभी से इस जगह को ‘साइबर ठगी का गढ़’ माना जाता है. ऐसा भी कहा जाता है कि देश में हो रही साइबर ठगी के 80 फीसदी मामले जामताड़ा से जुड़े हुए हैं.

याद रहे कि कुछ साल पहले ‘सदी के महानायक’ अमिताभ बच्चन के बैंक खाते से 5 लाख रुपए गायब हो गए थे. वही अमिताभ बच्चन, जो टैलीविजन पर भारतीय रिजर्व बैंक की साइबर क्राइम से आगाह करती लाइन ‘जानकार बनिए, सतर्क रहिए’ को दोहराते रहते हैं. साइबर ठगों ने उन्हें भी नहीं बख्शा था.

इस गोरखधंधे की शुरुआत तकरीबन 13 साल पहले जामताड़ा के एक गांव सिंदरजोरी में रहने वाला सीताराम मंडल से हुई थी, जो रोजीरोटी की तलाश में मुंबई गया था. वहां उस ने मोबाइल रिचार्ज की दुकान में नौकरी की और अपने शातिर दिमाग से ठगी करना सीखा.

जब सीताराम मंडल अपने गांव लौटा, तो उस ने जाली सिमकार्ड लगा कर, नकली बैंक मैनेजर बन कर ग्राहकों को फोन लगाने की चाल चली. इस के तहत वह लोगों से कहता था कि आप का कार्ड ब्लौक हो गया है. जो लोग उस के झांसे में आ जाते थे, वह उन से एटीएम नंबर, ओटीपी और सीवीवी नंबर जैसी जानकारियां मांग लेता था. फोन कट होतेहोते ग्राहक की जेब भी खाली हो चुकी होती थी.

इस पैसे को सीताराम मोबाइल रिचार्ज रिटेलर की आईडी में ट्रांसफर करता था. उस पैसे का 30 फीसदी अपने पास रख कर रिटेलर उसे बाकी का

70 फीसदी कैश दे देता था. आज उसी सीताराम मंडल के शागिर्दों ने गांव में कई गैंग बना रखे हैं, जो यहीं से देशभर में साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं.

सीताराम मंडल और उस के गिरोह पर आज क्यों बात हो रही है? क्यों जामताड़ा आज फिर सुर्खियों में है? इन दोनों सवालों का जवाब यह है कि हरियाणा का एक इलाका ‘मिनी जामताड़ा’ के नाम से बदनाम हो रहा है. वहां के बेरोजगार नौजवान सरकार से तो रोजगार पाने की उम्मीद खो चुके हैं, पर सीताराम मंडल की दिखाई राह पर चल कर वे भी जुर्म की दुनिया में घुसपैठ कर चुके हैं.

दरअसल, हरियाणा के नूह इलाके में मई, 2023 में हरियाणा पुलिस ने खुलासा किया था कि वहां से 35 राज्यों के 28,000 लोगों के साथ तकरीबन 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी की गई थी.

पुलिस ने यह भी बताया था कि ये साइबर महाठग फर्जी सिमकार्ड, आधारकार्ड और पैनकार्ड के जरीए देशभर में लोगों के साथ धोखाधड़ी करते थे. इन लोगों ने दिल्ली से अंडमाननिकोबार से ले कर केरल तक के लोगों को साइबर ठगी के अपने जाल में फंसाया था.

हरियाणा के नूह जिले के पुलिस सुपरिंटैंडैंट वरुण सिंगला ने इस कांड का खुलासा करते हुए बताया था कि 27-28 अप्रैल, 2023 की रात 5,000 पुलिस वालों की 102 टीमों ने जिले के 14 गांवों में एकसाथ छापेमारी की थी. इस दौरान तकरीबन 125 हैकरों को हिरासत में लिया गया था. इन में से 66 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था.

पुलिस सुपरिंटैंडैंट वरुण सिंगला ने यह भी बताया कि ये महाठग फेसबुक बाजार ओएलऐक्स और दूसरी साइटों पर मोटरसाइकिल, कार, मोबाइल फोन जैसे सामान पर आकर्षक औफर का लालच दे कर धोखाधड़ी को अंजाम देते थे. ये लोग पुराने सिक्के खरीदनेबेचने के बहाने, सैक्सटोर्शन के जरीए, केवाईसी और कार्ड ब्लौक के नाम पर भी ठगी करते थे.

