BB OTT 2: इमोशनल हुए जद हदीद, जानें क्यों किया शो छोड़ने का किया फैसला

सलमान खान का शो बिग बॉस ओटीटी 2 इन दिनों हिट चल रहा है शो में कभी रोमांटिक ट्रेक देखने को मिल रहा है तो कभी इमोश्नल, इन दिनों कुछ ऐसा हुआ जब जद हदीद इमोश्नल होते हुए दिखाई दिए. दरअसल, जद हदीद बेबिका धुर्वे से परेशान होकर घऱ छोड़ने की बात करने लगे और अपना समान भी पैक कर लिया.

आपको बता दें, कि बिग बॉस में कई बार ऐसा देखने को मिला है कि शो में रहते-रहते वो इतना परेशान हो जाते है कि वो शो छोड़ने की बात करते है ऐसा ही कुछ इन दिनों जद हदीद के साथ हो रहा है उन्हे बेबिका धुर्वे टारगेट करने लगी है उनकी नीजी जिंदगी को लेकर भी वह घर वालो से बात करने लगी है इतना ही नहीं, उन्होने जद हदीद की तलाक की बाते भी घर में की है जिससे परेशान होकर जद हदीद भावुक हो गए और शो छोड़ने का फैसला कर बैठे है. उन्होने अपना समान तक पैक कर लिया है. उन्होंने कहा, “मैं दर्शकों से माफी मांगता हूं. सलमान खान से और बाकी सब से भी माफी मांगता हूं. मैं इस शो को छोड़ना चाहता हूं, क्योंकि यह शो मेरे लिए बिल्कुल नहीं बना है.”

बताते चले कि जद हदीद की ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी खूब वायरल हो रही हैं, जिसमें वह अपना सामान पैक करते दिखाई दिये. बता दें कि जड हदीद और बेबिका धुर्वे की लड़ाई जिया शंकर के कैप्टेंसी टास्क के दौरान हुई थी. उसके बाद से ही बेबिका ने जेड को अपना निशाना बनाया हुआ है. उन्होंने न केवल पूजा भट्ट और सायरस ब्रोचा से जद हदीद के तलाक पर चर्चा की.बल्कि उनके और अभिषेक मलहान के लिए खाना बनाने से भी साफ इंकार कर दिया. यहां तक कि कैप्टन जिया शंकर के टोकने पर भी बेबिका धुर्वे ने एक नहीं सुनी. हालांकि अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बेबिका धुर्वे और जद हदीद की इस बात पर बिग बॉस और सलमान खान क्या फैसला करते हैं.

पति संग गोवा में छुट्टियां बिता रही है भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा, फोटो हुई वायरल

भोजुपरी की टॉप एक्ट्रेस में से एक मोनालिसा इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई है हाल ही में उन्होने कुछ फोटो शेयर की है जो कि सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है मोनालिसा इन तस्वीरों में अपने पति विक्रांत सिंह के साथ नजर आ रही है. जी हां, मोनालिसा की तस्वीरें गोवा की है जहां वह छुट्टियां बिता रही है.

 

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आपको बता दें, कि मोनालिसा समय-समय पर अपनी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर करती रहती है जिनका उनके फैंस को भी बेसब्री से इंतजार रहता है. ऐसे में गोवा में एन्जॉय कर रही मोनालिसा ने कुछ प्यारी सी तस्वीरें साझा की है जो कि अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इसमें वह अपने पति विक्रांत के साथ नजर आ रही है.इन फोटो में मोनालिसा ने प्रिटेंड शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई है.वहीं, उनके पति विक्रांत सिंह ने लोअर और टी-शर्ट पहना हुआ है.उन्होंने हैट भी लगाया है.

 

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मोनालिसा और विक्रांत सिंह की तस्वीरों को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. इसके साथ की फैंस कपल की तस्वीरों पर जमकर कमेंट भी कर रहे हैं. एक तस्वीर में मोनालिसा जहां बैठकर कैमरे की तरफ पोज दे रही हैं. वहीं, विक्रांत सिंह अपनी पत्नी के सामने झुककर कैमरे की तरफ देख रहे हैं.

पानी पीने के सही तरीके, 55 की उम्र में दिखेगा 25 वाला निखार

पानी का रिश्ता खूबसूरती से है कई लोगों को कहते सुना होगा कि पानी पिएं और जवां रहे. बिलकुल सही बात है, पानी आपकी स्किन को ग्लोइंग और शाइनिंग बनाता है. ऐसे में ज़रुरी है कि पानी कितना और कैसे पिया जाएं ये बेहद ही ज़रुरी बात है. क्योकि सही तरीके से पिया गया पानी आपके त्वचा को निखार सकता है आपको 50 की उम्र में 25 वाला लुक दे सकता है इसलिए आज हम आपको पानी पीने के 5 सही तरीके बताएंगे. जिससे आप जवां रहेगी.

  1. खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी पानी नहीं पीना चाहिए. खाने के करीब आधे घंटे बाद ही पानी पिएं. अगर आप खाना खा चुके हैं और कुछ पीना चाहते हैं तो दूध, मट्ठा, दही और शिकंजी पी सकते हैं.
  2. ठंडा पानी पीने से हर किसी को बचना चाहिए. अगर प्यास तेज लगी है और आप चिल्ड वॉटर खोज रहे हैं तो यह गलत है. हमेशा गर्मी के दिनों में मिट्टी के घड़े का पानी पीना ज्यादा बेहतर होता है.
  3. पानी को हमेशा आराम-आराम से पीना चाहिए. यानी की एक झटके में पूरा पानी नहीं पीना चाहिए. घूंट भरकर पीना चाहिए. इससे आपकी स्किन शाइनिंग बनेगी.
  4. सुबह फ्रेश होने के बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीने के बाद ही ब्रेकफास्ट करना चाहिए. या फिर पहली चाय पीनी चाहिए. इससे शरीर में जमा टॉक्सिन्स बाहर आ जाता है.
  5. अक्सर लोग खड़े-खड़े ही पानी पीने लगते हैं, यह तरीका बिल्कुल ठीक नहीं है. इससे बचना चाहिए. ऐसा करना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है. इसलिए कभी भी पानी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए.

प्यार में हुई तकरार, प्राइवेट पार्ट पर वार

29 साला सूर्य भूषण कुमार क्या अब जिंदगी में कभी सैक्स कर पाएगा? इस सवाल का जवाब तो अब उस का इलाज कर रहे डाक्टर कुछ दिन बाद ही दे पाएंगे, क्योंकि उस का प्राइवेट पार्ट तकरीबन 60 फीसदी कट चुका है.

यह सुन कर किसी को भी हैरत के साथ उस से हमदर्दी होना कुदरती बात है, क्योंकि मर्दानगी की निशानी प्राइवेट पार्ट किसी और ने नहीं, बल्कि उम्र में उस से 4 साल छोटी माशूका प्रिया (बदला नाम) ने पूरी बेरहमी से चाकू से काटा था.

आखिर प्रिया ने ऐसा खतरनाक कदम क्यों उठाया और इस से उसे हासिल क्या हुआ? यह समझने के लिए 3 साल पीछे चलना पड़ेगा, जब इन दोनों की लव स्टोरी शुरू हुई थी.

पटना में रह कर पढ़ाई कर रही प्रिया दरभंगा की रहने वाली है. सूर्य कुमार सीतामढ़ी का बाशिंदा है, जिस की तैनाती छत्तीसगढ़ के सुकमा में है. इस नक्सल प्रभावित इलाके में सूर्य कुमार सीआरपीएफ का जवान है. ये दोनों आपस में रिश्तेदार भी हैं. लिहाजा, कभीकभार मेलमुलाकातें होती रहती थीं, लेकिन प्यार कब हो गया, यह दोनों को पूरी तरह उस वक्त पता चला, जब सूर्य कुमार नौकरी पर सुकमा चला गया.

अब यह कहने भर की बात रह गई है कि प्यार में नजदीकियां और रोजरोज या कभी भी मिलना जरूरी है. सूर्य कुमार के सुकमा जाने से इन दोनों के प्यार पर कोई असर नहीं पड़ा, उलटे वह दिनोंदिन बढ़ता ही गया, क्योंकि रोज बात करने के अलावा वीडियो काल भी होते रहे और चैटिंग करने के लिए ह्वाट्सएप है ही, जिस में दोनों घंटों मशगूल रहते थे.

यही इन दोनों के बीच हो रहा था. वादोंइरादों में ही सही जिंदगी मजे में कट रही थी कि एक दिन प्रिया को पता चला कि सूर्य कुमार की शादी उस के घर वालों ने शिवहर की एक लड़की से तय कर दी है और शादी इसी 23 जून को होना तय हुई है, तो वह चोट खाई नागिन की तरह बिफर उठी.

प्रिया किसी भी सूरत में अपने आशिक को किसी दूसरी लड़की का होते नहीं देखना चाहती थी, क्योंकि दोनों शादी का वादा बहुत पहले ही कर चुके थे.

सुहागरात पर काटा प्राइवेट पार्ट

सूर्य कुमार ने लाख सफाई और दुहाई अपने प्यार और वफा की दी, लेकिन प्रिया टस से मस नहीं हुई. उसे अपने प्रेमी की इस बात या दलील से भी कोई मतलब नहीं था कि शिवहर वाली लड़की से शादी उस की मरजी के खिलाफ घर वालों ने तय कर दी है और अब मना किया तो रिश्तेदारी और समाज में काफी बदनामी होगी.

शादी के पहले ही अपना सबकुछ सूर्य कुमार को सौंप चुकी प्रिया खुद को ठगा सा महसूस कर रही थी. उसे अपने आशिक की बुजदिली पर भी गुस्सा आ रहा था. उस ने फोन पर बहुत साफ लहजे में सूर्य कुमार को धौंस सी दी कि तुम पहले पटना आओ, नहीं तो मैं अपनी जान दे दूंगी.

प्रिया जब जिद पर अड़ गई, तो सूर्य कुमार भी पटना आने के लिए राजी हो गया. उस ने सोचा था कि किसी तरह प्रिया को मना लेगा या इस समस्या का कोई दूसरा हल निकाल लेगा.

तयशुदा प्रोग्राम के मुताबिक सूर्य कुमार बीती 3 जून को सुकमा से पटना पहुंचा और गांधी मैदान के पास एक होटल में ठहर गया. वे दोनों होटल में मिले तो फिर वही कलह शुरू हो गई, जिस का आज तक कोई हल नहीं निकला था.

प्रिया ने फिर जिद पकड़ ली कि वादे के मुताबिक मुझ से शादी करो, नहीं तो मैं खुदकुशी कर लूंगी. आगे तुम जानो और तुम्हारा काम जाने.

सूर्य कुमार प्रिया के खतरनाक तेवर देख पहले से ही हलकान था, लिहाजा उसे भलाई इसी बात में लगी कि चुपचाप प्रिया से शादी कर ली जाए, आगे जो होगा देखा जाएगा. दोनों ने 5 जून को पटना सिटी कोर्ट में शादी कर ली और होटल वापस आ गए.

लेकिन शादी के बाद भी वे दोनों टैंशन में थे. सूर्य कुमार यह सोचसोच कर परेशान था कि अब 23 जून को क्या होगा, जब घर वालों और होने वाली ससुराल में प्रिया से उस की शादी की बात आम हो जाएगी? कहीं दोनों पक्षों में घमासान न हो जाए, क्योंकि बात तो दोनों की ही खराब हो रही थी. शादी की तैयारियां भी दोनों घरों में जोरशोर से चल रही थीं और सारी खरीदारी हो चुकी थी.

प्रिया ने अपनी जिद पूरी कर ली थी. अब वह सूर्य कुमार की माशूका नहीं, बल्कि ब्याहता हो गई थी. इस के बाद भी उस के दिल में 23 जून को ले कर खटका था कि कहीं ऐसा न हो कि सूर्य कुमार उस लड़की से भी शादी कर ले. हालांकि, वह यह भी समझ रही थी कि ऐसा होना अब नामुमकिन है. फिर भी वह अपने नएनवेले पति से सौ फीसदी प्यार और वफा की गारंटी चाहती थी.

अब दोनों के पास अपनी टैंशन दूर करने का एक ही तरीका बचा था कि हालफिलहाल तो सबकुछ भूलभाल कर सुहागरात मनाई जाए. रात गहरातेगहराते सूर्य कुमार ने तो पूरे मूड में आते हुए अपने कपड़े भी उतार दिए थे. अब वह केवल बनियान और अंडरवियर में था.

सूर्य कुमार शुरुआत कर पाता, इस के पहले ही प्रिया ने 3 दिनों के अंदर तीसरी जिद यह पकड़ ली कि पहले शिवहर वालों को फोन पर कहो कि तुम ने मुझ से शादी कर ली है.

इस पर झल्लाया सूर्य कुमार नहीं माना तो प्रिया ने तीसरी बार ही उसे खुदकुशी कर लेने की धमकी दे डाली. इस बार उस ने धमकी यह भी दी कि खुद की जान दे दूंगी या फिर तुम्हारी ले लूंगी.

यह धमकी सुनसुन कर आजिज आ चुके सूर्य कुमार ने जब साफतौर पर मना कर दिया और हमबिस्तरी करने की गरज से प्रिया को अपने पास खींचा तो प्रिया ने बिजली की फुरती से अपने साथ लाए बैग में से चाकू निकाला और उस से सूर्य कुमार के प्राइवेट पार्ट को एक झटके में काट डाला.

हड़बड़ाया सूर्य कुमार दर्द से कराहता उसी हालत में कमरे के बाहर निकला और मदद के लिए चिल्लाया तो होटल के मुलाजिम दौड़े आए, लेकिन उस

की तरफ देख कर सकते में आ गए, क्योंकि उस की जांघों के बीच से खून बह रहा था.

ऐसा नजारा जाहिर है उन्होंने जिंदगी में पहली बार देखा था. जैसेतैसे संभलते वे सूर्य कुमार को पीएमसीएच ले गए. खबर मिलने पर पुलिस अस्पताल

पहुंची तो सूर्य कुमार के बयान से सारी कहानी उजागर हुई. प्रिया को पुलिस ने आईपीसी की धारा 326 के तहत गिरफ्तार कर लिया.

सुबह जब बात आम हुई, तो सुनने वाले हैरान रह गए कि सुहागरात पर यह क्या तोहफा पत्नी ने पति को दिया कि उस का प्राइवेट पार्ट ही काट डाला?

प्रिया का गुस्सा और जिद अपनी जगह जायज थे, लेकिन तभी तक जब तक सूर्य कुमार ने उस से शादी नहीं की थी. इस के बाद प्रिया ने गलती नहीं, बल्कि गुनाह ही कर डाला जिस की सजा अदालत से उसे मिलेगी, लेकिन उस ने अपने साथसाथ सूर्य कुमार की भी जिंदगी खराब कर दी है.

ऐसी कुछ अहम घटनाओं पर नजर डालें तो समझ आता है कि माशूका की मंशा आशिक को न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी वाली कहावत की तर्ज पर कहीं न कहीं सबक सिखाने की रहती है. कटे प्राइवेट पार्ट वाला जिंदगीभर कसकता रहेगा और अपने प्यार को कोसते हुए खून के आंसू बहाने पर मजबूर रहेगा. अब ऐसे हिंसक प्यार को किस बिना पर प्यार कहा जाए, यह तय कर पाना और भी मुश्किल काम है.

हादसे ओडिशा के पटना सरीखे ही 2 सनसनीखेज और चर्चित मामले साल 2019 में आदिवासी बाहुल्य राज्य ओडिशा से सामने आए थे. राजधानी भुवनेश्वर से तकरीबन 525 किलोमीटर दूर नवरंगपुर जिले में एक पत्नी को शक था कि उस के पति के किसी और औरत से नाजायज संबंध हैं.

पूछने पर पति सफाई देता था, लेकिन गलत नहीं कहा जाता कि शक का इलाज तो लुकमान हकीम के पास भी नहीं. जनवरी की एक सर्द रात में शक की आग में जलती पत्नी का जब सब्र का बांध टूट गया, तो उस ने गहरी नींद में सोए पति का प्राइवेट पार्ट तेज धारदार हथियार से काट डाला.

पति जब दर्द से बिलबिला कर चिल्लाया, तो पड़ोसी भागेभागे आए और उसे अस्पताल ले गए. पुलिस ने आरोपी औरत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. यह पति तमिलनाडु में मजदूरी करता था और 3 महीने पहले ही नवरंगपुर आया था.इस हादसे के चंद महीनों बाद ही ओडिशा के क्योंझर जिले में एक औरत ने अपने बौयफ्रैंड का प्राइवेट पार्ट काटा था.

इस मामले में भी बौयफ्रैंड गहरी नींद में सोया हुआ था और इत्तिफाक की बात यह है कि वह भी तमिलनाडु में ही काम करता था. औरत शादीशुदा थी, जिस के नाजायज संबंध इस नौजवान से थे, जो चेन्नई से जब भी क्योंझर आता था, अपनी उम्रदराज माशूका से सैक्स सुख लेने पहुंच जाता था.

हादसे की रात दोनों में किसी बात को ले कर खासी कहासुनी हुई थी, जिस से माशूका को इतना गुस्सा आया कि सोते हुए आशिक का प्राइवेट पार्ट काटने के बाद ही शांत हुआ. खुद सरासर पति से बेवफाई कर रही यह औरत अपने आशिक से वफा चाहने की उम्मीद लगाए बैठी थी.

पहले गला काटा, फिर प्राइवेट पार्ट

छत्तीसगढ़ के दुर्ग के अमलेश्वर की रहने वाली संगीता सोनवानी का दर्द यह था कि पति अनंत सोनवानी उसे प्यार नहीं करता था. वह उसे काली और बदसूरत कहते हुए ताने मारता था और कभीकभी घर से निकल जाने को कहता था.

आएदिन की ही तरह पिछले साल 22 सितंबर को भी उस ने संगीता की जम कर ठुकाई की और फिर सो गया. इस बार संगीता का सब्र टूट गया और उस ने गुस्से में दीवार पर टंगी कुल्हाड़ी उठाई और अनंत की हत्या कर दी. इस पर भी भड़ास पूरी नहीं निकली, तो उस ने पति का प्राइवेट पार्ट काट डाला.

पुलिस ने संगीता को गिरफ्तार किया, तो पता चला कि दोनों की ही यह दूसरी शादी है और अनंत को अपनी पहली पत्नी से 12 साल का एक बेटा भी है. संगीता का गुस्सा अनंत के गले से ज्यादा उस के प्राइवेट पार्ट पर ज्यादा उतरा, जिस के उस ने कई टुकड़े कर दिए थे.

इस ने तो चबा ही डाला पति या प्रेमी के प्राइवेट पार्ट पर गुस्सा उतारने का एक अजब किस्सा मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की जौरा तहसील के गांव उम्मेदगढ़ से भी 24 मई, 2023 को सामने आया था. इस मामले में चाकू, कुल्हाड़ी या ब्लेड का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि पति के प्राइवेट पार्ट को पत्नी ने दांतों से ही चबा डाला था.

पीडि़त ने जनसुनवाई में जिला एसपी को अपनी शिकायत में बताया कि उस की बीवी का चालचलन ठीक नहीं है. वह कभी भी अपने दोस्तों को फोन कर के घर बुला लेती है. इस पर टोका तो वह लड़ाईझगड़ा करने लगी और पुलिस में झूठी रिपोर्ट लिखाने की धमकी दी. इतना ही नहीं, उस ने 75 साला बूढ़े ससुर के खिलाफ भी छेड़छाड़ की रिपोर्ट लिखा रखी थी.

घटना के दिन जब उस आदमी ने पत्नी को डांटा, तो मारे गुस्से के वह आपे से बाहर हो गई और गुस्से में ही उस के प्राइवेट पार्ट को दांतों से चबा डाला. पीडि़त जब बेसुध सा हो गया, तो पत्नी ने लातों से भी प्राइवेट पार्ट पर ताबड़तोड़ प्रहार किए. इलाज के लिए उसे ग्वालियर ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उस के प्राइवेट पार्ट के 3 आपरेशन किए.

प्राइवेट पार्ट से बदला क्यों?

ऐसे दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों मामले हैं, जिन में औरत का गुस्सा मर्द के प्राइवेट पार्ट पर उतरा. इस से तो लगता है कि एक औरत की नजर में किसी मर्द के लिए यही सब से बड़ी सजा है कि उस का प्राइवेट पार्ट ही काट डाला जाए, जो मूंछों से पहले भी मर्दानगी की निशानी माना जाता है. तमाम मामलों में बीवियां या माशूकाएं गुस्से और नफरत की सारी हदें पार कर चुकी थीं.

इस के अलावा 90 फीसदी मामलों में पति या आशिक का प्राइवेट पार्ट उस वक्त काटा गया, जब वे नींद में थे. मर्दों का प्राइवेट पार्ट बाहर की तरफ निकला हुआ रहता है और नाजुक भी बहुत होता है, इसलिए उसे आसानी से काटा जा सकता है.

इस तरह के बढ़ते मामले पतियों और प्रेमियों के लिए सिगनल हैं कि प्यार और शादीशुदा जिंदगी में उन्हें संभल कर रहना चाहिए. अगर औरत सैक्स सुख दे सकती है, तो उसे हमेशा के लिए छीन भी सकती है.

औरत से बेवफाई, उस की बेइज्जती और अनदेखी उस के गुस्से के चलते इतनी महंगी भी पड़ सकती है कि आप जिंदगीभर सैक्स सुख के लिए तरसते रह सकते हैं.

मैं जब भी बाहर जाती हूं, तो पराए मर्दों की नजरें मेरे सीने पर टिकी रहती हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 30 साल की एक ब्याहता औरत हूं और एक बेटे की मां भी. पर अपने भारी उभारों से बड़ी परेशान हूं. जब भी घर से बाहर जाती हूंतो पराए मर्दों की नजरें मेरी छाती पर टिकी रहती हैं.

मेरे पति मेरी इस समस्या को हंसी में टाल देते हैं. वे कहते हैं कि सिर्फ देखते ही तो हैंतुम्हें छेड़ते तो नहीं. तुम लोगों पर ज्यादा ध्यान मत दो. पर मुझ से ऐसा हो नहीं पाता है. मैं क्या करूं?

जवाब

आजकल औरतें बड़े और भारी उभारों के लिए तरसती हैं और लाखों रुपए इस पर खर्च भी करती हैंक्योंकि बड़े उभार आकर्षक लगते हैं और मर्दों को भी लुभाते हैं. आप के पति शायद इसलिए आप की समस्या को हंसी में उड़ा देते हैं.

हालांकि बहुत बड़े उभार कभीकभार परेशानी की वजह तो बन जाते हैं. बड़े उभारों को छोटा करने का कोई शर्तिया उपाय या इलाज नहीं हैक्योंकि ये अकसर हार्मोन की गड़बड़ी के चलते बड़े या छोटे होते हैं.

आप खानपान का ध्यान रखें. चरबी बढ़ाने वाला खाना बंद करें. हरी सब्जियां ज्यादा खाएं और ऐक्सरसाइज के लिए किसी फिजियोथैरेपिस्ट से सलाह लें. इस से उभार बहुत तो नहींलेकिन थोड़े तो कम होंगे.

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें.

मोबाइल नंबर : 08826099608

शर्मनाक: जीती जागती लड़की का मृत्युभोज

कल एक ह्वाट्सएप ‘ग्रुप में शोक संदेश का कार्ड आया. शोक संदेश में एक लड़की की मौत होने और उस की ‘पीहर गौरणी’ यानी मृत्युभोज का आयोजन होने का ब्योरा छपा था. शोक संदेश पर लड़की की तसवीर भी छपी थी.

बहुत ही कमउम्र लड़की की मौत के इस शोक संदेश को पढ़ कर दुख हुआ, लेकिन जैसे ही कार्ड के साथ लिखी इबारत को पढ़ा तो मैं हैरान रह गया. आंखें हैरानी से खुली रह गईं, क्योंकि यह मृत्युभोज किसी लड़की की मौत पर नहीं, बल्कि उस के जीतेजी किया जा रहा था.

उस शोक संदेश में लड़की की मौत की तारीख  1 जून, 2023 लिखी थी और मृत्युभोज  का आयोजन 13 जून, 2023 को आयोजित किया जाना लिखा था. यह मृत्युभोज लड़की के दादा, पिता, चाचा, ताऊ और भाई कर रहे थे.

यह मामला केवल हैरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परेशान करने वाला है. इस से पता चलता है कि हमारा समाज आज भी किस मोड़ पर खड़ा है. यह शोक संदेश राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक गांव से आया था.

वहां की 18 साल की एक लड़की ने अपनी पसंद के लड़के से शादी रचा ली थी और उस के इस ‘अपराध’ की सजा उसे जीतेजीते मरा घोषित कर के दी जा रही थी.

इस लड़की की सगाई गांव के ही एक लड़के से हुई थी. किसी वजह से परिवार वालों ने यह सगाई तोड़ दी, लेकिन लड़की ने इसे मंजूर नहीं किया. वह उसी लड़के से शादी करने पर अड़ गई.

परिवार वालों ने हामी नहीं भरी, तो लड़की ने घर से भाग कर उसी लड़के से शादी कर ली.  जब परिवार वालों ने लड़की की गुमशुदगी दर्ज कराई, तो पुलिस ने उसे ढूंढ़ कर बयान लिए. लड़की ने अपनी मरजी से शादी करने की बात कह कर परिवार वालों के साथ जाने से इनकार कर दिया.

लड़की का यह रवैया परिवार वालों को किस कदर नागवार गुजरा होगा, इस बात का अंदाजा शोक संदेश से लगाया जा सकता है. उन्होंने इस के विरोध में वही तरीका अपनाया, जो गांवदेहात में प्रचलित है यानी लड़की को मरा घोषित कर के उस का मृत्युभोज कर देना.

लड़की के परिवार वालों ने इसे अपनी ‘पगड़ी की लाज’ बचाने का कदम बताया है.  जब कोई लड़की भाग कर शादी कर लेती है, तो समाज उस के परिवार वालों को किस कदर शर्मिंदा करता है, यह किसी से छिपा नहीं है.

लड़की के भाग जाने की खबर सार्वजनिक होते ही उस के परिवार वालों पर थूथू की जाने लगती है. इस मामले में भी यही हुआ. जब प्रिया नामक इस लड़की ने अपनी मरजी से शादी रचाई, तो किसी ने इस की खुशी नहीं मनाई.

परिवार वालों पर यह खबर बिजली की तरह गिरी. उन्हें लगा कि वे किसी को चेहरा दिखाने लायक नहीं रहे. गांव के पंचपटेलों ने भी जलती आग  में घी का काम किया.

इस का नतीजा जीतीजागती लड़की के शोक संदेश के रूप में सामने आया. यह अपनी तरह का कोई पहला मामला नहीं है. लड़की के अपनी मरजी से शादी कर लेने पर गांवदेहात में ऐसी बातें अकसर सुनने को मिलती रहती हैं.

पहले ऐसी बातें अखबारों की सुर्खियां नहीं बनती थीं, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में अब ऐसी बातें फौरन घरघर तक पहुंच जाती हैं. 2-3 साल पहले मध्य प्रदेश में मंदसौर के पास एक गांव की 19 साल की शारदा ने अपनी पसंद के लड़के से शादी की, तो उस के परिवार वालों ने भी वैसा ही कुछ किया था, जो अब प्रिया के परिवार वालों ने करने की सोची.

सवाल उठता है कि आखिर ऐसा कर के किसी को मिलेगा क्या? दरअसल, भाग कर शादी करने वाली लड़कियों के परिवार वाले उन के जीतेजी मृत्युभोज कर के अपनी नाक ‘ऊंची’ फिर से करना चाहते हैं.  उन्हें लगता है कि जब वे अपनी लड़की को मरा मान लेंगे, तो समाज उन्हें कुसूरवार नहीं ठहराएगा, बल्कि उन की गिनती उन ‘बेचारों’ में होगी, जिन की परवाह उस औलाद ने भी  नहीं की, जिसे उन्होंने पालापोसा और पढ़ायालिखाया.

21वीं सदी में पहुंचने के बावजूद भी समाज की असली तसवीर यही है. इस का सुबूत हैं वे बातें, जो भीलवाड़ा की प्रिया के मृत्युभोज का कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल होने पर सामने आईं.  ऐसे लोगों की तादाद कम नहीं है, जो जीतीजागती लड़की का मृत्युभोज करने को सही ठहरा रहे हैं.

इसे अच्छी पहल बताया जा रहा है. समाज में हम अकसर लोगों को नारी सशक्तीकरण की बातें करते सुनते हैं, लेकिन जब कोई लड़की अपनी मरजी  से शादी कर लेती है, तो उसे कुलटा, कलंकिनी, कुलबैरन, खानदान की नाक कटाने वाली और न जाने क्याक्या कहा जाने लगता है.

कई बार तो मनमरजी से शादी करने का बदला लड़की की हत्या कर के लिया जाता है. समझ नहीं आता कि लड़की के अपनी मरजी से शादी करने पर ही कुल की नाक नीची क्यों होती है? कोई लड़का अगर पसंद की लड़की से शादी कर ले, तो ऐसा हंगामा क्यों नहीं बरपता? इस से भी बड़ा सवाल यह है कि क्या एक बालिग लड़की को अपनी पसंद से शादी करने का भी हक नहीं है?

ऊंची जाति के लोग गरीबों को मानते है गटर

दलितों, गरीबों, पिछड़ों को ऊंची जातियों के लोग किस तरह से गटर की और गंदे नाले की तरह का मानते हैं, यह एक बहुत ही बेचैन करने वाले वीडियो से समाने आया, मध्यप्रदेश के भारतीय जनता पार्टी केदारनाथ शुक्ला के एक वर्कर परवेश पर आरोप है कि उस ने खुलेआम चुपचाप बैठे एक आदिवासी लडक़े…..करा और उस दौरान आराम से सिगरेट के कश लगाता रहा. यह किस ने वीडियो में कैच कर के जगजाहिर कर दिया, वह असल में सिटिजन जर्नलस्टि अवार्ड का हकदार है क्योंकि आमतौर पर ऊंची जातियों के लोग अक्सर पिछड़ों, दलितों और गरीबों पर ही नहीं, अपनी ही जाति की औरतों को  बेइज्जत करने के लिए करते रहते हैं पर कोई रिकार्ड नहीं रहता.

यह तो नहीं कहा जा सकता कि पार्टी की नीति ऐसी है कि खुलेआम आदिवासियों के इस कदर बेइज्जत किया जाए पर यह पक्का है कि जो सनातन धर्म का नाम ले कर पौराणिक कहानियों में भरोसा ही नहीं करते, कुछ ऐसा सा करने वालों की पूछा करते है और आज सरकारें उन्हें पैसा और सुविधाएं दोनों दे रही हैं.

हमारे धर्म ग्रंथ ऐसी कहानियों से भरे हैं जिस में तरहतरह के श्राप औरतों और नीची जातियों के लोगों को दिए जाते हैं या उन्हें नीचा दिखाने के लिए पाप योनि का हकदार धर्मग्रंथों के हिसाब से माना जाता है, जो पिछड़े और दलित है वे मानते हैं कि उन्होंने पिछले जन्मों में कुछ पाप किए होंगे इसलिए वे इस जन्म में बूढ़े से भी गएबीते हैं. 75 साल के संविधान और 200 साल की पढ़ाई और साइंस की जानकारी भी देश की बड़ी जनता को इस दलदल से निकाल नहीं पाई.

ङ्क्षहदी फिल्म ‘श्री इडियट’ में रैङ्क्षगग के दौरान एक लडक़े का दूसरे नए लडक़े के कमरे के दरवाजे पर भूलना भी इसी सोच का नतीजा है. पुलिस थानों में नीची जातियों के अपराधियों पर अक्सर इस तरह पेशाब करने के किस से छपते रहते हैं.

जो समाज गौमूत्र की पावन मानता हो, उस के मन में कहीं बैठ जाता है कि वह नीची जाति के जने पर पेशाब कर के बड़ा गलत काम नहीं कर रहा. पिछड़ी और निचली जातियों के लोगों को अपने घरों की दीवारों पर पेशाब करना पड़ता है क्योंकि और जगह नहीं होतीं. समाज ने पेशाब को इस तरह का ढांचा बनाया है कि कुछ आदमी जानवरों की तरह अपने ही मलमूत्र में पड़े रहने के आदी हो जाएं.

एक नई, चुनी हुई, साइंस के गुणगान करने वाली, अपने को विश्वगुप्त बनाने वाली सरकार के मुंह पर ही मध्य प्रदेश के सघि जिले का यह वीडियो एक तमाचा है पर जिस बेफ्रिकी से वह भक्त पेशाब करता है, साबित करता है कि एक ताकतवर कौम किस तरह देश के गरीबों की बेइज्जती करना अपना पैदाइशी हक समझती है.

एक मनुवादी ने मोदी के किएधरे पर पेशाब फेरा

यह सब अचानक नहीं हुआ है और न ही प्रवेश शुक्ला नाम का ब्राह्मण नौजवान सिर्फ शराब के नशे में था, बल्कि उस के दिलोदिमाग पर तो सनातन धर्म, धर्मग्रंथों और हिंदू राष्ट्र का नशा ज्यादा था, जिसे बेइंतिहा नफरत की शक्ल में एक वीडियो के जरीए अब दुनिया देख रही है. इस पर भी हैरत की बात यह है कि इस घटिया हरकत पर एतराज भी एक सियासी रस्म के तौर पर जताया जा रहा है मानो विश्वगुरु बनने का रास्ता दलितों, आदिवासियों, औरतों और मुसलमानों से नफरत करने और उन्हें सताते रहने के ‘धर्म टोल’ से हो कर ही जाता है.

मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले सीधी के वायरल हुए इस वीडियो में एक नौजवान दूसरे नौजवान के चेहरे पर पेशाब करता नजर आ रहा है. कुबरी गांव के रहने वाले इस ब्राह्मण नौजवान का नाम प्रवेश शुक्ला है, जो पेशाब करते समय एक हाथ कमर पर रखे हुए है और दूसरे हाथ से बड़ी बेफिक्री से सिगरेट भी फूंक रहा है.

पीड़ित नौजवान कोई खिलाफत नहीं कर पा रहा है. हालांकि वह प्रवेश शुक्ला की पेशाब को चरणामृत की तरह भी नहीं ले रहा है, इसलिए उसे मानसिक रूप से विक्षिप्त यानी पागल भी कहा जा रहा है.

इस वीडियो पर बवाल मचना कुदरती बात थी, क्योंकि इस तरह की हैवानियत वाली हरकत अब कम देखने में आती है, नहीं तो दबंग सवर्ण अभी भी पुराने तरीकों से ही नीची जाति वालों को सताने में ज्यादा भरोसा करते हैं, क्योंकि उन में पकड़े जाने, जुर्म साबित होने और कानूनन सजा होने का जोखिम कम रहता है. इस के बाद भी कोई दिन ऐसा नहीं जाता, जिस में वंचित समाज को सताने की 2-4 खबरें न आती हों.

सीधी के वीडियो को सभ्य समाज पर कलंक और भोलेभाले आदिवासियों की बेइज्जती बताने और मानने वालों को इस कट्टर और घटिया सोच की वजह या जड़ पहले समझ लेनी चाहिए कि वह दरअसल ‘रामचरितमानस’ है, जो बिना किसी लिहाज या लागलपेट के छोटी जाति वालों से नफरत करने का संदेश देती है. प्रवेश शुक्ला जैसे कई नौजवान तो उसे अमल में लाते हैं, परवाह उन्हें भी समाज, संविधान या कानून की नहीं रहती.

कौन हैं कोल आदिवासी

पीड़ित नौजवान कोल आदिवासी समुदाय का है. इस जाति के आदिवासी आमतौर पर भूमिहीन हैं और लोहे को गलाने और उस का सामान बनाने का काम करते रहे हैं. कुछ लोग बांस के आइटम भी बनाने लगे हैं.

विंध्य इलाके के रीवा जिले का बरदीजादा इलाका इन का उत्पत्ति या मूल स्थान माना जाता है. यहां से होते ये लोग झारखंड और ओडिशा तक फैल गए हैं.

झारखंड में संथाली और मध्य प्रदेश में कोली भाषा बोलने वाले इस मेहनती समुदाय की माली हालत कभी ठीक नहीं रही. खाली समय में ये मजदूरी करने विदेश यानी बड़े शहरों की तरफ पलायन कर जाते हैं. झारखंड के गिरिडीह और देवधर के अलावा दुमका जिले में इन की आबादी सब से ज्यादा है.

इन लोगों के हिंदुओं से अलग रीतिरिवाज और खुद के अपने देवीदेवता हैं. ये देवीदेवता हैं काली माता और सिंगबोगा. अब कुछ पढ़ेलिखे कोल हिंदू मंदिरों में भी जाने लगे हैं, क्योंकि इन के पास चढ़ाने को पैसा होता है, इसलिए इन्हें यह सहूलियत पंडेपुजारियों ने दे रखी है.

कोल समुदाय के 12 गोत्र होते हैं, जिन में मुर्मू के अलावा सोरेन, मरांडी, किस्कू खास हैं. धर्मग्रंथों में भी इन का जिक्र मिलता है, लेकिन किस अंदाज और हैसियत से, इसे इस दोहे से समझिए, जिस से प्रवेश शुक्ला ने समझा और ज्यादातर सवर्ण भी इस तरीके से ही समझते हैं.

तुलसीदास द्वारा लिखी गई ‘रामचरितमानस’ के ‘उत्तरकांड’ के दोहा संख्या 99 (3) में कहा गया है :

‘जे बरनाधम तेलि कुम्हारा. स्वपच किरात कोल कलवारा.’

मतलब तेली, कुम्हार, चांडाल, भील और कोल, कलवार आदि बेहद नीच वर्ण के लोग हैं.

गरमाई सियासत

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं. ऐसे में भाजपा को प्रवेश शुक्ला की इस मनुवादी हरकत से तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि वह उस के विधायक केदार शुक्ला का प्रतिनिधि रहा है. हालांकि केदार शुक्ला सरासर झूठ बोलते हुए इस बात को नकारते रहे, लेकिन जल्द ही उन का आरोपी को दिया नियुक्तिपत्र भी वायरल हो गया. यह भी सामने आया कि वह भाजपा का पदाधिकारी भी है.

जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ सहित दूसरे छोटेबड़े कांग्रेसियों ने इस पर हल्ला मचाया, तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रवेश शुक्ला के खिलाफ एनएसए यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए. गिरफ्तारी के बाद थाने जाते समय भी प्रवेश शुक्ला के चेहरे और चालढाल की ठसक देखने के काबिल थी मानो उस ने इनसानियत को शर्मसार करने वाला गुनाह नहीं, बल्कि ‘रामचरितमानस’ में लिखे मुताबिक पीड़ित को नीच वर्ण का साबित कर दिया है. इस बाबत तो उसे सजा के बजाय इनाम मिलना चाहिए, क्योंकि भगवा गैंग के हिंदू राष्ट्र में होना यही है.

मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में भाजपा की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस ने पूरा जोर 30 फीसदी आदिवासी वोटों को लुभाने में लगा रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद मोदी 1 जुलाई, 2023 को शहडोल के आदिवासियों के बीच खाट लगा कर बैठे हुए आदिवासियों की बदहाली के बाबत कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कोस रहे थे. और तो और उन्होंने आदिवासी इलाकों की जानलेवा बीमारी सिकल सैल एनीमिया का जिम्मेदार भी कांग्रेस को ठहरा दिया, जबकि डेढ़ साल का अरसा छोड़ दें, तो पिछले 20 साल से भाजपा सत्ता में है और उस ने आदिवासियों और सिकल सैल एनीमिया के लिए क्या किया, यह सवाल अब इस पेशाब कांड के बाद पूछना बेमानी है.

यह हुआ भाजपा राज में भाजपा राज में दलित, आदिवासियों पर जोरजुल्म के मामले लगातार बढ़े हैं, जिस से अदिवासी समुदाय उस से खफा है. इस ताजा मामले ने तो उस आग में घी डालने का ही काम किया है.

छिंदवाड़ा के एक भाजपा कार्यकर्ता का नाम न छापने की शर्त पर कहना है कि सीधी पेशाब कांड ने मोदी और शिवराज के किएधरे पर पेशाब फेर दिया है. अब हम आदिवासियों से क्या खा कर और किस मुंह से वोट मांगेंगे? क्या यह कह कर कि आओ हमें वोट दो, हम तुम्हें पेशाब देंगे?

यह हकीकत राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़े भी बयां करते हैं कि साल 2018 में दलित, आदिवासियों के साथ हुई प्रताड़ना के 4,753 मामले दर्ज किए गए थे, जिन की तादाद साल 2019 में 5,300 हो गई थी और फिर साल 2021 में ऐसे दर्ज मामलों की तादाद 6,899 हो गई थी. इस तरह दलितआदिवासी समाज को सताने के मामले में मध्य प्रदेश टौप पर बना हुआ है.

हिंदुत्व है वजह

उम्मीद है कि मध्य प्रदेश में यह जगह शायद ही कोई दूसरा प्रदेश छीन पाएगा, क्योंकि यहां खासतौर से आदिवासियों पर जोरजुल्म करने की छूट और लाइसैंस मिले हुए हैं. ज्यादातर मामलों में हिंदूवादी ही आरोपी पाए गए हैं. सिवनी जिले के गांव सिमरिया की मौब लिंचिंग इस की बड़ी मिसाल है. इस कांड में बजरंगियों ने गौमांस की तस्करी के शक में 2 आदिवासियों संपत्त बट्टी और धानशाह को लाठियों से पीटपीट कर मार डाला था.

दरअसल, यह लड़ाई आदिवासियों के हिंदू होने और न होने की है. हिंदूवादी आदिवासियों में इतनी दहशत फैला देना चाहते हैं कि वे खुद को हिंदू धर्म का मानते हुए पूजापाठ और दानदक्षिणा करने के अलावा उन की गुलामी भी करें. लेकिन आदिवासी समुदाय उन की ज्यादतियों के सामने झुक नहीं रहा है.

जय आदिवासी युवा संगठन यानी जयस के मुखिया डाक्टर हीरालाल अलावा ने बताया, “हम ने आदिवासी समुदाय की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस घटिया कांड पर दखल देने की मांग की है. रही बात हम आदिवासियों पर अत्याचार की तो हमारी खामोशी अब वोटिंग के दिन टूटेगी, जिसे आप नतीजे के दिन सुनेंगे कि भाजपा मध्य प्रदेश में कर्नाटक की तरह 65 सीटों पर सिमट गई.

पैर धोने का पाखंड

हल्ला और आदिवासी समुदाय का बढ़ता गुस्सा देख कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपनी कुरसी खिसकती लगी तो वे इतना घबरा गए कि उन्होंने 6 जुलाई, 2023 की सुबहसुबह पीड़ित दशमत रावत को भोपाल सीएम हाउस बुला कर उस के पैर धोए. उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए दशमत को फूलमाला पहनाई, उस की आरती उतारी और उसे गणेश की एक तसवीर भी तोहफे में दी. सीएम हाउस का माहौल बड़ा ही पौराणिक और घर वापसी सरीखा था.

इस थूक कर चाटने से न तो दशमत के साथ हुई ज्यादती की भरपाई होनी है और न ही आदिवासियों को समाज में इस से कोई इज्जत मिलने वाली है. मुख्यमंत्री के एक आदिवासी के पूजापाठ और आरती से तुलसीदास का लिखा मिट नहीं जाना है, बल्कि यह और गहरा सकता है. कहने का मतलब यह नहीं है कि पेशाब का बदला पेशाब ही होना चाहिए, लेकिन दिखावे के इस पछ्तावे का मतलब हर कोई खूब समझ रहा है कि यह एक सियासी और धार्मिक पाखंड ही है.

Bigg Boss Ott 2: ये कंटेस्टेंट हो सकते है घर से बाहर, वोटिंग में मनीषा रानी ने मारी बाजी

इन दिनों बिग बॉस ओटीटी2 का खुमार सभी दर्शकों के सर चढ़ कर बोल रहा है. दर्शकों को शो बेहद पसंद आ रहा है शो में हर दिन कुछ नया एंटरटेनमेंट मिल रहा है जिस वजह से शो हिट चल रहा है ऐसे में शो में एविकशन वीक चल रहा है शो से घर से बेघर होने के लिए कुछ कंटेस्टेंट तैयार है लेकिन ऐसे में मनीषा रानी ने वोट बैंक लेने में बाजी मारी है. जी हां, मनीषा रानी को भर-भर के वोट मिले है जिसे वह बेघर होने से बच गई है.

1. मनीषा रानी

 

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आपको बता दें, कि मनीषा रानी इस बार वोटिंग ट्रेंड में सबसे आगे चल रही हैं. उन्हें देखकर कहा जा सकता है कि दर्शकों को उनका अंदाज पसंद आ रहा है. ऐसे में वह इस सप्ताह बेघर होने से बच सकती हैं.

2. पूजा भट्ट

 

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पूजा भट्ट ने भी वोटिंग ट्रेंड में बढ़त हासिल करते हुए दूसरे नंबर पर जगह बनाई है. बता दें कि पूजा का बेबाक अंदाज दर्शकों को भा रहा है. ऐसे में वह भी इस हफ्ते बेघर होने से बच सकती हैं.

3. अविनाश सचदेव

अविनाश सचदेव को शुरुआत में भले ही दर्शकों ने खास पसंद न किया हो. लेकिन वोटिंग ट्रेंड को देखकर कह सकते हैं कि अब वह भी दर्शकों के दिल में जगह बनाने लगे हैं. वह इस हफ्ते तीसरे नंबर पर दिखे.

4. जेद हदीद

 

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जेद हदीद इन दिनों काफी सुर्खियों में बने हैं. खासकर ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में आकांक्षा पुरी को किस करने के बाद से ही जेड निशाने पर हैं. वहीं वोटिंग ट्रेंड की बात करें तो इस हफ्ते वह चौथे नंबर पर दिखे.

5. बेबिका धुर्वे

 

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बेबिका धुर्वे ने इस सप्ताह वोटिंग ट्रेंड में पांचवा स्थान हासिल किया है. बेबिका अपने अंदाज के लिए काफी मशहूर हैं, हालांकि कभी-कभी वह इसके कारण ट्रोल भी हो जाती हैं.

6. सायरस ब्रोचा

 

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सायरस ब्रोचा पर इस बार ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है. सायरस वोटिंग ट्रेंड में छठे नंबर पर दिखाई दिये, जिससे कहा जा सकता है कि दर्शकों को उनका अंदाज ज्यादा नहीं जम रहा.

7. फलक नाज

 

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‘बिग बॉस ओटीटी 2’ के वोटिंग ट्रेंड में फलक नाज इस सप्ताह सातवें नंबर पर रहीं. सायरस के साथ-साथ इस बार ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ से उनके निकलने की भी आशंका है.

8. अकांक्षा पुरी

बता दें कि ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ से पिछले हफ्ते आकांक्षा पुरी का पत्ता कटा था. एक्ट्रेस जेड हदीद को शो में किस करने के लिए काफी निशाने पर बनी हुई हैं.

9. पलक पुर्सवानी

 

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आकांक्षा पुरी से पहले पलक पुर्सवानी को ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ से हाथ खींचना पड़ा था. सबसे कम वोट मिलने के कारण पलक पुर्सवानी भी ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ से बाहर हो चुकी हैं.

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