साउथ के हीरों पवन कल्याण की टूटेगी तीसरी शादी? खबर हो रही है वायरल

साउथ के सुपरस्टार पवन कल्याण इन दिनों मुश्किल में नजर आ रहे है सोशल मीडिया पर उनकी तिसरी शादी के टूटने की कबर जोरो-शोरो से वायरल हो रही है ऐसा भी देखा गया है कि एन्ना कई फैमली फंक्शन में नजर नही आई है. उनेह हर पार्टी में मिसिंग देखा गया है जिससे कयास लगाए जा रहे है कि पवन की तीसरी वाइफ उनसे तलाक लेने वाली है.

 

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आपको बता दें, कि पवन कल्याण की तीसरी वाइफ एन्ना इन दिनों अपने बच्चों को लेकर विदेश में रह रही है. इसी बीच दोनों के अलग होने की खबरें वायरल हो रही है हालांकि इस पर पवन कल्याण का कोई रिएक्शन अभी तक  नहीं आया है लेकिन जल्द ही वो तलाक की खबर को पब्लिक कर देंगे. गैरतलब है कि एन्ना पिछले कई फंक्शन में मिसिंग रही है. एन्ना राम चरण और उपासना की बेटी की सेरेमनी में भी नजर नहीं आई थी.

 

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बता दें, पवन कल्याण की पहली शादी सन् 1997 में नंदिनी के साथ हुई थी. इसके बाद 2008 में दोनों अलग हो गए थे. इसके बाद सन् 2009 में पवन कल्याण ने रेनू देसाई के साथ दूसरी शादी रचाई थी. ये शादी भी ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिकी और सन् 2012 में दोनों अलग हो गए थे. फिर साल 2013 में पवन रुस की खूबसूरत मॉडल एन्ना से मिले. जिसके बाद उनकी शादी एन्ना से हो गई. अब सोशल मीडिया पर पवन की तीसरी शादी के टूटने की खबर वायरल हो रही है. फैंस को इस मामले में पवन कल्याण के रिएक्शन का इंतजार है.

घर पर ऐसे तैयार करे बालों का तेल, बाल होंगे लंबे और मोटे

हर लड़की चाहती है कि उसके लंबे और घने बाल हो, जिसकी खूबसूरती बढ़ाने के लिए ना जाने कितने तरीके आजमा लेती है तो आज हम भी कुछ ऐसे ही तरीके के बारे में बातएंगे जिससे आपके बाल लंबे और मोटे हो जाएंगे. इस तेल को आप आसानी से घर पर तैयार कर सकते है बस लेनी होगी कुछ चीजे. इतना ही नहीं, अगर आपके बाल ज्यादा झड़ते है तो उसका भी घरेलू उपाय इस आर्टिकल में बताएंगे. जिससे आप घर पर यूज करके बालों का झड़ना रोक सकेंगे.

लंबे बालों के लिए तेल बनाने का तरीका है. इस तेल को बनाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं करना है बल्कि एक पैन में नारियल का तेल (Coconut Oil) लेकर गर्म करना है. इस तेल में कटे हुए प्याज के कुछ टुकड़े डालें और साथ ही डालें ताजा एलोवेरा. ताजा एलोवेरा के पत्ते तोड़कर इसे छिलका समेत ही काटकर पैन में डालें. अब इस प्याज और एलोवेरा को नारियल तेल में अच्छे से पकाएं. जब यह दोनों पककर लाल हो जाएं तो इन्हें छान लें. तेल छानने के लिए एक कटोरी के ऊपर छन्नी रखें. इसमें प्याज और एलोवेरा के तेल वाला मिश्रण डालें. अब चम्मच से इन्हें दबाएं जिससे तेल कटोरी में निकल आए. बस तैयार है आपका तेल.

अगर आप बालों के झड़ने से परेशान है तो यही नारियल तेल आपके लिए अच्छा साबित होगा. नारियल के तेल को बालों में लगाने के और भी कई तरीके बताए जाते हैं. अगर आप बाल झड़ने से परेशान हैं तो नारियल के तेल में करी पत्ते डालकर पका सकते हैं. करी पत्ते (Curry Leaves) जब पककर काले हो जाएं तो तेल को आंच से हटाएं. तेल छानकर अलग रखें और नहाने से एक से डेढ़ घंटे पहले सिर की मालिश में इस्तेमाल करें.

पीछा करता डर : पीठ में छुरा भाग-5

युवती ने एक ही बार में गिलास खाली कर दिया. पीने के बाद तीनों ने साथसाथ खाना खाया. खाना खातेखाते तीनों ही नशे में डूब चुके थे. खाना खाने के बाद भानु नंदन की ओर देख कर उठते हुए बोला, ‘‘थैंक्यू फौर ड्रिंक्स एंड डिनर. अब चलता हूं.’’

‘‘फोटो तो डिलीट कर दो. तुम ने वादा किया था.’’ नंदन माथुर ने कहा, तो भानु कोट की जेब में डाथ डालते हुए बोला, ‘‘हां, वादा तो किया था. वादा निभाने में भी मुझे कोई एतराज नहीं है.’’ भानु जेब से मोबाइल निकाल कर नंदन की ओर बढ़ाते हुए बोला, ‘‘लो, ये लो मोबाइल ही रख लो. तुम कोई गैर थोड़े ही हो. सुबह ले लूंगा.’’

नंदन ने मोबाइल लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो भानु ने हाथ पीछे खींच लिया. वह युवती की ओर देख कर बोला, ‘‘दोस्त, मुझे फोटोग्राफी का बड़ा शौक है. अब एक क्लाइमेक्स सीन और बनाना है. उस के बाद मोबाइल तुम्हें दे दूंगा.’’

‘‘कौन सा सीन?’’

‘‘तुम दोनों एक बार गले लग जाओ.’’

‘‘ब्लैकमेल करना चाहते हो हमें’’ नंदन माथुर ने कहा, तो भानु बोला, ‘‘ब्लैकमेल ही करना होता तो इस सब की जरूरत नहीं थी. काफी सबूत जुटा लिए मैं ने नंदन माथुर को नंगा करने के लिए. तुम लोग हकीकत में एंजौय कर रहे हो और मैं केवल उस की एक झलक देखना चाहता हूं. चलो दोस्त, दोनों आलिंगनबद्ध हो जाओ. उस के बाद मैं इस कमरे की घुटन में एक पल भी नहीं रूकूंगा.’’

नंदन माथुर और युवती नशे में थे और भानु को किसी तरह टालना चाहते थे. अत: उसे खुश करने के लिए एकदूसरे की बाहों में सिमट गए. जब वे दोनों एकदूसरे की बांहों में सिमटे थे, तभी भानु ने तड़ातड़़ उन के 2-3 शौट खींच लिए.

फोटो खींचने के बाद भानु ने मोबाइल जेब में डाला और हाथ हिला कर दरवाजे की ओर बढ़ते हुए बोला, ‘‘गुड नाइट फ्रैंडस, सुबह चाय पर मुलाकात होगी.’’

‘‘भानु,’’ नंदन गुस्से में चीखे, ‘‘ये क्या बद्तमीजी है. तुम ने फोटो डिलीट करने की बात की थी. हम ने तुम्हारी हर बात मानी, अब मोबाइल दो मुझे.’’

भानु ने पीछे मुड कर नंदन की ओर देखा और मुस्कराते हुए व्यंग्य में बोला, ‘‘पता नहीं इतना बड़ा बिजनैस कैसे चलाते हो! अक्ल तो खाक की भी नहीं है तुम्हारे अंदर. जरा सोचो, जिस कैमरे में इतनी कीमती फोटो हों, उसे मैं तुम्हें मुफ्त में क्यों दूंगा.’’

‘‘ये बात पहले ही तय हो चुकी थी. तुम ने खुद ही वादा किया था.’’

भानु वापस लौट कर नंदन के पास आया और उस के कंधे पर हाथ रख कर बोला, ‘‘दोस्त, यह मामला रुपएपैसे या बिजनैस का नहीं है. ऐसे धंधों में वादा खिलाफी आम बात है. बड़ी सीधी सी बात है, इस हाथ लो, इस हाथ दो. मेरा खयाल रखोगे तो मैं मोबाइल तुम्हारे हाथ में थमा दूंगा.’’

‘‘और क्या चाहिए तुम्हें?’’ नंदन ने गुस्से में पूछा, तो भानु युवती की ओर देख कर मुस्कराते हुए बोला, ‘‘ये…क्या नाम है इस का? ओह, आईसी, जान का जंजाल. आज की रात तुम्हारी जान के जंजाल को अपनी जान का जंजाल बनाना चाहता हूं. बोलो, हां या न?’’

‘‘भानु.’’ नंदन गुस्से में चीखे तो भानु सहज स्वर में बोला, ‘‘गुस्सा सेहत के लिए हानिकारक तो होता ही है नंदन! कभीकभी इज्जत के लिए भी दुखदाई बन जाता है. ठंडे दिमाग से सोचो, इस मोबाइल में तुम्हारी और इस लड़की की जिंदगी की हकीकत कैद है. अगर तुम ने मेरी बात मान ली तो यह हकीकत यहीं दफन हो जाएगी और नहीं मानी तो यही हकीकत सजधज कर मेरठ की सड़कों पर भरतनाट्यम करेगी.’’

‘‘यह ठीक नहीं है भानु.’’ नंदन माथुर हथियार डालते हुए परेशान हो कर बोले, ‘‘किसी की इज्जत से इस तरह खेलना ठीक नहीं है.’’

‘‘मैं इज्जत से कहां खेल रहा हूं. मैं तो सिर्फ अपना हक मांग रहा हूं.’’ भानु युवती की ओर देख कर बोला, ‘‘बंद कमरे में तुम एक जवान लड़की के साथ ऐश कर सकते हो, तो क्या मैं नहीं कर सकता? मैं तो उम्र में भी तुम से साल 2 साल छोटा ही हूं.’’

‘‘ये लड़की कालगर्ल नहीं है भानु. मेरी…’’

‘‘तुम्हारी प्रेमिका है,’’ भानु नंदन का वाक्य पूरा करते हुए व्यंग्य से बोला, ‘‘दो बच्चों के बाप और चालीस साला आदमी की चौबीस साला कोई प्रेमिका भी हो सकती है, यह आज पहली बार पता चला. यह भी आज पहली बार जाना कि कोई शादीशुदा लड़की अधेड़ उम्र के अपने प्रेमी के लिए मायके जाने के नाम पर पति को धोखा दे कर ऐश करने के लिए मेरठ से दिल्ली आ सकती है.’’

पलभर रूक कर भानु युवती की बगल में खड़ा होते हुए बोला, ‘‘जो लड़की मानमर्यादा और पति को छोड अपने से डेढ़ गुनी उम्र वाले मर्द की बांहों में सिमट सकती है, वह कालगर्ल से कम नहीं होती.

तुम्हें क्या फर्क पड़ता है, जैसा तुम्हारा पति, वैसा ही नंदन और वैसा ही मैं. इज्जत का जरा भी खयाल है तो हां कर दो.’’

नंदन समझ चुके थे कि बाजी भानु के हाथों में है. अपनी इज्जत बचाने के लिए उन्हें मोबाइल हासिल करना जरूरी लगा. सोच विचार कर उन्होंने लड़की से बात की. युवती भी जान चुकी थी कि इज्जत बचाने का एक ही विकल्प है कि वह भानु के साथ जाए. उस ने हां कर दी, तो नंदन भानु से बोले, ‘‘मोबाइल दो, सुजाता तुम्हारे कमरे में जा रही है.’’

भानु ने इस बार कोइ नानुकुर नहीं की. सुजाता का हाथ थामते हुए उस ने जेब से मोबाइल निकाल कर नंदन की ओर बढ़ा दिया. जातेजाते वह नंदन की ओर देख कर बोला, ‘‘दोस्त बुरा मत मानना. इस पर दिल आ गया था, इसलिए इतना प्रपंच करना पड़ा. 2 घंटे बाद इसे वापस भेज दूंगा. सोना नहीं, इंतजार करना.’’

भानु सुजाता के साथ कमरे से बाहर निकल गया. नंदन मोबाइल हाथ में थामे खड़े रह गए. मोबाइल गौर से देखा तो याद आया, भानु पिछले महीने विदेशी टुअर से लौटा था तो एक जैसे 2 मोबाइल ले कर आया था, एक अपने लिए, एक उन के लिए. लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया था. देखा, उस मोबाइल में उन का और सुजाता का कोई फोटो नहीं था. इस का मतलब भानु ने उन्हें दूसरा मोबाइल थमा दिया था.

हालांकि भानु ने कमरा नंबर बताया था. पर उन्हें भरोसा नहीं था कि उस ने सच बोला होगा. रात में तमाशा करना उन्हें वैसे भी ठीक नहीं लगा. वह बेड पर जा लेटे, लेकिन नशे के बावजूद वह सो नहीं सके. 2 घंटे बाद जब सुजाता वापस लौटी, तो वह जाग रहे थे. सुजाता नशे में भी थी और थकी हुई भी वह आते ही सो गई, लेकिन नंदन माथुर रातभर नहीं सो सके.

सुबह 7 बजे जब डोर बेल बजी तब भी नंदन जाग रहे थे. उन्होंने दरवाजा खोला, तो भानु को सामने खड़े पाया. वह कुछ कहते इस से पहले ही भानु बोला, ‘‘मैं जा रहा हूं. मेरा मोबाइल लौटा दो.’’

‘‘मैं ने तोड़ कर डस्टबिन में डाल दिया तुम्हारा मोबाइल. कहो तो ला दूं.’’ नंदन ने गुस्से में कहा, तो भानु ने मुस्कराते हुए जेब में हाथ डाल कर वैसा ही मोबाइल निकाल कर दिखाते हुए कहा, ‘‘कोई बात नहीं दोस्त, वो तुम्हारा ही था. मेरा मोबाइल तो मेरे पास है और उस में फोटो और रिकौर्डिंग दोनों हैं.’’

भानु अपनी बात कह कर आगे बढ़ गया नंदन मूक खड़े उसे जाते देखते रह गए.

अगले दिन शाम को भानु ने नंदन को पीनेपिलाने के लिए अपनी कंपनी में बुलाया तो वह डर की वजह से इनकार नहीं कर सके. दोनों आमनेसामने बैठे. हमेशा की तरह बातचीत कुछ नहीं.

एकएक पैग पीने के बाद भानु ने जेब से मोबाइल निकाल कर नंदन के सामने रखते हुए कहा, ‘‘मुंह मत बना, ले खुद सब कुछ डिलीट कर दे. तू दोस्त है मेरा. तेरी इज्जत मेरी इज्जत. तू सुजाता को छुपा रहा था, इसलिए ऐसा करना पड़ा. मैं ने तो हमेशा हिस्सा बांटा है तुम से.’’

सलाखों में हलाला एक्सपर्ट

24 अगस्त, 2017 को पुलिस की गिरफ्त में आए नीले रंग का लिबास पहने और सिर पर गोल टोपी लगाए उस शख्स की बातें वरदी वालों को हैरान कर रही थीं.

उस का गुनाह इतना था कि वह सजायाफ्ता मुजरिम था और कई सालों से फरार था. उस ने न सिर्फ जादूटोना, तावीजगंडों के नाम पर अपने अंधविश्वासी मुरीदों को लूटा था, बल्कि वह औरतों की आबरू से भी खेलता था और इस काम के पैसे लेता था.

धर्म की आड़ में खुद को वह हलाला ऐक्सपर्ट मौलवी बताता था. अपने पाखंड के जाल व हलाला को उस ने मौजमस्ती व रोजीरोटी का जरीया बना लिया था.

हलाला को बनाया धंधा

दरअसल, पकड़ा गया मौलाना करीम खुद को धर्म का बहुत बड़ा जानकार और तंत्रमंत्र का माहिर बताता था. लोगों को भूतप्रेत व निजी परेशानियों को दूर करने के नाम पर वह तावीजगंडे बांटता था. उस के अंधभक्तों की खासी तादाद थी.

मौलाना करीम मुंबई, सूरत, अजमेर शरीफ, फर्रुखाबाद वगैरह जगहों पर जा कर रुकता था. चेलेचपाटे ही उस का प्रचारप्रसार किया करते थे. बदले में वह उन्हें छल से कमाई दौलत का कुछ हिस्सा देता था.

मौलाना करीम ने 20 साल से ले कर 50 साल तक की औरतों के हलाला किए. हलाला का काम वह कभी लोगों के घर जा कर, तो कभी होटलों में कर दिया करता था.

जिस औरत पर उस का ज्यादा दिल आ जाता, उसे वह कई दिनों तक अपने पास रखता था और मन भर जाने पर उसे उस के परिवार वालों के हवाले कर देता था.

इतना ही नहीं, करीम खुद को धर्मगुरु बताता था. हलाला करने के पहले वह सामने वाले की माली हालत के हिसाब से पैसे लिया करता था. उस ने एकदो नहीं, बल्कि 38 से ज्यादा औरतों का हलाला किया था. चेले खुश रहें, इसलिए वह उन्हें भी औरतों से मजे कराता था.

करीम के चेले बहलाते थे कि जो कोई मौलाना से हलाला कराएगा, उस शख्स को जन्नत नसीब होगी. साथ ही, रिश्ते में कभी कड़वाहट पैदा नहीं होगी.

करीम की सभी मुरादें बैठेबिठाए पूरी हो रही थीं. तंत्रमंत्र और हलाला उस के लिए धंधा था, जिस से होने वाली कमाई वह खुद भी रखता था और अपने चेलों में भी बांटता था.

पुराना अपराधी था पाखंडी

मौलाना करीम का असली नाम आफताब उर्फ नाटे था. न तो वह कोई पहुंचा हुआ धार्मिक गुरु था और न ही तंत्रमंत्र का जानकार, बल्कि वह सजायाफ्ता एक भगौड़ा अपराधी था.

पुलिस से बचने के लिए आफताब उर्फ नाटे ने धर्म का चोला पहना और धार्मिक जगहों को ठिकाना बना कर लोगों की आंखों में धूल झोंकने लगा.

दरअसल, आफताब उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जनपद के शाहगंज थाना इलाके का रहने वाला था. वह जवानी में दबंग व आपराधिक सोच का था.

साल 1981 में आफताब ने एक नौजवान मोहम्मद अजमत की गोली मार कर हत्या कर दी थी. हत्या के इस मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

एक साल बाद जनपद कोर्ट से उसे हत्या का कुसूरवार पाते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी गई. उस के परिवार वालों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, तो साल 1985 में उसे कुछ समय के लिए जमानत मिल गई.

आफताब जेल की जिंदगी से ऊब चुका था. बाहर आते ही वह हमेशा के लिए फरार हो गया. उस ने अपना नाम बदल कर मौलाना करीम रखा और यह धंधा आबाद करने लगा.

यों आया शिकंजे में

आफताब भले ही धर्म की आड़ में मौज काट रहा था, लेकिन उस के परिवार वालों ने उस के कहने पर पहले तो उस से संबंध न होने की बात फैलाई, फिर कुछ साल बाद यह कहना शुरू कर दिया कि शायद आफताब किसी हादसे का शिकार हो कर मर चुका है. यह सब उस की सािजश का हिस्सा था.

दरअसल, आफताब परिवार की खैरखबर रखता था. वह लगातार मोबाइल फोन के जरीए उन के संपर्क में रहने लगा.

आफताब शातिर था. कुछ ही महीनों में वह सिमकार्ड बदल दिया करता था. वह इलाहाबाद समेत आसपास के जिलों में होने वाले धार्मिक जलसों में पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर घूमता था.

4 साल पहले हाईकोर्ट ने आफताब की फरारी को संज्ञान में ले कर पुलिस से उसे कोर्ट में पेश करने को कहा, तो पता चला कि वह फरार है.

जब पुलिस उसे खोजने में नाकाम रही, तो हाईकोर्ट ने किसी तरह उसे 3 महीने में पेश करने को कहा. उस के बाद इलाहाबाद परिक्षेत्र के आईजी एसवी सावंत ने उसे तलाशने के निर्देश दिए और उस पर 12 हजार रुपए का इनाम भी ऐलान कर दिया.

पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ मीना ने इंस्पैक्टर अनिरुद्ध सिंह समेत पुलिस की टीमों को उस की खोज में लगाया. पुलिस को सूचना मिली कि आफताब कौशांबी के एक प्रोग्राम में आने वाला है. पुलिस ने घेराबंदी की, लेकिन वह चकमा दे कर भाग गया.

पुलिस ने आफताब के परिवार वालों के फोन नंबर सर्विलांस पर ले लिए, जिस से पता चला कि वह एक मजार में शरण लिए हुए है. इस के बाद इंस्पैक्टर अनिरुद्ध सिंह ने खुद को झाड़फूंक करवाने वाला मरीज बता कर उसे गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ मीना ने बताया, ‘‘आफताब तंत्रमंत्र का ढोंग कर के लोगों से पैसा ऐंठता था. उस ने झांसा दे कर 38 से ज्यादा औरतों का हलाला करवाने की बात कबूल की है. उस की पहचान एक सिद्ध मौलाना के रूप में बन रही थी.’’

सामाजिक कार्यकर्ता ताहिरा हसन कहती हैं कि मुसलिम धर्म में प्रचलित हलाला को ले कर मौलानाओं पर तमाम आरोप लगते रहे हैं, लेकिन यह बड़ी हकीकत खुल कर उजागर हुई है कि हलाला के नाम पर धर्म की आड़ में पाखंडी क्याकुछ नहीं करते हैं.

मैं एक शादीशुदा लड़की से प्यार करता हूं और हम ने कई बार सेक्स भी किया है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं पिछले तकरीबन 4 सालों से एक शादीशुदा औरत से प्यार करता हूं. हम ने कई बार सेक्स भी किया है, क्या ऐसा करना ठीक है?

जवाब-

अगर औरत राजी हो तो ठीक है, पर उस के पति को पता चल गया तो जनाब बुरी तरह पिटोगे. जैसा कि वे औरत शादी-शुदा है तो बेहतर यही रहेगा कि आप उसका साथ छोड़ दें.

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का कारण कहीं सेक्स असंतुष्टि तो नहीं

कुछ अरसा पहले आए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में धारा 497 को रद्द कर विवाहेतर संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया. उस समय के सीजेआई दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवाह से बाहर बनाया गया संबंध एक व्यक्तिगत मुद्दा हो सकता है. यह तलाक का आधार तो बन सकता है, परंतु यह अपराध नहीं है.

देश की शीर्ष अदालत के इस फैसले से बहस छिड़ गई है. समाज में बढ़ रहा व्यभिचार समाज के तानेबाने को तोड़ने का कुत्सित प्रयास तो कर रहा है, लेकिन प्रश्न यह भी उठा रहा है कि आखिर बढ़ते व्यभिचार और विवाहेतर संबंध का कारण क्या है?

मानव सभ्यता के विकास के साथ समाज ने शारीरिक संतुष्टि और सेक्स संबंधों की मर्यादा के लिए विवाह नामक संस्था को सामाजिक मंजूरी दी होगी. विवाह के बाद पति और पत्नी के बीच के सेक्स संबंध शुरू में तो ठीक रहते हैं, परंतु समय के साथ सेक्स के प्रति अरुचि व पार्टनर की जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान न दिया जाना कलह के कारण बनते हैं.

आमतौर पर सुखद सेक्स उसी को माना जाता है, जिस में दोनों पार्टनर और्गेज्म पा सकें. यदि पतिपत्नी सेक्स संबंध में एकदूसरे को संतुष्ट कर पाने में सफल होते हैं तो उन के दांपत्य संबंधों की कैमिस्ट्री भी अच्छी रहती है.

राकेश और प्रतिभा की शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं. उन की 2 साल की एक बेटी भी है. परंतु बेटी के जन्म के साथ ही प्रतिभा का ध्यान अपनी बेटी में ही रम गया. पति की छोटीछोटी जरूरतों का ध्यान रखने वाली प्रतिभा अब पति के प्रति बेपरवाह सी हो गई है.

कभी रोमांटिक मूड होने पर राकेश जब सेक्स करने की पहल करता है, तो प्रतिभा उसे यह कह कर झिड़क देती है कि तुम्हें तो बस एक ही चीज से मतलब है. इस से राकेश कुंठित हो कर चिड़चिड़ाने लगता. मन मसोस कर अपनी कामेच्छा दबा लेता. धीरेधीरे सेक्स करने की कुंठा से उस के मन में कहीं और शारीरिक संबंध बनाने के खयाल आने लगे. प्रतिभा जैसी अनेक महिलाओं का यही व्यवहार राकेश जैसे पुरुषों को दूसरी महिलाओं के साथ संबंध बनाने को प्रोत्साहित करता है.

जिस तरह स्वादिष्ठ भोजन करने के बाद कुछ और खाने की इच्छा नहीं होती, ठीक उसी तरह सेक्स क्रिया से संतुष्ट पतिपत्नी अन्यत्र सेक्स के लिए नहीं भटकते. दांपत्य जीवन में सुख प्राप्त करने के लिए पतिपत्नी को अपनी सेक्स जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए. सेक्स की पहल आम तौर पर पति द्वारा की जाती है. पत्नी को भी चाहिए कि वह सेक्स की पहल करे. पतिपत्नी में से किसी के भी द्वारा की गई पहल का स्वागत कर, सेक्स संबंध स्थापित कर, एकदूसरे की संतुष्टि का खयाल रख कर विवाहेतर संबंधों से बचा जा सकता है.

बच्चों के जन्म के बाद भी सेक्स के प्रति उदासीन न हों. सेक्स दांपत्य जीवन का मजबूत आधार है. शारीरिक संबंध जितने सुखद होंगे भावनात्मक प्यार उतना ही मधुर होगा. घर में पत्नी के सेक्स के प्रति रूखे व्यवहार के चलते पति अन्यत्र सुख की तलाश में संबंध बना लेता है. कामकाजी पति द्वारा पत्नी को पर्याप्त समय और यौन संतुष्टि न देने से वह भी अन्य पुरुष से शारीरिक संबंध बना लेती है, जिस की परिणति दांपत्य जीवन में तनाव और बिखराव के रूप में देखने को मिलती है.

स्वाभाविक होता है बदलाव

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि संबंधों में यह बदलाव स्वाभाविक है. शादी के शुरू के सालों में पतिपत्नी एकदूसरे के प्रति जो खिंचाव महसूस करते हैं, वह समय के साथ खत्म होता जाता है और तब शुरू होती है रिश्तों में उकताहट.

आर्थिक, पारिवारिक और बच्चों की परेशानियां इस उकताहट को बढ़ावा देती हैं. फिर इस उकताहट को दूर करने के लिए पतिपत्नी बाहर कहीं सुकून तलाशते हैं, जहां उन्हें फिर से अपने वैवाहिक जीवन के शुरू के वर्षों का रोमांच महसूस हो. यहीं से विवाहेतर संबंधों की शुरुआत होती है.

एक रिसर्च से पता चला है कि अलगअलग लोगों में इन संबंधों के अलगअलग कारण हैं. किसी से भावनात्मक जुड़ाव, सेक्स लाइफ से असंतुष्टि, सेक्स से जुड़े कुछ नए अनुभव लेने की लालसा, वक्त के साथ आपसी संबंधों में प्रेम की कमी, अपने पार्टनर की किसी आदत से तंग होना, एकदूसरे को जलाने के लिए ऐसा करना विवाहेतर संबंधों के कारण होते हैं.

महिलाओं के प्रति दोयमदर्जे की सोच

भारतीय संस्कृति में महिलाओं के प्रति दोयमदर्जे का व्यवहार आज भी देखने को मिलता है. सामाजिक परंपराओं की गहराई में स्त्री द्वेष छिपा है. ये परंपराएं पीढि़यों से महिलाओं को गुलाम से अधिक कुछ नहीं मानती हैं. उन्हें इस तरह ढाला जाता है कि वे अपने शरीर के आकार से ले कर निजी साजसज्जा तक के लिए अनुमति लें.

जो महिला अपने ढंग से जीने के लिए परंपराओं और वर्जनाओं को तोड़ने का प्रयास करती है उस पर समाज चरित्रहीन होने का कलंक लगा देता है. पति को घर में व्यवस्था, पत्नी का समय व बढि़या तृप्तिदायक खाना, सुखचैन का वातावरण और देह संतुष्टि चाहिए. परंतु पति खुद उस की सुखसुविधाओं और शारीरिक जरूरतों का उतना खयाल नहीं रखता. पत्नी से यह चाह जरूर की जाती है कि वह पति की नैसर्गिक इच्छाएं पूरी करती रहे.

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार विवाहेतर संबंधों को रोकने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. यदि आपसी रिश्ते की गरमाहट कम हो गई है तो रिश्ते को पुराने कपड़े की तरह निकाल कर नए कपड़ों की तरह नए रिश्ते बनाना समस्या का हल नहीं है. अपने पार्टनर को समझाने के कई तरीके हैं. उस से बातचीत कर समस्या को सुलझाया जा सकता है. सेक्स को ले कर की गई बातचीत, सेक्स के नएनए तरीके प्रयोग में ला कर एकदूसरे की शारीरिक संतुष्टि से विवाहेतर संबंधों से बचा जा सकता है.

फोरप्ले से और्गेज्म तक का सफर

एक नामी फैशन मैगजीन के सर्वेक्षण के अनुसार महिलाओं के और्गेज्म यानी चरमसुख को ले कर कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. इस औनलाइन शोध में 18 से 40 साल की आयु वाली 2300 महिलाओं से प्रश्न किए गए, जिन में 67% महिलाओं ने माना कि वे फेक और्गेज्म यानी और्गेज्म होने का नाटक करती हैं. 72% महिलाओं ने माना कि उन का साथी स्खलित होने के बाद उन के और्गेज्म पर ध्यान नहीं देता है. सर्वेक्षण के यह आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में पति और पत्नी अकसर सेक्स संबंधों में और्गेज्म तक नहीं पहुंच पाते हैं.

सेक्स को केवल रात्रिकालीन क्रिया मान कर निबटाने से सहसंतुष्टि नहीं मिलती. जब दोनों पार्टनर को और्गेज्म का सुख मिलेगा तभी सहसंतुष्टि प्राप्त होगी. पत्नी और पति का एकसाथ स्खलित होना और्गेज्म कहलाता है. सुखद सेक्स संबंधों की सफलता में और्गेज्म की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है.

सेक्स को शारीरिक तैयारी के साथसाथ मानसिक तैयारी के साथ भी किया जाना चाहिए. यह पतिपत्नी की आपस की जुगलबंदी से ही मिलता है. सेक्स करने से पहले की गई सेक्स से संबंधित छेड़छाड़ भूमिका बनाने में सहायक होती है. कमरे का वातावरण, बिस्तर की जमावट, अंतर्वस्त्र जैसी छोटीछोटी बातें सेक्स के लिए उद्दीपक का कार्य करती हैं.

सेक्स के दौरान घरपरिवार की समस्याएं बीच में नहीं आनी चाहिए. सेक्स संबंध के दौरान छोटीछोटी बातों को ले कर की जाने वाली शिकायतें संबंध को बोझिल बनातीं और सेक्स के प्रति अरुचि भी उत्पन्न करती हैं. सेक्स के लिए नए स्थान और नए तरीकों का प्रयोग कर संबंध को प्रगाढ़ बनाया जा सकता है. सेक्स की सहसंतुष्टि यकीनन दांपत्य जीवन को सफल बनाने के साथसाथ विवाहेतर संबंध बनाने से रोकने में भी मददगार साबित हो सकती है.

दोस्त के ब्रेकअप के बाद कैसे करें मदद

‘‘क्या हुआ, तुम इतनी उदास क्यों बैठी हो,’’ नीता ने पूछा तो नेहा फूट पड़ी, ‘‘अविनाश से मेरा ब्रेकअप हो गया है. काफी समय से हम दोनों साथ थे परंतु उस ने मुझे धोखा दे दिया. आई डोंट नो यार, वह तो हमेशा साथ निभाने की बातें करता था, लेकिन उस के मन में क्या चल रहा था यह मुझे पता नहीं था.’’

‘‘यार नेहा, छोड़ अब इन बातों को और अपनी जिंदगी की नए सिरे से शुरुआत कर,’’ नीता ने नेहा के आंसू पोंछते हुए समझाया.

अकसर देखने में आता है कि ब्रेकअप के बाद युवतियां अपनेआप को काफी हताश महसूस करने लगती हैं साथ ही मानसिक रूप से भी इतनी अधिक कमजोर पड़ जाती हैं कि उन्हें जरूरत होती है ऐेसे दोस्त की जो उन्हें समझ सके.

अगर आप की दोस्त का भी ब्रेकअप हो गया है तो आप अपनी दोस्त को इस मुश्किल घड़ी से निकालने में मदद कर सकते हैं जानिए कैसे :

समझदारी दिखाएं

सब से पहले जरूरी है कि आप उस की बात समझिए आखिर उन के बीच हुआ क्या था? उसे अपने मन की बात बोलने दें, इस से उस का मन हलका होगा और जब आप उस की बात सुनेंगे तो उसे अपनेपन का एहसास भी होगा.

ब्रेकअप के बाद वैसे भी दोनों पार्टनर के मन में काफी कुछ चलता रहता है. दोनों एकदूसरे को दोषी ठहराते नजर आते हैं. ऐसे में आप की दोस्त में भी काफी गुस्सा होना लाजमी है. यदि वह आप को सबकुछ बता देगी तो उस का मन शांत हो जाएगा इसलिए बिना कोई राय दिए उस की पूरी बात सुनें.

अनदेखा करना

कई बार ऐसा होता है कि शुरू में जब आप की दोस्त का दिल टूटा होता है, आप उस की सब बातें सुन लेते हैं, लेकिन थोड़े दिन बाद उसे अनदेखा करने लगते हैं. इस से वह मानसिक तौर पर भी टूट जाती है, क्योंकि जिस से वह प्यार करती थी वह तो दूर चला ही गया अब तो उस के सच्चे दोस्त भी उसे अनदेखा कर रहे हैं.

इसलिए जरूरी है कि इस दौरान जब भी उसे अकेलापन महसूस हो, तो आप उसे खुशी का एहसास कराएं. इस से वह बेहतर तरीके से आप से जुड़ पाएगी और मजबूत होती चली जाएगी. इस के लिए आप उसे ज्यादा से ज्यादा समय दें, जब वह निराश हो तो उस में अपनी पौजिटिव बातों से नई ऊर्जा भरने की कोशिश करें. इस से वह बहुत जल्दी इस गम से उभर पाएगी.

घूमने जाएं

यदि आप उस के साथ कहीं घूमने का प्रोग्राम बनाते हैं तो उसे अच्छा लगेगा, क्योंकि ब्रेकअप के बाद युवतियां काफी तनाव में आ जाती हैं. इस तनाव से उभारने के लिए जरूरी है कि  आप उस का ध्यान किसी और जगह पर लगाएं. सभी पुराने दोस्तों को इकट्ठा करें और कहीं घूमने का प्लान बनाएं. किसी ऐसी जगह, जहां आप सभी ऐंजौय कर सकें. जैसे किसी कौमेडी मूवी को देखने या ऐम्यूजमैंट पार्क आदि जगहों पर वह अपनेआप को बेहतर महसूस करेगी और वैसे भी पुराने दोस्तों के साथ मजा दोगुना हो जाएगा.

विश्वासघात न करें

यदि आप अपनी दोस्त का सच्चा मित्र बनना चाहते हैं तो जरूरी है कि आप उस से विश्वासघात न करें. जब वह आप के  सामने अपनी बातें शेयर कर रही हो तो जरूरी है कि आप उस की बातों को और कहीं किसी के सामने न बताएं, क्योंकि शायद उस ने अपने ब्रेकअप से पहले की कुछ सीक्रेट बातें आप से कह दी हों, लेकिन ऐसे में आप का फर्ज है कि उन की बातों को अपने तक ही रखें. धीरेधीरे आप उन के सब से भरोसेमंद फ्रैंड बन जाएंगे और वह आप से हर तरह की बात शेयर कर पाएगी.

बौयफ्रैंड की बुराई न करें

आप की दोस्त का बौयफ्रैंड जिस से उस का ब्रेकअप हुआ है, की बुराई न करें. इस से उस का मन और भी दुखी होगा. साथ ही वह बहुत ज्यादा तनाव महसूस करेगी बल्कि कोशिश करें कि  वह इन बातों से उबर सके, क्योंकि जितनी बातें आप उस से ब्रेकअप के बारे में करेंगे या उस के ऐक्स केबारे में करेंगे वह उतनी ही परेशान होगी. यह भी हो सकता है कि वह इरिटेट हो कर आप से बात करना ही छोड़ दे.

मजाक न बनाएं

कई लोगों की आदत होती है कि वे दूसरों की बातों का मजाक उड़ाते फिरते हैं. यह भी नहीं सोचते कि उस पर क्या गुजर रही है. जरूरी यह है कि आप किसी की भावनाओं को बिना ठेस पहुंचाए उस को ऐसी परिस्थितियों से उबारने की कोशिश करें. मुश्किलें तो हर किसी के जीवन में आती हैं, लेकिन यदि हम सच्चे दोस्त हैं तो जरूरी है कि इस मुश्किल घड़ी में उस का साथ दें.

नए रिश्ते बनाने की सलाह

ब्रेकअप के बाद जब आप की फ्रैंड सिंगल है तो इस का यह मतलब कतई न निकालें कि उसे एक बौयफ्रैंड की सख्त जरूरत है. उसे समझाएं कि उस का ऐक्स बौयफ्रैंड उस के लिए बना ही नहीं था, उसे किसी ऐसे का चुनाव करना चाहिए जो उसे समझ सके. इस से उसे भी लगेगा कि जल्दबाजी में किसी से भी दोस्ती करने का कोई फायदा नहीं होगा.

सेक्स टौयज की बढ़ती मांग

सेक्स टौय वाइब्रेटर बौलीवुड तक आ पहुंचा है क्योंकि बौलीवुड फिल्म ‘वीरे दी वैडिंग’ और नैटफ्लिक्स पर ‘फोर मोर शौट्स प्लीज’ फिल्म सैगमेंट लस्ट स्टोरीज में नायिकाओं को परदे पर सेक्स टौयज द्वारा यौन आनंद लेते हुए दिखाया गया है. जबकि भारतीय पेटेंट कार्यालय ने कनैडियन कंपनी की सेक्स टौय की बिक्री की प्रार्थना को यह कह कर ठुकरा दिया था कि वाइब्रेटर अश्लील और कानूनी नजरिए से नैतिक पतन है.

संस्कारी कानूनों से इतर वास्तविकता यह है कि भारत में सेक्स टौयज का बाजार 230 मिलियन डौलर का है. इस में 2019 में 34 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना जताई गई है. अगर इन से कानून की सख्ती हट जाती है तो यह बाजार और भी तेजी से बढ़ेगा. वर्तमान में सेक्स टौयज बिक्री का कानून न होने के कारण ग्राहक इन्हें चोरीछिपे और ब्लैक में खरीदते हैं. सेक्स टौयज कृत्रिम उपकरण हैं जिन का इस्तेमाल पार्टनर के न होने पर भी सेक्स का चरम सुख प्राप्त करने के लिए किया जाता है. इस के साथ ही अपने पार्टनर के साथ सेक्स संबंध को और मजेदार बनाने के लिए भी इन की मदद ली जाती है.

लौ प्रोफैसर शमनाद बशीर अपने ब्लौग में लिखते हैं कि पेटेंट कार्यालय ने उत्पाद को इस के तकनीकी दृष्टिकोण से समझा है जबकि यह जरूरी है कि इसे नैतिक और अनैतिक दृष्टिकोण से समझते हुए इस की प्रकृति निर्धारित की जाए.

भारतीय समाज में वाइब्रेटर को सदैव ही शर्मनाक और फूहड़ता की दृष्टि से देखा गया है. कुछ ही स्थान हैं जहां आप इसे खरीद सकते हैं जैसे कि दिल्ली का पालिका बाजार और मुंबई का क्राफोर्ड मार्केट या फिर विदेशों में जहां दुकानदार आप को शक की नजरों से नहीं देखता. इसलिए, लोग ज्यादातर इसे औनलाइन खरीदना पसंद करते हैं.

निसंदेह इंटरनैट ने अब इसे खरीदना टोस्टर की तरह आसान बना दिया है. वयस्क टौय वैबसाइट इस की बिक्री की कठिनाइयों को पहचानते हुए इस उत्पाद को बौडी मसाज की आड़ में बेचती हैं तथा आनंद प्राप्ति की गारंटी देती हैं. कुछ नए उत्पाद एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) की आड़ में धंधा करते हैं, जिस कारण से इन पर कोई संदेह नहीं करता.

उदाहरण के तौर पर पुरुष सेक्स टौयज को चौपस्टिक के नाम पर खरीदते हैं, तो महिलाएं लिपस्टिक के नाम पर अपना जुगाड़ कर लेती हैं. खुदरा व्यापारियों के हित और सुविधा को देखते हुए इन उत्पादों को ड्रग्स एवं प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत यौन स्वास्थ्य उत्पाद में रजिस्टर्ड करा दिया जाता है. ये उत्पाद न तो अश्लील दिखाई पड़ते हैं और न ही मानव अंग से मेल खाते हैं.

औनलाइन एडल्ट स्टोर किंकपिन के बिक्री अधिकारी रीतिंद्र सिंह का कहना है कि हमारे पास बहुत बड़ी मात्रा में सेक्स टौयज के और्डर आते हैं लेकिन हमें सभी ग्राहकों को मना करना पड़ता है.

अन्य वस्तुओं की तरह आनंद प्रदान करने वाली वस्तुएं भी सस्ती नहीं हैं. वैधानिक वैबसाइट्स पर इन उत्पादों का मूल्य 3,000 से ले कर 25,000 रुपए तक है. जबकि भारत में यौन संतुष्टि के प्राकृतिक साधन सस्ते में उपलब्ध हैं. हरियाणा के युवा अपनी यौन संतुष्टि के लिए बिहार, झारखंड और ओडिशा से मात्र 5,000 से 10,000 के बीच में युवा लड़कियां खरीद लाते हैं और मजेदार बात यह है कि इन से जीभर जाने पर वे इन्हें दूसरों को और भी सस्ती दर पर बेच देते हैं.

‘एजेंट औफ इश्क’ फिल्म ने भी यह उजागर किया है कि महिलाएं हस्तमैथुन से किस प्रकार आनंद और संतुष्टि प्राप्त करती हैं. नोकिया फोन 3310 का महिलाओं में प्रचलित होने का सब से बड़ा कारण इस का शक्तिशाली कंपन था.

सेक्स टौयज के दुष्प्रभाव : मानव जीवन में सेक्स की महत्त्वपूर्ण भूमिका है. लेकिन अपनी सेक्स भूख मिटाने के लिए जहां तक संभव हो प्राकृतिक साधन प्रयोग करें. अगर किसी कारणवश अपनी यौन भूख को शांत करने के लिए आप सेक्स टौय प्रयोग में लाते या लाती हैं तो इन के दुष्प्रभावों का भी ध्यान रखें. जैसे सेक्स टौय डिल्डो और बट प्लग्स अकसर खुरदरे होते हैं, जिस के कारण स्त्री यौनांग में कट  आ सकते हैं या जलन हो सकती है या आप का अंग भी खराब हो सकता है.

यदि आप सेक्स टौयज को नियमित तौर पर साफ नहीं करते हैं (ऐसे टौयज जिन्हें शरीर में अंदर डाला जाता है) तो शरीर से निकला हुआ तरल पदार्थ उन पर लगा रहता है और इस से संक्रमण हो सकता है.

किसी संक्रमित साथी के साथ अपना सेक्स टौय शेयर न करें क्योंकि इस से संक्रमण हो सकता है. वाइब्रेटर जैसे सेक्स टौयज का अधिक प्रयोग करने से महिलाओं के क्लाइटोरिस में संवेदनशीलता कम हो जाती है जिस के कारण सेक्स का आनंद कम हो जाता है.

गैरकानूनी है सेक्स टौयज का धंधा : भारत में सेक्स टौयज की बिक्री आईपीसी के सैक्शन 292 (1) के तहत गैरकानूनी है. क्योंकि सेक्स टौयज को अश्लील उत्पाद माना जाता है. पहली बार दोष सिद्ध होने पर 2 साल की सजा, जबकि इस के बाद दोषी ठहराए जाने पर 5 साल तक की सजा हो सकती है. लेकिन इस के उपरांत भी दिल्ली के कनाट प्लेस में स्थित अंडरग्राउंड मार्केट पालिका बाजार में सेक्स टौयज का धंधा बेरोकटोक जारी है. इन की बिक्री के लिए खास तरह की भाषा और कोडवर्ड प्रयोग किए जाते हैं. यहां से इन खिलौनों की होम डिलिवरी भी की जाती है.

बीती ताहि बिसार दे : देवेश के दिल की

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चिड़िया चुग गईं खेत: शादीशुदा मनोज के साथ थाईलैंड में क्या हुआ था – भाग 5

वह शाम भी उस ने जूली के साथ बिताई. पूरे समय जूली उस का आभार प्रकट करती रही. उस ने मनोज को कसम खिलाई कि वह भारत वापस जा कर उसे भूलेगा नहीं और हमेशा उसे फोन करेगा.

दूसरे दिन मनोज भारत के लिए वापस निकल आया. जूली ने आंखों में आंसू भर कर उसे भावभीनी विदाई दी. उस ने वादा किया कि वह जल्द से जल्द उसे पैसे वापस करेगी.

भारत वापस आने पर मनोज का हर रोज जूली से बात करने का सिलसिला जारी रहा. बातों से ही उसे पता चला कि जूली अपने घर लौट गई है और उस ने शौप खोल ली है. वह हर रोज अपने कार्य की प्रगति के बारे में उत्साह से उसे बताती, जैसे आज उस ने क्या खरीदा, उसे शौप में कैसे जमाया, लोग उस की दुकान पर आने लगे हैं, उसे उस के पैसे जल्द से जल्द चुकाने हैं इसलिए वह ज्यादा से ज्यादा मेहनत कर रही है.

इधर, दिन, हफ्ते, महीने बीत गए पर जूली ने मनोज का एक भी पैसा वापस नहीं किया. मनोज को तो भावेश, सुरेश और बाकी लोगों के पैसे वापस करने ही पड़े. दोनों अकसर उसे कहते कि उस ने धोखा खाया है. जूली ने उसे बेवकूफ बनाया है पर मनोज का मन यह मानने को तैयार नहीं होता. लेकिन आजकल वह जब भी जूली से पैसे लौटाने की बात करता, वह टालमटोल करने लगती, अपनी परेशानियां गिनाने लगती. फिर एक दिन अचानक जूली ने अपना फोन बंद कर दिया. मनोज महीनों उसे फोन लगाता रहा पर वह नंबर स्विच औफ ही आता. अब तो मनोज भी समझ गया कि उस ने धोखा खाया.

वह रातदिन जूली को गालियां देता और अपनी मूर्खता पर पछताता. ठगे जाने से वह बुरी तरह तिलमिला रहा था. उसे सब से ज्यादा जलन इस बात पर हो रही थी कि उस के दोस्त इस से बहुत कम पैसों में लड़कियों के साथ ऐश कर आए और वह इतना सारा पैसा खर्च कर के भी सूखा रह गया. बेकार की भावनात्मक सहानुभूति में पड़ कर अच्छाभला चूना लग गया.

2 साल बीत गए. जूली का अतापता नहीं था. मनोज भी उस कसक को जैसेतैसे कर के भूल गया था.

एक दिन मुंबई में उस का एक दोस्त उस से मिलने आया. दोनों औफिस में मनोज के केबिन में बैठ कर बातें कर रहे थे. बातों ही बातों में उस के दोस्त अजय ने उसे बताया कि वह हाल ही में थाईलैंड के पटाया शहर गया था. और उस के बाद अजय की कहानी सुन कर मनोज सन्न रह गया. उसे लगा कि जैसे अजय उस की ही कहानी सुना रहा है. उस की कहानी का प्रत्येक शब्द और घटना वही थी जो

2 साल पहले मनोज के साथ घटी थी.

मनोज के घाव हरे हो गए. उस ने अजय को अपनी आपबीती सुनाई. सुन कर अजय भी बुरी तरह चौंक गया. उस ने तुरंत जूली को फोन लगाया क्योंकि उस के पास उस का नया नंबर था ही. उस ने स्पीकर औन कर के जूली से बात की. जूली की आवाज सुनते ही मनोज उसे पहचान गया. उस ने अजय को इशारे से बताया कि यह वही है. अब तो अजय भी बौखला गया और मनोज का तो गुस्से से बुरा हाल हो गया. उस के अंदर लावा उबलने लगा. वह जूली को अनापशनाप बोलने लगा. पहले तो वह अचकचा गई फिर मनोज को पहचान गई. मनोज उसे गालियां देने लगा तो जूली को भी गुस्सा आ गया.

‘‘देखिए, मिस्टर मनोज, जबान संभाल कर बात करिए. आप को कोई हक नहीं बनता मुझे बुराभला बोलने का,’’ जूली तीखे स्वर में बोली.

‘‘धोखेबाज, एक तो धोखा देती हो ऊपर से तेवर दिखाती हो. उलटा चोर कोतवाल को डांटे,’’ मनोज तिलमिला कर बोला.

‘‘धोखेबाज कौन है यह अपनेआप से पूछो,’’ जूली कड़वे स्वर में बोली, ‘‘तुम मर्द लोग विदेश जा कर कम उम्र की लड़कियों के साथ रंगरलियां मनाने और ऐश करने के लिए सदा लालायित रहते हो. दूसरी लड़कियों के साथ गुलछर्रे उड़ाने को आतुर रहते हो. लड़कियों के साथ घूमने और एंजौय करने, मौजमस्ती करते समय तुम्हें एक बार भी यह खयाल नहीं आता कि तुम अपनी पत्नियों के साथ धोखा कर रहे हो. लड़कियां तुम्हें हंस कर देख लें, तुम्हारे साथ मौजमस्ती कर लें तो तुम्हें अपना जीवन सार्थक और धन्य नजर आने लगता है. बोलो, तुम्हारा अंतर्मन एक बार भी तुम्हें कचोटता नहीं है?’’

फिर थोड़ा रुक कर –

‘‘मैं ने न तुम्हारी जेब काटी न बंदूक दिखा कर तुम्हें लूटा है. पैसे तुम ने अपनी मरजी से मुझे दिए थे.’’

‘‘लेकिन तुम ने पैसे वापस करने को तो कहा था न? उस का क्या?’’ मनोज गुस्से से बोला.

‘‘हां, कहा था. नहीं कहती तो क्या एक गरीब और असहाय लड़की की सहायता बिना किसी लालच के करते तुम लोग? नहीं, कभी नहीं करते. धोखा असल में मैं ने तुम्हें नहीं दिया, तुम्हारी गलत प्रवृत्ति ने तुम्हें दिया है. सचसच बताना, पैसा देने के बाद क्या तुम्हारे मन में मेरे साथ हमबिस्तर होने की तीव्र इच्छा नहीं हो रही थी? पैसे के एवज में क्या तुम लोग मेरा शरीर नहीं चाह रहे थे. वह तो मैं पूरे समय तुम्हें शराफत का वास्ता देती रही, इसलिए बच गई. और मैं तुम्हारी मर्यादा और चरित्र की झूठी तारीफें भी इसीलिए करती रहती थी कि तुम लोग अपनी हद में रहो.’’

जूली की बातों की सचाई ने मानो उन्हें नंगा कर दिया. दोनों एकदूसरे से नजरें चुराते हुए सिर नीचा कर के बैठे रहे और जूली बोलती रही.

‘‘सच कहूं तो पुरुषों को उन की प्रवृत्ति ही धोखा देती है. नया रोमांच, नया अनुभव पाने की इच्छा ही उन्हें डुबोती है. तुम लोग अपनी पत्नियों के प्रति वफादार होते नहीं और हमें गालियां देते हो. क्या बुरा करती हूं जो तुम जैसे मर्दों से पैसा ऐंठ कर मैं आज तक अपनी इज्जत बचाती आई हूं. आज के बाद मुझे कभी फोन मत करना क्योंकि यह नंबर मैं आज ही बंद कर दूंगी. अच्छा हुआ, जो अजय को भी सच पता चल गया. गुडबाय,’’ और जूली ने फोन काट दिया.

अजय और मनोज सन्न हो कर चुप बैठे थे, जूली ने उन्हें आईना दिखा दिया था. चिडि़यां खेत चुग चुकी थीं.

शिकस्त-भाग 4: शाफिया-रेहान के रिश्ते में दरार क्यों आने लगी

2 दिनों बाद मैं वक्त पर तैयार हो कर बाहर निकली. रेहान को लैटर मिल चुका था. उन्होंने कार का दरवाजा खोला. मैं ने कहा, ‘रेहान, जब रास्ते अलग हो रहे हैं तो फिर साथ जाने का कोई मतलब नहीं है. आप जाइए, मेरी टैक्सी आ रही है, मैं कोर्ट पहुंच जाऊंगी.’

कोर्ट में जज ने हम दोनों की बात ध्यान से सुनी. ‘खुला’ की वजह मेरे मुंह से जान कर जज ने हिकारतभरी नजर रेहान पर डाली और कहा, ‘रेहान साहब, जो कुछ आप कह रहे हैं वह ठीक नहीं है. 11-12 साल की खुशगवार जिंदगी को एक गलत ख्वाहिश के पीछे बरबाद कर रहे हैं. मैं आप दोनों को सोचने के लिए एक हफ्ते का टाइम देता हूं. दूसरी पेशी पर फैसला हो जाएगा.’ रेहान ने सिर झुका लिया.

कोर्ट से आ कर मैं ने टेबल पर बेहतरीन खाना लगाया जो मैं पका कर गई थी. मैं बच्चों से बातें करती रही, फिर गेस्टरूम में आई. पूरे वक्त हमारे बीच खामोशी रही. आबी कुछ कहना चाहती, तो मैं वहां से हट जाती. हफ्ताभर मैं एक से बढ़ कर एक मजेदार खाने बना कर खिलाती रही. रेहान के चेहरे पर फिक्र की लकीरें गहरी हो रही थीं. आखिरी दिन मुझे रोक कर बोले, ‘शाफी, मुझे तुम से कुछ बात करनी है.’ रेहान ठहरे हुए गंभीर लहजे मेें आगे बोले, ‘देखो शाफी, हमारा इतना दिनों का साथ है, मैं तुम्हें तनहा नहीं छोड़ना चाहता. तुम गेस्टरूम में रहो या मैं अलग घर का इंतजाम करवा दूंगा. बच्चों पर मेरा हक है पर तुम चाहो तो अपने साथ रखना. पर हम लोगों से दूर मत जाओ, करीब रहो.’

मैं ने दिल में सोचा, बच्चों की जिम्मेदारी मुझ पर डाल कर तुम दोनों ऐश करो. मैं ने गंभीर लहजे में कहा, ‘रेहान, मैं पहले भी कह चुकी हूं, मुझे आप के किसी एहसान की जरूरत नहीं है. और मैं आप का हक भी नहीं छीनना चाहती. आप के बच्चे आप के पास रहेंगे क्योंकि मैं उन्हें वह ऐशोआराम नहीं दे सकती जो आप के पास मिलेगा. मैं सिर्फ आप के घर, आप की जिंदगी से दूर हो जाऊंगी. मैं क्या करूंगी, कहां रहूंगी, इस की आप फिक्र न करें. यह मेरा सिरदर्द है.’

बेइंतहा ताज्जुब से सब मेरा चेहरा देख रहे थे जिस पर कोई जज्बात न थे, एकदम सपाट व बेजान. बेटा असद बोल उठा, ‘मम्मी, आप के जाने के बाद अच्छेअच्छे खाने कौन बनाएगा?’ असद भी बाप की तरह मतलबी था. उसे खाने की पड़ी थी, मां की परवा न थी. मैं ने कहा, ‘आप की नई मां बनाएगी और खिलाएगी.’ शीरी फौरन बोल पड़ी, ‘पर मम्मी, उन्हें तो कुछ पकाना नहीं आता है.’

मैं ने कहा, ‘तुम्हारे पापा की मोहब्बत में सब सीख जाएगी.’ असद को फिर परेशानी हुई. वह भी बाप की तरह लापरवाह और कामचोर था, आज तक अपने कपड़े उठा कर न रखे थे, न प्रैस किए थे, न अलमारी जमाई थी, न कमरा साफ किया था. सारे काम मैं ही करती थी. वह कह उठा, ‘मम्मी, हमारे सब काम कौन करेगा?’

‘तुम्हारी नई मम्मी करेगी. वह सब संभाल लेगी. वह संभालने में ऐक्सपर्ट है, जैसे आप के पापा को संभाल लिया.’

आज मुझे कोई लिहाज नहीं रहा था. दोनों के चेहरे शर्म से झुके हुए थे. फिर मैं ने बच्चों से कहा, ‘आप दोनों जैसी जिंदगी जीने के आदी हो वह आप के पापा ही बरदाश्त कर सकते हैं, मैं नहीं. पर आप दोनों जब चाहो, मुझ से मिलने आ सकते हो.’

दूसरे दिन सुबह ही सोहा कार ले कर आ गई. उसे देख कर मुझे एक साहस मिल गया. फोन पर रोज बात होती थी. हम दोनों साथ ही कोर्ट गए. आधा घंटे समझाइश व नसीहत के बाद खुला मंजूर हो गया. ज्यादा वक्त इसलिए नहीं लगा क्योंकि दोनों पक्ष पूरी तरह सहमत थे. और रहीम साहब भी कोशिश में साथ थे.

मैं ने घर पहुंच कर रेहान को मुबारकबाद दी. मैं ने अपना सामान पहले ही तैयार कर लिया था. सामान ले कर नीचे उतरी. जेवर के 2 डब्बे रेहान को देते हुए कहा, ‘ये दोनों सैट आप की तरफ से मिले थे. आप की नईर् बीवी को देने के काम आएंगे. आप रखिए, आप का दिया सब छोड़ कर जा रही हूं. मां की तरफ से मिली चीजें ले ली हैं. आप से एक गुजारिश है, अगर किसी मोड़ पर हम मिल जाएं तो मुझे आवाज मत देना.’ मैं ने बच्चों को प्यार किया, गले लगाया, दिल अंदर से बिलख रहा था पर मैं पत्थर बनी रही. आबी आगे बढ़ी. मैं ने उसे नजरअंदाज किया और सोहा के साथ बाहर आ गई.

उन लोगों के सामने एक आंसू आंख से गिरने न दिया, यह मेरी आन और खुद्दारी की हार होती. मैं सोहा के कंधे पर सिर रख बिलख पड़ी. सोहा ने कहा, ‘शाफी, आज जीभर कर रो लो. इस के बाद उस बेवफा इंसान के लिए मैं तुम्हें एक आंसू नहीं बहाने दूंगी.’

सोहा के शौहर राहिल बेहद नेक इंसान थे. उन की मां ने मुझे सगी मां की तरह अपनी आगोश में समेट लिया. उन्हीं के कमरे में मुझे सुकून मिलता. सोहा व उस का बेटा भी खूब खयाल रखते. मोहब्बत और अपनेपन के साए में 4 महीने गुजर गए. राहिल मेरी नौकरी और घर की तलाश में लगे रहे. रकम तो मेरे पास काफी थी. चाचा ने अम्मी का घर बेच कर आधी रकम मेरे खाते में डाल दी थी. सोहा की मल्टीस्टोरी बिल्ंिडग में मुझे सैकंड फ्लोर पर एक अच्छा फ्लैट मिल गया. मैं उस में शिफ्ट हो गई. मेरी कौन्वैंट की पढ़ाई काम आई. मुझे एक अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में जौब मिल गई. जिंदगी सुकून से गुजरने लगी. धीरेधीरे जख्म भरने लगे. सोहा की फैमिली का बड़ा साथ था. अम्मा काफी वक्त मेरे पास बितातीं. मुझे एक अच्छी औरत काम के लिए मिल गई. मैं ने उसे घर में रख लिया.

उस दिन छुट्टी थी. मैं बूआ के साथ काम में लगी थी कि डोरबैल बजी. दरवाजा खोला. राहिल के साथ रेहान खड़े थे. मैं हैरान रह गई. अंदर आने को कहा. राहिल रेहान को छोड़ कर लौट गए. मैं ने रेहान को देखा. 2 साल में काफी फर्क आ गया था. चेहरे पर थकान, उम्र व बेजारी साफ झलक रही थी. कुछ बाल उड़ गए थे. बूआ पानी ले आईं. रेहान टूटे लहजे में बोले, ‘शाफी, मैं अपने किए पर बेहद शर्मिंदा हूं. मुझे अपने गलत काम की खूब सजा मिल रही है. बस, मुझे अब माफ कर दो.’

‘क्यों, ऐसा क्या हो गया. आप ने बड़े शौक से, बड़े अरमान से आबी से शादी की थी.’

‘हां, की थी. भूल थी मेरी, अब पछता रहा हूं. आबी बेहद फूहड़, कामचोर और निकम्मी है. काम से तो उस की जान जाती है. कुछ कहो तो कहती है ‘मैं तो पहले से ऐसी हूं तभी तो आप ने मुझ से इश्क किया. सुघड़, सलीकेमंद और घर संभालने वाली तो शाफी आपा थीं. आप ने उन्हें छोड़ कर मुझे क्यों अपनाया? आप तो मेरे ऐब जानते थे. शाफी आपा के सामने आप ही मुझे काम करने से रोकते थे. आप ही मेरे नाजनखरों और अदाओं पर फिदा थे.’

‘शाफी, जब तुम बेहतरीन खाने खिलाती थीं, घर संभालती थीं, सब की खिदमत करती थीं, इश्क एक शगल की तरह लगता. सारी जरूरतें पूरी होते हुए एक नखरीली महबूबा किसे बुरी लगती है? आज ये तल्ख हकीकत खुली कि तुम्हारे बिना घर जहन्नुम है. सारे काम नौकरों के भरोसे हैं. ज्यादातर होटल से खाना आता है. हम ने अपने ऐश की खातिर बच्चों को भी खूब सिर चढ़ाया. अब बेहद बदतमीज हो गए. बहुत ज्यादा मुंहफट. पूरे वक्त आबी से झगड़े होते रहते हैं. मुझे भी काम करने की आदत न थी. जब चीजें तैयार नहीं मिलतीं तो गुस्सा आता है. फिर आबी से लड़ाई हो जाती है. वह भी बराबरी से जबान चलाती है. चीखतीचिल्लाती है. शाफी, जिंदगी अजाब बन गई है. तुम मुझ पर रहम करो. मैं आबी को तलाक दे दूंगा. तुम मेरी जिंदगी में वापस आ जाओ. मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता.’

मुझे यह एहसास था कि ऐसा होगा. आबी मेरी बहन थी, मैं उस के सारे ऐबों से वाकिफ थी. मैं ने सोचा था कालेज करने के बाद उसे घर के काम की बाकायदा ट्रेनिंग दूंगी. उस के पहले ही उस ने सब तहसनहस कर दिया. मैं ने रेहान की तरफ देखा. वह बेहद थका, टूटा हुआ इंसान लग रहा था.

मैं ने कहा, ‘रेहान, अब यह मुमकिन नहीं. आप से खुला लेने के बाद, आप का बेवफा रूप देखने के बाद मेरे दिल में आप के लिए जरा सी मोहब्बत नहीं है, न ही कोई इज्जत है.

‘मैं किसी कीमत पर आप की जिंदगी में दोबारा नहीं आ सकती. बच्चे एक बार रहीम चाचा के साथ मिलने आए थे. उन्हें मिलने भेज देना, मेहरबानी होगी. आप को अब आने की जरूरत नहीं है.’

नम आखें, झुके कंधे और लड़खड़ाते कदमों से रेहान लौट गए. अपने किए गए गुनाह के अजाब उन्हें ही समेटने थे. उन की बरबाद जिंदगी की खबरें मिलती रहती थीं. बच्चे आ कर मुझ से मिल जाते थे. रेहान को वापस गए भी 7-8 साल हो गए.

मैं 3 दिन पहले सोहा के भाई की बेटी की शादी में उस के साथ गई थी. वह वहीं रुक गई, मैं वहां से लौट रही थी कि आज बरसों बाद आबी को देखा. उसी ट्रेन के उसी कोच में वह भी सफर कर रही थी. उसे देख कर दुख हुआ पर मेरी उस से मिलने या बात करने की जरा भी ख्वाहिश न थी. जब मैं अपने स्टेशन पर उतरी, वह दूसरे गेट पर खड़ी मुझे देख रही थी. उस की आंखों से आंसू बह रहे थे. इन आंसुओं को पोंछने का हक वह मुझ से छीन चुकी थी.

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