मेवात में ठगी का पुराना चलन

हरियाणा के नूह और मेवात इलाके में ठगी करना नई बात नहीं है. पुलिस के मुताबिक, तकरीबन 20 साल पहले मेवात के नौजवान दूरदराज के लोगों को नकली सोने की ईंट को असली बता कर ठग लिया करते थे.

इस धंधे को आज भी ‘टटलू’ के नाम से जाना जाता है. इस में शिकार को यह यकीन दिलाया जाता है कि वे लोग (ठग) मकान बनाने के लिए बुनियाद खोद रहे थे, यह ईंट उस में मिली है. वे गरीब आदमी हैं, बाजार में इसे बेच नहीं सकते. सोने की नकली ईंट को सस्ते में मिलने के चलते लोग झांसे में आ जाते थे.

जब ऐसे कांड ज्यादा होने लगे, तो ‘टटलू’ गिरोह के खिलाफ हरियाणा और राजस्थान पुलिस ने नकली सोने की ईंट खरीदनेबेचने वालों से सावधान रहने के लिए चेतावनी वाले बोर्ड लगाए थे, जिस से लोग सावधान होने लगे.

इस से ‘टटलू’ का धंधा करने वाले लोगों ने ओएलऐक्स पर ठगी का धंधा शुरू कर दिया. ये ठग ओएलऐक्स पर किसी गाड़ी का फोटो डाल कर सस्ते में बेचने का झांसा देते और खुद को फौजी या कोई बड़ा अफसर बताते. पहले खाते में कुछ पैसे डलवाए जाते, जिस से सौदा पक्का हो जाए. उस के बाद पीडि़त को मेवात बुला कर उस के सारे पैसे, घड़ी, गहने, एटीएम वगैरह छीन कर उसे मारपीट कर भगा देते थे.

जब राजस्थान और मेवात की पुलिस ने ओएलऐक्स पर की गई ठगी करने वालों पर शिकंजा कसा तो, ये लोग अश्लील वीडियो बना कर लोगों को ठगने लगे. जब इस पर भी पुलिस ने शिकंजा कसा, तो ये लोग साइबर ठगी के काले धंधे में उतर आए.

क्या है वजह

झारखंड का जामताड़ा हो या हरियाणा का नूह इलाका, यहां पर गरीबी का ही ज्यादा असर रहा है. जब तक जामताड़ा में साइबर अपराध नहीं होते थे, तब तक वहां के लोग दो वक्त की रोटी के लिए तरसते दिखाई देते थे. कच्चे घरों के गांवों में लोगों के पास एक अदद साइकिल नहीं होती थी.

इसी तरह मेवात एक मुसलिम बहुल इलाका है, जो हरियाणा के पलवल, नूह जिला, राजस्थान के अलवर, भरतपुर और उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले तक फैला है. इस की तकरीबन 70 लाख की आबादी है. यहां पर पढ़ाईलिखाई की कमी है और रोजगार के मौके बेहद कम हैं. यही वजह है कि नौजवान ठगी जैसे अपराध की ओर आसानी से मुड़ जाते हैं.

साइबर क्रिमिनल इसी बात का फायदा उठाते हैं. नूह में जब पुलिस ने साइबर अपराधियों की कारगुजारियों का परदाफाश किया था, तब यह भी खुलासा किया था कि हरियाणा और राजस्थान बौर्डर के साथ लगते गांवों में साइबर क्राइम की ट्रेनिंग दी जाती है. वहां नौजवान केवल एक लैपटौप, एक मोबाइल फोन और फर्जी सिमकार्ड के जरीए साइबर क्राइम की ट्रेनिंग लेते हैं.

नूह में पकड़े गए नौजवानों को राजस्थान के भरतपुर जिले के जुड़वा गांवों जुरेहेरा और घामड़ी में ट्रेंड किया गया था. वे इस के लिए 15,000 रुपए की फीस भी देते थे.

नौजवानों का साइबर क्राइम की ओर यह झुकाव बड़ा ही खतरनाक है. ‘डबल इंजन’ की सरकार इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही है. आपदा में अवसर का यह घिनौना रूप है, जो देश की तरक्की में बहुत बड़ी रुकावट है.

हमारे 22 साल के बेटे की मौत हो चुकी है अब हम एक बच्चा गोद लेना चाहते है, हमे क्या करना होगा?

