प्यार में मिला धोखा: भाग 2

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

मांबेटी का रहनसहन काफी अच्छा था. प्रतिभा हाई सोसायटी की महिलाओं की तरह ही जींस टीशर्ट पहनती थी, हाथ में महंगा मोबाइल होता था. रहनसहन और काम के चलते प्रतिभा का हर तरह के लोगों से संपर्क रहता था. वह किसी के दबाव में नहीं आती थी.

समय के साथ सेजल जवान हो गई. उस ने इंटर तक पढ़ाई कर ली थी और आगे पढ़ने की तैयारी कर रही थी. गोरे रंग की सेजल बेहद खूबसूरत थी. गलीमोहल्ले का हर युवक उस से नजदीकी बढ़ाने को बेकरार रहता था.

पिता के बिना मां के साथ रहते हुए सेजल भी काफी खुले मिजाज की हो गई थी. मां के तौरतरीके और रंगढंग देख कर वह भी उसी रंग में ढल गई थी. उस के जो मन में आता, करती. वह अपने सपनों के राजकुमार के इंतजार में पलकें बिछाए बैठी थी.

हिमांशु सिंह बाराबंकी के गांव जंगरा बसावनपुर का रहने वाला था. उस का एक बड़ा भाई था शिवेंद्र. हिमांशु के पिता का नाम प्रदीप सिंह और मां का नाम प्रतिभा सिंह था. प्रदीप खेतीकिसानी का काम करते थे. लेकिन किसी वजह से उन की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रही.

भाई बना सहारा

पति की मानसिक स्थिति ठीक न होने पर प्रतिभा सिंह अपने दोनों बेटों को साथ ले कर सुलतानपुर अपने भाई विवेक सिंह के पास आ गई. विवेक सिंह सरकारी नौकरी करते थे और गोलाघाट क्षेत्र में रहते थे. उन्होंने अपनी बहन और भांजों को सहारा दिया. उन की परवरिश में मदद की.

शिवेंद्र ने मुरादाबाद स्थित एक इंस्टीट्यूट से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था. वह काफी स्मार्ट था. खूबसूरत युवतियों में उस का काफी लगाव था. जब हिमांशु और उस का भाई शिवेंद्र अपने दम पर कुछ करने के काबिल हुए तो विवेक सिंह ने उन्हें पीडब्लूडी कालोनी में एक मकान रहने के लिए दिला दिया. उन का सारा खर्चा विवेक सिंह ही उठा रहे थे.

हिमांशु की सेजल से मुलाकात मार्केट में शौपिंग करते समय हुई थी. पहली ही नजर में सेजल उसे दिल दे बैठी. उधर हिमांशु भी उसे देखते ही उस पर फिदा हो गया था. उस पहली मुलाकात में दोनों के बीच कोई संवाद शुरू नहीं हो सका. मगर सेजल मार्केट से घर लौट कर भी हिमांशु को भुला नहीं पाई. उस रात वह हिमांशु के बारे में ही सोचती रही.

Crime- ब्लैक मेलिंग का फल!

हिमांशु से हुई उस पहली मुलाकात के बाद सेजल खोईखोई सी रहने लगी थी. अब उसे बेसब्री से इंतजार था हिमांशु से अपनी मुलाकात होने का, ताकि वह अपना हाले दिल बयां कर सके.

पहली मुलाकात के 2 हफ्ते बाद एक दिन उसी मार्केट में उसे हिमांशु दिखाई दे गया. हिमांशु को देखते ही उस के दिल के तार झनझना उठे, चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई.

अब तक हिमांशु की निगाह भी उस पर पड़ चुकी थी. वह धड़कते दिल से बस सेजल को ही घूरे जा रहा था. कुछ पलों तक यह घूरने का सिलसिला चलता रहा. फिर हिमांशु सेजल के पास आया और बेहद मीठे लहजे में झिझकते हुए बोला, ‘‘माफ कीजिए, क्या मैं आप से कुछ बातें कर सकता हूं?’’

‘‘जी हां कीजिए, क्या बात करना चाहते हैं?’’

‘‘सामने रेस्टोरेंट में चल कर एकएक कप चाय पीते हैं, वहीं बातें भी हो जाएंगी.’’

‘‘अच्छा आइडिया है, चलिए.’’ सेजल ने उतावले मन से कहा.

दोनों कुछ कदमों की दूरी पर स्थित रेस्टोरेंट में दाखिल हो गए.

उस दिन दोनों ने एकदूसरे के बारे में बहुत कुछ जान लिया. दोस्ती हुई तो फोन पर बात करने का सिलसिला शुरू हो गया. सेजल के मोबाइल पर हिमांशु के फोन काल्स आने लगे. दोनों कईकई घंटे बात करते, मगर फिर भी दिल नहीं भरता. अब हिमांशु प्रतिभा की गैरमौजूदगी में सेजल के घर भी आनेजाने लगा.

एक दिन जब हिमांशु सेजल के घर आया तो हिमांशु ने सेजल को बांहों में भर कर उस के होंठोें को चूम लिया, ‘‘अब ये दूरियां बरदाश्त नहीं होतीं, तुम से एक पल भी अलग होने को दिल नहीं करता.’’

‘‘तो फिर मुझ से शादी क्यों नहीं कर लेते हो?’’

‘‘वह तो मैं करूंगा ही यार, मगर शादी के बाद रोमांस का मजा किरकिरा हो जाता है. इसलिए सोचता हूं कि पहले जी भर कर सैरसपाटा और मस्ती कर ली जाए. फिर शादी की बात सोचेंगे.’’

प्रेमी हिमांशु के मनोभावों को जान कर सेजल प्रसन्नता से खिल उठी. उसे हिमांशु दुनिया का सब से अच्छा इंसान नजर आने लगा. कुछ दिनों बाद सेजल का जन्मदिन था. उस दिन सेजल ने हिमांशु के सिवाय किसी को इनवाइट नहीं किया. यहां तक कि अपनी खास सहेली हिमानी को भी नहीं बुलाया.

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मिल गए हिमांशु और सेजल

तन्हा कमरे में दो जवां दिल, कोई रोकनेटोकने वाला भी नहीं था, ऐसे में मन भटकते कितनी देर लगती है. फिर हिमांशु ने सेजल को बांहों में भींच कर प्यार करना शुरू कर दिया. लेकिन सेजल ने किसी तरह खुद पर काबू किया और हिमांशु को भी बेकाबू होने से रोक लिया.

दोनों ही सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते थे. सोशल मीडिया ऐप ‘इंस्टाग्राम’ पर सेजल ने हिमांशु के साथ अपनी रिलेशनशिप को ले कर एक पोस्ट डाली, जिस में वह हिमांशु के साथ एक सेल्फी में  दिख रही थी. उस में उस ने हिमांशु से अपने प्यार का इजहार किया था और अपने रिलेशनशिप के 2 साल 7 महीने पूरे होने पर खुशी जताई थी.

ये पोस्ट सेजल के मित्रों के अलावा और अन्य लोगों ने भी देखी. यह बात सेजल की मां प्रतिभा तक भी पहुंच गई. प्रतिभा ने सेजल से बात की और उसे गुस्से में डांटा भी.

लेकिन कुछ सोचने के बाद प्रतिभा ने सेजल को समझाया, ‘‘मानती हूं कि तू उम्र के उस दौर से गुजर रही है, जहां किसी भी लड़के के प्रति आकर्षित हो सकती है. लेकिन एक सच यह भी है कि उम्र के इस दौर में दिमाग से ज्यादा दिल से काम लिया जाता है. जैसे तूने सिर्फ अपने दिल की सुनी, दिमाग की नहीं. दिमाग की सुनती तो तू उसे अपने लिए नहीं चुनती.’’

‘‘मौम, हिमांशु में क्या खराबी है. गुड लुकिंग है, हैंडसम है, मेरी उस की जोड़ी बहुत अच्छी लगती है.’’ सेजल ने खुश होते हुए अपने दिल की बात बता दी.

‘‘बेटा, केवल खूबसूरती और प्यार से जिंदगी में काम नहीं चलता. अच्छी तरह से जिंदगी गुजारने के लिए आमदनी का अच्छा जरिया होना चाहिए, जो उस के पास नहीं है. न नौकरी न कामधंधा और न ही रहने का खुद का कोई ठिकाना. ऐसे में वह तुझे क्या खुश रखेगा.’’

अगले भाग में पढ़ें- वाहिद ने पीछे से लोहे के पाइप से हिमांशु के सिर पर प्रहार किया

प्यार में मिला धोखा: भाग 3

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

पहले नहीं सोचा था

मां की बात सुन कर सेजल सोच में पड़ गई. वह सोचने लगी कि उस की मां कह तो सही रही हैं. प्यार के रंग और जोश में वह यह कुछ सोच ही न सकी कि आगे कैसे उस के साथ जिंदगी कटेगी. ऐसे में उस ने हिमांशु से दूर होने का फैसला कर लिया.

अब वह हिमांशु से कटने लगी. जबकि हिमांशु उस से शादी करने का दबाव बना रहा था. सेजल उस से दूर होने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हिमांशु उस का पीछा छोड़ने को ही तैयार न था. तब प्रतिभा एक दिन हिमांशु के घर पहुंच गई. उस ने हिमांशु की मां को न सिर्फ अपने बेटे को समझाने की हिदायत दी बल्कि काफी भलाबुरा भी कहा.

इसी दिन हिमांशु के घर वालों को उस के प्रेम संबंधों का पता चला. मां ने हिमांशु को समझाया भी कि वह सेजल से दूर रहे. लेकिन प्यार में आकंठ डूबा हिमांशु सेजल से दूर होने की सपने में भी नहीं सोच सकता था.

हिमांशु के पीछा न छोड़ने पर मांबेटी उस से छुटकारा पाने का उपाय सोचने को मजबूर हो गईं. डा. प्रदीप ने प्रतिभा से तलाक के बाद दूसरी शादी कर ली थी, एक बेटा भी था. लेकिन इधर कुछ समय से वह फिर से प्रतिभा से मिलने उस के घर आने लगा था. रोजाना एकडेढ़ घंटे वह प्रतिभा के घर रुकता था. प्रदीप को भी हिमांशु के बारे में पता था, वह भी उस से काफी गुस्सा था.

प्रदीप और प्रतिभा का एक प्रौपर्टी डीलर काफी करीबी था. उस का नाम गुफरान अख्तर था और शहर कोतवाली के चौक मोहल्ले में रहता था. दोनों ने गुफरान से बात की और उस से हिमांशु को ठिकाने लगाने में मदद मांगी. गुफरान का एक साथी था वाहिद खान. वाहिद चांदा थाने के अंतर्गत कोथरा गांव में रहता था. वह चांदा थाने का हिस्ट्रीशीटर था.

गुफरान ने वाहिद से बात की और उसे प्रदीप और प्रतिभा से मिला कर पूरी डील फाइनल करा दी. हत्या की सुपारी की रकम 50 हजार रुपए तय हुई जो काम होने के बाद दी जानी थी. हिमांशु की हत्या करने का पूरा तानाबाना बुना गया. इस में प्रतिभा ने अपने नौकर सद्दाम को भी शामिल कर लिया.

3 दिसंबर, 2020 की शाम सेजल ने फोन कर के हिमांशु को अपने घर बुलाया कि उस के मम्मीपापा उस से बात करना चाहते हैं. हिमांशु अपने दोस्त के साथ प्रतिभा के घर पहुंचा. करीब पौने 7 बजे वह दोस्त को बाहर खड़ा कर के अंदर चला गया. वहां प्रदीप, प्रतिभा, सेजल, नौकर सद्दाम के साथ गुफरान और वाहिद मौजूद थे.

बातचीत शुरू हुई. बातचीत के दौरान ही वाहिद ने पीछे से लोहे के पाइप से हिमांशु के सिर पर प्रहार किया. प्रहार इतना तेज था कि हिमांशु के मुंह से चीख भी न निकल सकी. फिर ताबड़तोड़ सिर व शरीर पर कई प्रहार कर के वाहिद ने हिमांशु की हत्या कर दी. बाकी सभी उस की हत्या अपनी आंखों के सामने होते देखते रहे.

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हिमांशु को मारने के बाद उस के कपड़े उतार कर सद्दाम को पहनाए गए. हिमांशु की तरह ही वेशभूषा बना कर उस की ही तरह सद्दाम रात 8:22 बजे घर से निकला, जिस से लगे कि हिमांशु घर से निकला है.

सभी को पता था कि बाहर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. उन में हिमांशु की घर में आते हुए फोटो कैद हुई होगी. ऐसे में उन पर ही पुलिस का शक जाएगा. इस से बचने के लिए ही यह रास्ता अपनाया गया.

देर रात वाहिद ने अपनी स्कोडा कार में हिमांशु की नग्न लाश डाली. फिर गुफरान के साथ कार से बाराबंकी के लोनी कटरा थाना क्षेत्र के अखैयापुर गांव के पास एक नाले में हिमांशु की लाश फेंक दी और वापस आ गए.

वाहिद को मिल गई रकम

अगले दिन वाहिद को अपनी तय सुपारी की रकम भी मिल गई. लेकिन तमाम होशियारी के बाद भी उन सब का गुनाह कानून की नजर में आ ही गया. आवश्यक पूछताछ के बाद पुलिस ने डा. प्रदीप को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

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19 दिसंबर को इंसपेक्टर भूपेंद्र सिंह ने गुफरान अख्तर और वाहिद खान को नगर कोतवाली के पयागीपुर चौराहे से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब दोनों स्कोडा कार से कहीं भागने की फिराक में थे. उन के पास से हत्या में प्रयुक्त लोहे का पाइप और स्कोडा कार बरामद हो गई.

उन दोनों ने हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. आवश्यक पूछताछ के बाद गुफरान और वाहिद को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक प्रतिभा, सेजल और नौकर सद्दाम पुलिस की पकड़ से दूर थे. पुलिस सरगर्मी से उन की तलाश कर रही थी. उन तीनों पर पुलिस ने ईंनाम भी घोषित कर दिया था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: प्यार में मिला धोखा

मैं Graduation का स्टूडेंट हूं एक जॉब का ऑफर मिला है, क्या मुझे जॉब करना चाहिए?

सवाल

मैं इस साल कालेज से इंग्लिश औनर्स में ग्रैजुएट होने वाला हूं. मेरा एक दोस्त अपना स्टार्टअप शुरू करने वाला है जिस में वह मुझे अच्छी पोजिशन पर नौकरी देने वाला है. ग्रैजुएट होते ही मैं उस के साथ इस काम में मदद कर सकता हूं. लेकिन, मैं इस बात को ले कर उलझन में हूं कि क्या मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करनी चाहिए या नौकरी के इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए. दोनों में से मुझे किसे चुनना चाहिए.

बिना किसी दोराय के आप को अपनी पढ़ाई पूरी करनी चाहिए. नौकरियां आप को भविष्य में बहुत मिलेंगी और यकीनन आप की काबिलीयत पर मिलेंगी, लेकिन पढ़ाई का यह मौका फिर मिले न मिले. अभी आप को अपनी पढ़ाई पूरी करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

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जवाब

आप यदि नौकरी में लग जाते हैं तो कुछ महीने तो आप को सब अच्छा लगेगा लेकिन फिर आप के टैलेंट से ऊपर आप की डिग्री को आंका जाएगा और यकीन मानिए, ग्रैजुएशन की डिग्री आप के बहुत ज्यादा काम नहीं आएगी. एक बार आप को पैसे कमाने की आदत लग गई तो फिर शायद आप के लिए दोबारा पढ़ाई की तरफ जाना मुश्किल भी हो सकता है. इसलिए आप पहले अपनी पढ़ाई पूरी कीजिए.

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रिंकू शर्मा हत्याकांड: धर्मजीवी होने से बचिए

पूरी दुनिया में सब से बड़ी बहस इस बात को ले कर होती रही है कि धर्म का मतलब क्या है और यह हमारी तरक्की में कितना जरूरी है? वैसे तो धर्म का साधारण सा मतलब है गुण. जैसे सूरज का धर्म है हमेशा जलते रहना, क्योंकि जिस दिन उस की आग शांत हो जाएगी, उस का वजूद ही नहीं रहेगा. वैसे ही धरती का गुण है सूरज के चारों ओर चक्कर काटना. धरती थमी और खेल खत्म.

इसी तरह किसी इनसान का धर्म है इनसानियत. चूंकि धरती पर फिलहाल वह सब से ज्यादा दिमाग वाला प्राणी माना जाता है और अपने अच्छेबुरे के साथसाथ दूसरे प्राणियों की भलाईबुराई को समझने की ताकत रखता है, इसलिए उस से उम्मीद की जाती है कि वह धरती पर इस तरह बैलेंस बनाए कि तरक्की के साथसाथ आबोहवा के साथ कोई खिलवाड़ न हो.

यह धर्म का स्वीकार रूप है. लेकिन इनसान ने खासकर तथाकथित धर्मगुरुओं अपने मतलब को साधने के लिए और आम लोगों में ‘अनदेखे ईश्वरीय भय’ के चलते धर्म को उन की जाति, समाज, रीतिरिवाजों से जोड़ कर इतना विकृत कर दिया है कि दुनिया में इसी धार्मिक दबदबे के लिए सब से ज्यादा खूनखराबा हुआ है. अब तो दुनियाभर की सरकारें भी इन धर्मगुरुओं की दासी जैसी बन गई हैं.

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भारत में जब से मोदी सरकार बनी है, तब से यहां ‘हिंदू देश’ के नाम पर यह भरम फैलाया जा रहा है कि अगर आज हिंदू नहीं जागे तो कट्टर मुसलिम कल को उन्हें खदेड़ कर देश पर कब्जा कर लेंगे.

इसी के चलते अब लोग कर्मजीवी, दयाजीवी, परोपकारजीवी बनने के बजाय हिंदूजीवी, मुसलिमजीवी, मंदिरजीवी, मसजिदजीवी यहां तक कि नफरतजीवी बन रहे हैं. दुख की बात है कि इस धार्मिक उन्माद में देश का भविष्य कहे जाने वाले नौजवान भी थोक के भाव में भागीदार बन रहे हैं.

हालिया रिंकू शर्मा हत्याकांड से इस बात की गहराई को समझते हैं. दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में 11 फरवरी, 2021 को 25 साल के रिंकू शर्मा की कुछ लोगों ने हत्या कर दी थी, जिस के बाद वहां तनाव का माहौल बन गया. वजह, रिंकू शर्मा एक हिंदू धार्मिक दल का कार्यकर्ता था और उस की हत्या में जिन 5 लड़कों को पुलिस ने पकड़ा वे मुसलिम समुदाय से थे. हालांकि वे सब एकदूसरे को पहले से जानते थे, पर एक झगड़े के बाद यह कांड हो गया.

इस के बाद धर्मजीवियों की ऐंट्री हुई. विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने दावा किया कि रिंकू शर्मा की इसलिए चाकू मार कर हत्या कर दी गई, क्योंकि वह अयोध्या में बन राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा कर रहा था, जबकि डिप्टी पुलिस कमिश्नर, आउटर दिल्ली ने बताया कि इस मामले की जांच में अब तक पता चला है कि हत्या एक कारोबारी विवाद के चलते हुई थी.

नफरती बयानबाजी

रिंकू शर्मा के साथ जो हुआ वह एक जघन्य अपराध है और कुसूरवारों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए, पर इस पूरे मामले में जिस तरह धार्मिक उन्माद को भड़काने की कोशिश की गई, वह चिंता की बात है.

इसी का नतीजा था कि इस हत्याकांड के अगले दिन आरोपी लड़कों के घर पर तोड़फोड़ की गई, पथराव हुआ. हालांकि, इलाके का बिगड़ता माहौल देख कर आरोपियों के परिवार वाले पहले ही घर छोड़ कर जा चुके थे.

इतना ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी की भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा और दिल्ली भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने रिंकू शर्मा के परिवार वालों से मुलाकात की. साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि घर में घुस कर वारदात को अंजाम देने से साफ हो जाता है कि हमलावरों के हौसले कितने बुलंद थे.

भाजपाई कपिल मिश्रा ने कहा कि इस मामले की जांच आतंकी हमले के तौर पर होनी चाहिए, क्योंकि घर में घुस कर मारा गया है. अपराधियों को तो फांसी होनी चाहिए. उन लोगों को भी सजा मिलनी चाहिए जिन्होंने अपराधियों के दिमाग में इतना जहर भरा है कि जो राम मंदिर के नाम पर चंदा मांगे उस की घर में घुस कर हत्या कर दो.

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भारतीय जनता पार्टी और तमाम हिंदू दलों की बात तो छोड़िए, खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली आम आदमी पार्टी, जिस की सरकार दिल्ली में है, के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली में रिंकू शर्मा के मांभाई कह रहे हैं कि ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने पर रिंकू शर्मा की हत्या की गई. इस की जांच होनी चाहिए. इस से यह नजर आ रहा है कि क्या ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वाले अब सुरक्षित नहीं हैं? क्या दिल्ली और भारत में ‘जय श्रीराम’ का नारा नहीं लगा सकते? क्या उन की हत्या की जाएगी?

सवाल उठता है कि देश को धार्मिक नारों की जरूरत ही क्यों है? सार्वजनिक जगह पर ‘जय श्री राम’ या ‘अल्लाह हू अकबर’ या फिर दूसरे धर्मों के नारे लगाने से किस का भला होगा? एक परिवार ने अपना 25 साल का जवान लड़का खोया है. अब उस के कितने ही करोड़ का चंदा जमा कर लो, दुख तो कम नहीं होगा. इसी तरह जिन 5 लड़कों को पुलिस ने पकड़ा है, वे भी जेल में कोई शानदार जिंदगी नहीं जिएंगे और उन का परिवार बाहर कोर्टकचहरी के चक्कर काटेगा.

हासिल क्या

इस सब से किसे और क्या हासिल होगा? अगर इस हत्याकांड को धार्मिक रंग न दिया जाता तो यह एक आम अपराध बन कर रह जाता, जो धर्म के ठेकेदारों को रास नहीं आता. यह पहला मामला नहीं, बल्कि पहले भी ऐसे हत्याकांडों को धार्मिक रंग दिया गया है, जिस से माहौल को टैंशन से भरा बना दिया जा सके, फिर अपने फायदे की रोटियां इस की आंच में सेंकी जा सकें.

पर आज की जरूरतें क्या हैं? क्या मंदिर, मसजिद और उन पर पलने वाले परजीवियों की ताकत बढ़ाने से देशदुनिया का भला होगा? बिलकुल नहीं, क्योंकि जिस देश ने धर्म की कट्टरता को अपनी जनता पर थोपा है, वे आज की तारीख में खंडहरजीवी बने हुए हैं. हमें रिंकू शर्मा जैसे नौजवानों को देश की तरक्की के कामों में आगे देखना है न कि किसी धार्मिक स्थल को बनाने के लिए परची काटने का मोहरा बना कर उन का भविष्य ही अंधकार में डाल दिया जाए. यह बात हर धर्म के लोगों पर लागू होती है.

याद रखिए, सियासत करने वालों ने अपने फायदे के लिए धर्म को हमेशा मजबूत ढाल बनाया है, ताकि उन की दालरोटी चलती रहे. अब हमें दिमाग लगाना है कि हमारा धर्म क्या है? सूरज की तरह जलते रह कर इस कायनात को बचाए रखना या फिर समय से पहले बुझ कर दुनिया को अंधेरे में धकेलना? धर्मजीवी तो यही चाहते हैं कि आम लोगों के दिलोदिमाग पर यह अंधेरा छाया रहे, ताकि उन के घरों में उजाला रहे.

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अमिताभ बच्चन ने लिखा ‘मे डे’ एक्ट्रेस आकांक्षा सिंह लिखा को ये लेटर

सदी के महानायक सुपरस्टार अमिताभ बच्चन आज भी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए आदर्श हैं.बौलीवुड में कदम रखने के साथ ही हर कलाकार की पहली तमन्ना अमिताभ बच्चन संग काम कर परदे पर आने की होती है.

ऐसी ही एक सपना अभिनेत्री आकांक्षा सिंह का भी था. फिजियोथेरेपिस्ट की पढ़ाई करते करते सीरियल ‘‘ना बोले तुम ना बोले की दुल्हनिया’ के अलावा तेलगु फिल्मों ‘मल्ली राव’और ‘देवदास’ की. गत वर्ष कन्नड़, मलयालम, हिंदी, तमिल व तेलगू भाषा की फिल्म ‘पहलवान’’ में सुदीप के साथ नजर आयी थीं.इन दिनों वह एक तरफ तमिल फिल्म ‘‘क्लैप’’ को लेकर उत्साहित है, जो कि पांच जून 2021 में रिलीज होगी, जिसमें उनके साथ प्रकाश राज, क्रिषा कुरूप व आधी जैसे कलाकार हैं. तो दूसरी तरफ अजय देवगन के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘मे डे’ को लेकर उत्साहित हैं.

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फिल्म ‘‘मे डे’’ ऐसी फिल्म है, जिसने अभिनेत्री आकांक्षा सिंह का सबसे बड़ा सपना सच कर दिया है.क्योंकि इस फिल्म में वह अमिताभ बच्चन संग परदे पर नजर आने वाली हैं. हाल ही में मुंबई शहर में इस फिल्म की शूटिंग के दौरान आकांक्षा सिंह सातवे आसमान पर थी, ऐसा होने का एक और कारण था.

जी हां! आकांक्षा सिंह का सपना सच में बदलने के साथ ही उनके लिए दूसरी खुशी तब लेकर आया, जब उन्हें अमिताभ बच्चन का एक हस्तलिखित पत्र मिला, जिसे उन्होंने हिंदी में अपनी विशिष्ट काव्य शैली में लिखा था.

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अभिनेत्री आकांक्षा सिंह ने अपने उत्साह और कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया. उन्होने अमिताभ बच्चन के पत्र की एक तस्वीर को साझा करते हुए लिखा, ‘‘मुझे आपसे अमिताभ बच्चन साहब से यह सुंदर हस्तलिखित पत्र प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है. यह एक सपने जैसा है. आपके स्नेह और विनम्रता के लिए धन्यवाद. मैं और कुछ ज्यादा नही मांग सकती. आपको एक्टिंग करते हुए देखना और एक फ्रेम में साथ मे दिखना यह मेरे लिए परियो की कहानी जैसा है. मैं ईश्वर से प्राथना करती हूं कि आपके साथ काम करने और भी मौके मुझे मिले. जैसे कि मेरा विश्वास है, यह  तो सिर्फ ट्रेलर है. पिक्चर तो अभी बाकी है..’’

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Saif Ali Khan बनेंगे क्वाडफादर, बहन Saba ने किया ये पोस्ट

करीना कपूर खान के घर जल्द ही नया मेहमान आने वाला है. एक्ट्रेस की डिलीवरी का काउंटडाउन शुरु हो चुका है.  हाल ही में सैफ की बहन सबा ने अपनी इंस्टा स्टोरी में एक काउंटडाउन पोस्ट किया था, जिसमें सैफ़, करीना और तैमूर की तस्वीरों के साथ सैफ़ की QuadFather वाली फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की थी.

उन्होंने अपने इंस्टा स्टोरी पर सैफ अली खान की फोटो शेयर किया और लिखा- ‘द क्वाडफादर’, जिसका मतलब है चार बच्चों के पिता.

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खबरों के अनुसार, करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) की ड्यू डेट 15 फरवरी थी. जिसके कारण अब अब किसी भी वक्त करीना गुड न्यूज सुना सकती है. फैंस को भी इस गुड न्यूज का बेसब्री से इंतजार हैं.

बता दें कि सैफ अली खान के चौथे बच्चे के पिता बनने वाले हैं. सैफ अली खान और करीना कपूर ने 16 अक्टूबर 2012 को शादी की थी. दोनों के तैमूर अली खान नाम का एक बेटा है. सैफ ने पहली शादी अभिनेत्री अमृता सिंह से की थी, जिनसे उनके दो बच्चे सारा और इब्राहिम हैं.

 

वर्क फ्रंट की बात करें तो  करीना कपूर खान  ने अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान ही आमिर खान के साथ अपनी आने वाली फिल्म लाल सिंह चड्ढा की शूटिंग भी पूरी की थी. इसके अलावा वह जल्द ही फिल्म ‘तख्त’ की शूटिंग शुरू करेंगी.

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जिंदगी की दास्तान: थर्ड जेंडर की एक किताब

किन्नर… थर्ड जेंडर.. भी हमारे आपकी तरह संवेदनशील है. वह भी भाव प्रवण है और कहानी कविता लेख लिख सकता है. यह सच बड़े ही शिद्दत के साथ आप “जिंदगी की दास्तां” में महसूस कर सकते हैं.

किन्नर की  जिंदगी  किताब की शक्ल में प्रकाशित होकर आ गई है. और उसमें साहित्य की विधा में अपने भाव उकेर गए हैं.  थर्ड जेंडर की सच्ची दास्तानं आप इस किताब में पढ़ सकते हैं .

दरअसल, छत्तीसगढ़ में किन्नरों ने ‘जिंदगी की दास्तान’ नाम से देश की पहली किताब प्रकाशित होकर आई  है. इस महत्वपूर्ण किताब में थर्ड जेंडर समुदाय के सदस्यों की गद्य और पद्य और संस्मरण संकलित हैं. सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है कि इसकी रचना छत्तीसगढ़ समेत पूरे भारत के तृतीय लिंग समुदाय ने की है.

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आत्मा अभिव्यक्ति और पीड़ा

“जिंदगी की दास्तान” किताब की संपादक किन्नर विद्या राजपूत के मुताबिक – जिंदगी की दास्तान किताब में आप हमारे समुदाय की आत्म-अभिव्यक्ति, संवेदना, पीड़ा, आशा, आकांक्षा और अनगिनत संभावना और ना जाने कितने ही ऐसे सहज और जटिल भावों से  रूबरू होंगे. किताब में संकलित रचनाएं पढ़कर चेतन और अचेतन मन में कहीं ना कहीं यहां भाव हिलोरे लेने लगेगा कि थर्ड जेंडर समुदाय भाव शून्य नहीं है. विचार शून्य नहीं है, हममें भी लेखन क्षमता है. किताब में आप पढ़ सकते हैं हमारा बचपन और जिंदगी की कटीले रास्तों पर चलने का दर्द .

हम भी समाज के अभिन्न अंग है और अपनी भूमिका इमानदारी से निभाने का प्रयास करते हैं. लेकिन जब देखते हैं कि वैचारिक यात्रा के लिए गली से लेकर सड़क तक सब बंद है, तो मन मसोस कर रह जाते है दुख होता है. संपादक विद्या राजपूत के अनुसार हमारे समुदाय की यह रचनाएं समाज के समक्ष उनके अंतर द्वंद को उद्घाटित करेंगी और लघुतम ही सही  सहृदयता का भाव पुष्पित करेगी.

 किताब:कोरोना काल में हुई तैयार

थर्ड जेंडर, किन्नर और लेखन यह दोनों ही बातें एकदम विपरीत जान पड़ती है. समाज में यह भावना घर कर गई है कि किन्नर सिर्फ जीविकोपार्जन के लिए नाचता गाता है और समाज की खुशी में शामिल होकर अपनी भूमिका निभाता है.

मगर धीरे-धीरे ही सही इस सोच में तब्दीली आ रही है देश के कानून निर्माताओं ने भी थर्ड जेंडर के दर्द को महसूस किया है और उन्हें सम्मान देना प्रारंभ किया है. थर्ड जेंडर राधा के मुताबिक छत्तीसगढ़ सरकार से बिहार सरकार की तर्ज पर अपेक्षा है कि सरकारी नौकरियों में भी हमें आरक्षण दें.

वहीं किताब की संपादक विद्या राजपूत के मुताबिक यह किताब दरअसल देश भर के लेखकीय हमारे समुदाय के कलमकारों का एक सुंगधित पौधे के समान है जिसमें कोरोना काल  के समय का दर्द और जीवन की त्रासदी अंकित है.

“जिंदगी की दास्तान” किताब का प्रकाशन विकास प्रकाशन, उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया है जोकि विभिन्न प्लेटफार्म पर उपलब्ध है.

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कौन है विद्या राजपूत!

“जिंदगी की दास्तान” पुस्तक की संपादक विद्या राजपूत छत्तीसगढ़ सरकार ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की सदस्य  हैं और  मितवा समिति की अध्यक्ष भी. आप पेशे से एक ब्यूटीशियन है.

विद्या राजपूत के मुताबिक  बचपन बहुत मुश्किल रहा, शुरू में  लोग चिढ़ाते थे, मैं लड़कियों के साथ खेलती थी, कक्षा चार-पांच तक ठीक चला लेकिन कक्षा छह-सात में पहुंचते ही लोगों की जुबान बदली और मैं लोगों के कटाक्ष से डरने लगी. आगे  स्कूल न जाने के बहाने बनाने लगी. मगर मेरी शिक्षा जारी रही मैं ने एम ए तक शिक्षा प्राप्त की है.  मुझे अक्सर घुटन महसूस होती थी, मेरे मन में सवाल उठते कि मैं हूँ क्या? मेरा शरीर लड़कों का है और भावनाएं लड़कियों की ऐसा क्यों? मेरी मां और भाइयों को लगता था कि यदि मैं लड़कियों के साथ न रहूं, उनके साथ न खेलूं तो शायद सुधर जाऊं. मेरे भाई  मुझे लड़कियों के साथ देख लेते तो पीटते  थे मगर मैंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया और निरंतर नए रास्ते तलाशते हुए आगे बढ़ने का प्रयास कर रही हूं.

Crime News: उधार के पैसे और हत्या

अपने परिजनों के राजनीतिक रसूख के चलते कोई बिगड़ैल नवाब अगर पैसे उधार लेकर आंखें दिखाने लगे, पैसे देना ना चाहे, तो उसका परिणाम जतिन राय जैसा हो सकता है.

रायपुर के खमताराई थाना इलाके में जतिन राय अभी नाबालिग ही था. उम्र थी 20 वर्ष और पार्षद अंजनी विभार का भतीजा था. चाचा भी प्रदेश में सत्ता में धमक रखते हैं.

राजधानी रायपुर के थाना खम्हारडीह इलाके में एक सूटकेस से जतिन राय नाम के युवक की लाश मिली . पुलिस इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले प्रदीप नायक, सुजीत तांडी और केवी दिवाकर को गिरफ्तार तो कर लिया मगर संपूर्ण घटनाक्रम को देखें तो जहां यह घटना एक बड़ा संदेश देती है कि अगर परिजन राजनीति में है, प्रभावशाली है तो बच्चे किस तरह “बिगड़े नवाब” बन सकते हैं. दूसरी तरफ पुलिस हत्या जैसे गंभीर अपराध पर भी कैसा लचीला रुख अपनाती है और अगर राजनीतिक प्रभाव ना हो मुख्यमंत्री तक पहुंच नहीं हो तो कुंभकर्णी नींद में सोती रहती है.

अपनी मौत का सामान लेकर आया जतिन!

आरोपियों ने जो घटनाक्रम पुलिस के समक्ष बयां किया है उसके अनुसार जतिन राय को कहा गया था कि अपने साथ एक बड़ा सुटकेश ट्रॉली बैग लेकर आना. क्योंकि हमें कहीं बाहर जाना है. जतिन ने अपनी मां से बैग मांगा, उन्होंने बैग देने से मना कर दिया.दूसरी तरफ आरोपी बार-बार उसे कॉल कर बुला रहे थे.
जतिन ने आखिरकार अपने पड़ोसी अभय से एक बड़ा सूटकेस लिया और प्रदीप से मिलने के लिए निकला.आरोपी प्रदीप के बताए स्थान पर पहुंचने के बाद थोड़ी देर में अपने 20 हजार रुपए लौटाने को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ. फिर प्रदीप ने अपने साथियों के साथ मिलकर जतिन की गला दबाकर हत्या कर दी. उसकी लाश को उसी सूटकेस में भर दिया जिसे लेकर वह पहुंचा था. वे आरोपी जतिन का स्कूटर लेकर चंडीनगर में सुनसान इलाके के कुएं में लाश भरे बैग को डाल कर आराम से अपने अपने घर चले गए.

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राजनीतिक रसूख!

9 फरवरी 2021को जतिन के लापता होने की शिकायत खमतराई थाने में परिवार ने दर्ज करवाई गई . मगर 5 दिनों तक पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही जहां परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. थाने तक महापौर एजाज मेंबर और पर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा आ पहुंचे. मामला मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दरबार तक पहुंचा और पुलिस को तत्परता से आरोपियों को खोजने का निर्देश मिला.और कहते हैं न, जब पुलिस अपने पर आ जाए तो आरोपी बच नहीं सकते. इस घटनाक्रम में भी यही हुआ सख्ती बरतने पर प्रदीप, उसका साथी सूरज और केवी दिवाकर पुलिस के समक्ष सच स्वीकार कर लिया.
दरअसल, करीब एक महीने पहले हत्या के आरोपी प्रदीप ने अपनी बाइक गिरवी रखी थी. इसके बदले में उसे 30 हजार रुपए मिले थे. इसमें से 20 हजार रुपए मांगने पर प्रदीप ने जतिन को दिए थे. और अब इन रुपयों को जतिन लौटा नहीं रहा था. जब भी प्रदीप पैसा मांगता तो जतिन बहाने बनाने लगता और ऐसा व्यवहार करता कि रुपए तो नहीं मिलेंगे जो करना है कर लेना. हालांकि जतिन के परिवार वालों का कहना है कि प्रदीप, जतिन से चिढ़ता था, इसलिए उसकी हत्या की और अब झूठ ही रुपयों की देनदारी की बातें कर रहा है.

“क्राइम पेट्रोल” देख बनाया प्लान

इस सनसनीखेज हत्याकांड के संदर्भ में पुलिस ने हमारे संवाददाता को बताया कि इस हत्याकांड के पीछे जहां पैसों की लेनदेन थी, रुपए नहीं मिलने से नाराज प्रदीप को “क्राइम पेट्रोल” का एक एपिसोड देखकर यह सुझा कि क्यों ना जतिन राय को कुछ इस तरह सजा दे दी जाए. पुलिस के समक्ष यह भी सच सामने आ गया है कि प्रदीप घटना से पहले जतिन को लगातार फोन कर रहा था, वो उसे बुला रहा था, जतिन जाने से इनकार कर चुका था. मगर वह बार-बार दोस्ती की दुहाई दे रहा था. जतिन जब प्रदीप के पास भनपुरी स्थित मकान में पहुंचा तो यहां दोस्तों ने उसका स्वागत किया और मिलकर शराब पार्टी की. प्रदीप ने जानबूझकर जतिन को ज्यादा शराब पिलाई. प्रदीप ने तीव्र आवाज में म्यूजिक चला रखा था ताकि किसी को कोई आभास ना मिले. इसके बाद हत्यारों ने मौका मिलते ही उसकी गला घोंट कर हत्या कर दी और जो सूटकेस जतिन लेकर आया था उसी में उसके शव को डालकर खम्हारडीह में फेंक दिया गया.
तीन दिन बाद कचरा बीनने वाले एक बच्चे की नजर कुएं में पड़े बैग और उसमें से निकले पैरों पर पड़ी थी. और मामला पुलिस तक पहुंचा. मगर पुलिस जांच में उदासीन रही जब जतिन राय के चाचा और परिजनों ने हंगामा किया तब जाकर पुलिस के उच्च अधिकारियों के कान में जूं रेंगी और मामले की जांच में में तेजी आई और अंततः मामले का खुलासा हुआ.

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