Women’s Day Special- अपना घर: भाग 2

उस की मां लीला आज के जमाने की आधुनिक महिला लग रही थीं. छोटी बहन मासूमा भी बेहद खूबसूरत थी. पिता अजय बेहद सीधेसादे व्यक्ति लग रहे थे.

जिया, अभिषेक की मां और बहन के सामने कहीं भी नहीं ठहरती थी पर उस का भोलापन, सुलझे हुए विचार और सादगी ने अभिषेक को आकर्षित कर लिया था. जिया के किरदार में कहीं भी कोई बनावटीपन नहीं था. जहां अभिषेक को अपनी मां में प्लास्टिक के फूलों की गंद आती थी, वहीं जिया से उसे असली फूलों की महक आती थी.

अपने पिता को उस ने हमेशा एडजस्टमैंट करते हुए देखा था. वह खुद ऐसा नहीं करना चाहता था, इसलिए हर हाल में अपनी मां का लाड़ला, हर बात मानने वाला अभिषेक किसी भी कीमत पर अपनी जीवनसाथी के चुनाव की बागडोर मां को नहीं देना चाहता था.

जिया ने कमरे में प्रवेश किया. जहां अभिषेक प्यारभरी नजरों से उस की तरफ देख रहा था, वहीं लीला और मासूमा उस की तरफ अचरज से देख रही थीं. उन्हें जिया में कोई खूबी नजर नहीं आ रही थी. अजय को जिया एक सुलझे विचारों वाली लड़की नजर आई जो उन के परिवार को संभाल कर रख सकेगी. लीला ने अभिषेक की तरफ देखा पर उस के चेहरे पर खुशी देख कर चुप हो गईं.

जिया को लीला ने अपने हाथों से हीरे का सैट पहना दिया पर उन के चेहरे पर कहीं कोईर् खुशी नहीं थी. जिया को यह बात समझ आ गई थी कि वह बस अभिषेक की पसंद है. अपने घर में जगह बनाने के लिए उसे बहुत मेहनत करनी पड़ेगी.

2 माह बाद उस के विवाह की तारीख तय हो गई. दुलहन के लिबास में जिया बेहद खूबसूरत लग रही थी. अभिषेक और उस की जोड़ी पर लोगों की नजरें ही नहीं ठहर रही थीं. लीला भी आज बहुत खुश लग रही थीं. कन्यादान करते हुए जिया के मां और पापा के आंखों में आंसू थे. वह उन के घर की रौनक थी. बिदाई पर अजय ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘बहू नहीं बेटी ले कर जा रहे हैं.’’

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जिया ने कुछ दिनों में यह तो समझ लिया था कि इस घर में बागडोर लीला के हाथों में है. यह घर लीला का घर है और वह घर उस के मांपापा का घर था पर उस का घर कहां है? इस सवाल का जवाब उसे नहीं मिल पा रहा था.

अभी कल की ही बात थी, जिया ने ड्राइंगरूम में थोड़ा सा बदलाव करने की कोशिश करी, तो लीला ने मुसकरा कर कहा, ‘‘जिया, तुम अभिषेक की बीवी हो, इस घर की बहू हो, पर इस घर को मैं ने बनाया है, इसलिए अपने फैसले और अपने अधिकार अपने कमरे तक सीमित रखो.’’

जिया चुपचाप खड़ी सुनती रही. अभिषेक से जब भी उस ने इस बारे में बात करनी चाही, उस ने हमेशा यही जवाब दिया कि जिया उन्हें थोड़ा समय दो. उन्होंने सब कुछ हमारी खुशी के लिए ही करा है.

जिया अपने मनोभावों को चाह कर भी न समझा पाती थी. खुश रहना उस की आदत थी और हारना उस की फितरत में नहीं था.

देखते ही देखते 1 साल बीत गया. आज जिया की शादी की पहली वर्षगांठ थी. उस ने अभिषेक के लिए घर पर पार्टी करने का प्लान बनाया. उस ने अपने सभी दोस्तों को निमंत्रण भेज दिया. तभी दोपहर में जिया ने देखा, लीला की किट्टी पार्टी का गु्रप आ धमका.

जिया ने लीला से कहा, ‘‘मां, आज मैं ने अपने कुछ दोस्तों को आमंत्रित किया है.’’

लीला ने जवाब में कहा, ‘‘जिया तुम्हें पहले मुझ से पूछ लेना चाहिए था…’’ मैं तो अब कुछ नहीं कर सकती हूं. तुम अपने दोस्तों को कहीं और बुला लो.’’

जिया उठ खड़ी हुई. अपने अधिकारों की सीमा रेखा समझती रही. मन ही मन उस ने एक निर्णय ले लिया.

जिया ने शाम की पार्टी के लिए घर के बदले होटल का पता अपने सभी दोस्तों को व्हाट्सऐप कर दिया. अभिषेक को भी वहीं बुला लिया. अभिषेक ने जिया को पीली व लाल कांजीवरम साड़ी और बेहद खूबसूरत झुमके उपहार में दिए, जिया जैसी सुलझे विचारों वाली जीवनसाथी पा कर अभिषेक बेहद खुश था.

जिया को अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी पर फिर भी कभीकभी वह चंदेरी के परदे उसे मुंह चिढ़ाते थे. अभिषेक उसे हर तरह से खुश रखता था पर वह कभी जिया की अपनी घर की इच्छा को नहीं समझ पाया था.

जिया को अपने घर को अपना कहने का या महसूस करने का अधिकार नहीं था. वह उस की जिंदगी का वह खाली कोना था जिसे कोई भी नहीं समझ पाया था. न उस के अपने मातापिता, न अभिषेक और न ही उस के सासससुर. जिया ने धीरेधीरे इस घर में सभी के दिल में जगह बना ली थी. लीला भी अब उस से खिंचीखिंची नहीं रहती थीं. मासूमा की मासूम शरारतों का वह हिस्सा बन गई थी.

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आज चारों तरफ खुशी का माहौल था. दीवाली का त्योहार वैसे भी अपने साथ खुशी, हर्षोल्लास और अनगिनत रंग ले कर आता है. पूरे घर में पेंट चल रहा था, जब अभिषेक परदे बदलने लगा तो अचानक जिया बोली कि रुको और फिर भाग कर चंदेरी के परदे ले आई.

इस से पहले कि अभिषेक कुछ बोलता, लीला बोल उठीं, ‘‘जिया ऐसे परदे मेरे घर पर नहीं लगेंगे.’’

जिया प्रश्नसूचक नजरों से अभिषेक को देख रही थी. उसे लगा वह कुछ बोलेगा कि मां यह जिया का भी घर है पर अभिषेक कुछ न बोला. जिया का खराब मूड देख कर बोला, ‘‘इतना क्यों परेशान हो. परदे ही तो हैं.’’

पहली बार जिया की आंखों में आंसू आए. अभिषेक आंसुओं को देख कर और चिढ़ गया.

आजकल जिया का ज्यादातर समय औफिस में बीतता था. अभिषेक ने महसूस किया कि वह अपने फोन पर ही लगी रहती है और उसे देखते ही घबरा कर मोबाइल रख देती है. अभिषेक जिया को सच में प्यार करता था, वह जिया से पूछना चाहता था पर उसे डर था कहीं सच में जिया के जीवन में उस की जगह किसी और ने तो नहीं ले ली है.

