सपना चौधरी पर भी चढ़ा टिक-टौक का बुखार, शेयर किया ये VIDEO

जी हां हम बात कर रहे हैं हरियाणवी सिंगर और डांसर सपना चौधरी की. जिनके डांस के चर्चे आज पूरी दुनिया में हैं. आज अगर सपना चौधरी की बात करें तो सपना अब सच में सपना हो गई हैं..क्योंकि जहां पहले उनके डांस को लोग आराम से देख पाते थे उनसे मिल पाते थे अब तो वो एक इतनी बड़ी हस्ती हो गई हैं कि उनके डांस को देखने के लिए लोग तरसते हैं उन्हें सपना के शो के लिए टिकट भी एडवांस में बुक करनी पड़ती हैऔर तो और वो अब वो बीजेपी में भी शामिल हो गई हैं तो उनसे मिलने के लिए लोगों को अप्वाइंमेंट लेना पड़ता है.

बौलीवुड स्टार्स भी इससे अछूते नहीं रहें…

जैसा कि आप सभी को पता है कि इस वक्त टिक-टौक का बुखार पूरे देश में चल रहा है. भले ही सुप्रीम कोर्ट में इस पर केस चलाया हो या जो भी हो लेकिन इस टिक-टौक के लिए लोगों की दिवानगी कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. तभी तो हरियाणवी डांसर सपना चौधरी पर भी टिक-टौक का बुखार चढ़ गया है और ये टिक-टौक की बीमारी उनके सर चढ़ कर बोल रही है.

 

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सपना चौधरी के टिक-टौक वीडियो

 

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इंस्टाग्राम हो या कोई भी सोशल मीडिया वहां पर आप सपना चौधरी के टिक-टौक वीडियो आराम से देख सकते हैं कि कैसे सपना चौधरी ने एक अलग ही अंदाज में अपने फैन्स का दिल जीतने की कोशिश की है और तो और लोग सपना के इस अंदाज को काफी पसंद भी कर रहे हैं. एक टिक-टौक में तो ऐसा लगता है मानों अब सपना को एक साथ की जरूरत है उसमें साफ-साफ सपना फूछ रही हैं कि कब लेके आओगे बारात ये कहो ना. शायद अब सपना अपने लिए एक हमसफर की तलाश में हैं. अब उन्हें भी चाहिए एक साथी जिसके साथ वो अपनी जिंदगी गुजार सकें.

सपना के डांस ने लोगों को बनाया दिवाना 

यूं तो सपना के डांस ने लोगों को दिवाना बनाया ही है लेकिन अब इस टिक-टौक ने लोगों के दिल को जीतने का एक नया तरीका दे दिया सपना को… सपना के टिक-टौक के इतने दिवाने हो गए हैं लोग कि सोशल मीडिया पर सपना की फैन फौलोविंग भी बढ़ गई है. लाइक और साथ ही ढेर सारे पौजिटिव कमेंट के साथ ही सोशल मीडिया पर भी सपना का जलवा छा गया है. अब तो आए दिन सपना चौधरी के नए-नए टिक-टौक वीडियोज सामने आ रहे हैं और सपना ऐसे ही लोगों के दिल को जीतती चली जा रही हैं.

बता दें, सपना को लेकर भले ही कई कंट्रोवर्सी हो रही हों और तमाम तरह की बातें हो रही हों लेकिन सपना तो भाई सपना ही है और उन्हें किस बात का डर. जब उनके साथ उनके पूरे फैन्स हो और सपना खुद कहती हैं कि अगर उनके साथ उनके फैन्स का प्यार है तो वो किसी भी कंट्रोवर्सी से नहीं डरती हैं. भाई जो भी हो लेकिन सपना का ये नया अंदाज लोगों को खूब भा रहा है.

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फ्रेंच निर्देशक ने प्रभास की ‘साहो’ पर लगाया चोरी का आरोप

दुनियाभर में धूम मचाने वाली फिल्म ‘‘बाहुबली-1’’ और ‘‘बाहुबली-2’’ में दक्षिण भारतीय फिल्म कलाकार प्रभास ने जिस तरह का बेहतरीन अभिनय किया था. उसी के सम्मोहन में फंसकर तमाम सिने प्रेमी प्रभास की नई फिल्म‘ ‘साहो’’ के लिए एडवांस में टिकट बुक करा कर बुरी तरह से फंस गए. फिल्म ‘‘साहो’’ की फिल्म आलोचकों ने कटु आलोचना की. तो वहीं फिल्म देखकर निकल रहा दर्शक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है. जबकि फिल्म ‘‘साहो’’ के निर्माता हर दिन दावा कर रहे हैं कि उनकी फिल्म ‘साहो’ बौक्स आफिस पर रिकार्ड तोड़ कमाई कर रही है. मगर ‘साहो’ के निर्माता यह नहीं बता रहे हैं कि उन्होंने किस तरह यह आंकड़े इकट्ठे किए हैं.

दाम बढ़ाकर बेची गईं टिकट…

फिल्म ‘‘साहो’’ किस तरह की फिल्म है, इसकी भनक किसी को लगने नहीं दी गयी. फिल्म की टिकटें एडवांस में दाम बढ़ाकर बेचे गए. कुछ मल्टीप्लैक्स ने प्रीमियम टिकटे दो हजार रूपए में बेची गयी. फिल्म समीक्षकों को भी मुंबई में शुक्रवार, तीस अगस्त की सुबह सवा ग्यारह बजे फिल्म दिखायी गयी. जबकि अमूमन हर फिल्मकार फिल्म समीक्षक को अपनी फिल्म रिलीज से एक दो दिन पहले ही दिखा देता है. बहरहाल, निर्माता और प्रभास को यह याद रखना होगा कि इस फिल्म के साथ ही उन्होंने दर्शकों के बीच अपना विश्वास खो दिया है. जिसका खामियाजा उन्हे आगामी फिल्मों में भुगतना पड़ सकता है. ज्ञातव्य है कि फिल्म ‘‘साहो’’ के निर्माताओं में से एक निर्माता प्रभास भी हैं. उन्होने इस फिल्म में निर्माता के तौर पर प्रमोद उपालापट्टी नाम दिया है.

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फिल्म पर लग रहे चोरी के आरोप…

एक तरफ सिनेप्रेमी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है, तो दूसरी तरफ फिल्म ‘‘साहो’’ पर लगातार चोरी के आरोप लग रहे हैं. सबसे पहले अभिनेत्री लिजा रे ने फिल्म ‘साहो’ पर एक कलाकार के आर्ट वर्क की चोरी का आरोप लगाया. फिर उस कलाकार ने भी ‘साहो’ के निर्माताओं पर चोरी के आरोप लगाए.

फ्रेंच निर्देशक ने लगाया चोरी का आरोप…

और अब ताजातरीन आरोप 2008 में रिलीज फ्रेंच फिल्म ‘‘लार्गो विंच’’ के निर्देशक जेरोम साल ने लगाया है. फ्रेंच फिल्म निर्देशक जेरोम साल ने फिल्म ‘साहो’ पर उनकी फिल्म ‘‘लार्गो विंच’’ को चुराने का आरोप लगाया है. फ्रेंच निर्देशक जेरोम साल ने ‘साहो’ को अपनी फिल्म ‘‘लार्गो विंच’ की ‘फ्रीमेक’ की संज्ञा देते हुए कहा कि ‘पहले की तरह खराब है’. जेरोम साल ने एक सितंबर को ट्वीट किए गए अपने ट्वीट में लिखा है- ‘‘ऐसा लगता है ‘लार्गो विंच’ की यह दूसरी ‘फ्री मेक’ है. पहले वाली की ही तरह खराब है. तो कृपया तेलगू फिल्म के निर्देशकों अगर आप मेरा काम चुराते हैं, तो कम से कम ठीक से करें.’’

ज्ञातव्य है कि फिल्म ‘‘साहो’’ मूलतः तेलगू फिल्म है, जिसे हिंदी, तमिल व मलायलम में डब किया गया है.

जब एक दर्शक ने जेरोम साल को ट्वीट करके सूचना दी कि उनकी फिल्म की चोरी की गयी है, तो जेरोम साल ने उसे जवाब देते हुए ट्वीट किया- मुझे लगता है कि मेरा भारत में आशाजनक करियर है.’’

इतना ही नही फ्रेंच फिल्मकार जेरोम साल ने 2018 में अभिनेता पवन कल्याण व निर्देशक त्रिविक्रम श्रीनिवास की तेलगू फिल्म ‘‘अग्न्याथावासी’ ’पर भी अपनी फिल्म के प्लौट को चुराने का आरोप लगाया था.

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मजेदार बात यह है कि ‘‘अग्न्याथावासी’ की ही तरह ‘‘साहो’’ के निर्माताओं ने भी जेरोम साल के आरोपों का अब तक कोई जवाब नही दिया है. वैसे इन दोनों ही फिल्मों के निर्माण के संग ‘‘टी-सीरीज’’ भी जुड़ी हुई है.

बेलजियन कौमिक बुक्स पर बनी फिल्म ‘‘लार्गो विंच’’ 17 दिसंबर 2008 को फ्रांस और बेल्जियम मे रिलीज हुई थी. फिर नवंबर 2011 में यह फिल्म अमरीका में रिलीज हुई थी. 2012 में इस फिल्म को बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म’ का ‘‘सैट्न अवौर्ड’ मिला था.

एडिट बाय- निशा राय

लोगों की जेबें ढीली करेंगे नए ट्रैफिक नियम

ट्रैफिक से संबंधित नया नियम कड़ा है ताकि लोग और ज्यादा संभल कर सड़क पर गाड़ी चलाएं. दुर्घटना के शिकार न हों या दूसरों के लिए परेशानी का सबब न बनें. सड़क पर हिफाजत से चलें,  मनमानी न करें.

‘धीरे चलिए सुरक्षित चलिए’ का नारा अब सब की समझ आ गया है, पर लोग भी तमाम बहाने बना कर अपनी आदत को बदलने का नाम ही नहीं ले रहे थे तभी तो ट्रैफिक का नया नियम  कान ऐंठने के लिए लागू किया गया है.

सड़क आप की बपौैती नहीं है, इस बात का खयाल रखें और अपनी लापरवाही किसी और पर न थोपें. कहीं ऐसा न हो कि आगे ट्रैफिक पुलिस वाले आप के गलत गाड़ी चलाने या तेज स्पीड में गाड़ी चलाने पर चालान काट कर थमा दे और आप भी कोर्टकचहरी के चक्कर लगाते रहें.

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लेकिन जो नए ट्रैफिक नियम आए हैं, वे अच्छेअच्छों की जेबें ढीली कर देंगे और आप भी सोचने पर मजबूर होंगे कि काश, गाड़ी गलत न चलाई होती या अपने बच्चे को चलाने के लिए न दी होती तो मैं चालान कटवाने या जेल जाने से तो बच जाता.

सड़क पर कतई जल्दबाजी न दिखाएं या ओवरस्पीड में गाड़ी न चलाएं. वहीं दोपहिया वाहन पर 2 सवारियां ही बैठें यानी अब आप को नए नियमों के मुताबिक ही चलना होगा.

वजह कुछ भी हो, पर आप अब बेतरतीब ढंग से गाड़ी नहीं चला सकते. गलती से अगर आप ने अनदेखी की तो नए नियमों के मुताबिक चालान कटना तय है.
मतलब यह कि सड़क पर कोई भी वाहन हो, नियंत्रित स्पीड में चलाएं.

बता दें कि संसद ने जुलाई में मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित कर दिया है. इस नियम के तहत सड़क सुरक्षा से सम्बंधित नियम कड़ा किया गया है जैसे ड्राइविंग लाइसैंस जारी करने और सड़क सुरक्षा में सुधार के प्रयास में उल्लंघन के लिए कठोर दंड लगाना वगैरह.

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अब तक जो चल रहा था जैसा चल रहा था, पर अब ऐसा नहीं चलेगा. अपनी सोच बदलें और नए नियमों का सख्ती से पालन करें. नए जमाने के साथ चलना है तो अपनी आदत में सुधार लाना होगा. जुर्माने से बचना है तो सचेत रहें, सावधान रहें.

जानें नए ट्रैफिक के नियम 

1- बिना ड्राइविंग लाइसैंस के गाड़ी न चलाएं. पकड़े जाने पर 5,000 रुपए का जुर्माना होगा.
2- शराब पी कर गाड़ी चलाने पर 10,000  रुपए जुर्माना भरना पड़ सकता है या फिर 6 महीने की कैद. अगर ऐसा दूसरी बार पाया गया तो 2 साल की कैद या 15,000 रुपए तक जुर्माना.
3-अगर गाड़ी तय स्पीड से तेज चलाई तो 2,000 रुपए का चालान काटा जाएगा.
4- बिना सीट बेल्ट बांधे गाड़ी चलाने पर 1,000 रुपए का चालान कटेगा.
5- मोबाइल फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग करने पर 5,000 रुपए का जुर्माना भरना होगा.
6- सड़क नियमों को तोडऩे पर अब 500 रुपए का चालान कटेगा.
7-बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाने पर अब 2,000 रुपए का चालान कटेगा.
8-इमर्जैंसी व्हीकल यानी अंबुलैंस गाड़ी, दमकल गाड़ी या अति महत्त्वपूर्ण लोगों के वाहन को रास्ता न देने पर 10,000 रुपए का चालान कटेगा.
9- डिसक्वालीफाई किए जाने के बावजूद भी अगर कोई शख्स गाड़ी चलाता है तो उसे 10,000  रुपए का जुर्माना देना होगा.
10- उबेर,ओला अगर ड्राइविंग लाइसैंस के नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उन पर 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, वहीं जरूरत से ज्यादा सवारी बैठाने पर 20,000 रुपए का जुर्माना लगेगा.
11- हेलमेट न पहनने पर 1,000 रुपए देने होंगे. साथ ही, 3 महीने के लिए लाइसैंस रद्द कर दिया जाएगा.
12- नाबालिग अगर सड़क पर कोई दुर्घटना करता है तो उस के मातापिता कुसूरवार माने जाएंगे और उन पर 25,000 रुपए तक का जुर्माना लगेगा, वहीं गाड़ी के रजिस्ट्रेशन पेपर रद्द कर दिए जाएंगे और 3 साल तक की जेल हो सकती है.
13- ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर 500 रुपए का जुर्माना देना होगा.
14- गलत दिशा में ड्राइविंग करने पर 5,000 रुपए का चालान देना होगा.
15- दोपहिया वाहन पर 3 सवारी बैठाने पर 500 रुपए का चालान काटा जाएगा.
16-पौल्यूशन सर्टिफिकेट न होने पर  500 रुपए देने होंगे.
17- खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने  पर 5,000 रुपए का चालान होगा.
18- रेड लाइट जंप करने पर  1,000 रुपए का जुर्माना लगेगा.

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शादी की खबरों के बीच फिर दिखी रणबीर-आलिया की रोमांटिक केमेस्ट्री

गणेश चतुर्थी के मौके पर फेमस बिजनेस पर्सनैलिटी मुकेश अम्बानी ने अपने घर पर एक शानदार कार्यक्रम रखा. इस खास मौके पर मुकेश अम्बानी के घर कई सेलेब्रिटीज भी आए, पर उनमें से एक सेलेब्रिटी कपल ऐसा था जिसने फंक्शन में आकर चार चांद लगा दिए. जी हां, हम बात कर रहे हैं बौलीवुड के पौपुलर लव बर्ड रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की.

पार्टी में दिखी क्यूट केमिस्ट्री…

इस पार्टी में से रणबीर और आलिया की फोटोज सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही हैं जिसमें दोनो साथ में मुकेश अम्बानी के घर पहुंचे. रणबीर और आलिया की फोटोज देख ये कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि दोनो के बीच बेहद अच्छी कैमिस्ट्री है. जिस तरह रणबीर आलिया को इतने प्यार से ले कर आ रहे हैं, ऐसा कहा जा सकता है कि वे आलिया का काफी ध्यान रखते हैं.

 

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एक्सेप्ट नहीं किया रिलेशन… 

अपने रिश्ते को लेकर रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की में से किसी ने अब तक कुछ नहीं कहा है पर उनकी बातों से ये साफ ज़ाहिर होता है कि वे एक दूसरे को काफी पसंद करते हैं.

ट्रेडिशनल  लुक में दिखे दोनों…

गणेश चतुर्थी के खास मौके पर आलिया और रणबीर काफी सुंदर लग रहे थे. आलिया पीले रंग की साड़ी और पिंक कलर के ब्लाउज में नज़र आ रही है तो वहीं रणबीर ने ग्रे कलर का कुर्ता पायजामा पहना हुआ है.

 

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“ब्रह्मास्त्र” में साथ आएंगे नजर…

बता दें, रणबीर कपूर और आलिया भट्ट अयान मुखर्जी की अप्कमिंग फिल्म “ब्रह्मास्त्र” में साथ दिखाई देंगे. इस फिल्म में आलिया और रणबीर के अलावा अमिताभ बच्चन, मौनी रौय जैसे कलाकार भी देखने को मिलेंगे. ये फिल्म क्रिसमस के मौके पर यानी 25 दिसम्बर 2019 को रिलीज की जाएगी.

Written By: Karan Manchanda

उस के लाइक्स मेरे लाइक्स से ज्यादा कैसे

किट्टी पार्टी में मुंह लटकाए बैठी मनीषा से कारण पूछा तो उस की रुलाई फूट पड़ी. बोली, ‘‘क्या बताऊं, मुझे फेसबुक पर 2 साल से ज्यादा हो गए हैं फिर भी न जाने क्यों लाइक्स और कमैंट्स बहुत कम मिलते हैं जबकि अंजु अभी महीना पहले ही फेसबुक से जुड़ी है और उस के लाइक्स की भरमार है. भला उस के लाइक्स मेरे लाइक्स से ज्यादा कैसे?’’ उस की स्थिति देख कर मेरी आंखें भर आईं. मैं फेसबुक की माहिर नहीं थी, अत: मुझे उस का दुख दूर करने का कोई रास्ता सूझ नहीं रहा था. मैं ने इस समस्या पर सब के साथ चर्चा करने का मन बनाया. सब के आ जाने पर चाय पीते हुए जब प्रदूषण जैसे आम मुद्दे पर बात चल रही थी, तब मैं ने मनीषा की समस्या का जिक्र किया. समस्या सुन सभी को अपनी दुखती रग पर हाथ रखना लगा, क्योंकि उन्हें भी आएदिन इस समस्या से दोचार होना पड़ता था. सभी इस विषय पर चर्चा करने को राजी हो गए. फिर अपने ज्ञान व अनुभव के आधार पर सभी ने कुछ सुझाव पेश किए.

पहला सुझाव था, इस उपदेश पर अमल करना कि व्यक्ति को फल की इच्छा किए बिना कर्म करते रहना चाहिए. लोगों की पोस्ट और फोटो दिल खोल कर सिर्फ लाइक ही न करें बल्कि कमैंट्स भी करें. चाहे कोईर् तसवीर कितनी भी खराब लग रही हो, उस की प्रशंसा के पुल बांध दें. याद रखें कि भलाई कभी बेकार नहीं जाती. ये लाइक्स और कमैंट्स आप के पास कभी न कभी लौट कर अवश्य आएंगे.

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अगला सुझाव प्रेम में बंधन के महत्त्व से था. जैसे रक्षाबंधन पर भाईबहन का बंधन, फ्रैंडशिप डे के दिन दोस्तों को बांधे जाने वाले फ्रैंडशिप बैंड और इसी प्रकार गठबंधन आदि. आप भी अपने फेसबुक के दोस्तों को ‘टैग’ नामक बंधन में बांधिए. किसी भी पोस्ट को प्रस्तुत करते समय प्रेमपूर्वक कई लोगों को टैग कर दीजिए. फिर देखिए कि प्रेमभाव कैसे उमड़ कर लाइक्स और कमैंट्स में तबदील होता दिखाई देता है. टैग किए गए दोस्तों के वे मित्र जो आप के फ्रैंड नहीं हैं, उन्हें भी आप की पोस्ट दिखाई देगी और वे भी टैग जाल में फंस कर अपने लाइक्स आप को समर्पित करेंगे.

जब आप की पोस्ट पर मित्र लाइक्स और कमैंट्स की अमृतवर्षा करें तो इन अतिथियों का सत्कार करें. सुंदर फूलों का प्रावधान जो फेसबुक ने किया है, वह अपने जवाब में पेश करें. ‘आभार’, ‘हृदयतल से धन्यवाद’ और ‘बंदा नवाजी का शुक्रिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मुसकराता स्टिकर चिपका कर उन्हें विदा कीजिए.

आप की इस मेहमाननवाजी से वे फूले नहीं समाएंगे व आप के द्वारा अगली पोस्ट डालने पर अवश्य आप को लाइक्स और कमैंट्स से नवाजेंगे.

जो मित्र कभी भी आप की पोस्ट को लाइक नहीं करते उन्हें निमंत्रण देने के उद्देश्य से अपनी पोस्ट को कौपीपेस्ट कर के उन के इनबौक्स में डाल दीजिए. वे खुद को किसी जज से कम नहीं समझेंगे और किसी चीफ गैस्ट की भांति खुद ही आप की वौल पर आ कर लाइक्स और कमैंट्स की ट्रौफियों की वर्षा कर देंगे.

जिस प्रकार स्वस्थ रहने के लिए मौर्निंगवौक और योगा का सहारा लिया जाता है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य के लिए पीपल यू मे नो और अपने फेसबुक मित्रों की ‘फ्रैंडलिस्ट’ देखते हुए दिमागी कसरत करना आवश्यक है. टहलने और योगा करने से यदि रोग दूर होते हैं और वजन घटता है तो इन लिस्टों की मानसिक कसरत से फेसबुक फ्रैंड्स बढ़ते हैं, जिस से लाइक्स मिलने की आशा का दीया टिमटिमा उठता है. फिर ज्योंज्यों लाइक्स मिलने शुरू होते हैं, त्योंत्यों मानसिक तनाव दूर होता है तथा प्रसिद्धि की प्रसन्नता से चेहरा कांतिमय बनता है.

योगा और टहलने से मिलने वाली औक्सीजन यदि फेफड़ों को गतिशील बनाती है, तो लाइक्स और कमैंट्स मिलने की अपार खुशी से सीना चौड़ा हो जाता है. अत: फेसबुक दोस्त ढूंढ़ने की दिमागी कसरत अपनी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है.

लाइक्स पाने का एक उपाय यह भी है कि अपने दोस्तों की वौल पर जा कर उन की पोस्ट पर अन्य व्यक्तियों द्वारा किए गए कमैंट्स पढि़ए और कमैंट्स करने वालों में जो आप के मित्र नहीं हैं, उन के कमैंट्स के चरणों में अपने लाइक्स के फूल अर्पित कीजिए. आप की इस अदा से प्रसन्न हो कर वे खुद ही आप को मित्र बना लेंगे तथा आप की पोस्ट पर भी अपने लाइक्स भेजने लगेंगे.

यदि कोई मित्र आप की पोस्ट लाइक करना बंद कर दे या कमैंट्स करने में कंजूसी दिखाए तो ‘जैसे को तैसा’ वाली कहावत पर अमल करते हुए उस का तब तक बायकौट जारी रखें, जब तक उसे अपनी गलती का एहसास न हो जाए.

यदि आप की पुरानी पिक्स पर लाइक्स बहुत कम हैं और उन्हें देखदेख कर आप का कलेजा मुंह को आ रहा है तो घबराएं नहीं बल्कि उन पर स्वयं ही कोई टिप्पणी कर दें या खुद ही उसे लाइक कर दें, इस से वे फ्रैंड्स की न्यूजफीड में ऊपर दिखाई देने लगेंगे और आप कई लाइक्स के हकदार बनेंगे.

यदि आप का बौयफ्रैंड आप को लाइक्स से वंचित किए हुए है तो किसी दिन उस से जबरदस्ती झगड़ा कर लीजिए, फिर कभी न मिलने की धमकी देने के साथसाथ ‘मैं फेसबुक पर आगे से आप की कोईर् पिक्स लाइक नहीं करूंगी,’ कहते हुए कुछ दिन दूरी बना लीजिए. फिर देखिए कैसे वह आप को लाइक्स और कमैंट्स के तोहफों से नवाजता है.

याद रखिए, फेसबुक सोशल मीडिया है अर्थात जनता द्वारा और जनता के लिए. अत: अपनी प्रोफाइल में तसवीरें, पोस्ट, शेयर आदि पब्लिक कर के रखिए ताकि अधिक से अधिक लोग देख पाएं. केवल मित्रों के लिए रखेंगे तो कम लाइक्स मिलेंगे, सब के लिए रखेंगे तो न जाने कब कौन अपने लाइक्स और कमैंट्स की बारिश कर दे.03

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जय इंडिया, जय करप्शन, जय सरकारी रिपोर्ट

कई दिनों से बड़े बाबू का चेहरा लटकालटका देख रहा था. नीम के पेड़ पर सूखी, लटकी, सड़ीगली लौकी जैसा. पर उन से इस बारे में कुछ पूछने का दुसाहस मुझ में न हो सका. औफिस में भी सहमेसहमे से रहते. सोचा, होगी घरबाहर की कोई प्रौब्लम. राजा हो या रंक, घरबाहर की प्रौब्लम आज किस की नहीं? घरबाहर की प्रौब्लम तो आज सासबहू की तरह घरघर की कहानी है. जो जितना बड़ा, उस के घरबाहर की प्रौब्लम उतनी बड़ी. हमारे जैसों के घर की प्रौब्लम हमारे जैसी. यहां मोदी से ले कर मौजी तक, सब अपनेअपने घर की प्रौब्लम से परेशान हैं. और कोई प्रौब्लम न होना भी अपनेआप में एक प्रौब्लम है.

हफ्तेभर औफिस से बिन बताए गायब रहे. आज अचानक पधारे और बड़े बाबू के चेहरे पर औफिस का गेट पार करते ही सौ किलो मुसकान देखी तो हक्काबक्का रह गया. चेहरे पर ऐसा नूर…मानो वक्त से पहले ही वसंत आ गया हो. या फिर, वसंत ने अपने आने की सब से पहले सूचना उन के चेहरे पर आ कर दी हो. गोया, उन का चेहरा, चेहरा न हो कर कोई नोटिसबोर्ड हो. वाह, क्या कामदेव सा दमदमाता चेहरा. रामदेव भी देख लें तो योग क्रियाएं भूल जाएं.

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उन्होंने आव देखा न ताव, आते ही बड़ी बेरहमी से मुझे गले लगाते बोले, ‘‘वैल डन कामरेड, वैल डन. आज मैं तुम से बेहद खुश हूं.’’

‘‘सर मुझ से, मेरी वर्किंग से या…?’’

‘‘तुम्हारी वर्किंग से. तुम ने मेरे औफिस की ही नहीं, पूरे देश की नाक रख ली.’’

‘‘मैं समझा नहीं साहब, जिन का हमारे औफिस से आज तक वास्ता पड़ा है वे तो कहते हैं कि मेरी नाक ही नहीं. ऐसे में मेरी नाक न होने के बावजूद मैं ने अपने देश की नाक कैसे रख ली, सर?’’

‘‘ऐसे, ये देखो, भ्रष्टाचार की ऐनुअल ग्लोबल रिपोर्ट. हम ने हमजैसों के अथक प्रयासों से इस मामले में अपनी पोजिशन बरकार रखी है. ऊपर नहीं चढ़े तो नीचे भी नहीं गिरे. सच कहूं, अब के तो मैं डर ही गया था कि पता नहीं हमारा क्या होगा? हम अपनी इस पोजिशन को मेंटेन रख पाएंगे कि नहीं. अब एक यही तो फील्ड रह गई है जिस में हम अपना बैस्ट दे सकते हैं. सच कहूं मेरे दोस्त, यह सब तुम जैसे भ्रष्टाचार को समर्पित भ्रष्टाचारियों की वजह से ही संभव हो पाया है. आज सारे स्टाफ को लंच मेरी ओर से. कहो, क्या मेन्यू रखा जाए? जो तुम कहोगे, वही चलेगा.’’

‘‘मतलब, साहब?’’

‘‘अरे बुद्धू, तुम लोगों को जो मैं दिनरात रिश्वत लेने को बूस्ट करता था, उस का परिणाम आ गया है. देखा नहीं तुम ने अखबार में? कभीकभार अखबार पढ़ने के लिए औफिस के आरामों से वक्त निकाल लिया करो, मेरे दोस्त. तुम जैसों की मेहनत एकबार फिर रंग लाई है. भ्रष्टाचार के मामले में हम अपने पड़ोसी से आगे हैं.’’

‘‘मतलब, पड़ोसी के यहां ईमानदारी के दिन फिर रहे हैं. हम ईमानदारी में उन से पीछे हैं?’’

‘‘नहीं, भ्रष्टाचार में हम उन से आगे हैं. मैं तो कई दिनों से मरा जा रहा था कि पता नहीं अब की हमारी मेहनत का क्या रिजल्ट आएगा? भूखप्यास सब, रिजल्ट की सोच में डूबा, भूल गया था. दिनरात, सोतेजागते, उठतेबैठते यही मनाता रहा था कि भ्रष्टाचार में जो अब के हम कम से कम अपने पड़ोसी से चार कदम आगे न रहें तो न सही, पर जिस पोजिशन पर हैं उस से नीचे भी न आएं.’’

‘‘एक बात तो तय है मेरे दोस्त, कुछ और रंग लाए या न, पर जो मेहनत सच्चे मन से, बिना किसी कानून के डर से की जाए, वह रंग जरूर लाती है. अब उन के सीने के जो हाल हों, सो हों पर आज मेरा सीना चालीस इंच से फूल कर छप्पन इंच हुआ जा रहा है. क्या कर लिया उन के ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ के सिद्धांत ने हमारा? पर अंदर की बात कहूं, उन के इस बयान से मैं डर गया था यार, कि अब इस देश का क्या होगा? लेकिन अब सब समझ गया कामरेड, कोई इस देश में न खाए तो न खाए. एकाध के खाने या न खाने से कोई फर्क नहीं पड़ता. आई एम प्राउड औफ यू, माई डियर. तुम लंबी उम्र जियो. मे यू लिव लौंग. जब तक तुमहम जैसे इस देश में भ्रष्टाचार को समर्पित रहेंगे, भ्रष्टाचार को बढ़ने से इस देश में कोई भी माई का लाल नहीं रोक सकता. जय इंडिया, जय करप्शन…’’

 

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मां बनी ‘देसी बौयज’ की ये एक्ट्रेस, शेयर की बेटी की Photo

ब्रज़ीलियन एक्ट्रेस ब्रूना अब्दुल्लाह अपने एक्टिंग के टेलेंट से कई बौलीवुड फिल्में कर काफी फैन फोलोविंग गेन कर चुकीं है. ब्रूना अब्दुल्लाह देखते ही देखते बहुत ही जल्द सबकी फेवरेट बनती जा रही हैं. ब्रूना ने कई फिल्मों के साथ काफी रीएलिटी शो भी किए हैं. खुशी की बात ये है कि ब्रूना के घर में 31 अगस्त को एक नए महमान ने दस्तक दी है.

बेटी ने लिया जन्म…

ब्रूना अब्दुल्लाह ने इस बात की जानकारी अपने फैंस को सोशल मीडिया से दी कि उनके घर एक बेटी ने जन्म लिया है. जानकारी देने के साथ ब्रूना ने अपनी बेटी की फोटो भी फैंस के साथ शेयर की जिसमें वे बेहद प्यारी लग रही है.

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बेटी का नाम भी किया शेयर…

ब्रूना अब्दुल्लाह ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम के ज़रिए अपनी बेटी का नाम भी फैंस को बताया. ब्रूना ने अपनी बेटी का नाम इसाबेला रखा है. वे अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर काफी एक्साइटिड थी और उनकी ये एक्साइट्मेंट उनके द्वारा शेयर किए जाने वाली फोटोज से साफ नज़र आ रही थी. अपनी बेटी को जन्म देने के कुछ समय पहले ब्रूना ने अपना बेबी बंप शो करते हुए फोटो शेयर की जिसमें वे काफी खुश नज़र आ रही थीं.

पति के साथ शेयर की फोटो…

ब्रूना ने अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान अपना काफी ख्याल रखा और आने वाले सदस्य के बारे में पल-पल की जानकारी अपने फैंस के साथ शेयर की. साथ ही इन खबरों के बीच उन्होनें अपने पति की फोटो भी शेयर की. उनकी इन फोटोज देख ये कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि वे अपनी पर्सनल लाइफ में काफी खुश हैं और ब्रूना और उनके पति के बीच काफी प्यार है.

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We 3 ❤️ . . #homeawayfromhome #goa #30weeks

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शादी से पहले ही थीं प्रेग्नेंट…

बता दें, ब्रूना अब्दुल्लाह ने अपने पति ‘एलन फ्रेस’ के साथ इसी साल के मई महीने में शादी की थी जिससे ये पता चलता है कि ब्रूना शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो चुकी थीं. ब्रूना ने अक्षय कुमार और जौन अब्राहम के साथ फिल्म “देसी बौयज़” में एक आइटम सौंग परफोर्म किया था और उनहोनें “ग्रैंड मस्ती”, “मस्तीज़ादे”, “जय हो”, जैसी कई हिट फिल्में भी की हैं. साथ ही ब्रूना अब्दुल्लाह ने “खतरों के खिलाड़ी सीज़न 9”, “नच बलिए सीज़न 6” जैसे रीएलिटी शो में भी भाग लिया है.

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Written By: Karan Manchanda

शर्लिन चोपड़ा ने राम गोपाल वर्मा को लेकर किया बड़ा खुलासा

बौलीवुड इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा ने हाल ही में मीडिया के सामने काफी बड़े खुलासे किए है जिसे सुन सभी लोग हैरान रह गए. शर्लिन ने डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा को ले कर बहुत बड़ा खुलासा किया है और देखा जाए तो ये खुलासे के साथ-साथ एक आरोप के रूप में भी सामने आया है.

शर्लिन चोपड़ा ने बताया कि, करीब 3 साल पहले उन्होनें डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा को काम के सिलसिले में एक मैसेज भेजा था और फिल्म की मांग को लेकर बात की थी तो राम गोपाल वर्मा ने उन्हे एक स्क्रिप्ट भेजी जिसमें सारे हौट और एडल्ट सीन्स थे. जब शर्लिन ने इस बारे में उनसे बात की और कहा कि इस स्क्रिप्ट में तो लगभग सारे ही हौट सीन्स हैं तो डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने कहा कि, अगर वे इस स्क्रिप्ट के साथ कम्फर्टेबल हैं तो फिल्म शुरु कर सकते हैं.

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शर्लिन चोपड़ा ने आगे यह भी बताया कि स्क्रिप्ट के साथ-साथ डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने उन्हे कुछ एडल्ट वीडियो भी भेजे थे और शर्लिन को उनकी ये हरकत बिल्कुल अच्छी नही लगी, जिसके बाद से शर्लिन ने डायरेक्टर के साथ अपने सारे कौंटैक्टस ही खत्म कर दिए.

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक शर्लिन चोपड़ा ने डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा की इस हरकत के बारे में आगे बताते हुए कहा कि, “अगर शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान भी उनके साथ काम करने को बोलती तो क्या वे उन्हे भी एसे ही एडल्ट और हौट सीन्स करने को देते जैसे उन्होंने मुझे औफर किए थे. वे ऐसा कभी नही करते बल्कि उनके साथ वे एक अच्छी फिल्म बनाते.”

बता दें, शर्लिन चोपड़ा ने कई रीएलिटी शो और फिल्म की हैं जैसे कि, ‘दिल बोले हडिप्पा’, ‘वजह तुम हो’, ‘ये जवानी है दीवानी’, आदी. हिन्दी फिल्मों के साथ-साथ शर्लिन ने और भाषाओं में भी फिल्में की हैं.

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जानें बल्लेबाजों के लिए जसप्रीत बुमराह क्यों बन चुके हैं अनसुलझी पहेली

क्रिकेट देखने और पसंद करने वाले लोग एक बात तो जानते होंगे कि भारतीय क्रिकेट टीम हमेशा बल्लेबाजों पर निर्भर रही है. भारत के पास हमेशा से ही एक से बढ़कर एक बल्लेबाज रहे हैं लेकिन गेंदबाजी में हमेशा कमी रही है. बीते कुछ सालों में भारतीय क्रिकेट टीम की ये भी कमी दूर हो गई. टीम में जब से भुवेश्वर कुमार और फिर जसप्रीत बुमराह आए हैं तब से भारतीय टीम का ये पाला भी मजबूत हो गया. गेंदबाजी के दम पर ही इस बार भारत विश्व कप की प्रबल दावेदार थी और गेंदबाजों ने ये कर के भी दिखाया था. छोटे से छोटे स्कोर पर भी टीम इंडिया ने कई मैच जीते थे. उन सभी मैचों को आप करीब से देखेंगे तो आप देख पाएंगे कि बुमराह ने कैसे विरोधियों को बांध दिया था. विरोधी खेमे का धुरंधर बल्लेबाज भी बुमराह की गेंदों पर चौंक जाता था. पाकिस्तान वाला मैच हो या फिर अफगानिस्तान वाला. दोनों ही मैचों में गेंदबाजों की भूमिका कमाल की रही.

अब बात आती है कि आखिरकार बुमराह कैसे यहां तक पहुंचे और वो इतने घातक कैसे हो गए. बात शुरू करते हैं कि बुमराह का करियर कैसे चढ़ा.

जसप्रीत बुमराह आईपीएल की देन हैं. आईपीएल में उनको मुंबई इंडियस ने खरीदा. जसप्रीत बुमराह ने साल 2013 में मुंबई इंडियंस के लिए आइपीएल डेब्यू किया था. डेब्यू के बाद से जसप्रीत बुमराह ने इस लीग के 76 मैच खेले हैं, जिनमें उन्होंने 80 विकेट अपने नाम किए हैं. मैच था मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपर किंग्स का. चेन्नई के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी बल्लेबाजी कर रहे थे और बुमराह गेंदबाजी. बुमराह को उस वक्त कोई नहीं जानता था. बुमराह ने गुड लेंथ की गेंद डाली और धोनी को आउट कर दिया. इस गेंद के बाद से ही बुमराह को लोगों ने जाना था. इसके बाद उनकी पहचान टी-20 गेंदबाज की बन गई थी क्यों कि वो ज्यादातर ओवरपिच गुड लेंथ और यॉर्कर गेंद फेंकने की कोशिश करते थे. इस कोशिश में उनसे कई बार फुल टॉस गेंद डल जाती थी जिसका बल्लेबाज भरपूर फायदा उठाते थे.

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टीम इंडिया में मुश्किल थी राह

टीम इंडिया में जगह बना पाना बुमराह के लिए आसान नहीं था. क्योंकि जब उनका पदार्पण होना था तब टीम इंडिया में भुवनेश्वर कुमार, उमेश यादव, ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी जैसे गेंदबाज काफी अच्छी गेंदबाजी कर रहे थे लेकिन उसके बाद बुमराह को टीम इंडिया में जगह मिली. जसप्रीत बुमराह ने 23 जनवरी 2016 को भारत के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना वनडे इंटरनेशनल में डेब्यू किया था. जसप्रीत बुमराह को जब टी20 गेंदबाज कहा गया तो ये बात उनको पची नहीं. उन्होंने अपनी गेंदबाजी पर और काम किया और एकदिवसीय क्रिकेट में लोहा मनवा दिया. आज वो पूरी दुनिया के लिए पहेली बन चुके हैं लेकिन इसके पीछे राज क्या है. आखिरकार उनकी गेंदबाजी में ऐसा क्या है जिसको बल्लेबाज समझ नहीं पा रहे हैं.

जसप्रीत बुमराह की सबसे खास बात ये हैं कि वो गुड लेंथ डिलीवरी बहुत बेहतरीन तरीके से डालते हैं. जसप्रीत बुमराह गुड लेंथ की बॉल को कहीं भी घुमा सकते हैं. वो गुड लेंथ वाली बॉल बाहर-अंदर की ओर फेंकने का माद्दा रखते हैं. इसके अलावा उनके पास है खास हथियार यॉर्कर. बुमरहा एक ओवर की 6 गेंदे यॉर्कर फेंकने का दम रखते हैं. इसी तरह थे मलिंगा. मलिंगा भी एक ओवर की सभी बॉलें यॉर्कर डाल सकते हैं.

बुमराह के पास वैरिएशन बहुत है. बल्लेबाज सोच भी नहीं सकता कि उसको अगली गेंद क्या आने वाली है. यही कारण है कि बुमराह  को बल्लेबाज खेल नहीं पाते हैं. बल्लेबाज को वो पहले दो गेंद बाउंसर या फिर आउट स्विंग फेंक देंगे. इसके तुरंत बाद वो यॉर्कर मार देते हैं जिससे कि बल्लेबाज आसानी से उनके जाल में फंस जाता है. बुमराह का बॉलिंग एक्शन भी एक बड़ा कारण हैं जिसकी वजह से वो बहुत घातक हो जाते हैं. उनके बॉलिंग एक्शन पर कई सारे सवाल भी उठाए गए हैं. उनका एक हाथ बिल्कुल सीधा आता है. ऐसा लगता है जैसे वो बीमर मार रहे हों. बल्लेबाज समझ ही नहीं पाता कि वो किस दिशा से गेंद फेंकने वाले हैं.

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अगर अभी की बात करें तो बुमराह ने एक और इतिहास रच दिया. भारत-वेस्टइंडीज के बीच टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच खेला जा रहा है. इस मैच में उन्होंने हैट्रिक ली. जसप्रीत बुमराह टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले भारत के तीसरे गेंदबाज बन गए हैं. बुमराह ने भारत और वेस्टइंडीज के बीच जमैका के सबीना पार्क मैदान पर खेले टेस्ट मैच में ये कारनाम कर दिखाया. यह उनके करियर की पहली हैट्रिक है. बुमराह से पहले इरफान पठान और हरभजन सिंह टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक ले चुके हैं.

बुमराह ने नौवें ओवर की दूसरी गेंद पर डेरेन ब्रावो को कैच आउट कराया. इसके बाद तीसरी गेंद पर उन्होंने शामराह ब्रुक्स को शून्य पर पगबाधा आउट कर दिया. ओवर की चौथी गेंद पर बुमराह ने रोस्टन चेज को भी शून्य के स्कोर पर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया और हैट्रिक अपने नाम की.

बुमराह ने सातवें ओवर से विकेट लेने का सिलसिला शुरू किया, सबसे पहले उन्होंने जौन कैम्पबेल को आउट किया जिनका कैच विकेटकीपर ऋषभ पंत ने आसानी से लपक लिया. इसके बाद नौंवें ओवर में लगातार गेंदों पर बुमराह ने डैरेन ब्रावो, शामहार ब्रुक्स और रोस्टन चेज के विकेट लेकर रिकॉर्ड कायम कर दिया.

प्रकाश स्तंभ

पूर्व कथा

रम्या अपनी बहन नंदिनी से छोटीछोटी बातों पर लड़ती थी. उन के झगड़ों से मां रचना परेशान हो जाती थीं. एक दिन रचना अपने परिवार को अपने विदेश ट्रांसफर की बात बताती हैं. अतीत की यादों में खोई रचना सहेली निमिषा के आने पर वर्तमान में लौट आती है. उस के पूछने पर वह बताती हैं कि बेटी रम्या, अपने पति प्रतीक के साथ मायके लौट आई है और नए व्यापार के लिए रुपए मांग रही है. परेशान रचना उसे अपने जीवन के उतारचढ़ाव के बारे में बताती हैं.

रचना के घर पहुंचने पर रम्या आ चुकी होती है. रम्या उन से नंदिनी की शिकायत करती है तो दोनों झगड़ने लगती हैं. रचना उन का बीचबचाव करती हैं. खाने की मेज पर बैठ कर भी दोनों लड़ती हैं तो पिता के डांटने पर नंदिनी रोती हुई अपने कमरे में चली जाती है. रम्या पति प्रतीक के व्यापार के लिए रुपयों की बात मां से करती है तो वह मूर्ति बनी सब सुनती रहती हैं. और अब आगे…

अंतिम भाग

गतांक से आगे…

‘कितनी पूंजी चाहिए प्रतीक को?’ ‘कम से कम

15-20 लाख रुपए, मां. एक बार उन का काम चल निकला तो वह आप की पाईपाई चुका देगा.’

‘रम्या, मैं प्रतीक से बात करना चाहती हूं. उस के मुंह में तो लगता है जबान ही नहीं है.’

रम्या लपक कर प्रतीक को बुला लाई थी.

‘देखो, बेटे,’ रचना ने बात स्पष्ट की, ‘मेरी बात को अन्यथा मत लेना. मैं तो तुम्हें केवल अपनी वस्तुस्थिति से अवगत कराना चाहती हूं. हम ठहरे मध्यवर्गीय लोग. हमारा काम अवश्य चलता रहता है पर व्यापार के लिए बड़ी रकम जुटा पाना हमारे लिए संभव नहीं है. लेदे कर यह एक घर ही है. कम से कम सिर पर छत होने का संतोष तो है, जहां हर परिस्थिति में शरण ली जा सकती है.

‘मैं तो तुम्हें यही सलाह दूंगी कि एक अच्छी सी नौकरी ढूंढ़ लो तुम दोनों. थोड़ा अनुभव और पूंजी दोनों पास हों तो व्यापार करने में सरलता रहती है. तुम समझ रहे हो न?’ प्रतीक के चेहरे पर बेचैनी के भाव देख कर वह पूछ बैठी थीं.

प्रतीक कुछ क्षणों तक शून्य में ताकता चुप बैठा रह गया था. रचना मन ही मन बदहवास हो उठी थीं. प्रतीक सामान्य तो है? ऐसा क्या है इस में जिस पर रम्या रीझ गई थी. रचना ने इसे भी नियति का खेल जान कर खुद को समझाना चाहा था.

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आखिर मौन रम्या ने ही तोड़ा था, ‘मां, हम आप से सलाह नहीं सहायता की उम्मीद ले कर आए थे.’

‘बेटी, मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार हर सहायता करने को तैयार हूं.’

उस दिन से रम्या ने उन से बोलचाल भी अत्यंत सीमित कर दी थी. कभी सामने पड़ जाती तो रचना ही बोल पड़ती अन्यथा रम्या और प्रतीक अपने ही कक्ष में सिमटे रहते.

ऐसे में सीशैल्स जाने का प्रस्ताव उन्हें ताजी हवा के झोंके की भांति लगा था. कुछ विशेष भत्तों के साथ उन्हें पदोन्नति दे कर भेजा जा रहा था. साथ ही नई शाखा स्थापित करने का अपना रोमांच भी था.

इसी ऊहापोह में देर तक सोचती हुई कब वह निद्रा की गोद में समा गईं उन्हें स्वयं ही पता नहीं चला था. नीरज ने जब बत्ती जलाई तो वह हड़बड़ा कर उठ बैठी थीं.

‘‘सो रही थीं क्या? सोना ही है तो आराम से पलंग पर सो जाओ, मैं बत्ती बुझा देता हूं,’’ नीरज बाबू धीरगंभीर स्वर में बोले थे.

‘‘थकान के कारण आंख लग गई थी. अभी सोने का मन नहीं है,’’ वह उठीं, घड़ी पर नजर डाली. अभी 9 ही बजे थे पर ऐसी शांति थी मानो आधी रात हो. चूंकि टीवी बंद था इसलिए उन्हें अजीब सा लगा.

‘‘क्या बात है नीरज, नाराज हो क्या? कुछ तो बोलो?’’

‘‘बोलने को क्या बचा है, रचना? तुम ने फैसला लिया है तो सोचसमझ कर ही लिया होगा. मुझे तो सदा यही अपराधबोध सताता है कि मैं ने तुम्हारे साथ अन्याय किया है. पर सच मानो, मैं ने अपनी ओर से पूरा प्रयास किया है,’’ नीरज बाबू का स्वर बेहद उदास था.

‘‘मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं है. तुम ने तो हर कदम पर मुझे मजबूत सहारा प्रदान किया है. केवल तुम्हारे ही बलबूते पर तो मैं बेधड़क कोई भी निर्णय ले लेती हूं. तुम्हारा मेरे जीवन में जो महत्त्व है उसे पैसे से नहीं आंका जा सकता,’’ रचना का स्वर अनजाने ही भीग गया था.

नीरज बाबू हंस दिए थे. एक उदास खोखली सी हंसी जो रचना के दिल को छलनी करती चली गई थी.

‘‘इस तरह मन क्यों छोटा करते हो,’’ रचनाजी बोलीं, ‘‘मैं अकेली नहीं जा रही, हम दोनों साथ जा रहे हैं. नंदिनी और रम्या स्वयं को संभालने योग्य हो गई हैं.’’

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‘‘लेकिन रचना, नंदिनी का हाल तो तुम जानती ही हो. हम दोनों के सहारे के बिना कैसे जीएगी वह.’’

‘‘मां हूं मैं, फिर भी मन को समझा लिया है मैं ने. शायद जो हमारी मौजूदगी से संभव नहीं हुआ वह हमारी गैरमौजूदगी में हो जाए. जब समस्या सिर पर आ खड़ी होती है तो हल ढूंढ़ने के अलावा और कौन सा रास्ता शेष रह जाता है?’’ रचना ने समझाना चाहा था.

‘‘ठीक है. मुझे सोचने के लिए कुछ समय दो,’’ और कुछ दिनों की ऊहापोह के बाद वह मान गए थे. रचना ने अनेक तर्क दे कर उन्हें साथ जाने के लिए मना लिया था.

नंदिनी के व्यवहार में अब अजीब परिवर्तन देखा था रचना ने. वह कुछ खिंचीखिंची सी रहने लगी थी और बहुत जरूरी होने पर ही उन से बात करती. ज्यादातर अपने कमरे में बैठी, स्वयं में ही व्यस्त रहने लगी थी.

एक दिन रचना बेटी के कमरे में जा बैठीं और बोलीं, ‘‘क्या बात है नंदिनी, आजकल बहुत चुप रहने लगी हो?’’

‘‘मां, आप के पास भी कहां समय है मेरे लिए? आप तो कामक ाजी महिला हैं. मेरे जैसी निठल्ली थोड़े ही हैं…फिर अब तो आप विदेश जा रही हैं,’’ नंदिनी के स्वर का व्यंग्य उन से छिप नहीं सका था.

‘‘भविष्य संवारने के लिए एक से दूसरे स्थान जाने का सिलसिला तो सालों से चल रहा है बेटी. वैसे मैं तुम लोगों का पूरा प्रबंध कर के जा रही हूं. तुम्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. यदि कभी अचानक कोई जरूरत आ पड़े तो तुम्हारे मामा हैं न यहां. वह कह भी रहे थे कि तुम दोनों बहनों का वह पूरा खयाल रखेंगे.’’

‘‘ठीक है, मां,’’ नंदिनी ने निश्वास लेते हुए कहा और बात आईगई हो गई थी.

1 माह का समय कैसे बीत गया रचना को पता भी नहीं चला. इस दौरान दफ्तर और घर दोनों ही जगहों पर उन की व्यस्तता बढ़ गई थी. जब जाने का समय आया तो रचना रो पड़ी थीं. नीरज बाबू का मन भी बोझिल हो उठा था पर वह पत्नी को ढाढ़स बंधाते रहे थे.

उधर मातापिता को विदा कर लौटी नंदिनी घर पहुंचते ही फूटफूट कर रो पड़ी थी. जब बहुत देर तक उस का रोना बंद नहीं हुआ तो रम्या के संयम का बांध टूट गया.

‘‘अब कब तक यों रोनेपीटने का कार्यक्रम चलेगा, दीदी,’’ वह बेहाल स्वर में बोली थी.?

‘‘मांपापा चले गए हैं, यह पता है मुझे. मैं तो इसलिए रो रही हूं कि मां ने एक बार भी मुझ से साथ चलने को नहीं कहा,’’ नंदिनी सुबकते हुए बोली थी.

‘‘लो और सुनो, तुम्हारे कारण ही तो मांपापा घर क्या देश भी छोड़ कर चले गए. फिर तुम्हें साथ चलने को कहने का क्या औचित्य था?’’ रम्या खिलखिला कर हंसी थी.

‘‘वे मेरे कारण नहीं तुम्हारे कारण गए हैं. जब देखो तब पैसा चाहिए. मैं पूछती हूं कि जब पूंजी नहीं है तो व्यापार करना जरूरी है क्या? प्रतीक नौकरी नहीं कर सकते?’’ नंदिनी क्रोध में आ गई थी.

‘‘दीदी, मुझे कुछ भी कहो पर प्रतीक को बीच में न ही लाओ तो अच्छा है. पूंजी के लिए मां से मैं ने कहा था प्रतीक ने नहीं,’’ रम्या ने विरोध प्रकट किया था.

सुनते ही नंदिनी भड़क उठी थी और आरोपप्रत्यारोपों का सिलसिला कुछ इस तरह चला कि प्रतीक को हस्तक्षेप करना पड़ा.

‘‘यदि आप दोनों बहनों का झगड़ा शांत हो गया हो तो हम भोजन कर लें. मुझे जोर की भूख लगी है. मैं ने मेज पर खाना लगा दिया है,’’ प्रतीक ने अनुनयपूर्ण स्वर में पूछा था.

उस के नाटकीय अंदाज को देख कर रम्या शांत हो गई और नंदिनी रूठ कर अपने कमरे में चली गई थी.

‘‘दीदी को भी बुला लो नहीं तो वह भूखी ही सो जाएंगी,’’ प्रतीक बोला था.

‘‘मैं न कभी रूठती हूं और न रूठे हुए को मनाती हूं,’’ रम्या ने उत्तर दिया था.

‘‘ठीक है तो मैं बुला लाता हूं उन्हें,’’ प्रतीक उठ खड़ा हुआ था.

‘‘अरे, वाह, आज दीदी के लिए बड़ा प्यार उमड़ रहा है?’’

‘‘रम्या, समझ से काम लो. मम्मीपापा अब नहीं हैं यहां जो तुम्हारी दीदी को मना कर खिलापिला देंगे. तुम दोनों एकदूसरे की चिंता नहीं करोगी तो कौन करेगा?’’ प्रतीक ने समझाना चाहा था.

‘‘बड़ी वह हैं मैं नहीं. यों बातबात पर रूठना, उन्हें शोभा देता है क्या? मैं नहीं जाने वाली उन्हें मनाने,’’ रम्या ने दोटूक उत्तर दे दिया था.

प्रतीक नंदिनी को बुलाने चला गया था. वह प्रतीक के साथ आई तो तीनों भोजन करने बैठे पर दोनों बहनें बातचीत करना तो दूर एकदूसरे से नजरें मिलाने से भी कतरा रही थीं.

नंदिनी ने चुपचाप भोजन किया और फिर अपने कमरे में जा बैठी थी.

‘‘देखा तुम ने? ऐसा कितने दिन चलेगा, आईं, खाना खाया और फिर अपने कमरे में जा बैठीं. हम दोनों क्या उन के सेवक हैं जो सारा काम करते रहें.’’

‘‘वह तुम्हारी बड़ी बहन हैं, रम्या. लोग तो अनजान लोगों की भी सेवा कर देते हैं. मन शांत रखोगी तो स्वयं भी चैन से रहोगी और दूसरे भी आनंदित रहेंगे.’’

‘‘ठीक है, मैं चलती हूं. कुछ रिक्त स्थानों के विज्ञापन देखे थे, उन्हें भेजने के लिए प्रार्थनापत्र टाइप करने हैं,’’ वह उठ खड़ी हुई थी.

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‘‘रम्या, तुम अपनी पुरानी कंपनी में पुन: प्रयत्न क्यों नहीं करतीं. शायद बात बन जाए,’’ प्रतीक ने सलाह दी थी.

‘‘क्या कह रहे हो? जब मैं ने अचानक नौकरी छोड़ी थी तो हमारे प्रबंध निदेशक आगबबूला हो गए थे. विवाह के लिए 2 माह का वेतन अग्रिम लिया था. उसे चुकाए बिना ही मैं छोड़ आई थी. अब क्या मुंह ले कर वहां जाऊंगी?’’ रम्या रोंआसी हो उठी थी.

‘‘तुम ने ऐसा किया ही क्यों? तुम्हारे नए नियोक्ता अवश्य उन से पूछताछ करेंगे.’’

‘‘इसीलिए तो मैं कंपनी का नाम तक नहीं ले रही.’’

‘‘ऐसा करने से कर्मचारी की साख को बट्टा लगता है. तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था.’’

‘‘क्या पता था, फिर से नौकरी करनी पड़ेगी,’’ रम्या बोली, ‘‘विवाह से पहले कितने सपने देखे थे, सब मिट्टी में मिल गए.’’

‘‘यों मन छोटा नहीं करते, मैं नौकरी और व्यापार दोनों के लिए प्रयत्न कर रहा हूं. कुछ मित्रों से बात की है. कुछ न कुछ हो जाएगा,’’ प्रतीक ने आश्वासन दिया था.

अगले दिन रम्या और प्रतीक सो कर उठे तो नंदिनी चाय बना रही थी. आशा के विपरीत वह टे्र में 3 प्याली चाय ले कर आई और प्रतीक और रम्या को उन की चाय थमा कर अपनी चाय पीने लगी थी.

‘‘धन्यवाद, दीदी, चाय बहुत अच्छी बनी थी,’’ प्रतीक आखिरी घूंट लेते हुए बोला था.

‘‘धन्यवाद तो मुझे देना चाहिए. रात्रि के भोजन के लिए तुम नहीं बुलाते तो शायद मैं भूखी ही सो जाती. इस घर में तो मेरे खाने न खाने से किसी को अंतर ही नहीं पड़ता,’’ नंदिनी भरे गले से बोली थी.

रम्या ने चौंक कर नंदिनी को देखा था.

‘‘आप क्यों चिंता करती हैं, दीदी, हम हैं न. धीरेधीरे सब ठीक हो जाएगा,’’ प्रतीक ने ढाढ़स बंधाया था.

समय अपनी गति से बढ़ता रहा. रम्या ने अनेक प्रयत्न किए पर कहीं सफलता नहीं मिली. आखिर उस ने अपनी पुरानी कंपनी में जाने का निर्णय लिया.

‘‘नमस्ते, सर,’’ रम्या ने प्रबंध निदेशक अस्थाना के कमरे में घुसते ही अभिवादन किया था.

‘‘ओह रम्या, कहो कैसी हो, तुम विवाह करते ही ऐसी गायब हुईं जैसे गधे के सिर से सींग. तुम तो यह भी भूल गईं कि तुम ने कंपनी से 2 माह का अग्रिम वेतन लिया हुआ था.’’

‘‘यह मैं कैसे भूल सकती हूं सर. सच पूछिए तो कुछ व्यक्तिगत समस्याओं में ऐसी उलझ गई कि आ ही नहीं सकी. उस के लिए क्षमा प्रार्थी हूं.’’

‘‘ओह, तो काम करने आई हो तुम? पर मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता. मेरे ऊपर भी कुछ अफसर हैं और उन से आज्ञा लिए बिना तुम्हें फिर काम पर रखना संभव नहीं हो सकेगा.’’

‘‘लेकिन सर, यदि आप ने मुझे काम पर नहीं रखा तो 2 माह का वेतन चुकाने की सामर्थ्य मुझ में कहां है?’’

‘‘ठीक है, तुम अपना प्रार्थनापत्र छोड़ जाओ. कोई निर्णय लेते ही सूचित करेंगे,’’ अस्थाना साहब ने दोटूक शब्दों में कह दिया था.

थकीहारी रम्या घर पहुंची तो वह चौंक गई. घर में तीव्र स्वर लहरियां गूंज रही थीं. अंदर पहुंची तो पाया कि नंदिनी दीदी एक लोकप्रिय गीत की धुन पर थिरक रही थीं. कुछ देर तो रम्या ठगी सी उन्हें देखती रही थी.

‘‘दीदी, तुम तो छिपी रुस्तम निकलीं. इतना अच्छा नृत्य करती हो तुम और मुझे पता तक नहीं,’’ वह बोली थी.

‘‘जब मन प्रसन्न हो तो पांव स्वयं ही थिरक उठते हैं,’’ नंदिनी भावविभोर स्वर में बोली थी और फिर एक पत्र उस की ओर बढ़ा दिया था.

‘‘ओह दीदी, एंजल कानवेंट स्कूल की ओर से भेजा गया यह तो तुम्हारा नियुक्तिपत्र है.’’

‘‘वही तो, यह मेरा पहला नियुक्ति- पत्र है. शायद मुझ अभागी का भाग्य भी करवट ले रहा है.’’

‘‘ऐसा नहीं कहते दीदी. मैं जानती थी कि एक न एक दिन तुम अवश्य अपनी योग्यता के झंडे गाड़ोगी.’’

‘‘रम्या, मुझे कल से ही काम पर जाना है पर तुम चिंता मत करना. मैं सारा काम कर लूंगी,’’ नंदिनी ने रम्या का मुंह मीठा करवाया था.

‘‘रम्या, कहां हो? देखो तो, बड़ा ही सुखद समाचार है,’’ कुछ ही देर में प्रतीक ने प्रवेश किया था.

‘‘कहो न, क्या बात है?’’

‘‘मैं ने अपने 3 दोस्तों के साथ मिल कर सौफ्टवेयर कंपनी बना ली है. बैंक ने कर्ज देने की बात भी मान ली है. मेरे एक हिस्सेदार के पिता बैंक में कार्यरत हैं. उन्होंने हमारी बड़ी सहायता की. अब तुम्हें कहीं नौकरी करने की जरूरत नहीं है.’’

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रचना और नीरज बाबू को फोन पर जब नंदिनी और प्रतीक ने अपनी सफलता की बात बताई तो उन की प्रसन्नता की सीमा न रही. रचना तो अपनी बेटियों को याद कर सिसक उठी थीं.

‘‘मन हो रहा है कि मैं उड़ कर अपने घर पहुंच जाऊं और दोनों बेटियों को गले से लगा लूं,’’ रचना बोली थीं.

‘‘मैं तो अगले सप्ताह ही उड़ कर अपनी बेटियों के पास जा रहा हूं, कई अधूरे काम पूरे करने हैं,’’ वह बोले थे.

‘‘मैं भी छुट्टी ले कर चलती हूं. नंदिनी और रम्या से मिलने को बड़ा मन हो रहा है,’’ रचना ने कहा तो नीरज बाबू प्रसन्नता से झूम उठे थे.

‘‘मैं ने कई जगह नंदिनी के विवाह की बात चलाई है. 2-3 जगह से कुछ आशा बंधी है. इस बार भारत जा कर नंदिनी का विवाह कर के ही लौटेंगे,’’ रचना पुलकित स्वर में बोलीं और नंदिनी के लिए आए विवाह प्रस्तावों की पतिपत्नी मिल कर कंप्यूटर पर विवेचना करने लगे थे.

‘‘क्यों न यह विवरण और फोटो नंदिनी को भेज दें. उस की राय भी तो जान लें,’’ नीरज बाबू बोले.

‘‘नहीं, यह सुखद समाचार तो वहां पहुंच कर हम स्वयं सुनाएंगे. नंदिनी के चेहरे पर आने वाले भाव मैं स्वयं देखना चाहती हूं,’’ रचना मुसकरा दी थीं. उस प्रकाश स्तंभ की भांति जो स्वयं निश्चल खड़ा रह कर भी दूरदूर तक लोगों को राह दिखाता है.   द्य

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