बलात्कारी की हार: भाग 1

लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

‘‘बधाई हो आप को, बेटी का जन्म हुआ है,’’ नर्स ने बिस्तर पर लेटी हुई प्रीति से कहा.

प्रीति ने उनींदी आंखों से अपनी बेटी की तरफ देखा, उस के होंठों पर मुसकराहट तैर आई और आंखों से चांदी के दो छोटे गोले कपोलों पर ढुलक गए.

प्रीति ने एक लंबी सांस छोड़ी और आंखों को कमरे के एक कोने में टिका दिया. ‘‘नहीं सिस्टर नहीं, यह मेरी बेटी नहीं है. यह तो मेरी जीत है, मेरी जित्ती.’’ अचानक से कह उठी थी प्रीति. कमरे के एक कोने में टिकी आंखों ने यादों की परतों की पड़ताल करनी शुरू कर दी थी.

प्रीति का तबादला आगरा की ब्रांच में हुआ था. बैंक में उस का पहला दिन था और इसी उत्साह में उस ने एक घंटे पहले ही कैब मंगवा ली थी और नियत समय से 15 मिनट पहले ही अपने बैंक जा पहुंची.

10 बजतेबजते ही लगभग सारा स्टाफ आ गया था. आज इस बैंक में प्रीति एक नया चेहरा थी, इसलिए सब ने उस का स्वागत किया.

प्रीति की उम्र 25 वर्ष थी और इस ब्रांच का स्टाफ भी युवा ही था, इसलिए वह बहुत ही जल्दी सब में घुलमिल गई थी.

लंचब्रेक होने पर वह कैंटीन जाने के लिए उठने ही जा रही थी कि तभी एक आवाज ने उस का ध्यान भंग किया.

‘‘प्रीतिजी, मेरा नाम अमित है. अगर आप बुरा न मानें तो मेरे साथ लंच शेयर कर सकती हैं. मां के बनाए हुए ढोकले लाया हूं. साथ देंगी तो अच्छा लगेगा,’’ अमित ने कहा.

प्रीति ने चौंक कर देखा तो वह उस का सहकर्मी था जो कैश मैनेजर की पोस्ट पर था. एक अच्छा शरीर, चेहरे पर घनी मूंछ और आंखों पर हलके लैंस वाला चश्मा और उस की आयु 30 वर्ष के आसपास. कुल मिला कर प्रीति भी अपनेआप को अमित के प्रति आकर्षित होने से न रोक पाई थी.

अमित ने अपना टिफिन आगे बढ़ाया तो सकुचाते हुए प्रीति ने एक ढोकला ले लिया और अमित को थैंक्स कहा.

‘‘जी मैं पिछले एक साल से इसी ब्रांच में काम कर रहा हूं. मैं ने देखा है इस ब्रांच में जो भी लोग आते हैं वे बहुत ही खूबसूरत होते हैं,’’ अमित ने प्रीति की आंखों में ?ांकते हुए कहा.

ये भी पढ़ें- Romantic Story in Hindi: दिव्या आर्यन- जब दो अनजानी राहों में मिले धोखा खा चुके हमराही

अपने आखिरी के शब्द अमित ने कुछ इस तरह कहे थे कि प्रीति कुछ शरमा सी गई थी. अमित का बात करने का अंदाज कुछ ऐसा था कि उस ने पहली ही मुलाकात में प्रीति के बारे में काफीकुछ जान लिया और लोकल घर का पता भी पूछ लिया था.

‘‘अमितजी, मैं यहां पर सिविल लाइंस में एक घर में पेइंगगैस्ट के तौर पर रहती हूं,’’ प्रीति ने बताया.

‘‘ओह, सिविल लाइंस वह तो मेरे घर जाने के रास्ते में ही पड़ता है. अगर आप बुरा न मानें तो मैं कल आते समय आप को पिक कर लूं?’’

अमित ने कुछ ऐसे कहा कि प्रीति को इस में कोई बुराई नहीं नजर आई और उस ने हामी भर दी.

अब तो अमित रोज सुबह प्रीति को पिक करता और शाम को घर जाते समय उसे उस के कमरे पर छोड़ देता.

अमित अपनी बातों में बड़ा बेतकल्लुफ और बेपरवाह सा था. उस की यही बात प्रीति को सब से ज्यादा पसंद भी थी क्योंकि उसे गंभीरता ओढ़े, जिंदगी को गणित के ढंग से जीने वाले लोग पसंद नहीं थे.

ये भी पढ़ें- Family Story in Hindi: मेरी खातिर- भाग 2: माता-पिता के झगड़े से अनिका की जिंदगी पर असर

यही वजह थी कि कहीं न कहीं वह अमित में एक आदर्श जीवनसाथी देख चुकी थी.

अमित एक दिन प्रीति को उस के घर छोड़ने जा रहा था कि रास्ते में तेज आंधी और बारिश शुरू हो गई. बहुत मुश्किल से प्रीति का घर आया. बारिश और उग्र हो रही थी, इसलिए प्रीति ने अमित को थोड़ा ठहर कर जाने को कहा जिसे अमित ने सहर्ष मान लिया.

दोनों भीगे हुए थे.  प्रीति चाय बना लाई और दोनों चाय की चुस्कियां लेने लगे. अचानक से बिजली चली गई. प्रीति ने मोबाइल की लाइट जलाई तो महसूस किया कि अमित तो उस के पीछे खड़ा है.

‘‘प्रीति, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं और तुम से शादी करना चाहता हूं,’’ उस के हाथ प्रीति के जिस्म पर फिसल रहे थे.

पता नहीं क्यों अमित की इस हरकत का जवाब कुछ भी नहीं दे पाई प्रीति. उस के मौन को अमित ने उस की स्वीकृति सम?ा और अपने हाथों की गति को तेज कर दिया.

इंद्रधनुष के दो रंग आपस में घुल गए. प्रीति की आंखों में चांदनी उतर आई थी. दो दिलों के मिलने की खुशबू पूरे कमरे में फैल गई. अंदर का तूफान जब शांत हुआ तो दोनों ने देखा कि बाहर का तूफान भी शांत हो चुका था.

प्रीति जो अमित को अपने जीवनसाथी के रूप में मान चुकी थी, इसलिए वह अपने इस नए अनुभव पर शर्मिंदा न हो कर रोमांचित थी और यह रोमांच उस ने अपने तक नहीं रखा बल्कि अपने घर के लोगों के साथ भी बांटा. घर के लोग भी खुश हुए कि चलो अच्छा हुआ जो प्रीति को मनचाहा वर मिल गया.

जब इस रिश्ते को घर वालों से हरी ?ांडी मिल गई तो प्रीति और अमित ने कई बार अपने अंदर के तूफान को अनुभव किया जिस का परिणाम यह हुआ कि प्रीति को गर्भ ठहर गया.

‘‘अमित, सुनो, अब हमें जल्दी शादी कर लेनी चाहिए,’’ कौफीहाउस में अमित के हाथों को अपने हाथों में लेते हुए प्रीति ने कहा.

‘‘क्या… पागल तो नहीं हो गई हो तुम. अरे हम दोनों साथ में काम करते हैं, अगर तुम्हारे साथ थोड़ा एंजौय कर लिया तो तुम तो गले ही पड़ने लगीं,’’ अमित बौखला सा गया था.

ये भी पढ़ें- Family Drama in Hindi: दत्तक बेटी ने झुका दिया

‘‘पर तुम ने तो कहा था कि प्यार करते हो मु?ा से, शादी करना चाहते हो,’’ प्रीति हकला सी गई.

‘‘अरे यार, ऐसे वादे तो खूबसूरत लड़कियों से करने के लिए ही तो होते हैं वरना वे हाथ ही कहां रखने देंगी,’’ अमित ने बेशर्मी दिखाई.

‘‘पर तुम ने तो गलत किया मेरे साथ. यह तो सरासर धोखा है,’’ प्रीति की आवाज डूब रही थी.

ऑनलाइन वर्क: युवाओं में बढ़ता डिप्रेशन

कोरोना के बाद से वर्क फ्रौम होम और औनलाइन क्लासेज का कल्चर पूरे विश्व में बढ़ा है. इस कल्चर के जहां कुछ शुरुआती नफे दिखे, वहीं इस के उलट नुकसान भी दिखाई दे रहे हैं, खासकर, युवाओं को इन से अधिक जू झना पड़ रहा है.

वर्क फ्रौम होम और औनलाइन क्लासेज युवाओं की मैंटल हैल्थ को प्रभावित कर रहे हैं. आज साइकोलौजिस्ट के पास आने वालों में बड़ी संख्या युवाओं की है. वर्क फ्रौम होम और औनलाइन क्लासेज के साइड इफैक्ट्स युवाओं को बीमार बना रहे हैं.

कोरोना के चलते कालेज से ले कर औफिस तक में युवाओं की निर्भरता मोबाइल और नैटवर्क पर बढ़ गई है. शुरूआत के दिनों में इस सिस्टम की सभी ने तारीफ की. कुछ लोगों ने माना कि बढि़या व्यवस्था है. बिना औफिस और कालेज जाए काम चल रहा है. पेरैंट्स इस बात को ले कर खुश थे कि युवाओं की निगरानी नहीं करनी पड़ रही. खासतौर पर लड़कियां अगर घर में हैं तो पेरैंट्स एकदम से चिंतामुक्त थे. बड़े शहरों में काम करने वाले युवा अपने घर वापस आ गए थे और वर्क फ्रौम होम से काम करने लगे थे. शुरुआती दिनों में अच्छा लगने वाला यह माहौल धीरेधीरे मैंटल हैल्थ पर भारी पड़ने लगा.

ये भी पढ़ें- आंखों में धूल झोंकने का नया ड्रामा!

साइकोलौजिस्ट डाक्टर नेहा आनंद कहती हैं, ‘‘मेरी क्लीनिक में कई पेरैंट्स अपने युवा बच्चों को ले कर आ रहे हैं जो कालेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले होते हैं या नईनई जौब में होते हैं. कुछ दिनों से या तो वे काफी गुस्से में रहने लगे हैं या फिर एकदम गुमसुम से हो गए हैं. कई में हाई ब्लडप्रैशर के लक्षण दिखने लगे हैं. उन से जब अच्छी तरह से बात की जाती है तो यह पता चलता है कि ‘वर्क फ्रौम होम’ और ‘औनलाइन क्लासेज’ की वजह से परेशानी बढ़ी है. ‘‘दरअसल, इन का उन के स्वास्थ्य पर ही प्रभाव नहीं पड़ रहा बल्कि उन के कार्य की क्षमता भी प्रभावित हो रही है और काम में गलतियां भी निकलने लगी हैं. सामान्य दिनों में अच्छी तरह से काम करने वाले लोग अब गलतियां करने लगे हैं.’’

बोझ बन गईं औनलाइन क्लासेज

ग्रेजुएशन में पढ़ रही वर्तिका बताती हैं, ‘‘शुरू में कुछ दिन तो औनलाइन क्लासेज अच्छी लगीं, लेकिन अब इस में दिक्कत आने लगी है. क्लास में क्या पढ़ाया जा रहा है सम झ नहीं आ रहा. नैटवर्क के कमजोर होने से कनैक्टिविटी सही नहीं होती. कोई जरूरी बात पूछनी हो तो समय निकल जाता है. कई युवा ऐसे होते हैं जो पढ़ाई को गंभीरता से नहीं ले रहे होते हैं. जिन की वजह से और दिक्कतें आती हैं. लगातार औनलाइन क्लासेज से आंखों पर जोर पड़ रहा है. इस के अलावा जब हम क्लासरूम में होते हैं तो केवल वहीं का ध्यान रखना पड़ता है. औनलाइन क्लासेज करते समय हमें पेरैंट्स और घर के दूसरे लोगों की बातें सुननी पड़ती हैं. बीचबीच में कुछ घर के काम भी मैनेज करने होते हैं. इन सब की वजह से अब औनलाइन क्लासें बो झ सी लगने लगी हैं.’’

क्लास ही नहीं, कोचिंग और ट्यूशन भी औनलाइन चल रहे हैं. कालेज और क्लासरूम में एकाग्रता बनी रहती थी. घर में पेरैंट्स की टोकाटाकी लगी रहती है. कालेज के दिनों में जब क्लासरूम में युवा होते थे तब उन का मोबाइल या तो बंद रहता था या फिर साइलैंट मोड पर होता था. औनलाइन क्लासों के समय मोबाइल खुला रहता है. इस वजह से तमाम मैसेज और नोटिफिकेशन आते रहते हैं. इस के कारण पढ़ाई से ध्यान भंग होता रहता है. एक ही जगह बंद रह कर काम करने से टैंशन और गुस्सा बढ़ने लगा है. जो डिप्रैशन और ब्लडप्रैशर को बढ़ाने का काम कर रहा है.

ये भी पढ़ें- ऐंटी सेक्स बेड: मैदान से पहले बिस्तर का खेल

वर्क फ्रौम होम ने बढ़ाए काम के घंटे

साइकोलौजिस्ट डाक्टर सोनल गुप्ता बताती हैं, ‘‘मैंटल हैल्थ की परेशानियों को ले कर आने वालों में सब से अधिक संख्या युवाओं की है. निजी कंपनियों में काम कर रहे युवा इस वजह से परेशान होते हैं कि उन के काम के घंटे खत्म हो गए हैं. वर्क फ्रौम होम में कंपनी यह मानती है कि हम घर से काम कर रहे हैं तो हमारे खर्चे घट गए हैं. उस ने तमाम तरह के इंसैंटिव खत्म कर दिए. सैलरी में कटौती कर दी. जब औफिस में काम करते थे तो काम के घंटे तय थे. अब सारे दिन और रात काम में लगे रहना पड़ता है. घरों में औफिस जैसा काम करने का माहौल नहीं है. ऐसे में काम करने में असुविधा होती है. औफिस में काम कई लोगों में बंट जाता था. कुछ सम झ नहीं आ रहा हो तो किसी सहयोगी से सलाह मिल जाती थी. अब ऐसा नहीं होता है, जिस की वजह से उन में तनाव बढ़ने लगा है.’’

यह सही है कि औफिस में काम करते समय दिनचर्या का रूटीन होता था. सुबह तैयार हो कर औफिस जाना, वहां दोस्तोंसहयोगियों से मिलना, रास्ते में शहर को देखते जाना आदि.

अब सुबह से शाम घर से ही काम करने में बोरियत होने लगी है. ऐसे में नौकरी के जाने, वेतन के कटने और दूसरी तमाम तरह की मुसीबतों से डिप्रैशन बढ़ने लगा है. यह युवाओं में तमाम तरह के हैल्थ इशू ले कर आ रहा है. हार्ट की बीमारियां ज्यादा बढ़ रही हैं.

दोस्त और सहयोगियों से दूरी

औफिस में तमाम ऐसे काम होते थे जो एकदूसरे की सलाह और सहयोग से पूरे हो जाते थे. वर्क फ्रौम होम में सारे काम खुद करने पड़ रहे हैं. ईमेल, व्हाट्सऐप, वीडियोकौल और जूम मीटिंग अब बोरियत का कारण होने लगे हैं. वर्क फ्रौम होम में घर वालों को लगता है कि अब तो औफिस भी नहीं जाना पड़ता है. औफिस वालों को लगता है घर से काम चल रहा है. ऐसे में युवा औफिस और घर दोनों की नजरों में काम नहीं कर रहा. औफिस से घर आने पर पहले स्वागत होता था. अच्छाअच्छा खाना मिलता था. अब ऐसा लग रहा जैसे खाना मांग कर अपराध कर रहे हों. घर के लोग भी ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे हम घर के काम न कर के केवल टाइमपास कर रहे हों.

वर्क फ्रौम होम में काम कर रहे हरीश नौटियाल कहते हैं, ‘‘घर और औफिस दोनों की नजरों में हम मेहनत नहीं कर होते हैं. इस से भी अधिक कमी हम दोस्तों, सहयोगियों के साथ चाय की चुस्कियों, उन के साथ हंसीखुशी के पलों, चुहलबाजियों और गौसिप को मिस कर रहे हैं. इस की वजह से हम तमाम तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. हमें रविवार की छुट्टी का रोमांच नहीं रह गया. हम वीकैंड की मस्ती को जी नहीं पा रहे. वर्क फ्रौम होम हमें युवावस्था में ही बुढ़ापे की तरफ ले कर जा रहा है.’’

ये भी पढ़ें- ओलंपिक: नीरज भारत का “गोल्डन सन”

कैसे संभालें हालात

कोरोना का प्रभाव कम होने के साथ ही साथ हालात को धीरेधीरे पटरी पर लाने का प्रयास करना चाहिए.

वर्चुअल वर्क से ही काम नहीं चलेगा. ऐसे में वापस औफिस कल्चर पर आना चाहिए.

वर्क फ्रौम होम में काम के घंटे तय हों. ऐसे लोगों के प्रोत्साहन के लिए प्रयास किए जाएं.

आर्थिक हालात के लिए तमाम दूसरे कारण जिम्मेदार हैं. केवल कर्मचारियों को ही जिम्मेदार नहीं मानना चाहिए.

लौकडाउन के पहले जो स्टाफ था, अचानक उसे खराब बताना तार्किक नहीं है. आपसी सामंजस्य से ही हालात बेहतर होंगे.

युवाओं को अपनी डाइट और ऐक्सरसाइज पर ध्यान देना चाहिए. उन को अपने आत्मविश्वास को बनाए रखने की जरूरत है.

युवाओं को अपने दोस्तोंसहयोगियों से बात करते रहना चाहिए. सावधानी से खुली हवा में घूमना चाहिए.

Satyakatha: लॉकडाउन में इश्क का उफान- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

लेखक- शाहनवाज

दिल्ली के करावल नगर की घटना एक ऐसे ही प्रेमी युगल की दास्तान है, जो वासना की भेंट चढ गया. करीब डेढ़ साल पहले दीपक दिल्ली में अपने चाचा रमेश के पास रहने गया था. वहां रह कर

वह कोई काम सीखना चाहता था, लेकिन इसी बीच मार्च 2020 में लौकडाउन लगने पर वह वापस अपने घर बागपत लौट आया था. इस साल मार्च में दोबारा दिल्ली जाने वाला ही था कि तभी दोबारा लौकडाउन लग गया.

अब वह यही सोच रहा था कि जितनी जल्द हो सके यह लौकडाउन खुले, जिस से वह दिल्ली जाए. जून में जब दिल्ली का लौकडाउन खुल गया तो वह दिल्ली जाने के लिए मां से जिद करने लगा, ‘‘मम्मी मैं दिल्ली जाऊंगा.’’

ये भी पढ़ें- Best of Manohar Kahaniya: पत्नी की बेवफाई पड़ी पति पे भारी

‘‘क्यों बेटा अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है.’’ मां बोली.

‘‘लेकिन मम्मी, लौकाडाउन तो खत्म हो गया है.’’

‘‘वहां जा कर करेगा क्या?’’ मां ने पूछा.

‘‘कोई काम करूंगा. पैसे कमा कर लाऊंगा. वैसे भी यहां भी तो खाली हूं.’’

‘‘ठीक है, इस बारे में पहले मैं तेरे पापा से बात करूंगी,’’ मां बोली.

बागपत का रहने वाला दीपक अपनी मां से दिल्ली जाने की जिद पर अड़ा था. इस बारे में उस की मां ने अपने पति से बात की तो पहले तो उन्होंने मना किया, लेकिन मिन्नत करने पर वह  मान गए.

अपने मातापिता को मना कर दीपक 2 जुलाई, 2021 को दिल्ली के करावल नगर में रह रहे अपने चाचा रमेश के पास आ गया. उस के मातापिता भले ही समझ रहे थे कि उन का बेटा दिल्ली काम करने के लिए गया है, लेकिन उस के दिल्ली आने की वजह कुछ और ही थी.

रमेश करावल नगर में किराए के कमरे में अकेले रहते थे. उन के पास दीपक दिन में ही आ गया था. उस दिन वह अपने काम पर नहीं गए थे. क्योंकि उन की शिफ्ट बदल गई थी. अचानक दीपक को आया देख वह चौंक गए. परिवार में सब का हालचाल लिया, फिर सुबह जो कुछ खाना पकाया था, वह उसे खाने को दिया.

दीपक खाना खा कर अपने पुराने दोस्त से मिलने को कह कर निकल गया. उस के चाचा भी खानेपीने का सामान लाने बाजार चले गए.

दीपक सीधा अपनी प्रेमिका पूजा के पास गया. पूजा भी उसे अचानक आया देख चौंक गई. लंबे समय बाद दीपक को देख वह उस के गले लिपट गई. कुछ पलों बाद वह अलग हुई और अपना नया मोबाइल नंबर दीपक को देते हुए बोली, ‘‘दीपक, तुम अभी चले जाओ, अब शाम को मिलना. मैं फोन करूंगी. क्योंकि अभी पापा आने  वाले हैं.’’

‘‘ सब ठीक है न?’’ दीपक ने पूछा.

‘‘ हांहां, मैं ठीक हूं. ये मास्क लो, लगा लेना नहीं तो फाइन भरना पड़ेगा.’’ पूजा ने मास्क दिया.

‘ पापा अभी भी नाराज हैं?’’ दीपक ने पूछा.

‘‘ हां, लेकिन मैं उन्हें मना लूंगी. ये मोहल्ले वाले ही उन को हमेशा भड़काते रहते हैं.’’

‘‘ कोई बात नहीं, मैं अभी चलता हूं. फोन करूंगा. आज ही नया नंबर ले लूंगा.’’

ये भी पढ़ें- Satyakatha: दोस्त की दगाबाजी

उस समय पूजा के पिता सत्यवीर सिंह घर पर नहीं थे. गलीमोहल्ले वाले दीपक को अच्छी तरह से पहचानते थे. वह उस के और पूजा के संबंधों के बारे में जानते थे. उन्हें यह भी पता था कि उस की वजह से पिछले साल गली में कितना हंगामा खड़ा हो गया था.

उस रोज भी दीपक का पूजा के घर जाना गली के अधिकतर लोगों ने देखा. उन्हीं में से एक ने सत्यवीर को दीपक के आने की जानकारी दे दी.

यह भी हिदायत दी कि उस की बेटी पूजा की करतूत अभी भी ठीक नहीं है. उसे संभालें, अच्छे से समझाएं. उस की हरकतों का असर उन के बच्चों पर भी पड़ेगा.

यह जान कर सत्यवीर अपनी बेटी पर आगबबूला हो गया था. उस ने पूजा को काफी डांटफटकार लगाई.

हालांकि सत्यवीर की डांट और चेतावनी का असर पूजा पर कुछ भी नहीं हुआ. इस का कारण भी था, वह दीपक से बेइंतहा प्यार करती थी. काफी समय से उस से मिलने को बेचैन थी. उस के मन में दीपक के लिए प्यार दबा हुआ था. उस के प्यार का उफान पिता की डांट से कहां थमने वाला था.

दीपक की हालत उस से कहीं अधिक बेचैनी वाली थी. अब जा कर उसे मिलने का मौका मिला था. उस ने तुरंत एक सैकंडहैंड स्मार्टफोन खरीदा और अपने चाचा की आईडी से नया सिम कार्ड ले लिया.

उस के एक्टिवेट होते ही सब से पहली काल उस ने प्रेमिका पूजा को कर के अपना नया नंबर सेव करने के लिए कहा.

उन की बातें फोन पर लगातार होने लगीं. पूजा ने फिलहाल उसे घर आने से मना किया था. इसी तरह 4-5 दिन निकल गए. दीपक पूजा से फिर मिलने को बेचैन हो गया था.

उसे लग रहा था कि पास आ कर भी वह पूजा से दूर क्यों है? दीपक के मन में पूजा के लिए दबी कुंठाएं अब दबने का नाम ही नहीं ले रही थीं. ऐसा ही हाल पूजा का भी था.

अगले भाग में पढ़ें-  दीपक को जरा भी आभास नहीं था कि वह इस बार पकड़ा जाएगा

भोजपुरी एक्टर Khesari Lal Yadav ने लाइव के दौरान मिलाया अपनी धोखेबाज गर्लफ्रेंड से, देखें Video

भोजपुरी के सुपरस्टार  खेसारी लाल यादव (khesari lal yadav) सोशल मीडिया पर इन दिनों काफी एक्टिव रहते हैं. वह अक्सर फैंस के साथ फोटोज और वीडियो शेयर करते रहते हैं. फैंस को भी खेसारी लाल यादव के पोस्ट का बेसब्री से इंतजार रहता है. सोशल मीडिया पर एक्टर फैंस के साथ लाइव भी करते हैं.

हाल ही में एक्टर ने फैंस के सवालों का जवाब दिया और उनसे ढेर सारी बातें की.  दरअसल रक्षाबंधन के मौके पर खेसारी लाल यादव फैंस के साथ लाइव किये. इस दौरान उन्होंने फैंस से अपनी ‘धोखेबाज गर्लफ्रेंड’ से मुलाकात करवाई.

ये भी पढ़ें- भोजपुरी सुपर स्टार खेसारीलाल यादव की फिल्म ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ का फर्स्ट लुक हुआ वायरल

दरअसल, खेसारी लाल यादव अपने नए गाने ‘बस कर पगली’ के प्रमोशन के लिए आए. इस गाने के वीडियो में  खेसारी के साथ मेघा शाह भी नजर आ रही हैं.  उन्होंने लाइव वीडियो के जरिए अपने गाने के बारे में बताया.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Khesari Lal Yadav (@khesari_yadav)

 

वीडियो में एक्टर ये कहते हुए दिखाई दिये कि ‘मेरा आज लाइव जरूरी काम से आया हूं,  मेरा नया गाना ‘बस कर पगली’ रिलीज हुआ है. इसे बिहार की कंपनी SRK म्यूजिक भोजपुरी द्वारा रिलीज किया गया है.

ये भी पढ़ेंं- Bigg Boss Ott: अक्षरा सिंह से बदला लेने के लिए शमिता सेट्टी ने कीं ये प्लानिंग

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Khesari Lal Yadav (@khesari_yadav)

 

खेसारी लाल यादव ने ये भी कहा कि ‘हम तो सिर्फ आप लोगों के लिए प्यार भरे गाने गाते हैं,  हमारा तो इधर-उधर कोई चक्कर नहीं है.  एक्टर ने लाइव के दौरान एक्ट्रेस मेघा शाह (Megha Shah) से भी मुलाकात करवाई. उन्होंने भी फैंस से बातचीत की.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के कार्तिक की होने वाली है छुट्टी! पढ़ें खबर

स्टार प्लस का सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ ( Yeh rishta kya kehlata hai) में हाल ही में कार्तिक और सीरत की जिंदगी में खुशियों ने दस्तक दी है. वो दोनों एक हो चुके हैं. इसी बीच खबर आ रही है कि शो से कार्तिक यानी मोहसिन खान (Mohsin Khan) की छुट्टी होने वाली है.

जी हां, सही सुना आपने. दरअसल शो के मेकर्स कहानी में बड़ा बदलाव करने वाले हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोहसिन खान जल्द ही सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है को अलविदा कहने वाले हैं.

ये भी पढ़ें- फ्रॉड पकड़ने के लिए ‘अनुपमा’ ने बनाया मास्टर प्लान, मिला समर का साथ

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Mohsin Khan (@khan_mohsinkhan)

 

रिपोर्ट के अनुसार मोहसिन खान बीते साढ़े पांच साल से ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में काम कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि मोहसिन खान ने शो छोड़ने का फैसला किया है.

ये भी पढ़ें- Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin: विराट को दूर जाने से रोकेगा सम्राट, अब क्या करेगी सई

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Mohsin Khan (@khan_mohsinkhan)

 

शो में जल्द ही जनरेशन लीप आने वाला है. ऐसे में कार्तिक का किरदार एक उम्रदराज आदमी क हो जाएगा. खबरों के अनुसार मोहसीन यह किरदार नहीं निभाना चाहते हैं इसलिए उन्होंने छोड़ने का फैसला किया है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Mohsin Khan (@khan_mohsinkhan)

 

खबरो की माने तो मोहसिन खान और ये रिश्ता क्या कहलाता है के मेकर्स के बीच बातचीत चल रही है. हालांकि मोहसीन खान ने इस खबर पर मुहर नहीं लगाई है.

ये भी पढ़ें- ‘चीकू की मम्मी दूर की’ में बॉलीवुड स्टार्स गोविंदा या मिथुन चक्रवर्ती की होगी एंट्री!

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Mohsin Khan (@khan_mohsinkhan)

 

फ्रॉड पकड़ने के लिए ‘अनुपमा’ ने बनाया मास्टर प्लान, मिला समर का साथ

रूपाली गांगुली और सुधांशु पांडेय स्टारर सीरियल अनुपमा में इन दिनों हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. अब तक आपने देखा कि शाह परिवार ने ढोलकिया का पर्दाफाश किया और किंजल उसके चंगुल से बचाया. तो उधर अनुपमा फ्रॉड का शिकार हो गई है. दरअसल वह लोन लेना चाहती है और उसने गलत कागजात पर साइन किया है. शो के अपकमिंग एपिसोड में महाट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में दिखाया जा रहा है कि अनुपमा को पैसे नहीं मिले है.  जब यह बात शाह परिवार को पता चलता है तो सब मिलकर अनुपमा को खूब खरी-खोटी सुनाते हैं. हर कोई उसे इस गलती का जिम्मेदार ठहराता है.

ये भी पढ़ें- सामाजिक कुरीति पर कुठाराघाट करने आ रहा है सीरियल ‘‘नथ: जेवर या जंजीर’’

 

View this post on Instagram

 

A post shared by StarPlus (@starplus)

 

तो वहीं समर और किंजल  अनुपमा के सपोर्ट करते नजर आएंगे. वे अनुपमा के  साथ खड़े  रहेंगे. शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुपमा पूरी तरह टूट जाएगी. बा, काव्या, वनराज, सब उसे ताना मारेंगे. लेकिन किसी भी तरह अनुपमा खुद को संभालेगी. और वह इस फ्रॉड से बचने के लिए कोई तरकीब निकालेगी.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss Ott: शो में पहुंचे Siddharth Shukla और Shehnaaz Gill, केमेस्ट्री ने लूटी महफिल

 

शो में यह भी दिखाया जाएगा कि अनुपमा इस फ्रॉड से बचने के लिए डिटेक्टिव का काम करेगी.  वह खुद ही मास्टर प्लान बनाएगी. वह ठान लेगी कि किसी भी तरह परिवार को बेघर होने से बचाना है. अब देखना ये होगा कि अनुपमा क्या प्लान बनाती है और कैसे इस फ्रॉड्स को सबक सिखाती है.

 

शो में ये भी देखना दिलचस्प होगा कि अनुपमा के इस मास्टर प्लान में वनराज और काव्या साथ देते हैं या नहीं?

ये भी पढ़ें- Anupamaa: काव्या को मिला बेस्ट खलनायिका का अवार्ड, सोशल मीडिया पर खुशी की जाहिर

 

आंखों में धूल झोंकने का नया ड्रामा!

ग्रामीण अंचल के सीधे साधे लोगों के अलावा शहर के पढ़े-लिखे लोग भी नटवरलाल बनकर घूमने वाले अपने आसपास के लोगों के शिकार हो रहे हैं. क्या है इसका मूल कारण और कैसे आप ठगी से बच सकते हैं, पढ़िए यह आलेख.

रूपए चार गुना करने के नाम पर ठगी  का  तरीका सामने आया है.  दरअसल, एक काले रंग के कपड़े में रुपए लपेट कर चार गुना करने का सपना दिखाकर 10 लाख रुपए की ठगी हो गई. पुलिस ने मामले में एक ढोंगी बाबा समेत 4 लोगों को  गिरफ्त में लिया है .  पूछताछ में फर्जी बाबा ने ठगे गए पैसे से ऐश करने शराब पीने और जमीन खरीदने की बात कबूल कर ली है.

ठगी के इस हैरतअंगेज मामले में प्रार्थी को पहले डेमो दिखाकर विश्वास जीत लिया गया. तरुण साहू ने ठगी का अहसास होने पर पुलिस में  एक शिकायत दर्ज कराई . उसने बताया   संतोष विश्वकर्मा ने अपने साथी संतराम जोशी और यादव बाबा के साथ मिलकर उसके साथ 10 लाख रुपए की ठगी की है. तरुण साहू ने बताया कि तीनों ने उसे पैसे को चार गुना करने का झांसा देकर उसे अपने मायाजाल में फंसाया. उन्होंने डेमो दिखाकर  उसका विश्वास जीत लिया . इसके बाद  जुलाई के अंतिम सप्ताह में  10 लाख रुपए को एक काले कपड़े में लपेटकर रकम चार गुना करने का दावा करने लगे, लेकिन जैसी ही पीड़ित किसी काम के लिए अपने कमरे में घुसा. वैसे ही आरोपियों  10 लाख रुपए लेकर गायब कर स्वयं भी नदारद हो गए.   पुलिस ने 24 घंटे के अंदर ही संतोष विश्वकर्मा और संतराम जोशी को गिरफ्तार कर लिया  था.इधर ढोंगी बाबा अपने साथियों को धोखा देकर भाग गया था दोनों ने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार कर लिया और पुलिस को बताया कि उन्होंने यादव बाबा के फेर में आ कर ठगी की घटना को अंजाम दिया था.

ये भी पढ़ें- Raksha Bnadhan Special: भाई को बनाएं जिम्मेदार

मजे की बात यह है कि कथित यादव बाबा उन्हें भी गच्चा दे कर सारे रूपए लेकर रफूचक्कर हो गया था.

अब आगे पुलिस के समक्ष ढोंगी बाबा एक चुनौती के रूप में सामने थे और उस यादव बाब की  तलाश कर रही थी. पुलिस के अनुसार  उसका कुछ पता नहीं चल रहा था . भारी मशक्कत के बाद दूसरे जिले से पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार किया .इधर पुलिस ने  आरोपियों से 2 लाख 40 हजार नकद और अन्य सामग्री बरामद की  है. बताया जा रहा है बाकी रुपयों से ढोंगी बाबा ने मोह माया के चक्कर में जमीन खरीद ली है.

लालच से बचिए

अक्सर लालच में पड़कर आदमी अपनी गाढ़ी कमाई को लूटा बैठता है. ऐसी प्रतिदिन जाने कितनी घटनाएं देशभर में घटित हो रही हैं.

हमने इस संदर्भ में आपके लिए पुलिस अधिकारी विधि के जानकार लोगों से बातचीत करके यह आलेख तैयार किया है. जिसमें हम यह स्पष्ट रूप से बताना चाहते हैं कि आप किस तरह समाज में होने वाली ठगी और लूट से बच सकते हैं. आपकी थोड़ी भी लापरवाही और लालच आपको ठगी का शिकार बना सकती है.

इस महत्वपूर्ण सामाजिक त्रासदी पर हमने पुलिस की अधिकारी इंद्र भूषण सिंह से  चर्चा की उनके मुताबिक मेरे पुलिसिया कार्यकाल के लगभग 30 वर्षों के समय में अनेक मामले ठगी के  हमारे जांच में आते रहे हैं और अगर मैं इसका मूल स्रोत आपको बताऊं तो वह सिर्फ एक है, और वह है लालच.

ये भी पढ़ें- ऐंटी सेक्स बेड: मैदान से पहले बिस्तर का खेल

आमतौर पर गांव के सीधे-साधे ग्रामीण लोगों के अलावा शहर के चतुर चालाक समझे जाने वाले शिक्षित वर्ग के लोग भी रुपए पैसों की लालच में पड़कर के ढोंगी ठगों के शिकार बन जाते हैं.

हाईकोर्ट के अधिवक्ता अविनाश शुक्ला के मुताबिक समाज में हो रही ठगी की मामलों की जो बारीक समझ मैं आपके पाठकों को बताना चाहता हूं, वह यह है कि अगर कोई आपको यह कहे कि बिना श्रम के आपको यह रुपए मिलने वाले हैं तो आप समझ जाइए कि आगे आप ठगी का शिकार हो सकते हैं.

संगीत मनोविज्ञान के जानकार घनश्याम तिवारी एक शिक्षक हैं आपके मुताबिक रुपए पैसों की लालच में आकर के लोग ठगी का शिकार बन जाते हैं, आम लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि अगर कोई आपको 1 का 4 गुना देने की बात कर रहा है तो फिर वह स्वयं अपना पैसा 4 गुना क्यों नहीं कर लेता.

इधर-उधर- भाग 2: अंबर को छोड़ आकाश से शादी के लिए क्यों तैयार हो गई तनु?

Writer- Rajesh Kumar Ranga

‘‘नारियल पानी पीना है?’’ तनु ने जोर से कहा.

‘‘पूछ रही हैं या कह रही हैं?’’

‘‘कह रही हूं… तुम्हें पीना हो तो पी सकते हो…’’

अंबर ने फौरन मोटरसाइकिल घुमा दी. विपरीत दिशा से आती गाडि़यों के बीच मोटरसाइकिल को कुशलता से निकालते हुए दोनों नारियल पानी वाले के पास पहुंय गए.

अंबर ने एक ही सांस में नारियल पानी खत्म कर दिया और नारियल को एक ओर उछाल कर जेब से पर्स निकाल कर पैसे दे कर बोला, ‘‘मैं ने अपने नारियल के पैसे दे दिए, आप अपने नारियल के पैसे दे दीजिए.’’

तनु अवाक हो कर अंबर को ताकने लगी.

‘‘बुरा मत मानिएगा तनुजी, आप का और मेरा अभी कोई रिश्ता नहीं है, मैं क्यों आप पर खर्च करूं?’’

तनु हार मानने वालों में से नहीं थी. बोली, ‘‘और जो आप के मातापिता हमारे घर पर काजू, किशमिश और चायकाफी उड़ा रहे हैं उस का क्या?

‘‘बात तो सही है, हम दिल्ली वाले हैं. मुफ्त का माल पर हाथ साफ करना हमें खूब आता है…’’

अंबर ने हंसते हुए कहा, ‘‘चिंता न करें मैं दोनों के पैसे दे चुका हूं, नारियल वाला छुट्टा करवाने गया है.’’

यह सुन कर तनु भी हंसे बगैर नहीं रह पाई.

अंबर के जूते मिट्टी से सन गए थे. उस ने पौलिश वाले बच्चे से जूते पौलिश करवाए, तब तक नारियल वाला भी आ चुका था.

‘‘आप ने देशविदेश में कहां की सैर की है,’’ तनु ने पूछा.

अंबर के पास जवाबहाजिर था, ‘‘यह पूछिए कहां नहीं गया, नौकरी ही ऐसी है पूरा एशिया और यूरोप का कुछ हिस्सा मेरे पास है… आनाजाना लगा ही रहता है…’’

ये भी पढ़ें- प्रसाद: रधिया के साथ तांत्रिक ने क्या किया?

‘‘क्या फर्क लगता है आप को अपने देश और परदेश में?’’

‘‘इस का क्या जवाब दूं, सभी जानते हैं, हम हिंदुस्तानी कानून तोड़ने में विश्वास करते हैं, नियम न मानना हमारे लिए फख्र की बात है… वहां के तो जानवर भी कायदेकानून की हद से बाहर नहीं जाते.’’

‘‘फिर क्या होगा अपने देश का?’’

‘‘फिलहाल तो यह सोचिए हमारा क्या होगा, आसमान पर बादल छा रहे हैं और मेरे 10 गिनने तक बरसात हमें अपने आगोश में ले लेगी.’’

‘घर तो जाना जरूरी है. मेरी दूसरी शिफ्ट भी है,’ तनु मन ही मन बुदबुदाई और फिर ऊंची आवाज में बोली, ‘‘चलते हैं और अगर भीग भी गए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता, मुझे बरसात में भीगना पसंद है.’’

‘‘मुझे भी,’’ अंबर ने मोटरसाइकिल स्टार्ट करते हुए कहा, ‘‘मगर यों भीगने से पहले थोड़ा इंतजार करना अच्छा नहीं रहेगा? चलिए रेस्तरां में 1-1 कप कौफी हो जाए, यह मेरा रोज का सिलसिला है…’’

तनु ने मुसकरा कर हामी भर दी. अगले चंद ही मिनटों में दोनों रेस्तरां में थे. अंबर ने ऊंची आवाज में वेटर को आवाज दी और जल्दी से 2 कप कौफी लाने का और्डर दिया. कौफी खत्म कर के अंबर ने एक बड़ा नोट बतौर टिप वेटर को दिया और दोनों बाहर आ गए. बारिश रुकने के बजाय और तेज हो चुकी थी.