सवाल

मेरे 22 साल के एकलौते बेटे की कैंसर से मौत हो गई है. अब हम पतिपत्नी एक लड़का गोद लेना चाहते हैंजो एक से 2 साल की उम्र का हो. हम ने सुना है कि सरकार की किसी संस्था से बड़ी उम्र का बच्चा साल 2 साल में मिल सकता है. इस के अलावा अगर कोई औरत लड़का गोद देने की इच्छुक हो तो भी हम स्वीकार करना चाहेंगे. हम यह सब कैसे करें?

जवाब

हमारे देश में बच्चा गोद लेना कितना मुश्किल काम हैइस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2021 में एक आंकड़े के मुताबिकदेश में 3 करोड़10 लाख अनाथ बच्चे थेलेकिन पिछले 5 साल में कानूनी कार्यवाही लंबी होने के चलते सिर्फ 16,533 बच्चे ही गोद लिए जा सके.

बच्चा गोद लेने में इतनी कागजी कार्यवाही और कानूनी खानापूरी करनी पड़ती है कि ज्यादातर लोग यह इरादा छोड़ ही देते हैंक्योंकि इस में 5 साल तक लग जाते हैं.

आप का जज्बा और फैसला अच्छा हैलेकिन इस के लिए आप को डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से मिलना होगा और औनलाइन आवेदन भी करना होगाजिस के लिए इस वैबसाइट 222. पर आवेदन करें.   

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें.

मोबाइल नंबर : 08826099608 

तो अब धार्मिक रिवाजों से इंसाफ मिलेगा

आखिरकार धार्मिक रीति और नीतियां कैसे महिलाओं के इंसाफ के लिए रुकावट बनती हैं, इस का जीताजागता उदाहरण इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश से सामने आया, जो उस ने 23 मई, 2023 को दिया था.

मामला उत्तर प्रदेश के चिनहट क्षेत्र का है, जहां एक लड़की ने गोविंद राय उर्फ मोनू पर शादी का झांसा दे कर सैक्स संबंध बनाने का आरोप लगाया. अपने बचाव में आरोपी ने दलील दी

कि उस ने आरोप लगाने वाली लड़की से ब्याह करना तो चाहा, पर चूंकि लड़की मांगलिक थी, इसलिए उस ने शादी नहीं की.

यहां इस धार्मिक रिवाज का जिक्र करना जरूरी है कि मंगली या मांगलिक होना हिंदू परंपरा के अनुसार मंगल के प्रभाव में पैदा हुआ वह इनसान है, जिस की शादी सिर्फ किसी मांगलिक इनसान से ही हो सकती है.

धार्मिक रिवाजों के अनुसार इसे एक तरह का ‘भाग्यदोष’ कहा जाता है यानी लड़की की शादी इस दोष में आसान नहीं होती और कहा जाता है कि अगर वह किसी गैरमांगलिक लड़के से शादी करेगी तो भारी अनहोनी घट सकती है, जैसे शादी टूटना, परिवार में किसी की मौत होना, लड़ाईझगड़े या तरक्की न कर पाना वगैरह.

अब चूंकि उत्तर प्रदेश में पौराणिक सरकार है और सरकार ने आधिकारिक तौर पर ज्योतिष विद्या की पढ़ाई करनेकराने का कोर्स यूनिवर्सिटी में शुरू करा ही दिए हैं, तो लखनऊ बैंच के जस्टिस बृज राज सिंह ने सोचा कि लड़के की बात में तो दम है, आखिर भला कोई भारतीय संस्कृति को मानने वाला कैसे किसी मांगलिक लड़की से शादी कर सकता है? तो फौरन लखनऊ यूनिवर्सिटी के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष से 10 दिन के भीतर लड़की की कुंडली जांचने का आदेश दे दिया कि वह मांगलिक है भी कि नहीं.

यह तो उस दलील से भी घटिया बात निकली, जब कोई लड़का कहे कि चूंकि फलां लड़की घर से बाहर निकली, इसलिए उस के साथ रेप किया. इस में उस बेचारे की गलती नहीं, बल्कि सारी गलती तो लड़की की है और कोर्ट यह पता लगाने लग जाए कि लड़की घर से निकली थी या नहीं.

हालांकि 3 जून, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि ‘सवाल यह नहीं है कि मांगलिक तय किया जा सकता है या नहीं और ज्योतिष भी एक विज्ञान है, सवाल यह है कि क्या कोर्ट ऐसा आदेश दे सकता है?’