एक शाम को अभिषेक ने जिया से कहा, ‘‘जिया, चलो तुम शुक्रवार की छुट्टी ले लो, कहीं आसपास घूमनेफिरने चलते हैं.’’

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जिया ने अनमने से कहा, ‘‘नहीं अभिषेक बहुत काम है औफिस में.’’

गोवा में वेकेशन एन्जॉय करती नजर आईं रानी चटर्जी, समंदर किनारे दिए कई पोज

भोजपुरी इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. आए दिन वह अपने फैंस के साथ फोटोज शेयर करती रहती है. अब उन्होंने  गोवा वेकेशन की फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर किया है.

इन फोटोज में एक्ट्रेस ग्लैमरस लुक में नजर आ रही हैं. आप फोटोज में देख सकते हैं कि पीले रंग की फ्लोरल ड्रेस में रानी चटर्जी बेहद खूबसूरत लग रही हैं.

 

गोवा में समंदर किनारे बैठे हुए रानी चटर्जी एक के बाद एक बोल्ड अंदाज में पोज देती दिखाई दे रही हैं. उनके फोटोज को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं.

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इस वेकेशन पर एक्ट्रेस अपनी मां के साथ गई हैं. उन्होंने अपनी मां के साथ फोटोज शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि ‘मां के साथ हर जगह अच्छा लगता है. आपको बता दें कि रानी चटर्जी टीवी रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 10’ में भी नजर आईं थी.

 

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नुजहत परवीन: छोटे शहर की बड़ी क्रिकेटर

भारतीय महिला ट्वैंटी20 क्रिकेट टीम की सदस्य नुजहत परवीन सिंगरौली जैसे एक छोटे शहर से आती हैं. बेहद सीमित संसाधनों और बड़े स्तर पर क्रिकेट का माहौल न होने के बाद भी वे लगातार आगे बढ़ी हैं. शुरुआती दिनों में वे क्रिकेट नहीं, बल्कि फुटबाल खेलती थीं, लेकिन एक दिन जब वे क्रिकेट के मैदान में पहुंचीं, तो कोच ने उन्हें विकेटकीपर के दस्ताने पहना दिए. क्रिकेट और उसके नियमों से एकदम अनजान नुजहत परवीन ने पहले मैच में ही अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन किया. विकेट के पीछे तो वे कामयाब रहीं ही, विकेट के आगे बल्ले से भी उन्होंने धमाल मचाया. संभाग स्तर पर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से उन में आत्मविश्वास आ गया और फिर उन का वह सफर शुरू हो गया, जिस की कल्पना खुद उन्होंने भी कभी नहीं की होगी.

नुजहत परवीन अपने अंदाज में खेलती गईं और उनका हुनर उनकी कामयाबी की कहानी लिखता गया. आज खेल के दम पर ही वे भारतीय रेलवे के साथ जुड़ी हैं और उन के परिवार में भी खुशहाली का माहौल है.

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देशप्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान बनाने के बाद अब रीवा संभाग देश और प्रदेश के खेल नक्शे पर भी उसी अंदाज में दिखने लगा है खासकर क्रिकेट में हाल के सालों में रीवा ने बहुत ज्यादा तरक्की की है. अवधेश प्रताप सिंह स्टेडियम में क्रिकेट टर्फ विकेट बनने के बाद यहां खेल में बड़ा शानदार बदलाव आया है.

रीवा के तेज गेंदबाज ईश्वर पांडे भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने वाले इस संभाग के पहले खिलाड़ी थे. अब सिंगरौली से निकली विकेटकीपर बल्लेबाज नुजहत परवीन नैशनल लैवल पर अपनी पहचान तेजी से बना रही हैं. उन्हें एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 7 मार्च से शुरू हुई ट्वैंटी20 महिला क्रिकेट सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया.

वे पहले भी देश की टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. हाल में हुए महिला आईपीएल की 3 टीमों में से एक टीम में वे भी शामिल थीं. उन की एक विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में पहचान है. एक तरह से वे ट्वैंटी20 टीम की अब नियमित सदस्य बन गई हैं. उन के आतिशी अंदाज के चलते ही उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट का ‘धौनी’ कहा जाता है. राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने कई बेहतरीन पारियां खेली हैं.

सनद रहे कि नुजहत परवीन एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं. उन के परिवार में कोई क्रिकेट के बारे न अच्छी तरह जानता था और न ही इस खेल में कोई खास दिलचस्पी ही थी. नुजहत परवीन आज जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है, लेकिन उन को परखने, निखारने और आगे बढ़ने का जज्बा पैदा करने वाला और कोई है. रीवा संभाग के बीसीसीआई के ए लैवल के कोच एरिल एंथोनी ने ही उन के हुनर को परखा और फिर जीजान से उसे निखारने में जुट गए.

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एरिल एंथोनी की पारखी निगाहों ने पहली नजर में ही नुजहत परवीन के टैलेंट को पहचान लिया था. उन के आक्रामक अंदाज को बनाए रखने के लिए उन्होंने उन में शौट सलैक्शन की समझ, गेंद की चाल और दिशा को भांपने की कला पैदा की. उन का तकनीकी पक्ष मजबूत करने के लिए भी कोच ने उन्हें वे सारे गुर सिखाए जो एक बेहतर बल्लेबाज बनने के लिए जरूरी होते हैं.

नुजहत परवीन आज विकेट के पीछे भी उतनी ही चपल हैं जितनी विकेट के आगे मुस्तैद रहती हैं. उन के जुनून और कोच की मेहनत ने उन में एक विस्फोटक बल्लेबाज पैदा कर दिया है.

इस समय रीवा के कई क्रिकेटर मध्य प्रदेश रणजी टीम में अपने हुनर का लोहा मनवा रहे हैं. रीवा के महज 24 साल के कुलदीप सेन इस समय मध्य प्रदेश के प्रमुख तेज गेंदबाज हैं. वे भी ईश्वर पांडे की ही तरह के तेज गेंदबाज हैं.

कुलदीप सेन के आंकड़ों की बात की जाए तो वे अब तक प्रथम श्रेणी, लिस्ट ए और ट्वैंटी20 के तकरीबन 32 मैचों में 55 से ज्यादा विकेट ले चुके हैं. उन के हुनर को भी खोजने, निखारने और संवारने का काम एरिल एंथोनी ने किया है. एरिल खुद भी कभी एमआरएफ पेस फाउंडेशन में आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज डेनिस लिली की निगरानी में निखरे हैं. एरिल खतरनाक तेज गेंदबाज थे, पर किन्हीं वजह से वह बड़े फलक पर नही आ सके, लेकिन आज वे उसी जुनून के साथ रीवा संभाग के खिलाड़ियों की राष्ट्रीय स्तर की फौज तैयार करने में जुटे हैं.

यहां “डाल डाल” पर ठग बैठे हैं

The Kapil Sharma Show का नया सीजन OTT प्लेटफॉर्म पर वापसी करेगा?

छोटे पर्दे का फेमस कॉमेडी शो ‘द कपिल शर्मा शो’ (The Kapil Sharma Show) कुछ दिन पहले ही दर्शकों से अलविदा कहा है. और अब इस शो के वापसी का दर्शकों को इंतजार है.

दरअसल कपिल शर्मा ने अपने दूसरे बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने के लिए कुछ समय के लिए इस शो से ब्रेक लिया है. और इस समय वो अपने बेटे के साथ समय बिता रहे हैं.

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तो  इसी बीच खबर ये आ रही है कि ‘द कपिल शर्मा शो’ टीवी की जगह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दस्तक देगा. तो आइए जानते हैं आखिर इस खबर में कितनी सच्चाई है.

 

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कपिल शर्मा के दोस्त और कोस्टार कीकू शारदा ने इन खबरों को झूठा करार दिया है. खबरों के अनुसार कीकू शारदा ने कहा है कि मैं खुद इस बात को जानकर हैरान हूं. कीकू शारदा के बयान से ये तो पता चल गया है कि उनको इस खबर के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

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कहा जा रहा है कि ‘द कपिल शर्मा शो’ सोनी टीवी के डिजिटल एप सोनी लिव पर प्रसारित किया जाएगा. वैसे इस खबर को लेकर कोई ऑफिसियली अनाउंसमेंट नहीं की गई है.

Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah के सेट पर इन एक्ट्रेसेज के बीच हुई लड़ाई?

सोनी सब का कॉमेडी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) दर्शकों के  बीच काफी मशहूर है. इस शो में कॉमेडी के साथ-साथ किरदारों के बीच दोस्ती देखने को मिलती है.

इस शो में मशहूर कलाकार दिलीप जोशी, मुनमुन दत्ता और टप्पू सेना के काफी अच्छी बॉन्डिंग देखने को मिलता है. लेकिन खबर ये आ रही थी कि सेट पर इन कलाकारों के बीच लड़ाई हुई. ये खबर सुनकर हर कोई हैरान  था. तो आईए जानते हैं आखिर क्या है सच्चाई.

 

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गोकुलधाम की महिलाओं के बीच सबकुछ सामान्य नहीं है. इस बारे में एक्ट्रेस सुनैना फौजदार यानि अंजली भाभी ने अपनी चुप्पी तोड़ी हैं. खबर ये आ रही है सुनैना फौजदार ने बताया कि हम एकदूसरे से शॉट खत्म होने के बाद ज्यादा बातें करते हैं.

खबरों के अनुसार उन्होंने आगे ये कहा कि जितना हमें एक-दूसरे से टेक लेते समय बात करने का मौका मिलता है, वो सारी कसर हम ऑफ स्क्रीन पूरी कर लेते हैं. जब भी मैं सेट पर होती हूं, हम जमकर मस्ती करते हैं. हम साथ में खाते हैं और खूब हंसते हैं.हम एक-दूसरे की वीडियो बनाते हैं और खूब तस्वीरें क्लिक करते हैं.

 

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बताया जा रहा है कि अंजली भाभी ने ये भी कहा कि मेरी तो सबसे दोस्ती है. मुझे कभी महसूस नहीं हुआ कि किसी के बीच मनमुटाव है.

बता दें कि हाल ही में सुनैना फौजदार इस शो से जुड़ी है शो  में पहले अंजलि भाभी का किरदार नेहा मेहता निभाती थीं.

सेक्स न करने से होती हैं ये 8 समस्याएं

हमारे देश में सैक्स को ले कर इतनी हायतोबा मचाई जाती है मानो इस की बात करने पर प्रतिबंध हो. पोंगापंथी और धर्म के ठेकेदार सैक्स को गंदा काम बताते फिरते हैं. यह अलग बात है कि कई मुल्लामौलवी, बाबा और पादरी सैक्सुअल हैरासमैंट और रेप के मामलों में पकड़े जा चुके हैं.

सच यह है कि सैक्स एक शारीरिक जरूरत है, जो बेहद स्वाभाविक और प्राकृतिक है. लेकिन धर्म के ठेकेदारों द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों और नकली बाबाओं द्वारा दिए गए उलटेसीधे प्रवचनों से प्रभावित हो कर भारतीय महिलाएं सैक्स को एक अधार्मिक क्रिया समझने लगती हैं और खुलेमन से इस का आनंद उठाने के बजाय इस से कतराने लगती हैं.

पति के लाख मनाने और समझाने के बावजूद वे उस का साथ देने और सैक्स का आनंद उठाने के लिए तैयार नहीं होतीं. कभी व्रतत्योहार का बहाना बना कर, तो कभी तबीयत खराब होने का बहाना बना कर ये महिलाएं ‘अपवित्र’ होने से बचती रहती हैं. लेकिन चिकित्सक, मनोविज्ञानी, व्यवहार विशेषज्ञ और समाजशास्त्री इस प्रवृत्ति को तन और मन की सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं.

पीरियड्स में बढ़ सकता है दर्द :

आमतौर पर महिलाओं के मैन्सट्रुअल साइकिल के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है. लेकिन जो महिलाएं सैक्सुअल लाइफ को एंजौय नहीं करतीं उन में यह दर्द ज्यादा हो सकता है.

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सेक्स ऐक्सपर्ट डा. लारेज स्ट्रीचर का कहना है कि पीरियड्स के दौरान सैक्स करने से मैन्स्ट्रुअल क्रैंप में काफी कमी आ सकती है. यूट्रस एक मांसपेशी है जिस में सैक्स और्गेज्म के दौरान सिकुड़न होती है. इस से रक्तस्राव बेहद आसानी से हो जाता है और स्राव के समय होने वाले दर्द से महिलाओं को काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है. इस के साथ ही, यौन आनंद से एंडौर्फिन का स्राव होता है जो दर्द को कम करने में सहायक होता है.

वैजाइना की दीवार हो सकती है कमजोर :

सैक्स थेरैपिस्ट सारी कूपर बताती हैं, ‘‘खुद को सैक्स से वंचित रखने वाली महिलाओं में वैजाइना की वाल धीरेधीरे कमजोर यानी पतली होने लगती है. विशेषरूप से मीनोपौज की उम्र में पहुंच चुकी महिलाएं जब सैक्स से दूरी बढ़ाती हैं तो उन में यह समस्या अधिक होती है.’’

वे कहती हैं, ‘‘नियमित सैक्स करते रहने से वैजाइना की वाल लचीली रहती है और ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता जबकि कभीकभी सैक्स करने में यह दर्द काफी ज्यादा महसूस हो सकता है. नौर्थ अमेरिकन मीनोपौज सोसायटी ने भी मीनोपौज के दौर से गुजरने वाली महिलाओं को नियमित पैनेट्रेटिव सैक्स करने की सलाह दी है.

बढ़ सकता है स्ट्रैस :

जगजाहिर है कि सैक्स से तन और मन में आनंद की अनुभूति होती है. इस से दिमाग में खुशी के हार्मोन एंडौर्फिन व औक्सीटोसीन उत्सर्जित होते हैं. स्कौटलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया है कि  सैक्स से दूर रहने वाले लोेग पब्लिक स्पीकिंग या ऐसी दूसरी स्टै्रसफुल सिचुएशन को आसानी से हैंडल नहीं कर पाते, जबकि महीने में कम से कम 2 बार सैक्स करने वाले लोग इस में आसानी महसूस करते हैं. नियमित सैक्स करने की आदत को हैल्थ ऐक्सपर्ट स्ट्रैस बस्टर मानते हैं, सैक्स न करने वाले लोगों का ब्लडप्रैशर स्ट्रैस की सिचुएशन में काफी बढ़ जाता है.

पुरुषों में बढ़ सकती है प्रोस्टैट कैंसर की संभावना :

हैल्थ ऐक्सपर्ट का मानना है कि जो पुरुष नियमित रूप से सैक्स नहीं करते उन में प्रोस्टैट कैंसर की संभावना बढ़ सकती है. सैक्स करने से प्रोस्टैट को सुरक्षा देने वाले कैमिकल्स रिलीज होते हैं. अमेरिकन यूरोलौजिकल एसोसिएशन द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से यौनसंबंध बनाने वाले पुरुषों में प्रोस्टैट कैंसर होने की संभावना 20 फीसदी तक कम हो जाती है क्योंकि समयसमय पर वीर्य स्खलन होने से प्रोस्टैट में मौजूद हानिकारक तत्त्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं.

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संबंधों के प्रति आ सकता है असुरक्षा का भाव :

जिन पतिपत्नी में सैक्सुअल संबंध लगभग खत्म हो जाते हैं उन में आपसी नजदीकी, माधुर्य और अपनापन भी कम होने लगता है. साथ ही, पति और पत्नी के मन में एकदूसरे के प्रति अविश्वास की भावना भी आ सकती है जिस से रिलेशनशिप में इनसिक्योरिटी का भाव आता है.

‘सेविंग योर मैरिज बिफोर इट स्टार्ट्स’ की लेखिका एवं मनोविज्ञानी लेस पैरोट कहती हैं, ‘‘सैक्स न करने से शरीर में औक्सीटोसिन व दूसरे बौंडिंग हार्मोन का लैवल कम होने लगता है. पति और पत्नी के मन में अपराधबोध की भावना आती है, सैल्फ एस्टीम में कमी आती है. साथ ही, मन में हमेशा संदेह रहता है कि कहीं आप अपनी सैक्स की जरूरत के लिए किसी दूसरे के संपर्क में तो नहीं. हालांकि, इस का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि बिना सैक्स के पतिपत्नी खुश रह ही नहीं सकते. उन्हें आपस में चुंबन लेना, हाथ पकड़ना, एकदूसरे को सहलाना आदि जारी रखने चाहिए.

बढ़ता है सर्दीजुकाम का खतरा :

पैनसिलवानिया की विलकेस बौरे यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने अपने शोध में पाया कि जो लोग हफ्ते में एक या दो बार सैक्स करते हैं, उन में एंटीबौडीज का उत्पादन 30 फीसदी तक बढ़ जाता है. ये एंटीबौडीज तरहतरह के वायरस आदि के खिलाफ लड़ने में हमारे शरीर के डिफैंस सिस्टम की मदद करते हैं. सैक्स को इम्यूनिटी सिस्टम इंप्रूव करने वाला भी माना गया है.

यौनेच्छा में कमी आने लगती है :

जब आप सैक्स से कतराने लगते हैं या इस की आदत धीरेधीरे छूटती जाती है तो आप की यौनेच्छा खुदबखुद कम होने लगती है. सैक्स थेरैपिस्ट सारी कूपर कहती हैं, ‘‘एक वक्त ऐसा आता है जब आप सैक्स करना चाह कर भी सैक्स नहीं कर पाते. सैक्स शारीरिक प्रक्रिया से ज्यादा एक मानसिक प्रक्रिया है. आदत छूटने या नियमित इस का उपभोग न करने पर आप का मन सैक्स के लिए तैयार नहीं हो पाता. जब तक मन तैयार नहीं होता, तो तन का साथ देने का सवाल ही नही.

पुरुषों में इरैक्टाइल डिसफंक्शन :

उपरोक्त कारण की वजह से पुरुषों में यौनांग सैक्स के लिए तैयार नहीं हो पाता, यानी यौनांग में कठोरता नहीं आ पाती जिसे हैल्थ ऐक्सपर्ट इरैक्टाइल डिसफंक्शन कहते हैं.

अमेरिकी मैडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरुषों का यौनांग एक मांसपेशी है. जैसे हमारे शरीर की अन्य मांसपेशियों को नियमित ऐक्सरसाइज की जरूरत है, ठीक उसी तरह इस का भी नियमित इस्तेमाल जरूरी है, वरना इस में शिथिलता आने लगती है. कुछ वैज्ञानिकों ने सरल भाषा में इसे ‘यूज इट आर लूज इट’ कह कर समझाया है.

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सुपरकॉप स्पेशल: हिमाचल की शेरनी- सौम्या सांबशिवन

लेखक- पुष्कर    

शायराना मिजाज की सौम्या सांबशिवन किसी भी दबाव में काम नहीं करतीं. उन के लिए कानून व्यवस्था और देशहित पहले है, बाकी बाद में. लेकिन ऐसे ईमानदार अफसरों को सरकार और उच्च अधिकारी चैन से कहां रहने देते हैं. देखना है हिमाचल की इस शेरनी का अंजाम…

जब भी जांबाज महिला आईपीएस अफसरों का नाम आता है तो शिमला में 1947 से 2017 तक 53वीं एसपी रह चुकीं सौम्या सांबशिवन को नहीं भूला जा सकता. वह स्वभाव से सौम्य हैं, लेकिन दिल से दबंग.

केरल की रहने वाली सौम्या बनना चाहती थीं लेखिका, लेकिन बन गईं एसपी. जाहिर है, ऐसे में मन गलत के प्रति विद्रोह तो करेगा ही, विद्रोह होगा तो दबंगई भी होगी. गनीमत यह है कि उन्हें पढ़ने का शौक है और यह शौक विद्रोह को रोकता है. फिर भी वह अपराधियों के लिए खौफनाक तो हैं ही.

इंजीनियर पिता की एकलौती बेटी सौम्या ने बायोस्ट्रीम से ग्रेजुएशन करने के बाद एमबीए में दाखिला लिया था. एमबीए हो गया तो उन्होंने 2 साल तक एक मल्टीनेशनल बैंक में नौकरी की. इस बीच वह यूपीएससी की तैयारी करती रहीं. 2010 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की और आईपीएस बन कर 11 महीने की ट्रेनिंग में चली गईं. उन्हें हिमाचल कैडर मिला था. विभागीय ट्रेनिंग के लिए उन्हें शिमला भेजा गया, जहां वह डिप्टी एसपी की पोस्ट पर रहीं. फिर उन्हें एडिशनल एसपी बनाया गया.

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एसपी के तौर पर उन की पहली पोस्टिंग सिरमौर में हुई. सिरमौर में ड्रग का बोलबाला था. ड्रग्स की तसकरी और बिक्री भी होती थी और लोग ड्रग्स लेते भी थे. झाडि़यों में ड्रग की खाली रेपर पुडि़या पड़ी मिलती थीं. सब से पहले सौम्या ने नशेडि़यों की धरपकड़ कर के ड्रग लेने वालों पर लगाम लगाई.

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इस के लिए उन्होंने पकड़े गए नशेडि़यों की वीडियोग्राफी कराई और बताया इस की डौक्यूमेंट्री बना कर देश भर में दिखाई जाएगी. इस से होने वाली बदनामी से लोग डरे. उन्होंने नशेडि़यों के ठिकानों को भी जेसीबी से हटवा दिया और उस का भी वीडियो बनवाया.

नशेडि़यों के अड्डे बने खंडहर भवनों में कांचकली (खुजली वाला पाउडर) का छिड़काव करा दिया गया ताकि वे वहां जाएं तो खुजातेखुजाते पागल हो जाएं. सिरमौर में चला अपनी तरह का यह पहला अभियान था, जिसे जनता का भरपूर समर्थन मिला. उन्होंने देवीनगर में कृपालशिला और गुरुद्वारे के पास नशेडि़यों के छिप कर बैठने के अड्डों को भी नेस्तनाबूद करवा दिया.

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सौम्या के अनुसार एक ब्लाइंड मर्डर की तफ्तीश के लिए वह झाडि़यों में गई थीं, जहां नशीली दवाइयों के रेपर, नशे के लिए प्रयोग होने वाली सामग्री आदि मिली. तभी उन्होंने फैसला कर लिया था कि नशे के खिलाफ अभियान चलाएंगी. संदिग्ध नशेडि़यों पर नजर रखने के लिए उन्होंने पावटा में 75 सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए.

इस के बाद उन्होंने नशा बेचने, सप्लाई करने वाले तसकरों को घेरा. अपने प्रयासों से सौम्या ने सिरमौर को ड्रग्स मुक्त तो किया ही. नशेडि़यों की लत छुड़वाने के लिए जिलेभर में नशा मुक्ति केंद्र भी बनवाए. इसी बीच उन्होंने कई ब्लाइंड केस सुलझाए. तिहाड़ जेल से फरार एक ऐसे पेशेवर हत्यारे को भी पकड़ा जो कत्ल कर के खुला घूम रहा था.

पढ़ने लिखने की शौकीन सौम्या को साहित्य, कविताओं और मुशायरों का खूब शौक है. एक बार तो वह सिरमौर से सैकड़ों किलोमीटर दूर देवबंद में होने वाले लेडीज मुशायरे में शामिल होने पहुंच गईं. उन का कहना था कि पुलिस के काम में दिमाग के साथ दिल की मजबूती भी बेहद जरूरी है और यह मजबूती, शक्ति साहित्य से ही मिल सकती है.

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कविताएं सदियों से मनुष्य को प्रेरित करती रही हैं, ये मानव के अंदर छुपी संभावनाओं को सामने लाने का बढि़या माध्यम हैं. साहित्य आदमी को सरल भी बनाता है और मजबूत भी.

एक तरफ सौम्या का यह सरल रूप सामने आया तो दूसरी तरफ उन्होंने सिरमौर में, खास कर नहान में खनन माफियाओं की नाक में ऐसी नकेल डाली कि खनन कार्य ही बंद करवा दिए. एक ही दिन में सौम्या ने 21 वाहन व जेसीबी मशीनें जब्त कीं, 40 वाहनों के चालान काटे और 1,47000 रुपए का जुर्माना वसूला.

सौम्या सब से ज्यादा चर्चाओं में तब आईं जब एक प्रदर्शन के दौरान उन्होंने बदतमीजी करने पर एक विधायक को न केवल थप्पड़ जड़ा, बल्कि जेल भी भेजा. उन का कहना था, इतनी छूट किसी को नहीं दी जा सकती. चाहे वह कोई भी क्यों न हो.

सिरमौर की सीमाएं 2 अलगअलग राज्यों से लगती हैं, इस नजरिए से इस जिले को संवेदनशील माना जाता है. लेकिन सौम्या ने अपराधियों में पुलिस का इतना खौफ भर दिया कि उन्हें ड्रग, शराब और मानव तसकरी बंद करनी पड़ी.

लड़कियों की रोल मौडल

सौम्या के पास लड़कियों से छेड़छाड़ की बहुत शिकायतें आती थीं. ऐसे मामलों में छेड़छाड़ के कुछ मामलों को तो रोका जा सकता था, लेकिन हर जगह पुलिस मौजूद नहीं रह सकती थी. इस के लिए उन्होंने सोचना शुरू किया. दरअसल बचाव के लिए पेपर स्प्रे एक तो हर जगह मिलता नहीं है, दूसरे महंगा भी होता है. कई बार मौका नहीं मिलता तो लड़कियां इस का इस्तेमाल भी नहीं कर पातीं. तीसरे इस का असर भी ज्यादा देर नहीं रह पाता.

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सौम्या ने इस बारे में सोचना शुरू किया तो थोड़ी सी मेहनत से उन्हें रास्ता मिल गया. उन्होंने मिर्च, रिफाइंड और नेल पौलिश से एक अलग तरह का तरल पदार्थ बनाया. यह इतना कारगर था कि एक बार स्प्रे करने से मनचले आधे घंटे से पहले नहीं उठ सकते थे.

उन्होंने इस का एक वीडियो बनाया और कालेज और स्कूलों की लड़कियों को ट्रेनिंग देनी शुरू की. यह काम उन्होंने हाईस्कूल से डिगरी कालेजों में पढ़ने वाली लड़कियों के बीच किया. साथ ही उन्हें खास तरह की खाली बोतलें दीं ताकि लिक्वेड को उस में भर कर अपने साथ रख सकें.

सौम्या की इस पहल को उद्योग संगठनों और प्रदेश के कुछ उद्योगपतियों ने सहयोग दिया और रीफिल की जाने वाली खाली स्प्रे बोतलें उपलब्ध कराईं. एसपी ने फैसला किया वह देश की बेटियों के लिए इस नए तरीके को यू ट्यूब के जरीए सार्वजनिक करेंगी, ताकि वे कम खर्च में अपनी सुरक्षा कर सकें. एसपी सौम्या की यह मुहिम काम आई और सिरमौर में छेड़छाड़ की घटनाएं बंद हो गईं.

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शिमला ट्रांसफर

इसी बीच शिमला के कोटखाई में गुडि़या गैंग रेप और हत्या के मामले को ले कर शिमला में लौ एंड और्डर की स्थिति बिगड़ी तो सुपरकौप सौम्या का ट्रांसफर शिमला कर दिया गया.

दरअसल, शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई में 4 जुलाई, 2017 को एक स्कूली छात्रा लापता हो गई थी. 2 दिन बाद जंगल में उस की लाश मिली. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि छात्रा के साथ गैंग रेप के बाद उस की हत्या की गई थी, वह भी 2 दिन पहले.

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सवाल उठा जंगली जानवरों के होते 2 दिन तक लाश सहीसलामत कैसे पड़ी रही. इसे ले कर हंगामा हुआ तो पुलिस ने एक स्थानीय युवक सहित 5 मजदूरों को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन लोग इस से संतुष्ट नहीं थे. हंगामा बढ़ते देख पुलिस ने जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी.

उस समय हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह की सरकार थी. लोग जांच से संतुष्ट नहीं हुए. इसी बीच 18 जुलाई को पकड़े गए एक युवक सूरज की हवालात में मौत हो गई. इस से हंगामा और बढ़ गया. लोग सड़कों पर उतर आए. आरोप था कि सूरज की मौत पुलिस टार्चर से हुई है.

लौ एंड और्डर को बिगड़ता देख मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला के एसपी डब्ल्यू डी नेगी को हटा कर 19 जुलाई, 2017 को सिरमौर की तेजतर्रार और ईमानदार आईपीएस सौम्या सांबशिवन को शिमला का नया एसपी तैनात कर दिया. साथ ही मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति दे दी.

जांच शुरू हुई तो सीबीआई ने अन्य लोगों के साथ नई एसपी सौम्या सांबशिवन का भी बयान लिया. इस के बाद सीबीआई ने हवालात में सूरज की मौत (हत्या) के मामले में सूबे के आईजी जहूर एच जैदी, एसपी डब्ल्यू डी नेगी और डीएसपी मनोज जोशी सहित 5 पुलिस वालों को आरोपी बनाया.

सीबीआई जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आईजी जहूर एच जैदी ने एसपी सौम्या पर बयान बदलने के लिए बारबार दबाव बनाया था.

सौम्या के लिए जब काम करना मुश्किल हो गया तो उन्होंने 10 दिसंबर, 2017 को पुलिस हेडक्वार्टर धर्मशाला फोन कर के डीजीपी से शिकायत की तो जैदी के फोन आने बंद हुए. डीजीपी ने यह बात मुख्यमंत्री को बताई तो जैदी को निलंबित कर दिया गया.

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सूरज की हत्या के आरोपी पुलिस वालों पर शिमला की सीबीआई अदालत में केस चलना शुरू हुआ, लेकिन वहां के वकीलों ने इन लोगों की पैरवी करने से इनकार कर दिया. बात सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची तो सर्वोच्च अदालत ने इस केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया.

शिमला की एसपी सौम्या सांबशिवन ने इस मामले में आईजी जहूर एच जैदी पर मानसिक रूप से प्रताडि़त करने का आरोप लगाते हुए अदालत में कहा कि आईजी इस केस में मेरा बयान बदलवाना चाहते हैं.

सौम्या के इस बयान से हिमाचल की सियायत में हलचल मच गई. तब नए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ऐसे अधिकारियों पर बड़ी काररवाई करेगी जो केस के गवाहों पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री ठाकुर का कहना था कि हम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं. इस मामले में किसी ने सबूतों या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश तो यह बरदाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने बताया कि एसपी सौम्या सांबशिवन ने आईजी जैदी द्वारा दबाव बनाए जाने की बात डीजीपी से कही थी और डीजीपी ने मुझे बताया. उन्होंने जैदी को चेतावनी भी दी थी. इस के बाद जैदी ने उन्हें फोन करना बंद कर दिया था. लेकिन यह मामला फिर से उठ खड़ा हुआ. सूरज और गुडि़या मामले में उन्होंने सौम्या पर जो दबाव बनाया, उस के लिए जैदी को 3 बार सस्पैंड किया गया. लेकिन उन्हें नियमों के तहत ही फिर से नियुक्ति दी गई.

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सरकारी खेल

इस बीच सौम्या सांबशिवन का ट्रांसफर कर के उन्हें पुलिस ट्रेनिंग कालेज भेज दिया गया. बाद में उन्हें वहां से भी ट्रांसफर कर के पंडोह में आईआरबी 3 का कमांडेंट बना दिया गया था. बाद में सौम्या ने फिर चंडीगढ़ कोर्ट में बयान दिया कि सुनवाई से पहले उन पर इतना दबाव डाला गया कि वह परेशान हो गईं और इस स्थिति में उन के लिए काम करना मुश्किल हो गया.

जैदी साहब सितंबर 2019 में उन के मोबाइल, शिमला औफिस के लैंडलाइन पर बात करने की लगातार कोशिश कर रहे थे. उन्होंने शिमला हेडक्वार्टर, वाट्सएप काल और सबौर्डिनेटर के फोन पर भी बात की.

सौम्या ने अपने मानसिक तनाव का जिक्र करते हुए आगे कहा कि दिनप्रतिदिन परिस्थितियां इतनी मुश्किल होती गईं कि उन के पीएसओ, स्टेनो ने फोन उठाना बंद कर दिया. ऐसी स्थिति में कोई कैसे काम कर सकता है.

अधिकारी कितना बड़ा और पावरफुल हो, लेकिन अपने सीनियर के सामने या उस के बारे में कुछ कहने से पहले 10 बार सोचता है, भविष्य की चिंता करता है. लेकिन सौम्या उन में से नहीं थीं जो डर जातीं. उन्होंने कोर्ट में कहा, ‘जैदी साहब ने मुझ से फोन पर कहा, ‘मैं वकीलों की एक टीम और 30 पेज की प्रश्नावली का सामना करने को तैयार हूं. उम्मीद है आप यह सूचना सीबीआई को नहीं देंगी.’

मजबूरी में उन्हें 10 दिसंबर, 2019 को धर्मशाला हेडक्वार्टर फोन कर के यह सूचना तत्काल डीजीपी को देनी पड़ी. इस के बाद उन का फोन आना तो बंद हो गया, लेकिन मेरे पीएसओ से मेरी लोकेशन जानने की कोशिश की गई. इस पर कोर्ट ने सीबीआई को सौम्या के कोर्ट आनेजाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा. सौम्या के बयान से यह बात साबित हो रही थी कि जैदी सहित कोटखाई मामले से जुड़े अन्य पुलिस अधिकारियों ने कहीं न कहीं लापरवाही बरती थी और अब खुद को बचाने के लिए गवाहों पर उन के पक्ष में बयान देने के लिए दबाव बना रहे थे. जैदी कौन सा बयान बदलवाना चाहते थे, यह बात क्लीयर नहीं हो पाई.

बहरहाल यह केस अभी भी चल रहा है. आगे क्या होगा कहा नहीं जा सकता. सौम्या सांबशिवन जहां भी रहीं अपनी ड्यूटी बखूबी निभाई, वह भी पूरी ईमानदारी से.

इसी बीच गतवर्ष अक्तूबर, 2020 में जब बिहार में 3 चरणों में चुनाव होने थे तो सौम्या को आदेश मिला कि बिहार में निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी उन की होगी. इस के लिए उन्हें राज्य कमांडर का दर्जा दिया गया था. तब भी वह पंडोह में आईआरबी 3 की कमांडेंट थीं.

आदेश मिलते ही वह हिमाचल के 600 जवानों के साथ निश्चित तारीख पर बिहार के लिए रवाना हो गईं. इन जवानों में पंडोह, बनगढ़ (ऊना) व कोलर (सिरमौर) की आईआरबी की 6 कंपनियां थीं. ये लोग सहारनपुर से टे्रन पकड़ कर बिहार के लिए रवाना हुए.