पूरे रास्ते तेज बरसात में भीगते हुए तनु को बहुत आनंद आ रहा था. घर पहुंचतेपहुंचते दोनों पूरी तरह भीग चुके थे. अंबर के मातापिता मानो उन का इंतजार ही कर रहे थे, उन के आते ही औपचारिक बातचीत कर के सभी वहां से चल पड़े.

‘‘कैसा लगा लड़का?’’ भाभी ने उतावलेपन से पूछा तो तनु ने भी स्पष्ट कर दिया, ‘‘भाभी दूसरे लड़के को मना ही कर दो, कह दो मेरी तबीयत ठीक नहीं है. मुझे अंबर पसंद है…’’

‘‘तनु, अब अगर वे आ ही रहे हैं तो आने दो. कुछ समय गुजार कर उन्हें रुखसत कर देना… कम से कम हमारी बात रह जाएगी.’’

‘‘लेकिन भाभी जब मुझे अंबर पसंद है, तो इस स्वयंवर की क्या जरूरत है?’’

ठीक 4 बजे एक लंबीचौड़ी गाड़ी आ कर रुकी. गाड़ी में से एक संभ्रांत उम्रदराज जोड़ा और एक नवयुवक उतरा. पूरे परिवार ने बड़े ही सम्मान से उन का स्वागत किया.

तनु ने एक नजर लड़के पर डाली और उस के मुंह से अनायास ही निकल गया, ‘‘आप सूटबूट में तो ऐसे आए हैं मानो किसी इंटरव्यू में आए हो.’’

जयनाथजी ने इशारे से तनु को हद में रहने को कहा.

जवाब में युवक ने एक ठहाका लगाया और फिर बिना ?िझके कहा, ‘‘आप सही कह रही हैं. एक तरह से मैं एक इंटरव्यू से दूसरे इंटरव्यू में आया हूं… दरअसल, हम यहां के कामा होटल को खरीदने का मन बना रहे हैं. अभी उन के निदेशकों से मीटिंग थी, जो किसी इंटरव्यू से कम नहीं थी और यह भी किसी इंटरव्यू से कम नहीं है…’’

ये भी पढ़ें- तुम कैसी हो: क्यों आशा को अपने पति से शिकायत थी?

तनु इधरउधर की औपचारिक बातें करने के बाद मुद्दे पर आ गई. बोली, ‘‘अगर आप लोग इजाजत दें तो मैं और आकाश थोड़ा समय घर से बाहर…’’

‘‘हां जरूर,’’ लगभग सब ने एकसाथ ही कहा.

आकाश ने ड्राइवर से चाबी ली और तनु के लिए गाड़ी का दरवाजा खोल कर बैठने का आग्रह किया. तनु की फरमाइश पर गाड़ी ने एक बार फिर गेटवे औफ इंडिया का रुख किया.

‘‘यहां से एक शौर्टकट है. आप चाहें तो मुड़ सकते हैं 15-20 मिनट बच जाएंगे.’’

‘‘तनुजी आप भूल रही हैं कि इधर नो ऐंट्री है,’’ आकाश ने कहा. फिर मानो उसे कुछ याद आया, ‘‘अगर आप बुरा न मानें तो मैं रास्ते में सिर्फ 10 मिनट के लिए होटल कामा में रुक जाऊं… वहां के निर्देशकों का मैसेज आया है. वे मुझ से मिलना चाहते हैं.’’

तनु ने अनमने मन से हां कर दी. आकाश ने तनु को कौफी शौप में बैठ कर वेटर को आवाज दे कर कौफी और चिप्स का और्डर दिया और स्वयं पुन: माफी मांग कर बोर्डरूम की तरफ चला गया.

10 मिनट के बाद जब आकाश आया तो उस के चेहरे पर खुशी और विजय के भाव थे, ‘‘मेरा पहला इंटरव्यू कामयाब हुआ. यहां की डील फाइनल हो गई है… तनुजी आप हमारे लिए शुभ साबित हुईं…’’

ये भी पढ़ें- चाहत: क्या शोभा के सपने पूरे हुए?

Crime- डर्टी फिल्मो का ‘राज’: राज कुंद्रा पोनोग्राफी केस- भाग 2

यही वजह रही कि कई बार पूछताछ के लिए बुलाने के बाद जब 19 जुलाई, 2021 को उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया तो क्राइम ब्रांच ने पर्याप्त सबूत होने के कारण राज कुंद्रा को गिरफ्तार कर लिया.

मुंबई क्राइम ब्रांच राज कुंद्रा पर बिना पुख्ता सबूत के हाथ नहीं डालना चाहती थी. इसलिए क्राइम ब्रांच ने राज कुंद्रा के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद पूरे मामलें की कडि़यों को एक दूसरे से जोड़ना शुरू किया.

जिन लोगों के नाम सामने आते रहे उन के खिलाफ साक्ष्य एकत्र कर के पुलिस बारीबारी से उन्हें गिरफ्तार करती रही. ये साफ हो चुका था कि अश्लील फिल्मों का ये रैकेट एक पोर्न फिल्म प्रोडक्शन कंपनी की आड़ में चलाया जा रहा था. जहां फिल्मों में ब्रेक देने के बहाने युवा और जरूरतमंद लड़कियों के अश्लील वीडियो बनाए जाते थे.

क्राइम ब्रांच इस केस में 2 अभिनेता, एक लाइटमैन और 2 महिला फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर, ग्राफिक डिजाइनर समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी थी.

लेकिन इस मामले में उमेश कामत नाम के एक शख्स की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच के पास पहली बार ऐसे साक्ष्य हाथ लगे, जिस से राज कुंद्रा पर हाथ डाला जा सकता था.

ये भी पढ़ें- Satyakatha: रिश्तों का कत्ल

दरअसल, उमेश कामत यूके बेस्ड कंपनी केनरिन प्रोडक्शन हाउस का भारत में प्रतिनिधि था. उमेश कामत भारत में एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ के साथ मिल कर अश्लील फिल्में बनाता था.

इन पोर्न फिल्मों की शूटिंग के बाद तैयार किए गए वीडियो भारतीय एजेंसियों से बचने के लिए एक एप्लिकेशन के जरिए यूके में केनरिन प्रोडक्शन हाउस भेजे जाते थे.

एडिटिंग के बाद पोर्न फिल्मों को हौट शौट एप्लिकेशन पर अपलोड किया जाता था. यूके में पोर्न फिल्मों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, इसलिए ये काम यूके से किया जाता था.

उमेश की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच की पड़ताल और तेज हो गई. राज कुंद्रा से कई बार पूछताछ की गई. क्राइम ब्रांच की टीम पोर्न फिल्में बनाने वाले इस गैंग से राज कुंद्रा के सबंधों के सबूत जुटाने का भी काम करती रही.

उमेश कामत से पूछताछ में पता चला कि वह राज कुंद्रा के यूके में रहने वाले बहनोई प्रदीप बख्शी के साथ काम करता है. प्रदीप बख्शी यूके बेस्ड कंपनी केनरिन प्रोडक्शन हाउस का डायरेक्टर है.

केनरिन लिमिटेड़ कंपनी 16 साल से वजूद में है. इस में केवल एक एक्टिव डायरेक्टर है, वो हैं प्रदीप बख्शी. उन्हें पहली नवंबर 2008 को इस फर्म के डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था. इस कंपनी में 10 से भी कम कर्मचारी हैं और इस कंपनी का टर्नओवर 2 मिलियन पाउंड है.

ये फर्म वीडियो प्रोडक्शन एक्टिविटीज और टेलिविजन प्रोग्रामिंग से जुड़ी थी. उमेश कामत से पता चला कि राज कुंद्रा इस कंपनी में प्रदीप बख्शी के साथ अप्रत्यक्ष तौर पर बिजनैस पार्टनर और निवेशक है.

उमेश कामत ने क्राइम ब्रांच को बताया कि केनरिन प्रोडक्शन हाउस भारत में मौजूद अलगअलग एजेंटों के जरिए पोर्नोग्राफी और पोर्नोग्राफी फंडिंग का भी बिजनैस करता था.

एडवांस पेमेंट मिलने के बाद गहना और कामत अश्लील फिल्में बनाने का काम करते थे और फिर ऐसे कंटेंट को कैनरिन प्रोडक्शन हाउस को भेजते थे.

ये भी पढ़ेंSatyakatha: रिश्तों का कत्ल- भाग 1

इसी बीच जांच के दौरान क्राइम ब्रांच को एक वाट्सऐप ग्रुप के बारे में भी पता चला. उस वाट्सऐप ग्रुप में पोर्न फिल्मों से जुड़े पूरे बिजनैस को ले कर चर्चा होती थी. उस वाट्सऐप ग्रुप का नाम ‘एच अकाउंट’ था, जिस में राज कुंद्रा समेत कुल 5 लोग शामिल थे.

इस ग्रुप का एडमिन भी राज कुंद्रा ही था. ग्रुप के सभी लोग पोर्नोग्राफिक कंटेंट बनाने के इस बिजनैस में शामिल थे.

जो वाट्सऐप चैट पुलिस को मिली उस में राज कुंद्रा इस बिजनैस की मार्केटिंग, सेल्स और मौडल्स की पेमेंट से जुड़े मसलों पर बात कर रहा था.

साथ ही किस तरह रेवेन्यू पर फोकस किया जाए, मौडल को कैसे पेमेंट दी गई है और किस तरह बिजनैस रेवेन्यू को बढ़ाया जाए. यही चैट होता था.

पुलिस की साइबर सेल राज कुंद्रा के उस ऐप का भी पता लगा चुकी थी, जिस पर पोर्न फिल्में अपलोड की जाती थी. ‘हौट हिट मूवी’ नाम के इस ऐप पर मूवी देखने वाले को ऐप डाउनलोड कर 200 रुपए का पेमेंट करना होता है.

कुल मिला कर पुलिस के सामने जब यह साफ हो गया कि मुंबई और इस के उपनगरों में पोर्न फिल्म बनाने का जो कारोबार चल रहा है, उस में राज कुंद्रा प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा है, तब 19 जुलाई की रात 9 बजे क्राइम ब्रांच ने पूछताछ के लिए उसे बुलाया. कुछ देर पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

हालांकि राज कुंद्रा ने किसी भी ऐप और पोर्नोग्राफी फिल्मों के रैकेट से अपना संबध होने से साफ इंकार कर दिया. उस ने कहा कि वह सिर्फ इरोटिक फिल्में बनाते हैं. लेकिन पुलिस का दावा है कि कुंद्रा ही अश्लील फिल्मों के कारोबार का मास्टरमाइंड था.

कुंद्रा को गिरफ्तार कर उसे 7 दिन की रिमांड पर लिया. इस दौरान पुलिस ने कुंद्रा के औफिस पर छापेमारी की तो वहां छिपा कर रखी गई 51 आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुईं.

गिरफ्तारी के बाद ही पुलिस ने राज कुंद्रा के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया. जिसे साक्ष्य एकत्र करने के लिए फोरैंसिक लैब भेजा गया. इस के अलावा पुलिस ने कई ऐसे सबूत एकत्र किए जाने का दावा किया है, जिस के बाद जल्द ही इस केस में गहना वशिष्ठ की गिरफ्तारी हो सकती है.

चूंकि ब्रिटेन में पोर्नोग्राफी के खिलाफ कोई कानून नहीं है, इसलिए पुलिस यूके बेस्ड कंपनी केनरिन प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ काररवाई को ले कर कानूनी राय ले रही है.

पुलिस का कहना है कि जिस ‘हौट हिट मूवी’ ऐप पर पोर्न फिल्में अपलोड की जाती थीं, उसे मेंटेन करने के लिए प्रतिकेश और ईश्वर नाम के 2 कर्मचारियों को विआन इंडस्ट्रीज लिमिटेड में पेरोल पर रखा था.

केनरिन कंपनी के ‘हौटशौट’ ऐप को मैनेज और मेंटेन करने के लिए ‘विआन इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ यानी राज की कंपनी हर महीने 3-4 लाख रुपए चार्ज करती थी. जांच में सामने आया है कि इस ऐप के जरिए राज कुंद्रा को एक दिन में कई बार 10 लाख से ज्यादा की कमाई भी होती थी.

लेकिन जो राज कुंद्रा आज केवल पोर्न फिल्मों के बिजनैस से 10 लाख रुपए प्रतिदिन कमाता है और अपने दूसरे कारोबार से 2700 करोड़ की संपत्ति का मालिक बन गया है, एक समय था जब वह दुबई से, नेपाल से पश्मीना शाल ला कर लंदन में बेचता था.

राज कुंद्रा का जीवन भी एक फिल्मी कहानी की तरह है. राज कुंद्रा का असली नाम है रिपुसूदन कुंद्रा. कुंद्रा के पिता बाल कृष्ण कुंद्रा लुधियाना के रहने वाले थे. लेकिन शादी के बाद वह युवावस्था में ही पत्नी को ले कर लंदन चले गए.

लंदन में पहले उन्होंने एक कौटन मिल में नौकरी की. उस के बाद वह बस में कंडक्टर के तौर पर नौकरी करने लगे. बाल कृष्ण न तो ज्यादा पढ़ेलिखे थे, न धंधा शुरू करने के लिए उन के पास बड़ी पूंजी थी.

अगले भाग में पढ़ें- 2005 में राज कुंद्रा की शादी कविता नाम की युवती से हुई थी

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें