लैटर बौक्स: प्यार और यौवन का खत भाग 2

छवि ने शायद मेरी आवाज का भारीपन महसूस किया. उस की आंखों में आश्चर्य के भाव प्रकट हो गए, फिर अचानक ही हंस पड़ी, ‘‘अच्छा, आप क्या लिखते हैं?’’ उस ने बहुत चालाकी से एक असहज करने वाले विषय को टाल दिया था.

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साहित्य पर चर्चा चल रही थी. तभी नेहा चाय, बिस्कुट और नमकीन ले कर आ गई. चाय पीते हुए कई विषयों पर चर्चा चली. छवि  एक बुद्धिमान और जिज्ञासु लड़की थी. उस का सामान्यज्ञान भी काफी अच्छा था. जब खुल कर बातें हुईं तो नेहा के मन से छवि के प्रति पूर्वाग्रह समाप्त हो गया.

छवि अपनी गरमी की छुट्टियां मुंबई में बिताने वाली थी. उस की दीदी और जीजा, दोनों ही सरकारी नौकरी में थे. दिनभर छवि घर पर रहती थी और टीवी देखती थी. कभीकभी आसपास घूमने चली जाती थी. छुट्टी के दिन अपनी दीदी और जीजा के साथ घूमने जाती थी.

मुझ से मिलने के बाद अब वह कहानी, कविता और उपन्यास पढ़ने लगी. मुझ से कई सारी किताबें ले गई थी. दिन का काफी समय वह पढ़ने में बिताती, या मेरी पत्नी के साथ बैठ कर विभिन्न विषयों पर बातें करती. मैं स्वयं एक सरकारी दफ्तर में ग्रेड ‘बी’ अफसर था, इसलिए केवल छुट्टी के दिन छवि से खुल कर बात करने का मौका मिलता था. बाकी दिनों में हम सभी शाम की चाय अवश्य साथसाथ पीते थे.

छवि के चेहरे में अनोखा सम्मोहन था. ऐसा सम्मोहन, जो बरबस किसी को भी अपनी तरफ खींच लेता है. संभवतया हर स्त्री में यह गुण होता है, कुछ में कम, कुछ में ज्यादा, परंतु कुछ लड़कियां ऐसी होती हैं जो पुरुषों को चुंबक की तरह अपनी तरफ खींचती हैं. छवि ऐसी ही लड़की थी. वह युवा थी, पता नहीं उस का कोई प्रेमी था या नहीं, परंतु उसे देख कर मेरा मन मचलने लगता था.

सामाजिक दृष्टि से यह गलत था. मैं एक शादीशुदा व्यक्ति था, परिवार के प्रति मेरी कुछ जिम्मेदारियां थीं और मैं सामाजिक बंधनों में बंधा हुआ था. परंतु मन किसी बंधन को नहीं मानता और हृदय किसी के लिए भी मचल सकता है. प्यार के  मामले में यह बच्चे के समान होता है, जो हर सुंदर लड़की और स्त्री को पाने की लालसा सदा मन में पालता रहता है.

मैं नेहा को देखता तो हृदय में अपराधबोध पैदा होता, परंतु जैसे ही छवि को देखता तो अपराधबोध गायब हो जाता और खुशी की एक ऐसी लहर तनमन में दौड़ जाती कि जी चाहता, यह लहर कभी खत्म न हो, शरीर के अंगअंग में ऐसी लहरें उठती ही रहें और मैं उन लहरों में डूब जाऊं.

छवि सामान्य ढंग से मेरे घर आती, हमारे साथ बैठ कर बातें करती, चाय पीती और चली जाती. कभी पुस्तकें मांग कर ले जाती और पढ़ कर वापस कर देती. उस ने मेरी भी कहानियां पढ़ी थीं, परंतु उन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. मैं पूछता, तो बस इतना कहती, ‘ठीक हैं, अच्छी लगीं.’ बस, और कोई विश्ेष टिप्पणी नहीं.

उस की बातों से नहीं लगता था कि वह मेरे लेखन या व्यक्तित्व से प्रभावित थी. यदि वह मेरे किसी गुण की प्रशंसा करती तो मैं समझ सकता था कि उस के हृदय में मेरे लिए कोई स्थान था, फिर मैं उस के हृदय में प्रवेश करने का कोई न कोई रास्ता तलाश कर ही लेता. मेरी सब से बड़ी कमजोरी थी कि मैं शादीशुदा था. सीधेसीधे बात करता तो वह मुझे छिछोरा या लंपट समझती. मुझे मन मार कर अपनी भावनाओं को दबा कर रखना पड़ रहा था.

मेरे मन में उस से अकेले में मिलने की लालसा बलवती होती जा रही थी, परंतु मुझे कोई रास्ता नहीं दिखाई पड़ रहा था. इस तरह 15 दिन निकल गए. जैसजैसे उस के पुणे जाने के दिन कम हो रहे थे, वैसेवैसे मेरे मन की बेचैनी बढ़ती जा रही थी.

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फिर एक दिन कुछ आश्चर्यजनक हुआ. मैं औफिस जाने के लिए सीढि़यों से उतर कर नीचे आया, तो देखा, नीचे छवि खड़ी थी. मैं ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘यहां क्या कर रही हो?’’

‘‘आप का इंतजार,’’ उस ने आंखों को मटकाते हुए कहा.

‘‘क्या?’’ मुझे हलका सा आश्चर्य हुआ. एक बार दिल भी धड़क कर रह गया. क्या उस के  दिल में मेरे लिए कुछ है? बता नहीं सकता था, क्योंकि लड़कियां अपनी भावनाओं को छिपाने में बहुत कुशल होती हैं.

‘‘हां, आप को औफिस के लिए देर तो नहीं होगी?’’

‘‘नहीं, बोलिए न.’’

‘‘मैं घर में सारा दिन पड़ेपड़े बोर हो जाती हूं. टीवी और किताबों से मन नहीं बहलता. कहीं घूमने जाने का मन है, क्या आप मेरे साथ कहीं घूमने चल सकते हैं?’’

उस का प्रस्ताव सुन कर मेरा मन बल्लियों उछलने लगा, परंतु फिर हृदय पर जैसे किसी ने पत्थर रख दिया. मैं शादीशुदा था और नेहा को घर में छोड़ कर मैं उसे घुमाने कैसे ले जा सकता था. नेहा को साथ ले जाता, तो छवि को घुमाने का क्या लाभ? मैं ने असमंजसभरी निगाहों से उसे देखते हुए कहा, ‘‘आप के दीदीजीजा तो रविवार को आप को घुमाने ले जाते हैं.’’

‘‘नहीं, मैं आप के साथ जाना चाहती हूं.’’

मेरा दिल फिर से धड़का, ‘‘परंतु नेहा साथ रहेगी?’’

‘‘छुट्टी के दिन नहीं,’’ उस ने निसंकोच कहा, ‘‘आप दफ्तर से एक दिन की छुट्टी ले लीजिए. फिर हम दोनों बाहर चलेंगे.’’

‘‘अच्छा, अपना मोबाइल नंबर दो. मैं दफ्तर जा कर फोन करूंगा.’’ उस ने अपना नंबर दिया और मैं खूबसूरत मंसूबे बांधता हुआ दफ्तर आया. मन में लड्डू फूट रहे थे. अपने केबिन में पहुंचते ही मैं ने छवि को फोन मिलाया. बड़े उत्साह से उस से मीठीमीठी बातें कीं, ताकि उस के मन का पता चल सके.. इस के बावजूद मैं अपने मन की बात उस से नहीं कह पाया. छवि की बातों से भी ऐसा नहीं लगा कि उस के मन में मेरे लिए कोई ऐसीवैसी बात है.

हम ने बाहर घूमने की बात तय कर ली. परंतु फोन रखने पर मेरा उत्साह खत्म हो चुका था. शायद मेरे साथ बाहर जाने का छवि का कोई विशेष उद्देश्य नहीं था, वह केवल घूमना ही चाहती थी.

मैरीन ड्राइव के चौड़े फुटपाथ पर धीमेधीमे कदमों से टहलते हुए एक जगह हम रुक गए और धूप में चांदी जैसी चमकती हुई समुद्र की लहरों को निहारने लगे. मेरे मन में भी समुद्र जैसी लहरें उफान मार रही थीं. मैं चाह कर भी कुछ नहीं कह पा रहा था. लहरों को ताकते हुए छवि ने पूछा, ‘‘क्या आप इस बात पर विश्वास करते हैं कि प्रथम दृष्टि में प्यार हो सकता है.’’

मैं ने आश्चर्ययुक्त भाव से उस के मुखड़े को देखा. उस के चेहरे पर ऐसा कोई भाव दृष्टिमान नहीं था जिस से उस के मनोभावों का पता चलता. मैं ने अपनी दृष्टि को आसमान की तरफ टिकाते हुए कहा, ‘‘हां, हो सकता है, परंतु…’’

अब उस ने मेरी ओर हैरत से देखा और पूछा, ‘‘परंतु क्या?’’

‘‘परंतु…यानी ऐसा प्रेम संभव तो होता है परंतु इस में स्थायित्व कितना होता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों व्यक्ति कितने समय तक एकदूसरे के साथ रहते हैं.’’

छवि शायद मेरी बात का सही मतलब समझ गईर् थी. इसलिए आगे कुछ नहीं पूछा.

मैं ने छवि से कहीं बैठने के लिए कहा तो उस ने मना कर दिया. फिर हम टहलते हुए तारापुर एक्वेरियम तक गए. मैं ने उसे एक्वेरियम देखने के लिए कहा तो उस ने बताया कि वह देख चुकी थी. मुंबई देखने का उस का कोई इरादा भी नहीं था. उस ने बताया कि वह केवल मेरे साथ घूमना चाहती थी.

दोपहर तक हम लोग मैरीन ड्राइव में ही घूमते रहे… निरुद्देश्य. हम दोनों ने बहुत बातें की, परंतु मैं अपने मन की गांठ न खोल सका. उस की बातों से भी ऐसा कुछ

नहीं लगा कि उस के मन में मेरे प्रति कोई ऐसावैसा भाव है. मैं शादीशुदा था, इसलिए अपनी तरफ से कोईर् पहल नहीं करना चाहता था.

लगभग 2 बजे मैं ने उस से लंच करने के लिए कहा तो भी उस ने मना कर दिया. मुझे अजीब सा लगा, कैसी लड़की है, सुबह से मेरे साथ घूम रही है और खानेपीने का नाम तक न लिया. कब तक भूखी रहेगी. मैं उसे जबरदस्ती पास के एक रेस्तरां में ले गया और जबरदस्ती डोसा खिलाया. आधा डोसा मुझे ही खाना पड़ा.

Crime Story: प्यार में मिट गई सिमरन- भाग 2

सौजन्य- मनोहर कहानियां

लेखक- सुनील वर्मा

एक तरह से सिमरन आमिर के प्यार में पूरी तरह दीवानी हो चुकी थी. करीब 6 महीने तक दोनों का प्यार इसी तरह चोरीछिपे परवान चढ़ता रहा. प्यार की हर कहानी एकदम सीधी नहीं होती. उस में कई बाधाएं होती हैं और सिमरन का प्यार तो वैसे भी पहली नजर का अंधा प्यार था, जिस में न तो भविष्य की भलाई देखी गई थी न ही भावी जिदंगी की कड़वी सच्चाई को परखा गया था.

सिमरन बहनों में सब से छोटी थी और मां बाप की लाड़ली भी. मां बाप चाहते थे कि जवानी की दहलीज पर खड़ी सिमरन की शादी भी किसी अच्छे परिवार में कर दी जाए. इसीलिए वे उस के लिए अच्छा वर तलाश रहे थे.

सिमरन के प्यार से अंजान मां ने जब एक दिन सिमरन को रिश्ते के लिए एक लड़के की फोटो दिखाई तो सिमरन को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसे हसीन सपना देखते हुए जगा दिया हो.

‘‘अम्मी अभी शादी की क्या जल्दी है.. मुझे घर से निकालना चाहती हो क्या?’’ सिमरन ने बेमन से लड़के की फोटो देखने के बाद कहा.

‘‘नहीं बेटा, लड़की मांबाप के लिए एक जिम्मेदारी होती है जितनी जल्दी ये जिम्मेदारी पूरी हो जाए मांबाप का मन हल्का हो जाता है. और तेरा निकाह हो जाएगा तो उस के बाद फिरोज के लिए भी तो दुल्हन लानी है घर में.’’

शाबरी बेगम ने सिमरन के शादी के ऐतराज को स्वभाविक रूप से लिया. लेकिन वे इस बात से कतई अंजान थी कि बेटी के मन में क्या चल रहा है.

सिमरन जानती थी कि अगर उस ने अपनी अम्मी को अपनी पंसद के बारे में बताया तो वे आमिर से उस की शादी के लिए कतई तैयार नहीं होगी. क्योंकि आमिर का परिवार उस की दूसरी बहनों की ससुराल की तरह समृद्ध नहीं था.

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आमिर के पिता शाहिद मूलरूप से मेरठ के रहने वाले हैं. वे जवानी के दिनों में ही दिल्ली आ गए थे. आजादपुर मंडी में आढ़तियों को लेबर सप्लाई करने वाले शाहिद के परिवार में उन की बीवी आबिदा के अलावा 10 बच्चे थे, 3 बेटियां व 7 बेटे.

परिवार लंबाचौड़ा था और खर्चे अधिक. मंदे समय में उन्होेंने किसी तरह अपने परिवार के लिए मंडोली की गली नंबर 9 में मकान तो बना लिया था, लेकिन 3 बेटियों की शादी करने और 7 बेटों को पालपोस कर जवान करतेकरते वे उम्र से पहले ही बूढे हो कर बीमार रहने लगे थे. उन का कोई भी बच्चा 5वीं जमात से ज्यादा नहीं पढ़ सका था.

मेरठ के सरूरपुर, जैनपुर में पनीर बनाने के कई प्लांट हैं. शाहिद के लगभग सभी बेटे इन्हीं फैक्ट्रियों में काम करते हैं. 2 बड़े बेटे अपने परिवार के साथ जैनपुर में ही किराए का मकान ले कर रहते थे.

आमिर से छोटे भाई की भी शादी हो चुकी थी, लेकिन उस की पत्नी दिल्ली में शाहिद व उन की पत्नी आबिदा के पास ही रहती थी.3 बेटों की अभी शादी नहीं हुई थी.

ढाई साल पहले जिन दिनों सिमरन और आमिर का प्यार परवान चढ़ रहा था उन दिनों आमिर पनीर बनाने का काम सीख रहा था. उस ने अभी नौकरी शुरू नहीं की थी. अलबत्ता 10 हजार रूपए में उस की नौकरी एक प्लांट में पक्की हो गई थी.

इधर जब सिमरन ने आमिर को बताया कि उस के अम्मी अब्बू उस का जल्द से जल्द कहीं दूसरी जगह निकाह कराने की तैयारी कर रहे है तो आमिर सकते में आ गया. क्योंकि वो चाहता था कि सिमरन के साथ अभी एक साल उस के प्रेम संबध यूं ही चलते रहें.

उस ने सोचा था कि नौकरी कर के पहले पैसा कमाएगा फिर सिमरन से शादी करेगा. लेकिन जब अचानक सिमरन ने बताया कि परिवार वाले उस का निकाह कराने की तैयारी कर रहे हैं तो उस के हाथपांव फूल गए.

उसे समझ नहीं आया कि वह क्या करें. सिमरन ने उसे ये भी बता दिया था कि उस के परिवार की हैसियत देख कर उस के परिवार वाले कभी दोनों की शादी के लिए तैयार नहीं होंगे.

सिमरन दिल्ली में रहने वाली और 12वीं क्लास तक पढ़ी लड़की थी. उसे पता था कि अगर परिवार शादी की इजाजत ना दे तो बालिग प्रेमियों को शादी के लिए क्या करना चाहिए.

सिमरन मिली भावी ससुराल वालों से

इसलिए सिमरन ने आमिर से पूछा कि क्या उस के परिवार वाले उसे अपनाने के लिए तैयार हैं. सिमरन अच्छे संपन्न परिवार की पढ़ीलिखी सुंदर लड़की थी. जब आमिर ने उसे अपने परिवार वालों से मिलाया तो सब ने शादी के लिए हां कर दी.

अब सवाल यह था कि सिमरन के परिवार वाले दोनों का निकाह कराने के लिए तैयार नहीं होंगे. तय हुआ कि सिमरन व आमिर कोर्ट मैरिज कर लें. बाद में सिमरन का परिवार अपने आप मान जाएगा.

सिमरन व आमिर ने शाहदरा मैरिज कोर्ट में शादी के लिए आवेदन कर दिया. चूंकि दोनों ही बालिग थे और परिवार के तौर पर दोनों की तरफ से आमिर के दोस्त गवाह थे, लिहाजा दोनों की कोर्ट मैरिज होने में कोई अड़चन नहीं आई.

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लेकिन जब कोई लड़की निकाह करती है तो भले ही परिवार से कुछ ना बताए लेकिन उस के रहनसहन और पहनावे में इतना परिवर्तन तो आ ही जाता है कि सवालों का पहाड़ अपने आप ही खड़ा हो जाए.

कोर्ट मैरिज के बाद सिमरन जब चूड़ा पहन कर अपने घर गई तो उस की अम्मी को शक हुआ, तो उन्होंने सवालों की बौछार कर दी. सिमरन जानती थी कि एक ना एक दिन सब को सच बताना ही पडे़गा. लिहाजा उस ने अपनी मां को बता दिया कि वह आमिर नाम के एक लड़के से प्यार करती है और उस ने कोर्ट मैरिज कर ली है.

बेटी के लिए अच्छे घर का सपना देखने वाले मातापिता के लिए बेटी के प्रेम विवाह की खबर किसी वज्रपात से कम नहीं होती. उन्होंने जब लड़के व उस के परिवार के बारे में पूछा तो सिमरन ने सब कुछ सचसच बता दिया.

जैसा कि सिमरन को आशंका थी वैसा ही हुआ. मां ने सिमरन को लानतमलानत दी और उस की पिटाई कर दी. अब्बू के घर आने के बाद तो जम कर हंगामा हुआ. पिता ने उसी दिन आमिर को अपने घर बुलाया और उसे धमकी देते हुए अपनी बेटी को भूल जाने के लिए कहा.

आमिर ने सिमरन से सच्ची मोहब्बत की थी. भूल जाने का तो सवाल ही नहीं उठता था. लिहाजा उस ने साफ कह दिया कि वह दुनिया में सब को छोड़ सकता है लेकिन सिमरन को छोड़ना उस के लिए मुमकिन नहीं.

मोहम्मद शरीफ ने जब उसे अपनी हैसियत देखने के लिए कहा तो आमिर ने साफ कह दिया कि उस ने सिमरन की हैसियत से नहीं, बल्कि दिल से प्यार किया है.

शरीफ ने आमिर को मारपीट कर घर से भगा दिया और उसे चेतावनी दे दी कि भूल कर भी सिमरन से मिलने का प्रयास न करें. आमिर जानता था कि अगर उस ने जरा सी भी देर कर दी तो सिमरन के घर वाले जल्दी ही कहीं उस का निकाह कर देंगे. लिहाजा उस ने अपनी जान पहचान के कुछ लोगों से बात की और हर्ष विहार थाने पहुंच गया.

अगले भाग में पढ़ें- क्या मांबाप का दिल तोड़ कर खुश थी सिमरन

सोनाली फोगाट ने किया अली गोनी को प्रपोज तो बोली जैस्मिन, ‘हम उनको मां की तरह ट्रीट करते हैं’

बिग बौस 14 (Bigg boss 14) की स्ट्रौग कंटेस्टेंट जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin) हाल ही में घर से बेघर हो गई हैं. जिससे उनके दोस्त अली गोनी(Aly Goni) बिग बौस हाउस में काफी उदास दिखाई दे रहे हैं. अब खबर तो ये भी आ रही है कि जैस्मिन दोबारा घर में एंट्री ले सकती हैं.

अब शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें सोनाली फोगाट, अली गोनी से अपने दिल की बात कहते हुए नजर आती है. इस वीडियो में सोनाली, अली से कहती हैं कि उन्हें उनकी आंखों में देखते रहने का मन करता है.

 

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खबर ये आ रही है कि जब जैस्मिन भसीन से इस बारे में पूछा गया कि उन्हें कैसा लगा जब सोनाली ने उनके बौयफ्रेंड अली गोनी के सामने प्यार का इजहार किया, तो जैस्मिन ने कहा, अली की आंखें हैं ही ऐसी है कि जो भी देखता है उनमें खो जाता है.

खबरों के अनुसार उन्होंने आगे बताया यह बहुत ही क्यूट है कि उन्होंने अली को प्रपोज किया. जो सोनाली जी ने फील किया वह एक्सप्रेस भी किया. जैस्मिन ने आगे कहा, बिग बौस हाउस  में नफरत तो सब फैलाते फिरते हैं. लेकिन उनके मन में अली के लिए प्यार है तो उसे जाहिर भी किया.

 

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रिपोर्टस के अनुसार जब जैस्मिन से पूछा गया कि जब सोनाली ने अली से ये बात कही तो आपको जलन हुई. तो इस सवाल पर जैस्मिन ने ये कहा कि हम सोनाली जी को मां की तरह ट्रीट करते थे तो फिर मुझे जलन क्यों होगी.

जाह्नवी कपूर का सेक्सी डांस वीडियो हुआ वायरल, फैंस ने दिया ये रिएक्शन

बौलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर (Janhvi Kapoor) का सेक्सी डांस वीडियो सोशल वीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. फैंस इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं.

दरअसल एक्ट्रेस ने लौकडाउन के दौरान भी डांस और एक्टिंग क्लासेज की. उन्होंने जमकर मेहनत किया. जाह्नवी कपूर का एक ऐसा ही ट्रेनिंग वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो करीना कपूर खान के गाने पर सेक्सी बेली डांस करती दिख रही हैं. जी हां इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं.

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जाह्नवी कपूर  का ये वीडियो इंटरनेट पर खूब धमाल मचा रहा है. फैंस इसे जमकर शेयर भी कर रहे हैं. इस वीडियो पर कई यूजर्स ने एक्ट्रेस से पूछा भी है कि क्या जाह्नवी किसी खास फिल्म की तैयारी कर रही हैं?

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टीवी एक्ट्रेस अनिता हसनंदानी के मैटरनिटी फोटोशूट में कैद हुआ ‘बेबी किक’, देखें Video

छोटे पर्दे की फेमस एक्ट्रेस अनिता हसनंदानी (Anita Hassanandani) जल्द ही मां बनने वाली हैं. वह इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं. अक्सर वह अपने फैंस के साथ फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती हैं.

वह इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी को भरपूर एन्जौय कर रही हैं. अब एक्ट्रेस का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. अनिता हसनंदानी ने प्रेग्नेंसी में  फोटोशूट करवाया है. इस फोटोशूट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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दरअसल अनिता हसनंदानी के पति रोहित रेड्डी इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है.एक्ट्रेस के इस वीडियो को देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. वीडियो में आप देख सकते हैं कि अनिता हसनंदानी का बेबी किक मारता हुआ दिख रहा है.

 

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इस वीडियो में आने वाले बेबी का खूबसूरत नजारा कैद हो गया है. सोशल मीडिया पर यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. बता दें कि 39 साल की उम्र में वह मां बनने वाली हैं. ये उनका पहला बच्चा है.

 

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अनिता हसनंदानी ने ‘ये हैं मोहब्बतें’, ‘नागिन’ जैसे कई हिट सीरियल्स से फैंस के दिलों पर राज करती आई हैं. उन्होंने साल 2013 में रोहित रेड्डी से शादी की थी. अब इस कपल के घर में जल्द ही नन्हा मेहमान आने वाला है.

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Short Story: गृहस्थी की डोर

लेखक- एन.के. सोमानी

मनीष उस समय 27 साल का था. उस ने अपनी शिक्षा पूरी कर मुंबई के उपनगर शिवड़ी स्थित एक काल सेंटर से अपने कैरियर की शुरुआत की, जहां का ज्यादातर काम रात को ही होता था. अमेरिका के ग्राहकों का जब दिन होता तो भारत की रात, अत: दिनचर्या अब रातचर्या में बदल गई.

मनीष एक खातेपीते परिवार का बेटा था. सातरस्ते पर उस का परिवार एक ऊंची इमारत में रहता था. पिता का मंगलदास मार्केट में कपड़े का थोक व्यापार था. मनीष की उस पुरानी गंदी गलियों में स्थित मार्केट में पुश्तैनी काम करने में कोई रुचि नहीं थी. परिवार के मना करने पर भी आई.टी. क्षेत्र में नौकरी शुरू की, जो रात को 9 बजे से सुबह 8 बजे तक की ड्यूटी के रूप में करनी पड़ती. खानापीना, सोनाउठना सभी उलटे हो गए थे.

जवानी व नई नौकरी का जोश, सभी साथी लड़केलड़कियां उसी की उम्र के थे. दफ्तर में ही कैंटीन का खाना, व्यायाम का जिमनेजियम व आराम करने के लिए रूम थे. उस कमरे में जोरजोर से पश्चिमी तर्ज व ताल पर संगीत चीखता रहता. सभी युवा काम से ऊबने पर थोड़ी देर आ कर नाच लेते. साथ ही सिगरेट के साथ एक्स्टेसी की गोली का भी बियर के साथ प्रचलन था, जिस से होश, बदहोश, मदहोश का सिलसिला चलता रहता.

शोभना एक आम मध्यम आय वाले परिवार की लड़की थी. हैदराबाद से शिक्षा पूरी कर मुंबई आई थी और मनीष के ही काल सेंटर में काम करती थी. वह 3 अन्य सहेलियों के साथ एक छोटे से फ्लैट में रहती थी. फ्लैट का किराया व बिजलीपानी का जो भी खर्च आता वे तीनों सहेलियां आपस में बांट लेतीं. भोजन दोनों समय बाहर ही होता. एक समय तो कंपनी की कैंटीन में और दिन में कहीं भी सुविधानुसार.

रात को 2-3 बजे के बीच मनीष व शोभना को डिनर बे्रक व आराम का समय मिलता. डिनर तो पिज्जा या बर्गर के रूप में होता, बाकी समय डांस में गुजरता. थोड़े ही दिनों में दफ्तर के एक छोटे बूथ में दोनों का यौन संबंध हो गया. मित्रों के बीच उन के प्रेम के चर्चे आम होने लगे तो साल भर बीतने पर दोनों का विवाह भी हो गया, जिस में उन के काल सेंटर के अधिकांश सहकर्मी व स्टाफ आया था. विवाह उपनगर के एक हालीडे रिजोर्ट में हुआ. उस दिन सभी वहां से नशे में धुत हो कर निकले थे.

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दूसरे साल मनीष ने काल सेंटर की नौकरी से इस्तीफा दे कर अपने एक मित्र के छोटे से दफ्तर में एक मेज लगवा कर एक्सपोर्ट का काम शुरू किया. उन दिनों रेडीमेड कपड़ों की पश्चिमी देशों में काफी मांग थी. अत: नियमित आर्डर के मुताबिक वह कंटेनर से कोच्चि से माल भिजवाने लगा. उधर शोभना उसी जगह काम करती रही थी. अब उन दोनों की दिनचर्या में इतना अंतराल आ गया कि वे एक जगह रहते हुए भी हफ्तों तक अपने दुखसुख की बात नहीं कर पाते, गपशप की तो बात ही क्या थी. दोनों ही को फिलहाल बच्चे नहीं चाहिए थे, अत: शोभना इस की व्यवस्था स्वयं रखती. इस के अलावा घर की साफसफाई तो दूर, फ्लैट में कपड़े भी ठीक से नहीं रखे जाते और वे चारों ओर बिखरे रहते. मनीष शोभना के भरोसे रहता और उसे काम से आने के बाद बिलकुल भी सुध न रहती. पलंग पर आ कर धम्म से पड़ जाती थी.

मनीष का रहनसहन व संगत अब ऐसी हो गई थी कि उसे हर दूसरे दिन पार्टियों में जाना पड़ता था जहां रात भर पी कर नाचना और उस पर से ड्रग लेना पड़ता था. इन सब में और दूसरी औरतों के संग शारीरिक संबंध बनाने में इतना समय व रुपए खर्च होने लगे कि उस के अच्छेभले व्यवसाय से अब खर्च पूरा नहीं पड़ता.

किसी विशेष दिन शोभना छुट्टी ले कर मनीष के साथ रहना चाहती तो वह उस से रूखा व्यवहार करता. साथ में रहना या रेस्तरां में जाना उसे गवारा न होता. शोभना मन मार कर अपने काम में लगी रहती.

यद्यपि शोभना ने कई बार मनीष को बातोंबातों में सावधान रहने व पीने, ड्रग  आदि से दूर रहने के संकेत दिए थे पर वह झुंझला कर सुनीअनसुनी कर देता, ‘‘तुम क्या जानो कमाई कैसे की जाती है. नेटवर्क तो बनाना ही पड़ता है.’’

एक बार मनीष ने एक कंटेनर में फटेपुराने चिथड़े भर कर रेडीमेड के नाम से दस्तावेज बना कर बैंक से रकम ले ली, लेकिन जब पोर्ट के एक जूनियर अधिकारी ने कंटेनर खोल कर तलाशी ली तो मनीष के होश उड़ गए. कोर्ट में केस न दर्ज हो इस के लिए उस ने 15 लाख में मामला तय कर अपना पीछा छुड़ाया, लेकिन उस के लिए उसे कोच्चि का अपना फ्लैट बेचना पड़ा था. वहां से बैंक को बिना बताए वापस मुंबई शोभना के साथ आ कर रहने लगा. बैंक का अकाउंट भी गलत बयानी के आधार पर खोला था. अत: उन लोगों ने एफ.आई.आर. दर्ज करा कर फाइल बंद कर दी.

इस बीच मनीष की जीवनशैली के कारण उस के लिवर ने धीरेधीरे काम करना बंद कर दिया. खानापीना व किडनी के ठीक न चलने से डाक्टरों ने उसे सलाह दी कि लिवर ट्रांसप्लांट के बिना अब कुछ नहीं हो सकता. इस बीच 4-6 महीने मनीष आयुर्वेदिक दवाआें के चक्कर में भी पड़ा रहा. लेकिन कोई फायदा न होता देख कर आखिर शोभना से उसे बात करनी पड़ी कि लिवर नया लगा कर पूरी प्रक्रिया में 3-4 महीने लगेंगे, 12-15 लाख का खर्च है. पर सब से बड़ी दुविधा है नया लिवर मिलने की.

‘‘मैं ने आप से कितनी बार मना किया था कि खानेपीने व ड्रग के मामले में सावधानी बरतो पर आप मेरी सुनें तब न.’’

‘‘अब सुनासुना कर छलनी करने से क्या मैं ठीक हो जाऊंगा?’’

सारी परिस्थिति समझ कर शोभना ने मुंबई के जे.जे. अस्पताल में जा कर अपने लिवर की जांच कराई. उस का लिवर ऐसा निकला जिसे मनीष के शरीर ने मंजूर कर लिया. अपने गहनेजेवर व फ्लैट को गिरवी रख एवं बाकी राशि मनीष के परिवार से जुटा कर दोनों अस्पताल में इस बड़ी शल्यक्रिया के लिए भरती हो गए.

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मनीष को 6 महीने लगे पूरी तरह ठीक होने में. उस ने अब अपनी जीवन पद्धति को पूरी तरह से बदलने व शोभना के साथ संतोषपूर्वक जीवन बिताने का निश्चय कर लिया है. दोनों अब बच्चे की सोचने लगे हैं, ता

ताक झांक: एक मनोवैज्ञानिक बीमारी की तथाकथा

ताक झांक करना ऐसा लगता है एक मामूली फितरत है. मगर यह मामूली सी लगने वाली फितरत आगे चलकर समाज में एक ऐसी बीमारी का स्वरूप धारण कर सकती है जिससे जाने कितने लोग तबाह हो जाएं. ताक झांक के कारण अक्सर इतने ही अपराधिक मामले पुलिस और न्यायालय में पहुंचते हैं जिन्हें देखते हुए कहा जा सकता है कि यह एक शगल के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक बीमारी भी है. जिसका किसी सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं हो सकता.

हाल ही में ब्रिटेन का एक मामला दुनिया के मीडिया में सुर्खियां बटोर गया. नए वर्ष के प्रथम सप्ताह में ही ताक झांक का अपराध करने वाले एक शख्स को न्यायालय ने लंबे समय तक के लिए जेल भेज दिया और गंभीर टिप्पणी की. खास बात यह है कि ब्रिटेन की एक अदालत ने भारतीय मूल के व्यक्ति को दस पांच नहीं बल्कि पुरी 574 से अधिक लड़कियों और महिलाओं के कम्प्यूटर में हैकिंग करने, धमकाने, ताक-झांक करने और साइबर अपराध का दोषी ठहराते हुए 11 साल जेल की सजा सुनाई है.

यह हैकिंग उनका उत्पीड़न करने के इरादे से की गई थी. महिला और युवतियों को अपना शिकार बनाने वाला यह शख्स मनोवैज्ञानिक रूप से एक बीमार व्यक्ति है जिसकी मनोवैज्ञानिक अपने ढंग से जांच भी कर रहे हैं.मगर आज वह जेल की हवा खा रहा है और यह संदेश दे रहा है कि ताक झांक का दुष्परिणाम क्या हो सकता है.

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होटल, दुकानें भी महफुज नहीं

कब कौन हमारे घर में तांक झांक करने लगे इसका तो खुदा ही मालिक है. वहीं यह भी सच है कि सार्वजनिक स्थान होटलें व्यवसायिक प्रतिष्ठान, बैंक और सरकारी दफ्तर भी ताक झांक के माध्यम बनकर सामने आ चुके हैं.

एक कॉफी हाउस के बेयरे महिलाओं के बाथरूम में तांक झांक किया करते थे. इसी तरह एक प्रतिष्ठित कपड़ा व्यवसायी के यहां निजी कक्ष जहां महिलाएं कपड़े बदला करती थी गुप्त कैमरे पाए गए. यही नहीं
एक बैंक के होम लोन डिपार्टमेंट के कार्यालय की बाथरूम में छेद करके ताक-झांक करने वाले चपरासी को यहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने रंगे हाथों पकड़ लिया. मामला सामने आते ही कर्मचारी और लोग आक्रोशित हो गए.

इस दौरान आरोपी चपरासी को पीटते हुए उसका जुलूस निकाला गया और थाने लेकर आए.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक प्रतिष्ठित बैंक है वहां एक चपरासी रामू नौकरी करता था. पिछले कुछ दिनों से यहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों को बाथरूम के दरवाजे में एक छेद दिखाई दे रहा था.

शंका होने पर जब उन्होंने निगरानी रखी तो सच सामने आ गया. उक्त छेद चपरासी रामू ने किया था. वह बाथरूम में अक्सर ताका झांक करता रहता था. एक दिन जैसे ही कर्मचारी ड्यूटी पर आए और सभी महिलाओं ने रामू की हरकतों पर नजर रखी और उसे रंगे हाथों पकड़ लिया.

सजा का है प्रवधान

तांक झांक को विधि के अनुरूप भी गंभीर अपराध माना गया है और इसके लिए सजा का प्रावधान किया गया है. छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर में एक किशोरी के घर में दरवाजे से तांक-झांक करने वाले युवक को अदालत ने एक साल कारावास की सजा सुनाई है. करबला थाना क्षेत्र निवासी किशोरी को आरोपी ट्यूशन जाने के दौरान अक्सर परेशान करता रहता था. पीड़िता के चुप्पी साधने की वजह से आरोपी राजेश की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि रात में उसके घर में घुस गया.

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परिजनों के पहुंचने पर फरार हो गया.पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दफा 354 (घ) तथा पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण को विचारण के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया था. दरअसल रात को किशोरी अपने घर में थी, इसी दौरान मोहल्ले का राजेश घर में घुस गया. कमरे में मौजूद किशोरी को दरवाजे की आड़ से देखने लगा. किशोरी की मां ने घर पहुंचकर उसे आवाज लगाई तो आरोपी भाग गया. इस पर किशोरी ने आरोपी के लंबे समय से परेशान करने की जानकारी दी.

साथ ही परिजनों को बताया कि स्कूल जाते समय उसका पीछा करता है. लोक लाज के भय से उसने किसी को जानकारी नहीं दी.पीड़िता की शिकायत पर अपराध पंजीबद्ध हुआ पुलिस ने ट्रायल के लिए प्रकरण न्यायालय के समक्ष पेश किया. विचारण बाद न्यायाधीश ने राजेश को किशोरी को बुरी नीयत से देखने का दोषी पाया.आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत 1 वर्ष के कारावास और अर्थदंड दिया गया.

Crime Story: जंगल में चोरी के लिए

Crime Story: जंगल में चोरी के लिए- पार्ट 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

लेखक- शैलेंद्र कुमार ‘शैल’ 

अनरजीत और उस की दूसरी पत्नी रीमा की हत्या पुलिस के लिए एक पहेली बन गई थी. 2 महीने तक पुलिस ने सभी पहलुओं पर जांच की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. बाद में हत्याकांड का परदाफाश हुआ तो ऐसी वजह सामने आई, जिस की किसी ने…

रीमा गौड़ गोरखपुर जिले के गुलरिहा क्षेत्र के शंकर टोला गांव में पति अनरजीत गुप्ता के साथ रहती थी.

रीमा का मायका इसी गांव में था, लेकिन वह अपने मांबाप के घर से दूर गांव के बाहर बने टिनशेड वाले मकान में रहती थी. यह मकान उस के पति अनरजीत ने बनवाया था. बात 6 अगस्त, 2020 की है. सुबहसुबह रीमा के चाचा बैजनाथ गौड़ घूमते हुए उस के घर पहुंचे तो उन्हें रीमा के घर का मुख्य दरवाजा  खुला मिला.

बैजनाथ ने दरवाजे से ही 2 बार ‘रीमा…रीमा…’ नाम से आवाज लगाई. आवाज देने के बावजूद अंदर कोई हलचल नहीं हुई तो बैजनाथ खुद अंदर कमरे में दाखिल हो गए.

जैसे ही वह कमरे में पहुंचे, तो वहां की दिल दहला देने वाला हाल देख कर उलटे पांव लौट आए. कमरे के अंदर तख्त पर रीमा और जमीन पर औंधे मुंह उस के पति अनरजीत की रक्तरंजित लाश पड़ी थीं. अनरजीत के सिर पर और रीमा की गरदन पर फावड़े से वार किए गए थे. बगल में खून से सना फावड़ा भी पड़ा था.

बेटी और दामाद की खून में डूबी लाशें देख बैजनाथ के हाथपांव फूल गए और वह घबराहट में वहां से वापस लौट आए.

रीमा पति अनरजीत के साथ गांव में रहती थी. उस की अपनी कोई औलाद नहीं थी. अनरजीत रीमा का तीसरा पति था, जबकि रीमा, अनरजीत की दूसरी पत्नी थी. अनरजीत की पहली पत्नी संगीता से 14 और 10 साल के 2 बेटे थे.

उस की पत्नी संगीता गुलरिहा थाना क्षेत्र के गांव जैनपुर के टोला मोहम्मद बरवा में दोनों बच्चों के साथ अलग रहती थी. अनरजीत ने संगीता और बच्चों को छोड़ा नहीं था, बल्कि स्वेच्छा से पत्नी और बच्चों का भरणपोषण होता था. वह परिवार से मिलने जैनपुर आता था लेकिन ज्यादातर समय दूसरी पत्नी रीमा के साथ ही बिताता था.

बहरहाल, बैजनाथ गौड़ दौड़ेभागे घर पहुंचे और सारी बात बड़े भाई रामरक्षा और भतीजे अखिलेश को बताई. छोटे भाई के मुंह से बेटी और दामाद की हत्या की खबर सुनते ही उन के हाथपांव कांपने लगे और वह धम्म से गिर पड़े. यही नहीं, बेटी और दामाद की हत्या की खबर सुन घर में भी कोहराम मच गया.

बैजनाथ ने फोन द्वारा यह सूचना बेटी की ससुराल में भी दे दी. थोड़ी देर में अनरजीत और रीमा की हत्या की खबर जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. खबर मिलते ही गांव वाले मौके पर जुट गए. भीड़ में से किसी ने घटना की सूचना गुलरिहा थाने को दे दी.

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दोहरे हत्याकांड की सूचना मिलते ही थानेदार अनिल पांडेय पुलिस टीम के साथ शंकर टोला पहुंच गए और घटना की सूचना तत्कालीन एसएसपी डा. सुनील गुप्ता, एसपी (नार्थ) अरविंद कुमार पांडेय और सीओ (चौरीचौरा) रचना मिश्रा को दे दी. इस के बाद जांच में जुट गए.

सूचना मिलने के कुछ देर बाद सभी पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए. घटनास्थल की बारीकी से जांच की गई. जांच के दौरान अनरजीत के सिर के पीछे और रीमा की गरदन पर गहरे घाव के निशान पाए गए. तख्त के बगल में खून से सना फावड़ा पड़ा था.

पुलिस जुटी जांच में

पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे ने फावड़े से वार किया होगा. पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर फावड़ा अपने कब्जे में ले लिया. जांचपड़ताल के दौरान कमरे में 4 जूठी थालियां भी मिलीं.

घर में तो 2 ही सदस्य थे तो थालियां भी 2 होनी चाहिए, लेकिन वहां 4 थालियां थीं. इस का मतलब रात में वहां 2 अन्य लोग रुके थे, जो अनरजीत या रीमा दोनों में से किसी के जानने वाले रहे होंगे और दोनों की हत्या कर के अलमारी से गहने लूट कर फरार हो गए होंगे. क्योंकि जांचपड़ताल के दौरान अलमारी खुली हुई मिली थी. जेवर का डिब्बा खुला हुआ था.

स्थिति को देख कर पुलिस पता लगा रही थी कि हत्या लूट के चलते की गई थी या लूट दोनों की हत्या के बाद हुई थी. कहीं ऐसा तो नहीं, पुलिस को गुमराह करने के लिए हत्यारों ने घटना को लूट का रंग देने की कोशिश की हो. लेकिन यह बात कातिलों के पकड़े जाने के बाद ही पता चल सकता है.

बहरहाल, काररवाई करतेकरते दोपहर के 12 बज गए. पुलिस ने दोनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए बाबा राघव दास मैडिकल कालेज, गोरखपुर भिजवा दीं और थाने लौट आई.

थाने पहुंच कर थानाप्रभारी ने दोनों मृतकों के पिता की संयुक्त तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ धारा 302 आईपीसी का मुकदमा दर्ज कर के आगे की काररवाई शुरू कर दी.

जैसेजैसे जांच की काररवाई आगे बढ़ी, अनरजीत और रीमा की जिंदगी से जुड़ी हैरान करने वाली त्रिकोणीय कहानी सामने आई, जिस में रीमा की जिंदगी से जुड़ी भूतकाल की कहानी भी थी. अनरजीत के जीवन से जुड़ी कहानी भी कम हैरतअंगेज नहीं थी.

पता चला कि छोटी बहन राजमती के बहकते कदम रोकने के लिए अनरजीत ने उस के प्रेमी प्रदीप यादव पर बहन के अपहरण का मुकदमा दर्ज करा कर उसे जेल भिजवाया था. 3 माह जेल में रहने के बाद जब प्रदीप जमानत पर बाहर आया तो राजमती और प्रदीप का प्यार फिर से जवां हो गया. नतीजा यह हुआ कि राजमती दूसरी बार प्रेमी के साथ घर छोड़ कर भाग गई.

राजमती के इस कदम से अनरजीत और उस के घर वालों की खूब जगहंसाई हुई. अनरजीत और उस के घर वाले बहुत दुखी थे. बहन के चालचलन से दुखी अनरजीत ने राजमती को उस के हाल पर छोड़ दिया था. अलबत्ता बहन से नाराज हो कर उस ने उस के कुछ कीमती जेवरात अपने पास रख लिए थे.

अनरजीत का तर्क था कि राजमती जब पहली बार प्रदीप के साथ भागी थी उस ने उस की तलाश में हजारों रुपए पानी की तरह बहाए थे. उधर भाई द्वारा जेवर रखने की बात राजमती ने अपने प्रेमी प्रदीप को बता दी थी.

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तब जेवरों को ले कर अनरजीत और प्रदीप के बीच विवाद भी हुआ था. पुलिस ने अपनी जांच में इसे भी शामिल कर लिया कि कहीं इस कांड के पीछे प्रदीप ही तो नहीं  है.

जैसेजैसे जांच आगे बढ़ी पुलिस के सामने रीमा और अनरजीत की उलझी हुई जिंदगी की चौंकाने वाली कहानी सामने आई. पता चला कि अनरजीत से प्रेम विवाह करने से पहले रीमा के कई युवकों से मधुर संबंध थे. तब वह दारू बेचने का धंधा करती थी. उस के दारू के ठीहे पर कई दिलफेंक आशिक दारू पीने आते थे और उन की नजरें रीमा के जवान शरीर पर जमी रहती थीं.

अगले भाग में पढ़ें-  पुलिस उलझी अंधविश्वास में

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