बिहार में शांतिपूर्ण चुनाव कराना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन सौम्या ने यह चुनौती स्वीकार की और पूरी भी की. फिलहाल सौम्या हिमाचल के पंडोह में आईआरबी 3 (भारतीय आरक्षित वाहिनी) की कमांडेंट हैं. उन की ईमानदारी और बेखौफ दबंग अधिकारी की छवि कभी नहीं बदलेगी. क्योंकि वह इसीलिए पुलिस फोर्स में आई हैं कि कानूनव्यवस्था को बनाए रखें और देशहित में काम करें.

जज्बे को सलाम

ईमानदारी, मेहनत और लगन से काम करने वाले पुलिस अधिकारी हों या आम लोग जहां भी जाते हैं. कुछ अलग कर के अपनी छाप छोड़ ही देते हैं. सौम्या सांबशिवन भी उन ही में से हैं. शिमला में जब उन का पंगा अपने सिनियर औफिसर आईजी से हुआ था तो राजनीतिक दबाव के चलते उन का तबादला कांगड़ा जिले के दरोह पुलिस प्रशिक्षण कालेज में कर दिया गया था, जहां उन्हें प्रिंसिपल बनाया गया था. वहां जाते ही उन्होंने अपने सहयोगी अफसरों से कहा, ‘हम मानकों के साथ इस कालेज की प्रतिष्ठा को न केवल बनाए रखेंगे बल्कि बेहतर से बेहतर काम करेंगे.’

सौम्या ने केवल कहा ही नहीं बल्कि स्वयं को साबित कर के भी दिखाया. उन्होंने जून 2018 के चयनित कांस्टेबलों के बैच के लिए कंप्यूटर और सामान्य संचार साधनों का प्रबंध कराया ताकि उन्हें मौजूदा दौर की जरूरी शिक्षा दी जा सके. इस बैच में 682 कांस्टेबल और 3 पूर्व सैनिक थे. इस बैच के सभी प्रशिक्षार्थी बुनियादी कंप्यूटर और सामान्य संचार माध्यमों में प्रशिक्षित हो कर पासिंग आउट परेड के बाद नियुक्ति के लिए विभिन्न थानों को भेजे गए थे.

भारत सरकार की संस्था ब्यूरो फौर पुलिस एंड डेवलपमेंट द्वारा किए गए अध्ययन के बाद कांगड़ा जिले को पुलिस प्रशिक्षण कालेज दरोह को राष्ट्रीय स्तर का सर्वश्रेष्ठ केंद्र (कांस्टेबल श्रेणी) घोषित किया था. प्रशिक्षण केंद्र को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 20 लाख का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिया गया था.

कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो जिंदगी की हर राह उपलब्धि बन जाती है. अपने सेवा काल के दौरान राह में आने वाली हर बाधा, रुकावट को अपनी उपलब्धि में बदलने वाली सौम्या सांबशिवन एक बेमिसाल अफसर तो हैं ही, साथ ही ईव टीजिंग का शिकार लड़कियों की स्नेहशील गार्जियन भी हैं.

Bigg Boss 14 फेम Kavita Kaushik ने ट्रोलर्स को ऐसे सिखाया सबक, कही ये बड़ी बात

बिग बौस 14 फेम कविता कौशिक बाद काफी चर्चा में रहीं थीं. क्योंकि शो में एंट्री के बाद उनके और एजाज खान के बीच जमकर लड़ाई हुई. कविता कौशिक को सोशल मीडिया पर भी ट्रोल किया गया है. तो ऐसे में एक्ट्रेस ने ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है.

उन्होंने ट्रोलर्स को जवाब देते हुए लिखा है कि उन्हें बाहर बुलाओ, उन्हें बेनकाब करो. दरअसल एक्ट्रेस को आपत्तिजनक भाषा लिखने वाले ट्रोलर्स को लेकर कविता के एक फैन ने कहा की कविता जी माफ कर दीजिए स्कूल का बच्चा लग रहा है.

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तो इसी बात पर एक्ट्रेस ने जवाब दिया है कि आज मैंने जाने दिया तो कल किसी छोटी बच्ची को गाली देगा, परसों बड़ा होकर अपने आस पास की लड़कियों के लिए खतरा बनेगा. आज नहीं डरा तो कल बड़ी बद्तमीजी करेगा.

कविता ने मुंबई पुलिस को भी अपने ट्विट के जरिए कहा है यह लड़का @PanchalNandita सोशल मीडिया पर अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहा है, प्लीज कार्रवाई करें! @MumbaiPolice.

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Pratyusha Banerjee के बॉयफ्रेंड का बड़ा खुलासा, विकास और काम्या पर साधा निशाना

छोटे पर्दे की फेमस एक्ट्रेस प्रत्यूषा बनर्जी ने 2016 में दुनिया को अलविदा कह दिया. ऐसे में उनके फैंस, फैमिली और फ्रेड्स को जबरदस्त झटका लगा था. प्रत्यूषा मौत की खबर सुनने के बाद हर कोई हैरान था.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार  प्रत्यूषा बनर्जी की मौत का जिम्मेदार उनके  बॉयफ्रेंड  राहुल राज सिंह को ठहराया गया था. अब इसी बीच राहुल राज सिंह ने खुलासा किया है कि प्रत्यूषा की मौत का उन पर क्या असर पड़ा.

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खबर ये आ रही है कि प्रत्यूषा बनर्जी के बॉयफ्रेंड राहुल राज सिंह ने कहा है कि उस दौरान हुए नुकसान से वो उभारना चाहते हैं और अच्छी यादों के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं.

ये भी बताया जा रहा है कि उन्होंने कहा कि उनकी शादी को दो साल हो चुके हैं, फिर भी उन्हें परिवार शुरू करने के लिए सही समय का इंतजार है. खबरों के अनुसार उन्होंने आगे बताया कि उनके माता-पिता और पत्नी ने कठिन समय में उनका साथ दिया है. राहुल ने ये भी कहा कि अब वह अपने परिवार को खुश रखना चाहते हैं.

रिपोर्टस के अनुसार राहुल ने प्रत्यूषा बनर्जी के बारे में बात करते हुए कहा कि उनका जीवन एक टीवी शो की कहानी जैसा रहा है. वह एक हैप्पी लाइफ के लिए अभी भी स्ट्रगल कर रहे हैं.

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प्रत्यूषा की मौत के मामले में उनके खिलाफ एक मामला भी दर्ज किया गया था. इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने तीन महीने बाद उन्हें अग्रिम जमानत दे दी.

प्रत्यूषा ने 2010 में टीवी सीरीयल बालिका वधु में आनंदी के किरदार से काफी मशहूर हुई थीं. 1 अप्रैल 2016 को मुंबई के गोरेगांव में वह अपने घर पर पंखे से लटकी पाई गईं.

Women’s Day Special- पथरीली मुस्कान: भाग 2

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

संतोषी के मरद की  आवाज़ सुनते ही सहम गयी थी गौरी ,आत्मा का दर्द एक बार फिर ताज़ा हो आया था ,पहले तो छत पर ही दुबक गयी ,आँखों और मुट्ठियों को किसके भीचें ,अपने शरीर को छोटा और छोटा करते हुए पर। मिठ्ठू वाली बात ने उसके बाल सुलभ मन को थोड़ा कमज़ोर किया था पर अपनी भावनाओं पर काबू पाना शायद स्त्री जाति में प्राकृतिक गुण ही तो है.

