बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर ने कल अपना 37वां जन्मदिन मनाया है. इस खास मौके पर अर्जुन कपूर अपनी गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा के साथ नजर आएं. मसाइका अरोड़ा ने बर्थडे सेलिब्रेशन की कुछ तस्वीर शेयर की है जिसमें वह काफी ज्यादा कुल नजर आ रहे हैं.
मलाइका अरोड़ा ने जो तस्वीर शेयर की है उसमे वह दोनों काफी ज्यादा कुल नजर आ रहे हैं. दोनों साथ में मस्ती करते नजर आ रहे हैं. मलाइका अर्जुन ने जो तस्वीर शेयर कि है उसमें दोनों साथ में एक बेस्ट कपल गोल देते नजर आ रहे हैं.
View this post on Instagram
मलाइका ने जो तस्वीर शेयर कि है उसमें अर्जुन कपूर काफी ज्यादा प्यारे लग रहे हैं. दोनों को साथ में देखकर फैंस काफी ज्यादा प्यारे कमेंट कर रहे हैं.
एक तस्वीर में मलाइका अरोड़ा फ्रेंच फ्राई खाती हुई नजर आ रही हैं और इसमें किलर पोज दे रही हैं. जहां एक तरफ मलाइका अरोड़ा फ्रेंच फ्राई खा रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ अर्जुन कपूर बर्गर खाते नजर आ रहे हैं.
मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर तस्वीर में एक दूसरे के साथ बेस्ट कपल बॉंड शेयर करते हुए नजर आ रहे हैं. मलाइका अरोड़ा के बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर इस तस्वीर में बड़े प्यारे लग रहे हैं. अर्जुन कपूर की बर्थडे पार्टी की तस्वीर जमकर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है.
अर्जुन मलाइका के फैंस भी उन्हें जन्मदिन की खूब सारी बधाइयां दे रहे हैं.
एक्ट्रेस शहनाज गिल इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं. शहनाज गिल कभी सलमान खान के गले लगाती नजर आती हैं तो वह कभी अपने दिमाग को शांत करने के लिए ब्रह्मकुमारी का सहारा लेती नजर आती हैं.
इसी बीच शहनाज गिल का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें वह डांस करती नजर आ रही है. दरअसल, शहनाज गिल का यह वीडियो उमंग 2022 का है. जिसमें वह डांस करती नजर आ रही हैं. जो मुंबई पुलिस कर्मियों के लिए हर साल आयोजित किया जाता है.
View this post on Instagram
इस वीडियो में शहनाज गिल चिकनी चमेली गाने पर डांस करती नजर आ रही हैं. फैंस शहनाज का यह वीडियो देखने के बाद से जमकर उनकी तारीफ करते नजर आ रहे हैं.
कुछ लोगों का कहना है कि शहनाज गिल सिद्धार्थ शुक्ला वाले सदमें से बाहर आ चुकी हैं. उन्हें इस तरह से डांस करते हुए देखकर फैंस को काफी ज्यादा अच्छा लग रहा हैं.
बता दें कि सिद्धार्थ शुक्ला के जाने के बाद से शहनाज गिल काफी ज्यादा मायूस हो गई थी. उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था कि वह इस सदमें से कभी उभर ही नहीं पाएंगी. लेकिन अब शहनाज गिल अपने जीवन में काफी ज्यादा आगे बढ़ गई है. इसे देखकर अच्छा लग रहा है.
देश के कई गरीब राज्यों में गरीब किसानों में घरों में जीने का मकसद एक ही होता रहा है, सेना की नौकरी. ब्रिटीश सरकार ने अपने राज के दौरान बड़ी भारी गिनती में हरियाणा, बुंदेलखंड, पंजाब, मद्रास आदि से सैनिक गांवों में जमा किए थे, उन्हें ट्रेङ्क्षनग दी थी और उन के बल पर दुनिया भर में अपना राज जमाया था. तब से सेना की नौकरी का फायदा देश के गरीब किसान घरों को मालूम है और सेना में होने वाली मौतों के खतरे के बावजूद लाखों जवान सेना में नौकरी पाने के लिए रिक्रूटमैंट सैंटरों में जमा होते रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी सरकार के जैसे पढ़ाई, रेलों, हवाई अड्डïों, प्रैस, अदालतों, संसद, विधानसभाओं, जांच ऐजेसियों का अपनी अधमरी पोलिसियों से कचरा किया है वैसा की कचरा सेना केे साथ करने की योजना बनाई है जिस में 17.5 साल से 21 साल तक के जवानों को थल, वायु और नौ सेना में 4 साल के भर्ती किया जाएगा और 21 से 25 साल की उम्र में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा, एक चैक पकड़ा कर जिस में एक कार तक नहीं खरीदी जा सकती, एक प्लाट तक नहीं मिल सकता, एक दुकान तक नहीं खरीदी जा सकती.
4 साल तक इन अग्निवीरों को पकापकाया खाना, बनीबनाई ड्रेस, अच्छा मकान, आर्मी ट्रकों में आनेजाने की सुविधा देकर इन्हें समाज से काट कर बंदूकों गोलियों
से घेर कर रखा जाएगा और फिर उम्मीद की जाएगी कि ये उस देश में नौकरियां ढूंढ़ें जहां इन 4 सालों में इन के साथी अपनेअपने हुनर सीख चुके होंगे, पढ़ाई की 2-3 बाधाएं दूर कर चुके होंगे या फिर व्यापार या किसानी में कुछ जानकार बन चुके हुए. इन रिटायर्ड अग्निवीरों को 4 साल में सिर्फ परेड करना, अफसर का हुक्म मानना, हथियार चलाना सिखाया जाएगा, ऐसी ट्रेङ्क्षनग जिस की देश का कोई जरूरत नहीं.
अगर देशभर के युवा सडक़ों पर निकल कर इस नई भगवाई स्कीम को ओपोज कर रहे हैं और वह कर रहे हैं जो किसान या मुसलमान करते तो उन पर बुलडोजर चलवा दिए जाते, तो बड़ी बात नहीं. इस नई स्कीम से सरकार लाखों को चाहे हर साल सेना नौकरी न मिलती पर उन के सपने तक चकनाचूर कर दिए. सेना की नौकरी मिलने पर भी उन का कल भरोसेमंद नहीं रहेगा और सैनिक होने पर ङ्क्षजदगी भर पटरी पर रहने की उम्मीद चली जाएगी. सैनिकों से शादी करने के लिए आज लड़कियां विधवा होने के रिस्क के बावजूद तैयार हो जाती है क्योंकि सेना की नौकरी करने के बाद आॢथक सुरक्षा मिलती रहती थी. अग्निवीरों को कोई पेंशन नहीं मिलेगी, कोई हैल्थ कार्ड नहीं मिलेगा, ङ्क्षजदगी का कोई खूंटा नहीं रहेगा. लाखों लड़कियों के सपने भी चकनाचूर हो गए कि वे सैनिक से शादी कर के पक्की गृहस्थी बना सकेंगी.
अब शादी तो रिटायर्ड होने के बाद हो सकेगी और बिना पक्की नौकरी वाले को कौन लडक़ी अपनाएगी? अगर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा, आंध्र के युवा सडक़ों पर उतरे हैं तो कोई बड़ी बात नहीं क्योंकि जिन सपनों के महलों में वे रह रहे थे, उन को एक झटके उन की भगवा सरकार ने चकनाचूर कर दिया. जिन्हें मुसलमानों के घर जलाने के ट्रेङ्क्षनग दी गई थी, वे अब अपनी सरकार की रेलें, पोस्टऔफिस और भाजपा दफ्तर जला रहे हैं.
देश के सारे युवाओं को सेना में चाहे नौकरी नहीं मिलती पर उम्मीद तो रहती थी और अब वह भी गई क्योंकि 4 साल की नौकरी के लिए कौन मगजमारी करेगा?
ईद के अगले दिन 4 मई, 2022 की रात को करीब 9 बजे का वक्त था. तेलंगाना में हैदराबाद के सरूरनगर इलाके की मेन सड़क पर गाडि़यों का आवागमन लगातार बना हुआ था. पैदल यात्रियों की भी भीड़भाड़ थी. तहसीलदार औफिस से ठीक पहले चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल के ग्रीन होने के इंतजार में हर तरह की छोटीबड़ी गाडि़यां खड़ी थीं. कुछ पैदल लोग सड़क पार कर रहे थे, जबकि कुछ सड़क के किनारे खड़े थे.
ग्रीन सिग्नल होने का इंतजार स्कूटी पर बैठे एक नवविवाहिता जोड़े को भी था. वह युवक कोई और नहीं बिलियमपुरम नागराजू था, जिस ने आशरीन सुलताना के साथ हाल ही में प्रेम विवाह किया था. शादी के बाद आशरीन ने अपना नाम पल्लवी रख लिया था.
गहरे सांवले रंग के नागराजू के साथ पीछे चिपक कर बैठी गोरीचिट्टी पल्लवी साइड मिरर में अपनी सूरत निहार रही थी. तभी युवक पत्नी से मुसकराते हुए बोला, ‘‘अपनी खूबसूरती आईने को दिखा रही हो या मुझे?’‘‘अरे नहीं जी, मुहांसे देख रही हूं. कुछ ज्यादा ही निकल आए हैं,’’ पल्लवी बोली.
‘‘देसी उपाय करो, ठीक हो जाएंगे. वैसे तुम इस में भी गजब की सुंदर दिखती हो,’’ नागराजू ने मजाक किया.‘‘अच्छाजी! तुम तो दादी अम्मा की तरह बोलते हो,’’ पल्लवी भी मजाकिया लहजे में बोली. तभी सिग्नल की लाइट ग्रीन हो गई.
पल्लवी ने नागराजू की कमर कस कर पकड़ ली और उस ने स्कूटी तेजी से आगे बढ़ा दी. स्कूटी के अचानक तेज होने से पल्लवी थोड़ा पीछे की ओर झुक गई और संभलती हुई बोली, ‘‘गिराने का इरादा है क्या?’’‘‘तुम्हें कैसे गिरा सकता हूं, तुम तो मेरी जान हो.’’ नागराजू प्यार जताते हुए बोला.
‘‘अच्छा ऐसा है क्या?’’पल्लवी का बोलना था कि उस के पति नागराजू ने स्कूटी को अचानक ब्रेक लगा दिया.‘‘अरे..अरे…अब क्या हुआ?’’ पल्लवी ने तेज आवाज में पूछा, लेकिन तब तक वह स्कूटी से नीचे धड़ाम से गिर चुकी थी. नागराजू भी उस से अलग जा गिरा था.
पल्लवी को मामूली चोट आई थी. तुरंत खुद को संभालती हुई उठ खड़ी हुई. जबकि नागराजू उस से थोड़ा दूर गिरा हुआ ही था. वह उठने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उठ नहीं पा रहा था. 2 युवक उसे घेरे खड़े थे.
एक बोला, ‘‘उठ हरामजादे… कुत्ते की औलाद. चला है इश्क लड़ाने. आज देखता हूं तुझे कौन बचाता है.’’
आशरीन उर्फ पल्लवी को आवाज जानीपहचानी लगी. उसे समझने में देर नहीं लगी. यह उस के बड़े भाई मोबिन की आवाज थी. वह हाथ में रौड लिए था.पल्लवी ने तुरंत उस के पैर पकड़ लिए, ‘‘भाई छोड़ दे. अब ये मेरे शौहर हैं. तुम्हारे दूल्हाभाई. मत मार इन्हें. तुझे जो कुछ कहना है मुझ से कह…’’
आशरीन उर्फ पल्लवी की बात अनसुनी कर गुस्से में चाकू पकड़े दूसरे युवक ने उसे खींच कर अलग कर दिया. चीखता हुआ गुस्से में बोला, ‘‘चल हट यहां से, आज इस का काम तमाम कर के ही दम लूंगा. बड़ी मुश्किल से महीने भर बाद हाथ लगा है.’’‘‘छोड़ दे भाई, इन्हें छोड़ दे. हमारी शादी हो चुकी है,’’ पल्लवी गिड़गिड़ाई.‘‘चल भाग यहां से हरामजादी, कुतिया कहीं की. भाग जा, वरना तुझे भी नहीं छोड़ूंगा. मुसलमानों में लड़कों की कमी हो गई है, जो तूने इस हिंदू से शादी की है. और वह भी नीची जाति के लड़के से. आज पकड़ में आया है, अब इस की खैर नहीं.’’ गुस्से में आगबबूला युवक ने अपने पति की जान की भीख मांगती बहन आशरीन को जोर का धक्का दिया.
खुद को संभालती पल्लवी कभी अपने पति को रौड से पीट रहे भाई की तरफ भागती तो कभी चाकू लिए दूसरे हमलावर को पकड़ने की कोशिश करती. लेकिन वह कोशिश के बाद भी सड़क पर जख्मी छटपटाते पति को नहीं बचा पा रही थी.तब तक वहां चारों ओर काफी भीड़ इकट्ठी हो गई थी. उन में अधिकतर मारपीट, हंगामे और खूनखराबे का तमाशा देख रहे थे तो कुछ लोगों ने अपनेअपने मोबाइल से वीडियो बनानी शुरू कर दी थी.जबकि हताश और विचलित पल्लवी जमा भीड़ में सभी से हाथ जोड़ कर पति को बचाने की गुहार लगा रही थी. गिड़गिड़ा रही थी कि कोई तो उस के पति को खून के प्यासे दरिंदों से बचा ले.
हमलावरों की आंखों में उतर आया था खून पल्लवी ने रौड से पिटाई कर रहे भाई के हाथ पकड़ लिए. रौड छीनने की कोशिश करती हुई बोली, ‘‘छोड़ दो, इन्हें छोड़ दो. जैसा तुम कहोगे मैं वैसा ही करूंगी. तुम चाहते हो कि मैं घर लौट जाऊं तो चलती हूं. मैं तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूं, लेकिन इन्हें छोड़ दो.’’
निर्दयी बने दोनों हमलावरों की आंखों में तो खून उतर आया था. एक ने युवती को भी रौड से पीट डाला, जबकि दूसरे ने नागराजू को चाकुओं से ताबड़तोड़ वार करते हुए गोद डाला.नागराजू की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. बर्बरता का यह मंजर करीब 20 मिनट तक चलता रहा, लेकिन तमाशबीन लाश बने रहे और दोनों हत्यारे चाकू और रौड लहराते हुए वहां से फरार हो गए.
थोड़ी देर में ही घटनास्थल पंजाल अनिल कुमार कालोनी की मेनरोड पर सरूरनगर थाने की पुलिस आ गई. थानाप्रभारी के. सीथाराम को 23 वर्षीय आशरीन सुलताना उर्फ पल्लवी ने सब कुछ बता दिया.
आशरीन ने थानाप्रभारी को यह भी बताया उन्होंने इसी साल 31 जनवरी को हैदराबाद के एक आर्यसमाज मंदिर में हिंदू रीतिरिवाज से 25 वर्षीय बिलियमपुरम नागराजू के साथ शादी कर ली थी. इस के एक दिन पहले ही उस ने अपना हिंदू नाम पल्लवी रख लिया था.आशरीन के अलावा घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की गई. इसी के साथ घटना की सूचना तत्काल पुलिस के उच्च अधिकारियों को दे दी गई. साथ ही लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस के सामने सब से पहली चुनौती वारदात के बाद फरार हमलावरों की गिरफ्तारी की थी.
मामला तुरंत राज्य के गृह मंत्रालय तक जा पहुंचा और इस घटना की राजनीतिक गलियारे में चर्चा होने लगी. तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन ने इस मामले में राज्य सरकार से डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी. इसे हिंदूमुसलिम और दलित की हत्या के नजरिए से देखा जाने लगा.इस बीच तेलंगाना में भाजपा नेताओं ने हमलावरों के खिलाफ सख्त काररवाई की मांग की. तेलंगाना के भाजपा विधायक राजा सिंह ने हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी की मांग की.
