नशे की हालत में Pawan Singh ने अक्षरा सिंह के साथ की ऐसी हरकत, पढ़ें खबर

भोजपुरी की फेमस एक्ट्रेस अक्षरा सिंह  सिगिंग और एक्टिंग की वजह से हर बार दर्शकों का दिल जीत लेती हैं. वह इन दिनों अपनी बेबाक अंदाज के लिए खूब सुर्खियां बटोरी रही हैं.

अक्षरा सिंह अपने लवलाइफ को लेकर भी काफी चर्चे में रही हैं. एक वक्त था, जब अक्षरा सिंह और पवन सिंह की फिल्मों के टिकिट हाथों-हाथ बिकते थे लेकिन किसी कारण से  इनका ब्रेकअप हो गया.

 

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दोनों की जोड़ी को ऑनस्क्रिन और ऑफस्क्रिन  खूब पसंद किया जाता था  और इन्हें असल जिंदगी  में भी एक-दूसरे से प्यार हो गया और इनका रिश्ता सालों तक चला.

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खबरों के अनुसार पवन सिंह ने एक लड़की के साथ शादी कर ली, जिसने अक्षरा सिंह को तोड़कर रख दिया. अक्षरा सिंह इन सारी चीजों से बाहर निकल ही रही थीं कि तभी एक रात ऐसा कुछ हुआ कि वो हैरान रह गईं.

 

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मिली जानकारी के अनुसार अक्षरा सिंह और पवन सिंह एक फिल्म की शूटिंग के लिए होटल में रुके हुए थे. शूटिंग के बाद पवन सिंह ने रात को ड्रिंक की और किसी बात पर वो इतना भड़क गए कि उन्होंने सबके सामने अक्षरा सिंह पर हाथ उठा दिया. आपको बता दें कि अक्षरा सिंह ने कई बार खुद ये बात कही हैं कि वो पवन सिंह से प्यार करती थीं.

 

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रिपोर्टर ने बनाया Imlie और आदित्य का वीडियो क्लिप, अब आएगा नया ट्विस्ट

स्टार प्लस का चर्चित  सीरियल ‘इमली’  में इन दिनों लव ट्रैंगल का ट्रैक चल रहा है जिससो दर्शकों को एंटरटेनमेंट का डबल डोज मिल रहा है. शो के मेकर्स हर हफ्ते नए ट्विस्ट के लिए कहानी का ट्रैक बदल रहे है.

सीरियल के बिते एपिसोड से दिखाया जा रहा है कि आदित्य, (Gashmeer Mahajani) इमली की ओर झुकता ही चला जा रहा है लेकिन वह मालिनी को सच बताने से डर रहा है कि कहीं मालिनी यह सच बर्दाश्त ना कर पाये.

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‘इमली’ के लेटेस्ट एपिसोड में ये दिखाया गया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों को सुनकर इमली काफी परेशान हो गई. तो आदित्य उसे अकेले में ले जाकर संभाला और उसे गले लगाकर शांत करने की कोशिश की तो इसी बीच आदित्य का एक कलीग दोनों का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया.

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तो वहीं इमली ने आदित्य से कहा कि उस रिपोर्टर को सच बताने से रोको तो दूसरी तरफ आदित्य कहता है कि अगर सच ऐसे ही पता चलने वाला है तो कोई बात नहीं.

इसी बीच वह रिपोर्टर घर जाकर सभी को इमली का सच बताने के लिए जाता है तभी वहां आदित्य और इमली पहुंच जाते हैं. तो दूसरी ओर मालिनी को बार-बार यही सवाल परेशान कर रहा है कि आखिर आदित्य उसे आजकल इतना इग्नोर क्यों कर रहा है.

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तो वहीं मालिनी आदित्य से पूछती है कि उसने उससे शादी ही क्यों की है, मालिनी इस बात की शिकायत करती है कि जब भी वो बात करने की कोशिश करती है तो वो काम का बहाना क्यों बनाता है. अब अपकमिंग एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा कि आदित्य, मालिनी के सवालों का क्या जवाब देता है.

Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin की पाखी हुईं ट्रोलिंग की शिकार तो ऐसे दिया करारा जवाब

टीवी एक्टर्स या बॉलीवुड एक्टर्स इन दिनों अपने फैंस के साथ सोशल मीडिया के जरिये एंटरटेन करने में कोई कसर नहीं छोड़ते लेकिन कई बार फैंस इन कलाकारों का ही मजाक बनाते हैं.

और फैंस को इनके पोस्ट का बेसब्री से भी इंतजार रहता है तो वहीं इन्हें ट्रोल करने का भी मौका गंवाना नहीं चाहते. ऐसा ही कुछ सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) के लीड एक्टर नील भट्ट (Neil Bhatt) के साथ हुआ था तो अब इस लिस्ट में इस सीरियल में पाखी का रोल अदा करने वाली एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा का जुड़ चुका है.

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दरअसल एक महीने पहले ही नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा की रोका सेरेमनी हुई. इस सेरेमनी से जुड़ा एक वीडियो ऐश्वर्या शर्मा ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था.

एक्ट्रेस ने वीडियो के कैप्शन में लिखा कि  जब हम दोनों रोका के समय कन्फ्यूज थे. मैं और नील सोच रहे थे कि क्या चल रहा है यार!

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एक्ट्रेस की यही बात लोगों को अच्छी नहीं लगी और इस कैप्शन के लिए लोगों ने लोगों को ऐश्वर्या शर्मा को ट्रोल करना शूरू कर दिया. कई यूजर्स ने उन्हें गालियां भी दी.

लेकिन एक्ट्रेस ने ट्रोलर्स के कमेंट्स को शेयर करके लिखा, ‘ओके बीसी मतलब विफोर कोविड… एक्ट्रेस का कहना है कि कोविड के समय ही हुई थी और हां रोका तो मेरा ही था अब रोक सको तो रोक लो, आपके भविष्य के लिए शुभकामनाएं.

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Serial Story: शब्दचित्र- भाग 3

लेखक- प्रीतम सिंह

उसे देखने के लिए उस ने अपनी गरदन घुमाई, तो बस देखती ही रह गई. वह खुशी से चिल्लाती हुई बोली, ‘‘प्रशांत, तुम!’’

प्रशांत ने घबरा कर उस की ओर देखा. ‘‘अरे, नीतू, इतने सालों बाद. कैसी हो?’’ और वह सवाल पर सवाल करने लगा.

‘‘मैं अच्छी हूं. तुम कैसे हो?’’ नीतू ने जवाब दे कर प्रश्न किया. उसे इतनी खुशी हो रही थी कि वह सोचने लगी कि अब यह बस 2 घंटे भी ले ले, तो भी कोई बात नहीं.

‘‘मैं ठीक हूं. और बताओ, क्या करती हो आजकल?’’

‘‘वही, जो स्कूल के इंटरवल में

करती थी.’’

‘‘अच्छा, वह चित्रों की दुनिया.’’

‘‘हां, चित्रों की दुनिया ही मेरा सपना. और मैं ने अपना वही सपना अब पूरा कर लिया है.’’

‘‘सपना, कौन सा? अच्छी स्कैचिंग करने का.’’

‘‘हां, स्कैचिंग करतेकरते मैं एक दिन अलंकार मैगजीन में इंटरव्यू दे आई थी. बस, उन्होंने रख लिया मुझे.’’

‘‘बधाई हो, कोई तो सफल हुआ.’’

‘‘और तुम क्या करते हो? जौब लगी या नहीं?’’

‘‘जौब तो नहीं लगी, हां, एक प्राइवेट कंपनी में जाता हूं.’’

तभी प्रशांत को कुछ याद आता है, ‘‘एक मिनट, क्या बताया तुम ने, अभी कौन सी मैगजीन?’’

‘‘अलंकार मैगजीन,’’ नीतू ने बताया.

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‘‘अरे, उस में तो…’’

नीतू उस की बात बीच में ही काटती हुई बोली, ‘‘कहानी भेजी थी. और संयोग से वह कहानी मैं आज ही पढ़ कर आई हूं, स्कैच बनाने के साथसाथ.’’

‘‘पर, तुम्हें कैसे पता चला कि वह कहानी मैं ने ही भेजी थी. नाम तो कइयों के मिलते हैं.’’

‘‘सिंपल, तुम्हारी हैंडराइटिंग से.’’

‘‘क्या? मेरी हैंडराइटिंग से, तो

क्या तुम्हें मेरी हैंडराइटिंग भी याद है

अब तक.’’

‘‘हां, मिस्टर प्रशांत.’’

‘‘ओह, फिर तो अब तुम पूरे दिन चित्र बनाती होगी और कोई डिस्टर्ब भी न करता होगा मेरी तरह. है न?’’

‘‘हां, वह तो है.’’

‘‘देख ले, सब जनता हूं न मैं?’’

‘‘लेकिन, तुम एक बात नहीं जानते प्रशांत.’’

‘‘कौन सी बात?’’

बारबार मुझे स्कूल की बातें याद आ रही थीं. मैं ने सोचा कि बता देती हूं. क्या पता, फिर ऊपर वाला ऐसा मौका दे या न दे, यह सोच कर नीतू बोल पड़ी, ‘‘प्रशांत, मैं तुम्हें पसंद करती हूं.’’

‘‘क्या…?’’ प्रशांत ऐसे चौंका जैसे उसे कुछ पता ही न हो.

‘‘तब से जब हम स्कूल में पढ़ते थे और मैं यह भी जानती हूं कि तुम भी मुझे पसंद करते हो. करते हो न?’’

प्रशांत ने शरमाते हुए हां में अपनी गरदन हिलाई.

तभी बस एक स्टाप पर रुकी. हम खामोश हो कर एकदूसरे को देखने लगे.

‘‘तेरी शादी नहीं हुई अभी तक?’’ प्रशांत ने प्रश्न किया.

‘‘नहीं. और तुम्हारी?’’

‘‘नहीं.’’

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न जाने क्यों मेरा मन भर आया और मैं ने बोलना बंद कर दिया.

‘‘क्या हुआ नीतू? तुम चुप क्यों हो गईं?’’

‘‘प्रशांत, शायद मेरी जिंदगी में तुम हो ही नहीं, क्योंकि कल मेरी एंगेजमैंट है और तुम इतने सालों बाद आज

मिले हो.’’

इतना सुनते ही प्रशांत का गला भर आया. वह बस, इतना ही बोला, ‘‘क्या,

कल ही.’’

दोनों एक झटके में ही उदास हो गए.

कुछ देर खामोशी छाई रही.

‘‘कोई बात नहीं नीतू. प्यार का रंग कहीं न कहीं मौजूद रहता है हमेशा,’’ प्रशांत ने रुंधे मन से कहा.

‘‘मतलब?’’ नीतू ने पूछा.

‘‘मतलब यह कि हम चाहे साथ रहें न रहें, तुम्हारे चित्र और मेरे शब्द तो साथ रहेंगे न हमेशा कहीं न कहीं,’’ प्रशांत हलकी सी मुसकान भरते हुए बोला.

‘‘मुझे नहीं पता था प्रशांत कि तुम इतने समझदार भी हो सकते हो.’’

तभी कंडक्टर की आवाज सुनाई दी, ‘‘पंजाबी बाग.’’

‘‘ओके प्रशांत, मेरा स्टौप आ गया है. अब चलती हूं. बायबाय.’’

‘‘बाय,’’ प्रशांत ने भी अलविदा कहा.

वह बस से उतरी और जब तक आंखों से ओझल न हो गए, तब तक दोनों एकदूसरे को देखते रहे.

Serial Story: शब्दचित्र- भाग 1

लेखक- प्रीतम सिंह

नीतू स्कूल के समय से ही स्कैच बनाया करती. पढ़ाई पूरी करने के बाद जौब भी उसे इसी तरह की मिल गई और उस का स्कैच बनाने का सपना साकार हो गया. पर क्या असल जिंदगी में भी उस का सपना सच हो पाया?

सुबह 6 बजे का अलार्म पूरी ईमानदारी से बज कर बंद हो गया. वह एक सपने या थकान पर कोई असर नहीं छोड़ पाया. ठंडी हवाएं चल रही हैं. पक्षी अपने भोजन की तलाश में निकल पड़े हैं.

तभी मां नीतू के कमरे में घुसते ही बोलीं, ‘‘इसे देखो, 7 बजने को हैं और अभी तक सो रही है. रात को तो बड़ीबड़ी बातें करती है, अलार्म लगा कर सोती हूं. कल तो जल्दी उठ जाऊंगी, मगर रोज सुबह इस की बातें यों ही धरी रह जाती हैं.’’ मां बड़बड़ाए जा रही थीं.

अचानक ही मां की नजर नीतू के चेहरे पर पड़ी, यह भी क्या करे, सुबह 9 बजे निकलने के बाद औफिस से आतेआते शाम के 8 बज जाते हैं. कितना काम करती है. एक पल मां ने यह सब सोचा, फिर नीतू को जगाने लगीं.

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‘‘नीतू, ओ नीतू, उठ जा. औफिस नहीं जाना क्या तुझे?’’

‘‘‘हुं… सोने दो न मां,’’ नीतू ने करवट बदलते हुए कहा.

‘‘अरे नीतू बेटा, उठ ना… देख 7 बज चुके हैं,’’ मां ने फिर से उठाने का प्रयास किया.

‘‘क्या…7 बज गए?’’ यह कहती

वह जल्दी से उठी और आश्चर्य से पूछने लगी, ‘‘उस ने तो सुबह 6 बजे का अलार्म लगाया था?’’

‘‘अब यह सब छोड़ और जा, जा कर तैयार हो ले,’’ मां ने नीतू का बिस्तर समेटते हुए जवाब दिया.

नीतू को आज भी औफिस पहुंचने में देर हो गई थी. सब की नजरों से बच कर वह अपनी डैस्क पर जा पहुंची. मगर रीता ने उसे देख ही लिया. 5 मिनट बाद वह उस के सामने आ धमकी. कहानियों से भरे पत्र उस की डैस्क पर पटक कर कहने लगी, ‘‘ये ले, इन 5 लैटर्स के स्कैच बनाने हैं आज तुझे लंच तक. मैम ने मुझ से कहा था कि मैं तुझे बता दूं.’’

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‘‘पर यार, आधे दिन में 5 स्कैच कैसे कंप्लीट कर पाऊंगी मैं?’’

‘‘यह तेरी सिरदर्दी है. इस में मैं क्या कर सकती हूं. और, वैसे भी मैम का हुक्म है,’’ कह कर रीता अपनी डैस्क पर चली गई.

Serial Story: शब्दचित्र- भाग 2

लेखक- प्रीतम सिंह

बचपन से ही अपनी आंखों में पेंटर बनने का सपना लिए नीतू अब जा कर उसे पूरा कर पाई है. जब वह स्कूल में थी, तब कौपियों के पीछे के पन्नों पर ड्राइंग किया करती थी, मगर अब एक मैगजीन में हिंदी कहानियों के चित्रांकन का काम करती है.

अपनी चेयर को आगे खिसका कर वह आराम से बैठी और बुझेमन से एक पत्र उठा कर पढ़ने लगी. वह जब भी चित्रांकन करती, उस से पहले कहानी को अच्छी तरह पढ़ती थी  ताकि पात्रों में जान डाल सके.

2 कहानियों के पढ़ने में ही घड़ी ने एक बजा दिया. जब उस की नजर घड़ी पर पड़ी, तो वह थोड़ी परेशान हो गई.

वह सोचने लगी, अरे, लंच होने में सिर्फ एक घंटा ही बचा है और अभी तक 2 ही कहानियां पूरी हुई हैं. कैसे भी 3 तो पूरी कर ही लेगी.  और वह फिर से अपने काम में लग गई.

लंच भी हो गया. उस ने 3 कहानियों का चित्रांकन कर दिया था. वह खाना खाती जा रही थी और सोचती जा रही थी कि बाकी दोनों भी 4 बजे तक पूरा कर देगी. साथ ही,  उस के मन में यह डर था कि कहीं मैम पांचों स्कैच अभी न मांग लें.

खाना खा कर नीतू मैम को देखने उन के केबिन की ओर गई, परंतु उसे मैम न दिखीं.

रीता से पूछने पर पता चला कि मैम किसी जरूरी काम से अपने घर गई हैं.

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इतना सुनते ही उस की जान में जान आई. लंच समाप्त हो गया.

नीतू अपनी डैस्क पर जा पहुंची. अगली कहानी छोटी होने की वजह से उस ने जल्दी ही निबटा दी. अब आखिरी कहानी बची है, यह सोचते हुए उस ने 5वां पत्र उठाया और पढ़ने लगी.

‘प्रशांत शर्मा’ इतना पढ़ते ही उस के मन से काम का बोझ मानो गायब हो गया. वह अपने हाथ की उंगलियों के पोर पत्र पर लिखे नाम पर घुमाने लगी. उस की आंखें, बस, नाम पर ही टिकी रहीं. देखते ही देखते वह अतीत में खोने लगी.

तब उस की उम्र 15 साल की रही होगी. 9वीं क्लास में थी. घर से स्कूल जाते हुए वह इतना खुश हो कर जाती थी जैसे आसमान में उड़ने जा रही हो.

मम्मीपापा की इकलौती बेटी थी वह. सो, मुरादें पूरी होना लाजिमी थीं. पढ़ने में होशियार होने के साथसाथ वह क्लास की प्रतिनिधि भी थी.

दूसरी ओर प्रशांत था. नाम के एकदम विपरीत. कभी न शांत रहने वाला लड़का. क्लास में शोर होने का कारण और मुख्य जड़ था वह ही. पढ़ाई तो वह नाममात्र ही करता था. क्या यह वही प्रशांत है?

दिल की धड़कन जोरों से धड़कने लगी. तुरंत उस ने पत्र को पलटा और ध्यान से हैंडराइटिंग को देखने लगी. बस, चंद सैकंड में ही उस ने पता लगा लिया कि यह उस की ही हैंडराइटिंग है.

फिर से अतीत में लौट गई वह. सालभर पहले तो गुस्सा आता था उसे, पर न जाने क्यों धीरेधीरे यह गुस्सा कम होने लगा था उस के प्रति. जब भी वह इंटरवल में खाना खा कर चित्र बनाती, तो अचानक ही पीछे से आ कर वह उस की कौपी ले भागता था. कभी मन करता था कि 2 घूंसे मुंह पर टिका दे, मगर हर बार वह मन मार कर रह जाती.

रोज की तरह एक दिन इंटरवल में वह चित्र बना रही थी, तभी क्लास के बाहर से भागता हुआ प्रशांत उस के पास आया. वह समझ गई कि कोई न कोई शरारत कर के भाग आया है, तभी उस के पीछे दिनेश, जो उस की ही क्लास में पढ़ता था, वह भी वहां आ पहुंचा और उस ने लकड़ी वाला डस्टर उठा कर प्रशांत की ओर फेंकना चाहा. उस ने वह डस्टर प्रशांत को निशाना बना कर फेंका. उस ने आव देखा न ताव, प्रशांत को बचाने के लिए अपनी कौपी सीधे डस्टर की दिशा में फेंकी, जो डस्टर से जा टकराई. प्रशांत को बचा कर वह दिनेश को पीटने गई, पर वह भाग गया.

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‘अरे, आज तू ने मुझे बचाया, मुझे…’ प्रशांत आश्चर्य से बोला.

‘हां, तो क्या हो गया?’ उस ने जवाब दिया.

अचानक प्रशांत मुड़ा और अपने बैग से एक नया विज्ञान का रजिस्टर ला कर उसे देते हुए बोला, ‘यह ले, आज से तू चित्र इस में बनाना. वैसे भी, मुझे बचाते हुए तेरी कौपी घायल हो गई है.’

उस ने रजिस्टर लेने से मना कर दिया.

‘अरे ले ले, पहले भी तो मैं तुझे

कई बार परेशान कर चुका हूं, पर अब से नहीं करूंगा.’

जब उस ने ज्यादा जोर दिया, तो उस ने रजिस्टर ले लिया, जो आज भी उस के पास रखा है.

ऐसे ही एक दिन जब उसे स्कूल में बुखार आ गया, तो तुरंत वह टीचर के

पास गया और उसे घर ले जाने की अनुमति मांग आया.

टीचर के हामी भरते ही वह उस का बैग उठा कर घर तक छोड़ने गया.

वहीं, शाम को वह उस का हाल जानने उस के घर फिर चला आया. उस की इतनी परवा करता है वह, यह देख कर उस का उस से लगाव बढ़ गया था. साथ ही, वह यह भी समझ गई थी कि कहीं न कहीं वह भी उसे पसंद करता है.

पर 10 सालों में वह एक बार भी उस से नहीं मिला. दिल्ली जैसे बड़े शहर में न जाने कहां खो गया.

‘‘रीता, इस की एक कौपी कर के मेरे कैबिन में भिजवाओ जल्दी,’’ अचला मैम की आवाज कानों में पड़ने से उस की तंद्रा टूटी.

मैम आ गई थीं. अपने कैबिन में जातेजाते मैम ने उसे देखा और पूछ बैठीं, ‘‘हां, वो पांचों कहानियों के स्कैचेज तैयार कर लिए तुम ने?’’

‘‘बस, एक बाकी है मैम,’’ उस ने चेयर से उठते हुए जवाब दिया.

‘‘गुड, वह भी जल्दी से तैयार कर के मेरे पास भिजवा देना. ओके.’’

‘‘ओके मैम,’’ कह कर नीतू चेयर पर बैठी और फटाफट प्रशांत की लिखी कहानी पढ़ने लगी.

10 मिनट पढ़ने के बाद जल्दी से उस ने स्कैच बनाया और मैम को दे आई.

औफिस का टाइम भी लगभग पूरा हो चला था. शाम 6 बजे औफिस से निकल कर नीतू बस का इंतजार करने लगी. कुछ ही देर में बस भी आ गई. वह बस में चढ़ी, इधरउधर नजर घुमाई तो देखा कि बस में ज्यादा भीड़ नहीं थी. गिनेचुने लोग ही थे.

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कंडक्टर से टिकट ले कर वह खिड़की वाली सीट पर जा बैठी और बाहर की ओर दुकानों को निहारने लगी.

अचानक बस अगले स्टौप पर रुकी, फिर चल दी.

‘‘हां भाई, बताइए?’’

बस के इंजन के नीचे दबी कंडक्टर की आवाज मेरे कानों में पड़ी.

‘‘करोल बाग एक,’’ पीछे से किसी ने जवाब दिया.

लगभग एक घंटा तो लगेगा. अभी इतना सोच कर वह पर्स से मोबाइल और इयरफोन निकालने लगी कि अचानक कोई आ कर उस की बगल में बैठ गया.

Crime Story: फंस ही गई कातिल बीवी- भाग 2

सौजन्य- मनोहर कहानियां

रिंकू फोटोग्राफी का काम करता था, इसलिए उसे अकसर बाहर रहना पड़ता था. अब से करीब 8 साल पहले रिंकू दिल्ली में किसी शादी में फोटोशूट के लिए गया हुआ था. उसी दौरान उस की मुलाकात निशा से हुई. निशा देखनेभालने में ठीकठाक थी.

शादी में फोटोशूट के दौरान वह रिंकू से इंप्रैस हुई तो उस ने रिंकू का फोन नंबर ले लिया. उस शादी के बाद रिंकू अपने घर आ गया. रिंकू के घर आने के एकदो दिन बाद ही रिंकू के पास  निशा के फोन आने लगे.

फोन पर बात होने के दौरान ही निशा ने बताया कि हल्द्वानी और रुद्रपुर में उस की बहनें रहती हैं. वह उन के घर भी आतीजाती है. समय गुजरते निशा और रिंकू के बीच प्रेम अंकुरित हुआ और दोनों ही एकदूसरे के साथ जिंदगी बिताने के सपने देखने लगे.

उस दौरान निशा कई बार अपनी बहन के घर आई तो उस ने रिंकू को मिलने के लिए अपनी बहन के घर बुलाया. उसी दौरान रिंकू के परिवार वालों को भी पता चल गया था कि वह निशा नाम की किसी लड़की से प्यार करता है.

उस के परिवार वालों ने उसे समझाने की कोशिश की कि शादी के मामले इतने आसान नहीं होते. ऐसे मौके इंसान की जिंदगी में बारबार नहीं आते. किसी की लड़की घर में लाने से पहले उस के परिवार के बारे में जानकारी जुटाना बहुत जरूरी होता है.

लेकिन रिंकू अपने परिवार वालों की एक भी बात मानने को तैयार न था. वह निशा के प्यार में इस कदर पागल हो चुका था कि किसी भी कीमत पर उसे छोड़ने को तैयार न था. परिवार के इसी विरोध के चलते रिंकू ने परिवार वालों को बिना बताए निशा से कोर्टमैरिज कर ली.

निशा से शादी कर के रिंकू ने शहर में ही उसे किराए का एक कमरा दिला दिया. वह भी उसी के साथ रहने लगा. जब घर वालों को उस की हकीकत पता चली तो उन्होंने उस की मजबूरी समझ कर निशा को घर लाने को कहा.