गिद्ध ,बाज़ और मक्खी की नाक और नज़र बड़ी पैनी होती है वे अपने शिकार को सूँघ ही लेते हैं.

संतोषी का मरद भी छत पर जा पहुंचा ,उसकी आहट जान सिहर उठी थी गौरी,उसकी सिहरन अभी खत्म भी न हो पायी थी कि एक पंजा उसकी पीठ को सहलाने लगा ,गौरी अभी बच्ची थी उसका डर भी स्वाभाविक था ,पर आज जैसे ही गिद्ध ने अपनी चोंच आगे बढ़ा कर शिकार करने चाहा ,गौरी ने प्रतिरोध किया पर उसका शक्ति प्रदर्शन एक पुरुष के सामने कहाँ चलने वाला था.

अपने आपको नर्क में गिरता देख गौरी ने चाचा की कलाई पर पूरी शक्ति से काटा , एक बारगी कराह तो उठा था चाचा,पकड़ ढीली हुयी तो गौरी बेतहाशा भागी और ऐसी भागी की नीचे की सीढ़ियों की जगह छत से सीधे नीचे ही आ गिरी .

कितनी चोट लगी थी ,कितनी नहीं ,गौरी को उसका गम नहीं था पर ज़मीन पर पड़े हुए जब उसकी नज़रें छत की और गयी तो उसने चाचा को अपनी और देखता हुआ पाया और गौरी के मन में एक संतोष सा उभर आया था कि आज उसने अपनी रक्षा कर ली है.

गांव में हल्ला हो गया कि गौरी छत से गिर गयी है ,और सबसे पहले चाचा ने ही गौरी को गोद में उठाया था उसके स्पर्श में भी एक गिजगिजाहट महसूस कर रही थी वो पर पीठ में आयी चोट के कारण प्रतिरोध करते न बनता था ,

चाचा अम्मा पापा को पता नहीं क्या मनगढ़ंत कहानी बता रहा था और वो भी चाचा की बात को सच ही मान रहे थे .

पैर में आयी चोट के कारण पैर में प्लास्टर करवाना पड़ा था पर उस दिन की घटना के बाद चाचा दुबारा गौरी को छूने  हिम्मत नहीं कर पाया था.

इस घटना ने गौरी को मर्दों के प्रति अनिच्छा सी भर दी थी ,वह जब भी कोई मर्द देखती तो गौरी को यही लगता कि उसकी नज़रें उसके अंगों को टटोल रही हैं और वो अंदर तक सिहर जाती और अपने दायरे में ही सिमट कर रह जाती.

गौरी का स्कूल जाना  पैर पर प्लास्टर होने के कारण फिलहाल बंद हो गया था,पर फिर भी गौरी ने घर से ही पढाई जारी रखी और जब इम्तेहान आये तो पापा आधी बोरी हल्दी की गांठे मास्साब के घर पहुंचा आये थे जिसका नतीजा ये हुआ कि अगले दिन  मास्साब खुद ही घर आकर कॉपी लिखवाकर ले गए, गौरी से.

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गौरी ने कॉपी में जो भी लिखा था वह पास होने के लिए काफी था पर वो ज़ख्म जो चाचा ने गौरी के मन पर दे दिया था वो तो भरने का नाम ही नहीं ले रहा था.

पापा का मसाले और गल्ले का काम और बढ़ चला था ,उनके सामान को  बाज़ार तक ले जाने और फिर वहां से वापिस लाने के लिए उन्हें एक सहायक की ज़रूरत थी क्योंकि छोटा भाई अभी  छोटा था और इस लायक नहीं था कि उनके काम में सहायक हो सके.

इसलिए पापा ने एक लड़का काम के लिए रख लिया उसका नाम पारस था ,बाजार वाले दिन वो पापा के साथ ही आता जाता और थोड़ा बहुत घर के कामों में माँ को भी सहायता करता ,बेहद ही हँसमुख था वो,सबको हँसाता पर गौरी को कभी हँसी नहीं आती.

एक जीवन का पत्थर की मूर्ति में बदलना आरम्भ हो चुका था. पारस और गौरी दोनों हमउम्र थे ,इसलिए दोनों में बातचीत भी हो जाती थी ,गौरी के पैरों का प्लास्टर कटने से पहले ,एक  सुंदर फूल की आकृति उकेरी थी उसने गौरी के पैर पर चढ़े सफ़ेद प्लास्टर पर.

“अरे वाह तुम तो कलाकार भी हो”माँ ने कहा

माँ की इस बात पर बच्चों की तरह हँस दिया था पारस.

प्लास्टर काटा जा चुका था और गौरी पहले की तरह ही स्कूल आने जाने लगी थी,पर मुस्कान अब भी उसके होठों से अंजान रिश्ता ही कायम कर हुए थी.

पारस की मौजूदगी गौरी को अच्छी लगने लगी थी ,गौरी के मन में चाचा की गंदी हरकतों की वजह से पुरूष के प्रति जो नफरत भरी हुयी थी ,पारस के आने के बाद वह कम हो गयी थी.

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अब किसी दिन अगर पारस काम पर नहीं आता तो गौरी को अच्छा नहीं लगता ,और उसके आने पर वो उसे पापा के साथ काम करते हुए कनखियों से देखती रहती.

जब कभी पापा को दुकान नहीं लगानी होती तो पारस घर में रहता ,एक दिन वह छत पर पतंग उडा रहा था ,और पतंग खूब हिचकोले लेकर मानो सूरज से ही बातें करना चाहती थी

“अरे ….कैसे इतनी ऊंची पतंग उडा लेते हो तुम” गौरी अपने छोटे भाई के साथ छत पर आते हुए बोली

“कोई भी उडा सकता है”

“कोई भी …..मतलब …मैं भी”

“हाँ..हाँ क्यों …नहीं ,देखो मैं तुम्हे सिखाता हूँ….देखो ..ये डोर ऐसे पकड़नी है …और जब पतंग आसमान की तरफ जाए तो थोड़ा डोर को ढीला करना …है और फिर थोड़ा डोर को खींचना है …..और बस” पारस ने गौरी को बताया

गौरी ने डोर उसके हाथ से ले ली और अपनी ही मस्ती में पतंग उड़ाने लगी ,पारस उसकी मदद कर रहा था जबकि गौरी के  छोटे भाई को नीचे रखा मांझा लेने भेज दिया था पारस ने

जैसे ही पारस ने अकेलापन पाया ,गौरी की पीठ से चिपक गया और फुसफुसा कर बोला “गौरी में तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ….और तुमसे शादी करना चाहता हूँ”

और पारस के हाथ गौरी के सीने पर जा पहुंचे गौरी के लिए पारस के मन में भी लगाव था पर अचानक से फिर उसी घटना की पुनरावृत्ति ……..,गौरी के सामने मिठ्ठू और चाचा वाली घटना आँखों में उतर आई ,उसने  अपने को पारस की गिरफ्त से छुड़ाया तमतमाती हुयी नीचे चली आयी.

आसमान में पतंग डोर समेत लहराते हुए एक पीपल के पेड़ में जाकर अटक गयी थी.

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