आश्चर्य! पुलिस अधिकारी होते हैं “ठगी का शिकार”

सुरेशचंद्र रोहरा

सौ बात की एक बात लालच बुरी बला. यह बात बचपन में ही घुट्टी की तरफ पिलायी जाती है. मगर आमतौर पर साधारण और खास दोनों ही प्रकार के लोग कहावत मुहावरे को भुला कर  आंख बंद करके लालच करते हैं और जिंदगी में कई दफा ठगे जाते हैं लूट जाते हैं.

आज आपको हम बता रहे हैं कि एक पुलिस का उच्च अधिकारी जो जिंदगी भर लोगों को अपने वर्दी के बूते, शिक्षा के दम पर जांच पड़ताल करके न्याय दिलाता रहा रिटायरमेंट के कुछ समय बाद कैस लाखों रुपए की ठगी का शिकार हो जाता है.

कितने आश्चर्य की बात है, अगरचे कोई आम आदमी अशिक्षित व्यक्ति, गांव का आदमी ठगा जाता है तो हम कहते हैं कि इसे कानून का ज्ञान नहीं है नियमों का पता नहीं है. यह संसार के बारे में ज्यादा नहीं जानता, बेचारा इसीलिए ठगा गया है. मगर जब यही बात इसी शिक्षित और कानून के जानकार के साथ घटित हो तो फिर क्या कहा जाए.

आज हम इस रिपोर्ट में यही सच आपको बता रहे हैं कि आज के इस संक्रमण काल में अगर आप चौक्कना  नहीं रहेंगे तो कभी भी ठगे जा सकते हैं. अत: एक बार फिर याद कर लें-” लालच बुरी बला है.”

पच्चीस लाख का चुग्गा

कथित सीबीआई अधिकारी बन कर आईजी कार्यालय से सेवामुक्त हुए एडिशनल एसपी को 25 लाख की लॉटरी लगने का झांसा दिया गया और बैंक खाते से साढ़े छह लाख की धोखाधड़ी को अंजाम दे दिया गया.

कुछ समय बाद ठगी का एहसास होने पर पीड़ित रिटायर्ड अधिकारी ने बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के सिविल लाइन थाने पहुंच कर मामले की शिकायत दर्ज कराई है. अप पुलिस मामले को अपने हाथों में लेकर के छानबीन शुरू कर चुकी है यह रिपोर्ट लिखे जाने तक कोई आरोपी पुलिस के हाथ नहीं चढ़ा है जैसा कि होता है पुलिस मामले में जांच कर आगे की कार्रवाई कर रही है.

दरअसल हुआ यह कि‌ रिटायर्ड एएसपी को 25 लाख की लॉटरी लगने का झांसा दिया गया और साढ़े छह लाख का चूना लगा दिया गया.

अब आपको हम उक्त पुलिस अधिकारी से आप परिचय कराते हैं आप हैं -रवीन्द्र कुमार मिश्रा पिता हरिनारायण मिश्रा (66) वर्ष 2017 में पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय से रिटायर्ड हुए हैं. आपके मोबाइल नम्बर पर 13 जनवरी को फोन कर एक महिला ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए मैसेज किया कि उन्हें कौन बनेगा करोड़पति  केबीसी कंपनी की 25 लाख की लॉटरी लगी है.

उसके बाद एक और मैसेज आया की रुपए कैश करवा कर सीबीआई आफिसर अजय कुमार देंगे. 25 लाख मिलने के लालच में आए रिटायर्ड एएसपी ने खाता नम्बर, एटीएम का नंबर पासबुक की फोटोकॉपी व अन्य दस्तावेज वाट्सएप के माध्यम से दे दी.

अजय कुमार ने रविन्द्र कुमार मिश्रा को झांसे में लेने के लिए अपना सीबीआई का आई कार्ड भी भेज दिया.और लाखों रुपए रुपए की लाटरी जल्द से जल्द मिल सके इसके लिए कथित अधिकारी अरविंद कुमार से भी बात कराई व उनका भी आईकार्ड भेजा. रविन्द्र कुमार मिश्रा को दोनों शातिर ठगों ने बताया – लाटरी का पैसा मुंबई मुख्यालय एवं दिल्ली से कुल राशि 29 लाख रुपए मिलेगा.

यह सुनते ही पुलिस अधिकारी महोदय ठगों के जाल में फंसते चले गए और अंततः ठग लिए गए और अब आप पछता रहे हैं मगर इस घटना से यह संदेश दूध चला गया है कि जब पुलिस अधिकारी वह भी रिटायर्ड पुलिस अधिकारी जो जिंदगी भर जाने कितने ठगी के प्रकरणों का विवेचना करके अपराधियों को जेल भेजते हैं भी ठगी का शिकार हो सकते हैं तो फिर आम आदमी की बिसात क्या है अतः हमें अपने आसपास के तौर से सावधान रहने की आवश्यकता है.

‘कुमकुम भाग्य’ में अब नहीं दिखेगी अभि-प्रज्ञा की जोड़ी, Sriti Jha और शब्बीर ने लिया शो छोड़ने का फैसला

उमा नेगी

टीवी के सुपरहिट सीरियल में से एक ‘कुमकुम भाग्य’ पिछले 8 सालों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है. एकता कपूर का ये सीरियल पिछले 8 सालों से टीआरपी लिस्ट में सबसे आगे रहा है. वैसे तो कुमकुम भाग्य ने टीआरपी लिस्ट में हमेशा धमाल मचाया है. लेकिन इसी बीच कुमकुम भाग्य के फैंस के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है. ताज़ा जानकारी के अनुसार जल्द ही शो से अभि (Shabir Ahluwalia) और प्रज्ञा (Sriti Jha) की विदाई होने वाली है.

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि शब्बीर आहलूवालिया और सृति झा ने सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है. अब मेकर्स दोनों कलाकारों के बिना ही सीरियल को आगे बढ़ाने कि सोच रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जल्द ही सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ की कहानी में लंबा लीप आएगा .लीप के बाद दर्शकों को कहानी में जनरेशन गैप देखने को मिलेगा कुछ समय पहले भी दर्शकों को इस शो में लीप देखने को मिला था ,टीआरपी बढ़ाने के लिए मेकर्स समय समय पर लीप का इस्तेमाल करते रहते है. अब मुग्धा चापेकर और कृष्णा कौल कहानी को आगे बढ़ाएंगे .सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ की कहानी में बीते कुछ महीनों के अंदर अंदर 2 बार लीप आ चुका है.

लीप के बाद शब्बीर आहलूवालिया और सृति झा का नया अंदाज़ दर्शकों को देखने मिला था. बता दें कि 2014 से शब्बीर आहलूवालिया और सृति झा एक ही किरदार निभा रहे हैं.

छुटकी नहीं…बड़की : भाग -1

नीरज कुमार मिश्रा

फजल और हिना की शादी को 7 साल हो गए थे, पर उन्हें अभी तक एक भी औलाद नहीं हो सकी थी. लखनऊ के नामीगिरामी डाक्टरों का इलाज करवाया जा चुका था. हजारों रुपए के टैस्ट करवाए गए, पर सब फुजूल…

डाक्टरों ने हिना और फजल दोनों के टैस्ट की रिपोर्ट आने के बाद यही बताया था कि दोनों की जिस्मानी हालत बिलकुल ठीक नहीं है. हालांकि वे दोनों बच्चा पैदा करने में पूरी तरह से काबिल हैं, पर अगर फिर भी बच्चा नहीं हो रहा है तो सही समय का इंतजार करें. फजल के घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं थी. वह घर में मंझला भाई था. बड़े भाई के 3 बच्चे थे, 2 बेटे और एक बेटी. फजल का एक छोटा भाई हैदर था, जिस का हाल ही में निकाह हुआ था.

फजल की कमाई का जरीया उस की आरा मशीन थी, जो घर से कुछ ही दूरी पर लगी हुई थी. उस पर इतना काम आता कि काम बंद करतेकरते ही रात के 9 भी बज जाते थे. तकरीबन 15 आरा मशीन पर नौकर लगे हुए थे, जो बड़ी ईमानदारी से काम करते थे.

पुराने लखनऊ में तिमंजिला मकान होना अपनेआप में बहुत बड़ी बात थी और चारपहियों की 2 गाडि़यां भी फजल के दरवाजे पर खड़ी रह कर शान बढ़ाती थीं. फजल के पास न तो काम की कमी थी और न ही पैसे की… उस की और हिना की जिंदगी में एक औलाद की कमी जरूर थी और यह कमी फजल को अब और भी खलने लगी, जब छोटे भाई हैदर के निकाह के साल के अंदर ही वह भी एक चांद जैसी बेटी का बाप बन गया.

‘‘जी… शादी के 2 सालों तक औलाद नहीं हुई तो अब हमें औलाद क्या होगी, इसीलिए मैं चाहती हूं कि हम कोई बच्चा गोद ले लें,’’ एक दिन हिना ने कहा. ‘‘तुम भी क्या बेकार की बात करती हो… डाक्टर ने कहा है कि मेरी मर्दानगी में कोई कमी नहीं है और न ही तुम में कोई कमी है और फिर 2 सालों में तुम्हें 2 बार बच्चा ठहर भी तो चुका है…

‘‘अब यह अलग बात है कि तुम उन्हें संभाल नहीं पाई और तुम को 2 महीने पर ही गर्भपात हो गया… हम फिर से कोशिश करेंगे और हमें औलाद जरूर होगी,’’ फजल ने हिना को समझाया.

हिना की बच्चे को गोद लेने वाली बात से शायद फजल के आत्मसम्मान को ठेस लग गई थी, इसीलिए वह हिना पर झल्ला उठा था. हिना उस समय तो फजल की बात का कोई जवाब नहीं दे पाई, पर एक औलाद न होने के गम में वह अंदर ही अंदर घुटने लगी और परेशान रहने लगी.

2 साल का समय और गुजर गया. अब भी हिना मां नहीं बन पाई थी और एक दिन अचानक वह बहुत बीमार पड़ गई. उसे डाक्टरों को दिखाया गया. ‘‘देखिए, इन्हें अंदरूनी कमजोरी है और ब्लड प्रैशर बढ़ा हुआ है… आप लोग इन्हें ज्यादा से ज्यादा खुश रखने की कोशिश कीजिए… इन की बीमारी अपनेआप ठीक हो जाएगी,’’ डाक्टर कह कर चला गया.

फजल को पता था कि हिना खुश क्यों नहीं रह पा रही है. शादी के इतने साल बाद भी वह मां नहीं बन पाई है. परेशान हालत में वह अपनी आरा मशीन पर बैठा हुआ लकडि़यों के एक ठूंठ को देख रहा था.

‘‘सब खैरियत तो है फजल बाबू,’’ आरा मशीन पर काम करने वाले सज्जाद मुंशी ने पूछा.

‘‘अरे कहां सज्जाद भाई… मेरी दिक्कतें तो आप को पता ही हैं… पर, अब हिना ने मां न बन पाने की बात को अपने जेहन की गहराइयों में बिठा लिया है… लिहाजा, बीमार हो कर वह बिस्तर पर पड़ी है…

‘‘हां, एक बार उस ने एक बच्चा गोद लेने की फरमाइश जरूर की थी, पर मैं ने उसे मना कर दिया, क्योंकि मुझे लगता है कि मेरे भाइयों के बच्चे भी तो मेरे बच्चे हैं… तो भला बच्चा गोद लेने की जरूरत है?’’ फजल उसे बता रहा था.

‘‘तो इस में परेशानी क्या है… आप किसी बच्चे को गोद ले सकते हैं,’’ सज्जाद मुंशी ने कहा.

‘‘ऐसे हर किसी राह चलते का बच्चा तो गोद नहीं लिया जा सकता न सज्जाद भाई… कोई ऐसा हो, जिसे हम जानते हों… उस के परिवार को जानते हों… उन के परिवार में कोई ऐब न हो तो ही ठीक है… वरना हम बेऔलाद ही मर जाएं तो बेहतर होगा,’’ फजल ने लंबी सांस भरते हुए कहा.

‘‘ऐसी बात मत कहिए हुजूर… वैसे, अगर आप चाहें तो इस नाचीज का बच्चा गोद ले सकते हैं. अभी मेरी बीवी ने कोई 10 दिन पहले ही एक बेटी को जन्म दिया है. आप तो जानते ही हैं कि मेरे पहले से ही 3 लड़कियां हैं… एक लड़के की चाह में मेरा परिवार बड़ा होता गया…

‘‘अब इतनी महंगाई के दौर में 4 लड़कियों को पालना… मेरे लिए भी मुश्किल होगा शुरुआत से आप बच्ची को साथ रखेंगे, तो वह आप को अब्बू और हिना को अम्मी ही समझेगी,’’ सज्जाद मुंशी ने कहा.

‘‘तुम्हारी बेटी को मैं गोद ले लूं, पर क्या तुम्हारी बीवी इस के लिए राजी हो जाएगी?’’ फजल ने पूछा.

‘‘मेरी अपनी बीवी को तो मैं मना लूंगा… और फिर मेरा बच्चा आप जैसे शरीफ आदमी के घर पलेगा तो इस से बड़ी सुकून देने वाली बात मेरे लिए और क्या होगी… यह हम 2 लोगों की जबान का मामला है… न इस में किसी कोर्ट की जरूरत होगी और न ही किसी कागजी कार्यवाही की…

‘‘मैं कसम खाता हूं कि इस बच्चे को आप को सौंपने के बाद उस पर कभी हक नहीं जताऊंगा,’’ सज्जाद ने कहा.

सज्जाद मुंशी की बातों में फजल को सचाई नजर आ रही थी और उस की बातों से एक नया हौसला भी मिल रहा था.

उसे यों सोच में पड़ा देख सज्जाद मुंशी बोला, ‘‘इतनी भी कोई जल्दी नहीं है… आप घर जा कर अच्छी तरह सोच लेना… घर पर सलाह कर लेना, तब मुझे बताना.’’

घर आ कर फजल ने एक बच्ची को गोद लेने वाली बात हिना से कही.फजल की बातें सुन कर हिना की सूनी आंखों में मानो रोशनी आ गई. वह बिस्तर पर से उठ कर बैठ गई और बोली, ‘‘तो क्या मुझे भी कोई अम्मी कह कर पुकारेगा? मैं भी किसी को गोद में ले सकूंगी,’’ हिना की आंखों से आंसू छलक पड़े थे.

काफी अच्छी तरह सोचविचार करने के बाद फजल सज्जाद मुंशी के घर जा कर उस की दुधमुंही बच्ची को अपने घर ले आया. दुनिया की कोई भी मां अपने दुधमुंहे बच्चे को अपने से अलग नहीं करना चाहती है, पर जब सज्जाद मुंशी ने अपनी बीवी को यह बात समझाई कि उस की बेटी इतने बड़े घर में जाएगी और वे लोग भी तुम्हारी बेटी को कितना लाड़ करेंगे, तब जा कर कहीं हामी भरी थी सज्जाद की बीवी ने.

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अंधविश्वास: वैष्णो देवी मंदिर हादसा- भय, भगदड़ और भेड़चाल

सुनील शर्मा

किसी भी जगह पर भगदड़ मचने की सब से बड़ी वजह तो बेकाबू भीड़ ही मानी जाती है, पर अगर गौर से देखा जाए तो ज्यादातर जगहों पर भीड़ पर काबू पाने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होता है.

अगर धार्मिक जगहों की बात करें, तो वहां कुछ खास दिनों और मौकों पर जरूरत से ज्यादा लोग जमा हो कर खुद को ही परेशानी में डाल देते हैं. कोई बड़ा हादसा न भी हो, पर छोटीछोटी मुसीबतें सब को परेशान जरूर कर देती हैं. ऊपर से वहां आपदा प्रबंधन प्राधिकरण या पुलिस प्रशासन के बताए गए नियमों का पालन भी नहीं किया जाता है.

आमतौर पर भगदड़ मचने की 4 वजहें खास होती हैं, जैसे भीड़ की प्रतिबंधित इलाके में घुसने की कोशिश, दम घुटना या फिर धक्कामुक्की, किसी आपदा के चलते डर के हालात बन जाना और अफवाह की वजह से लोगों का डर के मारे भागना.

साल 2022 की शुरुआत कुछ लोगों का अंत साबित हुई. जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर में नए साल के जश्न में शामिल लोगों की भारी भीड़ उन्हीं में से 12 लोगों के लिए जानलेवा बन गई.

इस हादसे के चश्मदीदों का कहना है कि नए साल के मौके पर वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए बड़ी तादाद में लोग पहुंचे थे. भवन के पास लोगों का इतना ज्यादा जमावड़ा था कि किसी तरह की अनहोनी पर वहां से निकलने तक का कोई रास्ता नहीं था. अचानक किसी तरह की हड़बड़ी में लोग इधरउधर भागने लगे, जिस की वजह से भगदड़ मच गई और यह कांड हो गया.

इस अफरातफरी से 12 लोगों की जान चली गई और कई घायल भी हुए. इस कांड में सब से ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि मरने वालों में ज्यादातर की उम्र 21 से 38 साल के बीच थी. मतलब वे सब नौजवान थे. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कहा था कि पहले लोग त्योहारों के दौरान मंदिर जाते थे, पर आजकल युवा न्यू ईयर के दिन मंदिर जाना चाहते हैं.

वैष्णो देवी मंदिर पर उमड़ी भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां लोग नए साल पर माता के दर्शन करने के लिए एक दिन पहले ही जा पहुंचे थे.

चश्मदीदों की मानें, तो गर्भगृह के बाहर गेट नंबर 3 पर नौजवानों के 2 गुटों में आपसी कहासुनी के बाद झगड़ा हुआ और फिर झगड़े के बाद लोगों में भगदड़ मच गई. नतीजतन, जो लोग थक कर वहीं जमीन पर सोए हुए थे, उन्हें भीड़ ने कुचल दिया.

अब यह हादसा हो चुका है. मृतकों और घायलों को मुआवजा देने का ऐलान भी कर दिया गया है. बड़े लोगों ने पीडि़त परिवारों के लिए हमदर्दी जता दी है, वैष्णो देवी की यात्रा दोबारा शुरू हो चुकी है, पर लाख टके का सवाल यह कि वैष्णो देवी मंदिर में किस ने लोगों की जान ली?

इस सवाल का एक ही जवाब है कि लोग यह मान लेते हैं कि जो भी दुनिया में हो रहा है, वह उन के पसंदीदा देवीदेवता की मरजी से हो रहा है. जब किसी का सोचा हुआ पूरा हो जाता है, तो वह यह मान लेता है कि ईश्वर ने उस की सुन ली है. लिहाजा, अब ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करना तो बनता है.

इस बात को हम इस हादसे में मारे गए 24 साल के सोनू पांडे के पिता के कथन से समझ सकते हैं. उन्होंने बताया कि 2 महीने पहले सोनू की उंगली में चोट लग गई थी. तब उस ने मन्नत मांगी थी कि उंगली ठीक होने पर वह माता वैष्णो देवी के दर्शन करने जाएगा.

यहां सवाल यह उठता है कि क्या सोनू पांडे की उंगली अपनेआप किसी चमत्कार से ठीक हो गई थी? चूंकि उंगली में ज्यादा ही चोट लगी होगी, तभी तो सोनू ने ऐसी मन्नत मांगी थी. पर वह चोट किसी डाक्टर के इलाज से सही हुई होगी, क्या सोनू के मन में कभी यह खयाल आया कि डाक्टर को जा कर उस का शुक्रिया अदा कर देना चाहिए?

दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो पड़ोस में रहने वाले डाक्टर को ठीक होने पर उस का क्रेडिट देने जाते हैं, जबकि इस में उन का कुछ भी खर्च नहीं होता है. पर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करने के लिए वे ही लोग अपना समय और अपना पैसा खर्च कर के हजारों किलोमीटर दूर जाने में कतई नहीं हिचकिचाते हैं.

सब से ज्यादा दुख की बात तो यह है कि यह जो ‘मन्नत’ शब्द है, बड़ा ही खौफनाक होता है. समाज ऐसी मन्नतों पर बड़ी टेढ़ी नजर रखता है. मान लो, अगर सोनू पांडे अपनी मन्नत पर ध्यान नहीं देता और उंगली ठीक होने के बाद वैष्णो देवी मंदिर नहीं जाता तो उस के आसपास के लोग ही उसे जीने नहीं देते और ईश्वर के प्रकोप का डर उस के मन में बिठा देते कि तू ने अपनी कही बात पूरी नहीं की, इसलिए माता रानी तुझ पर कोई विपदा ले आएंगी.

सोनू ही क्या भारत में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो एक मन्नत की खातिर सालोंसाल खास दिन पर धार्मिक जगहों पर जाते ही रहते हैं, फिर चाहे दुनिया इधर की उधर ही क्यों न हो जाए. उन के मन में यह डर बैठ चुका होता है कि अगर यह चेन टूट गई तो 7 अरब की इस दुनिया की सारी मुसीबतें उसी पर कहर बन कर टूट जाएंगी. यही चेन एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाती रहती है.

पिछले 7-8 साल में भारत में धर्म के उन्माद का जिस तरह से प्रचारप्रसार हुआ है, उस की गिरफ्त में नौजवान पीढ़ी ही सब से ज्यादा आई है. सब के दिमाग में यह बात घुसा दी गई है कि सनातन धर्म ही तरक्की का एकमात्र रास्ता है. धार्मिक जगहों को सरकारी खर्च पर पर्यटन स्थलों में बदला जा रहा है. संसद हो या सड़क, हर जगह धार्मिक नारों का चलन बढ़ गया है. सत्ता पक्ष ही क्या विपक्ष भी खुद को धर्म का असली ठेकेदार बनाने और कहलाने पर तुला है.

जब ऐसी धार्मिक चाल में नौजवान पीढ़ी फंसती है, तो देश का भविष्य ही अंधकार की तरफ जाता दिखता है. इसी नौजवान पीढ़ी से एक और सवाल है कि वह किसी धार्मिक जगह पर जा कर आपा ही क्यों खोती है? वैष्णो देवी मंदिर में माता के दर्शन करने से कुछ देर पहले ही 2 गुटों में लड़ाई ही क्यों हुई? क्या माता ने उन्हें इतनी भी सहनशक्ति नहीं दी कि सब्र करो, सब का नंबर बारीबारी से आ जाएगा?

अगर उन 2 गुटों में कहासुनी नहीं होती, तो यह कांड ही नहीं होता. पर हमारे यहां तो हर जगह शौर्टकट मारने का मानो चलन सा बन गया है. मंदिर में भी बैकडोर ऐंट्री मिल जाए, तो क्या हर्ज है. यही वजह है कि देश के हर बड़े मंदिर में परची कटा कर या किसी दूसरे जुगाड़ से जल्दी दर्शन करने की सहूलियत दी गई है.

जनता की इस तरह की चालबाजियों से धर्म के ठेकेदारों पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता है, बल्कि उन्हें तो मंदिर में आई भीड़ से मतलब होता है, तभी तो इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी वैष्णो देवी मंदिर पर लोगों के हुजूम का आना जारी रहा और आगे भी जारी रहेगा.

धार्मिक जगहों पर  मची भगदड़ का इतिहास : चंद उदाहरण 

14 जुलाई, 2015 को आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी के तट पर मची भगदड़ में कम से कम 29 लोगों की मौत हो गई थी. वे लोग वहां पवित्र स्नान करने गए थे.

* 25 अगस्त, 2014 को मध्य प्रदेश के सतना जिले में चित्रकूट के कामतनाथ मंदिर में भगदड़ मच गई थी. इस में  11 लोगों की मौत हो गई थी और तकरीबन 60 लोग घायल हुए थे. वहां किसी ने करंट फैलने की अफवाह उड़ा दी थी.

* 25 सितंबर, 2012 को झारखंड के देवघर में ठाकुर अनुकूल चंद की 125वीं जयंती पर एक आश्रम में हजारों की भीड़ जमा हो जाने और सभागार में भारी भीड़ के चलते दम घुटने से 12 लोगों की मौत हो गई थी.

* 8 नवंबर, 2011 को उत्तर प्रदेश के हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर हजारों लोगों के जमा हो जाने के दौरान मची भगदड़ में 16 लोगों की जान चली गई थी.

* 14 जनवरी, 2011 को केरल के इदुक्की में शबरीमाला के नजदीक पुलमेदु में मची भगदड़ में 102 लोग मारे गए थे.

* 4 मार्च, 2010 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में कृपालुजी महाराज आश्रम में प्रसाद बांटने के दौरान मची भगदड़ में 63 लोग मारे गए थे.

* 30 सितंबर, 2008 को राजस्थान के जोधपुर में चामुंडा देवी मंदिर में बम धमाके की अफवाह से मची भगदड़ में 250 लोगों की मौत हो गई थी.

* 3 अगस्त, 2008 को हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते नैना देवी मंदिर की एक दीवार ढह गई थी. इस हादसे में 160 लोगों की मौत हो गई थी.

* 26 जून, 2005 को महाराष्ट्र के मंधार देवी मंदिर में मची भगदड़ में 350 लोगों की मौत हो गई थी.

उत्तर प्रदेश: लोकतंत्र में विरोध के स्वर को दबाने के लिए मारी गोली

– शैलेंद्र सिंह  

लोकतंत्र में विरोध करने का संविधान में अधिकार दिया गया है. समय के साथसाथ तानाशाही सरकारों को यह पसंद नहीं आ रहा है. विरोध के स्वर को दबाने के लिए अब सरकारें किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गई हैं. केवल विपक्षी दलों की आवाज को ही नहीं, बल्कि मीडिया के स्वर को भी दबाया जा रहा है.

राजनीतिक पत्रिका ‘कारवां’ ने जब किसान आंदोलन और अलगअलग मुद्दों पर निष्पक्ष लेखों को छापा, तो राष्ट्रद्रोह जैसे मुकदमे लगा कर आवाज को दबाने का काम किया गया. कई तरह की धमकियां भी मिलीं.

सुलतानपुर की रहने वाली रीता यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काले झंडे दिखाए, तो जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद बदमाशों ने उन की बोलैरो जीप को रोक कर पैर पर गोली मार दी.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री बनने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में गए, तो समाजवादी पार्टी की नेता पूजा शुक्ला ने उन्हें काले झंडे दिखाए, जिस के बाद पूजा को न केवल जेल भेजा गया, बल्कि उन का उत्पीड़न भी किया गया.

प्रधानमंत्री को काला झंडा दिखाने वाली 35 साल की रीता यादव संतोष यादव की पत्नी हैं. वे सुलतानपुर जिले के चांदा क्षेत्र के लालू का पूरा सोनावा गांव की रहने वाली हैं.

16 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ का लोकार्पण करने के लिए सुलतानपुर पहुंचे थे. सुलतानपुर जिले के अरवलकीरी में रीता यादव ने प्रधानमंत्री को काला झंडा दिखाया. रीता यादव उस समय समाजवादी पार्टी में थीं.

प्रधानमंत्री को काला झंडा दिखाने के आरोप में पुलिस ने रीता यादव को जेल भेज दिया था. कुछ दिन जेल में रहने के बाद रीता यादव को जमानत पर रिहाई मिल गई थी. जेल से रिहा होने के बाद रीता यादव को समाजवादी पार्टी में कोई खास तवज्जुह नहीं मिली.

17 दिसंबर, 2021 को रीता यादव ने लखनऊ में कांग्रेस जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा से मुलाकात की और कांग्रेस जौइन कर ली. कांग्रेस में उन की मुलाकात प्रियंका गांधी से भी हुई.

रीता यादव ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सुलतानपुर की चांदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी. इस की तैयारी के सिलसिले में वे पोस्टरबैनर छपवाने सुलतानपुर गई थीं. सोमवार, 3 जनवरी, 2022 को वे अपनी बोलैरो जीप से गांव लौट रही थीं. शाम के तकरीबन साढ़े 6 बजे का समय था. रास्ते में बाइक सवार 3 लोगों ने जीप को ओवरटेक कर के रोक लिया.

रीता यादव का कहना है, ‘‘मैं पोस्टरबैनर बनवाने गई थी. वहां से घर जा रही थी. रास्ते में हाईवे पर लंभुआ के पास 3 लोगों ने ओवरटेक कर के मेरी गाड़ी को रोका और गाली देते हुए जान से मारने की धमकी दी.

‘‘मेरे ड्राइवर की कनपटी पर पिस्टल लगा दी. मैं ने जब उन्हें तमाचा मारा, तो उन्होंने मेरे पैर पर गोली मार दी और भाग निकले.’’

कांग्रेस ने लगाया आरोप

इस घटना के बाद रीता को लंभुआ सीएचसी अस्पताल पहुंचाया गया. सूचना मिलते ही सीओ सतीश चंद्र शुक्ल सीएचसी पहुंचे और घायल रीता और उन के चालक से पूछताछ की. वहां से रीता यादव को सुलतानपुर जिला अस्पताल पहुंचा दिया गया.

कांग्रेस ने इस मामले को ले कर भाजपा को घेरा है. कांग्रेस ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को ट्विटर पर टैग करते हुए लिखा कि ‘लड़कियों को लड़ने से आप की पार्टी के जंगलराज में भाड़े के गुंडे रोक रहे हैं. महिलाओं की साड़ी खींचने वाले कायरों से इसी कायरता की उम्मीद है. बेटियों की एकजुटता से डरे कायर अब उन पर गुंडे छोड़ रहे हैं’.

सुलतानपुर पुलिस इस मामले को पूरी तरह से संदिग्ध मान रही है. पुलिस अधिकारी विपुल कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि मामले की जांच चल रही है. रीता यादव पुलिस के कुछ सवालों के जवाब नहीं दे पा रही हैं.

पुलिस का कहना है कि किसी बोलैरो जीप को बाइक सवार कैसे रोक सकते हैं? अगर उन की कोई दुश्मनी थी, तो रीता यादव को पैर पर गोली क्यों मारते?

रीता यादव का मामला आगे किस करवट बैठेगा, यह देखने वाली बात होगी, पर यह बात सच है कि विरोध के स्वर को दबाने के लिए अलगअलग तरह से कोशिश की जा रही है.

कई बार राजनीतिक दलों के अंधभक्त समर्थक भी खुद से ऐसे काम करते हैं. ‘हिदुत्व’ व ‘गौरक्षा’ के नाम पर तमाम मौब लिंचिंग की घटनाएं भी हुई हैं.

एक तरफ ‘धर्म संसद’ में भड़काने वाले बयान दिए जाते हैं और सरकार किसी भी तरह की कानूनी कार्यवाही नहीं करती है, वहीं दूसरी तरफ सामान्य विरोध पर गोली मारने जैसी घटनाएं घट रही हैं, जो सरकार के माथे पर कलंक जैसी हैं.

जागरूकता: मैं कुंआरी हूं

संवाददाता

क्या यह पता चल सकता है कि कोई लड़की कुंआरी है या नहीं?

पहली रात को खून नहीं निकलता तो क्या लड़की ने सैक्स किया है?

क्या खेलकूद से भी कुंआरेपन की झिल्ली फट जाती है?

ऐसा क्या करें कि कुंआरेपन की झिल्ली सुहागरात तक बची रहे?

पहली बार सैक्स करने में दर्द नहीं तो क्या लड़की कुंआरी नहीं है?

क्या एक बार खोया हुआ कुंआरापन फिर से पाया जा सकता है?

क्या ज्यादा सैक्स करने से औरत के अंग में ढीलापन आ जाता है?

कोई लड़की अपने कुंआरेपन को कैसे साबित कर सकती है?

लड़के के जोर लगाने से क्या लड़की की सुहागरात का पता चलता है?

द्य क्या ज्यादा हस्तमैथुनकरने से कुंआरेपन की झिल्ली फट सकती है?

तकरीबन 42 फीसदी लड़कियों को ही पहले सैक्स के दौरान खून आता है,

इसलिए यह कहना समझदारी नहीं है कि जिन्हें खून नहीं आया है वे कुंआरी भी नहीं हैं.

ऐसे कई सवाल हैं, जो बड़े होने की दहलीज पर खड़े लड़केलड़कियों के मन में कौंधते रहते हैं, पर उन्हें इन का सही जवाब नहीं मिल पाता. इस की एक वजह तो जरूरी सैक्स ऐजूकेशन का न होना है. चूंकि कुंआरेपन का पहलू बड़े तौर पर लड़कियों से ही जुड़ा रहता है, इसलिए लड़कियां ही इस मामले में ज्यादा परेशान रहती हैं. कई लड़कियां तो प्यार, सैक्स और शादी को ठीक से एंजौय नहीं कर पाती हैं.

एक सर्वे से पता चला था कि भारतीय लड़कियां 17 साल की औसत उम्र में अपना कुंआरापन खो रही हैं, जबकि भारतीय लड़की की शादी की औसत उम्र इस से ज्यादा होती है.

एक और सैक्स सर्वे के मुताबिक, शादी से पहले सैक्स कर चुके मर्दों की तादाद औरतों के मुकाबले 3 गुना है. इस के बावजूद 77 फीसदी मर्द कुंआरी दुलहन ही चाहते हैं. इन का कहना है कि अगर इन्हें पता चले कि उन की होने वाली पार्टनर या पत्नी ने पहले सैक्स किया हुआ है, तो वे उस से संबंध ही नहीं बनाएंगे. यही नहीं, शादी से पहले प्यार करने वाले भी चाहते हैं कि लड़की का किसी से पहले सैक्स न हुआ हो.

गायनोकोलौजिस्ट की राय

हाइमन रैस्टोरेशन या रीवर्जिनेशन एक कौस्मैटिक सर्जरी है, जो फटी झिल्ली को रिपेयर करने के लिए की जाती है. टांकों द्वारा फटी झिल्ली को पुरानी जैसा बनाया जाता है. हाइमनोप्लास्टी के बढ़ते चलन के पीछे शादी से पहले सैक्स की बढ़ती सोच है. यह लड़कियों की शादीशुदा जिंदगी पर असर डाल सकती है. हाइमन केवल सैक्स से ही नहीं, बल्कि खेल जैसे घुड़सवारी या मुश्किल शारीरिक कसरत या फिर नाचने से भी फट सकती है.

यह ओपीडी प्रोसीजर है, जो लोकल एनैस्थिसिया दे कर किया जाता है और इस में तकरीबन डेढ़ घंटे का वक्त लगता है. अगर इसे माहिर डाक्टर द्वारा कराया जाए, तो साइड इफैक्ट जैसे आपरेशन के बाद दर्द, असामान्य रूप से खून बहना, असामान्य वैजाइनल डिस्चार्ज, जलन या इंफैक्शन या अंसतोषजनक नतीजे बहुत कम देखने को मिलते हैं. लड़की 2-3 दिन में सामान्य हो कर काम पर लौट सकती है. पूरी तरह से ठीक होने में 6-7 हफ्ते लगते हैं. आपरेशन के 2-3 हफ्तों तक बैठने और भारी कसरत के प्रति सावधानी बरतें. इस के बाद पहली बार सैक्स करने पर दर्द और खून निकलता है.

हाइमनोप्लास्टी सर्जरी को सुहागरात में लड़की कुंआरी है और खून नहीं निकला, इस के लिए कराई जाती है. इस सर्जरी में वैजाइना से ही टिशू ले कर कृत्रिम हाइमन झिल्ली बनाई जाती है. इस का खर्च तकरीबन 70-80 हजार रुपए आता है. यह सर्जरी एक बार के लिए ही होती है.

लेबियाप्लास्टी यानी डिजाइनर अंग आपरेशन के जरीए जननांग के अंदरूनी हिस्से को कम कर दिया जाता है. हीनभावना के चलते लड़कियां लेबियाप्लास्टी कराती हैं. इस में प्यूबिक एरिया की ऐक्स्ट्रा चरबी को लिपोसक्शन के जरीए कम या फिर सर्जरी से ड्रिम कर देते हैं. इस सर्जरी में भी दिन में ही डिस्चार्ज मिल जाता है और इस का खर्च तकरीबन 50-60 से एक लाख रुपए तक आता है.

वैजाइनोप्लास्टी या कहें वैजाइना टाइटनिंग. यह बाकी 2 सर्जरी से बड़ी सर्जरी है. इस के लिए एक दिन रुकना पड़ सकता है. वैजाइना का ढीला हो जाना और उसे सर्जरी द्वारा टाइट व कसावट लाने के लिए यह सर्जरी की जाती है. इस का खर्च 50-60 हजार रुपए ही है. इस में भी 3 हफ्ते तक सैक्स संबंध मना होते हैं. डिलीवरी के बाद महिला के अंग का ढीला पड़ जाना सामान्य बात है. इसे लैक्स पैरिनियम कहते हैं. वैजाइना से ऐक्स्ट्रा लाइनिंग को हटा कर व चारों ओर के मुलायम टिशू और मांसपेशियों में कसावट ला कर वैजाइना का ढीलापन दूर किया जा सकता है.

आम सवाल

मैं कैसे पता करूं कि मेरी गर्लफ्रैंड या होने वाली बीवी कुंआरी है?

इस तरह के आम सवाल डाक्टरों और कौस्मैटिक सर्जनों के मेल बौक्स में ज्यादा पूछे गए हैं. इस का जवाब है कि इसे जानने का कोई रास्ता नहीं है.

डाक्टरों के मुताबिक,कुंआरापन कोई बड़ा मसला नहीं है, मगर मर्दों की यह पुरानी शिकायत रही है कि पहली रात को खून नहीं निकला. ऐसा सभी के साथ होना जरूरी नहीं है. इस का मतलब यह नहीं है कि वह लड़की कुंआरी नहीं है. किसी लड़की की अंदरूनी झिल्ली स्कूल के दिनों में ही फट जाती है, तो किसी की सुहागरात पर भी नहीं फटती.

एक सच

एक गायनोकोलौजिस्ट के मुताबिक, लड़की के प्राइवेट पार्ट में मौजूद झिल्ली के फटने से खून निकलना कुंआरेपन का सुबूत नहीं है. सच बात यह भी है कि कुछ लड़कियों में झिल्ली जन्म से नहीं होती, लेकिन कुछ लड़कियों की यह परत बेहद लचीली होती है और सैक्स के दौरान भी नहीं फटती है. इतना ही नहीं, कई लड़कियों को इस परत के बारे में भी पता नहीं चल पाता है. झिल्ली को सैक्स किए बिना दूसरी चीजों से नुकसान पहुंच सकता है.

ऐसे पता चले कुंआरापन

लड़की या तो खुद स्वीकार कर ले या वह शादी से पहले पेट से हो चुकी हो. बता दें कि एक झिल्ली कभी भी कुंआरेपन का सुबूत नहीं हो सकती, क्योंकि आजकल तो रीवर्जिनिटी के जरीए सर्जन आसानी से झिल्ली की तरह के टिशू बना लेते हैं.

अगर चौइस दी जाए, तो शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने वाले नौजवान ज्यादातर मामलों में अपने लिए भी कुंआरा पार्टनर ही चाहते हैं. ऐसा लड़के और लड़कियां दोनों के केस में

देखने को मिलता है. लड़कों को लड़कियों के मुकाबले इस मामले में अपनी इच्छा जाहिर करने का ज्यादा मौका मिलता है, इसलिए यह माना जाता है कि कुंआरेपन को ले कर मर्द ज्यादा चिंतित रहते हैं.

सर्जरी कराने या न कराने पर कोई ऐसा दर्द नहीं होता, जो झेला न जा सके. ज्यादातर औरतों को सुहागरात की वजह से भी सैक्स के दौरान होने वाला दर्द बढ़ जाता है.

हमारे समाज में लड़कियों को ऐसे सपने दिखाए जाते हैं कि तकरीबन हर लड़की कुंआरेपन के बारे में सोचते हुए ही बड़ी होती है. आसपास के हालात कैसे भी हों, हर लड़की शादी के बाद सुहागरात को सजनेसंवरने और दुनिया की सब से खास शादी करना चाहती है.

जिंदगी की परेशानियों, हालात से इस दिन का कुछ लेनादेना नहीं रह गया है. यही वजह है कि लड़कियों पर इतने फालतू के दबाव बना दिए गए हैं कि उस से प्यार, लिवइन व शादी तक अनछुई, अनदेखी होने की उम्मीद की जाती है.

लड़की के पार्टनर की सब से बड़ी ख्वाहिश यह होती है कि लड़की कुंआरी हो यानी उस के किसी के साथ शारीरिक संबंध न रहे हों. इस बात को शादी से पहले तो लड़का इशारों में खुले तौर पर लड़की से पूछ ही लेता है. प्यार करने वाले भी पूछे बिना नहीं रहते. लड़की के चालचलन के बारे में पूरी जांचपड़ताल कर ली जाती है.

लड़का सुहागरात के दिन लड़की का कुंआरापन भंग करने के सपने देखता है. आजकल भी कई जगहों पर दूल्हे के घर वाले अगले दिन चादर पर दुलहन का कुंआरापन भंग होने की निशानी यानी खून के धब्बे खोजते हैं. जब ‘कुंआरेपन की झिल्ली’ साइकिल चलाने, दौड़ने, तैरने जैसे सामान्य कामों में ही फट सकती है, तो लड़कियों के पास ही रास्ता बचता है रीवर्जिनिटी पाने का. एक डाक्टरी संस्थान के सर्वे से पता चला है कि लड़कियां रीवर्जिनिटी इसलिए करवाती हैं, ताकि उन की शादीशुदा जिंदगी शांति से बीते.

Bigg Boss 15 फिनाले वीक: ये 7 कंटेस्टेंट पहुंचे ग्रैंड फिनाले में, कौन मारेगा बाज़ी ?

बिग बॉस 15 का यह सीजन काफी सुर्ख़ियों में रहा है , कंटेस्टेंट की तमाम लड़ाई झगड़ों ,शॉकिंग एविक्शन और रोमांस के साथ यह शो अब ग्रैंड फिनाले में पहुँच गया है. सलमान ने इसी बीच फाइनल डेट भी Annaounce कर दी है, हालाँकि ग्रैंड फिनाले में इस बार 5 की जगह 7 कंटेस्टेंट पहुंचे हैं.

 टिकट-टू- फिनाले जीतकर फाइनल वीक में पहुंचे ये कंटेस्टेंट

फिनाले वीक में इस बार 5 कंटेस्टेंट्स अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए हैं. इन कंटेस्टेंट के नाम है :

शमिता शेट्टी, प्रतीक सहजपाल, निशांत भट्ट, करण कुंद्रा, तेजस्वी प्रकाश, रश्मि देसाई और राखी सावंत. पिछले दिनों घर से देवोलिना और अभिजीत घर से एलिमिनेट हो गए और रश्मि देसाई को फाइनल में जगह मिल गई.सातों में सबसे ज्यादा स्ट्रॉन्ग कंटेस्टेंट  प्रतीक सहजपाल, करण कुंद्रा, शमिता शेट्टी और तेजस्वी प्रकाश को माना जा रहा है,और सोशल मीडिया पर इन सभी के फैंस इन्हें जमकर सपोर्ट कर रहे है.

कौन मारेगा बाजी?

बिग बॉस 15 में इस बार 7 कंटेस्टेंट पहुंचे हैं ,लेकिन प्रतीक  सहजपाल, करण कुंद्रा, शमिता शेट्टी और तेजस्वी प्रकाश को ट्रॉफी का स्ट्रांग दावेदार माना जा रहा है. सभी के फैंस सोशल मीडिया पर जमकर सपोर्ट कर रहे हैं अब देखते हैं कि इस सीज़न कि ट्रॉफी किसके नाम होगी.

इस दिन होगा ग्रैंड फिनाले

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बिग  बॉस 15 के फिनाले का कंटेस्टेंट को ही नहीं उनके फैंस को भी बेसब्री से इंतज़ार है ,सलमान ने annaounce किया कि बिग बॉस 15 ग्रैंड फिनाले 30 जनवरी को होगा. इसी दिन फैंस को इस सीज़न का विनर मिलेगा. फैंस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने फेवरेट स्टार को जमकर सपोर्ट कर रहे हैं और उन्हें जिताने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

आखिरी मंगलवार: भाग -1

   वेणी शंकर पटेल ‘ब्रज’

सपना की शादी को 8 साल बीत चुके हैं. जब वह मायके से ब्याह कर पहली बार अपनी ससुराल आई थी, तो नईनवेली दुलहन का खूब स्वागत हुआ था. मंडप के नीचे मुंहदिखाई की रस्म में जो भी सपना को देखता, उस की खूबसूरती की तारीफ करते नहीं थकता था. उसे याद है कि दिनभर शादी की रस्मों के चलते कब शाम हो गई थी, उसे पता ही नहीं चला. खाने के बाद रात को सपना की ननद प्रीति जब उसे सुहागरात वाले कमरे में ले गई तो फूलों से सजी सेज और कमरे की खुशबू से सपना की खुशी दोगुनी हो गई थी. सुहागरात को ले कर जो डर सपना के मन में था, उस की ननद की हंसीठिठोली ने दूर कर दिया था.

सपना पूरी रात के एकएक पल को इसी तरह रोमांटिक तरीके से जीना चाहती थी, पर सुभाष का उतावलापन भी वह साफ महसूस कर रही थी. वह चाहती थी कि वे एकदूसरे के नाजुक अंगों को चूमतेसहलाते आगे बढ़ें कि तभी अचानक सुभाष उस के जिस्म से कपड़े एकएक कर के हटाने लगा था. उन दोनों की सांसों की गरमाहट तेज होती जा रही थी.

अगले कुछ पलों में ही सुभाष के अंदर उठा तूफान एक झटके में ही शांत हो गया था और सपना की चाह अधूरी रह गई थी. सुभाष मुंह फेर कर दूसरी तरफ खर्राटे भर रहा था और सपना के अंदर लगी आग उसे बेचैन कर रही थी. शादी का एक साल बीतते ही सपना की सास उस की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखने लगी थीं कि कब उन की बहू की गोद भरे और आंगन में बच्चे की किलकारियां गूंजें, मगर सपना सुभाष की कमजोरी जान गई थी. इसी के चलते साल दर साल बीतते गए, लेकिन सपना का मां बनने का सपना अधूरा ही रह गया.

घरपरिवार और रिश्तेदारों की चहेती सपना अब सब की नजरों में खटकने लगी थी. कोई तीजत्योहार हो या शादीब्याह का मौका औरतें उस की सूनी कोख को ले कर ताने देने लगी थीं. एक बार तो सपना अपने पति के साथ  सैक्सोलौजिस्ट के पास भी गई थी. वहां पर हुई जांच रिपोर्ट से उसे पता चल गया था कि वह तो मां बन सकती है, पर सुभाष के पिता बनने के कोई चांस नहीं थे. सपना इसी वजह से न जाने कितने मंदिरों और संतमहात्माओं के दरबार में मन्नत मांग चुकी थी, मगर फिर भी उस की गोद नहीं भर पाई.

सपना वैसे तो नए जमाने के खयालों की हिमायती लड़की थी, जो किसी तरह के अंधविश्वास पर भरोसा नहीं रखती थी, पर समाज के तानों की वजह से वह अपनी सूनी गोद भरने के लिए कुछ भी करने को तैयार थी. रातदिन, सोतेजागते इसी चिंता में वह सूख कर कांटा हुए जा रही थी. सुभाष की किराना दुकान आज भी इस छोटे से शहर में खूब चलती है. सुभाष दिनभर दुकानदारी में लगा रहता और रात को ही घर पहुंचता. सपना की सास रातदिन औलाद के लिए उसे भलाबुरा कहती, मगर सपना किसी से अपना दर्द नहीं बांट पाती थी.

ऐसा नहीं था कि औलाद न होने के तानों से अकेले सपना ही परेशान थी, बल्कि सुभाष भी दिनरात इसी चिंता में डूबा रहता. उस के यारदोस्त भी उसे ताने देने लगे थे. एक बार तो सुभाष के खास दोस्त ने उस की मर्दानगी का भी मजाक उड़ाया था. अपनी मर्दाना कमजोरी के चलते औलाद न होने के दुख ने उन दोनों की हंसीखुशी से भरी जिंदगी को बोझिल बना दिया था.

पिछले साल जब पास के गांव में रहने वाली सुभाष की बूआ उस के घर आई थी तो उसी दौरान बूआ ने बताया कि उस के गांव के पास ही एक मंदिर है, जहां पर धर्मराज स्वामी का दरबार लगता है. उन के दरबार में मंगलवार को हाजिरी लगाने से मन की हर मुराद पूरी हो जाती है. वैसे तो धर्मराज स्वामी के बारे में सपना ने भी सुन रखा था, लेकिन जब से बाबाओं द्वारा धर्म के नाम पर औरतों के साथ यौन शोषण की घटनाएं हुई हैं, उस का तो बाबाओं से भरोसा ही उठ गया है.

एक दिन अखबार में सपना ने उसी धर्मराज स्वामी का एक परचा देखा था, जिस में लिखा था कि केवल एक नारियल द्वारा सभी समस्याओं का समाधान किया जाता है. परचे में बताया गया था कि पतिपत्नी को एकदूसरे के वश में करने के अलावा औलाद भी पा सकते हैं. वह परचा देख कर सपना के मां बनने की उम्मीद एक बार फिर से जिंदा हो उठी. उस ने आसपड़ोस की औरतों से जब इस की चर्चा की तो कुछ औरतों ने तो इतना तक भरोसा दिलाया कि एक बार उन बाबा के दरबार में जा कर तो देख, तुझे औलाद जरूर होगी.

सपना ने जब सुभाष को धर्मराज स्वामी के दरबार के बारे में बताया और वहां चलने को कहा, तो सुभाष ने साफ मना कर दिया, ‘‘मैं इस तरह के अंधविश्वास पर भरोसा नहीं करता.’’ सपना ने उसे समझने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘इतने सालों में हम ने औलाद के लिए कहांकहां की खाक नहीं छानी, तो इतने पास बूआ के गांव जाने में हर्ज क्या है.’’

सुभाष सपना का दर्द समझता था. वह उसे दुखी नहीं करना चाहता था, इसलिए उस ने यह सोच कर हां कर दी कि इसी बहाने बूआ के घर घूमना भी हो जाएगा.

सुभाष और सपना मंगलवार को बूआ के गांव पहुंचे, तो बुआ उन्हें शाम के समय मंदिर ले गई. मंदिर के बड़े दरवाजे से अंदर जाते ही उन दोनों ने देखा कि गले में लाल गमछा डाल कर घूम रहे सेवादार, जिन में औरतें भी शामिल थीं, हर आनेजाने वाले से पूछताछ कर रही थीं. लोगों के सामने वे धर्मराज की तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रही थीं. सपना और सुभाष ने भी धर्मराज स्वामी से मिलने की इच्छा जताई तो सेवादारों ने उन्हें अंदर भेज दिया.

अंदर एक बड़े से हाल में एक चबूतरे पर बिछे आसन पर पीले कपड़ों से सजेधजे तकरीबन 45-50 साल की उम्र के धर्मराज स्वामी के सामने लोगों का हुजूम लगा हुआ था. लाइन में खड़े लोगों में नारियल दे कर उन के पैर छूने की होड़ सी मची थी. लोग उन के पैर छू कर अपनी परेशानी बताते और धर्मराज स्वामी उन्हें 5 से 7 मंगलवार को दरबार में हाजिरी लगाने की सलाह देते.

देखतेदेखते सपना का नंबर भी आ गया. बूआ के साथ सपना और सुभाष ने धर्मराज के पैर छूते हुए नारियल दे कर अपनी परेशानी बताई.

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