सत्य असत्य- भाग 3: क्या था कर्ण का असत्य

उस के समीप जा कर मैं ने उस का हाथ पकड़ा, ‘‘पिताजी की आखिरी तनख्वाह इस तरह उड़ा दी.’’

‘‘मेरे पिताजी कहीं नहीं गए. वे यहीं तो हैं,’’ उस ने मेरे पिता की ओर इशारा किया, ‘‘इस घर में मुझे सब मिल गया है. आज जब मैं देर से आई तो इन्होंने मुझे बहुत डांटा. मेरी नौकरी की बात सुन रोए भी और हंसे भी. पिताजी होते तो वे भी ऐसा ही करते न.’’

‘‘हां,’’ स्नेह से मैं ने उस का माथा चूम लिया.

‘‘बहुत भूख लगी है, दोपहर को क्या बनाया था?’’ निशा के प्रश्न पर मैं कुछ कहती, इस से पहले ही पिताजी बोल पड़े, ‘‘आज तुम नहीं थीं तो कुछ नहीं बना, सब भूखे रहे. जाओ, देखो, रसोई में. देखोदेखो जा कर.’’

निशा रसोई की तरफ लपकी. जब वहां कुछ नहीं मिला तो हड़बड़ाई सी बाहर चली आई, ‘‘क्या आज सचमुच सभी भूखे रहे? मेरी वजह से इतने परेशान रहे?’’

‘‘जाओ, अब दोनों मिल कर कुछ बना लो और इस नालायक को भी खिलाओ. इस ने भी कुछ नहीं खाया.’’

निशा ने गहरी नजरों से भैया की ओर देखा.

उस रात हम चारों ही सोच में डूबे थे. खाने की मेज पर एक वही थी, जो चहक रही थी.

‘‘बेटे, तुम्हारे उपहार हमें बहुत पसंद आए,’’ सहसा पिताजी बोले, ‘‘परंतु हम बड़े, हैं न. बच्ची से इतना सब कैसे ले लें. बदले में कुछ दे दें, तभी हमारा मन शांत होगा न.’’

‘‘जी, यह घर मेरा ही तो है. आप सब मेरे ही तो हैं.’’

‘‘वह तो सच है बेटी, फिर भी तुम्हें कुछ देना चाहते हैं.’’

‘‘मैं सिरआंखों पर लूंगी.’’

‘‘मैं चाहता हूं, तुम्हारी शादी हो जाए. मैं ने विजय के पिता से बात कर ली है. वह अच्छा लड़का है.’’

‘‘जी,’’ निशा ने गरदन झुका ली.

हम सब हैरानी से पिताजी की ओर देख रहे थे कि तभी वे बोल उठे, ‘‘झूठ नहीं कहूंगा बेटी, सोचा था तुम्हें अपनी बहू बनाऊंगा, परंतु मेरा बेटा तुम्हारे लायक नहीं है. मैं हीरे को पत्थर से नहीं जोड़ सकता. परंतु कन्यादान कर के तुम्हें विदा जरूर करना चाहता हूं. मेरी बेटी बनोगी न?’’

‘‘जी,’’ निशा का स्वर रुंध गया.

‘‘बस, अब आराम से खाना खाओ और सो जाओ,’’ मुंह पोंछ पिताजी उठ गए और पीछे रह गई प्लेट पर चम्मच चलने की आवाज.

उस के बाद कई दिन बीत गए. भैया की भूल की वजह से मां और पिताजी ने उन से बात करना लगभग छोड़ रखा था. निशा विद्यालय जाने लगी थी. शाम के समय हम सब चाय पीने साथसाथ बैठते.

एक शाम पिताजी ने फिर से सब को चौंका दिया, ‘‘निशा, कल विजय आने वाला है. आज मैं उस से मिला था. तुम कल जल्दी आ जाना.’’

तभी भैया बोल उठे, ‘‘विजय आज मुझ से भी मिला था, लेकिन उस ने तो नहीं बताया कि आप उस से मिले थे?’’

‘‘तो इस में मैं क्या करूं?’’ पिताजी का स्वर रूखा था, ‘‘मैं पिछले कई दिनों से उस से मिल रहा हूं. निशा के विषय में उस से पूरी बात की है. उस ने तुम से क्यों बात नहीं की, यह तुम जानो.’’

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‘फिर भी उसे मुझ से बात तो करनी चाहिए थी, मुझे भी तो वह हर रोज मिलता है.’’

‘‘चलो, उस ने नहीं की, अब तुम्हीं कर लेना. और अपने साथ ही लेते आना.’’

‘‘मैं क्यों उस से बात करूं? हमारा बचपन का साथ है, क्या उसे अपनी शादी की बात मुझ से नहीं करनी चाहिए थी. क्या उस का यह फर्ज नहीं था?’’

‘‘फर्जों की दुहाई मत दो कर्ण, फर्ज तो उस से पूछने का तुम्हारा भी था. निशा कोई पराई नहीं है. कम से कम तुम भी तो आगे बढ़ते.’’

‘‘लेकिन पिताजी, उस ने एक  बार भी निशा का नाम नहीं लिया, दोस्ती में इतना परदा तो नहीं होता.’’

दोस्ती के अर्थ जानते भी हो, जो इस की दुहाई देने लगे हो. फर्ज और दोस्ती बहुत गहरे शब्द हैं, जिन का तुम ने अभी मतलब ही नहीं समझा. सदा अपना ही सुख देखते हो, तुम्हें क्या करना चाहिए, बस, यही सोचते हो. तुम्हें क्या नहीं मिला, हमेशा उस का रोना रोते हो. यह नहीं सोचते कि तुम्हें क्या करना चाहिए था. उस ने बात नहीं की, तो तुम ही पूछ सकते थे. अपनेआप को इतना ज्यादा महत्त्व देना बंद करो.’’

उसी रात मैं ने आखिरी प्रयास किया. निशा से पहली बार पूछा, ‘‘क्या तुम इस रिश्ते से खुश हो?’’

परंतु कुछ न बोल वह खामोश रही.

‘‘निशा, बोलो, क्या इस रिश्ते से तुम खुश हो?’’

उस की चुप्पी से मैं परेशान हो गई.

‘‘भैया पसंद नहीं हैं क्या? मैं तो यही चाहती हूं कि तुम यहीं रहो, इसी घर में. कहीं मत जाओ. भैया तुम से बहुतबहुत प्यार करते हैं,’’ कहते हुए मैं ने उस का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा. फिर जल्दी से बत्ती जलाई. उस की सूजी आंखों में आंसू भरे हुए थे.

सुबह पिताजी के कमरे से भैया की आवाज आई, ‘‘निशा इसी घर में रहेगी.’’

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‘‘क्या उस की शादी नहीं होने दोगे? विजय का नाम तुम ने ही सुझाया था न, आज क्या हो गया?’’

‘‘मैं…मैं तब बड़ी उलझन में था, आत्मग्लानि ने मुझे तोड़ रखा था. मैं खुद को उस के काबिल नहीं पा रहा था.’’

‘‘काबिल तो तुम आज भी नहीं हो. जिस से जीवनभर का नाता जोड़ना चाहते हो, क्या उस के प्रति ईमानदार हो? तुम ने उस का कितना बड़ा नुकसान किया है, क्या उसे यह बात बता सकते हो?’’

अब भैया खामोश हो गए.

गोवा फिल्म फेस्टिवल में यूपी की फिल्म पॉलिसी की सराहना

गोवा में आयोजित इन्टेरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आफ इन्डिया-2021 में यूपी की फिल्म पॉलिसी को खूब सराहना मिल रही है. यहां यूपी के फिल्म बन्धु का स्टॉल भी लगाया गया है जिसका उदघाटन मशहूर फिल्म निर्माता, निर्देशक रणधीर कपूर और राहुल रावेल ने किया. वहीं फिल्म बन्धु के अध्यक्ष नवनीत सहगल और सचिव शिशिर के मार्गदर्शन में एक डेलीगेशन प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुंचा है.

फिल्म बन्धु के स्टॉल का उदघाटन करते हुए मशहूर फिल्म निर्देशक रणधीर कपूर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की और कहा कि उनकी दमदार फिल्म नीति की वजह से ही समस्त निर्माता, निर्देशक उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी हो रही है कि आज गोवा में आयोजित फिल्म समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार का फिल्म बन्धु स्टाल का उद्घाटन उनके द्वारा हो रहा है. फिल्म निर्देशक राहुल रावेल ने यूपी को एक अद्भुत स्थान बताया. उन्होंने कहा कि यहां पर ज्यादा से ज्यादा फिल्में बननी चाहिये. उन्होंने यूपी सरकार के कार्यों तथा फिल्म नीति की खूब सराहना की. इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित निर्माता, निर्देशक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

दुनिया भर से आए निर्माता, निर्देशकों को एलडीडी पर दिखाई जा रहीं यूपी की शूटिंग लोकेशन

गोवा फिल्म फेस्टिवल में लगाए गए फिल्म बन्धु के स्टॉल पर यूपी सरकार की फिल्म नीतियों का प्रचार-प्रसार बुकलेट, फोल्डर देकर और एलईडी से किया जा रहा है. पूरी दुनिया से आये कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, टेकनिकल विशेषज्ञों से सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन, नीति और यूपी की खूबसूरत फिल्म शूटिंग लोकेशन के बारे में चर्चा की जा रही है और प्रसारण किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश फिल्म बन्धु के उप निदेशक दिनेश कुमार सहगल ने निर्देशक रणधीर कपूर और राहुल रावेल से मुलाकात कर उनको उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण करने का न्योता भी दिया. बता दें कि गोवा फिल्म फेस्टिवल में यूपी की फिल्म पॉलिसी पर मशहूर फिल्म निदेशक करन जौहर तो इतने फिदा हो गये कि उनसे यह कहे बिना नहीं रहा गया कि यूपी के लखनऊ और वाराणसी में फिल्म शूट करो तो कहानियां अपने आप उभर जाती हैं.

Bigg Boss फेम Akshara Singh का बोल्ड अवतार देखकर फैंस ने किया ये कमेंट

बिग बॉस फेम अक्षरा सिंह (Akshara Singh) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह अपने फोटोज और वीडियो के कारण सुर्खियों में छायी रहती है.हाल ही में एक्ट्रेस ने बोल्ड अवतार में एक फोटो शेयर की है. जिसमें वह काफी हॉट दिखाई दे रही हैं. अक्षरा सिंह की ये फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है.

इस फोटो में अक्षरा सिंह ब्लैक लॉन्ग कोट में दिखाई दे रही हैं. अक्षरा सिंह की ये फोटो बड़ी तेजी से वायरल हो रही है. अक्षरा सिंह ने इस फोटोज को शेयर करते हुए कैप्शन दिया है,  तुम पर्याप्त हो. इस फोटो में अक्षरा सिंह की अदाएं फैंस को अपना दीवाना बना रही है.

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कई फैंस ने अक्षरा सिंह के फोटो पर कमेंट किया है. एक यूजर ने कमेंट में लिखा,  सर्दियों में क्यों गर्मी बढ़ा रही होतो वहीं दूसरे यूजर ने अक्षरा सिंह को ट्रोल करते हुए लिखा,  वैसे तो आप बड़ी संस्कारी बनती हो. इस तरह का फोटोशूट संस्कार है क्या?

 

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बता दें कि अक्षरा सिंह कई भोजपुरी फिल्मों और म्यूजिक वीडियोज में काम किया है. अब खबर है कि अक्षरा सिंह जल्द ही पंजाबी म्यूजिक वीडियोज में काम करने वाली हैं. वर्कफ्रंट की बात करें तो अक्षरा सिंह आने वाले दिनों में निरहुआ के साथ ‘मजनुआ’, ‘जान लेबुका’  और रितेश पांडे और कृष्ण कुमार के साथ ‘डोली’  जैसी कई फिल्मों में दिखाई देंगी.

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Balika Vadhu 2: आनंदी और जिगर की होगी शादी तो आनंद करेगा ये काम

कलर्स टीवी का सीरियल बालिका वधू 2 (Balika Vadhu 2) को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. शो में नए ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. खबरों के अनुसार जल्द ही  बालिका वधू 2 में लीप आने वाला है. जिससे शो में नई एंट्री होगी और कहानी और भी दिलचस्प होगी.

शो के लेटेस्ट एपिसोड में दिखाया गया आनंदी की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं. शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि आनंदी की जिंदगी में एक बड़ा तूफान आएगा. जिससे उसकी जिंदगी बदल जाएगी.

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शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि आनंदी काफी खुश होगी लेकिन जैसे ही आनंदी और जिगर की शादी का ऐलान किया जाएगा उसकी खुशियों बिखर जाएंगी.

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आनंदी जिगर के साथ अपनी शादी की खबर सुनकर परेशान हो जाएगी. वह जिगर के साथ शादी नहीं करना चाहती है क्योंकि उसे जिगर बिल्कुल पसंद नहीं है.

 

शो में दिखाया जाएगा कि भले ही आनंदी की शादी जिगर के साथ तय हो गई हो लेकिन आनंदी को बचाने के लिए आनंद जरूर आएगा. आनंद आनंदी का सबसे अच्छा दोस्त है.

 

आनंद को देखकर आनंदी काफी खुश होगी. उसकी सातवें आसमान पर होगी. लेकिन क्या आनंद, आनंदी और जिगर की शादी को रोक पाएगा. यह तो शो में ही पता चलेगा. इस शो में और भी ट्विस्ट देखने को मिलेगा.

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Anupamaa: काव्या ने पारितोष के भरे कान, क्या टूटेगा किंजल के साथ रिश्ता

स्टार प्लस का पॉपुलर सीरियल अनुपमा में इन दिनों हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है, जिससे दर्शकों का एंटेरटेनमेंट का जबरदस्त तड़का मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि वनराज ने बा से कहा कि वह घर के मामलों में नहीं पड़ना चाहता है अब वह अपने जीवन में कुछ करना चाहता है. उसे पूरी दुनिया को दिखाना है कि वनराज शाह क्या चीज है. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में आप देखेंगे कि अनुपमा, वनराज और बाकी घरवाले बा और बापूजी की 50वीं सालगिरह के मौके पर उनकी दोबारा शादी कराने का प्लान करेंगे. तो दूसरी तरफ काव्या वनराज से कहेगी कि मुझसे पूछे बिना घर के सारे फैसले लिए जाते हैं.

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तो वहीं वनराज काव्या को धमकी देता है, कहता है कि अगर बा बापूजी की खुशियों में किसी ने दखल दी तो उससे बुरा कोई नहीं होगा.

 

दूसरी तरफ काव्या वनराज से लड़कर पारितोष और किंजल के बीच दरार डालने की कोशिश करेगी. शो में आप देखेंगे कि बा-बापूजी की एनिवर्सरी प्लानिंग के दौरान सभी को काम बांटा जाएगा.  पारितोष के पास कैटरिंग का काम आता हैतो वहीं, किंजल डेकोरेशन देखेंगी. पारितोष को गुस्सा आता है कि किंजल ने अलग काम चुना.

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तो इसी बात पर पर किंजल और पारितोष की बहस होती है. मौका देखकर काव्या पारितोष को किंजल और अनुपमा के खिलाफ भड़काती है. शो में दिखाया जाएगा कि बापूजी और बा की शादी की तैयारी करते हुए अनुपमा को अपनी शादी का लहंगा मिलता है. अनुपमा को फिर से काव्या और वनराज का रोमांस याद आने लगता है. और वह पुराने दिनों के याद करके दुखी होने लगती है.

तो दूसरी तरफ काव्या घर की बातों को लेकर वनराज से लड़ती है और वह भड़क जाता है. ऐसे में वह कहता है कि अगर उसे परेशानी है तो वह अपने मां-बापूजी को लेकर किसी दूसरी जगह चला जाएगा.

कम उम्र में बढ़ती हार्ट की बीमारी

डा. समोंजोय मुखर्जी

वर्ष 2020 में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हार्टअटैक से मरने वालों की संख्या 2014 से लगातार बढ़ रही है. परंपरागत रूप से हृदय की बीमारियों को ‘पुरुषों की बीमारी’ का पर्याय माना जाता रहा है. हालांकि, अब नवीनतम रिपोर्ट में बदलाव देखा जा रहा है.

वैसे तो महिलाओं को कार्डियोवैस्कुलर बीमारी पुरुषों के मुकाबले 7-10 साल बाद होती है पर महिलाओं के बीच यह मौत का एक अहम कारण बना हुआ है. इस विश्वास के कारण कि महिलाएं कार्डियोवैस्कुलर बीमारी (सीएडी) से ‘सुरक्षित’ हैं, महिलाओं में हृदय की बीमारी के जोखिम को अकसर कम कर के आंका जाता है. महिलाओं में हार्टअटैक के संकेत और लक्षण अस्पष्ट हो सकते हैं और इस का पता उतनी आसानी से नहीं चलता है क्योंकि सीने में तेज दर्द का संबंध अकसर हार्टअटैक से जुड़ा होता है.

कुछ मिनट से ज्यादा देर तक रहने वाला सीने में एक खास किस्म का दर्द, दबाव या असुविधा महिलाओं में हार्टअटैक का आम संकेत है. हालांकि, खासतौर से महिलाओं में सीने का दर्द अमूमन बहुत गंभीर नहीं होता है और यह सब से ज्यादा दिखाई देने वाला लक्षण भी नहीं होता है. महिलाएं इस का वर्णन खासतौर से दबाव या सख्ती के रूप में करती हैं. यह भी संभव है कि सीने में दर्द के बिना मरीज हार्टअटैक का शिकार हो जाए.

महिलाओं में अकसर ये लक्षण तब सामने आते हैं जब वे आराम कर रही हों या सो रही हों और पुरुषों के मुकाबले यह कम होता है. महिलाओं में भावनात्मक तनाव भी हार्टअटैक के लक्षण की शुरूआत में भूमिका अदा कर सकता है.

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हार्टअटैक के ये कुछ संकेत हैं जिन पर सभी को नजर रखनी चाहिए.

बेहद थकान या सीने में भारीपन महसूस करना.

सांस फूलना या अत्यधिक पसीना आना.

गरदन, पीठ, कमर, जबड़ों, बांह या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द.

चक्कर आना या उलटी होने का एहसास

कार्डियैक जोखिम के इन लक्षणों में बहुतों को नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन सब को नहीं. सामान्य जीवनशैली में बदलाव ला कर कुछ जोखिम घटकों का प्रबंध किया जा सकता है लेकिन कुछ घटक, जैसे आयु, लिंग, परिवार का इतिहास, नस्ल और जातीयता जैसे कुछ कारणों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है. अनुमान है कि जीवनशैली में बदलाव से हार्टअटैक और स्ट्रोक समेत कार्डियैक बीमारियों के 80 फीसदी मामले रोके जा सकते हैं.

कई ऐसे कारण हैं जो महिलाओं में हृदय की बीमारी का जोखिम बढ़ाते हैं-

महिलाओं में ऐसे जोखिम हैं जो पुरुषों में नहीं हैं : उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ ब्लडशुगर, ज्यादा कोलैस्ट्रौल, धूम्रपान और मोटापा हृदय की बीमारी के लिए खास जोखिम हैं जो महिलाओं में भी पुरुषों की तरह मौजूद होते हैं. हृदय की बीमारी का परिवार का इतिहास भी महिलाओं पर पुरुषों की ही तरह प्रभाव छोड़ सकता है. हालांकि कुछ बीमारियां, जैसे एंडोमेट्रियोसिस, पौलिसिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी), डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जो गर्भावस्था के दौरान विकसित होता है आदि कौरोनरी आर्टरी डिजीज का जोखिम बढ़ा देती हैं. यह हार्टअटैक के प्रमुख कारणों में एक है. 40 साल से कम की महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस से कौरोनरी आर्टरी डिजीज का जोखिम 400 फीसदी तक बढ़ जाता है.

देर से गर्भधारण करना कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का जोखिम बढ़ा कर महिलाओं और उन के बच्चे को प्रभावित कर सकता है : देर से मां बनने का असर पैदा होने वाले बच्चे पर बाद में पड़ सकता है. इस से देर से गर्भधारण के कारण हो सकने वाली समस्याओं में प्लेसेन्टल एबरप्शन, प्रीमैच्योर रप्चर औफ मेमब्रेन, कोरियोएम्नियोनाइटिस यानी भ्रूण को ढकने वाली झिल्लियों में सूजन, प्रसवाक्षेप और हेलेप सिंड्रोम जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

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महिलाओं में सीएडी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है : हृदय की मुख्य धमनियों के संकरा होने या उन में बाधा का पता लगाने का परंपरागत तरीका एक्सरे मूवी (एंजियोग्राम) है जो कार्डियैक कैथेराइजेशन के दौरान लिया जाता है. हालांकि, महिलाओं में सीएडी अकसर छोटी धमनियों को प्रभावित करता है. एंजियोग्राफी में इस का पता लगाना मुश्किल होता है. इसलिए, यह सुझाव दिया जाता है कि अगर महिला को एंजियोग्राफी के बाद ‘औल क्लीयर’ का संकेत मिले पर लक्षण बना रहे तो ऐसे कार्डियोलौजिस्ट के पास जाना चाहिए जो महिलाओं के मामले में सुविज्ञ हों.

महिलाओं पर हार्टअटैक पुरुषों के मुकाबले भारी पड़ता है : हार्टअटैक के बाद महिलाओं का प्रदर्शन पुरुषों के जैसा अच्छा नहीं होता है. उन्हें अकसर लंबे समय तक चिकित्सीय देखभाल और निगरानी की आवश्यकता होती है और अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही उन के निधन की आशंका ज्यादा होती है. इस का कारण उन जोखिम घटकों को माना जा सकता है जिन का उपचार नहीं किया गया या किया जाता है. इन में डायबिटीज या उच्च रक्तचाप आदि शामिल हैं. कभीकभी इस का कारण यह भी होता है कि वे परिवार को प्राथमिकता देती हैं और खुद की उपेक्षा करती हैं.

हार्टअटैक के बाद महिलाओं को हमेशा सही दवाइयां नहीं मिलती हैं : हार्टअटैक के बाद महिलाओं में खून का थक्का जमने की आशंका पुरुषों के मुकाबले ज्यादा होती है. यह दूसरे अटैक का कारण बन सकता है. अस्पष्ट कारणों से उन्हें खून का थक्का जमने से रोकने वाली दवा दिए जाने की संभावना कम है. यह महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले एक साल के अंदर हार्टअटैक आने की आशंका ज्यादा होने का कारण हो सकता है.

धूम्रपान और खाने वाली गर्भनिरोधक गोलियां स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं : दोनों का मेल घातक हो सकता है. धूम्रपान के बारे में जाना जाता है कि इस से धमनियां संकुचित हो जाती हैं. इस से खून के थक्के बनते हैं और कार्डियोवैस्कुलर समस्याएं होती हैं. दूसरी ओर, खाने वाली गर्भ निरोधक गोलियां शरीर के हार्मोन संतुलन को बदल देती हैं. इस से खून सामान्य के मुकाबले ज्यादा गाढ़ा होता है.

कुछ जोखिमों पर नियंत्रण संभव नहीं है लेकिन सही आदतों का पालन करना आप के हृदय के स्वास्थ्य के लिए काफी मददगार हो सकता है. कुछ उपाय जो हृदय की बीमारी और स्ट्रोक को कम करने में मददगार हो सकते हैं, ये हैं-

आरामतलब जीवनशैली से बचना.

नियमित शारीरिक गतिविधि और 25 से कम बीएमआई के साथ शरीर का स्वस्थ वजन रखना.

जीवनशैली में संशोधन कर के जैसे शारीरिक गतिविधियां बढ़ा कर और समय पर जानकारी प्राप्त कर के ब्लडप्रैशर ठीक रखना.

तनाव कम करने की कोशिश करना क्योंकि इस बात के पर्याप्त सुबूत हैं कि तनाव और हृदय पर इस के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

वसामुक्त, उच्च फाइबर वाला पौष्टिक भोजन करना तथा खराब ढंग से प्रसंस्कृत भोजन से बचना.

धूम्रपान से बचने की कोशिश और शराब का सेवन कम करना.

जीवनशैली में बदलाव के अलावा वार्षिक जांच करवाना हृदय को जानने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है. जो लोग उम्र के 20वें दशक के आखिर में और 30वें दशक में हैं उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए.

जैसेजैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज को रोकने से संबंधित ज्यादा सूचनाएं उपलब्ध हो रही हैं, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि महिलाएं भी पुरुषों के बराबर जोखिम में हैं और उन्हें रोकथाम के गंभीर उपाय करने चाहिए. हृदय की बीमारी और स्ट्रोक से बचने के साथसाथ चेतावनी के संकेतों को पहचानने के लिए हर महिला को अपने जोखिम घटक से वाकिफ होना चाहिए तथा जितनी जल्दी संभव हो, इलाज करवाना चाहिए. सांस फूलने, सीने में दर्द, अत्यधिक पसीना आना और चक्कर आने जैसे आम लक्षणों को नजरअंदाज न करें. अपने हृदय के लिए अच्छी आदतें अपनाने के लिए कोई भी समय बहुत देर नहीं है.

(लेखक मणिपाल अस्पताल, द्वारका, दिल्ली में कंसल्टैंट व सीनियर इंवैन्शनल कार्डियोलौजिस्ट हैं).

Crime: और एक बार फिर साबित हो गया “कानून के हाथ” लंबे होते हैं

आज आपको इस रिपोर्ट में हम एक ऐसे सनसनीखेज घटना बता रहे हैं जिसमें एक नारी ही नारी की दुश्मन बन गई एक मां ने अपनी नवजात बालिका की अपने ही हाथों से हत्या कर दी.

यह एक सर्वमान्य सिद्धांत माना गया है कि पूत कपूत हो सकता है मगर मां कभी कुमाता नहीं हो सकती.मां अपने बच्चों के साथ, उनके साथ अत्याचार, भेदभाव नहीं करती. मगर  आज  21 वीं शताब्दी के भारत में कुछ एक ऐसी घटनाएं घट जाती है जो इस धारणा को ध्वस्त कर देती हैं की एक नारी, एक मां अपनी औलाद को अपने ही हाथों से नहीं मारती. वह भी सिर्फ इसलिए कि वह एक लड़की है!

जी हां!! एक ऐसा ही दर्दनाक दुखद घटना क्रम आज हम आपको इस रिपोर्ट में बताने जा रहे हैं. किस किस तरह मां ने अपने पहले बच्चे को जो एक लड़की पैदा हुई थी को अपने ही हाथों से इस लिए मार डाला कि वह लड़का नहीं थी. समाज में लड़कों और लड़कियों के भेदभाव पर हमेशा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता रहा है और अब तो यह भी कहा जा रहा है कि लड़कियां लड़कों से कहीं ज्यादा काबिल, संवेदनशील, कर्तव्य परायण और अपने मां पिता को आगे चलकर के संरक्षण देने में योग्य साबित हुई है.

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इस सब के बावजूद एक मां ने जब उसे लड़की पैदा हुई तो उसकी हत्या के लिए आज के सबसे बड़े हथियार “गूगल” का इस्तेमाल किया और उससे पूछा कि हत्या का तरीका क्या हो सकता है?

मासूम  की दुखदाई मौत

उज्जैन,  मध्य प्रदेश में तीन माह की मासूम के हत्या के मामले में सनसनीखेज खुलासा पुलिस ने किया  है.  बच्ची की मां स्वाति ने पुलिस को बताया  कि वह बेटा चाहती थी! पिंकी के जन्म के बाद से ही उसे नफरत करने लगी थी.मानसिक रूप से अपने आप को उसकी हत्या के लिए तैयार करती रही.

पुलिस के मुताबिक अपनी ही बच्ची की हत्यारी स्वाति बहुत शातिर किस्म की औरत है. वह बार-बार बयान बदल रही है. वह पुलिस को लगातार गुमराह कर रही है. पुलिस यह रिपोर्ट लिखे जाने के समय तक उसके साथ पूछताछ कर रही थी और वह कभी उसको कभी कुछ कर रही थी, पड़ताल के बाद और भी तथ्य सामने आएंगे.

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हमारे संवाददाता को पुलिस अधिकारियों ने बताया

मासूम पिंकी परिवार की लाड़ली बेटी थी, मगर  उसकी मां स्वाति  उसे पसंद नहीं करती थी. वह लगातार उसकी उपेक्षा करती थी.उसके सभी काम भी परिवार के दूसरे सदस्य ही करते थे. दरअसल, स्वाति बेटा चाहती थी, लेकिन बेटी होने के बाद से ही वह परेशान रहने लगी थी. पुलिस अधिकारी आकाश भूरिया के मुताबिक पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं कि पिंकी को स्वाति ने ही मारा है. और सबूतों के आधार पर स्वाति को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है, लेकिन बहुत सारे तथ्य हम सार्वजनिक नहीं कर सकते. स्वाति से अर्पित की शादी दो साल पहले  2019 में हुई थी.

बच्ची की आसान हत्या कैसे होगी?

स्वाति इतना होने के बावजूद अपनी कोख से जन्म लेने वाली पिंकी की हत्या के लिए जो काम किया उसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे स्वाति ने पिंकी की हत्या के लिए गूगल में सर्च किया और यह जानना चाहा कि कैसे हत्या करती हो वह आसानी से बच सकती है इस हत्याकांड के बाद पुलिस अधिकारियों ने विवेचना की और स्वाति को अपराधी पाया है संपूर्ण कहानी कुछ इस तरह सामने आई है. दरअसल,

पति अर्पित ने 5 दिन पहले ही पत्नी स्वाति  को एक नया स्मार्टफोन  दिलाया था. मोबाइल हाथ में आते ही सबसे पहले स्वाति ने गूगल पर अकाउंट बनाया. इसके बाद अगले 3 दिन  इंटरनेट पर वह बच्ची को मारने की तरीके ही सर्च करती रही.

आखिरकार  उसने बच्ची को पानी की हौद में डुबोकर मार दिया. उसने कुछ ऐसे सवाल ऑनलाइन सर्च किए थे- जैसे, बच्ची को कैसे मारें, कैसे बच्चों को आसानी से मारा जा सकता है? ऐसा क्या करें कि मारने वाला पकड़ा न जाए? सबसे आसान मौत क्या हो सकती है? बच्चों को कैसे मारें कि उनके शरीर पर कोई चोट के निशान न हो? कैसे मारें कि पोस्टमार्टम में किसी पर शक न हो?

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जैसे अनेक सवाल स्वाति ने गूगल पर सर्च किए  और अंततः 20 मिनट में  पिंकी की हत्या पानी में डालकर कर दी. घटना के वक्त घर पर कोई नहीं था  दोपहर 1.20 से 1.40 बजे के दौरान घर में से लापता हुई थी. उस समय पति घर के नीचे दुकान पर था.उसके पिता कुछ समय पहले बाहर गए थे. घर में स्वाति और उसकी सास अनीता भटेवरा के अतिरिक्त कोई नहीं था.

कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं अपराधी बच नहीं सकता यहां भी यह सत्य सिद्ध हुआ.

जांच की गई तो आखिर स्वाति शंका के घेरे में आ गई.

अंततः पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश किया है जहां से उसे जेल भेज दिया गया है.

मेरी गर्लफ्रैंड को कोरोना हो गया है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी गर्लफ्रैंड और मेरे बीच सब ठीक चल रहा था. कोरोना लहर के दौरान उसे कोरोना हो गया. उस दौरान मिल नहीं सकते थे, इसलिए नहीं मिले. लेकिन फोन पर कौंटैक्ट बनाए हुए थे. एक महीने बाद वह ठीक हो गई. मैं ने मिलने की बात कही तो कहने लगी, ‘अभी नहीं, थोड़े दिनों बाद मिलेंगे.’ 2 महीने बाद मैं ने फिर मिलने के लिए कहा तो बात टालने लगी.

मैं ने अब कारण जानना चाहा कि वह ऐसा क्यों कर रही है तो उस ने बताया कि कोरोना के बाद उस के बाल तेजी से झड़ गए हैं. वह नहीं चाहती कि मैं उसे ऐसी हालत में देखूं. वह नहीं चाहती कि उस की ऐसी हालत देख मेरे दिल में उस के प्रति प्यार कम हो जाए.

तब मैं ने उसे समझाया कि मैं उस से प्यार करता हूं. बालों का क्या है, फिर आ जाएंगे,  बहुत ट्रीटमैंट मौजूद हैं. वह मेरी बात सुन कर खुश हो गई और अब जल्दी मुझ से मिलने की बात कही.

मैं ने उस से कह तो दिया लेकिन मैं खुद बेचैन हूं. मैं उसे ऐसी हालत में कैसे देखूंगा. मैं तो अपने मम्मीडैडी से हमारी शादी की बात करने वाला था. अब कैसे करूंगा उस की यह हालत देख कर. मन पर बहुत बोझ सा लग रहा है. क्या करूं? आप ही मुझे इस हालत से निकाल सकते हैं.

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जवाब

आप बेवजह ही परेशान हो रहे हैं. कोरोना के बाद कई साइड इफैक्ट्स देखने में आ रहे हैं.  उन में से एक महिलाओं में बाल झड़ना है. लेकिन डेढ़दो महीने के बाद बाल झड़ना बंद हो जाते हैं और नए बाल आना शुरू हो जाते हैं. आप की गलफ्रैंड के साथ भी ऐसा हो रहा है. इसलिए बालों को ले कर आप को घबराने की जरूरत नहीं, वे वापस आ जाएंगे. हां, पूरी तरह आने में सालभर लग सकता है.

मम्मीपापा से अभी शादी की बात मत कीजिए. जहां इतना इंतजार किया है, थोड़ा और सही. आप यह सोचिए कि गर्लफ्रैंड का इस मुसीबत के वक्त साथ दे कर आप उस की नजरों में कितना ऊपर उठ गए हैं. उस के दिल में आप के लिए प्यार कितना अधिक बढ़ गया होगा. आप की गर्लफ्रैंड अब जिंदगीभर आप का हाथ थामे रहेगी, क्या यह बात आप को छोटी लगती है. सच्चा प्यार करने वाला लाइफ पार्टनर मिलना बहुत बड़ी बात होती है.

यदि अभी आप उसे इस हालत में नहीं देखना चाहते तो अच्छा यह रहेगा कि आप उस से कहें कि अपने बालों का ट्रीटमैंट अच्छी तरह ले और जब वह खुद को आप से मिलने में अच्छा महसूस करे, तभी मिलें. तब तक फोन पर कौंटैक्ट बनाए रखें, चैटिंग करें. आप की गर्लफ्रैंड को भी अच्छा लगेगा और आप भी एक औक्वर्ड सिचुएशन से बच जाएंगे.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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सुलझती जिंदगियां- भाग 3: आखिर क्या हुआ था रागिनी के साथ?

‘‘अपने हाथ से एक पंछी निकलता देख वे बौखला उठे और तुम्हारे जाने के महीने भर बाद ही मुझे अपनी हवस का शिकार बना लिया. उस दिन मां ने मुझे पड़ोस में आंटी को राजमा दे कर आने को कहा. हमेशा की तरह कभी यह दे आ, कभी वह दे आ. मां पर तो अपने बनाए खाने की तारीफ  सुनने का भूत जो सवार रहता था. हर वक्तरसोई में तरहतरह के पकवान बनाना और लोगों को खिला कर तारीफें बटोरना यही टाइम पास था मां का.

‘‘उस दिन आंटी नहीं थीं घर पर… अंकल ने मुझ से दरवाजे पर कहा कि अांटी किचन में हैं, वहीं दे आओ, मैं भीतर चली गई. पर वहां कोई नहीं था. अंकल ने मुझे पास बैठा कर मेरे गालों को मसल कर कहा कि वे शायद बाथरूम में हैं. तुम थोड़ी देर रुक जाओ. मुझे बड़ा अटपटा लग रहा था. मैं उठ कर जाने लगी तो हाथ पकड़ कर बैठा कर बोले कि कितने फालतू के गेम खेलती हो तुम… असली गेम मैं सिखाता हूं और फिर अपने असली रूप में प्रकट हो गए. कितनी देर तक मुझे तोड़तेमरोड़ते रहे. जब जी भर गया तो अपनी अलमारी से एक रिवौल्वर निकाल कर दिखाते हुए बोले कि किसी से भी कुछ कहा तो तेरे मांबाप की खैर नहीं.

‘‘मन और तन से घायल मैं उलटे पांव लौट आई और अपने कमरे को बंद कर देर तक रोती रही. मां की सहेलियों का जमघट लगा था और वे अपनी पाककला का नमूना पेश कर इतरा रही थीं और मैं अपने शरीर पर पड़े निशानों को साबुन से घिसघिस कर मिटाने की कोशिश कर रही थी.

‘‘धीरेधीरे मैं पढ़ाई में पिछड़ती चली गई और मैं 10वीं कक्षा में फेल हो गई. मां ने मुझे खूब खरीखोटी सुनाई, मगर कभी मेरी पीड़ा न सुनी. मैं गुमसुम रहने लगी. सोती तो सोती ही रहती उठने का मन ही न करता. मां खाना परोस कर मेरे हाथों में थमा देती तो खा भी लेती अन्यथा शून्य में ही निहारती रहती. सब को लगा फेल होने का सदमा लग गया है, किसी ने सलाह दी कि मनोचिकित्सक के पास जाओ.

3-4 सीटिंग के बाद जब मैं ने महिला मनोचिकित्सक को अपनी आपबीती बताई तो उन्होंने मां को बुला कर ये सब बताया. मगर वे मानने को ही तैयार न हुईं. कहने लगीं कि साल भर तो पढ़ा नहीं, अब उलटीसीधी बातें बना रही है. इस की वजह से हमारी पहले ही कम बदनामी हुई है, जो अब पड़ोसी को ले कर भी एक नया तमाशा बनवा लें अपना… जब मेरी कोई सुनवाई ही नहीं तो मैं भी चुप्पी लगा गई. मुझे ही आरोपी बना कर कठघरे में खड़ा कर दिया गया था. फिर इंसाफ  किस से मांगती?

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‘‘तब से अपना मुंह बंद कर जीना सीख लिया. मगर इस दिल और दिमाग का क्या करूं. जो अब भी चीखचीख कर इंसाफ  मांगता है जब दर्द बरदाश्त से बाहर हो जाता है तो नशा ही मेरा सहारा है, उन गोलियों को खा बेहोशी में डूब जाती हूं. तू ही बता कोई इलाज है क्या इस का तेरे पास?’’ रागिनी ने सीमा के हाथों को अपने हाथों में ले कर पूछा.

‘‘हां है… हर मुसीबत का कोई न कोई हल जरूर होता है. बस उसे ढूंढ़ने की कोशिश जारी रहनी चाहिए. इस बार तेरे मायके मैं भी साथ चलूंगी और उस शख्स के भी घर चल कर, बलात्कारियों की सजा पर चर्चा करेंगे. बलात्कारियों को खूब कोसेंगे, गाली देंगे और बातों ही बातों में उस शख्स के चेहरे पर लगे मुखौटे को उस की पत्नी के समक्ष नोंच कर फेंक देंगे.

‘‘उन्हें भी तो पता चले उन के पतिपरमेश्वर की काली करतूत…देखो बलात्कारी की पत्नी उस की कितनी सेवा करती हैं… उन का बुढ़ापा नर्क बना कर छोड़ेंगे… रोज मरने की दुआ मांगता न फिरे वह तो मेरा नाम बदल देना,’’ सीमा ने रागिनी के हाथों को मजबूती से थाम कर बोला.

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रागिनी के चेहरे पर मुसकराहट तैर गई. तभी रमन ने आ कर रागिनी के कंधे पर हाथ रख कर कहा, ‘‘बचपन की सहेली क्या मिल गई, तुम तो एकदम बदल ही गई. यह मुसकराहट कभी हमारे नाम भी कर दिया करो.’’

सीमा ने रागिनी के हाथों को रमन के हाथों में सौंपते हुए कहा, ‘‘अब से यह इसी तरह मुसकराएगी, आप बिलकुल फिक्र न करें… इस के कंधे से कंधा मिलाने के लिए मैं जो वापस आ गई हूं इस की जिंदगी में.’’

Satyakatha: विदेशियों से साइबर ठगी- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

‘‘मगर क्यों?’’ यश ने सिर्फ इतना ही पूछा कि लैपटौप संभालने वाले पुलिसकर्मी ने कहा, ‘‘यहां छापेमारी हुई है. तुम्हारे काल सेंटर के खिलाफ कंप्लेन है. जो कुछ भी कहना है, वह थाने में कहना. चलो, लाओ तुम्हारा अपना मोबाइल फोन कहां है? वह भी दो.’’

‘‘जी, वो तो आप ने ले रखा है.’’ यश बोला.

‘‘…और कंपनी का मोबाइल?’’ पुलिसकर्मी ने सवाल किया.

‘‘जी, वह चार्ज हो रहा है.’’ दाईं ओर चार्जर पौइंट की ओर इशारा करते हुए यश बोला. पुलिस ने उस मोबाइल को भी अपने कब्जे में ले लिया.

‘‘कंपनी का कोई दूसरा डिवाइस या फाइल वगैरह भी है?…उसे भी दो.’’

‘‘कोई और डिवाइस नहीं है सर, सिर्फ एक फाइल है,’’ बैड के नीचे से नीले रंग की एक फाइल निकालते हुए यश बोला.

थोड़ी देर में पुलिस यश को रिसौर्ट के रिसैप्शन पर ले आई. वहां उस के कुछ और साथियों को पुलिस ने पकड़ रखा था. उन्हीं में रवि भी था. वहीं उसे मालूम हुआ कि दोनों रिसौर्ट में पुलिस ने छापेमारी की है और कुल 18 लोगों को पकड़ लिया है.

छापेमारी कथित काल सेंटर द्वारा फरजीवाड़ा करने की शिकायत पर की गई थी. पुलिस हिरासत में लिए गए युवाओं में एक युवती भी थी. सभी के लैपटौप, मोबाइल और हेडफोन के अलावा माडम, राउटर एवं दूसरे उपकरण भी जब्त कर लिए गए थे.

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दरअसल, अजमेर जिले में स्थित पुष्कर की पुलिस को जयपुर हेडक्वार्टर से सूचना मिली थी कि वहां 2 रिसौर्ट में फरजी काल सेंटर चलाया जा रहा है. सेंटर के कर्मचारी वर्क फ्रौम होम के तहत जौब कर रहे हैं.

वे विदेशियों से औनलाइन फ्रौड के धंधे में लिप्त हैं. काल सेंटर के कर्मचारी उन्हें अमेजन का प्रतिनिधि बताते हैं. कुछ कर्मचारी खुद को इनकम टैक्स का अधिकारी भी बताते हैं.

इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों रिसौर्ट पर दबिश दी थी और सेंटर के कर्मचारियों को पकड़ लिया था. उन की ठगी का शिकार होने वाले अमेरिका और आस्ट्रेलिया के लोग थे.

पुलिस सभी को पुष्कर थाने ले आई. उन से पूछताछ से मालूम हुआ कि सभी 10वीं-12वीं तक ही पढ़े हैं, लेकिन वे फर्राटेदार अंगरेजी बोलते हैं. कुछ तो अमेरिकन और ब्रिटिश अंगरेजी दोनों बोलने में माहिर थे.

हैरानी की बात यह थी उन में से कोई भी स्थानीय नहीं था. यहां तक कि जयपुर का भी नहीं था. सभी दिल्ली, गजियाबाद, मुंबई, कोटा, पटना, नागौर और गुजरात के आनंद के थे. उन्हें सेंटर में कुछ माह पहले ही जौब मिली थी. सभी लंबे समय से बेरोजगार थे.

फरजीवाड़े के लिए सेंटर के संचालक ने विदेशी साइटों पर जा कर उन का डेटा खरीदा था. फिर काल या मैसेजिंग के जरिए उन से संपर्क किया और विविध औफर के साथ ठगी को अंजाम दिया. इस काम के लिए नियुक्त किए गए युवाओं को 25 हजार रुपए मंथली सैलरी पर रखा गया था. साथ ही उन्हें इंसेंटिव भी मिलता था.

इस तरह से एक कर्मचारी को 70-80 हजार रुपए तक मिल जाते थे. कुछ लोग एक महीने में एक लाख रुपए तक इंसेंटिव पा चुके थे. यह उन के द्वारा क्लाइंट के संतुष्ट होने और उन के काम से ठगी गई रकम पर निर्भर करता था.

सभी के नाम दोनों रिसौर्ट के अलगअलग कमरे बुक थे. एक तरह से उन का वही औफिस और रहने का ठिकाना था. कमरे में ही खानेपीने की तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवा दी गई थीं. सेंटर के ये सारे इंतजाम पिछले जून माह से किए गए थे.

अगस्त के महीने में जयपुर की पुलिस को उस सेंटर की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी. उस के बाद से ही जयपुर पुलिस ने अजमेर और पुष्कर की पुलिस को अलर्ट कर दिया था. इस की तहकीकात की जिम्मेदारी एएसपी (ग्रामीण) सुमित मेहरड़ा, आईपीएस को सौंपी गई थी.

उस के बाद ही मौका देख कर पुलिस ने 7 अक्तूबर को दोनों रिसौर्ट पर अचानक रेड डाली, जिस में सेंटर के कर्मचारी पकड़े गए और उन से ठगी के कई दस्तावेज भी हाथ लगे.

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उन दस्तावेजों और लैपटौप से मिली जानकारियों के आधार पर ठगी का पूरा मामला सामने आ गया. ठगी के तरीके का खुलासा हो गया. कुछ बातें जौब करने वाले सेंटर के कर्मचारियों ने बताईं. हालांकि कर्मचारियों की आईडेंटिटी में किसी भी तरह की हेराफेरी या फरजीवाड़ा नहीं किया गया था.

पूछताछ में पुलिस को मालूम हुआ कि वे ठगी को किस तरह से अंजाम देते थे. दूर बैठे विदेशियों को फोन पर इस तरह की बातें करते थे, जिस से वे सेंटर द्वारा बुने गए ठगी के जाल में फंस जाते थे. हालंकि इस की पूरी जानकारी सेंटर के उन युवाओं को भी नहीं होती थी कि उन के काम से कोई ठगा जा रहा है.

उन के सभी क्लाइंट आस्ट्रेलिया और अमेरिका के थे. उन्हें वे इनकम टैक्स औफिसर की हैसियत से फोन करते थे या फिर मैसेज भेजते थे. वे कहते थे कि उन के 4-5 साल की औडिट रिपोर्ट में कई खामियां हैं, उसे वे तुरंत सही करवा लें, वरना उन्हें भारी जुरमाना भरना पड़ सकता है.

इसी के साथ उन्हें एक राशि बताई जाती थी और कहा जाता था, वह उन की पिछली गलतियों के लिए निर्धारित किया गया फाइन है. उसे भर देने पर वित्तीय कानून के मुताबिक भविष्य में किसी भी तरह के मुकदमे की काररवाई से बचे रहेंगे.

उस के बाद विदेश में बैठा वह व्यक्ति सेंटर के खाते में पैसा ट्रांसफर कर देता था, जो लाखों में होता था.

अमेरिका के लिए ठगी का तरीका अलग तरह का था. वहां के क्लाइंट के लिए सेंटर के कर्मचारी खुद को अमेजन कंपनी के रिप्रजेंटेटिव कहते थे.

इस के लिए सेंटर के संचालक द्वारा पहले से कर्मचारियों को अलगअलग एग्जीक्यूटिव के रूप में पोस्ट बंटे होते थे. उन से कहा जाता था कि आप ने अमेजन कंपनी का जो सामान खरीदा है, उस बारे वे कुछ विशेष जानकारी बताना चाहते हैं.

उन के द्वारा मना करने पर कहा जाता था कि उन का सिस्टम पहले सामान की खरीद के बारे में दिखा रहा है. इस तरह से उन्हें बातोंबातों किसी गिफ्ट या पहले के किसी औफर को ठुकराने या लौटाने का जिक्र कर उलझा देते थे.

कुछ समय में ही क्लाइंट उस के झांसे में आ जाता था. फिर अमेजन अकाउंट हैक होने की बात कर उस का आईपी एड्रेस आदि ले लेते थे. यहां तक कि एनीडेस्क का इस्तेमाल कर सीधे उस के कंप्यूटर, लैपटौप या मोबाइल में घुस जाते थे.

इस घुसपैठ के बाद क्लाइंट को हैकिंग का भय दिखाया जाता था और छुटकारा पाने के एवज में एक रकम मांगी जाती थी. बदले में उन्हें अमेजन के कूपन का औफर दिया जाता था और उन का यूनिक नंबर ले कर डालर में मोटी राशि सेंटर के अकाउंट में ट्रांसफर करवा ली जाती थी.

अगले भाग में पढ़ें- राहुल ने बताया कि कोरोना काल में उस के बिजनैसमैन पिता की मौत हो गई थी

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