औनलाइन गैंबलिंग यूज फिर मिस यूज   

लेखक- रोहित   

जिस बिंदु की तरफ ज्यादातर लोगों का ध्यान नहीं जा रहा वह अनप्रोडक्टिव वर्क कल्चर को बढ़ावा दे रहा है. समस्या यह है कि समाज ने उसे नैतिकअनैतिक की बहस में उलझा कर रखा हुआ है, जबकि वह किसी भी तरह से प्रोडक्टिव नहीं है. ‘‘चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिगनल यातायात को सुचारु रूप से चलाए रखने के लिए निर्णायक हैं.

अब अगर कुछ बाइकसवार यातायात के बने इन नियमों की अवहेलना करते हुए रैडलाइट जंप कर दें, तो क्या इस अपराध को रोकने के लिए ट्रैफिक सिगनल से रैडलाइट ही हटा देना उचित कदम होगा?’’ यह सवाल करते हुए अशोक ने एक अनबुझ पहेली मेरे सामने रख दी. दरअसल, कुछ दिनों पहले आईपीएल मैच देखते हुए भारत में औनलाइन गैंबलिंग के बढ़ते चलन को ले कर मेरी अपने मित्र अशोक से चर्चा चल रही थी. और यह सवाल उस ने मेरे उस बात के प्रतिउत्तर में दागा था जिस में मैं ने उस से कहा कि गैंबलिंग को वैधानिकता मिलने से इस से जुड़े छिपे गैरकानूनी धंधों में कमी आएगी, सबकुछ सामने होगा और सरकार को टैक्स के तौर पर रैवेन्यू में भारीभरकम रकम प्राप्त होगी.

अशोक का इस मसले पर सीधा सोचना था कि ‘‘अगर गैंबलिंग की वैधानिकता से सरकार को टैक्स का फायदा होता है तो ड्रग्स, कालेधन, स्मगलिंग, ट्रैफिकिंग जैसे दो नंबरी धंधों को कानूनी बना कर उन से भी भारीभरकम टैक्स कमाने में क्या बुराई है, ये धंधे भी वैधानिक कर दिए जाने चाहिए?’’ उस के सवाल तीखे थे, लेकिन जिज्ञासा जगा रहे थे. मैं ने गाजियाबाद में रह रहे अपने एक अन्य मित्र 28 वर्षीय प्रदीप (बदला नाम) को फोन मिलाया. दरअसल, मुझे जानकारी थी कि प्रदीप ने पिछले साल से ही औनलाइन गैंबलिंग में हिस्सा लेना शुरू किया था. वैसे तो इसे सीधेसीधे गैंबलिंग कोई स्वीकार नहीं करता लेकिन प्रदीप ने सीधेतौर पर बताया कि यह एक तरह का सट्टा या जुआ ही है. जो जुआ आप मटका या औफलाइन छिपेतौर पर खेल रहे थे, बस, अब वह पूरी मान्यता के साथ खेला जा रहा है.   प्रदीप लौकडाउन से पहले गुरुग्राम स्थित एक एमएनसी में काम कर रहा था. उस की नौकरी 2 साल पहले लगी थी. उस ने शुरू से ही कंप्यूटर लाइन चुनी थी.

ये भी पढ़ें- ऐसी सहेलियों से बच कर रहें

उस ने पहले बीसीए किया, फिर जौब करते हुए अपनी एमसीए की पढ़ाई भी पूरी की. जिस कंपनी में वह कार्यरत था वहां उसे 25 हजार रुपए प्रतिमाह सैलरी मिलती थी. इसलिए उस ने घर से दूर लेकिन औफिस के नजदीक ही गुरुग्राम में कहीं अपने कुछ सहकर्मियों के साथ किराए के फ्लैट में रहने का फैसला किया था. परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए वह नियमिततौर पर सैलरी का एक हिस्सा घर भिजवाता रहा. वहां रह कर उस ने परिवार की आर्थिक स्थिति को संतुलित किया, और साथ ही अपने लिए कुछ सेविंग्स भी की. लेकिन इस बीच धीरेधीरे वह अपने दोस्तों के साथ औनलाइन गेमिंग की जकड़ में भी फंसता गया. शुरूआत मजे से हुई लेकिन धीरेधीरे यह उस की आदत का हिस्सा बनता चला गया.  देश में तालाबंदी हुई तो शुरुआती डेढ़ महीना वह अपने सहकर्मियों के साथ फ्लैट में ही फंसा रहा. वहां वह अधिकतर खाली समय औनलाइन गेम खेलता रहा. तालाबंदी के तुरंत बाद ही कंपनी ने छंटनी कर उसे काम से निकाल दिया. प्रदीप वापस अपने घर गाजियाबाद में आ तो गया, लेकिन धीरेधीरे वह अपने ही फ्रैंड सर्कल में शौर्टकट तरीके से पैसे कमाने के लिए छोटीछोटी औनलाइन बैट यानी शर्त लगाने लगा. इस बीच, आईपीएल क्रिकेट टूर्नामैंट शुरू होने के बाद उस ने ‘ड्रीम 11’ पर खेलना (बैट लगाना) शुरू किया. हालांकि इस से पिछले साल वह इसे खेल चुका था लेकिन इस साल, उस के कथनानुसार, उस ने अपनी की हुई सेविंग से लगभग 36 हजार रुपए गंवा दिए हैं. लेकिन, उस का मानना है कि औनलाइन गेमिंग से वह इसे जल्द ही रिकवर कर लेगा, अपने नुकसान की भरपाई कर लेगा. वहीं, यूपीएससी की प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे प्रखर लौकडाउन के बाद से ही अपने होमस्टेट बिहार चले गए थे.

वे कम से कम इस साल तो कोरोना के चलते दिल्ली का रुख नहीं करना चाहते. वे कहते हैं, ‘मैं ने पिछले साल से ही आईपीएल पर की जाने वाली औनलाइन सट्टेबाजी में हिस्सा लेना शुरू किया. पिछले साल ‘ड्रीम 11’ पर खेल कर लगभग 2,200 रुपए जीते थे. लेकिन इस साल मैं हारा हूं.’ हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि वे किसी दूसरे औनलाइन गेम से इस नुकसान की भरपाई कर लेंगे.  इस साल के जून माह में ही आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित पंजाब नैशनल बैंक के भीतर एक फोरजरी का मामला सुर्खियों में था. बैंक के कैशियर रवि तेजा ने औनलाइन गेम (रम्मी) में होने वाली गैंबलिंग में फंस कर पहले अपना पैसा बरबाद किया, फिर कर्ज ले कर गेम खेलने लगा. जब कर्ज का बो?ा बढ़ा और कर्ज लेने वाले घर के इर्दगिर्द तकाजा करने लगे, तो उस ने बैंक में जमा लोगों के पैसों को अपने अकाउंट में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया. अंत में जब बैंक औडिट हुआ तो पता चला लगभग 1 करोड़ 57 लाख रुपए की कमी पाई गई है. इस की जांच की गई.

जांच में पता चला, यह सारा पैसा कैशियर के अकाउंट में ट्रांसफर हुआ था. फिर वहां से कैशियर द्वारा औनलाइन गेमिंग साइट्स पर ट्रांसफर किया गया. ये ही कुछ मामले नहीं हैं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में औनलाइन गेमिंग के जरिए गैंबलिंग करने के ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं. कई मामले ऐसे हैं जिन में सट्टे की रकम न चुकाने की स्थिति में व्यक्ति द्वारा सुसाइड करने की नौबत आ चुकी है. भारत में गैंबलिंग के अवैध होने के बावजूद सरकार और न्यायालयों के सामने या यों कहें कि उन की परामर्श या मंजूरी के बाद ही इस धंधे का क्षेत्रफल विशालकाय होता जा रहा है.  स्किल और चांस के बीच वैधअवैध का खेल? इस साल आईपीएल में औनलाइन जुआ से संबंधित गेम्स को खूब प्रमोट किया गया. कल तक जिस पेटीएम पर गूगल ने सट्टेबाजी को ले कर प्रतिबंध लगाया था, उसे मात्र 4 घंटे के भीतर ही समझौता कर गूगल ने वापस ले लिया.

इसी प्रकार गैंबलिंग से जुड़े गेम्स इस साल काफी बड़े स्तर पर देखने को मिले हैं. इस का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल आईपीएल क्रिकेट लीग को ‘ड्रीम 11’ ने स्पौंसर किया. वहीं, माय सर्किल 11, एमपीएल जैसे औनलाइन गैंबलिंग से संबंधित एकसाथ कई ऐसे गेम्स की बाढ़ सी आ गई है. ये खुलेतौर पर लोगों से पैसा लगाने का आह्वान कर रहे हैं. यह आह्वान, खासकर, उन युवाओं को सीधे लुभा रहा है जिन के पास एंड्रौयड फोन है और जो बेरोजगारी के मौजूदा दौर में शौर्टकट तरीके से पैसे कमाने की जुगत में लगे हैं. किंतु इन सारी चीजों के बावजूद बड़ा सवाल यह है कि भारत में जब जुआ या सट्टे से जुड़े कारोबार पर पाबंदी है तो यह खुलेआम इतने बड़े लैवल पर कैसे सुचारु रूप से चल रहा है? भारत में इस समय पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1867 लागू है.

इस के अनुसार, कोई भी घर, जो दीवारों से घिरा या बंद हो और वहां कार्ड्स, डाइस, टेबल और गेम के अन्य यंत्र रखे हों जिन का इस्तेमाल किसी व्यक्ति, फिर चाहे वह मकानमालिक ही क्यों न हो, द्वारा लाभ कमाने की मंशा से किया जा रहा हो, इस कानून की श्रेणी में आता है.’’ इस परिभाषा के अनुसार, किसी गैंबलिंग को गैंबलिंग मानने के लिए 3 चीजों की जरूरत है- संभावना, आपसी सहमति, दांव पर लगने वाली कीमत (गिफ्ट). लेकिन, यह जितना आसान दिखता है उतना है नहीं. इस के भीतर कई उठापटक हैं. इस एक्ट के सैक्शन 12 में यह कहा गया कि जिन गेम्स में संभावना कम और स्किल, हुनर या कौशल की मात्रा अधिक होती है, वे  पनिशेबल नहीं हैं.

ये भी पढ़ें- सोशल मीडिया से भड़कती “सेक्स की चिंगारी”

यानी, वे गैंबलिंग की श्रेणी में नहीं आते हैं. यह कानून ब्रिटिश समय से ही भारत में लागू है, इसे ले कर भारतीय न्यायिक मामले में अलगअलग समय 3 डिसीजन लिए गए. पहला 1957 में, जब आरएमडी चमरबउगवाला वर्सेस यूनियन औफ इंडिया के मामले के तहत अपैक्स कोर्ट ने कहा, जिन गेम्स में स्किल्स की जरूरत होती है उन्हें गैंबलिंग से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता. दूसरा 1967 में, आंध्र प्रदेश वर्सेस के सत्यनारायण मामले में जब सुप्रीम कोर्ट ने 13 पत्तों वाले ‘रम्मी गेम’ को यह कहते हुए उन क्लब्स या संस्थाओं में खेलने की आज्ञा दी, जहां यह लाभ कमाने के उद्देश्य से न हो. कथनानुसार, ‘‘रम्मी खेल, तीन पत्ती गेम की तरह ‘गेम औफ चांस’ नहीं है. रम्मी में एक प्रकार का स्किल चाहिए होता है क्योंकि इस में अपने पत्तों को बनाने के लिए कार्ड्स को गिराने, उठाने और सजाने के लिए विशेष ध्यान देना पड़ता है.’’ जिस के बाद इसे ‘गेम औफ स्किल’ कहा गया.

इसी तौर पर तीसरा 1996 में, जहां अपैक्स कोर्ट ने के आर लक्ष्मण वर्सेस स्टेट औफ तमिलनाडु मामले में हौर्स रेसिंग गेम को गैंबलिंग के दायरे से दूर रखते हुए इस में खुली सट्टेबाजी की वैधानिकता प्रदान की. हालांकि, भारत के संविधान, 1950, लिस्ट 2 के 7वें शैड्यूल के एंट्री 34 और 62 में सभी राज्यों को यह ताकत दी गई है कि राज्य विधानसभाएं अपने अधीन गैंबलिंग और बैटिंग के मैटर पर विधेयक बना सकती हैं. इसी के तहत, देश में 3 राज्यों (गोवा, सिक्किम, दमन) को छोड़ कर सभी ने गैंबलिंग या बैटिंग से जुड़े किसी भी प्रारूप पर पाबंदी लगाई हुई है.  गोवा ने भी 1996 में अनुमति दी. इस के बाद दमन एंड दीव ने ‘पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1976’ में संशोधन के बाद पांचसितारा होटलों में इस की अनुमति दी. फिर सिक्किम ने भी तय किया कि सिक्किम रेगुलेशन औफ गैंबलिंग (अमैंडमैंट) एक्ट 2005 के तहत इसे लीगल किया. वर्ष 2013 में  सरकारी आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट आई थी कि अकेले गोवा राज्य में चलने वाले कैसीनों से 2012-13 में 135 करोड़ रुपए का रैवेन्यू सरकार को प्राप्त हुआ. यानी, देखा जाए तो खेलों में होने वाली सट्टेबाजी को 2 कैटेगरी में बांटा गया है, एक- ‘गेम औफ स्किल्स’ दूसरा- ‘गेम औफ चांस’. इसी अनुसार कोई सट्टा वैध है अथवा अवैध, इस की वैधानिकता इस बात पर निर्धारित होती है कि वह कितना स्किल्स पर निर्भर है या कितना संभावना पर.

औनलाइन सट्टेबाजी का बढ़ता चलन देश में चूंकि डिजिटलीकरण के चलते चीजें बहुत तेजी से बदलीं, तो एंड्रौयड फोन और इंटरनैट ने 5-7 सालों के भीतर काफी तेजी से इस इंडस्ट्री पर भी अपना प्रभाव छोड़ा. पहले जो चीजें छिपछिपा कर गैरकानूनी तरीके से डार्क साइड में चला करती थीं, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय तौर पर अब पहले की अपेक्षा सुसंगठित करने व नई पहचान देने में डिजिटलीकरण ने भारी योगदान दिया. ‘औनलाइन गेमिंग इन इंडिया 2021’ रिपोर्ट में बताया गया कि भारत का औनलाइन गेमिंग उद्योग जो 2016 में 29 करोड़ डौलर का था वह 2021 तक 1 अरब डौलर तक पहुंच जाएगा. और इस में 19 करोड़ गेम्स शामिल हो जाएंगे. इन यूजर्स में उन लोगों को शामिल किया गया है जो गेम के नाम पर जुआ खेल रहे हैं या फैंटेसी स्पोर्ट के नाम पर उन्हें खिलाया जा रहा है.

वर्ष 2013 में फिक्की ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह कहा था कि भारत में गेमिंग इंडस्ट्री से सरकार को लगभग 7,200 करोड़ रुपए का टैक्स प्राप्त होता है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितने बड़े स्केल पर आज चल रहा है. औनलाइन रम्मी का प्रचलन पिछले कुछ समय से बढ़ता ही जा रहा है. देश में औनलाइन रम्मी उद्योग के मौजूदा समय में करीब 5 करोड़ खिलाड़ी हैं. और लौकडाउन के दौरान घर में बैठे लोगों के बीच इस का प्रचलन और भी बढ़ा है. फरवरीमार्च में गेमिंग साइट्स और ऐप इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में 24 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस के प्रचलन बढ़ने के साथसाथ बात इस की सेफ्टी पर भी आ गई है. इस साल के अगस्त माह में हैदराबाद कमिश्नर औफ पुलिस और उन की टीम ने ऐसे ही एक बड़े औनलाइन गैंबलिंग घोटाले का भंडाफोड़ किया. पुलिस के अनुसार, पूरे प्रकरण में 1,100 करोड़ रुपए के लेनदेन की बात सामने आई. जिस में पुलिस का कहना था कि कई युवा इस गैंबल घोटाले में अपने लाखों रुपए गंवा चुके हैं. हैरानी वाली बात यह सामने आई कि पुलिस ने कई युवाओं के इस के चलते आत्महत्या करने की बात भी बताई.

ये भी पढ़ें- जुड़वा स्टार बहनें ‘चिंकी-मिंकी’

इन मसलों के बाद भारत में सट्टेबाजी और गैंबलिंग को ले कर एक नई बहस छिड़ गई है. यह बहस इसे पूरी तरह से वैधानिकता दिए जाने या इस पर सख्ती से पाबंदी लगाए जाने को ले कर है. इस पूरी बहस में 2 सवाल केंद्रबिंदु बन गए हैं. पहला, क्या इतने पुराने समय से चले आ रहे कानून को बदल कर गैंबलिंग को वैधानिक करने का समय आ गया है? दूसरा, सरकार अगर इस अपराध को रोक नहीं पा रही तो क्या इस के सामने घुटने टेक देना इस का समाधान है? हालांकि, भारत सरकार किसी प्रकार से औनलाइन सट्टेबाजी को ले कर किसी प्रकार का रोडमैप बनाने में फिलहाल असफल रही है, जिस के चलते औनलाइन चलने वाली गैंबलिंग काफी कंफ्यूजन से भरी हुई है. इसे टैक्निकल भाषा में ‘ग्रे एरिया’ कहा जा रहा है. यानी, जिस जगह पर ‘हां और ना’ या ‘काला और सफेद’ दोनों की स्थिति बनी हुई है. जैसा कि देखा सकता है कि एक तरफ कर्नाटक हाईकोर्ट पोकर गेम को ‘गेम और स्किल’ मान रही है, जबकि दूसरी तरफ गुजरात हाईकोर्ट ने इसे ‘गेम औफ चांस’ माना. स्किल-चांस की नैतिकता-अनैतिकता जुआ किसी भी समाज में कभी भी नैतिक तौर पर स्वीकृत नहीं रहा है.

सभ्यताओं के बनने से ही जुआ लोगों को लुभाते जरूर रहे हैं, चाहे इस के उदाहरण महाभारत में पाए गए हों या अन्य धार्मिक ग्रंथों में लेकिन जुए में ‘जर, जोरू और जमीन’ गंवाने की मिसाल सदियों से आज तक कायम है. महाभारत में जुए की लत को बहुत ही सरलता से दर्शाया गया. जब युधिष्ठिर, धर्मराज और सचाई के राजा, ने अपने भाइयों की संपत्ति और पत्नी द्रौपदी सहित सबकुछ जुए में खो दिया. कहने वाले कहते हैं, यही संपत्ति का विवाद आगे चल कर धर्मयुद्ध में कन्वर्ट हुआ, जिसे महाभारत कहा गया. जुआ किसी भी समाज में खेलने वालों के प्रति न्यायिक नहीं रहा. एक की हार से ही दूसरे की जीत संभव है.

हालांकि, इस की नकारात्मकता पर बाद में आया जाएगा लेकिन यह तय है कि यह नैतिक तौर पर समाज द्वारा कभी स्वीकृत नहीं हो पाया. फिर क्या यह प्रश्न बन सकता है कि इसे अब तक अवैध किए जाने के पीछे इस की अवांछनीयता रही है? जी हां, एक पल के लिए कानूनों के वैधअवैध ठहराए जाने में कुछ अपवादों को छोड़ कर 2 बातें देखी जा सकती हैं. पहली, हर अनैतिक कार्य अवैध नहीं. दूसरी, हर अवैध कार्य हो सकता है अनैतिक हो. मसलन, झूठ बोलना अनैतिक है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर मामले में अपराध हो.

जब तक किसी कृति का परिणाम अधिसंख्य लोगों को विपरीत प्रभावित न करे तब तक वह अपराध की श्रेणी में नहीं आता. फिर सवाल यह है कि औनलाइन चाहे औफलाइन गैंबलिंग तो यह बड़े हिस्से को प्रभावित करती है, खासकर इस की जकड़ में युवा अधिक संख्या में हैं, तो फिर वह बिंदु कहां छूट रहा है कि जहां राज्य कहे कि ‘अब बस, आप यह कार्य नहीं कर सकते.’ 2017 में सपोर्ट फैंटेसी ‘ड्रीम 11’ के एक प्लयेर वरुण गुम्बर, जो लगभग 50 हजार रुपए इस खेल (बैटिंग) में गंवा चुका था, ने फैसला किया कि इस मामले को ले कर वह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में शिकायत दर्ज कराएगा. वरुण ने अपनी पिटीशन में चैलेंज किया कि यह फैंटेसी लीग ‘गेम औफ स्किल’ नहीं है. जिस के बाद जस्टिस अमित रावल की सिंगल जज बैंच ने इस मामले को औब्जर्व करते हुए पाया कि इस में यूजर सपोर्ट की जानकारी के साथ ‘‘पिछले परफौर्मैंस, डाटा, प्लेयर की चल रही फौर्म के आधार पर इस में पैसे लगाता है. जिस के बाद निर्णय लिया गया कि यह ‘गेम औफ स्किल’ के भीतर आने वाली गतिविधि है, और वरुण की कंप्लेंट खारिज कर दी गई.

भारत में औनलाइन फैंटेसी के तौर पर चल रहे गेम्स के लिए यह बहुत बड़ी जीत और टर्निंग पौइंट था. यह पहला मामला था जब किसी कोर्ट ने इस तरह के फैंटेसी लीग वाले खेलों को गेम औफ स्किल में डाला. जिस के बाद ‘ड्रीम 11’ के कोफाउंडर और सीईओ हर्ष जैन ने सैल्फ रेगुलेटेड ‘इंडियन फैडरेशन औफ स्पोर्ट्स गेमिंग’ की इसी साल स्थापना की. इस समय ‘ड्रीम 11’ के लगभग साढ़े 4 करोड़ यूजर्स हैं, जिन में से 15 प्रतिशत यूजर्स पैसों के लिए खेलते हैं. यही यूजर्स हैं जो ड्रीम 11 के लिए रैवेन्यू जनरेट करते हैं.

ज यह कंपनी आईसीसी, द बिग बेश, कैरिबियन सुपर लीग, प्रो कबड्डी, एफआईएच इत्यादि की औफिशियल पार्टनर है. यहां तक कि यह देखा जा सकता है कि कंपनी को अपने प्रचार में एम एस धौनी को एंबैसडर बनाया गया जिस का स्लोगन ‘खेलो दिमाग से’ था. हालांकि, इस के बाद भी वरुण गुम्बर ने अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के लिए एप्रोच किया, जिस के बाद सितंबर माह में सुप्रीम कोर्ट के डिविजनल बैंच के जस्टिस रोहितो और जस्टिस संजय किशन कौल द्वारा इस पिटीशन को खारिज कर दिया गया. वैधअवैध के अपनेअपने तर्क में ‘ग्रे एरिया’ सट्टा बाजार, गैंबलिंग या जुआ को वैधअवैध किए जाने को ले कर काफी समय से बहस चली आ रही है. इस के पक्षविपक्ष में लगातार दलीलें दी जाती रही हैं. दोनों तरफ के लोगों की अपनीअपनी दलीलें हैं. इसे वैधानिक किए जाने वाले जानकारों का कहना है कि यूरोप के कई देशों में सट्टेबाजी के लिए कानून बदले जा चुके हैं. कई देशों ने तो इसे पूरी तरह वैधानिक कर दिया है, जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, कनाडा, इत्यादि. वहीं, कुछ देशों ने कुछ शर्तों के साथ अपने कुछ राज्यों को विशेष छूट दी.

ये भी पढ़ें- छालीवुड एक्ट्रेस : पति, प्रेमी और धोखा

उदाहरण के तौर पर यूएसए है जहां के ‘लास वेगास’ को जाना ही इसी के लिए जाता है.  इस के पक्ष में जो सब से बड़ा तर्क दिया जा रहा है वह अवैध तरीके से होने वाले इस धंधे की दो नंबरी कमाई है, जिस का कोई हिसाब सरकार के सामने नहीं आ पाता. वहीं, इस के अवैध होने के चलते, टैक्स के दायरे में नहीं आने से सरकार की आय का एक बड़ा स्रोत खत्म हो जाता है.

भारत समेत पूरी दुनिया में गैंबलिंग कारोबार (औनलाइन व औफलाइन) पहले ही काफी ज्यादा ग्रोथ पर था, लेकिन लौकडाउन के बाद इस में तेजी से उछाल आया है. आंकड़ों की मानें, तो भारत के 80 प्रतिशत युवा किसी भी रूप के गैंबलिंग में हर साल में कम से कम एक बार जुड़ जाते हैं. इस का पूरा बाजार लगभग 60 बिलियन डौलर का बताया जा रहा है. फिर ऐसे में सवाल इस की कमाई को ले कर होने लगे हैं, यह पैसा कहां लग रहा है, किसे फेसिलिटेट कर रहा है इत्यादि?  इस में एक तर्क इस के 150 साल पुराने हो चुके कानून को ले कर है. यह कहा जा रहा है कि जिन अंगरेजों ने यह कानून बनाया, उन्होंने इसे अपने देश में रैगुलेट कर लिया है.

साथ ही, यह भी कहा जा रहा है कि इस के रैगुलेट होने और वैधानिक किए जाने से इस पूरे प्रोसैस में पारदर्शिता आएगी. इस पर ईसिस्टम के जरिए नजर रखी जा सकती है और ट्रैक किया जा सकता है. इस में खेलने और खिलाने के लिए नियमावली रखी जाए. किंतु इस के विपक्ष में दी जाने वाली दलीलें भी कई हैं. सरकार अगर इस अपराध को रोकने में असफल है, तो इस कारण इसे लीगल किए जाने वाली दलीलें देश के संविधान पर नकारात्मक असर डालेंगी. संवैधानिक तौर पर इस से मिलतेजुलते अपराधों को भी लीगल करने की बात आएगी, जिन्हें सरकार रोक नहीं पा रही.

यही बात ड्रग्स को लीगल करने को ले कर कही जा रही है. वहीं इस के माध्यम से कालेधन को सफेद करने की वैधानिकता प्राप्त हो जाएगी, जिसे रोजगार कहा जा रहा है. तो फिर इस से कई युवा जुए की खराब लत के शिकार होंगे. ऐसे में क्राइम और सुसाइड की प्रवृत्ति में बढ़ोतरी होगी. इस से खेल की शुद्धता और सुचिता पर भारी खतरा होने की आशंका होगी. ऐसे ही स्पौट फिक्ंसिंग का उदाहरण हम आईपीएल में पीछे देख चुके हैं. 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस के लीगल-इललीगल पर बहस चली, जिस के बाद विधि आयोग को इस पर एग्जामिन कर अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया. यह तब जब लोडा कमेटी ने रिकमैंड किया कि बैटिंग को रैगुलेट किया जाना चाहिए. विधि आयोग ने इस पर अपना स्टैंड लेने के बजाय इसे ‘ग्रे एरिया’ में ही रख दिया, यानी इसे ‘इफ एंड बट’ वाली स्थिति पर छोड़ दिया. इस से होने वाले फायदे और नुकसान गिना कर रिपोर्ट सैंट्रल गवर्नमैंट को सौंप दी गई. फिक्की के स्टेक होल्डर ने भी इस पर अपनी राय रखी.

ऐसे में इस क्षेत्र में कमर्शियल पहलू हावी होने लगे हैं. देशीविदेशी कंपनियों का भी इस में बड़ा रोल देखने को मिल रहा है. चूंकि यह एक बड़ा व्यवसाय बन चुका है तो बड़े पूंजीपतियों और सरकार दोनों ही इस में अपने फायदे तलाश रहे हैं. जाहिर है, इस में बड़ा आरोप इस बात का लग रहा है कि बदलते स्वरूप में इस के वैधानिक होने की बहस का कारण बड़े पूंजीपतियों और कौर्पोरेटरों का संगठित तौर पर इस में मुनाफे के लिए कूद पड़ना है. कई लोगों का तर्क है कि यह गेमिंग के नाम पर चलाए जाने वाला मात्र जुआ है, जो कानून के लूप होल्स के साथ खेला जा रहा है. फिर इस के विपक्ष में एक तर्क यह भी है कि राज्य सरकार की भूमिका ऐसे मामलों में ‘गार्जियन स्टेट’ की होती है. स्टेट को देखना है कि उस की जनता के लिए यह कितना वांछनीय है अथवा कितना नहीं.

किसी भी कानून को लाने के लिए सरकार का उद्देश्य यह होता है कि वह कानून राज्यवासियों के लिए कितना उपयोगी है. खेलों में भारी सट्टेबाजी से यह जरूर है कि इस का खेलों पर प्रतिकूल ही असर पड़ेगा. 2013 आईपीएल मैचों के दौरान राजस्थान रौयल्स और सीएसके को 2 साल का बैन उठाना पड़ा है. वहीं उन के मालिकों राजकुंद्रा, मय्यापन, एन श्रीनिवासन पर खेल से दूर रहने की आजीवन पाबंदी लगा दी गई. एन श्रीनिवासन को तो अपनी बीसीसीआई की कुरसी तक गंवानी पड़ी, जिस ने खेल की सुचिता पर बड़े प्रश्न खड़े किए हैं. अनप्रोडक्टिव वर्क कल्चर को बढ़ावा जिस बिंदु की तरफ ज्यादातर लोगों का ध्यान नहीं जा रहा वह इस के अनप्रोडक्टिव वर्क कल्चर के बढ़ावा होने का है. समस्या यह है कि फिलहाल इसे नैतिकअनैतिक की बहस में उलझ कर रखा हुआ है. जबकि, इस तरह के काम किसी भी तरीके से प्रोडक्टिव नहीं हैं. ‘इस की टोपी, उस के सिर’ के बीच अपना कट लेती कंपनी के मुनाफे का यह सारा खेल सदियों से चल रहा है. ऐसे कामों में ज्यादातर मामले बरबाद होने के ही देखे गए हैं.  समस्या इस के गैरउत्पादन काम को ले कर है. समाज में हर तबका किसी न किसी तरीके से खुद के स्वार्थ को पूरा कर, समाज के हितों की पूर्ति करता है.

उदाहरण के तौर पर, फैक्ट्री में काम करने वाला मजदूर अगर कोई कमीज सिलता है तो उस से वह तनख्वाह पाता है, साथ ही, समाज के किसी व्यक्ति के लिए उत्पादन भी करता है. रोड बनाता है तो दिहाड़ी पाता है और समाज के चलने लायक रास्ता तैयार करता है. वहीं, कोई किसान खेती करता है तो खुद के हित के साथ समाज के हित भी पूरे करता है. इसी तौर पर सर्विस से जुड़े कामों में भी यही बात लागू होती है.  लेकिन जुए से जुड़ा धंधा किसी प्रकार से सामाजिक हितों की पूर्ति नहीं करता. यह प्रोडक्टिव वर्क भी नहीं है. रही बात टैक्स कमाने की, सरकार को ऐसे कामों के पीछे छिप कर टैक्स कमाने की मंशा खुद ही सवालिए निशाने पर ले जाती है.

कल को हवाला के पैसों से भी सरकार भारीभरकम टैक्स कमा सकती है. इस से समाज का नवयुवक तबका न सिर्फ जुए की फंतासी में फंस रहा है, बल्कि साथ ही संभवतया भविष्य में उस के वर्क कल्चर के हैबिट में नकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.  बिना मेहनत शौर्टकट पैसे कमाने की होड़ और उस से हुए नुकसान से क्रिमिनल ऐक्टिविटी में भी बढ़ावा होने का अंदेशा है. ऐसे कई उदाहरण हमारे आसपास देखने को मिल सकते हैं जब लोगों ने सट्टे, जुए के चक्कर में घर, संपत्ति तक गिरवी रखवा दिए. कानून में यह स्किल और चांस का मायाजाल जरूर बुना गया है लेकिन इसे खेलने वाले लोग भी और खिलाने वाले उद्योगपति भी बखूबी जानते होंगे कि वे क्या कर रहे हैं.

Web Series Review : सैंडविच फार एवर

रेटिंगःएक स्टार

निर्माताः इंद्राणी चैधरी

निर्देशकः रोहण सिप्पी

कलाकार- अतुल कुलकर्णी, लुबना सलीम, अहाना कुमरा, कुणाल राय कपूर, जाकिर हुसेन, दिव्या सेठ शाह

अवधि : 28 से 35 मिनट के पंद्रह एपीसोड

ओटीटी प्लेटफार्मः सोनी लिव

शादी के बाद पति व पत्नी की जिंदगी में दोनों के माता पिता की दखलअंदाजी के चलते किस तरह के हास्य के दृश्य पैदा हो सकते है. उसी पर निर्देशक रोहण सिप्पी हास्य प्रधान वेब सीरीज ‘‘सैंडविच फार एवर’ लेकर आए हैं, जो कि आज यानी 25 दिसंबर से स्ट्रीम हो रही है.

कहानीः 

कहानी मुंबई में रह रहे समीर (कुणाल राय कपूर) व नैना (अहना कुमरा) की है, जो कि एक दूसरे से प्रेम करते हैं और अपने माता पिता की रजामंदी से विवाह के बंधन में बंध जाते हैं. नैना के पिता वी के सरनाइक (अतुल कुलकर्णी) कभी सेना में थे, अब अवकाश प्राप्त कर चुके हैं. उनकी मां मंजरी ज्योतिषी (लुबना सली) हैं.जबकि समीर के माता पिता कानपुर में रहते हैं. समीर के पिता डा. गिरजा शास्त्री (जाकिर हुसेन ) अवकाश प्राप्त कर चुके हैं. और उन्हे साठ हजार रूपए पेंशन मिलती है. जबकि समीर की मां संयुक्ता (दिव्या सेठ शाह) हैं. संयुक्ता और डा. गिरजा के बीच हमेशा अनबन बनी रहती है.

ये भी पढ़ें- Yeh Rishta Kya Kehlata hai : क्या नायरा की मौत हो जाएगी ?

sandwich

जब वी के सरनाइक को पता चलता है कि उनकी बेटी समीर उससे विवाह करना चाहती है, तो वह समीर को घर पर मिलने बुलाते हैं. समीर बताता है कि वह किराए के मकान में रहते हैं और उनके माता पिता कानपुर मे रहते हैं. होली व दिवाली के अवसर पर दो चार दिन के लिए वह मुंबई आते हैं. उसके पास कोई नौकरी नहीं है. वह वीडियो गेम डेवलपर है. अपनी बेटी नैना की खुशी के लिए वी के सरनाइक अपने पड़ोसी का घर उनके लिए खरीद देते हैं. पर तभी समीर के माता पिता मुंबई आ जाते हैं. और ऐलान कर देते हैं कि वह अपने बेटे समीर व बहू नैना के ही साथ मुंबई मे रहेंगें. पर समीर व नैना दोनों ऐसा नहीं चाहते. तब वी के सरनाइक समीर के माता पिता के लिए भी अपने दूसरे पड़ोसी का फ्लैट खरीदवा देते हैं. इसके बाद हर एपीसोड में समीर व नैना के माता पिता उनकी बेहतरी के लिए कुछ न कुछ करते हैं, जो कि उन्हे पसंद नहीं आता है और हास्य के क्षण पैदा होते हैं.

मसलन, शादी के बाद समीर की मां व नैना के पिता द्वारा उनके घर के लिए फर्नीचर खरीदकर लाना, हनीमून के लिए शिमला जाने के कार्यक्रम में रोड़ा, रद्द, समीर के हाथ से नैना की जीत हुई बैंडमिंटन ट्राफी का टूटना, समीर के पापा का सियापा, डा.गिरजा वी के सरनाइक का शराब पीना और दोष समीर पर लगना, समीर व नैना द्वारा घर काम के लिए पंद्रह हजार रूपए पर कमला को नौकरानी रखना, समीर का नैना के जन्मदिन पर उपहार न लाना, जैसे घटनाक्रमों के माध्मय से हर एपीसोड में हास्य के क्षण पैदा होते हैं.

लेखन व निर्देशन

हास्य के नाम पर घटिया लेखन की मिसाल है यह सिअकाम वाली वेब सीरीज. इसका एक भी दृष्य हंसाने में कामयाब नही होता. पर फूहड़ता परोसी गयी है.किसी भी एपीसोड का एक भी दृष्य ऐसा नही हैं, जिसे देखकर दर्शक को हंसी आए या उसके चेहरे पर स्निग्ध मुस्कान आ जाए. मगर हर एपीसोड में पृष्ठभूमि में हंसी के फव्वारे व अविश्सनीय दृश्यों को भरकर दर्शकों को हंसाने का असफल प्रयास किया गया है. हर एपीसोड को पांच सात मिनट के बेतरतीब तरीके के छोटे छोटे कामेडी स्टिक में बांटा गया है. हर कलाकार मूखर्तापूर्ण हरकतें करते हुए हंसाने का असफल प्रयास करता रहता है. समीर बेवजह सेक्सी हरकतें करता रहता है. फूहड़ता की सारी हदें हर किरदार पार करता नजर आता है. अफसोस लेखक व निर्देशक ने इस वेब सीरीज के संग कई बेहतरीन कलाकारों को जोड़ा, मगर लेखक व निर्देशक उनका सही उपयोग नही कर पाए.

ये भी पढ़ें- क्या कंगना रनौत को मिल रही हैं रेप की धमकियां, देखें ये वीडियो

अभिनय

कुणाल राय कपूर ने महज अपने आपको इसमें दोहराया है. उनके अभिनय में कोई नवीनता नहीं है. पता नहीं क्यों उन्हे गलत फहमी है कि लोग उनकी उटपटांग व सेक्सी हरकते करते हुए देखना चाहते हैं. नैना के किरदार में अहना कुमरा महज सेक्सी व सुंदर नजर आयी हैं. जबकि उनमें अभिनय प्रतिभा की कमी नही है, मगर वह पता नही क्यों अपनी अभिनय प्रतिभा की बनिस्बत अपनी सेक्सी अदाओं व कम वस्त्र पहनने को ही अहमियत देती हैं. वी के सरनाइक के किरदार में प्रतिभाशाली अभिनेता अतुल कुलकर्णी को देखकर समझ में नहीं आता कि उन्होंने इस वेब सीरीज से जुड़ने का फैसला क्यों किया ? जिन दर्शकों ने कुछ समय पहले वेब सीरीज ‘बंदिश बैंडिट’ में अतुल कुलकर्णी को देखकार उनके अभिनय के कसीदे पढ़ते हुए नहीं थक रहे थे, वह यकीन नही कर पा रहे हैं कि उन्ही अतुल कुलकर्णी ने ऐसा फूहड़ अभिनय किया है. मंजरी के किरदार में लुबना सलीम के हिस्से भी फूहड़ व अविश्वसनीय दृस्य ही आए हैं.

ये भी पढ़ें- एक्स मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर का हौट अंदाज देखकर फैंस हुए दीवाने

Bhojpuri Top Song 2020 – खेसारी लाल यादव के इन भोजपुरी गानों ने खूब मचाया धमाल, देखें Video

भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव के गाने इस साल खूब धमाल मचाया. खेसारी लाल यादव के कई गाने लगातार यूट्यूब पर रिलीज किए गए.

इन गानों में ‘लहंगा लखनऊआ’ से लेकर ‘रेड लिपस्टिक’ को फैंस ने खूब पसंद किया. खेसारी लाल यादव के  गानों की धूम इस साल दर्शकों के बीच देखने को मिली.

तो ऐसे में आपको खेसारी लाल यादव के कुछ मशहूर गानों की वीडियो दिखाते हैं.

खेसारी लाल यादव के टौप गानें-

‘कमर लोड सही ना’

इस गाने में ‘कमर लोड सही ना’ खेसारी लाल यादव के साथ काजल रघवानी नजर आ रही है. इस गाने को दर्शकों ने काफी पसंद किया है.

‘लड़की पटाना”

खेसारी लाल यादव का फेमस भोजपुरी गाना ‘लड़की पटाना’ का निर्देशन दीपेश गोयल ने किया है. अब तक इस गाने को यूट्यूब पर करोड़ों से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके है.

‘रेड लिपस्टिक’

खेसारी लाल यादव का हिट भोजपुरी वीडियो सौन्ग ‘रेड लिपस्टिक’ में खेसारी लाल यादव के साथ खुश्बु तिवारी मजर आ रही है. गाने में इन दोनों की जबरदस्त केमेस्ट्री नजर आ रही है.

‘जा जा जान भुला जइह’

यह भोजपुरी गाना ‘जा जा जान भुला जइह’ खेसारी लाल यादव की आवाज में दर्शकों का दिल जीत लेती है. इस गाने को भी दर्शको ने खूब पसंद किया है.

Yeh Rishta Kya Kehlata hai : क्या नायरा की मौत हो जाएगी ?

स्टार प्लस (Star Plus) का मशहूर शो ‘ये रिश्‍ता क्‍या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) में हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. जिससे दर्शकों का भरपूर एंटरटेनमेंट हो रहा है. अब इस सीरियल में दर्शकों को धमाकेदार ट्विस्ट देखने को मिलने वाला है.

इस शो के मेकर्श ने एक प्रोमो जारी किया है. प्रोमो के अनुसार शो में नायरा (Nayra) की मौत होने वाली है. जिससे उसके पति कार्तिक (Kartik) को जबरदस्त झटका लगने वाला है.

ये भी पढ़ें- फैंस ने Shehnaaz Gill और Siddharth Shukla को लेकर किए लाखों ट्वीट, टौप ट्रेंड में रहा ये हैशटैग

शो के प्रोमो के अनुसार इस वीडियो में कार्तिक सफेद कपड़ो में, नायरा की मौत के बाद उसका अंतिम क्रिया करते दिखाई दे रहा है. कार्तिक इस वीडियो में ये कहते हुए नजर आ रहा है कि ‘सब कुछ तुमने सिखाया था, पर अकेले रहना कौन सिखाएगा.’

 

View this post on Instagram

 

A post shared by StarPlus (@starplus)

 

दरअसल ‘स्‍टार प्‍लस’ के औफसियल इंस्‍टाग्राम अकाउंट से ये प्रोमो वीडियो जारी किया गया है. इस प्रोमो के कैप्शन में ये लिखा गया है कि ‘कार्तिक को कहनी होगी, जिंदगी की सबसे मुश्‍क‍िल अलविदा! क्‍या रह पाएगा वो, हो कर नायरा से जुदा?

अब तो इस शो के अपकमिंग एपिसोड में ही पता चलेगा कि क्या वाकई नायरा का सफर खत्म हो जाएगा या शो में कोई महाट्विस्ट होने वाला है.

ये भी पढ़ें- क्या Hrithik Roshan की एक्स वाइफ सुजैन हुई गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला

शो में  नायरा की मौत से फैंस को जबरदस्त झटका लगने वाला है. शो के प्रोमो से इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि नायरा यानी शिवांगी जोशी का किरदार खत्म होने वाला है.

Crime Story: प्रेमिका की बली- भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

दिनेश तो शर्म से सिर झुका कर वहां से उसी समय चला गया किंतु लक्ष्मी देवी ने सरोज को खूब खरीखोटी सुनाई. शाम को अजय घर आया तो लक्ष्मी ने बेटे को सारी बात बताई और धैर्य से काम लेने की सलाह दी.

अजय कुमार जान गया कि दिनेश उस के मायके का यार है और शादी से पूर्व ही उस के संबंध हैं. इसलिए दिनेश रिश्ते की आड़ में सरोज से मौजमस्ती करने आता है.

पत्नी की यारी की जानकारी अजय को हुई तो उस ने सरोज से जवाबतलब किया. सरोज जान गई थी कि झूठ बोलने से लाभ नहीं है. अत: उस ने सच बोल दिया, ‘‘दिनेश से मेरी शादी से पहले की दोस्ती है. उस में पता नहीं ऐसा क्या है कि न चाहते हुए भी मैं बहक जाती हूं. अब मैं ने उस से रिश्ता तोड़ लिया है. वादा करती हूं कि आइंदा उस से संबंध नहीं रखूंगी.’’

अजय ने सरोज को जमाने की ऊंचनीच तथा पत्नी धर्म का पाठ पढ़ाया. उस ने उसे इस शर्त पर माफ किया कि भविष्य में वह दिनेश से संबंध न रखेगी.

इस के बाद सरोज ने दिनेश से बात करनी बंद कर दी, तो दिनेश छटपटा उठा. सरोज उस से जितना दूर भागती, दिनेश उस के उतना ही नजदीक आने की कोशिश करता. इस के बावजूद सरोज ने दिनेश को भाव नहीं दिया तो वह उसे बदनाम करने की धमकी देने लगा.

ये भी पढ़ें- बच्चे के लिए बच्ची की बली

सरोज ने ये बातें पति अजय को बताईं. अजय ने इस समस्या से निपटने के लिए अपने रिश्तेदार सूरज, नीरज व लवकुश से बात की. ये तीनों बंथरा थाने के खसरवारा गांव के रहने वाले थे. इज्जत बचाए रखने के लिए उन्हें एक ही उपाय सूझा कि दिनेश की हत्या कर दी जाए. इस के लिए उन पांचों ने मिल कर योजना भी बना ली.

योजना के तहत 23 सितंबर, 2020 की शाम 4 बजे सरोज ने दिनेश को फोन किया कि वह घर में अकेली है, अत: वह आ जाए. रात उन दोनों की है.

प्रेमिका की बात सुन कर दिनेश की खुशी का ठिकाना न रहा. उस ने ट्रैक्टर ठेकेदार के हवाले किया और सरोज की ससुराल संभरखेड़ा पहुंच गया. घर के अंदर दाखिल होते ही सरोज ने दरवाजा बंद कर लिया. नीरज, सूरज, लवकुश व अजय घर में पहले से छिपे हुए थे. उन्होंने एकदम से हमला कर दिनेश को दबोच लिया.

इस के बाद उन्होंने उसे जम कर पीटा. वह किसी तरह चंगुल से छूट कर दरवाजे की ओर भागा तो अजय ने पीछे से उस के सिर पर लोहे की रौड से प्रहार कर दिया, वह जमीन पर बिछ गया. फिर उन सब ने रस्सी से गला घोंट कर उस की हत्या कर दी.

हत्या करने के बाद उन लोगों ने दिनेश की जामातलाशी ली और जो भी सामान मिला वह अपने कब्जे में कर लिया. इस के बाद शव को रात के अंधेरे में बंथरा थाने के रायगढ़ी के पास सड़क पर फेंक दिया, ताकि लगे कि एक्सीडेंट हुआ है. इस के बाद वे सब फरार हो गए. दूसरे रोज थाना बंथरा पुलिस ने शव बरामद किया और शिनाख्त न होने पर पोस्टमार्टम के लिए उन्नाव के अस्पताल में भेज दिया.

इधर देर रात तक दिनेश घर वापस नहीं आया तो उस के पिता शिवबालक को चिंता हुई. जब 3 दिनों तक उस का कुछ भी पता नहीं चला तो वह उन्नाव कोतवाली पहुंचा और बेटे की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

चौथे दिन उसे बंथरा थाने से अज्ञात लाश की सूचना मिली. तब वह पत्नी और बेटी के साथ बंथरा थाने पहुंचा और कपड़ों तथा फोटो से शव की शिनाख्त अपने बेटे दिनेश के रूप में की.

चूंकि उन्नाव कोतवाली में दिनेश की गुमशुदगी दर्ज थी, अत: कोतवाल दिनेशचंद्र मिश्र ने मामले को भादंवि की धारा 302/201 के तहत दर्ज कर लिया.

इधर जब कई दिनों तक हत्या का राज नहीं खुला, तो शिवबालक एसपी आनंद कुलकर्णी से मिला और हत्या का परदाफाश करने की गुहार लगाई. इस पर आनंद कुलकर्णी ने एएसपी विनोद कुमार पांडेय की अगुवाई में एक टीम गठित कर दी.

इस टीम ने मृतक के पिता शिवबालक से पूछताछ की तो उस ने हत्या का संदेह पड़ोसी रामनाथ की बेटी सरोज और उस के पति अजय कुमार पर व्यक्त किया.

ये भी पढ़ें- बच्चे के लिए बच्ची की बली- भाग 1

संदेह के आधार पर पुलिस टीम ने सरोज व अजय को उन के घर संभरखेड़ा से हिरासत में लिया और थाने ला कर उन से सख्ती पूछताछ की तो दोनों टूट गए और दिनेश की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

अजय ने बताया कि दिनेश के नाजायज संबंध उस की पत्नी से थे. इज्जत के लिए उस ने अपने रिश्तेदार सूरज, नीरज, लवकुश की मदद से दिनेश की हत्या कर दी थी. 11 अक्तूबर, 2020 को पुलिस ने नाटकीय ढंग से उन्नाव बाईपास के एक ढाबे से नीरज, सूरज व लवकुश को भी गिरफ्तार कर लिया.

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने आलाकत्ल रौड और रस्सी बरामद कर ली. इस के अलावा मृतक का पर्स, आधार कार्ड, चप्पल तथा वोटर आईडी कार्ड भी बरामद कर लिया. 12 अक्तूबर, 2020 को उन्नाव कोतवाली पुलिस ने सभी आरोपियों को उन्नाव कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: प्रेमिका की बली- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

उसके लिए सरोज वह सब कुछ थी, जिस की कामना हर युवा करता है. लेकिन सरोज के दिल में उस के लिए कोई जगह नहीं थी. उस के दिल में तो कोई और ही बसा था. सरोज का तन भले ही अजय कुमार को मिल गया था, पर मन तो दिनेश का ही था.

अजय कुमार कैसा भी था, इस से सरोज को कोई मतलब नहीं था. शादी के बाद लड़कियां ससुराल आ क र एकदो दिन भले ही उदास रहें, लेकिन यदि उन्हें ससुराल वालों और पति का प्यार मिले तो वे खुश रहने लगती हैं. लेकिन सरोज के चेहरे पर मुसकराहट 2 सप्ताह बीत जाने के बाद भी नहीं आई थी. इस का कारण यह था कि वह पल भर के लिए भी दिनेश को नहीं भुला सकी थी.

सरोज ससुराल में महीने भर रही. लेकिन उस के चेहरे पर कभी मुसकराहट नहीं आई. ससुराल वालों ने तो सोचा कि पहली बार मांबाप को छोड़ कर आई है, इसलिए उदास रहती होगी. पर अजय कुमार पत्नी की उदासी से बेचैन और परेशान था. वह उसे खुश रखने, उस के चेहरे पर मुसकान लाने की हरसंभव कोशिश करता रहा, लेकिन सरोज के चेहरे पर मुसकान नहीं आई.

होली के 8 दिन पहले सरोज ससुराल से मायके आ गई. जिस दिन वह मायके आई, उसी शाम वह दिनेश से मिली. सरोज के मांबाप बेटी का विवाह कर के निश्चिंत हो चुके थे, इसलिए उन्होंने सरोज पर रोकटोक नहीं लगाई थी. लिहाजा सरोज का मिलन दिनेश से पुन: शुरू हो गया.

इस के बाद तो यह सिलसिला ही शुरू हो गया. सरोज मायके में होती तो उस का मिलन दिनेश से होता रहता, ससुराल चली जाती तो मिलन बंद हो जाता. ससुराल में रहते वह मोबाइल फोन पर दिनेश से चोरीछिपे बात करती थी.

यह मोबाइल फोन दिनेश ने ही उस के जन्मदिन पर उपहार में दिया था. उस ने पति से झूठ बोला था कि फोन मायके वालों ने दिया है. जब मोबाइल फोन का बैलेंस खत्म हो जाता तो दिनेश ही उसे रिचार्ज कराता था.

एक दिन मोबाइल फोन पर बतियाते दिनेश ने कहा, ‘‘सरोज, जब तुम ससुराल चली जाती हो तो यहां मेरा मन नहीं लगता. रात में नींद भी नहीं आती और तुम्हारे बारे में ही सोचता रहता हूं. मिलन का कोई ऐसा रास्ता निकालो कि तुम्हारी ससुराल आ सकूं.’’

‘‘तुम किसी रोज मेरी ससुराल आओ. मैं कोई रास्ता निकालती हूं.’’ सरोज ने उसे भरोसा दिया.

सरोज से बात किए दिनेश को अभी हफ्ता भी नहीं बीता था कि एक रोज वह उस की ससुराल संभरखेड़ा जा पहुंचा. सरोज ने सब से पहले दिनेश का परिचय अपनी सास लक्ष्मी देवी से कराया, ‘‘मम्मी, यह दिनेश है. मेरा पड़ोसी है. रिश्ते में मेरा भाई लगता है. किसी काम से सोहरामऊ आया था, सो हालचाल लेने घर आ गया.’’

ये भी पढ़ें- धर्म परिवर्तन की एक गोली

‘‘अच्छा किया बेटा, जो तुम हालचाल लेने आ गए.’’ फिर वह सरोज की तरफ मुखातिब हुई, ‘‘बहू, भाई आया है तो उस की खातिरदारी करो. मेरी बदनामी न होने पाए.’’

‘‘ठीक है, मम्मी.’’ कह कर सरोज दिनेश को कमरे में ले गई. इस के बाद दोनों कमरे में कैद हो गए. कुछ देर बाद वे कमरे से बाहर आए तो दोनों खुश थे. शाम को सरोज का पति अजय कुमार घर आया तो सरोज ने पति से भी उस का परिचय करा दिया. अजय ने भी उस की खूब खातिरदारी की.

सरोज की ससुराल जाने का रास्ता खुला, तो दिनेश अकसर उस की ससुराल जाने लगा. लक्ष्मी देवी टोकाटाकी न करें, इस के लिए वह उन की मनपसंद चीजें ले आता. घर वापसी के समय वह उन के पैर छू कर 100-50 रुपए भी हाथ पर रख देता. जिसे वह नानुकुर के बाद रख लेती.

शाम को वह सरोज के पति अजय के साथ भी पार्टी करता और खर्च स्वयं उठाता. इस तरह उस के आने से मांबेटे दोनों खुश होते. लेकिन दिनेश घर क्यों आता है, वह घर में क्या गुल खिला रहा है, इस ओर उन का ध्यान नहीं गया.

ये भी पढ़ें- बर्दाश्त की हद – भाग 1

दिनेश का आनाजाना जरूरत से ज्यादा बढ़ा तो सरोज की सास लक्ष्मी देवी को उन के रिश्तों पर कुछ शक हुआ. कारण यह था कि दिनेश जब भी आता बंद कमरे में ही बहू से बात करता. वह सोचती कि यह कैसा रिश्ता है, जो भाईबहन सामने बैठ कर बात करने के बजाय बंद कमरे में बात करते हैं. जरूर दाल में कुछ काला है.

शक गहराया तो वह दोनों पर नजर रखने लगीं. एक रोज दिनेश आया तो लक्ष्मी देवी जानबूझ कर घर के बाहर चली गईं. कुछ देर बाद लौटीं तो उन्होंने बहू सरोज को दिनेश के साथ बिस्तर पर देख लिया.

Crime Story: प्रेमिका की बली- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

20वर्षीया सरोज दिखने में जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही चंचल व महत्त्वाकांक्षी भी थी. जो उसे देखता था, अपने आप उस की तरफ खिंचा चला जाता था. गांव के कई युवक उस का सामीप्य पाने को लालायित रहते थे. लेकिन सरोज किसी को भाव नहीं देती थी. वह जिस युवक की ओर आकर्षित थी, वह उस के बचपन का दोस्त दिनेश था.

सरोज के पिता रामनाथ उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के गांव संभरखेड़ा के रहने वाले थे. उन की गिनती गांव के संपन्न किसानों में होती थी. उन का गांव उन्नाव शहर की सीमा पर स्थित था, सो वह अपने खेतों में सब्जियां उगा कर शहर में बेचते थे. इस काम में उन्हें अच्छी कमाई होती थी.

रामनाथ के घर के पास शिवबालक रहता था. वह दूध का धंधा करता था. दोनों एक ही जाति के थे. दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी. दोनों के परिवार के हर सदस्य का एकदूसरे के घर आनाजाना बना रहता था.

शिवबालक की माली हालत रामनाथ की अपेक्षा कमजोर थी. उसे जब कभी रुपयों की जरूरत होती, वह रामनाथ से मांग लेता था. शिवबालक का बेटा दिनेश था. वह ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था. पर उस ने ड्राइविंग सीख ली थी और ट्रैक्टर चलाता था.

शिवबालक का बेटा दिनेश और रामनाथ की बेटी सरोज हमउम्र थे. दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना बेरोकटोक था. दोनों बचपन के दोस्त थे, सो उन की खूब पटती थी. दोनों घंटों बतियाते थे और खूब हंसीठिठोली करते थे. उन की बातचीत और हंसीठिठोली पर घर वालों को भी ऐतराज नहीं था, क्योंकि पड़ोसी होने के नाते उन दोनों का रिश्ता भाईबहन का था. लेकिन उन दोनों की बचपन की दोस्ती कब प्यार में बदल गई, उन्हें पता ही नहीं चला.

जैसेजैसे समय बीत रहा था, वैसेवैसे उन के प्यार का रंग भी गहराता जा रहा था. सरोज स्कूल जाने के बहाने घर से निकलती और तय स्थान पर पहुंच जाती दिनेश के पास. फिर दिनेश उसे ले कर घुमाने के लिए निकल जाता था. दोनों के बीच चाहत बढ़ी तो उन के मन में शारीरिक मिलन की इच्छा भी होने लगी.

आखिर एक दिन ऐसा भी आया जब दोनों मर्यादा भुला बैठे और उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. इस के बाद उन्हें घरबाहर जहां भी मौका मिलता, मिलन कर लेते.

इश्क में दोनों इतने अंधे हो गए थे कि उन्हें घरपरिवार की इज्जत का खयाल ही नहीं रहा. लेकिन एक दिन उन के इश्क का भांडा उस समय फूट गया, जब सरोज की मां पुष्पा ने उन्हें रंगेहाथों पकड़ लिया.

पुष्पा ने सरोज और दिनेश के नाजायज रिश्तों की जानकारी पति को दी, तो रामनाथ का खून खौल उठा. गुस्से में उस ने सरोज को पीटा तथा दिनेश को भी फटकार लगाई.

ये भी पढ़ें- रिश्वतखोरी की दुकान में जान की कीमत

चूंकि मामला काफी नाजुक था, अत: पतिपत्नी ने सरोज को काफी समझाया. उन्होंने उसे अपनी मानमर्यादा के बारे में सचेत किया. लेकिन दिनेश के प्यार में आकंठ डूबी सरोज पर उन की किसी बात का असर नहीं हुआ.

बेटी पर समझाने का असर न होता देख रामनाथ और पुष्पा परेशान हो गए. तब उन्होंने अपने घर दिनेश के आने की पाबंदी लगा दी. सरोज का भी घर से बाहर जाना बंद करा दिया.

अब रामनाथ और पड़ोसी शिवबालक की दोस्ती में भी दरार आ गई थी. रामनाथ ने शिवबालक को धमकी दी कि वह अपने बेटे दिनेश को समझा दे कि वह उस की बेटी सरोज से दूर रहे. अगर उस ने उस की इज्जत से खेलने की कोेशिश की तो अच्छा नहीं होगा. अपनी इज्जत की खातिर वह किसी भी हद तक जा सकता है.

कहते हैं, इश्क अंधा होता है. दिनेश और सरोज भी इश्क में अंधे थे. यही कारण था कि परिवार की सख्तियों के बावजूद उन के प्यार में कोई कमी नहीं आई थी. हालांकि उन की मुश्किलें अब पहले से ज्यादा बढ़ गई थीं और उन के मिलने में बाधा भी पड़ने लगी थी. लेकिन वे सावधानीपूर्वक किसी न किसी बहाने मिल ही लेते थे.

इधर बेटी के कदम बहके तो रामनाथ को उस के ब्याह की चिंता सताने लगी. उस ने सोचा, सरोज अगर उस की पीठ में इज्जत का छुरा घोंप कर दिनेश के साथ भाग गई तो बड़ी बदनामी होगी. वह कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचेगा. इसलिए बेहतर होगा कि वह सरोज के हाथ जल्द से जल्द पीले कर दे.

रामनाथ ने बेटी के लिए रिश्ता खोजना शुरू किया तो उसे अजय कुमार पसंद आ गया. अजय कुमार के पिता रामऔतार उन्नाव जिले के महनोरा गांव में रहते थे. अजय कुमार उन का एकलौता बेटा था. वह सोहरामऊ में एक कपड़े की दुकान पर काम करता था, इसलिए रामनाथ ने अपनी बेटी सरोज के लिए उसे पसंद कर लिया था.

सारी औपचारिकताएं पूरी कर सरोज और अजय कुमार के विवाह की तारीख तय कर दी थी.

ये भी पढ़ें- प्यार की चाहत में

दिनेश को जब सरोज का विवाह तय होने की बात का पता चली तो वह बेचैन हो उठा. सरोज ने प्यार उस से किया था और अब विवाह किसी और से करने जा रही थी. एक दिन सरोज उसे एकांत में मिली तो वह बोला, ‘‘सरोज, जब तुम्हें किसी और से विवाह रचाना था, तो तुम ने मुझ से प्यार का नाटक क्यों किया?’’

‘‘दिनेश, यह शादी मैं अपनी मरजी से नहीं कर रही हूं. घर वालों ने शादी तय कर दी है, तो करनी ही पड़ेगी. उन का विरोध तो मैं कर नहीं सकती. लेकिन मैं आज भी तुम्हारी हूं और कल भी रहूंगी. तुम से अब मुझे कोई भी अलग नहीं कर सकता, यह विवाह भी नहीं.’’ सरोज ने उदास हो कर कहा.

3 फरवरी, 2017 को अजय कुमार के साथ सरोज का विवाह धूमधाम से हो गया. सरोज विदा हो कर ससुराल आ गई. सरोज जैसी खूबसूरत पत्नी पा कर अजय खुद को खुशनसीब समझ रहा था.

प्रेमिका की बली

भोजपुरी क्वीन रानी चटर्जी का ये डांस वीडियो हुआ वायरल, फैंस ने की जमकर तारीफ

भोजपुरी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) का नया गाना ‘झार झार के’ सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. फैंस इस गाने को खूब पसंद कर रहे है.

इस वीडियो में रानी शानदार डांस करती नजर आ रही हैं. इस गाने में उनका बोल्ड अंदाज देखने को मिल रहा है. फैंस एक्ट्रेस की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

रानी चटर्जी इस वीडियो में काफी खूबसूरत नजर आ रही है. रानी डांस करते हुए काफी खूबसूरत लग रही हैं. इस गाने को काफी ज्यादा व्यूज मिल रहे हैं. ये गाना भोजपुरी फिल्म ‘परिवार के बाबू’ का है.

ये भी पढ़ें- भोजपुरी एक्ट्रेस Prachi Singh का हौट अंदाज देखकर फैंस ने दिया ये रिएक्शन

बता दें कि यह गाना खुद रानी चटर्जी ने गाया है. रानी ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर कर दी थी. इस पोस्ट के कैप्शन में रानी ने लिखा, ‘मेरा नया गाना (जा झार के) रिलीज हो गया है.

 

कुछ दिन पहले ही रानी चटर्जी ने सोशल मीडिया पर एक  वीडियो शेयर किया था. भोजपुरी एक्ट्रेस ने इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर शेयर किया था. रानी ने फिल्म ‘दिल तो पागल है’ (Dil To Pagal Hai) के ‘प्यार कर’ गाने पर डांस करते हुई नजर आ रही थीं.

ये भी पढ़ें- आगे बढ़ने के लिए अलग काम करने की आदत डालनी होगी- निशा दुबे

तो वहीं  सोशल मीडिया पर एक यूजर ने रानी चटर्जी के वीडियो के लिए लिखा,  तुम्हारे हर वीडियो में एक अलग ही अंदाज देखने को मिलता है.

फैंस ने Shehnaaz Gill और Siddharth Shukla को लेकर किए लाखों ट्वीट, टौप ट्रेंड में रहा ये हैशटैग

‘बिग बौस 13’ (Bigg Boss 13) में सिडनाज की जोड़ी तो आपको याद ही होगी. शो में इस जोड़ी ने दर्शकों का खूब दिल जीता. और आज भी यह जोड़ी दर्शकों के दिल पर राज करती है.

बिग बौस 13 में शहनाज गिल के कई डायलौग तो काफी मशहूर हुए. जिसमें ‘त्वाड्डा कुत्ता टामी, साड्डा कुत्ता कुत्ता’ है. इस पर तो गाना भी वायरल हो रहा है.  शो के दौरान शहनाज गिल और सिद्धार्थ शुक्ला की जोड़ी काफी चर्चे में रही.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Shehnaaz Gill (@shehnaazgill)

 

बिग बौस 13 खत्म होने के बाद भी दर्शक इन दोनों को साथ में देखने के लिए बेसब्री से इंतजार करते हैं. सोशल मीडिया पर फैंस दोनों को SidNaaz के नाम से जानते हैं. फैंस ने इस ‘कपल’ को लेकर सोशल मीडिया पर लाखों ट्वीट्स किए हैं.

ये भी पढ़ें- सपना चौधरी ने हरियाणवी गानों को घरघर पहुंचाया- शिवा दहिया

आपको बता दें कि कई बार इनसे जुड़े हैशटैग  टौप ट्रेंड में रहा है. हाल ही में शहनाज गिल ने खुद, अपने और सिद्धार्थ से जुड़े टौप हैशटैग्स शेयर किया है. शहनाज ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में 42 रिकौर्ड हैशटैग शेयर किया है. इस हैशटैग्स पर फैंस ने उनके लिए लाखों ट्वीट कर चुके हैं.

सिद्धार्थ और शहनाज से जुड़े हैशटैग है- #DestinedSidNaaz , #SidNaazShines,  #DilSeSidNaaz, #SidNaazOurSoul, #BhulaDungaFtSidNaaz, #SidNaazBrokeInternet, #WeMissOurSidNaaz, #FansDemandSidNaazShow. शहनाज ने इन हैशटैग सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो इस साल टौप ट्रेंड में रहा है.

सिद्धार्थ और शहनाज की वर्क फ्रंट की बात करें तो बिग बौस से बाहर आने के बाद दोनों कुछ सौन्ग वीडियोज में साथ नजर आए हैं।. इनमें टोनी कक्कड़ (Tony Kakkar) का ‘शोना शोना’ भी शामिल है. दोनों के इन वीडियोज को लोगों ने काफी पंसद किया है.

ये भी पढ़ें- ताहिर राज भसीन ने इस फिल्म की शूटिंग को कहा, ‘क्रिसमस के त्यौहार का जश्न’

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें