Women’s Day Special- पथरीली मुस्कान: भाग 1

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

बचपन में ही दानव के हाथों इस राजकुमारी को भी मसल दिया गया था.

बाप और बेटी के ठहाकों की आवाज़ें किचन तक आ रहीं थी,कभी रिया फुसफुसा कर कुछ कहती तो कभी ये धीरे से ये  कुछ कहते ,और फिर अनवरत हँसी का फव्वारा छूट पड़ता.

बापबेटी अपने हँसी के समंदर में गोते लगा ही रहे थे ,कि गौरी  भी कॉफी देने कमरे में गयी तो रिया  गौरी से लिपटते हुए बोली

“अरे….माँ कभी हमारे साथ भी बैठ लिया करो और थोड़ा हँस भी लिया करो ….

आप अपने होठों को कैसे सीये रहती हो  ,मेरा तो मुंह ही दर्द हो जाये और हाँ….माँ ….आपको तो अच्छे अच्छे जोक पर भी हँसी नहीं आती है ….कैसे माँ….तुम कभी हँसती क्यों नहीं हो….?”

रिया ने बात खत्म करी तो उसके समर्थन में ये भी उतर आये , और हसते रहने के महत्व पर पूरा लेक्चर ही दे डाला.

पर फिर भी गौरी चुप ही रही रिया ने  अपने पापा की ओर देखा पर गौरी के मौन ने सब कुछ कह डाला ,और शायद ये बात विराम भी समझ गए ,इसीलिये तुरंत ही बात बदलकर रिया से उसके कॉलेज की राजनीति पर बात शुरू कर दी.

रिया जब भी कॉलेज से घर आती तो घर में ऐसा ही माहौल रहता ,पर उसके मासूम सवालों का उसके पास कोई जवाब नहीं होता,भला अपनी खमोशी और उदासी का क्या कारण बताती वह ,और अगर बताती भी तो पता नहीं रिया का क्या रिएक्शन होता गौरी के प्रति, इसलिए वह खामोश ही थी.

गौरी  दोबारा जब कमरे में गयी तब तक रिया टीवी पर “टॉम और जैरी ” कार्टून फिल्म देख रही थी और ठहाके लगाकर हँस रही थी,गौरी को रिया ने खींचकर अपने पास बैठा लिया और शिकायती लहज़े में माँ से बोली

“हंसो न माँ ,देखो कितना अच्छा और मजेदार कार्टून आ रहा है ,अरे….तुम तो हँसती ही नहीं, मिस सीरियस ही बनी रहती हो”

“अरे ….क्या …हँसना और न हँसना…मेरे लिए अब तू आ गयी है ना यही सबसे बड़ी खुशी की बात है …” इतना कहकर गौरी किचन में आकर काम करने लगी.

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अपने ही ख्यालों में खोयी हुई  थी गौरी कि बाहर वाले कमरे से रिया की आवाज़ आयी जो अपने पापा के साथ मार्किट होकर आने की बात कह रही थी.

मोटरसाइकिल स्टार्ट होने की आवाज़ गौरी भी सुन सकती थी

” हाँ ….मिस सीरियस ही तो हूँ ….ज़िंदा हूँ …यही क्या कम है….”बुदबुदा उठी थी गौरी

गौरी ने किचन की खिड़की खोली ,सामने ही अमरुद का पेड़ था ,इस समय उस पर अमरुद भी फल हुए थे .

तभी तोतों का एक झुण्ड उड़ता हुआ आया और अमरुद के पेड़ को लगभग ढक ही लिया और सारे  तोते एक ही साथ अमरुद खाने में मगन हो गए.

ये देख गौरी को अपने मायके वाले ‘मिठ्ठू मियाँ’ की याद आ गयी और अतीत के पन्ने पलटने लगे कितने प्यार से तो पापा उसके लिए लाए थे ये तोता,और हाँ वो साथ में सुनहरा सा पिंजरा भी तो लाये थे ,जिसे देख कितना खुश हुई थी गौरी,पिंजरे में रख सारा दिन घूमती , खाने  को अमरुद और हरी मिर्च .

हरी मिर्च खाने से मिठ्ठू मियाँ  जल्दी ही राम राम बोलने लगेगा और संतोषी चाची वाला मिठ्ठू तो उनका नाम भी रटता था .

पर जब एक दिन संतोषी चाची का मिठ्ठू पिजरा खुला पाकर उड़ गया तबसे वे दुखी होकर यही कहने लगी

“अरे….इन पंछियन की जात तो बड़ी बेवफा होत है ,इनकी आँखिन में कोई प्यार ममता नाही ,एक बार उडि पावें ,फिर नाइ आवै के”

पर संतोषी चाची की इन बातों से गौरी सहमत ना होती ,उसे तो यही गुमान था कि चाहे जो कुछ हो पर उसका मिठ्ठू मियाँ तो उसको छोड़कर कहीं नहीं जा सकता.

मिठ्ठू मियाँ अब राम-राम भी बोलने लगा था और गौरी -गौरी भी ,स्कूल से आने पर गौरी अपने मिठ्ठू के पास ही जाती और खूब खेलने के बाद ही उसके पास से हटती थी.

पर उस दिन जब गौरी स्कूल से लौटी तो अम्मा और पापा भागे जा रहे थे ,गौरी के पूछने पर ये ही बताया कि गांव के कोने पर रहने वाले सरवन की मौत हो गयी है ,अभी बस वहीँ जाकर आते हैं तू घर पहुँच और रोटी पानी खा ले जाकर .

गौरी घर आयी तो मिठ्ठू मियाँ का पिंजरा खाली था, वह अपना बस्ता वहीँ गिरा कर दौड़ी और पिंजरा हाथ में ले मिठ्ठू-मिठ्ठू चिल्लाकर इधरउधर भागने लगी.

“अरे तेरा मिठ्ठू मेरे यहां उड़कर आ गया है,ले…ले आकर “संतोषी चाची के पति बोल रहे थे

“क्या….चाचा …मिठ्ठू तुम्हारे यहाँ आ गया है …कहाँ …है ,कहाँ है”कहते कहते चाचा के आँगन में आ गयी थी गौरी

“हाँ …वो देख …आँगन के कोने वाली दीवार के ऊपर”

“कहाँ ….मुझे तो नहीं दिखता”

चाचा गौरी के पीछे आकर खड़े हो गए थे और गौरी के कंधे पर हाथ रखकर बोलने लगे

“अरे ….ध्यान से देख गौ…री…”चाचा के मुंह से अस्फुट से स्वर निकल रहे थे  और उनका हाथ गौरी के हाथ से फिसलता हुआ उसके सीने तक जा पहुंचा.

अपने मिठ्ठू को अब भी ढूंढ रही थी गौरी पर अब उसके साथ चाचा कुछ ऐसा करने लगे जो उसे भी असहज हो रहा था.

क्या …ये वही काम है जो कुछ समय पहले उसके स्कूल के मास्टर ने संध्या के साथ किया था……पर वो संध्या तो मर गयी थी…..तब तो मैं भी मर जाऊंगी.

Women’s Day Special: टिट फौर टैट

पूरा जोर लगा दिया था गौरी ने ,पसीनेपसीने हो गयी ,कसमसाई भी ,चिल्लाई भी पर चाचा की गिरफ्त से आज़ाद न हो सकी .

ये बात किसी को भी बताने पर चाचा उसके छोटे भाई को मार देगा…. ऐसा बोलकर चाचा ने मासूम गौरी के मुँह पर ताला लगा दिया था

और ये ले तेरा मिठ्ठू …बिल्ली ने मार दिया था इसे मरा हुआ मिठ्ठू हाथ में ले रोती ही जा रही थी गौरी, सही कारण क्या है ये तो किसी को पता ही ना था .

अम्मा पापा यही सोच रहे थे कि मिठ्ठू के मरने से लड़की दुखी है तभी रोये जा रही है ,पर तेरह साल की गौरी को इतना तो आभास हो ही गया था कि जो भी उसके साथ हुआ है वो सही नहीं है.

वो अपना दुख कहती भी तो कैसे क्योंकि  एक तरफ तो किसी को भी बता देने पर चाचा द्वारा छोटे भाई को मार दिए जाने का डर था और दूसरी तरफ जब संध्या की वो वाली बात सभी लोगों को पता चली थी तो भी गांव वाले संध्या के माँ बाबूजी को अजीब नज़रों से देखते थे और फिर गांव वालों ने अपनी बातों से ऐसे ताने कसे कि संध्या के घर वालों को अपना सामान ले गांव ही छोड़ जाना पड़ा.

गौरी के पापा गांव की साप्ताहिक बाज़ार में मसाले और थोड़ा मोड़ा गल्ले की दुकान लगाते थे,कल  अचानक हुयी बारिश ने उनके मसालों को भिगो दिया था ,आज धूप हुयी तो माँ ने उन मसालों को छत के ऊपर सूखने को फैला दिया था और गौरी से यही छत पर  बैठने को कहा .

आज सरवन की तेरवीं थी ,घर के लोग उसके घर भोज में गए हुए थे,पता नहीं ये बात संतोषी चाची के आदमी को कैसे पता चल गयी

“गौरी….ओ ..गौरी …अरे कहा है रे तू …

देख तो तेरे लिए दूसरा मिठ्ठू लाया हूँ

मैं 25 वर्षीया वर्किंग गर्ल हूं, अगले महीने मेरी शादी होने वाली है लेकिन मैं डरी हुई हूं क्योंकि मेरे ब्रेस्ट छोटे हैं ऐसे में स्तनों का आकार बढ़ाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल

मैं 25 वर्षीया वर्किंग गर्ल हूं. मेरी सुंदरता, अच्छी कदकाठी व खासी लंबाई लोगों को आकर्षित भी करती है लेकिन मेरे स्तन छोटे एवं लटके हुए हैं. अगले महीने मेरी शादी होने वाली है. मुझे डर है कि मेरे होने वाले पति को शायद यह अच्छा न लगे. मैं स्तनों का आकार बढ़ाने और इन्हें सुडौल करने के लिए क्या करूं?

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जवाब

व्यायाम या मालिश करने से स्तनों के माप में कोई परिवर्तन नहीं होता, ये सिर्फ स्तन के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं. पूर्णतया अर्धगोलाकार स्तन केवल औपरेशन या दूसरी तकनीकों द्वारा ही प्राप्त किए जा सकते हैं.

जहां तक आप की बात है, आप बेकार की चिंता कर रही हैं. महिला के स्तन के आकार का सैक्स के प्रति रुचि और यौनिक आनंद यानी अंतरसंबंध बनाने में आनंद लेने या देने की क्षमता से कोई संबंध नहीं होता है. आप की यौनिकता यानी सैक्सुअलिटी केवल आप के शरीर के कुछ हिस्सों तक ही सीमित नहीं है.

आप का पूरा शरीर आप के आकार, रंग, आकृति और वजन पर ध्यान दिए बिना भी यौनिक है. अपने पूरे शरीर का आनंद लें. चिंतामुक्त विवाह उपरांत सैक्स को पूरी तरह एंजौय करें.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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Women’s Day Special- पथरीली मुस्कान: भाग 3

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

नीचे आकर गौरी छोटे भाई बाबू पर खूब चिल्लाई थी ,वो क्यों इतना गुस्सा कर रही थी किसी को पता नहीं था बस सबने ये ज़रूर देखा कि  थोड़ी देर के बाद पारस वहाँ से गर्दन नीची करके चला गया.

उस दिन के बाद पारस कभी नहीं वापस आया,पापा ने कुछ दिन तो इन्तज़ार किया फिर कहने लगे की “दो महीने से पगार भी नहीं दिया था पारस को , राम जाने काहे काम छोड़ कर भाग गया ,चलो कभी मैं ही उसके गाँव जाऊँगा तो उसका पता करूँगा”

पापा पारस के गांव गए भी पर वहां भी उसका कुछ पता नहीं चला .

क्या पारस और चाचा एक ही सिक्के के दो पहलू ही नहीं हैं,जब जिसको मौका मिला ,नारी देह से खेलना चाहा, क्या एक पुरुष एक लड़की में सिर्फ एक ही चीज़ को खोजता है,अपने आप से कई सवाल और बदले में कई और सवाल.

युवा होती लड़कियों में अपने अंगों के प्रति एक जिज्ञासा भी होती है और अधिक से अधिक सुंदर दिखने की चाह भी .

गौरी में ये सारी जिज्ञासाएं मर चुकी थी,वह कभी दर्पण के सामने खड़ी होकर अपने को देखती तो यही सोचती कि इससे तो अच्छा हो कि ये अंग ही कट जाएँ , खत्म हो जाएं जिन्हें देखते ही मर्द लोग लार चुआने लगते है, न उन्हें रिश्ते नातों का भान रहता है और ना ही समाज की कोई चिंता ,उन्हें तो बस स्त्री की देह से ही सरोकार है,कहीं न कहीं सभी मर्दों के प्रति एक ही राय कायम कर ली थी गौरी ने.

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गांव की बाहरी सड़क को हाईवे में बदला जा रहा था ,काम जोर शोर से चल रहा था ,इसी नाते शहर से बाबू और इंजीनियर लोग गांव में आतेजाते रहते थे.

गांव के पास हाईवे का निर्माण होना सारे गांव के लिए  कौतूहल का विषय था ,सुबह शाम गांव वाले लोग अक्सर देखने पहुँच जाते कि सड़क निर्माण का काम कैसे होता है .

अपनी सहेलियों के बहुत कहने पर गौरी भी एक दिन हाईवे देखने चली गयी थी ,वहाँ पर एक सजीला सा नौजवान भी था जो तीन टांगों पर लगे एक दूरबीन नामक यंत्र से कुछ देखता था ,गांव की लड़कियों ने भी उस दूरबीन से झाँकने की  इच्छा प्रकट करी ,बारी बारी से सब लड़कियों ने उसमे झाँका,पर गौरी बुत बनी खड़ी रही.

उस सजीले नौजवान को बहुत कुछ अच्छा लग गया था गौरी में.

दो दिन बाद ही वह इंजीनियर  गौरी का हाथ मांगने ही उसके  घर चला आया.

“मैं आपकी बिटिया से शादी करना चाहता हूँ ”

“पर बेटा तुम तो शहर के इतने बड़े बाबू ,और हमारी बिटिया बारह तक ही पड़ी है ,तुम काहे ब्याह करोगे उससे”पापा ने चौककर कहा

“जी….वो बात सही है ,पर मैंने हमेशा गौरी की तरह ही सीधी सादी लड़की चाही है ,ताकि वो मेरे माँ और पापा का ध्यान रख सके” वो इंजीनियर बोला जिसका नाम विराम था

अम्मा पापा भी गौरी को एक बोझ ही मानते थे और बोझ सर से जितना जल्दी उतर जाए उतना अच्छा.

कहते हैं कि जोड़े स्वर्ग  से ही बनकर आते हैं ,कम से कम गौरी के संदर्भ में तो यही बात सही लग रही थी और सारे गांव वाले चकित थे कि गौरी की शादी शहर में वो भी एक इंजीनियर के साथ ,अब तो मोटर में ही घूमेगी गौरी.

और आखिर वो दिन भी आ गया जब गौरी की शादी विराम से हो गयी

खुद गौरी को भी समझ नहीं आया ये सब कैसे और अब हो गया ,एक गांव की लड़की अब इतने बड़े घर में रहेगी.

शहर में दोमंजिला मकान था , और गौरी नयी बहू , छम छम करती कभी इस कमरे तो कभी उस कमरे में पतंग सी लहराती फिरती

बडी भाभी मौका मिलते ही उझसे चुहलबाज़ी करने में पीछे न हटतीं,रात में क्या -क्या हुआ जैसी बातें पूछती और फिर गौरी के गाल पर एक प्यारी सी चपत लगाकर हँसती हुयी चली चली जातीं.

ये सच था कि गौरी के अंदर भी एक स्त्री के सारे गुण थे,एक लड़की का संसार जिसमे गुड्डे गुड़ियों के खेल होते है ,परियां होती हैं और हाँ एक सुंदर सजीला राजकुमार भी तो होता है जो अपनी राजकुमारी को घोड़े पर बिठा अपने देश को उड़ जाता है.

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जहाँ परियाँ होतीं हैं ,राजकुमार होता है वहां पर एक दानव भी तो होता है ना…..

वो दानव जो राजकुमारी को सोने के पिंजरे में बंद कर लेता है और तरह तरह के आघात करता है.

बचपन में ही दानव के हाथों इस राजकुमारी को भी मसल दिया गया था,कोमल मन और तन पर पड़े इस आघात से हमारी राजकुमारी गौरी ने भी अपने ह्रदय को सिर्फ जीवन चलाने भर का ही अधिकार दे रखा था अब ह्रदय में कोई भाव ,अनवरत हँसी ,मुस्कराहट ,प्रेम आदि के लिए कोई स्थान न था.

गौरी तो बस एक नदी की तरह बही जा रही थी ,एक ऐसी नदी जिसे अपना गंतव्य भी नहीं पता था ,उसे तो बस बहने के लिए ही बहना था

और ऐसे में रात की बातों को लेकर भी गौरी के मन में कोई उत्साह नहीं बचा था बल्कि जब भी विराम रात को उससे प्रेम करते ,उसे सहलाते ,चूमते तब अपने में ही सिमट जाती गौरी, कमल की तरह अपनी पंखुड़ियों को समेट लेती गौरी और  उसके अंग प्रत्यंग पत्थर की तरह सख्त हो जाते ,बंद आँखों में चाचा के गंदे स्पर्श की पुनरावृत्ति सी गुज़र जाती और उसके बाद वो सब असहय हो जाता गौरी के लिए और फिर विराम के साथ यात्रा में एक भी कदम आगे न बढ़ाया जाता उससे.

शुरुआत में जब ऐसा हुआ तो विराम ने सोचा कि गांव की सीधी सादी लड़की है ,शायद मन की झिझक के कारण मुझे रोक देती है और यह सोच अपने मन को मार लिया .

पर यह एक कुंवारी लड़की द्वारा किया जाने वाला अभिनय नहीं था बल्कि यह तो एक सच्चाई थी ,कली को खिलने से पहले ही मसला जा चुका था ,तितली के रंगीन परों पर तेज़ाब छिड़का जा चुका था. प्रेम में जब निरंतर पत्नी का सहयोग ना मिला तो वह बिफर पड़ा.

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“ये तुम इतना सती सावित्री बनने की कोशिश क्यों करती हो ,जो मैं कर रहा हूँ ये कोई गलत काम नहीं ,बल्कि प्रेम का एक मार्ग है और ये सब भी परिवार को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी है और फिर मैं तुम्हे भगाकर तो लाया नहीं जो तुम इतना शर्माती हो, शादी करी है मैंने तुमसे”

Women’s Day Special- पथरीली मुस्कान: भाग 4

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

गौरी चुपचाप सब सुन लेती ,बहस करने उसने सीखा नहीं था और सच बताने का मतलब था उसकी अपनी ही दुनिया में आग लगाना.

अपनी इस परेशानी को दोस्तों से भी विराम ने शेयर किया था , दोस्तों ने हसते हुए यही बताया कि तू उसकी शर्म को खत्म कर ,थोड़ा मोबाइल पर सेक्स वेक्स दिखाया कर ,कुछ दिन बाद सब नॉर्मल हो जायेगा.

रात को बिस्तर में विराम ने मोबाइल ऑन किया और  गौरी के बालों को सहलाते हुए मोबाइल पर एक पोर्न फिल्म चला दी ,विराम को लगा कि इससे गौरी की सोयी इच्छाएं जाग जाएंगी .

इच्छाएं अगर सोयी हो तो वे जाग सकती हैं पर उन इच्छाओं का क्या जो मर ही चुकी हों.

पति की खुशी के लिए मोबाइल पर आँखे गड़ाई रही गौरी पर उसके शरीर में कोई हरकत नहीं हुई .

मन ही मन झुंझुला पड़े थे विराम ,मोबाइल बंद करके रख दिया  और करवट बदल कर लेट गए.

गौरी के मन पर जो कुठाराघात हुआ था उससे उसकी सम्वेदनाएँ ही तो मरी थी, बाकी तो वह एक सम्पूर्ण स्त्री थी और जब गौरी के स्त्रीत्व को  उसके जीवन पुरुष विराम का साथ मिला तो वह माँ बन गयी.

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एक माँ “माँ बनकर ही एक स्त्री पूर्ण होती है ” यही तो उसकी दादी अक्सर कहा करती थी

आब गौरी की समझ में आ गया था,नन्ही बिटिया की देखभाल में कब दिन पंख लगाकर उड़ने लगे उसे पता ही न चला.

विराम के घरवालों ने भी गौरी का खूब ध्यान रखा ,उनकी बहू ने लक्ष्मी को जन्म जो दिया था.

संवर की देखभाल के बाद शरीर की आभा देखते ही बनती थी गौरी की ,अपने आपको आईने में देखा ,पता नहीं कितने दिनों के बाद उसे कुछ अच्छा सा लगा ,मुस्कुराने की कोशिश भी करी पर असफल ही रही वो ,किसी ने मानो उसके होठों पर सिहरन आने से पहले ही उन्हें सी दिया हो और कह दिया हो कि नहीं गौरी नहीं तुझे तो हँसने का अधिकार ही नहीं है.

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बेटी रिया के जनम के आठ महीने हो चुके थे और अब तो विराम ने भी महीनो से गौरी से शारीरिक मिलन की कोई इच्छा नहीं ज़ाहिर करी थी बल्कि वे तो और भी शांत हो गए थे ,शायद काम ज्यादा था ,रोज़ ही देर रात गए आते और चुपचाप सो जाते.

सभी घर वालों का प्यार देख गौरी बहुत खुश थी ,एक अच्छा पति ,एक नन्ही बिटिया ,और जीने को क्या चाहिए था.

पर अपने पति का सेक्स में साथ न दे पाने और उन्हें संतुष्ट न कर पाने का मलाल गौरी को अब भी था,पर वो अपने स्वभाव से विवश थी वो स्वभाव जो उसने नही बनाया था बल्कि इस समाज ने उसे दिया.

गौरी को नींद नहीं आ रही थी,उसने हाथ लगाकर रिया को छुआ  तो पाया कि रिया ने बिस्तर गीला कर रखा था, उसका डायपर बदलना था सो गौरी उठने लगी ,बिजली नहीं थी ,विराम का मोबाइल उठाकर ,मोबाइल की टॉर्च जलाई और रिया का डायपर बदलकर जैसे ही मोबाइल की टॉर्च बंद करी तो मोबाइल पर एक वीडियो ,गौरी की उंगली के स्पर्श से प्ले होने लगा जिसे शायद विराम रात में देखते देखते ही सोये थे और उसका बैक बटन दबाना भूल गए थे और इसलिए टॉर्च जलने के बाद बंद करने के उपक्रम में वह वीडीयो चलने लगा था.

क्या ये विराम हैं ……..हाँ विराम ही तो हैं…

गौरी की आँखें हैरत से फैल गयी थी. विराम इस वीडियो मे एक महिला के साथ संभोगरत थे और वह महिला पूरा साथ दे दे रही थी, और विराम द्वारा अपना ही वीडीयो बनाये जाने पर बनावटी नाराज़गी भी  ज़ाहिर कर रही थी ,और अब तो विराम के कहने पर उसने उत्तेजनात्मक सिसकियाँ भी भरना शुरू कर दी थी.

गौरी की आँखों से अश्रुधारा बह निकली, वीडीयो की आवाजों से विराम हड़बड़ाकर जाग गए ,और लपककर मोबाइल गौरी के हाथों से छीन लिया.

शायद विराम शर्मिंदा थे पर एक पुरुष के अहंकार ने उनकी शर्म को क्रोध का जामा पहनाने मे देर न करी.

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“अरे…ऐसे क्या देख रही हो ….मैं एक जवान मर्द हूँ,मेरी भी कुछ इच्छाएं हैं ,जब घर में खाना नहीं मिलेगा तो आदमी बाहर का ही खाना तो खायेगा न”.

हाँ पुरुष प्रधान इस दुनिया में  बाहर का खाना खाने का अधिकार पुरुष को ही ससम्मान दिया गया है ,महिला नज़र भी उठा ले तो वह पापी है

और इस दुनिया में चाचा जैसे  पुरुष भी हैं

विराम जैसे भी और पारस जैसे  भी

आँगन में बाप बेटी के ठहाको की आवाज़ें फिर से आने लागी थी ,गौरी भी  चाय लेकर वहां जा पहुंची,रिया माँ को देखकर फिर बोल पडी

“अरे…आओ माँ ….पर रोनी सूरत क्यों बना रखी है….

कभी मुस्करा भी दिया करो माँ….”

गौरी चाय कपों में डाल रही थी ,उसने एक नज़र विराम की तरफ देखा उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था ,गौरी ने मुस्करा दिया .

गुड़िया और गुड्डे ,दानव ,सजीला राजकुमार ,सोने का पिंजरा सभी को चीनी के साथ घोलती जा रही थी गौरी.

कोई स्त्री हँसने का अपना सहज स्वभाव यूँ ही नहीं भूलती, कोई स्त्री बात बात में यूँ ही नहीं ड़ो पड़ती जिस स्त्री ने बचपन में ही यौन उत्पीड़न को महसूस किया हो… वो अपने आप में ही सिमटकर रह जाती है और कभी खिल नहीं पाती, खुल नहीं पाती, बोल नहीं पाती हमारी गौरी की तरह.

Crime: छत्तीसगढ़ में उड़ते नकली नोट!

छत्तीसगढ़ में नकली नोटों के कई प्रकरण सामने आ रहे हैं. खास बात यह कि इस में युवाओं की भागीदारी ज्यादा दिख रही है जो एक चिंता का सबब हो सकती है. और यह संकेत भी कि किस तरह देश में बेरोजगारी का भयावह समय आ गया है कि नवजवान युवक किस तरह जीवन यापन के लिए नकली नोटों के गैरकानूनी धंधे में लग गए हैं.

शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि नकली नोट का यह धंधा कितना अहितकारी हो सकता है.

इस रिपोर्ट में नकली नोट में संलिप्त पाए गए लोगों के सच को आपके सामने प्रस्तुत करने का एक प्रयास इस रिपोर्ट में करते हैं.

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पहला घटनाक्रम-

औद्योगिक नगर कोरबा के एक बाजार में दो युवक पहुंचे और सौ का नोट देकर 10 रूपए की सब्जी खरीदने का प्रयास किया. दरअसल, नोट नकली था और 10 रुपये की सब्जी खरीदने पर 90 रुपये हासिल करने की नीयत से आए थे. नकली नोट खपाने में सफल नहीं हुए और देखते ही देखते सब्जी विक्रेताओं ने उन्हें घेर लिया. माहौल विपरीत देख युवक वहां से नौ दो ग्यारह हो गया. मगर उसका एक साथी पकड़ा गया उसके पास से 100 के दो नकली नोट मिले.

द्वितीय घटनाक्रम-

छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिला पेंड्रा मरवाही में कुछ आदिवासी युवक जोकि कंप्यूटर फोटोकॉपी की दुकान चलाया करते थे. इन लोगों ने एक दिन फोटोकॉपी मशीन से सौ रूपए के नकली नोट प्रिंट निकाल लिए और उन्हें बाजार में चलाने लगे और आखिरकार पकड़े गए.

तृतीय घटनाक्रम-

जिला चांपा जांजगीर में युवकों ने कलर फोटोकॉपी मशीन से 500 के नकली नोट छापे और बाजार में सामानों की खरीदी शुरू की एक दिन पकड़े गए और आज जेल की हवा खा रहे हैं.

कुछ घटनाक्रमों के बिनाह पर कहा जा सकता है कि कुछ तो अज्ञान लापरवाही और कुछ पैसों की जरूरत के कारण आज का युवा भारतीय मुद्रा का गैर कानूनी रूप से प्रिंट करके सीधे-सीधे अपने जीवन को दुश्वारियों में डाल रहा है.

महिलाओं में पैसे बांटे!

कुछ चतुर सुजान ऐसे भी होते हैं. जो शहर से ग्रामीण अंचल में पहुंचकर नकली नोटों का धंधा अलग-अलग ढंग से करने लगते हैं. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला के पसान थाना अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में “महिला समूहों” को लोन देने के प्रोसेसिंग फीस के बहाने 96 हजार लेकर एक युवक 8 लाख के नकली नोट थमा गया था. शिकायत की सच्चाई सामने आने के बाद पसान पुलिस की टीम ने उसे पेंड्रा के बचरवार गांव से गिरफ्तार किया.

घटनाक्रम के अनुसार लैंगा गांव में 3 हफ्ते पहले बाइक पर पहुंचे दो युवकों ने स्वयं को लोन बांटने वाली एक कंपनी का कर्मचारी बताते हुए महिला समूह को बिना ब्याज के लोन देने का झांसा दिया था. इसके बाद 22 महिलाएं 5 समूह बनाकर लोन लेने को तैयार हो गईं. बाद में उनमें से एक युवक ने गांव पहुंचकर महिलाओं से कंपनी में स्वीकृत लोन के बदले 10 प्रतिशत रकम प्रोसेसिंग फीस जमा करने के बहाने उनसे 96 हजार लिए. वहीं सभी समूह को 2-2 हजार के नकली नोट से भरा लिफाफा थमाया. महिलाओं ने जब लिफाफा खोला तो उसमें 2 हजार के सभी नोट नकली थे. इस तरह 5 समूह को 8 लाख के नकली नोट थमाकर युवक 96 हजार के असली नोट ले भाग गया. पसान पुलिस ने धोखाधड़ी व नकली नोट चलाने का मामला दर्ज किया. जांच के दौरान टीम बिलासपुर जिले के पेंड्रा थाना अंतर्गत बचरवार गांव पहुंची, जहां घेराबंदी करके रवि गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया. जो कहानी सामने आई है उसके अनुसार आरोपी अपने साथी के साथ मिलकर कंप्यूटर से स्केनिंग करके नकली नोट तैयार करता था. आरोपी ने आश्चर्यजनक तरीके से 1 करोड़ रुपए का नकली नोट खपाना स्वीकार किया है.

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युवा नकली नोटों के अपराध में क्यों है संलिप्त ?

दरअसल, जितने भी प्रकरण नकली नोट के संचार के संदर्भ में सामने आ रहे हैं, उन में युवाओं की भागीदारी अत्यधिक है. यह संकेत देती है कि युवा आज किस तरह भ्रमित है और रूपए के कारण कानून को अपने हाथ में लेकर अपना भविष्य अंधकार मय बना रह है.

कोरबा जिला में नकली नोट खपाने का प्रयास करते युवकों को सब्जी व्यवसायियों ने पकड़ा था. इस नकली नोटों के कारोबार में पुलिस ने रमेशर अमलेश पिता स्वर्गीय नोहर सिंह एवं गुलाब अहिरेश पिता अंतराम दोनों निवासी ग्राम रटगा थाना मरवाही जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के कब्जे से 17500 के नकली नोट बरामद किया था. आरोपितों ने पूछताछ में जानकारी दी थी कि पेंड्रा मरवाही में राठ गांव गांव में रहने वाला राय बहादुर पिता मथुरा प्रसाद कलर प्रिंटर से नोट छाप पर उन्हे खपाने देता था पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर आरोपितों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया . फरार मास्टरमाइंड आरोपी राय बहादुर को पुलिस तलाश रही थी. वह लुक छिप कर यहां वहां भाग रहा था, इस बीच आरोपित के संबंध में जानकारी साइबर सेल ने हासिल की.इसमें आरोपित का वर्तमान लोकेशन जिला त्रिशूर केरल में होना पाया गया. और जैसा कि बार-बार यह सत्य सामने आता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं पुलिस ने आरोपी को अंकिता धर दबोचा.

नकली नोटों के इस खेल में युवाओं की भागीदारी के संदर्भ में पुलिस अधिकारी विवेक शर्मा के मुताबिक दरअसल युवा जहां कानून की जानकारी के अभाव में नकली नोटों का कारोबार करने लगते हैं वहीं उन्हें यह भी अति एहसास रहता है कि वह कभी पकड़े नहीं जाएंगे. मगर उन्हें कोई बताने वाला नहीं होता कि कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं और अपराध का सबक आखिरकार मिलता ही है.

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ऐसे में घर के बड़े बुजुर्गों को सदैव सचेत रहना चाहिए और युवा होते बच्चों को कानून का ज्ञान कराना चाहिए. ताकि उम्र की इस युवा दहलीज पर उनके पांव अपराध की ओर ना बढ़ जाए.

मन महकाए खुशबू, बढ़ाए प्यार

राजवीर की नईनई शादी हुई थी. रात होतेहोते मिलन की घड़ी भी आ गई. राजवीर ने जैसे ही खुशबूदार गुलाबों की सेज से महकते बिस्तर पर इंतजार कर रही रजनी के करीब जा कर कपड़े उतारे तो रजनी ने अचानक से नाक पर हाथ रख दिया और मुंह सिकोड़ते हुए बिस्तर से उठ खड़ी हुई.

रजनी की इस हरकत की वजह थी राजवीर के शरीर और मुंह से आती बदबू. फिर क्या था, दोनों की सुहागरात बेहद उदास और मनमुटाव भरे अंदाज में शुरू हुई.

देश और दुनिया के सैक्सोलौजिस्ट भी मानते हैं कि सैक्सुअल लाइफ को खुशनुमा बनाए रखने में शरीर की खुशबू की बहुत अहमियत होती?है क्योंकि यह खुशबू रिश्ते की मजबूती को बनाए रखती है.

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अगर राजवीर ने सुहागरात पर कोई बढि़या सा परफ्यूम या बौडी स्प्रे इस्तेमाल किया होता तो शायद अंजाम कुछ और ही होता.

  • याद रखें, बेहतरीन क्वालिटी का परफ्यूम वही है जो ज्यादा से ज्यादा समय तक बरकरार रहता है और जिस की पहुंच दूरदूर तक होती है.
  • परफ्यूम के अलावा नहाने के पानी या फिर मुंह धोने के लिए खुशबूदार फेसवाश, शरीर के लिए बौडी क्रीम, लोशन वगैरह का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.
  • गरमी के दिनों में ज्यादा पसीना आता है इसलिए नहाने से पहले पानी में यूडी कोलोन, डेटौल या कोई इत्र मिला लें, इस से शरीर महक उठेगा. हलकी खुशबू वाला टैलकम पाउडर भी लगा सकते हैं.
  • कुछ खास तरह की चीजें खाने, मसूड़ों की बीमारी, शरीर में जिंक की कमी या डायबिटीज के चलते मुंह से बदबू आ सकती है. इस को दूर करने के लिए माउथवाश का इस्तेमाल करें.
  • अकसर बगल व गुप्तांगों के आसपास बाल बढ़ जाते हैं, उन की समयसमय पर सफाई करना न भूलें, नहीं तो सैक्स के दौरान आप से बदबू आ सकती है. बालों को किसी अच्छे ब्रांड के ट्रिमर से साफ कर लें. लड़कियां और औरतें हेयर रिमूवर क्रीम इस्तेमाल कर सकती हैं. हां, ऐसी क्रीम खरीदें जो आप की चमड़ी के लिए एलर्जिक न हो.
  • अगर आप के शरीर से नहाने और परफ्यूम लगाने के बाद भी पसीने की बदबू आ रही है तो आप किसी डाक्टर से सलाह लें, नहीं तो सैक्स के दौरान आप के हमसफर का मूड उखड़ सकता है.
  • सहवास को सुखनुमा और रंगीन बनाने के लिए केवल परफ्यूम या डियोडैं्रट पर ही निर्भर न रहें बल्कि अपने आसपास के माहौल को भी रूम फ्रैशनर वगैरह से खुशबूदार बना लें.
  • सैक्स के दौरान कभी भी वही कपड़े न पहनें जो दिनभर पहने हों. हमेशा धुले कपड़े पहनें और कपड़ों में खुशबू के लिए अच्छा और खुशबूदार डिटर्जेंट इस्तेमाल करें.

दरअसल, खुशबू के बिना कोई भी सिंगार अधूरा रहता?है. बदन से झरती भीनीभीनी खुशबू किसी भी रिश्ते में गरमजोशी और माहौल में नई एनर्जी भर देती है और बात जब रूमानी हो तो एकदूसरे की खुशबू को महसूस करने से ही कामोत्तेजना में बढ़ोतरी होती है.

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भारत ही एक ऐसा देश है जहां खुशबू को 21 श्रेणियों में बांटा गया है. हमारे यहां खुशबू की एक अलग ही परंपरा रही है, इसलिए आप भी अपने बदन की खुशबू से अपने चाहने वाले का मन महकाएं और बहकाएं भी.

World NGO Day के मौके पर प्रिया दत्त और Cwaty ने पशुओं के कल्याण के लिए इस अभियान की शुरुआत की

World NGO Day के मौके पर दुनिया के पहले डिजिटल एनिमल इंफ्लूएंसरक्वाटी (CWATY) ने नरगिस दत्त फाउंडेशन, स्पर्स ट्रस्ट, मेक अर्थ ग्रीन अगेन फाउंडेशन और कोविन के साथ मिलकर पशुओं के कल्याण से जुड़े अभियान – OOHA (आउट ऑफ होम एडॉप्शन) की शुरूआत की गयी.

इस अभियान के तहत सड़कों पर रहनेवाले पशुओं की समस्या के निदान और उनके देखभाल की अनूठी पहल की जाएगी,जिससे इंसान और पशु दोनों ही साझा तौर पर हंसी-खुशी जी पाएं.

एनजीओ CEP (सेलिब्रिटी एक्सेलेंस इन फिलॉन्थ्रोपी) एक गैर लाभकारी संगठन है, जहां वरिष्ठ और उभरते हुए दानदाताओं को भविष्य को बेहतर बनाने के लिए उनके द्वारा दिए गए योगदान के आधार पर सम्मानित किया जाता है. इन्हीं की साझेदारी में आज इसके दूसरे भाग CEP 2.0 का भी ऐलान भी कर दिया गया.

इस मौके पर बात करते हुए अभिनेता स्व. सुनील दत्त और अभिनेत्री स्व. नरगिस दत्त की बेटी, जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता व राजनीतिज्ञ प्रिया दत्त ने कहा, ‘‘सहचर्यता और धरती पर रहनेवाले सभी जीवों और पर्यावरण के प्रति हमारा आदर ही मेरे लिए पशु कल्याण का द्योतक है. धरती पर जितना हक इंसानों का है, उतना ही हक पशु पक्षियों व अन्य जीवों का भी है.

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‘‘ प्रिया,‘नरसिग दत्त मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट (NDMCT)’ की संस्थापक भी हैं,जिसकी शुरुआत उन्होंने अपनी दिवंगत मां की याद में की थी. वह कहती हैं, ‘‘कल्याण करने का मतलब यह नहीं हैं जो आप किसी जरूरतमंद के लिए करते हैं बल्कि ऐसा आप अपने लिए करते हैं. ऐसा करने से खुद आपको खुशी और शांति का अनुभव होता है और आपको इस बात का सुखद एहसास होता है कि आप बदलाव की दिशा में प्रयत्न कर रहे हैं.‘‘

क्वाटी (CWATY) के मुताबिक, सह-चर्यता और समानता जीवन जीने के आवश्यक सिद्धांत हैं. इसके अध्यक्ष जागृत देसाई कहते हैं,‘‘हम वसुदैव कुटुम्बकम‘ पर विश्वास रखते हैं. इसका मतलब है कि है कि यह समस्त दुनिया एक परिवार है और हम सभी एक ही जीवन ऊर्जा के हिस्सा हैं.

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हम एक-दूसरे के साथ चीजों को साझा करने की आदत और अच्छी ऊर्जा के आदान-प्रदान के साथ इसका निर्वहन कर सकते हैं. मेरे लिए पशुओं का कल्याण ही जीवन जीने का उत्तम तरीका है और एक सेलिब्रिटी इंफ्लोएंसर के तौर पर मैं इस मकसद के लिए बड़े पैमाने पर दान-राशि इकट्ठा कर अपनी ओर से अधिक से अधिक योगदान देने की कोशिश में जुटा हूं. OOHA की पहल से जुड़े इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुझे आप सभी के सहयोग की आवश्यकता है क्योंकि ये दुनिया सभी के लिए बराबर है.‘‘

क्वाटी ( CWATY) को जीवंत बनाने में जागृत देसाई की अहम भूमिका रही जो एक लेखक, एक आंत्रप्योनर और CWAT ऐप के संस्थापक भी हैं. यह एक ऐसा ऐप है जिसकी खासियत ये है कि इस ऐप के जरिए यूजर्स अपनी पसंद के एनजीओ को 100 फीसदी लाभ का दान कर सकते हैं.

स्पर्श ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक महर्षि दवे कहते हैं, ‘‘मैं ऐसे कार्य करने में यकीन रखता हूं जो चेहरों पर मुस्कान लाए और बांटने की आदत में बढ़ावा दे, फिर चाहे वो जानवारों की बात हो, इंसानों की बात हो या फिर पर्यावरण की देखभाल की बात हो.‘‘ उल्लेखनीय है कि महर्षि दवे एक बेहद प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो मानवावादी कार्यों के साथ-साथ पशुओं की भलाई के लिए भी शिद्दत से काम करते हैं.

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वे कहते हैं, ‘‘मेरा माननाघ् है कि पशुओं के कल्याण से बढ़कर और कोई कामघ् नहीं हो सकता है. सह-चर्यता के बारे में मेरी राय है कि लाखों-करोड़ों पशु-पक्षियों की तरह हम सब भी धरती मां की कोख से पैदा हुए हैं. सह-चर्यता पर ही हम सबका अस्तिस्व टिका हुआ है जिसका हम सबको आदर करना चाहिए.‘‘

सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहनेवाली, पर्यावरण के संरक्षण में संलग्न मेक अर्थ ग्रीन अगेन (MEGA) फाउंडेशन नामक संस्था से जुड़ीं और Pawisitive फार्म सैंक्चुरी के जरिए 200 से अधिक पशु-पक्षियों की देखभाल करनेवाली अनुषा श्रीनिवासन अय्यर इस परियोजना को लेकर बेहद उत्साहित हैं.

वे कहती हैं, ‘‘जागृत देसाई द्वारा शुरू किया गया OOHA अभियान सड़कों पर रहनेवाले जानवरों के लिए की गई एक उल्लेखनीय पहल है. इस तरह की पहल से न सिर्फ बेसहारा जानवरों को मदद हासिल होती है बल्कि इससे इंसानियत से जुड़ीं मिसालें भी कायम होती हैं जिसकी आज के कोरोना काल में सबसे अधिक आवश्यकता महसूसकी जा रही है.‘‘ उनका कहना है कि CEP  एक बेहद उम्दा और एक सशक्त किस्म की पहल है”.

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कनाडाई गैर-लाभकारी संगठन ‘द कलेक्टिव विन‘ के संस्थापक अलेट विएगास कहते हैं-‘‘हमारी संस्था दुनिया भर के एनजीओ के साथ मिलकर सामाजिक बदलाव के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहती है. हम पशु-पक्षियों की बेहतरी और इंसानों के उनके साथ मिल-जुलकर रहने में यकीन करते है. जानवरी की अपनी कोई आवाज नहीं होती है और रोजाना की जिंदगी में अक्सर उनकी उपेक्षा की जाती है. चाहे आप असमानता के खिलाफ आवाज उठा रहे हों या गरीबी को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हों अथवा धरती को बचाने के प्रयासों में लगे हों – आपकी संस्था की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. ऐसे में ‘द कलेक्टिव विन स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तर पर कम्युनिटी लीडर्स को सशक्त बनाने में यकीन रखता है ताकि ऐसे भविष्य का निर्माण किया जा सके जिसकी लोग ख्वाहिश रखते हैं.

हमारा मानना है कि अगर इसमें विविध प्रकार के लोगों का समावेश है तो रचनात्मक ढंग से समस्या का समाधान किया जाना आवश्यक है. यही है वजह है कि हम अपने कम्युनिटी हब और पार्टरशिप के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को साथ लाने की कोशिश करते हैं. आज की तारीख में CWATY और CEP 2.0 के साथ हमारी साझेदारी का मकसद OOHA द्वारा की गई पहल से शुरू की गईं परियोजनाओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना और समस्याओं का प्रभावी ढंग से निदान करना है.

अपने आसपास के जानवरों को अपनाने और उनकी मदद के लिए प्रेरित करने के लिए OOHA लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने के लिए कार्यरत हैं ताकी लोग रोजाना की जिंदगी में जानवरों की भलाई के लिए काम करें. जबकि CEP की कोशिश दान देनेवाले और दान प्राप्त करनेवालों के बीच की दूरी को कम करने की रहती है.

Preity Zinta ने अपने पति के बिना सेलिब्रेट की 5वीं सालगिरह, शेयर किया ये पोस्ट

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा  ने अपनी पांचवी सालगिरह मनाया. लेकिन  उन्होंने पति जीन गुडएनफ के बिना ये एनिवर्सरी सेलिब्रेट की. इस मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पति के साथ फोटो भी शेयर की है.

दरअसल एक्ट्रेस इस खास मौके पर इंस्टाग्राम पर अपने पति के साथ काफी खूबसूरत फोटो शेयर की. और कैप्शन में लिखा, हैप्पी एनिवर्सरी माय लव. विश्वास नहीं हो रहा है कि हमने एकसाथ एक दशक गुजारा है. समय कैसे बीत जाता है. मिस यू. काश आप यहां होते. #Hubby #Love #29feb #ting’

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शादी से पहले दोनों ने एक-दूसरे को डेट किया. प्रीति जिंटा ने साल 2016 में 29 फरवरी को जीन के साथ शादी की थी.

 

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आपको बता दें कि प्रीति जिंटा ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म सोल्जर से की थी. ये फिल्म साल 1998 में रिलीज की गई थी और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा प्रर्दशन दिया था.

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Bigg Boss 14 ट्रॉफी जीतने के बाद रुबीना ने बिकनी में शेयर की फोटो तो पति अभिनव ने दिया ये रिएक्शन

‘बिग बॉस 14’  (Bकी विनर रुबीना दिलैक इन दिनों अपनी खुशियों का जश्न मनान में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं. ट्राफी जीतने के बिबाद वह वेकेशन पर जाना चाहती है. ये बात खुद रुबीना दिलैक ने कहा है.

जी हां, हाल ही में उन्होंने स्विमसूट में फोटोशूट करवाई हैं. इस फोटो को उन्होंने सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर किया है. इस फोटो में रुबीना कलर फुल बिकिनी में नजर आ रही हैं और वह पूल के अंदर हैं. और इस पोस्ट के कैप्शन में लिखा है कि ‘क्रेविंग फॉर ए वकेशन.

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रुबीना के इस तस्वीर को फैन्स खूब पसंद कर रहे हैं और जमकर तारीफें कर रहे हैं. उनके पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट किया है, प्लीज जल्दी वकेशन पर जाओ. हम भी खूबसूरत तस्वीरें देखने के इंतजार में हैं. लेकिन उनके पति अभिनव शुक्ला ने रुबीना की इस तस्वीर पर कॉमेंट किया, Noooooo.

 

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हाल ही में रुबीना दिलैक के घर किन्नर समाज की गुरु मां उन्हें आशीर्वाद देने पहुंची थीं. रुबीना ने इसका एक वीडियो भी इंस्टाग्राम पर शेयर किया था. रिपोर्टस के अनुसार रुबीना ने बिग बॉस में अपनी जर्नी पर बात करते हुए कहा था कि उन्हें बिग बॉस में जाकर अभिनव के साथ अपने रिश्तों को सुधारने का मौका मिला.

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बिग बॉस में रुबिना ने खुलासा किया था कि अभिनव और उनका तलाक होने वाला है. लेकिन शो में दोनों को  रिश्ते सुधारने का मौका मिला और अब वो अपने रिश्ते को एक और मौका देना चाहते हैं.

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