Crime Story: फंस ही गई कातिल बीवी- भाग 3

सौजन्य- मनोहर कहानियां

इस तरह निशा ने रिंकू को अपने भाई के सामने खड़ा करा कर दोनों में मनमुटाव करा दिया, साथ ही उस के नाम मां की एलआईसी के रुपए हड़पने का आरोप लगा कर रुद्रपुर कोतवाली में एक एफआईआर भी दर्ज करा दी. विपिन ने अपने कुछ रिश्तेदारों के सहयोग से पुलिस से मिल कर जैसेतैसे वह मामला निपटाया.

इस से विपिन को लगा कि अब उस घर में अपने भाई के साथ रहना उस की सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं है. वह अपना घर छोड़ कर अपनी ससुराल बिलासपुर में जा कर रहने लगा. तब से वह वहीं पर रह रहा था.

विपिन के घर छोड़ते ही निशा के सारे बंद रास्ते खुल गए. सुबह होते ही रिंकू अपने काम पर निकल जाता. उस के बाद वह अभिषेक को फोन कर के अपने घर बुला लेती थी. रिंकू के अभी 2 ही बच्चे थे, जिन में बड़ी बेटी मानवी 5 वर्ष की थी और उस से छोटा बेटा मानव 3 वर्ष का था.

मानवी तो स्कूल जाने लगी थी. लेकिन बेटा अभी छोटा था, जिस से निशा को कोई खास परेशानी नहीं होती थी. वह रिंकू की अनुपस्थिति का लाभ उठाते हुए आए दिन अभिषेक यादव के साथ मस्ती करती थी. अभिषेक का आनाजाना बढ़ गया तो मोहल्ले वालों को भी अखरने लगा. चलतेचलते यह बात रिंकू के सामने भी जा पहुंची.

रिंकू ने निशा को समझाने की कोशिश की. लेकिन निशा ने उलटे उसे ही समझाते हुए कहा कि अभिषेक उस का दूर का रिश्तेदार है. वह उस के घर पर आने पर रोक नहीं लगा सकती. निशा के सामने रिंकू की एक न चली.

रिंकू का आए दिन बाहर आनाजाना लगा रहता था. उसी दौरान एक दिन रिंकू ने अभिषेक और निशा को अपने घर में ही आपत्तिजनक स्थिति में रंगेहाथों पकड़ लिया. अभिषेक तो छत की सीढि़यों से पीछे कूद कर भाग गया.

उस रात रिंकू और निशा के बीच खूब गालीगलौज हुई. रिंकू ने निशा को बहुत भलाबुरा कहा. लेकिन निशा को जैसे सांप सूंघ गया था.

उस ने रिंकू के सामने माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती न करने की कसम भी खाई. रिंकू जानता था कि बात ज्यादा बढ़ाने से उसी की बेइज्जती होगी, लिहाजा वह सहन कर गया.

ये भी पढ़ें- Crime Story: मोहब्बत की खौफनाक साजिश- भाग 1

निशा जानती थी कि अब रिंकू को अभिषेक के बारे में सब कुछ पता चल चुका है, वह आगे किसी भी कीमत पर अभिषेक को सहन नहीं करेगा. उस दिन से अभिषेक काफी दिनों तक उस गली से नहीं गुजरा. लेकिन वह मोबाइल पर हमेशा निशा के संपर्क में रहता था. जब रिंकू कहीं काम से बाहर जाता तो वह घंटों तक अभिषेक से मोबाइल पर बात करती रहती. मोबाइल पर उस ने अभिषेक यादव से कहा कि अगर तुम मुझे सच्चा प्यार करते हो तो मुझे इस नर्क से निकाल कर कहीं दूसरी जगह ले चलो. लेकिन अभिष्ेक यादव जानता था कि उस के छोटेछोटे 2 बच्चे हैं, वह उन का क्या करेगा.

निशा ने रची साजिश

अंतत: निशा ने अभिषेक के साथ मिल कर रिंकू से पीछा छुड़ाने के लिए एक साजिश रच डाली. साजिश के तहत निशा ने अभिषेक को बताया कि वह 28 फरवरी, 2021 को अपनी बहन के घर हल्द्वानी जा रही है. अगर तुम मुझे सच्चा प्यार करते हो तो मेरे आने से पहले रिंकू को दुनिया से विदा कर दो. फिर हम दोनों इसी घर में मौजमस्ती करेंगे.

अभिषेक यादव निशा के प्यार में पागल था. वह उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. वह उस की साजिश का हिस्सा बन गया. रिंकू की हत्या करने के लिए उस ने अपने दोस्त आकाश यादव, साहिल व सूरज को भी शामिल कर लिया. निशा और अभिषेक यादव ने आकाश को 20 हजार रुपए देने के साथ ही एक तमंचा भी दिला दिया था.

योजना के तहत निशा ने अपने भाई को अपने घर बुलाया और 28 फरवरी को वह उस के साथ चली गई. निशा के जाने के बाद रिंकू घर पर अकेला रह गया था. 28 फरवरी की शाम को पूर्व योजनानुसार आकाश यादव उर्फ बांडा निवासी भदईपुरा, साहिल निवासी भूत बंगला ने रिंकू के घर पर पार्टी करने की योजना बनाई, जिस में शराब के साथ मुर्गा भी बनाया गया.

पार्टी में तीनों ने रिंकू को ज्यादा शराब पिलाई. उस शाम रिंकू के घर के पास एक शादी भी थी, जिस में डीजे बज रहा था. डीजे की आवाज में कुछ सुनाई नहीं दे रहा था. देर रात तक चली पार्टी में जब रिंकू बेहोशी की हालत में हो गया तो मौका पाते ही तीनों ने गोली मार कर उस की हत्या कर दी.

रिंकू की हत्या करने के बाद उन्होंने उस का मोबाइल भी स्विच्ड औफ कर दिया था. उस के बाद तीनों घर के दरवाजे पर अंदर से ताला लगा कर छत के रास्ते नीचे कूद कर चले गए. रिंकू की हत्या के बाद आकाश ने अभिषेक को बता दिया कि उस का काम हो गया है. उस के आगे का काम स्वयं निशा ने संभाला.

ये भी पढ़ें- Crime: दोस्ती, अश्लील फोटो वाला ब्लैक मेलिंग!

योजनानुसार निशा ने इस केस में रिंकू के छोटे भाई विपिन और उस के रिश्तेदारों को फंसाने की योजना बना रखी थी. लेकिन उस का यह दांव चल नहीं सका और वह खुद ही अपने जाल में उलझ गई.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. इस हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम में शामिल कोतवाल एन.एन. पंत, एसएसआई सतीश कापड़ी, एसआई पूरनी सिंह, रमपुरा चौकीप्रभारी मनोज जोशी, एसओजी प्रभारी उमेश मलिक, कांस्टेबल प्रकाश भगत

और राजेंद्र कश्यप को आईजी ने 5 हजार, एसएसपी ने ढाई हजार रुपए का ईनाम देने की घोषणा की.

कोरोना के दौर में बिहार में एक बार फिर शुरू हुआ चमकी बुखार का कहर

राइटर- सोनाली 

कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच बिहार में चमकी बुखार का प्रकोप एक बार फिर शुरू हो गया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक लगभग 200 से ज्यादा बच्चों की मौत इस बीमारी की वजह से हो चुकी है. एक बार फिर मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार ने एक 12 वर्षीय बच्चे की जिंदगी छीन ली है. चमकी बुखार से इस साल जिले में यह पहली मौत है, लेकिन इस मौत के बाद ये साफ है कि एक बार फिर बिहार में चमकी बुखार का आगमन हो चुका है. राज्य में पहले से ही कम संसाधनों और छोटी टीम के साथ कोरोना से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग बच्चों के लिए जानलेवा इस बीमारी से कितना मुकाबला कर पायेगा, यह गंभीर सवाल है.

ताजा मामले में मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में चमकी बुखार से एक बच्चे की मौत का है. मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने पीआईसीयू वार्ड में जमकर हंगामा मचाया. इस दौरान वार्ड में अफरातफरी मच गई. सुरक्षाकर्मियों के आने के बाद ही आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया गया. परिजनों का आरोप है कि इलाज के अभाव में बच्चे ने दम तोड़ दिया. हंगामा के दौरान बच्चे की मां बार-बार बेहोश होती रही, अस्पताल कर्मियों ने उसे बाहर निकाल दिया. मृतक की पहचान कांटी गोसाईटोला के कमलेश सहनी के पुत्र नंदन कुमार (10 साल) के रूप में की गई है. मृतक के पिता कमलेश ने बताया कि 2 बजे कांटी पीएचसी के डॉक्टर ने नंदन को चमकी बुखार से पीड़ित बताया और एसकेएमसीएच रेफर कर दिया. यहां आने पर भर्ती करने के बाद कोई डॉक्टर बच्चे का इलाज नहीं कर सकें, जिसके बाद बच्चे की मौत हो गई. इधर, डॉक्टर ने बताया कि बच्चे का ग्लुकोज लेवल 106 था. इसलिए मर्ज के अनुसार इलाज किया जा रहा था. इलाज के दौरान मौत हुई है. इधर, अस्पताल अधीक्षक डॉ. बाबू साहब झा ने बताया कि चमकी से बच्चे की मौत हुई है. इसके लिए अस्पताल में पूरी व्यवस्था की जा रही है. एसकेएमसीएच में इससे पहले चमकी से एक और बच्चे की मौत हो चुकी है.

ये भी पढ़ें-  Lockdown Returns: आखिर पिछले बुरे अनुभव से सरकार कुछ सीख क्यों नहीं रहीं?

 

उत्तर बिहार के 11 जिलों में बच्चों के लिए जानलेवा साबित होने वाली यह बीमारी AES, जिसे स्थानीय भाषा में चमकी बुखार भी कहते हैं, हर साल गर्मियों में फैलती है और बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो जाती है. 2019 में भी इस बीमारी से 600 से अधिक बच्चे पीड़ित हुए थे और इनमें 185 की मौत हो गई थी. उस वक्त इन बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था. राज्य के स्वास्थ्य संसाधनों को लेकर तब बड़े सवाल उठे थे.

उस वक्त बीमार होने वाले बच्चों के सामाजिक आर्थिक स्थितियों का आकलन करने के लिए सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा बीमार बच्चों के परिवार वालों का सर्वेक्षण किया गया था. सरकारी सर्वेक्षण तो सार्वजनिक नहीं हुआ, मगर सेंटर फॉर रिसर्च एंड डायलॉग द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चला कि बीमार होने वाले बच्चों में से 95 फीसदी से अधिक अत्यंत गरीब और दलित-पिछड़ी जाति के बच्चे हैं. वे कुपोषण का शिकार हैं. उनमें से ज्यादातर का टीकाकरण नहीं हुआ है. 70 फीसदी से अधिक परिवार वालों में चमकी बुखार को लेकर जागरूकता न के बराबर है. उनके इलाकों में आंगनबाड़ी की स्थिति ठीक नहीं है. न उन्हें समुचित पोषाहार मिलता है, न ही उनका वजन और बांह का माप लिया जाता है.