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ससुराल में शुरू की कलह

निशा रिंकू के घर वालों के रहमोकरम पर बहू बन कर परिवार के बीच रहने लगी. शादी के कुछ समय बाद तक निशा ठीकठाक रही. लेकिन कुछ ही दिनों में उस का व्यवहार बदलने लगा.

वह रिंकू के घर वालों के साथ गलत व्यवहार करने लगी. उस के घर वाले उसे बोझ लगने लगे. जिस के चलते वह रिंकू पर घर वालों से अलग रहने का दबाव बनाने लगी. यहां तक वह परिवार वालों का खाना बनाने के लिए भी तैयार नहीं थी.

रिंकू का छोटा भाई विपिन उस वक्त कुंवारा था. घर में आई बहू की हालत देख उस के घर वालों ने अपने छोटे बेटे विपिन की शादी करने का फैसला कर लिया.

विपिन की शादी की बात चली तो उस के योग्य एक लड़की मिल गई. विपिन की शादी उत्तर प्रदेश के बिलासपुर कस्बे से हुई. विपिन की शादी होते ही घर में दूसरी बहू आई तो घर वालों को कुछ राहत मिली.

विपिन की शादी होते ही रिंकू अपनी पत्नी निशा को ले कर अलग रहने लगा. खानापीना घर परिवार से अलग बनने लगा, लेकिन रहनसहन उसी घर में था. भाई तो भाई होते हैं लेकिन एक ही छत के नीचे चार बहुओं का रहना किसी मुसीबत से कम नहीं था. यही कारण था कि परिवार में आए दिन किसी न किसी बात पर मनमुटाव होता रहता था.

जिस घर में कलह होने लगे तो वहां शांति के लिए कोई जगह नहीं रह जाती. वही इस परिवार में भी हुआ.

सन 2017 में रिंकू की मां द्रौपदी अपने 2 बेटों भारत यादव और सुनील यादव के साथ किसी काम से बरेली गई हुई थी. वहां से घर लौटते समय उन की बाइक किसी गाड़ी की चपेट में आ गई, जिस से उन तीनों की मौत हो गई.

घर में एक साथ 3 मौतें हो जाने के कारण रिंकू को जबरदस्त झटका लगा. उस के बावजूद उस ने जैसेतैसे अपने परिवार को संभालने की कोशिश की. दोनों भाइयों की विधवा बीवी और बच्चों की जिम्मेदारी भी उसी ने संभाली. लेकिन यह सब निशा को पसंद नहीं था. निशा शुरू से ही तेजतर्रार थी. पैसे से उसे कुछ ज्यादा ही प्यार था.

उसी दौरान निशा को पता चला कि उस की सास द्रौपदी का जीवनबीमा था, जिस का क्लेम उन के नौमिनी को मिलना था. रिंकू के सभी परिवार वाले यह बात जानते थे कि अगर पैसा रिंकू के हाथ में चला गया तो उस की बीवी सारे पैसे पर अपना कब्जा जमा लेगी.

दूसरे रिंकू के घर अभिषेक यादव का बहुत आनाजाना था. अभिषेक यादव आवारा युवक था, जिस का घर में आना उस के परिवार वालों को बिलकुल पसंद नहीं था. अभिषेक का घर आनाजाना रिंकू को भी खलता था. लेकिन निशा को बुरा न लगे, इसलिए वह अपनी जुबान बंद रखता था.

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रिंकू के भाई विपिन और उस के रिश्तेदारों ने पूरी कोशिश की कि पैसा किसी भी हाल में रिंकू या उस की बीवी के हाथ में न जाने पाए. जब यह जानकारी निशा को हुई तो उस ने घर में बवाल खड़ा कर दिया.

पैसे ने भाइयों में डाली फूट

अपने भाई की मजबूरी और अपनी भाभी के चरित्र और व्यवहार को देखते हुए विपिन ने एलआईसी से मिलने वाली मां की पौलिसी की रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली. यह जानकारी निशा को हुई तो घर में तूफान आ गया. निशा ने घर में जम कर हंगामा किया.

उस ने रिंकू का भी जीना हराम कर दिया. वह बातबात पर उस से लड़नेझगड़ने लगी. इस बीच अभिषेक यादव का भी आनाजाना बढ़ गया था, जिस से उस के परिवार वाले बुरी तरह चिढ़ते थे.

विपिन के खाते में रुपए जाने के बाद निशा उस से बुरी तरह चिढ़ने लगी थी. उस ने पति रिंकू से साफ शब्दों में कह दिया कि इस घर में या तो मैं और मेरा परिवार रहेगा या फिर विपिन. रिंकू निशा की जिद से परेशान था. उस ने कह दिया कि जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा.

अगले भाग में पढ़ें-  निशा ने रची साजिश

Crime Story: फंस ही गई कातिल बीवी- भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

28फरवरी, 2021 को अपने भाई को घर आया देख निशा की खुशी का ठिकाना नहीं था. उस का भाई काफी समय बाद उसे ससुराल से लेने आया था. उस वक्त निशा और उस का पति रिंकू घरगृहस्थी में आए उतारचढ़ाव को ले कर काफी परेशान चल रहे थे. जिस के चलते उन का घर चिंता और परेशानियों से घिरा हुआ था. इस दौरान निशा ने कई बार अपने मायके जाने की सोची भी, लेकिन वह रिंकू को ऐसी स्थिति में छोड़ कर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थी.

रिंकू की परेशानी का कारण यह था कि सन 2017 में उस के परिवार में एक ऐसी अनहोनी हो गई थी, जिस में उस की मां और उस के 2 भाइयों की मौत हो गई थी. उस की मां की एक जीवनबीमा पौलिसी थी.

मां की मौत के बाद बीमा की रकम मिली तो उस के छोटे भाई विपिन ने चालाकी से सारी रकम हड़प ली. भाई के विश्वासघात से रिंकू को जबरदस्त झटका लगा था. बाद में उस का छोटा भाई विपिन उस की जान का दुश्मन बन गया था.

अपने साले दीपक के आने के बाद रिंकू ने निशा को समझाबुझा कर उसी दिन उस के साथ मायके भेज दिया. मायके पहुंचने के बाद भी निशा बारबार अपने पति को फोन कर के उस की खैरखबर लेती रही.

28 फरवरी को रात करीब 10 बजे निशा की रिंकू से फोन पर आखिरी बार बात हुई. रिंकू ने निशा को बताया था कि उस का भाई विपिन कुछ लोगों के साथ उस के पास आया था और उस ने गालीगलौज की थी. उस के बाद से उस का मोबाइल बंद हो गया था.

अगले दिन पहली मार्च, 2021 को सुबह निशा ने फिर से रिंकू को फोन मिलाया तो उस समय भी उस का मोबाइल बंद आ रहा था. रात से लगातार रिंकू का फोन बंद आने से निशा परेशान हो उठी.

जब उस से नहीं रहा गया तो वह भाई दीपक को साथ ले कर ससुराल जा पहुंची. लेकिन वहां उस के घर का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे देख निशा और उस का भाई दीपक परेशान हो उठे.

उन्होंने तुरंत इस बात की जानकारी पड़ोसियों को दी, जिस के बाद कालोनी के कुछ लोग दीवार फांद कर घर के अंदर पहुंचे तो अंदर रिंकू की खून से लथपथ लाश पड़ी हुई थी.

पति की लाश देखते ही निशा चक्कर खा कर गिर पड़ी. रिंकू की हत्या की बात सुन कर पूरे मोहल्ले में सनसनी फैल गई. इस बात की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई.

बंद घर में एक युवक की हत्या की बात सुनते ही पुलिस आननफानन में घटनास्थल पर पहुंच गई. यह घटना रुद्रपुर, ऊधमसिंह नगर से सटे भदईपुरा इलाके की है.

वह जगह रमपुरा चौकी के अंतर्गत आता था. इसलिए जानकारी मिलते ही रमपुरा चौकीप्रभारी अनिल जोशी ने इस घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी और खुद घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. सूचना मिलते ही रुद्रपुर कोतवाल एन.एन. पंत, सीओ (सिटी) अमित कुमार, एसपी (क्राइम) मिथिलेश सिंह और एसएसपी दलीप सिंह कुंवर भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

रिंकू की लाश बंद घर के अंदर मिली थी. किसी ने रिंकू के सिर में सटा कर गोली मारी थी, जिस से उस की मौके पर ही मौत हो गई थी. इस हत्या की जांचपड़ताल करते हुए पुलिस ने सब से पहले मृतक की बीवी निशा से पूछताछ शुरू की.

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निशा ने बताया कि वह एक दिन पहले ही अपने भाई के साथ मायके चली गई थी. जहां पर उसे पति द्वारा ही पता चला था कि उस के भाई विपिन ने उस के साथ गालीगलौज की थी.

उस के बयान के आधार पर पुलिस ने मृतक के भाई विपिन और उस के एक सहयोगी को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. एसएसपी ने केस की तह तक जाने के लिए एसओजी समेत 3 टीमों को लगाया.

लाश को देख कर लग रहा था कि रिंकू की हत्या कई घंटे पहले की गई थी. पुलिस ने पड़ोसियों से बात की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने गोली की कोई आवाज नहीं सुनी थी. हालांकि मृतक की बीवी ने अपने ही देवर पर रिंकू की हत्या का आरोप लगाया था. लेकिन पुलिस के लिए इस तरह के सबूत तब तक मायने नहीं रखते जब तक पुलिस हत्या से सबंधित कोई तथ्य न जुटा ले.

पुलिस ने अपनी काररवाई को आगे बढ़ाते हुए रिंकू की लाश पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल भिजवा दी. लेकिन पोस्टमार्टम होने से पहले ही मृतक के ससुराल वालों ने पोस्टमार्टम का विरोध करते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया.

उन का कहना था कि पहले इस हत्या केस का खुलासा करो, बाद में पोस्टमार्टम कराना. पुलिस के काफी समझाने के बाद भी वे लोग मानने को तैयार नहीं हुए थे. रिंकू के ससुराल वाले उस के छोटे भाई समेत अन्य कई रिश्तेदारों पर उस की मां के एक्सीडेंट क्लेम के रुपए हड़पने के लिए हत्या का आरोप लगा रहे थे.

तफ्तीश में जुटी पुलिस

इस मामले में रिंकू ने कोर्ट के माध्यम से 22 फरवरी, 2020 को रुद्रपुर कोतवाली में अपने छोटे भाई विपिन के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था. यह बात पुलिस के संज्ञान में थी. उन्हीं तथ्यों के आधार पर पहली मार्च को निशा यादव की ओर से देवर विपिन यादव, सचिन यादव और दीपक यादव के खिलाफ कोतवाली में रिंकू की हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. मुकदमा भादंवि की धारा 302 के तहत दर्ज किया गया.

पुलिस ने इस केस की तहकीकात शुरू करते हुए सर्विलांस की मदद से रिंकू के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालने शुरू कर दिए. उसी दौरान पुलिस ने रिंकू के घर के पास स्थित दुकानदार पुष्पेंद्र से पूछताछ की तो उस ने बताया कि 28 फरवरी की शाम रिंकू उस की दुकान से सिगरेट लेने आया था.

उस वक्त उस के साथ 3 अन्य लोग भी थे, जिन्हें वह नहीं जानता. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस ने रिंकू के मोबाइल की कालडिटेल्स खंगाली, जिस से पता चला कि उस वक्त उस की पत्नी ने ही उस से बात की थी.

पुलिस ने निशा से पूछताछ की तो निशा ने अपनी सफाई देते हुए अपनी तरफ से अपने 2 गवाह पेश कर के साबित करने की कोशिश की कि उस के भाई और बहन ने विपिन और उस के साथियों को घर से तमंचा ले कर भागते हुए देखा था.

पुलिस ने उस के भाई और बहन के बारे में जांचपड़ताल की तो पता चला कि उस के भाईबहन भदईपुरा में रहते ही नहीं तो उन्होंने उन को भागते हुए कैसे देख लिया. निशा का बिछाया यही जाल उस के लिए जी का जंजाल बन गया.

पुलिस को संदेह हो गया कि जरूर रिंकू की हत्या करने में निशा की ही भूमिका रही होगी. हालांकि पुलिस ने इस केस को पारिवारिक विवाद से जोड़ कर 2 संदिग्धों को हिरासत में ले कर पूछताछ भी शुरू कर दी थी, लेकिन जब पुलिस को निशा ही संदिग्ध लगी तो पुलिस ने उसे भी पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.

निशा को हिरासत में ले कर पुलिस ने उस की कालडिटेल्स निकाली तो उस के नंबर पर सब से ज्यादा बात भदईपुरा निवासी उस के पड़ोसी अभिषेक यादव से होती पाई गई.  28 फरवरी, 2021 को भी निशा और अभिषेक यादव के बीच कई बार बात हुई थी.

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पुलिस ने निशा से कड़ी पूछताछ की तो वह पुलिस के दांवपेंच में फंसती चली गई. आखिरकार उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अभिषेक से मिल कर अपने पति की हत्या कराई है.

उस ने पुलिस को बताया कि अभिषेक यादव और उस के बीच काफी समय से अवैध संबंध थे. इस बात का शक उस के पति रिंकू को हो गया था. उस ने एक दिन हम दोनों को रंगेहाथों घर में ही पकड़ लिया था, जिस के बाद उस का पति से मनमुटाव हो गया था. उसी मनमुटाव के चलते उस ने अभिषेक से मिल कर उस की हत्या करा दी.

नाजायज फायदा उठाया

उस के बाद उस ने अपने पारिवारिक संबंधों का नाजायज फायदा उठाते हुए इस केस में अपने ही परिवार वालों को घसीटने की कोशिश की.

निशा तेजतर्रार महिला थी. उस ने रिंकू के साथ कोर्टमैरिज की थी. रिंकू से कोर्टमैरिज करने के बाद उस ने रिंकू को कैसे अपनी अंगुलियों के इशारे पर नचाया, यह रोमांचक कहानी है.

रुद्रपुर, ऊधमसिंह नगर से लगभग एक किलोमीटर दूर किच्छा मार्ग पर एक कालोनी है भदईपुरा. इसी कालोनी में भान सिंह यादव का परिवार रहता था.

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भान सिंह के 4 बेटे थे. समय के साथ चारों बेटे जवान हुए तो वे भी कामों में अपने पिता का सहयोग करने लगे. चारों बेटों ने मिलजुल कर काम करना शुरू किया तो भान सिंह के परिवार की स्थिति इतनी मजबूत हो गई कि उसी कमाई के सहारे उस ने मकान भी बनवा लिया.

भान सिंह ने समय से 2 बेटों की शादी कर दी थी. रिंकू तीसरे नंबर का था. रिंकू ने किसी फोटोग्राफर के यहां रह कर फोटोग्राफी का काम सीखा और वह शादीविवाह में फोटोशूट का काम करने लगा. उसी दौरान किसी बीमारी के चलते भान सिंह की मृत्यु हो गई.

भान सिंह के निधन से घर की जिम्मेदारी चारों बेटों पर आ गई. चारों बेटे पहले की तरह ही एकमत हो कर घर की सारी जिम्मेदारी निभाते रहे. रिंकू भी शादी लायक हो गया था.

अगले भाग में पढ़ें- ससुराल में शुरू की कलह

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