अंबाती रायडू ने संन्यास ले कर सब को चौंकाया

क्या महेंद्र सिंह धौनी इस वर्ल्ड कप के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे? अभी यह चर्चा जोरों पर थी कि एक भारतीय बल्लेबाज अंबाती रायडू ने भारत में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह कर सब को चौंका दिया है. उन का यह संन्यास लेने की वजह कहीं न कहीं इस वर्ल्ड कप से ही जुड़ी है.

दरअसल, इस वर्ल्ड कप में न चुने जाने के बाद 33 साल के अंबाती रायडू ने बुधवार, 3 जुलाई को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. इस संबंध में उन्होंने बीसीसीआई को मेल भेजा है. बीसीसीआई के सीईओ राहुल जोहरी ने इस सिलसिले में बताया कि अंबाती रायडू ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया है और वे फिलहाल एक साल और आईपीएल खेलेंगे.

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यह रही वजह

आंध्र प्रदेश के इस क्रिकेटर को वर्ल्ड कप के लिए भेजी गई 15 सदस्यों की टीम में शामिल नहीं किया गया था. तब क्रिकेट जगत में इस बात पर चर्चा भी हुई थी कि अच्छी फॉर्म में चल रहे अंबाती रायडू के साथ ऐसा क्यों हुआ? अचंभा तो तब हुआ था जब चोट लगने की वजह से पहले शिखर धवन और बाद में विजय शंकर के वर्ल्ड कप से बाहर होने के बावजूद अंबाती रायडू को इस वर्ल्ड कप में नहीं लिया गया, बल्कि उन की जगह ऋषभ पंत और मयंक अग्रवाल को टीम में जगह मिली थी.

जब ज्यादा सवाल उठाए गए तो बीसीसीआई ने कहा था कि विजय शंकर को ‘तीनों विभागों (बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग) में काबिलियत’ के बूते लिया गया है. इस पर तंज कसते हुए अंबाती रायडू ने ट्वीट किया था कि उन्होंने वर्ल्ड कप देखने के लिए 3डी ग्लास ऑर्डर किए हैं.

अंबाती रायडू का क्रिकेट कैरियर…

अंबाती रायडू के क्रिकेट कैरियर की बात करें तो उन्होंने कुल 55 वनडे इंटरनैशनल मैच खेले हैं जिन में उन्होंने 47.6 की औसत से 1694 रन बनाए हैं. इस में 3 शतक और 10 अर्धशतक शामिल हैं, वहीं 6 ट्वेंटी20 मुकाबलों में उन्होंने महज 42 रन ही बनाए हैं. आईपीएल की बात करें तो इस बार वे चेन्नई सुपर किंग्स टीम के लिए खेले थे. उन्होंने 147 आईपीएल मैचों में 28.7 की औसत से 3300 रन बनाए हैं.

अभी हाल ही में 2011 के वर्ल्ड के हीरो रहे युवराज सिंह ने भी चुपचाप संन्यास ले लिया था. उन्हीं की राह पर चल कर अंबाती रायडू ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को एक झटका दिया है.

मलाइका अरोड़ा का ‘दबंग अंदाज’, ‘चुलबुल’ सलमान को यूं किया COPY

बौलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रैस मलाइका अरोड़ा अक्सर ही अपने लुक्स से फैंस को इम्प्रेस करती रहती हैं. मलाइका अच्छी एक्ट्रैस होने के साथ-साथ एक बेहतरीन मौडल, डांसर और प्रोड्यूसर भी हैं. मलाइका ने “इंडियाज़ गोट टेलैंट”, “झलक दिखला जा”, “नच बल्लिए” जैसे कई रिएलिटी शो में जज की भूमिका भी निभाई है.

न्यूयार्क में दिखा दबंग अंदाज…

हाल-फिलहाल मलाइका अरोड़ा ने अपने फैंस के साथ कुछ ऐसी फोटोज शेयर की हैं जिसमें वे बेहद ही खूबसूरत लग रही हैं. मलाइका इन फोटोज में दिल की आकार वाला चश्मा पहने दिखाई दे रही है जैसा चश्मा सलमान खान ने दबंग फिल्म में पहना था. मलाइका की इन फोटोज को देख फैंस को दबंग फिल्म की याद आ गई होगी. मलाइका की इन फोटोज को फैंस ने खूब पसंद किया और जमकर कमेंट्स कर उनकी तारीफ भी की.

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Hey Wat u lookin at ???👀👀👀

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‘दबंग’ में बनी थीं ‘मुन्नी’…

मलाइका अरोड़ा ने दबंग फिल्म में एक आइटम सौंग किया था जिसका नाम “मुन्नी बदनाम हुई” था और ये आइटम सौंग बेहद पसंद किया गया था और काफी फेमस भी हुआ था. मलाइका ने ना सिर्फ दबंग फिल्म में आइटम सौंग परफोर्म किया था बल्कि मलाइका दबंग फिल्म की प्रोड्यूसर भी रही थीं.

 

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Happy bday my crazy,insanely funny n amazing @arjunkapoor … love n happiness always

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अर्जुन के साथ छुट्टी मना रही हैं मलाइका…

वैसे देखा जाए तो मलाइका इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ खुल कर एन्जौय कर रही है. मलाइका इन दिनों अर्जुन कपूर के साथ न्यूयार्क में छुट्टियां मना रही हैं. जहां दोनों अर्जुन के बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए गए थे. मलाइका ने अर्जुन के लिए एक इमोशनल पोस्ट भी किया था. साथ ही उनके साथ एक रोमांटिक फोटो भी शेयर की थी.

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World Cup के दौरान इस 87 साल की महिला ने जीता फैंस का दिल

मंगलवार, 2 जुलाई को बांग्लादेश के साथ हुए एक रोचक मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार जीत हासिल की. पहले तो बल्लेबाजी में रोहित शर्मा ने शतक ठोंक कर नया रिकौर्ड बनाया और बाद में जसप्रीत बुमरा की बूमरैंग गेंदबाजी ने विरोधी टीम पर ऐसा शिकंजा कसा कि उसे टूर्नामेंट से ही बाहर कर दिया.

विराट को भी मिली तारीफें…

इस सब में विराट कोहली की कप्तानी की भी जमकर तारीफ हुई कि मैदान के अलहदा आकार को देखते हुए उन्होंने 4 तेज गेंदबाज और एक स्पिनर को टीम में जगह दी थी. उन का यह फैसला गेंदबाजों ने सही साबित किया.

मैच की इन घटनाओं ने जीता दिल…

इस मैच में 2 और ऐसी घटनाएं हुई थीं जिन्होंने सब का दिल जीत लिया. एक तो तब जब रोहित शर्मा बल्लेबाजी कर रहे थे. अपनी धुआंधार बल्लेबाजी में उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 5 छक्के जड़े थे. उन में एक छक्का स्टेडियम में मैच का लुत्फ ले रही एक भारतीय फैन मीना को जा लगा था. वैसे, ऐसा अक्सर हो जाता है पर जब मैच खत्म हुआ तो रोहित शर्मा उस महिला मीना से खासतौर पर मिलने गए थे. उन्होंने उन का हालचाल लिया और खेद भी प्रकट किया लेकिन साथ ही अपने आटोग्राफ वाली एक हैट भी उन्हें भेंट की. शायद उन्हें मजाकमजाक में समझा भी दिया कि आगे कोई गेंद आप के पास आए तो उसे लपक लेना.

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87 साल की महिला पहुंचीं मैच देखने…

इसी तरह दूसरा किस्सा तो और भी मजेदार रहा. एक उम्रदराज महिला का भारतीय टीम की हौसला अफजाई करना उन्हें ‘आर्यन लेडी’ का खिताब दिला गया. दरअसल, जब यह मैच चल रहा था तब टेलीविजन के कैमरे एक 87 साल की महिला पर फोकस कर रहे थे कि वे मानो किसी बच्ची की तरह भारतीय टीम को जीतने के लिए प्रेरित कर रही थीं.

विराट और रोहित मिलने पहुंचे…

टीम इंडिया की ये फैन थीं चारुलता पटेल. उन का उत्साह और क्रिकेट के प्रति दीवानगी लाजवाब थी. यही वजह थी कि मैच जीतने के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा उन से मिलने पहुंच गए थे. व्हील चेयर पर आई इस बूढ़ी अम्मा के जज्बे ने भारत की इस जीत में चार चांद लगा दिए.

एडिट बाय- निशा राय

आखिर क्यों नेहा धूपिया और अंगद बेदी से नाराज हैं युवराज सिंह?

क्रिकेट की दुनिया के जाने-माने स्पोर्ट्समैन युवराज सिंह और बौलीवुड कलाकार अंगद बेदी एक समय बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे लेकिन आज ये दोनों एक-दूसरे से कटे-कटे रहते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि युवराज और अंगद के बीच आई इस दूरी की वजह कोई और नहीं बल्कि अंगद बेदी की पत्नी नेहा धूपिया हैं.

युवराज सिंह और नेहा धूपिया एक समय एक-दूसरे को डेट कर रहे थे पर उनका ये रिश्ता ज्यादा लंबा ना चल पाया और फिर अंगद बेदी और नेहा रिलेशनशिप में आए और पिछले साल दोनों ने चुपचाप शादी कर डाली. युवराज अंगद से इस बात पर नाराज हैं कि अंगद ने अपनी शादी के बारे में उन्हे बताया तक नहीं.

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युवराज सिंह अंगद बेदी से इतने नाराज है कि युवराज ने अपनी रिटायरमेंट पार्टी में नेहा और अंगद दोनों को नहीं बुलाया जबकि उनकी पार्टी में कई बौलीवुड सेलेब्स और बड़े-बड़े क्रिकेटर आए थे. युवराज का नेहा और अंगद को ना बुलाना पार्टी में सबको अखरा था.

युवराज सिंह ने पिछले साल फ्रेंडशिप डे पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने इनडायरैक्टली अंगद के प्रति गुस्सा जाहिर किया था. युवराज ने पोस्ट में लिखा था, ‘मुझे अभी-अभी पता चला कि बीते दिन फ्रेंडशिप-डे था. मैं उन लोगों को बताना चाहता हूं जिनको मैं अपना अच्छा दोस्त समझता था कि मुझे खुशी है मैं अपने कुत्तों को ज्यादा प्यार करता है. आप जीते हैं और सीखते हैं. हैप्पी फ्रेंडशिप डे.’

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युवराज सिंह के इस पोस्ट के बाद अंगद बेदी मीडिया के सामने आए और कहा कि ‘मेरा दोस्त मेरी वजह से ही नाराज है. युवराज की नाराजगी बेवजह नहीं है, उनके पास अपने कारण हैं.

‘सूर्यवंशी’ के लिए अक्षय ने किया ये खतरनाक स्टंट, VIDEO VIRAL

बौलीवुड के खिलाड़ी कुमार कहे जाने वाले एक्टर अक्षय कुमार अपने स्टंट्स को ले कर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. जब भी अक्षय को स्टंट सीन करने का मौका मिलता है वे उस सीन में अपनी जी-जान लगा देते हैं. हाल-फिलहाल अक्षय अपनी आने वाली फिल्म ‘सूर्यवंशी’ की शूटिंग में बिजी हैं.

‘सूर्यवंशी’ का शूट करते हुए अक्षय कुमार ने एक ऐसा स्टंट कर दिखाया जिसे देख कोई भी दंग रह जाएगा. शूट के दौरान अक्षय एक हेलीकौप्टर से लटके दिखाई दिए. अक्षय ने सूर्यवंशी के सेट का एक वीडियो खुद अपने फैंस के साथ शेयर किया जिसमें वे जबरदस्त एक्शन सीन्स करते नजर आ रहे हैं. ये वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें आप अक्षय को खतरनाक स्टंट करते हुए देख सकते हैं.

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नहीं किया डुप्लीकेट का यूज…

अक्सर ये देखा जाता है कि बौलीवुड एक्टर्स एक्शन सीन्स करने के लिए डुप्लीकेट्स का यूज करते हैं लेकिन अक्षय को स्टंट्स करने में इतना मजा आता है कि वे किसी भी डुप्लीकेट का इस्तेमाल ना करते हुए खुद ही सारे स्टंट्स परफौर्म करते हैं, शायद यही वजह है कि अक्षय कुमार स्टंटमैन के नाम से भी जाने जाते हैं.

‘सूर्यवंशी’ के सेट से अक्षय कुमार की एक फोटो भी सामने आई है जिसमें वे रोहित शेट्टी के साथ कुछ बात कर रहें है और चारों तरफ काफी सारी गाड़ियां दिख रही हैं.

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बता दें अक्षय कुमार की ये फिल्म अगले साल यानी 2020 में रिलीज होगी. फिल्म में अक्षय के साथ कैटरीना कैफ अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी. इस फिल्म के जरिए रोहित शेट्टी और अक्षय की जोड़ी पहली बार बड़े पर्दे पर दर्शकों को देखने को मिलेगी.

बोल्ड सीन से नहीं डरती छत्तीसगढ़ी फिल्मों की ये हीरोइन

पांच दशक पूर्व कही देबो संदेश छत्तीसगढ़ की पहली मूवी थी . जिसे आज भी लोग देखना पसंद करते हैं. यह एक सफल हिंदी मूवी थी. छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के दरमियान सन ‘2000 मे मोर छइयां भुइयां फिल्म रिलीज हुई और एक तरह से सारे रिकार्ड तोड़ डाले . हिंदी फिल्मे भी फीकी पड़ गई, तब से अब तक छत्तीसगढ़ की महानदी में बहुत पानी बह गया, मगर फिल्मो मे मानीखेज उठाव देखने को नहीं मिला. बीस वर्षों में लगभग 50- फिल्में रिलीज हुई मगर यह सब बौक्स औफिस पर कमाल नहीं दिखा सकी . इधर मध्यप्रदेश के जबलपुर से तनु प्रधान दो वर्षों से छत्तीसगढ़ की चार फिल्मों में एक्ट्रेस  की भूमिका सफलतापूर्वक निभा चुकी है छत्तीसगढ़ की यह उभरती तारिका मूलतः जबलपुर अर्थात मध्य प्रांत की है. मगर छत्तीसगढ़ की धरा पर उन्होंने प्रेम दिवानी, दहाड़, दिल है तोर दीवाना, हमर हीरो नंदू भाई मे काम करके अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई  है. प्रस्तुत है शूटिंग के दरम्यान हमारे सवांददाता की तनु से छोटी सी बातचीत .

सवाल- तनु, मध्यप्रदेश के जबलपुर से छत्तीसगढ़ कैसे आ गई….

मैं जबलपुर की रहने वाली हूं एक तरह से भाग्य कहूं या फिल्मो में अभिनय का आकर्षण मै छत्तीसगढ़ी फिल्म मे एक्ट्रेस बतोर काम कर रही हूं.

सवाल- फिल्म दिल है तोर दीवाना के संदर्भ में कुछ बताएं?

फिल्म लव बेस है. मगर पटकथा मे परिवारिक पृष्टभूमि को संजोया गया है. फिल्ममें मेरे  अपोजिट  सागर भारद्वाज हैं.(हंसते हुए) अभी  इतना काफी है और हां निर्देशक आरसी भारद्वाज हैं.

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सवाल- दिल है तो दीवाने फिल्म की शूटिंग कंप्लीट हो गई है कब रिलीज होगी?

जवाब- दिल है तोर दीवाना की शूटिंग पूरी हो गई है इसी माह जुलाई में यह छत्तीसगढ़ के सिनेमा में आपको देखने को मिलेगी .

सवाल- आप मध्य भारत की हैं और छत्तीसगढ़ की फिल्मों में काम कर रही हैं, आपको बहुत  दिक्कत आती होगी?

जवाब- नहीं,  मुझे कोई दिक्कत नहीं.  मेरा मानना है  अगर आपको जुनून है तो आप हर चैलेंज को पार पा जाते हैं शायद यही चैलेंजिंग भावना के कारण मैंने फिल्मों में काम करके दिखा दिया है . शुरू में दिक्कतें भी आई अब तो बिल्कुल नहीं ….

सवाल- आपने मौडलिंग भी की है फिल्म और मॉडलिंग दोनों में क्या अंतर है?

जवाब- मौडलिंग मेरा पहला शौक था यह एक सीढ़ी है मौडलिंग से पहचान की और फिल्मों में काम मिला और मैं यही चाहती थी .

सवाल- आपकी पसंदीदा एक्ट्रेस कौन है?

जवाब- तमन्ना भाटिया (बाहुबली फ्रेम) मैं उनकी फैन हूं उन का हेयर स्टाइल उनका अभिनय मेरी आत्मा में बस गया है . देखिए मैं अभी भी उनकी हेयर स्टाइल अपनाए हुए हूं….

सवाल- प्रेम दीवाना प्रदर्शित हो चुकी है इसकी कामयाबी से आप कितनी खुश है?

जवाब- सचमुच मैं बहुत खुश हूं  जैसी आशा थी वैसा प्रतिसाद मिला है. यह रोमांटिक फिल्म है डीएस प्रोडक्शन व त्रिवेदी वीडियो ड्रामा फिल्म प्रोडक्शन की  एक पारिवारिक फिल्म और खास बात  मैं आपको बताऊं की यह छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और चांपा जांजगीर जिले के कुछ जगहो पर इसकी शूटिंग हुई थी.

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सवाल- प्रेम दीवाना का कुछ और परिचय?

जवाब- जैसा कि सभी जानते हैं इसके हीरो विवेक साहू हैं अन्य कलाकार कन्हैया पटनिया है गीत तुलसी राज चौहान व सीमा दिवाकर के हैं निश्चित रूप से यह फिल्म  आगे भी एक मील का पत्थर बनेगी .

सवाल- फिल्म दुनिया की ओर आपका आकर्षण कैसे पैदा हुआ?

जवाब- जब मैं ने होश संभाला और कुछ फिल्में देखी तो मुझे लगा मैं फिल्मों के लिए ही बनी हूं और देखिए आज हिंदी और छत्तीसगढ़ी फिल्में कर रही हूं  .

सवाल- आज फिल्मों में बोल्ड सीन की मांग है….

जवाब- मैं बोल्ड सीन से नहीं डरती. अगर फिल्म की मांग है, निर्देशक का आदेश सर्वमान्य है. मगर मैं अपनी कहूं तो मुझे छोटे कपड़े पसंद नहीं है. सादगी में ही सुंदरता है आगे दर्शकों की जैसी मांग होगी….

सवाल- क्या कभी ऐसा भी कोई समय आया है जब बोल्ड सीन किया या करने से घबड़ा गई?

जवाब- देखिए छत्तीसगढ़ की फिल्म इंडस्ट्री अभी जवां नहीं हुई है. यह अभी प्रारंभिक अवस्था में है और निदेशक सुलझे हुए हैं .

सवाल- छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री छलीवुड का क्या भविष्य लगता है आपको?

जवाब- बौलीवुड तो है मगर छालीवुड भी अब पीछे नहीं है मुझे लगता है यह इंडस्ट्री बहुत आगे जाएगी फ्यूचर दिखाई दे रहा है मुझे . छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की अहमियत कम नहीं है, ऐसा मुझे  लगता है.

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सवाल- सहकर्मियों का व्यवहार कैसा लगा आप जबलपुर से यहां आई हैं?

जवाब- सच कहूं तो मुझे अहसास ही नहीं हुआ मैं सोचती थी मैं कैसे काम कर पाऊंगी मगर निर्देशक सह कलाकारों ने बहुत साथ दिया .

सवाल- कहते हैं फिल्मों में हीरोइन को कुछ करने के लिए नहीं होता शोपीस होती है?

जवाब- मैं कहूंगी मैं ने जो काम किया है, वह दर्शकों को बहुत पसंद आया है मैं आगे भी अच्छा काम कर पहचान बना रही हूं. मुझे निर्देशक  शेखर चौहान ने मौका दिया मेरे टैलेंट को पहचाना,  मैं उन्हें शुक्रिया करना चाहूंगी.

एक शेख की छठी पत्नी आखिर लापता क्यों हो गई

खाड़ी देशों के शेख राजशाही जीवन जीने के लिए खासा मशहूर है. महंगी गाड़ियां, ऐशो-आराम की जिंदगी और यहां तक कि शान की खातिर कुत्ते-बिल्ली नहीं बल्कि खूंखार टाइगर को पालने का शौक रखते हैं. लग्जरी जीवन जीना और अधिक से अधिक रानियों को रखना भी इनका पुराना शौक रहा है.

दुबई के शासक शेख मुहम्मद बिन राशिद अल मखदूम को भी रानियों का शौक रहा है. इन्होंने 5वीं शादी करने के बाद छठी शादी जौर्डन के किंग अब्दुल्ला की सौतेली बहन हया से की. हया न सिर्फ बला की खूबसूरत थी, बल्कि औक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ी-लिखी व आधुनिक ख्याल की महिला रही है.

शेख मुहम्मद बिन राशिद से शादी के बाद वह दुबई में रहने तो लगी पर उन्हें हद से ज्यादा धार्मिक पाबंदियों से चिढ़ होने लगी थी.

करोड़ों रूपए के साथ हुई लापता…

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाबंदियों से उकता कर दुबई के अरबपति शासक की छठी बीवी रानी हया करोड़ों रूपए और बच्चों के साथ लापता हो गईं. खबर है कि वे अपने साथ करीब 31 मिलियन पाउंड लगभग 271 करोङ रूपए भी साथ ले गई हैं.

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आधुनिकता पर हावी कट्टरता

तेल के कुओं से अरबपति शेखों और पैसे के बल पर आज सऊदी अरब में गगनचुंबी इमारतें हैं, साफ-सुथरी सड़के हैं और वह सब है जो एक अमीर देश की पहचान होती है पर इन सब चकाचौंध के पीछे यहां धार्मिक पाबंदियां आधुनिकता पर बुरी तरह हावी हैं.

दरअसल, उच्च शिक्षा प्राप्त हया जो पश्चिमी संस्कृति में पलीबङी थीं, धार्मिक कट्टरता और रहनसहन से सामंजस्य नहीं बैठा पा रही थीं.

जौर्डन के किंग अब्दुल्ला की सौतेली बहन हया को बंदिशों से चिढ़ थी. शेख के साथ उस के रिश्ते भी अच्छे नहीं चल रहे थे. हया ने फिर एक कठोर फैसला लिया और बच्चों सहित किसी सुरक्षित स्थान की ओर चल दीं. हया अब शौहर से तलाक लेना चाहती हैं और जरमनी में बसना चाहती हैं.

किसने की मदद

अरब देशों की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हया को दुबई से निकलने में जरमनी के राजनयिकों ने मदद की है, क्योंकि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों को धता बता कर बेशुमार दौलत के साथ भागना यों भी आसान नहीं था.

क्या कूटनीतिक संबंधों पर असर पड़ेगा

हया को देश से निकालने को ले कर जरमनी और यूएई में राजनीतिक संबंधों पर असर पङ सकता है, यह तय है क्योंकि इस के तुरंत बाद शेख मुहम्मद बिन राशिद ने जरमनी के राजनयिकों से बात कर हया को सौंपने की मांग तक कर डाली पर जरमनी ने इस के लिए किसी तरह की मदद देने से इनकार कर दिया.

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इनकी कौन सुनेगा

वहीं, सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बंगलादेश जैसे गरीब देशों से बड़ी संख्या में लड़किया पैसा कमाने के लिए खाड़ी देशों की ओर रूख करती हैं. कुछ जो कबूतरबाजी की शिकार हो कर वहां पहुंचती हैं उन की जिंदगी तो इतनी नारकीय होती है कि जान कर ही रौंगटे खड़े हो जाएं. यहां तक कि पढ़ी-लिखी व आधुनिक खयाल की महिलाएं भी, जो चकाचौंध भरी जिंदगी से आकर्षित हो कर वहीं रह कर नाम और पैसा कमाना चाहती हैं, कभीकभी धोखे का शिकार हो जाती हैं और फिर शुरू हो जाता है उन पर जुल्म और सितम ढाने की इंतहा.

हाल ही में केरल की कई नर्सें वहां उंचे ख्वाब ले कर गई थीं, जिन्हें बाद में सरकार के हस्तक्षेप के बाद वतन लाया गया. इन नर्सों को वहां बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता था.

हया के साथ चूंकि हाई प्रोफाइल मामला है, इसलिए संभव है इन की सुध कोई न कोई लेगा पर उन महिलाओं की आखिर कौन सुनेगा, जो ऊंचे सपने ले कर खाड़ी देशों में चली तो गईं पर वहां गुलाम सी बदतर जिंदगी जीने को आज भी विवश हैं?

रितविक धनजानी के फैशन ट्राय कर बने स्टाइल एक्सपर्ट

रितविक धनजानी टीवी इंडस्ट्री को वो चहरा है जो ना सिर्फ लड़कियों में बल्कि लड़को में भी काफी पौपुलर है. चाहे एक्टिंग हो या फिर उनकी एंकरिंग हर जिस में उनको सेन्स औफ ह्यूमर काफी लाजवाब है. वैसे रितविक की एक और क्वालिटी है जो उनको सभी से अलग करती है और वो है दोस्ती और प्यार में इमानदारी. रितविक धनजानी एक अच्छे पति के साथ-साथ अच्छे दोस्त भी हैं. करन वाही से उनकी दोस्ती किसी से छुपी नहीं हैं. वही अपने आशा के साथ 6साल का प्यार और उन प्यार में वफादारी. इन सब क्वालिटी के अलावा एक खास बात और है रितविक हमेशा स्टाइलिश रहते है. किसी भी इवेंट या पार्टी में रितविक का स्टाइल सेन्स देखते ही बनता है. इसलिए आज हम लाए उनके कुछ खास लुक्स जिसको ट्राय करके आप भी स्टाइलिश दिख सकते है.

इंडियन वेस्टर्न लुक

रितविक इस लुक में उन्होंने इंडियन वेस्टर्न आउट फिट को परफेक्टली कैरी किया है. लाइट वोइलेट कलर के इस इंडो- वेस्टर्न ड्रेस को आप किसी भी पार्टी में ट्राय कर सकते हैं.

 

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Aaj thoda desi!✨

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रितविक का बो लुक

इस ब्लैक सूट वाले लुक में बो टाय ने इसे पुरा कंपलीट कर दिया है. फुल ब्लैक वाले इस लुक को आप किसी भी पार्टी और इवेंट पर ट्राय कर सकते हैं.

रितविक येल्लो लुक

इस लुक में रितविक ने काफी कलरफुल कपड़ो को कैरी किया है. जिसमें वो काफी क्लासी लग रहा है. रितविक के इस लुक को यंग बौय्ज कैरी करके अपने फैशन को और भी बेहतर बना सकते है.

 

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Yellow is hope, and yellow is happiness.. . . wishing everyone a lot of yellow in your lives!✨😄 #London 🌈

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फ्लावरी शर्ट लुक

वैसे तो फ्लावरी शर्ट प्रिंट सभी अपने हौलीडेज में कैरी करते है. पर अगर आप कुछ अच्छा पहनना चाहते है तो और इजीलि कैरी करना चहते है तो  फ्लावरी शर्ट वीथ शोट्स पेंट ट्राय कर सकते है.

तो ये थे  रितविक के कुछ क्लासी लुक जिसे आप ट्राय कर सकते है.

शर्मनाक दलितों को सताने का जारी है सिलसिला

लेखक- शंभू शरण सत्यार्थी

जितेंद्र ऊंची जाति वालों के सामने कुरसी पर बैठ कर खाना खा रहा था. यह बात उन लोगों को पसंद नहीं आई और उस की कुरसी पर लात मार दी. इस दौरान जितेंद्र की थाली का भोजन उन लोगों के कपड़ों पर जा गिरा. इस बात पर उस की जम कर पिटाई कर दी गई जिस से उस की मौत हो गई.

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एंडोरी थाने के लोहरी गांव के 60 साला दलित कप्तान की मौत के बाद उस के परिवार वाले जब श्मशान घाट ले गए तो गांव के दबंगों ने उन्हें वहां से भगा दिया. मजबूर हो कर इन लोगों ने अपने घर के सामने कप्तान का दाह संस्कार किया.

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के कोतवाली इलाके में एक शादी समारोह में फिल्टर जार वाला पानी मंगवाया गया. जब पानी का जार देने वाला आदमी वहां पहुंचा तो मालूम हुआ कि वह तो दलित है. इस से अगड़ों में पानी के अछूत होने का भयानक डर पैदा हो गया और उस जार वाले को काफी फजीहत झेलनी पड़ी.

इसी तरह जालौन जिले के तहत गिरथान गांव में चंदा इकट्ठा कर के भंडारे का आयोजन किया गया था, जिस में सभी जाति के लोगों ने सहयोग दिया था. भोज चल रहा था कि कुछ दलित नौजवान पूरी और खाने की दूसरी चीजें बांटने लगे. ऊंची जाति वालों ने इस का विरोध किया और खाना खाने से इनकार करते हुए दलितों को अलग बिठाने की मांग करने लगे.

दलितों ने इस का विरोध किया तो उन में झगड़ा हो गया. बाद में दबंगों ने फरमान जारी कर दिया कि दलितों का बहिष्कार किया जाए. इस फरमान को तोड़ने वाले पर 1,000 रुपए जुर्माने के साथ ही सरेआम 5 जूते भी मारे जाएंगे.

ये चंद उदाहरण हैं. देशभर में दलितों के साथ आज भी तरहतरह की सताने वाली घटनाएं घटती रहती हैं. देश के नेता जब बुलंद आवाज में दलितों की बात करते हैं तो लगता है कि समाज में बदलाव की बयार चल रही?है.

तसवीर कुछ इस अंदाज में पेश की जाती?है कि लगता है कि देश में जातिगत बराबरी आ रही है, पर सच तो यह है कि जातिवाद और छुआछूत ने 21वीं सदी में भी अपने पैर पसार रखे?हैं.

मध्य प्रदेश के मालवा जिले के माना गांव के चंदेर की बेटी की शादी थी. चंदेर ने बैंड पार्टी बुलवा ली थी. यह बात ऊंची जाति के लोगों को नागवार गुजरी. उन्होंने सामाजिक बहिष्कार करने की धमकी दी, फिर भी उन लोगों ने बैंडबाजा बजवाया और खुशियां मनाईं.

इस बात से नाराज हो कर ऊंची जाति के लोगों ने दलितों के कुएं में मिट्टी का तेल डाल दिया.

दलितों की जरूरत

ऊंची जाति के लोगों को बेगारी करने के लिए, बोझा ढोने के लिए, घर की साफसफाई करने के लिए, घर बनाने के लिए इन्हीं दलितों की जरूरत पड़ती है. लेकिन जब काम निकल जाता है तो वे लोग उन्हें भूल जाते हैं. वे कभी नहीं चाहते हैं कि दलितों की जिंदगी में भी सुधार हो.

उन्हें यह डर सताता रहता है कि अगर दलित उन की बराबरी में खड़े हो गए तो फिर जीहुजूरी और चाकरी कौन करेगा? लेकिन जब काम निकल जाता है तो ऊंची जाति वाले दलितों को दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देते हैं.

शोषण और गैरबराबरी की वजह से बहुत से दलित ईसाई और बौद्ध धर्म अपना चुके हैं. दलितों का दूसरा धर्म स्वीकार करना भी इन ऊंची जाति वालों को काफी खलता है.

इज्जत से जीने का हक नहीं

हमारे देश में एक तरफ तो दलितों में चेतना बढ़ी है तो वहीं दूसरी तरफ दलितों पर जोरजुल्म की वारदातें भी लगातार जारी हैं. दलित भी पोंगापंथ से बाहर

नहीं निकल पा रहे हैं. इस देश में आज भी 37 फीसदी दलित गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं. 57 फीसदी दलित कुपोषण के शिकार हैं. हर 18 मिनट पर एक दलित के खिलाफ अपराध होता है.

दुख की बात तो यह है कि आज भी 21वीं सदी में दलितों को इज्जत से जीने का हक नहीं मिल पाता है जिस के वे हकदार हैं.

इन की भूल क्या है

दलित लोगों में से कुछ निरंकारी, राधास्वामी, ईसाई, आर्य समाजी, कुछ कट्टर हिंदू, नकली शर्मा, चौहान, सूर्यवंशी और चंद्रवंशी हैं. वे तकरीबन 1,108 जातियों में बंटे हुए हैं. ज्यादातर मामलों में दलित एकजुट हो कर आवाज नहीं उठाते हैं.

दलित भी इंसाफ मिलने की आस देवताओं से करते हैं. उन्हें पता नहीं है कि देवता खुद रिश्वतखोर हैं और ऊंची जाति वालों का यह शोषण करने का बहुत बड़ा हथियार हैं. दलित समाज अलगअलग खेमों में बंटा हुआ है और ये लोग अपनेअपने संगठन का झंडाडंडा उठा कर खुश हैं.

दलितों में भी जिन की हालत सुधर गई है, उन में से कुछ लोग अपनेआप को ऊंची जाति के बराबर का समझने की भूल कर बैठे हैं. बहुत से मामलों में ये दलित भी ऊंची जाति वालों का साथ देने लगते हैं. इन की हालत जितनी भी सुधर जाए, लेकिन ऊंची जाति के लोग उन्हें दलित और निचला ही समझते हैं.

दलितों पर हो रहे शोषण का विरोध एकजुट हो कर पूरी मुस्तैदी के साथ करना पड़ेगा, तभी उन पर हो रहा जोरजुल्म रुक पाएगा.

हैरानी की बात यह है कि अपनेआप को दलितों का नेता मानने वाले रामविलास पासवान और देश के दलित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी इस मसले पर चुप दिखाई देते हैं.               द्य

पहला-पहला प्यार भाग-2

लेखक-  शन्नो श्रीवास्तव

‘‘दा,तुम मेरी बात मान लो और आज खाने की मेज पर मम्मीपापा को सारी बातें साफसाफ बता दो. आखिर कब तक यों परेशान बैठे रहोगे?’’

बच्चों की बातें कानों में पड़ीं तो मैं रुक गई. ऐसी कौन सी गलती विकी से हुई जो वह हम से छिपा रहा है और उस का छोटा भाई उसे सलाह दे रहा है. मैं ‘बात क्या है’ यह जानने की गरज से छिप कर उन की बातें सुनने लगी.

‘‘इतना आसान नहीं है सबकुछ साफसाफ बता देना जितना तू समझ रहा है,’’ विकी की आवाज सुनाई पड़ी.

‘‘दा, यह इतना मुश्किल भी तो नहीं है. आप की जगह मैं होता तो देखते कितनी स्टाइल से मम्मीपापा को सारी बातें बता भी देता और उन्हें मना भी लेता,’’ इस बार विनी की आवाज आई.

‘‘तेरी बात और है पर मुझ से किसी को ऐसी उम्मीद नहीं होगी,’’ यह आवाज मेरे बड़े बेटे विकी की थी.

‘‘दा, आप ने कोई अपराध तो किया नहीं जो इतना डर रहे हैं. सच कहूं तो मुझे ऐसा लगता है कि मम्मीपापा आप की बात सुन कर गले लगा लेंगे,’’ विनी की आवाज खुशी और उत्साह दोनों से भरी हुई थी.

‘बात क्या है’ मेरी समझ में कुछ नहीं आया. थोड़ी देर और खड़ी रह कर उन की आगे की बातें सुनती तो शायद कुछ समझ में आ भी जाता पर तभी प्रेस वाले ने डोर बेल बजा दी तो मैं दबे पांव वहां से खिसक ली.

बच्चों की आधीअधूरी बातें सुनने के बाद तो और किसी काम में मन ही नहीं लगा. बारबार मन में यही प्रश्न उठते कि मेरा वह पुत्र जो अपनी हर छोटीबड़ी बात मुझे बताए बिना मुंह में कौर तक नहीं डालता है, आज ऐसा क्या कर बैठा जो हम से कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. सोचा, चल कर साफसाफ पूछ लूं पर फिर लगा कि बच्चे क्या सोचेंगे कि मम्मी छिपछिप कर उन की बातें सुनती हैं.

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जैसेतैसे दोपहर का खाना तैयार कर के मेज पर लगा दिया और विकीविनी को खाने के लिए आवाज दी. खाना परोसते समय खयाल आया कि यह मैं ने क्या कर दिया, लौकी की सब्जी बना दी. अभी दोनों अपनीअपनी कटोरी मेरी ओर बढ़ा देंगे और कहेंगे कि रामदेव की प्रबल अनुयायी माताजी, यह लौकी की सब्जी आप को ही सादर समर्पित हो. कृपया आप ही इसे ग्रहण करें. पर मैं आश्चर्यचकित रह गई यह देख कर कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. उलटा दोनों इतने मन से सब्जी खाने में जुटे थे मानो उस से ज्यादा प्रिय उन्हें कोई दूसरी सब्जी है ही नहीं.

बात जरूर कुछ गंभीर है. मैं ने मन में सोचा क्योंकि मेरी बनाई नापसंद सब्जी या और भी किसी चीज को ये चुपचाप तभी खा लेते हैं जब या तो कुछ देर पहले उन्हें किसी बात पर जबरदस्त डांट पड़ी हो या फिर अपनी कोई इच्छा पूरी करवानी हो.

खाना खा कर विकी और विनी फिर अपने कमरे में चले गए. ऐसा लग रहा था कि किसी खास मसले पर मीटिंग अटेंड करने की बहुत जल्दी हो उन्हें.

विकी सी.ए. है. कानपुर में उस ने अपना शानदार आफिस बना लिया है. ज्यादातर शनिवार को ही आता है और सोमवार को चला जाता है. विनी एम.बी.ए. की तैयारी कर रहा है. बचपन से दोनों भाइयों के स्वभाव में जबरदस्त अंतर होते हुए भी दोनों पल भर को भी अलग नहीं होते हैं. विकी बेहद शांत स्वभाव का आज्ञाकारी लड़का रहा है तो विनी इस के ठीक उलट अत्यंत चंचल और अपनी बातों को मनवा कर ही दम लेने वाला रहा है. इस के बावजूद इन दोनों भाइयों का प्यार देख हम दोनों पतिपत्नी मन ही मन मुसकराते रहते हैं.

अपना काम निबटा कर मैं बच्चों के कमरे में चली गई. संडे की दोपहर हमारी बच्चों के कमरे में ही गुजरती है और बच्चे हम से सारी बातें भी कह डालते हैं, जबकि ऐसा करने में दूसरे बच्चे मांबाप से डरते हैं. आज मुझे राजीव का बाहर होना बहुत खलने लगा. वह रहते तो माहौल ही कुछ और होता और वह किसी न किसी तरह बच्चों के मन की थाह ले ही लेते.

मेरे कमरे में पहुंचते ही विनी अपनी कुरसी से उछलते हुए चिल्लाया, ‘‘मम्मा, एक बात आप को बताऊं, विकी दा ने…’’

उस की बात विकी की घूरती निगाहों की वजह से वहीं की वहीं रुक गई. मैं ने 1-2 बार कहा भी कि ऐसी कौन सी बात है जो आज तुम लोग मुझ से छिपा रहे हो, पर विकी ने यह कह कर टाल दिया कि कुछ खास नहीं मम्मा, थोड़ी आफिस से संबंधित समस्या है. मैं आप को बता कर परेशान नहीं करना चाहता पर विनी के पेट में कोई बात पचती ही नहीं है.

हालांकि मैं मन ही मन बहुत परेशान थी फिर भी न जाने कैसे झपकी लग गई और मैं वहीं लेट गई. अचानक ‘मम्मा’ शब्द कानों में पड़ने से एक झटके से मेरी नींद खुल गई पर मैं आंखें मूंदे पड़ी रही. मुझे सोता देख कर उन की बातें फिर से चालू हो गई थीं और इस बार उसी कमरे में होने की वजह से मुझे सबकुछ साफसाफ सुनाई दे रहा था.

विकी ने विनी को डांटा, ‘‘तुझे मना किया था फिर भी तू मम्मा को क्या बताने जा रहा था?’’

‘‘क्या करता, तुम्हारे पास हिम्मत जो नहीं है. दा, अब मुझ से नहीं रहा जाता, अब तो मुझे जल्दी से भाभी को घर लाना है. बस, चाहे कैसे भी.’’

विकी ने एक बार फिर विनी को चुप रहने का इशारा किया. उसे डर था कि कहीं मैं जाग न जाऊं या उन की बातें मेरे कानों में न पड़ जाएं.

अब तक तो नींद मुझ से कोसों दूर जा चुकी थी. ‘तो क्या विकी ने शादी कर ली है,’ यह सोच कर लगा मानो मेरे शरीर से सारा खून किसी ने निचोड़ लिया. कहां कमी रह गई थी हमारे प्यार में और कैसे हम अपने बच्चों में यह विश्वास उत्पन्न करने में असफल रह गए कि जीवन के हर निर्णय में हम उन के साथ हैं.

आज पलपल की बातें शेयर करने वाले मेरे बेटे ने मुझे इस योग्य भी न समझा कि अपने शादी जैसे महत्त्वपूर्ण फैसले में शामिल करे. शामिल करना तो दूर उस ने तो बताने तक की भी जरूरत नहीं समझी. मेरे व्यथित और तड़पते दिल से एक आवाज निकली, ‘विकी, सिर्फ एक बार कह कर तो देखा होता बेटे तुम ने, फिर देखते कैसे मैं तुम्हारी पसंद को अपने अरमानों का जोड़ा पहना कर इस घर में लाती. पर तुम ने तो मुझे जीतेजी मार डाला.’

पल भर के अंदर ही विकी के पिछले 25 बरस आंखों के सामने से गुजर गए और उन 25 सालों में कहीं भी विकी मेरा दिल दुखाता हुआ नहीं दिखा. टेबल पर रखे फल उठा कर खाने से पहले भी वह जहां होता वहीं से चिल्ला कर मुझे बताता था कि मम्मा, मैं यह सेब खाने जा रहा हूं. और आज…एक पल में ही पराया बना दिया बेटे ने.

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कलेजे को चीरता हुआ आंसुओं का सैलाब बंद पलकों के छोर से बूंद बन कर टपकने ही वाला था कि अचानक विकी की फुसफुसाहट सुनाई पड़ी, ‘‘तुम ने देखा नहीं है मम्मीपापा के कितने अरमान हैं अपनी बहुओं को ले कर और बस, मैं इसी बात से डरता हूं कि कहीं बरखा मम्मीपापा की कल्पनाओं के अनुरूप नहीं उतरी तो क्या होगा? अगर मैं पहले ही इन्हें बता दूंगा कि मैं बरखा को पसंद करता हूं तो फिर कोई प्रश्न ही नहीं उठता कि मम्मीपापा उसे नापसंद करें, वे हर हाल में मेरी शादी उस से कर देंगे और मैं यही नहीं चाहता हूं. मम्मीपापा के शौक और अरमान पूरे होने चाहिए, उन की बहू उन्हें पसंद होनी चाहिए. बस, मैं इतना ही चाहता हूं.’’

‘‘और अगर वह उन्हें पसंद नहीं आई तो?’’

‘‘नहीं आई तो देखेंगे, पर मैं ने इतना तो तय कर लिया है कि मैं पहले से यह बिलकुल नहीं कह सकता कि मैं किसी को पसंद करता हूं.’’

तो विकी ने शादी नहीं की है, वह केवल किसी बरखा नाम की लड़की को पसंद करता है और उस की समस्या यह है कि बरखा के बारे में हमें बताए कैसे? इस बात का एहसास होते ही लगा जैसे मेरे बेजान शरीर में जान वापस आ गई. एक बार फिर से मेरे सामने वही विकी आ खड़ा हुआ जो अपनी कोई बात कहने से पहले मेरे चारों ओर चक्कर लगाता रहता, मेरा मूड देखता फिर शरमातेझिझकते हुए अपनी बात कहता. उस का कहना कुछ ऐसा होता कि मना करने का मैं साहस ही नहीं कर पाती. ‘बुद्धू, कहीं का,’ मन ही मन मैं बुदबुदाई. जानता है कि मम्मा किसी बात के लिए मना नहीं करतीं फिर भी इतनी जरूरी बात कहने से डर रहा है.

सो कर उठी तो सिर बहुत हलका लग रहा था. मन में चिंता का स्थान एक चुलबुले उत्साह ने ले लिया था. मेरे बेटे को प्यार हो गया है यह सोचसोच कर मुझे गुदगुदी सी होने लगी. अब मुझे समझ में आने लगा कि विनी को भाभी घर में लाने की इतनी जल्दी क्यों मच रही थी. ऐसा लगने लगा कि विनी का उतावलापन मेरे अंदर भी आ कर समा गया है. मन होने लगा कि अभी चलूं विकी के पास और बोलूं कि ले चल मुझे मेरी बहू के पास, मैं अभी उसे अपने घर में लाना चाहती हूं पर मां होने की मर्यादा और खुद विकी के मुंह से सुनने की एक चाह ने मुझे रोक दिया.

रात को खाने की मेज पर मेरा मूड तो खुश था ही, दिन भर के बाद बच्चों से मिलने के कारण राजीव भी बहुत खुश दिख रहे थे. मैं ने देखा कि विनी कई बार विकी को इशारा कर रहा था कि वह हम से बात करे पर विकी हर बार कुछ कहतेकहते रुक सा जाता था. अपने बेटे का यह हाल मुझ से और न देखा गया और मैं पूछ ही बैठी, ‘‘तुम कुछ कहना चाह रहे हो, विकी?’’

‘‘नहीं…हां, मैं यह कहना चाहता था मम्मा कि जब से कानपुर गया हूं दोस्तों से मुलाकात नहीं हो पाती है. अगर आप कहें तो अगले संडे को घर पर दोस्तों की एक पार्टी रख लूं. वैसे भी जब से काम शुरू किया है सारे दोस्त पार्टी मांग रहे हैं.’’

‘‘तो इस में पूछने की क्या बात है. कहा होता तो आज ही इंतजाम कर दिया होता,’’ मैं ने कहा, ‘‘वैसे कुल कितने दोस्तों को बुलाने की सोच रहे हो, सारे पुराने दोस्त ही हैं या कोई नया भी है?’’

‘‘हां, 2-4 नए भी हैं. अच्छा रहेगा, आप सब से भी मुलाकात हो जाएगी. क्यों विनी, अच्छा रहेगा न?’’ कह कर विकी ने विनी को संकेत कर के राहत की सांस ली.

मैं समझ गई थी कि पार्टी की योजना दोनों ने मिल कर बरखा को हम से मिलाने के लिए ही बनाई है और विकी के ‘नए दोस्तों’ में बरखा भी शामिल होगी.

अब बच्चों के साथसाथ मेरे लिए भी पार्टी की अहमियत बहुत बढ़ गई थी. अगले संडे की सुबह से ही विकी बहुत नर्वस दिख रहा था. कई बार मन में आया कि उसे पास बुला कर बता दूं कि वह सारी चिंता छोड़ दे क्योंकि हमें सबकुछ मालूम हो चुका है, और बरखा जैसी भी होगी मुझे पसंद होगी. पर एक बार फिर विकी के भविष्य को ले कर आशंकित मेरे मन ने मुझे चुप करा दिया कि कहीं बरखा विकी के योग्य न निकली तो? जब तक बात सामने नहीं आई है तब तक तो ठीक है, उस के बारे में कुछ भी राय दे सकती हूं, पर अगर एक बार सामने बात हो गई तो विकी का दिल टूट जाएगा.

4 बजतेबजते विकी के दोस्त एकएक कर के आने लगे. सच कहूं तो उस समय मैं खुद काफी नर्वस होने लगी थी कि आने वालों में बरखा नाम की लड़की न मालूम कैसी होगी. सचमुच वह मेरे विकी के लायक होगी या नहीं. मेरी भावनाओं को राजीव अच्छी तरह समझ रहे थे और आंखों के इशारे से मुझे धैर्य रखने को कह रहे थे. हमें देख कर आश्चर्य हो रहा था कि सदैव हंगामा करते रहने वाला विनी भी बिलकुल शांति  से मेरी मदद में लगा था और बीचबीच में जा कर विकी की बगल में कुछ इस अंदाज से खड़ा होता मानो उस से कह रहा हो, ‘दा, दुखी न हो, मैं तुम्हारे साथ हूं.’

ठीक साढ़े 4 बजे बरखा ने अपनी एक सहेली के साथ ड्राइंगरूम में प्रवेश किया. उस के घुसते ही विकी की नजरें विनी से और मेरी नजरें इन से जा टकराईं. विकी अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और उन्हें हमारे पास ला कर उन से हमारा परिचय करवाया, ‘‘बरखा, यह मेरे मम्मीपापा हैं और मम्मीपापा, यह मेरी नई दोस्त बरखा और यह बरखा की दोस्त मालविका है. ये दोनों एम.सी.ए. कर रही हैं. पिछले 7 महीने से हमारी दोस्ती है पर आप लोगों से मुलाकात न करवा सका था.’’

हम ने महसूस किया कि बरखा से हमारे परिचय के दौरान पूरे कमरे का शोर थम गया था. इस का मतलब था कि विकी के सारे दोस्तों को पहले से बरखा के बारे में मालूम था. सच है, प्यार एक ऐसा मामला है जिस के बारे में बच्चों के मांबाप को ही सब से बाद में पता चलता है. बच्चे अपना यह राज दूसरों से तो खुल कर शेयर कर लेते हैं पर अपनों से बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं.

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बरखा को देख लेने और उस से बातचीत कर लेने के बाद मेरे मन में उसे बहू बना लेने का फैसला पूर्णतया पक्का हो गया. विकी बरखा के ही साथ बातें कर रहा था पर उस से ज्यादा विनी उस का खयाल रख रहा था. पार्टी लगभग समाप्ति की ओर अग्रसर थी. यों तो हमारा फैसला पक्का हो चुका था पर फिर भी मैं ने एक बार बरखा को चेक करने की कोशिश की कि शादी के बाद घरगृहस्थी संभालने के उस में कुछ गुण हैं या नहीं.

मेरा मानना है कि लड़की कितने ही उच्च पद पर आसीन हो पर घरपरिवार को उस के मार्गदर्शन की आवश्यकता सदैव एक बच्चे की तरह होती है. वह चूल्हेचौके में अपना दिन भले ही न गुजारे पर चौके में क्या कैसे होता है, इस की जानकारी उसे अवश्य होनी चाहिए ताकि वह अच्छा बना कर खिलाने का वक्त न रखते हुए भी कम से कम अच्छा बनवाने का हुनर तो अवश्य रखती हो.

मैं शादी से पहले घरगृहस्थी में निपुण होना आवश्यक नहीं मानती पर उस का ‘क ख ग’ मालूम रहने पर ही उस जिम्मेदारी को निभा पाने की विश्वसनीयता होती है. बहुत से रिश्तों को इन्हीं बुनियादी जिम्मेदारियों के अभाव में बिखरते देखा था मैं ने, इसलिए विकी के जीवन के लिए मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी.

मैं ने बरखा को अपने पास बुला कर कहा, ‘‘बेटा, सुबह से पार्टी की तैयारी में लगे होने की वजह से इस वक्त सिर बहुत दुखने लगा है. मैं ने गैस पर तुम सब के लिए चाय का पानी चढ़ा दिया है, अगर तुम्हें चाय बनानी आती हो तो प्लीज, तुम बना लो.’’

‘‘जी, आंटी, अभी बना लाती हूं,’’ कह कर वह विकी की तरफ पलटी, ‘‘किचन कहां है?’’

‘‘उस तरफ,’’ हाथ से किचन की तरफ इशारा करते हुए विकी ने कहा, ‘‘चलो, मैं तुम्हें चीनी और चायपत्ती बता देता हूं,’’ कहते हुए वह बरखा के साथ ही चल पड़ा.

‘‘बरखाजी को अदरक कूट कर दे आता हूं,’’ कहता हुआ विनी भी उन के पीछे हो लिया.

चाय चाहे सब के सहयोग से बनी हो या अकेले पर बनी ठीक थी. किचन में जा कर मैं देख आई कि चीनी और चायपत्ती के डब्बे यथास्थान रखे थे, दूध ढक कर फ्रिज में रखा था और गैस के आसपास कहीं भी चाय गिरी, फैली नहीं थी. मैं निश्चिंत हो आ कर बैठ गई. मुझे मेरी बहू मिल गई थी.

एकएक कर के दोस्तों का जाना शुरू हो गया. सब से अंत में बरखा और मालविका हमारे पास आईं और नमस्ते कर के हम से जाने की अनुमति मांगने लगीं. अब हमारी बारी थी, विकी ने अपनी मर्यादा निभाई थी. पिछले न जाने कितने दिनों से असमंजस की स्थिति गुजरने के बाद उस ने हमारे सामने अपनी पसंद जाहिर नहीं की बल्कि उसे हमारे सामने ला कर हमारी राय जाननेसमझने का प्रयत्न करता रहा. और हम दोनों को अच्छी तरह पता है कि अभी भी अपनी बात कहने से पहले वह बरखा के बारे में हमारी राय जानने की कोशिश अवश्य करेगा, चाहे इस के लिए उसे कितना ही इंतजार क्यों न करना पड़े.

मैं अपने बेटे को और असमंजस में नहीं देख सकती थी, अगर वह अपने मुंह से नहीं कह पा रहा है तो उस की बात को मैं ही कह कर उसे कशमकश से उबार लूंगी.

बरखा के दोबारा अनुमति मांगने पर मैं ने कहा, ‘‘घर की बहू क्या घर से खाली हाथ और अकेली जाएगी?’’

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मेरी बात का अर्थ जैसे पहली बार किसी की समझ में नहीं आया. मैं ने विकी का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘तेरी पसंद हमें पसंद है. चल, गाड़ी निकाल, हम सब बरखा को उस के घर पहुंचाने जाएंगे. वहीं इस के मम्मीडैडी से रिश्ते की बात भी करनी है. अब अपनी बहू को घर में लाने की हमें भी बहुत जल्दी है.’’

मेरी बात का अर्थ समझ में आते ही पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. मम्मीपापा को यह सब कैसे पता चला, इस सवाल में उलझाअटका विकी पहले तो जहां का तहां खड़ा रह गया फिर अपने पापा की पहल पर बढ़ कर उन के सीने से लग गया.

इन सब बातों में समय गंवाए बिना विनी गैरेज से गाड़ी निकाल कर जोरजोर से हार्न बजाने लगा. उस की बेताबी देख कर मैं दौड़ते हुए अपनी खानदानी अंगूठी लेने के लिए अंदर चली गई, जिसे मैं बरखा के मातापिता की सहमति ले कर उसे वहीं पहनाने वाली थी.

 

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