अब कोई नाता नहीं : अतुल-सुमित में से कौन बना अपना – भाग 2

छोटीमोटी बीमारी होने पर उन्हें पड़ोसियों का सहारा लेना पड़ता था. मगर हर बार यह मुमकिन नहीं था कि जब उन्हें जरूरत पड़े तब पड़ोसी उन की सेवा में हाजिर हो जाएं. इसी बीच देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने कहर ढाना शुरू कर दिया. लौकडाउन के कारण कामवाली बाई यशोदा ने आना बंद कर दिया और घरेलू नौकर किशन अपने गांव चला गया. लोग अपनेअपने घरों में बंद हो गए. रमा को दमे की शिकायत थी तो कांता प्रसाद डायबिटिक थे. चिंता और तनाव ने दोनों को और अधिक बीमार बना दिया था.

सुमित इस संकट की घड़ी में व्हाट्सऐप पर ‘टेक केयर, बाहर बिलकुल मत जाना और जाना पड़ जाए तो मास्क पहन कर जाना, सैनिटाइजर का उपयोग करते रहना, बारबार साबुन से हाथ धोते रहना, सोशल दूरी बनाए रखना’ जैसे महज औपचारिक संदेश नियमित रूप से भेज कर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेता था. एक दिन रात में कांता प्रसाद को तेज बुखार आया. उन्हें लगा, मौसम बदलने से आया होगा. घर में ही दवा खा ली. मगर बुखार न उतरा. 2 दिनों बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी और मुंह का स्वाद चला गया तब रमा को पता चला कि ये तो कोरोना के लक्षण हैं.

रात में करीब एक बजे उन्होंने अतुल को फोन किया और सारी बात बताई. अतुल और उस के पिता ने तुरंत भागदौड़ शुरू कर दी. अतुल ने एक सामाजिक संस्था के यहां से ऐंबुलैंस मंगवाई और अपने पिता के साथ कांता प्रसाद के घर के लिए रवाना हो गया.

बीच रास्ते में अतुल अस्पतालों में बैड की उपलब्धता के लिए लगातार फोन कर रहा था. दोतीन अस्पतालों से नकारात्मक उत्तर मिला, मगर एक अस्पताल में एक बैड मिल गया. अतुल ने कांता प्रसाद को फोन कर के अस्पताल जाने के लिए तैयार रहने के लिए कहा. रात करीब 2 बजे कांता प्रसाद को एक अस्पताल के कोरोना वार्ड में एडमिट कर दिया और ट्रीटमैंट चालू हो गया.

रमा की आंखों में छिपा हुआ नीर आंसुओं का रूप धारण कर उस के गालों को भिगोने लगा जिसे देख अतुल ने कहा, ‘ताईजी, प्लीज आंसू न बहाओ. अब चिंता की बात नहीं है. यह शहर का बहुत अच्छा अस्पताल है. ताऊजी जल्दी ही स्वस्थ हो जाएंगे. ताईजी, अब आप हमारे घर चलो. ताऊजी के ठीक होने तक आप हमारे ही घर पर रहना. अस्पताल में कोरोना मरीज के रिश्तेदारों को ठहरने की अनुमति नहीं है.’

रमा का कंठ रुंध गया था. वह बोल नहीं पा रही थी. खामोशी से अतुल के साथ रवाना हो गई. कांता प्रसाद का औक्सीजन लैवल कम हो जाने से कुछ दिनों तक उन्हें वैंटिलेटर पर रखा गया. फिर उन्हें जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. डाक्टरों ने बताया कि समय पर बैड मिल जाने से उन की जान बच गई है. कुछ ही दिनों के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई. कांता प्रसाद मन ही मन सोच रहे थे कि आज अतुल उन की सहायता के लिए दौड़ कर न आता तो न जाने उन का क्या हाल होता.

इस कोरोना महामारी ने आज इंसान को इंसान से दूर कर दिया है. कोरोना का नाम सुनते ही अपने लोग ही दूरियां बना लेते हैं. ऐसे में अतुल और राम प्रसाद ने अपनी जान की परवा किए बगैर उन की हर संभव सहायता की थी. बुरे वक्त में अतुल ही उन के काम आया था, उन के अपने बेटे सुमित ने तो उन से अब महज औपचारिक रिश्ता बना कर रखा था. वे मन ही मन सोचने लगे कि अब उस से तो नाता रखना बेकार है.

अतुल के साथसाथ कांता प्रसाद भी अतीत की यादों से वर्तमान में लौटे. वे अभी भी अतुल को अपने गले से लगाए हुए थे. अतुल ने अपनेआप को उन से अलग करते हुए कहा, ‘‘ताऊजी, पुरानी बातों को छोड़ दीजिए, मैं तो आप के बेटे के समान हूं. क्या पिता अपने बेटे को डांटताफटकारता नहीं है. फिर आप तो मेरे बड़े पापा हैं. मुझे आप की बातों का कभी बुरा नहीं लगा. अब आप अतीत की कटु यादों को बिसरा दो और अपनी तबीयत का ध्यान रखो. अपनी मैडिकल की दुकान होने से कई बार अस्पतालों में जाना पड़ता है, इसी कारण कुछेक डाक्टरों से मेरी पहचान हो गई है. इसलिए आप को बैड मिलने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई और आप का समय पर इलाज हो गया. अब आप को डाक्टरों ने सख्त आराम की हिदायत दी है.’’

बाद में वह ताईजी की ओर मुखातिब होते हुए बोला, ‘‘ताईजी, अब आप ताऊजी के पास ही बैठी रहोगी और इन का पूरा ध्यान रखोगी, साथ ही, अपना भी ध्यान रखोगी. अब आप की उम्र हो गई है, सो आप दोनों को आराम करना चाहिए. अब आप दोनों को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. अभी कुछ ही देर में दिशा और निशा यहां पर आ रही हैं. वे किचन संभाल लेंगी और घर का सारा काम भी वे दोनों कर लेंगी.’’

अभी अतुल ने अपनी बात समाप्त भी नहीं की कि राम प्रसाद ने अपनी पत्नी सरला और दोनों बेटियों के साथ घर में प्रवेश किया. राम प्रसाद भीतर आते ही कांता प्रसाद के पैर छूने के लिए आगे बढ़े तो कांता प्रसाद ने उन्हें अपने गले से लगा लिया. दोनों की आंखों से गंगाजमुना बहने लगी. एक लंबे अरसे से दोनों के मन में जमा सारा मैल पलभर में आंसुओं में बह गया. दोनों भाइयों को वर्षों बाद गले मिलते देख परिवार के अन्य सदस्यों की आंखें भी पनीली हो गईं.

निशा और दिशा सभी के लिए चायनाश्ता बनाने के लिए रसोई घर की ओर मुड़ गईं. बैठक में कुछ देर तक निस्तब्धता छाई रही जिसे अतुल ने भंग करते हुए कहा, ‘‘ताऊजी, एक बात कहूं, कोरोना महामारी ने लोगों के बीच दूरियां जरूर बढ़ाई हैं पर हमारे लिए कोरोना लकी साबित हुआ है क्योंकि इस ने 2 परिवारों की दूरियां मिटाई हैं.’’ यह कहते हुए वह जोर से हंसने लगा, अतुल की हंसी ने गमगीन माहौल को खुशनुमा बना दिया.

आखिर क्यों शादी के बाद धोखा देते हैं महिला और पुरुष, जानें 9 कारण

Sex News in Hindi: धोखा देना इंसान की फितरत है फिर चाहे वह धोखा छोटा हो या फिर बड़ा. अकसर इंसान प्यार में धोखा खाता है और प्यार में ही धोखा देता है. लेकिन आजकल शादी के बाद धोखा देने का एक ट्रेंड (Trend) सा बन गया है. शादी (Marriage) के बाद लोग धोखा कई कारणों से देते हैं. कई बार ये धोखा जानबूझकर दिया जाता है तो कई बाद बदले लेने के लिए. इतना ही नहीं कई बार शादी के बाद धोखा देने का कारण होता है असंतुष्टि. कई बार तलाक (Divorce) का मुख्‍य कारण धोखा ही होता है. लेकिन ये जानना भी जरूरी है कि शादी के बाद धोखा देना कहां तक सही है, शादी के बाद धोखे की स्थिति को कैसे संभालें. क्या करें जब आपका पार्टनर (Partner) आपको धोखा दे रहा है.

शादी के बाद धोखा देने के कारण

असंतुष्टि-

कई बार पुरूष को अपनी महिला साथी से संभोग के दौरान असंतुष्टि होती है जिसके कारण वह बाहर की और जाने पर विविश हो जाता है और जल्दी ही वह दूसरी महिलाओं के करीब आ जाता है, नतीजन वो चाहे-अनचाहे अपनी महिला साथी को धोखा देने लगता है.

खुलापन-

समाज में आ रहे खुलेपन के कारण भी पुरूष अपनी महिला साथी को धोखा देने से नहीं चूकता. दरअसल, समाज में खुलापन आने के कारण लोग खुली मानसिकता के हो गए हैं जिससे उन्हें विवाहेत्तर संबंध बनाने में भी कोई दिक्कत नहीं होती और महिलाएं भी बहुत बोल्ड हो गई हैं. इस कारण भी पुरूष अपनी महिला साथी का धोखा देते हैं.

संभावनाओं के कारण-

आजकल विवाहेत्तर संबंध बनने की संभावनाएं अधिक हैं यानी विवाहेत्तर संबंध आसानी से बन जाते हैं. जिससे पुरूष अपनी पत्नी को धोखा देने लगते हैं, यह सोचकर कि उन्हें कुछ पता नहीं चलेगा.

आपसी वार्तालाप ना होना-

पुरूष अकसर चाहते हैं कि वो अपनी पत्नी से खूब बातें करें और उनकी पत्नी भी अपनी बातें शेयर करें लेकिन जब आपसी वार्तालाप या संवाद की स्थिति खत्म हो जाती है तो रिश्तों में दरार आने और धोखा देने की संभावना अधिक बढ़ जाती है.

प्रयोगवादी होना-

लोग आजकल नए-नए एक्सपेरिमेंट करते हैं. जब कोई पुरूष रिश्तों से उबने लगता है तो वह एक्सपेरिमेंट करने से नहीं चूकता. लेकिन जब पत्नी इसमें सहयोग नहीं देती तो पुरूष धोखा देने लगते हैं.

महिलाओं का शादी के बाद धोखा देने के कारण

अफेयर होना-

आमतौर पर महिलाएं शादी के बाद पुरूषों को इसीलिए धोखा देने लगती हैं, क्योंकि उनका शादी से पहले किसी से अफेयर होता है या फिर उनका पहला प्रेमी उन्हें परेशान और ब्लैकमेल करता है जिससे वे धोखा देने पर मजबूर हो जाती हैं.

विश्वास ना होना-

इसीलिए कुछ महिलाएं धोखा देने लगती हैंक्योंकि उनका पति उन पर विश्वास नहीं करता या फिर बिना किसी वजह शक करता है.

बोरियत होना-

कई बार महिलाएं घर में रहकर या फिर एक ही तरह के रूटीन से बोर हो जाती हैं और अकेले रहते-रहते वे बाहर की और आकर्षित होती हैं. नतीजन कई बार उनके इससे विवाहेत्तर संबंध भी बन जाते हैं.

साथी से विचार ना मिलना

कई बार पति से विचार ना मिलना या फिर हर समय घर के झगड़े के कारण भी महिलाएं बाहर की ओर आकर्षित होती हैं.

इसके अलावा भी बहुत से कारण हैं जिससे महिलाएं और पुरूष शादी के बाद भी अपने साथी को धोखा देने लगती हैं.

उम्र में पत्नी से छोटे पति

Society News in Hindi: साल 1998 में अरबाज खान से शादी कर साल 2017 में तलाक लेने वाली 45 साला बौलीवुड की मशहूर ‘आइटम गर्ल’ मलाइका अरोड़ा अब अपने से 12 साल छोटे अर्जुन कपूर के साथ रिलेशनशिप में हैं. वे दोनों अब पब्लिकली नजर आने लगे हैं. उन की शादी होगी, ऐसी खबरें भी उड़ने लगी हैं. दोनों के डिनर डेट की तसवीरें वायरल हो रही हैं. 43 साल की सुष्मिता सेन पिछले कुछ दिनों से अचानक अपने अफेयर को ले कर फिर से चर्चा में हैं. इस बार वे खुद से 15 साल छोटे रोहमन शौल के साथ रिलेशनशिप को ले कर खबरों में हैं. वे दोनों कई पार्टियों में साथ भी नजर आए हैं.

खबरों में यह भी है कि रोहमन शौल ने सुष्मिता सेन को शादी के लिए प्रपोज किया है. वे दोनों तकरीबन 2-3 महीने पहले एक फैशन इवैंट में मिले थे और अब एकदूसरे को डेट कर रहे हैं.

प्रियंका चोपड़ा भी अपनी शादी से पहले पिछले दिनों न्यूयौर्क में प्रीब्राइडल सैरेमनी के बाद अपनी गर्लगैंग के साथ बैचलर पार्टी के लिए एमस्टरडम रवाना हुई थीं. उस के बाद वे अपने से 11 साल छोटे निक जोनस के साथ शादी कर चुकी हैं.

कुछ समय पहले अपने से 7 साल छोटे हर्ष से शादी कर कौमेडियन भारती ने भी सब को अचरज में डाल दिया था. इस से पहले 41 साल की उम्र में प्रीति जिंटा ने अपने से 10 साल छोटे फाइनैंशियल एनालिस्ट जीन गुडइनफ से शादी कर ली थी तो उर्मिला मातोंडकर ने भी 9 साल छोटे मोहसिन से शादी कर सब को हैरत में डाल दिया था.

जाहिर है कि पढ़ाईलिखाई, नौकरी और अपने पैरों पर खड़े होने के बाद अब औरतें रिलेशनशिप और शादी को ले कर भी खुल रही हैं.

पहले जब औरतें घर से बाहर नहीं निकलती थीं तब उन्हें आदमी के पैर की जूती माना जाता था. उन के पास कोई हक नहीं था. पति की बात मानना, उस के मुताबिक खुद को ढालना और पति जब कहे समर्पण के लिए तैयार रहना, यही आदर्श पत्नी की खासीयतें थीं.

मगर अब माहौल बदल रहा है. आज औरतें पढ़लिख कर आगे बढ़ रही हैं. वे काबिल बन रही हैं. वे भरपूर नाम, पैसा और रुतबा हासिल कर रही हैं. ऐसे में वे पति का दबदबा क्यों सहें?

इस सिलसिले में मनोवैज्ञानिक और सोशल ऐक्टिविस्ट अनुजा कपूर कहती हैं कि अगर मर्द कम उम्र की लड़की से शादी कर सकता है, 15 साल की लड़की 45 साल के अधेड़ की बीवी बन सकती है, तो औरतें खुद से छोटे लड़कों को पति क्यों नहीं बना सकतीं?

आज औरतें कामयाब हैं. अपने पैरों पर खड़ी हैं. उन्हें अपने हक और कानून मालूम हैं. वे आदमी के बिना भी रह सकती हैं. वे घर के काम आराम से कर सकती हैं और बाहर के काम भी, इसलिए उन की जिंदगी में मर्द की अहमियत अब उतनी नहीं रही है.

पहले औरतों की शादी ज्यादा उम्र के शख्स से की जाती थी ताकि वे पति के कंट्रोल में रहें. उन की हर बात माने. ज्यादा उम्र के मर्दों के पास पैसा, तजरबा और रुतबा सबकुछ होता था. आज औरतें खुद ही इतनी काबिल, पढ़ीलिखी और कमाऊ हैं तो वे किसी का रोब क्यों सहें? वे अपने से कम उम्र के मर्द से शादी कर उस पर दबदबा बना कर रख सकती हैं. इसे एकदम से गलत भी नहीं माना जा सकता है, क्योंकि जो ज्यादा काबिल और रुतबेदार होगा वही दूसरे पर हावी रहेगा. यही समाज का नियम है.

सवाल उठता है कि मर्द क्यों अपने से ज्यादा उम्र की लड़की या औरत से शादी करते हैं? इस की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे:

समझदार और अनुभवी

बड़ी उम्र की पत्नी स्वभाव से गंभीर होती है. उन के साथ रिलेशनशिप में कम उम्र वाले ड्रामों और बचपने की गुंजाइश नहीं रहती, बल्कि आपसी समझ बनी रहती है. उन्हें हर मामले में ज्यादा तजरबा रहता है.

रुपएपैसे से मदद

बड़ी उम्र की कमाऊ पत्नी पैसे के लिहाज से भी मजबूत होती है. अपने पति के कैरियर को आगे बढ़ाने में और सैटल होने में भी मददगार रहती है. वह हर मामले में बेहतर सलाह दे सकती है और अपने संपर्कों से पति को फायदे में पहुंचा सकती है.

ये औरतें कम उम्र की ऐसी हाउस वाइफ से बेहतर होती हैं जो पैसों की अहमियत नहीं समझती हैं, बेमतलब का खर्च करने की आदी होती हैं और पूरी तरह पति पर निर्भर होती हैं.

सब्र और परवाह वाली

बड़ी उम्र की बीवी कम मांग करती है और ज्यादा देखभाल करती है. वह पूरा प्यार देना जानती है. फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में ऐश्वर्या राय बच्चन का किरदार कुछ ऐसा ही था. वे रणबीर कपूर के साथ ऐसे ही एक रिश्ते में थीं जहां वे फेमस शायर थीं तो वहीं रणबीर कपूर टौय बौय की तरह उन के साथ जुड़े थे.

जहां तक बात साथ जिंदगी जीने की है तो क्या ऐसे रिश्ते कामयाब होते हैं? क्या हैल्थ और सैक्सुअल समस्याएं आ सकती हैं?

इस बारे में सैक्सुएलिटी पर काफी काम कर चुके अल्फ्रैड विनसे के मुताबिक, मर्दों में सैक्सुअल हार्मोन

18 साल की उम्र में हद पर होते हैं, जबकि औरतों में 30 साल की उम्र के बाद यह समय होता है. हैल्थ के नजरिए से भी औरतें 5 साल ज्यादा जीती हैं. ऐसा होने की वजह लाइफस्टाइल या बायोलौजी नहीं है.

एक विधुर के अनुपात में उसी उम्र की 4 विधवाएं जिंदा रहती हैं यानी अपने से ज्यादा उम्र की लड़की के साथ शादी करने वाले मर्द पत्नी के साथ ही बूढ़े होते हैं.

वैसे भी प्यार में उम्र का फर्क माने नहीं रखता. जिंदगी किस के साथ और किस तरह बीती, यह अहम होता है.

मेरी पत्नी सेक्स करने में इंटरेस्टेड नहीं है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 55 वर्षीय पुरुष हूं. मैंने प्रेमविवाह किया था. मैरिड लाइफ अभी तक तो मजे में प्यार से भरी रही लेकिन पिछले 1-2 महीने से नोट कर रहा हूं कि पत्नी की रुचि सैक्स में कम होने लगी है, जबकि मुझ में सैक्स की वही चाहत भरी हुई है जो मैं जवानी में महसूस करता था. पत्नी की उदासीनता की वजह क्या हो सकती है?

जवाब

आप ने पत्नी की उम्र नहीं लिखी. खैर, वे आप की उम्र की या आप से कुछ छोटीबड़ी होंगी, मेनोपौज के दौर से गुजर रही होंगी या हो चुका होगा. सैक्स के प्रति महिलाओं में अरुचि पैदा होने की यह अहम वजह होती है. पत्नी का खानपान कैसा है, इस पर ध्यान दें. औरतें अकसर अपनी डाइट पर ध्यान नहीं देती हैं और आयरन की कमी की वजह से अकसर एनिमिया की शिकार हो जाती हैं, जिस से जननांगों में सही से ब्लड सर्कुलेशन नहीं होता और सैक्सड्राइव कम होने लगती है.

ध्यान दें कि कहीं आप की पत्नी काम में अत्यधिक व्यस्त तो नहीं रहतीं. नींद पूरी लेती हैं कि नहीं. कई शोधों में इस बात का पता चला है कि जो लोग अच्छी नींद लेते हैं उन की सैक्सलाइफ बेहतर होती है.

पत्नी को किसी तरह का स्ट्रैस तो नहीं. स्ट्रैस अगर लगातार रहता है तो मन में सैक्स के प्रति इच्छा ही नहीं होती. ज्यादा समय तक अगर स्ट्रैस रहता है तो टैस्टोस्टेरौन हार्मोन का उत्पादन भी कम होता है जो सैक्सलाइफ के लिए सब से अहम होता है.

देखिए, कहीं यही वजहें तो नहीं हैं आप की पत्नी की सैक्स के प्रति अरुचि की. अपनी तरफ से भी पत्नी को खुश रखने का प्रयास करें. इस उम्र में पत्नी को पति का इमोशनल सपोर्ट ज्यादा चाहिए होता है, सैक्सलाइफ अपनेआप बेहतर हो जाती है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

पहले सास के साथ बनाए अवैध संबंध, फिर इस वजह से कर दिया मर्डर

Crime News in Hindi: दिलचस्प और चिंतनीय मामला भोपाल के अशोका गार्डन इलाके का है. जुर्म और देह व्यापार के लिए बदनाम इस इलाके में बीती 20 अक्तूबर को उस वक्त सनसनी मच गई जब एक अधेड़ उम्र की औरत की लाश अशोक विहार कालोनी के एक फ्लेट से बरामद हुई. पुलिस को इसी इलाके के एक वाशिंदे ने खबर दी थी कि कालोनी के एक फ्लेट में कत्ल हो गया है. पुलिस जब फ्लेट पर पहुंची तो वहां उसका सामना खून से लथपथ पड़ी शाहीन नाम की औरत की लाश से हुआ.

लाश को पोस्ट मार्टम के लिए भेजकर पुलिस ने पूछताछ और छानबीन शुरू की तो कई चौंका देने वाली बातें सामने आईं जिनमें से पहली यह थी कि शाहीन देह व्यापार करती थी और इस फ्लेट में एक नौजवान नाम शाहरुख खान के साथ रहते थी जो उसका दामाद है. दरअसल में कुछ साल पहले ही शाहरुख की शादी शाहीन के बेटी शबनम ( बदला नाम ) से हुई थी.

आमतौर पर जैसा होता है कि शादी के बाद के कुछ दिन तो ठीक ठाक गुजरे लेकिन इसके बाद शाहीन और शाहरुख एक दूसरे को दिल दे बैठे. जब सास जवाईं के मन मिल गए तो तन मिलने में भी देर नहीं लगी. दोनों पहले तो चोरी छुपे और फिर चोरी न छुपने पर दिन दहाड़े जिस्मानी ताल्लुकात बनाने लगे. नौबत यहां तक आ पहुंची कि शबनम कुछ न कर पाने की बेबसी के चलते अपने नाना के यहां रहने चली गई और शाहीन ने दामाद शाहरुख को पाने के लिए अपने शौहर को तलाक दे दिया. इसके बाद सास दामाद दोनों अलग लिव इन में रहने लगे.

अब तक बात समाज और रिश्तेदारी में आम हो चुकी थी लेकिन किसी ने इनके चक्कर में अपनी टांग नहीं अड़ाई . कुछ दिनों बाद ही शाहरुख को एक ऐसी बात पता चली जो कुछ लोगों को पहले से ही मालूम थी कि शाहीन देह व्यापार करती है. यह बात जानकारी में आते ही शाहरुख ने उसे इस दलदल से बाहर आने को कहा तो शाहीन ने इंकार कर दिया. लिहाजा दोनों में हर कभी झगड़ा होने लगा. अब शाहरुख को समझ आया कि देह व्यापार करने वाली अपनी सास के लिए उसने शबनम जैसी नेक बीवी को छोडकर भारी गलती कर डाली है लेकिन बात इतनी बिगड़ चुकी थी कि अब कुछ हो भी नहीं सकता था.

शबनम पर जो गुजर रही थी उसका अंदाजा शायद ही कोई लगा सके. एक तरफ जन्म देने वाली मां थी तो दूसरे तरफ वह शख्स था जिसे वह निकाह के बाद सरताज मानने लगी थी लेकिन इन दोनों ने ही उसके जज़्बातों और अपने रिश्ते की कद्र और परवाह ना करते जो किया था वह किसी भी बीवी के लिए किसी सदमे से कम नहीं था .

बहरहाल अपने किए पर पछता रहे शाहरुख ने शाहीन को 19 अक्तूबर को फिर समझाया कि वह जिस्म के कारोबार को छोड़ दे और उसके साथ इज्जत से रहे तो शाहीन ने साफ मना कर दिया. इस पर दोनों में खूब झगड़ा हुआ और गुस्साये शाहरुख ने अपनी सास या लिव इन पार्टनर कुछ भी कह लें का गला रेत दिया और उसे तड़प तड़प कर मरने छोड़ फरार हो गया.

जाते जाते उसने यह बात और शाहीन की हकीकत अपने एक दोस्त को बता दी थी. इसी दोस्त के जरिये पुलिस को पता चला कि मामला क्या था तो पुराने मामले खोलने यानि तफ्शीश में उसे पता चला कि शाहीन एक साल पहले ही देह व्यापार के मामले में गिरफ्तार भी हो चुकी है. इन लाइनों के लिखे जाने तक शाहरुख गिरफ्तार नहीं हो पाया था लेकिन लग नहीं पा रहा कि वह ज्यादा दिनों तक पुलिस से बच पाएगा.

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि शाहीन ने क्या सोचकर अपनी ही बेटी का घर उजाड़ डाला और बेटे समान दामाद के साथ शारीरिक संबंध बना डाले, इस बारे में हालफिलहाल सभी खामोश हैं शाहीन का शौहर भी कुछ नहीं बोल रहा और शबनम भी चुप है और यह तय है कि इन दोनों के पास बोलने को कुछ बचा भी नहीं है, एक का शौहर बेईमान निकला तो दूसरे की बीबी बेवफा निकली.

जाने क्यों शाहरुख ने भी यह नहीं सोचा कि अच्छी खासी जवान बीवी को छोड़ अधेड़ उम्र की बदचलन सास के साथ नाजायज तरीके से रहने से उसे क्या मिलेगा. अब अदालत में जो होगा सो होगा लेकिन असल इंसाफ तो हो ही गया है. शाहीन ने बेटी से उसका शौहर छीनने का जो गुनाह किया था उसकी सजा तो उसे वही दामाद दे गया और शाहरुख बीवी को छोड़ सास को ही बीवी बनाने की सजा अभी फरारी की शक्ल में भुगत रहा है और पकड़े जाने के बाद जेल की चक्की पीसते भुगतेगा.

हर मां चाहती है कि बेटी को हेंडसम और स्मार्ट पति मिले जो उसे दुनिया भर के सुख दे लेकिन इस मामले को देख लगता है कि शायद शाहीन शबनम से जलती थी जो उसने जानबूझकर शाहरुख को अपने हुस्न और अदाओं के जाल में फंसाया, तब उसे लगा होगा कि अब शाहरुख भी उसके इशारों पर नाचेगा लेकिन यह वह भूल गई थी कि शाहरुख उसका ग्राहक नहीं बल्कि कम उम्र कच्चा आशिक है जो उसे सही रास्ते पर लाना चाहता था पर वह नहीं मानी तो अंजाम एक हैरतअंगेज जुर्म की शक्ल में सामने आया.

आस्तीन का सांप

रात के 2 बज रहे थे. घर के सभी लोग गहरी नींद में थे. रीमा चुपचाप उठी और बगल वाले कमरे में चली गई. उस कमरे में उस का देवर सूरज सो रहा था.

रीमा सूरज के बगल में आ कर लेट गई और उस के बालों में उंगलियां फिराने लगी. उस के लगातार ऐसा करते रहने से सूरज जाग गया और बगल में अपनी भाभी को लेटा देख धीरेधीरे मुसकराने लगा. एकदूसरे को सहलाते और चूमते रहने के बाद देवरभाभी ने जब तक ताकत रही जम कर एकदूसरे के साथ खेले.

दोनों को एकदूसरे के साथ लेटे हुए सुबह के 5 बज चुके थे. रीमा जब अपने कमरे में जाने लगी, तो सूरज ने उसे पकड़ कर फिर से घसीट लिया.

‘‘जाने दो न, तुम्हारे भैया जाग गए होंगे,’’ रीमा ने इठलाते हुए कहा.

‘‘अरे भाभी, जाग गए होंगे तो जागने दो न उन्हें. मैं ने तुम्हें पाने के लिए कितनाकुछ किया है. वैसे भी उन को यह सब हमारा प्लान समझ में नहीं आएगा. इतने स्मार्ट नहीं हैं वे,’’ सूरज ने अंगड़ाई लेते हुए कहा.

सूरज की इस बात पर दोनों ही खिलखिला कर हंसने लगे और रीमा अपनी साड़ी और पल्लू सही कर के अपने कमरे में चली गई, जहां उस का पति बिरज सो रहा था. उस ने एक नजर अपने पति की ओर डाली और उस के माथे को चूम लिया.

बिरज ने आंखें खोलीं और कहने लगा, ‘‘रीमा, तुम मुझे कितना प्यार करती हो. रोज मेरे माथे पर चूम कर जगाती हो. मुझे यह बहुत अच्छा लगता है. मैं कितना खुशनसीब हूं, जो मुझे तुम्हारी जैसी पत्नी मिली,’’ यह कह कर बिरज ने रीमा को अपनी बांहों में भर लिया.

बिरज और सूरज का कपड़ों का कारोबार था. बिरज बहुत ही सीधा और सज्जन था, जबकि सूरज एक आवारा और गलत संगत में पड़ कर इधरउधर पैसे बरबाद करने वाला लड़का बन गया था.

सारा कारोबार बिरज ने ही संभाल रखा था, जबकि सूरज सिर्फ इधरउधर घूमता और दोस्तों पर पैसे लुटाता था.

सूरज को एक लड़की से प्यार भी हो गया था, जिस से वह शादी करना चाहता था. वह लड़की और कोई नहीं, बल्कि बाद में उस की भाभी बन चुकी रीमा ही थी, पर उस समय जब सूरज ने रीमा के घर वालों से अपनी शादी की बात कही तो रीमा के पिताजी ने साफ मना कर दिया था, ‘हम तुम्हारे जैसे आवारा लड़के से अपनी बेटी की शादी नहीं करेंगे.’

पर, सूरज और रीमा के लिए एकदूसरे के बिना रह पाना नामुमकिन था. जब दोनों को अपनी शादी हो पाना मुश्किल लगा, तो दोनों ने आपसी रजामंदी से एक योजना बनाई.

हालांकि बिरज और सूरज दोनों सगे भाई थे, पर उन में काफी खुलापन था. लड़कियों को ले कर भी आपस में काफी हंसीमजाक भी चल जाता था.

इसी बात का फायदा सूरज ने उठा लिया और अपने मोबाइल फोन में रीमा का फोटो दिखाया. फोटो देखते ही बिरज को रीमा बहुत पसंद आ गई.

‘‘अरे सूरज, यह लड़की तो बहुत खूबसूरत है,’’ बिरज ने उतावला होते हुए कहा.

‘‘हां भैया, खूबसूरत तो है. पसंद हो, तो बात चलाऊं?’’ सूरज ने पांसा फेंका.

‘‘अरे, नहींनहीं. ये सब अच्छी बातें नहीं हैं,’’ बिरज थोड़ा शरमा सा गया.

‘‘अरे भैया, शरमा क्यों रहे हो? यह इस का ह्वाट्सएप नंबर है और चैटिंग शुरू कर दो,’’ सूरज ने एक और दांव फेंका.

बिरज सीधासादा लड़का था. जमाने की हवा उसे लगी नहीं थी, इसलिए उसे सूरज की चाल समझ में नहीं आई. उस ने धीरेधीरे रीमा से फोन पर बातें शुरू कर दीं.

रीमा ने भी बिरज को अपने प्रेम में गिरफ्तार कर लिया और जब ऐसा लगने लगा कि वह रीमा के बिना नहीं रह पाएगा, तब उस ने खुद ही अपनी मां से अपने मन की बात कह दी.

बिरज के पिता की मौत 4 साल पहले ही हो चुकी थी. बड़े दिनों के बाद बिरज की मां ने उस की आंखों में कोई चमक देखी थी, इसलिए वे बिरज को मना न कर पाईं और शादी के लिए न सिर्फ हां कर दी, बल्कि खुद ही रिश्ता ले कर रीमा के घर पहुंच गईं.

रीमा के घर वालों को भी कोई दिक्कत नहीं हुई और जब उन्होंने रीमा का मन टटोला तो उस की भी रजामंदी देख रीमा के घर वालों ने रीमा और बिरज की शादी करा दी.

सुहागरात के दिन जब बिरज अपने कमरे में पहुंचा और रीमा का चेहरा देख जब उस ने संबंध बनाना चाहा, तो रीमा ने मना कर दिया.

‘‘क्या आप ने सिर्फ शरीर के लिए मुझ से शादी की है?’’ रीमा ने बिरज से धीरे से पूछा.

नई दुलहन से बिरज को ऐसे सवाल की उम्मीद नहीं थी, इसलिए वह एकदम सकपका सा गया.

‘‘नहीं, लेकिन दोस्त कहते हैं कि पहली रात में यह सब जरूरी होता है,’’ बिरज ने शरमाते हुए कहा.

‘‘देखिए, मुझे अभी पढ़ाई करनी है, इसलिए मैं इन सब कामों में नहीं पड़ना चाहती हूं. जब मेरा रिजल्ट आ जाएगा, तभी हमारे बीच में कोई संबंध बन सकेगा,’’ रीमा ने समझाने वाले अंदाज में कहा.

बिरज भोला था. वह रीमा की बातों में आ गया और यही समझता रहा कि रीमा पढ़ाई में बिजी है, इसलिए उस ने फिर संबंध बनाने के लिए जबरदस्ती नहीं की.

लेकिन बिरज को क्या पता था कि उस का भाई सूरज ही उस के साथ दुश्मनी कर रहा है.

बिरज तो अपने काम में बिजी रहता और रीमा और सूरज जवानी के मजे लूट रहे थे. अब उन लोगों को किसी की परवाह नहीं थी. वैसे भी सूरज और रीमा में भाभीदेवर का रिश्ता था, इसलिए मां को भी शक नहीं हुआ.

रीमा कभीकभी डाक्टर को दिखाने को कहती तो बिरज यही कह देता कि आज दुकान पर बहुत काम है. तुम सूरज के साथ चली जाना. फिर क्या था, रीमा और सूरज घर से निकल जाते और किसी होटल में 3-4 घंटे मजे कर के लौट आते.

किसी ने सोचा भी न था कि एक प्रेमी जोड़ा अपने प्रेम को कायम रखने के लिए किस कदर गंदे खेल को अंजाम दे सकता है.

बिरज और रीमा की शादी को एक साल बीत चुका था, पर उसे अभी तक रीमा के शरीर का सुख नहीं मिला था. जब बिरज से न रहा गया तो उस ने शरमाते हुए यह बात अपनी मां से बता दी.

बिरज की मां को कुछ अजीब सा तो लगा, पर उन्होंने सोचा कि पढ़नेलिखने वाली लड़की है, अभी से बच्चों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती, यह सोच कर उन्होंने उलटे ही बिरज को समझा दिया.

एक दिन की बात है. बिरज शाम को दुकान बंद कर के घर लौट रहा था. रीमा के लिए गजरा लेने के लिए वह एक दुकान की तरफ बढ़ा, तभी एक पान की गुमटी के पीछे से सूरज की आवाज आती हुई सुनाई दी, जो अपने दोस्तों के साथ मस्ती कर रहा था. बिरज वहीं रुक कर सूरज की बातें सुनने लगा.

एक दोस्त सूरज से कह रहा था, ‘‘अरे भाई सूरज, दिमाग हो तो तेरे जैसा. कैसे अपनी गर्लफ्रैंड को तुम ने अपनी भाभी बना लिया और अब तो जब चाहे जितनी चाहे उतनी बार मौज ले सकता है.’’

‘‘अरे यार, मैं यह सब नहीं करना चाहता था, पर रीमा का बाप मुझ जैसे आवारा लड़के से अपनी लड़की की शादी करना ही नहीं चाहता था, इसलिए मुझे उस की शादी अपने भैया से करवाने का यह नाटक करना पड़ा,’’ सूरज नशे में सब कहे जा रहा था.

बिरज के कानों में मानो किसी ने पिघला सीसा भर दिया था.

‘‘लेकिन… दोस्तो, रीमा भी बड़ी चालाक निकली. उस ने आज तक भैया को अपना शरीर छूने तक नहीं दिया है, पर उसे क्या मालूम कि रीमा के सीने पर मैं कई बार अपनी कलाकारी दिखा चुका हूं और आगे भी दिखाता रहूंगा,’’ इतना कह कर सूरज जोरजोर से हंसने लगा.

अपने खिलाफ इतना बड़ा धोखा होने की उम्मीद बिरज को सपने में भी नहीं थी और जिस तरह से सूरज ने रीमा के लिए गलत बातें कह रखी थीं, उन से बिरज का खून उबाल मारने लगा था.

‘‘बेईमान, कमीने, धोखेबाज, भाई हो कर तू ने भाई को धोखा दिया,’’ चिल्लाते हुए बिरज ने सूरज को एक जोरदार तमाचा मार दिया.

अपने दोस्तों के सामने हुई इस बेइज्जती को सूरज सहन नहीं कर पाया और उस ने भी बिरज पर हाथ छोड़ दिया. दोनों भाई आपस में ही लातघूंसे चलाने लगे.

सूरज का खून गरम तो था ही, उस पर शराब ने और भी गरमी चढ़ा रखी थी और ये गरमी तब शांत हुई, जब उस ने शराब की टूटी बोतल अपने भाई बिरज के सीने में उतार दी.

दर्द से छटपटाता बिरज खून से नहा उठा था और कुछ देर में वह शांत हो गया. उस की मौत हो चुकी थी.

सामने भाई बिरज की लाश देख कर सूरज पहले तो घबराया, पर बाद में पुलिस की कार्यवाही और इस झमेले से बचने के लिए उस ने प्लान बनाया.

सूरज और उस के दोस्तों ने पुलिस में यह बताया कि कोई लूटने के मकसद से बिरज का खून कर गया है और पर्स, मोबाइल फोन, घड़ी वगैरह भी उन लोगों ने ठिकाने लगा दिया.

बिरज अपने हाथ में एक सोने की अंगूठी पहने रहता था, जिस पर सूरज का दिल आ गया, इसलिए वह अंगूठी सूरज ने पुलिस को न दे कर अपने पास रख ली.

पुलिस ने भी सूरज की बात को सच मान लिया और लूट का केस मान कर केस बंद कर दिया. बिरज की मां ने भी अपनी फूटी किस्मत समझ कर आंसू पोंछ लिए.

बिरज के मरने के बाद मां एकदम अकेली हो गई थीं और वे रीमा के कमरे में ही सोने लगी थीं.

मां के रीमा के साथ में सोने से सूरज और रीमा का बनाबनाया खेल चौपट सा दिखने लगा, क्योंकि अब उन दोनों को जिस्मानी जरूरतें पूरी करने की आजादी नहीं मिल पा रही थी, इसलिए सूरज ने मन ही मन एक दूसरा प्लान बनाया.

‘‘मां, बिरज भैया के जाने के बाद से आप बड़े अशांत रहने लगी हो, आप को शांति मिले, इसलिए चलो, मैं आप को और भाभी को हरिद्वार घुमा लाता हूं.

‘‘कुछ दिन आश्रम में रहेंगे तो मन भी हलका हो जाएगा,’’ सूरज ने मासूमियत भरे लहजे में अपनी मां से कहा.

‘‘अरे बेटा, मैं अब बूढ़ी हड्डियां ले कर कहां जाऊंगी. तुम और रीमा ही हो आओ, मैं यहीं रह कर घर की देखभाल करूंगी,’’ मां ने कहा.

अंधे को क्या चाहिए दो आंखें. सूरज और रीमा जो चाहते थे, वही उन को मिल गया. फिर क्या था, दोनों ने खूब रुपयापैसा इकट्ठा किया और निकल पड़े शांति की तलाश में.

पहले तो शहर में जा कर उन्होंने होटल में कमरा लिया और जी भर कर अपने जिस्मों की प्यास बुझाई.

इधर सूरज की मां घर में अकेली होने के चलते घर की साफसफाई में लग गईं. सफाई के दौरान उन्हें सूरज के कमरे की अलमारी में बिरज की वह अंगूठी मिली, जो सूरज उस को मारने के बाद ले आया था. अचानक से बिरज को लूट लिया जाना, जबकि बिरज कई सालों से उस रास्ते से आताजाता था और आज अचानक से बिरज की अंगूठी का सूरज की अलमारी में मिलना मां के दिल में शक सा पैदा कर गया.

मां ने कमरे को और खंगाला तो पाया कि उस की बहू रीमा की चुन्नी भी सूरज के कपड़ों में मिली. मां समझ गई कि क्या मामला है. लेकिन, वे कर क्या सकती थीं.

उन्होंने सूरज के दोस्तों को घर पर बुलाया और बातोंबातों में सारा भेद उगलवा लिया. अब उन के पास एक ही उपाय था, दोनों की शादी कर देना, ताकि देवरभाभी का खेल किसी को पता नहीं चले.

मां को मालूम था कि अब रीमा के मातापिता भी कुछ न कहेंगे, क्योंकि वे विधवा बेटी का बोझ क्यों संभालेंगे.

नीरज कुमार मिश्रा

भोली गाय : राम और रेखा की अनोखी कहानी

कि सान रमुआ के बेटों राम व रणवीर की शादी उन्हीं की तरह 2 जुड़वां बहनों रेखा और सीमा से हुई थी. रेखा 2 मिनट बड़ी थी, पर लगती छोटी थी. सीमा सुडौल और चुस्त लगती थी. पर एक मिनट बड़े भाई राम और रणवीर में कोई फर्क नहीं दिखता था.

रमुआ सब की मदद करने वाला और मीठा बोलने वाला इनसान था. उस के पास 50 एकड़ जमीन, पक्का मकान और कहना मानने वाले बेटे थे, जो पिता को मां की कमी खलने नहीं देते थे.

शादी के बाद दोनों बहनें सुखी थीं और घर का ध्यान रखती थीं. रेखा को सब गाय जैसी सीधी मानते थे और वह सब के खानेपीने का ध्यान रखती थी. सीमा सारा समय खेतों में लगा देती थी. छोटा भाई रणवीर बड़े भाई राम और भाभी रेखा का कहना मानता था.

राम कभीकभी बीज लेने और गल्ला बेचने शहर जाता था. रणवीर घर और खेत का काम देखता था. राम रात होने से पहले घर आ जाता था.

राम ने एक दिन सरपंच से सुना कि पास के कृषि महाविद्यालय में उन्नत खेती की एक महीने की पढ़ाई करने पर सरकार ट्रैक्टर खरीदने के लिए कर्ज दे देती है.

राम ने अपना नाम लिखवा दिया. रेखा को यह अच्छा नहीं लगा, पर राम चला गया. रेखा उदास हो गई.

2-3 दिन सब ठीक रहा, पर चौथे दिन जब सब खेत पर थे, तो रणवीर किसी काम से घर आया. दरवाजा बंद करते ही रेखा रणवीर से लिपट गई और कहने लगी, ‘‘आप जल्दी आ गए, बहुत अच्छा किया. मैं आप के बिना नहीं रह सकती.’’

सजीधजी रेखा के ऐसा करते ही रणवीर हैरान हो गया, पर रेखा अपनी कोशिश में आगे ही बढ़ती गई और जो नहीं होना था हो गया.

रणवीर ने संयत होने के बाद कहा, ‘‘भाभी, मैं रणवीर हूं. आप ने बोलने का मौका ही नहीं दिया और यह सब हो गया.’’

‘‘पगले, मैं तुम दोनों भाइयों को पहचानती हूं. मैं अपने को रोक नहीं पा रही थी, इसलिए यह नाटक किया.’’

तब रणवीर बोला कि यह ठीक नहीं है, तो रेखा ने गुस्से में कहा, ‘‘अगर अब मुझे छोड़ा, तो मैं तुम्हें बदनाम कर दूंगी. मैं सीमा से खूबसूरत हूं.’’

यह सुन कर रणवीर डर गया और बोला, ‘‘सच है कि आप सीमा से ज्यादा खूबसूरत हैं. मैं आप को नहीं छोड़ूंगा.’’

तब से उन में यह सैक्स का खेल शुरू हो गया और राम के आने पर भी यह सिलसिला नहीं थमा. एक दिन पता चला कि सीमा पेट से है और घर पर रहेगी.

यह सुन कर रेखा खुश दिखी, मगर सोच में पड़ गई. थोड़े दिन बाद रेखा के पेट से होने की खबर मिली, तो रमुआ बहुत खुश हुआ और दोनों बहुओं को

2-2 सोने के कड़े दिए और गांव में मिठाई बांटी.

अब रेखा अपना और सीमा का बहुत ध्यान रखती थी. सीमा को कम से कम काम करने देती थी और ससुर को भी अच्छी तरह खिलानेपिलाने लगी थी.

एक दिन राम रेखा को शहर ले गया. शहर की रौनक देख कर रेखा दंग रह गई और उस ने खुशीखुशी आने वाले बच्चों के लिए खूब कपड़े खरीदे.

दोनों ने सिनेमा भी देखा. शहर का खाना भी रेखा को अच्छा लगा. मौजमस्ती में काफी समय लग गया. यहां तक कि आखिरी बस भी छूट गई.

राम का दोस्त राजू, जो ट्रक चलाता था, अचानक मिल गया. राम ने अपनी समस्या बताई, तो राजू ने घर छोड़ने की हामी भर दी.

रेखा के कहने पर भी दोनों ने जल्दी नहीं दिखाई. दोनों ने बैठ कर काफी देर तक शराब पी. रेखा सोचती थी कि उस का पति पीता नहीं है, पर यह देख कर उसे लगा कि वह अपने पति को जानती नहीं है. तब उसे यह भी पता लगा कि जब वह शहर में रहता है, तो पीता है, पर घर पर पिता रमुआ से डरता है और भाई के कारण आदत नहीं डालता है.

खैर, पीना बंद कर के राजू ने ट्रक चलाना शुरू किया. बरसात और कच्ची सड़क के कारण ट्रक ठीक नहीं चल पा रहा था, पर ट्रक को राजू ज्यादा तेज चला रहा था.

रेखा के कहने पर भी राजू ने ट्रक की स्पीड कम नहीं की. अचानक ही अंधेरे में बिजली चमकी, तो उस ने देखा कि आगे रोडरोलर है और ट्रक बड़ी तेजी से उस से टकराया और पलट गया. रेखा जमीन पर गिरी और बेहोश हो गई.

रेखा को जब होश आया, तो उस ने अपनेआप को पट्टियों से बंधा पाया और मुंह पर एक सांस लेने वाली किसी चीज को लगा देखा. यह सब उस ने फिल्मों में देखा था और अब वह घबरा गई थी.

उस ने अपने हाथपैरों को हिलाया और ठीक पाया. इस के बाद उस ने पेट पर हाथ फेरा और ‘उई मां’ चिल्लाई.

यह सुन कर नर्स भागी आई, तो वह जोर से बोली, ‘‘मेरे बच्चे को क्या हुआ? मेरे पति कहां हैं? मैं कहां हूं?’’ यह बोल कर वह रोने लगी.

तब नर्स ने डाक्टर को बुलाया. उस ने आ कर हिम्मत बंधाने की कोशिश की और सीमा को बुला लिया.

सीमा ने आ कर बहन के साथ लिपट कर कहा, ‘‘बच्चे तो बाद में आ जाएंगे. तुम बच गईं, यही काफी है. राम भैया और किसी का भी अभी मत सोचो,’’ यह सुन कर रेखा सो गई.

रेखा की जब आंखें खुलीं, तो वह सोच में पड़ गई कि राम का क्या हाल होगा. वह अपाहिज तो नहीं हो गया. अगर उसे कुछ हो गया, तो मेरी जिंदगी का क्या होगा?

यह सब सोचसोच कर वह आंसू बहाने लगी.

सीमा ने उस का मन बहलाना चाहा और कहा कि कल तक राम ठीक हो कर उस से मिलेगा, यह सुन कर उसे कुछ हौसला आया. उस ने दवा और नाश्ता लिया और फिर सो गई.

इस तरह 3 दिन बीत गए और रेखा के बारबार कहने पर भी राम नहीं आया. उस ने सोचा कि शायद राम को ज्यादा ही चोट लगी होगी.

चौथे दिन उस ने अपनेआप को दूसरे कमरे में पाया और देखा कि नर्स नहीं, सीमा उस का सिर दबा रही थी. उस के वही सवाल दोहराने पर सीमा ने कहा कि वहां राम नहीं आ सकते थे, अब जल्दी आ जाएंगे.

इस तरह करतेकरते 3 दिन और बीत गए, तब उस के फिर दोहराने पर सीमा ने कहा, ‘‘आज तो तुम घर चल रही हो, इतनी उतावली क्यों हो? जरा चलोफिरो और घर चलने को तैयार हो जाओ,’’ यह सुनते ही जैसे रेखा को पर लग गए हों. वह जल्दीजल्दी घर के लिए तैयार हो गई. घर आने पर उस ने अपने ससुर रमुआ के पैर छुए, तो वे रोते हुए घर से बाहर निकल गए.

वह अंदर आई, तो सीमा ने कहा, ‘‘रोज रट लगा रखी थी, लो अपने राम से मिल लो.’’

राम की तरफ देखते ही वह जोर से चिल्लाई, ‘‘नहीं… यह राम नहीं, रणवीर है. यह तुम क्या कह रही हो? सीमा, मैं क्या पहचानती नहीं,’’ और वह सिर पटक कर रोने लगी.

यह सुन कर रणवीर और सीमा माफी मांगने लगे और रमुआ भी अंदर आ गया और बोला, ‘‘बेटी, मैं ने राम को तो खो दिया, पर तुझे नहीं खोना चाहता था. मेरा बुढ़ापा खराब न हो, इसलिए मैं ने यह कहा था.’’

यह सुन कर उस का रोना कम नहीं हुआ और वह रोती रही.

एक दिन अचानक रेखा सपने से जागी. लगा, जैसे राम कह रहा हो, उठो और मेरे पिता का ध्यान रखो.

वह उठ कर बैठ गई और कुछ देर बाद घर से बाहर आ कर खेतों की तरफ धीरेधीरे चलने लगी. उस ने कुछ दूरी पर औरतों को बातें करते सुना कि रमुआ काका का तो घर बरबाद हो गया. राम जैसा बेटा चला गया और गाय जैसी रेखा का बच्चा. अब रेखा तो बांझ भी हो गई. उस के बच्चे भी नहीं हो सकते.

यह सुन कर रेखा हैरान रह गई, पर रोई नहीं.

वह घर की तरफ चल दी और घर में आ कर चारपाई पर लेट गई.

इतना सब सुनने पर नींद किसी पागल को ही आती होगी. वह सोचने लगी कि अब क्या होगा.

सीमा ने आ कर उस की सोच तोड़ी और चाय देते हुए कहा, ‘‘दीदी, चाय पी लो और उठ जाओ. हम दोनों जिंदगी में सुखदुख बांटती आई हैं, अब भी यही होगा.’’

तब रेखा ने चाय लेते हुए कहा, ‘‘तेरे होते मैं परेशान नहीं हूं. अब अपनी और होने वाले बच्चे की सोचो.’’

कुछ देर बाद रेखा ने रसोई में जा कर सीमा से कहा, ‘‘तुम काम कम किया करो, तुम्हें बच्चे को जन्म देना है. चलो हटो, खाना मैं बनाती हूं,’’ फिर उस ने सीमा को बाहर बैठा दिया और सब को खाना खिलाया.

रमुआ खुश हो गया और रेखा को बुला कर कहा, ‘‘बेटी, बात सुनो. यह लो अलमारी की चाबी और सामान वाले कमरे को भी देख लो. आज से घर का सब काम तुम्हें देखना है, तुम इस घर की बड़ी हो,’’ इतना कहने के बाद रमुआ उस के सिर पर हाथ फेर कर चला गया.

अब तो रेखा के पैर सारा दिन काम करते और सीमा का ध्यान रखते थकते नहीं थे. उस ने अपना हार बेच कर भैंस खरीद ली और सीमा के 2 बेटे होने के बाद बहुत अच्छा भोज भी किया.

जिंदगी एक रास्ते पर नहीं चलती. इसी तरह एक दिन रमुआ सोया, पर उठा नहीं, तो घर फिर दुख में डूब गया.

सीमा को रमुआ के जाने पर ज्यादा काम पड़ गया, पर वह अपने बेटों के साथ ही सोती थी.

घर का सारा काम रेखा देखती थी, इस थकान में वह रणवीर, राम और सबकुछ भूल कर रात को सो जाती.

एक रात वह सो रही थी, तो उस ने अपने आसपास हरकत देखी और कहा कि कौन है, तो रणवीर धीरे से बोला, ‘‘मैं हूं, मुझ से आप का दुख देखा नहीं जाता, इसलिए मैं यहां आया हूं.’’

तब रेखा ने धीरे से कहा, ‘‘मेरा दुख कि अपनी खुशी. खैर, जो भी है, पहले ही मैं यह कर चुकी हूं, अब तो जिंदगी तुम सब के नाम है. तुम चाहे जो करो.’’ यह सुन कर प्यार की बातें बना कर रणवीर अपना काम कर गया.

यह सिलसिला फिर शुरू हुआ, तो रुका नहीं, पर इस बीच पता चला कि सीमा फिर पेट से है और समय आने पर उस के 2 बेटियां पैदा हुईं.

अब घर का काम बढ़ गया था, पर फसल ठीक हो रही थी, इसलिए रणवीर ने एक 16 साल के लड़के को काम पर रख लिया था, पर रेखा को यह परेशानी थी कि उस का नाम भी राम था.

रेखा ने उसे बाबू कहना शुरू कर दिया. वह सारा दिन खेत और घर का काम करता था. रात को वह खेत पर ही सोता था. रणवीर खुश था, क्योंकि उसे सब आसानी से मिल रहा था.

एक दिन रणवीर ने कहा, ‘‘भाभी, घर का खर्च काफी हो रहा है. सीमा तो बस काम कर सकती है. आप बताओ कि क्या करें?’’

यह सुन कर रेखा ने कहा, ‘‘तुम्हें अब सिर्फ प्रेमलीला नहीं, घर की सोचनी चाहिए. ज्यादा खेती करो और कुछ राम की तरह पढ़ कर आओ.’’

इस पर रणवीर बोला, ‘‘मैं आप के लिए सब कर सकता हूं.’’

अगले दिन रेखा ने जा कर खुद, उसे और सीमा को प्रौढ़ शिक्षा केंद्र में दाखिल करवा लिया. तीनों जल्दी ही अच्छा पढ़नालिखना और अंगरेजी बोलना भी सीख गए.

एक साल बाद जब खेत में काम कम हुआ, तो ट्रक चलाने का मन बना कर रणवीर शहर चला गया. वहां उसे ट्रक चलाने से कार ठीक करना बेहतर लगा. वह कुछ महीनों में ही कार ठीक करने में माहिर हो गया और एक गैराज में काम करने लगा.

रणवीर के जाने के बाद नौकर राम का घर आना ज्यादा हो गया. वह सब का खयाल रखता था.

वह सब से ज्यादा रेखा का ध्यान रखता था और उसे ‘भाभीभाभी’ कहते नहीं थकता था. रेखा भी उसे अच्छी तरह खाना खिलाती थी.

रणवीर जब गांव आता, तो सब के लिए चीजें लाता था. वह दोनों बहनों के लिए एकजैसा सामान लाता था. सीमा कुछ नहीं कहती थी, पर बहन का पूरा ध्यान रखती थी.

एक दिन जब रणवीर आया, तो वह बहुत खुश था. उस ने बताया कि वह जिस गैराज में काम करता है, वह बिक रहा है. उस ने वह गैराज खरीदने का फैसला कर लिया है और हम सब शहर जा रहे हैं.

यह सुन कर घर के सब लोग खुश हो गए, मगर रेखा नहीं. रेखा ने कहा, ‘‘मैं यहीं रहूंगी.’’

तब सीमा बोली, ‘‘बहन, मैं ने तेरे साथ सबकुछ बांटा है, मुझे मूर्ख मत समझना. बाकी बात अकेले में करूंगी.’’

सब के जाने के बाद सीमा ने कहा, ‘‘मेरी जिंदगी आप की है. मैं ने सबकुछ तुम्हारे साथ बांटा है. बात कहे बिना समझ लो. अब बच्चे सब समझने लगे हैं, इसलिए जाना ही होगा,’’ यह कह कर वह रो पड़ी.

उन की जमीन काफी उपजाऊ थी, इसलिए आधा खेत बेचने पर गैराज और मकान मिल गया और वह चले गए.

रेखा का मन अब उचाट था, इसलिए वह जीजान से काम करती थी. खर्च उस का और नौकर राम का रह गया था. पैसा काफी बचता था. रेखा ने खेत वापस खरीद लिया.

नौकर राम खेत पर सोता था, पर वह रेखा का बहुत ध्यान रखता था.

एक दिन नौकर राम खाना खा रहा था, तो रेखा ने कहा, ‘‘बाबू, अब तुम जवान हो, शादी करो और घर बसाओ.’’

राम ने कहा, ‘‘मालकिन, मैं आप को छोड़ कर नहीं जा सकता. वैसे, मेरा घर क्या बसेगा, क्योंकि मेरे सौतेले बाप ने एक हजार रुपए के लिए मेरी नसबंदी करवा दी थी. मैं भाग आया और अब आप की सेवा में यह जिंदगी है.’’

यह बात सुनते ही रेखा रो उठी और उस के कंधे पर हाथ रख कर दिलासा दी. वह पानी की बालटी ले कर आई, पर उस का पैर फिसल गया, तो एकदम नौकर राम ने उसे संभाल कर बांहों में भर लिया.

वह बोली, ‘‘यह क्या कर रहे हो?’’

यह सुन कर राम ने माफी मांगते हुए कहा, ‘‘मालकिन, गलती हो गई, माफ करना. मैं ने गाय जैसी भोली मालकिन के साथ ऐसा क्यों किया?’’

‘‘इन मामलों में ऊपर वाले ने किसी को भी भोला नहीं बनाया, क्या गाय, क्या जानवर? मैं इस के लिए मन से मजबूर रही हूं. मेरे बच्चे नहीं हो सकते और तुम मुझ से छोटे हो, शादी भी नहीं हो सकती और वह मुझ पर कलंक होगी, इसलिए जाओ, खेत पर काम करो.’’

अब राम बहुत चुप रहता था, खाना भी कम खाता था. रेखा सब जानती थी. वह डर गई कि कहीं राम न चला जाए.

एक दिन वह आया, तो उस ने देखा, दरवाजा तो खुल गया, पर कोई दिखा नहीं. जब वह अंदर गया, तो सजी हुई रेखा को देखता ही रह गया.

यह देख कर रेखा बोली, ‘‘बाबू, क्या देखते हो… मैं ही हूं. मैं ने टैलीविजन पर शहर में बिना शादी किए साथ रहने के बारे में सुना है. क्या कहते हैं… लिव इन रिलेशनशिप… हम वही करेंगे. जीना तो है न. पर किसी को बताया, तो इतने जूते मारूंगी कि याद करेगा.’’

‘‘नहीं मालकिन, मैं आप का नौकर हूं, नौकर ही रहूंगा.’’

यह कह कर नौकर राम उस के गले लग गया.

चादर : रमजान के वे दिन

रमजान अली ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इस बुढ़ापे में यह मुसीबत भी सिर पर आ पड़ेगी. इस जिंदगी ने उन्हें दिया ही क्या था, सिवा दुखों के. बचपन में ही अब्बा मर गए. अम्मी ने मेहनतमजदूरी कर के, दूसरों के कपड़े सिल कर, बरतन मांज कर जैसेतैसे पाला और मैट्रिक पास करा दिया.

उन दिनों इतनी पढ़ाई कर के रोजगार मिल जाता था. रमजान अली भी चुंगी महकमे में लग गए. उन की शादी होने के बाद अम्मी भी मर गईं.

एक साल के बाद बेटी पैदा हुई. वे थोड़ी सी आमदनी में गुजारा करते रहे. ईमानदार आदमी थे, इसलिए हाथ तंग ही रहा. न कभी अच्छा खा सके, न पहन सके. जिंदगी एक बोझ थी, जिसे वे ढो रहे थे.

रमजान अली की बेटी अकबरी 10 साल की ही थी कि उन की बीवी चल बसी. उन्होंने दूसरी शादी नहीं की, क्योंकि वे डरते थे कि सौतेली मां बेटी को तंग न करे.

न जाने क्याक्या जतन कर के वे अकबरी को पालते रहे. इस सब में उन की कमर टेढ़ी हो गई. बालों पर बुढ़ापे की बर्फ गिरने लगी. दांत टूट गए. धुंधलाई हुई आंखों पर चश्मा लग गया. वे छड़ी के सहारे चलने लगे.

अकबरी 20 साल की हो गई थी. रमजान अली की रातों की नींद हराम हो गई थी. रिश्ते की तलाश में दौड़तेदौड़ते उन के जूतों के तले घिस गए.

आमतौर पर या तो लड़के ऐबी और निकम्मे मिलते थे या उन के घरों का माहौल जाहिल था. जो कुछ ढंग के थे, उन्हें पैसे वाले झटक लेते थे.

आखिरकार काफी दौड़भाग के बाद एक रिश्ता मिला. लड़का किसी वकील का मुंशी था.

रमजान अली ने बेटी की शादी कर दी और बिलकुल ही कंगाल हो गए. रिटायर होने में एक साल बाकी था. कर्ज का बोझ दबा रहा.

बेटी को विदा कर के सोचा था, ‘चलो, इस फर्ज से तो निबट गए. दिल में एक ही तमन्ना थी कि रिटायर होने के बाद हज को जाऊंगा, पर यहां तो रोटियों के भी लाले हैं.’

बेटी की शादी तो एक तरह का जुआ होती है. कोई नहीं कह सकता कि अंजाम क्या होगा.

अकबरी बड़ी दुखी थी, क्योंकि उसे बड़ी जालिम सास मिली थी. वह अकबरी को दिनभर कोल्हू के बैल की तरह कामकाज में पेले रखती. चलो, उसे भी झेल लिया जाता, पर मुसीबत तो यह थी कि 2 साल बीतने पर भी उस की गोद हरी नहीं हुई थी और इस का इलजाम भी उसी पर था.

सास ‘बांझ’ होने का ताना देने लगी थी. जाहिल लोग भला क्या जानें कि ‘बांझ’ तो मर्द भी हो सकता है.

एक दिन अकबरी रोती हुई आई और अब्बा से कहा, ‘‘मेरी सास मेरे शौहर की दूसरी शादी की बात कर रही हैं… कहती हैं कि मैं बांझ हूं.’’

रमजान अली पर बिजली सी गिर पड़ी, आंखों के सामने अंधेरा छा गया. वे बेटी की ससुराल गए.

उन्होंने उस की सास के सामने हाथ जोड़े और गिड़गिड़ाए, ‘‘ऐसा मत करो. मेरी बेटी कहीं की न रहेगी. मैं उस का इलाज कराऊंगा… हम पर तरस खाओ.’’

सास चीख कर बोली, ‘‘घर में फल देने वाला पेड़ ही लगाते हैं. तुम ने एक बांझ को मेरे बेटे के पल्ले बांध कर हमें धोखा दिया है. मैं दूसरी बहू लाऊंगी और तुम्हारी बेटी को तलाक दिलवाऊंगी.’’

दामाद चुप रहा, क्योंकि मां उस पर छाई हुई थी. मां का हुक्म मानना हर बेटे का फर्ज है. बीवियां तो जितनी चाहो मिल जाती हैं, मां नहीं मिलती. मां के कहने पर शादी की और उस के कहने पर तलाक भी दे देगा.

तलाक देना कोई ऐसा मुश्किल काम तो है नहीं. बस, 3 बार जबान हिलानी पड़ती है. बांझ भला किस काम की? आखिर वह मर्द था, उसे हक था एक को तलाक दे कर दूसरी लाने का.

लेडी डाक्टर को दिखाया. अकबरी में कोई कमी नहीं थी. रिपोर्ट रमजान अली के हाथ में थी, पर समाज तो औलाद पैदा करने की जिम्मेदारी औरत पर ही डालता है. डाक्टर कुछ भी कहा करें, बदनामी तो हर सूरत में रमजान की बेटी ही की थी.

वे इसी परेशानी में मारेमारे फिर रहे थे कि उन के दोस्त जलील मियां ने सलाह दी, ‘‘मस्तान शाह की दरगाह पर जा कर मजार पर चादर चढ़ाओ, बड़ीबड़ी मुरादें पूरी हो जाती हैं. जितनी भारी चादर होगी, उतनी ही जल्दी मुराद पूरी होगी.’’

रमजान अली उलझन में पड़ गए कि करें तो क्या करें? इन बातों को वे मानते तो न थे, मगर डूबने वाला तो तिनके का भी सहारा लेता है. बेटी की शादी ने उन की हालत एक भिखारी जैसी बना दी. हाथ बहुत तंग हो रहा था. ऐसी हालत में भारी चादर चढ़ाने के लिए पैसे कहां से लाते?

मस्तान शाह के मजार पर अब फूलों की चादर चढ़ाना बंद कर दिया गया था. कपड़े की चादरें ही कबूल की जाती थीं. शायद पीर साहब ने सपने में सज्जादे मियां से यह बात कही थी.

रमजान अली रकम उधार ले कर बाजार पहुंचे.

‘जितनी भारी चादर होगी, उतनी ही जल्दी मुराद पूरी होगी,’ उन्होंने मन ही मन कहा. अब वे इतने भोले भी न थे कि ‘भारी’ का मतलब भी न समझते.

रेशम की भारी चादर 8 सौ रुपए में मिली. रकम गिनते वक्त जैसे कलेजा निकला जा रहा था, मगर बेटी की जिंदगी का सवाल था. इस जुए की एक बाजी और लगा दी.

जुमेरात की शाम को वे चादर को थाली में रख कर दरगाह की तरफ चल पड़े. हरे रंग के मीनार का कलश दूर से दिखाई दे रहा था. दरगाह के पास ही सड़क के दोनों तरफ मिठाई की दुकानों के अलावा फूलों, चादरों और इत्र की दुकानें भी थीं, जिन पर ग्राहकों की भीड़ थी.

इन चीजों को लोग खरीद कर मजार पर चढ़ाते थे और वही चीजें पिछली गली से फिर इन दुकानों में  जातीं, एक बार फिर बिकने के लिए. इस तरह मस्तान शाह भी खुश, मुजाविर भी खुश, दुकानदार भी खुश.

मर्द, औरतें, बूढ़े, जवान और बच्चे दरगाह के गेट की तरफ जा रहे थे.

जो पैसे वाले थे, उन की कीमती झिलमिलाती चादरें कव्वालों की गातीबजाती टोलियों के साथ ले जाई जा रही थीं, जिन पर गुलाबपाशी की जा रही थी.

दरगाह के आसपास लंगड़ेलूले, अपाहिज और हट्टेकट्टे भिखारियों का हुजूम था. जुमेरात के दिन और दिनों से ज्यादा ही भीड़ होती थी. एक मेला सा लगा रहता था. कव्वालों का गाना, औरतों  और बच्चों का शोर, दुकानदारों और ग्राहकों का मोलतोल, यानी कानपड़ी आवाज न सुनाई देती.

गेट पर एक बक्से में 5 रुपए का नोट डालना पड़ा. यह ‘चिरागी’ के नाम पर देना पड़ता था.

अंदर खचाखच भीड़ थी. अगरबत्ती, लोबान, गुलाब के फूलों और पसीने की बू से हवा बोझिल थी.

मजार तक पहुंचतेपहुंचते 3 जगह 3 बक्सों में 5-5 के नोट और सिक्के डालने पड़े, क्योंकि इन जगहों पर मस्तान शाह बैठ कर हुक्का पीया करते थे.

उस दिन भीड़ कुछ ज्यादा ही थी. इस की वजह यह थी कि सज्जादे साहब भी मजार पर हाजिर हुए थे. सुर्ख, सफेद रंगत वाले भारीभरकम आदमी थे.

10-20 लोग आगेपीछे चल रहे थे. लोग उन के हाथ चूमने के लिए एकदूसरे को धकेल कर आगे बढ़ने का जतन कर रहे थे.

इतनी बड़ी दरगाह के सज्जादे की एक नजर ही पड़ जाने से बेड़ा पार हो जाता था. उन की आंखों में लाललाल डोरे रातों को जागने से पड़े रहते थे.

लोगों का कहना था कि वे रातभर इबादत करते हैं, इसीलिए दिनभर सोया करते हैं. जब भी वे बाहर आते, रेशम के कपड़े पहने होते. गले में सोने की चेन और उंगलियों में जगमगाती हीरे की अंगूठियां उन की शान बढ़ाती थीं.

सुना है कि एक पार्टी उन्हें विधानसभा की सीट के लिए खड़ा करने वाली है. चेहरे पर बड़ीबड़ी मूंछें देख कर किस की हिम्मत थी, जो उन से आंख से आंख मिला कर बात करता?

सुना है कि वे करामाती भी हैं. एक बार एक कव्वाल का गला पड़ गया था, सज्जादे साहब ने उस के मुंह में थूक कर उस का गला ठीक कर दिया था.

सज्जादे साहब की हाजिरी के बाद भीड़ कम हुई, तो रमजान अली मजार की तरफ चले. बाहर कव्वाली हो रही थी. मजार के चारों तरफ मुजाविर मोर के परों के पंखे हिला रहे थे. लोबान का धुआं भरा हुआ था. लोग मिठाइयां और चादरें चढ़ा रहे थे. उन में बहुत से ऐसे थे, जिन के अपने तन पर फटे कपड़े थे.

पलभर के लिए रमजान अली ने सोचा, ‘हम लोग जिंदा लोगों को भूखा मारते हैं और उन के तन पर से कपड़े भी उतार लेते हैं और मरने वालों के लिए शानदार इमारतें बनवाते हैं, कब्रों को चादरें ओढ़ाते हैं और मिठाई चढ़ाते हैं.’

मजार पर औरतें और लड़कियां मर्दों से कहीं ज्यादा थीं. मुजाविर बारबार ‘या मस्तान’ का नारा लगा रहे थे.

न जाने क्यों, रमजान अली चादर लिए खड़े सोचते रहे, फिर वे चौंक पड़े. पहले उन्हें ऐसा लगा, जैसे बड़ा मुजाविर, जो चादरें और मिठाइयां लोगों से ले कर मजार पर चढ़ा रहा था, उन की तरफ देख रहा हो. मगर उस की लाललाल आंखें उस दुबलीपतली सी प्यारी सूरत वाली लड़की पर गड़ी थीं, जो उन के पीछे शरमाई सी खड़ी थी.

उन्होंने देखा, उस की आंखों में गहरा दुख था. वह बहुत गरीब थी. कपड़े फटे हुए थे. कुरता तो इतना फटा था कि उस का बदन भी जगहजगह से झांक रहा था.

वह लड़की बदन को फटे हुए दुपट्टे से ढकने की कोशिश कर रही थी. मुजाविर की निगाहों के तीर उसे घायल किए जा रहे थे.

रमजान अली ने उस लड़की से पूछ ही लिया, ‘‘क्या बात है?’’

‘‘मुराद मांगने आई हूं बाबा,’’ वह बोली.

उन्होंने फिर पूछा, ‘‘क्या दुख है बेटी?’’

वह बोली, ‘‘2 साल पहले मेरी शादी हुई थी. अभी तक गोद हरी नहीं हुई… मियां कहता है कि मैं बांझ हूं. तलाक देने की बात कर रहा है. घर से भी निकाल दिया है…

‘‘सुना है, चादर चढ़ाने से दुख दूर हो जाते हैं. तन पर तो फटे कपड़े हैं, चादर कहां से लाऊं? बड़ा मुजाविर कहता है कि सज्जादे साहब जुमेरात की रात को दुखियारियों को अपने हजूरे में बुला कर खास दुआ करते हैं.

‘‘इस तरह चादर चढ़ाए बिना भी मुराद पूरी हो जाती है. पर तुम तो चादर लाए हो, इसे चढ़ा कर मुराद पा लो.’’

रमजान अली ने फिर मुजाविर की आंखों की तरफ देखा, जो अभी भी उस लड़की के फटे कुरते में से झांकते गोरे बदन पर गड़ी थीं.

वे गुस्से से कांप उठे और उन्होंने आगे बढ़ कर अपनी चादर उस लड़की के बदन पर चढ़ा दी. मुजाविर और लड़की उन्हें इस तरह आंखें फाड़ कर देखने लगे, जैसे वे पागल हों.

फिर उन्होंने लड़की का हाथ पकड़ा और उसे दरगाह से बाहर ला कर कहा, ‘घर जा… बेटी, तेरा वहां आना ठीक नहीं है.’’

वह बोली, ‘‘यह चादर तुम ने…’’

उन्होंने उस की बात काट दी, ‘‘हां बेटी… आज मैं ने चादर भी चढ़ा दी और हज भी कर लिया.’’

उन्होंने जेब से अकबरी की डाक्टरी रिपोर्ट निकाली और सचाई व इंसाफ की लड़ाई लड़ने और जालिम को धूल चटाने के लिए वकील के घर की ओर चल पड़े.

फलक से टूटा इक तारा: सान्या का यह एहसास- भाग 2

अभी एक महीना बीता था कि सान्या को मुंबई से डांस शो के फाइनल्स के लिए बुलावा आ गया. उस के पैर तो बिन घुंघरू के ही थिरकने लगे थे. वह तो एकएक दिन गिन रही थी फिर से मुंबई जाने के लिए. अब डांस फाइनल्स शो का भी दिन आ ही गया.

फिर से वही स्टेज की चमकदमक और उस के मातापिता दर्शकों की आगे की पंक्ति में बैठे थे और शो शुरू हुआ. नतीजा तो जैसे सान्या ने स्वयं ही लिख दिया था. उसे पूरा विश्वास था कि वही जीतेगी. और डांस शो की प्रथम विजेता भी सान्या ही बनेगी. फिर क्या था, सान्या का नाम व तसवीरें हर अखबार व मैग्जीन के मुखपृष्ठ पर थीं. अब उसे हिंदी धारावाहिकों के लिए प्रस्ताव आने लगे थे. सभी बड़े नामी उत्पादों की कंपनियां उसे अपने उत्पादों के विज्ञापन के लिए प्रस्ताव देने लगी थीं.

अब तो सान्या आसमान में उड़ने लगी थी. उस की मां व पिताजी उस से कहते, ‘‘बेटी, इस चमकदमक के पीछे न दौड़ो, पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर लो.’’ लेकिन सान्या कहती, ‘‘पिताजी, ऐसे सुनहरे अवसर बारबार थोड़े ही मिलते हैं. मुझे मत रोकिए, पिताजी, उड़ जाने दीजिए मुझे आजाद परिंदे की तरह और कर लेने दीजिए मुझे अपने ख्वाब पूरे.’’

मांपिताजी ने उसे बहुत समझाया, पिताजी तो कई बार नाराज भी हुए, उसे डांटाडपटा भी, लेकिन सान्या को तो मुंबई जाना ही था. सो, मातापिता की मरजी के खिलाफ जिद कर एक दिन उस ने मुंबई की ट्रेन पकड़ ली, लेकिन मातापिता अपनी बेटी को कैसे अकेले छोड़ते, सो हार कर उन्होंने भी उस की जिद मान ही ली. कुछ दिन तो मां उस के साथ एक किराए के फ्लैट में रही, लेकिन फिर वापस अपने घर आ गई. सान्या की छोटी बहन व पिता को भी तो संभालना था.

सान्या को तो एक के बाद एक औफर मिल रहे थे, कभी समय मिलता तो मां को उचकउचक कर फोन कर सब बात बता देती. मां भी अपनी बेटी को आगे बढ़ते देख फूली न समाती. एक बार मां 7 दिनों के लिए मुंबई आई. जगहजगह होर्डिंग्स लगे थे जिन पर सान्या की तसवीरें थीं. विभिन्न फिल्मी पत्रिकाओं में भी उस की तसवीरें आने लगी थीं. वह मां को अपने साथ शूटिंग पर भी ले कर गई. सभी डायरैक्टर्स उस का इंतजार करते और उसे मैडममैडम पुकारते.

मां बहुत खुश हुई, लेकिन मन ही मन डरती कि कहीं कुछ गलत न हो जाए, क्या करती आज की दुनिया है ही ऐसी. अपनी बेटी के बढ़ते कदमों को रोकना भी तो नहीं चाहती थी वह. पूरे 5 वर्ष बीत गए. रुपयों की तो मानो झमाझमा बारिश हो रही थी. इतनी शोहरत यानी कि सान्या की मेहनत और काबिलीयत अपना रंग दिखा रही थी. हीरा क्या कभी छिपा रहता है भला?

जब सान्या को किसी नए औफर का एडवांस मिलता तो वह रुपए अपने मांपिताजी के पास भेज देती. साथ ही साथ, उस ने मुंबई में भी अपने लिए एक फर्निश्ड फ्लैट खरीद लिया था. कहते हैं न, जब इंसान की मौलिक जरूरतें पूरी हो जाती हैं तो वह रुपया, पैसा, नाम, शोहरत, सम्मान आदि के लिए भागदौड़ करता है. तो बस, अब सबकुछ सान्या को हासिल हो गया तो उसे तलाश थी प्यार की.

वैसे तो हजारों लड़के सान्या पर जान छिड़कते थे किंतु उस की नजर में जो बसा था, वह था देव जो उसे फिल्मी पार्टी में मिला था और मौडलिंग कर रहा था. दोनों की नजरें मिलीं और प्यार हो गया.

कामयाबी दोनों के कदम चूम रही थी. जगहजगह उन के प्यार के चर्चे थे. आएदिन पत्रिकाओं में उन के नाम और फोटो सुर्खियों में होते. सान्या की मां कभीकभी उस से पूछती तो सान्या देव की तारीफ करती न थकती थी. मां सोचती कि अब सान्या की जिंदगी उस छोटे से कसबे के साधारण लोगों से बहुत ऊपर उठ चुकी है और वह तो कभी भी साधारण लोगों जैसी थी ही नहीं. सो, उस के मांपिताजी ने भी उसे छूट दे दी थी कि जैसे चाहे, अपनी जिंदगी वह जी सकती है. देव और सान्या एकदूसरे के बहुत करीब होते जा रहे थे.

देव जबतब सान्या के घर आतेजाते दिखाई देता था. कभीकभी तो रात को भी वहीं रहता था. धीरेधीरे दोनों साथ ही रहने लगे थे और यह खबर सान्या की मां तक भी पहुंच चुकी थी. यह सुन कर उस की मां को तो अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ. जब मां ने सान्या से पूछा तो वह कहने लगी, ‘‘मां, यहां मुंबई में ऐसे ही रहने का चलन है, इसे लिवइन रिलेशन कहते हैं और यहां ऐसे रहने पर कोई रोकटोक नहीं. मेरे दूसरे दोस्त भी ऐसे ही रहते हैं और मां, मैं ने और देव ने शादी करने का फैसला भी कर लिया है.’’

मां ने जवाब में कहा, ‘‘अब जब फैसला कर ही लिया है तो झट से विवाह भी कर लो और साथ में रहो, वरना समाज क्या कहेगा?’’ सान्या बोली, ‘‘हां मां, तुम ठीक ही कहती हो, मैं देव से बात करती हूं और जल्द ही तुम्हें शादी की खुशखबरी देती हूं.’’

अगले दिन जैसे ही देव ने सान्या के मुंह से शादी की बात सुनी, वह कहने लगा, ‘‘हांहां, क्यों नहीं, शादी तो करनी ही है लेकिन इतनी जल्दी भी क्या है सान्या, थोड़ा हम दोनों और सैटल हो जाएं, फिर करते हैं शादी. तुम भी थोड़ा और नाम कमा लो और मैं भी. फिर बस शादी और बच्चे, हमारी अपनी गृहस्थी होगी.’’

देव की प्यारभरी बात सुन कर सान्या मन ही मन खुश हो गईर् और अगले ही पल वह उस की आगोश में आ गई. सान्या को पूरा भरोसा था अपनेआप पर और उस से भी ज्यादा भरोसा था देव पर. वह जानती थी कि देव पूरी तरह से उस का हो चुका है.

अब उन का मिलनाजुलना पहले से ज्यादा बढ़ गया था, कभी मौल में, तो कभी कैफे में दोनों हाथ में हाथ डाले घूमते नजर आ ही जाते थे. उन का प्यार परवान चढ़ने लगा था. सान्या तो तितली की तरह अपने हर पल को जीभर जी रही थी. यही जिंदगी तो चाहती थी वह, तभी तो उस छोटे से कसबे को छोड़ कर मुंबई आ गई थी और उस का सोचना गलत भी कहां था, शायद ही कोई विरला होगा जो मुंबई की चमकदमक और फिल्मी दुनिया की शानोशौकत वाली जिंदगी पसंद न करता हो.

अभी 2-3 महीने बीते थे और देव अब सान्या के फ्लैट में ही रहने लगा था. रातदिन दोनों साथ ही नजर आते थे. लेकिन यह क्या, देव अचानक से अब उखड़ाउखड़ा सा, बदलाबदला सा क्यों रहता है? सान्या देव से पूछती, ‘‘देव कोई परेशानी है तो मुझे बताओ, तुम्हारे व्यवहार में मुझे फर्क क्यों नजर आ रहा है? हर वक्त खोएखोए रहते हो. कुछ पूछती हूं तो खुल कर बात करने के बजाय मुझ पर झल्ला पड़ते हो.’’

देव ने जवाब में कहा, ‘‘कुछ नहीं, तुम ज्यादा पूछताछ न किया करो, मुझे अच्छा नहीं लगता है.’’

रिश्ता : कैसे आई सूनी बगिया में बहार

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