टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) इन दिनों महाट्विस्ट दिखाया जा रहा है. जिससे फैंस को एंटरटेनमेंट का डबल डोज मिल रहा है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में.
शो में अब तक आपने देखा कि श्रुति की तबियत खराब हो जाती है और वह विराट को फोन करती है. ऐसे में सई श्रुति को खरी-खोटी सुनाती है. और कहती है कि वह क्यों विराट को फोन करती है. सई का गुस्सा श्रुति पर फूटता है.
सई फोन पर ही श्रुति से लड़ना शुरू कर देती है. सई की बातें सुनकर श्रुति की हालत खराब हो जाती है. सई पूछेती है कि श्रुति बार बार विराट को किस हक से फोन कर रही है.
ऐसे में वह विराट को धक्का देगी. विराट भी सई के उपर हाथ उठाएगा. सई को इस बात पर यकीन ही नहीं होगा कि विराट ने उसे मारने की कोशिश की है. शो में अब ये देखना होगा कि क्या सई और विराट का रिश्ता टूट जाएगा?
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लड़की 18 वर्ष की हुई नहीं कि घरपरिवार में लड़की की शादी करवा देना सिर से बोझ उतरने जैसा बन जाता है. कुछ लड़कियां कई वजहों से देर तक शादी नहीं करतीं तो उन पर चहुंओर से छींटाकशी शुरू हो जाती है. सवाल यह है कि अविवाहित लड़कियों पर समाज इतना प्रश्नचिह्न क्यों लगाता है?
युग बदला. परंतु हमारी विचारधारा न बदली. ऐसा कहना गलत न होगा. आज जरा भी नहीं बदला तो वह है हमारे समाज की संकुचित सोच. लगता है जैसे हमारे मध्यवर्गीय समाज ने न बदलने की कसम खा रखी हो, खासकर, लड़कियों के विवाह के मामले में.
हम 20वीं से 21वीं सदी में आ गए परंतु लड़कियों के विवाह के मामले में हमारा नजरिया आज भी पुरानी सोच पर ही स्थिर है. लड़कियों की शादी उचित समय पर हो जाए, 2 से 3 बच्चे हो जाएं, घरवाले छाती चौड़ी कर लें समाज में, खासकर ऐसे परिवारों के सामने जिन की बेटियां उन की नजरों में ‘बदकिस्मती’ से कुंआरी हैं.
इस विषय में समाज की सब से अहम सोच या नजरिया, अपनेअपने शब्दों में जो भी कह लें, यह है कि लड़कियां बिना विवाह के पूर्ण नहीं. उन की खुशी, उन की पूर्णता शादी में ही है. पति होगा, बच्चे होंगे तो सारे संसार की खुशियां बच्ची को मिल जाएंगी.
ज्यादातर ये बातें सच प्रमाणित भी होती हैं और लड़कियां घरपरिवार बसा कर खुश भी हो जाती हैं, खासकर ऐसी लड़कियां जिन की प्राथमिकता घरपरिवार बसाना होता है. दूसरी तरफ ऐसी लड़कियां भी हैं जिन की प्राथमिकता पहले उन का कैरियर, उस के बाद अपनी पसंद या मातापिता की पसंद से घर बसाना होता है. शहरी क्षेत्रों में ऐसे विचार वाली लड़कियां ज्यादा या दूसरे शब्दों में कहें तो बहुतायत में होती हैं.
अगर मानसिक स्थिति पर गौर कर के इस विषय को देखा जाए तो हरेक शख्स का अपना खुद का नजरिया होता है. वहां पर शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों का प्रभाव बहुत कम हो जाता है. परिवेश की भूमिका भी अहम रोल निभाती है.
लड़कियों के विवाह के मामले में एक खास पहलू यह भी है कि ग्रामीण या छोटे शहरों के माहौल से आई लड़कियां जब पढ़लिख जाती हैं तो उन के सोचने का नजरिया बहुतकुछ बदल जाता है. ऐसी लड़कियां ही ज्यादातर घरेलू जुल्म की शिकार बनती हैं तब जब वे अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं या खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं.
उस वक्त विवाह के लिए वे मानसिक रूप से तैयार नहीं रहतीं और शादी से इनकार करती हैं. उन पर उन के इनकार को इकरार में बदल देने का दबाव बनाया जाता है. कभी समाज का, कभी बीमार मातापिता का, कभी छोटे भाईबहनों का हवाला दिया जाता है और इमोशनल रूप से ऐसी लड़कियों को तोड़ दिया जाता है. नतीजा, वे विवाह के लिए हामी भर देती हैं.
अपनी औकात के अनुसार लड़का ढूंढ़ कर लड़की के हाथ पीले कर दिए जाते हैं और विदा कर के सिर का बो झ, समाज का बो झ हलका कर लिया जाता है. विवाह होते ही अधिकांशतया सारे बहाने गुम हो जाते हैं. शुरू में लड़की कुछ दुखी रहती है परंतु पति और ससुराल को निरपराध मान कर उन की खुशियों की खातिर समर्पित हो जाती है और पूरी जिंदगी समर्पित ही रहती है.
वह अपने सपनों को अपनी बंद मुट्ठी में भरी रेत की तरह देखती और हथेली खोल कर उसे हवा में उड़ने की आजादी दे देती है. पति और बच्चों का उच्च मुकाम और उन का मुसकराता चेहरा देखना अब उस का नया सपना होता है. उन की खुशियों में खुद की खुशियां ढूंढ़ना जीवन जीने का मकसद बन जाता है.
लड़कियों की जिंदगी के लिए अहम फैसले लेने का हक और निर्णय सुना देने का अधिकार समाज का छिपा और डरावना रूप आज भी कायम है. फर्क यह है कि पहले के लोगों की खुलेआम ऐसी सोच दिखती थी. अब आधुनिक होने का मुखौटा लगा है जिस से कि वैसी सोच सामने वाले को न दिखे, न वे दकियानूस की उपाधि से नवाजे जाएं.
दूसरा और अहम पहलू सामाजिक निंदा है. किसी लड़की ने शादी नहीं की, इस के पीछे जरूर कोई न कोई कहानी होगी. ऐसा समाज में उस के बीच के लोग सोचते हैं. शक की सूई लड़की पर घूमती रहती है. उस समाजरूपी सूई की बैटरी कभी खत्म नहीं होती और मौका मिलते चुभोने से भी लोग पीछे नहीं हटते.
इस सूई की चुभन उसे कितनी पीड़ा देगी, यह सोचे बिना, वह अंदर से हिल जाएगी, ऊपर से मुसकराते हुए, जवाब हाजिर करना, खुद को मजबूत दिखाना उस की जरूरत बन जाती है. वरना यह समाज सवालों की सूई से घायल करता रहेगा. अब सवाल उठता है हमारी आप की सोच ऐसी क्यों हैं? अन्य मामलों में आधुनिकता का ढोल पीटने वाले हम लड़कियों के विवाह के मामले में क्यों कुंठित सोच के शिकार हैं.
जरूरी नहीं कि हर लड़की शादी में, घरपरिवार में रुचि रखती हो. हो सकता कुछ की उन की कुछ निजी मजबूरियां हों, कुछ को लाइलाज बीमारी हो, कुछ अपने घर की जिम्मेदारी को समर्पित हो गई हों. कोई भी कारण हो सकता है अविवाहित होने का. केवल प्यारमोहब्बत में असफलता ही कारण नहीं होता कुंआरेपन का. वे अपनी निजी वजह दुनिया वालों से या सहकर्मी से सा झा करती नहीं फिरेंगी.
खुद को सभ्य कहने वाले थोड़ा और सभ्य बन जाइए. अविवाहित लड़कियों के मुंह पर पऊ फुसफुसाना उन की पीठपीछे उन की खिल्ली उड़ाना और शकभरे सवालों की बौछार से उन्हें लज्जित महसूस करवाना या अनापशनाप शादी के रिश्ते बताना आदि आदतें छोडि़ए. महिला ने जन्म लिया है तो क्या वह अपने जीवन का निर्णय लेने में सक्षम नहीं है?
कुछ प्रतिशत बुद्धिजीवी कहेंगे, क्यों नहीं हैं. परंतु उन बुद्धिजीवियों में 90 प्रतिशत मौका मिलते ही फुसफुसाने से भी परहेज नहीं करेंगे. लड़की के अविवाहित होने की वजह कुछ भी हो, इस विषय पर भी अपनी आधुनिक सोच को बढ़ाएं, न कि संकुचित करें.
हमारी एक परिचिता हैं, उन की उम्र करीब 65 वर्ष के आसपास है. मध्य आयु में पिता के गुजर जाने के बाद छोटेछोटे भाईबहनों को टीचर की नौकरी कर के पढ़ायालिखाया और शादी विवाह की. सारे भाईबहनों की शादी होतेहोते उन की उम्र 40-42 हो गई.
सारे भाईबहन व्यवस्थित होने के बाद उन पर शादी का दबाव बनाने लगे. जब उन्होंने इनकार किया तो उन्हें यह बोल कर मानसिक आघात दिया गया कि आप को बुढ़ापे में कौन रखेगा? शिक्षिका दीदी उन के सवालों से सन्नाटे में आ गईं.
आज वे अकेली रहती हैं और अपने समाज के लोगों के लिए जीती हैं. वही लोग उन का परिवार हैं. भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है, कौन जानता है? हो सकता है शिक्षिका दीदी को अंत समय में किसी की जरूरत ही न पड़े, पड़े भी तो अनेक ऐसे सामाजिक संस्थान हैं जो मजबूरों की मदद करते हैं. उन के चाहने वाले कम से कम वहां तक तो उन्हें छोड़ ही देंगे. विदेश प्रवास और मैट्रो सिटी में जा कर बसने वाले बच्चों के मातापिता भी बच्चों के होते हुए जीवन का अंतिम सफर अकेले ही तय कर रहे हैं. ऐसे लोगों से एक सवाल यह है कि उन के लिए आप का क्या सु झाव है?
शिवाजी माधवराव सानप (54) मुंबई पुलिस के नेहरू नगर थाने में हैडकांस्टेबल के पद पर तैनात था. वह पुणे में रहता था. वहीं से रोजाना ड्यूटी के लिए अपडाउन करता था. पुणे से वह बस से पनवेल जाता था, फिर पनवेल से दूसरी बस पकड़ कर कुर्ला पहुंचता और कुर्ला से लोकल ट्रेन के जरिए वह नेहरू नगर थाने पहुंचता. आनेजाने के लिए उस का रुटीन ठीक उसी तरह तय था, जैसे सुबह उठ कर लोग दैनिक काम करते हैं.
इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के कारण काफी भागदौड़ रही. दिन भर की थकान के बाद वह उस रात भी कुर्ला स्टेशन से उतरने के बाद पनवेल के लिए बस पकड़ने के लिए लगभग रात के साढ़े 10 बजे सड़क से गुजर रहा था.
तभी सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार नैनो कार ने शिवाजी को इतनी जोर की टक्कर मारी कि उस का शरीर हवा में उछलता हुआ सड़क के किनारे दूर जा गिरा.
इस बीच शिवाजी को टक्कर मारने वाली कार हवा की गति से नौ दो ग्यारह हो गई. शिवाजी सानप गंभीर रूप से घायल हो गया. आनेजाने वाले कुछ राहगीरों ने यह माजरा अपनी आखों से देखा था. लिहाजा वहां मौजूद हुए लोगों में से किसी ने उसी समय पुलिस कंट्रोल रूम को इस की सूचना दे दी.
पहले पीसीआर की गाड़ी आई जिस ने घायल शिवाजी को पास के एक अस्पताल में भरती करा दिया. लेकिन कुछ देर की जद्दोजहद के बाद आखिरकार शिवाजी को मृत घोषित कर दिया गया.
मामला बिलकुल सीधासाधा सड़क हादसे का दिख रहा था, इस में शक की कोई गुंजाइश भी नहीं लग रही थी. लिहाजा पनवेल शहर पुलिस स्टेशन के सीनियर पीआई अजय कुमार लांडगे ने सड़क दुर्घटना का मामला दर्ज करवा दिया.
शिवाजी के कपड़ों की तलाशी लेने के बाद जेब से उस का महाराष्ट्र पुलिस का परिचय पत्र, आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज मिले थे. इस से पुलिस को उस की पहचान कराने में भी ज्यादा जहमत नहीं उठानी पड़ी.
सड़क दुर्घटना का केस दर्ज करने के बाद पनवेल पुलिस स्टेशन ने पुणे में रहने वाले शिवाजी के घर वालों को भी हादसे की खबर कर दे दी. अगली सुबह ही शिवाजी सानप की पत्नी गायत्री अपने भाई व रिश्तेदारों को ले कर पनवेल पुलिस स्टेशन पहुंची, जहां उन्हें हादसे के बारे में बताया गया.
पुलिस ने विभाग का आदमी होने के कारण जल्दी ही शिवाजी के शव का पोस्टमार्टम करवा कर शव उस के परिजनों का सौंप दिया.
1-2 दिन गुजरने के बाद अचानक शिवाजी की पत्नी गायत्री अपने भाई के साथ पनवेल पुलिस स्टेशन पहुंची और सीनियर पीआई अजय कुमार लांडगे से मुलाकात की.
गायत्री ने अपने मन में छिपे शक का इजहार करते हुए कहा, ‘‘सर, मेरे पति का ऐक्सीडेंट नहीं हुआ उन की हत्या की गई है. हत्या भी इस तरह कि लोगों को लगे कि ये पूरी तरह से सड़क दुर्घटना है.’’
यह सुन कर अजय लांडगे के होंठों पर हलकी सी मुसकान तैर गई. वह बोले, ‘‘देखो गायत्री, मैं तुम्हारा दुख समझता हूं. तुम्हारे पति की मौत हुई है और तुम्हारे दिमाग की हालत अभी ठीक नहीं है. लेकिन इस का मतलब ये नहीं कि तुम्हारे पति की हत्या हुई है. भला तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है. सड़कों पर हर रोज ऐसे हजारों ऐक्सीडेंट होते हैं, लेकिन इस का मतलब ये तो नहीं कि सब हत्या कही जाएंगी.’’
‘‘हां साहब, इस की वजह मैं आप को बताती हूं,’’ कहने के बाद गायत्री ने इंसपेक्टर अजय कुमार लांडगे को जो कुछ बताया, उसे सुन कर लांडगे की आंखें फैल गईं.
कुछ देर शांत रहने के बाद इंसपेक्टर लांडगे ने कहा, ‘‘ठीक है गायत्री, तुम ने जो कुछ बताया, अगर वो सच है तो हम इस की जांच करेंगे. अगर तुम्हारे पति की मौत हत्या है तो तुम्हें इंसाफ जरूर मिलेगा और कातिल जेल की सलाखों के पीछे होगा.’’
इंसपेक्टर लांडगे ने उसी दिन पनवेल डिवीजन के एसीपी भगवत सोनावने को शिवाजी की पत्नी और उस के साले के इस शक के बारे में जानकारी दे कर यह भी बता दिया कि उन्हें क्यों शक है कि शिवाजी की मौत सड़क हादसा नहीं बल्कि मर्डर है.
अगले भाग में पढ़ें- पुलिस टीम को एक और कहानी पता चली.
रीमा की आंखों के सामने बारबार डाक्टर गोविंद का चेहरा घूम रहा था. हंसमुख लेकिन सौम्य मुखमंडल, 6 फुट लंबा इकहरा बदन और इन सब से बढ़ कर उन का बात करने का अंदाज. उन की गंभीर मगर चुटीली बातों में बहुत वजन होता था, गहरी दृष्टि और गजब की याददाश्त. एक बार किसी को देख लें तो फिर उसे भूलते नहीं. उन की ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के गुण सभी गाते थे. उम्र 50 वर्ष के करीब तो होगी ही लेकिन मुश्किल से 35-36 के दिखते थे. रीमा बारबार अपना ध्यान मैगजीन पढ़ने में लगा रही थी लेकिन उस के खयालों में डाक्टर गोविंद आजा रहे थे.
रीमा ने जैसे ही पन्ना पलटा, फिर डाक्टर गोविंद का चेहरा सामने आ गया जैसे हर पन्ने पर उन का चेहरा हो वह हर पन्ने के बाद यही सोचती कि अब नहीं सोचूंगी उन के बारे में.
‘‘रीमा, जरा इधर आना,’’ रमा की मम्मी किचन से चिल्लाई.
‘‘अभी आई,’’ कहती हुई रीमा मैगजीन रख कर किचन में आ गई.
‘इस लड़की ने जब से कालेज में दाखिला लिया है, इस का दिमाग न जाने कहां रहता है’ मम्मी बड़बड़ा रही थी.
रीमा मैनेजमैंट का कोर्स कर रही है. मम्मी उसे कालेज भेजना ही नहीं चाहती थी. वह हमेशा चिल्लाती रहती कि 20वां चल रहा है, इस के हाथ पीले कर दो, लड़कियों को ज्यादा पढ़ाने से क्या लाभ.
रीमा की जिद और पापा के सपोर्ट की वजह से उस का दाखिला कालेज में हुआ. मम्मी कम पढ़ीलिखी थी. उन का पढ़ाई पर जोर कम ही था. मम्मी की बातों से रीमा कुढ़ती रहती. और जब से उस ने डाक्टर गोविंद को देखा है, उसे और कुछ दिखता ही नहीं.
डाक्टर गोविंद जब क्लास ले रहे होते, रीमा सिर्फ उन्हें ही देखती रह जाती. वे किस टौपिक पर चर्चा कर रहे हैं, इस की भी सुध उसे कई बार नहीं होती. यह तो शुक्र था उस के सहपाठी अमित का, जो बाद में उस की मदद करता, अपने नोट्स उसे दे देता और यदि कोई टौपिक उस की समझ में नहीं आता तो वह उसे समझा भी देता.
वैसे रीमा खुद भी तेज थी. कोई चीज उस की नजरों से एक बार गुजर जाती, उसे वह कभी नहीं भूलती. डाक्टर गोविंद भी उस की तारीफ करते. उन के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर रीमा को बहुत अच्छा लगता. शर्म से उस की नजरें झुक जातीं. उसे ऐसा लगता कि डाक्टर गोविंद सिर्फ उसे ही देख रहे हैं. उस के चेहरे को पढ़ रहे हैं.
डाक्टर गोविंद रीमा के रोल मौडल बन गए. वह हर समय उन की तारीफ करती रहती. कोई स्टूडैंट उन के खिलाफ कुछ कहना चाहता तो वह एक शब्द न सुनती. एक दिन उस की सहेली सुजाता ने यों ही कह दिया, ‘गोविंद सर कुछ स्टूडैंट्स पर ज्यादा ही ध्यान देते हैं.’ बस, इतनी सी बात पर रीमा उस से झगड़ पड़ी. उस से बात करनी बंद कर दी.
रीमा भावनाओं में बह रही थी. उस ने डाक्टर गोविंद को समझने की कोशिश भी नहीं की. उन के दिल में अपने सभी छात्रों के लिए समान स्नेह था. वे सभी को प्रोत्साहित करते और जहां जरूरत होती, प्रशंसा करते. यह सब रीमा को नजर नहीं आता. वह कल्पनालोक की सैर करती रहती. उसे हर पल, चारों ओर डाक्टर गोविंद ही नजर आते.
उस ने मन ही मन तय कर लिया कि वह अपने दिल की बात डाक्टर गोविंद को जरूर बताएगी. कल वे मेरी ओर देख कर कैसे मुसकरा रहे थे. वे भी उस में दिलचस्पी लेते हैं. उस से अधिक बातें करते हैं. अगर वे मुझे पसंद नहीं करते तो क्यों सिर्फ मुझे नोट्स देने के बहाने बुलाते. देर तक मुझ से बातें करते रहते. शायद वे मुझ से अपनी चाहत का इजहार करना चाहते हैं लेकिन संकोचवश कर नहीं पाते.
रीमा को रातभर नींद नहीं आई, उनींदी में रात काटी और सुबह समय से पहले कालेज पहुंच गई. क्लास शुरू होने में अभी देर थी. मैरून कलर की कमीज, चूड़ीदार पजामा और गले में मैचिंग दुपट्टा डाले रीमा गजब की खूबसूरत लग रही थी. वह चहकती हुई सीढि़यां चढ़ रही थी. डाक्टर गोविंद अपनी क्लास ले कर उतर रहे थे. ‘‘अरे रीमा, तुम आ गई.’’
‘‘नमस्ते सर,’’ कहते हुए रीमा झेंप गई.
‘‘यह लो,’’ उन्होंने अपने हाथ में लिया गुलाब का फूल रीमा की ओर बढ़ा दिया.
‘‘थैंक्यू सर,’’ कह कर रीमा जल्दीजल्दी सीढि़यां चढ़ गई. वह क्लास में जा कर ही रुकी. उस की सांसें तेजतेज चल रही थी. वह बैंच पर बैठ गई. गुलाब का फूल देखदेख बारबार उस के होंठों पर मुसकराहट आ रही थी. उसे लगा उस का सपना साकार हो गया. उस का दिल जोरजोर से धड़क रहा था. तभी अमित आ गया.
‘‘अकेली बैठी यहां क्या कर रही हो? अरे, गुलाब का फूल. बहुत खूबसूरत है. मेरे लिए लाई हो तो दो न. शरमा क्यों रही हो?’’ अमित ने गुलाब छूने के लिए हाथ बढ़ाया.
रीमा बिफर पड़ी. ‘‘यह क्या तरीका है? ऐसे क्यों बिहेव कर रहे हो, जंगली की तरह.’’
‘‘अरे, तुम्हें क्या हो गया? मैं ने तो ऐसा कुछ नहीं किया. वैसे, बिहेवियर तो तुम्हारा बदला हुआ है. कहां खोई रहती हैं मैडम आजकल?’’
‘‘सौरी अमित, पता नहीं मुझे क्या हुआ अचानक…’’
‘‘अच्छा, छोड़ो इन बातों को. सैमिनार हौल में चलो.’’
‘‘क्यों? अभी तो गोविंद सर की क्लास है.’’
‘‘अरे पागल, गोविंद सर अब क्लास नहीं लेंगे. वे आज ही यहां से जा रहे हैं. उन का दिल्ली यूनिवर्सिटी में वीसी के पद पर चयन हुआ है. सभी लोग हौल में जमा हो रहे हैं. उन का विदाई समारोह है. उठो, चलो.’’
रीमा की समझ में कुछ नहीं आया. वह सम्मोहित सी अमित के पीछेपीछे चल पड़ी. सैमिनार हौल में छात्र जमा थे. रीमा को आश्चर्य हो रहा था कि इतना कुछ हो गया, उसे पता ही नहीं चला. वह कल्पनालोक में विचरती रही और हकीकत में उस का सारा नाता टूटता गया.
वह इन्हीं विचारों में मग्न थी कि गोविंद सर की बातों ने उस का ध्यान भंग किया.
‘‘मैं भले ही यहां से जा रहा हूं लेकिन चाहता हूं कि जीवन में किसी मोड़ पर कोई स्टूटैंट मुझे मिले तो वह तरक्की की नई ऊंचाई पर मिले. एक छात्र का एकमात्र उद्देश्य अपनी मंजिल पाना होना चाहिए. अन्य बातों को उसे नजरअंदाज कर के आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि एक बार मन भटका, तो फिर अपना लक्ष्य पाना अत्यंत मुश्किल हो जाता है. मेरे लिए सभी छात्र मेरी संतान के समान हैं. मैं चाहता हूं कि सभी खूब पढ़ें और अपना व अपने मातापिता का नाम रोशन करें.’’
तालियों की गड़गड़ाहट में उन की आवाज दब गई. सभी उन्हें विदा करने को खड़े थे. कई छात्रों की आंखें नम थीं लेकिन होंठों पर मुसकराहट तैर रही थी. डाक्टर गोविंद के शब्दों में जाने क्या जादू था कि रीमा भी नम आंखों और होंठों पर मुसकराहट लिए अपना हाथ हिला रही थी. गुलाब का फूल अपनी खुशबू बिखेर रहा था.
VIDEO : ट्राइंगुलर स्ट्रिप्स नेल आर्ट
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टीवी की मशहूर एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) और विक्की जैन (Vicky Jain) शादी के बंधन में बंध गए हैं. दोनों की शादी की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. इसी बीच अंकिता का एक नया वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में अंकिता लोखंडे होटल की ट्रॉली पर बैठकर मस्ती करती नजर आ रही हैं.
वीडियो में आप देख सकते हैं कि अंकिता लोखंडे लाल रंग की साड़ी पहने नजर आ रही हैं. वीडियो में अंकिता लोखंडे माथे पर सिंदूर और हाथों में चूड़ी पहनकर पोज दे रही हैं. अंकिता लोखंडे का ये अंदाज लोगों को खूब हंसा रहा है.
बता दें कि अंकिता और विक्की लगभग 3 साल से एक दूसरे को डेट कर रहे थे. अंकिता और विक्की की शादी खूब धूमधाम से हुई. अंकिता लोखंडे ने सगाई, मेहंदी, हल्दी और संगीत सेरेमनी में विक्की के साथ जमकर मस्ती की.
अंकिता की शादी में बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत भी पहुंचीं थी. कंगना ने विक्की जैन और अंकिता का फोटो शेयर करते हुए लिखा- प्यार करो, लड़ाई नहीं, क्योंकि मेरे यार की शादी है.
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Readers Problem in Hindi: इस आर्टिकल में आपके लिए लेकर आए हैं Saras Salil की 10 Readers Problem in Hindi 2021. लोगों के पास कई प्रौब्लम होती हैं, जिन्हें वह दूसरों से शेयर नहीं कर पाते. लेकिन हमारे पाठकों द्वारा भेजी गई कुछ प्रौब्लम्स, जो आपकी भी जिंदगी का हिस्सा हो सकती हैं. तो आइए आपको बताते हैं Saras Salil की Readers Problem in Hindi, जिसमें रीडर्स की रिलेशन, हेल्थ और मैरिड लाइफ से जुड़ी प्रौब्लम और उनके सौल्यूशन आपको मिलेंगे.
मेरे पति जिद्दी इंसान है, मैं क्या करूं?
मेरी शादी हुए 2 महीने हो चुके हैं. अरेंज मैरिज है. शादी से पहले मैं इन से सिर्फ 2 बार मिली थी. तब दोनों बार ये मुझसे बहुत अच्छी तरह पेश आए थे. इतनी अच्छीअच्छी बातें कीं कि मैं इंप्रैस हो गई थी. लेकिन शादी के बाद पता चला कि ये कितने जिद्दी इंसान हैं. एक ही बात पर इतना ज्यादा अड़ जाते हैं कि मैं परेशान हो जाती हूं. समझ नहीं आता, तब कैसे इन से डील करूं? आप ही मेरी परेशानी का हल निकालें.
2. सिंगल मदर होने के कारण मैं अपनी बेटी के लिए काफी चिंतित हूं, मैं क्या करूं?
मैं अपनी 2 बेटियों के साथ रहती हूं, सिंगल मदर हूं, दोनों बेटियों की जिम्मेदारी मुझ पर ही है. मैं सरकारी नौकरी में हूं, दोनों बेटियों को मैं ने अच्छी शिक्षा देने की कोशिश की है. मेरी छोटी बेटी 17 साल की है और बड़ी 22 की. छोटी बेटी अकसर टिकटौक पर वीडियो बनाया करती थी. अपना सारा समय वह वीडियो बनाने या बाकी लोगों की वीडियो देखने में बरबाद करती है. मैं उस से कुछ कहती हूं या
बड़ी बेटी कुछ कहने की कोशिश करती है तो वह सुन कर भी अनसुना कर देती है. क्या करूं, समझ नहीं आता.
3. मेरे पति पीरियड्स के दौरान सेक्स करने की जिद करते हैं, मैं क्या करूं?
मेरी उम्र 27 वर्ष है. अभी नईनई शादी हुई है. पति मेरा पूरा ध्यान रखते हैं. पीरियड्स के दौरान भी सैक्स करने की जिद करते हैं लेकिन मैं उस दौरान सैक्स करते समय सहज नहीं रहती. संक्रमण का डर लगा रहता है, कहीं गर्भ न ठहर जाए यह भी चिंता रहती है. कृपया मेरी इस आशंका का समाधान करें.
4. मेरे Parents घर से बेदखल करना चाहते हैं, मैं क्या करूं?
मैं अपने मातापिता का इकलौता पुत्र हूं. मैं ने अपनी मरजी से शादी की है. लड़की नेपाली है, इसलिए मातापिता को वह बिलकुल पसंद नहीं, क्योंकि उन्होंने मेरे लिए अपनी जात (पंडित) की लड़की पसंद की हुई थी.
मेरे पिता जातबिरादरी को बहुत महत्त्व देते हैं. मैं अब पत्नी के साथ अलग एक किराए के मकान में रहता हूं. मेरी कोई खास जौब नहीं है और पत्नी की भी कोई खास आमदनी नहीं है. अब आटेदाल का भाव पता चल रहा है. पिता कहते हैं कि मुझे संपत्ति से बेदखल कर देंगे. क्या वे ऐसा कर सकते हैं. इकलौता पुत्र होने के नाते क्या उन की संपत्ति पर मेरा कोई कानूनी अधिकार नहीं है?
5. मेरे होने वाले पति काफी स्मार्ट और फिट हैं जबकि मैं मोटी हूं, क्या करूं?
अगले 2 महीने बाद मेरी शादी है. घर में बैठेबैठे मेरा वजन बढ़ गया है. देखने में मैं मोटी लगने लगी हूं. जबकि मेरे होने वाले पति काफी स्मार्ट और फिट हैं. शादी के बाद यह सुनने को न मिले कि जोड़ी बेमेल है. मैं जल्द से जल्द पतली होना चाहती हूं. मैं ने इंटरमिटैंट फास्ंिटग के बारे में सुना है कि इस से तेजी से वजन घटता है. क्या वाकई ऐसा है?
6. मैं अपने रिलेशनशिप को लेकर काफी परेशान हूं, क्या करूं?
मैं अपने बौयफ्रैंड के साथ 3 साल से रिलेशनशिप में हूं. हमारा रिलेशनशिप ऐसा है कि हम अपने घरों में इस रिलेशनशिप के बारे में कुछ नहीं बता सकते. फिलहाल हम एकदूसरे के साथ खुश हैं लेकिन पता नहीं क्यों मैं अपने इस रिलेशनशिप को ले कर डिप्रैशन में चली जाती हूं, जबकि मुझे पता है, हमारे इस रिलेशनशिप का कोई भविष्य नहीं है.
हम एकदूसरे के साथ कमिटिड भी नहीं हैं लेकिन फिर भी कई बार मैं अपने बौयफ्रैंड से कुछ उम्मीदें लगा बैठती हूं, जो पूरी नहीं होतीं तो मैं हताश हो जाती हूं. कुछ भी अच्छा नहीं लगता.
7. 1 साल से पति ने मेरे साथ सेक्स नहीं किया है, मैं क्या करूं?
मैं शादीशुदा गृहिणी हूं. पति स्मार्ट व हैंडसम हैं और अपनी उम्र से काफी छोटे दिखते हैं. वे सरकारी महकमे में अधिकारी हैं. 2 बेटे हैं जो अपनेअपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रहे हैं. मेरी समस्या यह है कि पिछले 1 साल से पति ने मेरे साथ सैक्स नहीं किया, हालांकि हमारे में कोई विवाद नहीं है. 1-2 लोगों ने मुझे बताया है कि उन के अपनी सहकर्मी से संबंध हैं. बताएं मैं क्या करूं?
8. मैं 35 साल की एक आंटी को पसंद करता हूं, क्या यह सही है?
मैं 19 साल का एक लड़का हूं. मेरे पड़ोस में 35 साल की एक आंटी रहती हैं, जो मुझे बहुत पसंद हैं. वे इतनी ज्यादा खूबसूरत हैं कि रात को मेरे सपने में आती हैं. सपने में मैं बहक जाता हूं, पर असली जिंदगी में वे मु झ से बात भी नहीं करती हैं.
मैं उन आंटी को देखते ही बौरा जाता हूं और उन्हीं के बारे में सोचता रहता हूं. मेरा पढ़ाई में भी मन नहीं लगता है. मैं क्या करूं?
9. ऑनलाइन क्लास से लिखने की आदत छूट गई है, मैं क्या करूं?
मैं 12वीं क्लास का छात्र हूं. कोरोना के चलते इस बार स्कूल तो बिलकुल ठप हो गया है. औनलाइन क्लास तो होती है, पर उस से लिखने की आदत बिलकुल छूट गई है. अगर कल को बोर्ड के इम्तिहान होंगे तो उन में लिखना तो पड़ेगा न. इसी बात को सोचसोच कर मैं तनाव में रहता हूं. मु झे सही
सलाह दें.
10. मेरा बॉयफ्रेंड मुझसे 5 साल बड़ा है, क्या इस वजह से सेक्स संबंध में कोई परेशानी आ सकती है?
मैं 26 साल की हूं और मेरा बौयफ्रैंड मुझसे 5 साल बड़ा है. क्या इस वजह से सैक्स संबंध में कोई परेशानी आ सकती है? मैं उस से सैक्स करना चाहती हूं पर कभीकभी लगता है कि वह मेरा साथ नहीं दे पाता, क्योंकि एक बार जब देर तक फोरप्ले करने के बाद वह अपना पैनिस इंसर्ट करने की कोशिश कर रहा था तो बारबार की कोशिशों के बावजूद वह कामयाब नहीं हो पा रहा था. क्या उसे कोई परेशानी है? कृपया सलाह दें?
टीवी शो ‘अनुपमा’ (Anupama) के मेकर्स शो में नए-नए ट्विस्ट लेकर आ रहे हैं, जिससे फैंस को शो में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है. शो के लेटेस्ट एपिसोड में नयी एंट्री हुई है. आइए बताते हैं शो के नए ट्विस्ट एंड टर्न के बारे में.
शो में मालविका यानी अनेरी वजानी (Aneri Vajani) की एंट्री हो चुकी है. और मालविका वनराज की नयी बिजनेस पार्टनर है. पार्टी के दौरान दोनों की केमिस्ट्री शानदार नजर आ रही थी. तो दूसरी तरफ मालविका का अनुज से भी रिश्ता है.
शो में आप देखेंगे कि वनराज और मालविका अपने नए बिजनेस की शुरुआत का ऐलान करेंगे और दोनों के बीच जबरदस्त बॉन्डिंग नजर आएगी. तो दूसरी तरफ काव्या ये सब देखकर शॉक्ड हो जाएगी.
वनराज मालविका के साथ डांस करेगा. पार्टी के दौरान वह उसके आगे-पीछे घूमता नजर आएगा. दोनों को साथ काव्या का खून खौलेगा, वह गुस्से से तिलमिला जाएगी और मालविका को सबक सिखाने की बात सोचेगी.
पार्टी में अनुज और गोपी काका की एंट्री होगी. ऐसे में मालविका दौड़ते हुए अनुज के पास जाएगी, दोनों एक दूसरे को देखते ही रो पड़ेंगे और गले लगेंगे. अनुज और मालविका को देखकर गोपीकाका भी इमोशनल होंगे.
कई वर्ष पहले बौलीवुड में फिल्म ‘‘शूल’’ का गाना ‘दिल वालों के दिल का करार लूटने मैं आई हूं यूपी बिहार लूटने’ ने ऐसा हंगामा बरपाया था कि यह गाना और इस गाने पर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी द्वारा लगाए गए ठुमके आज भी लोगों के जेहन में मौजूद है.
इस गाने को सुनते ही आज भी लोग खुद ब खुद थिरकने लगते हैं. अब इसी गाने को भाजेपुरी निर्माता अभय सिन्हा अपनी प्राडेक्शन कंपनी ‘‘यशी फिल्मस’’के तहत नए अंदाज में भाजे पुरी गायिका चंद्र नंदिनी के स्वर में रिकार्ड कर तथा इसका एक नया वीडियो बनाकर ‘‘यशी फिल्मस’’ के यूट्यूब चैनल पर जारी कर दिया है.
गाने ‘‘यूपी बिहार लूटने आयी हूं ’ के इस नए वर्जन के वीडियो में भावना सिंह और आदित्य गिरी की जोड़ी गजब ढा रही है.मजेदार बात यह है कि इस नए वर्जन के गाने को चंद्र नंदिनी ने स्वयं कुछ नए षब्द पिराके र लिखा और फिर उसे अपनी आवाज में स्वरबद्ध किया है.जबकि हम सभी जानते है कि मूल गाने को सपना अवस्थी और चेतन शशिताल ने गाया था.
लेकिन अब भाजे पुरी सिंगर की आवाज का जादू भी लोगों पर सिर चढ कर बोल रहा है. गीत ‘‘‘दिल वालों के दिल का करार लूटने मैं आई हूं यूपी बिहार लूटने’’ की चर्चा चलने पर चंद्र नंदिनी कहती हैं-‘‘ मेरे लिए यह गाना अति महत्वपूर्ण है. यह महज बौलीवुड का गाना नही है,बल्कि यह तो सावभौमिक गाना है.
हमने इस गाने को वर्तमान पीढ़ी को ध्यान में रखकर बदलाव करते हुए गाया है.लोगों को इसमें बहुत मजा आने वाला है.हमने एक बेहतरीन टीम वर्क के साथ यह गाना बनाया है.इसलिए सभी से अपील है कि एक बार मेरे द्वारा स्वरबद्ध इस गाने केा अवश्य सुने और अपनी प्रतिक्रिया देकर हमें प्रोत्साहित करें.
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भोजपुरी वर्जन के गीत ‘आई हु यूपी बिहार लूटने’ को संगीत से अंकित सिंह ने संवारा है. जबकि वीडियो का निर्देशन करण चैधरी ने किया है. इसके कैमरामैन कुलदीप शर्मा और संजय, नृत्य निर्देशक सचिन ग्रुप, नंद किशोर, एडिटर कुमार वैभव, मेकअप पवन मिश्रा और सहायक निर्देशक शक्ति तिवारी है.