डीसीपी सुनप्रीत सिंह और एलबी नगर के एसीपी पी. श्रीधर रेड्डी के आदेश पर पुलिस टीम बनाई गई और सीसीटीवी के फुटेज निकलवाए गए. सीसीटीवी की फुटेज के अनुसार, घटना की रात नागराजू आशरीन के साथ अपनी बहन के घर से अपने घर लौट रहा था. उसे सरूरनगर में हमलावरों ने रास्ते में रोक लिया था.
सीसीटीवी कैमरों और मोबाइल वीडियो में कैद हमले के कथित दृश्यों में 2 लोग नागराजू की बेरहमी से पिटाई करते हुए दिख रहे थे, जिस से वह खून से लथपथ हो गया.
अगले रोज 5 मई, 2022 को सरूरनगर पुलिस ने नागराजू की बेरहमी से हत्या करने वाले दोनों हमलावर गिरफ्तार कर लिए. इस संबंध में सरूरनगर पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 302 और एससी/एसटी (पीओए) संशोधन अधिनियम 2015 की धारा 3 (2) (वी) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया.
आरोपी हुए गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदराबाद के बालानगर इलाके के गुरुमूर्ति नगर में रहने वाले सैय्यद मोबिन अहमद (30 साल) और रंगारेड्डी जिले के शेरिलिंगमपल्ली के तारानगर इलाके के रहने वाले मोहम्मद मसूद अहमद (29 साल) के रूप में हुई.सैय्यद मोबिन अहमद आशरीन का भाई था. वह एक फल विक्रेता है, जबकि अन्य गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद मसूद पेशे से मोटर मैकेनिक है. मृतक नागराजू मलकपेट के एक मारुति शोरूम में मार्केटिंग का काम करता था. वह अनुसूचित जति माला समुदाय से आता था.
आशरीन ने घटना के पीछे के कारण के बारे में बताया. बड़ा भाई सैयद मोबिन अहमद को उस के नागराजू से प्रेमसंबंध पसंद नहीं थे. वह उस का घोर विरोधी बना हुआ था. वह बारबार कहता था कि नागराजू पढ़ालिखा है तो क्या हुआ, है तो नीची जाति का. हमें अपनी कौम में रहना है, यहीं जीना है, यहीं मरना है तब दूसरी कौम से रिश्ता क्यों बनाएं?
मोबिन ने उसे शादी से पहले इस के खिलाफ चेतावनी दी थी. फिर 30 जनवरी, 2022 को उस ने घर छोड़ दिया. तब वह अपना मोबाइल फोन साथ नहीं ले जा पाई थी.वारदात के दिन वह पति नागराजू के साथ स्कूटर से अपने किराए के कमरे पर जा रही थी. सरूरनगर के अनिल कुमार कालोनी के पास उसे हमलावारों ने रोक लिया था. अचानक उन पर हमले होने लगे थे. 2 हमलावर थे, जिन में वह सिर्फ भाई को ही पहचान पाई. दूसरे को वह नहीं जानती है.साथ ही आशरीन ने यह भी कहा कि उस ने मदद के लिए वहां खड़े तमाशबीनों से भी भीख मांगी थी, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया, जबकि उस के पति नागराजू को सब के सामने सिग्नल पर पीटा जा रहा था.
आशरीन ने नागराजू की हत्या का आरोप सीधेसीधे अपने भाई मोबिन अहमद और उस के साथी मोहम्मद मसूद पर लगाया. वह रोरो कर कहने लगी, ‘‘मैं हत्यारों से अपने पति के जान की भीख मांगती रही. लेकिन दोनों कसाई बने रहे. मेरे पति को उन्होंने चाकुओं से गोद दिया. मेरी आंखों के सामने मेरे पति की हत्या कर दी.’’
वीडियो हुआ वायरल
इस हत्याकांड के वीडियो में नागराजू की हत्या करता आशरीन का भाई साफ दिख रहा था. आशरीन अपने भाई से पति को बचाने की कोशिश करती दिख रही थी, लेकिन हत्यारोपी उसे धक्का मार कर दूर झटक देता है और जमीन पर पड़े नागराजू के सिर पर वार करता रहता है. यह वीडियो किसी छत से शूट किया गया था.वारदात में आशरीन ने नागराजू द्वारा सुने गए अंतिम शब्द के बारे में भी बताया कि उस का पति भी जान बचाने की भीख मांग रहा था, ‘‘मुझे क्यों मार रहे हो, मुझे छोड़ दो, जाने दो. मैं तुम्हारा जीजा हूं.’’
इस के बावजूद नागराजू के साले मोबिन का दिल नहीं पसीजा था. वह गैरधर्म में हुई शादी से बहुत गुस्से में था. गुस्सा इतना था कि साथी के साथ मिल कर अपनी ही बहन का सुहाग उजाड़ दिया.
आशरीन बताती है कि नागराजू अपने प्यार की खातिर अपना धर्म बदलने को भी राजी था. वह इसलाम धर्म कुबूलने को तैयार थे. फिर भी उस का भाई नहीं माना. आशरीन ने बताया कि शादी से पहले ही उस ने नागराजू को कहा था कि उस के घर वाले इस शादी से खुश नहीं हैं और वे उस की जान भी ले सकते हैं. इस पर नागराजू ने कहा था कि उसे किसी बात की परवाह नहीं है. वह जिए या मरे, हर हाल में आशरीन के साथ ही रहना चाहता है.नागराजू सिकंदराबाद के मरेडपल्ली का रहने वाला था और पुराने शहर मलकपेट में एक कार शोरूम में सेल्समैन का काम करता था. इस मामले को ले कर एसीपी पी. श्रीधर रेड्डी ने जांच की.
जांच में पाया कि हत्या से एक महीने पहले से मोबिन ने आशरीन और नागराजू का पता लगाने के लिए पहली फरवरी, 2022 को बालानगर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी. साथ ही अपने स्तर से उन्हें तलाश रहा था, लेकिन इस में उसे सफलता नहीं मिल पा रही थी.
यूं शुरू हुई मोहब्बत की दास्तान
आशरीन ने नागराजू से प्यार किया था. इस प्यार के लिए उन्होंने धर्म और जाति की सभी बंदिशों से टकराने की हिम्मत जुटाई थी. शादी के बाद दोनों ने जिंदगी भर साथ रहने के वादे किए थे, कसमें खाई थीं.
वे अपने वादे निभाते भी जा रहे थे, लेकिन उन के सपने हमेशा टूटते भी रहे. …और वह काला दिन भी आ गया, जब उन के सारे सपने सब के सामने मिट्टी में मिल गए. सारे सपने अपने प्रियतम के खून में तब मिल गए, जब उस की आंखों के सामने नागराजू की हत्या हो गई.
नागराजू की हत्या की एकमात्र वजह उस का एक मुसलिम लड़की से प्रेम करना, उस से शादी करना ही था. दोनों के परिवार उन की शादी से खुश नहीं थे. आशरीन के भाई की नाराजगी तो कुछ अधिक ही थी, जबकि आशरीन अपनी जिंदगी नागराजू के साथ ही गुजारना चाहती थी.
हैदराबाद से करीब 80 किलोमीटर दूर है तालुका विकाराबाद. इसी तालुका में एक गांव मारपल्ली है. यही नागराजू का गांव है. आशरीन का गांव गानपुर यहां से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है. नागराजू हत्याकांड के बाद दोनों के परिवार अपनेअपने गांवसे दूर जा कर कहीं छिप गए. दोनों गांवों में हिंदू और मुसलमानों की आबादी लगभग बराबर है.आशरीन और नागराजू एकदूसरे को तब से जानते हैं, जब वे किशोर उम्र के थे. दोनों ने एक साथ स्कूल और कालेज में पढ़ाई की. वहीं से उन के बीच दोस्ती हुई और फिर वे प्रेमीयुगल बन गए.
नागराजू ने की थी घर वालों को मनाने की कोशिश
नागराजू को आशरीन इसलिए पसंद थी, क्योंकि सारे दोस्तों में एक वही थी, जो उसे इंसान की तरह समझती थी, उस ने कभी भी उसे नीची जाति के नजरिए से नहीं देखा. बल्कि उसे हमेशा अधिकार के लिए लड़ने की हिम्मत बढ़ाती रहती थी.2 साल पहले नागराजू ने आशरीन से कहा कि वह बड़े शहर में जा कर नौकरी करना चाहता है. वहीं रह कर पहले कोई प्राइवेट जौब कर लेगा और अच्छी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी करेगा. इसी बीच कोरोना का दौर आ गया और उस की योजना धरी की धरी रह गई. पढ़ाई भी पिछड़ गई.
एक रोज आशरीन ने नागराजू को फोन पर बताया कि उस के घर वाले शादी करने के लिए लड़का देख रहे हैं. इसलिए वह अपने घर वालों से बात करे.नागराजू ने अपने मातापिता से आशरीन से शादी के बारे में जिक्र किया. दूसरी तरफ आशरीन ने अपनी मां से नागराजू की तारीफ करते हुए उस से निकाह करवाने की मिन्नत की. दोनों के घर वालों ने उन की शादी से इनकार कर दिया. दोनों ने एक ही वजह बताई, ‘‘हमारी कौम अलगअलग है. यह नहीं हो सकता.’’
इस पर नागराजू ने आशरीन की मां से कहा कि वह आशरीन के लिए इसलाम धर्म अपनाने को राजी है.
कुछ इसी तरह की बात आशरीन ने नागराजू की मां से कही थी. उन्होंने साफ लहजे में कहा था कि वह नागराजू से शादी करने और उन के परिवार में घुलमिल कर रहने के लिए हिंदू धर्म अपनाने को राजी है. संयोग से धर्म परिवर्तन करने के मामले में आशरीन ने ही पहल की और और हिंदू नाम पल्लवी रख लिया.
आशरीन ने अपने प्यार के लिए धर्म के बंधनों को तोड़ दिया था. कहने को तो नागराजू और आशरीन के बीच धर्म कभी भी कोई परेशानी नहीं था क्योंकि दोनों एकदूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे, किंतु सामाजिक और पारिवारिक संतुष्टि के लिए आशरीन ने अपने प्यार के लिए धर्म के बंधनों को तोड़ दिया था.
आर्यसमाज मंदिर में की थी शादी
आशरीन हमेशा ही विरोध करने वालों को कहती थी, ‘मुझे राजू के हिंदू होने से कोई समस्या नहीं थी. मैं हमेशा सिर्फ यह सोचती थी कि वो मेरे लिए हैं. हिंदूमुसलिम जैसा कुछ भी हमारे बीच नहीं था. हम दोनों एकदूसरे को समझते थे और हंसीखुशी अपनी जिंदगी बिता रहे थे.’कहने को तो प्यार के सहारे उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया, लेकिन हर कोई आशरीन और नागराजू की तरह नहीं सोचता है, कुछ लोग जो धर्म और जाति को इज्जत से जोड़ कर देखते हैं, उन्हें नागराजू और आशरीन जैसों के सपनों को मौत के घाट उतारने में पलभर भी नहीं लगता.
हैदराबाद के लक्ष्मीनगर इलाके में एक आर्यसमाज मंदिर से उन्हें बाकायदा शादी का सर्टिफिकेट दिया गया और वहां के पंडित एम. रविंद्र ने दोनों की वैदिक रीति और गायत्री मंत्रोच्चारण के साथ शादी करवाई. इस मंदिर में शादी के लिए बहुत से लोग आते हैं, जिन में अंतरधार्मिक विवाह वाले भी होते हैं.
वहां शादी के रीतिरिवाज शुरू करने से पहले लड़कालड़की को समझाया भी जाता है. बाकायदा उन की काउंसलिंग की जाती है.उन के परिवार और परिवार के विचारों के बारे में पूछा जाता है. आर्यसमाज मंदिर में शादी करने से पहले शख्स को हिंदू धर्म अपनाना होता है. आशरीन ने ऐसा करने का फैसला किया था. जब कोई ईसाई और मुसलिम शादी करते हैं तो उन्हें हिंदू धर्म में परिवर्तन करना होता है. हिंदू धर्म अपनाने के लिए उन्हें कुछ चीजें करनी होती हैं. जो हिंदू धर्म स्वीकार करते हैं, सिर्फ वही यहां शादी कर सकते हैं.
आशरीन और नागराजू की शादी के समय भी ऐसा ही हुआ. उन्होंने भी गायत्री मंत्र का जाप किया. ये बातें पुजारी एम. रविंद्र ने बताईं. उन्होंने बताया कि हर जोड़े की तरह नागराजू और आशरीन को भी इस बारे में सब कुछ बताया और समझाया गया था.आशरीन मोबिन की तीसरी और छोटी बहन है. परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी मोबिन पर है. उस का फल का कारोबार है और परिवार का खर्च वही उठाता है. एक तरह से घर पर उस के फैसले को ही महत्त्व दिया जाता है. वह आशरीन से 2 बड़ी बहनों की शादियां कर चुका था.
मोबिन ने आशरीन की शादी के बाद अपनी शादी की योजना बनाई थी. इसी बीच उसे पता चला कि उस की बहन आशरीन पास के गांव के ही नागराजू से प्यार करती है.दूसरी कौम का होने के चलते मोबिन ने उसे समझाया था. जब वह भाई की बात मानने को राजी नहीं हुई, तब उस ने उस की पिटाई भी कर दी थी.
उस के बाद ही आशरीन ने घर छोड़ने का निर्णय ले लिया था और 30 जनवरी, 2022 की रात करीब 8 बजे किसी को बिना बताए घर से निकल गई थी. साथ में नागराजू भी था. अगले दिन उस ने हिंदू परंपरा के अनुसार पुराने हैदराबाद स्थित आर्यसमाज मंदिर में नागराजू से शादी कर ली थी. आशरीन के घर वालों को जब उस शादी की जानकारी हुई, तब उन्होंने नागराजू से अपनी बहन को छोड़ने के लिए दबाव बनाया. लेकिन नागराजू और उस के परिवार ने इनकार कर दिया. इस के बाद ही मोबिन ने नागराजू को मारने की योजना बनाई.
ऐप से तलाशा नागराजू को
आशरीन उर्फ पल्लवी और नागराजू की तलाश करने के लिए आरोपियों ने ‘फाइंड माई डिवाइस’ नाम के ऐप का इस्तेमाल किया. इस का खुलासा मोबिन ने रिमांड के दौरान पुलिस से पूछताछ में किया.
उस ने बताया कि वह अपने साथी के साथ मिल कर करीब एक महीने से नागराजू की तलाश में जुटा हुआ था. वारदात से पहले उन्होंने नागराजू की हत्या के लिए उसे ट्रैक करने की कोशिश की. उस का पता लगाने के लिए मोबाइल स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया.हालांकि हत्या के दिन आरोपी ने पहले कार शोरूम के बाहर की हत्या करने की कोशिश की थी, जहां नागराजू काम करता था. वहां ट्रैफिक अधिक होने के चलते वह वारदात को अंजाम नहीं दे पाया.
जब आशरीन और नागराजू को मोबिन के योजना की भनक लगी, तब वे सरूरनगर आ गए. वहीं नागराजू ने एक कार के शोरूम में नौकरी कर ली. उधर मोबिन नागराजू की तलाश में लगा रहा.रिपोर्ट के अनुसार, मोबिन ने अपनी बहन के मोबाइल से नागराजू का नंबर निकाल लिया था. आशरीन के फोन में तलाशी के दौरान नागराजू की मेल आईडी भी मिल गई थी. इस के बाद उस ने फाइंड माई डिवाइस ऐप डाउनलोड किया और नागराजू को ट्रैक करने के लिए उस के मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का यूज किया.
उस के बाद वह करीब एक हफ्ते तक नागराजू की तलाश में जुटा रहा. इस के लिए ऐप पर नजर बनाए रखी. वहीं से मोबिन को नागराजू की लोकेशन सरूरनगर की मिली. उस के बाद मोबिन ने 4 मई, 2022 को अपने साथी को फोन कर सरूरनगर बुलाया.
आंखों के सामने घूमता है वह खौफनाक मंजर
मोबिन के कहने पर उस का साथी मसूद अहमद आने को राजी हो गया. दोनों एक साथ बस से लोहे की रौड और चाकू ले कर मियापुर पहुंच गए. मियांपुर से मोबिन अपने एक अन्य साथी के साथ सरूरनगर के लिए रवाना हुआ. वहां उन्होंने फाइंड माई डिवाइस ऐप के जरिए नागराजू की सटीक लोकेशन का पता कर लिया.ऐप में नागराजू की लोकेशन कालोनी के मेनरोड पर मूसाराम बाग में दिखी. मोबिन जब वहां पहुंचा, तब नागराजू दिख गया. उस के साथ आशरीन भी थी.
इस के बाद बाइक पर सवार मोबिन और मसूद ने मिल कर स्कूटी चला रहे नागराजू और आशरीन को रोका. स्कूटी के एक झटके में रुकते ही मोबिन ने नागराजू के सिर पर लोहे की रौड से वार कर दिया. एक ही वार में नागराजू सड़क पर गिर गया. इस के बाद मोबिन और मसूद रौड और चाकू से नागराजू पर ताबड़तोड़ हमला करने लगे.अपनी आंखों के सामने अपने पति की न सिर्फ मौत, बल्कि बर्बर हत्या देखने वाली आशरीन का अब कोई ठौरठिकाना तक नहीं बचा है.
वह कहती है, ‘‘मैं अपने भाई से मिलना चाहती हूं. मैं राजू के बिना जिंदा नहीं रहना चाहती. लेकिन मैं अपने भाई से बहुत नाराज हूं और सिर्फ यही एक कारण है कि मैं जिंदा हूं. जिस तरह से उस ने राजू को… मेरे पति को मारा, मैं भी उस को उसी तरह मारना चाहती हूं. उसे भी मेरा दर्द महसूस होना चाहिए.’’
पूरी तरह टूट चुकी आशरीन जब भी अपनी बातें बताने लगती है, उस समय भी उस के चेहरे पर दर्द साफ नजर आ जाता है. उसे देख कर ऐसा लगता है मानो कोई तूफान उस की सारी खुशियां उड़ा ले गया हो. उस की बेजार हो चुकी जिंदगी का कोई भी अंदाजा लगा सकता है. वह जिस से भी मिलती है, अपना वही दर्द दोहराती है.
तमाशबीन भीड़ से भी है पल्लवी को शिकायत
आशरीन का दर्द कुछ इस तरह रहरह कर सामने आ जाता है, ‘‘उस सड़क पर पैदल और बाइक पर बहुत सारे लोग थे, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया. मैं ने उन से विनती की, उन के पैर छुए, लेकिन किसी ने हमले को रोकने की कोशिश नहीं की. मेरे पति को लोहे की रौड से इतना पीटा जा
रहा था कि उस का मांस बाहर आ गया था.‘‘जब तक लोग मदद के लिए आते, तब तक मेरे पति की मौत हो चुकी थी. अगर सभी ने शुरू में आरोपियों पर पथराव किया होता तो हमले को रोका जा सकता था. कुछ हमलावरों को रोकने के लिए कितने लोगों की जरूरत है?’’ पल्लवी पूछती है, ‘‘क्या यह समाज में किसी के जीवन का मूल्य है? हम जिस जगह पर हैं, वह कोई समाज नहीं है?’’
इस के साथ ही नाराजगी भरा सवाल भी पूछती है, ‘‘मेरे पति की मृत्यु के बाद उस के शरीर के चारों ओर लगभग 100 लोग जमा हो गए. जब हमला चल रहा था, तब ये लोग क्यों नहीं रुके और मदद करने की कोशिश क्यों नहीं की?’’
पुलिस से की थी सुरक्षा की मांग
आशरीन ने बताया कि वह और नागराजू जानते थे कि जनवरी में शादी के बाद से वे खतरे में हैं और इस के लिए उन्होंने पुलिस सुरक्षा भी मांगी थी.नागराजू के घर वाले भी युवा सदस्य की इस तरह हत्या किए जाने से काफी खफा हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अनुरोध करने पर हत्यारे को जरा भी दया नहीं आई. लड़की का भाई तो पूरा कसाई ही बन गया था.नागराजू की बहन रमा देवी काफी गुस्से में कहती हैं, ‘‘पुलिस सुरक्षा मांगने के बावजूद, मेरे भाई को मार दिया गया. पुलिस ने अपनी ड्यूटी क्यों नहीं की, सुरक्षा की उन की दलील को क्यों नजरअंदाज किया?’’
इस सवाल पर सुरक्षा की गुहार करने वाले मोमिनपेट पुलिस स्टेशन ने चुप्पी साध ली है. हालांकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इसे गंभीरता से लिया है. इसे ‘संदिग्ध औनर किलिंग’ बताते हुए तेलंगाना के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.आयोग ने मुख्य सचिव से यह बताने का अनुरोध किया है कि क्या राज्य सरकार की अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में औनर किलिंग की ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई नीति है? साथ ही डीजीपी से जांच, पीडि़त की पत्नी और परिवार की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी गई है. कहा गया है. यही नहीं तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने
भी घटना पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
नागराजू के पुश्तैनी गांव में उस की कब्र बनाई गई है. उल्लेखनीय है कि भारत में कुछ अनुसूचित जाति के लोगों को भी दफनाए जाने की परंपरा है. नागराजू की कब्र पर उस के पूरे परिवार सहित आशरीन ने भी कई दिनों तक श्रद्धांजलि के फूल चढ़ाए.गांव वाले और नागराजू के रिश्तेदार बताते हैं कि वह 2 साल पहले गांव छोड़ कर पढ़ाई के सिलसिले में हैदराबाद चला गया था. आशरीन के साथ अच्छी जिंदगी शुरू करने के लिए दोनों ने वहां से निकल कर शादी कर ली थी.
परेशानियों से दूर रहने के लिए दोनों कुछ दिनों तक विशाखापट्टनम में भी रहे. इस के बाद वे यह सोच कर हैदराबाद लौट आए कि यह जगह भी सुरक्षित होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.नागराजू के दादा नागरपल्ली जगन की आंखें नम हो जाती हैं. वे नागराजू की कब्र से हटने का नाम ही नहीं लेते हैं. उन्होंने बताया कि नागराजू ने परिवार को अपनी शादी के बारे में नहीं बताया था. हालांकि उन्हें आशरीन के परिवार के विरोध के बारे में पता था.इस बारे में जगन कहते हैं कि मसला ये नहीं है कि हम पसंद करते हैं या नहीं करते हैं. हमें इस बारे में तब पता चला, जब उन की शादी हो गई. उन्होंने घर पर कुछ भी नहीं बताया था. लड़की मुसलमान थी और वो हिंदू. लड़की का परिवार एक हिंदू लड़के से उन की शादी के लिए तैयार नहीं था और शायद यही वजह रही होगी कि नागराजू ने इस बारे में अपने घर में नहीं बताया था. वह डर गया था.
उन के रिश्ते और शादी के बारे में गांव के पूर्व सरपंच मोहम्मद कलीमुद्दीन की भी अपनी राय है. वे कहते हैं, ‘‘आशरीन के घर वाले जब पुलिस स्टेशन पहुंचे, तब उन्हें बताया गया कि लड़कालड़की बालिग हैं. इस पर आशरीन के भाई का गुस्सा बना रहा. आशरीन के घर वालों ने दोनों का रिश्ता तोड़ने की बहुत कोशिशें कीं.’’
आशरीन के घर वाले इस शादी से अपने समाज में काफी आलोचना झेलने लगे थे.
वे आशरीन को वापस अपने घर ले जाना चाहते थे.कलीमुद्दीन ने भी परिवार को राजी करने की बहुत कोशिश की, लेकिन शर्त रखी कि वे अगर शांति से आएं तभी इस मसले का कोई समाधान निकाला जा सकता है.लेकिन जिस समय कलीमुद्दीन ये सब बातें उन्हें समझा रहे थे, उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था कि 3 महीने बाद ऐसा कुछ हो जाएगा.अंतरधार्मिक विवाह करने पर औनर किलिंग का यह कोई पहला मामला नहीं है. हैदराबाद ही नहीं, देश के हर राज्य में इस तरह के मामले आए दिन होते रहते हैं.
आधुनिक भारत का गौरव समझने वाले इस दकियानूसी समाज को अपराध का रास्ता अपनाने के बजाय अपनी सोच में बदलाव करना होगा. इस के अलावा पुलिस को भी ऐसे जोड़ों की सुरक्षा की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए वरना ऐसी घटनाएं होती रहेंगी और नेता राजनीतिक रोटियां सेंकते रहेंगे.
बहरहाल, पुलिस ने हत्यारोपियों से विस्तार से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया
गांव तब और अब पैसा आया, हालात वही पिछले कुछ सालों की तुलना करें, तो गांवों में बहुत सारे बदलाव देखने को मिल रहे हैं. वहां तक सड़कें पहुंच गई हैं, भारी तादाद में मकान पक्के हो गए हैं, साइकिल की जगह मोटरसाइकिल का इस्तेमाल होने लगा है, खेती के काम ट्रैक्टर और दूसरी मशीनों से होने लगे हैं. यहां तक कि कुएं और नदी की जगह पीने का पानी हैंडपंप या वाटर सप्लाई से मिलने लगा है, बिजली तकरीबन हर गांव तक पहुंच गई है, रसोई गैस और बिजली से चलने वाले हीटर का इस्तेमाल खाना बनाने में होने लगा है,
खेती की जमीनों के बिकने से एकमुश्त पैसा भी मिलने लगा है, गांव के स्कूल पहले से बेहतर हो गए हैं, शादीब्याह और दूसरे मौकों पर खर्च और दिखावा बढ़ गया है. लेकिन इतने सारे बदलाव के बाद भी गांवों में आज भी गरीबी है, लोग सरकारी राशन लेने के लिए मजबूर हैं, बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा नहीं पा रहे हैं और अपना इलाज अच्छे अस्पताल में नहीं करा पा रहे हैं. कुलमिला कर हालात परेशानी वाले हैं. किसान खेती से पैसा नहीं कमा पा रहे हैं. गांव के नौजवान रोजगार के लिए शहरों की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं. जिन किसानों के ऊपर पूरे देश की जनता का पेट भरने की जिम्मेदारी है, वे खुद के खाने के लिए सरकारी राशन की दुकानों पर जाने लगे हैं. गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की तादाद में कोई कमी नहीं आई है. सवाल उठता है कि सड़क और बिजली पहुंचने के बाद भी गांवदेहात में गरीबी क्यों है? खेती से दूर भागते नौजवान इस मसले पर यादवेंद्र सिंह बताते हैं,
‘‘गांवों में रहने वाला नौजवान तबका खेतीबारी में कोई दिलचस्पी नहीं रखता है. वह छोटीमोटी नौकरी करना बेहतर समझता है. जो लोग खेतीकिसानी करते भी हैं, वह खेती के बारे में कोई खास जानकारी नहीं रखते हैं. ‘‘किस फसल की कब बोआई करनी है? किस मंडी में ज्यादा कीमत मिलती है? सरकार की क्या योजनाएं हैं? फसल को कब बेचा जाए, जिस से ज्यादा मुनाफा हो? ऐसे सवालों के जवाबों से वे अनजान हैं. ‘‘आज बहुत सारी जानकारियां मोबाइल फोन पर मौजूद हैं, पर गांव के लोग मोबाइल का इस्तेमाल गाना सुनने और वीडियो देखने में करते हैं. खेतीकिसानी के बारे में वे ज्यादा नहीं पढ़ते हैं. ‘‘देश में छोटे किसानों की तादाद ज्यादा है. बहुत सारे किसान एक हजार रुपए प्रति माह में भी अपनी जिंदगी की गुजरबसर करते दिखते हैं. ऐसे लोग हमेशा ही इस चाहत में रहते हैं कि सरकार की तरफ से कुछ न कुछ मिल जाए. पर सरकार के मदद करने के बाद भी गांव के लोगों की हालत इसलिए नहीं बदलती है, क्योंकि लोग काम नहीं करना चाहते हैं. वे अपनी जरूरतों को बढ़ा लेते हैं.
‘‘सरकार भी छोटे किसानों को फायदा देने के लिए बुनियादी ढांचा नहीं तैयार करती है. वह केवल छोटीमोटी मदद कर के किसानों को खुश रखना चाहती है, जिस से मदद की चाहत में किसान उसे वोट देते रहें. सरकारी मदद के मुकाबले महंगाई इस कदर बढ़ी है कि किसान की माली हालत जस की तस बनी हुई है.’’ रोजगार की कमी ऋतुजा सिंह बघेल कहती हैं, ‘‘गांव में पहले कुटीर उद्योगधंधे चलते थे. लोहे का काम वहां के रहने वाले लुहार करते थे. लकड़ी का काम भी गांव में होता था. मिट्टी के बरतन गांव में बनते थे. दोनापत्तल भी गांव में बनते थे. सूत कातने, ऊन का काम, अचार, पापड़ जैसी खाने की चीजें गांव में ही बनती थीं. ‘‘भले ही यह बड़ा रोजगार न रहा हो, पर गांव की जरूरतों को पूरा करता था. गांव का पैसा गांव में ही रह जाता था. जैसेजैसे ये काम बाजार के हवाले हो गए, गांव का पैसा बड़ी कंपनियों को जाने लगा. गांव में पैसा आने के बाद भी गरीबी दिखने लगी.
‘‘आज के समय में गांवों में होने वाले शादीब्याह से ले कर छोटेमोटे आयोजनों तक में बाहर का सामान और लोग आते हैं. गांव का पैसा इस तरह से बाहर के लोगों के पास जा रहा है. दिखावा बढ़ गया है. जिन के पास पैसा है, वे भी और जिन के पास पैसा नहीं है, वे भी कर्ज ले कर या जमीन बेच कर अपना काम अच्छे से अच्छा कर रहा है. ‘‘इसे देख कर शहरी लोगों को लगता है कि गांव अमीर हो गए हैं, पर गांव की यह अमीरी केवल हाईवे के किनारे से दिखती है. गांव के अंदर घुसते ही गांव की रहने वाली 80 फीसदी आबादी गरीबी में गुजरबसर करती दिखती है.’’ गरीब होते गांव भारत एक विकासशील देश है, जहां विकास की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं, लेकिन उस देश का विकास कैसे हो सकता है, जिस की आधे से ज्यादा आबादी गांव की हो और गरीबी से जूझ रही हो.
नैशनल फैमिली हैल्थ सर्वे पर आधारित नीति आयोग ने पहली रिपोर्ट जारी कर दी है, जिस के मुताबिक भारत के शहरों के बजाय गांवों में रहने वाले लोग चौगुना ज्यादा गरीब हैं. यह रिपोर्ट 2015-16 के स्वास्थ्य सर्वे पर बनी है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश की कुल 25.1 फीसदी आबादी गरीबी की रेखा में आती है, वहीं गांवों के तकरीबन 37.75 फीसदी लोग गरीबी में आते हैं. शहरों की कुल आबादी का 8.81 फीसदी हिस्सा गरीबों में आता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार सब से ज्यादा गरीबी वाला राज्य है, केरल सब से कम गरीबी वाला राज्य है. सब से ज्यादा गरीबी वाले राज्यों में मध्य प्रदेश चौथे नंबर पर है, वहीं झारखंड और उत्तर प्रदेश दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं. सब से कम गरीबी वाले राज्य में गोवा और सिक्किम दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं. तेंदुलकर समिति के मुताबिक,
गरीबी में कमी आई है और ग्रामीण आबादी में गरीबी घट कर 33.8 फीसदी से 25.7 फीसदी रह गई है और शहरों में गरीबी आबादी घट कर 29.8 फीसदी से 21.9 फीसदी रह गई है. यहां गौर करने की बात यह है कि गांव की ज्यादातर आबादी किसान तबके की है और खेती पर निर्भर है, लेकिन किसानों को उन की फसल के लिए न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाता है और न ही उन्हें खेती से जुड़ी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, जिस से गांव का नौजवान तबका खेती नहीं करना चाहता है और शहरों की तरफ भागता है. गांवदेहात के बहुत से लोग आज भी पढ़ाईलिखाई से दूर हैं और ऐसे न जाने कितनी वजहें हैं, जिन के चलते गांव का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित है. सरकार को चाहिए कि वह जमीनी लैवल पर ऐसे कदम उठाए, जिस से गरीबी कम हो सके. ‘गरीबी हटाओ’ का सच गांव की गरीबी के साथ अपनेअपने समय में सभी नेताओं ने राजनीति की. 70 के दशक में कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था. 80 के दशक में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल कमीशन लागू करते समय यह कहा था कि इस से पिछड़ी जातियों को मजबूत किया जा सकेगा. साल 2004 में जब कांग्रेस की सरकार बनी,
तो गांव में हर घर को रोजगार देने के लिए ‘मनरेगा योजना’ चलाई गई. इस के बाद साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने गांव में रहने वाले किसानों की आमदनी को दोगुना करने का वादा किया. मोदी सरकार बनने के 8 साल बाद भी किसानों और गांव के दूसरे लोगों की हालत जस की तस रही है. किसानों की मदद के लिए 500 रुपए प्रति माह की ‘किसान सम्मान निधि’ और सरकारी राशन की दुकान से राशन देना पड़ा. किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा दरकिनार हो गया. देश की आजादी के 74 साल से ज्यादा बीतने के बाद भी किसानों की हालत जस की तस है. इस का सब से बड़ा उदाहरण राजनीतिक दलों द्वारा किसानों की हालत को मुद्दा बनाया जाना है. अगर इंदिरा गांधी के समय में गरीबी दूर हो गई होती, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात नहीं करनी पड़ी होती. धर्म और नशाखोरी गांव के लोग अब काम नहीं करना चाहते हैं. महंगी होने के बाद भी वे बाजार में बिकने वाली चीजों का इस्तेमाल करते हैं. इस से गांव की आमदनी खत्म हो रही है.
कामचोरी के साथसाथ गांव में बहुत तेजी से नशा करने की आदत फैल रही है. आज हर तरह का नशा गांव के लोग करने लगे हैं. इस में तंबाकू और शराब के साथसाथ गांजा, भांग और अफीम जैसा नशा भी शामिल है. नशे के चलते अपराध बढ़ रहे हैं. थाना और तहसील में खर्च बढ़ रहा है. कानूनी झगड़े में खेत और जमीनें बिक रही हैं, जो गांव के लोगों पर भारी पड़ रहा है. नशे का दूसरा असर यह है कि शरीर कमजोर होता जा रहा है. दवा और अस्पताल का खर्च बढ़ने लगा है. आज गांवदेहात में भी फास्ट फूड का चलन बढ़ने लगा है. इस से ब्लड प्रैशर और डायबटीज जैसी कई बीमारियां बढ़ रही हैं. गांवदेहात में जो पैसा है, वह किसी उत्पादक काम में नहीं लग रहा है. सब से पहले तो नशाखोरी, उस के बाद धर्म के काम जैसे पूजापाठ, चढ़ावा, दानदक्षिणा में फुजूल का खर्च होता है.
हाल के दिनों में गांवदेहात में भी मंदिरों की तादाद बढ़ गई है. लोग स्कूल और अस्पताल पर खर्च नहीं करते हैं, पर मंदिरों पर जरूर खर्च करते हैं. जब पैसा उत्पादक कामों पर खर्च नहीं होता, तो फायदे की उम्मीद कम हो जाती है. गांवदेहात के लोग अब मेहनत की जगह भाग्य पर भरोसा करने लगे हैं, जिस से ज्यादातर पैसा ऊपर वाले को खुश करने के लिए पंडित को चढ़ावा चढ़ाने में निकल जाता है. गांव छोड़ते लोग गांवदेहात की एक बड़ी आबादी शहरों की तरफ भाग रही है. हर शहर के आसपास ऐसे छोटेछोटे महल्ले बन गए हैं, जहां गांव जैसा ही माहौल देखने को मिलता है. इस से शहरों की व्यवस्था भी खराब होती जा रही है. गांव में अगर रोजीरोजगार का ढांचा तैयार होगा, तो गांव के लोगों का शहरों की तरफ भागना नहीं होगा. बहुत सारे ऐसे रोजगार हैं, जिन की जानकारी देने से गांव के लोगों का फायदा हो सकता है. खेतीबारी से जुड़े रोजगार बढ़ाने की जरूरत है.
अगर ऐसा नहीं किया गया, तो गांव के लोग और भी गरीब होते जाएंगे. शहर में रहने वाले और बिजनैस करने वाले लोगों के पास पैसा बढ़ता जाएगा. इस से गरीबी और अमीरी के बीच की खाई चौड़ी होती जाएगी. गांवदेहात में रोजगार होने से लोगों का शहरों की तरफ भागना रुकेगा. गांव का पैसा गांव में रहेगा, तो तरक्की केवल सड़क तक नहीं दिखेगी, बल्कि गांव के अंदर भी बदलाव दिखेगा. इस के लिए गांव के लोगों को काम करना पड़ेगा, उन्हें नशाखोरी, कामचोरी और धार्मिक अंधविश्वास से दूर होना होगा. नौजवानों की पढ़ाईलिखाई रोजगार देने वाली हो, वह गांव के काम आए, उस तरह की योजना बनाई जाए. भारत की आबादी का सब से बड़ा हिस्सा गांव में रहता है. ऐसे में गांव गरीब रहें और देश तरक्की करे, ऐसा मुमकिन नहीं है. देश की तरक्की गांव के बिना नहीं हो सकती. गांवों को साथ ले कर चलना पड़ेगा, तभी पूरा देश खुशहाल होगा. सरकारी मदद किसी समस्या का समाधान नहीं है. योजना बना कर गांव का रोजगारपरक विकास ही समस्या का एकमात्र हल है.
सवाल-
मेरी उम्र 21 वर्ष है. मेरी दोस्त का भाई 19 वर्ष का है. वैसे तो मेरी उस से ज्यादा कुछ बात नहीं हुई है पर मैं जब भी उसे देखती हूं तो कुछ महसूस होता है. मेरा कभी-कभी मन करता है कि मैं उस से बात करूं. लेकिन अपनी दोस्त के भाई को उस नजर से देखना गले नहीं उतरता. उस के भाई का भी मेरी तरफ रुझान है. पर मैं बड़ी हूं और उस की बहन की दोस्त हूं, शायद इसलिए वह कुछ भी कहने से डरता है. क्या मुझे उस से बात करनी चाहिए, और उस से भी बड़ा सवाल कि क्या मेरा अपनी दोस्त के भाई को इस तरह देखना सही है?
जवाब-
आप और आप की दोस्त का भाई दोनों ही बालिग हैं. इस उम्र में लड़केलड़कियों का एकदूसरे के प्रति आकर्षण स्वाभाविक है. परंतु सवाल यहां आप की दोस्ती का भी है. इसलिए कोशिश करें कि आप अपनी फीलिंग्स का सामने से जा कर इकरार न करें. इस से बात बिगड़ भी सकती है. यदि आप की दोस्त के भाई को आप से किसी प्रकार का संबंध रखना होगा तो वह स्वयं आप को हिंट देगा. और यदि वह पहला कदम बढ़ाने से इतना डरेगा तो भविष्य में तो और भी कई कदम उठाने पड़ेंगे, उस का क्या करेगा. इसलिए बेहतर है कि आप इंतजार करें. यदि कोई जवाब नहीं मिलता तो जिंदगी अभी बहुत लंबी है, आगे बढ़ें.
सवाल-
मैं 25 वर्षीय महिला हूं. हाल ही में शादी हुई है. पति घर की इकलौती संतान हैं और सरकारी बैंक में काम करते है. पर सब से बड़ी दिक्कत सासू मां को ले कर है. उन्हें मेरा मौडर्न कपड़े पहनना, टीवी देखना, मोबाइल पर बातें करना और यहां तक कि सोने तक से प्रोबलम है. बताएं मैं क्या करूं?
जवाब-
आप घर की इकलौती बहू हैं तो जाहिर है आगे चल कर आप को बड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी. यह बात आप की सासूमां समझती होंगी, इसलिए वे चाहती होंगी कि आप जल्दी अपनी जिम्मेदारी समझ कर घर संभाल लें. बेहतर होगा कि ससुराल में सब को विश्वास में लेने की कोशिश की जाए. सासूमां को मां समान समझेंगी, इज्जत देंगी तो जल्द ही वे भी आप से घुलमिल जाएंगी और तब वे खुद ही आप को आधुनिक कपड़े पहनने को प्रेरित कर सकती हैं. घर का कामकाज निबटा कर टीवी देखने पर सासूमां को भी आपत्ति नहीं होगी. बेहतर यही होगा कि आप सासूमां के साथ अधिक से अधिक रहें, साथ शौपिंग करने जाएं, घर की जिम्मेदारियों को समझें, फिर देखिएगा आप दोनों एकदूसरे की पर्याय बन जाएंगी.
‘‘तुम भाभी की चिंता मत करो. मैं इन्हें घर ले जाता हूं.’’
सूरज चला गया. फिर थोड़ी देर बाद जीप सूरज के घर के सामने रुकी.
‘‘आओ भाभी, गृहप्रवेश करो. चलो,
मैं ताला खोलता हूं. अरे, दरवाजा तो अंदर से बंद है.’’
दोस्त ने घंटी बजाई. दरवाजा खुला तो 25-26 साल की एक स्मार्ट महिला गोद में कुछ महीने के एक बच्चे को लिए खड़ी दिखी.
‘‘कहिए, किस से मिलना है?’’
दोस्त हैरान, जया भी परेशान.
‘‘आप? आप कौन हैं और यहां क्या कर रही हैं?’’ दोस्त की आवाज में उलझन थी.
‘‘कमाल है,’’ स्त्री ने नाटकीय अंदाज में कहा, ‘‘मैं अपने घर में हूं. बाहर से आप आए और सवाल मुझ से कर रहे हैं?’’
‘‘पर यह तो कैप्टन सूरज का घर है.’’
‘‘बिलकुल ठीक. यह सूरज का ही घर है. मैं उन की पत्नी हूं और यह हमारा बेटा. पर आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं?’’
दोस्त ने जया की तरफ देखा. लगा, वह बेहोश हो कर गिरने वाली है. उस ने लपक कर जया को संभाला, ‘‘भाभी, संभालिए खुद को,’’ फिर उस महिला से कहा, ‘‘मैडम, कहीं कोई गलतफहमी है. सूरज तो शादी कर के अभी लौटा है. ये उस की पत्नी…’’
दोस्त की बात खत्म होने से पहले ही वह चिल्ला उठी, ‘‘सूरज अपनी आदत से बाज नहीं आया. फिर एक और शादी कर डाली. मैं कब तक सहूं, तंग आ गई हूं उस की इस आदत से…’’
जया को लगा धरती घूम रही है, दिल बैठा जा रहा है. ‘यह सूरज की पत्नी और उस का बच्चा, फिर मुझ से शादी क्यों की? इतना बड़ा धोखा? यहां कैसे रहूंगी? बाबूजी को फोन करूं…’ वह सोच में पड़ गई.
तभी एक जीप वहां आ कर रुकी. सूरज कूद कर बाहर आया. दोस्त और जया को बाहर खड़ा देख वह हैरान हुआ, ‘‘तुम दोनों इतनी देर से बाहर क्यों खड़े हो?’’
तभी उस की नजर जया पर पड़ी. चेहरा एकदम सफेद जैसे किसी ने शरीर का सारा खून निचोड़ लिया हो. वह लपक कर जया के पास पहुंचा. जया दोस्त का सहारा लिए 2 कदम पीछे हट गई.
‘‘जया…?’’ इसी समय उस की नजर घर के दरवाजे पर खड़ी महिला पर पड़ी.
वह उछल कर दरवाजे पर जा पहुंचा,
‘‘आप? आप यहां क्या कर रही हैं? ओ नो… आप ने अपना वार जया पर भी
चला दिया?’’
औरत खिलखिला उठी.
थोड़ी देर बाद सभी लोग सूरज के ड्राइंगरूम में बैठे हंसहंस कर बातें कर रहे थे. वही महिला चाय व नाश्ता ले कर आई, ‘‘क्यों जया, अब तो नाराज नहीं हो? सौरी, बहुत धक्का लगा होगा.’’
इस फौजी कालोनी में यह एक रिवाज सा बन गया था. किसी भी अफसर की शादी हो, लोग नई बहू की रैगिंग जरूर करते थे. सूरज की पत्नी बनी सरला दीक्षित और रीना प्रकाश ऐसे कामों में माहिर थीं. कहीं पहली पत्नी बन, तो किसी को नए पति के उलटेसीधे कारनामे सुना ऐसी रैगिंग करती थीं कि नई बहू सारी उम्र नहीं भूल पाती थी. इस का एक फायदा यह होता था कि नई बहू के मन में नई जगह की झिझक खत्म हो जाती थी.
जया जल्द ही यहां की जिंदगी की अभ्यस्त हो गई. शनिवार की शाम क्लब जाना, रविवार को किसी के घर गैटटुगैदर. सूरज ने जया को अंगरेजी धुनों पर नृत्य करना भी सिखा दिया. सूरज और जया की जोड़ी जब डांसफ्लोर पर उतरती तो लोग देखते रह जाते. 5-6 महीने बीततेबीतते जया वहां की सांस्कृतिक गतिविधियों की सर्वेसर्वा बन गई. घरों में जया का उदाहरण दिया जाने लगा.
खुशहाल थी जया की जिंदगी. बेहद प्यार करने वाला पति. ऐक्टिव रहने के लिए असीमित अवसर. बड़े अफसरों की वह लाडली बेटी बन गई. कभीकभी उसे वह पहला दिन याद आता. सरला दीक्षित ने कमाल का अभिनय किया था. उस की तो जान ही निकल गई थी.
2 साल बाद नन्हे उदय का जन्म हुआ तो उस की खुशियां दोगुनी हो गईं. उदय एकदम सूरज का प्रतिरूप. मातृत्व की संतुष्टि ने जया की खूबसूरती को और बढ़ा दिया. सूरज कभीकभी मजाक करता, ‘‘मेम साहब, क्लब के काम, घर के काम और उदय के अलावा एक बंदा यह भी है, जो घर में रहता है. कुछ हमारा भी ध्यान…’’
असम में आई बाढ़ ने कई लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है. इस आपदा में अबतक बहुत लोगों की जान जा चुकी है. बीते दिनों असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने वहां पर सर्वेक्षण भी किया है.
दरअसल, असम में बाढ़ आने से 30 जिले बुरी तरह से ग्रसित हो चुके हैं. ऐसे में भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस स्वीटी छाबड़ा ने वहां के लोगों के लिए प्रार्थना किया है. इस आपदा ने 24घंटे में 7 लोगों की जान ले ली है.
View this post on Instagram
इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि इसकी स्थिति पर बारीकी से नजर रखा जाए. इस बाढ़ में जान मान का भी भारी नुकसान हुआ है. एक्ट्रेस स्वीटी छाबड़ा ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एक नोट साझा किया है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि तस्वीर को आप देख सकते हैं कि असम गुरुवार से बाढ़ की चपेट में हैं.
राज्य में बाढ़ से कुल 45,34,048 लोगों प्रभावित हैं. असम में रहने वाले सभी लोगों से प्रार्थना करती हूं कि भगवान इन्हें इस बुरी परिस्थिति से बचाए. स्वीटी के इस पोस्ट के बाद से कई लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. लोगों ने अपने हाथ भी बढ़ाए हैं उनकी मदद करने के लिए.
अगर बात करें एक्ट्रेस स्वीटी छाबड़ा के वर्कफ्रंट कि तो स्वीटी ने कई सारी भोजपुरी फिल्मों में काम किया है. अपनी एक्टिंग से स्वीटी दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रही हैं.