इस बीमारी के अब तक सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है. बता दें कि 1995 से ही उत्तर बिहार के जिलों में इस बीमारी से बच्चों की मौत होती रही है. पहले यह माना जाता था कि चूंकि लीची के मौसम में बच्चों की मौत होती है, इसलिए इस रोग से लीची का कोई न कोई संबंध है. पिछले साल यह बताया गया कि तेज गर्मी के मौसम में खेलने से बच्चे इस बीमारी के चपेट में आ रहे हैं. दिलचस्प है कि इस साल अभी तक न लीची का मौसम शुरू हुआ है, न कोई गर्मी का ही कोई प्रकोप है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हो रहे हैं.

ये भी पढ़ें- कोरोना: तंत्र मंत्र और हवन का ढोंग

ऐसे में प्रभावित क्षेत्र की गरीब आबादी के बीच जागरूकता, बच्चों को कुपोषण से बचाना, उन्हें भूखे पेट न सोने देना, बीमारी के लक्षण दिखते ही उन्हें पास के अस्पताल में तत्काल पहुंचा और ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और कारगर बनाना ही इस रोग से बच्चों को बचाने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है.

2019 में इतनी मौतों को बाद राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग की कमियों पर गंभीर सवाल उठने पर बिहार सरकार ने फैसला किया था कि अगले साल ऐसी तैयारी की जाएगी कि बच्चों की कम से कम मौत हो. मगर कुछ तो सरकारी तैयारी में हुए विलंब और कुछ कोरोना के प्रकोप की वजह से जिस तैयारी की बात की गई थी, वह पिछले साल भी नही दिखी और शायद इस साल भी वहीं हाल है.

बता दें कि मुजफ्फरपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच में 515 करोड़ की लागत पहला एक सौ दो बेड के पीकू (शिशु गहन चिकित्सा यूनिट) और 60 बेड का इंसेफ्लाइटिस वार्ड बनाया गया, जिससे की राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और बेहतर हो सकें और लोगों को परेशानी का सामना ना करना पड़े.

ये भी पढ़ें- जब डॉक्टर करता है, गर्भपात का अपराध!

पिछले साल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बार-बार घोषणा की जा रही थी कि कोरोना की वजह से बच्चों को मरने नहीं दिया जाएगा. हर मौत के बाद जांच हो रही है और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी हो रहा था. यह भी कहा गया है कि कोरोना संक्रमण के लिए चल रहे घर-घर सर्वे में चमकी बुखार से संबंधित जानकारी भी ली जाए. मगर इसके बावजूद जमीनी हालात इतने जटिल थे कि बच्चों का मरना लगातार जारी था. इन सबके बाद ऐसा लग रहा था मानों सरकार अब इस बीमारी को थोड़ा गंभीर रूप से लेंगे और आने वाले सालों में इस बीमारी से जूझने के लिए पूरी तरीकें से तैयार रहेंगे. लेकिन इस साल भी बच्चे की मौत और कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के बीच एक बार फिर राज्य के स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

आम्रपाली दुबे के बाद निरहुआ भी हुए कोरोना के शिकार, सरकारी नियमों को तोड़ना पड़ा भारी

Nrahua Tests Covid 19 Positive: बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री के बाद कोरोनावायरस ने  भोजपुरी इंडस्ट्री को भी चपेट में ले लिया है. हाल ही में खबर आई थी कि फेमस भोजपुरी एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) कोरोना पॉजिटिव हो गई हैं. आम्रपाली दुबे के बाद अब मशहूर भोजपुरी एक्टर दिनेश लाल यादव यानी निरहुआ (Dinesh Lal Yadav Niraua) भी कोरोना वायरस के शिकार हो गए हैं.

दो स्टाफ मेंबर्स को भी हुआ कोरोना…

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निरहुआ बांद्र जिले के एक गांव में अपनी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें कोरोना ने अपना शिकार बनाया है. वो अपनी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, जिस दौरान उन्हें और उनके दो स्टाफ मेंबर्स को कोरोना हो गया है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Nirahua (@dineshlalyadav)

ये भी पढ़ें- प्यार और हवस में फर्क करना सीखें- काजल राघवानी

शूटिंग के दौरान कोरोना नियमों की अनदेखी…

निरहुआ की फिल्म की शूटिंग के दौरान कोरोना के नियमों को भी नजरअंदाज किया जा रहा था. निरहुआ ने फिल्म के सेट से कुछ दिनों पहले ही एक वीडियो जारी किया था, जिसमें सभी कलाकार बिना मास्क के एक-दूसरे के करीब बैठे दिख रहे थे. वीडियो में साफ दिख रहा है कि सेट पर सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखा जा रहा था.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Nirahua (@dineshlalyadav)

लोगों ने किए ऐसे कमेंट…

इस वीडियो पर कुछ फैंस ने कमेंट करके उन्हें कोरोना नियमों का पालन करने की सलाह भी दी थी. बता दे कि निरहुआ यहां जिस फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, उसका नाम ‘सबका बाप अंगूठा छाप’ है.

ये भी पढ़ें- अक्षरा सिंह ने इस गाने में बताया ‘BOYFRIEND बदलने का नया तरीका’ देखें Viral Video

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Nirahua (@dineshlalyadav)

आम्रपाली दुबे ने किया था ये पोस्ट

इसके पहले आम्रपाली ने अपने कोरोना पॉजिटव होने की बात खुद फैंस के साथ शेयर की थी. आम्रपाली ने अपने इंस्टा अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया. जिसमें एक्ट्रेस ने लिखा, ‘सभी को नमस्ते, मैं आप सबको यह बताना चाहती हूं कि आज सुबह मेरी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. मैं और मेरा परिवार पूरी सावधानी बरतते हुए मेडिकल केयर ले रहे हैं.

उन्होंने आगे लिखा, आप लोग चिंता ना करें, हम सब एकदम ठीक हैं. बस केवल मुझे और मेरे परिवार को दुआओं में याद रखिएगा.

एक्ट्रेस के पोस्ट पर मोनालिसा, काजल राघवानी, दिनेश लाल यादव और रानी चटर्जी समेत कई भोजपुरी सेलेब्स ने कमेंट कर स्टार के जल्दी स्वस्थ होने की कामना की.

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव: विधानसभा चुनाव का सैमीफाइनल

योगी सरकार आने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पंचायत चुनाव को देख रही है, तो विपक्ष पूरा जोर लगा कर अपना दबदबा दिखाना चाहेगा.

इस बार उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव इतने खास हैं कि इन्हें ले कर तमाम तरह के लोकगीत बन चुके हैं. इन में से सब से मशहूर गीत ‘जब नौकरी न मिली जवानी में, तो कूद पड़े परधानी में…’ है. गांव के बेरोजगार नौजवानों के लिए यह एक सुनहरे मौके की तरह से दिख रहा है. इस की वजह यह है कि एक गांव को साल में विकास के लिए कम से कम 5 लाख से 10 लाख रुपए की सरकारी योजना मिलती है. ऐसे में 5 साल में अच्छीखासी रकम हो जाती है. इस के अलावा सड़क, खड़ंजा वगैरह बनाने का ठेका मिल जाता है और राजनीतिक ताकत बन कर बिचौलिए के रूप में काम करने का मौका भी मिल जाता है. इस वजह से प्रधान का पद बेहद खास हो जाता है.

पंचायत चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार हर तरह के दांव आजमा रहे हैं. जो सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं उन पर प्रधानी का सपना देखने वालों ने अपनी पत्नी, मां या दूसरी महिला रिश्तेदार को चुनाव मैदान में उतारा है. महिला उम्मीदवारों में से 90 फीसदी ऐसी हैं जो मुखौटाभर हैं. उन के नाम पर घर के मर्द काम करेंगे. यही वजह है कि बहुत सी कोशिशों के बाद भी महिलाओं को रिजर्व सीट का फायदा नहीं मिल सका है.

पैसे और दबदबे वाले लोग पंचायत चुनाव के जरीए सत्ता में अपना दखल बनाए रखना चाहते हैं. नौजवान तबका अपने राजनीतिक कैरियर के लिए पंचायत चुनाव को अहम मान कर चुनाव मैदान में है. राजनीतिक दलों को इस बहाने नए कार्यकर्ता भी मिल रहे हैं.

बिहार पर पड़ेगा पश्चिम बंगाल चुनाव का असर

अहम है यह दांव

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के बहाने राजनीतिक दल अपनी पैठ गांवगांव तक बना लेना चाहते हैं. साल 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों की नजर से देखें तो इन्हें विधानसभा चुनाव का सैमीफाइनल माना जा रहा है. इस की वजह यह है कि पंचायत चुनाव के जरीए ब्लौक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष को भी चुना जाना है. इन 2 पदों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपनेअपने उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतार दिया है.

ब्लौक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए उम्मीदवार को बीडीसी यानी क्षेत्र पंचायत सदस्य और डीडीसी यानी जिला पंचायत सदस्य बनना जरूरी होता है. बीडीसी सदस्य 1800 वोटर पर और डीडीसी 50000 वोटर पर एक पद स्वीकृत होता है. हर पार्टी ज्यादा से ज्यादा ब्लौक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष जितवाना चाहती है. इस राजनीतिक ताकत को हासिल करने के लिए पंचायत के चुनाव बेहद खास हो गए हैं.

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में 3051 पद जिला पंचायत सदस्य, 826 पद ब्लौक प्रमुख, 75,855 पद क्षेत्र पंचायत सदस्य, 58,194 पद ग्राम प्रधान और 7,31,813 पद ग्राम पंचायत सदस्यों के हैं. इन में से एक फीसदी सीटें अनुसूचित जनजाति, 21 फीसदी सीटें अनुसूचित जाति और 27 फीसदी सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए रिजर्व की जाएंगी, बाकी 51 फीसदी सीटें सामान्य वर्ग के लिए होंगी. सभी वर्गों में एकतिहाई सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व रखी गई हैं.

ये चुनाव ऐसे हैं जिन के जरीए गांवगांव तक पार्टी का प्रचार किया जा सकता है. यही वजह है कि राजनीतिक दल इन चुनावों को साल 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए सब से मुफीद मान रहे हैं.

ये भी पढ़ें- नक्सल बनाम भूपेश बघेल: “छाया युद्ध” जारी आहे

महंगे हो गए पंचायत चुनाव

चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवारों ने धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. चुनाव प्रचार के लिए बीडीसी और डीडीसी उम्मीदवारों को अपने गांव से दूर भी प्रचार के लिए जाना पड़ रहा है. ऐसे में गाड़ी, पैट्रोल और खानेपीने का खर्च करना पड़ रहा है. एक उम्मीदवार के साथ 5 से 10 लोगों की टीम चलती है. इस का पूरा खर्च उम्मीदवार को उठाना पड़ता है. चुनाव लड़ने की फीस भले ही कम लगती हो, पर वोट मांगने में लाखों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं.

पंचायत चुनाव के दौरान पुलिस शराब की धरपकड़ भी कर रही है. साल 2021 के पंचायत चुनाव में चुनाव खर्च की सीमा भी बढ़ा दी गई है. चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्य 10,000, ग्राम प्रधान 75,000, क्षेत्र पंचायत सदस्य 75,000, जिला पंचायत सदस्य डेढ़ लाख रुपए अधिकतम खर्च कर सकता है.

नेताओं की नर्सरी बने

प्रशासन के साथसाथ राजनीतिक दलों ने भी इन चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है. राजनीतिक दलों खासकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पहली बार दलीय आधार पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. भाजपा को लगता है कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पंचायत चुनाव में अपनी पकड़ बनानी जरूरी है. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का सब से ज्यादा फोकस गांव पर है. ‘मोदीयोगी’ की राज्य और केंद्र सरकारों के काम गिनाते हुए भाजपा अपना प्रचार कर रही है. प्रचार के लिए भाजपा किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम फसल बीमा योजना, गांव के शौचालय, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास और मनरेगा जौब कार्ड योजना का सहारा ले रही है.

इस बार के पंचायत चुनाव में बड़ी तादाद में बेरोजगार नौजवान चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. इस की वजह यह है कि सरकार गांवों के लिए बड़ेबड़े बजट ले कर आ रही है. इस के जरीए किसानों के गुस्से को कम करने की कोशिश की जाएगी. इन योजनाओं के संचालन में बड़े पैमाने पर पैसे की बंदरबांट होती है.

इस के साथ ही विधानसभा और लोकसभा चुनाव में वोटरों को जोड़ने में गांव के प्रधान की ज्यादा अहमियत होती है. इस वजह बड़ी तादाद में नौजवान ग्राम पंचायत के चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार विमल पाठक कहते हैं, ‘पहले जो काम छात्रसंघ के चुनाव करते थे, अब वही काम पंचायत और निकाय के चुनाव कर रहे हैं. वे नौजवानों को राजनीति की तरफ जोड़ रहे हैं. यहां से वे आगे बढ़ेंगे और देशप्रदेश की राजनीति में काम करेंगे.’

ये भी पढ़ें- आंदोलन कारोबारी की रीढ़ है किसान

मुद्दा बना किसान आंदोलन

गांवों में भाजपा के प्रचार करने वालों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. किसान कृषि कानून और किसान उत्पीड़न की बात कर रहे हैं. विरोधी उम्मीदवार इस बात का प्रचार कर रहे हैं कि भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार विकास नहीं कर रही है. महंगाई और बेरोजगारी बढ़ा रही है. किसान आंदोलन जो पहले दिल्ली की सीमा तक सीमित था, उस में पंजाब और हरियाणा के किसान ज्यादा थे, पर जैसे ही किसान आंदोलन में उत्तर प्रदेश के किसानों की भागीदारी हुई, तो यह भाजपा पर भारी पड़ने लगा. अब पंचायत चुनावों में कृषि कानून मुद्दा बन रहे हैं.

भाजपा के लोग इस के असर को कम करने के लिए किसान सम्मान निधि, केंद्र सरकार की आवास योजना, उज्ज्वला योजना का जिक्र कर रहे हैं. कुछ क्षेत्रों में धार्मिक धुव्रीकरण की कोशिश भी हो रही है.

टीवी और फिल्म के बाद भोजपुरी इंडस्ट्री में भी छाया कोरोना का कहर, Aamrapali Dubey हुईं वायरस का शिकार

टीवी और फिल्म इंडस्ट्री के बाद भोजपुरी इंडस्ट्री में कोरोना का कहर छाया हुआ है.  इसकी शुरुआत भोजपुरी क्विन आम्रपाली दुबे  से हुई. रविवार को आम्रपाली दुबे (Aamrapali Dubey) कोरोना पॉजिटिव पाई गईं.

दरअसल इसकी जानकारी आम्रपाली ने खुद फैंस के साथ शेयर की है. आम्रपाली ने अपने इंस्टा अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया. जिसमें एक्ट्रेस ने लिखा, ‘सभी को नमस्ते, मैं आप सबको यह बताना चाहती हूं कि आज सुबह मेरी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. मैं और मेरा परिवार पूरी सावधानी बरतते हुए मेडिकल केयर ले रहे हैं.

ये भी पढ़ें- खेसारी लाल यादव और कनिष्का नेगी का नया गाना ‘कोलगेट’ हुआ वायरल, देखें Video

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Dubey Aamrapali 🎀 (@aamrapali1101)

 

उन्होंने आगे लिखा, आप लोग चिंता ना करें, हम सब एकदम ठीक हैं. बस केवल मुझे और मेरे परिवार को दुआओं में याद रखिएगा.

ये भी पढ़ें- श्रुति राव को खेसारीलाल यादव ने क्यों कहा ‘तू फ्रॉड है’

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Dubey Aamrapali 🎀 (@aamrapali1101)

 

एक्ट्रेस के पोस्ट पर मोनालिसा, काजल राघवानी, दिनेश लाल यादव और रानी चटर्जी समेत कई भोजपुरी सेलेब्स ने कमेंट कर स्टार के जल्दी स्वस्थ होने की कामना की. वहीं अगर बात करें कोरोना की तो बीते एक ही महीने में करीब 50 से अधिक स्टार्स को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है. टीवी इंडस्ट्री के कुछ शोज पर कोरोना अटैक हुआ है. इनमें अनुपमा, इंडियन आइडल 12 और भी कई सारे शोज शामिल हैं.

Litti Chokha Trailer: ‘लिट्टी चोखा’ में भूत बनकर एंटरटेन करेंगे Khesari Lal Yadav, देखें Video

मलाइका अरोड़ा के हाथ में दिखी ये रिंग, क्या कर ली हैं Arjun Kapoor से सगाई?

बॉलीवुड एक्टर आर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा अपनी लव लाइफ को लेकर खूब सुर्खियां बटोरते हैं. ये कपल अक्सर अपनी फोटोज सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर करते हैं. अब फैंस को इनके शादी का बेसब्री से इंतजार है आखिर ये कपल कब शादी करेंगे.

तो अब मलाइका अरोड़ा ने अपनी एक खूबसूरत तस्वीर शेयर कर फैंस को चौंका दिया है. दरअसल इस तस्वीर में मलाइका रिंग फ्लॉन्ट करती हुई नजर आ रही हैं. इस तस्वीर को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि लगा रहे हैं कि कपल ने सगाई कर ली है.

ये भी पढ़ें- Ghum hai kisikey pyaar meiin: सई ने छोड़ा चौहान हाउस, भवानी की चाल हुई कामयाब

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Malaika Arora (@malaikaaroraofficial)

 

इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि मलाइका अरोड़ा बेहद खूबसूरत क्रीम कलर की डिजाइनर साड़ी में नजर आ रही हैं. इस फोटो में एक्ट्रेस ने एक बेहद खूबसूरत इंगेजमेंट रिंग पहनी हुई है. तो दूसरी तस्वीर में एक्ट्रेस ने हाथों में शैंपेन का ग्लास लिए हुए फोटो शेयर की है.

ये भी पढ़ें- ‘अनुपमा’ स्टार मदालसा शर्मा ने समंदर किनारे दिखाया अपना हॉट अंदाज, देखें Photos

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Malaika Arora (@malaikaaroraofficial)

 

अगर आपको भी लगता है कि एक्ट्रेस ने सगाई कर ली है तो हम आपको बता दें कि मलाइका अरोड़ा एक नामी रिंग ब्रांड को एंडोर्स कर रही हैं. ये तस्वीर उनके इसी कैंपेन का हिस्सा हैं.

ये भी पढ़ें- मालिनी लगाएगी पति चुराने का इल्जाम तो Imlie उठाएगी ये कदम

Ghum hai kisikey pyaar meiin: सई ने छोड़ा चौहान हाउस, भवानी की चाल हुई कामयाब

स्टार प्लस का सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ इन दिनों नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहा है, जिससे सीरियल  का अपकमिंग एपिसोड काफी धमाकेदार होने वाला है.

जी हां, इस सीरियल के बिते एपिसोड में आपने देखा कि विराट ने भवानी से वादा किया है कि वो सई को उसकी औकात दिखाकर ही दम लेगा. उसने सई से ये भी कहा कि वह उससे नफरत करता है और उसके घर में उसके लिए कोई भी जगह नहीं है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Aishwarya Sharma (@aisharma812)

 

ये भी पढ़ें- Anupamaa एक्ट्रेस Rupali Ganguly ने जीता कोरोना से जंग, अगले हफ्ते शुरू करेंगी शूटिंग

दरअसल पुलकित और देवयानी की शादी की वजह से विराट और सई के बीच जंग जारी है. तो वहीं शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि सई चौहान हाउस का दरवाजा खटखटाती रहेगी लेकिन कोई भी दरवाजा नहीं खोलेगा.

ये भी पढ़ें- ‘अनुपमा’ स्टार मदालसा शर्मा ने समंदर किनारे दिखाया अपना हॉट अंदाज, देखें Photos

इसके बाद सई आसापास को लोगों से ,कहेगी कि उसके घरवाले उसके साथ बुरा व्यवहार कर रहे हैं और दरवाजा नहीं खोल रहे हैं. तो दूसरी तरफ विराट ये सब देखकर और भी गुस्सा हो जाएगा. और सई को खूब खरी-खोटी सुनाएगा.

विराट की बातें को सुनकर सई चौहान हाउस की चौखट से ही वापस लौट जाएगी. सई और विराट के बीच बढ़ती हुई दूरियों को देखकर पाखी और भवानी काफी खुश होंगे. अब सीरियल के अपकमिंग एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या सई भवानी का पर्दाफाश कर पाएगी.

ये भी पढ़ें- Yeh Rishta Kya Kehlata hai: कार्तिक की जिंदगी में वापस लौटेगी नायरा, आएगा नया ट्विस्ट

Serial Story- अब जाने दो उसे: भाग 3

‘‘नीलू भाई को बहुत चाहती है मां. उस से अच्छी लड़की हमारे लिए कोई हो ही नहीं सकती…अनाथ बच्ची को अपना बना लो, मां. बस, तुम्हारी ही बन कर जीएगी वह. हमारे घर को नीलू ही चाहिए.’’

आंखें खुली रह गई थीं मां की और मेरी भी. हमारे घर का वह कोना जिसे हम ने इतनी मेहनत से सुंदर, आकर्षक बनाया वहां नीलू को मैं ने किस रूप में सोचा था? मैं ने तो उसे सोम के लिए सोचा था न.

नीलू को इतना भी अनाथ मत समझना…मैं हूं उस का. मेरा उस का खून का रिश्ता नहीं, फिर भी ऐसा कुछ है जो मुझे उस से बांधता है. वह मेरे भाई से प्रेम करती है, जिस नाते एक सम्मानजनक डोर से वह मुझे भी बांधती है.

‘‘तुम्हें कैसे पता चला? मुझे तो कभी पता नहीं चला.’’

‘‘बस, चल गया था पता एक दिन…और उसी दिन मैं ने उस के सिर पर हाथ रख कर यह जिम्मेदारी ले ली थी कि उसे इस घर में जरूर लाऊंगा.’’

‘‘कभी अपने मुंह से कुछ कहा था उस से तुम दोनों ने?’’ बारीबारी से मां ने हम दोनों का मुंह देखा.

मैं सकते में था और सोम निशब्द.

‘‘नीलू का ब्याह तो हो भी गया,’’ रो पड़ी थीं मां हमें सुनातेसुनाते, ‘‘उस की बूआ ने कोई रिश्ता देख रखा था. 4 दिन हो गए. सादे से समारोह में वह अपने ससुराल चली गई.’’

हजारों धमाके जैसे एकसाथ मेरे कानों में बजे और खो गए. पीछे रह गई विचित्र सी सांयसांय, जिस में मेरा क्याक्या खो गया समझ नहीं पा रहा हूं. पहली बार पता चला कोई मुझ से प्रेम करती थी और खो भी गई. मैं तो उसे सोम के लिए इस घर में लाने का सपना देखता रहा था, एक तरह से मेरा वह सपना भी कहीं खो गया.

‘‘अरे, अगर कुछ पता चल ही गया था तो कभी मुझ से कहा क्यों नहीं तुम ने,’’ मां बोलीं, ‘‘सोम, तुम ने मुझे कभी बताया क्यों नहीं था. पगले, वह गरीब क्या करती? कैसे अपनी जबान खोलती?’’

प्रकृति को कोई कैसे अपनी मुट्ठी में ले सकता है भला? वक्त को कोई कैसे बांध सकता है? रेत की तरह सब सरक गया हाथ से और हम वक्त का ही इंतजार करते रह गए.

सोम अपना सिर दोनों हाथों से छिपा चीखचीख कर रोने लगा. बाबूजी भी तब तक ऊपर चले आए. सारी कथा सुन, सिर पीट कर रह गए.

ये भी पढ़ें- सच उगल दिया: क्या था शीला का सच

वह रात और उस के बाद की बहुत सी रातें ऐसी बीतीं हमारे घर में, जब कोई एक पल को भी सो नहीं पाया. मांबाबूजी अपने अनुभव को कोसते कि क्यों वे नीलू के मन को समझ नहीं पाए. मैं भी अपने ही मापदंड दोहरादोहरा कर देखता, आखिर मैं ने सोम को क्यों और किसकिस कोण से सही नहीं नापा. सब उलटा हो गया, जिसे अब कभी सीधा नहीं किया जा सकता था.

सोम एक सुबह उठा और सहसा कहने लगा, ‘‘भाई, खड़े सामान की तरह क्यों न अब खड़े भावों को भी मन से निकाल दें. जिस तरह नया सामान ला कर पुराने को विदा किया था उसी तरह पुराने मोह का रूप बदल क्यों न नए मोह को पाल लिया जाए. नीलू मेरे मन से जाती नहीं, भाभी मान जिस पर ममता लुटाता रहा, क्यों न उसे बहन मान नाता जोड़ लूं…मैं उस से मिलने उस के ससुराल जाना चाहता हूं.’’

‘‘अब क्यों उसे पीछे देखने को मजबूर करते हो सोम, जाने दो उसे…जो बीत गई सो बात गई. पता नहीं अब तक कितनी मेहनत की होगी उस ने खुद को नई परिस्थिति में ढालने के लिए. कैसेकैसे भंवर आए होंगे, जिन से स्वयं को उबारा होगा. अपने मन की शांति के लिए उसे तो अशांत मत करो. अब जाने दो उसे.’’

मन भर आया था मेरा. अगर नीलू मुझ से प्रेम करती थी तो क्या यह मेरा भी कर्तव्य नहीं बन जाता कि उस के सुख की चाह करूं. वह सब कभी न होने दूं. जो उस के सुख में बाधा डाले.

रो पड़ा सोम मेरे कंधे से लग कर. खुशनसीब है सोम, जो रो तो सकता है. मैं किस के पास जा कर रोऊं और कैसे बताऊं किसी को कि मैं ने क्या नहीं पाया, ऐसा क्या था जो बिना पाए ही खो दिया.

ये भी पढ़ें- तुम ही चाहिए ममू : क्या राजेश ममता से अलग रह पाया

‘‘सिर्फ एक बार उस से मिलना चाहता हूं भाई,’’ रुंधा स्वर था सोम का.

‘‘नहीं सोम, अब जाने दो उसे.

Serial Story- अब जाने दो उसे: भाग 2

शाम कालिज से वापस आया तो खटखट की आवाज से पूरा घर गूंज रहा था. लपक कर पीछे बरामदे में गया. लकड़ी का बुरादा उड़उड़ कर इधरउधर फैल गया था. सोम का खाली दिमाग लकड़ी के बेकार पड़े टुकड़ों में उलझा पड़ा था. मुझे देख लापरवाही से बोला, ‘‘भाई, कुछ खिला दे. सुबह से भूखा हूं.’’

‘‘अरे, 5 घंटे कालिज में माथापच्ची कर के मैं आया हूं और पानी तक पूछना तो दूर खाना भी मुझ से ही मांग रहा है, बेशर्म.’’

‘‘भाई, शर्मबेशर्म तो तुम जानो, मुझे तो बस, यह कर लेने दो, बाबूजी का फोन आया है कि सुबह 10 बजे चल पड़ेंगे दोनों. शाम 4 बजे तक सारी कायापलट न हुई तो हमारी मेहनत बेकार हो जाएगी.’’

अपनी मस्ती में था सोम. लकड़ी के छोटेछोटे रैक बना रहा था. उम्मीद थी, रात तक पेंट आदि कर के तैयार कर देगा.

लकड़ी के एक टुकड़े पर आरी चलाते हुए सोम बोला, ‘‘भाई, मांबाप ने इंजीनियर बनाया है. नौकरी तो मिली नहीं. ऐसे में मिस्त्री बन जाना भी क्या बुरा है… कुछ तो कर रहा हूं न, नहीं तो खाली दिमाग शैतान का घर.’’

ये भी पढ़ें- विरोधाभास : सबीर का कैसा था चरित्र

मुझे उस पल सोम पर बहुत प्यार आया. सोम को नीलू से गहरा जुड़ाव है, बातबेबात वह नीलू को भी याद कर लेता.

नीलू बाबूजी के स्वर्गवासी दोस्त की बेटी है, जो अपने चाचा के पास रहती है. उस की मां नहीं थीं, जिस वजह से वह अनाथ बच्ची पूरी तरह चाचीचाचा पर आश्रित है. बी.ए. पास कर चुकी है, अब आगे बी.एड. करना चाहती है. पर जानता हूं ऐसा होगा नहीं, उसे कौन बी.एड. कराएगा. चाचा का अपना परिवार है. 4 जमातें पढ़ा दीं अनाथ बच्ची को, यही क्या कम है. बहुत प्यारी बच्ची है नीलू. सोम बहुत पसंद करता है उसे. क्या बुरा है अगर वह हमारे ही घर आ जाए. बचपन से देखता आ रहा हूं उसे. वह आती है तो घर में ठंडी हवा चलने लगती है.

‘‘कड़क चाय और डबलरोटी खाखा कर मेरा तो पेट ही जल गया है,’’ सोम बोला, ‘‘इस बार सोच रहा हूं कि मां से कहूंगा, कोई पक्का इंतजाम कर के घर जाएं. तुम्हारी शादी हो जाए तो कम से कम डबल रोटी से तो बच जाएंगे.’’

सोम बड़बड़ाता जा रहा था और खातेखाते सभी रैक गहरे नीले रंग में रंगता भी जा रहा था.

‘‘यह देखो, यह नीले रंग के छोटेछोटे रैक अचार की डब्बियां, नमक, मिर्च और मसाले रखने के काम आएंगे. पता है न नीला रंग कितना ठंडा होता है, सासबहू दोनों का पारा नीचा रहेगा तो घर में शांति भी रहेगी.’’

सोम मुझे साफसाफ अपने मनोभाव समझा रहा था. क्या करूं मैं? कितनी जगह आवेदन दिया है, बीसियों जगह साक्षात्कार भी दे रखा है. सोचता हूं जैसे ही सोम को नौकरी मिल जाएगी, नीलू को बस, 5 कपड़ों में ले आएंगे. एक बार नीलू आ जाए तो वास्तव में हमारा जीवन चलने लगेगा. मांबाबूजी को भी नीलू बहुत पसंद है.

दूसरी शाम तक हमारा घर काफी हलकाफुलका हो गया था. रसोई तो बिलकुल नई लग रही थी. मांबाबूजी आए तो हम गौर से उन का चेहरा पढ़ते रहे. सफर की थकावट थी सो उस रात तो हम दोनों ने नमकीन चावल बना कर दही के साथ परोस दिए. मां रसोई में गईं ही नहीं, जो कोई विस्फोट होता. सुबह मां का स्वर घर में गूंजा, ‘‘अरे, यह क्या, नए बरतन?’’

‘‘अरे, आओ न मां, ऊपर चलो, देखो, हम ने तुम्हारे आराम के लिए कितनी सुंदर जगह बनाई है.’’

आधे घंटे में ही हमारी हफ्ते भर की मेहनत मां ने देख ली. पहले जरा सी नाराज हुईं फिर हंस दीं.

‘‘चलो, कबाड़ से जान छूटी. पुराना सामान किसी काम भी तो नहीं आता था. अच्छा, अब अपनी मेहनत का इनाम भी ले लो. तुम दोनों के लिए मैं लड़कियां देख आई हूं. बरसात से पहले सोचती हूं तुम दोनों की शादी हो जाए.’’

ये भी पढ़ें- वह अनजान लड़की: स्टेशन पर दिनेश के साथ क्या हुआ

‘‘दोनों के लिए, क्या मतलब? क्या थोक में शादी करने वाली हो?’’ सोम ने झट से बात काट दी. कम से कम नौकरी तो मिल जाए मां, क्या बेकार लड़का ब्याह देंगी आप?’’

चौंक उठा मैं. जानता हूं, सोम नीलू से कितना जुड़ा है. मां इस सत्य पर आंख क्यों मूंदे हैं. क्या उन की नजरों से बेटे का मोह छिपा है? क्या मां की अनुभवी आंखों ने सोम की नजरों को नहीं पढ़ा?

‘‘मेरी छोड़ो, तुम भाई की शादी करो. कहीं जाती हो तो खाने की समस्या हो जाती है. कम से कम वह तो होगी न जो खाना बना कर खिलाएगी. डबलरोटी खाखा कर मेरा पेट दुखने लगता है. और सवाल रहा लड़की का, तो वह मैं पसंद कर चुका हूं…मुझे भी पसंद है और भाई को भी. हमें और कुछ नहीं चाहिए. बस, जाएंगे और हाथ पकड़ कर ले आएंगे.’’

अवाक् रह गया मैं. मेरे लिए किसे पसंद कर रखा है सोम ने? ऐसी कौन है जिसे मैं भी पसंद करता हूं. दूरदूर तक नजर दौड़ा आया मैं, कहीं कोई नजर नहीं आई. स्वभाव से संकोची हूं मैं, सोम की तरह इतना बेबाक कभी नहीं रहा जो झट से मन की बात कह दूं. क्षण भर को तो मेरे लिए जैसे सारा संसार ही मानो गौण हो गया. सोम ने जो नाम लिया उसे सुन कर ऐसा लगा मानो किसी ने मेरे पैरों के नीचे से जमीन ही निकाल ली हो.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें