Satyakatha- सूदखोरों के जाल में फंसा डॉक्टर: भाग 1

22अप्रैल, 2021 की शाम लगभग 5 बजे की बात है. मध्य प्रदेश के जिला नरसिंहपुर शहर की कोतवाली के टीआई उमेश दुबे को सूचना मिली कि नरसिंहपुर-करेली रेलमार्ग पर स्थित टट्टा पुल के पास रेल पटरियों पर एक आदमी की लाश पड़ी है.

सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो रेल पटरियों के बीच में एक आदमी की लाश क्षतविक्षत हालत में पड़ी थी. लग रहा था जैसे उस ने जानबूझ कर आत्महत्या की हो. वह अचानक दुर्घटना का मामला नहीं लग रहा था. उस आदमी का चेहरा पहचानने में नहीं आ रहा था.

पुलिस ने सब से पहले वह शव रेल लाइनों  के बीच से हटवा कर साइड में रखवा दिया ताकि उस लाइन पर ट्रेनों का आवागमन सुचारू रूप से हो सके. इस के बाद उस के कपड़ों की तलाशी ली तो पैंट की जेब में एक मोबाइल फोन और एक चाबी मिली. तब तक कई लोग वहां इकट्ठे हो चुके थे. पुलिस ने उन से लाश की शिनाख्त करानी चाही, लेकिन कोई भी मृतक को नहीं पहचान सका.

पुलिस जांच कर ही रही थी कि तभी किसी ने पुलिस को रेल लाइन के नजदीक  सड़क पर खड़ी एक लावारिस स्कूटी के बारे में जानकारी दी. जांच में वह स्कूटी वहां जमा भीड़ में से किसी की नहीं थी. एक पुलिसकर्मी ने स्कूटी की डिक्की खोली तो उस में शादी का निमंत्रण कार्ड मिला, जिस के आधार पर पता चला कि वह शादी का कार्ड डा. सिद्धार्थ तिगनाथ के नाम का था.

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कोतवाली पुलिस ने लाश का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए वह जिला अस्पताल भेज दी. इस के बाद भादंवि की धारा 174 (संदिग्ध मृत्यु) का मामला दर्ज कर लिया.

सिद्धार्थ तिगनाथ कोई मामूली इंसान नहीं थे. वह शहर के एक जानेमाने डाक्टर थे. इसलिए पुलिस ने मोबाइल फोन के जरिए डा. सिद्धार्थ तिगनाथ के घर वालों की सूचना दी. उस समय सिद्धार्थ के पिता डा. दीपक तिगनाथ अपने ही रेवाश्री हौस्पिटल में मरीजों का इलाज कर रहे थे.

जैसे ही उन्हें सिद्धार्थ के रेल से कटने की सूचना मिली, वे अपना होश खो बैठे. आननफानन में अस्पताल का स्टाफ डा. दीपक तिगनाथ और घर वालों को ले कर जिला अस्पताल पहुंच गए.

अस्पताल में सिद्धार्थ का शव देख कर घर वालों का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था. सिद्धार्थ की पत्नी अपने 5 साल के बेटे को सीने से चिपकाए बिलख रही थी. घर वालों को यह समझ नहीं आ रहा था कि आखिरकार सिद्धार्थ ने इस तरह का आत्मघाती कदम क्यों उठा लिया.

डा. सिद्धार्थ तिगनाथ नगर के प्रतिष्ठित कांग्रेसी नेता एवं पेशे से दंत चिकित्सक थे. सोशल मीडिया पर यह खबर पूरे जिले में जब वायरल हुई तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि एक हाईप्रोफाइल डाक्टर फैमिली का सदस्य आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है. लौकडाउन के बावजूद देखते ही देखते जिला अस्पताल में डा. तिगनाथ के रिश्तेदार और उन के प्रशंसकों की भीड़ जमा होने लगी.

सिद्धार्थ की एकलौती बहन गार्गी रीवा में थी. दूसरे दिन जब वह नरसिंहपुर पहुंची तो पोस्टमार्टम के बाद सिद्धार्थ का अंतिम संस्कार किया गया. जब 5 साल के बेटे ने डा. सिद्धार्थ की चिता को मुखाग्नि दी तो उपस्थित घर वालों एवं अन्य लोगों की आंखों से आंसुओं की झड़ी लग गई.

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने डा. सिद्धार्थ तिगनाथ के कुछ मित्र और परिजनों के बयान दर्ज किए. मामले की तहकीकात के लिए पुलिस ने सिद्धार्थ के पिता डा. दीपक तिगनाथ, मां ज्योति तिगनाथ, पत्नी नेहा के अलावा नरसिंहपुर के सुरेश नेमा, शेख रियाज, प्रसन्न तिगनाथ, घनश्याम पटेल कुंजीलाल गोविंद पटेल के बयान दर्ज किए. इस के बाद पुलिस टीम ने रेलवे स्टेशन नरसिंहपुर के स्टाफ के बयान दर्ज किए. इस से पता चला कि डा. सिद्धार्थ ने ट्रेन से कट कर अपनी जीवनलीला समाप्त की थी. रेलवे स्टाफ ने पुलिस को बताया कि ट्रेन के ड्राइवर के हौर्न बजाने के बाद भी सिद्धार्थ रेल पटरियों से दूर नहीं हुए थे.

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर मुख्यालय में  रेवाश्री हौस्पिटल एक बड़ा प्राइवेट हौस्पिटल है, जिस के डायरेक्टर डा. दीपक तिगनाथ हैं.  मैडिसिन में एमडी डिग्रीधारी कार्डियोलौजिस्ट डा. दीपक तिगनाथ पिछले 4 दशकों से पूरे जिले में अपनी चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं. डा. दीपक तिगनाथ के परिवार में एक बेटा सिद्धार्थ और एक बेटी गार्गी है. गार्गी की  रीवा के रहने वाले अजय शुक्ला से शादी हो चुकी है.

डा. दीपक तिगनाथ का बेटा सिद्धार्थ दंत चिकित्सक के रूप में रेवाश्री हौस्पिटल में ही अपने पिता की तरह लोगों का इलाज करते थे. परिवार में डा. सिद्धार्थ की पत्नी नेहा और उन का 5 साल का एक बेटा है.

सिद्धार्थ की शुरुआती शिक्षा रीवा के सैनिक स्कूल में हुई. उन के दादाजी गणित के शिक्षक थे, इसलिए गणित उन का पसंदीदा विषय था. क्रिकेट में भी उन की बेहद दिलचस्पी रहती थी.

स्कूली पढ़ाई के बाद सिद्धार्थ बीडीएस की डिग्री ले कर दंत चिकित्सक बने, उन की इंटर्नशिप देख उन के सीनियर ने उन्हें सफल सर्जन बनने की सलाह दी. पिता भी एक सफल डाक्टर थे, वही सब अच्छे गुण विरासत में उन्हें भी मिले.

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चिकित्सा के साथ राजनीति को वह समाज सेवा का एक सफल माध्यम मानते थे. इसी कारण से वह राजनीति एवं प्रशासनिक की पढ़ाई के लिए पुणे स्थित पूर्व चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के संस्थान में गए.

इसी संस्थान में पढ़ाई के दौरान ‘चिकित्सा पद्धति एवं उस का क्रियान्वयन कैसा हो’ विषय पर अपनी थीसिस के माध्यम से अपने विचार जब टी.एन. शेषन के सामने रखे तो शेषन डा. सिद्धार्थ से बहुत प्रभावित हुए. उन्होंने कहा था कि राष्ट्र को ऐसे ही परिपक्व और उत्कृष्टता दे सकने वाले तुम्हारे जैसे नौजवानों की जरूरत है.

डा. सिद्धार्थ तिगनाथ एक समय जिले की राजनीति में कांग्रेसी नेता के रूप में सक्रिय रहे थे. सन 2011 में उन्हें प्रदेश के 2 बड़े नेता कमलनाथ और सुरेश पचौरी ने होशंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के उपाध्यक्ष की कमान सौंपी थी. लोकसभा क्षेत्र में संगठन की मजबूती के लिए उन्होंने रातदिन काम किया. किसान आंदोलन हो या उन की फसलों का मुआवजा, जहां प्रशासनिक व्यवस्था धराशाई हो जाती थी, वे किसानों को बातचीत के लिए तैयार करते.

किसी कैंसर पेशेंट को क्या सहायता मिल सकती है, वह उसे पूरी मदद अपने माध्यमों से करते. चिलचिलाती गरमी में स्टेशन पर पानी के पाउच बांटते, ऐसी नेतागिरी वह अपने दम पर तन मन धन से करते थे. तिगनाथ फैमिली को पूरे इलाके में उन की दौलत और शोहरत के कारण जाना जाता था. हर किसी के सुखदुख में तिगनाथ फेमिली हमेशा साथ रहती. डा. सिद्धार्थ अपने व्यवहार एवं शैली के चलते थोड़े से समय में ही सब के चहेते बन चुके थे.

कहते हैं कि जीवन में यदि खुशियां हैं तो दुखों के पहाड़ भी हैं. कुछ लोग इन पहाड़ों को काट कर रास्ता बना लेते हैं तो कुछ लोग एक चट्टान के आगे अपनी हार मान कर निराश हो जाते हैं. डा. सिद्धार्थ ने भी 41 साल की उम्र में एक गलत फैसला ले कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली और अपने भरेपूरे परिवार को यादों के सहारे छोड़ गए.

डा. सिद्धार्थ सूदखोरों के बनाए चक्रव्यूह में इस कदर फंस चुके थे कि उस से बच कर  निकलना नामुमकिन था. उन के पिता भी अपनी दौलत बेटे के कर्ज की रकम चुकाने में कुरबान कर चुके थे, फिर भी सूदखोरों का कर्जा जस का तस बना हुआ था.

डा. सिद्धार्थ की सोच थी कि जिले के नौजवानों को रोजगार के उचित अवसर नहीं मिलते. इसलिए उन्होंने सन 2016 में ‘विश्वभावन पालीमर’ नाम की फैक्ट्री की शुरुआत की और बेरोजगार जरूरतमंद नौजवानों को उस में रोजगार दिया.

इसी दौरान उन्होंने ‘रेवाश्री इंस्टीट्यूट औफ पैरामैडिकल साइंसेस’ कालेज की शुरुआत की, जिस में स्थानीय युवकयुवतियों को मैडिकल की पढ़ाई के साथसाथ रोजगार दे कर उन्हें पगार देनी शुरू की थी.

अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए वह पैसे की व्यवस्था में लग गए. 2016 की नोटबंदी से कोई अछूता नहीं बचा था. कारोबार में पैसे की जरूरत ने उन्हें स्थानीय सूदखोरों की तरफ धकेला. इसी दौरान सूदखोर आशीष नेमा से उन का संपर्क हुआ.

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Manohar Kahaniya: जॉइनिंग से पहले DSP को जेल- भाग 3

नशे की हालत में होते हुए भी निखिल सौरभ को आगाह करते हुए बोला, ‘‘भाई थोड़ा संभाल कर. अगर चल गई तो हम आए 4 थे लेकिन जाएंगे 3.’’

निखिल की इस बात पर सब हंस पड़े और एकएक कर सब पिस्तौल के साथ अपनी सेल्फी लेने लगे. यह देख कर सूरज बोल पड़ा, ‘‘भाई, सेल्फी क्यों ले रहा है, हम मर गए हैं क्या फोटो खींचने के लिए.’’

यह कहते हुए सूरज ने अपनी जेब से फोन निकाला और निखिल और सौरभ की फोटो खींचने लगा. उस समय तक आशुतोष चुपचाप बैठ कर अपने दोस्तों को फोटो खींचते खिंचवाते हुए देख रहा था.

अचानक से उसे महसूस हुआ कि वो अपने दोस्तों के साथ इस खेल में कहीं पीछे न रह जाए. इसलिए वह भी अपनी जगह से उठा और सूरज के हाथों से पिस्तौल ले कर निखिल पर तान कर खड़ा हो गया.

फोटो खिंचवाने में चली गोली

आशुतोष ने इस पोज में 2-3 फोटो खिंचवाईं और उस ने सूरज के फोन में अपनी खींची हुई फोटो देखीं. वह फोटो उसे कुछ खास पसंद नहीं आईं तो उस ने सौरभ को अपना फोन जेब से निकाल कर दिया और उसे फोटो खींचने के लिए कहा.

सौरभ ने अपने दोस्त की बात न टालते हुए उस के हाथों से फोन लिया और आशुतोष और निखिल की फोटो खींचने लगा.

इस बार जब आशुतोष के हाथों में पिस्तौल थी और सौरभ के हाथों में उस का फोन तो आशुतोष ने सोचा कि क्यों न निखिल को थोड़ा डराया जाए.

यह सोच कर उस ने पिस्तौल के ट्रिगर पर उंगली रख दी, जिसे देख कर निखिल जो कि नशे की हालत में था, अचानक से होश में आ गया. उस के मुंह से निकला ही था कि, ‘‘ये क्या कर रहा है?’’ इतने में आशुतोष से ट्रिगर दब गया.

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अब बहुत देर हो चुकी थी. गोली पिस्तौल से निकल चुकी थी और सामने खड़े निखिल की छाती में जा कर धंस चुकी थी. गोली की आवाज से दूरदूर तक पेड़पौधों में बैठे पक्षी उड़ गए. छाती पर गोली लगने के साथ ही निखिल जमीन पर गिर पड़ा.

आशुतोष जो कुछ मिनटों के लिए स्तब्ध हो गया था, वह अचानक से हरकत में आया. उस की पी हुई दारू का नशा तो एकदम से जादू की तरह गायब हो गया था. उस के हाथपैर सुन्न पड़ गए थे. उस की आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

सामने अपने दोस्त को खून से लहुलुहान देख उस ने इधरउधर नजर घुमाई और अपने दोस्त निखिल के पास दौड़ पड़ा.

फोन हाथ में लिए सौरभ भी अपनी जगह पर स्तब्ध खड़ा था. उसे उस की आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि यह क्या हो गया. उस के हाथों से आशुतोष का फोन छुट कर जमीन पर गिर गया.

सौरभ भी अपने दोस्त निखिल के पास दौड़ पड़ा. दोनों की आंखों में आंसू लगातार बह रहे थे. उस जगह से उस समय तक सूरज वहां से गायब हो गया था.

रंज में बदल गई पार्टी

इतने में आशुतोष ने महसूस किया कि निखिल की धड़कनें अभी तक चल रही हैं. वह सौरभ से बिना कुछ बोले निखिल को अपने हाथों के सहारे उठाने लगा.

सौरभ जैसे मानो उस का इशारा समझ गया था. उस ने निखिल को उठाने में आशुतोष की मदद की और दोनों ने निखिल को उठा कर आशुतोष की गाड़ी में पिछली सीट पर लिटा दिया.

आशुतोष ने बिना देरी के गाड़ी चलाई और निखिल को ले कर इलाके के सदर अस्पताल पहुंचा. लेकिन अस्पताल के डाक्टर ने निखिल को मृत घोषित कर दिया. निखिल को मृत घोषित किए जाने के बाद निखिल को कुछ और सूझा ही नहीं. उस ने फिर से निखिल को गाड़ी की पिछली सीट पर लिटाया और शव को ले कर वे दोनों सीधे कोडरमा थाने पहुंच गए.

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थाने पहुंच कर इस मामले की जानकारी आशुतोष ने खुद दी. घटना की सूचना पा कर एसपी डा. एहतेशाम वकारीब कोडरमा थाने पहुंचे. उन्होंने शुक्रवार की रात करीब साढ़े 11 बजे आरोपी ट्रेनी डीएसपी आशुतोष कुमार और उस के दोस्त सौरभ से अलगअलग पूछताछ की. इस के बाद उन्होंने डीएसपी की कार में पड़े निखिल रंजन के शव को भी देखा.

एसपी डा. एहतेशाम वकारीब ने बिना किसी देरी के आरोपी आशुतोष कुमार और उस के दोस्त सौरभ कुमार को हिरासत में ले लिया. आशुतोष ने स्थानीय पुलिस की मदद करते हुए सूरज कुमार को भी पकड़वाने में सहायता की. 20 घंटों की लगातार खोजबीन के बाद सूरज कुमार को भी कोडरमा से हिरासत में ले लिया गया.

इस बीच पुलिस ने मृतक निखिल रंजन के घर वालों को इस की सूचना दी और पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार के हवाले कर दिया है.

मृतक निखिल रंजन के पिता ऋषिदेव प्रसाद सिंह ने आरोपी आशुतोष पर आरोप लगाया कि उन के बेटे के साथ जो हुआ वह कोई घटना नहीं है बल्कि सोची समझी साजिश के तहत उस की हत्या की गई.

उन का आरोप था कि आशुतोष सटोरियों से पैसों की उगाही कराता था और पैसों के चक्कर में ही उस ने निखिल की हत्या की. उन्होंने इस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की.

आशुतोष के पिता भी रिटायर्ड जज हैं. वह भी इस घटना पर हैरान हैं. आशुतोष कुमार का कहना है कि उस ने यह सब जानबूझ कर नहीं किया, बल्कि शराब के नशे में गलती से गोली चल गई. उसे अपने दोस्त के मरने का बहुत दुख है.

बहरहाल, पुलिस ने ट्रेनी डीएसपी आशुतोष कुमार, सौरभ कुमार और सूरज कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया.

समस्या: लोकतंत्र का माफियाकरण

लेखक- देवेंद्र गौतम

साल 2022 के 15 अगस्त को आजादी की 75वीं सालगिरह मनाई जाएगी. इस के लिए ‘अमृत महोत्सव’ की बड़े पैमाने पर तैयारी चल रही है. 26 जनवरी, 2022 को हमारा लोकतंत्र भी 72वें साल में दाखिल हो जाएगा.

आजाद भारत के इतने लंबे सफर के बाद राजनीति के अपराधीकरण के बाद अब राजनीति के माफियाकरण का खतरा पैदा हो गया है.

इस की एक जीतीजागती मिसाल महाराष्ट्र के सत्ता संरक्षित वसूली गैंग के रूप में सामने आई है. अब चुनाव भी सत्ता पर कब्जे की होड़ में तबदील हो चले हैं, जिस में प्यार और जंग में सबकुछ जायज है की तर्ज पर कानूनी और गैरकानूनी सभी साधनों का इस्तेमाल किया जाता है.

पिछले दिनों भारत के जानेमाने उद्योगपति मुकेश अंबानी के बंगले के पास लावारिस स्कौर्पियो गाड़ी में बरामद जिलेटिन की छड़ों ने बगैर डैटोनेटर इतना बड़ा धमाका कर दिया कि इस की आंच महागठबंधन सरकार तक पहुंच गई है.

मुंबई के पुलिस कमिश्नर रह चुके परमवीर सिंह और गृह मंत्री रह चुके अनिल देशमुख से होती हुई इस की लपटें राकांपा प्रमुख शरद पवार तक पहुंच चुकी हैं. धीरेधीरे चेहरे बेनकाब हो रहे हैं. अभी और कितने लोग इस की चपेट में आएंगे, पता नहीं.

एनआईए मामले की जांच कर रही है. इस में रोज नएनए हैरतअंगेज खुलासे हो रहे हैं. जांच का आखिरी फैसला सामने आने में अभी समय है, लेकिन अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं, तो यह मान लेना चाहिए कि अब सत्ता की राजनीति काले धन का खेल बन चुकी है और लोकतंत्र का माफियातंत्र में बदलाव हो चुका है.

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अभी तक एनआईए की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन से यह कहने में झिझक नहीं होनी चाहिए कि महाराष्ट्र में सत्ता की आड़ में एक खूंख्वार माफिया गैंग काम कर रहा था. यह गैंग अंडरवर्ल्ड के गिरोहों की तर्ज पर कारपोरेट घरानों  से भारीभरकम वसूली का जाल बिछा चुका था.

जांच आगे बढ़ेगी, तो पता चलेगा कि इस गिरोह में सीधे और गैरसीधे तौर पर कौनकौन से सफेदपोश नेता और नौकरशाह शामिल थे. कितने की वसूली हो चुकी है और दूसरे अपराधी गिरोहों से इन के क्या संबंध थे.

इस गैंग के मेन किरदार परदे के  पीछे हैं. परदे पर मौजूद किरदार सचिन वाझे थे. महाराष्ट्र पुलिस के अदना से असिस्टैंट पुलिस इंस्पैक्टर जो ऐनकाउंटर स्पैशलिस्ट रह चुके हैं और एक हत्या के आरोप में साल 2004 से ही निलंबित थे.

सचिन वाझे का काम करने का तरीका पूरी तरह जासूसी उपन्यासों के अपराधी सरगनाओं की तरह रहा है. ऐनकाउंटर स्पैशलिस्ट रहने के नाते जाहिर है कि उन के अंडरवर्ल्ड से संबंध रहे होंगे.

कुछ ऐसी ऐक्स्ट्रा खूबियां सचिन वाझे के अंदर रही होंगी कि 16 साल के वनवास के बाद उन्हें वापस बुला कर नौकरी पर रखा गया, जबकि वे हत्या के मामले से बरी भी नहीं हुए थे. कुछ तो उन की ऐसी उपयोगिता थी, जो वर्तमान पुलिस बल से अलग और अहम थी.

सचिन वाझे निलंबित रहते हुए भी फाइव स्टार जिंदगी जी रहे थे, तो इस का सीधा सा मतलब है कि उन की जिंदगी पुलिस महकमे की तनख्वाह से नहीं चल रही थी. उन की आमदनी के दूसरे कई अज्ञात स्रोत थे. पुलिस की वरदी सिर्फ अपनी करतूतों को सरकारी जामा पहनाने का साधन थी.

ऐनकाउंटर स्पैशलिस्ट होने के नाते सचिन वाझे को सत्ता में बैठे लोग भी जानते थे. किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि निलंबित रहने के बावजूद वे आधा दर्जन से ज्यादा लग्जरी कारों में कैसे घूमते थे? शाही जिंदगी कैसे जीते थे? इस बीच वे शिव सेना के सक्रिय सदस्य बन गए थे.

महागठबंधन सरकार बनने के बाद सरकार और महाराष्ट्र पुलिस को सचिन वाझे की सेवाओं की खास जरूरत पड़ गई, इसीलिए उन्हें विशेष प्रावधान के तहत सेवा में वापस लिया गया और उन्हें क्राइम ब्रांच में विशेष जिम्मेदारी दी गई. उन्हें सीधे पुलिस कमिश्नर को रिपोर्ट करना होता था. वे उन्हीं के निर्देश पर काम करते थे. 9 महीने के अंदर ही उन्हें तकरीबन 2 दर्जन खास मामलों का जांच अधिकारी बना दिया गया था.

जाहिर है कि भांड़ा फूट जाने के बाद सचिन वाझे अकेले बलि का बकरा बनना पसंद नहीं करते, इसलिए धीरेधीरे अपने आकाओं के नाम जाहिर करते जा रहे हैं. हम तो डूबेंगे सनम तुम को भी ले डूबेंगे की तर्ज पर.

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मायानगरी मुंबई में धन उगाही पहले भी होती रही है, लेकिन पहले दुबई और मलयेशिया में बैठे डौन बड़ी रकमों की उगाही करते थे. उन के निशाने पर बौलीवुड के सितारे भी होते थे और बड़े कारोबारी भी, खासतौर पर काले धंधे से जुड़े हुए लोग. लोकल इलाकाई गुंडे छोटे दुकानदारों से हफ्तावसूली करते थे.

यह मुंबई तक ही सीमित नहीं है. देश के तकरीबन हर राज्य में सरकार संरक्षित वसूली गैंग हैं, जो राजनीति के लिए खादपानी का जुगाड़ करते रहे हैं, लेकिन मुंबई की सरकार संरक्षित माफिया की वसूली का लक्ष्य बड़ा था.

अभी 100 करोड़ रुपए हर महीने वसूली का टारगेट सामने आया है, लेकिन बात यहीं तक नहीं होगी. अभी बहुतकुछ उजागर होना बाकी है. इतनी बड़ी रकम किसी खास मकसद से ही वसूली जा सकती है.

यह मकसद सत्ता पर कब्जा बनाए रखने या कब्जा करने का हो सकता है. केंद्र सरकार में बैठे लोग इसे बेहतर समझ रहे होंगे, इसीलिए राज्य के क्राइम ब्रांच से मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई.

क्या यह आम लोगों के लिए बेहद चिंता की बात नहीं होनी चाहिए? औपनिवेशिक सत्ता से आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने कितना संघर्ष किया, कितनी कुरबानियां दीं, उस का नतीजा इस रूप में सामने आ रहा है. हम जिस तरह का देश बनाना चाहते थे, वह यह तो कतई नहीं है. यकीनन, किसी नई व्यवस्था को स्थापित होने में समय लगता है.

फ्रांस की क्रांति 1779 में हुई थी. इस का लक्ष्य लोकतंत्र की स्थापना था, लेकिन इस क्रांति ने नैपोलियन बोनापार्ट को पैदा किया, जिन्होंने सत्ता हाथ में आने के बाद खुद को फ्रांस का सम्राट घोषित कर दिया और राजशाही की वापसी हो गई. फिर राजा बदलता रहा, राजशाही चलती रही और लोकतंत्र की दोबारा बहाली 1848 के बाद ही हो सकी यानी 69 साल बाद.

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भारतीय लोकतंत्र भी अभी संक्रमण काल से ही गुजर रहा है. लोकतंत्र की आड़ में परिवारवाद, व्यक्तिवाद का दौर चलता रहा. अब माफियावाद का दौर दस्तक दे रहा है. जब तक आम जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी नागरिक गुणों से लैस नहीं होगी, इस तरह की विकृतियां जारी रहेंगी.

ये विकृतियां धीरेधीरे देश और समाज को खोखला कर देंगी और हम कुछ नहीं कर पाएंगे.

‘चुरा के दिल मेरा’ गाने पर भोजपुरी एक्ट्रेस Akshara Singh का शानदार एक्सप्रेशन, Viral हुआ Video

भोजपुरी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह अक्सर अपनी फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती है. फैंस भी उनके पोस्ट का बेसब्री से इंतजार करते हैं. वह शानदार अभियन और डांस से फैंस का दिल जीतने में कामयाब होती हैं.

अब वह शिल्पा शेट्टी के गाने पर डांस करते हुए नजर आ रही है. जी हां, ‘चुरा के दिल मेरा’ इस गाने पर अक्षरा सिंह एक्ट करती नजर आ रही हैं. अक्षरा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. फैंस इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं.

‘चुरा के दिल मेरा’ गाने पर अक्षरा सिंह ने किया डांस

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इस वीडियो में एक्ट्रेस शानदार एक्सप्रेशन दे रही हैं. ये रील वीडियो उन्होंने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. अक्षरा सिंह ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि ‘मंजिल’ आ जाओ अब तुम, आप सभी को मानसून की बधाई.’ फैंस को उनका ये अंदाज काफी पसंद आ रहा है.

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आदित्य की जान बचाने के लिए Imlie उठाएगी ये कदम, देखें Video

टीवी सीरियल इमली में दर्शकों को एक से बढ़कर एक ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. जिससे दर्शकों को एंटरटेनमेंट का डबल डोज देखने को मिल रहा है. शो की कहानी एक नया मोड़ ले रही है. अब तक आपने देखा कि मालिनी चाहती है कि इमली-आदित्य को घरवाले अपना ले और इमली को आदित्य की पत्नी होने का दर्जा मिले. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए ट्विस्ट के बारे में.

इमली के अपकमिंग एपिसोड में  ये दिखाया जाएगा कि मालिनी अपने हक के लिए लड़ेगी. तो वहीं मालिनी की मां अनु आदित्य और इमली को अलग करने के लिए नया प्लान बनाएगी. वह आदित्य को गुंडों की मदद से किडनैप करवा लेगी.

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तो उधर त्रिपाठी परिवार पुलिस के पास करने के लिए जाती है. वहां इमली और मालिनी दोनों होते हैं. पुलिस पूछताछ करती है. तो वहीं अपर्णा वहां इमली को आदित्य की पत्नी कहने से इनकार कर देती है. वह कहती है कि मालिनी आदित्य की पत्नी है. अपर्णा की ये बात सुनकर  इमली उदास हो जाती है.

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तो वहीं शो में ये भी दिखाय जाएगा कि इमली आदित्य की जान बचाने के लिए गुंडो से भिड़ेगी. दरअसल सेट से एक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में इमली और मालिनी के पिता का किरदार निभा रहे कलाकार इंद्रनील भट्टाचार्जी भी नजर आ रहे हैं. तीनों कलाकार वीडियो में खूब मस्ती कर रहे हैं. इमली के सिर पर चोट लगी हुई है.

मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने में जुटी यूपी सरकार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज अपने सरकारी आवास पर आहूत एक बैठक में में उत्तर प्रदेश की प्रगति के सम्बन्ध में भारत के सतत् विकास लक्ष्य इण्डेक्स 3.0 की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि निर्धारित 15 सतत् विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पर प्रदेश तेजी से कार्य करते हुए सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है. सतत् विकास लक्ष्य इण्डेक्स 2020 में उत्तर प्रदेश 60 अंकों के साथ परफॉर्मर स्टेट के रूप में आगे आया है, जबकि वर्ष 2019 व वर्ष 2018 में  प्रदेश के क्रमशः 55 एवं 42 अंक थे. उन्होंने मानकों के अनुसार कार्य करते हुए इन लक्ष्यों के सम्बन्ध में और बेहतर स्कोर किए जाने पर बल दिया.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अन्तर्विभागीय समन्वय एवं निरन्तर समीक्षा करते हुए सतत् विकास लक्ष्यों की पूर्ति में तेजी लायी जाए. इसके लिए सभी नोडल विभाग तथा उनके साथ लिंक किए गए विभाग सम्बन्धित फोकस सेक्टरों पर मिलकर काम करें. उन्होंने सभी सम्बन्धित विभागों को अद्यतन डाटा फीडिंग कराए जाने के निर्देश दिए. विभागीय स्तर पर सतत् विकास लक्ष्यों के सम्बन्ध में अद्यतन डाटा उपलब्ध रहे. नीति आयोग से समन्वय बनाते हुए डाटा में सुधार के प्रयास किए जाएं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तथा स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाए. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार हमें सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बेहतर परिणाम प्राप्त करते हुए आगे बढ़ना है. विभागीय स्तर पर लक्ष्यों का निर्धारण करते हुए उन्हें प्राप्त करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाएं. उन्होंने नियोजन विभाग को लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रति माह नोडल/सम्बन्धित विभागों से रिपोर्ट प्राप्त कर इनकी गहन मॉनीटरिंग किए जाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सतत् विकास के लक्ष्यों का लाभ वंचित वर्गों तक पहुंचाना राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है. विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति गुणवत्तापरक होनी चाहिए, तभी समाज को इनका लाभ मिलेगा.

मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित 15 एस0डी0जी0 लक्ष्यों में नो पॉवर्टी (ग्राम्य विकास विभाग), जीरो हंगर (खाद्य एवं आपूर्ति तथा कृषि विभाग), गुड हेल्थ एण्ड वेल बींग (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग), क्वॉलिटी एजुकेशन (बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग), जेण्डर इक्वॉलिटी (महिला एवं बाल विकास विभाग), क्लीन वॉटर एण्ड सैनीटेशन (सिंचाई, ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज विभाग), एफोर्डेबल एण्ड क्लीन इनर्जी (ऊर्जा विभाग), डीसेण्ट वर्क एण्ड इकोनॉमिक ग्रोथ (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग), इण्डस्ट्री इनोवेशन एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर (अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग), रिड्यूस्ड इनइक्वॉलिटीज (समाज कल्याण विभाग), सस्टेनेबल सिटीज एण्ड कम्युनिटीज (नगर विकास विभाग), रिस्पॉन्सिबल कन्जम्पशन एण्ड प्रोडक्शन (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग), क्लाइमेट एक्शन (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग), लाइफ ऑन लैण्ड (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग) तथा पीस, जस्टिस एण्ड स्ट्रॉन्ग इंस्टीट्यूशंस (गृह विभाग) की विस्तृत समीक्षा की.

बैठक में मुख्य सचिव श्री आरके तिवारी, अपर मुख्य सचिव नियोजन श्री सुरेश चन्द्रा, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव गृह श्री अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं एमएसएमई श्री नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास श्री अरविन्द कुमार, अपर मुख्य सचिव सिंचाई श्री टी0 वेंकटेश, अपर मुख्य सचिव वित्त श्रीमती एस0 राधा चौहान, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज श्री मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा श्रीमती आराधना शुक्ला, अपर मुख्य सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन श्री मनोज सिंह, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री अमित मोहन प्रसाद, अपर मुख्य सचिव कृषि श्री देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव नगर विकास श्री रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा श्री दीपक कुमार, प्रमुख सचिव खाद्य एवं आपूर्ति श्रीमती वीना कुमारी मीना, प्रमुख सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास श्रीमती वी. हेकाली झिमोमी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना श्री संजय प्रसाद, सचिव मुख्यमंत्री श्री आलोक कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

”मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना” को बेहतर बनाने में लगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ का लाभ पात्र बालिकाओं तक पहुंचाने के लिए तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के स्तर में वृद्धि करने तथा उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए सहायक सिद्ध हो रही है. इस योजना के तहत अब तक 07 लाख 81 हजार बालिकाओं को लाभान्वित किया जा चुका है. उन्होंने योजना के सम्बन्ध में नियमित समीक्षा करते हुए अन्य सम्बन्धित विभागों से संवाद व समन्वय बनाकर कार्य किए जाने के निर्देश दिए.

मुख्यमंत्री जी आज यहां अपने सरकारी आवास पर ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के सम्बन्ध में समीक्षा कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए लक्ष्य निर्धारित कर पात्र बालिकाओं तक योजना का लाभ पहुंचाया जाए. उन्होंने ग्राम पंचायतों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, आशा वर्कर्स, अध्यापकों व प्रधानाचार्यों, बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय आदि से ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के सम्बन्ध में समन्वय व संवाद किए जाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि मण्डल व जनपद स्तर पर योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के ठोस प्रयास किए जाएं. उन्होंने कहा कि मानक के अनुसार पात्र बालिकाओं तक योजना का लाभ पहुंचाने की दिशा में बेहतर रणनीति के साथ कार्य किए जाएं.

इस अवसर पर महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती स्वाती सिंह, प्रमुख सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास श्रीमती वी0 हेकाली झिमोमी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना श्री संजय प्रसाद, सचिव मुख्यमंत्री श्री आलोक कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

GHKKPM: कोमा से बाहर आयेगी सई, गुस्से में कर देगी विराट की शक्ल देखने से इनकार

स्टार प्लस का सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin)  की कहानी एक दिलचस्प मोड़ ले रही है. शो के बिते एपिसोड में दिखाया गया कि सई- विराट में आजिंक्य को लेकर कहासुनी होती है तो सई विराट की बातों से दुखी होकर घर छोड़कर चली जाती है तो विराट पीछे-पीछे आता है. फिर दोनों रास्ते में लड़ने लगते हैं. और ऐसे में सई का एक्सीडेंट हो जाता है. शो के अपकमिंग एपिसोड में धमाकेदार ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि सभी घरवाले सई को भला बुरा कहेंगे. तो उधर मोहित का गुस्सा सातवें आसमान पर होगा और वह सबसे कहेगा कि वे सई के बारे में कुछ भी गलत ना बोलें. वह सई को लेकर बहुत इमोशनल हो जाता है.

 

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शो के अपकमिंग एपिसोड में ये भी दिखाया जाएगा कि सई को देखने के लिए पुलकित हॉस्पिटल पहुंचता है. सई की हालत का जिम्मेदार पुलकित घरवालों को ठहराता है. वह अजिंक्य और सई के रिश्ते की सच्चाई बताता है. वह कहता है कि वो दोनों सिर्फ अच्छे दोस्त हैं.

 

इतना ही नहीं पुलकित विराट को जेल पहुंचाने की धमकी देता है. विराट गुस्से में खुद को चोट पहुंचाने लगता है. तो उधर सई को होश आता है. वह पुलकित से कहती है कि उसे विराट की बातों से बहुत दुख हुआ है. फिर पुलकित कहता है कि वह विराट से मिल ले. पर सई विराट की शक्ल देखने से मना कर देती है. शो में ये देखना दिलचस्प होगा कि  विराट-सई का झगड़ा कैसे खत्म होता है?

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Mirabai Chanu को सिल्वर नहीं , गोल्ड मेडल

टोक्यो ओलंपिक में पहले ही दिन भारत का सर ऊंचा करने वाली भारत की बेटी मीराबाई चनू ने सिल्वर जीत कर देश सीना गर्व से चौड़ा कर दिया, अपना नाम एक अमर खिलाड़ी के रूप में दर्ज करा लिया है. मगर आज हम आपको यहां बताएं मीराबाई चनू को मिला सिल्वर किस तरह गोल्ड मेडल में भी बदल सकता है ? जिसकी बहुत ज्यादा संभावना दिखाई दे रही है.

दरअसल, हमारे पड़ोसी चीन की वेटलिफ्टर होऊ झिऊई पर डोपिंग का शक है, उसकी जांच शुरू हो गई है. ऐसे में अगर डोपिंग आती है तो क्या होगा आप अंदाज लगाइए.
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि टोक्यो ओलंपिक -2021 में भारत के हिस्से में अनायास ही पहला गोल्ड आ सकता है.

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खेल समीक्षक अनुमान लगा रहे हैं कि वेटलिफ्टिंग (49 किग्रा वर्ग) में रजत पदक हासिल करने वालीं मीराबाई चनू का मेडल गोल्ड में बदल सकता है. यह इसलिए क्योंकि चीनी खिलाड़ी होऊ झिऊई पर डोपिंग के शक के बाद उसकी जांच प्रारंभ हो गई है.

टोक्यो ओलंपिक में इस तरह पहला ही गोल्ड पाने वाले चीनी खिलाड़ी होउ जिहूई का परीक्षण किया जा रहा है आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि आगे क्या क्या हो सकता है.

हालांकि इस संदर्भ में भारतीय खेल उच्च अधिकारी मौन है क्योंकि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. मगर दुनिया की मीडिया व खेल प्रेमियों की निगाह इस मसले पर टकटकी लगाए हुए हैं कि आगे क्या होने वाला है. अगर परीक्षण में डोपिंग पाई गई तो परिणाम बहुत चौंकाने वाले होंगे और यह खबर अपने आप में विश्वव्यापी होगी और भारत के लिए एक सुखद समाचार ऐतिहासिक समय.

चीन लौटने से पहले गिरी गाज

दरअसल, चीन की खिलाड़ी होऊ झिऊई जब अपने देश लौटने वाली थीं, अधिकारियों को उसकी गतिविधि पर शक हुआ और उन्हें रुकने को कहा गया. यहां यह जानना जरूरी है कि ओलंपिक खेलों के इतिहास में ऐसा पूर्व में भी हो चुका है, जब डोपिंग में फेल होने पर खिलाड़ी का मेडल छीन लिया गया है.

वेटलिफ्टिंग में सोना जीतने वाली चीनी एथलीट होउ पर डोपिंग का शक गहरा गया है. सैंपल-ए में संदेह के बाद सैंपल-बी के लिए बुलाया गया.

इस तरह बड़ी संभावना है कि वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू का मेडल गोल्ड में बदल सकता है.

यह माना जा रहा है कि टोक्यो ओलंपिक के महिला भारोत्तोलन (49 किग्रा) में मीराबाई चनू का सिल्वर पदक स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) में बदल सकता है, अगरचे यह हो गया तो ओलंपिक के इतिहास में भारत के नाम व्यक्तिगत स्पर्धा में यह दूसरा स्वर्ण पदक होगा. बताते चलें कि शूटर अभिनव बिंद्रा ने भारत को पहला गोल्ड मेडल (बीजिंग, चीन 2008) दिलाया था.

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महत्वपूर्ण बात यह भी है कि टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई ने भारोत्तोलन स्पर्धा में पदक का भारत का एक लंबे, 21 साल के इंतजार को खत्म किया है. इससे पूर्व कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक 2000 में देश को भारोत्तोलन में कांस्य पदक दिलाया था.

चनू ने क्लीन एवं जर्क में 115 किग्रा और स्नैच में 87 किग्रा से कुल 202 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया है. चीन की होऊ झिऊई ने कुल 210 किग्रा (स्नैच में 94 किग्रा, क्लीन एवं जर्क में 116 किग्रा) से स्वर्ण पदक अपने नाम किया . इंडोनेशिया की ऐसाह विंडी कांटिका ने कुल 194 किग्रा का वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया है.

मीराबाई के नाम अब महिला 49 किग्रा वर्ग में क्लीन एवं जर्क में विश्व रिकॉर्ड भी है. उन्होंने टोक्यो ओलंपिक से पहले अपने अपने अंतिम टूर्नामेंट एशियाई चैम्पियनशिप में 119 किग्रा का वजन उठाया और इस वर्ग में स्वर्ण और ओवरऑल वजन में कांस्य पदक जीता है.

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यही नहीं इस सब के बीच टोक्यो ओलिंपिक में रजत पदक जीतने वाली वेटलिफ्टर मीराबाई चानू के लिए एक और खुशखबरी है. 26 वर्षीय यह वेटलिफ्टर पुलिस विभाग में एएसपी बना दी गईं हैं. मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इसकी घोषणा की है.और दूसरी तरफ मीरा बाई पर लाखों रुपए की बारिश हो रही है.

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