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही आदेश को रोक दिया, लेकिन इस से यह सवाल उठा कि क्या आने वाले समय में देश में इंसाफ की यही भाषा होने जा रही है? क्या ऐसे जज देशभर के कोर्टों में भरने नहीं लग गए हैं? सवाल यह भी है कि क्या अब इंसाफ करते समय वैज्ञानिक तर्कों की जगह धार्मिक रिवाजों को ऊपर रखा जाने लगा है?

अगर ऐसा होने लगता है, तो कल को कोई महिला अगर घरेलू हिंसा का मामला ले कर अदालत पहुंच कर कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाती है, तो उस का मामला तो ऐसे ही रफादफा हो जाएगा कि धार्मिक रिवाज तो औरतों को पति की दासी बनी रहने का आदेश देता है, वह चाहे मारेपीटे, उसे चुपचाप सहना है और पति के आदेश का पालन करना है, क्योंकि ऐसे मौकों पर ही तो आरोपी पति अपने पक्ष में सती प्रथा में जलाई जाने वालों के तर्क रखेंगे.

ऐसा होता है तो कोई दलित कुएं से पानी पीने की फरियाद ले कर पहुंचेगा तो पहले चैक किया जाएगा कि हिंदू रिवाजों में दलित सवर्णों के बनाए कुओं से पानी पी सकता है कि नहीं? वह साथ बैठ कर खाना खा सकता है कि नहीं? या उसे पढ़नेलिखने का हक है कि नहीं?

जिस समाज में लड़की के रंगरूप वगैरह को ले कर इतना भेदभाव किया जाता है, जहां दहेज जैसी कुरीति का बोलबाला है, दहेज हत्या के मामले भयानक हैं, वहां ऐसे आदेश देशभर की लड़कियों का मजाक उड़ाने जैसे नहीं हैं क्या? इस तरह के आदेश कहीं न कहीं पंडोंज्योतिषियों की लूट की दुकान चलती रहे, इसलिए दिए जा रहे हैं.

जरूरत तो यह थी कि कुंडली जैसे फिजूल के रिवाजों और प्रथाओं से लड़ने की एक वैज्ञानिक चेतना जगाई जाए, लेकिन इस की जिम्मेदारी ही जिन्हें सौंपी जा रही है, वे ही ऐसे आदेश देंगे तो हो गया फिर सब का भला.

सोरायसिस से रहें सावधान

कई बार आप ने देखा होगा कि कुछ लोगों की कुहनी, घुटने या सिर के पीछे लाल चकत्ते पड़ जाते हैं. ये चकत्ते थोड़े उभरे होते हैं. इस जगह की चमड़ी मोटी और खुरदुरी दिखती है. सामान्य रूप से ये सोरायसिस नामक बीमारी के लक्षण होते हैं.

सोरायसिस चमड़ी से जुड़ी एक बीमारी है. इस में खुजली होने के साथसाथ, पपड़ीदार चमड़ी के अलावा चकत्ते दिखाई देते हैं. आमतौर पर ये चकत्ते घुटने, कुहनी, धड़ और सिर पर सब से ज्यादा होते हैं. जिन लोगों को डायबिटीज, दिल की बीमारी, मोटापा और डिप्रैशन है, उन्हें सोरायसिस होने का खतरा ज्यादा होता है.

इम्यूनिटी सिस्टम और आनुवंशिक वजह से यह बीमारी किसी को भी हो सकती है. इस का असर शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकता है, इसलिए इस के लक्षणों पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है.

होता यह है कि शरीर में खुजली और चमड़ी पर चकत्ते देख कर लोग इन को नजरअंदाज कर देते हैं. यह गलती न करें. सावधान हो जाएं और तुरंत डाक्टर के पास जाएं, क्योंकि ये ही सोरायसिस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं.

अगर घर में किसी को सोरायसिस की शिकायत रह चुकी है तो खास सावधानी बरतने की जरूरत है. स्किन पर अगर खुरदुरापन है, चमड़ी मोटी लगे या उस पर चकत्ते हों, तो माहिर डाक्टर से जांच करा लेनी चाहिए. इस बीमारी का सब से ज्यादा असर कुहनी के बाहरी हिस्से और घुटने पर देखने को मिलता है.

लखनऊ की स्किन स्पैशलिस्ट डाक्टर प्रियंका सिंह बताती हैं, “सोरायसिस को संक्रामक बीमारी नहीं माना जाता है. यह बीमारी स्विमिंग पूल में नहाने, किसी सोरायसिस पीड़ित के साथ संपर्क में आने और किसी सोरायसिस पीड़ित के साथ शारीरिक संबंध बनाने से नहीं फैलती है, इसलिए ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है.”

सोरायसिस के प्रकार

सोरायसिस बीमारी के कई प्रकार हैं. प्लाक सोरायसिस सब से आम है. सोरायसिस से पीड़ित लोगों में से तकरीबन 80 फीसदी से 90 फीसदी को प्लाक सोरायसिस होता है. उलटा सोरायसिस में चमड़ी पर सिलवटें दिखाई देती हैं. यह छोटे, लाल, बूंद के आकार के पपड़ीदार धब्बों जैसा दिखता है. यह अकसर बच्चों और नौजवानों में होता है. कुछ में टुकड़े के ऊपर छोटे, मवाद से भरे थक्के होते हैं. कई बार सोरोयसिस चमड़ी के झड़ने की वजह बनता है.

सोरायसिस में चेहरे और खोपड़ी पर एक चिकने, पीले रंग के धब्बे के साथ जगह दिखाई देती है. यह हाथ के नाखूनों के अंदर गड्ढे और पैर की उंगलियों में भी होता है.

सोरायसिस के चलते चमड़ी में खुजली, चमड़ी का फटना, सूखी चमड़ी, चमड़ी में दर्द, नाखून का उखड़ना, फटना और जोड़ों का दर्द भी होता है. अगर इस के साथसाथ दर्द, सूजन और बुखार लगे तो यह संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं. ऐसे में डाक्टर के पास जाना चाहिए.

सोरायसिस का इलाज

इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन कई ऐसे उपचार जरूर हैं, जो इस के लक्षणों और चमड़ी के चकत्तों को कम कर सकते हैं. इस के इलाज के लिए डाक्टर से बात करने की जरूरत होती है.

सोरायसिस से बचाव के लिए शरीर को साफसुथरा रखें और खुद का ध्यान रखे. सेहत से भरपूर भोजन और दिनचर्या, तनाव से दूर रह कर इस बीमारी से बचा जा सकता है.

धूम्रपान और का सेवन न केवल सोरायसिस का खतरा बढ़ाता है, बल्कि बीमारी को भी खतरनाक बनाता है. सोरायसिस का इलाज करने के लिए स्टेरौयड, क्रीम, रूखी चमड़ी के लिए मौइस्चराइजर या एंटीसैप्टिक क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं.

मैडिकेटेड लोशन या शैंपू, विटामिन डी 3, विटामिन ए या रैटिनोइड क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं. चमड़ी पर छोटे दाने ठीक करने के लिए क्रीम या मलहम का इस्तेमाल कर सकते हैं. पर साथ ही याद रखें कि बिना डाक्टरी सलाह के दवा कभी न लें.

कमजोर होती भाजपा

खेमेबाजी हमारे देश के हर गांव की एक खासियत है. 1000 घरों के गांव में 4.5 खीमे होना आम बात है और जाति, धर्म, काम, पैसे के नाम पर बने ये खेमे एकदूसरे से लड़ते ज्यादा रहते हैं, गांव की देखभाल, आम जगहों को बनवाने, सिक्योरिटी पर कम ध्यान देते है. हर खेमा दूसरे से लड़ता रहता है और दूसरे में सेंध लगाना रहता है कि कैसे उसे कमजोर किया जाए. गांव के भले की सोचने की फुर्सत किसी को नहीं होती.

हमारी राजनीति में यह अर्से से चल रहा है पर 2014 में वादा किया गया था कि भारतीय जनता पार्टी को मिली भारी भरकम जीत के बाद दलबदल खत्म हो जाएगा क्योंकि देश की कट्टर हो चुकी ङ्क्षहदू जनता के बड़े हिस्से ने नरेंद्र मोदी को वोट दिया था.

अफसोस यही है कि 2014 के बाद सुॢखयों नहीं बनती हैं कि भाजपा ने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल दूसरी पाॢटयों को तोडऩे और अपने में मिलाने में किया और ङ्क्षहदूङ्क्षहदू करते हुए भी उस के हाथ से सत्ता फिसलती नजर आती रही.

उस की वह जनता के पास जा कर नहीं, खेमों में सेंध लगा कर या पुलिस को दूसरे खेमों के सरगनों को परेशान करने में लगाती रही. देश का कल्याण तो हवा हो गया है, पार्टी का कल्याण ही अकेला मकसद बच गया है.

महाराष्ट्र में 2 साल पहले जब पुराने साथी शिवसेना के उद्धव ठाकरे से समझौता नहीं हुआ और शिवसेना ने नेशनल कांग्रेस और इंडियन कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार बना ली तो बजाए अगले चुनाव तक इंतजार करने के उस ने खीज में आ कर तीनों पाॢटयों के विधायकों की खरीद शुरू कर दी. पहले एकनाथ ङ्क्षशदे को शिवसेना को तोड़ा और अब एनसीपी के अजीत पंवार को तोड़ कर एक टेढ़ीमेढ़ी ऊंची इमारत बना ली.

ऐसा काम पहले ही वह कर्नाटक व मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों और गोवा, मेघालय, मिजोरम, अरुणांचल में कर चुकी है.

यह साबित करता है भाजपा के खेमे की हवेली चाहे कितनी बड़ी दिखती हो, उस के सामने से गुजरने वाले चाहे चप्पल को बगल में दबा कर और सलाम कर के गुजरते हो, मन में लोगों को कोई भरोसा नहीं है कि खेमेदार कुछ भला करेगा. इसलिए भाजपा के खेमेदारों को लाठी और पैसे के दम पर हमारे खेमों में तोडफ़ोड़ करनी पड़ रही है.

यह भारतीय जनता पार्टी की कमजोरी दिखाती है कि उसे केंद्र में भारी सीटें मिलने के बावजूद राज्यों में दलबदलूओं के सहारे सरकारें चलाना पड़ रहा है. मतलब यह है कि पार्टी को जनता से डर  लगता है जीते हुए विधायकों और सांसदों से नहीं.

महाराष्ट्र में जो हुआ वह वैसे पौराणिक युकों से ङ्क्षहदू राजा करते आए हैं पर हमेशा उन्होंने छल से राज्य किया है. अमृत मंथन में भी दस्युओं को मिला कर देवताओं ने अमृत निकाला पर बजाए बांटने के सारा हड़प गए. यही आज हो रहा है.

दहशत: क्या सामने आया चोरी का सच

Story in Hindi

Urfi Javed ने कटी-फटी ड्रेस की जगह पहना सूट, लोग हुए हैरान

फैशन क्वीन उर्फी जावेद (Urfi Javed) अक्सर ही अपने फैशन सेंस को लेकर सुर्खियों में रहती है उनके अटपटे फैशन लोगों को खूब पसंद आते है जिन्हे लेकर कई बार उन्हे ट्रोल भी होना पड़ता है लेकिन हाल ही में उर्फी ने कुछ ऐसा कैरी किया जो देखें वो यकीन करें, जो ना देखें उन्हे यकीन ना हो, जी हां, इऩ दिनों उर्फी भारतीय लिबास में नजर आई . जिसे देख उनके फैंस बेहद ही खुश नजर आए है, उन्होने लिबास में सूट कैरी किया. जो कि पर्पल कलर का है. अब ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है लोग इसे काफी पसंद कर रहे है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

उर्फी जावेद  का यह वीडियो सेलेब्रिटी फैन पेज विरल भयानी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से शेयर किया है. इस वीडियो में उर्फी पर्पल कलर का सूट पहनें नजर आ रही हैं. इस सूट पर गोल्डन कलर की कढ़ाई सूट को खूबसूरत लुक दे रही है. इस आउटफिट के साथ उर्फी ने अपने बालों को खुला रखा हुआ है और कानों में गोल्डन ईयररिंग्स पहनें हुए हैं. इस आउटफिट में उर्फी जावेद बेहद ही हसीन लग रही हैं. उर्फी के इस वीडियो पर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

उर्फी जावेद (Urfi Javed) के इस वीडियो में उनके आउटफिट की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं. उर्फी के इस वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “आज कितनी प्यारी लग रही है लेकिन हुआ क्या है उसको?” इसके अलावा एक दूसरे यूजर ने उर्फी को भारतीय कपड़े पहनने की सलाह देते हुए लिखा, “आज तो उर्फी बहुत अच्छी लग रही है. उर्फी ऐसे ही इंडियन कपड़े पहना करो, अच्छी लगती हो.” एक दूसरे यूजर ने उर्फी जावेद की तारीफों के पुल बांधते हुए लिखा, “जानें कितने दिनों के बाद गली में आज चांद निकला.” एक और यूजर ने उर्फी की तारीफ करते हुए लिखा, “कपड़े इंसान का गहना है बहना.”

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें