Serial Story : अजनबी मुहाफिज- भाग 2

लेखक: शकीला एस हुसैन

उसी वक्त एएसआई लोहे का रेंच और पाना उठा लाया. उस पर खून और कुछ बाल चिपके हुए थे. यही आलाएकत्ल था, जिस की मार ने चौधरी का काम तमाम कर दिया. यह रेंच पाना पलंग के नीचे से बरामद हुआ था.

उसे ऐहतियात से रखने के बाद मैं ने राशिद से कहा, ‘‘जल्दी ही चौधरी की लाश को अस्पताल ले जाने का बंदोबस्त करो.’’

इस डेरे पर 3 कमरे थे. दूसरे कमरे में कादिर का मुकाम था. तीसरा कमरा स्टोर की तरह काम में आता था. कहीं से कोई भी काम की चीज बरामद नहीं हुई. मैं चौधरी सिकंदर के पास पहुंच गया. वह अपाहिज था. फालिज ने उसे बिस्तर से लगा दिया था. जवान बेटे की मौत ने उसे हिला कर रख दिया था.

मैं ने उसे तसल्ली दी और वादा किया कि मैं बहुत जल्द कातिल को गिरफ्तार कर लूंगा. वह रोते हुए बोला, ‘‘रुस्तम मेरा एकलौता बेटा था. मेरी तो नस्ल ही खत्म हो गई. उस की शादी का अरमान भी दिल में रह गया. उस से छोटी तीनों बहनों की शादियां हो गईं. बस यही रह गया था. मेरी बीवी का भी इंतकाल हो गया है. अब मैं बिलकुल तनहा रह गया.’’

मैं ने उसे तसल्ली दे कर डेरे के हाल सुनाए और पूछा, ‘‘आप को किसी पर शक है क्या?’’

‘‘नहीं जनाब. मुझे कुछ अंदाजा नहीं है.’’

‘‘कादिर को गरदन का मनका तोड़ कर ठिकाने लगाया गया था और लाश नहर में बहा दी गई थी, जबकि रुस्तम को खोपड़ी पर वार कर के खत्म किया गया था. यह किसी ऐसे इंसान का काम है जो दोनों से नफरत करता था. क्या आप फरीदपुर की तमाम औरतों को हवेली में जमा कर सकते हैं, साथ ही अगर आप के गांव में कोई पहलवान हो या कबड्डी का खिलाड़ी हो तो उसे भी बुलवाइए.’’

‘‘मैं अभी इंतजाम करता हूं. हमारे गांव में एक ही पहलवान है सादिक, जो गांव की शान और हमारा मान है. बड़ा ही भला आदमी है.’’

थोड़ी देर में गांव की सभी औरतें हवेली में पहुंच गईं. मैं ने चौधरी को बताया, ‘‘मुझे उस औरत की तलाश है जो रात को चौधरी रुस्तम के साथ डेरे पर मौजूद थी. उस की चूडि़यां टूटी थीं. उस के हाथ पर खरोंच या जख्म जरूर होगा.’’

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मैंने चौधरी को चूड़ी के टुकड़े भी दिखाए. मेरी बात सुन कर चौधरी सारा मामला समझ गया. मैं ने हवेली में बुलाई जाने वाली तमाम औरतों की कलाइयां बारीकी से चैक कीं पर किसी की कलाई पर ऐसा कोई निशान नहीं मिला. मुझे बताया गया बस एक औरत इस परेड में शामिल नहीं है, क्योंकि उसे बुखार है.

मैं ने उस औरत से मिलना जरूरी समझा. उसे सब नूरी मौसी कहते थे. मैं उस के घर पहुंचा. नूरी कोई 50 साल की मामूली शक्ल की औरत थी. उसे देख कर मेरी उम्मीद खत्म हो गई पर उस से बात करना जरूरी समझा. मैं ने उसे सारी बात बताई. उस ने अपनी कलाई आगे की.

मैं ने जल्दी से कहा, ‘‘नहीं नूरी मौसी, तुम्हारी कलाई चैक करने की जरूरत नहीं है. अगर तुम मुझे यह बता सकती हो कि रात चौधरी के डेरे पर कौन औरत थी, जिस ने चौधरी की जान ली तो बड़ी मेहरबानी होगी. वैसे मुझे एक मर्द की भी तलाश है जिस ने कादिर को मौत के घाट उतारा है.’’

नूरी बहुत समझदार औरत थी. सारी बात समझ गई. कहने लगी, ‘‘सरकार, मेरा अंदाजा है चौधरी के साथ जो औरत डेरे पर थी, वह जरूर बाहर की होगी. फरीदपुर की नहीं हो सकती. क्योंकि यहां आप ने सभी को चैक कर लिया है.’’

‘‘तुम्हारे इस अंदाजे की कोई वजह है?’’

‘‘जी सरकार, मैं ने कल दिन में 2 अजनबी औरतों को कादिर से बात करते देखा था.’’

नूरी की बात सुन कर आशा की एक किरण जगी. मैं ने जल्दी से पूछा, ‘‘तुम ने उन औरतों को कहां देखा था?’’

‘‘डेरे के करीब, नहर के किनारे.’’ उस ने जवाब दिया.

‘‘ओह. क्या तुम बता सकती हो कि वे क्या बातें कर रहे थे?’’

‘‘नहीं जनाब, मैं जरा फासले पर थी. बात नहीं सुन सकी. पर यह पक्का है वे फरीदपुर की नहीं थीं.’’

‘‘नूरी, तुम ने बड़े काम की बात बताई. मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूं. बस एक काम और करो, उन के हुलिए और कद के बारे में तफसील से बताओ जिस से उन्हें ढूंढने में आसानी हो जाए. तुम ने उन की शक्लें तो गौर से देखी होंगी?’’

‘‘जी देखी थीं. साहब वे 2 औरतें थीं. उस में से एक जवान 19-20 की होगी. लंबा कद, गोरा रंग, बड़ीबड़ी आंखें बहुत खूबसूरत थी. उस ने फूलदार सलवार कुरते पर काली शौल ओढ़ रखी थी. उस के साथ वाली औरत अधेड़ थी. काफी मोटी, कद छोटा, रंग सांवला बिलकुल फुटबाल जैसे लगती थी. उस की नाक पर एक मस्सा था. उस ने भूरे रंग का जोड़ा और नीला स्वेटर पहन रखा था.’’

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शुक्रिया कह कर मैं उस के घर से निकल आया. फरीदपुर में मेरा काम करीबकरीब खत्म हो गया था. पहलवान सादिक से आज मुलाकात मुमकिन न थी. क्योंकि वह बाहर गया हुआ था.

अगले दिन सुबह मैं ने सरकारी फोटोग्राफर और आर्टिस्ट को थाने बुलवाया और उन दोनों औरतों का हुलिया बता कर स्केच बनाने को कहा. स्केच तैयार होने पर मैं ने उस स्केच के 10-12 प्रिंट बनवाए. साथ ही बताने वालों को भी जता दिया कि ये दोनों औरतें अगर कहीं भी दिखाई दें तो मुझे फौरन खबर करें.

फिर उन तसवीरों के आने पर मैं ने उन्हें जरूरी जगहों पर तलाश करने के लिए सिपाहियों की ड्यूटी लगा दी. शाम को दोनों पोस्टमार्टम शुदा लाशें थाने पहुंच गईं. दोनों की मौत का वक्त 10 और 11 बजे के बीच का था.

रुस्तम की मौत खोपड़ी पर लगने वाली करारी चोट से हुई थी, जब वह शराब के नशे में धुत था. रेंच पाने पर उसी का खून और बाल थे और कादिर की गरदन का मनका एक खास टैक्निक से तोड़ा गया था और फिर उसे नहर में डाल दिया गया था. मैं ने लाशें कफनदफन के लिए चौधरी साहब के यहां भिजवा दीं.

अब मुझे उन दोनों औरतों की तलाश थी. फोटो बन कर आ गए थे. सिपाही उन की तलाश में भटक रहे थे. दूसरे दिन शाम को एक सिपाही खबर ले कर आया कि इन दोनों औरतों को रेलवे प्लेटफार्म पर देखा गया है.

मैं फौरन रेलवे स्टेशन रवाना हो गया. स्टेशन मास्टर ने बड़ी गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया. मैं ने उन दोनों औरतों के बारे में पूछताछ शुरू कर दी. उस ने बताया, ‘‘वह लड़की गलती से इस स्टेशन पर उतर गई थी. वह बहुत परेशान थी. उसी दौरान यह मोटी औरत उसे मिल गई. दोनों काफी देर तक एक बेंच पर बैठ कर बातें करती रहीं. उस के बाद मोटी औरत उस का हाथ पकड़ कर स्टेशन से बाहर ले गई. हो सकता है, वे एकदूसरे को जानती हों पर पक्का नहीं है.’’

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मैं ने पूछा, ‘‘आप ने कहा वह लड़की गलती से उतर गई थी. वह जा कहां रही थी?’’

‘‘जिस गाड़ी से वह उतरी थी, वह रावलपिंडी से लाहौर जा रही थी. मुझे यह नहीं पता वह कहां जा रही थी क्योंकि मेरी उस से कोई बातचीत नहीं हुई थी. फिर वह मोटी औरत के साथ बाहर चली गई थी.’’

छालीवुड एक्ट्रेस : पति, प्रेमी और धोखा

प्रथम घटना-

राजधानी रायपुर के तेलीबांधा क्षेत्र में सोशल मीडिया में दोस्ती के बाद प्रिया का प्यार मनोज से हुआ, शादी हुई और बाद में पता चला मनोज तो पहले ही शादीशुदा है. प्रिया ने क्षुब्ध होकर अग्नि स्नान कर आत्महत्या कर ली.

दूसरी घटना-

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के बलदेव बाग की एक किशोरी बबली का प्रेम रायपुर के एक युवक अशोक के साथ हुआ शारीरिक आकर्षण के फेर में पड़कर अपना सब कुछ गंवाने के बाद, जब शादी की गुहार लगाई तो अशोक ने मुंह फेर लिया. लड़की ने आत्महत्या कर ली.

तीसरी घटना-

छत्तीसगढ़ के चांपा जांजगीर जिला के अकलतरा में एक लड़की ने प्यार में धोखा खाकर किरोसिन तेल उड़ेल अपनी जान दे दी.

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जब किसी अबोध लड़की के पांव बहकते हैं पति अथवा मां बाप को छोड़कर, घर के आंगन डेहरी को लांघती है तो उसे नोचने और खसोटने के लिए जाने कितने लोग सामने आ जाते हैं. ऐसा हमने अक्सर फिल्मों और कहानियों में पढ़ा है, और देखा है. ऐसा ही कुछ घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. जहां छत्तीसगढ़ के फिल्मी दुनिया अर्थात छालीवुड की एक्ट्रेस ने पति को इस महत्वकांक्षी आशाओं के फेर में छोड़ दिया कि वह फिल्मों की रंगीन दुनिया की ओर जा रही है तो दूसरी तरफ एक सह कलाकार ने मीठी चुपड़ी बातें करके उसका दैहिक शोषण कर लिया. अंततः
छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री की महिला कलाकार पुष्पा बेहरा ने आग लगाकर खुदकुशी करने की कोशिश की है और बुरी तरह जलने के पश्चात उसका अस्पताल में इलाज जारी है. 70 फिसदी जली हालत में इलाज के लिए जिला रायगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया है. विगत दिनों उसका एक वीडियो “वायरल” हुआ – जिसमें उसने अपने प्रेमी पर आरोप लगाते हुए अग्नि स्नान करते हुएआत्महत्या करने की बात कही है.

वह घर की रही न घाट की!

इस प्रतिनिधि को जिला रायगढ़ के जूटमिल थाना प्रभारी अमित शुक्ला ने बताया कि पुष्पा बेहरा 70 फिसदी जल चुकी है. उनका इलाज चल रहा है, मामले में फिलहाल किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है. पुष्पा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें उसने खुदकुशी करने का कारण प्रेमी मोहन पटेल द्वारा धोखा देने नहीं व उसे बदनाम करने को बताया है. वीडियो में वह कह रही है कि उनका प्रेमी हादसे से एक दिन पहले उनके घर में आया और उनपर कई लांछन लगाने के साथ घर में तोड़फोड़ भी की.
महिला के जीजा अरूण साहू के अनुसार मोहन पटेल के घर में घुसकर तोड़फोड़ करने के बाद पुष्पा ने फोन पर इसकी जानकारी उसे दी.

दरअसल पुष्पा के जीवन की त्रासदी यह रहेगी अपनी महत्वाकांक्षाओं के कारण जहां उसने पहले अपने मां और पिता को छोड़ा और एक प्रेमी नीरज शर्मा से प्रेम विवाह कर लिया और आगे चलकर उसे भी छोड़कर मोहन पटेल की ओर आकर्षित हो गई एक फिल्मी कहानी की तरह आगे चलकर स्थिति ऐसी बनी कि नवल की रही और न घाट की. ऐसी परिस्थितियों में मानसिक रूप से परेशान होकर उसने पेट्रोल डालकर आत्महत्या करने की कोशिश की है.

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पुष्पा का “प्रेम विवाह”

संपूर्ण घटनाक्रम को देखें तो यह तथ्य सामने आ गए हैं कि पुष्पा गलत सोहबत में पड़ कर बिगड़ती चली गई. सबसे पहले उसने जवान होते ही होश संभालते ही अपना रास्ता स्वयं तय करने का निर्णय किया और लव मैरिज कर पति के साथ रहने लगी. कुछ दिनों बाद जब उसकी महत्वाकांक्षा ने उड़ान भरी तो उसने रायपुर छालीवुड की तरफ रुख किया. और वहां कथित प्रेमी से धोखा खाया. फिल्मों के आकर्षण से खींच कर रायपुर के फिल्मी संसार की ओर आकर्षित पुष्पा की कहानी यह बताती है कि आज की नारी थोड़ा भी रास्ता भटकी नहीं की उसके जीवन में अंधेरा ही अंधेरा होता है.

महिला पुष्पा बेहरा (28) आदिवासी बाहुल्य रायगढ़ जिला की लैलूंगा विकासखंड की मूल निवासी है. वह प्रेम विवाह के पश्चात रायगढ़ स्थित साहेबनगर कालोनी में किराए के मकान में पति नीरज शर्मा के साथ रहती थी. इस दरमियान वह पति को बार-बार फिल्मों के आकर्षण के बारे में बताती तो पति पुष्पा को रोकने का समझाने का प्रयास करता रहा मगर फिल्मों की दुनिया के आकर्षण ने साल भर पहले पति से विवाद के बाद दोनों अलग रहने लगे थे. पुलिस के अनुसार पुष्पा रायगढ़ थाना क्षेत्र के मिट्ठुमुड़ा इलाके में पहुंची और खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा अग्नि स्नान करने के पश्चात बुरी तरह जल चुकी है. पुलिस उसका बयान लेकर मामले की तफ्तीश कर रही है या के दोषी कौन है?

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हिना खान ने बिकनी में दिखाया अपना ग्लैमरस अंदाज, देखें फोटोज

जानी मानी एक्ट्रेस हिना खान इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टीव रहती हैं. वह आए दिन फैंस के साथ अपनी लाइफ से जुड़े पलों को शेयर करती रहती है.

हाल ही में वह अपने फैमिली के साथ मालदीव्स में वेकेशन मनाने गई थीं. अब हिना खान ने इस वेकेशन की फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. इन फोटोज में हीन खान का हौट अंदाज नजर आ रहा है.

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मालदीव्स से लौटकर हिना खान अपने वेकेशन की फोटोज को लगातार फैंस के साथ शेयर कर रही हैं. हिना खान के साथ इस वेकेशन पर उनका पूरा परिवार और बायफ्रेंड रौकी जायसवाल भी गए हैं.

 

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ऐसे में वो हर किसी के साथ खूब इंजौय कर रही हैं. हिना खान की हर फोटो ने उनके फैंस को अपना दीवाना बना दिया है.

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वह हौट अंदाज में समंदर का नजारा लेती हुई दिखाई दे रही हैं. बता दें कि मालदीव्स में हिना हर साल वेकेशन मनाने जाती हैं.

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Indian Idol 2020 : इस कंटेस्टेंट की कहानी सुनकर नेहा कक्कड़ हुई इमोशनल

सोनी टीवी (Sony Tv) का फेमस सिंगिंग रिएलिटी शो ‘इंडियन आइडल 2020’ (Indian Idol) शुरू हो गया है. और इस शो में एक से बढ़कर एक टैलेंटेड सिंगर्स नजर आ रहे हैं. इस शो में औडिशन राउंड चल रहा है, जिसमें सिंगर्स जजों का दील जीतने के लिए काफी कोशिश कर रहे हैं. तो आइए जानते हैं, शो के करेंट एपिसोड के बारे में…

एक कंटेस्टेंट की कहानी सुन कर नेहा कक्कड़ काफी इमोशनल हो गई. शो में  ध्रुव नाम के कंटेस्टेंट अपनी कहानी सुनाकर हर किसी को हैरान कर दिया.

 

दरअसल ध्रुव ने बताया कि उनके गुरू उनसे नराज हैं. उन्होंने अपने औडिशन के बाद अपने गुरू का जिक्र किया और बताया कि कुछ गलतफहमी के चलते वो उनसे दूर हो गए थे. ऐसे में नेहा कक्कड़ ने फैसला लिया कि वह  उनके गुरू से बात करवाएंगी.

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इस सिंगिंग रिएलिटी शो में दिखाया जा रहा है हर सिंगर्स अपने आवाज की जादू से सभी जजों का दिल जीतने की भरपूर प्रयास करते दिखाई दे रहे है. तो ऐसे में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का रहने वाले एक कंटेस्टेंट ने इस शो में एंट्री की है. वह अपने गाने के साथ साथ जजों को मजेदार कहानी सुनाकर एंटरटेन किया.

आकाश कुमार दुबे की इंटरेस्टिंग कहानी सुनाकर हिमेश रेशमिया, नेहा कक्कड़ और  विशाल डडलानी लोट-पोट हो गए. दरअसल आकाश दूबे ने जजों को बताया कि उन्हें अपने पिता से बहुत डर लगता है. जब उन्होंन इस डर के पीछे की वजह जजों को सुनाई तो विशाल डडलानी और नेहा कक्कड़ का हाल हंस- हंसकर बुरा चुका था.

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लेकिन इस कहानी के बाद जब आकाश ने गाना शुरू किया तो नेहा कक्कड़ उनकी आवाज सुनकर ही दीवानी हो गई. बता दें कि इस हफ्ते एक ऐसी कंटेस्टेंट आएंगी, जिन्हें सोशल एग्जायटी है. ऐसे में वह औडिशन देते समय काफी काफी नर्वस हो जाएंगी.

“तीन गुना रुपया” मिलने का लालच में…

आमतौर पर हमने स्वयं को एक ऐसा लालची, लोभी और आलसी बना लिया है कि जरा भी लाभ हमें कहीं दिखाई देता है तो हम फिसल जाते हैं. हम यह भूल जाते हैं कि बिना श्रम और अथक परिश्रम के कुछ भी नहीं मिलता. और अगर मिलता है तो वह ठगी के मायाजाल के अलावा कुछ नहीं.

शायद यही कारण है कि आए दिन लोगों को लोग लालच देकर कुछ चतुर सुजान लोग सामने वाले की जमा पूंजी और तिजोरी खाली कर देते हैं. ऐसा ही एक बड़ा अपराध छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिला रायगढ़ में घटित हुआ जहां बड़े ही शातिर तरीके से छह वर्ष में तीन गुना राशि मिलने के लालच में किसान 12 लाख रुपए के ठगी का शिकार बनाया गया. यही नहीं जाने कितने ग्रामीण और किसान लालच और फंदे बाजी के शिकार हो गए.

एडीवी के्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड में जमा राशि की जानकारी लेने के लिए किसान जब तीन साल बाद पहुंचा तो पता चला कि कंपनी में ताला लगा हुआ है. जिसकी शिकायत कलेक्टर व एसपी से करते हुए इस मामले में जांच कर जमा राशि वापस दिलाने की मांग की गई .

सहदेवपाली रायगढ़ निवासी भोकलो निषाद ने जिलाधीश तक अपनी फरियाद पहुंचाई बताया कि स्वयं की करीब 3 एकड़ जमीन को करीब 4 साल पहले विक्रय किया था जिसके एवज में उसको १२ लाख रुपए मिला था जिसे वह आंध्रा बैंक में जमा कर रखा था लेकिन इसी बीच डभरा के ससुराल के कुंजबिहारी पटेल डोमनपुर वाले आए और 6 साल में तीन गुना राशि दिलाने का प्रलोभन दे मुझे आंध्रा बैंक ले जाकर जमा राशि का आहरण करा लिए.

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और कुछ इस तरह ‘”शिकार” बनाया!

आहरण राशि 12 लाख रुपए को एडीवी क्रेडिट को आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड कंपनी में जमा कराने कहा गया. और मुझे बड़ी-बड़ी बातें ख्वाब दिखा कर लालच देकर राशि ले ली गई. लेकिन अब जब पैसे की जरूरत पड़ी तो मैं एजेंट कुंजबिहारी पटेल के पास गया और राशि निकलवाने की बात कही जिस पर कुंजबिहारी ने कह दिया कि कंपनी बंद हो गई है राशि कहां से दिलाऊं. पीड़ित शख्स ने
जब कृष्णा कॉम्प्लेक्स स्थित कंपनी के कार्यालय में पता साजी किया गया तो पता चला कि पिछले लंबे समय से वह बंद है. किसान ने उक्त बातों से जिला प्रशासन को अवगत कराते हुए एजेंट व कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ जांच कराते हुए एफआईआर दर्ज करने व राशि वापस दिलाने की मांग की. हमारे संवाददाता ने जब इस संदर्भ में खोजबीन की और पुलिस अधिकारियों से चर्चा की तो यह तथ्य सामने आया कि रायगढ़ जिला में अनेक किसानों को इस तरह अलग-अलग दलालों द्वारा ठगा गया है.
पुलिस अधिकारी बताते हैं कि लगभग 15 करोड़ के ठगी की आशंका जिले में है. उक्त किसान ने बताया कि जिले में उक्त कंपनी करीब चार-पांच साल से लगातार काम करती रही . इस बीच सैकड़ों लोगों से करीब 10 से 15 करोड़ रुपए ठगी होने की संभावना है. कंपनी के खिलाफ सख्ती से जांच होने पर इसका खुलासा होने की बात कही जा रही है. वही यह सच भी सामने आ गया है कि पहले भी इस कथित कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों ने शिकायत की थी मगर प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की. तथ्य बताते हैं कि कंपनी जब शुरू में रायगढ़ शहर के ईतवारी बाजार में चालू हुई तो कुछ लोगों ने कंपनी के खिलाफ शिकायत की थी, जिस पर पुलिस व अल्प बचत अधिकारी ने कंपनी के दस्तावेजों की जांच की थी. इसके बाद भी इतने लंबे समय तक कंपनी चलती रही और अब ऐसी शिकायत सामन आ रही है. कुल मिलाकर संभावना यह है कि कंपनी के दलालों ने शासन प्रशासन को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया था और इस तरह जिला में दोनों हाथों से किसानों ग्रामीणों को भ्रमित करके करोड़ों रुपए लूट लिए गए.

अपना बनकर अपनों को बनाते हैं उल्लू!

दरअसल, इस तरह की कंपनियां लोगों को बहुत अधिक बोनस कमीशन आदि का लालच देकर अपना एजेंट बना लेते हैं और एजेंट अपने आसपास के लोगों को अपने पहचान के रिश्तेदारों को भी उल्लू बनाने लगते हैं. क्योंकि उनकी नजर मोटे कमीशन और बोनस पर रहती है वह यह नहीं समझ पाते हैं कि जब 25 प्रतिशत का कमीशन उन्हें मिल रहा है, अच्छा खासा बोनस मिल रहा है तो कंपनी आखिर किस तरह लंबे समय तक चल सकती है.

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ऐसी ही एक घटना जिला रायगढ़ में घटित हुई जिसमें रायगढ़ स्टेशन चौक स्थित हाेटल संचालक ने अपने दाे खास परिचितों के खिलाफ फायनेंस कंपनी से दाे गुना लाभ कमाने के नाम पर लाखाें रुपए की धाेखाधड़ी करने का मामला दर्ज कराया . पुलिस ने ठगी करने वाले लाेगाें के खिलाफ जांच शुरू की है.काेतवाली पुलिस थाने में दराेगापारा निवासी विधानचंद्र गांधी ने बताया कि उसका स्टेशन चौक पर हाेटल स्थित है. 2018 में पड़ाेस में रहने वाले राजेश मिश्रा अपने साथ लक्ष्मेशवर ठाकुर काे उसके हाेटल पर ठहराने के लिए लाए थे. पड़ोसी राजेश ने लक्ष्मेश्वर से उसकी जान पहचान कराई.कुछ दिन रुकने के बाद वह वापस दिल्ली चला गया. राजेश ने बताया कि वह किसी बड़ी फायनेंस कंपनी काे संभाल रहा है.इसमें पैसा लगाने पर दाे गुना लाभ मिलने का भरोसा दिलाया. विधानचंद्र पड़ाेसी की बात में आ गया और उसने कई किस्तों में 12 लाख 50 हजार रुपए फाइनेंस कंपनी में लगाने के नाम पर लक्ष्मेश्वर काे दिए। आराेप है कि दिसंबर दाे 2019 तक दाेनाें अच्छे से बात कर लाभ पहुंचाने के बात कहते रहे, पर जनवरी 2020 में जब फाइनेंस कंपनी में लगाई गई रकम मांगने तथा दाे गुना लाभ दिलाने की बात कही जाने लगी ताे लक्ष्मेशवर ठाकुर टाल मटाेल करने लगा.

अच्छा हो हमें यह समझ ले कि कभी भी अनजानी कंपनियों में अपना बेशकीमती मेहनत का पैसा जमा ना करें दुगना पैसे का लालच हमें बर्बाद कर देता है. अंचल के प्रसिद्ध समाजसेवी इंजीनियर रमाकांत के मुताबिक लोग लोभ लालच में ना आएं, और अपनी जमा पूंजी को राष्ट्रीय कृत बैंकों में ही अथवा पोस्ट औफिस में ही जमा करें.

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कहीं अंधकार में न धकेल दे आनंद की यह छलांग!

हिमांशी हाय!

कुनाल : हैलो— आप—?

हिमांशी : मेरा नाम हिमांशी है और आपका?

कुनाल : मेरा नाम कुनाल है, क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी?

हिमांशी : क्यों नहीं? अगर न करनी होती तो तुम्हारे चैट बौक्स में थोड़े आती.

कुनाल : ओ, तो ये बात है.

हिमांशी : हां, यही बात है.

कुनाल : सो, ये बताओ तुम्हें किस चीज में दिलचस्पी है?

हिमांशी : लड़कों से दोस्ती करने में.

कुनाल : अच्छा अगर मैं लड़की होती तो तुम मुझसे दोस्ती नहीं करती ?

हिमांशी : नहीं, ऐसा नहीं है। फिर मैं उसे दूसरे तरह से ट्रीट करती—।

कुनाल : इसका क्या मतलब है?

हिमांशी : जाने दो, तुम नहीं समझोगे—।

कुनाल : तुम्हें मैं पागल लगता हूं क्या? मैं इतना भी नासमझ नहीं हूं।

हिमांशी : अच्छा काफी समझदार हो—।

कुनाल : आजमा लो

हिमांशी :  देख लो! मौके में धोखा तो नहीं दोगे।

कुनाल : कुछ भी करवा लो। अगर बीच चैराहे पर छोड़ जाऊं तब तुम मुझे लड़का ही मत समझना–

हिमांशी : क्या! क्या! क्या! लड़का ही न समझूं. कहीं वाकई कोई अबनॉर्मलिटी तो नहीं है? मुझे तो लग रहा है कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरुर है.

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कुनाल : यहां कुछ दिखा नहीं सकता वरना सब कुछ दिखा देता.

हिमांशी : कर तो सकते हो

कुनाल : करवा लो, इंतजार किस बात का कर रही हो? चले क्या बेडरूम में.

हिमांशी : मैं कब से इसी बात का तो इंतजार कर रही हूं.

कुनाल : चलो फिर. मेरे बेडरूम में राउंड बेड है और मैंने चारो तरफ कैंडल जलायी हुई है. धीमे स्वर में संगीत बज रहा है.

हिमांशी : वाव! मुझे यहां सुकून मिल रहा है. मैंने कभी इतनी खूबसूरत डेटिंग नहीं की. तुम्हारी खिड़की खुली हुई है.

कुनाल : रुक जाओ लगाकर आता हूं.

हिमांशी : नहीं रहने दो. यहां से बहुत प्यारी हवा आ रही है। ये हवा मेरे पूरे जिस्म में सनसनी फैला रही है.

कुनाल : तुम्हें अच्छा लग रहा है तो ठीक है. मैं नहीं लगा रहा हूं. मैं तो तुम्हें घूर रहा हूं.

हिमांशी : मेरी आंखें शर्म से नीचे हो रही हैं.  मुझमें तुम्हारी आंखों से आंखें मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही.

कुनाल : कोई बात नहीं. ऐसा तो लड़कियों के साथ होता ही है.

हिमांशी : तुम्हें तो लड़कियों के बारे में काफी जानकारी है.

कुनाल : हां, खैर ये बताओ कि तुमने पहना क्या है? मुझे उतारना है.

हिमांशी : मैंने मिनी स्कर्ट: ऊपर टॉप है. पीछे से इसके हुक है और तुमने—?

कुनाल : मैंने जीन्स पहना है, ब्लू कलर का और शर्ट है, व्हाईट कलर की. मेरी हाइट 5-10 इंच है. शौर्ट हेयर है, फेयर कलर है.

हिमांशी : मेरी हाइट 5-5 इंच है. 34, 26, 34 मेरा साइज है.

कुनाल : क्या बात है. तुम तो बहुत सेक्सी हो.

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हिमांशी : हां, कोई लड़का कॉम्पलीमेंट करता है तो ऐसा ही लगता है. मैंने अपने होंठों पर लाल रंग की लिपस्टिक लगाई है और बालों में पोनी बना रखी है. मेरी लटें मेरी आंखों में गिर रही है.

कुनाल : तुम्हारी लटें जो हवा से तुम्हारे चेहरे पर आ गिरी, उसे मैंने धीरे से तुम्हारे कान के पीछे कर दिया है और अब तुम्हारे गालों पर एक किस कर रहा हूं.

हिमांशी : हाय! मै शर्म से लाल हो गई.

कुनाल : मेरी जान इतना शर्माओगी तो आगे के काम कैसे करोगी?

हिमांशी : मैं तुम्हारे होंठों का रस पी रही हूं.

कुनाल : मजेदार है. तुम्हारे होंठ बड़े मीठे हैं. साथ ही तीखापन भी मौजूद है. जाने अंदर का माल कितना स्वादिष्ट होगा?

हिमांशी : चुप नालायक.

कुनाल : मैं अपने हाथ तुम्हारे पीठ पर सहला रहा हूं.

हिमांशी : मुझे गुदगुदी हो रही है. मैंने अपनी उंगलियां तुम्हारे बालों में फंसायी हुई है.

कुनाल : मैंने अपना हाथ तुम्हारी टॉप के अंदर घुसा दिया.

हिमांशी : हां, मुझे ठंडक महसूस हो रही है.

कुनाल : चेन खोल दिया. तुम्हारी ब्रा का हुक मुझे चुभ गया

हिमांशी : ध्यान से करो. मैंने ब्लैक कलर की ब्रा पहनी है.

कुनाल : लगता है तुम्हारी हुक टूटी हुई हैं

हिमांशी : हां, आज सुबह हैंगर से निकाल रही थी तभी टूट गई थी.

कुनाल : तुम बिना टॉप के कितनी खूबसूरत लग रही हो. मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता.

हिमांशी : मैं तुम्हारी शर्ट के बटन खोल रही हूं. मैं तुम्हारे अंदर के माचो मैन को देखना चाहती हूं.

कुनाल : मैं भी चाहता हूं कि तुम जल्द से जल्द खोल दो. तुम खोलती रहो. मैं तुम्हारे गर्दन का रस चूस रहा हूं.

हिमांशी : मुझे बहुत मजा आ रहा है. मैं, मानों सातवें आसमान पर हूं. मैंने तुम्हारी पूरी शर्ट खोल दी है. तुम्हारा सीना तेरे सामने है. मैं तुम्हारे सीने को चूम रही हूं.

कुनाल : मैं गीला हो रहा हूं. मुझसे रहा नहीं जा रहा. मैं तुम्हारी स्कर्ट के बटन खोल रहा हूं.

हिमांशी : मुझे भी तुम्हारे खूबसूरत औजार को देखने का मन हो रहा है. मैं अपना हाथ तुम्हारे पैंट के अंदर डाल रही हूं.

कुनाल : तुम्हारी स्कर्ट मेरे हाथ में है.

हिमांशी : क्या!

कुनाल : हां, तुम टू पीस में बिल्कुल मेरी मल्लिका लग रही हो.

हिमांशी : मेरे हाथ में कुछ आ गया. यह बहुत टाइट है.

कुनाल : तुम्हारे प्यार का नतीजा है. इतनी देर जो कर रही हो, उसके चलते यह सब हो रहा है.

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हिमांशी : तुम तो बिल्कुल गीले हो चुके हो. तुम अब और किसका इंतजार कर रहे हो जो करना है जल्दी कर लो. मैं और इंतजार नहीं कर सकती. मेरे सब्र का इम्तहान मत लो. मेरी धड़कनें और मत बढ़ाओ. मैं तुम्हारी पूरी पैंट उतार रही हूं.

कुनाल : जल्दी करो.

हिमांशी : कर दिया. अमेजिंग. मैंने ऐसा आज से पहले कभी महसूस नहीं किया था.

कुनाल : मैं तुम्हारे सीने को दो उभारों को ब्रा से निकाल चुका हूं और उन्हें दबाने में बेहद आनंद आ रहा है. बिल्कुल ऐसा लग रहा है मानो मुलायम बॉल्स हैं.

हिमांशी : खोल दो!

कुनाल : खोल चुका हूं. लगता है तुम तो मुझसे भी ज्यादा उत्तेजना महसूस कर रही हो.

हिमांशी : मेरे गले से आवाज नहीं निकल रही.

कुनाल : मैं तुम्हें अपने बाहों में भरकर बेड में लिटा रहा हूं. तुम मेरी गोद में बिल्कुल एक बच्ची जैसी लग रही हो. सिर्फ तुम्हारी पैंटी उतारने की देरी थी. शिट! पैंटी क्यों नहीं उतारी?

हिमांशी : अब उतार दो. मैं तो कह ही रही थी कि उतार दों

कुनाल : मैं चलता हूं तो तुम्हारे दो उभार हिलते हैं, ऐसा नजारा प्रकृति की और किसी चीज में मौजूद नहीं हैं.

हिमांशी : हां, तुम चल रहे हो और तुम्हारा औजार सीधा खड़ा है.

कुनाल : बिल्कुल सही पहचाना, उसे अपनी जगह चाहिए

हिमांशी : लेकिन उससे पहले मेरा मुंह सूख रहा है. क्या मेरी प्यास नहीं बुझाओगे.

कुनाल : मैं कौन होता हूं तुम्हें रोकने वाला. तुम तो मेरी रानी हो, मेरी शहजादी हो.

हिमांशी : ये कितना नमकीन है. कितना रसीला है.

कुनाल : तेजी से करो और तेज और भी—

हिमांशी : कर रही हूं. इससे तेज नहीं कर सकती.

कुनाल : रुक जाओ. अब इसे इसकी जगह पर पहुंचा दो. हमारे प्यार को अंतिम सीमा तक पहुंचा दो.

हिमांशी : अरे, लगता है कुछ गिर गया.

कुनाल : क्या?

हिमांशी : एक कैंडल गिर गई.

कुनाल : जाने दो. फिलहाल यहां-वहां नजर मत दौड़ाओ.

हिमांशी : अरे मेरे राजकुमार अगर आग लग गई तो?

कुनाल : लो मैंने मोमबत्ति बुझा दी.

हिमांशी : मुझे प्यास लग रही है.

कुनाल : तुम क्या चाहती हो.

हिमांशी : वही जो तुम चाहते हो.

कुनाल : तो करने क्यों नहीं देती?

हिमांशी : मैं तो बस तुम्हारा सब्र देख रही थी.

कुनाल : फिलहाल मैं हार चुका हूं. करने दो मुझे

हिमांशी : मैं भी! और तेज और तेज और भी—. मुझे दर्द हो रहा है.

कुनाल : सॉरी! क्या तुम्हें दुख रहा है.

हिमांशी : हां, बहुत तेजऋ लेकिन मुझे मजा आ रहा है. तुम लगे रहो. करो और भी तेज. अपनी पूरी ताकत लगा दो. अपने अंदर का जंगली जानवर जगा दो. अअअअअअ—-.

कुनाल : तुम्हारी ये सिसकियां मेरी जान लेकर रहेंगी.

हिमांशी : मैं रुक नहीं सकती. अअअअअअअअ.

……और ये बातें अंत तक चलती रहीं जब तक दोनों क्लाइमेक्स पर पहुंच गए.

आज से करीब सात साल पहले यह मुंबई के दो टीनएजर की इंटीमेट चैट थी, जो वायरल हो गई थी. इसमें नाम काल्पनिक हैं बाकी बातचीत वही है, जो उस समय दोनों के बीच हुई थी. हिमांशी और कुनाल यूं तो फेसबुक के मैसेज बाक्स में उन दिनों बातचीत कर रहे थे, मगर ये सिर्फ बातचीत नहीं थी. दोनों इसके जरिये अपनी सेक्सअुल फंतासी इंज्वॉय कर रहे थे. वास्तव में ऐसी ही अंतरंग बातचीत के जरिये साइबर सेक्स की शुरुआत हुई थी, जो आज वर्चुअल इंटरकोर्स तक पहुंच चुका है. साइबर सेक्स को कम्पयूटर सेक्स, इंटरनेट सेक्स, नेट सेक्स, मड सेक्स, टाइनी सेक्स आदि कई नामों से जाना जाता है. इसके तहत हम व्यवहारिक तौरपर भले कुछ नहीं करते हैं, लेकिन वर्चुअल तौरपर या कहें कि बातों और कल्पनाओं में सारी हदें तोड़ देते हैं. सबसे बड़ी बात ये है कि नेट सेक्स में लोग अपने नेट फ्रेंड के जरिये तो यह सब करते ही हैं, साथ ही अजनबी लोगों के साथ भी अंगतरंगता का लुत्फ उठाते हैं. नेट सेक्स दरअसल फीलिंग की दुनिया है. बातों से और अब तो लाइव होकर बिल्कुल असली की तरह यह सब किया जाता है. नेट सेक्स महज झूठमूठ की एक्टिंग भर नहीं होता बल्कि इससे लोग वैसे ही संतुष्ट होते हैं, जैसे सचमुच का सेक्स करने से होते हैं.

मीठे मीठे दर्द की अनुभूति, सिसकियों की धीमी धीमी आवाज निकालकर और बदन के वैसे ही हाव भाव निकालकर साइबर सेक्स के जरिये भरपूर संतुष्ट हुआ जाता है. यही नहीं साइबर सेक्स अपनी फंतासियों के पूरा करने का भी एक कृत्रिम जरिया है. वास्तव में साइबर जगत एक ऐसी दुनिया बन गई है, जहां अपनी किसी भी कल्पना को वर्चुअल तरीके से अंजाम दे दिया जाता है. हालांकि अब इसमें कई तरह के अपराधिक तौर तरीके भी जुड़ गये है मसलन- कुछ पॉर्न वेबसाइटें सचमुच में लाइव सेक्स का प्रसारण करते हैं. मतलब यह कि लोग सेक्स की जो तमाम फंतासियां पहले पॉर्न फिल्मों के जरिये देखते थे, अब उन्हें न केवल लाइव भी दिखाया जाता है बल्कि दोहरे कम्युनिकेशन की व्यवस्था से दूर बैठे देखने वाले लोग इस पूरी प्रक्रिया को अपनी इच्छा के मुताबिक करने के लिए कह सकते हैं.

लेकिन जब इस दोहरे संवाद की सुविधा नहीं थी, तब भी साइबर सेक्स के दीवाने वेबकैम और हैड फोन का इस्तेमाल करते हुए, लाइव तरीके से हस्तमैथुन तक करने लगते थे. हालांकि आज पूरी दुनिया में बढ़ते साइबर सेक्स को लेकर बहुत चिंताएं जतायी जा रही हैं, लेकिन समाजशास्त्रियों का नजरिया इसमें बंटा हुआ है. कुछ का मानना है कि इस पर तुरंत सख्त पाबंदी लगनी चाहिए. क्योंकि यह बलात्कार की घटनाओं के लिए माहौल तैयार करता है. जबकि कुछ समाजशास्त्रियों का मानना है कि इसके जरिये तमाम यौन अपराध होने से बच जाते हैं, क्योंकि लोग कृत्रिम तरीके से अपनी सेक्सुअल जरूरतें पूरी कर लेते हैं. हालांकि यह कभी न खत्म होने वाली बहस है. लेकिन जिस तरह साइबर सेक्स धीरे धीरे ड्रग्स की तरह लत बन जाता है, उसके मद्देनजर इससे एक अनुशासित दूरी बनाकर रखना जरूरी है. पॉर्न तब तक बीमारी नहीं है बल्कि तरोताजा होने का उपाय है, जब तक पॉर्न देखने की फ्रीक्वेंसी पर हमारी इच्छा का नियंत्रण है. लेकिन अगर हम पॉर्न देखने की इच्छा पर नियंत्रण रखने में असफल हों तो इसके जबरदस्त नुकसान हैं. असल में तब यह एक ऐसी लाइलाइज बीमारी में तब्दील हो जाती है, जिससे उबरना मुश्किल होता है.

पिछला दशक पूरी दुनिया में साइबर सेक्स की फंतासियों का इंज्वाय करने वाला दशक था. लेकिन पिछले पांच छह सालों से पूरी दुनिया में साइबर पॉर्न के तमाम जाने अंजाने खतरे सामने आये हैं, जिनसे समाजशास्त्री बहुत चिंतित हैं. वास्तव में अमरीका और यूरोप जहां आज हर एक लाख की आबादी के बीच औसतन एक ऐसा क्लिनिक खुल गया है, जहां साइबर सेक्स के एडिक्शन का इलाज हो रहा है, उससे इसके खतरे का जबरदस्त तरीके से भान हुआ है. समाजशास्त्रियों के मुताबिक साइबर सेक्स एक ऐसी लत है, जो हमें तमाम व्यवहारिक दुनिया से न सिर्फ काट देती है बल्कि उस दुनिया का आनंद लेने में भी अरूचि पैदा कर देती है. हाल के सालों में अमरीकी हाईवेज में पांच से सात फीसदी रोड एक्सीडेंट बढ़े हैं. समाजशास्त्रियों का मानना है कि इनमें कार चलाते हुए, पॉर्न देखने की लत का एक बड़ा हिस्सा है. यही नहीं पॉर्न देखने में औसतन हर व्यक्ति दिन के कम से कम दो घंटे बरबाद करता है. इस श्रम का एक मौद्रिक मूल्य तो है ही. इसका एक भावनात्मक मूल्य भी है. हर दिन औसतन दो घंटे पॉर्न देखने वाले 90 फीसदी लोग निराशा और बेचैनी से घिरे रहते हैं. इनकी उत्पादन क्षमताओं पर साफ साफ इसका असर दिखता है. सबसे बड़ी बात यह है कि यूरोपियन साइक्रेटिक एसोसिएशन का मानना है कि इसके कारण बहुत तेजी से मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है. कुल मिलाकर साइबर सेक्स एकांत में भले मजा देने का सुरक्षित तरीका हो, लेकिन इसके जो नुकसान सामने आ रहे हैं, उसको देखते हुए तो यही ठीक है कि इससे बचा जाए.

Serial Story : मेरी मां का नया प्रेमी

Serial Story : मेरी मां का नया प्रेमी – भाग 2

कुछकुछ आभास श्वेता को उन की डायरी से ही हुआ था. एक बार उन की डायरी में कुछ कविताओं के अंश नोट किए हुए मिले थे.

‘तुम चले जाओगे पर थोड़ा सा यहां भी रह जाओगे, जैसे रह जाती है पहली बारिश के बाद हवा में धरती की सोंधी सी गंध.’

एक पृष्ठ पर लिखी ये पंक्तियां पढ़ कर तो श्वेता भौचक ही रह गई थी…सब कुछ बीत जाने के बाद भी बचा रह गया है प्रेम, प्रेम करने की भूख, केलि के बाद शैया में पड़ गई सलवटों सा… सबकुछ नष्ट हो जाने के बाद भी बचा रहेगा प्रेम, …दीपशिखा ही नहीं, उस की तो पूरी देह ही बन गई है दीपक, प्रेम में जलती हुई अविराम…

मम्मी अचानक ही आ गई थीं और डायरी पढ़ते देख एक क्षण को सिटपिटा गई थीं. बात को टालने और स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए श्वेता खिसियायी सी हंस दी थी, ‘‘यह कवि आप को बहुत पसंद आने लगे हैं क्या, मम्मी?’’

‘‘नहीं, तुम गलत समझ रही हो,’’ मम्मी ने व्यर्थ हंसने का प्रयत्न किया था, ‘‘एक छात्रा को शोध करा रही हूं नए कवियों पर…उन में इस कवि की कविताएं भी हैं. उन की कुछ अच्छी पंक्तियां नोट कर ली हैं डायरी में. कभी कहीं भाषण देने या क्लास में पढ़ाने में काम आती हैं ऐसी उजली और दो टूक बात कहने वाली पंक्तियां.’’ फिर मां ने स्वयं एक पृष्ठ खोल कर दिखा दिया था, ‘‘यह देखो, एक और कवि की पंक्तियां भी नोट की हैं मैं ने…’’ वह बोली थीं.

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उस पृष्ठ को वह एक सांस में पढ़ गई थी, ‘‘धीरेधीरे जाना प्यार की बहुत सी भाषाएं होती हैं दुनिया में, देश में और विदेश में भी लेकिन कितनी विचित्र बात है प्यार की भाषा सब जगह एक ही है और यह भी जाना कि वर्जनाओं की भी भाषा एक ही होती है…प्यार की भाषा में शब्द नहीं होते सिर्फ अक्षर होते हैं और होती हैं कुछ अस्फुट ध्वनियां और उन्हीं को जोड़ कर बनती है प्यार की भाषा…’’

मां के उत्तर से वह न सहमत हुई थी, न संतुष्ट पर वह व्यर्थ उन से और इस मसले पर उलझना नहीं चाहती थी. शायद यह सोच कर चुप लगा गई थी कि मां भी आखिर हैं तो एक स्त्री ही और स्त्री में प्रेम पाने की भूख और आकांक्षा अगर आजीवन बनी रह जाए तो इस में आश्चर्य क्या है?

पिता के साथ मां ने एक लंबा वैवाहिक जीवन जिया था. उस दुर्घटना में वह अचानक मां को अकेला छोड़ कर चले गए थे. शरीर की कामनाएंइच्छाएं तो अतृप्त रह ही गई होंगी…55-56 साल की उम्र थी तब मम्मी की. इस उम्र में शरीर पूरी तरह मुरझाता नहीं है. फिर पिता महीने 2 महीने में ही घर आ पाते थे. पूरा जीवन तो मां ने एक अतृप्ति के साथ बियाबान रेगिस्तान में प्यासी हिरणी की तरह मृगतृष्णा में काटा होगा…आगे और आगे जल की तलाश में भटकी होंगी…और वह जल उन्हें मिला होगा अमन अंकल में या हो सकता है मिल रहा हो प्रभु अंकल में.

एक शहर के महाविद्यालय में किसी व्याख्यान माला में भाषण देने गई थीं मम्मी. उन के परिचय में जब वहां बताया गया कि साहित्य में उन का दखल एक डायरी लेखिका के रूप में भी है तो उन के भाषण के बाद एक सज्जन उन से मिलने उन के निकट आ गए, ‘‘आप ही

डा. कुमुदजी हैं जिन की डायरियों के कई अंश…’’ मम्मी उठ कर खड़ी हो गई थीं, ‘‘आप का परिचय?’’

‘‘यहां निकट ही एक नेशनल पार्क है… मैं उस में एक छोटामोटा अधिकारी हूं.’’ इसी बीच महाविद्यालय के एक प्राध्यापकजी टपक पड़े थे, ‘‘हां, कुमुदजी यह छोटे नहीं मोटे अधिकारी हैं. वन्य जीवों पर इन्होंने अनेक शोध कार्य किए हैं. हमारे जंतु विज्ञान विभाग में यह व्याख्यान देने आते रहते हैं. यह विद्यार्थियों को जानवरों से संबंधित बड़ी रोचक जानकारियां देते हैं. अगर आप के पास समय हो तो आप इन का नेशनल पार्क अवश्य देखने जाएं… आप को वहां कई नए अनुभव होंगे.’’

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श्वेता को मां ने बताया था, ‘‘यह महाशय ही प्रभुनाथ हैं.’’

मां की डायरी में बाद में श्वेता ने पढ़ा था.

‘किसीकिसी आदमी का साथ कितना अपनत्व भरा होता है और उस के साथ कैसे एक औरत अपने को भीतर बाहर से भरीभरी अनुभव करती है. क्या सचमुच आदमी की उपस्थिति जीवन में इतनी जरूरी होती है? क्या इसी जरूरीपन के कारण ही औरत आदमी को आजीवन दुखों, परेशानियों के बावजूद सहती नहीं रहती?’

खालीपन और अकेलेपन, भीतर के रीतेपन को भरने के लिए जीवन में क्या सचमुच किसी पुरुष का होना नितांत आवश्यक नहीं है…कहीं कोई आदमी आप के जीवन में होता है तो आप को लगता रहता है कि कहीं कोई है जिसे आप की जरूरत है, जो आप की प्रतीक्षा करता है, जो आप को प्यार करता है…चाहता है, तन से भी, मन से भी और शायद आत्मा से भी…

प्रभुनाथ के साथ पूरे 7 दिन तक नेशनल पार्क के भीतर जंगल के बीच में बने आरामदेय शानदार हट में रही… तरहतरह के जंगली जंतु तो प्रभुनाथ ने अपनी जीप में बैठा कर दिखाए ही, थारू जनजाति के गांवों में भी ले गए और उन के बारे में अनेक रोचक और विचित्र जानकारियां दीं, जिन से अब तक मैं परिचित नहीं थी.

‘दुनिया में कितना कुछ है जिसे हम नहीं जानते. दुनिया तो बहुत बड़ी है, हम अपने देश को ही ठीक से नहीं जानते. इस से पहले हम ने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि यह नेशनल पार्क…यह मनोरम जंगल, जंगल में जानवरों, पेड़पौधों की एक भरीपूरी विचित्र और अद्भुत आनंद देने वाली एक दुनिया भी होती है, जिसे हर आदमी को जीवन में जरूर देखना और समझना चाहिए.’

प्रभुनाथ ने चपरासी को मोटर- साइकिल से भेज कर भोजन वहीं उसी आलीशान हट में मंगा लिया था. साथ बैठ कर खाया. खाने के बाद प्रभुनाथ उठे और बोले, ‘‘तो ठीक है मैडम…आप यहां रातभर आराम करें. हम अपने क्वार्टर में जा कर रहेंगे.’’

‘‘नहीं. मैं अकेली हरगिज इस जंगल में नहीं रहूंगी,’’ मैं हड़बड़ा गई थी, ‘‘रात हो आई है और जानवरों की कैसी डरावनीभयावह आवाजें रहरह कर आ रही हैं. कहीं कोई आदमखोर यहां आ गया और उस ने इस हट के दरवाजे को तोड़ कर मुझ पर हमला कर दिया तो?’’

‘‘क्या आप को इस हट का कोई दरवाजा टूटा या कमजोर नजर आता है? हर तरह से इसे सुरक्षित बनाया गया है. इस में देश और प्रदेश के मंत्री, सचिव और आला अफसर, उन के परिवार आ कर रहते हैं. मैडम, आप चिंता न करें. बस रात को कोई जानवर या आदमी दरवाजे को धक्का दे, पंजों से खरोंचे तो आप दरवाजा न खोलें. यहां आप को पीने के लिए पानी बाथरूम में मिलेगा. चाय-कौफी बनाना चाहेंगी तो उस के लिए गैसस्टोव और सारी जरूरी क्राकरी व सामग्री किचन में मिलेगी. बिस्तर आरामदेय है. हां, रात में सर्दी जरूर लगेगी तो उस के लिए 2 कंबल रखे हुए हैं.’’

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‘‘वह सब ठीक है प्रभु…पर मैं यहां अकेली नहीं रहूंगी या तो आप साथ रहें या फिर हमें भी अपने क्वार्टर की तरफ के किसी क्वार्टर में रखें.’’

‘‘नहीं मैडम,’’ वह मुसकराए, ‘‘आप डायरी लेखिका हैं. हिंदी की अच्छी वक्ता और प्रवक्ता हैं. हम चाहते हैं कि आप यहां के वातावरण को अपने भीतर तक अनुभव करें. देखें कि कैसा लगता है. बिलकुल नया सुख, नया थ्रिल, नया अनुभव होगा…और वह नया थ्रिल आप अकेले ही महसूस कर पाएंगी…किसी के साथ होने पर नहीं.

‘‘आप देखेंगी, जीवन जब खतरों से घिरा होता है…तो कैसाकैसा अनुभव होता है…जान बचे, इस के लिए ऐसेऐसे देवता आप को मनाने पड़ते हैं जिन की याद भी शायद आप को अब तक कभी न आई हो…बहुत से लेखक इस अनुभव के लिए ही यहां इस हट में आ कर रहना पसंद करते हैं.’’

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‘‘वह तो सब ठीक है…पर आप को मैं यहां से जाने नहीं दूंगी.’’ फिर कुछ सोच कर पूछ बैठीं, ‘‘बाहर गेट के क्वार्टरों में आप की प्रतीक्षा पत्नीबच्चे भी तो कर रहे होंगे? अगर ऐसा है तो आप जाएं पर हमें भी वहीं किसी क्वार्टर में रखें.’’

गंभीर बने रहे काफी देर तक प्रभुनाथ. फिर एक लंबी सांस छोड़ते हुए बोले, ‘‘अपने बारे में किसी को मैं कम ही बताता हूं. यहां बाईं तरफ जो छोटा कक्ष है उस में एक अलमारी में जहां वन्य जीवजंतुओं से संबंधित पुस्तकें हैं वहीं मेरे द्वारा लिखी गई और शोध के रूप में तैयार पुस्तक भी है. अकसर यहां मंत्री लोग और अफसर अपनी किसी न किसी महिला मित्र को ले कर आते हैं और 2-3 दिन तक उस का जम कर देह सुख लेते हैं. उन के लिए हम लोग यहां हर सुविधा जुटा कर रखते हैं. क्या करें, नौकरी करनी है तो यह सब भी इंतजाम करने पड़ते हैं…’’

झेंप गईं डा. कुमुद, ‘‘खैर, वह सब छोडि़ए. आप अपने परिवार के बारे में बताइए.’’

‘‘एक बार हम पिकनिक मनाने यहां इसी हट पर अपने परिवार के साथ आए हुए थे. अधिक रात होने पर पता नहीं पत्नी को क्या महसूस हुआ कि बोली, ‘यहां से चलिए, बाहर के क्वार्टरों में ही रहेंगे. यहां न जाने क्यों आज अजीब सा भय लग रहा है.’ हम जीप में बैठ कर वापस बाहर की तरफ चल दिए. पत्नी, लड़की और लड़का. हमारे 2 ही बच्चे थे. अभी कुछ ही दूर चले होंगे कि खतरे का आभास हो गया. एक शेर बेतहाशा घबराया हुआ भागता हमारे सामने से गुजरा. पीछे कुछ बदमाश, जिन्हें हम लोग पोचर्स कहते हैं. जंगली जानवरों का चोरीछिपे शिकार करने वाले उन पोचरों से हमारा सामना हो गया.’’

‘‘निहत्थे नहीं थे हम. एक बंदूक साथ थी और साहसी तो मैं शुरू से रहा हूं इसीलिए यह नौकरी कर रहा हूं. बदमाशों को ललकारा कि अगर किसी जानवर को तुम लोगों ने गोली मारी तो हम आप को गोली मार देंगे. जीप को चारों ओर घुमा कर हम ने उस की रोशनी में बदमाशों की पोजीशन जाननी चाही कि तभी उन्होंने हम पर अपने आधुनिक हथियारों से हमला बोल दिया. हम संभल तक नहीं पाए… पत्नी और बेटी की मौत गोली लगने से हो गई. लड़का बच गया क्योंकि वह जीप के नीचे घुस गया था.

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‘‘मैं उन्हें ललकारता हुआ अपनी बंदूक से फायर करने लगा. गोलियों की आवाज ने गार्डों को सावधान कर दिया और वे बड़ीबड़ी टार्चों और दूसरी गाडि़यों को ले कर तेजी से इधर की तरफ हल्ला बोलते आए तो बदमाश नदी में उतर कर अंधेरे का लाभ उठा कर भाग गए.’’

‘‘फिर दूसरी शादी नहीं की,’’ उन्होंने पूछा.

‘‘लड़के को हमारी ससुराल वालों ने इस खतरे से दूर अपने पास रख कर पाला…साली से मेरी शादी उन लोगों ने तय की पर एकांत में साली ने मुझ से कहा कि वह किसी और को चाहती है और उसी से शादी भी करना चाहती है. मैं बीच में न आऊं तो ही अच्छा है. मैं ने शादी से इनकार कर दिया…’’

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‘‘लड़का कहां है आजकल?’’

डा. कुमुद ने पूछा.

‘‘बस्तर के जंगलों में अफसर है. उस की शादी कर दी है. अपनी पत्नी के साथ वहीं रहता है.’’

‘‘मैं ने तो सुना है कि बस्तर में अफसर अपनी पत्नी को ले कर नहीं जाते. एक तो नक्सलियों का खतरा, दूसरे आदिवासियों की तीरंदाजी का डर… तीसरे वहां आदमी को बहुत कम पैसों में औरत रात भर के लिए मिल जाती है.’’ इतना कह कर डा. कुमुद मुसकरा दीं.

‘‘जेब में पैसा हो तो औरत सब जगह उपलब्ध है…यहां भी और कहीं भी… इसलिए मैं ने शादी नहीं की. जरूरत पड़ने पर कहीं भी चला जाता हूं.’’ प्रभु मुसकराए.

‘‘हां, पुरुष होने के ये फायदे तो हैं ही कि आप लोग बेखटके, बिना किसी शर्म के, बिना लोकलाज की परवा किए, कहीं भी देहसुख के लिए जा सकते हैं…पैसों की कमी होती नहीं है आप जैसे बड़े अफसरों को…अच्छी से अच्छी देह आप प्राप्त कर सकते हैं. मुश्किल तो हम संकोचशील औरतों की है. हमें अगर देह- सुख की जरूरत पड़े तो हम बेशर्मी लाद कर कहां जाएं? किस से कहें?’’

‘‘वक्त बहुत बदल गया है कुमुदजी…अब औरतें भी कम नहीं हैं. वह बशीर बद्र का शेर है न… ‘जी तो बहुत चाहता है कि सच बोलें पर क्या करें हौसला नहीं होता, रात का इंतजार कौन करे आजकल दिन में क्या नहीं होता.’’’

मुसकराती रहीं कुमुद देर तक, ‘‘बड़े दिलचस्प इनसान हैं आप भी, प्रभुनाथजी.’’

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श्वेता डायरी के अगले पृष्ठ को पढ़ कर अपने धड़कते दिल को मुश्किल से काबू में कर पाई थी…

मां ने लिख रखा था… ‘7 दिन रही उस नेशनल पार्क में और जो देहसुख उन 7 दिनों में प्राप्त किया शायद अगले 7 जन्मों में प्राप्त न हो सके. आदमी का सुख वास्तव में अवर्णनीय, अव्याख्य और अव्यक्त होता है…इस सुख को सिर्फ देह ही महसूस कर सकती है…उम्र और पदप्रतिष्ठा से बहुत दूर और बहुत अलग…’.

भ्रष्टाचार की बीमारी सरकारी योजनाओं में सेंधमारी

मसला

अमला है सरकारी जिस को एक धुन है,

लूटना, खाना ही जिस का खास गुन है.

आम जनता की कमाई भरी जिस में,

इस सड़े गोदाम में चूहे और घुन हैं.

ये लाइनें टैक्स देने वालों के पैसे के बल पर चल रही सरकारी स्कीमों में मची सेंधमारी पर मोजूं लगती हैं. आजादी के बाद से गरीबों, नौजवानों, औरतों व किसानों के नाम पर केंद्र व राज्यों की सरकारों ने बहुत सी योजनाएं चलाईं. पैसे की नहरें बहाईं, लेकिन पानी आखिरी छोर तक नहीं पहुंचा. लिहाजा, नतीजा वही ढाक के तीन पात. देश में करोड़ों लोग आज भी गरीबी की चपेट में हैं. साथ ही, बहुत सी समस्याएं बरकरार व भयंकर हैं.

कारण हैं खास

तालीम की कमी, नशा, अंधविश्वास व निकम्मापन गरीबी की सब से खास वजहें हैं, लेकिन गरीबों के लिए चल रही सरकारी योजनाओं का बेजा इस्तेमाल भी इस की एक बड़ी वजह है. नतीजतन, सरकारी अमले में गले तक रचाबसा भ्रष्टाचार का दलदल है, इसलिए ज्यादातर सरकारी स्कीमें गरीबी दूर करने में बेअसर, नाकाम व बिचौलियों के लिए चारागाह साबित हुई हैं. इन की बदौलत भ्रष्ट नेताओं, अफसरों व मुलाजिमों ने अकूत दौलत इकट्ठी की है.

जिन के कंधों पर जरूरतमंदों के लिए चल रही योजनाओं के तहत राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी है, वे अपना फर्ज व जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा कर अपनी जेबें भरने में लगे रहते हैं. वे किसी को कानोंकान खबर नहीं देते, इसलिए बहुत कम लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी हो पाती है. सरकारी महकमे अपने दफ्तरों के बाहर चल रही योजनाओं में जनता के लिए दी जा रही छूट, कर्ज व सहूलियतों वगैरह का ब्योरा नहीं लिखवाते.

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सरकारी मुलाजिम कहीं किसी जरूरतमंद का फार्म भरवाने में मदद नहीं करते, उलटे उन्हें जराजरा से काम के लिए बारबार दफ्तरों के चक्कर कटवाते हैं. नतीजतन, बहुत से लोग या तो दलालों की शरण में जा कर अपनी जेब कटवाते हैं या थकहार कर घर बैठ जाते हैं.

ज्यादातर गरीब भोले, नावाकिफ व कम पढ़ेलिखे हैं. उन्हें अपने हकों व सरकारी स्कीमों की जानकारी नहीं है. वे सरकारी राहत व इमदाद पाने की खानापूरी भी नहीं कर पाते और उन में से ज्यादातर लोग सरकारी सहूलियतों से बेदखल रह जाते हैं. उन की जगह दूसरे लोग सांठगांठ कर के उन का हिस्सा हड़पने में कामयाब हो जाते हैं.

बिगड़ैल अमला

सरकारें हर साल अरबों रुपए बहुत सी योजनाओं में खर्च करती हैं, लेकिन उन का एक बड़ा हिस्सा वे गटक जाते हैं, जो चील, गिद्ध, कौवों की तरह ताक में लगे रहते हैं. मसलन, बहुत से लोग आज भी बेघर हैं. वे किसी तरह अपना सिर छिपाने के लिए फूंस के छप्पर, खपरैल व मिट्टी से बने कच्चे घरों में रहते हैं. ऐसे गरीब लोगों को पक्का घर मुहैया कराने की गरज से साल 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई थी, लेकिन चालाक, मक्कार व दलाल लोग मुलाजिमों की मदद से इस में भी गड़बड़ी करने में कामयाब हो गए.

इस योजना से फायदा उठाने वालों के लिए तयशुदा शर्तें रखी गई थीं, लेकिन योजनाओं को लागू करने का जिम्मा तो सब से नीचे के मुलाजिमों पर होता है और वे अपना घर भरने के लिए मनमानी बंदरबांट करने लगते हैं. उन की नकेल कसने वाले भी अपने हिस्से के लालच में उन से मिल जाते हैं, इसलिए वे भी उन्हें चैक करने के बजाय अपनी आंखें मूंद लेते हैं.

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कुलमिला कर भ्रष्ट व निकम्मे सरकारी मुलाजिमों की मिलीभगत व मनमानी की वजह से अकसर गरीबों की जगह उन अमीरों को भी लिस्ट में शामिल कर लिया जाता है, जो असल में राहत या इमदाद पाने के हकदार नहीं होते. बाद में जब कहीं कोई शिकायत होती है, तो पोल खुलती है और जांचपड़ताल में गड़बड़ी पाई जाती है.

यही उत्तर प्रदेश के मेरठ में भी हुआ. वहां प्रधानमंत्री आवास योजना में जिले के 1,884 लोगों में 534 लोग अपात्र यानी गलत पाए गए. सिर्फ किसी एक इलाके या किसी एक योजना में ही पलीता लगाया जा रहा है, ऐसा नहीं है. अपवाद छोड़ कर सरकार की ज्यादातर योजनाओं में लूटखसोट व बंदरबांट चल रही है, इसलिए हांड़ी का एक चावल देख कर ही बाकी सब का पता लग जाता है.

घपले और घोटाले

किसान सम्मान निधि योजना में  10 करोड़ किसानों के बैंक खातों में  6-6 हजार रुपए भेजने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 1-2 नहीं, पूरे 14,000 लोग अपात्र पाए गए हैं. इन में से 1,200 किसान अकेले गोंडा जिले के हैं. राज्य सरकार ने इस पर कड़ा कदम उठाया है.

गरीब किसानों के लिए चली इस स्कीम में जिन्होंने बेजा तरीकों से सेंधमारी कर के सरकारी पैसा हड़पा ,वे अब उस रकम को सरकारी खजाने में वापस जमा करेंगे.

खेती महकमे ने चेताया है कि जिन लोगों ने गलत तरीके से किसान सम्मान निधि का पैसा लिया है, वे फौरन उसे वापस जमा कर दें, वरना उन से जुर्माने समेत वसूली की जाएगी.

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब व उत्तर प्रदेश में गरीब छात्रों को दिए जाने वाले वजीफे में हुए करोड़ों रुपयों की गड़बड़ी की जांच चल रही है.

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5 साल पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पिछले दिनों फर्जी छात्र व फर्जी कालेज दिखा कर सरकारी वजीफे के  6 करोड़ रुपए हड़पे गए थे. यह मामला बरसों तक माली जरायम केसों की जांच करने वाली पुलिस के पास रहा. अब कुसूरवार अफसरों पर मुकदमा कायम करने के लिए मंजूरी मांगी गई है.

इस के बाद साल 2018 में इटावा और मेरठ जिलों में स्कौलरशिप हड़पने के 109 मामले पकड़े गए थे, जिन पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी. कमोबेश यही हाल विधवा पैंशन व बुढ़ावा पैंशन स्कीमों का है.

सरकारी योजनाओं में मिली रकम अब सीधे गरीबों के बैंक खातों में जाती है, लेकिन गड़बड़घोटाले करने वाले तरकीब व तरीके का तोड़ निकाल ही लेते हैं. इन का पूरा गिरोह मिलीभगत से काम करता है. कंप्यूटर में लाभार्थी की डिटेल फीड करते वक्त जानबूझ कर बैंक खातों का नंबर बदल दिया जाता है, इसलिए जो सरकारी सहूलियतें पाने के हकदार हैं, वे पीछे छूट जाते हैं और जो असरदार, चालबाज या छुटभैए नेता या उन के चमचे, चेलेचपाटे बेजा फायदा उठाने में कामयाब हो जाते हैं.

सरकारी योजनाओं में सारे असल गरीबों को इमदाद नहीं मिलती. यह बात यहीं खत्म नहीं होती. एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा यह कि उन के साथ चौतरफा बेजा बरताव भी होता है. सहूलियतें देने का लौलीपौप दिखा कर काम कराने के नाम पर उन से मोटी रकम वसूली जाती है और बाद में उन्हें ठेंगा दिखा दिया जाता है, इसलिए ज्यादातर गरीब बेचारे ठगे से देखते हुए रह जाते हैं.

ठगी पहले कदम से

सरकारी योजनाओं में गरीबों को लूटने का सिलसिला फार्म भरने के पहले पायदान से ही शुरू हो जाता है. कर्ज व छूट का फार्म भरवाने व बाद में मिलने वाली रकम का लालच दे कर दलाल पहले ही अपना हिस्सा झटक लेते हैं. बीते लौकडाउन के दौरान ऐसे बहुत से लोगों के कामधंधे बंद हो गए थे, जो रोज कमा कर खाते थे, इसलिए वे बेहद परेशान थे.

पिछले दिनों प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के इश्तिहार अखबारों में छपे थे. इस में ठेलेखोमचे आदि लगाने वालों को 10,000 रुपए का कर्ज मिलने का दावा किया गया था. सरकार ने मेरठ में 65,000 लोगों को इस स्कीम का फायदा देने का मकसद तय किया था. इस के उलट नगरनिगम के मुलाजिमों ने बीते 4 महीने में सिर्फ 18,745 लोगों का ही रजिस्ट्रेशन किया.

गौरतलब है कि उस में से केवल 6,815 फार्म ही बैंकों को भेजे गए. जब लीड बैंक से इस बाबत जानकारी की गई, तो पता लगा कि उन को 5,606 फार्म मिले. 209 फार्म बीच में कहां गायब हो गए, यह कोई नहीं जानता. और सुनिए, इन में से सिर्फ 1,036 फार्म ही कर्ज मंजूरी की सिफारिश करने लायक पाए गए, लेकिन कितनों को पैसा मिला, यह किसी को भी पता नहीं है.

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कड़वा सच

मेरठ में फलों की रेहड़ी लगा रहे किशनपुरा के दिनेश से जब इस लेखक ने बात की, तो उस ने बताया कि एक आदमी खुद को सरकारी मुलाजिम बता कर फार्म भरने के नाम पर उस से 200 रुपए ले गया. फिर उस के बाद क्या हुआ, यह आज तक पता नहीं चला.

इस ठगी का शिकार दिनेश अकेला नहीं है. आइसक्रीम बेच रहे मंशा, फूल बेचने वाले नंदू व जूस निकालने वाले फुरमान ने बताया कि उन्हें आज भी इंतजार है कि शायद कुछ इमदाद जरूर मिलेगी. हालांकि उन के पास कोई रसीद या फार्म भरने वाले का नामपता नहीं है. तालीम व जानकारी की कमी से बहुत

से गरीब लोग आएदिन ठगी के शिकार होते हैं.

यह है हल

सरकारी योजनाओं में पसरी लूटखसोट बंद करने के लिए जरूरी है कि योजनाओं का प्रचारप्रसार कारगर तरीकों से किया जाए. असली हकदार लोगों को छांट कर उन की पहचान लिस्ट बनाते वक्त पूरी जांचपड़ताल सही तरीके से की जाए. साथ ही, उन्हें जागरूक किया जाए. अपनी जेब भरने के लालच में गड़बड़ी करने वाले मुलाजिमों की जवाबदेही तय की जाए. घपलेघोटालों की जांच जल्दी पूरी की जाए. दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए, साथ ही, उन से ब्याज व जुर्माने समेत सरकारी पैसों की वसूली की जाए.

गरीबों की स्कीमों में घुसपैठ करने वाले अमीरों पर भी तगड़ा जुर्माना लगे और उन के नाम व फोटो इश्तिहारों में सार्वजनिक किए जाएं. हर योजना का पब्लिक औडिट हो, ताकि गड़बड़ी करने वालों पर कारगर नकेल कसी जा सके, वरना सरकारी स्कीमों में गरीबों के हक पर अमीरों की सेंधमारी आगे भी इसी तरह जारी रहेगी.

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